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Incest मेरी आत्मा मेरे पिता के शरीर में घुसी

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StoryPublisher

Guest
सुबह का टाइम था और चिल्लाने कि आवाज़ से सिड की नींद खुलती है।

मादर चोद तुमको एक बार बोला है सुबह सुबह नाटक मत पेला करो लेकिन बिना मार खाए तो तेरा दिमाग नी चलता ना

साक्षी - मुझे माफ़ कर दीजिए मै अभी आपके लिया ठंडा पानी लाती हूं

* चटाक़ * * चटाक़ "

वीर - बोला था तेरे बाप को डिवोर्स के लिए लेकिन नही तुझे तो मेरे साथ ही मा चुदानी है ना

साक्षी - मुझसे ऐसा क्या हो गया जो इतनी नफरत करते हो मैंने तो कभी कुछ नहीं किया ना कुछ मागती हूं

वीर - जाबान ना लड़ा मुझसे समझी वरना यही ज़िंदा गाढ दूंगा रास्ता छोड़ मेरे काम पर जाना है

वीर के जाते ही सिड नीचे आता है और कहता है क्या हुआ मा आप रो रही हो मत रो ना सब ठीक हो जाएगा आप बात ही क्यों करती हो ऐसे गिरे हुए इंसान से

• चटाक़ *

थापड़ इतना जोरदार था कि पूरे हाल में आवाज गूंज गई

साक्षी - इसी दिन के लिए पैदा किया तुझे बाप है वो तेरा तेरे साथ तो हमशा अच्छा से रहता है ना तो याद रखना मेरे पति के बारे में मैं एक वर्ड भी बर्दास्त नहीं करूँगी अब जा और नहा कर आ।

सिड आंखों में आसूं लेकर नहाने निकल जाता है।

और जब वो नहा कर आता है तब उसकी नज़र साक्षी पर पड़ती है जो उसको दीवाल से टेक लगा कर देख रही थी

साक्षी - चल स्कूल जा अब और सॉरी में ज्यादा गुस्सा हो गई थी।

सिड - कोई बात नहीं कैसे मॉम आप बहुत सुंदर हो पापा तो बहुत लकी है आपको पा कर

साक्षी - मम्मी को ऐसा बोलता है बदमाश चल भाग

सिड - ही ही ही मम्मी बाय

सिड फिर स्कूल के लिए निकल गया रास्ते में उसको कुछ लोग की आवाज़ सुनाई पड़ी

अबे ये तो वहीं है वो साक्षी का बेटा साले की मा बहुत मस्त है

इसी तरह स्कूल आ गया और सिड चुप चाप अपनी डेस्क पर आ गया

जहा पर उसके बगल एक लड़का आता है और कहता है क्यों बे गांड़ू हट साइड

सिड - मे क्यों जाउ मै पहले आया ये मेरी जगह है तुम जाओ

लडका सिड को देखते हुए चला जाता है।

लड़का के दोस्त उसके पास आते है और उससे पुछते है क्या हुआ बे ऐसा क्या शकल बना रखी है

लड़का - अबे वो हड्डी साला सिड उसने सब के सामने मेरी बेज़्जती की

दूसरा लड़का हँसता है और कहता तू देख अब मैं क्या करता हुं ऐसा चीज मैं साले को फासूँगा की अब स्कूल ही नहीं आयेगा साला

तभी वो लड़का कहीं चला जाता है और दूसरा लड़का सिड के पास जा कर कहता है

सिड तुमको साइंस की मैम दिव्या बुला रही है।

सिड - कहाँ पर है मैम

लडका - लाईब्रेरी में

सिड वहाँ से निकाल जाता है और जब वो पास ही होता है तभी उसको कोई धक्का देता है और वो सीधा रूम में गिर जाता है और फिर कोई गेट बंद कर देता है।

सिड देखता है वहा पर दिव्या पुरी नगी लेटी हुई होती है जो रो रही थी

सिड बिना कुछ सोचे अपनी शर्ट उतार कर उस पर डाल देता है तभी दिव्या रोने लगती है

बचा लो मुझे प्लीज़ कोई

और जोर जोर से चिल्लाने लगती है और रोने लगती है

सिड - डर जाता है और कहता है मैम प्लीज़ ऐसा मत करो मेरा कोई नही है मैं बर्बाद हो जाऊंगा मैंने तो आपका कुछ नहीं बिगाड़ा है

लेकीन तब तक गेट टूट जाता है गार्ड आ कर सिड को बहुत मारते है

और फिर वीर को कॉल कर के बुलाया जाता है और मामला को शान्त करने की कोशिश की जाती है

वीर आता है तो देखता है सिड को बहुत बुरी तरह से मारा गया है
 
वीर साक्षी को सारी बात बताया और उसको भी आने को बोला वो भी वहीं आ जाती है और वीर ने वहीं सबके सामने साक्षी और सिड को मारना शुरू कर दिया और फिर दोनों को ले कर घर ले कर निकल पड़ता है।

वीर - कर दिया नाम रोशन क्यों तेरी जगह मैने काजल से शादी की होती तो आज ये मनहूस को ना देखना पड़ता साला हड्डी

साक्षी सिड को नफ़रत भरी नज़रों से देखती है और कहती है काश तुझे पैदा होते ही मार देती

सिड - हा मार देती बचपन से ले कर आज तक यही सून रहा हूं पतला तो क्या करू क्या किसी ने मुझसे पूछा कि मैंने क्या किया

वीर - चुप हो जा क्या पूछ दुनिया पूछ रही है सिड और किस किस को जवाब देगा अपनी बेगुनाही का

सिड - मॉम आपको भी यही लगता है

साक्षी कुछ और कह पाती तभी कार का बॅलेन्स बिगड़ जाता है और कार सीधा पहाड़ी से लड़ जाती है और वीर बहुत ज़्यादा जख्मी हो जाता है और सिड भी किसी तरह लगड़ते हुआ बाहर आता है वो देखता है कि उसकी मा और बाप बेहोशी की हालत में पड़े है

सिड - आई आम सॉरी मों डॅड मैं अच्छा बेटा नहीं बन पाया मैं कायर हूं नही रह सकता इस शरीर में आप दोनों खुश रहो ऐसा कह कर सिड पहाड़ी से कूद जाता है।

…………………………………………
 
इधर टाईम पर अस्पताल ले जाया जाता है लेकिन वहाँ पर वीर का ब्लड बहुत ज़्यादा जाने की वजह से वीर मर जाता है।

वहीं साक्षी पीछे होने की वजह से ठीक थी जो बस बेहोश हुई थी वो अब पूरी तरह से ठीक थी।

ईधर सिड मर तो गया था लेकिन तभी एक साया उसके पास आता है और उससे कहता है बच्चे ये तूने क्या किया तेरी उमर तो पुरी नहीं हुई

सिड - में नहीं जी सकता ऐसा शरीर मैं नहीं देख सकता और नहीं है मुझमे और हिम्मत

साया - तुझे नया शरीर देता हूं और सब ठीक करने का एक मौका आज से तेरी सिड वाली लाईफ ख़तम अब तुझे नया शरीर देता हूं अब तेरे ऊपर है तेरी किस्मत जा मै भी देखता हूं कैसी जिंदगी दे पाता है साक्षी को तू

तभी सिड जोर जोर से सांस लेना लगता है और फिर वो बेहोश हो जाता है और जब उसकी आंखे खुलती है तो वो अपना आप को बेड पर पाता है

सिड - मैं कहा हूं

तभी उसकी नज़र साक्षी पर पड़ती है

जो डर से काप रही थी और कहती है आप अपने घर पर है ऐक्सिडेंट के बाद अब होश में आए हैं आप प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिए ये मेरी वजह से हुआ है सब आपकी हालात मुझे मत मारिएगा

सिड - मॉम

साक्षी - क्या

सिड - कुछ नहीं ज़रा चाय मिलेगी

साक्षी - अजीब सी नज़रों से सिड को देखती है और फिर चली जाती है।

फिर सिड वॉशरूम की तरफ जाता है और जब वो शीशे में अपना चेहरा देखता है तो देखता रह जाता है

सिड का चहरा बहुत ज्यादा चमक रहा था बेशक उसका ये चेहरा वीर का था लेकिन सिड की आत्मा की वज़ह से उसका चेहरा बहुत अच्छा लग रहा था उसको उम्मीद नहीं थी कि वो इतना सुंदर हो जाएगा

सिड - अब से मै वीर ही हूं मतलब अब से मै वीर बन कर रहुंगा लेकिन कैसे मुझे कुछ पता नहीं है अब मैं मॉम को बस खुश रखूँगा ।

वीर फिर बाहर आता है और रसोई में काम कर रही साक्षी को देखने लग जाता है

तभी साक्षी की नज़र उस पर पड़ जाती है और वो फिर से डर जाती है

साक्षी - आ आ आपको कुछ चाहिए था क्या

वीर - ना नहीं तो मुझे कुछ नहीं चाहिए

साक्षी - बस 2 मिनट रुक जाइए मैं चाय लाती हुं

वीर आज पहली बार साक्षी के उभार को देख रहा था उसके ऊपर और नीचे हो रहा चूचे जो डर रही थी वीर से

फिर वीर तेजी से सास लेते हुए चला जाता है।

और थोड़ी देर बाद साक्षी चाय ले कर आती है और वीर की तरफ कर के कहती है ये लीजिए

वीर चाय पकड़ लेता है

वीर - थैंक्यू

साक्षी - अजीब नज़रों से वीर को देखती है और जाने लगती है

वीर थोड़ी देर बाद फिर से उठ जाता है और साक्षी के पास जाने लगता है जो दूसरे रूम में थी

इधर साक्षी वीर को देख कर जल्दी से खड़ी हो जाती है और कापती हुई कहती है माफ़ कर दीजीए चाय अच्छी नहीं बनी क्या मैं दुबारा बना दूंगी प्लीज

साक्षी इसलिए इतना वीर से डरती है क्युकी वीर पहले उसको हर छोटी छोटी बात पर मारता था।

वीर जल्दी से डर कर पीछे हो जाता है और कहता है नहीं वो बात नहीं है मैं बस आपके साथ चाय पीना चाहता था।

साक्षी वीर को देखती है आज उसने पहली बार वीर के मुंह से कुछ ऐसा सुना

तो वो डरते हुए वीर के बाजू में बैठ गई वीर बहुत डर रहा था

लेकिन उसने धीरे से चाय पीना शुरू किया।

वहीं साक्षी डर जाती है और उससे चाय गिर जाती है और वीर उसको अपनी चाय पीने के लिए देता है

साक्षी एक घुट पी कर चली जाती है खाना बनाने।

इधर वीर सोचने लगता है मॉम मेरे पास क्यों नहीं रुकती और वो उदास हो जाता है।

तभी उसको वो सब याद आता है कि वीर कितनी बुरी तरह से मारता था साक्षी को ऊपर से रात को उसने हमेशा साक्षी की चीखें ही सुनी थी कभी सिगरेट से जलाना तो कभी कुछ वीर ये सब करता था जिसकी वजह से आज साक्षी वीर के साथ तो है लेकिन बस फ़र्ज़ अदा कर रही थी उससे डरती है प्यार तो कब का मर गया था उसका।

तभी सिड अपने आप से कहता है ये नया वीर है मॉम मैं आपको हसना सीखा दूंगा

लेकिन पता नहीं जब भी मॉम को देखता हूं तो हार्ट बीट क्यों इतनी बढ़ जाती है।

फिर वीर खडा हो जाता है रसाई के पास और चुपके से साक्षी को काम करता हुआ देखता रहता है।

इधर साक्षी पता नहीं क्या हो गया है पीछे पीछे आए जा रहा है मेरे पहले ही मैं अपने बेटे को खो चुकी हूँ ।

साक्षी की नज़र फिर से सामने लगे शीशे पर जाती है तो वो देखती है कि वीर उसको चुपके से देख रहा है

साक्षी - ये अब मुझे क्यों घुर रहे है तभी साक्षी देखती है कि वीर की नज़र उसकी उभरी हुई गान्ड पर थी जिससे वो शॉक हो जाती है और चुप चाप अपना काम करने लगती है
 
1 घंटे में सारा खाना रेडी हो जाता है और तब वो सोचती है वीर को बुला कर खाना को दे देती हूं

लेकिन जैसी ही वो पलट के देखती है वीर खडा उसको देख रहा था

साक्षी - हाए दैया रे ये 1 घंटे से मुझे घुर रहा है

साक्षी खाना लगाने के लिए टेबल की तरफ जाती है तो वीर उसके पीछे जाता है

साक्षी - कुछ चाहिए क्या

वीर - न न न नहीं तो

वीर को इतना घबराता देख वो डर जाती है कि कहीं वीर उसको पिटे ना

साक्षी - वो खाना खा लीजिए

वीर - आप नहीं खाओगे

साक्षी इतना सुनते ही डर कर कापने लगती है और फिर वो सोच में डूब जाती है

Past -----

वीर - खाना नही खाओगी तुम

साक्षी - खाऊंगी

वीर - खाऊंगी तो बैठ ना

साक्षी जैसे ही बैठती है वीर उसको एक जोर दार लात देता है और वो गिर पड़ती है

वीर - सून औकात में रहा कर नीचे बैठने की औकात है तेरी अगली बार से बोलना ना पड़े और जा कोने बैठ जा

Present -----

साक्षी - नही खाना है अभी आप खा लो

वीर - मेरा भी मन नहीं है अभी बाद में खा लूंगा

साक्षी - आपको तो ऑफिस जाना है ना

वीर - बेमन से खाने लगता है तभी वो कहता है आज नहीं जाना रेस्ट करना है मुझे

साक्षी फिर एक कोने जा कर अपनी प्लेट ले कर खाने लगती है और फिर वीर उठ जाता है साक्षी को देखता है तो वो कोने मैं बैठी होती है और खा रही होती है नम आंखों से

वीर भी अपनी प्लेट ले कर कर उसके पास बैठ जाता है और जब देखता है तो साक्षी रों रही थी

वीर - प्लीज मत रोइए आप मैं पक्का ऑफिस जाऊंगा आप मत रो

साक्षी को तो जैसे अपने कानो पर भरोसा ही नहीं हुआ वो चुप चाप खाना खाने लगती है

वीर भी चुप चाप खा लेता है और चुपके चुपके से साक्षी को देखता है और स्माइल कर के खाने लगता है

साक्षी कुछ भी कर के वीर से दूर होना चाहती थी उसको डर था कि कहीं वीर फिर से ना मारे पुरानी और गंदी याद आसानी से पीछे नहीं छोड़ती
 
इधर वीर का खाना ख़त्म हुआ तो वो रसाई मैं अपनी प्लेट ले जाने लगता है।

साक्षी को ये देख कर हिचकी आ जाती है और वीर उसके लिए पानी ले कर आता है और कहता है आराम से खाओ

साक्षी जल्दी से ख़तम कर के रसोई मैं आती है और देखती है वीर फिर उसके भरे हुए शरीर को देख रहा था

साक्षी - हम्म ठरकी कही का

वीर - फिर साक्षी के बगल में आता है और कहता है वैसे अगर मैं ऑफिस ना जाउ तो कुछ प्रॉबलम तो नहीं होगी

साक्षी कुछ नहीं कहती

वीर फिर उदास हो कर चला जाता है वो चाहता था साक्षी उससे बात करे

वीर फिर ऑफिस की ओर निकल जाता है उसको ये पता था कि उसके बाप का टूर एंड ट्रेवल का काम था वो मालिक थे।

वीर आफिस जाता है एक लड़की वहा पर मौजुद रहती है

लड़की वीर को देख कर बोली सर वेल्कम

लड़की - सर 2 स्कॉर्पियो ट्रिप पर जाने वाली है तो उसको आप फोन कर दीजिए।

वीर ने ऐसा ही किया और तभी वीर की अकाउंटेंट स्वाति आ जाती है।

स्वाति - इस मंथ का प्रॉफिट उतना नी है लेकिन हा बहुत है तो ठीक है ना

वीर - हा हा ठीक है

तभी वीर की नज़र बाहर एक कपल मैं पड़ती है तो लड़की लड़के को अपने हाथों से खाना खिला रही थी।

वीर तभी लड़की से कहता है ये लड़की उसको खाना क्यों खिला रही है

लड़की - अरे वो पति है ना उसका

वीर - और पत्नी गुस्सा हो तो

लडकी - तब आपको गिफ्ट देना चाहिए मैम को वो मान जाएगी

दिन भर वीर ऑफिस मैं रहा और शाम को एक शॉप पर जाता है और जीन्स और टॉप ले लेता है और घर पर चल पड़ता है तभी उसकी नज़र एक कपल पर पड़ती है को खाना खा था रहा थे और खाना खाते टाइम लड़का अपना पैर लड़की के पैर पर रख कर छेड़ता है

वीर - अच्छा तो वाइफ के साथ ऐसा करते है अब मैं समझ गया मैं भी ऐसा करूंगा

फिर वीर घर आता है और फिर उसको याद आता है कि उसने कपड़े तो लिए है लेकिन वो साइज सही है या नही उसको नही पता

एक काम करता हूं वो साक्षी अभी बाथरूम में है में चेक कर लेता हूं ये सोच कर उसके गाल लाल हो जाते है

और फिर कहता है में कितना गन्दा इंसान हूं
 
वो अलमारी में जल्दी से ढूंढता है तभी उसके हाथ में साक्षी की ब्रा आ जाती है और वो हाथ मैं आते ही वीर डर जाता है और तभी साक्षी आ जाती है जो टॉवेल और ब्रा में थी

वीर - माफ़ कर दो आप मै बस बस बस आप गुस्सा मत होना माफ कर दो

लेकिन फिर वो चुपके से साक्षी को देखता है जो ब्रा मैं थी और आज पहली बार इसको ऐसा देख कर उसकी सास थम जाती है और उसके गोरे से बदन को देख रहा था साक्षी ने उसके फेस को देखा तो वो डर गया और मूड गया

फिर साक्षी ने साड़ी पहन ली और चली गई

साक्षी - बेशर्म पता नहीं क्या हो गया है सुबह से बदतमीजी करते है

साक्षी के जाने के बाद वीर देखता है तो उसका लौड़ा खड़ा हो कर सालामी दे रहा था वीर शरमा जाता है और चुप चाप बाथरूम में जाता है और सूसू कर के आ जाता है

फिर साक्षी खाना ले कर टेबल पर लगा देती है और वीर भी आता है

साक्षी - बैठिए खाना लगा दिया है

वीर - आप भी बैठो और खाना खाओ साथ मैं ।

साक्षी डर जाती है और खाने लगती है और साक्षी जब खा रही होती है तभी वीर अपना पैर साक्षी के पैर पर प्यार से पैर रख़ देता है

साक्षी को खासी आ जाती है और वीर डर कर खड़ा हो जाता है

साक्षी - क्या कर रहे है आप

वीर - वो मुझे अपने हाथो से खाना खिलाओ

साक्षी जो अब खाना खा चुकी थी वो जाने लगती है और मूड कर वीर को देखती है

साक्षी - मारना है तो मार दे मैं नहीं खिला रही हू

ऐसा ही रात हो जाती है और वीर कमरे में लेट हुआ था फिर वो सोचता है कि साक्षी सो गई होगी

वीर जैसे ही कमरे में जाता है तो देखता है साक्षी सो रही थी जिसकी साड़ी का पल्लू गिर हुआ था और उसका पुरी कमर दिख रही थी

साक्षी की ऐसी हालत देख कर वीर का रोम रोम खुश हो गया लेकिन साक्षी जाग रही होती तो वीर उससे नज़रे भी ना मिला पाता

वीर चुपके से साक्षी के बगल लेट जाता है और उसकी कमर पर हाथ रखा देता है तभी साक्षी अपनी नज़रे खोल देती है और वीर डर जाता है जमीन पर गिर जाता है

साक्षी मन में सोचती है ये कैसी हरकते कर रहा है सुबह से वो मन ही मन हसी भी आ रही थी उसको

वीर - में तो बस तुम्हरे साथ सोने आया था

साक्षी कुछ नहीं बोलती वो चुप चाप सो जाती है और रात को उसने अपनी कमर पर वीर का हाथ महसूस किया

वीर को लगा साक्षी सो रही है और वो चुपके से उसकी पीठ पर किस करने जा रहा था तभी उसकी नज़र साक्षी की पीठ पर पड़ी जो पुरी तरह से जली हुई थी जगह जगह सिगरेट से जले हुआ निशान था

और वीर फिर किस नहीं करता बस रोने लगता है और साक्षी को फील हुआ कि वीर रों रहा है तो वो उठ गई

साक्षी - क्या है आप क्यों रों रहे है हुआ क्या है आपको बहेंकी बहकी बात कर रहे है

वीर - तुम सुबह से मुझसे बात नहीं कर रही हो तुम्हारी पीठ भी जली हुई है दर्द हो रहा है ना

साक्षी को अब हसी आ रही थी वो किसी तरह कंट्रोल करती है और कहती है नही दर्द नही हो रहा रात हो गई है जाइए सो जाइए

साक्षी कुछ और कहती लेकिन वीर फिर रोना लगता है

साक्षी - क्या हुआ अब

वीर - तुमने मुझे खाना भी रहे खिलाया बात क्यों नही करती वाइफ हो मेरी तो ऐसे इग्नोर क्यू करती हो हा वाइफ अपने हब्बी को खाना खिलाती है तुम मुझे क्यों नही खिलाती

साक्षी अब पागलों कि तरह हसे जा रही थी आज वीर को बच्चे की तरह शिकायत करता देख उसको अच्छा लग रहा था वो यही लाइफ तो जीना चाहती थी

साक्षी - अच्छा सॉरी अब सो जाओ सुबह में अपने हाथों से खिला दूंगी प्रोमिस

वीर चुप चाप सो जाता है और साक्षी बस मन में हसी जा रही थी और कहती है मुझे नही पता तुम्हारे साथ क्या हुआ लेकिन ऐसे आदमी के साथ में लाइफ स्पेंट कर सकती हूं।

साक्षी की हसी नही रुक रही थीं वो पागलों की तरह हस रही थी तभी वीर को लगा कि वो सो गई फिर वीर ने अपना हाथ उसकी कमर पर रखा तभी साक्षी ने नींद का नाटक करते हुए करवट ली
 
वीर हड़बड़ी मैं दूर हुआ और जल्दी से आंखो को बंद कर लिया और साक्षी फिर मन में हसने लगी और वीर को ऐसा तड़पता देख उसको अच्छा लग रहा था

उसका पति आज उसको सुबह से घुर रहा है उसके करीब आने की कोशिश कर रहा है

साक्षी हँसते हुए कब सो गई उसको पता नही चला।

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सुबह जब साक्षी की नींद खुली तो वो स्माइल करते हुए उठी और उसे फिर कल की बात याद आई तो खुद से बोल उठी

कभी मैंने ऐसी लाइफ जीने की तमन्ना की थी ऐसा पति चाहा था लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है लेकिन इस बात की खुशी है की मैने कभी अपने पति को धोका नही दिया लेकिन सिड के जाने के बाद अब जीने की इच्छा भी चली गई है वैसे भी ये कोनसा मेरे से प्यार करने लगेंगे इनका प्यार तो वो वैसे ये हरकते ऐसी कर रहे है जैसे नई नई शादी हुई है हमारी

इतने में उसको वीर की आवाज आती है जो उसको नींद मैं बड़बड़ाता हुआ दिखा

उम्म तुम्हारा पेटू बहुत सॉफ्ट है मुलायम सा वाइफ मेरी

वही ये सुन कर साक्षी को हसी आ जाती है और हँसते हुए वीर को देखती है जल्दी से उठ जाऊ वर्ना ऐसी हालत में देख कर पागल हो जाएंगे पहले ही अजीब अजीब हरकते कर रहा है।

और कहती है अब देर हो चुकी है कुछ दिन ऐसे रहोगे फिर वापिस वैसे हो जाओगे पहले जैसे फिर मेरी परछाई से भी नफरत होगी तुमको इसलिए अच्छा है मैं तुमसे दूर रहूं तुम कुछ भी कर लो मेरा दिल में तुम्हारे लिया अब कोई सॉफ्ट फीलिंग नहीं है।

फिर साक्षी उठ कर अपने काम करने लगती है और तभी उसको सोफे पर एक पॉलिथीन दिखता है जब वो ओपन कर के देखती है तो उसमें एक जींस और ब्लू टॉप था

साक्षी - मैने कहा था ना वापिस उसी तरह हो जाएंगे फिर मुझे मारेंगे

साक्षी वापिस पॉलिथीन को वही रख देती है और तभी उसको कॉल आती है

साक्षी - हेलो

सामने कॉल पर - हां मेरी बेटी कैसी है

साक्षी - क्या जिंदा हूं ये काफी नहीं है

सामने कॉल पर - ऐसा मत बोल बेटी तू मेरी जान है हम जल्द ही आ रहे है फिर तेरा और उसका मामला संभाल लेंगे

साक्षी - अब फोन रखूं मैं

सामने कॉल पर - खुशी की कोई वजह ढूँढ बेटी हजारों वजह मिल जाएगी

टू टू

साक्षी ने फोन कट कर दिया अब साक्षी को किसी से भी मतलब नही था वो बस अपने मैं खोई रहती थी उसके साथ 17 साल से ऐसा व्यवहार किया जा रहा था इतना मारा जा रहा था की वो अब जीना बात करना सब भूल चुकी थी

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उधर साक्षी की मां - हमने अपनी बेटी को खो दिया क्या जवाब दूंगी मैं भगवान को

तभी एक कड़क आवाज आती है कुछ दिन मैं छोटी बेटी की शादी है तब उसको यहां बुला लेंगे और समझ लेंगे।

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इधर साक्षी खाना बनाने लगती है और टी बना कर वीर को उठाने जाती है और वही बैठ कर अपनी साडी सही करने लगती है

वीर - उठ कर उसको ही देखने लगते है

साक्षी- क्या है सुबह सुबह

वीर - अच्छी लग रही हो बहुत

साक्षी उठ कर चली जाती है

वीर - में तुमको जीना सिखा दूंगा देखना

इधर वीर ब्रश कर के आता है और साक्षी जो सोफे पर बैठ कर टी पी रही थी उसको फिर से देखने लगता है

तभी वीर कुछ ढूढने लगता हैं और साक्षी उसको कहती है वो रूम में है तुम्हारा पॉलिथीन

वीर जल्दी से भागता हुआ पॉलिथीन उठा कर आता है और साक्षी के पास आता है और साक्षी डर जाती है और उसकी चाय गिर पड़ती है उसके पैर पर

साक्षी - मां मां माफ कर दो मुझे अब कभी आपके समान को हाथ नही लगाउंगी मुझे मत मारना

साक्षी की आंखों से आसू आने लगता है और वो मुस्किल से ये कहती हैं

इधर वीर भी उदास हो गया और मन में सोचता है मेरी साक्षी इस कदर टूट चुकी है डर गई है वो भी वीर की वजह से अच्छा हुआ जो मर गया

तभी वीर की नजर उसके पैर पर जाती है जो बुरी तरह से जल गया था चाय की वजह से

वीर पॉलिथीन को उसके बगल रख देता है और जमीन पर बैठ जाता है

साक्षी अपनी आंखो को बंद कर देती है और कांपने लगती है और वीर जमीन पर बैठ पर अपने हाथों मे उसके पैर ले कर सहलाता है और ठंडा पानी डाल कर साफ कर करता है

और अपने घुटनो पर रख लेता है

साक्षी अब अजीब नज़रों से देखती है तो वो वीर को उसके पैर पर देखती है और

साक्षी - क्या कर रहा हो आप मेरा पांव ठीक है

वीर - क्या ठीक है चाय गिर गई दिमाग कहा था तुम्हारा तुम मेरी वाइफ हो मेरी जान निकल जाती है तुमको दर्द मैं देख कर वैसे तुम्हारे कलर बिलकुल दूध जैसा

साक्षी को ये सब अजीब लग रहा था आज उसका ही पति उसको छेड़ रहा था उसकी केयर कर रहा था और फिर साक्षी कहती है इतना ही केयर है तो

वीर - तो क्या आगे

साक्षी -

वीर - फिर साइलेंट मोड अच्छा ठीक है मत बोलो वो ना मेरी ऑफिस में एक सेक्रेट्री है मेरी वो मुझे बता रही थी की वाइफ को मानने के लिया गिफ्ट दिया जाता है ड्रेस दी जाती है इसलिए मैंने ये ड्रेस लिया आपके लिया तुमको अच्छा नी लगा क्या साइज सही नहीं है क्या

साक्षी की तो चहरे की हवाइयां उड़ गई और वो खुद मैं सोचती है पहले मैं इनसे डरती थी अब ये मुझसे डरते है और जब देखो घूरते रहते है
 
साक्षी - नहीं ठीक है खाना खाओ लेट हो रहा है ऐसा कह कर वो साइड हो कर चली गई

वीर उदास हो कर बैठ जाता है और साक्षी खाने ले कर आती है

वीर - मुझे भूख नहीं है

साक्षी - क्या हुआ अब चोट मुझे लगी खाना तुम नहीं खा रहे हो

वीर - तुम मुझे डॉटती रहती हो

इतना सुन कर साक्षी को हसी तो बड़ी आती है लेकिन वो रुक कर कहती हैं मैने कब डाटा

वीर - तुमने कल कहा था तुम मुझे खाना खिलाओगे

साक्षी वीर को देख कर एक कोर खिला देती है और फिर वहा से चली जाती है

इधर साक्षी चुप चाप बाल्कौनी मैं खड़ी थी और सोच रही थी वीर का उसको यू देखना रात को सोने बाद उसको छूने की कोशिश करना बात करना के लिया तड़पना अब उसको यू सब अच्छा सा लग रहा था

तभी वीर फिर उसके पास आता है और कहता है साक्षी सुनिए

साक्षी पता नहीं क्या सोचती है और बहुत जोर से चिल्ला देती है क्या है साक्षी साक्षी साक्षी साक्षी करते रहते हो हवसी कही के दिन भर मुझे घुरोगे क्यों पास आना है तुमको मेरे जब मुझसे प्यार नही है तो

वीर बिना कुछ बोले चुप चाप वहा से चला जाता है

वीर के जाने के बाद साक्षी को रियलाइज हुआ की उसने क्या किया तो वो सिर पर हाथ रख कर बैठ गई और सोचने लगी ये क्या कर दिया मैंने और मैने उसको भगा दिया और वो चला गया क्या सच में इतना बदल गया

तभी साक्षी का ध्यान जमीन पर गया जो वो देखती है की जमीन पर खाना गिरा हुआ था वीर साक्षी को बस खाना देना के लिए लाया था
 
वीर के जाने के बाद साक्षी को रियलाइज हुआ की उसने क्या किया तो वो सिर पर हाथ रख कर बैठ गई और सोचने लगी ये क्या कर दिया मैंने और मैने उसको भगा दिया और वो चला गया क्या सच में इतना बदल गया

तभी साक्षी का ध्यान जमीन पर गया जो वो देखती है की जमीन पर खाना गिरा हुआ था वीर साक्षी को बस खाना देना के लिए लाया था

वीर इधर ऑफिस निकल गया जहा से सीधा उसको ऑफिस सेकेट्री मिलती है

काव्या - गुड मॉर्निंग सर

वीर - गुड मॉर्निंग

काव्या - सर क्या हुआ मूड सही नहीं है आपका

वीर - वाइफ गुस्सा है मेरी

काव्या - एक काम करिए ना सर उसको हग कर लीजिए और प्यार का इज़हार करिए

वीर - ओके

उसके बाद वीर काम पर लग जाता है और फिर रात को काव्या चली जाती है और स्वाति आती है

तो देखती है वीर कुछ सोच रहा है

स्वाति - क्या सोच रहे हो

वीर - प्यार इज़हार कैसे करते है

स्वाति - पकड़ कर किस करो एक दम जबरदस्त वाली और बोल दो आइ लव यू आसान है यार अब मैं जा रही हूँ

वीर वहा से निकल कर सीधा मेडिकल की दुकान पर जाता है और कहता है कोई ऐसी क्रीम है जिससे जला हुआ दाग चला जाए

और फिर वो क्रीम ले कर वापिस आ जाता है और जैसे ही घर में आता है डोर नोक करता है।

डोर ओपन करते ही 1 लड़का उसको धक्का देता है जिससे वो गिर जाता है और उसका सिर पर थोड़ी चोट आ जाती है

लड़का - ये मेरी बहन को मारने के लिया था

और वीर ने जो क्रीम और दवा वैगारा लिया था सब गिर गया और ये शोर सुन कर साक्षी की मम्मी और पापा और बहन आ जाती है और वीर को ऐसा गिरा हुआ देख कर वो कुछ नहीं कहती और साक्षी आगे बढ़ती है उसके पहले वीर लंगड़ाते हुए चला जाता है

साक्षी डॅड - चलो साक्षी हम तुम दोनो का तलाक करा देंगे

और वीर कमरे में उदास बैठा हुआ था

तभी रूम में साक्षी आती है और उसके पास आ कर बैठ जाती है और अपने हाथों से उसकी क्रीम उसको पकड़ा देती है और कहती है ये क्या है और ये दवा

वीर रोने लगता है और कहता है मुझे मत छोड़ो मैं मर जाऊंगा तुम्हारे बिना मैं वो वीर नहीं हूं मैं दूसरा वीर हूं प्लीज मुझे एक मौका दो मुझे मार लिया करो डेली पीट लेना लेकिन मुझे तलाक मत दो मैं कभी तुमको ऊंची आवाज में बात नहीं करूँगा कभी घूर कर तुमको नहीं देखूंगा ये दावा मैने तुम्हारे जले हुए निशान के लिया लाया है

वीर को ऐसा रोता देख तड़पता देख साक्षी उसका पास बैठी हुई थी

वीर - मत छोड़ो मुझे मत दो ना तलाक मैं हर वो कोशिश करूंगा एक मौका दो बोलो चुप क्यों हो

साक्षी - रोना बंद करो

वीर - मुझे मत छोड़ो

साक्षी एक थप्पड़ देती है और वीर का रोना रुक जाता है और साक्षी कुछ नहीं कहती और उठ कर चली जाती है

(वीर की आत्मा तो शरीर से निकल चुकी थी ये सिड की आत्मा थी जिसके वजह से वीर का चेहरा अब सुंदर हो गया था और वो बचपन से साक्षी के बहुत क्लोज था।)

जैसे ही साक्षी बाहर आती है सबने थप्पड़ की आवाज सुनी थी और सब गुस्सा था

अनु (साक्षी सिस्टर)- दीदी इसने आप को फिर मारा क्या

इतने मे साक्षी उसको इग्नोर कर के चुप चाप अपने हाल से फास्ट एड का बॉक्स ले कर वीर की तरफ जाने लगती है और अपने भाई की तरफ देख कर इतना ही बोलती है मेरे पति को हाथ भी लगाया ना तो जिंदा मार दूंगी

फिर वो वीर के रूम में जाती है और वीर के पास बैठ कर उसके माथे पर रुई से ब्लड साफ करती है

साक्षी - रोना बंद करोगे या मैं जाऊ

वीर –नहीं नहीं

फिर वीर पूरा चुप हो जाता है और साक्षी कहती है क्या है हा

वीर – मुझे नहीं छोड़ोगि ना

साक्षी - नहीं छोड़ती बाबा अब रोना बंद करो ना

वीर - कुछ कहना था

साक्षी - हा

फिर वीर डरते हुआ कापते हाथों से उसको हग कर लेता है और उसकी कमर पर सिर रख कर जकड़ लेता है

वीर - आइ लव यू साक्षी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं

साक्षी - हा ठीक है

वीर - सुनो

साक्षी - हा

वीर - हसबैंड और वाइफ वाला प्यार कैसे करते है

साक्षी - बेशर्म हटो

फिर साक्षी ने अपने घर वालो को भगा दिया और बोला कल वो आएगी गांव शादी तक रहेगी फिर चली आएगी और साथ में वीर को ले कर आएगी

साक्षी रसोई में खाना बना रही थी और वीर उसको घूर रहा था पीछे से तभी वो पलट कर कहती है क्या कर रहे हो हा घूरे जा रहे हो

वीर - वो कुछ भी तो नहीं

साक्षी - ओके

वीर उसके पीछे खड़ा हो जाता है और कहता है मेरा साथ मूवी देखना चलोगे सब अपनी गर्लफ्रेंड के साथ जाते है तुम चलोगी मेरे साथ

साक्षी - ठीक है मैं चलूंगी कल फिर शॉपिंग कर के गांव चलना है

वीर थोड़ा घबरा जाता है

साक्षी - मेरे होते हुए तुमको कोई कुछ नहीं करेगा समझे

वीर - ठीक है फिर

साक्षी फिर काम करने लगती है और वीर साक्षी का पल्लू गिरा देता है और उसकी पीठ पर क्रीम लगाने लगता है

साक्षी - फायदा उठा रहे हो मेरा हा

वीर - ए ए ऐसा नहीं है

साक्षी फिर खिलखिला कर हस पड़ती है और कहती है चल झूठे

साक्षी मन में कहती है मैं 17 साल से तड़पी हूं दर्द झेली हूं तुम देखो तुमको कितना तड़पाती हूं मेरा नए नए पति तुमको पुरानी बात नहीं याद तो ठीक है ये हमारी न्यू शुरुआत है जिस दिन तुम पुराने वाले वीर हुए उस दिन मैं आत्म हत्या कर लुंगी

वीर - मै भी खाना बनाने में मदद करू

साक्षी - नही रहने दो दूर हटो मुझसे

फिर खाना खा कर वीर सोने के लिया बेड पर आ जाता है और साक्षी को देख कर उसकी सास ही रुक गई

साक्षी - लाइट ऑफ करो और सोते है बहुत नींद आ रही हैं

साक्षी पूरा सज कर बेड पर लेटी थी और मन में हस रही थी

इधर वीर धीरे से अपना हाथ साक्षी की कमर पर रख देता है

साक्षी - ओ मैने परमिशन दी क्या छूने की

वीर - प्लीज बस एक बार टच कर लेने दो

साक्षी - में चली जाऊंगी फिर

वीर -नहीं नहीं मैं नहीं टच करूंगा

साक्षी मन में कहती है कल से तुम देखो तुम्हारी ऐसी हालत कर दूंगी ना देखना
 
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