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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

फ्लॅशबॅक 192ब

थप्पड़ की आवाज़ सुनके संगीता की आँख खुल जाती है

और जैसे ही संगीता की नज़र वीर पे पड़ती है

संगीता बिना एक पल गवाए वीर के पास जाती है और उसके गले लग्के रोने लगती है

वीर संगीता के सर पे हाथ फेरने लगता है

और आशा को रूठी हुए नज़र से देखता है

वीर- सॉरी लेट हो गया काम ज़्यादा था ना

आगे से कभी इतनी दूर नही जाउन्गा

[फिर संगीता रूम से बाहर चली जाती है

और आशा अपनी नज़रे नीची कर लेती है

वीर धीरे से आगे बढ़के आशा का हाथ पकड़ता है और अपना गाल सहलाने लगता है

वीर- जब देखो तब मारती रहती हो

कभी प्यार भी कर लिया करो

ऐसा लगता ही नही है कि मैं तुम्हारा पति हूँ

[वीर की बात आशा के दिल पे किसी तीर की तरह चुभि]

[आशा बिना कुछ कहे वीर के गले लग्के रोने लगी

फिर तीनो एक साथ नाश्ता करने लगे

वीर आज अपनी दोनो बीवियो का दिल जीत चुका था

और वो यह भी समझ चुका था कि अपनी दोनो बीवियो के बिना जी नही पाएगा

ऐसे ही पूरा दिन बीत गया

वीर संगीता के रूम में गया

वीर- आज तुम कल से ज़्यादा सुंदर लग रही हो

[संगीता जान चुकी थी कि वीर आज उसकी तारीफ़ क्यूँ कर रहा है

वीर आगे बढ़ता और धीरे धीरे संगीता को प्यार करने लगता है

यह वीर और संगीता दोनो की जिंदगी का पहला मिलन था

सुबह आशा जब संगीता के रूम में जाती है तो शरमा जाती है

संगीता और वीर एक दूसरे की बाहो में निर्वस्त्र पड़े थे

ऐसे ही वक़्त बीत ता गया

संगीता पहले धर्मेश को जन्म दी

फिर जतिन को फिर सिमिता को

आज आशा और वीर की शादी को 10 साल हो चुका था

लेकिन वीर अब तक आशा को प्यार नही किया था

यह बात आशा को अंदर ही अंदर खाए जा रही थी

वीर को भी इस बात का एहसास हो चुका था

आशा वीर का पहला प्यार थी

वीर आशा के पास जाता है

वीर- आज तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ

मुझे पता है कि तुम उदास हो

तुम्हे एक बात बताता हूँ

[धुरेन्द्र की मौत कैसे हुई वीर आशा को बता देता है

वीर- तुम्हे पता है मैं तुमसे अभी तक प्यार क्यूँ नही किया

क्यूंकी यह एक ऐसी सच्चाई है जिससे तुम्हे लगता कि मैं ग़लत हूँ

और एक बात मैं पहली बार जब देखा था उसी दिन से मैं तुमसे प्यार करने लगा था

अब तुम जो कहोगी मैं वो करूँगा

आशा- वो सब पुरानी बात है आप मेरे पति हैं और मुझे आपसे कोई शिकायत नही है

[आशा की बात सुनके वीर खुशी से उच्छल पड़ा और उसके बाद जो वीर ने आशा को प्यार किया है

अगर वीर 10 साल भी ऐसा प्यार करता तो आशा को इतनी खुशी नही मिलती

आशा और संगीता दोनो अब माँ बनने वाली थी

संगीता ने किरण को जन्म दिया

और आशा ने मीता को

फिर वीर ने संगीता का ओपरेशन करवा दिया

ताकि संगीता अब माँ ना बन सके

मीता के जन्म के 1 साल बाद आशा की तबीयत अचानक खराब हो गयी

गाओं में कोई हॉस्पिटल नही था

वीर आशा को शहर वाले हॉस्पिटल में लेके गया

वहाँ डॉक्टर ने बताया कि आशा अब कभी माँ नही बन पाएगी

क्यूंकी आशा की डेलिवरी बिना डॉक्टर्स के हुई थी

डेलिवरी के समय आशा को इन्फेक्षन हो गया

और यह इन्फेक्षन इतना बढ़ गया है कि अब वो कभी माँ नही बन पाएगी

आशा दुखी नही हुई क्यूंकी आशा के पास उसकी बेटी मीता थी

लेकिन वीर को बहुत दुख था

एक बार फिर वीर की वजह से आशा की जिंदगी में दुख का सैलाब आ गया था

फिर धर्मेश और जतिन को पढ़ने के लिए लंडन भेज दिया गया

और फिर समय बीत ता गया

सब बच्चे जवान हो चुके थे...

 
फ्लॅशबॅक 193

फिर धर्मेश और जतिन को पढ़ने के लिए लंडन भेज दिया गया

और फिर समय बीत ता गया

सब बच्चे जवान हो चुके थे

धर्मेश 25

जतिन 22

सिमिता 20

किरण और मीता 18

आज धर्मेश और जतिन विदेश से वापस आ रहे थे

क्यूंकी 2 दिन बाद सिमिता की शादी थी

जब धर्मेश और जतिन विदेश से वापस आए तो संगीता दोनो के गले लग्के फूट फूटके रोने लगी

सिमिता भी अपने बड़े भाइयो को देख कर खुशी से उच्छल पड़ी

धर्मेश के साथ उसका दोस्त भी आया था

जब धर्मेश ने पूछा की उनकी दोनो छोटी बहने कहाँ हैं

तो संगीता बोली कि वो दोनो तालाब के पास गयी हैं

किरण और मीता दोनो बचपन से एक साथ रहती थी

इसी लिए और सब भाई बहनो में सबसे ज़्यादा प्यार इन्ही दोनो बहनो में था

किरण और मीता दोनो बच्चो की तरह तालाब के पास खेल रही थी

तभी एक लड़का जो अभी अभी शहर से अपनी पढ़ाई पूरी करके अपने गाओं लौटा था

उसने सोचा क्यूँ ना पहले तालाब के पास जाया जाए

इधर किरण बोल रही थी कि भैया आ गए होंगे

हमे चलना चाहिए

पर मीता को तो लग रहा था कि आज सब घर वाले मज़ाक कर रहे हैं

पिच्छले 4 साल से मीता सुन रही थी कि उसके भैया अब आएँगे तब आएँगे लेकिन उसके भैया आते ही नही थे

इधर किरण को पता था कि सिमिता दी की शादी है

तो उसके दोनो भैया ज़रूर आ गए होंगे

इसी लिए वो तालाब के पास हवेली की तरफ बढ़ गयी

और इधर मीता वहीं पे बैठी थी

तभी वो खड़ी हो गयी और जैसे ही वो मूडी उसका पैर फिसल गया

और वो तालाब में गिर गयी

मीता को तो तैरना भी नही आता था

वो लड़का जब तालाब के पास पहुँचा तो देखा कि एक लड़की डूब रही है

वो लड़का तुरंत पानी में कूद गया

और उस लड़की को पानी से बाहर निकाल लेता है

लेकिन वो लड़की बेहोश हो जाती है

तो वो लड़का उस लड़की का पेट अपने घुटने पे रखता है

और उसके पेट के पीछे वाले हिस्से को दबाने लगता है

इससे होता यह है कि उस लड़की के पेट में जितना पानी होता है वो निकल जाता है

लेकिन वो लड़की होश में नही आती

उस लड़के को कुछ समझ में नही आता है

वो लड़का उस लड़की का मुँह खोलता है और जैसे ही वो लड़का अपना मुँह उस लड़की के मुँह के पास ले जाता है उस लड़की की आँख खुल जाती है और वो अपने इतने करीब किसी लड़के को देख कर घबरा जाती है

और उसे धकिया देती है

और रोने लगती है

वो लड़का ऐसे मुँह बनाता है जैसे उसने किसी भूत को देख लिया हो

वो लड़का उस लड़की के पास जाता है

और उसके कंधे पे हाथ रख देता

लड़का- तुम रो क्यूँ रही हो

[वो लड़की और ज़ोर से रोने लगती है

वो लड़का अपना सर खुजाने लगता है]

बताओगी भी रो क्यूँ रही हो

लड़की- तुमने मुझे बर्बाद कर दिया

लड़का- मैने क्या किया

लड़की- तुमने मेरी इज़्ज़त लूट ली

[यह सुनके लड़के को हार्ट अटॅक आने जैसी फीलिंग होती है]

लड़का- क्याअ

अरे तुम यह क्या बोल रही हो तुम डूब रही थी मैं पानी में कूद के तुम्हे बाहर निकाला और तुम कह रही हो मैंने तुम्हारी इज़्ज़त

लड़की- तो फिर तुम मेरे उपर क्यूँ झुके थे

लड़का- अरे छोड़ो मुझे देर हो रही है मैं जा रहा हूँ

लड़की- मेरा क्या होगा गाओं में किसीने मुझे इस हालत में देख लिया तो मैं अपने घर पे क्या बोलूँगी

लड़का- पहले तुम रोना बंद करो क्या मुसीबत है...

 
अपडेट 193ए

लड़का- पहले तुम रोना बंद करो क्या मुसीबत है

[फिर वो लड़का अपने बॅग से एक सूट निकालके उस लड़की को देता है

लड़का- यह लो अपनी नयी भाभी के लिए लाया था

तुमको दे रहा हूँ

लड़की- मैं तुम्हारा एहसान कभी नही भूलूंगी

प्लीज़ मुझे माफ़ कर देना

मैं तुम्हे ग़लत समझी

लड़का- मेरा नाम सूरज है

और तुम्हारा

लड़की- मीता

सूरज- ठीक है अब मैं चलता हूँ

[फिर सूरज अपने घर चला गया

और मीता कपड़े बदलके जल्दी से हवेली पहुँची

जैसे ही वो किचन में गयी

किरण उसे अजीब नज़रो से देखने लगी

संगीता- कहाँ थी इतनी देर से और तेरे दोनो भाई तेरा इंतेज़ार कर रहे हैं

और दीदी भी

मीता- माँ को क्या हुआ

संगीता- क्या होगा आज तेरे भाई आने वाले थे तुझे पता था ना

फिर तू बाहर क्यूँ गयी

गयी तो गयी इतनी देर में क्यूँ आई

मीता- छोटी माँ प्लीज़ बचा लो

आगे से कभी बाहर नही जाउन्गी

संगीता- तू चाहती है कि तेरे लिए मैं दीदी से मार खाउ

इससे अच्छा तू अपने पिताजी के पास जा

[संगीता की बात सुनके मीता फट से वीर के रूम पे पहुँची

और जैसे ही अंदर गयी आशा वीर पे बरस रही थी

अपनी माँ को अपने पिता पे बरसते देख मीता और डर गयी

लेकिन मीता जब देखी कि उसके पिता मुस्कुरा के उसकी माँ की डाँट खा रहे हैं

तो वो कुछ समझ नही पाई

आशा- आप ही ने मीता को सर पे चढ़ा रखा है

लड़की जात इस उमर में बाहर घूमे यह क्या आपको अच्छा लगता है

इस उमर से पहले ही हम दोनो बहनो की शादी हो गयी थी

[तभी आशा की नज़र मीता पे पड़ी जो नज़र नीची किए खड़ी थी]

लीजिए आ गई राजकुमारी जी मन भरा कि नही

आज बड़े भाई आने वाले हैं याद था कि नही

[तभी वीर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगता है]

[आशा आँखें फाड़के वीर को देखने लगती है

वीर- बस करो जब तुम गुस्सा करती हो तो बहुत हँसी आती है

इतना हंसाया मत करो पेट दर्द हो जाता है

[आशा झुंज़लाई नज़र से वीर को देखती है

आशा- बेशरम कहीं के इस उमर में आपको यह सब शोभा देता है

[यह कहके आशा पैर पटकते हुए रूम से बाहर चली जाती है]

और मीता वीर के पास जाती है

मीता- पिताजी माँ इतना गुस्सा क्यूँ हो रही हैं

वीर- तुम्हारी माँ है ही ऐसी जब देखो

तब ऐसी बात करती है मैं अपनी हँसी रोक ही नही पाता हूँ

अच्छा अब जाके अपने भाइयो से मिलो वरना वो तुमसे बात भी नही करेंगे

[यह सुनके मीता अपने भाइयो के रूम की तरफ भागती है

वीर सोचता है कि आज उसके सब बच्चे बड़े हो गये हैं

लेकिन उसके बड़े भाई का बेटा उसके साथ नही है

हर रात वीर यह सोचता है कि उसके बड़े भाई का बेटा कैसा होगा किस हाल में होगा

और वो दुश्मन अभी तक सामने नही आया है

जिसने उसके पिता और उसके बड़े भाई की जान ले ली

वीर इस सोच में डूबा था

उधर मीता अपने बड़े भाई के रूम में जाती है

और धर्मेश को भैया कहते हुए उसके गले लग जाती है

धर्मेश भी अपनी छोटी बहेन के सर पे हाथ फेरता है

धर्मेश- कैसी है मेरी प्यारी और सबसे छोटी बहना

मीता- मैं ठीक हूँ भैया लेकिन मैं आपसे नाराज़ भी हूँ

धर्मेश- क्यूँ

मीता- क्यूंकी आप 4 साल बाद आए हैं

पहले तो आप हर साल आते थे

धर्मेश- सॉरी अब तो यहीं रहूँगा

अपना बड़ा भाई समझके माफ़ कर दे

मीता- मेरा गिफ्ट दीजिए तब माफ़ करूँगी...

 
अपडेट 193ब़

मीता- मेरा गिफ्ट दीजिए तब माफ़ करूँगी

[उधर जतिन सोच रहा था कि कैसे अपनी पिताजी को कहे की वो शहेर में अपना बिज्निस शुरू कर चुका है

2 दिन ऐसे ही बीत गये

सिमिता की शादी भी हो गयी

सिमिता अपने ससुराल चली गयी

वीर ऐसे ही हॉल में बैठके पेपर पढ़ रहा था की एक नौकर आके बोला कि कोई आपसे मिलना चाहता है

वीर ने बुलाने को कहा

तभी सूरज अंदर आजाता है

और वीर के पैर छुता है

वीर- कैसे हो सूरज लगता है पढ़ाई पूरी करके आए हो

सूरज- जी ठाकुरजी

वीर- आगे क्या करने का इरादा है

सूरज- जी वो पिताजी ने कहा है कि मैं फौज में भरती हो जाउ

वीर- बहुत अच्छे विचार हैं तुम्हारे पिता के

कब जा रहे हो

सूरज- जी वो क्या है मैं 2 साल पहले ही फौज में भरती हो गया था

वीर- अपने पिता को बताया

सूरज- जी

वीर- मुझे लगा था कि तुम पढ़ाई पूरी करके आए हो

लेकिन तुम तो बहुत आगे निकल गये

सूरज- जी वो आपने मुझे बुलवाया था

वीर- हाँ वो मैं चाहता हूँ कि तुम हमारी ज़मीन कितनी है और कहाँ पे है

धर्मेश को समझा दो

सूरज- जी

[सूरज के चाचा वीर के यहाँ हिसाब किताब देखते थे

और जब सूरज के चाचा के देहांत हुआ तो सूरज कुछ दिनो के लिए हिसाब किताब देखने लगा

सूरज का तेज़ दिमाग़ देख कर वीर ने उसे पढ़ने के लिए बाहर भेज दिया

इसी लिए सूरज वीर की इतनी इज़्ज़त करता है

[फिर सूरज अपने घर चला जाता है

दूसरे दिन सूरज धर्मेश से मिलके उसे सब ज़मीन दिखा देता है

पहली बार धर्मेश किसी गाओं वाले से बात कर रहा था

धर्मेश पे सूरज का प्रभाव ऐसा पड़ा कि धर्मेश ने सूरज को रात के खाने पे बुला लिया

इधर जतिन वीर को अपने बिज्निस के बारे में बता चुका था

वीर- देखो बेटा मैं कोई पुराने ख़यालात टाइप का ठाकुर नही हूँ

अगर तुम कुछ सही कर रहे हो

तो मुझे कोई परेशानी नही हैं

लेकिन हां मेरी एक बात तुम्हे माननी पड़ेगी

जतिन- आप जो कहेंगे करूँगा

वीर- शादी करनी पड़ेगी

जतिन- जी

वीर- जी हां

[तभी धर्मेश आजाता है

धर्मेश- क्या हुआ पिताजी

जतिन- आपकी शादी की बात हो रही है

[यह सुनके वीर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगता है

[ धर्मेश जतिन को घुरके देखता है]

वीर- बहुत अच्छा विचार है तुम दोनो भाई की शादी एक साथ कर देता हूँ

वो भी अगले महीने

धर्मेश- अगले महीने

वीर- ठीक है 15 दिन

[यह सुनके धर्मेश और जतिन दोनो मुँह लटका के अपने रूम में चले जाते है

फिर दोनो को लगता है कि पिताजी मज़ाक कर रहे हैं

रात में सूरज आजाता है

और सब लोग खाना खाते हैं

तभी सूरज को लगता है कि कोई उसे देख रहा है

वो नज़र इधर उधर घुमा कर देखता है

पर कोई नही दिखता है

तभी उसकी नज़र छत पे पड़ती है जहाँ से मीता उसे चोरी छुपे देख रही थी

सूरज की तो साँस ही अटक जाती है

कि यह यहाँ क्या कर रही है

और मुझे क्यूँ देखे जा रही है

बेचारा सूरज जैसे तैसे खाना ख़ाता है और अपने घर की तरफ भागता है

इधर जब मीता सूरज को देख रही थी तो किरण मीता को देख लेती है

किरण मीता के रूम में जाती है

जहाँ पे मीता खोई हुई सी रहती है

किरण- वो तो कब का चला गया फिर किसके ख्यालो में खोई है

[मीता को कुछ समझ ही नही आया

मीता- किरण तुम यहाँ

किरण- अब बता जब तू तालाब से वापस आई तो तेरे बदन पे दूसरे कपड़े क्यूँ थे

और आज जब वो लड़का आया तो तू उसे घूर क्यूँ रही थी...

 


अपडेट 194

किरण- बता चुप क्यूँ खड़ी है

मीता- पहले तू मेरी कसम खा कि तू यह बात किसी को नही बताएगी

किरण- मैं कसम खाती हूँ

अब बता

[मीता बात करने की जगह शरमा रही थी

वो मैं तालाब में गिर गयी थी और मुझे उसने डूबने से बचाया

पता नही अब वो हर जगह मुझे दिखाई देता है

जब भी कोई मुझसे बात करता है ऐसा लगता है कि वोही मुझसे बाते कर रहा है

[और मीता बोलती गयी बोलती गयी जब किरण से बर्दाश्त नही हुआ

किरण- चुप कर मेरी माँ

इतनी तारीफ़ माँ भी पिताजी की नही करती जितना तू उस की कर रही है

मीता- उस का नाम सूरज है

किरण- हो क्या गया तुझे मीता

मीता- पता क्या हो गया है

किरण- अच्छा तो क्या हो गया है

पता ही नही

अगर बड़ी माँ को पता चला तो वो क्या करेंगी पता है

[इससे पहले किरण आगे कुछ बोल पाती

आशा रूम में आजाती है साथ में वीर भी थे

वीर- कल मुझे एक ख्याल आया तुम्हारी दोनो माँ तुम दोनो से बहुत परेशान है

तो क्यूँ ना तुम्हारी दोनो माँ के लिए दो बहू आजाए क्या कहती हो

किरण- पिताजी हमने सुना है

बेटे की शादी के लिए सबसे पहले माँ सोचती है

वीर- [बड़बड़ाते हुए] यहाँ हम खुद भीगी बिल्ली बन जाते हैं

जब हमारी शेरनी दहाड़ती है तो हमे ही माँ समझो

आशा- वीर आप फिर से शुरू हो गये

वीर- मैने क्या किया

अब तुम हर वक़्त मुझे डान्टा मत करो बच्चे भी सोचने लगे हैं

कि मैं तुमसे डरता हूँ

मीता- माँ आप पिताजी को नाम लेके क्यूँ बुलाती हैं

[अब इस बात का बेचारी आशा क्या जवाब देती

लेकिन वीर का तो कुछ और ही इरादा था]

वीर- तुम दोनो नाम लेने का बात करती हो

आज भी मेरे गाल तुम्हारी माँ के हाथ का थप्पड़ नही भूले हैं

किरण मीता- माँ आपने पिताजी पे हाथ उठाया

आशा- खुद आग लगाते हैं और खुद उसमें घी भी डालते हैं

हे भगवान इन्हे कुछ अकल दे दीजिए

वीर- अकल दे देंगे तो तुम्हारे अत्याचार कैसे सहेन करूँगा

[यह सुनके आशा का गुस्सा सातवें आसमान पे पहुँच जाता है

और वो रूम से बाहर चली जाती है

किरण- पिताजी आप बड़ी माँ को हर वक़्त परेशान क्यूँ करते हैं

वीर- अरे तुम नही समझोगी

तय्यार रहना कल तुम्हारी होने वाली भाभी को देखने जाएँगे

[अगले दिन सब धर्मेश के लिए लड़की देखने निकल जाते हैं

और सबको लड़की पसंद भी आ जाती है

शादी का महुरत तीन महीने बाद का निकलता है

जब सब लोग घर पहुँचते हैं तो पता नही मीता को क्या सूझता है

वो तालाब के पास चली जाती है

लेकिन पहले ही वहाँ पर कोई था

यह कोई और नही सूरज था

जब सूरज को किसी के आने की आहट होती है तो वो पीछे मूड कर देखता है

तो उसे मीता दिखती है

सूरज को अपने सब भगवान एक बार फिर से याद आजाते हैं

क्यूंकी मीता बड़े ही प्यार से सूरज को देख रही थी

सूरज मीता के पास जाता है और उसका कंधा पकड़ कर हिलाता है

मीता होश में आती है

सूरज- ऐसे मुझे क्यूँ देखती हो

अगर तुम्हारे पिताजी ने तुम्हे मुझे ऐसे देखते हुए देख लिया

तो वो बिना सोचे मुझे जान से मार देंगे

मीता- मुझे भी नही पता कि मैं तुम्हे देख कर खो क्यूँ जाती हूँ

सूरज- मुझे पता है कि तुम मुझसे प्रेम करती हो और इसी लिए तुम मुझे हमेशा देखती रहती हो लेकिन तुम मुझे भूल जाओ

इसी में हम दोनो की भलाई है..,

 
अपडेट 194अ

सूरज की बात सुनके मीता की आँखो से आँसू बहने लगते हैं

और वो नीचे ज़मीन पे बैठ जाती हैं

मीता के आँसू अब हिचकियों में बदल गये थे

सूरज भी मीता के सामने बैठ जाता है

और उसके आँसू पोछता है

सूरज- देखो अभी इतनी तकलीफ़ हो रही है तुम्हे

आगे चलके अगर मुझे कुछ हो जाता है तो तुम क्या करोगी

वैसे भी मैं एक फ़ौजी हूँ

कब जंग शुरू हो जाए और कब मैं उसमें मारा जाउ कोई ठीक नही है

मीता- तो जाओ ना यहाँ मुझे रोते हुए क्यूँ देख रहे हो

तुम तो अंतर्यामी हो ना सब पहले ही पता चल गया तुम्हे

मैं तो जानती भी नही थी कि मैं तुमसे प्रेम करती हूँ

सूरज- जान के क्या करोगी

प्रेम एक वरदान भी है और श्राप भी

प्रेम में ज़िद जब होती है तो वो विष का काम करता है

और अगर प्रेम में त्याग हो तो वोही अमृत बन जाता है

तुम्हे क्या लगता है तुम मुझसे प्रेम करती हो

मैं नही करता हूँ

तुम से ज़्यादा तुम से प्रेम करता हूँ

इसी लिए मैं त्याग कर रहा हूँ

तुम भी त्याग करो

मीता- तुम करो त्याग अपने झूठे प्रेम का

मैं नही करूँगी

मैं अभी जाके अपने घरवालो से कहती हूँ कि मैं किसी से प्यार करती हूँ

फिर देख लेना कि मेरे साथ क्या होता है

सूरज- ऐसा करोगी तो शायद मैं मर ही जाउ

मीता- मैं तो सिर्फ़ इतना ही चाहती हूँ

कि तुम हमेशा मेरे साथ रहो

सूरज- ऐसा नही हो सकता

मीता- क्यूँ नही हो सकता तुम तो पिताजी से डरते भी नही हो

[मीता की बात सुनके सूरज उसकी गोद में सर रखके लेट जाता है

सूरज- जब मैं बहुत छोटा था तब मेरी माँ का देहांत हो गया

पिताजी ने ही मुझे मेरे माँ और बाप दोनो का प्यार दिया

मान लो मैं तुम्हे अपना भी लूँ तो क्या तुम्हार परिवार वाले मुझे अपनाएँगे

मीता- तुम क्यूँ कल के बारे में सोचते हो

मौत तो कभी भी आ सकती है

मैं वादा करती हूँ जब परिवार की बात आएगी तब मैं अपने प्रेम का त्याग कर दूँगी

सूरज- इतना आसान नही होगा और तुम तो एक अल्लहड़ सी प्यारी सी बच्ची हो

जिसे पता ही नही है कि वो जवान हो चुकी है

और उसे अब अपना बचपाना छोड़ देना चाहिए

मीता- मान जाओ ना मैं कभी तुम्हे परेशान नही करूँगी

सूरज- सोच लो एक बार हाथ थाम लिया तो छोड़ूँगा नही

दुनिया इधर से उधर हो जाए

तुम्हे अपने से दूर जाने नही दूँगा

[मीता समझ चुकी थी कि सूरज मान गया है

और उसके आँसू से भीगे हुए चेहरे पे मुस्कान आजाती है

मीता- अच्छा अब हटो मुझे घर जाना होगा

सूरज- पहली बार तुम्हारी गोद में सर रखा हूँ

थोड़ी देर और

या फिर मैं सो जाउ तब चली जाना

[मीता सूरज के सर में अपनी उंगलिया फिराने लगती है

ऐसे ही सूरज और मीता मिलते रहते हैं

धर्मेश की शादी भी हो जाती है

और उसके एक महीने बाद जतिन की शादी तय होती है

धर्मेश के साथ जो उसका दोस्त आया था वो धर्मेश से कहता है कि वो उसकी बहेन मीता से शादी करना चाहता है

धर्मेश अपने पिताजी से बात करता है

वीर बहुत सोच विचार करने के बाद शादी के लिए हां कह देता है

लेकिन उसकी एक शर्त थी कि मीता की शादी होने के बाद वो इसी गाओं में रहेगी

वीर उसे बड़ी हवेली दे देंगे

धर्मेश का दोस्त मान जाता है

इधर सूरज कुछ दिनो के लिए शहर चला जाता है...

 
अपडेट 195

इधर मीता घर पे आके सीधा किचन में जाती है अपनी भाभी के पास

मीता अपनी भाभी के गले लग जाती है

मीता की भाभी और धर्मेश की वाइफ जया

जया- आज अपनी भाभी पे इतना प्यार क्यूँ

ज़रूर कुछ काम होगा

मीता- क्या भाभी मैं आपको ऐसी लगती हूँ

जया- पता है ना देवर्जी की शादी अगले महीने पक्की हुई है और तेरी भी

मीता- मेरी भी क्या

जया- तेरी शादी तय हुई है इनके दोस्त से

[अपनी भाभी की बात सुनके मीता को ऐसा लगता है जैसे उसके सिर पे पहाड़ टूट पड़ा हो

मीता की आँखो से धडा धड आँसू छलक्ने लगते हैं

और वो किचन से निकलके अपने कमरे की तरफ बढ़ जाती है

जया अपनी ननद को देख कर समझ जाती है कि कोई और बात है

मीता अपने कमरे में पहुँचके फुट फुटके रोने लगती है

ऐसे ही एक हफ़्ता बीत जाता है

मीता अपने कमरे में बहाल पड़ी रहती है

एक हफ्ते से आशा अपनी बेटी की हालत देख रही थी

वो अपनी बेटी से के रूम में जाती हैं

और अपनी बेटी के सर पे हाथ फेरती है

आशा- क्या हुआ लाडो क्यूँ ऐसा हाल बना ली है अपना

1 हफ्ते से ठीक से खा भी नही रही है

बता ना अपनी माँ को क्या हुआ है तुझे

मीता- माँ मैं शादी नही करूँगी

आशा- शादी तो हर लड़की को करनी पड़ती है

मेरी शादी तो बहुत कम आयु में हुई थी

इसमें इतना दुखी क्यूँ हो रही है

[अपनी माँ की बात सुनके मीता एक दम चुप हो जाती है

मीता- माँ मैं किसी से प्यार करती हूँ

[मीता की माँ आव देखती है ना ताव और मीता को थप्पड़ मार देती है

फिर मीता के गाल सहलाने लगती है

आशा- यह बात सच है या झूठ अपने सीने में दफ़न कर ले

क्यूंकी तेरी शादी तय हो चुकी है

150 गाओं में निमंत्रण दिया जा चुका है

अपने बाप की इज़्ज़त को नीलाम नही करना

मीता- माँ मैं उसके बिना नही जी पाउन्गी

आशा- मैं तेरी पिता के भाई की विधवा थी

जब तेरे पिता ने मुझसे शादी की तो मुझे उनसे वो सम्मान और प्यार मिला जिसके बारे में मैं कभी सपने में भी ना सोची थी

मैं उनकी दूसरी पत्नी हूँ

लेकिन उन्हो ने मुझे पॅल्को पे बिठाए रखा

ऐसे प्यार और सम्मान का बदला तू अपने बाप के को इस तरह अगर देगी

अगर तेरी डोली इस घर से नही गयी तो मेरी अरथी इस घर से जाएगी

क्यूंकी मैं अपने पति की आत्मसम्मान को ठेस नही पहुँचने दूँगी

तू अगर उस लड़के से इतना ही प्रेम करती है तो दे देना अपनी माँ के प्राणो की आहुति

[यह कहके मीता की माँ कमरे से बाहर चली जाती है

मीता कुछ समझ ही नही पाती है

मीता- माँ मैं आपके लिए अपने प्रेम का त्याग करूँगी

लेकिन मेरा विवाह होते ही मैं अपनी जान दे दूँगी

क्यूंकी किसी और के हाथ सूरज की मीता के जिस्म को छुए

तो मीता अपनी जान दे देगी

ऐसे ही एक और हफ़्ता बीत जाता है

सूरज शहर से वापस आजाता है

पर मीता उससे मिलने नही आती तो सूरज अपने घर पे जाता है

वहाँ उसे अपने बड़े भाई से पता चलता है कि मीता की शादी का न्योता आया था

सूरज के पैरो तले ज़मीन खिसक जाती है

सूरज तुरंत अपने घर से दौड़ता है और पहुँचता है हवेली के बाहर

नौकर को बोलता है कि ठाकुर साहब से मिलना है

वीर सूरज को अंदर बुलवाता है

सूरज बहुत ही डरा हुआ था

ठाकुर साहब से नही

मीता से

क्यूंकी मीता कही थी मीता अगर सूरज की नही हुई तो किसी और की भी नही होगी....

 
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