कोई आधा घंटे बाद मुझे कुछ लोगो के उपर आने की आहट सुनाई दी तो मैने खुले दरवाजे से बाहर देखा दीदी और मंजू दोनो ही दीदी के रूम की तरफ जा रही थी और उनके पीछे ही डॉली भी आई जो मुझे आँख मार कर उन लोगो के पीछे दीदी के रूम मे चली गई और मैं फिर से सोने की कोशिश करने लगा..............
अब आगे.. ...
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लगभग 4 बजे डॉली ने मुझे झींझोड़ कर नींद से उठाया
"ओये........ कुंभकरण चल उठ कब तक सोता रहेगा, जब से तू आया है सिर्फ़ खाना खाने तक ही जगा रहता है वरना हर वक्त बस सोना ही सोना" डॉली तेज आवाज़ मे बोल रही थी
"क्या है यार ऐसा कौन सा पहाड़ टूट पड़ा जो तू मुझे इस तरह उठा रही है" मैं अपनी आँखे मलते हुए बोला
"पहले उठ और तैयार होकर जल्दी से नीचे आजा फिर मालूम पड़ जाएगा" वो बोली
"लेकिन कुछ तो बता" मैं उठते हुए बोला
"हमे अभी शहर चलना है, बाकी बाते तुझे नीचे मालूम पड़ जाएगी चल अब जल्दी से नीचे आजा" डॉली बोली और रूम से बाहर निकल गई
पता नही क्यों इस टाइम शहर जाना है सोचते हुए मैं भी बेड से उतरा और बाथरूम मे घुस गया और कोई 15 मिनिट बाद मैं नीचे हॉल मे था जहाँ सभी लोग बैठे हुए थे और मेरे पहुचते ही काम वाली बाई चाय लेकर आ गई और सभी चाय पीने मे लग गये तभी मेरी नज़र मंजू पर पड़ी और उसका भोला और मासूम चेहरा देख कर मेरे दिल मे एक बार फिर से हुक सी उठी
जिस तरह से मंजू मुझे इग्नोर कर रही थी उससे तो मुझे उसकी तरफ देखना भी नही था लेकिन पता नही उसके चेहरे मे क्या कशिश थी जो सामने पड़ते ही मेरा ध्यान सिर्फ़ उस पर ही होता था और मेरी नज़रे उसके चेहरे पर लेकिन एक वो थी जो मेरी तरफ ध्यान ही नही दे रही थी
"बेटा सोनू तू ऐसा कर की अभी डॉली को लेकर शहर चला जा, कल तेरी दीदी जा रही है ना तो उसके लिए कुछ नाश्ता बनाना है इसलिए थोड़ा समान लाना है शहर से और तुझे पता नही है की हम समान कहाँ से लाते है इसलिए डॉली भी तेरे साथ जा रही है" मम्मी बोली और उनकी बात सुनकर मैं अपनी सोचो से बाहर आया
"लेकिन डॉली कहाँ है, दिखाई नही दे रही है" मैं अपनी चाय ख़तम करते हुए बोला
"मैं इधर हूँ भाई" मेरी बात ख़तम होते ही मुझे डॉली की आवाज़ सुनाई दी और मैने आवाज़ की दिशा मे देखा तो देखता ही रह गया
डॉली एक पिंक टॉप और डार्क ब्लू जीन्स पहने हुए खड़ी थी जिसमे वो बहुत हॉट लग रही थी 'क्या किस्मत है यार मेरी भी जो ऐसा हॉट माल मेरे घर मे है उपर से मैं इसे सेमी न्यूड भी देख चुका हूँ फिर भी मन नही भरता इसे देखने से' मैं सोच रहा था और मेरी नज़रे डॉली पर गढ़ी हुई थी
"ओये.. ...कहाँ खो गया चलना है या नही" डॉली मेरे चेहरे के आगे चुटकी बजाते हुए बोली उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी
"हूंम्म्म....हाँ... हाँ चल" मैं बोला और उठ कर खड़ा हो गया फिर मम्मी ने समान खरीदने के लिए डॉली को पैसे दिए और हम घर से बाहर आकर मेरी बाइक पर शहर के लिए निकल गये डॉली बाइक पर दोनो तरफ पैर डाल के बैठी हुई थी लेकिन उसने मेरी बॉडी से बहुत डिस्टेन्स मेनटेन किया हुआ था जोकि सड़क के गड्ढो की वजह से कुछ ही देर मे ख़तम हो गया और डॉली की चुचिया रह रह कर मेरी पीठ से टकराने लगी थी
"थोड़ा आराम से चलना यार" डॉली बार बार अपने बूब्स मेरी पीठ से टकराने से परेशान होकर बोली
"क्यों क्या हुआ" मैं उसे छेड़ते हुए बोला
"जैसे तू समझ नही रहा की क्या हो रहा है" वो तुनकी
"सच मे मैं कुछ नही समझा" मैं बोला
"अब तुझे किस भाषा मे समझाऊ तेरी वाली मे या मेरी वाली मे" डॉली बोली
"मेरी वाली मे ही समझा दे क्योंकि तेरी वाली तो मेरी समझ मे आने से रही" मैने जवाब दिया
"ओके. ....तो सुन बाइक के बार बार गड्ढे कूदने से मेरी चुचिया तेरी पीठ से टकरा रही है जिससे मुझे कुछ अनकंफर्टबल महसूस हो रहा है" वो बोली और मुझे मज़ा आ गया की डॉली अभी उस दिन हुई बातों को भूली नही है इसीलिए वो ऐसे वर्ड मे बात कर रही है और उसकी इस बात से मेरे मन मे उम्मीद जागी की दीदी और मोना के जाने के बाद भी मुझे बंजारनो से काम नही चलाना पड़ेगा
"तो इसमे परेशानी की क्या बात है इसमे तो तुझे मज़े ही आरहे होंगे" मैं अपनी पीठ पीछे कर के उसके बूब्स पर रगड़ते हुए बोला
"मज़े तो आरहे है लेकिन साथ ही कुछ और भी हो रहा है जिससे मुझे प्राब्लम हो रही है" वो बोली
"और क्या हो रहा है" मैने पूछा
"वो छोड़ वो तेरे काम की बात नही है तू बस गड्ढे कम कुदा" डॉली बोली
"कहीं मेरी पीठ से चुचिया टकराने के कारण तेरी चूत पानी तो नही छोड़ने लगी" मैं खुलते हुए बोला
"च्चिईीई.. ....गंदा कैसी बाते करता है" कहते हुए उसने मेरे कंधे पर एक मुक्का मारा
"अब इसमे क्या गंदा है उस दिन तो हम इससे भी ज़्यादा गंदी बाते कर चुके है, बताना क्या सच मे तेरी चूत पानी छोड़ने लगी है" मैं उसे समझाते हुए बोला
"हाँ......" वो दो पल सोचने के बाद बोली "और इसी गीलेपन से मुझे प्राब्लम हो रही है"
"हूंम्म....तो चल साइड मे किसी सेफ जगह चलते है
जहाँ मैं तेरी चूत से सारा पानी निकाल देता हूँ फिर तू उसे अच्छे से पोंछ लेना फिर कोई प्राब्लम नही रहेगी" मैं बोला
"चल - चल अभी तेरे इतने भी अच्छे दिन नही आए है जो तू मेरी चूत का पानी निकाल सके लेकिन यार पहले तू मुझे ये बता की दीदी के साथ तेरा क्या लफडा है तुम दोनो पिक्निक मे ही बहुत आगे बढ़ गये थे और मुझे तो लगता है की हमारे ना रहते मे तूने उसे निपटा भी दिया है शायद और देख झूठ नही बोलना" डॉली बोली और मुझसे चिपक कर बैठ गई और अपने हाथ मेरी कमर मे डाल लिए जिससे उसके बड़े बड़े बूब्स मेरी पीठ मे अच्छे से दब गये और इधर मेरा लंड अपने पूरे आकार मे आ गया था
अब मैं सोच चुका था की कभी ना कभी तो उसे सब पता चल जाएगा तो छुपाने से क्या फ़ायदा और अगर मैं ही सब बता दूँगा तो उसके उपर मेरा इंप्रेशन भी अच्छा बनेगा
"तू ठीक सोच रही है डॉली" मैं बोला
"क्या......इसका मतलब तू सच मे दीदी के साथ आई मीन
तू सच मे दीदी को चोद चुका है" डॉली हैरत से बोली अभी तक तो वो सिर्फ़ तुक्के ही लगा रही थी लेकिन सच्चाई जानते ही उसके तोते उड़ गये थे
"हाँ और सिर्फ़ दीदी को ही नही मोना को भी चोद चुका हूँ मैं और मोना ने तो अपने सामने रूपा को भी चुदवाया है मुझसे" मैं बोला
"क्या.......मोना और रूपा को भी.. ...कब कैसे मुझे शुरू से सब बता" डॉली बोली
और फिर मैने शुरू से सारी बाते उसे बता दी की किस तरह मैने दीदी मोना और रूपा को चोदा और कैसे उनकी गान्ड भी मारी तो सारी बाते सुनकर डॉली की आँखे चौड़ी हो गई थी और मुँह खुला का खुला रह गया था लेकिन उसके मुँह से आवाज़ नही निकल रही थी
"अब क्या हुआ ऐसे चुप क्यों हो गई" मैं बोला
"कुछ नही यार, सच मे बहुत बड़ा वाला है तू इतनी जल्दी इतनी सारी लड़कियो को आगे पीछे दोनो साइड से पेल दिया और किसी को भनक भी नही पड़ने दी यू अरे ग्रेट भाई लेकिन मैं सोच रही हूँ की अब तेरा क्या होगा अब दीदी और मोना तो डेढ़ साल के लिए जा रही है और तेरी सारी मौज तो उन दोनो की वजह से ही थी अब तू क्या करेगा अब किसका नंबर है तेरी नज़र मे" डॉली ठंडी आ भरते हुए बोली
"मेरी नज़र मे तो तेरा ही नंबर है अगर तू तैयार हो तो" मैं बोला
"चल चल बड़ा आया मेरा नंबर लगाने वाला उपर उपर से तो ठीक है लेकिन ये चुदाई उदाइ मैं नही करने वाली और हाँ मुझे तो लग रहा है की तू मंजू पर मर मिटा है कैसे दीवानो की तरह देख रहा था तू उसे स्टेशन पर और फिर घर पर भी खाना खाते वक्त" डॉली बोली लेकिन अभी हम कुछ और बात कर पाते शहर आचुका था और सामने ही पोलीस चेक चली थी तो हमारी बाते वहीं ख़तम हो गई और हम चेकिंग मे हमारा नंबर आने का वेट करने लगे.........
अभी हम कुछ और बात कर पाते शहर आचुका था और सामने ही पोलीस चेक चली थी तो हमारी बाते वहीं ख़तम हो गई और हम चेकिंग मे हमारा नंबर आने का वेट करने लगे......... .
अब आगे...........
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पोलीस चेकिंग से निकल कर हम मार्केट मे पहुच गये और मम्मी का बताया हुआ समान लेने लगे इन सब मे कोई एक घंटा लग गया फिर हम थोड़ा हल्का फूलका नाश्ता कर के घर के लिए वापस निकल पड़े अब हमारे पास बहुत ज़्यादा समान होने के कारण कुछ समान तो हमने बाइक पर पीछे साइड बाँध लिया था और कुछ को डॉली ने उसके और मेरे बीच रख लिया था यानी के अब मुझे डॉली के बूब्स फील करने का कोई मौका नही मिलने वाला था क्योंकि समान रखा होने से हम दोनो के बीच बहुत गॅप हो गया था और अगर मैं जानबूझ कर भी ऐसी कोई कोशिश करता तो भी कुछ नही होने वाला था तो मैने ऐसी कोई कोशिश भी नही की अब तक मेरे और डॉली के बीच मंजू को लेकर कोई बात नही हुई थी
आख़िर हम जब शहर से बाहर आ गये तब डॉली बोली "तूने मेरी बात का जवाब नही दिया"
"कौन सी बात का" मैं बोला और मेरी समझ मे नही आया की वो कौन सी बात का जवाब जानना चाहती है
"वो ही मंजू वाली की तू उसपर मर मिटा है" डॉली बोली
" ओह्ह्ह वो बात...........अरे नही पगली ऐसा कुछ नही है" मैं बोला
"अगर ऐसा नही है तो फिर कैसा है, स्टेशन पर भी तू मुँह फाडे उसे देख रहा था और घर पर भी अब मैं इससे क्या अंदाज़ा लगौ बता" वो बोली
"देख डॉली मुझे ये बात मानने मे कोई मुश्किल नही है की मंजू एक बहुत ही खूबसूरत लड़की है और पता नही मेरी ऐसी आदत क्यों है की मैं हर खूबसूरत लड़की को देखने लगता हूँ लेकिन खूबसूरती के साथ साथ मुझे उसके चेहरे पर दुख और उदासी भी सॉफ नज़र आ रही है इसीलिए मेरी नज़र उसपर बार बार जाती है की क्या कारण होगा उसकी इस उदासी और अकेलेपन के पीछे और इसीलिए मैने खाना खाने के बाद जब हम हॉल मे बैठे थे तब उससे बात करने की बहुत कोशिश की लेकिन उसने मुझे कोई भाव नही दिया और मेरी बात का इग्नोर ही करती रही, वैसे उसने तुझसे और दीदी से भी ज़्यादा बाते कहाँ की वो तो लगभग हर बात का जवाब हाँ हूँ मे ही दे रही थी वैसे क्या वजह है जो वो ऐसा बिहेव कर रही है" मैने पूछा
"अब तुझे क्या बताऊ यार की इस बेचारी पर क्या बीती है उसकी तो जैसे सारी दुनिया ही लूट चुकी है" डॉली बोली और मुझे उसकी आवाज़ मे दुख और मंजू के लिए सहानुभूति के भाव अलग ही समझ आए
"क्यों ऐसा क्या हुआ है उसके साथ" मैने पूछा
और मेरी बात सुनकर मुझे डॉली ने जो बताया वो इस तरह था की मंजू के पापा उसके दादा के इकलौते बेटे थे उनके कोई भाई बहन नही थे उनके शहर मे उनकी बहुत सी ज़मीने थी जो की बहुत मौके की जगह पर थी जिसे उस शहर का एक नेता जोकि दबा छुपा गुंडा भी था हथियाना चाहता था लेकिन मंजू के पापा भी कुछ कम नही थे इसलिए उस नेता की चाल नही पा रही थी लेकिन कोई 4 महीने पहले मंजू के पापा मम्मी की एक रोड आक्सिडेंट मे डेत हो गई थी लेकिन कुछ लोगो के तो ये कहना था की वो आक्सिडेंट नही था बल्कि उस नेता ने जानबूझ कर ये सब करवाया था लेकिन मंजू के परिवार मे उसके कोई चाचा या बुआ नही थे जो इस बारे मे कुछ करते सिर्फ़ उसके एक मामा है जोकि उनके शहर से बहुत दूर रहते है और बेचारे बहुत ग़रीब भी है तो वो कुछ कर नही पाए अब मंजू और उसका एक बड़ा भाई दो ही लोग थे उनके घर मे लेकिन मंजू का भाई भी अभी सिर्फ़ 22 साल का ही था वो अभी पढ़ ही रहा था और उनके पापा मम्मी की डेत के 15 दिन बाद से ही इस नेता ने उन्हे फिर परेशान करना शुरू कर दिया की वो ज़मीन वो उसे बेच दे और कीमत भी बहुत कम बोल रहा था तो मंजू के भाई ने मना कर दिया तो वो नेता उन्हे धमकिया देने लगा की वो उन्हे भी मार देगा
इन सब धमकियो से परेशान होकर मंजू के भाई ने पोलीस मे रिपोर्ट कर दी और पोलीस की कार्यवाही से तिलमिला कर उस नेता का एक बेटा अपने कुछ गुन्डो को लेकर एक रात मंजू के घर आ गया वो सभी लोग शराब भी पिए हुए थे पहले तो उन लोगो ने मंजू के भाई को थोड़ा मारा पीटा और फिर उससे ज़मीन बेचने को कहा लेकिन जब मंजू का भाई नही माना तो उन्होने उसे बाँध दिया और उसके सामने ही मंजू से छेड़छाड़ करने लगे और कहने लगे की अगर वो नही माना तो मंजू का ** कर देंगे अब बेचारा मंजू का भाई क्या करता वो ज़मीन बेचने के लिए तैयार हो गया तो उस वक्त तो उन लोगो ने उन्हे छोड़ दिया और दो दिन बाद सारे कागज बना कर लाने का कह कर चल दिए लेकिन नेता के उस बेटे की गंदी नज़र मंजू पर पड़ चुकी थी और वो किसी भी कीमत पर मंजू को चोदने की ठान चुका था
और फिर दो दिन बाद नेता का बेटा फिर रात मे कागज लेकर अपने दोस्तो के साथ मंजू के घर आ धमका वो लोग आज भी शराब पिए हुए थे जब मंजू के भाई मे उन कागज़ो पर साइन कर दिए तो फिर उस नेता के बेटे ने अपना रंग दिखाना शुरू किया और मंजू के साथ ज़बरदस्ती करने लगा जिसका विरोध मंजू के भाई ने किया तो नेता के गुंडे उसके साथ मार पीट करने लगे और इधर नेता का बेटा मंजू को लगभग नंगी कर चुका था इस दौरान ना जाने कैसे मंजू का भाई उन गुन्डो से छूट कर नेता के बेटे के पास पहुच गया जोकि मंजू के कपड़े फाड़ने मे लगा हुआ था और उसे मारने लगा और इसी बीच नेता के बेटे ने गन निकाल ली और मंजू के भाई पर गोलिया चलाने लगा कोई 3-4 गोलिया मंजू के भाई के सीने पर लगी और वो वहीं गिर पड़ा गोलियो की आवाज़ सुनकर अब तक आस पड़ोस मे सभी लोग जाग चुके थे तो वो सभी गुंडे और नेता का बेटा वहाँ से भाग खड़े हुए और वो लोग साथ लाए कागज जिन पर मंजू का भाई सिग्नेचर कर चुका था की भी वहीं छोड़ चुके थे
जब तक मुँहल्ले वाले मंजू के घर पहुचते मंजू का भाई दम तोड़ चुका था और मंजू उसी अधनंगी हालत मे खड़ी रो रही थी ये सब देख कर मुँहल्ले के लोगो ने पोलीस को फोन करके दिया और पोलीस के आते ही हुंगमा मचाना शुरू कर दिया था अब तक पड़ोस की कुछ महिलाओ ने मंजू को कपड़े पहना दिए थे लेकिन मंजू तो जैसे बेसूध हो गई थी वो बहुत सदमे मे थी और कुछ बोल भी नही रही थी बस टकटकी लगाए शून्य मे देख रही थी इधर मुँहल्ले वालो के साथ सारे शहर वालो का गुस्सा ये सब जान कर उबल पड़ा था और मीडीया ने भी ये सारा मामला उछाल दिया था तो उस नेता और उसके बेटे सहित उसके सारे गुन्डो को पोलीस ने पकड़ लिया और उन्हे जैल मे डाल दिया और उनपर कोर्ट मे केस चलने लगा लेकिन इधर बेचारी मंजू को तो दुनिया ही उजड़ चुकी थी फिर कुछ दिनों बाद उस शहर के माने हुए लोगो ने मंजू से पूछ कर उसकी सारी प्रॉपर्टी अच्छी कीमत मे बिकवा कर पैसे मंजू के अकाउंट मे डाल दिए और मंजू को समझाया की इस शहर मे रहना अब उसके लिए ठीक नही था क्योंकि अभी भी इस नेता का एक बेटा जैल से बाहर था और वो अपने भाई बाप का बदला लेने के लिए मंजू के साथ कुछ भी ग़लत कर सकता था इसलिए मंजू ने वो शहर छोड़ दिया था और अब अपने रहने के लिए कोई नयी जगह तलाश रही थी और उसे हमारे गाओं के पास वाला शहर पसंद आया था इसीलिए वो शादी के बाद मम्मी पापा के साथ हमारे गाओं आई थी और अब पापा उसे उस शहर मे सेट्ल करवाने वाले थे लेकिन अभी कुछ टाइम मंजू हमारे घर ही रहने वाली थी
डॉली के मुँह से मंजू को दर्द भरी कहानी सुनकर मेरा भी दिल भर आया और मेरी आँखो के भी आँसू निकल पड़े और मेरे मन मे भी मंजू के लिए सहानुभूति जाग गई थी और मैं उसका अपने को इग्नोर करना भी भूल गया था अब तो दिल मे केवल एक ही अरमान था की किसी भी तरह बस मंजू के चेहरे पर मुस्कान लाना था और उसके सारे गम भुला देने थे
खैर इन सब बातों के दौरान हम घर पहुच गये और मैं सारा समान मम्मी को थमा कर उपर अपने रूम मे पहुच गये अब जब कल सुबह दीदी इतने दिनों के लिए बाहर जाने वाली थी तो एक बार तो चुदाई बनती ही थी लेकिन मंजू को दर्दनाक कहानी सुनने के बाद मेरे मन मे ऐसा कुछ नही आया और मैं खाना खाने के बाद अपने रूम मे आकर सो गया और उधर मम्मी सभी लड़कियो के साथ देर रात तक दीदी के लिए तैयारी करती रही और फिर सुबह हम सभी दीदी और मोना को स्टेशन पर ट्रेन मे बैठा कर वापस आ गये
अब मेरे सामने सिर्फ़ एक ही काम था की किसी भी तरह मंजू को उस दर्दनाक हादसे की यादो से बाहर निकाल कर नॉर्मल करना और उसके हसीन चेहरे से गम और उदासी के बादल हटा कर मुस्कान खिलाना था
और इस काम मे साथ देने के लिए मेरे साथ डॉली तो थी ही अरे हाँ अभी डॉली को भी तो लाइन मे लाना था जो उपर से करने को तो राज़ी थी लेकिन चुदाई से दूर भाग रही थी.....................
अब मेरे सामने सिर्फ़ एक ही काम था की किसी भी तरह मंजू को उस दर्दनाक हादसे की यादो से बाहर निकाल कर नॉर्मल करना और उसके हसीन चेहरे से गम और उदासी के बादल हटा कर मुस्कान खिलाना था
और इस काम मे साथ देने के लिए मेरे साथ डॉली तो थी ही अरे हाँ अभी डॉली को भी तो लाइन मे लाना था जो उपर से करने को तो राज़ी थी लेकिन चुदाई से दूर भाग रही थी.....................
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अब आगे...
दीदी और मोना को छोड़ कर हम सुबह 8 बजे वापस आ गये थे मैं अपने रूम मे गया और थोड़ी देर सोने की कोशिश की क्योंकि सुबह जल्दी उठना पड़ा था लेकिन नींद नही आई तो मैं नहा धोकर नीचे आ गया अभी सुबह के 10 बज चुके थे पापा कहीं दिखाई नही दे रहे थे जबकि मम्मी और डॉली की आवाज़ किचन से आ रही थी लेकिन मंजू मुझे कहीं दिखाई नही दे रही थी
मैं पक्का कर चुका था की अब चाहे वो मुझे कितना भी इग्नोर करे मैं उसका पिच्छा नही छोड़ने वाला था कुछ भी करके मैं उसे वापस नॉर्मल लाइफ मे लाना चाहता था मैने सोचा की शायद मंजू भी किचन मे हो क्योंकि वो ज़्यादा बोलती नही है शायद इसी लिए मुझे उसकी आवाज़ नही आ रही है इसलिए मैं किचन मे आ गया लेकिन वो वहाँ भी नही थी और वहाँ डॉली के सामने उसके बारे मे पूछने की मेरी हिम्मत नही हुई तो मैं चुपचाप ही वापस आ गया और हॉल मे बैठ कर टीवी देखने लगा
अभी हॉल मे बैठे मुझे कुछ ही देर हुई थी की मम्मी वहाँ आई और बोली "बेटा ज़रा मंजू को तो बुला ला बेचारी अकेली बोर हो रही होगी"
"बुला लाउ लेकिन कहाँ से" मैने पूछा
"अरे वो उपर निशा वाले रूम मे है, अब निशा तो है नही इसलिए मैने उसे वो रूम देदिया है अब जब तक वो यहाँ रहेगी वो रूम उसका ही होगा" मम्मी ने बताया
'इसकी मा की, साला कांख मे बच्चा और गाओं मे ढिंढोरा' मैने सोचा और उपर जाने लगा अगर मुझे मालूम होता की दीदी का रूम उसे देदिया गया है तो क्यों मैं इतना परेशान होता
मैं दीदी के रूम मे बाहर पहुचा और गेट को थोड़ा सा ढकाया तो वो खुलने लगा तो मैने वापस खींच लिया और उसे नॉक किया पल भर मे ही मंजू की सुरीली आवाज़ आई "कौन"
"मैं हूँ सोनू" मैं बोला
"क्या बात है" वो फिर सूखे लहजे मे बोली लेकिन उसकी आवाज़ की मिठास कम नही हुई थी
"अरे अब क्या दरवाजे पर ही सब कुछ पूछ लोगी या फिर इसे खॉलोगी भी" मैं बोला
"ओके....तुम दरवाजा खुद ही खोल लो मैने लॉक नही किया है" कुछ देर सोचने के बाद वो बोली
अब मैने भी दरवाजे को धक्का देकर खोल लिया लेकिन अंदर नही गया लेकिन सामने का सीन देख कर मेरे तोते उड़ गये अंदर मंजू एक पिंक सारी मे बैठी हुई बला की खूबसूरत लग रही थी और उसके चेहरे की मासूमियत उसके इस रूप मे चार चाँद लगाए दे रही थी
उसके इस रूप को देख कर मैं जैसे अपनी सुध बुध खो बैठा और उसके इस रूप माधुर्य को निहारने लगा लेकिन तभी उसने पहलू बदला और फिर मुझे जो दिखा उसने मेरे होश उड़ा दिए क्या दिलकश नज़ारा मेरी आँखो के सामने था मंजू का पल्लू थोड़ा नीचे हटते ही उसके ब्लाउस मे कसे उसके बूब्स को एक झलक मुझे दिखाई दे गई जिससे मैने ये अंदाज लगाया की उसके बूब्स भले ही मोना, दीदी या डॉली जीतने बड़े नही थे लेकिन इतने बड़े तो ज़रूर थे की कम से कम एक हाथ मे ना समा पाए और मैं उल्लुओ की तरह उसे देखने लगा
"क्या हुआ क्या बात है" वो एक बार फिर अपना पल्लू ठीक करते हुए बोली
"वो.....वो.....मम्मी तुम्हे बुला रही है" मेरे मुँह से इतना ही निकला जबकि अभी मैं बड़ी बड़ी बाते सोच कर आया था की उससे ऐसे बात करूँगा या ऐसे बात करूँगा लेकिन मेरी सारी सोचे सारी अकड़ उसकी इस एक बात ने ही मिटा दी थी
"ओके तुम चलो मैं आती हूँ" वो ऐसे बोली जैसे कोई कोर्ट अपना फ़ैसाला सुना रहा हो कोई और कंडीशन होती तो मैं अब तक उसकी मा बहन एक कर चुका होता लेकिन पता नही अभी मेरे मुँह से एक आवाज़ तक नही निकली और मैं पालतू कुत्ते की तरह दुम हिलाते हुए दरवाजे से ही वापस लौट गया
मेरे खुद की समझ मे नही आरहा था की ये सब क्या होरहा है लेकिन जो भी हो रहा था उसमे मुझे मज़ा बहुत आरहा था.......
"ओके तुम चलो मैं आती हूँ" वो ऐसे बोली जैसे कोई कोर्ट अपना फ़ैसाला सुना रहा हो कोई और कंडीशन होती तो मैं अब तक उसकी मा बहन एक कर चुका होता लेकिन पता नही अभी मेरे मुँह से एक आवाज़ तक नही निकली और मैं पालतू कुत्ते की तरह दुम हिलाते हुए दरवाजे से ही वापस लौट गया
मेरे खुद की समझ मे नही आरहा था की ये सब क्या होरहा है लेकिन जो भी हो रहा था उसमे मुझे मज़ा बहुत आरहा था....... .
अब आगे.....
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फिर मैं नीचे आ गया और थोड़ी देर बाद मंजू भी आ गई थी मैं जानबूझ कर उसके आस पास ही रहने की कोशिश कर रहा था लेकिन वो शायद से सब पसंद नही कर रही थी फिर भी मजबूरी मे सहन किए जा रही थी
खाना खाते वक्त भी मैने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन उसने कोई भाव नही दिया और मेरी किसी भी बात का जवाब नही दिया शायद डॉली भी सब समझ रही थी और मंजू का ऐसा करना उसे भी अच्छा नही लग रहा था लेकिन इसमे वो भी क्या कर सकती थी
खाना ख़तम होने के कुछ देर बाद डॉली गाओं मे अपनी किसी सहेली के घर कुछ काम से चली गई और फिर उसके जाने के बाद मम्मी और मंजू भी मोना के घर चली गई और घर मे मैं अकेला ही रह गया मेरी इच्छा हुई की उपर अपने रूम मे चला जाता हूँ लेकिन फिर सोचा की अगर डॉली वापस आई तो फिर दरवाजा खोलने नीचे आना पड़ेगा इसलिए हॉल मे ही टीवी देखने लगा
कोई आधा घंटे बाद डॉली वापस आ गई तो मैं उपर अपने रूम मे चला गया और मोबाइल उठा कर मेसेज चेक करने लगा हर बार की तरह इस बार भी व्हातसपप पर बहुत से पॉर्न मेसेज थे जिसमे वीडियो भी थे मैं उन्हे ही देखने लगा और इधर मेरा लंड महाराज खड़ा होने लगा
'क्या कंडीशन हो गई है मेरी पहले मोना और दीदी थी तो कभी भी चुदाई हो जाती थी और आज मूड है तो हाथ से काम चलाना पड़ेगा' सोचते हुए मैने अपना लोवर नीचे किया और लंड बाहर निकाल लिया और पॉर्न वीडियो देखते हुए लंड हिलाने लगा
मुझे ऐसा करते हुए दो मिनिट भी नही हुए थे की मेरे रूम का गैट खुला और डॉली अंदर आई और मुझे ऐसा करते हुए देख कर उसने अपने मुँह पर हाथ रख लिया
"वाउ.......क्या नज़ारा है, कल तक जो तीन चार लड़कियो को चोद रहा था आज वो हाथ ठेला ढका रहा है" डॉली हँसते हुए बोली
उसे देख कर अब मैने भी लंड वापस अंदर कर लिया था और मोबाइल भी साइड मे रख लिया था
"अगर तुझे मेरी इतनी ही फिकर है तो तू ही मेरे साथ क्यों नही कर लेती फिर मुझे हाथ ठेला नही चलाना पड़ेगा" मैं बोला
"ना बाबा ना, अभी तो मैं छोटी सी बच्ची हूँ और तेरा ये काला नाग बहुत बड़ा है मैं इसे नही झेल पाउन्गी इसलिए मुझे तो तू माफ़ ही कर, वैसे क्या देख रहा था तू मोबाइल मे जो तुझे मूठ मारनी पड़ी मुझे भी दिखा" डॉली मेरे पास आते हुए बोली अभी इसने एक जीन्स टॉप और मॅचिंग जॅकेट पहना हुआ था जिसमे वो गजब की हसीन लग रही थी
मैने भी अब सोच लिया था की आज डॉली से लंड चुदवाना ही है तो मैने वापस वो वीडियो मोबाइल मे चालू कर दिया और डॉली भी मेरे साइड मे लेट कर देखने लगी पहले तो उस वीडियो मे ओरल सेक्स हुआ लेकिन जैसे ही चुदाई शुरू हुई डॉली की साँसे तेज चलने लगी और उसका हाथ अपने आप ही उसके जीन्स के उपर से उसकी चूत को सहलाने लगा और इधर मैने भी अपने लोवर के अंदर हाथ डाल कर अपना लंड मसलना शुरू कर दिया वैसे तो अगर मैं चाहता तो लंड बाहर निकाल कर भी मूठ मार सकता था लेकिन मैने जान बुझ कर डॉली को तड़पने के लिए लंड बाहर नही निकाला था मैं चाहता था की वो खुद मुझे लंड बाहर निकालने को कहे
उधर मूवी मे जैसे जैसे चुदाई की स्पीड बढ़ रही थी इधर डॉली का हाथ भी उसी स्पीड से उसकी चूत को रगडे जा रहा था तभी उसकी नज़र मेरे लंड को तरफ गई तो मुझे लोवर के अंदर ही मूठ मारते देख कर वो मुस्कुराते हुए बोली "क्यों परेशान हो रहा है भाई बाहर निकाल कर अच्छे से करले"
"कोई बात नही ऐसे ही ठीक है" मैं बोला
"लेकिन मुझे भी देखना है तेरा लंड" डॉली बोली और ये बात मैं जानता था की वो मेरे लंड को दीवानी हो चुकी थी
"अब तुझे तो पता है की देखने के लिए दिखाना भी पड़ेगा" मैं बोला
"ओके... तू अपना लंड बाहर निकाल मैं भी अपने बूब्स नंगे कर लेती हूँ" डॉली बोली
"जी नही आज सौदा बराबरी का होगा लंड के बदले चूत दिखानी पड़ेगी, बोलो मंजूर है" मैं उसे लाइन पर लाने के लिए बोला
"लेकिन... ...." उसने कहना चाहा
"कोई लेकिन वेकीन नही, और वैसे भी मैं तुझे बहुत बार उपर से नंगी देख चुका हूँ और हर बार तेरी पैंटी ही दीवार बनी रही मेरे और तेरी चूत के बीच लेकिन आज मैं ये दीवार भी हटा देना चाहता हूँ" मैं बोला
"ओके. ...लेकिन याद रखना कुछ उल्टा सीधा काम नही करना" आख़िर वो कुछ देर सोचने के बाद हार मानते हुए बोली
"क्या तुझे लगता है की मैं तेरी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ ग़लत कर सकता हूँ" मैं बोला
"वो बात नही है लेकिन फिर भी बताना मेरा काम था" कहते हुए वो बेड से उतर कर खड़ी हो गई और अपना जॅकेट उतारने लगी अब तक वो मूवी भी ख़तम हो गई थी
"सुन डॉली एकदम से पूरे कपड़े मत उतारना एक एक कर के धीरे धीरे उतारना जैसे स्ट्रीप गर्ल्स करती है समझी" मैं जल्दी से बोला
" ओह्ह्ह्ह्ह..मैं कोई पॉर्न स्टार हूँ क्या हो स्ट्रीप करू" वो मुझे छेड़ते हुए बोली
"प्लीज़.. .डॉली मेरे लिए कर दे ना मेरी प्यार बहन" मैं उसे मानते हुए बोला
"हे भगवान कैसा जमाना आ गया है एक भाई अपनी बहन की स्ट्रीप करने को कह रहा है, ओह सॉरी मैं तो भूल ही गई थी की ये भाई तो अपनी एक बहन की चोद भी चुका है ठीक है भाई मैं तेरे लिए स्ट्रीप भी कर देती हूँ" कहते हुए डॉली ने अपना जॅकेट उतार कर फेंक दिया और अपना टॉप खींच कर मुझे अपने बूब्स दिखाने लगी
फिर वो अपनी गान्ड मटकाते हुए धीरे धीरे अपना टॉप उपर उठाने लगी अब उसकी चिकनी और पतली कमर नंगी थी और उसकी गहरी नाभि मेरी आँखो के सामने थी और मेरा लंड झटके मारने लगा था जिसे मैने अब लोवर से बाहर निकाल लिया था जबकि उधर डॉली अपने टॉप को गले तक उपर कर चुकी थी और उसके बड़े बड़े बूब्स मुझे दिखाई देने लगे थे उसने टॉप के नीचे ब्रा नही पहनी थी
"ये क्या, तूने आज ब्रा नही पहनी" मैने पूछ ही लिया
"ब्रा को छोड़ मैने तो आज पैंटी भी नही पहनी" वो आँख मारते हुए बोली
"आक्च्युयली मेरा ये जीन्स इतना टाइट है की इसमे से पैंटी लाइन एकदम सॉफ नज़र आती है और मैं किसी को भी इतना अच्छा नज़ारा फ्री मे नही करवाना चाहती थी" डॉली बोली और उसने अपने जीन्स की बटन खोल कर उसे थोड़ा सा नीचे खिसका दिया
अब मुझे उसकी चूत के उपर के काले बालो की झलक दिखाई दे गई थी और ये नज़ारा देख कर मेरे हाथ अपने लंड पर जोरो से चलने लगे थे और अब मेरा लंड प्री कम की बूंदे छोड़ने लगा था तभी डॉली मेरी आँखो मे देखते हुए पलट कर खड़ी हो गई अब उसकी गान्ड मेरी आँखो के सामने थी लेकिन जीन्स के अंदर छिपी हुई फिर डॉली धीरे धीरे जीन्स नीचे करने लगी और उसकी गद्देदार गान्ड मेरी आँखो के सामने नंगी होने लगी और जैसे ही जीन्स उसकी गान्ड से पूरा नीचे हुआ वो झुक गई और मुझे अपनी गान्ड दिखाने लगी
जिस गान्ड पर पहले दिन से मेरी नज़र थी आज वो पूरी नंगी मेरे सामने थी अब मुझसे बर्दाश्त नही हुआ और मैं अपना लंड हिलाते हुए बेड से उतार कर डॉली की तरफ जाने लगा
"स्टॉप..स्टॉप.......मैने कहा था ना की कुछ भी उल्टा सीधा मत करना" डॉली सीधी होते हुए बोली
"सॉरी यार लेकिन मैं कुछ करने नही बल्कि देखने ही आरहा था अब तू तो जानती ही है की जिस दिन से मैने तुझे देखा था उस दिन से मैं तेरी गान्ड का दीवाना हूँ, प्लीज़ एक बार देख लेने दे ना" मैं गिडगिडाता हुआ बोला
"हाँ....हाँ.....फिर कब देख लेगा तो कहेगा प्लीज़ एक बार मार लेने दे ना, नो बिल्कुल नही वापस बेड पर जा वरना मैं शो यहीं बंद करती हूँ" वो वॉर्निंग देते हुए बोली
और मैं अपना सा मुँह लेकर वापस बेड पर बैठ गया और उधर मेरे बैठते ही डॉली ने अपना जीन्स उतार दिया और पूरी नंगी होकर शरमाते हुए खड़ी हो गई
उसका नंगा बदन सोने की तरह दमक रहा था और मेरी नज़र उसकी काले बालो से घिरी चूत पर टिकी हुई थी जिसे आज मैं चूसने और चाटने की सोच रहा था लेकिन उसके झान्टो ने मेरे सारे अरमान कुचल डाले थे
"क्या यार डॉली कम से कम अपने बाल तो सॉफ कर लेती आज मैं तेरी चूत चूसने की सोच रहा था" मैं बोला
"भाई अभी तेरे इतने अच्छे दिन नही आए है की तुझे मेरी चूत चाटने को मिले, चल अब पूरा नंगा होकर बेड पर लेट जा और मुझे अपने लॉली पोप को खाने दे इस वक्त तेरे लिए यही अच्छा है" डॉली मेरे पास आते हुए बोली
अब मैं करता भी क्या अगर कोई ज़बरदस्ती करता तो जितना अभी मिल रहा है उससे भी जाता तो मैने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बेड पर लेट गया तो डॉली ने मेरा लंड पकड़ लिया और अपने होंठो से चूम लिया
फिर वो मेरे लंड के पास मुँह कर के पेट के बल लेट गयी और मेरी कमर पकड़ कर मेरे लंड को उपर से नीचे तक चाटने लगी उसकी बड़ी बड़ी चुचिया मेरी जाँघो पर हावी हुई थी और मैं जैसे जन्नत मे था
थोड़ी देर तक डॉली मुझे ऐसे ही मज़े देते रही और फिर उसने जो किया वो मेरे लिए बिल्कुल नया था और मैने ऐसा कभी सोचा भी नही था डॉली ने थोड़ा उपर सरक कर मेरे लंड को अपने दोनो बूब्स के बीच मे दबा लिया था और मेरे लंड के सुपाडे को अपनी जीभ से चाटने लगी थी
उसके ऐसा करने से मुझे लग रहा था की मैं बहुत जल्दी झड़ जाउन्गा क्योंकि पहले ही उत्तेजना मे मैं लंड को बहुत हिला चुका था और अब डॉली के बूब्स और जीभ की गर्मी जैसे मेरे लंड का दम निकाले दे रही थी
"आ डॉली मैं बस झड़ने ही वाला हूँ" मैं बोला
"क्या.. .....इतनी जल्दी अभी तो मैने कुछ भी नही किया है, एक मिनिट रुक मैं सीधी लेटती हूँ और तू अपना लंड मेरे मुँह मे डाल" वो मेरे लंड को छोड़ते हुए सीधी लेट गयी और मैं उसके चेहरे के पास आकर घुटनो के बल खड़ा हो गया तो उसने मेरे लंड अपने मुँह मे ले लिया और मैं धीरे धीरे आगे पीछे होने लगा
इधर मैं डॉली का मुँह चोद रहा था और उधर वो अपनी चूत मे उंगली कर रही थी एक मिनिट बाद ही डॉली के मुँह को गर्मी ने जैसे मेरे लंड को पिघला दिया था मैं बस झड़ने ही वाला था तो मैने अपना लंड डॉली के मुँह से बाहर निकाला और मूठ मारते हुए ज़ोर ज़ोर की पिचकारिया छोड़ने लगा जो बेड पर यहाँ वहाँ गिरने लगी और उधर डॉली भी अपनी चूत मे उंगली ज़ोर ज़ोर से चलाने लगी और कुछ ही देर मे उसका भी बदन अकड़ गया और वो आँखे बंद करके झड़ने लगी और मैं भी बेड पर उसके साइड मे लेट कर हापने लगा था......................