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Incest मेरा परिवार और मेरी वासना

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"नही नही, दीदी के सामने नही टीना की चुदाई के बारे मे दीदी जानती थी लेकिन उस वक्त वो वहाँ रुकी नही लेकिन जब मैं निशा को चोद रहा था तब दीदी ने पीछे से आकर सब देख लिया था" मैने बताया

"तो अब क्या परेशानी है अब तो शायद तू दीदी को भी चोद लेगा एक दो दिन मे" डॉली कुछ ठंडे लहजे मे बोली

"मुझे भी यही उम्मीद थी और इस बारे मे मैने दीदी से बात भी की लेकिन वो कहती है की जितना होना था वो हो चुका अब मैं उसके बारे मे भूल जाउ" मैं मुँह उतार कर बोला

"मुझे उसकी बात पर यकीन नही है जो इतना कुछ कर सकती है वो आगे भी बहुत कुछ करेगी तू परेशान मत हो लेकिन यार तूने एक ही बार मे टीना की भी दोनो तरफ से लेली और और एक ही बार मे निशा को भी दोनो तरफ से निपटा दिया ये कैसे हुआ, लगता है की तेरा लंड सच मे पॉर्न फ़िल्मो वाले लड़को जैसा ही शानदार है जो एक ही बार मे कितनी देर तक लगे रहते है" डॉली बोली

"अब मैं क्या बोलू लेकिन हक़ीकत यही है की मैने आज ऐसा ही किया है" मैं बोला

मेरी बात सुनकर डॉली कुछ देर तक सोचती रही फिर बोली "सोनू मुझे तेरा लंड देखना है"

"अरे अभी परसो ही तो देखा था तूने अब क्यों" मैं खुश होते हुए बोला मेरा प्लान सही दिशा मे जा रहा था

"वो...वो...उस दिन मैं ध्यान से नही देख पाई थी इसीलिए" वो बोली

"ओके...तो देख लेकिन मेरी वही शर्त है" मैं बोला

"मुझे पता है की तेरी शर्त क्या है इसलिए मैं तैयार हूँ मुझे अभी सिर्फ़ टॉप ही उतारना है नीचे तो मैं वैसे भी पैंटी मे ही हूँ, चल अब तू अपना लंड बाहर निकाल ले" वो झट से बोली

"जी नही मेडम आज आपको भी पूरी नंगी होना होगा अगर मेरा लंड देखना चाहती हो तो" मैं बोला

"प्लीज़ यार क्यों सता रहा है उस दिन तो ब्रा पैंटी मे ही मान गया था आज भी वैसे ही कर लेते है, तुझे पता है ना की मुझे शरम आती है" वो गिडगिडाते हुए बोली

"ओके तो ठीक है, आज तू पैंटी मत उतारना लेकिन ब्रा तो उतरनी ही पड़ेगी मंजूर हो तो बोल वरना मैं अपनी गली और तू अपनी गली" मैं बोला

मेरी दो टुक बात सुनकर उसके पास कहने को कुछ रह ही नही गया था

"ओके...ठीक है" वो बोली और उसने अपना टॉप निकाल कर फेंक दिया

अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा पैंटी मे खड़ी थी और उसका मादक हुस्न मेरे होश उड़ाए जा रहा था भले ही कल मैने टीना और निशा जैसी सेक्सी लड़कियो की चुदाई की थी और निशा दीदी जैसी लड़की को नंगी देख कर उसकी गान्ड को रगड़ते हुए अपना पानी निकाला था लेकिन डॉली का ये नज़ारा मुझे आंदोलित किए जा रहा था

और जैसे अभी सिर्फ़ शुरुआत ही हुई थी की डॉली ने अपनी ब्रा भी निकाल फेंकी

हे भगवान क्या नज़ारा था उस कुवारि अनचुदी लड़की के जिस्म का जिसे देख कर मेरा लंड मेरी चड्डी और पैंट फाड़ने पर उतारू था

और मैने भी देर ना करते हुए अपने नीचे के डोड़नो कपड़े उतार दिए जिससे मेरा ख़तरनाक लंड खड़े हुए मेरी छोटी बहन को सालामी देने लगा

"वाउ...कितना प्यारा है ये, पता नही कैसे दीदी ने इसे मुँह मे लेने के बाद भी इसे चूसा नही" वो मेरे लंड को पास आकर देखते हुए बोली

अब मैं क्या बोलता मैं बस उसे देखता ही रहा

"क्या मैं इसे च्छू कर देख सकती हूँ" वो मेरी नज़रो से नज़र मिलाते हुए बोली

"ज़रूर...लेकिन मेरी भी शर्त है की अगर तूँ इसे छुओगी तो मैं भी तेरे बूब्स छुउंगा, बोल मंजूर है" मैं बोला

"ओके...मुझे मंजूर है" वो बोली और उसने मेरे लंड के पास बैठ कर मेरा लंड पकड़ लिया

और वो मुस्कुराने लगी और मेरे लंड पर अपनी मुट्ठी आगे पीछे चलाने लगी और जैसे मैं जन्नत मे पहुच गया था

"क्या मैं इसे चूम सकती हूँ" डॉली ने मेरे लंड को मसलते हुए पूछा

"बिल्कुल..., लेकिन मैं भी तेरे बूब्स के साथ वही करूँगा बोल मंजूर" मैने कहा

"ओके मुझे मंजूर है" वो बोली और उसने मेरा लंड पकड़ कर अपने चेहरे के उपर रख लिया

"ओह्ह माइ गॉड...क्या शानदार लंड है मेरे भाई तेरा ऐसा लग रहा है की अभी सारा की सारा मुँह मे भर लू और दिन भर बाहर ही ना निकालु" डॉली मादक स्वर मे बोली

"तो तुझे रोका किसने है मेरी बहन तेरे भाई का ये लंड तेरे ही लिए है जो करना है वो कर" मैं भी मस्त होते हुए बोला

और डॉली ने मेरा लंड पकड़ कर उसे सीधा कर लिया और उसे अपने खुले हुए मुँह मे भरने के लिए आगे बढ़ी लेकिन तभी हमारे घर की लॅंड लाइन का फोन बज्ज उठा और जैसे हम दोनो नींद से जागे और एक दूसरे का मुँह देखने लगे

मैने डॉली को इशारा किया की वो जाकर फोन पिक करे और मेरा इशारा समझते ही उसने फोन उठाया दूसरी तरफ मम्मी थी

"अरे अभी तक तुम लोग निकले नही" मम्मी की आवाज़ आई

"बस मम्मी निकल ही रहे थे वो क्या है ना आज भाई देर से उठा है और अभी तैयार ही हो रहा है उसके तैयार होते ही हम निकलते है" डॉली बोली

"ओके ठीक है लेकिन जल्दी आओ" मम्मी बोली और फोन काट दिया

"चल भाई अब अपनी मस्ती ख़तम, मम्मी ने जल्दी बुलाया है" डॉली फोन रखते हुए बोली

"रुक ना यार अभी थोड़ा और करते है" मैं बोला

"जी नही आज के लिए इतना ही काफ़ी है ना तुम कहीं जा रहे हो और ना मैं कहीं भाग रही हूँ ओके, चलो अब उठो और चलो" डॉली बोली

"ओके.....चलो" मैं बोला और अपने खड़े लंड को समझाते हुए बाहर निकल गया की बेटा आज तेरे हिस्से मे मलाई नही है लेकिन मैं क्या जानता था की मेरे लंड की किस्मत मुझसे भी अच्छी थी क्योंकि उसे आज और भी दो छूटो को चोद ना था

और मेरे बाइक बाहर निकालते ही डॉली भी घर लॉक कर के बाहर आ गयी और हम दोनो ही मेरी बाइक से

रवाना हो गये...........
 
अपडेट 40

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मैं और डॉली बाइक पर पास वाले गाओं के लिए निकल गये जो हमारे गाओं से कोई आधे घंटे की दूरी पर था और रोड भी कच्चा था तो गाड़ी पर धक्के लग ही रहे थे और मैं भी इस मौके का फ़ायदा उठना चाहता था लेकिन डॉली ने मुझे ऐसा करने का मौका ही नही दिया वो खुद ही मेरी पीठ से चिपक कर बैठ गई और खुद ही अपनी बड़ी बड़ी चुचिया मेरी पीठ पर दबा दी थी

खैर रास्ते मे और कुछ नही हुआ और मैं उसकी चुचियो का मज़ा लेते हुए पापा के दोस्त के गाओं पहुच गया

अभी दोपहर के 11 बज चुके थे वहाँ पहुचते ही पापा ने मुझे अपने दोस्त और उसकी फॅमिली से मिलवाया और फिर सभी अपने अपने ग्रूप मे बैठ कर बाते करने लगे लेकिन मैं अकेला ही बोर हो रहा था क्योंकि दीदी कहीं दिखाई नही दे रही थी और डॉली भी यहाँ आते ही पता नही कहाँ गायब हो गई थी तभी मेरी नज़र मेरी तरफ आती दो लड़कियो पर पड़ी तो मेरा दिल खुश हो गया मुझे उम्मीद नही थी की इन दोनो से यहाँ मुलाकात होगी

सामने से मोना और रूपा मुस्कुराते हुए चली आ रही थी

"हेलो.....तुम दोनो यहाँ" मैं खुश होते हुए बोला

"क्यों... हमे यहाँ नही आना चाहिए था क्या" मोना बोली

"कैसी बात करती है यार तुम लोगो को यहाँ देख कर तो मुझे इतनी खुशी हो रही है की मैं बता नही सकता, चलो उधर बैठते है" मैं बोला और मोना का हाथ पकड़ कर एक कोने की तरफ बढ़ गया जहाँ और कोई नही बैठा था रूपा भी हमारे पीछे वहाँ आ गई थी

"और सुना क्या हाल है" मैं एक कुर्सी पर बैठते हुए बोला

"मैं तो ठीक हूँ लेकिन इस बेचारी की हालत बहुत खराब है" मोना रूपा की तरफ इशारा करते हुए बोली

"कैसी बात कर रही यार तू....." मोना की बात सुन कर रूपा उसे कोहनी मारते हुए बोली अब वो दोनो भी बैठ चुकी थी

"क्यों, क्या हुआ इसे अच्छी भली तो दिख रही है" मैं हँसते हुए बोला

"चेहरे से ही अच्छी है बस वरना इसकी चूत के बुरे हाल हुए पड़े है, तुमसे चुदवाने के बाद इसने कल से मुझे पागल बना रखा है की सोनू को बुला, सोनू को बुला ये तुझसे चुदवाने को मरे जा रही थी बड़ी मुश्किल से मैने इसे समझाया की तू निशा के साथ पिक्निक पर गया है और आ नही सकता, और जब मुझे मालूम पड़ा की तू भी यहाँ आने वाला है तो मैं इसे यहाँ ले आई ताकि यहाँ इसका कुछ जुगाड़ हो सके वैसे सोनू पिक्निक कैसी रही मज़ा आया की नही" मोना बोली
 
मोना की बात सुनकर रूपा ने शरम से गर्दन झुका ली थी

"एकदम मस्त रही पिक्निक और बहुत मज़ा भी आया लेकिन वो बात बाद मे करेंगे पहले तू ये बता की यहाँ चुदाई का जुगाड़ कैसे होगा सच मे यार मेरा भी बहुत मन कर रहा था चुदाई करने का और अब तुम दोनो को देखने के बाद तो मैं रुक ही नही सकता, प्लीज़ कुछ कर ना" मैं बोला

"तू चिंता मत कर जब मेरी मम्मी ने बताया था की हमे यहाँ आना है और तुम लोग भी यहाँ आने वाले हो तो मैने तभी प्लान बना लिया था अब बस सब ठीक से निपट जाए तो फिर मज़े ही मज़े है" मोना ने बताता

"वो कैसे" मैने पूछा

"वो ऐसे की मैने मम्मी को पहले ही बता दिया था की रूपा भी हमारे साथ यहाँ आना चाहती है क्योंकि इस गाओं के पास वाले गाओं मे उसकी रिश्ते की बहन रहती है और इस बहाने वो उससे मिल लेगी तो मम्मी ने कहा था की ठीक है ले चलो और अब मैं जाकर मम्मी से बोलती हूँ की हमे उस गाओं मे जाना है अब पापा तो अपने दोस्तो के साथ लगे है तो वो तो जाएँगे नही इसलिए मैं उन्हे तेरा नाम सूझा दूँगी फिर क्या है मज़े ही मज़े" मोना ने बताया

"लेकिन इसकी बहन के घर हम ये सब कैसे कर सकते है" मैं बोला

"कौन बहन और किसकी बहन, ये सब बस एक बहाना है चुदाई करने का क्योंकि मैं जानती हूँ की उस गाओं वाले रोड पर जंगल पड़ता है जहाँ रोड से थोड़ा अंदर जाकर हम आराम से कुछ भी कर सकते है" मोना बोली

"ओह्ह्ह्ह.तो जा अपनी मम्मी से बात कर" मैं बोला

"कहीं जाने की ज़रूरत नही है वो देखो तुम दोनो की ही मम्मी इधर ही आ रही है" रूपा बोलती

और मैने उधर देखा तो सच मे हमारी मम्मियाँ हमारी तरफ ही आ रही थी

"अरे मेरा सोना बेटा.....ठीक से तो पहुच गया था ना" मम्मी पास आकर मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए बोला

"हाँ मम्मी" मैं बोला और फिर मैने मोना की मम्मी से नमस्ते की और वो दोनो भी हमारे साथ ही बैठ गयी

फिर मोना ने अपनी मम्मी से रूपा की बहन के घर जाने की बात की तो बहुत आसानी से मेरी मम्मी ने मुझे इन दोनो के साथ मे जाने की पर्मिशन दे दी लेकिन खाना खाने के बाद क्योंकि उसके बाद भी हमे शाम तक यहीं रुकना था तो हम भी खुश हो गये और खाना शुरू होने का वेट करने लगे

कोई 1 बजे खाना ख़तम हुआ और फिर हम तीनो मम्मी को बता कर मेरी बाइक से निकल गये और कोई 20/मिनिट चलने के बाद घना जंगल शुरू हो गया था थोड़ा आगे जाकर मोना ने मुझे रोड से हट कर राइट साइड मे चलने को कहा और थोड़ी देर चलने के बाद हम जंगल के अंदर थे और इधर कोई आवाजाही दिखाई नही पड़ रही थी मैने पेड़ो के एक झुर्मुट के बीच मे बाइक खड़ी कर दी और हम तीनो ही नीचे पेड़ की छाँव मे बैठ गये

"लेकिन यार मोना यहाँ कैसे करेंगे हमारे पास तो नीचे बिच्छाने के लिए भी कुछ नही है" मैं बैठते ही बोला

"कोई बात नही यार आज खड़े खड़े ही कर लेंगे क्यों रूपा" मोना बोलती है

"जैसे भी करना हो करो लेकिन जल्दी क्योंकि मेरी चूत जैसे जल रही है अभी और हाँ मोना आज पहला नंबर मेरा होगा" रूपा मेरे लंड को पैंट के उपर से ही मसलते हुए बोला

"ठीक है बाबा आज पहले तू ही चुदवा ले लगता है तेरी चूत मे आग लगी हुई है" मोना हँसते हुए बोली

अब तक रूपा मेरे पैंट की जीप खोलकर मेरा लंड बाहर निकाल चुकी थी और उसे हसरत भरी नज़रो से देखते हुए सहला रही थी जबकि मेरे हाथ उसके ब्लाउस के अंदर घुस के उसके बूब्स को मसल रहे थे अंदर उसने ब्रा नही पहनी थी थोड़ी देर बाद ही रूपा मेरे लंड को मुँह मे भर कर चूस रही थी जिससे मेरा लंड अब पूरी तरह चुदाई करने को तैयार हो चुका था
 
मेरे लंड को झटके मारते देख रूपा ने उसे मुँह से बाहर निकाला और एक पेड़ के तने से सट कर खड़ी हो गई और उसने अपनी सारी उठा कर अपनी पैंटी निकाल दी और सारी को अपनी कमर के पास अटका दिया और अपनी टाँगे फैला ली

अब वो नीचे से पूरी तरह नंगी थी उसकी रस बहाती चूत मेरी आँखो के सामने थी मैने भी देर नही की और अपना पैंट और चड्डी नीचे खिसका कर उसके पास जाकर उसके कुल्हो को पकड़ा और उसकी चूत मे खड़े खड़े लंड घुसाने लगा चूँकि इस तरह चूत पूरी

खुली नही थी इस लिए लंड बहुत रगड़ते हुए अंदर जा रहा था लेकिन एक बार रूपा की चूत उसके पानी से गीली

होते ही मेरे धक्को की स्पीड बढ़ गई और मैं ज़ोर

ज़ोर से उसकी चूत मे लंड पेलने लगा और वो

हाय....हाय...करते हुए चुदाई मा मज़ा लेने लगी और

कोई 5 मिनिट बाद ही मेरा लंड अपना माल उसकी चूत मे भर रहा था और वो भी झड़ते हुए अपनी चूत का पानी मेरे पानी से मिला रही थी

थोड़ी देर बाद हम दोनो अलग हुए तो रूपा ने अपनी पैंटी पहन ली और सारी ठीक कर ली लेकिन मैं अभी भी वैसे ही बैठा हुआ था क्योंकि मुझे अभी मोना को भी चोदना था लेकिन अभी मेरा लंड सुस्ता रहा था और रूपा भी एक साइड बैठ गई थी

तभी मोना मेरे पास आई और अपनी सलवार और पैंटी उतार कर अपनी नंगी चूत मेरे लंड पर घिसते हुए मेरी गोद मे बैठ कर मेरे होंठ चूसने लगी और मैं भी अपने हाथ उसके पीछे ले जाकर उसके कुल्हो को दबाने लगा

"यार मोना तेरी गान्ड बड़ी मस्त है आज इसे मारने देना" मैं बोला

"ना बाबा ना, मैने सुना है उसमे बहुत दर्द होता है मैं नही करने वाली ये सब" वो बोली

"अरे पहली बार तो होता ही है लेकिन बाद मे मज़ा भी आता है चाहे तो रूपा से पूछ ले उसने भी तो गान्ड मरवाई है ना, क्यों रूपा मैने ठीक कहा ना" मैं बोला

"हाँ...तुम सही कह रहे हो लेकिन इस वक्त गान्ड मारना ठीक नही है बेचारी ठीक से चल भी नही पाएगी और वैसे भी हम घर पर नही है" रूपा बोली और उसकी बात सही भी थी ये वक्त इस काम के लिए ठीक नही था

"ठीक है बाद मे ही सही लेकिन पहले ये हाँ तो करे" मैं बोला

"ठीक है बाद मे देख लेंगे लेकिन अभी तो लंड मेरी चूत मे डाल" मोना मेरे खड़े हो चुके लंड को

पकड़ कर अपनी चूत पर सेट करते हुए बोली

"मैं कैसे डालु उपर तो तू बैठ ही तू डाल और वैसे भी मैने सोच लिया है की आज के बाद जब तक मैं तुम दोनो की गान्ड मे लंड नही डाल लूँगा तब तक चूत मे भी नही डालूँगा" मैं बोला

और मेरी बात सुनकर मोना थोड़ी सी उठी और मेरे खड़े लंड को अपनी चूत पेर लगा कर उसपे बैठती गई जिससे उसकी गीली चूत मेरा पूरा लंड निगल गई और वो अब धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी जिससे उसके बड़े बड़े बूब्स उसकी करती के अंदर ही ज़ोर ज़ोर से हिलने लगे

"क्यों रूपा मेरी शर्त मंजूर है" मैने चुदाई का मज़ा लेते हुए रूपा से पूछा

"मुझे मंजूर है क्योंकि वैसे भी बहुत दिनों से मेरी गान्ड मरी नही है लेकिन मोना से पूछ लो" रूपा मुस्कुराते हुए बोली

"अब जब इसने शर्त रख दी है तो करना ही पड़ेगा लेकिन सोनू अब तू उपर आजा यार ऐसे मे मज़ा नही आरहा है" कहते हुए मोना मेरे उपर से उठ गई और पेड़ के तने के पास वैसे ही खड़ी हो गई जैसे रूपा खड़ी थी मैं भी उसके पास पहुचा और फिर हमारी चुदाई एक बार फिर शुरू हो गई थी

कोई 10 मिनिट बाद हम वापसी के बाइक पर निकल गये थे और मैं सोच रहा था की अब एक बार फिर मुझे इन दोनो से बहुत मज़ा आने वाला है क्योंकि अब की बार इनकी टाइट गान्ड मारने की बरी थी और हम लोग कोई 4 बजे प्रोग्राम वाले घर मे पहुच गये जहाँ निशा दीदी बड़ी बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रही थी...........
 
अपडेट 41 A

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जब हम वापस प्रोग्राम वाले घर पहुचे तो वहाँ निशा दीदी बहुत बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रही थी मैं मोना और रूपा को छोड़ कर दीदी की तरफ चल दिया

"कहाँ चला गया था तू, मैं कब से तेरा इंतज़ार कर रही हूँ" मुझे देखते ही दीदी बोली

"अरे अभी तो गया था मम्मी को बता कर वैसे बात क्या है" मैं बोला

"मुझे यहाँ अच्छा नही लग रहा है चल हम घर चलते है बाकी लोग बाद मे आजाएँगे" वो बोली

"लेकिन मुझे तो अच्छा लग रहा है फिर मैं क्यों जाउ" मैं उसे चिढ़ाते हुए बोला

"कोई बात तो समझा कर, मैने कहा ना मुझे यहाँ अच्छा नही लग रहा है" वो मेरी आँखो मे देख कर मेरा हाथ दबाती हुई बोली

"क्या इरादा है" मैं भी उसकी आँखो मे देखते हुए बोला

"ज़्यादा कुछ नही बस पिक्निक मे जितना किया था उतना ही करने का इरादा है" वो मुस्कुराते हुए बोली

"ओके....तो मम्मी पापा से पूछ लो पहले जाने के लिए" मैं खुश होते हुए बोला क्योंकि मैं समझ गया था की अब जब ये खुद पहल कर रही है तो आज कुछ ज़्यादा ही होगा पिक्निक से

"मैं उनसे पूछ चुकी हूँ बस तेरे आने का इंतज़ार था, चल उनको बता कर आजाते है की हम घर जारहे है" वो बोली और मेरा हाथ पकड़ कर एक तरफ बढ़ गई

फिर हम मम्मी पापा को बता कर घर की तरफ निकल गये दीदी बाइक पर मुझसे चिपक कर बैठी थी और गाओं से बाहर आते ही उसने अपने बूब्स मेरी पीठ पर रगड़ने शुरू कर दिए और अपना एक हाथ मेरे पैंट के अंदर डाल कर मेरे लंड को मसलने लगी

"क्या बात है आज बहुत गरम लग रही है" मैं मज़े लेते हुए बोला

"वो क्या है ना आज मैने लाइव चुदाई देख ली है जिस वजह से मेरी मुनिया मे बहुत खुजली हो रही है" वो बोली

"तो वहीं बाथरूम मे जाकर अपनी उंगली से ही खुजली मिटा लेती ऐसे घर जाने की क्या ज़रूरत है" मैं बोला

"ज़्यादा होशियार मत बन, एक तो तुझे मज़े करने का मौका दे रही हूँ उस पर तू मुझे ही ज्ञान दे रहा है" दीदी बोली और उसने ज़ोर से मेरे लंड को दबा दिया मेरे मुँह से ज़ोर की आ निकल गई

"क्या कर रही हो......." मैं बोला

"अभी तो सिर्फ़ दबाया है अब अगर ज़्यादा चुपातक की ना तो तेरे लंड को उखाड़ कर ही फेक दूँगी" दीदी बोली

"ओके....लेकिन अब तो बता दो की आज मुझ पर इतनी मेहरबानी कैसे हो रही है" मैं सीधे होते हुए बोला

"यार वहाँ वो चुदाई देख कर मेरी इच्छा तो हुई की उंगली कर लू लेकिन फिर मुझे तेरी याद आ गई तो उंगली करने का मन ही नही किया" वो बोली

"तो क्या आज लंड लेने का इरादा है" मैने फिर उसे छेड़ा

"जी नही मेरा वैसा कोई इरादा नही मैं तो बस तेरे साथ उपर उपर से करना चाहती हूँ" वो बोली

"लेकिन यार मुझे उपर उपर से मज़ा नही आता उस पर तुम लंड भी नही चुस्ती हो" मैं नाराज़गी से बोला

"चूसा नही तो क्या हुआ, देखना आज मैं तुझे पूरे मज़े दूँगी अपने हाथो से" वो मेरी गर्दन पर किस करते हुए बोली

"चलो देखते है लेकिन अगर मुझे मज़ा नही आया तो फिर आज के बाद ये उपर उपर वाला खेल बंद, समझी ना" मैने अपना फ़ैसला सुनाया

"ओके....ठीक है" वो बोली और फिर थोड़ी ही देर मे घर पहुच गये

घर पहुँचते ही दीदी ने गेट लॉक किया और मेरा हाथ पकड़ कर उपर अपने रूम मे आ गई वो जैसे बहुत जल्दी मे थी उसने रूम मे पहुचते ही मेरे होंठो को अपने होंठो मे क़ैद कर लिया और उन्हे चूस्ते हुए मेरे पैंट के उपर से ही लंड को अपनी मुट्ठी मे भींचने लगी और मैने भी उसके बूब्स और हिप्स को मसलना शुरू कर दिया था

धीरे धीरे उसके किस करने की स्टाइल एकदम वहशी होते जा रही थी वो मेरे होंठो को दाँतों से काटने भी लगी थी जब हम दोनो की ही साँसे भारी हो गई तो मैने उसे पास पड़े सोफे पर धकेल दिया और खुद उसके पास बैठ कर उसे चूमने लगा और मेरा एक हाथ उसके जीन्स के उपर से उसकी चूत को दबाने लगा था.
 
अपडेट 41 B

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मेरा एक हाथ उसके जीन्स के उपर से ही उसकी चूत को दबाने लगा था

कुछ मिनिट हम एक बार फिर एक दूसरे के होंठो का रस पीते रहे लेकिन अब तक दीदी बहुत गरम हो गई थी इसलिए उसने मुझे पीछे किया और खड़ी होकर अपने कपड़े उतारने लगी उसने अपना टॉप निकाल फेंका और अपना जीन्स भी नीचे कर दिया और मुझे देख कर मुस्कुराइ

इस वक्त उसने अंदर लाल ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी उसकी बड़ी गान्ड इस वक्त मेरे सामने थी और उसके बड़े बड़े बूब्स जैसे बाहर आने को मचल से रहे थे

मैने भी अपने कपड़े निकाल फेके और पूरा नंगा होकर आगे बढ़ा और मैने उसकी ब्रा के हुक्क खोल कर उसे उपर से पूरा नंगा कर दिया और उसकी पैंटी भी नीचे खींच दी जिसे दीदी ने खुद ही अपने पैरो से निकाल दिया

अब मैं उसके नंगे बूब्स को ज़ोर से दबाते हुए उसकी गान्ड की दरार मे उंगली घुमाने लगा मेरे ऐसा करने से दीदी पूरी तरह मस्ती मे आ गई थी वो अपने एक हाथ से मेरे लंड को मसलने लगी और दूसरे हाथ की एक उंगली अपनी चूत मे चलाने लगी उसकी चूत ढेर सारा पानी बहाने लगी थी

कुछ टाइम बाद मैने उसके बूब्स को अपने मुँह मे भर लिया और उन्हे चूमने और चूसने लगा

उसके बूब्स चाटने मे मुझे बहुत मज़ा आरहा था लेकिन उसके तने हुए निपल्स जैसे मुझे मुँह चिढ़ा रहे थे मैने अपने एक हाथ की उंगलियो मे उसका एक निपल लेकर दबा दिया जिससे दीदी और मस्त होने लगी तभी मैने उसकी एक चुचि अपने मुँह मे भर ली और उसके निपल को अपने होंठो के बीच भर कर उस पर अपनी जीभ चलाने लगा जबकि उसके दूसरे निपल को मैं अपने हाथ से छेड़ रहा था

थोड़ी देर ऐसे ही करने के बाद दीदी ने अपने बूब्स मेरे मुँह से निकाल लिए और मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया मैं समझ गया की अब ये मेरी उंगली अपनी चूत मे डलवाना चाहती है तो मैं उसके साइड मे खड़ा हो गया अब मेरा एक हाथ उसकी चूत पर था तो दूसरा उसकी गान्ड पर मैने अपनी एक उंगली धीरे धीरे उसकी चूत मे पेलने शुरू कर दिया और दूसरे हाथ की उंगली उसकी गान्ड की दरार पर चलाते हुए उसका छेद ढूँढने लगा इधर दीदी अपनी चूत मे चलती मेरी उंगली से बार बार जगह पर ही उचक रही थी और तभी मैने अपने दूसरे हाथ की उंगली उसकी गान्ड मे घुसेड दी

"आअहहाआक्ककककक....." दीदी के मुँह से एक ज़ोर की सिसकी निकली लेकिन तब तक मेरी आधी उंगली उसकी गान्ड मे थी

दीदी ने पूरी ताक़त से अपनी गान्ड को भींच लिया और बोली "साले गंदे.....वो गंदी जगह है निकाल अपनी उंगली वहाँ से मुझे दर्द हो रहा है"

लेकिन मैने उसकी गान्ड से उंगली निकालने की कोई कोशिश नही की और उसकी चूत मे तेज़ी से उंगली चलाते हुए

बोला "कुछ नही होता दी, मैं अब और अंदर नही करूँगा और फिर थोड़ी ही देर मे देखना तुझे कितना मज़ा आता है"

मेरी बात सुनकर और अपनी चूत मे चलती उंगली के मज़े से दीदी अब चुप हो गई थी लेकिन उसने अपनी गान्ड ढीली नही की थी जिससे मेरी उंगली उसकी गान्ड मे वैसे ही फसी हुई थी लेकिन कुछ ही देर मे जब उसका दर्द कम हुआ तो उसकी पकड़ ढीली हो गई और मैं उसकी गान्ड मे अपनी आधी उंगली धीरे धीरे चलाने लगा

थोड़ी ही देर मे दीदी मस्त होने लगी और बोली "और ज़ोर से सोनू और ज़ोर से चला अपनी उंगली"

"कौन सी वाली, आगे वाली या पीछे वाली" मैं अपनी उंगली की स्पीड बढ़ाते हुए बोला

"आ.....आगे वाली.....ना..नही...दोनो ही तेज चला" वो आहे भरते हुए बोली

उसकी बात सुनकर मेरे होंठो पर मुस्कान आ गई और मैं समझ गया की आज तो मुझे इसकी गान्ड मिल ही सकती है क्योंकि इसे अब पीछे से भी मज़ा आरहा है और मेरी दोनो उंगलिया उसके छेदों मे तेज़ी से चलने लगी और कुछ ही देर मे दीदी भरभरा कर मेरे उपर ढेर हो गई उसका काम हो चुका था वो फर्श पर ही लेट कर गहरी गहरी साँसे लेते हुए झड़ने लगी थी............
 
अपडेट 42

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उसकी बात सुनकर मेरे होंठो पर मुस्कान आ गई और मैं समझ गया की आज तो मुझे इसकी गान्ड मिल ही सकती है क्योंकि इसे अब पीछे से भी मज़ा आरहा है और मेरी दोनो उंगलिया उसके छेदों मे तेज़ी से चलने लगी और कुछ ही देर मे दीदी भरभरा कर मेरे उपर ढेर हो गई उसका काम हो चुका था वो फर्श पर ही लेट कर गहरी गहरी साँसे लेते हुए झड़ने लगी थी............

अब आगे...

कोई 5 मिनिट तक वो ऐसे ही आँखे बंद किए हुए पड़ी रही

"दी, तेरा काम तो हो गया अब कुछ मेरा भी ख़याल कर ना" आख़िर मैं बोला

मेरी आवाज़ सुनकर उसने आँखे खोली और एक स्माइल देते हुए उठ कर खड़ी हो गई मैं भी उसके साथ ही खड़ा हो गया वो मेरे पास आई और मेरे खड़े लंड जो पकड़ लिया

"तो अब इसका इलाज भी करना ही पड़ेगा" वो मेरे लंड की चमडी आगे पीछे करते हुए बोली

"और नही तो क्या अकेले ही मज़े करने का इरादा था" मैं बोला और मैने खिच कर उसे अपने से चिपका लिया और उसके होंठो को चूस्ते हुए उसके बूब्स दबाने लगा और अब वो भी मेरे लंड को जोरो से मुठियाने लगी

तभी अचानक मुझे आइडिया आया और मैने उसके हाथ से लंड निकाल कर अपने हाथ मे पकड़ कर उसकी चूत की लाइन पर फिराने लगा

"आईईईई.....ष्ह.....प्लीज़ सोनू ऐसे मत कर अभी मैं वहाँ से करने को तैयार नही हूँ" दीदी सिसकारी भरते हुए बोली और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया

"अरे मैं अंदर थोड़े ही ना कर रहा हूँ मैं तो बस बाहर से ही मज़े लेना चाहता हूँ" मैं बोला

"नही नही बाहर से भी नही देखा नही उस दिन पिक्निक मे कैसे तेरा लंड मेरी गान्ड मे घुस गया था" वो बोली

"लेकिन यार तू अंदर जाने से डर क्यों रही है जब मज़े लेना चाहती है तो खुल कर ले ऐसे मे पूरा मज़ा थोड़े ही ना आता है" मैं बोला

"मैं डर नही रही हूँ बल्कि मैं सिर्फ़ ये चाहती हूँ की मेरी पहली चुदाई एकदम शानदार होनी चाहिए जब मैं पहली बार चुदु तो उस वक्त मुझे किसी भी प्रकार का डर ना रहे यानी सिर्फ़ मैं और मुझे चोदने वाला बस हम दो ही हो उस वक्त तीसरा कोई नही मैं पहली बार पूरी शांति के साथ सारी रात चुदना चाहती हूँ समझे, अब चल बेड पर मैं तेरे इस मूसल को ठंडा कर देती हूँ" वो बोली

"लेकिन दी ऐसा मौका कब आएगा जब हम दोनो ही घर पर अकेले हो, ये तो मुश्किल है" मैं बोला

"मैने कब कहा की मैं तुझसे ही चुदवा उंगी पहली बार" वो शरारती मुस्कान से बोली

"तो क्या सच मे कभी मेरे साथ चुदाई नही करोगी" मैं मुँह उतार कर बोला

"अरे...अरे...मेरा सोनू तो उदास हो गया, चल पहले ये मौका मैने तुझे ही दिया लेकिन उसके लिए अभी थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा क्योंकि मुझे पता है की बहुत जल्दी ही मम्मी पापा और डॉली दो दिन के लिए एक शादी मे जाने वाले है वो हमे भी कहेंगे वहाँ चलने के लिए लेकिन हम दोनो मना कर के यहीं रुक जाएँगे और उनके आने तक खुल कर चुदाई करेंगे, अब तो खुश है ना तू" दीदी मेरे गाल गुलेचती हुई बोली

और उसकी बात सुनकर मैने उसे चूम लिया और बोला " वैसे दी आज तूने वहाँ किसकी चुदाई देख ली थी जो तू इतनी गरम हो गई थी"

"पता नही यार वो उस घर के मेहमान थे और न्यूली मॅरीड थे इसलिए साले दिन मे ही शुरू हो गये थे और खिड़की भी बंद करना भूल गये थे जहाँ से मैने उनकी चुदाई देखी थी" दीदी ने बताया और मुझे बेड पर धकेल दिया

बेड पर गिरते ही मैं लेट गया और दीदी मेरी जाँघो पर दोनो तरफ पैर डाल कर बैठ गयी और मेरे लंड को पकड़ लिया

"मुझे नही लगता ऐसा करने से इसे कुछ फरक पड़ेगा इसे अब चूत और गान्ड की आदत हो गयी है अब हाथ से इसका कुछ नही होने वाला" मैं बोला
 
"देखते है, लेकिन अभी तूने टीना और निशा दो को ही तो चोदा है और वो भी एक ही बार फिर इसे कहाँ से आदत पड़ गयी" दीदी मेरी मूठ मारते हुए बोली

"दो नही दी मैं चार लड़कियो को चोद चुका हूँ यहाँ आने के बाद" मैं बोला, मैं अब उसे मोना और रूपा के बारे मे सब बता देना चाहता था

"क्या कहा चार....और दोनो लड़किया कौन है" वो हैरत से बोली उसका मूठ मरता हाथ रुक गया और आँखे बड़ी हो गयी थी

"एक तो तेरी हमारी प्यारी मोना और दूसरी उसकी मुंहबोली भाभी रूपा" मैने उसका एक बूब दबाते हुए बोला

"क्या.....मोना और रूपा...." वो और भी हैरत से बोली

लेकिन मेरे उसकी चुचि दबाने से उसकी आँख बंद हो गयी थी

"हाँ दी, रूपा और मोना दोनो को ही चोद चुका हूँ मैं" मैं बोला

"कब और कहाँ...." उसने पूछा और अपनी चुचि को मेरे लंड पे लगा कर उसकी मूठ मारने लगी

"तुम्हे याद है तुम्हारे लास्ट पेपर वाली रात जब तुम पढ़ाई कर रही थी तब मोना मेरे रूम मे आई थी" मैने पूछा

"हाँ..." दीदी अपना हाथ चलते हुए बोली लेकिन मुझे कोई मज़ा नही आरहा था

"उसी रात मैने उसकी सील थोड़ी थी और फिर तुम्हारे पेपर के बाद दूसरे दिन दोपहर मे मोना के घर गया था जहाँ मैने मोना के साथ रूपा को भी चोदा था और आज दोपहर मे भी मैं उन दोनो को चोद चुका हूँ जब मैं उन्हे पास वाले गाओं लेगया था" मैने बताया

"ओह्ह्ह्ह तभी तू इतना लेट हो गया था, और ये साली मोना तो बहुत बड़ी चुदक्कड निकली खुद भी चुद रही है और अपनी सहेली को भी तुझसे चुदवा लिया" दीदी बोली

"वो बहुत समझदार है जो उसने चुदाई के मज़े लेलीए तेरे जैसी नही है जो उपर उपर से ही घिसे जा रही है" मैने आग मे गीयी डाला

"खाक समझदार है, साली मुझे ज्ञान दे रही थी की मैं तुझसे चुदवा लू और खुद ही तुझसे मज़ा लेने लगी" दीदी अब जलन से बोल रही थी

"अब इसमे उस बेचारी की क्या ग़लती है उसने तो तुझे सही रास्ता बताया था लेकिन तू इतनी समझदार नही है जो उसकी बात समझ सकती" मैं आग को और भड़काते हुए बोला

"बहुत फीवर कर रहा है उसका" दीदी मेरे लंड को ज़ोर से मुठियाते हुए बोली जिससे मेरे लंड की चमडी बहुत नीचे तक चली जाती और मुझे दर्द होता

"आह.....क्यों नही करू उसका फीवर, एक बेचारी वो है जो मुझे अपनी चूत से चुदाई का मज़ा दे रही है और एक तू है जो बुरी तरह मेरे लंड को खींच खांच और तोड़ मरोड़ कर मुझे दर्द दे रही है, और हाँ अब बंद कर ये तमाशा इस तरह हिलने से मेरा लंड ठंडा नही होने वाला अब ये आदमख़ोर शेर जैसा हो गया है बगैर चूत या गान्ड के ये नही झड़ने वाला" मैं बोला और मैने उसे पीछे धकेल दिया और उठ कर बैठ गया

"क....क्यों मज़ा नही आरहा क्या" मेरे ऐसा करने से दीदी हकबकते हुए बोली

"और नही तो क्या, मैने कहा था ना मूठ मारने से मेरे लंड का कुछ नही होने वाला इसे तो बस चूत या गान्ड ही चाहिए झड़ने के लिए" मैं नाराज़गी से बोला

"लेकिन यार मैने तुझे अभी बताया ना की मैं जिस तरह से अपनी पहली चुदाई करवाना चाहती हूँ" दीदी परेशान होते हुए बोली

"तो मैं कौन सा तुम्हे चूत देने को कह रहा हूँ आज बस अपनी गान्ड का ही भोग लगा दो मेरे लंड को" मैं बोला

"क्या......" दीदी एक बार फिर आँख फाड़ कर बोली

"हाँ...चूत नही तो अपनी गान्ड ही दे दो और वैसे भी अभी थोड़ी देर पहले ही मेरी उंगली अपनी गान्ड मे ले चुकी हो तो ज़्यादा परेशानी भी नही होगी" मैं बोला

"नही, नही तूने देखा नही था की उस दिन तेरे गान्ड मारने से टीना कैसे लंगड़ा कर चल रही थी" दीदी झुरजुरी लेते हुए बोली

"और शायद तूने ही देखा था की निशा कैसे मटक मटक कर मुझसे गान्ड मरवा रही थी" मैं गुस्से से बोला

"यार लेकिन मुझे दर्द होगा और फिर जब सब घर आजाएँगे तो मुझसे पूछेंगे नही की क्या हुआ जो मैं लंगड़ा रही हूँ" दीदी असमंजस मे थी

"उसके लिए बहुत बहाने है, कह देना की सीढ़ियो से पैर फिसलने के कारण मोच आ गई है" मैने उसे बताया

"लेकिन.....नही नही यार, ये सब मुझसे नही होगा" दीदी ना मे गर्दन हिलाते हुए बोली

"मुझे पता था की ऐसा ही कुछ होगा, जाने दो ये सब तुम्हारे बस का नही है अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा" कहते हुए मैं उठ कर खड़ा हो गया

"क्या करेगा तू" दीदी मुझे कातर निगाहो से देखती हुई बोली
 
"करना क्या है अब, मोना को फोन लगा कर देखता हूँ अगर वो वापस आ गई होगी तो उसी के पास जाकर अपनी प्यास बुझा लूँगा क्योंकि तुमसे तो कुछ होने वाला है नही, और हाँ अब से भूल जाना की कभी हम दोनो ऐसा कुछ हुआ भी था क्योंकि आज के बाद मैं तुम्हारे पास नही आने वाला अपनी कलपड़ (खड़े लंड पर धोका) करवाने को" मैं एक बार फिर गुस्से से बोला और अपने कपड़े पहनने लगा जबकि उस वक्त दीदी के चेहरे पर बहुत गहरी चिंता झलक रही थी

अभी मैने सिर्फ़ चड्डी ही पहनी थी की दीदी मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली "चल मैं तैयार हूँ गान्ड मरवाने के लिए, अब तुझे कहीं और जाने की कोई ज़रूरत नही है"

"सोच लो बाद मे नखरे मत करना की दर्द हो रहा है बाहर निकालो, क्योंकि एक बार अगर मेरा लंड तेरी गान्ड मे गया तो झड़ने के बाद ही बाहर आएगा, समझी" मैं शेर बनते हुए बोला क्योकि मैं समझ गया था की अब वो इनकार करने की कंडीशन मे नही थी

"ठीक है मैं कोई नखरा नही करूँगी लेकिन तूने भी आराम से करना जानवर मत बन जाना" कहते हुए दीदी ने मेरी चड्डी वापस नीचे खींच दी

"उसकी चिंता तू मत कर मेरी जान, वहाँ टीना को ज़्यादा दर्द इसलिए हुआ था क्योंकि वहाँ सूखा सूखा लंड ही उसकी गान्ड मे घुस गया था लेकिन यहाँ तो ल्यूब्रिकेशन के सारे औज़ार है तुझे बस थोड़ा ही दर्द होगा फिर बाद मे तो मज़े ही मज़े है" मैं बोला और तब तक मेरे मुरझाए लंड मे फिर से जान आ चुकी थी

अब मैने ज़्यादा देर करना ठीक नही समझे और दीदी का हाथ पकड़ कर उसे बेड पर घोड़ी बना दिया और पास ही पड़ी पॉंड'स की क्रीम लेकर अपने लंड और दीदी की गान्ड मे जहाँ तक मेरी उंगली गयी थी वहाँ तक अच्छे से लगा दिया

" आर यू रेडी" मैं दीदी की गान्ड के छेद पर लंड सेट करके बोला

"हूंम्म....लेकिन प्लीज़ आराम से करना" दीदी डरते हुए बोली

और मैने धीरे धीरे अपने लंड का दबाव उसकी गान्ड पर बनाना शुरू किया और जैसे तैसे मेरे लंड का सुपाडा उसकी गान्ड के अंदर घुस गया

दीदी को इतने मे दर्द तो हुआ होगा लेकिन उसने दर्द को अपने अंदर ही जब्त कर लिया था शायद मेरे धीरे करने से उसे ज़्यादा दर्द नही हुआ था लेकिन अब आगे बगैर ज़ोर लगाए काम बनने वाला नही था क्योंकि इस वक्त मेरा लंड उसकी गान्ड के छल्ले मे फँसा पड़ा था इस लिए मैने थोड़ा ज़ोर से धक्का लगाया और मेरा 1/4 लंड उसकी गान्ड मे घुस गया और दीदी के मुँह से एक हल्की चीख निकल गई

"आ.....ऊओ....मा........धीरे कर कुत्ते.....दर्द होता है" दीदी के मुँह से निकला

"अरे यार सील पॅक गान्ड है कुछ तो दर्द होगा ही ना फिर भी मैं बहुत आराम से कर रहा हूँ वरना अभी टीना से पूछ ले की उस दिन वो कैसे चिल्ला चिल्ला कर रोती थी मेरा लंड उसकी गान्ड मे घुसने पर" मैं बोला

"ठीक है लेकिन अभी थोड़ा रुक ज़रा दर्द कम हो जाए फिर आगे बढ़ना" दीदी आहे भरते हुए बोली

और मैं उसकी बात सुन कर वैसे ही लंड फँसाए रुक गया और उधर दीदी गहरी गहरी सांस लेते हुए अपने दर्द को सहने की कोशिश करने लगी

अब तक कोई दो मिनिट बीट चुके थे मैने हिम्मत करके थोड़ा और दबाव बढ़ाया जिससे मेरा आधा लंड उसकी गान्ड के अंदर था लेकिन इस बार उसके मुँह से चीख नही निकली लेकिन दर्द तो उसे बराबर हुआ था आख़िर पहली बार उसकी गान्ड का छेद चौड़ा हो रहा था

अब मैने धीरे धीरे कर के पूरा लंड उसकी गान्ड मे पेल दिया था और धीरे धीरे आगे पीछे भी करने लगा था

थोड़ी ही देर बाद शायद उसका भी दर्द कम हो गया था और अब वो भी गान्ड पीछे की तरफ धकेलने लगी थी जिससे जैसे मुझे लाइसेन्स मिल गया था की अब मैं खुल कर कुछ कर सकता हूँ और मैने पूरा लंड बाहर खींच कर एक ही धकके मे पूरा अंदर कर दिया

दर्द के मारे उसके मुँह से चीख निकल गई

"साले हरामी, कुत्ते....आराम से नही कर सकता क्या मैं तेरी बहन हूँ कोई रंडी नही जो ऐसे ज़ोर ज़ोर से मेरी कुवारि गान्ड मे लंड घुसेड रहा है" वो चीखते हुए बोली

"बस मेरी जान जितना दर्द होना था हो गया अब मज़े ले" मैं बोला और अब आराम से सारा लंड उसकी गान्ड मे अंदर बाहर करने लगा

और थोड़ी देर बाद ही वो भी मज़े लेने लगी थी

और धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ने लगी और साथ ही साथ दीदी की आहे..और सिसकारिया भी बढ़ रही थी मेरे हर धक्के पर वो आ..भर कर वो अपनी गान्ड पीछे कर के मेरा साथ देने लगी

और कुछ ही धक्को के बाद मेरे लंड ने दम तोड़ दिया और भल भल करके अपना माल दीदी की गान्ड के गोदाम मे भरने लगा

और कोई 5 मिनिट बाद हम दोनो ही अपनी साँसे संभालने मे लगे हुए थे मैं झड़ने की वजह से और दीदी गान्ड मरवाने मे हुए दर्द की वजह से............
 
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