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Incest रुतबा या वारिस

आगे...

मै और दादी मन ही मन मे एक दूसरे के और भी करीब आना चाहते थे, दादी भी मेरे लण्ड कि दीवानी हो गयी थी ऐसा लंड पहली बार देखा था और वो भी कई सालों बाद, और सब कुछ बात हम दोनो तक, आज रात मै भी दादी के और नजदीक आकर दादी को तड़फाना चाहता था, मै लेती हुई दादी के पेरो की साइड जाके हतेली पर तेल लगाया, पेट के बल लेटी दादी जो आज उल्टी जान बूझकर लेटी थी, दादी ने अपना पेटिकोट पकड़ उपर अपनी जाँघ तक चूतडो से थोड़ा सा नीचे तक कर दिया, दादी की पीछे से गोरी नंगी टांग देख मेरे लंड मे हलचल होने लगी, मे बोला दादी अगर मै आपको पेरो के बीच बैठ कर अच्छे से मालिश कर पाऊंगा, दादी बोली जैसे तुझे सही लगे वैसे कर ले बेटा, दादी के काले बालो की चोटी नागिन से पीठ और कमर तक पड़ी हुई थी, मैने दादी को बोला दादी थोड़ा पैर चौड़े करलो ना मै बीच मै बैठ जाऊ, दादी ने झट से पेरो को चौड़े कर दिये, दादी भी मुझे पास लाना चाहती थी पूरी तरह से मेरे लंड कि दीवानी हो चुकी थी, मै दादी के पेरो के बीच बैठ गया और तेल से भरी हतेली को दादी की एक जाँघ जहा लगी थी हाथ रखा क्या आप ही मुलायम और मांस भरी जाँघ थी, मेरे लंड मे कसाव हो गया और लंड पूरी तरह तन गया, दादी के पैर चौड़े होने से दादी की पैंटी जो सफ़ेद थी दिखने लगी, मै पैंटी की झलक लेते हुए मालिश कर रहा था, तभी दादी बोली बेटा थोड़ी कमर की भी कर दे बहुत थक गयी हु मै हा दादी मै कर देता हु दादी बोली बिल्कुल अपने दादा की ख्याल रखता है मेरा, मै भी दादी अब दादा तो है नही तो मुझे ही तो ख्याल रखना होगा आपका, मै अपनी दादी को दादा की कमी कभी होने दूंगाः, दादी मेरी बात सुन मस्ती से मुस्करा दी, बोली इतना प्यार करता है अपनी दादी को, मै दादी आप ही तो जो मेरी दोस्त जैसे है हम दारू हुक्का मालिश सब साथ करते है, इतने मै दादी बोली बेटा हुक्का से याद याद कल याद दिलाना, मै बेटी से हुक्का ले लुंगी, हा दादी मै बोला, मैने दादी के बालो की चोटी को साइड में कर दिया, और दादी को बोला अगर दादी आप दोनो पेरो को एक साथ कर लो तो मै सही कर पाऊंगा, दादी समझ गयी की मै उनके चुतड पर बैठना चाहता हु, मै दादी के पेरो के बीच से हटा और दादी ने अपने दोनो पेरो को पास में कर लिया , दादी की जाँघ तक नंगी टांग और पेटिकोट से ढके बड़े बड़े चूतड़ से मेरा लंड पुरा खडा मस्ती मार रहा था,मैने एक टांग उठाकर दादी के चूतडो पर से दूसरी साइड रख रख दादी की जाँघ जहा तक पेटिकोट था वहा पर बैठ अपने घुटनों तक पर बैठ गया, दादी का मुह नीचे की और था, मैने धीरे से लुंगी खोल दी और साइड मे रख दी, मेरा लंड तना हुए खड़ा था, तभी मैने

दोनो हतेली पर तेल डाल दादी की कमर पर रखा, बहुत ही कोमल खाल और मांस से भरी हुई थोड़ी सी, मेरे लंड के नीचे दादी के मस्त चुतड पड़े थे, मैने जैसे ही मालिश करते हुए हाथ को आगे किया मेरा लंड दादी के चूतडो पर टच हुआ, मुझे और मस्ती चढ़ गयी, शायद दादी को भी, दादी बोली आह बेटा आराम सा आ रहा है दादी भी समझ गयी मैने लुंगी नही पहनी है अभी, मै कुछ देर ऐसे ही कमर की मालिश करता रहा और दादी के मस्त चूतडो पर लंड लगाता रहा, तभी दादी मस्ती भरी आवाज में बोली बेटा तूने लुंगी निकाल दी है क्या, मै बोला हा दादी आपकी कैसे पता, दादी बोली बेटा तेरा हथियार मुझे पीछे से टच हुआ इसलिए, मै बोला दादी एक बात बताओ, आज तो मैने लंड की मालिश भी नही की आज कैसे खड़ा हो गया, दादी मस्ता गयी, और बोली बेटा तु जवान है ना, और जवानी मे औरत का टच से ऐसा हो जाता है दादी क्या आपके टच से खड़ा हुआ है मै भोला बनता हुआ बोला, दादी बोली बेटा जब मुझे टच कर रहा है तभी शायद खड़ा हो गया होगा, दादी भी खुश थी की उनका पोता उनको देख लंड खडा करता है, तभी दादी बोली बेटा अब आराम है अब सोते है नही तेरी बुआ, फिर से कहेगी, मेरा तो दिल सा टूट गया मै खडा हुआ लुंगी पहन, दादी के पास सो गया, रात भर मै दादी आराम से सोते रहे,सुबह बुआ चाय लेकर आई, हमने चाय पी, कल की तरह सब काम कर खाना खाने बैठ गये, तभी दादी बोली बेटी रात को कमरे मे हुक्का लगा दिया कर अच्छी नींद आती है, बुआ बोली ठीक है माँ लगा दूंगी, , मै दादी फूफा से मिल खेत मे घूमने चले गये.. Next
 
आगे,,..

हम दोनो खेत मे पहुँच गये, दोनो बात करने लगे, दादी बोली बेटा रात को तूने मुझे देख कर छु कर अपना हथियार क्यों खडा कर लिया, मै बोला दादी पता नही आपको देख कर और टच होते ही पता नही क्यु खडा हो गया, दादी बोली बेटा ये तो अच्छी बात नही, मै तेरी दादी हु, सिर्फ अपनी पत्नी के साथ ही ऐसा करना वरना तेरी माँ को तू जानता है दादी मुझे समझा रही थी कि किसी और से ऐसा ना करू, मै बोला दादी आप मुझे सब बताती हैं और हम दोनो की बात हम तक ही रहती है, और दादी आप सुंदर भी हो और मस्त भी इसलिए अपने आप ही मेरा लंड खड़ा हो जाता हैं दादी मेरी तरफ देख बोली पागल दादी हु तेरी अपनी दादी को ऐसा कहता है, मै तो अब बुढी हो गयी हु, मै बोला नही दादी आप कहा बुढी हो इतनी जवान तो हो, दादी अपनी तारीफ सुन खुश हो रही थी दादी आप भी माँग और चूड़ियाँ और बिंदी लगाया करो और भी अच्छी लगोगी, दादी हस्ती हुई तु पुरा पागल है अब मे ऐसा नही कर सकती, मै बोला क्यु दादी, दादी बोली बेटा जिनका पति जिन्दा होता है वो ही ऐसा सजती है और नही, मै बोला दादी मुझे आपको देखना है आप ऐसे ही इतनी सुंदर हो तो उसमे कैसी लगोगी, दादी बोली नही बेटा ऐसा नही कर सकती अब, तेरी माँ को पता चल जाएगा तो पता नही वो क्या करेगी, मै बोला दादी हमे माँ को थोड़ी ही बताना है जैसे कमरे मे मालिश करते है वैसे ही कमरे मे पहन लेना दादी, मान जाओ ना दादी, मेरे लिए, अपने बेटे के लिए, दादी कुछ देर सोचती रही, फिर बोली ठीक है बेटा मै कमरे मे ऐसा कर लुंगी, जब हम दोनो होते है, दादी बोली बेटा तेरे लिए मे सब कुछ करूँगी, दादी मस्ता रही थी, मै बोला दादी क्या मै आपको अच्छा लगता हु, दादी हा मेरे लाल मेरी जान है तू, मेरा राजकुमार है मेरा बेटा.. मैं बोला दादी मेरा लंड भी अच्छा लगता है क्या, दादी थोड़ा सा हस्ती हुई दादी से ऐसे बात करता है पागल, दादी बताओ ना, दादी बोली बेटा सभी औरतो को ये अच्छा लगता है और मेरे बेटा का तो वैसे ही घोड़े जैसे है अच्छा तो लगेगा ही, दादी भी खुल कर बात कर रही और मस्ता रही, दादी की बात से मै भी मस्त हो गया था, मै बोला दादी एक बात और बताओ आपके चुन्चे और चुतड इतने बड़े कैसे हुए, दादी फिर से हस्ते हुए पागल दादी के ये सब देखता है तू, मै बोला दादी आपको देखूंगा तो ये भी दिखेंगे ही बताओ ना दादी, दादी बोली बेटा जब कोई माँ बनती है तो उसके चुचियो मे दूध बनना लगता है और शरीर मे चर्बी बढ़ने लगती है और जवानी मे भी बदन ऐसा हो जाता है इसलिए बेटा, दादी बोली तू दादी के अलावा और किस को देखता है, मै बोला दादी और किसी को नही बस आप मेरी प्यारी दादी हो सिर्फ आपको ही देखता हु, दादी मुस्करा रही थी, बोली और किसी को देखना भी नही, नही तो मारूंगी, मै बोला दादी मेरा यहा कोई मित्र भी नही है दादी बोली बेटा मै हु ना दादी भी और मित्र भी, सभी बाते तो बताती हु, दादी बोली अब शाम हो रही है चल घर चल, हम घर आये बुआ काम मे लगी थी हम दोनो फूफा के पास बैठ गये, काफी देर तक बात की फूफा की हालत अब ठीक हो रही थी, बुआ ने खाना बना लिया हमने खाना खा लिया और कमरे मे चले गये, मै बोला दादी तेल तो खत्म हो गया है अब क्या करेंगे, दादी बोली मै सब कर लुंगी, तभी बुआ हुक्का भर कर ले आई, बुआ भी दारू और हुक्का पीती थी, दोनो बैठ हुक्का पीने लगी, इच्छा तो मेरी भी हो रही थी लेकिन दादी ने और के सामने पीने को मना किया हुआ था, मै लेट कर सोने लगा और आँखे बन्द कर ली, कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा, तभी दादी मेरी तरफ देखी उनको लगा मै सो रहा था, दादी बोली बेटी अब उनकी तबियत ठीक है जो भी करना है जल्दी करलो, लेट मत करो, बुआ- माँ कल भी कोशिश की लेकिन उनका ठीक से खडा नही होता कहा से करू,, दादी बोली पता नही मै नानी बनुगी या नही, दोनो हुक्का पी रही और बात कर रही, तभी दादी बोली अब सोऊँगी बेटी एक काम कर थोड़ा सरसो का तेल गर्म कर ला, खेत मे जाने से पैर की मालिश करूँगी थक गयी हु, बुआ हुक्का साइड मे रख थोड़ी देर मे तेल गर्म कि कटोरी ले आई और सोने चली गयी, बुआ के जाते ही दादी उठी और दरवाजा बन्द कर बेड पर आई मुझे हिलाते हुए मेरा लाल लुंगी तो पहन ले, दादी मेरे साथ सोकर लंड का मज़ा लेना चाहती थी, उनको पता था मे चड्डी तो पहनता नही, में उठ गया और पेंट निकाल कर लुंगी डाल ली, दादी बोली बेटा मैने सरसो के तेल गर्म मंगवा लिया है मै बोला दादी सरसो का तेल सही है क्या दादी बोली बेटा गर्म तेल से आराम मिलता है चाहे कोई भी हो, दादी उल्टी सो गयी, मैने कटोरी मे हाथ डाल अपनी ऊँगली मे तेल भर कर दादी के पेरो की तरफ बैठ गया, तेल हल्का गर्म था,,.. Next
 
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दादी ने अपना पेटिकोट पकड़ कर उपर कर दिया और अपने पेरो को खोल दिया मै दादी के पेरो मे बैठ गया, मैने तेल से भरे हाथ दादी के दोनो पेरो पर लगा कर मालिश करने लगा, हम दोनो चाहते थे की काम आगे बढे, मैने हाथ की मालिश करते करते धीरे धीरे जांघों तक ले जाने लगा, तभी दादी बोली बेटा तेरे हाथ मै जादू है तेरी मालिश से सारी थकान और दर्द दूर हो जाता है मै बोला दादी आपके हाथो मै भी जादू है मेरी मालिश कर दर्द दूर कर दिया, मेरे लंड मे तो पहले ही हलचल हो रही थी, और जाँघ पर मालिश कर रहा था जहा तक पेटिकोट था, तभी मैने थोड़ा और हाथ पर लगाया और जाँघ से उपर चुतड की और ले जाने लगा, मैने धीरे धीरे पेटिकोट मै हाथ डाल दादी के चुतड जहा से शुरू होते है ले जाने लगा, दादी मस्ती से पड़ी हुई थी मेरे हाथ की पकड़ से दादी के पैर का मांस भी दबता साथ मे, मेरे हाथ मालिश करते करते पेटिकोट मे दादी की पैंटी थी जहा तक जाने लगा, मेरे हाथ को दादी की पैंटी को छु रहे बार बार, दादी की पैंटी जो पुरे चूतडो पर थी, तभी दादी बोली बेटा मेरे चूतडो तक क्यों मालिश कर रहा है मै सकपका गया, दादी इनकी भी कर देता हु ना, दादी तु तो करके ही मानेगा, लेकिन लाईट बन्द कर दे, और पेटिकोट को उपर नही करना, अंदर हाथ डाल के ही करदे, मै समझ गया दादी भी आग मे जल रही है, मेरे लंड कसकर तन गया और मैने चुपके से लुंगी को खोल निकाल दिया, मेरा लंड साँप की तरह फुहार रहा था, मैने खड़े होके लाईट बन्द कर फिर से हतेली पर तेल डाल दादी के पेरो मे बैठ गया, और हाथ डाल दादी की जांघो से होता हुआ उनके माँस से भरे बड़े बड़े चूतडो तक ले जाकर मालिश करने लगा, दादी के चूतडो का टच पाकर मेरा लंड लोहे की तरह हो गया, मैने मालिश के बहाने धीरे धीरे चूतडो पर से दादी की पैंटी मे नीचे से ऊँगली डाल उपर करने लगा, धीरे धीरे दादी की पैंटी को दादी के बड़े चूतडो की खाई मे कर दिया, मेरे हाथ दादी के बड़े बड़े चूतडो पर घूम रहे थे और तेल से चुतड और भी चिकने हो रहे थे, मेरे हाथ के जोर से चुतड का माँस दब रहा था, मे जान बूझकर जोर लगाकर चुतड दबा रहा था, कमरे मे अंधेरा होने के कारण उनके चूतडो को देख नही सकता था, मैने मालिश करते करते पेटिकोट को भी कमर तक कर दिया, दादी और मेरी साँसे बहुत जोर से हो रही थी दादी को भी बड़ा मज़ा आ रहा था वो भी कुछ नहीं बोल रही थी, दादी की पैंटी पीछे गांड की दरार मे पड़ी थी, पूरी मैने धीरे धीरे अपना अंगूठा गांड की दरार की तरफ ले जाने लगा दोनो हाथ के अंगूठा अब दरार मे जाने लगे दादी बिल्कुल चुप नागिन की तरह जोर से साँसे ले रही थी, तभी मैने अंगूठो को और दरार मे डाल नीचे की तरफ ले जाते हुए मालिश करने लगा तभी मेरे अंगूठे दादी की गांड के छेद से टच होते हुए उनकी चूत की मोटी फांकों पर से होते हुए नीचे की तरफ गये जैसे ही दादी की गांड और चूत की फांकों पर अंगूठा लगा दादी की अचानक आह निकल गयी, हम दोनो जान बूझकर चुप थे मेरे लंड भी बहुत लाल हो रखा था दादी की चूत के पास बड़े बड़े बाल हो रखे थे, मे बार बार वही मालिश कर रहा तो देखा दादी की पैंटी बहुत गीली हो रखी थी, और दादी पुरे मजे ले रही थी, मेरे अंगूठे जैसे ही गांड के छेद और चूत की फांकों पर जाते दादी आह के साथ थोड़ी सी अपनी कमरा की हिला देती मस्ती से, मुझसे रुका नही जा रहा रहा था मैने अपने अंगूठे को गांड के छेद और चूत की फांकों और ही सहलाने लगा, दोनो चुपचाप मजे ले रहे थे, बार बार गांड और चूत की फांकों से दादी ने जवाब दे दिया और जोर से आह आह करती हुई झटके खाती हुई पैसाब के साथ झरने लगी, मेरे अंगूठे पर दादी का पैसाब पैंटी से टकरा कर गिर रहा था, बहुत ही गर्म पैसाब था दादी का, दादी जब झर रही थी, तब मेरा अंगूठे चूत की फांकों पर ही था, दादी झरने से उनकी मस्ती शांत हो गयी, बोली बेटा तु थक गया होगा आराम कर सोजा, मै बोला दादी आपकी सेवा मे कैसी थकान, अभी तो कमर की करनी है मालिश, मैने इसलिए बोला क्यु की मुझे भी तो झर कर शांत होना था next..
 
आगे..

दादी की पैंटी गीली और बेड पुरा एक साइड से गीला हो चुका था, दादी बोली बेटा मुझे खडा होने दे एक बार, यहा पैसाब से गीलापन हो गया है ठण्डा सा लग रहा है, अंधेरे मे मै अपना लंड ताने दादी से हट गया, दादी खड़ी हुई और अंधेरे मे बोल रही बिस्तर गिले से सर्दी सी लगती है इसलिए यहा दूसरी साइड सो जाती हु तु यहा आजा, और बोली थोड़ा तो पेटिकोट भी गिला हो गया है, और पैंटी भी कहती हुई अपनी पैंटी निकाल लेट कर पेटिकोट उपर कर टांग चोड़ी कर लेट गयी, मुझे नही पता था दादी ने पैंटी निकाल दी है इधर अंधेरे मै ही मै अपना लंड सहला रहा था, दादी बोली आजा बेटा अब कर दे, मै अंधेरे मे ही दादी के पास आया और तेल साथ ले रखा था हतेली पर तेल लगाया और दादी के पेरो के बीच बैठ कर कमर पर हाथ रखा, अचानक मैने महसूस किया की मेरा लंड दादी के चूतडो की खाई के उपर रगड़ खा रहा है मुझे दादी की पैंटी महसूस नही हुई, मेरा दिमाग बुरी तरह से काम करना बन्द रहा था, तभी मैने थोड़ा पीछे हुआ और थोड़ा झुका जिससे लंड दादी की चुतड और जाँघ जहा से शुरू होती है वहा पर टिक गया, और मैने कमर पर जोर देते हुए हाथ आगे किये और साथ ही खुद नीचे झुकते हुए आगे हुआ, मेरा लंड दादी की दोनो जांघो के बीच से होता हुआ दादी कि चूत के सुपाडे और झांटो से होता हुआ नीचे बेड पर लगा, दादी अचानक से उछली और मै भी समझ गया की दादी पुरे मूंड में है इसलिए पैंटी निकाल दी है, दोनो की गर्म साँसे चलने लगी , लंड इतना मोटा था की चूत की दोनो फांकों के बाहर जा रहा था, मैने फिर से पीछे और उपर हुआ तो लंड ने फिर से चूत पर रगड़ कर दी मेरे लंड पर दादी की चूत का पानी लग रहा था दादी की चूत पानी छोड़ रही थी, कई सालों बाद आग लगी थी, मैने तभी अपने पैर दादी की टांगो के बीच से हटा दोनो तरफ बाहर कर दिया और उनके उपर उकडू सा हो गया, दादी भी समझ गयी उसने भी अपने पर पास मै ले लिए, मै दादी की दोनो जांघो पर आगे झुकता हुआ बैठ गया, मेरा लंड दादी की चूत से लगता हुआ, दोनो जांघो मै फस गया दादी अब मेरे मोटे और लम्बे लंड को आराम से फील कर रही थी, दोनो की साँसे जोरों पर थी, मेरा हाथ दादी की मालिश भूल गया, मुझे और दादी को कुछ भी होश नही था, मै दादी के उपर लेट गया, दादी भी कुछ नही बोली और जोर जोर से साँसे लेने लगी, अचानक मेरे हाथ दोनो साइड से जाके दादी के ब्लाउस से चुन्चियो पर आ गया, दोनो एकदम चुप थे, दादी की जाँघ तो तेल से पहले ही चिकनी हो रखी थी, अचानक मेरी कमर उपर नीचे होने लगी, चिकनी जांघो से लंड चूत की फांकों तो स्पर्श करता हुआ उपर नीचे होने लगा, मै दादी की जांघो को चोद रहा, मेरे मोटे लंड की रगड़ से दादी को दर्द हो रहा, वो हर बार आह आ आह कर रही थी, दादी की चूत का पानी और चिकना बना रहा था, तभी मेरा शोला उखड़ने लगा मुझे लगा की अब वीर्य निकलने वाला है मैने लंड को चूतडो की खाई पे लगा दिया, और मेरे लंड से वीर्य निकल पड़ा जो बहुत गर्म था, वीर्य खाई से होता हुआ दादी की दोनो फांकों मे से चूत पर होता हुआ बेड पर गिरने लगा, दादी की चूत को जैसे ही गर्म वीर्य लगा, दादी हाय राम मर गयी रे कहती हुई झटके खाकर झरने लगी, कुछ देर हम दोनो साथ झर रहे थे, मै दादी के उपर ही थक कर कुछ देर लेटा रहा, थोड़ी देर बाद मै सोये हुए ही साइड मे गिरकर लेट गया, जैसे ही मै साइड मे लेटा दादी, आज तो पेटिकोट भी पुरा भीगो दिया है, कहती हुई फिर से लेट गयी.. Next
 
आगे... मै दादी आज बहुत ज्यादा तक खुल गये थे दादी भी तड़प रही और मे भी बस एक दूसरे से अंजान बनकर झरते रहते, आज दादी ने लंड और वीर्य को चूत पर महसूस कर लिया था, अब उनकी आग और भी भड़क गयी थी, लेकिन मेरे लंड पर पहले मेरी माँ की चूत का नाम लिख था, क्यों की उनकी चूत ने भी कभी लंड नही लिया था, बस पापा के साथ थोड़ा सा ही हुआ था,

मै और दादी उस रात आराम से चिपकर सो गये, सुबह जब नींद से आँखे खुली तो देखा माँ भी आ गयी थी दादी माँ बुआ तीनो बैठकर बाते कर रही थी, एक साथ तीनो परियो की रानी लग रही थी, मैने कपड़े पहन बाहर आया, तीनो मुझे देख मुस्कराई, मै बोला माँ आप कब आई, माँ मै घर पर अकेली थी दिल नही लगा तो सोचा आप सब से मिल आउ, इसलिए आ गयी, यहा आके अच्छा लगा, सबसे मिल भी ली, फूफा भी अब ठीक से है, तभी माँ बोली की अब मै चलती हु थोड़ा काम है घर पर, तभी बुआ बोली भाभी अभी तो आई हो और अभी जा रही हो, जरूरी काम है तो बेटे को ले जाओ, फिर कभी वापिस भेज देना इसे, माँ बोली हा सही कहा अभी अकेली भी हु, बहुत बोर हो जाती हु अभी इसको ले जाती हु वापिस फिर कभी भेज दूंगी,अभी माँ जी को कुछ दिन रख लो आप, दादी और मै सब चुपचाप सुन रहे, दोनो के चेहरे से उदासी दिख रही, तभी माँ बोली चल बेटा गाड़ी मे बैठ जाओ, दादी मेरे पास आई और धीरे से बोली बेटा अपना ध्यान रखना अपनी बात ना बता देना, मै कुछ ही दिन मै आ जाऊंगी, मेरे लाल तेरी बहुत याद आयेगी, मै दादी मुझे भी बहुत याद आयेगी, मै गाड़ी में बैठ गया और घर की तरफ चल दिया , और दो बारूद के जिस्म अलग अलग हो गये, हम घर आ गये
 
मै पुरे दिन चुपचाप रहता, माँ का गुस्सा और रुतबा बड़ा डरावना होता था, लेकिन माँ की जवानी के आगे सब फेल थे, कसे हुई चुन्चे, फिट पेट और छोटी सी नाभि, और कैसे हुए चुतड उनकी जवानी को बया करता था लेकिन माँ पापा के साथ हुई घटना के बाद खुद को जैसे भूल ही गयी,ना जवानी जि,ना खुद के बारे मे सोचा कभी, मै दिन भर दादी को याद करता रहा, हम दोनो की मालिश याद करता रहा, शाम को माया आई खाना बनाकर चली गयी, माँ ने मुझे आवाज दी बेटा खाना खा लो, मै चुप चाप खाना खा रहा तभी बेटा तु कुछ बोलता क्यु नही, चुप चाप रहता है कोई बात है क्या, नही माँ कोई बात नही है माँ बोली तो फिर चुप क्यु रहता है मेरा लाल, माँ आज बड़े प्यार से बात कर रही थी, मै बोला माँ आपसे डर लगता है, माँ एकदम से सहज गयी, बोली बेटा मुझसे डर क्यु, मै तो माँ हु तेरी,माँ आप हमेशा गुस्से मे रहती हों ना कोई हसी मज़ाक करती हो तो डर ही लगेगा ना, माँ थोड़ी सी चुप हुई बोली बेटा मुझसे मत डरना तुम, बस कभी कोई गलत काम नही करना, मेरे लाल तु एक ही तो है जिसे मै सबसे ज्यादा प्यार करती हु, मै इस सोच मे था की अगर माँ मुझे नही लेकर आती तो मै दादी को चोद देता आज, वहाँ दादी तड़प रही यहा मै,लेकिन समय सबका आयेगा, मेरा लंड सबकी चूत का पानी चखेगा, next
 
आगे..

हम दोनो खाना खाने के बाद मै अपने कमरे मे चला गया, मुझे दादी की बहुत याद आ रही थी, अगर कुछ दिन दादी के पास रहता तो हम एक दूसरे के रस का मज़ा ले चुके होते, दादी की याद मे मेरा लंड अंगड़ाई लेने लगा था, जैसे ही शाम होने होने को आई माँ चाय लेकर आ गयी, .

माँ-- बेटा चाय पीले,

मुझे चाय देकर खुद चाय ली और पास मे बैठ गयी, माँ का डर इतना था की उसकी तरफ देखा भी नही जाता था, लेकिन मुझे ही हिम्मत करनी थी, रिश्तो को आगे जो बढाना था, तभी मै बोला..

मै-- माँ मुझे शहर मे वापिस जाना है मै वही कुछ और पढाई कर लूंगा,

माँ-- इतना तो पढ़ लिया बेटा और क्या करेगा,

मै-- माँ यहा बोर हो गया हु कोई दोस्त भी नही है घर में भी अकेला सा हु आपसे डर लगता हैं, शहर मे अच्छा है बिजी रहूँगा,

माँ--मेरे लाल इतने साल शहर मे रहा, हम सबसे दूर रहा, हम सब भी बेटा अब आपको दूर नही रहने दूंगी, और बेटा माँ से क्यु डरता है तु तो मेरा बेटा है भला अपनी माँ से कोन डरता है, मै सिर्फ गलती करने वालो के लिए सख्त हु मेरे बच्चे तुम कभी कोई गलत काम नही करना, मै अब अपने बच्चे को दूर नही जाने दूंगी, कहती हुई माँ का गला भर आया.

हम दोनो ने चाय पी मै चुप बैठा रहा, माँ उठ कर जाने लगी मै पीछे से उनको देख रहा, क्या ही मस्तानी चाल थी, मटक मटक कर चलने से उनकी जवानी तड़प रही थी,

मै समझ गया की माँ अब दूर नही जाने देंगी मुझे अब माँ को प्यार देना है, बस पास जाने के लिए बहाना नही था.. माँ के पास रहूँगा तभी को उनको माँ का सुख दे पाऊँगा, खेर रात होने को आई माया ने खाना लगा दिया और हम दोनो ने खाना खाया जैसे ही उठने लगे माँ बोली बेटा अकेला कहा सोयेंगा मेरे कमरे मे सो जाना, मुझे अपने के पास रहना है तभी तो उसका डरना कम होगा,.

मै-- नही माँ मै अपने कमरे मे सो जाऊंगा आप क्यु परेशान हो रही हो.

माँ-- नही बेटा, अब मै अपने बेटे को दूर नही जाने दूंगी, अपने पास रखूंगी अपने कलेज़े के टुकड़े को,,,

मै-- ठीक है माँ, मै कुछ देर मे आ जाऊंगा, कपड़े बदलकर आ जाऊंगा माँ,

माँ-- ठीक है बेटा, आ जाना,,

मैने माया को इशारा किया की कमरे मे हुक्का लगाना है, जल्दी आना.

मै जैसे ही कमरे मे गया, माया भी पीछे पीछे आ गयी, माया ने हुक्का लगा दिया, माया बोली साहब मै जाऊ अब,

मै-- अरे थोड़ा तुम भी हुक्का पीलो,

माया-- नही साहब, मै घर मे पी लुंगी, आप बड़े लोगो के साथ मै कैसे पी सकती हु,

मै-- माया कैसी बात कर रही हो,. तुम भी तो हमारे घर की ही हो, हमारे लिए खाना भी बनाती हो, फिर ऐसे क्यु बोल रही हो, और मुझे साहब मत कहो, हम तो थोड़े ही छोटे है आपसे.

माया-- तो साहब क्या बोलू आपको भैया जी बोलू आपको..

मै-- अरे माया भैया जी नही केवल भैया ही बोल दो, आओ अब तो भैया के पास बैठ जाओ हुक्का पी लो.

माया-- ठीक है भैया कहती हुई चुनरी का पल्लु पीछे से पेटिकोट से हटा गोद मे लेकर पास बैठ गयी और हुक्के का कस लगाती हुई, भैया मालकीन को नही बताना हुक्के के बारे मे, वैसे जब कभी मालकीन के साथ पी हू,

मै-- माँ भी हुक्का पीती है,

माया- हा भैया लेकिन कभी कभी,

मेरी नज़र चुपके से ब्लाउस मे तनी हुई चुन्चियो पर जा रही, क्या ही कमसीन जवानी है, चारो तरफ मस्तियो की नदिया थी बस मुझे सब मे गोता लगाना था.

मै-- माया एक काम करते है अब तो हम भाई बहन है कल दिन मे आपके पास ही हुक्का पियूँगा, वहा माँ का कोई डर नही होगा,

माँ--ठीक है भैया आप वहा आ जाना, वहा पी लेना, मे अपने पति को अच्छे से बता दूंगी सब बाते..

माया--ठीक है भैया अब मै चलती हु उनको खाना भी खिलाना है

मै-- ठीक है दीदी, आप जाओ.

माया-- भैया आप बहुत अच्छे हो मुझे दीदी बोला,, मै भी अपने भैया का बहुत ख्याल रखूंगी.

और माया चली गयी मै बैठा बैठा दादी के बारे मे सोचने लगा, तभी माँ की आवाज आती है आजा बेटा क्या करने लगा

मै-- आया माँ अभी..

मैने सोचा अब माँ है चड्डी पहन नी होगी, मैने चड्डी पहनी और लुंगी साथ लिए माँ के कमरे की तरफ गया,

आगे....
 
आगे..

माँ कमरे में अपने बेड पर कंबल ओढ़े बैठी हुई थी..

माँ-- आ गया मेरा लाल जल्दी आजा कितनी सर्दी है,

मै जल्दी से कंबल मे घुस गया और बेड के एक साइड पे चुपचाप बैठ गया.

माँ-- मेरा लाल अब भी चुप है क्यु मुझसे डरता है,,

मेरे पास अब मोका है माँ को आग लगाने का..

मै-- माँ आप इतना गुस्से वाली क्यु है.

माँ-- नही बेटा मै कहा हु

मै-- माँ फिर सब आपसे इतना डरते क्यु है

माँ-- बेटा मै गलत लोगो को सज़ा देती हु ना,, इसलिए शायद..

मै--माँ मै कोई भी गलत काम नही करूँगा,,

माँ-- मेरा राजा बेटा, बहुत अच्छा है

अब मोका था माँ की दुखती रग पर हाथ रखने का..

मै-- माँ आप भी बहुत अच्छी है, और हल्की सी मुस्कान दी.

माँ एक बात पूछूँ, आप गुस्सा नही करना.

माँ-- हा बेटा पूछ, भला बात पूछने पर गुस्सा क्यु करूँगी मेरे बेटे पर.. बोलो बेटा

मै-- माँ पापा को क्या बीमारी है, उनको क्या हुआ है माँ,

ऐसी बात सुन माँ का चेहरा लाल सा हो गया,

बोली अब सोजा बेटा,

मै चुपचाप लेट गया, माँ अभी भी बैठी हुई थी लाल चेहरा और मस्तानी लग रही थी, कुछ देर बैठी रही, फिर खड़ी हुई अपनी चुनरी निकाली और चुपचाप लेट गयी, हम दोनो चुपचाप सो गये, सुबह माया चाय लेकर आवाज देती हुई आ रही..

माया-- माँ जी लो चाय लो भैया आप भी चाय लो.

हम दोनो बेड पर बैठ गये माँ चाय पीती हुई,

माँ-- अरे भैया कैसे कहा माया बहुत अच्छी बात है

माया-- माँ जी कल भैया ने मुझे दीदी मान लिया और मैने इनको भैया,,

माँ हल्की सी मुस्कराती हुई, मेरा अच्छा बेटा,, सबसे अच्छा,,

मै चुपचाप चाय पी रहा, माया घर का काम करने लगी, माँ उठी और बाहर जाने लगी, जाती हुई माँ एकदम हसीना लग रही, आज भी वो कुवारपंन लिए हुए बैठी थी,

मै भी उठा और शौच के लिए चला गया, वापिस आया माँ तब तक नहा के आ चुकी थी, मैने कपड़े लिए और बाथरूम मे चला गया. तभी मेरी नज़र माँ के पड़े हुए चड्डी और ब्रा पर गयी... लाल रंग की ब्रा पैंटी को मैने हाथ मे लिया और नाक के पास लेकर सुघने लगा, कच्ची जवानी जैसे उनकी , सुघते ही मेरे लंड मे हल चल होने लगी, मै आँखे बन्द कर माँ के सपने लेने लगा, सोच रहा इन कपड़ो मे माँ एकदम हुरपरी लगेगी, माँ की पैंटी पीछे से जहा गांड का छेद होता है वहा सुघने लगा, सोचने लगा माँ की कैसी गांड होगी और उनका पाद की सुगन्ध लेने लगा, मुझे पूरी मस्ती चड गयी थी, लेकिन सर्दी के कारण मैने अपना ध्यान हटाया और जल्दी से नहा कर बाहर आया, माया ने तब तक खाना लगा दिया था,,
 
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मैं और मां खाना खाने बैठ गए मां चाहती थी कि मैं उनसे डरु नहीं और प्यार जताते हुए मां ने खाने का निवाला लिया और बोली ले बेटा अपनी मां के हाथ से भी एक निवाला खा ले और मैंने मुंह खोल दिया मां ने निवाला मेरे मुंह में रखा पहली बार उनकी अंगुली को टच किया क्या इस बुलाए ही मुलायम अँगुलिया थी उनकी, पहली बार मे ही मज़ा सा छा गया,खाना खाने के बाद माँ बोली..

माँ-- बेटा तेरी मौसी भी आने को है आज शायद, मै कुछ नही बोला, सिर्फ चुपचाप बैठा रहा, मै चाहता था माँ खुद मुझसे कहे की बेटा मै तुमको सब बताउगी, क्यों की माँ रात से गुस्सा टाइप हो रही थी, और मै भी बिल्कुल चुपचाप रहा..

मै -- ठीक है माँ.

हमने खाना खाया अब मुझे हुक्का पीना था,

मै-- माँ मै माया दीदी के घर घूम आउ, थोड़ा.

माँ-- हा बेटा जाओ, अच्छा है

माया बाहर बर्तन साफ कर रही थी,

मै -- दीदी चले हम,

माया-- हा भैया आती हु, रुको.

माया आ गयी हम दोनो चल दिये, माया आगे मै पीछे चल रहा,

माया एक जवानी भरी कमसीन कली जैसे ही थी उसके भी बच्चे नही थे, छोटी चुन्चि मस्त सी छोटी गांड, उपर से पति बीमार, सबका प्यार मुझे ही देना था, जैसे ही माया के घर पर गये सामने पति कुर्सी पर बैठा था, अपनी बैशाखी लेकर खड़ा होने लगा,

मै-- अरे जीजा जी बैठे रहे, जीजा जी हस्ते हुए, कल माया ने बताया की आप दोनो भाई बहन बन गये है, अच्छा लगा सुनकर,

मै-- जी क्या है ना माया हम सब का बहुत ख्याल रखती है, और मेरे यहा कोई और है भी नही जिससे हसी मज़ाक कर सकू, इसलिए माया को दीदी बना लिया,

इतने में माया हुक्का लेते हुई आई लो पिलो,

मै-- nhi दीदी यहा नही अंदर कमरे मे यहा माँ का डर लगता है मुझे.

माया और जीजा जी-- कोई बात नही, जहा आपको ठीक लगे वहा पिलो

मै माया के साथ कमरे मे गया, हम दोनो चारपाई पर बैठ गये और हुक्के का कश लगाने लगे, थोड़ा नशा सा हुआ मै बोला,

मै-- दीदी आप बहुत अच्छी हो सबका ख्याल रखती हो

माया- नही भैया, वो भी मेरा घर है, आप भाई बन गये तो सब रिश्ते हुए ना फिर,

मै-- दीदी आप हमसे दूर नही जाना कभी, मै शहर में अच्छे डॉक्टर से जीजू का ईलाज करवाउंगा,

माया एकदम से मेरी तरफ देखी और अचानक रोती हुई मुझे गले लगा लिया,,

भैया आप बहुत अच्छे हो, हम गरीबो के लिए इतना सोचते हो, भिया अगर ये ठीक हो गये ना तो मै आपके लिए जी जान से सेवा करूँगी, अभी भी करती हु, लेकिन इनकी तरफ ध्यान ज्यादा रहता है

मै-- दीदी आज से आपका ख्याल भी मै रखूँगा, वादा रहा. कहता हुआ बाहर आया,

दीदी अब चलता हु कल फिर से आऊंगा

दीदी और जीजू हस्ते हुए, हा जी जरूर

मै घर पहुंच गया तभी सामने माँ बैठी थी..

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माँ-- आ गया बेटा, यहा आ, फिर से चुपचाप रहने लगा ना तू, क्या मै तेरी माँ नही हु,

मै-- सिर हिलाते हुए, हा माँ आप ही तो माँ है

माँ-- फिर चुपचाप क्यु रहता है बेटा मै तुमको बहुत प्यार करती हूँ, मुझसे यू दूर मत रहा कर,,

मै-- माँ प्यार तो मै भी करता हूँ लेकिन आप गुस्सा करती है कुछ बताती भी नही, कल पापा के बारे में पूछा तब भी नही बताया.

माँ-- चुपचाप रही, बेटा उनको उनकी गलतियों की सज़ा मिली है, इसलिए वो बीमार है,

माँ की आवाज दर्द से भर गयी, और आँखों से आँसु निकलने लगे, तभी मै माँ के आँसु पूछते हुए

मै-- आप रोयो मत, मै आपकी आँखों मे आँसु नही देख सकता,, और दोनो हाथो से माँ के आँसु पूछने लगा, बहुत ही प्यारे और मुलायम गाल थे माँ के, माँ रोती हुई मेरे गले लग गयी, मेरे बच्चे, कितना ख्याल होता है,, माँ का ब्लाउस मेरे सीने पर टच था मै उनकी चुन्चियो को महसूस कर रहा था, मै बोला

माँ आपको मेरी कसम है आज के बाद आप कभी नही रोवोगी..

आप रोती हुई अच्छी नही लगती , आप खुश रहा करो माँ, माँ थोड़ी सी हस्ती हुई

माँ-- मेरा लाल इतना ध्यान रखता है अपनी माँ का,

मै-- माँ आप को कसम दी है आप हमेशा खुश रहोगी, आप जो कहोगी जैसा कहोगी मै करूँगा माँ,, बस मेरी एक बात माननी होगी, और कुछ नही कहूँगा माँ,,

माँ-- थोड़ी सी हिचकते हुए, हा मेरे लाल मै कोशिश करूँगी, और क्या बात माननी है बेटा.

मै--माँ आपको कसम दी है, आपको माननी होगी,

माँ- ठीक है बेटा, मै जरूर मानुगी, अब बताओ

मै-- माँ आप पापा से दूर नही रहना है उनकी सेवा करनी होगी माँ, मेरे कारण, माँ, मेरे खातिर माँ, पापा तो वैसे भी बेड पर ही रहते है वो हिल डुल भी नही सकते, आपको उनसे गुस्सा किस बात पर है मुझे नही पूछना, लेकिन माँ मेरे पापा है और आपके पति भी है वो, आपको भी पत्नी की तरह सेवा करनी होगी, माँ मै चाहता हु हमारे घर मे खुशिया हो, बस मेरे लिए ये काम कर सकती है क्या माँ,,

माँ-- कुछ देर सोचती हुई सही बोला बेटा, मेरे साथ जो भी हुआ, लेकिन अब वो मेरे पति और तेरे पापा भी हैं, मै अपने गुस्से मे सब कुछ भूल गयी थी, मेरे लाल तूने बहुत अच्छा किया मुझे याद दिलाया, मै तेरी कसम खाती हु बेटा, मै उनकी सेवा जरूर करूँगी,

तभी मै समझ गया की तीर निशाने पर है, तभी

मै-- माँ आप एक अच्छी माँ और एक अच्छी पत्नी भी बनना, अपनी मांग, बिंदिया और सारे व्रत भी रखना,

माँ- हा मेरे लाल कहती हुई रोने लगी जोर जोर से, कितना समझदार हो गया तू बेटा, अपनी माँ के बारे मे इतना सोचा, मैं बेटा अब से ही अपने घर की तरफ ध्यान दूंगी,

माँ बोली बेटा अब शाम होने को है चलो पापा के कमरे मे चलते है, हा माँ,

हम दोनो पापा के कमरे की तरफ जा रहे, आज माँ के कदम बहुत तेजी से चल रहे, मै समझ गया की माँ अब बदल रही है, तभी सामने पापा बेड पर लेट रहे, पापा की नज़र हम दोनो पर पड़ी, पापा पड़े पड़े चोंक से गये,

हम पास गये, माँ की आँखो मे आँसु निकलने लगे और माँ जोर से रोती हुई, पापा की छाती पर सिर रख रोने लगी,

माँ-- मुझे माफ करदो, मैने आपके साथ अच्छा नही किया, माँ जोर जोर से रो रही,

पापा बस हिल डुल नही सकते थे बाकी ठीक था, आज पहली बार माँ को पास देख और वो भो रोता हुआ, पापा की आँखो मे आँसु आ गये, ऐसा मत कहो, तुमने सही किया था, मैने ही जोश मे गलत काम किया, मुझे ऐसी सज़ा मिलनी जरूरी ही थी, माँ और पापा की आँखो मे आँसु की नदी बह रही, तभी मै

मै- माँ रोवो मत, जो भी हुआ होगा, लेकिन आज से सब ठीक करना आप, पापा को जल्दी से ठीक करना है अब, भगवान चाहे तो जल्दी ही सब ठीक हो जायेगा, माँ पापा ने मुझे पास बुलाया और हम तीनो आपसे मे गले मिले,

माँ- सब तूने किया है बेटा मेरी आँखे खोल दी, आज से हमारे घर मे खुशिया होगी,

हम तीनो बहुत खुश थे, तभी शाम का खाना बनाने माया आ गयी,

माँ ने सब बात माया को बताई माया भी बहुत खुश हुई, बोली मेरे भैया है ही बहुत अच्छे, सबका ख्याल रखते है, माया ने खाना बनाया, और माँ को बोली

माया-- मालकिन आप साहब के लिए खाना लेकर जाओ, आज आप उनको खाना खिलाना,

वैसे रोज़ उनको माया ही देती थी,

माँ थाली को उठाई, तभी माया

माया-- क्या कर रही है आप मालकिन, ऐसे नही, एक पत्नी बनकर जाओ आज से,

माँ - वो तो हु ही,

माया-- अरे मालकिन ऐसे नही, पहले तैयार होके, मांग और बिंदिया भी लगाओ,

माँ -- अरे हा सही बोली माया, मुझे ये सब याद नही रहा, माँ अपने कमरे मे चली गयी, आगे
 
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