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अपडेट 30
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"जानवर" रूपा के ये शब्द मेरे कान मे गूँज रहे थे और मैं उसके इन शब्दो का मतलब समझ गया था सच मे मैने जानवरों जैसा ही काम किया था कितनी बुरी तरह उसके मुँह मे लंड चलाया था मैने बेचारी से सांस भी नही ली जा रही थी लेकिन मैं अभी कुछ नही बोला क्योंकि मैं इतनी बुरी तरह झड़ा था जितना आज तक नही झड़ा था और आख़िर मे मेरे काँपते हुए पैरो ने मेरे शरीर का बोझ उठाने से मना कर दिया और पहले मैं घुटनों के बल गिरा और फिर धदाम...मैं चारो खाने चित्त होकर फर्श पर औंधे मुँह पड़ा था
उधर रूपा की कंडीशन तो नही थी मुझे उठाने की लेकिन मोना जिसका मुँह अभी तक खुला हुआ था वो मेरी ऐसी हालत देख कर भाग कर मेरे पास आई और मुझे सीधा कर मेरा सिर गोद मे रख कर मेरे गाल तापियाने लगी और मेरा नाम ले लेकर मुझे उठाने लगी और सच मे मुझ पर बेहोशी तरी होने लगी थी
"रूपा, उठ ना यार मैं जानती हूँ की तेरी हालत भी खराब है लेकिन ये तो लगता है बेहोश ही हो गया है, प्लीज़ मेरी मदद कर ना" आख़िर मे वो रूपा से बोली
और जैसे तैसे कर रूपा अपनी हालत ठीक करते हुए उठी और पास ही टेबल पर रखे जग मे से कुछ बूंदे पानी की निकाल कर मेरे मुँह पर छिड़की अपने चेहरे पर ठंडे पानी की बूंदे पड़ते ही मैं जैसे वापस इस दुनिया मे आया और मैने आँखे खोली
"थॅंक गॉड, रूपा देखो इसने आँखे खोल ली है"
मोना ज़ोर से बोली
मैं समझ तो सब रहा था लेकिन अभी तक मेरी धड़कनें काबू मे नही थी इसलिए मैं वैसे ही पड़ा रहा
"सोनू...प्लीज़ उठो ना क्यों परेशान कर रहे हो"
मोना घबराती हुई बोली
अब तक रूपा भी लगभग ठीक हो चुकी थी और अब उसकी आँखो मे भी मेरे लिए चिंता के भाव आ चुके थे
"सोनू प्लीज़ उठो ना..." रूपा के मुँह से निकला
"हा..हाँ..." मेरे मुँह से निकला और मैं अपनी सारी ताक़त समेट कर उठ बैठा तो रूपा ने झट से मुझे पानी पिलाया
पानी पीने के बाद कुछ देर मे मेरी साँसे वापस ठीक हुई तो मैं उन दोनो को देख कर मुस्कुरा दिया
"ये अभी तुझे क्या हो गया था सोनू, अब तो तू ठीक है ना" मोना चिंता करते हुए बोली
"हाँ...अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ" मैं बोला
"लेकिन हुआ क्या था" अब रूपा ने पूछा
"ये तुम पूछ रही हो, सब कुछ तो तुम्हारा ही किया धरा है" मैं रूपा से बोला
"लेकिन मैने ऐसा क्या किया" रूपा घबराते हुए बोली
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"जानवर" रूपा के ये शब्द मेरे कान मे गूँज रहे थे और मैं उसके इन शब्दो का मतलब समझ गया था सच मे मैने जानवरों जैसा ही काम किया था कितनी बुरी तरह उसके मुँह मे लंड चलाया था मैने बेचारी से सांस भी नही ली जा रही थी लेकिन मैं अभी कुछ नही बोला क्योंकि मैं इतनी बुरी तरह झड़ा था जितना आज तक नही झड़ा था और आख़िर मे मेरे काँपते हुए पैरो ने मेरे शरीर का बोझ उठाने से मना कर दिया और पहले मैं घुटनों के बल गिरा और फिर धदाम...मैं चारो खाने चित्त होकर फर्श पर औंधे मुँह पड़ा था
उधर रूपा की कंडीशन तो नही थी मुझे उठाने की लेकिन मोना जिसका मुँह अभी तक खुला हुआ था वो मेरी ऐसी हालत देख कर भाग कर मेरे पास आई और मुझे सीधा कर मेरा सिर गोद मे रख कर मेरे गाल तापियाने लगी और मेरा नाम ले लेकर मुझे उठाने लगी और सच मे मुझ पर बेहोशी तरी होने लगी थी
"रूपा, उठ ना यार मैं जानती हूँ की तेरी हालत भी खराब है लेकिन ये तो लगता है बेहोश ही हो गया है, प्लीज़ मेरी मदद कर ना" आख़िर मे वो रूपा से बोली
और जैसे तैसे कर रूपा अपनी हालत ठीक करते हुए उठी और पास ही टेबल पर रखे जग मे से कुछ बूंदे पानी की निकाल कर मेरे मुँह पर छिड़की अपने चेहरे पर ठंडे पानी की बूंदे पड़ते ही मैं जैसे वापस इस दुनिया मे आया और मैने आँखे खोली
"थॅंक गॉड, रूपा देखो इसने आँखे खोल ली है"
मोना ज़ोर से बोली
मैं समझ तो सब रहा था लेकिन अभी तक मेरी धड़कनें काबू मे नही थी इसलिए मैं वैसे ही पड़ा रहा
"सोनू...प्लीज़ उठो ना क्यों परेशान कर रहे हो"
मोना घबराती हुई बोली
अब तक रूपा भी लगभग ठीक हो चुकी थी और अब उसकी आँखो मे भी मेरे लिए चिंता के भाव आ चुके थे
"सोनू प्लीज़ उठो ना..." रूपा के मुँह से निकला
"हा..हाँ..." मेरे मुँह से निकला और मैं अपनी सारी ताक़त समेट कर उठ बैठा तो रूपा ने झट से मुझे पानी पिलाया
पानी पीने के बाद कुछ देर मे मेरी साँसे वापस ठीक हुई तो मैं उन दोनो को देख कर मुस्कुरा दिया
"ये अभी तुझे क्या हो गया था सोनू, अब तो तू ठीक है ना" मोना चिंता करते हुए बोली
"हाँ...अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ" मैं बोला
"लेकिन हुआ क्या था" अब रूपा ने पूछा
"ये तुम पूछ रही हो, सब कुछ तो तुम्हारा ही किया धरा है" मैं रूपा से बोला
"लेकिन मैने ऐसा क्या किया" रूपा घबराते हुए बोली