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"वो कल कोई ज़रूरी काम तो नही कर रहा कोई?" खाने के वक्त आज रामेश्वर जी भी वही बैठे थे और अर्जुन से बात शुरू करते उन्होने पूछा.
"बताइए दादाजी. कही जाना है क्या?" अर्जुन तो यही सोच रहा था कि अलका दीदी का इम्तिहान तो परसो है और ऋतु दीदी का उस से अगले दिन. तभी तो मंजुला को उसने हा बोल दिया था चलने के लिए.
"वो कल एक बार बड़ी मार्केट चले जाना टाइम मिले तो. तेरी बॉक्सिंग की ड्रेस लेनी है और वही पंसारी से ये समान भी लेते आना." एक पर्ची उन्होने उपर की जेब से निकाल कर दी और साथ मे 2000 रुपये.
"वो दादाजी हमें भी कुछ चाहिए था." ये अलका दीदी की आवाज़ आई जो सामने ऋतु दीदी के साथ ही बैठी थी.
"बोलो लक्ष्मी बेटा. जो भी चाहिए बताओ." दादा जी ने प्यार से कहा तो अलका दीदी ने ऋतु दीदी की तरफ देखा जैसे उनसे इशारो मे कुछ पूछ रही हो.
"ट्रेडमिल." ऋतु दीदी ने इतना बोला और फिर चुप हो नीचे देखने लगी.
" ट्रेडमिल? तुम वो दौड़ने वाली मशीन की बात तो नही कर रही कही बेटा?" चौंकते हुए रामेश्वर जी ने कहा तो दोनो सहमी सी हाँ मे सर हिलाने लगी.
"हाहाहा. अच्छी बात है ये भी लेकिन वो ये कहाँ ला पाएगा. अर्जुन मार्केट के प्रवेश द्वार पर ही जीवन की खेल के समान की दुकान है. उसको बोल देना की पंडित रामेश्वर शर्मा के घर एक ट्रेडमिल भिजवा दे. और बाकी बात फोन पर कर लेगा." एक तरफ से ऋतु दीदी और एक तरफ से अलका दीदी ने दादा जी झप्पी डाल ली.
"दादा जी आप बेस्ट हो. थॅंक यू सो मच." दोनो बस यही बोलने लगी
तो रामेश्वर जी हंसते हुए ही बोले. "अररी मेरी बच्चियो ने इतनी अच्छी चीज़ की फरमाइश करी है भाई, ये नलायक तो सड़क पर दौड़ता है लेकिन तुम दोनो ने सही बात करी. और फिट होना तो सबसे ज़रूरी है."
कौशल्या देवी जी रोटी प्लेट मे रखते हुए ही बोली, "कल को वो बंदूक माँगेंगी फिर भी कह देना के अच्छी बात है." वो ऐसा कभी नही बोलती थी पता नही क्या सोच कर उन्होने ये कहा.
"वो तो भागवान अब तुम्ही दिला सकती हो. मैं तो अदना सा हवलदार हूँ थानेदारनी का." उनकी बातों पर सब हँसने लगे लेकिन दादी तो आज कुछ सोच के ही बैठी थी.
"ये दोनो पहले ही घर का कोई काम नही करती. शादी होगी फिर घरवाले को क्या खिलाएँगी? माधुरी का रिश्ता तो इस बार मैं करके ही आउन्गी इस बार कृशन ने एक लड़का देखा है. फिर उसके जाने तक इनको काम तो सीखना पड़ेगा या वो शादी तक घिसटी रहेगी?"
कौशल्या जी का सख़्त मिज़ाज देख कर दोनो बहनो का मूह उतर गया था.
"ये दोनो जो चाहे वो करेंगी. एक ने डॉक्टर बन कर घर का नाम रोशन करना है दूसरी ने एम बी ए करके बाहर जाना है. 2 कामवाली रख लो घर मे लेकिन तुम इन्हे कुछ नही कहोगी." रामेश्वर जी नाराज़गी से बोलकर चुप हो गये
लेकिन ऋतु अलका ने जब आपस मे ताली मारी तो उन्होने अपनी घरवाली को भी हंसते देखा. "ये शैतान की नानी है दोनो. खुद इन्होने कहा था मुझे आपको ये बोलने के लिए और आपने भी इनका साथ देकर दिखा दिया की घर मे ये 2 आपकी जान क्यो है." और हंसते हुए चूल्हे की ओर चल दी जहा ललिता जी और लोगो के लिए प्लेट लगा रही थी और रेखा जी रोटी सेक रही थी.
"इतना आगे का कैसे सोच के रखती हो तुम?" रामेश्वर जी ताज्जुब से बोले.
"वो आपने ही कहा था ना दादाजी, आज के साथ आने वाला कल भी तयार रखकर चलो.दादी ने जब कहा के अब आप लोग दीदी का रिस्ता पक्का करने वाले हो और हम को घर का काम करना पड़ेगा तो मैने उन्हे बोल दिया था कि हमारे दादाजी कामवाली रखवा देंगे लेकिन हमारी पढ़ाई के बीच मे किसी को नही आने देंगे. और दादी ने शर्त लगाई थी अब वो हार गई." ऋतु ने चहकते हुए कहा और अलका के गले लग गई.
"तो थानेदारनी जी शर्त मे क्या हार गई आप?" रामेश्वर जी ने अपनी बीवी को छेड़ते कहा तो उन्होने सामने से कहा, "वो मूई दौड़ने वाली मशीन पर पहन-ने वाले कपड़े और जूते."
एक बार फिर सब हंस दिए. अर्जुन तो बस अपने घर को देख रहा था जो हमेशा इतना खिला खुश रहता था. और जब किशनचन्द शर्मा
का जीकर हुआ तो वो अपने दादाजी से बोला. "गाँव वाले दादाजी आएँगे यहा या आप जाएँगे वहाँ?"
"तेरे विनोद चाचा के कल लड़का हुआ है. 6 दिन बाद पूजा है और फिर गेहूँ भी तयार है. उसने तो कहा था सबको आने के लिए लेकिन तेरी दादी ने कहा के
ऋतु, अलका तो अभी जा नही सकती और पीछे संजीव भी है. फिर प्रियंका और आरती भी होंगी यहा तो सिर्फ़ घर के बड़े ही जा रहे है. माधुरी और कोमल
को साथ लेकर." रामेश्वर जी ने खाना ख़तम करते ये कहा.
"मतलब ये हुआ की आप, दादीजी, ताऊ जी-ताईजी , मेरी मा, माधुरी दीदी, कोमल दीदी और मैं?" अर्जुन ने चहकते हुए कहा तो दादाजी ने उसकी शकल देखते कहा
"तू यही रहेगा और तेरा बाप भी जा रहा है वहाँ पे. गर्मी की छुट्टियों मे चला जइयो गाँव अभी तुझे इस शहर से एक दिन के लिए भी कही भेजना. वैसे भी अगर हम 1-2 दिन के लिए जाते तो भी बात थी. वहाँ तो पूरा हफ़्ता लग जाएगा. लड़के वाले भी आएँगे, फिर कुलदेवी के मंदिर जाना है और ज़मीन के कागज का भी कुछ काम है कचहरी मे." और उठ गये वहाँ से.
"कब जा रही हो दादी आप लोग?" अर्जुन ने उदास स्वर मे ये बात कही तो दादी जी हंस पड़ी. "बेटा नरेन्दर आ जाए फिर जाएँगे. और देख तेरी भलाई के लिए ही कहा है तेरे दादा जी ने."
"और पापा वहाँ कैसे जाएँगे. वो तो छुट्टी करते नही?" थोड़ा हैरान होते कहा उसने
"उसका बाप बुलाए तो उसको भी जाना पड़ता है." हँसती हुई सी वो अंदर की ओर चल दी अपनी थाली हाथ मे लिए.
अर्जुन ने देखा तो माधुरी दीदी बार बार उसकी तरफ ही देख रही थी. जैसे कोई बात करना चाहती हो उस से. अर्जुन ने ध्यान दिया तो उंगली के इशारे से वो उपर का इशारा कर रही थी. उसने सिर्फ़ हल्के हा मे सर हिला दिया दीदी को देखते हुए. ऐसे ही सब खाना खा चुके तो कौशल्या जी ने अलका को अर्जुन को बुलाने भेजा जो अपने कमरे मे थे उपर.
अलका दीदी अर्जुन के कमरे की ओर चल दी. इस समय एक हल्का खुल्ला सूती कुर्ता और खुली सलवार मे पतंग सी उड़ती अलका दीदी जा पहुँची उपर जहा अर्जुन कोई किताब बड़े ध्यान से पढ़ रहा था सोफे पर अकेला बैठा. कुछ देर तो अलका दीदी ने देखा की ये सच मे ही पढ़ रहा है या वैसे टाइम पास कर रहा है लेकिन उसको थोड़ी देर बाद पन्ना पलट ते देखा तो दबे पाव उसके पीछे जा खड़ी हुई और जैसे ही उसकी तरफ अपने हाथ बढ़ाए, अर्जुन ने साइड हो कर उनके दोनो हाथ पकड़ अपने ही उपर गिरा सा लिया.
"मेरे कान हर तरफ रहते है दीदी और फिर आपके हाथ तो आ भी रोशनी की तरफ से रहे थे." बोलता हुआ वो उनके चेहरे पर झुक गया. 1 मिनिट बाद जब दोनो के होंठ अलग हुए तो अलका दीदी जैसी प्यासी सी उसको देखने लगी. "आप शायद किसी काम से आई थी क्योंकि इस समय अगर मेरे पास मिलने आती तो ऐसे आने की जगह मेरी गोद मे आ जाती."
अर्जुन की बात सुनकर अलका दीदी अच्छे से उसके गोद मे आकर बैठ गई. "कर ले 2 दिन और इंतजार तू. फिर ये तेरी गर्लफ्रेंड तुझे बताएगी ये शरारत कितनी महँगी पड़ती है." और चूमकर फुर्ती से खड़ी हो गई. "दादी बुला रही है तुझे. चल आजा साथ लेकर आने को कहा है." मुस्कुराती से दरवाजे पर जा खड़ी हुई.
कुछ ही देर मे दोनो ही रामेश्वर जी के कमरे मे थे. अलका तो बिस्तर पर बैठ गई दादी के सिरहाने और अर्जुन खड़ा था.
"हंजी आपने बुलाया मुझे?" दादा-दादी की तरफ देखते पूछा.
"तू यहा बैठ और ये पूरे ख़तम करने है. और लक्ष्मी बेटा तू खुद रसोईघर मे जा और बड़ा गिलास दूध का बना के लेकर आ." कौशल्या जी ने पिस्ता और काजू से आधी भरी कटोरी अर्जुन को थमाते हुए अलका दीदी को दूध लाने को भेजा.
"बताइए दादाजी. कही जाना है क्या?" अर्जुन तो यही सोच रहा था कि अलका दीदी का इम्तिहान तो परसो है और ऋतु दीदी का उस से अगले दिन. तभी तो मंजुला को उसने हा बोल दिया था चलने के लिए.
"वो कल एक बार बड़ी मार्केट चले जाना टाइम मिले तो. तेरी बॉक्सिंग की ड्रेस लेनी है और वही पंसारी से ये समान भी लेते आना." एक पर्ची उन्होने उपर की जेब से निकाल कर दी और साथ मे 2000 रुपये.
"वो दादाजी हमें भी कुछ चाहिए था." ये अलका दीदी की आवाज़ आई जो सामने ऋतु दीदी के साथ ही बैठी थी.
"बोलो लक्ष्मी बेटा. जो भी चाहिए बताओ." दादा जी ने प्यार से कहा तो अलका दीदी ने ऋतु दीदी की तरफ देखा जैसे उनसे इशारो मे कुछ पूछ रही हो.
"ट्रेडमिल." ऋतु दीदी ने इतना बोला और फिर चुप हो नीचे देखने लगी.
" ट्रेडमिल? तुम वो दौड़ने वाली मशीन की बात तो नही कर रही कही बेटा?" चौंकते हुए रामेश्वर जी ने कहा तो दोनो सहमी सी हाँ मे सर हिलाने लगी.
"हाहाहा. अच्छी बात है ये भी लेकिन वो ये कहाँ ला पाएगा. अर्जुन मार्केट के प्रवेश द्वार पर ही जीवन की खेल के समान की दुकान है. उसको बोल देना की पंडित रामेश्वर शर्मा के घर एक ट्रेडमिल भिजवा दे. और बाकी बात फोन पर कर लेगा." एक तरफ से ऋतु दीदी और एक तरफ से अलका दीदी ने दादा जी झप्पी डाल ली.
"दादा जी आप बेस्ट हो. थॅंक यू सो मच." दोनो बस यही बोलने लगी
तो रामेश्वर जी हंसते हुए ही बोले. "अररी मेरी बच्चियो ने इतनी अच्छी चीज़ की फरमाइश करी है भाई, ये नलायक तो सड़क पर दौड़ता है लेकिन तुम दोनो ने सही बात करी. और फिट होना तो सबसे ज़रूरी है."
कौशल्या देवी जी रोटी प्लेट मे रखते हुए ही बोली, "कल को वो बंदूक माँगेंगी फिर भी कह देना के अच्छी बात है." वो ऐसा कभी नही बोलती थी पता नही क्या सोच कर उन्होने ये कहा.
"वो तो भागवान अब तुम्ही दिला सकती हो. मैं तो अदना सा हवलदार हूँ थानेदारनी का." उनकी बातों पर सब हँसने लगे लेकिन दादी तो आज कुछ सोच के ही बैठी थी.
"ये दोनो पहले ही घर का कोई काम नही करती. शादी होगी फिर घरवाले को क्या खिलाएँगी? माधुरी का रिश्ता तो इस बार मैं करके ही आउन्गी इस बार कृशन ने एक लड़का देखा है. फिर उसके जाने तक इनको काम तो सीखना पड़ेगा या वो शादी तक घिसटी रहेगी?"
कौशल्या जी का सख़्त मिज़ाज देख कर दोनो बहनो का मूह उतर गया था.
"ये दोनो जो चाहे वो करेंगी. एक ने डॉक्टर बन कर घर का नाम रोशन करना है दूसरी ने एम बी ए करके बाहर जाना है. 2 कामवाली रख लो घर मे लेकिन तुम इन्हे कुछ नही कहोगी." रामेश्वर जी नाराज़गी से बोलकर चुप हो गये
लेकिन ऋतु अलका ने जब आपस मे ताली मारी तो उन्होने अपनी घरवाली को भी हंसते देखा. "ये शैतान की नानी है दोनो. खुद इन्होने कहा था मुझे आपको ये बोलने के लिए और आपने भी इनका साथ देकर दिखा दिया की घर मे ये 2 आपकी जान क्यो है." और हंसते हुए चूल्हे की ओर चल दी जहा ललिता जी और लोगो के लिए प्लेट लगा रही थी और रेखा जी रोटी सेक रही थी.
"इतना आगे का कैसे सोच के रखती हो तुम?" रामेश्वर जी ताज्जुब से बोले.
"वो आपने ही कहा था ना दादाजी, आज के साथ आने वाला कल भी तयार रखकर चलो.दादी ने जब कहा के अब आप लोग दीदी का रिस्ता पक्का करने वाले हो और हम को घर का काम करना पड़ेगा तो मैने उन्हे बोल दिया था कि हमारे दादाजी कामवाली रखवा देंगे लेकिन हमारी पढ़ाई के बीच मे किसी को नही आने देंगे. और दादी ने शर्त लगाई थी अब वो हार गई." ऋतु ने चहकते हुए कहा और अलका के गले लग गई.
"तो थानेदारनी जी शर्त मे क्या हार गई आप?" रामेश्वर जी ने अपनी बीवी को छेड़ते कहा तो उन्होने सामने से कहा, "वो मूई दौड़ने वाली मशीन पर पहन-ने वाले कपड़े और जूते."
एक बार फिर सब हंस दिए. अर्जुन तो बस अपने घर को देख रहा था जो हमेशा इतना खिला खुश रहता था. और जब किशनचन्द शर्मा
का जीकर हुआ तो वो अपने दादाजी से बोला. "गाँव वाले दादाजी आएँगे यहा या आप जाएँगे वहाँ?"
"तेरे विनोद चाचा के कल लड़का हुआ है. 6 दिन बाद पूजा है और फिर गेहूँ भी तयार है. उसने तो कहा था सबको आने के लिए लेकिन तेरी दादी ने कहा के
ऋतु, अलका तो अभी जा नही सकती और पीछे संजीव भी है. फिर प्रियंका और आरती भी होंगी यहा तो सिर्फ़ घर के बड़े ही जा रहे है. माधुरी और कोमल
को साथ लेकर." रामेश्वर जी ने खाना ख़तम करते ये कहा.
"मतलब ये हुआ की आप, दादीजी, ताऊ जी-ताईजी , मेरी मा, माधुरी दीदी, कोमल दीदी और मैं?" अर्जुन ने चहकते हुए कहा तो दादाजी ने उसकी शकल देखते कहा
"तू यही रहेगा और तेरा बाप भी जा रहा है वहाँ पे. गर्मी की छुट्टियों मे चला जइयो गाँव अभी तुझे इस शहर से एक दिन के लिए भी कही भेजना. वैसे भी अगर हम 1-2 दिन के लिए जाते तो भी बात थी. वहाँ तो पूरा हफ़्ता लग जाएगा. लड़के वाले भी आएँगे, फिर कुलदेवी के मंदिर जाना है और ज़मीन के कागज का भी कुछ काम है कचहरी मे." और उठ गये वहाँ से.
"कब जा रही हो दादी आप लोग?" अर्जुन ने उदास स्वर मे ये बात कही तो दादी जी हंस पड़ी. "बेटा नरेन्दर आ जाए फिर जाएँगे. और देख तेरी भलाई के लिए ही कहा है तेरे दादा जी ने."
"और पापा वहाँ कैसे जाएँगे. वो तो छुट्टी करते नही?" थोड़ा हैरान होते कहा उसने
"उसका बाप बुलाए तो उसको भी जाना पड़ता है." हँसती हुई सी वो अंदर की ओर चल दी अपनी थाली हाथ मे लिए.
अर्जुन ने देखा तो माधुरी दीदी बार बार उसकी तरफ ही देख रही थी. जैसे कोई बात करना चाहती हो उस से. अर्जुन ने ध्यान दिया तो उंगली के इशारे से वो उपर का इशारा कर रही थी. उसने सिर्फ़ हल्के हा मे सर हिला दिया दीदी को देखते हुए. ऐसे ही सब खाना खा चुके तो कौशल्या जी ने अलका को अर्जुन को बुलाने भेजा जो अपने कमरे मे थे उपर.
अलका दीदी अर्जुन के कमरे की ओर चल दी. इस समय एक हल्का खुल्ला सूती कुर्ता और खुली सलवार मे पतंग सी उड़ती अलका दीदी जा पहुँची उपर जहा अर्जुन कोई किताब बड़े ध्यान से पढ़ रहा था सोफे पर अकेला बैठा. कुछ देर तो अलका दीदी ने देखा की ये सच मे ही पढ़ रहा है या वैसे टाइम पास कर रहा है लेकिन उसको थोड़ी देर बाद पन्ना पलट ते देखा तो दबे पाव उसके पीछे जा खड़ी हुई और जैसे ही उसकी तरफ अपने हाथ बढ़ाए, अर्जुन ने साइड हो कर उनके दोनो हाथ पकड़ अपने ही उपर गिरा सा लिया.
"मेरे कान हर तरफ रहते है दीदी और फिर आपके हाथ तो आ भी रोशनी की तरफ से रहे थे." बोलता हुआ वो उनके चेहरे पर झुक गया. 1 मिनिट बाद जब दोनो के होंठ अलग हुए तो अलका दीदी जैसी प्यासी सी उसको देखने लगी. "आप शायद किसी काम से आई थी क्योंकि इस समय अगर मेरे पास मिलने आती तो ऐसे आने की जगह मेरी गोद मे आ जाती."
अर्जुन की बात सुनकर अलका दीदी अच्छे से उसके गोद मे आकर बैठ गई. "कर ले 2 दिन और इंतजार तू. फिर ये तेरी गर्लफ्रेंड तुझे बताएगी ये शरारत कितनी महँगी पड़ती है." और चूमकर फुर्ती से खड़ी हो गई. "दादी बुला रही है तुझे. चल आजा साथ लेकर आने को कहा है." मुस्कुराती से दरवाजे पर जा खड़ी हुई.
कुछ ही देर मे दोनो ही रामेश्वर जी के कमरे मे थे. अलका तो बिस्तर पर बैठ गई दादी के सिरहाने और अर्जुन खड़ा था.
"हंजी आपने बुलाया मुझे?" दादा-दादी की तरफ देखते पूछा.
"तू यहा बैठ और ये पूरे ख़तम करने है. और लक्ष्मी बेटा तू खुद रसोईघर मे जा और बड़ा गिलास दूध का बना के लेकर आ." कौशल्या जी ने पिस्ता और काजू से आधी भरी कटोरी अर्जुन को थमाते हुए अलका दीदी को दूध लाने को भेजा.