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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

थोड़ा सा तेल अपने लंड पे लगाया,और माला को इशारा किया,माला मेरे लंड को मुठियाने लगी

कुछ देर बाद माला की चूत पूरी तरह से चिकनी हो गयी

फिर मैं माला की टाँगो के बीच आया,और माला की चूत पे अपना लंड सेट किया

माला थोड़ा डर रही थी

मैं माला के होंठो पे अपने होंठ रखा,और माला की चूत में अपना लंड डालने के लिए दबाव डाला पर कोई फायदा नही हुआ,मैं माला के होंठो पे अपने होंठ रखके अपने लंड को पकड़ा और धक्का मारा,मेरे लंड का सुपाड़ा माला की चूत में चला गया,माला दर्द से तड़पने लगी,मैं माला

के होंठ चूस्ते हुए उसके बूब्स दबाने लगा,कुछ देर बाद वो शांत हुई

अब वक़्त था माला को थोड़ा और दर्द देने का,मैने एक और धक्का मारा,मेरा आधा लंड माला की सील तोड़ता हुआ अंदर चला गया,माला की

चूत से खून बहने लगा,माला रोने लगी,मैं लगातार उसके होंठ चूसने लगा

साथ ही उसके बूब्स दबाने लगा

थोड़ी देर बाद मैने आधे लंड को ही धीरे-धीरे आगे पीछे करना सुरू किया ओर माला दर्द से सिसकने लगी..

माला-दिलीप¡*आहह..दर्द हो रहा¡*आहह¡¯¡¯

दिलीप- बस माला..थोड़ा रूको..सब ठीक होगा¡*
 
थोड़ी देर बाद मैने आधे लंड को ही धीरे-धीरे आगे पीछे करना सुरू किया ओर माला दर्द से सिसकने लगी..

माला-दिलीप¡*आहह..दर्द हो रहा¡*आहह¡¯¡¯

दिलीप- बस माला..थोड़ा रूको..सब ठीक होगा¡*

मैं अपना काम करता रहा और 5 मिनिट के बाद माला नॉर्मल हो गई¡*उसकी आँखे आँसुओ से भर गई थी¡*मैने फिर धक्का मारा ओर पूरा लंड अंदर डाल दिया¡*.

माला-उहूहू..म्मूऊउम्मय्ययी¡*.एम्मॅर..आहह..गगाइइइ¡*.म्मयमायीयी

मैं माला के बूब्स सहलाते हुए उसे किस करने लगा ऑर धीरे धीरे लंड को हिलाने लगा¡*.

करीब 10 मिनट की मेहनत के बाद माला नॉर्मल हुई ऑर बोली...मैने लंड को निकाल कर माला की चूत देखी तो वो लाल हो गई थी....

माला-अब करो¡*दर्द कम है¡*

मैं- ठीक है मेरी रानी..मैं आराम से करता हूँ¡*

माला-ह्म

मैने फिर से लंड डाला और प्यार से माला को चोदना सुरू किया ऑर थोड़ी देर के बाद स्पीड बढ़ाई¡अब माला भी दर्द के साथ मस्ती मे सिसक रही थी¡*

दिलीप- माला..अब ठीक है¡*

माला-आहह..हाँ..दिलीप¡*करो¡आहह

दिलीप- ये लो¡*..प्यार से¡*यीहह

माला- हाँ..दिलीप¡*डालो¡*.आहह

मैने अपनी स्पीड थोड़ी और बढ़ा दी¡*

दिलीप- ये ले माला¡*अब मज़ा करो..

माला-आहह..दिलीप¡*डालो¡*ज़ोर से¡*आहह¡*

दिलीप- मज़ा आ रहा है¡*

माला- हहा¡*.दिलीप¡*बहुत..आहह¡*डालो

मैने थोड़ी देर बाद फुल स्पीड मे माला को चोदना सुरू किया ऑर माला ने भी अपनी गान्ड को उछाल कर लंड का स्वागत करना सुरू किया¡*.

दिलीप- ये ले. मेरी माला..अपने पहले प्यार का ले..

दिलीप-हाँ...दिलीप...फाड़ दो....अब...ज़ोर से...आहह..आहह

दिलीप- ये ले......मज़ा आया...

माला-आहह..दिलीप¡*ज़ोर से..ओरर..तीजेज्ज

मैं तेज़ी से माला को चोद रहा था ऑर माला झड़ने लगी ऑर उसके चूत रस के साथ खून मिक्स हो कर बहने लगा¡*.

माला-दिलीप¡*आहह..मैम्म्म¡*पानी¡*निकला¡*.आअहह

दिलीप- यस..निकाल..दे¡*.ओर निकलेगा¡*.ये ले¡*.

जैसे ही माला झड गई तो मैने लंड को चूत से बाहर निकाल लिया तो देखा कि चूत खून से लाल हो गई थी ऑर पूरी खुल चुकी थी¡*माला भी

अब थोड़ा नॉर्मल थी¡*.

मैने माला को घोड़ी के पोज़ मे आने को कहा ऑर उसके पीछे से उसकी चूत मे लंड डाल दिया¡*.इस बार मैने दो धक्को मे ही पूरा लंड चूत मे डाल दिया¡*.
 
माला-आहह..दिलीप¡*आअराम से¡*

दिलीप- अब आराम हो गया माला¡*अब बस मज़े कर¡*

और मैं स्पीड से माला को घोड़ी की तरह चोदने लगा¡*

माला भी अब मस्त हो कर सिसकने लगी थी¡*

दिलीप- ये ले मेरी माला ¡*.अच्छा लगा¡*

माला-आअहह..दिलीप...मस्त है....ज़ोर से....डालूओ

दिलीप- हाँ..ये ले...

माला-आहह..आह..दिलीप...फाड़ दूओ....मज़ाअ...आहह....आ...गायाअ...

दिलीप- अभी ओर मज़े करवाउन्गा..आगे...

दिलीप-आहह¡*¡*मैं¡*..भी करना..चाहती¡*आहह¡*.हुउऊउ

मैं पूरी स्पीड मे 5 मिनिट माला को चोदता रहा ऑर माला फिर से झड़ने लगी¡*

माला- दिलीप¡*..मेरा¡*पानी,¡*आहह¡*..आहह¡*निकल¡*.रहा.....

माला झड़ने लगी ऑर उसकी चूत मे पानी के साथ मेरा लंड अंदर बाहर होते हुए फ्यूच फॅक करने लगा¡*.ऑर चुदाई का महॉल गरम हो गया¡*

माला-ओह्ह..दिलीप¡*ह¡*आहह

दिलीप- येस्स..माला¡*यस¡*

माला-दिलीप.आआ¡*..आहह..आहह¡*आहह¡*.

पूरे रूम मे अब आवाज़े गूंजने लगी

मैं भी अब झड़ने के करीब था

तो मैं पूरी स्पीड से माला को चोदने लगा

और कुछ ही देर में मैं माला की चूत में झड़ने लगा...

और कुछ ही देर में मैं माला की चूत में झड़ने लगा

और साइड में लेट गया

कुछ देर बाद मैं बाथरूम गया और नाहके अपने कपड़े पहेन लिया

माला के रूम में जाके देखा तो वो सो चुकी थी

मैं उसके माथे को चूमा और अपने घर की तरफ चल दिया

मेरे जाने के बाद माला अपनी आँखें खोली

और रोने लगी
 
जब मैं घर पहुँचा तो मेरी तीनो मुझे अजीब नज़रो से देखने लगी,मैं भी क्या कर सकता था

खाने के वक़्त विदू खाना परोस रही थी

जब विदू मेरी प्लेट में खाना डालने लगी

तो वँया बोली,,दीदी और डालो ना दिलीप की प्लेट में आज इसने बहुत मेहनत की है

बड़ी मामी- क्या मेहनत की है दामाद जी ने

वँया- दामाद जी से ही पूछ लीजिए

बड़ी मामी- दिलीप तुम बताओ

दिलीप- मामी जिसने यह बात कही है उससे ही पूछिए

बड़ी मामी- वानु तू ही बता दे ना बेटी

[बेचारी वानु की बोलती बंद हो गयी

फिर हम सबने खाना खाया,और मैं अपने रूम में आ गया

कुछ देर बाद हमारे बॉस देव का फोन आया

दिलीप- बोलिए सर

देव- तेरी मासी का किडनॅप किसने कराया था,तुझे पता है

दिलीप- आप ही बता दीजिए सर

देव- खड़ा है तो बैठ जा

दिलीप- बैठ गया अब बोल

देव- तेरी सिमिता मासी है इसके पीछे

दिलीप- अच्छा मज़ाक है

देव- तेरे अलावा मैं किसके साथ फ्रेंड्ली बात करता हूँ

दिलीप- लेकिन वो ऐसा क्यूँ करेंगी

देव- यह तो तुझे ही पता करना पड़ेगा

दिलीप- पर कैसे

देव- एक और बात तेरी सिमिता मासी सिर्फ़ एक मोहरा है

इस सब के पीछे कोई और है

दिलीप- थॅंक यू सर

[फिर फोन कट हो गया,और मैं अपना सिर पकड़के बैठ गया

मैं तुरंत किरण मौसी के रूम में गया

वो मुझे देखके चौंक गयी

दिलीप- सिमिता मासी मुझसे नफ़रत क्यूँ करती हैं

किरण मौसी- क्या हुआ दिलीप

दिलीप- आप मेरे सवाल का जवाब दीजिए

किरण मौसी- दीदी तुझसे नफ़रत क्यूँ करेंगी

दिलीप- मासी मैं सिर्फ़ आवाज़ सुनके बता सकता हूँ,वो सच बोल रहा है,या झूठ

किरण मौसी- मुझे नही पता

[मैने किरण मौसी का हाथ पकड़के अपने सिर पे रख दिया

दिलीप- मेरी कसम ख़ाके कहिए

[किरण मौसी अपना हाथ झट से हटा ली
 
किरण मौसी- जिस दिन पिताजी और माँ की मौत हुई थी,उस दिन एक और जान गयी थी

दिलीप- किसकी

किरण मौसी- दीदी के पेट में जो बच्चा था

दिलीप- डाइयरी में कहाँ कुछ ऐसा लिखा था

किरण मौसी- दीदी जीजा जी और मैं ही जानती हूँ

दिलीप- इसी लिए वो मुझसे बात नही करती हैं

किरण मौसी- वो सोचती है कि यह सब तेरे पिता की वजह से हुआ

[मैं अपने रूम में आ गया

सिर्फ़ इसी लिए सिमिता मासी ने मेरे दुश्मन का साथ दिया

लगता है कोई उनका ग़लत इस्तेमाल कर रहा है

कुछ देर बाद विदू मेरे रूम में आई

और मेरे पास बैठ गयी

दिलीप- आप बड़े मामा को बोलिए कि कुछ दिन के लिए आप मेरे साथ सिमिता मासी के घर जाना चाहती हैं

विदू- सिर्फ़ हम दोनो

दिलीप- हां सिर्फ़ हम दोनो,और मुझे यह भी पता है कि आप मुझसे यह भी नही पूछेंगी,कि अचानक मैं ऐसा क्यूँ कह रहा हूँ

विदू- आप को बताने की ज़रूरत नही है

हां लेकिन वानु को कौन समझाएगा

दिलीप- उस चुहिया को मैं देख लूँगा

विदू- कब जाना है

दिलीप- कल

[और विदू जाने लगी

मैं उसका हाथ पकड़के अपनी तरफ खींचा

दिलीप- अरे मेरी जान पहले गुडनाइट किस तो दीजिए

[विदू शरमाते हुए मेरे होंठो पे किस करके चली गयी
 
विदू जाने लगी

मैं उसका हाथ पकड़के अपनी तरफ खींचा

दिलीप- अरे मेरी जान पहले गुडनाइट किस तो दीजिए

विदू शरमाते हुए मेरे होंठो पे किस करके चली गयी

फिर मैं वँया के रूम में गया चुहिया पढ़ाई कर रही थी

मैं उसके पास बैठ गया और उसे देखने लगा

दिलीप- कल मैं और विदू सिमिता मासी के यहाँ जा रहे हैं

वँया- क्यूँ

दिलीप- बस ऐसे ही

वँया- मैं भी चलूंगी

दिलीप- पढ़ाई कौन करेगा

वँया- तुम भी तो जा रहे हो

दिलीप- जल्द ही आजाउन्गा

वँया- सब जानती हूँ,सब से ज़्यादा तुम दीदी से ही प्यार करते हो

दिलीप- यह तो सच कह रही हो तुम

[वँया मुझे मारने लगी

मैने वँया को अपने सीने से लगा लिया

तभी एलीना रूम में आई

एलीना- सारा प्यार उसी पे लूटा दो

दिलीप- अब तुम भी शुरू हो गयी

एलीना- सच ही कह रही हूँ

दिलीप- तू चल रूम में तुझे बता ता हूँ

एलीना- यही पे बताओ जो बताना है

दिलीप- तुम कल से वँया को कॉलेज छोड़ने जाओगी,और लेके भी आओगी

एलीना- इसके बदले मुझे क्या मिलेगा

दिलीप- पास तो आओ

एलीना- नही मेरे साथ चलो

वँया- क्यूँ

तुम कहीं नही जाओगे

एलीना- तुम चल रहे हो कि नही

वँया- तुम नही जाओगे

दिलीप- चुप करो दोनो

एलीना तुम इधर आके सो जाओ

और तू इधर सो मेरी चुहिया

और मैं बीच में सोता हूँ

[फिर क्या था बीच में मैं सोया,एक साइड वँया और एक साइड एलीना

लेकिन मुझे क्या पता था,आज मेरी ऐसी तैसी करने वाली थी यह
 
रात में हम तीनो सो गये कुछ देर बाद मैं नींद में ही करवट लिया और वँया को अपनी बाहो में भर लिया अगले ही पल मेरे पिच्छवाड़े पे किसी ने चींटी काटी,मेरी आँख खुल गयी

मैने देखा एलीना सोई हुई थी,मुझे अजीब लगा

फिर मैं सो गया

एक बार फिर मैं नींद में करवट लेके एलीना को अपनी बाहो में भर लिया

एक बार फिर किसी ने चींटी काटी,मेरी आँख खुल गयी

अब मुझे गुस्सा आने लगा था

दोनो मिलके मेरी ले रही थी

लेकिन मैं कर भी क्या सकता था

मैं दोबारा सो गया

इस बार मैं आराम से सोया,सुबह जब मेरी आँख खुली तो वँया मेरी बाहो में थी,और एलीना मुझे पीछे से गले लगाए हुई थी...

सुबह जब मेरी आँख खुली तो वँया मेरी बाहो में थी,और एलीना मुझे पीछे से गले लगाए हुई थी

मैं उठके बाथरूम गया नाहके कपड़े पहना फिर वँया और एलीना को जगाया

एलीना अपने रूम में चली गयी,मैं अपने रूम में आया

कुछ देर बाद हम सबने नाश्ता किया

बड़े मामा मुझे घूर घुरके देख रहे थे

फिर मैं अपने रूम में आया,एलीना और वँया मेरे रूम में आई और मेरे गले लग गयी फिर एलीना वँया को लेके कॉलेज चली गयी

..................................
 
करीब 10 बजे हम कार में निकले

दिलीप- आपने सिमिता मासी को फोन किया कि हम आ रहे हैं

विदू- आपने कहा था फोन करने को

दिलीप- नही

विदू- जब हम पहुँच जाए मुझे उठा दीजिएगा

[और विदू मेरी कंधे पे रखके आँखें बंद कर ली

करीब 3 घंटे बाद मैने एक जगह कार रोकी

मैं और विदू एक होटेल के पास रुके और कुछ खाने लगे,जब हम खा रहे थे,तब एक आदमी आया और मेरी कार की डिकी खोलके उसमें

एक बॅग रख दिया

फिर से हमारा सफ़र शुरू हो गया

2 घंटे बाद हम सिमिता के घर पहुँचे

सिमिता मौसी का घर भी काफ़ी बड़ा था

विदू ने डोरबेल बजाई

कुछ देर बाद गेट खुला और सामने प्रीति खड़ी थी

जो उच्छलते हुए विदू के गले लग गयी

सिमिता मौसी- कौन है प्रीति

प्रीति- विद्या दी आई हैं माँ

[यह कहते हुए प्रीति मेरे गले लग गयी

प्रीति- आज मैं बहुत खुश हूँ आप आए

दिलीप- तुम्हारे लिए तो आया हूँ

प्रीति- झूठ मत बोलिए

[फिर विदू और प्रीति अंदर चली गयी

और मैं कार से सामान निकालके अंदर ले गया

विदू और सिमिता मौसी एक दूसरे से बात कर रही थी

मैं मासी के पैर छुआ

मासी सर पे हाथ रखके बोली,हमेशा खुश रहिए

प्रीति मुझे पानी लाके दी

मैं पानी पी लिया

प्रीति- आप मेरी मनझली भाभी और छोटी भाभी को नही लाए

दिलीप- आपकी मनझली भाभी को पढ़ना है,और आपकी छोटी भाभी को उसका ख्याल रखना है

प्रीति- आप मेरे रूम में चलिए मैं आपको अपना रूम दिखाती हूँ

[मुझे यकीन नही हो रहा था,जो प्रीति मुझसे सिर्फ़ एक बार बात की थी,वो आज मुझपे इतना प्यार जता रही है

मैं उसके साथ उसके रूम में गया

वो मुझे अपना रूम दिखाने लगी
 
मुझे यकीन नही हो रहा था,जो प्रीति मुझसे सिर्फ़ एक बार बात की थी,वो आज मुझपे इतना प्यार जता रही है

मैं उसके साथ उसके रूम में गया

वो मुझे अपना रूम दिखाने लगी

दिलीप- आज बड़ा प्यार आरहा है अपने भाई पे

प्रीति- क्यूँ नही आ सकता

आप से कभी बात नही की इसका मटकब यह तो नही है

कि मैं आप से प्यार नही करती

दिलीप- उदास क्यूँ होती हो

और तुम्हारी बड़ी बहेन कहाँ हैं

प्रीति- अपनी फ़्रेंड के यहाँ गयी है

[उसके बाद प्रीति मुझे अपनी पसंद नापसंद के बारे में बताने लगी

दिलीप- आइस क्रीम खाओगी

प्रीति- हां

दिलीप- चलो फिर

[मैं और प्रीति रूम से बाहर आए

प्रीति- माँ मैं भैया के साथ आइस क्रीम खाने जा रही हूँ

दिलीप- आप चेंज करके आइए जल्दी से

विदू- आप जाइए मैं बहुत थक गयी हूँ

[फिर मैं और प्रीति आइस्क्रीम पार्लर पहुँचे

प्रीति और मैं आइस्क्रीम खाने लगे

हम आइस्क्रीम ख़ाके पार्लर से निकले और उसके बाद सिमिता मौसी के घर पहुँचे

वैसे अब मैं समझ गया था कि प्रीति सच में मुझे इतना अपनापन दिखा रही है

विदू और सिमिता मौसी दोनो ने मिलके खाना बनाया था

रात के 8 बज चुके थे और प्रिया अभी तक घर नही आई थी

विदू मुझे एक रूम में लेके गयी

विदू- यह है हमारा रूम

अब आप थोड़ा फ्रेश हो जाइए

दिलीप- मुझे अभी प्यार करना है

[विदू की बोलती बंद हो गयी,वो मुझे फटी आँखो से देखने लगी

दिलीप- ऐसे क्या देख रही हो

मैने कुछ ग़लत कह दिया क्या

विदू- नही नही वो मैं

दिलीप- वो मैं क्या

विदू- आप गुस्सा मत कीजिए

दिलीप- आप मुझे प्यार करने देंगी कि नही

विदू- जी

[मैने विदू को अपने सीने से लगा लिया
 
और उसके पूरे चेहरे को चूमने लगा,उसकी आँखो को उसके गाल को उसकी नाक को उसके माथे को

दिलीप- मैं इस प्यार की बात कर रहा था

[फिर विदू चली गयी

कुछ देर बाद विदू आई

कुछ परेशान लग रही थी

विदू- प्रिया अभी तक घर नही आई है

आप प्रीति के साथ जाके देखिए ना

दिलीप- रोज कितने बजे आती है

विदू- 7 बजे तक

दिलीप- ठीक है जाता हूँ

[फिर मैं प्रीति के साथ अपनी कार में बैठा

हम प्रिया के जितने भी फ़्रेंड थे उनके घर गये,लेकिन उनका यही कहना था,कि आज कॉलेज के बाद हम ने उसे नही देखा

प्रीति की शकल अब रोने जैसी हो गयी थी

दिलीप- कोई और जगह है जहाँ वो जा सकती है

प्रीति- सब जगह देख चुके हैं

दिलीप- वो आज या कल कही जाने की बात कर रही थी

प्रीति- नही

दिलीप- अच्छे से याद करो

प्रीति- नही हम सब जगह देख चुके हैं

दिलीप- तुमने उसके मुँह से किसी जगह का नाम सुना है

[प्रीति अपने दिमाग़ पे ज़ोर डालने लगी

प्रीति- एक जगह है

[फिर उस जगह जाने के लिए प्रीति मुझे रास्ता बताने लगी,करीब 20 मिनिट बाद हम वहाँ पहुँचे

यह फार्महाउस था जहाँ पार्टी हो रही थी

फार्महाउस के गेट पे 4 सेक्यूरिटी गार्ड खड़े थे

दिलीप- तुम कार में ही बैठो

[मैं फार्महाउस मे जैसे ही अंदर घुसने की कोशिश किया सेक्यूरिटी ने मुझे रोक लिया

दिलीप- मुझे अंदर जाना है

सेक्यूरिटी- पास है

दिलीप- पास तो नही लेकिन पैसा है वो भी दो लाख

[सब की आँखें चमक गयी,मैने दो लाख रुपया जेब से निकालके उन्हे दिया

और अंदर जाके प्रिया को ढूँढने लगा,एक जगह मुझे प्रिया दिखी,मैं उसके पास गया,उसने काफ़ी पी रखी थी,कपड़े ऐसे पहने हुए थे,मैं प्रिया

को गोद में उठाया और आगे बढ़ने लगा

लेकिन एक लड़के ने मुझे रोक दिया और बोला,इतनी मुश्किल से यह हमारे हाथ आई है,तू इसे कहाँ ले जा रहा है

आज तो हम इस बला की खूबसूरत कली को फूल बनाएँगे...
 
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