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फुलवा ने चिराग के गाल को चूमते हुए अपने पेट की मांसपेशियों को कसना जारी रखा। चिराग के चेहरे को उठाकर फुलवा ने उसके नाक को चूमा तो शरमसार नजरों से चिराग ने अपनी मां की आंखों में देखा।
फुलवा, “शुक्रिया बेटा! तुमने मुझे वो दिया है जो आज तक मुझे नहीं मिला!”
चिराग थोड़ा गुस्सा होते हुए, “क्या? हंसने का मौका?”
फुलवा मुस्कुराकर, “नहीं मेरे बच्चे! मुझे अपना पहला प्यार बनाने का तोहफा!”
इस से पहले कि चिराग कुछ कह पता फुलवा ने उसके होठों पर अपने होंठ लगाए और उसे चूमने लगी। फुलवा ने अपनी कमर को धीरे से ऊपर उठाया और चिराग का लौड़ा लगभग सुपाड़े तक बाहर आ गया। फुलवा चिराग के लौड़े पर बैठ गई और चिराग की आह निकल गई।
चिराग ने आह भरते ही फुलवा ने अपनी जीभ को आगे बढ़ाते हुए चिराग की जीभ को ढूंढ लिया। चिराग की जीभ भी फुलवा की जीभ से भिड़ते ही लड़ने लगी। मां बेटे की जीभ की जंग होने लगी और उन्हें घेरे होटों ने एक दूसरे को दबाते हुए अपना घेरा बनाए रखा।
फुलवा की कमर ने हिलते हुए चिराग के लौड़े को उसी के वीर्य से पोत दिया। अपने और मां के यौन रसों की चिकनाहट में सेंखता चिराग का लौड़ा दुबारा तन गया। फुलवा ने अपने मुंह को दूर करते हुए आह भरी और अपनी कमर को हिलाने की रफ्तार बढ़ा दी।
चिराग ने मौका साध कर फुलवा के गले को चूमते हुए अपनी कमर को उठाना शुरू कर दिया। फुलवा ने चिराग के बालों को खींच कर उसे अपने गले से दूर किया।
फुलवा, “मादरचोद!!…
मज़ा आ रहा है न!!…
मैं तुझे इतनी आसानी से छोडूंगी नही!!…
ले चूस मेरा मम्मा!!…
निकाल मेरा दूध!!…”
फुलवा ने चिराग का चेहरा अपने बाएं मम्मे पर दबाते हुए उसे जबरदस्ती अपनी चूची खिलाई। दाएं हाथ से बेड के सिरहाने को पकड़ कर अपनी कमर हिलाते हुए उसने चिराग को अपने सूखे हुए मम्मे को चूसकर दूध पीते हुए महसूस किया। फुलवा ने अपनी कमर को चिराग के सुपाड़े तक उठाते हुए तेज़ी से बैठ कर अपनी भूख को मिटाना शुरू किया।
चप…
पच…
पाक…
सुर्रप…
मां बेटे के मिलन में रसों के घर्षण से संगीत बना और यौन उत्तेजना की आहें के गीत के साथ जुड़ गया। फुलवा की चूत में बेटे का मथा हुआ वीर्य मां के रसों में फेंटा गया और झाग बनकर मां बेटे के इंद्रियों को रंगने लगा।
फुलवा का बदन अकड़ने लगा और वह चिराग को पुकारते हुए झड़ने लगी। चिराग का लौड़ा गरम पानी में भिगो कर निचोड़ा गया पर अभी कुछ देर पहले झड़ने से वह रुक पाया। फुलवा तड़पती झड़ते हुए चिराग के लौड़े पर बैठ गई पर चिराग अधीर होकर अपनी कमर हिला कर अपनी मां को चोदता रहा।
फुलवा जवान फौलाद से पिटती बेबस हो कर उसे अपना मम्मा खिलाते हुए चूधती और झड़ती रही। चिराग अब अपना आत्मविश्वास हासिल कर अपनी मां को अपनी जवानी का तोहफा दे रहा था।
चिराग के धक्के तेज हो गए और वह अपनी मां की चूची पर आह भरते हुए कराह उठा। फुलवा को अपनी कोख में दुबारा अपने बेटे की गर्मी महसूस हुई और वह थक कर चूर अपने बेटे के लौड़े पर बैठ गई।
मां बेटे को सर्द AC में भी पसीने छूट गए थे। दोनों ने एक दूसरे को देखा और शरमाकर मुस्कुराए। फुलवा ने अपने बेटे के लौड़े को मुरझाकर बाहर निकलता महसूस किया और वह भी अपनी नारीत्व पर खुश हो गई।
फुलवा ने चुपके से अपनी संतुष्ट चूत पर चिराग का तौलिया लगाकर अपने पैरों को बंद किया। फुलवा ने अपने बेटे के हाथों को खोला तो उसने अपनी मां को उसमें जकड़ लिया।
फुलवा अपने बेटे के सीने पर सर रख कर लेट गई। आज तक वह कभी चूधने के बाद अपने प्रेमी की नजदीक नहीं रही थी। फुलवा को अपने सीने के बालों में उंगलियां फेरते हुए महसूस कर चिराग अपने डर को बोल गया।
चिराग, “मां!!… हमने कंडोम इस्तमाल नहीं किया! आप को जल्द से जल्द दवा दिलानी होगी!”
फुलवा ने अपने जिम्मेदार बेटे के गाल को चूमते हुए, “मेरा अच्छा बेटा! तुझे और कितना अच्छा बनना है? हमें डरने की कोई जरूरत नहीं! जब तुम पैदा हुए मैंने तभी अपना ऑपरेशन करा लिया था। एक रण्डी कभी अपनी मर्जी से दूसरे को अपनी जिंदगी नहीं देती!”
चिराग ने राहत की सांस लेते हुए अपनी मां को कस कर अपनी बाहों में भर लिया और दोनों मां बेटे प्रेमी जोड़े की अघोष में सो गए।
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फुलवा, “शुक्रिया बेटा! तुमने मुझे वो दिया है जो आज तक मुझे नहीं मिला!”
चिराग थोड़ा गुस्सा होते हुए, “क्या? हंसने का मौका?”
फुलवा मुस्कुराकर, “नहीं मेरे बच्चे! मुझे अपना पहला प्यार बनाने का तोहफा!”
इस से पहले कि चिराग कुछ कह पता फुलवा ने उसके होठों पर अपने होंठ लगाए और उसे चूमने लगी। फुलवा ने अपनी कमर को धीरे से ऊपर उठाया और चिराग का लौड़ा लगभग सुपाड़े तक बाहर आ गया। फुलवा चिराग के लौड़े पर बैठ गई और चिराग की आह निकल गई।
चिराग ने आह भरते ही फुलवा ने अपनी जीभ को आगे बढ़ाते हुए चिराग की जीभ को ढूंढ लिया। चिराग की जीभ भी फुलवा की जीभ से भिड़ते ही लड़ने लगी। मां बेटे की जीभ की जंग होने लगी और उन्हें घेरे होटों ने एक दूसरे को दबाते हुए अपना घेरा बनाए रखा।
फुलवा की कमर ने हिलते हुए चिराग के लौड़े को उसी के वीर्य से पोत दिया। अपने और मां के यौन रसों की चिकनाहट में सेंखता चिराग का लौड़ा दुबारा तन गया। फुलवा ने अपने मुंह को दूर करते हुए आह भरी और अपनी कमर को हिलाने की रफ्तार बढ़ा दी।
चिराग ने मौका साध कर फुलवा के गले को चूमते हुए अपनी कमर को उठाना शुरू कर दिया। फुलवा ने चिराग के बालों को खींच कर उसे अपने गले से दूर किया।
फुलवा, “मादरचोद!!…
मज़ा आ रहा है न!!…
मैं तुझे इतनी आसानी से छोडूंगी नही!!…
ले चूस मेरा मम्मा!!…
निकाल मेरा दूध!!…”
फुलवा ने चिराग का चेहरा अपने बाएं मम्मे पर दबाते हुए उसे जबरदस्ती अपनी चूची खिलाई। दाएं हाथ से बेड के सिरहाने को पकड़ कर अपनी कमर हिलाते हुए उसने चिराग को अपने सूखे हुए मम्मे को चूसकर दूध पीते हुए महसूस किया। फुलवा ने अपनी कमर को चिराग के सुपाड़े तक उठाते हुए तेज़ी से बैठ कर अपनी भूख को मिटाना शुरू किया।
चप…
पच…
पाक…
सुर्रप…
मां बेटे के मिलन में रसों के घर्षण से संगीत बना और यौन उत्तेजना की आहें के गीत के साथ जुड़ गया। फुलवा की चूत में बेटे का मथा हुआ वीर्य मां के रसों में फेंटा गया और झाग बनकर मां बेटे के इंद्रियों को रंगने लगा।
फुलवा का बदन अकड़ने लगा और वह चिराग को पुकारते हुए झड़ने लगी। चिराग का लौड़ा गरम पानी में भिगो कर निचोड़ा गया पर अभी कुछ देर पहले झड़ने से वह रुक पाया। फुलवा तड़पती झड़ते हुए चिराग के लौड़े पर बैठ गई पर चिराग अधीर होकर अपनी कमर हिला कर अपनी मां को चोदता रहा।
फुलवा जवान फौलाद से पिटती बेबस हो कर उसे अपना मम्मा खिलाते हुए चूधती और झड़ती रही। चिराग अब अपना आत्मविश्वास हासिल कर अपनी मां को अपनी जवानी का तोहफा दे रहा था।
चिराग के धक्के तेज हो गए और वह अपनी मां की चूची पर आह भरते हुए कराह उठा। फुलवा को अपनी कोख में दुबारा अपने बेटे की गर्मी महसूस हुई और वह थक कर चूर अपने बेटे के लौड़े पर बैठ गई।
मां बेटे को सर्द AC में भी पसीने छूट गए थे। दोनों ने एक दूसरे को देखा और शरमाकर मुस्कुराए। फुलवा ने अपने बेटे के लौड़े को मुरझाकर बाहर निकलता महसूस किया और वह भी अपनी नारीत्व पर खुश हो गई।
फुलवा ने चुपके से अपनी संतुष्ट चूत पर चिराग का तौलिया लगाकर अपने पैरों को बंद किया। फुलवा ने अपने बेटे के हाथों को खोला तो उसने अपनी मां को उसमें जकड़ लिया।
फुलवा अपने बेटे के सीने पर सर रख कर लेट गई। आज तक वह कभी चूधने के बाद अपने प्रेमी की नजदीक नहीं रही थी। फुलवा को अपने सीने के बालों में उंगलियां फेरते हुए महसूस कर चिराग अपने डर को बोल गया।
चिराग, “मां!!… हमने कंडोम इस्तमाल नहीं किया! आप को जल्द से जल्द दवा दिलानी होगी!”
फुलवा ने अपने जिम्मेदार बेटे के गाल को चूमते हुए, “मेरा अच्छा बेटा! तुझे और कितना अच्छा बनना है? हमें डरने की कोई जरूरत नहीं! जब तुम पैदा हुए मैंने तभी अपना ऑपरेशन करा लिया था। एक रण्डी कभी अपनी मर्जी से दूसरे को अपनी जिंदगी नहीं देती!”
चिराग ने राहत की सांस लेते हुए अपनी मां को कस कर अपनी बाहों में भर लिया और दोनों मां बेटे प्रेमी जोड़े की अघोष में सो गए।
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