आगे...
तभी बुआ फूफा जी को दवा देकर आ गई, और कंबल मे पैर डालकर बैठ गयी, हम तीनों बैठकर बाते करने लगे, दादी बोली बेटी चिंता मत कर जमाई जल्दी ठीक हो जाएंगे,
बुआ--माँ आप दोनो कुछ दिन यही रुक जाओ, मुझे अच्छा लगेगा, मेरी तरफ देखती हुई मै अपने बेटे से भी अच्छी तरह मिल लुंगी, और थोड़ी सी हंसी
दादी- ठीक है बेटी हम कुछ दिन तेरे पास ही रहेंगे, तभी मेरे दिल मे खुशी की लहर उठी, मै बुआ को दिल भर कर देखूंगा, मेरे सामने बुआ माँग मे सिंदूर बड़ी सी बिंदी, और ब्लाउस मे तने हुए चुन्चे, एकदम अप्सरा लग रही थी,
हम तीनो कुछ देर बाते करते रहे, तभी मै बोला दादी मुझे नींद आ रही हैं मै सो जाता हु, दादी - ठीक है बेटा सोजा लेकिन कपड़े तो बदल ले, मै बोला दादी मे लुंगी नही लाया तभी, दादी ने बुआ की तरफ देखती हुई बोली इसको लुंगी मे सोने की आदत है
बुआ- कोई बात नही, बेटा मै तेरे फूफा की लुंगी लेकर आती हु वो पहन कर सो जाना, कहती हुई बेड से खड़ी होकर लुंगी लाने चली गयी,
दादी बेटा आज चड्डी मत निकालना तेरी बुआ देखेंगी तो अच्छा नही लगेगा, मै बोला दादी चड्डी तो मैने पहनी नही आपने ही तो मना किया हुआ है, दादी बोली कोई बात नही बेटा तु साइड मे होकर कपड़े बदलना तेरी बुआ को ना पता चले, दादी को डर था की मै बिना चड्डी दादी के साथ सोता हु बुआ को पता नही चल जाए,..
इतने मे बुआ लुंगी लाई,
बुआ- ले बेटा ये पहन ले और सोजा कहती हुई कंबल मे पैर डाल लिए,
मै खड़ा हुआ लुंगी उठाई और साइड मे जाके लुंगी को लपेट और हाथ डाल पेंट खोल दी पेंट निकाल रख लुंगी पहन जल्दी से कंबल मे घुस गया, और लेट गया और सोने की कोशिश करने लगा और आँखे बन्द कर ली, कुछ देर ऐसे ही लेटा हुआ था, दादी ने मेरी तरफ देखा कि मै सोया या नही, मेरी बन्द आँखो को देख, मै कोई हलचल नही कर रहा सोचा की मै सो गया हु, धीरे से बुआ से बोली बेटी एक बात तो बताओ, तुम पेट से हूई या नही,
बुआ- नही माँ, बहुत कोशिश कर रही हु लेकिन उनकी कमज़ोरी के कारण कभी कभी होता है, वो भी सही नही होता कहा से पेट से होऊ कहकर थोड़ा दुखी सी हो गयी, मै नींद के बहाने सब बात सुन रहा था, दादी- बेटी जल्दी कोशिश कर मुझे बहुत डर लगता है कही कुछ अनहोनी ना हो जाए
बुआ- माँ कोशिश तो बहुत कर रही हु लेकिन इनकी कमज़ोरी मे बहुत कम हो पाता है, पता नही मेरे नसीब मे ओलाद का सुख है या नही.
दादी - बेटी चिंता मत कर भगवान सब देख रहा है वो जरूर तेरी सुनेगा,
मे सोच रहा तभी बुआ के बच्चे नही हो रहे, तभी ये जवान दिख रही है, फूफा तो इनकी जवानी का मज़ा लेते नही, बुआ और दादी कुछ देर बाते करती रही फिर दादी बोली बेटी अब सोजा हम कल दिन मे बात करेंगे, बुआ बोली ठीक है माँ, कहती हुई उठी और बोली माँ रात को कुछ चाहिए तो मै पास वाले कमरे मे हु आवाज लगा देना उस तरफ टॉयलेट है कहकर फूफा के कमरे मे चली गयी, दादी ने कहकर चुनरी खोल लेट गयी, कुछ देर मे ऐसे ही लेटा रहा उठा और बोला दादी मै पैसाब करके आता हु दादी बोली ठीक हैं बेटा कर आ, मै पैसाब कर आया और कंबल मे सो गया, दादी जग रही थी कि मै बोला दादी सो क्यु नही रही आप,
दादी- बेटा आज ना दारू पी ना हुक्का लगाया, इसलिए बैचेनी सी हो रही है तू सोजा मेरे लाल, मैने दादी से चिपते हुए नही मै कैसे सो जाऊ मै तो दादी के साथ मे ही सोऊंगा, और एक हाथ दादी के पेट पर से डालते हुए साइड मे कमर पर रख दिया, और दादी से चिपक गया, दादी की जाँघ की साइड पर मेरा लुंगी में पड़ा लंड टच कर दिया, दादी का कोमल स्पर्श पाके लंड मे तनाव आने लगा, दादी बोली मेरा लाल मेरा कितना ख्याल रखता है, दादी बोली कल बेटी को कहूंगी दारू और हुक्का के लिए, तभी मैने दादी आपका दर्द कैसा है अब दर्द है तो मालिश कर दु मै तेल लाया हु, दादी थोड़ी सी हस्ती हुई, मेरा लाल मेरा बहुत ध्यान रखता है, जब ले ही आया है तो जा कमरा बन्द कर दे कूंडी लगा दे और मालिश कर दे, मै जल्दी से उठा कूंडी लगाई और बेग से तेल की शीशी निकाली और बेड पर आ गया, दादी ने अपने पेरो से कंबल निकाल दी, मैने देखा दादी मदमस्त नागिन कि तरह लेटी थी, बड़ी बड़ी चुन्चिया ब्लाउस को उभार रही थी, मोटी सी नाभि, और पेटिकोट, तभी बोली बेटा तेरा दर्द कैसा है मै बोला दादी अब ज्यादा नही है, दादी बोली कोई नही जब तेल पास मे है तो लगा देती हु, कल की तरह, दादी को मेरे लंड पसंद आ गया था वो उसको किसी भी बहाने से छूना चाहती थी बस, दादी बोली बेटा घुटनों मे दर्द नही है जाँघ पर दर्द है मै समझ गया दादी मालिश के बहाने खूद को शांत करना चाहती है, झर कर, दादी जवानी कि याद मे आना चाहती है तभी दादी ने पेटिकोट को पकड़कर उपर जाँघ तक कर दिया, आज पुरा पेटिकोट उपर किया तो दोनो जाँघ दूध कि तरह चमक रही थी, मांस से भरी गोरी गोरी, जाँघ देखते ही मेरे लंड मे हलचल हो गयी और खडा हो गया और जहां से लुंगी बांधते है वहा से नीचे तक पुरा ऐसे ही जुड़ा रहता है उस जगह से बाहर आके खडा हो गया, दादी ने जैसे ही लंड निकलता देखा वो समझ गयी की उनकी गोरी गोरी जाँघ को देखकर मेरा लंड खड़ा हुआ है, दादी ने एक लंबी साँसे ली, दादी से रहा नही जा रहा था दादी बोली बेटा जैसे कल लेटा था वैसे लेट जा मै भी तेरी कर देती हु, और दादी ने करवट मेरी तरफ ली और अपना एक पैर जिस पर लगी नही थी उसको घुटनों से मोड दिया और एक पैर सीधा था, दादी के ऐसे लेटने और पैर मोड़ने से दादी का पेटिकोट थोड़ा और उपर सरक गया और दादी की लाल पैंटी कि झलक दिखी, मैने बिना देरी करते हुए दादी के हाथ पर तेल डाला और खुद कि हतेली पर तेल डालकर कल की तरह लेट गया, दादी ने बिना देर करते हुए झट से लंड के सुपाडे पर तेल भरा हाथ रखा, जो बहुत ही गर्म था और हाथ को लंड पर दबाती हुई नीचे ले जाने लगी, और कभी उपर करती, दादी के हाथ के साथ लंड के सुपाडे पर कभी लंड की खाल आती और कभी नीचे चली जाती, दादी के ऐसे करने पर लंड पूरी तरह तन गया, मैने भी बिना देर के दादी की जाँघ पर तेल भरा हाथ रख दिया, क्या ही कोमल और मस्त जाँघ थी, मज़ा आ गया, और मालिश करने लगा, दोनो अपनी मस्ती मे मालिश कर रहे थे, तभी मैने पूछ लिया दादी एक बात पूछूँ दादी समझ गयी कोई मस्त ही बात पूछेगा पक्का, हा बेटा पूछ, मै तुझे सब बताऊंगी, मै बोला दादी मै जब मालिश कर रहा था कल तब आपने झटके खाकर पैसाब क्यु कर दिया, आप बोल देती और पैसाब कर आती बाहर, दादी हंसी और बोली मेरा लाल कितना भोला है, मै दादी बताओ ना, दादी अब मेरे साथ खुलकर बात करती थी, बेटा जैसे तेरा पानी निकलता है और मज़ा सा आता है वैसे ही हम औरतो का भी होता है, मै बोला दादी आपने तो मेरा लंड की मालिश की तब निकला मैने तो आपके लंड की मालिश नही की और मेरे तो पैसाब नही निकला दादी, मै भोला बनकर दादी से यह सब पूछ रहा था, दादी फिर से हंसी पागल हम औरतो के लंड नही होता है, मै दादी तो फिर क्या होता है जिससे आपका पैसाब निकल गया, दादी मेरी बातो से मस्त हो रही थी और लंड को दबा दबा कर मालिश कर रही थी, पागल हम औरतो के जहा से पैसाब निकलता है उसको चूत कहते है, और पागल सबको पैसाब नही आता, अब मै इतनी जवान नही हु ना तो जब मज़ा आता सा आता है तो पैसाब रोक नही पाती इसलिए निकल गया, मै बोला दादी लेकिन आपको मज़ा सा क्यु आया मैने तो आपकी चूत पर मालिश नही की, दादी मेरी बात सुनकर जोर जोर से साँसे लेने लगी, पहली बार मैने दादी की चूत की बात की भोला बनकर, दादी ने लंड पर स्पीड बड़ा दी थोड़ी, और मै भी जाँघ को थोड़ा दबा दबा कर मालिश दे रहा, दादी बोली बेटा औरत एक नाजुक सी होती है उसका हर अंग नाजुक होता है जब कोई उसको हाथ लगाता है तो वो मस्ती मे हो जाती है, तूने भी ऐसा किया इसलिए मुझे अच्छा लगा, मैने देखा की दादी ने अपने पेरो को थोड़ा चौड़ा कर दिया, जिससे उनकी पैंटी आराम से दिख रही, लाल पैंटी दोनो पेरो के बीच चूत के दोनो फांकों को ढकी हुई थी और बीच मे से गीली हो रही थी, मै समझ गया दादी पूरी गर्म है, मै बोला दादी कोनसा कोनसा अंग नाजुक होता है दादी बोली बेटा जो औरत ढक कर रखती है वो सब नाजुक होते है, मै बोला दादी पेट नही होता क्या, दादी बोली हा बेटा पेट भी होता है, नाभि भी, लगभग सभी होते है, अच्छा दादी मैने आपकी जाँघ की मालिश की तभी आपको अच्छा लगा, दादी बोली हा बेटा, मेरा लाल समझदार हो गया है, जीता रह, हम दोनो मालिश से मस्त हो चुके थे लंड तेल से चमक रहा था, मैने धीरे से मालिश करते हुए दादी की पैंटी जहा से गिला था ऊँगली लहरा दी, दादी अचानक से अपनी कमर का उठाई, दादी की चूत के छेद पर जो लगी, दादी की पैंटी और गीली होने लगी, दादी लंबी साँसे लेने लगी,तभी मैने दुबारा से वही ऊँगली लगाई मालिश के बहाने, दादी से रहा नही गया और, हें राम मर गयी कहती हुई झटके के साथ झरने लगी, और पैसाब की झल झल आवाज के साथ करने लगी, दादी दादी ने अपने दोनो पेरो को दबा लिया जोर से, मेरा हाथ दादी के दोनो जाँघ के बीच फसा हुआ था, दादी के दोनो जाँघ की गर्मी से मै भी पिंघल गया, और लंड ने पानी छोड़ दिया, आज दादी ने जब पानी निकलने वाला था लंड को दूसरी साइड कर दिया, मेरा लंड दीवार के सामने था, और दीवार पर वीर्य की पिचकारी जाने लगी, बहुत सारा वीर्य दीवार पर गिरा और कुछ फर्श पर, मै अब शांत हुआ, दादी बोली क्या खाता है मेरा लाल, कितना बीज निकलता है, पूरी दीवार भर दी, सुबह जल्दी साफ करनी पड़ेगी नही तेरी बुआ क्या सोचेगी,, next