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मै और दादी मन ही मन मे एक दूसरे के और भी करीब आना चाहते थे, दादी भी मेरे लण्ड कि दीवानी हो गयी थी ऐसा लंड पहली बार देखा था और वो भी कई सालों बाद, और सब कुछ बात हम दोनो तक, आज रात मै भी दादी के और नजदीक आकर दादी को तड़फाना चाहता था, मै लेती हुई दादी के पेरो की साइड जाके हतेली पर तेल लगाया, पेट के बल लेटी दादी जो आज उल्टी जान बूझकर लेटी थी, दादी ने अपना पेटिकोट पकड़ उपर अपनी जाँघ तक चूतडो से थोड़ा सा नीचे तक कर दिया, दादी की पीछे से गोरी नंगी टांग देख मेरे लंड मे हलचल होने लगी, मे बोला दादी अगर मै आपको पेरो के बीच बैठ कर अच्छे से मालिश कर पाऊंगा, दादी बोली जैसे तुझे सही लगे वैसे कर ले बेटा, दादी के काले बालो की चोटी नागिन से पीठ और कमर तक पड़ी हुई थी, मैने दादी को बोला दादी थोड़ा पैर चौड़े करलो ना मै बीच मै बैठ जाऊ, दादी ने झट से पेरो को चौड़े कर दिये, दादी भी मुझे पास लाना चाहती थी पूरी तरह से मेरे लंड कि दीवानी हो चुकी थी, मै दादी के पेरो के बीच बैठ गया और तेल से भरी हतेली को दादी की एक जाँघ जहा लगी थी हाथ रखा क्या आप ही मुलायम और मांस भरी जाँघ थी, मेरे लंड मे कसाव हो गया और लंड पूरी तरह तन गया, दादी के पैर चौड़े होने से दादी की पैंटी जो सफ़ेद थी दिखने लगी, मै पैंटी की झलक लेते हुए मालिश कर रहा था, तभी दादी बोली बेटा थोड़ी कमर की भी कर दे बहुत थक गयी हु मै हा दादी मै कर देता हु दादी बोली बिल्कुल अपने दादा की ख्याल रखता है मेरा, मै भी दादी अब दादा तो है नही तो मुझे ही तो ख्याल रखना होगा आपका, मै अपनी दादी को दादा की कमी कभी होने दूंगाः, दादी मेरी बात सुन मस्ती से मुस्करा दी, बोली इतना प्यार करता है अपनी दादी को, मै दादी आप ही तो जो मेरी दोस्त जैसे है हम दारू हुक्का मालिश सब साथ करते है, इतने मै दादी बोली बेटा हुक्का से याद याद कल याद दिलाना, मै बेटी से हुक्का ले लुंगी, हा दादी मै बोला, मैने दादी के बालो की चोटी को साइड में कर दिया, और दादी को बोला अगर दादी आप दोनो पेरो को एक साथ कर लो तो मै सही कर पाऊंगा, दादी समझ गयी की मै उनके चुतड पर बैठना चाहता हु, मै दादी के पेरो के बीच से हटा और दादी ने अपने दोनो पेरो को पास में कर लिया , दादी की जाँघ तक नंगी टांग और पेटिकोट से ढके बड़े बड़े चूतड़ से मेरा लंड पुरा खडा मस्ती मार रहा था,मैने एक टांग उठाकर दादी के चूतडो पर से दूसरी साइड रख रख दादी की जाँघ जहा तक पेटिकोट था वहा पर बैठ अपने घुटनों तक पर बैठ गया, दादी का मुह नीचे की और था, मैने धीरे से लुंगी खोल दी और साइड मे रख दी, मेरा लंड तना हुए खड़ा था, तभी मैने
दोनो हतेली पर तेल डाल दादी की कमर पर रखा, बहुत ही कोमल खाल और मांस से भरी हुई थोड़ी सी, मेरे लंड के नीचे दादी के मस्त चुतड पड़े थे, मैने जैसे ही मालिश करते हुए हाथ को आगे किया मेरा लंड दादी के चूतडो पर टच हुआ, मुझे और मस्ती चढ़ गयी, शायद दादी को भी, दादी बोली आह बेटा आराम सा आ रहा है दादी भी समझ गयी मैने लुंगी नही पहनी है अभी, मै कुछ देर ऐसे ही कमर की मालिश करता रहा और दादी के मस्त चूतडो पर लंड लगाता रहा, तभी दादी मस्ती भरी आवाज में बोली बेटा तूने लुंगी निकाल दी है क्या, मै बोला हा दादी आपकी कैसे पता, दादी बोली बेटा तेरा हथियार मुझे पीछे से टच हुआ इसलिए, मै बोला दादी एक बात बताओ, आज तो मैने लंड की मालिश भी नही की आज कैसे खड़ा हो गया, दादी मस्ता गयी, और बोली बेटा तु जवान है ना, और जवानी मे औरत का टच से ऐसा हो जाता है दादी क्या आपके टच से खड़ा हुआ है मै भोला बनता हुआ बोला, दादी बोली बेटा जब मुझे टच कर रहा है तभी शायद खड़ा हो गया होगा, दादी भी खुश थी की उनका पोता उनको देख लंड खडा करता है, तभी दादी बोली बेटा अब आराम है अब सोते है नही तेरी बुआ, फिर से कहेगी, मेरा तो दिल सा टूट गया मै खडा हुआ लुंगी पहन, दादी के पास सो गया, रात भर मै दादी आराम से सोते रहे,सुबह बुआ चाय लेकर आई, हमने चाय पी, कल की तरह सब काम कर खाना खाने बैठ गये, तभी दादी बोली बेटी रात को कमरे मे हुक्का लगा दिया कर अच्छी नींद आती है, बुआ बोली ठीक है माँ लगा दूंगी, , मै दादी फूफा से मिल खेत मे घूमने चले गये.. Next
मै और दादी मन ही मन मे एक दूसरे के और भी करीब आना चाहते थे, दादी भी मेरे लण्ड कि दीवानी हो गयी थी ऐसा लंड पहली बार देखा था और वो भी कई सालों बाद, और सब कुछ बात हम दोनो तक, आज रात मै भी दादी के और नजदीक आकर दादी को तड़फाना चाहता था, मै लेती हुई दादी के पेरो की साइड जाके हतेली पर तेल लगाया, पेट के बल लेटी दादी जो आज उल्टी जान बूझकर लेटी थी, दादी ने अपना पेटिकोट पकड़ उपर अपनी जाँघ तक चूतडो से थोड़ा सा नीचे तक कर दिया, दादी की पीछे से गोरी नंगी टांग देख मेरे लंड मे हलचल होने लगी, मे बोला दादी अगर मै आपको पेरो के बीच बैठ कर अच्छे से मालिश कर पाऊंगा, दादी बोली जैसे तुझे सही लगे वैसे कर ले बेटा, दादी के काले बालो की चोटी नागिन से पीठ और कमर तक पड़ी हुई थी, मैने दादी को बोला दादी थोड़ा पैर चौड़े करलो ना मै बीच मै बैठ जाऊ, दादी ने झट से पेरो को चौड़े कर दिये, दादी भी मुझे पास लाना चाहती थी पूरी तरह से मेरे लंड कि दीवानी हो चुकी थी, मै दादी के पेरो के बीच बैठ गया और तेल से भरी हतेली को दादी की एक जाँघ जहा लगी थी हाथ रखा क्या आप ही मुलायम और मांस भरी जाँघ थी, मेरे लंड मे कसाव हो गया और लंड पूरी तरह तन गया, दादी के पैर चौड़े होने से दादी की पैंटी जो सफ़ेद थी दिखने लगी, मै पैंटी की झलक लेते हुए मालिश कर रहा था, तभी दादी बोली बेटा थोड़ी कमर की भी कर दे बहुत थक गयी हु मै हा दादी मै कर देता हु दादी बोली बिल्कुल अपने दादा की ख्याल रखता है मेरा, मै भी दादी अब दादा तो है नही तो मुझे ही तो ख्याल रखना होगा आपका, मै अपनी दादी को दादा की कमी कभी होने दूंगाः, दादी मेरी बात सुन मस्ती से मुस्करा दी, बोली इतना प्यार करता है अपनी दादी को, मै दादी आप ही तो जो मेरी दोस्त जैसे है हम दारू हुक्का मालिश सब साथ करते है, इतने मै दादी बोली बेटा हुक्का से याद याद कल याद दिलाना, मै बेटी से हुक्का ले लुंगी, हा दादी मै बोला, मैने दादी के बालो की चोटी को साइड में कर दिया, और दादी को बोला अगर दादी आप दोनो पेरो को एक साथ कर लो तो मै सही कर पाऊंगा, दादी समझ गयी की मै उनके चुतड पर बैठना चाहता हु, मै दादी के पेरो के बीच से हटा और दादी ने अपने दोनो पेरो को पास में कर लिया , दादी की जाँघ तक नंगी टांग और पेटिकोट से ढके बड़े बड़े चूतड़ से मेरा लंड पुरा खडा मस्ती मार रहा था,मैने एक टांग उठाकर दादी के चूतडो पर से दूसरी साइड रख रख दादी की जाँघ जहा तक पेटिकोट था वहा पर बैठ अपने घुटनों तक पर बैठ गया, दादी का मुह नीचे की और था, मैने धीरे से लुंगी खोल दी और साइड मे रख दी, मेरा लंड तना हुए खड़ा था, तभी मैने
दोनो हतेली पर तेल डाल दादी की कमर पर रखा, बहुत ही कोमल खाल और मांस से भरी हुई थोड़ी सी, मेरे लंड के नीचे दादी के मस्त चुतड पड़े थे, मैने जैसे ही मालिश करते हुए हाथ को आगे किया मेरा लंड दादी के चूतडो पर टच हुआ, मुझे और मस्ती चढ़ गयी, शायद दादी को भी, दादी बोली आह बेटा आराम सा आ रहा है दादी भी समझ गयी मैने लुंगी नही पहनी है अभी, मै कुछ देर ऐसे ही कमर की मालिश करता रहा और दादी के मस्त चूतडो पर लंड लगाता रहा, तभी दादी मस्ती भरी आवाज में बोली बेटा तूने लुंगी निकाल दी है क्या, मै बोला हा दादी आपकी कैसे पता, दादी बोली बेटा तेरा हथियार मुझे पीछे से टच हुआ इसलिए, मै बोला दादी एक बात बताओ, आज तो मैने लंड की मालिश भी नही की आज कैसे खड़ा हो गया, दादी मस्ता गयी, और बोली बेटा तु जवान है ना, और जवानी मे औरत का टच से ऐसा हो जाता है दादी क्या आपके टच से खड़ा हुआ है मै भोला बनता हुआ बोला, दादी बोली बेटा जब मुझे टच कर रहा है तभी शायद खड़ा हो गया होगा, दादी भी खुश थी की उनका पोता उनको देख लंड खडा करता है, तभी दादी बोली बेटा अब आराम है अब सोते है नही तेरी बुआ, फिर से कहेगी, मेरा तो दिल सा टूट गया मै खडा हुआ लुंगी पहन, दादी के पास सो गया, रात भर मै दादी आराम से सोते रहे,सुबह बुआ चाय लेकर आई, हमने चाय पी, कल की तरह सब काम कर खाना खाने बैठ गये, तभी दादी बोली बेटी रात को कमरे मे हुक्का लगा दिया कर अच्छी नींद आती है, बुआ बोली ठीक है माँ लगा दूंगी, , मै दादी फूफा से मिल खेत मे घूमने चले गये.. Next