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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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अपडेट 30

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"जानवर" रूपा के ये शब्द मेरे कान मे गूँज रहे थे और मैं उसके इन शब्दो का मतलब समझ गया था सच मे मैने जानवरों जैसा ही काम किया था कितनी बुरी तरह उसके मुँह मे लंड चलाया था मैने बेचारी से सांस भी नही ली जा रही थी लेकिन मैं अभी कुछ नही बोला क्योंकि मैं इतनी बुरी तरह झड़ा था जितना आज तक नही झड़ा था और आख़िर मे मेरे काँपते हुए पैरो ने मेरे शरीर का बोझ उठाने से मना कर दिया और पहले मैं घुटनों के बल गिरा और फिर धदाम...मैं चारो खाने चित्त होकर फर्श पर औंधे मुँह पड़ा था

उधर रूपा की कंडीशन तो नही थी मुझे उठाने की लेकिन मोना जिसका मुँह अभी तक खुला हुआ था वो मेरी ऐसी हालत देख कर भाग कर मेरे पास आई और मुझे सीधा कर मेरा सिर गोद मे रख कर मेरे गाल तापियाने लगी और मेरा नाम ले लेकर मुझे उठाने लगी और सच मे मुझ पर बेहोशी तरी होने लगी थी

"रूपा, उठ ना यार मैं जानती हूँ की तेरी हालत भी खराब है लेकिन ये तो लगता है बेहोश ही हो गया है, प्लीज़ मेरी मदद कर ना" आख़िर मे वो रूपा से बोली

और जैसे तैसे कर रूपा अपनी हालत ठीक करते हुए उठी और पास ही टेबल पर रखे जग मे से कुछ बूंदे पानी की निकाल कर मेरे मुँह पर छिड़की अपने चेहरे पर ठंडे पानी की बूंदे पड़ते ही मैं जैसे वापस इस दुनिया मे आया और मैने आँखे खोली

"थॅंक गॉड, रूपा देखो इसने आँखे खोल ली है"

मोना ज़ोर से बोली

मैं समझ तो सब रहा था लेकिन अभी तक मेरी धड़कनें काबू मे नही थी इसलिए मैं वैसे ही पड़ा रहा

"सोनू...प्लीज़ उठो ना क्यों परेशान कर रहे हो"

मोना घबराती हुई बोली

अब तक रूपा भी लगभग ठीक हो चुकी थी और अब उसकी आँखो मे भी मेरे लिए चिंता के भाव आ चुके थे

"सोनू प्लीज़ उठो ना..." रूपा के मुँह से निकला

"हा..हाँ..." मेरे मुँह से निकला और मैं अपनी सारी ताक़त समेट कर उठ बैठा तो रूपा ने झट से मुझे पानी पिलाया

पानी पीने के बाद कुछ देर मे मेरी साँसे वापस ठीक हुई तो मैं उन दोनो को देख कर मुस्कुरा दिया

"ये अभी तुझे क्या हो गया था सोनू, अब तो तू ठीक है ना" मोना चिंता करते हुए बोली

"हाँ...अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ" मैं बोला

"लेकिन हुआ क्या था" अब रूपा ने पूछा

"ये तुम पूछ रही हो, सब कुछ तो तुम्हारा ही किया धरा है" मैं रूपा से बोला

"लेकिन मैने ऐसा क्या किया" रूपा घबराते हुए बोली
 
"तुम मेरा लंड चूस रही थी या उसमे से मेरी जान निकाल रही थी, सच कहूँ रूपा तो आज ही मैने झड़ने का असली मज़ा लिया है आज तक मुझे झड़ने मे इतना मज़ा नही आया था और ना ही आज तक कभी भी मेरे लंड से इतना माल भी नही निकला था जब मैं झड़ा रहा था तब मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे लंड के रास्ते मेरी जान भी निकाल रही हो लगता है बहुत ज़्यादा झड़ने और उत्तेजना के कारण ही कुछ कमज़ोरी हुई और मेरी ये हालत हुई लेकिन अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ और हाँ रूपा थॅंक यू वेरी मच जो आज मुझे इतना मज़ा दिया" मैं बोला

मेरी बात सुनकर रूपा मुस्कुराने लगी

"यार सोनू मैने और तूने तो मज़े ले लिए लेकिन अब बेचारी रूपा का क्या होगा ये तो खाली खाली ही रह जाएगी" मोना बोली

"क्यों भला" मैने पूछा

"अब यार तेरी हालत देख कर तो यही लग रहा है की अब तेरे से नही होगा" मोना बोली

उसकी बात सुनकर मैं उछल कर खड़ा हो गया और रूपा को भी खड़ा करके बोला "तू चिंता मत कर मोना अब एक ही बार मे मैं तुझे और रूपा दोनो को जन्नत की सैर करवा दूँगा "

मेरी बात सुनकर मोना भी खुश हो गई और खड़े होते हुए बोली "चल रूपा अब तो अपने कपड़े उतार दे"

और अभी मोना की बात पूरी भी नही हुई थी की उसके पहले ही रूपा के सारे कपड़े ज़मीन पर पड़े हुए थे और उसका हाहकारी नंगा बदन मेरी आँखो के सामने खड़ा मुझे ललचा रहा था

उसके बड़े बड़े बूब्स उसके मस्त भरे भरे नितंब और मांसल जांघें और उनके बीच वो बिना बालो की फूली हुई चूत जैसे मुझे इन्विटेशन दे रही थी आओ और आज हमे मसल कर रख दो

मैं आगे बढ़ा और मैने रूपा के होंठो से अपने होंठ जोड़ लिए और फिर जो रूपा ने किया उससे एक बार फिर मैं मज़े मे खो गया मेरे होंठ जोड़ते ही उसने अपनी जीभ मेरे मुँह मे घुसा दी और उसकी जीभ मेरे पूरे मुँह मे घुमानेलगी और उसका एक हाथ मेरी पीठ सहलाने लगा जबकि दूसरे हाथ से वो मेरे मुरझाए हुए लंड को मसलने लगी और इधर पता नही मोना को क्या हुआ की वो मुझसे पीछे से आकर चिपक गई और अपनी बड़ी बड़ी चुचिया मेरी पीठ पे रगड़ने लगी उसके खड़े निपल और मुलायम चुचियो के स्पर्श से मेरे लंड मे अब हरकत होनी शुरू हो गई थी और मैने भी अब अपने एक हाथ से रूपा की चुचियो को दबाना शुरू कर दिया जबकि दूसरा हाथ उसकी गान्ड की दरार मे ले जाकर एक उंगली उसकी गान्ड मे डालने की कोशिश करने लगा लेकिन मेरी उंगली को वहाँ महसूस कर के रूपा ने अपनी गान्ड भींच ली जिससे उंगली अंदर नही जा पाई तो मैं बस वही उंगली घुमाने लगा

अब मोना ने मेरी गर्दन चूमते हुए अपना एक हाथ मेरे और रूपा के बीच लाकर रूपा की चूत को सहलाना शुरू कर दिया था और इस सब मे हम तीनो ही पनिया गये थे रूपा तो पहले से ही गरम थी और मेरा लंड भी अब पूरा खड़ा हो कर अपने सुपाडे पर कुछ बूंदे निकाल चुका था जबकि पीछे से चिपकी मोना का पानी मैं अपनी जाँघ पर महसूस कर रहा था

अब रूपा का धैर्य टूट चुका था उसने मुझे पीछे धकेला और बेड पर जाकर लेट गई

"प्लीज़ सोनू अब आजओ और सहन नही होता मुझसे" वो अपनी टाँगे फैलाती हुई बोली उसकी चूत के दोनो किनारे फड़ फडा से रहे थे
 
अब मैने भी देर नही की और बेड पर चढ़ कर उसकी चूत के छेद पर अपना लंड सेट कर दिया और एक ज़ोर का धक्का आ गया जिससे मेरा आधा लंड बहुत बुरी तरह रगड़ते हुए उसकी चूत मे घुस गया और उधर रूपा के मुँह से एक चीख निकल गई

"ऊऊ....मा......प्लीज़ आराम से अंदर कर सोनू मैने पहले ही कहा था की तेरे जितना मोटा लंड आज तक नही लिया है और उस पर बहुत दिनों से चुदी नही हूँ तो दर्द हो रहा है" रूपा बोली

और उसकी बात समझ कर मैने जितना लंड अंदर गया था उतने मे ही धक्के लगाने शुरू कर दिए

और वक्त के साथ साथ जगह बनती गई और मेरा पूरा लंड उसकी चूत ने निगल लिया और अब वो भी मेरे कूल्हे और पीठ सहलाते हुए मुझे उकसाने लगी

"हूंम्म...और ज़ोर से, और ज़ोर से हाँ ऐसे ही फाड़ दो मेरी चूत को सोनू, लगता है जैसे आज पहली बार ही चुद रही हूँ मैं, हाय....कितना मोटा लंड है तेरा मेरे राजा....अब अच्छे से बजा दे मेरी चूत का बजा...."

रूपा कामुक बाते कर कर के मुझे उकसा रही थी और मैं उसकी बेहद टाइट और गरम चूत मे जोरो के धक्के लगाए जा रहा था

अभी धक्के लगाए हुए कोई 3-4 मिनिट ही हुए थे की रूपा का बदन अकड़ने लगा और उसके कूल्हे उचकाने की स्पीड बढ़ गई उसके हाथ मेरी पीठ पर जबकि उसकी टाँगे मेरी कमर पर कस गई

"अफ....आहह....हूंम्म.......मैं तो गई...." कहते हुए रूपा ने मुझे जोरो से कस लिया और उसके कूल्हे उचकना भी बंद हो गये मैं उसकी चूत से रिस्ता पानी अपने लंड पर महसूस कर रहा था

कोई 2 मिनिट तक रूपा मुझे ऐसे ही जकड़े रही फिर उसने मुझे छोड़ दिया और बेड पर निढाल सी पड़ कर हान्फते हुए अपनी सांसो को काबू मे करने लगी रूपा का तो हो गया था लेकिन मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था मैने मोना की तरफ देख तो वो अपनी चूत को सहलाते हुए मुझे ही देख रही थी मैने उसे बेड पर खींचा और उसे घोड़ी बना कर उसके पीछे आ गया मैने उसकी चूत पर हाथ लगाया तो देखा की वो बहुत गीली हुई पड़ी थी और फिर मैने आव देखा ना ताव और उसकी चूत पर लंड सेट करके एक ही धक्के मे पूरा लंड अंदर पेल दिया चूँकि उसकी चूत पूरी तरह से गीली थी इसलिए अबकी बार उसे दर्द नही हुआ और फिर मैने धुआधार धक्को के साथ मोना की चुदाई शुरू कर दी मोना भी अपनी कमर पीछे कर कर के मेरा साथ देने लगी और थोड़ी देर बाद ही हम साथ मे ही झड़ गये और मैं मोना के उपर ढेर हो गया

कोई 10 मिनिट के बाद हम सभी बेड पर बैठे एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे

"क्यों रूपा मज़ा आया की नही" मोना ने पूछा

"सच कहूँ तो ऐसा लगा मोना जैसे की मैं आज पहली बार ही चुदी हूँ आज सोनू ने मुझे असली चुदाई का मज़ा दिया है" रूपा मस्त होकर बोली

"और मुझे भी आज सबसे ज़्यादा मज़ा आया, आज तो दो बार मेरा पानी निकला" मोना बोली

और इधर मैं सोच रहा था की आज सबसे ज़्यादा फ़ायदे मे तो मैं रहा क्योंकि आज मैं तीन बार झड़ा था और तभी मेरी नज़र घड़ी पर पड़ी तो मैं उछल कर बेड से नीचे आया

"क्यों क्या हुआ" रूपा बोली

"अबे टाइम देखो 4 बज गये है वो तो अच्छा हुआ की पापा घर पर नही है इसलिए बच जाउन्गा वरना तो इतनी देर होने पर मेरी वॉट लग जाती" मैं बोला और बाथरूम की तरफ भागा और अपने को अच्छे से सॉफ करके और हाथ मुँह धोकर अपने कपड़े पहन लिए और फिर दोनो ही लड़कियो को किस करके दोबारा जल्दी मिलने का वादा करके उनसे विदाई ली और अपने घर की तरफ बढ़ गया........
 
अपडेट 31

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मैं घर वापस पहुचा तो मेरे लिए दरवाजा काम वाली बाई ने खोला मैने पूछा की सब कहाँ है तो मालूम पड़ा की मम्मी और निशा दीदी किसी के घर गये है किसी प्रोग्राम मे जबकि डॉली अभी अपने रूम मे थी मैने चैन की सांस ली की अब मुझे इतनी देर गायब रहने का कोई जवाब नही देना पड़ेगा

मैं अपने रूम मे आकर आज की धुआँधार चुदाई के बारे मे सोचने लगा की आज किस तरह रूपा ने अपनी गान्ड उचका उचका कर मुझसे चुदवाया था और मोना भी पीछे नही रही थी लेकिन जब मैने दोनो की तुलना की तो मुझे यही लगा की रूपा के साथ ही ज़्यादा मज़ा आया क्योंकि वो शादी शुदा थी और उसे पूरा अनुभव हो चुका था इन सब चीज़ो का और जिस तरह उसने मेरा लंड चूसा था उस मामले मे तो वो लगभग एक्सपर्ट ही थी और यही सोचते सोचते थकान और आलस की वजह से कब मुझे नींद आ गयी मुझे पता ही नही चला

शाम को कोई 7 बजे के आस पास किसी के हिलाने से मेरी नींद खुली देखा तो डॉली सामने खड़ी थी

"कितना सोता है तू कब से उठा रही हूँ तुझे, और आज दिन भर कहाँ गायब था" मेरे आँखे खोलते ही डॉली बोली

मैने डॉली का हाथ पकड़ कर बेड पर बैठा लिया और बोला "दिन भर कहाँ यार 3 बजे तो वापस आ गया था मैं जब तू सो रही थी"

"लेकिन इतनी देर भी कहाँ रहा" उसने पूछा

"अरे मैं घूमते हुए मोना के घर की तरफ चला गया था वहाँ उसने मुझे देख लिया और घर मे बुला लिया फिर वहाँ टाइम कैसे कट गया पता ही नही चला" मैं बोला

"आज कल बहुत बन रही है मोना से वैसे इतनी देर तक तू उसके साथ वहाँ क्या कर रहा था" उसने फिर पूछा

"बाते कर रहा था और क्या, वहाँ उसके साथ उसकी कोई मुँह बोली रूपा भाभी भी थी इसलिए बतो मे वक्त कब कट गया पता ही नही चला, वैसे तू क्या समझ रही थी" मैने सफाई दी और बेड से उतर गया लेकिन मैं नही जानता था की इस वक्त मेरा लंड खड़ा है और मेरे लोवर मे बड़ा भारी टेंट बना हुआ है

"का....कुछ नही" डॉली मेरे खड़े हुए लंड को देखते हुए बोली

जब मैने उसकी निगाहो का पिच्छा किया तो समझ गया की वो कहाँ देख रही है तो जानबूझ कर मैने लंड को अपने हाथ से सेट किया और बोला "मम्मी और दीदी वापस आ गये क्या?"

लेकिन इस वक्त वो सुध बुध खोए मेरे लंड की तरफ ही देख रही थी और शायद उसने मेरी आवाज़ नही सुनी थी तो मैं भी कुछ टाइम वैसे ही खड़ा रहा और फिर थोड़ा ज़ोर से बोला "अरे बता ना"

"हुम्म....का...क्या" वो इस दुनिया मे वापस आते हुए बोली

"ये हो क्या गया है तुझे, सुबह भी तेरी नज़रे वहीं गढ़ी हुई थी और अभी भी तेरा ध्यान वहीं था" मैं बोला

"वो....वो...." वो शरम से नज़रे झुकाते हुए बोली उसके गाल लाल पड़ गये थे

"चल ठीक उसके बारे मे बाद मे बात करते है पहले तू ये बता की मम्मी और दीदी वापस आ गये है क्या" मैं बोला

"नही, वो लोग रात का खाना खा कर ही वापस आएँगे और पापा का भी फोन आया था की उन्हे भी लौटने मे टाइम लग जाएगा" डॉली बोली

"तो ठीक है तू मेरे लिए चाय ला जब तक मैं फ्रेश हो जाता हूँ" कहते हुए मैं बाथरूम की तरफ बढ़ गया

"वो तो मैने बाई को पहले ही बोल दिया था वो आती ही होगी चाय लेकर" उसने जवाब दिया

"ओके...तो फिर मैं आता हूँ फ्रेश होकर" मैं बोला

"अरे पहले मुझे अपना मोबाइल तो बता दे कहाँ रखा है" वो बोली

"क्यों तुझे उसमे क्या करना है" मैने पूछा

"वही......." वो मुझे आँख मारते हुए बोली और

उसने मुस्कुराते हुए अपना निचला होंठ अपने दाँतों से दबा लिया
 
"तू नही मानेगी, अब वापस आकर तुझसे बात करनी ही पड़ेगी, मोबाइल मेरी शर्ट के जेब मे है निकाल ले" मैं बोला और बाथरूम मे घुस गया

कोई 10 मिनिट बाद मैं नहा धोकर बाहर निकला तो मैने सिर्फ़ टवल लपेटा हुआ था और कोई कपड़ा मेरे बदन पर नही था क्योंकि मैं बाथरूम मे गया तो सिर्फ़ हाथ मुँह धोने था इसलिए मैं चड्डी बनियान लेकर नही गया था लेकिन वहाँ जाकर मेरी नहाने की इच्छा हो गई थी इसलिए अभी मैं सिर्फ़ टवल लपेटे हुए था

मैने डॉली की तरफ देखा तो वो अभी भी मोबाइल मे लगी हुई थी, उसका चेहरा उत्तेजना से सुर्ख लाल पड़ गया था और साँसे भी तेज चल रही थी जिससे उसके बूब्स उपर नीचे हो रहे थे उसे ऐसे देख मेरे लंड ने फिर करवट लेनी शुरू कर दी थी

"क्या देख रही है तू" कहते हुए मैं उसके साइड मे आ गया और मोबाइल मे देखने लगा जहाँ वो पिक्स को

ज़ूम करके लड़को के लंड देख रही थी

मुझे आया देख वो शर्मा गई और मोबाइल को बंद करने लगी तो मैं वहाँ से हट-ते हुए बोला "देख ले देख ले आराम से देख ले मैं कुछ नही कहूँगा, वैसे चाय नही आई अभी तक" मैने पूछा

"वो मैं अब बाई को बोलती हूँ वो जब चाय लेकर आई थी तब तू बाथरूम मे था इसलिए मैने वापस भेज दिया था" इतना बोल कर वो उठी और बाई को बुलाने चली गई

मैं भी तब तक तेल और देव लगाने लगा मैं अब सोच चुका था की मुझे क्या करना है इसलिए मैने चड्डी बनियान अभी तक नही पहने थे

अब डॉली वापस रूम मे आ गयी थी और फिर मोबाइल मे लग गई थी अब उसकी शरम बहुत हद तक ख़तम हो गई थी और वो मुझसे खुलने लगी थी तभी बाई चाय और पानी रख कर चली गई

"सोनू एक बात पुछु........बुरा तो नही मानेगा" तभी डॉली बोली

"मैं सुबह ही तुझसे कह चुका हूँ की 'इस बारे' मे तू जो चाहेगी मैं तेरी वो मदद करूँगा, पूछ क्या पूछना है" मैं बोला

"वो...वो....क्या सभी लड़को का 'वो' ऐसा ही बड़ा सा होता है" उसने शरमाते हुए पूछा

"कैसा....ला बता ज़रा, बगैर देखे मैं कैसे बता पाउन्गा" मैं उसके पास बैठते हुए बोला

उसने नज़रे झुकाए हुए मोबाइल मेरे सामने कर दिया जिसमे एक लड़के का लंड दिखाई पड़ रहा था जो मेरे लंड से छोटा ही था

"अरे ये तो नॉर्मल है जबकि कई लड़को के तो इससे ज़्यादा बड़े और मोटे होते है" मैं मोबाइल उसे वापस करते हुए बोला "वैसे तूने आज तक किसी का लू.... सॉरी वो रियल मे नही देखा है क्या"

मेरी बात सुनकर उसके गाल लाल हो गये थे और उसके साथ ऐसी बाते करने से मेरा लंड भी अब पूरा खड़ा हो गया था

"म...म.....मैं.....मुझे किसका देखने को मिलता है

जो मैं देखती" वो नज़रे झुकाए देखती

"कोई बाय्फ्रेंड व्फ........" मैं बोला

"चल हट....मैं वैसी लड़की नही हूँ, भले ही मुझे ये सब देखने मे बहुत मज़ा आता है लेकिन मैने आज तक किसी लड़के की तरफ नज़र उठा कर भी नही देखा है" वो बोली

"ओह्ह्ह्ह.सेम यही स्टोरी मेरी भी है मुझे भी लड़कियो के प्राइवेट पार्ट्स देखने की बहुत इच्छा है लेकिन आज तक मुझे भी देखने को नही मिले कभी" मैं मुँह उतार कर बोला

फिर मेरी बात सुनकर वो कुछ सोचने लगी और हमारे बीच चुप्पी च्छा गयी

"वैसे सोनू तू इसमे मेरी हेल्प कर सकता है" कोई 2 मिनिट बाद वो बोली

"वो कैसे....." मैने पूछा जबकि मैं समझ गया था की वो अब क्या कहने वाली है और मेरा लंड टवल के अंदर झटके मारने लगा

"तू मुझे अपना वो दिखा सकता है" वो बोली

"क्या......अब तेरी भाई बहन वाली बाते कहाँ गई" मैं बोला

"वो मैने कल नेट पर भाई बहन वाली स्टोरी पढ़ी थी जिसमे वो लोग सब कुछ कर लेते है तो मुझे लगा की तू सही है और जो तू दीदी के साथ पिक्निक मे करने जा रहा है उससे तो ये कम ही है, और मुझे तो तुझे बस दिखना ही है" वो शरमाते हुए बोली

"हूंम्म्म...तो ये बात है, लेकिन तुझे अपना वो दिखाने के बदले मुझे क्या मिलेगा" मैं बोला

"तुझे क्या चाहिए" उसने पूछा

"बदले मे तुझे भी अपने ये दिखाने होंगे" मैं उसके बूब्स की तरफ इशारा करते हुए बोला

"ये...ये...कैसे हो सकता है" वो हड़ बड़ाते हुए बोली
 
"क्यों...क्यों नही हो सकता जब मैं तुझे दिखा सकता हूँ तो तू क्यों नही दिखा सकती, तेरे ही जैसे मैं भी मरा जा रहा हूँ ये सब देखने को" मैं बोला

"वो....तुझे तो शायद कल दीदी के देखने को मिल ही जाएँगे ना" वो बोली

"शायद ही ना, पक्का तो नही है ना" मैं बोला

"लेकिन मुझे बहुत शरम आएगी तेरे सामने ऐसे होने मे" वो बोली

"तो क्या मुझे नही आएगी तुझे अपना वो दिखाने मे" मैं बोला

मेरी बात सुनकर उसने कुछ देर सोचा और बोली "ठीक है लेकिन मैं सिर्फ़ टॉप उतारूँगी ब्रा नही"

उसकी बात सुनकर मैं खुश हो गया जब टॉप उतर गया तो ब्रा भी जल्दी ही उतर जाएगी फिर भी मैने ज़िद की और बोला "ठीक है मंजूर लेकिन तुझे अपना लोवर भी उतार कर सिर्फ़ ब्रा पैंटी मे होना पड़ेगा"

"लेकिन...." उसने कहना चाहा

"कोई लेकिन वेकीन नही चलेगा, कह दिया बस" मैं अड्ते हुए बोला

"ओके....ठीक है चल अब दिखा" वो बोली

"बहुत होशियार है तू है ना, पहले मेरा देख लेगी और फिर भाग जाएगी और मैं वैसा ही रह जाउन्गा, नो नो पहले तुझे अपनी टॉप और लोवर उतारना होगा ताकि कोई लाफद ना हो मुझे तुझ पर भरोसा नही" मैं बोला

मेरी बात सुनकर वो फिर सोच मे पड़ गई फिर शरमाते हुए उसने अपना टॉप निकाल दिया और फिर जल्द ही लोवर भी उतार दिया जिसमे वो कुछ ऐसी लग रही थी

उसकी छोटी सी ब्रा मे उसके बड़े बड़े बूब्स समा ही नही पा रहे थे और नीचे उसकी पैंटी हाए....क्या

दिलकश नज़ारा था मोना और रूपा तो कहीं से भी उसके सामने बस ज़ीरो ही थी मैं आँखे फाड़ के उसे घूर रहा था

"ऐसे क्या देख रहा है, चल मैने तेरी शर्त पूरी कर दी है अब तू भी अपना वो दिखा" वो उतावली सी बोली

और मैने अपना टवल खोल कर नीचे गिरा दिया

नीचे मैने कुछ नही पहना था तो अब मैं पूरा नंगा ही उसके सामने खड़ा था

मेरा लंड देख कर उसका मुँह खुला का खुला ही रह गया और उसकी आँखे फट गयी थी

"ये तो सच मे उस फोटो वाले से बड़ा और मोटा है" वो मेरे पास आकर अपने मुँह पर हाथ रख कर बोली और बड़े ध्यान से मेरे लंड को देखने लगी जो रह रह कर झटके मार रहा था

"लेकिन ये ऐसे झटके क्यों मार रहा है" वो फिर बोली

"अब जब तेरे जैसी खूबसूरत और सेक्सी लड़की सिर्फ़ ब्रा पैंटी मे सामने खड़ी होगी तो बेचारा और क्या करेगा, बस तुझे सालामी दे रहा है" मैं बोला मेरी बात सुन कर वो शर्मा गयी

तभी मुझे सीढ़ी पर किसी के आने की आवाज़ आई और मैं टवल लपेट-ता रूम से बाहर निकला तब तक डॉली भी अपने कपड़ो पर झपट पड़ी थी

बाहर काम वाली बाई थी

"भैया जी, वो खाना बन गया है और अब मेरा जाने का टाइम भी हो गया है तो दीदी से बोल दो की वो नीचे आजाए" वो बोली

"ठीक है" मैं बोला तो वो चली गई जबकि मैं मन ही मन उसे गालियाँ बक रहा था

तभी डॉली भी बाहर आ गयी और नीचे की तरफ बढ़ गयी शायद उसने बाई की बाते सुन ली थी

"अगला शो कब दिखा रही है" मैं उसे जाते देख कर बोला

"बस....ये फर्स्ट आंड लास्ट शो था अब आगे कुछ नही" वो मुस्कुराते हुए बोली और सीढ़िया उतरने लगी

'अभी तो खेल शुरू ही हुआ है बच्चो, आगे आगे देख कितने शो होते है' मैं मन ही मन बोला और अपने रूम मे चला गया

रात कोई 9.30 बजे तक मैं और डॉली खाना खा चुके थे मम्मी और दीदी अभी तक नही आई थी की तभी पापा का फोन आया की उनकी गाड़ी खराब हो गई है और मैं बाइक लेकर उन्हे लेने आऊँ और ये सुन कर मेरे सारे अरमानो पर पानी फिर गया क्योंकि पापा को लेकर आने मे 12 तो बज ही जाने थे मतलब रात मे दीदी के साथ मस्ती कॅन्सल थी क्योंकि तब तक उसने सो जाना था और मैं बुझे मन से डॉली को बता कर पापा को लाने निकल गया

और सच मे वापस आने मे 12 बज ही गये थे मैं उपर आया और दीदी के रूम के पास गया लेकिन मुझे अंदर से कोई आवाज़ नही आई मैने के होल से झाँक कर देखा तो मेरा लंड फिर ताव मे आ गया दीदी अंदर सोई हुई थी

उसकी मोटी गान्ड देख कर मैं अपने लंड को पैंट के उपर से ही भींचने और दबाने लगा और मन मे सोचा की 'अगर कल मौका मिला तो इसके बूब्स के पहले इसकी गान्ड को ही बुरी तरह से मसलूंगा'

और यही सोचते हुए अपने रूम के बाथरूम मे आकर अपनी दोनो बहनो के बारे मे सोचते हुए मूठ मारने लगा.........
 
अपडेट 32

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सुबह किसी के दरवाजा ज़ोर से ख़टखटाने से मेरी नींद खुली

"कौन है...." मैं कुन्मूनाते हुए बोला

"अरे कुम्भकरण और कब तक सोया पड़ा रहेगा, सुबह के 6 बज गये है और हमे 8 बजे तक मेरे कॉलेज पहुचना है मैं नहाने जा रही हूँ तू भी जल्दी तैयार हो जा" मुझे दीदी की आवाज़ आई

"ओके...."मैं बोला और मैने घड़ी की तरफ देखा

सुबह के 6 बज गये थे

मैं उठा और बाथरूम की तरफ बढ़ गया दीदी भी शायद जा चुकी थी

कोई आधे घंटे बाद मैं तैयार हो कर अपने रूम से बाहर निकला और दीदी के रूम मे पहुचा और वहाँ के नज़ारे ने एक बार फिर मेरी धड़कने बढ़ा दी

दीदी नहा कर अपने रूम मे आ गयी थी और अभी उनकी गान्ड एक छोटी सी पैंटी मे फसी हुई मेरे सामने थी जोकि मेरे लंड को जगाने के लिए काफ़ी थी

मैं आगे बढ़ा और पीछे से दीदी से चिपक गया और उसकी कमर मे हाथ डाल कर अपने होंठ उसकी गर्दन से लगा दिए मेरे ऐसा करने से वो सिहर उठी और उसके रोंगटे खड़े हो गये

"चल हॅट.....जब देखो तुझे एक ही काम सूझता है,

अब मुझे तैयार होने दे वरना हम लेट हो जाएँगे" वो मुझे पीछे धकेलते हुई बोली

"अरे यार अब परीक्षा का टाइम आ गया है लास्ट बार तो प्रॅक्टीस कर लेने दो" मैं फिर आगे बढ़ते हुए बोला

"मैने मना किया ना, चल अब तू नीचे जा और चाय वाय पी ले मैं भी बस 10 मिनिट मे आती ही हूँ" वो

बोली और मैं अपना मुँह बना कर नीचे आ गया

"हाई हीरो......आज तो मज़े है तेरे" मुझे देखते ही डॉली बोली जो वहीं हॉल मे थी

"तो तू क्यों जल रही है, तू कह के तो देख तेरे भी मज़े करा देता हूँ" मैं बोला

"मुझे नही करने ऐसे मज़े वो तुझे और दीदी को ही मुबारक हो" कहते हुए वो उठी और अंदर किचन मे चली गई चाय लाने

…………………

इधर मैं टीवी देखने लगा थोड़ी ही देर मे दीदी भी नीचे आ गयी जोकि इस वक्त बहुत हॉट लग रही थी जीन्स और टीशर्ट मे

कोई बात नही आज मैं तेरी सारी हॉटनेस निकाल दूँगा मैने मन मे सोचा और डॉली की लाई हुई चाय पीने लगा और दीदी भी चाय पीने लगी

इतने मे कैसे 7 बज गये पता ही नही चला
 
"अरे बाप रे 7 बज गये, चल सोनू खड़ा हो मैं मम्मी को बोल कर आती हूँ की हम जा रहे है" दीदी बोली और अंदर चली गयी

"वैसे सोनू दीदी के साथ तो तू आज बहुत मज़े करेगा लेकिन थोड़ा मज़ा मैं तुझे अभी करवा सकती हूँ" दीदी के जाते ही डॉली बोली

"वो कैसे" मैने पूछा

वो मेरी बात का जवाब दिए बिना ही थोड़ी दूर खिड़की के पास जाकर बैठ गयी और उसने झट से अपना टॉप उपर उठाया और अंदर उसने ब्रा नही पहनी थी जिससे पल भर के लिए उसके बड़े बूब्स मेरी नज़रो के सामने आ गये फिर उसने अपने दोनो हाथो से अपने बड़े बड़े बूब्स दबा दिए

उसकी ये हरकत देख कर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया मैने उससे ये उम्मीद नही की थी मेरी ऐसी हालत देख कर उसने मुझे आँख मार दी

अभी मैं ये नज़ारा ढंग से देख भी नही पाया था की दीदी के आने की आहट हुई और डॉली ने वापस अपना टॉप नीचे खींच लिया और मुस्कुराने लगी मुझे ऐसा लगा जैसे की मेरा सारा माल किसी लूट लिया हो

"अरे अभी तक तू यहीं खड़ा है, बाइक नही निकाली अभी" दीदी मेरे पास आते हुए गुस्से से बोली

"वो..वो...अभी निकालता हूँ दी" मैं बोला और लपकते हुए बाहर निकला

मैने बाइक बाहर निकाली और दीदी झट से मेरे पीछे दोनो तरफ पैर डाल कर बैठ गयी और मैने बाइक आगे बढ़ा दी

"अब ज़रा तेज चल मैं लेट होना नही चाहती" गाओं से बाहर निकलते ही दीदी मुझसे चिपक कर बैठते हुए बोली

"तेज तो चलाता हूँ लेकिन फिर मत बोलना की....." मैने कहना चाहा

"नही बोलूँगी कुछ, आज तुझे पूरी छूट है आज तू जो चाहे वो कर सकता है और यकीन नही आता तो ये देख" मेरी बात काट कर दीदी बोली और अपने एक हाथ से पैंट के उपर से मेरा लंड पकड़ लिया

मैं मस्त हो गया था मानो मेरी हर मुराद पूरी हो गई थी मैने अब दीदी के बूब्स जोकि मेरी पीठ मे गढ़े जारहे थे और उसके हाथ जो की मेरे लंड की मालिश कर रहा था के मज़े लेते हुए बाइक की स्पीड बढ़ा दी और हम कोई 40 मिनिट बाद दीदी के कॉलेज मे थे

हम बाइक खड़ी कर के दीदी की चारो सहेलियो के पास आए उनमे से सब एक से बढ़ कर एक थी

"हाई निशा तो आ गई तुम" तभी एक लड़की बोली

"हाँ यार, लेट तो नही हुई ना" दीदी बोली

"नही नही अभी तो 5 जोड़े और आने वाले है और अभी हम सभी के बाय्फ्रेंड भी नही आए है" वोही लड़की बोली

"लेकिन यार अभी तक तूने अपने बाय्फ्रेंड का इंट्रो नही करवाया हमसे" दूसरी लड़की बोली

"लेकिन अभी ये साबित कहाँ हुआ है की ये इसका बाय्फ्रेंड ही है" तभी निशा (ग्रूप लीडर) पास आते हुए बोली जो इस वक्त बहुत हॉट ड्रेस पहने हुए एकदम पटाखा लग रही थी

"तो क्या सच मे तू इनका टेस्ट लेगी" पहली वाली लड़की बोली

"वो तो मैं लूँगी लेकिन यहाँ नही पिक्निक स्पॉट पर पहुच कर, वैसे सोनू मेरा नाम निशा है" कहते हुए उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया

क्या मस्त एहसास था उसके हाथ का मेरा मन ही नही हो रहा था उसे छोड़ने का

"और मैं टीना" दूसरी वाली बोली

और फिर सभी लड़कियो ने मुझे अपने अपने नाम बताए और मेरा नाम तो वो सभी जानती ही थी लेकिन यहाँ मैं सिर्फ़ निशा और टीना का ही नाम बता रहा हूँ क्योंकि आगे उनसे मेरा बहुत कुछ होने वाला था

फिर लगभग 15 मिनिट मे सभी लोग आ गये और हम 10 जोड़े अपनी अपनी बाइक से रंगीन पिक्निक के लिए निकल पड़े...........
 
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