सबेरे दरवाजे पर दस्तक हुई तो नहाकर बाहर निकले मानव शाह ने बिना सोचे तौलिया लपेट कर दरवाजा खोला। तौलिए के नीचे से झांकता सेब जैसा सुपाड़ा देख कर प्रिया की आंखें फटी रह गई।
अपने नंगे बदन पर तौलिया लपेट कर लड़खड़ाते हुए बाहर आती काम्या,
“कितनी बार कहा है, दरवाजा खोलने तौलिया लपेट कर नहीं जाना। बेचारी बच्ची सदमे में चली गई!…
हटो!!…
जाओ!!…
शू!!…”
मानव शाह अपने 15 इंची सांप को तौलिए के अंदर दबाते हुए, “वहां सारे बच्चों ने मोहिनी पर कब्जा कर लिया है।”
काम्या मानव को धक्का देकर भेजते हुए, “बच्चे हैं काटेंगे नहीं! काट भी लिया तो आप ही के बच्चे हैं!! जाओ!!”
प्रिया काम्या और मानव की बातें सुनती दंग रह गई। काम्या प्रिया को अपने कमरे में ले गई और दरवाजा लॉक कर लिया। अपना तौलिया उतार कर अपनी जांघों पर से बहते गाढ़े वीर्य की धाराओं को काम्या पोंचते हुए काम्या प्रिया से बातें करने लगी।
काम्या, “डरना मत! दरवाजा लॉक नहीं करती तो इसे पोंछने की नौबत दुबारा आती। मुझे ऐसा देखकर तुम्हें एतराज तो नहीं ना?”
प्रिया ने सर हिलाकर मना किया।
काम्या, “ कुछ जरूरी बात होगी जो सुबह इतनी जल्दी यहां आई! बोलो क्या हुआ?”
प्रिया ने काम्या को अपने आकर्षक बदन को अलग अलग कपड़ों और सुगंध से सजाते हुए देखते हुए अपने मन में चिराग के कीड़े को देख कर बनती हालत के बारे में बताया।
काम्या, “कीड़ा? ओह!!… मैंने सिर्फ सांप देखा है तो समझने में देर लगी! मैं जानती हूं कि तुम हमारा राज समझ चुकी हो। तो हिचकिचाहट की कोई जरूरत नहीं है।”
प्रिया सिसकते हुए, “मैं रंडीखाने में पली बढ़ी हूं। मैंने बचपन से औरतों को मर्दों के नीचे रोते चीखते सुना है। फुलवा मां कहती हैं कि प्यार होने पर यह दर्द मज़ेदार होता है! मैं नहीं जानती की मुझे क्या सोचना चाहिए पर मुझे पहले ऐसा कभी नहीं लगा।”
काम्या ऑफिस के कपड़े पहने प्रिया के बगल में बैठ गई।
काम्या, “पहली बार दर्द होता है! तुमने पापा का आकार देखा ना?(प्रिया ने सहमी हुई आंखों से देख कर सर हिलाकर हां कहा) मेरी शुरुवात तो जबरदस्ती से हाथ पांव बांध कर हुई थी! कभी कभी सोचती हूं कि अगर प्यार से होती क्या कम दर्द होता?”
प्रिया ने काम्या को गले लगाया तो काम्या हंस पड़ी।
काम्या, “अरे नही!!… मैने पापा के हाथ पांव बांध कर उन्हें अपनी पहली बार दी थी! (प्रिया हैरानी में देखती रही गई) वो अलग कहानी है। पर हां दर्द होता है और इसे फ्रेंच लोग ‘le petit morte’ कहते हैं। यानी छोटी मौत! मर्द सही काम करे तो औरत कुछ पलों के लिए दूसरी दुनिया की सैर कर लौटती है।”
प्रिया की अविश्वास भरी आंखों को देख कर काम्या हंस पड़ी।
काम्या, “छोड़ो!! इसे बाद में देखेंगे। तुम्हारी तकलीफ है कि तुम चिराग से कैसे पेश आओगी? तो मैं तुम्हें कुछ नियम बताती हूं।”
उस पर ध्यान मत देना। चाहे जितना मन करे उसे ऐसे दिखाना की वह कोई आम राह चलता मर्द है जिस से तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
उसे तुमसे बात करने दो! खुद से उसके पास कभी नहीं जाना!
हमेशा एक पहेली बने रहना। उसे ऐसा कभी नहीं लगना चाहिए की वह तुम्हें पहचान गया है।
यह मुश्किल है! मर्द बेवकूफ होते हैं और वह तुम्हें चोट पहुंचाएगा। उसे यह कभी पता नहीं चलना चाहिए कि तुम्हें उसकी चोट से फर्क पड़ता है।
प्रिया, “इस से क्या होगा?”
काम्या हंसकर, “तुम चिराग से आसानी से बात कर पाओगी और शायद भविष्य अपने आप को खुद दिखा दे! (प्रिया को गले लगाकर) चलो अब बच्चे बाहर मस्ती कर रहे होंगे और पापा को मुझे ऑफिस के कपड़ों में देख कर मुझ पर ज्यादा प्यार आता है!”
काम्या के साथ उसके पापा क्या करने वाले हैं यह सोच कर प्रिया का चेहरा लाल हो गया और वह परिवार के सारे लोगों से विदा लेकर चिराग का सामना करने लौटी।
चिराग ने दरवाजा खोला तो प्रिया उसे गुड मॉर्निंग बोल कर अंदर चली आई जिस से चिराग भौंचक्का रह गया। चिराग ने प्रिया को दरवाजे के बाहर रखी पेंटिंग के बारे में पूछा तो प्रिया हंस पड़ी।
प्रिया, “कल तुम्हारा जन्मदिन था और वह तुम्हारा तोहफा है। मैं देने आई थी पर तुम… व्यस्त थे इस लिए वहां छोड़ कर चली गई।”
फुलवा प्रिया में आए बदलाव से मुस्कुरा रही थी जब की चिराग उलझन में था।
चिराग, “कल रात तुमने जो देखा… सुना…”
प्रिया हंसकर, “मैं एक रण्डी की बेटी हूं। मैने बहुत कुछ बचपन से देखा और सुना है! सच में, अगर फुलवा मां को कोई ऐतराज नहीं तो मैं भला क्यों कुछ बोलूं? (फुलवा की ओर देख कर) मां अगर बुरा ना मानो तो एक बात कहूं?”
चिराग को ऐसे भुला दिया जाना बिलकुल रास नहीं आया पर फुलवा का चेहरा खुशी से खिल गया था।
प्रिया, “आप को नहीं लगता कि चिराग ठीक से कसरत नहीं करता? मतलब कल कितनी जल्दी हांफने लगा था?”
चिराग दंग रह गया और फुलवा जोर से हंस पड़ी।
फुलवा, “बात बिलकुल सही कही! शायद उसे लगता है कि अब उसे मेरे लिए मेहनत करने की जरूरत नहीं रही! चिराग! बेडरूम में आओ! मैं तुम्हें कसरत कराऊंगी!!”
चिराग को लग रहा था जैसे उसकी दुनिया दुबारा उल्टी हो गई है और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
प्रिया ने अपनी कलाओं और गुणों को निखारते हुए जल्द ही अपनी पढ़ाई पूरी कर ली और मानव की मदद से हनीफा के पति रिज़वान अहमद के साथ काम करने लगी। हालांकि उसे फुलवा के होते हुए पैसे की कमी नहीं थी पर प्रिया अपने पैरों पर खड़ी होकर अपनी मां का सपना पूरा करना चाहती थी। प्रिया अब भी हर रात चुपके से मां बेटे की चुदाई देखते हुए अपनी गीली जवानी की चुभन महसूस करती। अपने जलते बदन को ठंडे पानी में भिगो कर शांत करती। लेकिन चिराग के लिए प्रिया वह पहेली थी जिसे वह ना उगल सकता था और ना निगल सकता था।
प्रिया को फुलवा और चिराग से मिले दो साल होने को थे जब फुलवा एक दिन बहुत खुश लौटी।
फुलवा ने रात के खाने के वक्त बताया की अब वह अपनी बीमारी से पूरी तरह ठीक हो गई है और अब वह अपनी भूख पर बिना किसी तकलीफ के काबू पाने के काबिल है।
चिराग ने अपनी मां को इस कामयाबी की बधाई दी तो प्रिया ने उसे पूछा की वह इस कामयाबी को कैसे मानना चाहेगी।
फुलवा, “चिराग, मैं अकेली गोवा जा रही हूं! खुला समुंदर, नंगे लड़के और मस्त हवा। मैं अपने आप को 1 हफ्ते तक छूटी देते हुए मज़े करूंगी!!”
प्रिया को अपने जन्मदिन पर फुलवा का ना होना बुरा लगा पर उसने फुलवा की खुशी को ज्यादा अहमियत देते हुए उसे बैग भरने में मदद की।
फुलवा ने चिराग को गले लगाकर, “तुम्हें पिछले 3 सालों में रोज औरत का साथ मिला है। अकेले रह पाओगे ना? तकलीफ हुई तो तुम्हारे ऑफिस की पम्मी…”
चिराग, “मां मैं ठीक हूं! मुझे कोई तकलीफ नहीं होने वाली! और मैं आप से प्यार करता हूं, बस गरम बदन से नहीं को पम्मी को बुला लूं!”
फुलवा, “मेरा राजा बेटा! (चिराग का गाल चूमकर उसके कान में) घर में जवान मर्द को कच्ची कुंवारी के साथ छोड़ते हुए थोड़ा डर तो लगता ही है! मतलब अगर तुम्हें रात में भूख लगी और बगल के कमरे में कोई आह भरे तो… इस लिए पम्मी के बारे में बताया।”
चिराग की आंखों के सामने मां ने बनाई तस्वीर साफ नजर आई और उसका लौड़ा फूल कर फटने की कगार पर पहुंच गया।
चिराग, “मां, आप डरो मत! ऐसा कुछ नहीं होने वाला! आप हफ्ते बाद आओगी तब भी प्रिया मुझे ऐसे ही झटक कर आप से बात कर रही होगी।”
प्रिया कुछ लेकर आई और फुलवा की बैग में रखा।
फुलवा, “यह बिकिनी सेट है! गोवा में काफी दिल जलाना! जब आप लौटेंगी तब तक मैं चिराग से पूरा घर साफ करवा लूंगी! मर्द और किस काम आते हैं?”
फुलवा ने प्रिया को गले लगाकर, “ओह मेरी मासूम बच्ची!! सच में मर्द एक ही काम आते हैं!”
फुलवा अपनी गाड़ी में बैठ कर गोवा के लिए चली गई और चिराग प्रिया के साथ घर लौटा। चिराग को एहसास हुआ कि वह पहली बार प्रिया के साथ अकेले रहने वाला है। प्रिया ने अपने घर में पहने जाने वाले कपड़े पहन कर घर के रोज के काम करना शुरू किया।
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Crop tops और denim shorts में प्रिया को रोज़ देखना अपने आप में एक सजा थी पर अब चिराग को प्रिया के असर से बचाने या प्रिया का असर कम करने वाली मां भी सात दिन तक नहीं थी।
चिराग ने पहली बार ऊपर वाले से मदद मांगी की वह इन सात दिनों में अपने आप को शर्मिंदा होने से रोक पाए। प्रिया को अपनी मासूम जवानी का चिराग पर क्या असर होता है इसकी भनक भी नहीं थी।
चिराग ने अपने घर का दरवाजा लगाया तो उसे अपने कमरे में से प्रिया की हल्की चीख सुनाई दी। चिराग दौड़ कर गया तो उसकी आंखों के सामने प्रिया की शॉर्ट्स में भरी हुई गांड़ झूल रही थी।
प्रिया, “पीछे से देखते रहोगे या पकड़ोगे भी! मेरी पकड़ छूट रही है!”
चिराग ने प्रिया को पीछे से पकड़ लिया और प्रिया चिराग के सीने पर से सरकती नीचे आई। चिराग की मजबूत बाहों के घेरे में प्रिया के फूले हुए मम्मे नीचे से दबकर उठ रहे थे। प्रिया ने गले में से आवाज निकाली और चिराग ने झटके से अपने हाथों को हटाया।
चिराग डांटते हुए, “वहां ऊपर क्या कर रही थी? गिर जाती तो?”
प्रिया, “मां के आने के बाद मेरा जन्मदिन मनाएंगे लेकिन अब जब मां ठीक हो गई है तो मैं और मां इस कमरे में सोएंगी। बदबूदार मर्दों को वह दूसरा कमरा ठीक है।”
चिराग, “याद रखना की इसी बदबूदार मर्द ने अभी तुम्हें बचाया!”
प्रिया ने नीचे झुककर कुछ सामान उठाते हुए, “मर्दों को और क्या करना आता है?”
चिराग के अंदर से एक जानवर दहाड़ा की प्रिया को मर्द का काम सिखाया जाए और चिराग जैसे तैसे अपने होठों को दबाकर बाहर TV के सामने बैठ गया।
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