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Incest रुतबा या वारिस

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StoryPublisher

Guest
हैलो दोस्तो मै आपका राज शर्मा,,

ये कहानी मेरी है मै एक ऐसी फैमिली से हु जिसके लिए रुतबा ही सब कुछ है मेरे घर में मै (18), मेरी माँ (35),पापा(45)बुआ(30) दादी(50) नॉकरानी माया (32) और उसका पति थे। हमारे गाँव मै हमारे परिवार का रोब रुतबा सबसे बड़ा था, गाँव मै जब भी कोई बात होती या कोई फैसला मेरी माँ ही करती, उनका गुस्सा और निर्णय का सब सम्मान करते, कोई भी हो वो सज़ा सबको बराबर देती, उनके लिए उनका रुतबा ही सब कुछ था, मेरे पापा जब जवान थे तब वो शिकार पर निकले थे, मेरी माँ उंन दिनों एक कमसीन कली थी, उनका शरीर पर कच्चे आम की तरह उनकी चूचियाँ और बाहर निकली गांड को देखकर सब पागल हो जाते थे, मेरे नाना बहुत गरीब थे, माँ और मौसी दो ही औलाद थी,बेटा था नही इसलिए वो दुखी रहते की कैसे इनकी शादी होगी,, पापा शिकार के लिए बंदूक लिए घोड़े पर बैठकर जा रहे थे,मेरी माँ और मौसी दोनो शौच के लिए पास ही के जंगल मे गयी हुई थी, मेरी माँ और मौसी की कमसीन जवानी किसी को भी पागल कर सकती थी,पास मे ही तालाब था जहाँ सब शौच के बाद अपनी गांड साफ करते थे, मेरी माँ और मौसी ने चारो तरफ देखा की कोई नही है दोनो कुछ दूरी अलग अलग होकर शौच के लिए बैठ गयी, दोनो की भरी जवानी मे भरी गांड देख कर कोई भी पागल हो सकता था,,, उनका मोटे मोटे भरे चुतर और कसे हुए चुचे जवानी का रस उन दोनो के अंगो मे भरा पड़ा था, मेरे पापा भी घोड़े को पानी पिलाने के लिए तालाब के पास जा रहे थे,अचानक पापा की नज़र माँ की फूली हुई गोरी गोरी दो कच्चे तरबूज हो रसभरे, पापा के मुह मे पानी आ गया था, पापा के लंड ने हलचल करनी शुरू कर दी थी, पापा ने घोड़े को पेड़ से बांध वही बंदूक रख दी, और अपना काला लंड निकाल कर मसलने लगे, ओहो आज तो यही शिकार करूँगा कसम से पुरा खून खराबा करूँगा, हल्की मुस्कान और हाथ में लंड लिए पापा चुपके से माँ के पीछे चले गये,.. Next पार्ट
 
आगे...

पापा माँ की कमसीन गांड देख रहे थे और अपने बड़े घर होने का रोब रुतबा चेहरे पर लिए हुए थे, नाना बहुत गरीब घर से थे, पास ही के गाँव से थे लेकिन बड़े घर को सब जानते थे उनका न्याय सबसे बड़ा होता था, अब पापा अपने लंड को एक हाथ से पकड़े हुए थे और चुपके से जाके माँ के बालों की चुटिया पकड़ ली,माँ एकदम से डर गयी जोर से चिलाई जैसे किसी जानवर ने हमला कर दिया हो, माँ कि चुटिया पापा के हाथो मै थी, पापा ने बालो को खिच कर माँ को खड़ा कर दिया, माँ कि आवाज सुन मौसी जो पास मे बैठी थी दोड़ कर आई देखा माँ को साहब ने पकड़ रखा है, माँ ने पीछे मुड़कर देखा, साहब अपना लंड मसल रहे थे, माँ डर कर साहब छोड़ दो साहब छोड़ दो, पापा मौसी कि तरफ देखा मौसी की कुर्ती के उपर से मौसी कि चुन्चियो के उभार को देखा जैसे कच्ची आम डाल रहे हो, मौसी का बदन भी माँ की तरह ही था, दोनो की मस्त चुन्चिया और पतली कमर और गांड देख पापा ने अपने लंड को सहला दिया, माँ और मौसी की नज़र पापा के काले 5 इंच के लंड पर गया, दोनो समझने मे देर नही लगी, मौसी भागकर पापा के पर पकड़ लिए और रोते हुए साहब छोड़ दो साहब, हम आपके पेर पड़ते है पापा जोर से हस्ते है, ऐसे कैसे छोड़ दु शिकार करने निकला हु शिकार तो करूँगा ही, पापा ने सोच लिया था की, साले गरीब है जवानी का मज़ा चख कर कुछ पैसे दे दूंगा अपने आप चुप हो जायेंगे, पापा जोर से हंस रहे थे की माँ बोली साहब हम आपकी गायें है हमे छोड़ दो, माँ की आँखो मे भी आँसू थे, लेकिन पापा के उपर पागल पन सवार था, वो जवानी के जोश मे पागल हो गये थे , उनके काले लंड को सहलाते हुए गायें हो तभी तो शिकार करूँगा, आज तो दो दो शिकार मिले है, पापा जोर से हस्ते है की मौसी पेर को कसकर पकड़ती हुई साहब छोड़ दो, साहब छोड़ दो, इतने मे पापा ने लंड से हाथ हटा माँ की छाती पर रख मसल दिया, पापा के हाथ मे जैसे कच्चे आम हो, इतने जोर से मसला की माँ की चीख निकल गयी, पापा का लंड मै और तनाव आ गया, मौसी ने इतना देखा और गुस्से मे पापा के पर को दांतो से कट कर लिया, पापा अचानक गुस्से से मौसी को दूर कर एक लात मारी, साली कुतिया कट करती है, पापा की लात मौसी के पेट पर लगी और मौसी दूर जा कर गिरी, मौसी को गिरता देख माँ जोर से रोने लगी, माँ को रोता देख पापा और जोर से हसने लगे ऐसे शिकार का मज़ा ही कुछ और है, मौसी पापा का प्रहार सहन नही कर पायी और पेट पकड़ कर लिया उनकी सांसे कमज़ोर होने लगी, और आँखे बंद होने लगी, और मौसी बेहोश हो गयी, माँ मौसी की तरफ देखा और डर गयी साहब छोड़ दो देखो दीदी को क्या हो गया, लेकिन पापा की वासना सातवे आसमाँ पर थी, पापा ने बोला पहले शिकार कर लू फिर छोड़ दूँगा, पापा ने माँ को नही छोड़ा तो माँ थोडे गुस्से मे उनके हाथ को दांतो से कट लिया, पापा को बहुत गुस्सा आया साली कुतिया तु भी कट करती है, और जोर से एक मुक्का माँ के मुह पर मारा, माँ के मुह पर लगते ही माँ पीछे की तरफ गिरी, और माँ के नाक से खून निकलने लगा, माँ दर्द से कराह उठी, माँ के गिरने से, माँ का घागरा माँ की गोरी गोरी जांघों पर आ गया, पापा ने माँ की रसभरी जांघों को देखा उनका लंड अब और तन गया, पापा का सब्र और जोर पर था, पापा माँ के पास जाके उनके हसने लगे, माँ ने अपने घाघरे को हाथ से नीचे की और दोनो पैरो को आपस में कस लिया और साहब भगवान के लिए हमे छोड़ दो साहब, मे आपके पैर पड़ती हु, पापा का काला लंड बाहर था, माँ देख कर समझ गयी आज उसकी इज्जत लूटने वाली है, पापा माँ के पास गये और पैरो को पकड़ कर दूर करना चाह रहे थे कि माँ ने पैरो को छुटाने के लिए पैरो को चला दिये जो सीधे पापा की छाती से लगा, पापा को गुस्सा आया पापा गाली देते हुए साली कुतिया मुझे मारती है जोर से दो तीन लात माँ के पेट पे मारते है, माँ के लगते ही माँ ने पेट को पकड़ लिया, जोर से मारने के कारण माँ भी कमज़ोर हो गयी उनकी हिम्मत जवाब दे गयी, पापा फिर माँ के पैरो को पकड़ दूर करना चाहा अब माँ की हिम्मत नही रही पापा ने आराम से दूर कर घाघरे को एक ही झटके में उपर कर दिया, पापा के सामने एक छोटी सी गोरी सी चूत सामने आई जिस पर हल्के से बाल थे, पापा की अब वासना जोर पर थी पापा के सामने एक कमसीन बदन पड़ा था लेकिन पापा को सिर्फ लंड को शांत करना था उन्हे बदन से कोई मतलब नही था, लंड भी काफी देर तक तन कर टूटने को त्यार था, पापा का सब्र टूट रहा था नीचे माँ बेहतास पड़ी थी, पापा ने जल्दी से माँ की जांघों को पकड़ लिया और लंड को चूत पर लगाया, माँ की चूत मे कोई पानी नही था बिल्कुल सूखी पडी थी, क्यों की ये सब डर था कोई प्यार नही, पापा ने जोर लगाया लंड का चूत पर, लेकिन वो अंदर नही जा रहा, एक तरफ काला लंड और एक तरफ गोरी चूत, दिन रात का मिलन हो जैसे, पापा ने अपने मुह से थुक निकाला और लंड के सुपाडे पर लगा माँ की चूत पर रख जोर दिया सुपाडा गिला था लेकिन सुखी थी, सुपाडा थोड़ा सा अंदर गया था की माँ की होश मे नही होने के कारण हल्की सी चीख निकली, पापा का गर्म और कस्सी चूत होने के कारण पापा के लंड ने जवाब दे दिया, लंड तो पूरा बाहर ही था कुछ सुपाडा ही चूत के उपर था, और पापा माँ की चूत के दरवाजे पर अपना वीर्य निकल दिया, वीर्य की कुछ बुँदे माँ की चूत मे भी चली गयी और कुछ बाहर निकल रही थी, माँ की बदनसीब ही था की बिना कुछ किया माँ के पेट मे पापा का वीर्य चला गया,, पापा साली एकदम गर्म लोहा हो लंड ने पहले ही पानी छोड़ दिया कहते हुए साइड मे लेट गये, पापा का काला लंड अब चूहे जैसा हो गया, माँ अब अपने उपर से पापा को न पाकर जल्दी से उठ कर मौसी की तरफ भागी, मौसी को रोती हुई हिला रही थी, इधर नाना सोच रहे की काफी देर हो गयी बच्चीया आई नही, जाके देखता हु कोई जानवर कुछ ना कर दे, जंगल में, माँ उकडू बैठी थी और मौसी को हिला रही थी इतने मै पापा ने माँ के घाघरे मे फेली हुई गांड देख फिर से लंड खड़ा होने लगा, पापा जोर से हँसते हुए क्या ही माल हो, मेरा फिर से खड़ा हो गया तेरी गांड देख कर, पापा उठकर माँ की तरफ जाने लगे थे, मै आपको पहले ही बता दु पापा ने पहले भी एक गाँव की गरीब लड़की का जंगल मै ब्लात्कार कर दिया था और वही उसको मार दिया दिया था जहा उसको जंगली जानवर खा गये थे, पापा को उसके बुरे कर्मो की सज़ा मिलनी ही थी, पापा अब माँ के पास गये थे की माँ ने रण चंडी का रूप धारण कर लिया आँखे गुस्से मे लाल हो गयी उनका रोम रोम खड़ा हो गया, पापा अपना काला लंड लिए माँ के पीछे आ खड़े थे थे की माँ ने पास मे पड़ी एक लकड़ी जो की बहुत नुकीली थी, उठाई और बैठी बैठी पीछे मुड़ी और एक ही झटके मे पापा के पैरो के बीच से घूसा दी, लकड़ी दोनो अंडो को चिरति हुई, पेट तक घुस गयी, पापा जोर से चीखे और नीचे गिर पड़े, उनके खून ने रफ्तार पकड़ ली, पापा की चीख सुन नाना तालाब की तरफ भागे, सामने का नजारा देखा तो उनकी आँखे फटी रह गयी,
 
छोटे साहब के पेरो के बीच मे लकड़ी फसी है साहब दर्द से चिल्ला रहे है एक तरफ छोटी बेटी पड़ी है और माँ पास मे बैठी है, नाना रोते हुए समझ गये की यहा क्या हुआ होगा, हे भगवान ये क्या किया तुमने, पापा मौसी के पास आये देखा की मौसी बेहोश है नाना तालाब से पानी हाथ मे लेकर आते है और मौसी के चेहरे पर डालते है, मौसी थोड़ी सी हिली और अचानक से उठी रोटी हुई नाना को देखा उनसे लिप्त गयी, माँ अभी एक मूर्त की तरह खड़ी थी , मौसी और नाना ने माँ की तरफ देखा माँ का घाघरा पापा के पानी se भरा पड़ा था, दोनो को समझने में देर नही लगी, नाना रोते और गुस्से मे, वहा से भाग कर बड़े साहब की हवेली पर गये, साहब न्याय करो साहब न्याय करो, मै लूट गया बर्बाद हो हो गया, दादा जी खाट पर बैठकर हुक्का पी रहे, क्या हुआ ऐसा क्या हुआ बताओ, न्याय सबके लिए एक समान है साहब मेरी इज्जत माटी मे मिल गयी, साहब मेरे साथ चलो, दादा जी एक रोब दार आदमी थे उनका न्याय सब जानते थे दादा जी ने हुक्का साइड मे किया और कहा चलो कहा चलना है, नाना जी दादा को लेकर तालाब के पास आ गये, दादा जी ने सामने का नाज़रा देखा उनकी आँखे फट गयी, उनका बेटा जो नीचे पड़ा था, उनके पैरो के बीच, लकड़ी घुसे पड़ी और बहुत सारा खून जमीन पर पड़ा, और मां घागरा वीर्य से सना हुआ, पास मे मौसी खड़ी हुई, दादा जी सब समझ गये की यह क्या हुआ, नाना साहब न्याय करो, और दादा के पैरो मे गिर गये, दादा ने नाना को उठाया और गुस्से मे लाल ho गये न्याय सबके लिए एक समान है, यहा भी समान न्याय होगा, कहते हुए, मेरी माँ के सिर पर हाथ रखा, और बोला मे इस बच्ची की ज़िंदगी खराब नही होने दूंगा, मे आज और अभी से इस बच्ची को अपने घर की बहु स्वीकार करता हु, इतना सुनकर मौसी और नाना थोड़ा चेहरे पर चैन मिला, माँ अब भी गुस्से मे खड़ी थी दादा जी मेरी बच्ची तूने खुद सही न्याय किया है आज से मेरी हवेली पर आप ही न्याय करोगी, नाना और दादा ने पापा को उठा कर घोड़े पर लाध के हवेली की तरफ चल दिये, पीछे माँ भी चल दी, मौसी को नाना ने घर भेज दिया, जैसे ही हवेली पहुंचे सबकी आँखे खुली रह गयी सब समझ गये क्या हुआ, जल्दी से नोकरो ने वैध को बुला लाये, दादा बोले आज से यही मेरे घर की बहु है इसका न्याय सबको मानना होगा, वैध ने खूब ईलाज शुरू किया लेकिन खून बहुत निकल चुका था, पापा के लंड की नस टूट चुकि थी, उनके शरीर को लकवा मार गया, वो चल सकते ना बोल सकते, कहते है ना भगवान के घर देर है अंधेर नही, कुछ ही दिनों मे सबको पता चल गया की माँ पेट से है, दादी मेरी माँ से खुश नही थी क्यु की माँ ने ही उनके बेटे की ये हालत की है, पापा का बड़े शहरो मे ईलाज भी चला लेकिन कुछ नही हुआ पापा एक कमरे मे बेड लेटे रहते, माँ ये बच्चा जन्म नही देना चाहती लेकिन दादा की बात उन्हे माननी पड़ी, माँ को 9 महीने बाद मै हुआ, घर मै खुशिया छा गयी की एक नया वारिश aa गया, सब खुश थे, इधर मौसी की भी शादी हो गयी, मै जब 5 साल का हुआ मुझे बड़े शहर पढ़ने भेज दिया,काफी साल बाद आज मै अपने घर जा रहा था, मै अब जवान हो चुका था, अच्छी खुराक और मेहनत से मेरा गोरा गठिला बदन, 9 इंच का गोरा और मोटा लंड, हो चुका था, मै जैसे ही हवेली पहुंचा गाड़ी से उतरा ही था की दादी मेरी तरफ भाग कर रोटी हुई आई, मेरे लाल तरस गयी थी मेरी आँखे तुझे देखने को, कहते हुए मुझे गले लगा लिया, दादी अब भी बिल्कुल जवान ही लग रही थी, दादी के बड़े बड़े चुन्चे उनकी गदराइ हुई कमर बड़े बड़े चुतर, गजब ढा रही थी, मैने भी दादी को कसकर गले लग गया, मुझे मस्ती सी छा गयी, मै पहली बार किसी औरत के गले लगा था, इतने मै माँ गयी मुझे देखा उनके आँसू निकल गये मेरे लाल कहते गये मेरी तरफ आई, माँ ब्लाउस और पेटिकोट और चुनरी से रानी लग रही, उनका शरीर लंबा चौड़ा, चिकना पेट, काले बाल कस्सी हुई चुन्चिया और कस्सी हुई गांड, क्यों की आज तक उनका यौवन निकला नही था, आज भी माँ एक कुवांरी ही थी, माँ ने मुझे अपने गले लगा लिया, माँ की जैसे ही चुन्चिया मेरे सीने से लगी मै तो डर गया बिल्कुल पथहर् जैसे हो, इतने तो किसी जवान लड़की के भी नही होते, हम दोनो अलग हुए की माँ बोली थक

गये हो खाना खा लो, मै पापा से मिल आता हु फिर खाना खाता हु, इतने मै मेरी बुआ फुआ, मौसी मोसा आ गये, बुआ भी पतली कमर, बड़े बड़े चुन्चे बड़ी कस्सी हुई गांड छोटी सी नाभि, रूप की रानी लग रही थी, मुझे गले लगा लिया कसम से औरतो का छूना मज़ा आ रहा था, इतने मे मौसी ने आके मुझे बाहों मे ले लिया, मौसी भी बड़े बड़े चुन्चे मोटी गांड, बड़ी ही सेक्सी थी मेरी माँ की तरह, आज तो जैसे मुझे सब खा जायेगी, हम सब साथ खाना खाने बैठ गये, सब साथ खाना खा लिए और बाते करने लगे, माया नोकरानी घर का काम कर रही थी वॉ एक कमसिन कली हो छोटी सी, छोटी छोटी चुन्चीय, छोटी सी कमर और गांड, एक जवान लड़की लगती थी, उसके पति को सांड ने मारा जिससे उसकी कमर टूट गयी, वो ज्यादा चल नही सकता था, माया मौसी और बुआ तीनो के बच्चा नही हो रहा था, सब मुझे ही बेटा मानती थी, जिस साल मे शहर गया उस साल दादा भी चल बसे थे, अब न्याय का फैसला माँ ही करती थी, माँ से सब डरते थे, शाम होने को आई, फूफा और मोसा एक कमरे मे बैठकर दारू पी रहे और अपनी बात कर रहे, साथ मे हुक्का चल रहा, इधर माँ मौसी और बुआ तीनो बैठी हुक्का पी रही, मौसी और बुआ दारू पी रही थी माँ कभी कभी ही पीती थी, दादी अपने कमरे मे थी, वो भी दारू हुक्का लगा रही थी सब काम माया ही करती थी, दादी के पास मे गया दादी आ मेरे लाल दादी थोड़ी नशे मे थी बैठ मै बैठ गया तभी मैने कहा दादी ये हुक्का क्यु पीती हो दादी बस बेटे ऐसे ही, मैने कहा दादी मै भी पीयू, दादी बोली हा बेटा तु भी अब सीख ले तु ही तो इस घर का चिराग़ है, मैने भी हुक्का पीना शुरू कर दिया, बड़ा मज़ा आया मे अपने कमरे मे आया और सो गया, सुबह उठा बुआ और मौसी जाने वाली है मौसी माँ से राज को कुछ दिन मेरे पास भेज देना मैं भी अपने बेटे के साथ रह लुंगी, माँ बोली अब तो सर्दी शुरू हो गयी गई गर्मी आते ही भेज दूँगी, इतना कहते ही, दोनो गाड़ी मे बैठ चल दी, दादी ने मुझे आवाज लगाई बेटा आजा तुझे खेत दिखा लाऊँ, मै दादी खेत की तरफ निकल निकल गये, पीछे तबेले मे माया और उसका पति थे, next....
 
मै दादी तबेले मे गये वहा एक घोड़ी बहुत चिगहाड़ रही थी, और एक घोड़ा अपना लंड निकाले हुए था, दादी ने माया को जोर से आवाज लगाई, माया दोड़ के आई जी, माया घोड़ी को तूने दिखाया नही कितना बोल रही है माया माँ जी मुझे आता नही दिखाना उनको आता है लेकिन वो चल नही सकते, दादी कोई बात नही मै दिखा देती हु दादी ने घोड़ी की रस्सी खोली और एक पेड़ के पास ले गयी, माया ने लंड निकाले घोड़े की रस्सी खोली की घोड़ा भाग निकला घोड़ी की तरफ और घोड़ी की पीछे आये मुह लगा रहा, देखते देखते घोड़ा लंड को पुरा निकाल लिया, दादी माया जल्दी भाग, माया भागती हुई एक जवान लड़की लग रही थी, इतने मे घोड़े ने अपने दोनो पैरो को उठा घोड़ी पर रख लंड का धक्का लगाने लगा, एक दो बार ऐसे ही हुआ सका लंड चूत मे नही जा रहा था, वो उसके उपर था, घोड़े ने पानी वीर्य छोड़ दिया, जो सीधा दादी के उपर जाके गिरा, दादी घोड़े के पानी से पुरा भीग् गयी, इतने मे माया ने घोड़े की रस्सी पकड़ी दादी देर करदी आने मे तूने अब के एक घण्टे की, हम तीनो वही खड़े थे, दादी घोड़े के पानी को साफ कर रही थी, बोल रही पुरा खराब कर दिया, कुछ देर बात करते रहे की घोड़ा फिर लंड को खडा कर दिया, माया ने जाके घोड़ी की रस्सी को फिर पकड़ लिया, दादी घोड़ी के पास खड़ी हो गयी जैसे ही घोड़े ने अपने पैरो को उठाया और आगे बढ़ा दादी ने घोड़े के लंड को हाथ से पकड़ कर घोड़ी की चूत पर लगा दिया, घोड़े ने एक धका दिया एक ही झटके मे पुरा लंड घोड़ी की चूत मे चला गया, घोड़ी जोर से चिंघाडी, दो झटके बाद घोड़ा नीचे उतरा उसका लंड ढिला हो गया और घोड़ी के चूत से बहुत सारा पानी निकल रहा, दादी बोली हो गयी ये तो, ये सब देखा तो मेरे लंड भी खडा हो गया जो पेंट मे अलग ही दिख रहा था, माया की नज़र अचानक मेरे लंड पर गयी तो उसकी आँखे खुली रह गयी थी, क्यों की मेरा लंड भी घोड़े जैसे ही था, दादी बोली चल घर चलते है साफ करना है, दादी और माया आगे चल रही , दादी के बड़े बड़े चूतड़ मटक रहे थे घाघरे से हिल रहे, और माया तो लड़की जैसे क्स्से हुए थे मेरे लंड ने खडा होना फिर शुरू कर दिया, माया अपने तबेले में चली गई मै दादी घर आये, देखा की बुआ और मौसी जा रही है, मौसी ने मुझे गले लगाया बोली बेटा गर्मी मे आना मेरे पास, मौसी का स्पर्श पाके लंड फिर से खडा हो गया, बुआ को जैसे ही गले लगाया, मै उनसे चिपक गया और मेरा लंड बुआ की चुत पर लगा, मेरे सिहरन सी दोड़ पड़ी, बुआ बोली बेटा कभी समय मिले तो मेरे पास भी आना, मै बोला जरूर बुआ, मौसी मोसा और बुआ फूफा गाड़ी मे बैठ कर निकल गये, हम घर में आये दादी नहाने चली गयी, दिन यु ही बीत गया, शाम को माँ त्यार होकर आई बोली तेरे फूफा की तबियत खराब हो गयी अचानक, मे उनके पास जा रही हु, एक सप्ताह तक लटूंगी, घर का ध्यान रखना और दादी का भी, माँ चली गयी माया आई और दादी के कमरे मे हुक्का लगाने लगी, मै अपने कपड़े बदलकर लुंगी पहन ली, और दादी के कमरे मे चल पड़ा, दादी ब्लाउस पेटिकोट मे बैठी हुक्का पी रही माया पास मे बैठी, मुझे देखा दादी बोली आ बेटा आजा, दादी बोली माया तु जा अब, माया चली गयी, मै दादी के पास बैठा की दादी बेटा अलमारी से रम और गिलास निकाल ला, सर्दी बहुत है, मै दारू और गिलास लाया दादी ने हुक्का मुझे दिया और एक पटियाला पेग बनाया मुझे देकर बोली ले बेटा, दादी आप लो ना पहले, दादी बेटा तु इस घर का वारिश है पहला हक तेरा ही है दादी की बात मुझे और मर्दाना बना रही, मै दादी पेग और हुक्का पिया फिर खाना खाया, दादी की जवान बदन मेरे लंड मे हलचल कर रहा, मे उनके पास रहने का बहाना ढूंढ रहा था, दादी आज मे आपके पास सो जाऊ, दादी बेटा ये तेरा ही घर है जहा दिल करे सो जाया कर, सर्दी थोड़ी बढ़ने लगी मै दादी के बेड पर सो गया दादी भी रज़ाई ली और दोनो के उपर डाल मेरे पास सो गयी, दोनो नशे मे मस्त हो रहे, दादी एक बात पूछूँ आपसे, दादी हा बेटा पूछ, दादी वो सुबह आप और माया क्या करवा रही थी, दादी मेरी तरफ देखा और सोची कितना भोला है इतना बड़ा हो गया लेकिन इतना भी नही पता, दादी बोली बेटा वो दोनो का मिलन करवा रही थी, मै दादी मिलन क्यु करवा रही थी आप और आपको कैसे पता इनका मिलन करना है, दादी हल्की सी हसी बोली जब कोई ज्यादा बोलती है तो वो मिलन चाहती है समझे, मै बोला अच्छा, दादी वो घोड़े ने आप पर पानी क्यु मारा, क्या था वो, दादी सुनकर सिहर गयी, सोचा घर का एक ही वारिश हैं इसको सब समझाना होगा, मेरी तरफ मुह कर मेरे सर पर हाथ फेर बोली, बेटा वो पानी नही बीज था उसका, तो दादी आप पर क्यु डाला, आप तो बोली भी नही, दादी हंसी पागल वो फिसल गया तो मेरे पर आ गया, दादी फिर आपने उसका हाथ से क्या पकडा, और क्या किया की वो गायब हो गया उसमे, दादी मेरी बात सुनकर साँसे तेज हो गयी, मेरा लंड भी ऐसी बात करके खडा था चड्डी मे,, दादी बेटा मैने तो उसको सही जगह लगाया था, क्या था दादी वो, दादी की साँसे तेज हो रही उनकी बड़ी बड़ी चुन्चिया ब्लाउस को उपर नीचे कर रही, दादी ने कई साल बाद ऐसी बात की, दादी को लगा की ये घर का एक ही वारिश है इसको सब बताना होगा,दादी बोली उसको लंड कहते है बेटा, अच्छा, दादी उसको कहा गायब किया आपने, दादी फिर हंसी पागल मैने कोई गायब नही किया मैने तो उसको सही जगह लगाया था, दादी सही जगह मतलब, दादी बेटा उसको चूत पर लगाया, दादी वो अपने आप नही जाता क्या, दादी अब कुछ गर्म हो रही, बोली बेटा जब चूत छोटी और लंड मोटा होता है तब पकड़ कर डालना पड़ता है, अच्छा दादी दादी वो घोड़ी जोर से क्यु बोली जब लंड अंदर गया तब, मेरे मुह से लण्ड सुनकर दादी की साँसे तेज और गर्म हो गयी, मेरा लंड मे भी तनाव आ गया और हल्का सा दर्द होने लगा, दादी बोली बेटा, जब लंड मोटा होता है तब दर्द होता है इसलिए, अच्छा दादी, जब लंड बाहर आया तब वो लटक क्यु गया, गया तब तो ऐसा नही था, दादी अपने पोते को ऐसी बात बता कर गर्म हो रही थी, रज़ाई मै गर्मी हो रही दोनो से अब, दादी बेटा जब बीज निकल जाता है तब वो ढिला हो जाता है अच्छा दादी, ये कहकर दादी दूसरी साइड मुह करके सो गयी, next...
 
दादी की पीठ मेरी तरफ हो गयी, गद्रायी हुई कमर और मोटे मोटे चुतर मानो मेरे लंड को बुला रहे है, मैने थोड़ी सी हिम्मत करके मेरा हाथ दादी की कमर पर रखा, गर्म गर्म गद्रायी हुई मुलायम कमर हाय हाथ लगते ही लंड मानो चड्डी को फाड़ देगा, मेरे बदन मे आग लगने लगी दादी से आज ऐसी बात करके, मेरे मन मे गंदे ख्याल आने लगे, माँ का बदन, हाय, मौसी और बुआ, दादी, माया, सब हूर की परिया लग रही थी, मैं अकेला जवान, जिसने आज तक किसी और को छुवा तक नही, इन सबको छूके अपना लंड को शांत करूँगा, दादी कुछ देर तक ऐसे ही सोई रही, मैने सोचा दादी सो गयी है शायद मैने अपने कमर को थोड़ा आगे खिसका दिया, जिससे मेरा लंड सीधा दादी की के दोनो चुतर के बीच लगा, उनके माँस से भरे बड़े बड़े चुतरो का महसूस पाके लंड और तनाव खाने लगा, मैने मेरे लंड का आकर बहुत बड़ा और मोटा था जो दादी के चुतर पर टिके थे, थोड़ा आगे बढ़ाया, दादी से चिपक गया, मेरी धड़कन बड़ गयी, मैने अपने कमर को थोड़ा सा हिलाया लंड चुतरो को रगड़ता हुआ दादी की कमर से लगा, इतने मे दादी बोली क्या कर रहा है कहा से लाया है ये लकड़ी इतनी रात को, फेक इसे, साथ लेके क्यु सोता है, दादी को मेरा लंड लकड़ी लगा, मै डर कर पीछे हो गया, मै दूसरी साइड मुह करके सो गया, सुबह माया चाय लेके आई दादी शौच के लिए चली गयी, माया चाय देने जैसे झुकी माया के ब्लाउस मे छोटी छोटी चुन्चियो को देखा, बेचारी ब्लाउस मे दबी पड़ी, मेरे लंड ने आकार बदलना शुरू कर दिया, मै लुंगी पहने बैठा था मेरा लंड चड्डी मे ही हिलोरे मारने लगा, माया मेरी उभरी हुई लुंगी को देख शर्मा दी, मैने चाय लेने के बहाने माया के हाथ को छुआ, क्या ही मुलायम हाथ थे, मज़ा आ रहा था, सबको माँ का डर रहता था, माया वहा से भाग गयी, तभी दादी आ गयी, बोली नहा ले , पुरा दिन ऐसे ही गुजर गया, अब शाम होने को आई, मै दादी कल कि तरह दारू और हुक्का लगा बैठ गये, दादी ने माया को बोल दिया की तू मत आया कर मुझे कोई काम होगा तो मैं बुला लुंगी, दादी और हम पेग पे पेग लगा रहे, और हुक्का मार रहे, आज मुझे ज्यादा हो गयी, दादी मै सो रहा हु, दादी बोली खाना तो खा ले, दादी आज नशा ज्यादा हो गया है मै सो रहा हु, और बेड पर सो गया, थोड़ी देर बाद मुझे जोर से पैसाब लगा, मै जल्दी से उठा और पैसाब करके आ रहा था, तभी मेरे पैर चोट खा गये, मै लडखडाटा हुआ बेड के कोने पर गिरा, और मेरे लंड पर बड़ी सी चोट लगी, मै जोर से चिल्लाया, दादी खाना खा रही थी, जल्दी से उठ कर आई, और बोली क्या हुआ बेटा, मै लंड को दबा रहा खडा था, दादी ने जल्दी से मुझे लिटा दिया, बोली बेटा बताओ कहा लगी, मैने लंड को दबा रखा था, दादी यहा लगी, दादी के लिए मै अभी बच्चा ही थे, दादी ने जल्दी से लुंगी खोल दी , कमरे मै हल्की रोशनी थी, मै चड्डी पर हाथ लगाया हुआ था, मेरे लंड मै दर्द हो रहा था, दादी को याद आया की एक बार दादा को लगी थी तो वैध ने तेल की शीशी दी थी, दादी जल्दी से तेल लेकर आई, मुझे बोली ले, इसको लगा, मै दर्द से कहरा रहा था, मैने बोला दादी आप लगा दो मुझे दर्द हो रहा है, मै नही लगा सकता, दादी मुझे बच्चा समझ रही थी, बोली ठीक है मै लगा देती हु मेरे बच्चे, दादी ने मेरी चड्डी पकड़ी और नीचे करने लगी मैने भी थोड़ा सा चुतरो को उठाया, चड्डी मेरे लंड से सरकती हुई नीचे हुई, मेरा सोया हुआ मोटा गोर लंड जैसे ही देखा वो हीचक कर उठ गयी, दादी की आँखो मै डर था, इतना मोटा और बड़ा हुआ लंड जैसे घोड़े का हो, दादी क्या हुआ जल्दी करो बहुत दर्द हो रहा है दादी अब भी दूर खड़ी एक नज़र लंड पर थी, दादी ने कई साल बाद लंड देखा, वो भी ऐसा, ऐसा किसी का नही होता, मैने जोर से बोला दादी जल्दी करो,, दादी हड़ बड़ाई और लंड पर नज़र गड़ा रखी, दादी बेड के एक कोने पर बैठ गयी दादी जल्दी करो, दादी हा बेटा, हड़ बड़ा कर, हा बेटा, अभी लो, दादी ने बोला कहा पर दर्द है में बोला दादी इसमे पुरे मे दर्द है, दादी की साँसे लंबी हो रही थी, दादी सोच रही की कैसे मै अपने बच्चे के लंड को हाथ लगा सकती हु वो भी ऐसा, लेकिन माँ का डर और अपने वारिश का ख्याल उन्हे मजबूर कर रहा था, दादी ने तेल की शीशी ली और खूब सारा तेल अपनी हतेली मे लिया और अपनी हतेली को तेल से मल लिया,, और उनके काम्प्ते हाथ ने मेरे लंड के उपर जाके लंड पर हाथ रखा, मुझे लगा जैसे कोई गर्म माँस रखा हो, इतनी मुलायम और गर्म हाथ था, दादी की साँसे बहुत लंबी हो रही, कितने सालों बाद देखा और छु रही थी, दादी ने अपनी हतेली को लंड पर नीचे लाई, इतना गर्म और मोटा लंड दादी को बहुत डरा रहा था, दादी की साँसे गर्म हो गयी थी, उसे वासना और डर दोनो लग रहा था, दादी ने अपनी हतेली को एक दो बार ऐसे किया, मेरा दर्द कम हो रहा, लेकिन मेरे लंड मे हलचल होने लगी, मेरा लंड धीरे धीरे खडा होने लगा ऐसा देख दादी की साँसे और तेज हो रही, उनकी चुन्चिया ब्लाउस को बाहर आने को बेताब हो, कुछ दी देर मे लंड जो पड़ा था खडा हो गया, 9 इंच खडा और मोटा और गोर लंड देख दादी की आँखे लाल हो गयी, दादी डरते हुए बेटा अब ठीक है क्या, हा दादी आराम आ रहा है थोड़ा और मालिश करो, दादी ने थोड़ा और तेल लिया, और खड़े लंड पर हाथ से मालिश करने लगी, मै समझ गया की दादी की जवानी मस्ती मारने को त्यार हो रही है, दादी जैसे ही हतेली नीचे ले जाती मेरे लंड की खाल साथ मै नीचे जाती, और लंड का सुपाडा खाली दिखाई देता, जैसे कोई साँप अपना फन ताने हुए हो, दादी की नज़र सिर्फ लंड पर थी, दादी की हतेली में पुरा लंड आ भी नही रहा था बहुत मोटा होने के कारण, दादी की चूत भी लंड को देख सलामी लेने लगी, कई सालो बाद दादी को अपनी चूत मे हलचल महसूस हुई, दादी मे मस्ती छाने लगी, उनकी साँसे बहुत तेज हो गयी, मे आराम लेटा था, दादी की पकड़ अब पहले से ज्यादा थी, मेरा लंड अब एकदम लोहे की तरह खडा था, दादी और मै दोनो अपनी मस्ती मे थे, दादी ने हाथों की स्पीड बड़ा दी, मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था, मेरा दर्द सारा गायब हो गया, मै भी जोर से साँसे लेने लगा, कुछ देर दादी मेरे लंड की मालिश कर रही थी की, मुझे लगा की कुछ निकलने वाला है अभी, तभी मेरे लंड ने पहली बार अपना पानी वीर्य छोड़ दिया, जिसकी पहली बूंद सीधी उपर छत से लगी इतनी लंबी बूंद देख दादी उपर देखने लगी, मुझे बड़ा ही असीम आनंद आ रहा था, और मेरा पानी दादी जो लंड पकड़े हाथ पर गिर रहा, बहुत सारा पानी मेरे पेट और जांघों पर गिर रहा, 2 मिनट तक पानी निकलता रहा,मुझे बड़ा ही आराम मिला पहली बार झड़ कर, झड़ने के बाद मेरा लंड वापिस सोने लगा लेकिन दादी ने उसको अब तक पकड़ रखा था और हाथ पर गिरा वीर्य को देख रही इतना गाढ़ा और इतना सारा वीर्य देख, दादी पागल सी हो गयी सोच रही बिल्कुल घोड़ा है मैने बोला दादी अब आराम मिला है छोड़ दो अब, दादी ने मेरी बात नही सुन रही सिर्फ लंड को देख रही, मैने जोर से कहा दादी, दादी हकलाई बोली आराम है बेटा, कहकर लंड को छोड़ दिया और अपनी चुनरी से हाथ पर गिरा पानी साफ करने लगी, और चुनरी के पलु से मेरा पेट और जाँघ साफ करने लगी, मेरे उपर लुंगी डाल दी, दादी का पल्लु पुरा गिला हो गया, दादी ने चुनरी निकाल सो गयी मेरे पास, मुझे पता नही कब नींद आई मैं सो गया, सुवह उठा.. 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सुबह हुई दादी अपना काम कर रही थी मैं उठा रात को बहुत अच्छी नींद आई थी तभी माया चल के आ गई माया को सामने देख मैं इससे मस्त हो गया हूं मैंने देखा जैसे ही माया चाहे देने नीचे चुकी उसकी छोटी-छोटी चुन्चिया मेरे सामने ब्लाउज के अंदर से दिख रही थी तभी मेरा नंद लण्ड फिर से उछाल मारने लगा मेरी चड्डी में ही खड़ा हो गया जिससे मेरी चड्डी उभर गई माया के नज़र जैसे ही नीचे पड़ी, माया थोड़ा सा मुस्कुरा गयी मैंने चाय लेने के लिए हाथ आगे बढ़ाया माया का हाथ आते ही झरा गया मुझे तुरंत चाय दे कर वहां से भाग गई मैंने चाय पी इतने भी दादी आ गई बोली बेटा नहा लो और दर्द कैसा है अब मैं बोला दादी अभी भी थोड़ा दर्द है दादी बोली जल्दी ही ठीक हो जाएगा मैं उठा नहाने चला गया मैं नहा कर आया दादी खाना लगा रही थी दादी बोली आ जाओ खाना खा लो पहले मैं बोला था दादी थोड़ा दर्द है मालिश कर दो ना दादी बोली हां तो तू भी कर सकता है अब तो ठीक है तु कमरे मे जा वहा तेल की शीशी वही पड़ी है जल्दी से मालिश करा फिर खाना खा ले मैं लूंगी बांध यहां आया तेल की शीशी हाथ में ली और बेड पर बैठ गया मैंने अपनी लूंगी खोल और चड्डी निकाल दी तेल को मेरी हाथ की हथेली में डाला जैसे ही लङ के ऊपर लगाया सो गया हुआ लण्ड खड़ा होने लगा पहली बार मैंने अपने लङ को हाथ ऐसे लगाया था मैंने तेल का हथेली को लङ पर फेरा तो लङ तनाव खाने लगा थोड़ी ही देर में मेरा लंबा और मोटा लङ खड़ा हो गया मुझे मस्ती सिखाने लगा, मेरी जवानी हीलोरे मारने लगी धीरे धीरे मेरी आंख बंद होने लगी मुझे दादी की रात वाली मालिश याद आने लगी तभी मेरे मन में दादी का बदन दिखने लगा मेरा हाथ लङ पर जल्दी चलने लगा मेरे लङ से सुपाड़ा की खाल कभी ऊपर जाती कभी नीचे आती मैं पहली बार अपने लङ को सहला रहा था मुझे दादी के बड़े-बड़े चूतड़ और बड़ी-बड़ी चूचियां याद आ रही थी करीब 10 मिनट तक ऐसे ही करता रहा,तभी मुझे लगा मेरे लङ से कुछ निकलने वाला है और मेरी वीर्य की बूंद सीडी सामने की दीवार पर लगी मेरी हाथ की रफ्तार भी कम होने लगी मेरा पानी निकल रहा था सामने की दीवार और निचे फर्श और बेड पर गिर रहा था मैंने जिंदगी की पहली बार मुठ मारी थी वह भी मेरी दादी की याद करके मुझे बड़ा ही आराम मिला मैंने लङ को अपनी चड्डी में डाला और दादी के पास चला गया दादी तब तक खाना खा चुकी थी मुझे बोली मालिश कर ली बेटा चल अब खाना खा ले मैं खाना खाने बैठ गया और खाना खाने लगा दादी वहां से उठकर अपने कमरे में गई जैसे ही कमरे में घुसे ही सामने का नजारा देख लो पागल सी हो गई उनकी आंखें खुली की खुली रह गई सामने दीवार से मेरे वीर्य की बूंद नीचे गिर रहे थी और दीवार पर लकीर सी बन रही थी नीचे फर्श और बेड पर बहुत सारा वीर्य गिरा पड़ा था दादी देख बोली मेरा लाल पूरा का पूरा घोड़ा है और एक कपड़ा लिया दीवार पर और बेड को साफ करने लगी पूरा दिन मस्ती में से निकल गया शाम को दादी अपने कमरे में बैठी थी मैं लूंगी पहन आ गया और फिर वही दारू हुक्का लगाकर दादी के पास में बैठ गया मुझे साइड से दादी की बड़ी-बड़ी चुन्चे ब्लाउस को फुला रखा था, मेरी नजर आप दादी को प्यार से देखने लगी थी मैं और दादी ने बड़े प्यार से दारू और हुक्का का मजा लिया दादी बार-बार मेरी तरफ देख रही थी ना दे बोली बेटा अब दर्द कैसा है मैं बोला दादी अभी भी थोड़ा है दादी बोली सब ठीक हो जाएगा मालिश करते रहना मैं बोला दादी मुझसे सही से मालिश नहीं होती आज आप कर देना दादी कुछ नहीं बोली, तभी दादी ने कहा मुझे जोर से पेशाब लगी है मैं पेशाब करके आती हूं next...
 
दादी पेशाब करने के लिए उठी जैसे ही चलने लगी नशा ज्यादा होने के कारण लड़खड़ा गई और गिर पड़ी दादी के हाथ आगे देखे थे और घुटने टिके थे दादी दादी मदमस्त घोड़ी हो रखी थी उनके घागरे से बड़े-बड़े चूतड़ फेल रखे थे जिसे देख मेरा लङ खड़ा होने लगा जिससे दादी की जाँघ और घुटनों पर चोट लगी, दादी जोर से चिल्लाई उईई मां मर गई, मैं जल्दी से उठा दादी को पकड़ा कंधों से और दादी को उठाकर बेड पर बिठाया दादी जोर से कराह रही थी, मैं बोला दादी आप बेड बेड रेस्ट करो दादी वाली मुझे जोर से पेशाब लगी है मैंने दादी का हाथ पकड़कर बेड से खड़ा किया दादी ने एक हाथ मेरे कंधे पर रखा और मैंने भी अपना एक हाथ दादी की चर्बी भरी कमर पर रखकर हाथ से पकड़ ली उनकी मुलायम खाल और मांस से भरी खाल का स्पर्श पाकर मेरे लङ में तनाव आने लगा, दादी का बाई चुन्चिया मेरे सीने के साइड से लगी मेरा लंड तो चड्डी मे ही फड़फड़ा रहा था, दादी मेरे साथ बाहर मै बाहर आ गया, वहा खुला खेत सा था थोड़ा, और अंधेरा सा था दोनो नशे मे चूर थे, मै दादी को एक पेड़ के पास लेकर गया, दादी बोली बेटा यही छोड़ दे अब रुका नही जा रहा और दर्द से कराह रही थीn, next
 
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दादी चोट के कारण बैठ तो सकती नही, मुझे बोली बेटा तु पीछे हो जाओ, मै पैसाब कर लेती हु, मै दादी के थोड़ी दूर पीछे खड़ा हो गया, दादी ने एक हाथ पेड़ से पकडा हुआ था और एक हाथ से आगे से अपना पेटिकोट उठाया और पेंटी को साइड kr दिया और अपने दोनो पेरो को खोल कर चोड़ा कर दिया इतने में ही दादी ने पैसाब करना शुरू कर दिया जो दादी के दोनो पेरो के बीच गिर रहा था, मुझे दादी की फूली हुई चूत से निकला पैसाब और जमीन पर गिर रहा दोनो की सर्र र र र र र.. की आवाज मद्होश कर रही, दादी 2 मिनट तक पैसाब करती रही, करने के बाद दादी ने अपनी पैंटी को फिर से चड्डी से ढक ली और पेटिकोट को नीचे कर दिया, बोली बेटा मुझे कमरे तक ले चल, मैने फिर से दादी की कमर पर हाथ रख कमरे की तरफ चल पड़ा, जैसे ही कमरे के दरवाजे पर आये नशे मे होने के कारण फिर से पैर टकरा गया, और दादी मेरी पकड़ से छूट कर जोर से बेड पर पेट के बल गिर गयी, दादी ने मेरे कन्धे पर हाथ था तो मे भी जोर से दादी के पीछे उनके उपर गिरा, दादी बेड पर पेट के बल लेटी थी और मै उनके उपर गिरा तो उनके गदराये हुए बड़े बड़े चूतड़ पर मे गिरा और मेरा चड्डी मे तना लंड दादी के चूतडो पर था, दादी के रस भरे चूतड़ का पहली बार स्पर्श पाके लंड पूरी तरह से तन गया, शायद दादी ने भी पेटिकोट के उपर से ही लंड को महसूस कर लिया और चीखी क्या कर है बेटा मार डाल दिया रे, मै जल्दी से उनके उपर से हटा दादी माफ करना मै भी सम्भल नही पाया, दादी कोई बात नही बेटा, मैने दादी का हाथ पकड़ कर सीधा किया, मैने कहा दादी मुझे भी आप पर गिरने से दर्द शुरू हो गया फिर से, मैने जानबुजकर ऐसा कहा, दादी ने कहा बेटा मुझे भी बहुत दर्द हो रहा है, जा तेल लेकर आ पहले मे लगा देती हु, फिर तु भी लगा देना, दादी लेटी थी,,, next....
 
दादी बैठीं और मेरे हाथ से तेल हाथ की हतेली मे डाल कर जैसे ही अपना पेटिकोट उपर सरकाना शुरू किया, उनकी गोरी गोरी पिंडलिया देख मेरे होश उड़ने लगे, दादी बोली बेटा, लाइट जला दे, मैने जल्दी से लाइट जला दी, मै दादी के सामने बेड पर खडा था, दादी ने पेटिकोट घुटनों तक किया और एक टांग मोड कर बैठ गयी, मैने जीवन में पहली बार किसी की टांग देखी, मेरा लंड चड्डी मे पुरा खडा हो गया, ढूध जैसे सफेद टांग, मानो रोशनी कर रही हो, दादी दर्द से कराह रही और घुटनों पर तेल की मालिश कर रही, दादी के हाथ से उनके चुन्चे ब्लाउस से बाहर आने को बेताब हो जैसे, मेरी तो साँसे तेज हो गयी बड़े बड़े ब्लाउस मे पड़े चुन्चो को देख कर, दादी ने मुझे बोला बेटा तु क्यु खडा है, तु भी मालिश कर ले, इतना कह दादी ने शीशी मेरी तरफ की, मैने दादी की तरफ हाथ कर हतेली की, दादी ने मेरी हतेली पर तेल डाला बोली ले करले, मैने झट से अपनी लुंगी खोली, लाइट की रोशनी मे दादी ने देखा की मेरी चड्डी बड़ी दूर तक उभरी हुई है दादी को जैसे झटका लगा, मैने अगले ही पल मे अपनी चड्डी नीचे कर दी, मैं भी चाहता था की दादी आज लाइट मे दादी को पुरा दिखाऊ, जैसे ही चड्डी नीचे हुई, मेरा तना हुआ लंड एक ही झटके मे बाहर आ गया, 9 इंच का गोरा और मोटा लंड बिल्कुल घोड़े जैसा लग रहा था, जैसे ही दादी की नज़र मेरे तने हुए लंड और छोटे छोटे झांट पर पड़ी दादी की आँखे चोड़ी हो गयी, दादी का मुह खुला रह गया, हाय राम बोली, मैं बोला दादी क्या हुआ, दादी ने बात बदल दी, आह बेटा दर्द हुआ, दादी को सामने ऐसा देख मुझे कंट्रोल होना मुश्किल हो रहा था, तभी दादी ने अपना मुड़ा हुआ दूसरा पर और साइड मे कर उसपर एक हाथ रख दूसरे हाथ से आगे झुकती हुई मालिश करने लगी, दादी के आगे झुकने से उनकी चुन्चिया और घाटी सामने दिखने लगी, मैने एक ही पल में लंड पर हाथ रखा दादी मेरी तरफ मेरे लंड को देखने लगी, दादी की साँसे तेज हो गयी, मैने बिना देर करते हुए लंड की मालिश शुरू कर दी, जैसे ही लंड पर तेल लगा, लंड चिकना हो गया मानो किसी मोटे लोहे पर तेल लगा हो, दादी की साँसे लंबी होने लगी, जिससे उनकी चुन्चिया भी उपर नीचे होती, मुझे दादी की ऐसी हालत देख लंड पर रफ्तार बडा दी, दादी की हिम्मत जवाब दे गयी और, दादी ने घुटना छोड़ पीछे लेट गयी और मेरे लंड की तरफ एक नज़र से देखती हुई बोली बेटा आराम से कर, जल्दी क्यु कर रहा है, मै समझ गया कई सालों बाद दादी लंड को देखकर मस्त हो गयी है दादी की साँसे तेज से उनकी चुन्चिया और पेट कभी उपर कभी नीचे हो रहे, उनकी नाभि मानो पानी से भरना चाहती हो, मेरा लंड पर हाथ आराम से चला रहा, तभी दादी ने अपना पर पुरा साइड मे कर मोड रखा, मेरी नज़र दादी पर तो थी ही, देखा उनके मुड़े हुए पर से पेटिकोट थोड़ा साइड हो गया, दादी की काली पैंटी मुझे दिखी, मेरी साँसे और तेज हो गयी, मेरी नज़र पैंटी को देखने लगी, इतने मै ही मेरे लंड से पानी का गुबारा फुट पड़ा, जो दादी की उपर होता हुआ सामने की दीवार से लगा, मेरा वीर्य दादी के मुह, ब्लाउस, पेट और पेटिकोट पर गिरने लगा, आह दादी, कहकर मै झड़ने लगा, मेरे पानी से दीवार और दादी, और बेड और फर्श पुरा भर गया , मेरा हाथ लंड से हटा और लंड नीचे होने लगा, मै बोला दादी अब आराम आया है, दादी बोली वो तो ठीक है बेटा लेकिन देख कमरे की क्या हालत हो गयी, है राम, पुरा जानवर है तू, कहते हुए दादी ने अपनी चुनरी खोल दी और खुद को साफ करने लगी और मुझे देते हुए बोली बेड और फर्श भी साफ कर दे बेटा,मुझसे नही होगा,मैने चुनरी ली जो गली हो चुकी थी,साफ कर एक तरफ फेंक दी, मै चड्डी को पहनने को जैसे ही हाथ बढ़ाया दादी बोली बेटा जब तक दर्द ठीक नही होता, तब तक चड्डी मत पहन, यहाँ कोई नही है, तेरी माँ आ जाए तब तक मत पहन, दादी की आँखो और बातो मै मुझे मस्ती नज़र आ रही थी, मैने लुंगी उठाई और बांधने लगा और बोला सही कहा दादी आपने चड्डी मै बहुत दर्द करता है, कहकर दादी के पास लेट गया
 
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दादी बोली रज़ाई डाल लो उपर, मैने रज़ाई डाल दोनो ने ओढ़ ली, दादी मेरी तरफ देख बोली मेरा बेटा अब जवान हो गया है, मै बोला दादी आपको कैसे पता मे जवान हो गया हु, दादी मुस्कराई, बोली बेटा मैने सब देख लिया है तेरा, जल्दी ही तेरी माँ को बोलूँगी तेरी शादी करदे , दादी बताओ ना, कैसे लगा की मै जवान हो गया हु, दादी पागल दादी हु तेरी मुझे सब पता है अब सोजा, मै बोला दादी आप बताओ ना, नही मै माँ से पूछूँगा, दादी डर सी गयी, नही बेटा तुझे मेरी कसम है इस कमरे की बात तु किसी से नही कहेगा, दादी इक्लोता वारिश होने के कारण मुझे हर बात बताती थी, मै बोला ठीक है दादी नही कहूंगा किसी से, लेकिन आप बता नही रही हो की मै कैसे जवान हो गया, दादी कुछ देर मेरी तरफ देखा, और बोली मेरे बच्चे, तेरा मैने सब देखा है इसलिए बोली, दादी ऐसा क्या देखा की मै जवान लगने लगा, दादी मेरी मासुमियत पर हंसी, और मेरी तरफ मुह कर ली, बोली बेटा अब तुझे पानी आने लगा है, इसलिए तु जवान हो गया है, दादी पैसाब तो छोटे बच्चे भी करते है क्या वो भी जवान, है, दादी हंसी बोली बेटा मै पानी की बात नही कर रही, मै तेरे पानी यानी वीर्य जी, तूने अभी किया तब जो निकला था, यही पानी जिसको बीज कहते है, दादी की आँखो और बातो मै वासना दिख रही थी, दादी ये बीज निकला था क्या, दादी हा बेटा, लेकिन दादी मैने तो किसी से मिलन भी नही किया, आप तो बोली की जब मिलन होता है तब निकलता है, दादी की नज़र मेरे मासूम सवालो पर थी, बोली बेटा जब तु मालिश कर रहा था तब ऐसे हिलाने पर भी बीज निकल जाता है, मै बोला अच्छा दादी, दादी जब बीज निकलता है तब साँसे तेज क्यु हो जाती है और अच्छा सा क्यु लगता है, और निकलने के बाद थक सा क्यु जाता हु, दादी हंसी बोली बेटा यही तो जवानी है, जब बदन की गरमी निकलती है ऐसे तो अच्छा भी लगता हैं और थकान भी हो जाती है, दादी अब मै भी बच्चे कर सकता हु ना, मेरे भी बीज निकलता है दादी हंसी और बोली पागल, इसलिए तो शादी के लिए बोल रही हूँ, और पूरी नदी सी बहाता है तू, मै बोला दादी शादी क्यु ऐसे बच्चे नही कर सकते, किसी के साथ, दादी एकदम डर सी गयी, उनके सामने पापा और माँ के साथ हुई बात याद आ गयी, नही बेटा ऐसा मत करना, किसी को जबरदस्ती पकड़ कर, जिससे शादी होती है उसी के साथ ही बच्चा पैदा करना सही होता है, मै बोला दादी फिर मौसी बुआ और माया बच्चे क्यु नही कर रहे, दादी के सामने मै जवान घोड़ा भी था और नादान मासूम बालक भी, दादी बोली बेटा वो तयारी कर रहे है अभी उनके हो नही रहा, मै बोला दादी क्यु नही हो रहा, दादी बोली बेटा उनका बीज काम नही कर रहा सायद इसलिए, दादी बोली अब सोजा, और दादी दूसरी साइड मुह करके सो गयी, बीच रात को सर्दी तेज हो गयी मुझे बहुत सर्दी लगने लगी रज़ाई मे भी, मैने दादी कि तरफ मुह करके सो गया दादी का मुह अभी भी दूसरी तरफ था... Next
 
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