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Incest रुतबा या वारिस

आगे...

हम पापा से मिले हालचाल पूछा कुछ देर बाते करते रहे, पापा बोले अब आप जाओ,

हमने पापा को नही बता रखा की हम यही शहर में कमरा लेकर रह रहे है, क्यु की हम पापा को परेसान नही करना चाहते थे,

मै और माँ दोनो अपने कमरे पर पहुंचे, माँ बोली मै नहा लेती हु फिर तु भी नहा लेना, मै-- ठीक है माँ

माँ बाथरूम मै गयी वहा गर्म पानी के लिए गीजर लगा था, माँ जल्दी से नहा कर आ गयी, मुझे बोली जा तु भी जल्दी नहा ले फिर खाना खाते है, मै भी जल्दी से बाथरूम मे घुस कपड़े निकाल दिया,

मैने देखा की बाथरूम के एक कोने मे माँ कि पैंटी ब्रा ब्लाउस पेटिकोट पड़े है, मैने अपने पुरे कपड़े निकाल दिये, और माँ के ब्लाउस को उठाया और सोचने लगा की माँ अपने चुन्चिया इनमे कैसे ढक कर रखती होगी, मैने देखा की माँ के बगल के पसीने से ब्लाउस कांख से गिला हो रखा था, मैने तुरन्त पसीने को नाक के पास ले जाके सुघने लगा, बड़ा ही मस्त खुशबु आ रही थी, मेरा लंड खडा होने लगा, मैने एक हाथ से लंड को सहलाने लगा, कभी पेटिकोट को सुंघता कभी ब्लाउस को, लंड पूरी तरह तन गया था और मेरे हाथ की गति भी तेज हो गयी, मैने ब्रा को मुह मे लेकर चूसने लगा जैसे माँ के चुन्चिया चूस रहा हूँ, जैसे ही माँ की पैंटी हाथ मे ली, मुझे पैंटी पर थोड़ा खून सा दिखा, मै समझ गया माँ को आज पेरियड आ गये है, मेरी खुशी दुगुनी हो गयी, माँ के अब भी माहवारी आती है, माँ तो बच्चे दे सकती हैं, मेरी गति और तेज हो गयी, इतने मे ही मेरे लंड से वीर्य निकलने लगा, मैने तुरंत पैंटी पर सारा माल गिरा दिया, वीर्य और माँ का खुन एक हो गये, मै ये सब हकीकत मे करना चाहता हु,

मै फिर जल्दी से नहा कर बाहर आया, माँ तब तक तैयार होकर बैठी थी, आज माहवारी आने से उनको थकान और दर्द भी था हल्का सा,

माँ उदास सी बैठी थी, मैने पूछा माँ क्या हुआ चुप क्यों बैठी हो,, माँ झुठ बोलते हुए, बेटा थक सी गयी हु इसलिए शायद,

माँ माहवारी में केवल एक कपड़ा लगाती थी, उनको पेड के बारे मे नही पता था, ना ही ये पता की माहवारी क्यु आती है,

मैने कहा माँ मै अभी आता हु तब तक आप खाना लगाओ टिफिन आ गया होगा,

माँ- पहले खाना तो खा ले, फिर चले जाना कहा जाना है

मै-- बस यू गया यू आया,

मै जल्दी से बाहर आया पास मे ही दवाई की दुकान थी उसमे से पेड का पकेट लिया और जल्दी से घर आ गया,

माँ खाना लगा रही थी, अरे आ भी गया, और ये क्या है हाथ मे, मै-- माँ पहले खाना लगाओ, खाते है फिर बताता हु

हम दोनो ने खाना खाया, और छत पर चले गये, मै साथ मे पेड का पकेट भी ले गया,

माँ-- क्या है बेटा बताया नही ये,

मै,-- माँ मै पढ़ा लिखा हु सब जानता हूँ आप इसके बारे मे नही जानती हो,

माँ-- तो तु ही बता दे क्या है

मै-- माँ मुझे पता है आपको माहवारी शुरू हो गयी है ये उसी के लिए है,

माँ ये सुन चोंक सी गयी,

ये क्या कह रहा है तु, और तुझे कैसे पता की मुझे माहवारी आ गयी गई,

मै-- माँ मै जब बाथरूम में नहा रहा था, तब अचानक मेरी नज़र आपके साइड में पड़े कपड़े पर चली गयी, उस पर खून दिखा तो मै समझ गया की आपको माहवारी शुरू हो गयी है,

माँ एकदम चुप हो गयी, बेटा मै जल्दी मे भूल आई, अभी उनको धो कर आती हु,

मै-- अरे माँ, रुको मैने धो दिये है आप चिंता ना करो,

माँ-- अरे क्या बेटा, ये गलत बात है माँ के कपड़े साफ नही करते, ना ही उन्हे देखते और छूते है, सब गलती मेरी ही है मै ही वहा भूल आई,

मै-- माँ आप भी ना, इसमे गलत क्या है, और मै समझदार हु सब पता है मुझे, मेरे भी तो आपने धोये है मैने धो दिये तो क्या गुनाह कर दिया,

माँ-- बेटा माँ तो बच्चे के धो सकती है लेकिन बेटा माँ के नही,

मै-- माँ मैने तो आपकी सहायता करनी सोची अगर आपको अच्छा नही लगा तो माफ करदो, मै जानबुझकर उदास सा हो गया,

माँ-- अरे नही बेटा, ऐसी बात नही है, मै आगे से ध्यान रखुंगी, तु उदास मत हो, तु ही तो मेरा एक सहारा है

ये तो बता ये लाया क्या है

मै-- माँ ये आपके लिए है

माँ-- मेरे लिए, ऐसा क्या है इसमे

मै-- माँ ये माहवारी मे काम आता है, जब खून शुरू होता है तब इसको लगाने से खुन ये सोख लेता है, ना तो कपड़े खराब होते है ना कोई बीमारी

माँ-- लेकिन मै तो कपड़ा लगाती हु, ये मुझे नही आता कैसे लगाते है,

मै-- माँ कपड़े से आपको समस्या हो सकती है वो सही नही है आप ये लगाना

माँ-- मै नही जानती बेटा, कैसे लगाते है,

मै-- माँ को समझाते हुए माँ इसको ऐसे पकड़ो और इसको ऐसे लगाना, आप ख़ुद देखना आप आराम दायक महसूस करोगी,

माँ एक पेड लेकर दूसरे कमरे मे चली जाती हैं, कुछ देर मे आती है, बेटा ये ठीक सा लग रहा है, इसमे आराम है बहुत, कहती हुई माँ धुप मे बैठ गयी, मै पास मै खडा रहा,..
 
आगे,,

माँ-- पता नही बेटा हम औरतो को ये खून क्यु आता है,

मै-- माँ ये माहवारी होती है जो अच्छी होती है,

माँ -- अच्छी कैसे बेटा,

मै-- माहवारी आने का मतलब है की माँ बन सकती है

माँ-- समझी नही बेटा

मै-- माँ जिसको माहवारी आती है मतलब उसमे अंडे बनते है वो माँ बनने के लायक है,

माँ-- मतलब मुझे माहवारी आई तो मै भी माँ बन सकती हु,, एकदम खुशी से बोली

लेकिन अचानक चुप हो गयी,

मै-- माँ क्या हुआ

माँ-- कुछ नही बेटा,

मै-- माँ आप बात बहुत छुपाती हो, एक मै हु जो सब बात बताता हु, मेरा इस दुनिया मे आपके सिवा कोई नहीं, आप माँ भी हो और मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी

माँ-- अच्छा मुझे दोस्त भी मानता है मेरा लाल,

मै -- हा माँ,, एक आप ही हो बस

माँ-- लेकिन बेटा मै तेरी माँ तो हु लेकिन मुझे कुछ भी नही पता दुनिया के बारे मे, क्या क्या होता है,,

मै-- माँ मै हु ना मुझे सब पता है क्या क्या होता है मै मेरी माँ और दोस्त को सब सीखा दूंगा.

माँ मेरी तरफ देखकर मेरा राजा बेटा अपनी माँ का कितना ख्याल रखता है, तभी मैं

माँ अभी आप अचानक से चुप क्यु हो गयी थी,

माँ-- ऐसे ही बेटा

मै-- देखा ना माँ, आप दोस्त नही मानती इसलिए बात नही बता रही

माँ-- बेटा बात ही ऐसी है की कैसे बताऊ, तु मेरा बेटा है

मै-- माँ बेटा और दोस्त दोनो हु, और दोस्त से कोई भी बात नही छुपाते,

हम दोनो मिलकर इस दुनिया के बारे में सब जान लेंगे,

माँ-- ठीक है बेटा, मै अपने बेटे के लिए कोशिश करूँगी

मै-- माँ आपको मेरी कसम है आज के बाद आप मुझे बेटे से ज्यादा दोस्त मनोगी, तभी आप दुनिया के बारे में जान पाओगी, अब बताओ बात

मै जान बूझकर माँ को आग लगा रहा था,

माँ जब तूने कहा की माहवारी आने का मतलब माँ बनने से होता है तब मै अपने बचपन मे चली गयी थी, मेरे साथ साथ क्या हुआ,

मै-- मैने माँ के दोनो हाथ अपने हाथ मे ले लिए, माँ आप मुझ पर भरोसा रखो, जो बात है बताओ,

माँ-- बेटा बचपन मे तेरे पापा ने मेरी इज्जत लूट ली थी, मैने गुस्से मे उनके लकड़ी मार दी, जिससे उनकी ये हालत हो गयी है, माँ दुखी सी हो गयी,

मै-- माँ मतलब मै पापा के प्यार की निशानी नही हु, ये सब ऐसे ही है, माँ आपने सही किया फिर तो पापा को सज़ा मिलनी ही चाहिए थी,

माँ मेरी तरफ देखने लगी, क्या बेटा मैने सही किया,

मै-- हा माँ आपने सही किया था, लेकिन.

माँ-- लेकिन क्या बेटा

मै-- कुछ नही माँ

माँ-- अच्छा अब तुम नही बता रहे बात, माँ और दोस्त को भी नही बताओगे,

माँ के मुह से दोस्त सुनकर अच्छा लगा,,

मै-- माँ मै चाहता हु की मेरा एक भाई और हो,, और वो आप दोनो के प्यार की निशानी हो,

माँ-- समझी नही बेटा,

माँ मै चाहता हु आप और पापा की शादी हो, आप दुल्हन बने, आप दोनो के प्यार से आप माँ बनो और मुझे एक भाई दो,,

माँ -- मेरा ऐसा नसीब कहा बेटा, अब तुम्हारी शादी करनी है, मेरी उम्र बीत चुकी है अब

मै-- किसने बोला आपकी उम्र बीत चुकी है, कल आप सजी तब पूरी दुल्हन लग रही थी, और आपको अपने दोस्त के लिए ज़िंदगी जीनी होगी, शुरू से, मै आपके साथ हु,

माँ-- लेकिन मै- कुछ नही जानती, कैसे क्या क्या होता है

मै-- माँ मै हु ना, आप मेरा साथ दो, वैसे भी पापा तो ठीक होने मे समय लगेगा, तब तक शादी के पहले की ज़िंदगी के बारे में मै सिखा दूंगा, जब पापा ठीक हो जायेंगे तब शादी करवाउंगा, फिर शादी के बाद की ज़िंदगी जीना, लेकिन मुझे एक भाई और चाहिए, और वो भी प्यार की निशानी, ना की मेरे दिल रखने के लिए,

माँ दोगी ना अपने प्यार की निशानी मुझे,,

माँ ठीक है बेटा मै पूरी कोशिश करूँगी, मै अपने बेटे से ज़िंदगी फिर से जीना सीखूँगी,

मै-- माँ एक बात और ये बात सिर्फ हम दोनो तक रहनी चाहिए, किसी को भी नही बतायेंगे,

देखना आप इतनी खुश होंगी की आप सोच भी नही सकती,

माँ-- ठीक है बाबा अब से मै तेरे हवाले, सिखा देना जो सिखाना है

माँ मेरी बातो मै पूरी तरह आ चुकी थी

मै-- माँ एक बात और हम यहा शहर मे है तब तक आप दुसरो के सामने बेटा नही बोलना, मेरा नाम लेना, ताकि कोई शक नही करे, हम दोनो पर

माँ-- ठीक है बेटा ध्यान रखूंगी,,

दिन अस्त होने का था, सूरज ढलने को हो गया, तभी पास वाले छत पर वो कल वाले पति पत्नी फिर से छत पर आ गये, थोड़ी देर हाथ मे हाथ डाल कर घूम रहे थे फिर एक दूसरे की बाहों मे आकर एक दूसरे के होठ को चूसने लगे, माँ बड़ी गोर से देख रही थी, माँ-- बेटा ये क्या कर रहे है

मै-- माँ बताया था ना, प्यार कर रहे हैं

बेटा मैने ये कभी नही किया, मुझे कोई प्यार नही करता क्या,

मै-- माँ कैसी बात करती हो, मै हु ना बहुत प्यार करता हु आपसे,

माँ-- फिर तूने बेटा ऐसा क्यु नही किया

अब माँ को नही पता था की ये करने से कोनसा प्यार होता है,

मै-- माँ मै भी करूँगा जरूर, समय आने पर,

माँ ठीक है बेटा मुझे सब सिखाना,

मै-- माँ आज आइसक्रीम खाने का दिल कर रहा है चलो बाहर चलते है,

माँ --सर्दी मे कोन ये खाता है

मै-- माँ बताया ना आपको नही पता कुछ, चलो मेरे साथ
 
आगे..

थोड़ा सा अंधेरा होने लगा, शहर लाईट की रोशनी से भर गया था, माँ मेरे साथ चल रही थी तभी,..

मै-- माँ जब तक पापा ठीक होते है आप मेरे साथ खुलकर ज़िंदगी जीना, शादी से पहले की पूरी ज़िंदगी आपको सिखा दूंगा, बस माँ, मै आपको दुल्हन बनते देखना चाहता हु, आप माँ बनोगी उसकी खुशी देखना चाहता हु, माँ आपकी पापा के साथ शादी होगी तब आपको मै ही तैयार करूँगा, अच्छी सी दुल्हन बनाऊंगा,,

माँ-- ठीक है बेटा तु जो भी कहेगा मै जरूर करूँगी, मुझे पता है मेरा बेटा मुझे खुश देखना चाहता है, तु ही मुझे सजाना,

मै-- हा माँ बहुत बहुत धन्यवाद

माँ-- भला दोस्त को कोन धन्यवाद देता है, बताओ

मै-- माफ करना माँ, अब ध्यान रखूँगा

तभी आइसक्रीम की दुकान आ गयी मै और माँ ने आइसक्रीम लेकर उसको खाते हुए चल रहे थे, तभी कुछ कपल रात के अंधेरे मे न दूसरे की बाहों मे सिमटे हुए होठों को चूम रहे थे, माँ बेटा शहर मे लोग प्यार ज्यादा ही करते है जहा देखो प्यार करते रहते है, पता नही तु कब सिखायेगा मुझे,

माँ किस से अंजान थी

मै-- माँ अब ज्यादा दूर नही है दिन, आपको सब सिखाऊंगा, एक औरत होने का पूरा सुख दूंगा आपको,

माँ आप मेरी सुंदर दोस्त और माँ हो, i love You माँ.

माँ-- ये i love you क्या है बेटा, क्या बोल रहा कुछ समझ मे नही आ रहा है

मै-- जिसको हम प्यार करते है उसको अंग्रेजी मे i love you बोलते हैं

माँ-- अच्छा बेटा, फिर तो i love you बेटा

माँ से ये सुन अच्छा लग रहा था,

मै- माँ कल हम शहर घूमेंगे, आप को पहले अच्छे से तैयार करवाउंगा, फिर हम चलेंगे,

माँ आपको एक लड़की से ज़िंदगी जीना सिखाऊंगा, देखना आप बहुत खुश होंगी,

माँ-- ठीक है बेटा, देखती हु क्या क्या सिखाता है

बेटा माहवारी से थकान सी होने लगती है, जब माहवारी रुक जायेगी तब हम चलेंगे,

मै-- ठीक है माँ ये सही रहेगा,

खेर मै माँ घर आ गये तब तक टिफिन आ चुका था, माँ बोली बेटा जा छत पर जा कोई सामान तो नही रह गया है, मै तब तक खाना लगा देती हु, मै छत पे गया वहा कुछ नही था, मै जैसे ही नीचे आने लगा, सीढ़ियों मे अंधेरा होने के कारण मै गिर पड़ा, गिरने की आवाज सुन माँ भागकर आई, मुझे उठाती हुई, रोने सी लगी, क्या हुआ लाल, तुझे ज्यादा तो चोट नही लगी ना, माँ मुझे अंधेरे से कमरे मे लेकर आई, देखा तो हाथो की दोनो कोहनी छिल गयी थी,, उनसे खून निकलने लगा था, माँ रोने लगी,

मै-- माँ मुझे ज्यादा चोट नही लगी है आप मत रो,

माँ चल जल्दी से डॉक्टर के पास

लेकिन माँ को गाड़ी नही चलानी आती, माँ ने सड़क पर आकर एक ऑटो रुकवाया, हम दोनो ऑटो में बैठ होस्पिटल पहुंचे डॉक्टर को दिखाया, डॉक्टर ने दोनो हाथो की पट्टी कर दी, बोला 4 दिन पट्टी करनी होगी, नॉर्मल चोट है जल्दी ठीक हो जायेगा, मै और माँ ऑटो मे बैठ कमरे पर आ गये, माँ बहुत उदास लग रही थी,

माँ न अपने हाथो से खान खिला रही थी, तभी

मै-- माँ पापा को मत बताना इस बारे मे वरना उनको चिंता होगी, और आप भी उदास ना हो, मै जल्दी ठीक हो जाऊंगा,

माँ-- बेटा मै माँ हु मै तेरा दर्द नही देख सकती

मै-- माँ जब पट्टी खुल जायेगी तब ठीक हो जाऊंगा 4 दिन की बात है

माँ और मैने खाना खा सोने को चले गये, माँ रात भर सो नही पायी,,

**अब माँ के साथ मजा शुरू होने वाला था**

सुबह हुई माँ मुझसे पहले हि उठ गई थी,

माँ-- बेटा दर्द हो रहा है क्या

मै-- नही माँ दर्द नही है

मुझे जोर से टट्टी लगी थी, माँ मुझे टॉयलेट जाना है, लेकिन..

माँ-- लेकिन क्या बेटा, जा आओ

माँ-- मेरे हाथो मे पट्टी लगी है, मै कपड़े कैसे निकालु और पहनुगा, और साफ भी कर सकता,..

माँ-- अरे माँ हु तेरी मै कर दूंगी

मै-- नही माँ मुझे शर्म आयेगी,

माँ-- अरे बेटे, माँ से क्या शर्म, पहले भी तो मैने सब किया है, बेटा माँ के लिए बेटा हमेशा बच्चा हि रहता है, चल खडा हो,,

मै खडा हो माँ के साथ टॉयलेट मे आ गया,

मै माँ मुझे शर्म आयेगी,

माँ -- ठीक है बेटा मै आँखे बन्द कर लुंगी, फिर तो ठीक है,

मै-- हा माँ ठीक है

माँ-- पागल कही का, दोस्त भी कहता हूँ और माँ से शर्माता भी है,

मैने आपकी तरफ पीठ कर खडा हो गया, माँ ने आँखे बन्द कर एक ही झटके में पेंट जो की नाड़े वाली थी, नीचे कर दी और चड्डी भी,

माँ की आँखे बन्द थी, वरना उनके सामने मेरे चुतड होते,,

माँ आँखे बन्द करती हुई दरवाजे से बाहर आ गयी और दरवाजा बन्द कर दिया,

मैने टट्टी पूरी की, सोच रहा माँ आज अपने हाथ से मेरी गांड को साफ करेगी, सोच के खुश हो रहा

मैने माँ को आवाज लगाई, माँ दरवाजा खोल अंदर आते ही आँखे बन्द कर ली, बोली बेटा, तु थोड़ा झुक जा, में पानी डाल साफ कर देती हु, मै झुक गया माँ पानी डाल गांड का छेद साफ करने लगी, ये सिर्फ माँ की ममता थी, माँ ने साफ कर मेरे कपड़े उपर कर दिये

मै और माँ कमरे मे आ गये, दोनो ने दिन भर साथ मे बाते करते रहे,, दिन मे पट्टी बदल कर आये,

खेर अब रात होने को थी, तभी

मै-- माँ आप एक काम करो, मुझे लुंगी पहना दो, ताकि बार बार मे आपको परेसान नही होना पड़े,

माँ-- ठीक है बेटा, लेकिन मेरे लिए कोई काम हो तो बता देना, शर्माना मत,

माँ मेरे पीछे आ गयी और आँखे बन्द कर पेंट और चड्डी नीचे की और लुंगी को डाल मेरे पर पर गांठ लगा दी, मै और माँ दोनो सोने लगे,

मै खुश था आज माँ के पास नंगा लेटा हु, खेर ये माँ की ममता थी अब तक, सफर तो अब शुरू होगा..
 
आगे,,

सुबह हुई, माँ आई उठ जा बेटा तु ठीक है ना,

मै-- हा माँ, मुझे टट्टी लगी है जाना होगा

माँ-- चल खडा हो, बेटा

मै जैसे ही खड़ा हुआ लुंगी की गांठ रात मे खुल गयी थी, खड़ा होने से लुंगी एकदम से नीचे गिर गयी, माँ के सामने मै नीचे से एकदम नंगा हो गया, माँ की नज़र जैसे ही मेरे लंड पर गयी, माँ मेरे मोटे और लम्बे लंड को देख, उनकी आँखे खुली की खुली रह गयी, क्यों की माँ ने सिर्फ एक बार पापा का लंड देखा था, वो भी मुझसे छोटा था,

मैने तुरन्त घूम गया और माँ की तरफ पीठ कर दी,

मै-- माँ माफ करना, गलती से लुंगी की गांठ खुल गयी शायद, माँ एक जगह सुनी सी खड़ी थी बिल्कुल चुपचाप, जो माँ कभी गुस्सा करती थी आज चुपचाप खड़ी थी,

मै-- माँ आओ ना लुंगी बांध दो, माँ सुन नही रही, माँ, ओ माँ, क्या हुआ आओ ना खड़ी क्यु हो, जल्दी से लुंगी बांधो,

मुझे जोर से टट्टी लगी है

मैने जोर से बोला,

माँ अचानक से, हा बे.. बे.. बेटा

माँ की आवाज लडखडा रही थी, माँ वहा से दूसरे कमरे मे जाती हुई, तु जा टॉयलेट मे मै बाद मे आती हु, जैसे ही माँ कमरे मे गयी मै भागकर टट्टी करने लगा, दरवाजा खुला ही था,

माँ कमरे मे बैठ गयी और मन ही मन मे सोचने लगी, ये क्या बेटा अब जवान हो गया है, उसका लंड ऐसे कैसे था, कही उसको कोई बीमारी तो नही, क्या सभी का ऐसा ही होता है, मेरे पति का तो ऐसा नही था,

हे भगवान मुझे माफ करना मुझे अपने बेटे को ऐसे देखा, लेकिन दूसरी तरफ माँ की जवानी भी अंगड़ाई मार रही,

जैसे किसी 16 साल की लड़की जब किसी का लंड देख लेती है तो उसकी क्या हालत होती है वही माँ कि हो रही,

माँ का गला सुख गया, उनकी साँसे तेज सी हो रही,

फिर माँ ने सोचा मैने कोई जांबुझकर तो नही देखा, वो सब भूल से हुआ है, और वैसे भी वो मेरा बेटा है, लेकिन माँ को मेरे लंड की साइज परेसान कर रही थी,,

मै टट्टी करता हुआ समझ गया की माँ को गुस्सा नही आया मतलब माँ अब खुल रही है

तभी मैने माँ को आवाज दी माँ आओ साफ करदो, जैसे ही माँ को आवाज सुनाई दी, बोली आती हु बेटा

माँ आई तो देखा दरवाजा खुला है आते ही माँ ने आँखे बंद कर ली, मै जल्दी से झुक गया, जैसे ही माँ ने पानी लेकर हाथ आगे किया , मैने अपने घुटनों को सीधा कर दिया जिससे मै थोड़ा उपर हो गया, और माँ का हाथ सीधा जांघो के बीच से लंड पर चला गया, माँ भी अचानक से जैसे किसी गर्म लोहे को हाथ लगाया हो, और माँ की आँखे खुल गयी, माँ की उंगली मेरे लंड पर थी, मैने बहाना बनाते हुए,

माँ क्या साफ कर रही हो, यहा नही, माँ,

माँ लंड का टच पाते ही माँ को पसीना आने लगा,

माँ-- वो.. बे.. बेटा गलती से हाथ फिसल गया, आँखे बन्द जो थी,

लेकिन माँ की आँखे अब खुली थी, वो मेरी गांड को साफ कर रही लेकिन नज़र मेरे लंड पर थी,

माँ ने गांड साफ की, और बाहर चली आई, मै भी नंगा माँ के पीछे बाहर आकर कमरे मे चला गया, और बेड पर लेट गया, और कंबल मे घुस गया, माँ दूसरे कमरे मे सोच रही थी,

ए क्या हुआ मेरे साथ मेरा हाथ बेटे के लंड से लगा, छि छी छी....

मैने बहुत गलत किया, बेटा क्या सोचेगा मेरे बारे मे,

माँ का दूसरा मन बेटे का लंड इतना बड़ा और गर्म कैसे था, कही उसको कोई बीमारी तो नही है, मुझे उससे बात करनी चाहिए,,

और मै अपने बेटे का लंड फिर क्यु देख रही थी,, और मुझे पसीना क्यु आ रहा था, नही मै आगे से बेटे को नंगा नही देखूंगी, बेटा पता नही क्या सोच रहा होगा, मुझे उससे बात करनी चाहिए, माँ उठ कर मेरे कमरे मे आई, सामने मै बेड पर लेटा था, माँ चुपचाप पास खड़ी हो गयी,

माँ-- उदास सी,, बेटा मुझे माफ करना, सुबह गलती से और फिर टॉयलेट मे सब गलती से,,

मै-- माँ सब भूल से हुआ है अपने आप को क्यु दोष दे रही हो, और आप माँ हो, आप ऐसा बिल्कुल मत सोचो,और कल आपने ही तो बोला था, बेटा कितना भी बड़ा हो जाए माँ के लिए बच्चा ही रहता है, और अब आप ही ऐसा कर रही हो, आपने माँ और एक सच्चे दोस्त का फर्ज़ निभाया है,

माँ- बेटा कही तु मेरे बारे मे गलत ना सोच ले, इसलिए..

मै-- नही माँ कभी नही, मेरी माँ कभी भी गलत नही हो सकती

माँ-- शुक्रिया बेटा, मै आगे से ध्यान रखूंगी,

मै-- माँ आप फिर से शुक्रिया क्यु बोली, आप भूल रही हैं हमने क्या बात की थी इस बारे मे

माँ-- ओह, हा बेटा माफ करना भूल गयी थी,

लेकिन बेटा एक बात और करनी थी पता नही कैसे कहु

मै-- माँ अगर आप मुझे अपना प्यारा बेटा और दोस्त मानती हो तो पूछ सकती हो, वरना रहने देना,

माँ-- मानती हु बेटा, लेकिन

मै-- रहने दो, दोस्तो मे लेकिन का कोई मतलब नही होता है

माँ एक गहरी साँसे लेती है फिर

ठीक है

माँ-- बेटा सच सच बताना तुझे कोई बीमारी लगी है क्या,

मै-- नही माँ, आपने ऐसा क्यु पूछा,

माँ घबरा रही कि कैसे कहु

माँ-- बेटा, तेरा ऐसा क्यु है, तेरे पापा का ऐसा नही था, और ये गर्म भी बहुत है, तुझे मेरी कसम है लाल, कोई बीमारी है तो बता दो, हम एक अच्छे डॉक्टर को दिखा देंगे,

मै माँ की बात सुन जोर से हसने लगा,

माँ-- हँस क्यु रहा हैं, मै यहा परेसान हो रही हूँ और तू हंस रहा है,

मैं-- माफ करना माँ आपकी बातो से हंसी निकल गयी, लेकिन ऐसी कोई बात नही है आप परेसान ना हो,

माँ-- माँ खाओ मेरी कसम

मै-- आपकी कसम, अब खुश

माँ-- हा लेकिन फिर ऐसा क्यु है,

मै-- माँ ये ऐसा सबका नही होता, भगवान कुछ ही लोगो को ऐसा बनाता है

माँ-- फिर गर्म क्यु था,

मै-- माँ जवानी मे सबका गर्म ही होता है,

माँ -- अच्छा,,

मै-- माँ देखा माँ, आपको धीरे धीरे सब पता चल रहा है ना, यही तो दोस्ती हैं सब बाते खुलकर हो जाती है,

माँ-- हा बेटा मुझे विश्वास है मेरा बेटा मुझे सब सिखा देगा,

माँ चल होस्पिटल तुझे दिखा आ ती हूँ, माँ मै ठीक हु, आप ये पट्टी खोल दो, हम पापा के पास चलेंगे,

माँ ने पट्टी खोल दी, अब हाथ लगभग ठीक से हो गये,
 
मै और माँ ने ऑटो पकडा पापा के पास चले गये, कुछ देर बाते करते रहे, पापा के साथ बातो मे शाम हो चली थी,

पापा बोले अब तुम जाओ रात होने को है,, मै और माँ पापा से विदा ली और बाहर आ गये,

माँ -- मै बहुत खुश हु भगवान सब ठीक कर रहा है,,

मै-- हा माँ,, मै भी खुश हु, और मुझे माँ के साथ साथ एक खूबसूरत दोस्त भी मिल गयी,

माँ शर्मा रही थी

माँ बेटा आज मेरा दिल दारू पीने को कर रहा है, माँ कभीकभी घर पर पीती थी,

माँ मै आपके लिए यहा से बढ़िया सी दारू लेकर आता हु, आप रुको, अभी आता हु,

मै पास मै ही दारू की दुकान थी, वहा से 2 बोतल दारू ली और 2 पैकेट सिगरेट के लिए और एक बेग मे डाल जल्दी से माँ के पास आ गया,

मै-- माँ ले आया मै, थोड़ा और खाने का सामान ले लेता हु आज से खाना आपके हाथ का ही खाऊंगा,

माँ-- ठीक है बेटा, हम घर पर ही बना कर खायेंगे

मै और माँ पास ही किराणा की दुकान पर गये और घर का राशन ले लिया, और एक ऑटो लिया सारा सामान डाल घर पर आ गये, माँ बोली मै खाना बना लेती हु पहले, फिर दारू पियूंगी,,

माँ खाना बना कर कमरे मे आ गयी, मै सब तैयार करके बैठा था, एक बोतल, एक गिलास, नमकीन, पास मे सिगरेट और माचिस, माँ ने दरवाजा बन्द कर दिया,

बेटा आज बहुत खुश हु, आज दिल भर कर पियूंगी,

मै-- हा माँ, जितना दिल करे पियो,

तभी माँ ने बोतल का ढक खोला और गिलास मे पटियाला पेग बना डाला,

माँ-- अरे एक ही गिलास क्यु, तु नही पियेगा,

मै-- झुठ बोलते हुए, माँ मैने नही पी कभी, पता नही क्या होगा,

माँ-- कुछ नही होगा बेटा मै हु ना, चल गिलास लेकर आ जल्दी,

मै जल्दी से गिलास लेकर आ गया और माँ को दे दिया,

माँ ने उसमे भी बड़ा पेग बना मेरी तरफ किया,

मै और माँ ने गिलास को आपस मे टकरा कर पेग पीना शुरू कर दिया, माँ ने एक ही सांस मे पुरा पेग खाली कर दिया, मै बहाना बनाते हुए धीरे धीरे पी रहा,

माँ--- वा बेटे इसका स्वाद तो अच्छा है

मैं-- माँ ये शहर है यहा अच्छी चीज ही मिलती है,

तभी मैने सिगरेट निकाली,

माँ-- बेटा ये क्या है,

मै-- माँ यहा हुक्का तो नही है ये सिगरेट है अच्छी वाली,

मैने सिगरेट जलाई और एक लम्बा सा कस लगाया, और धुआ माँ की तरफ फेंका,

माँ बोली बेटा मुझे भी तो सिखा

मैने सिगरेट माँ को दे दी, माँ ने भी पकड़ कर जोर का कस लगाया, और बहुत सारा धुआँ मेरी तरफ फेकने लगी,

माँ-- वा बेटा इसका मज़ा तो अलग है, तुने पहले भी पी है क्या

मैं-- हा माँ, पहले भी यहा दोस्तो के साथ पी थी, अब आप दोस्त हो तो आपके साथ पी रहा हु,

माँ-- जल्दी से पेग बना, तब तक मै सिगरेट पीती हु,

मै पेग बना रहा, माँ सिगरेट पी रही और पूरी पी ली, मैने माँ को पेग दिया, मै और माँ ने एक साथ पेग खत्म कर दिया,

माँ-- बेटा तूने मेरी ज़िंदगी मे खुशिया लोटा दी है, तु मेरे लिए भगवान जैसा है,

मुझे और माँ को नशा होने लगा था, तभी मैने एक सिगरेट और लगा दी, हम दोनो ने सिगरेट पूरी पी, जिससे दोनो नशे मे हो गये,

माँ-- बेटा तुने मेरे लिए बहुत कुछ कर रहा है, मौका होगा तो मै भी तेरे लिए जरूर करूँगी,

मै -- माँ बस मेरा एक सपना है बस वो पूरा हो जाये, और कुछ नही चाहिए

माँ-- कैसा सपना बेटा,

मै-- आपको बताया था ना माँ, मै आपको दुल्हन के रूप मे देखना चाहता हु आपकी शादी, फिर एक और मेरा भाई, मतलब एक लड़की की जीवन की तरह आप जीवन जियो,

हम दोनो नशे मे थे,

माँ -- हा बेटा, मैने जीवन मे कुछ नही जिया, मै भी ये सब चाहती हु, तु मेरे साथ है तो पक्का सब होगा,

मै-- हा माँ मै हमेशा आपके साथ हु, माँ आप बहुत खूबसूरत हो, मुझे आप जैसा ही भाई चाहिए,

माँ-- तू तो मेरे पीछे ही पड़ गया, मैं कहा खूबसूरत हु,

मै-- माँ आप हो, आप एक जवान लड़की कि तरह ही हो,

मै माँ को आग लगा रहा था,

माँ अच्छा तुझे मै लड़की नज़र आती हु पागल,

मै-- कसम से यार, सही बोल रहा हु, मैने माँ को यार बोल दिया,

माँ-- बेटा ये यार क्या होता है

मै-- माँ सबसे खास दोस्त को यार कहते है

माँ-- अच्छा, फिर तु भी मेरा यार हुआ,

माँ के मुह से सब अच्छा लग रहा था

हम दोनो नशे मे हो गये माँ बोली बेटा,, अब खाना खाते है, मज़ा आ गया अब रोज़ पियेंगे

पास मे ही खाना रखा हुआ था, मैने और माँ ने खाना खाया, और बेड पर सोने लगे,

माँ मेरी तरफ मुह करके सो गयी, मै माँ का चेहरा देख रहा था, बहुत ही सुंदर था, पतले होंठ, चिकने गाल, काले बाल, माँ को और मस्त बनाते थे, माँ की चुन्चिया एक दम लोहे की तरह ही थी, बिल्कुल भी ढीली नही थी,

मै माँ के बदन का मुआयाना कर रहा था, मै भी देखते देखते सो गया, दिन अब ज्यादा दूर नही थे,

सुबह हुई माँ मुझे उठाई उठ जा बेटा, रात को तो सोने का मज़ा ही आ गया, मै और माँ नहा धो लिए,

मै--- माँ आज बाजार चलते है, आपको और तैयार करते है,

माँ-- और क्या करेगा, इससे भी ज्यादाहोता है क्या,

मै-- हा माँ, ब्यूटी पार्लर मेदेखना आप,,,,

माँ-- चलो देखते है
 
आगे,,

मै और माँ बाजार जा रहे होते है, माँ आज से आपकी नई ज़िंदगी की शुरू है,

जैसा मै कहु वैसा ही करना, मै आपको एक मोर्डन लड़की बना कर शुरू करूँगा,

माँ-- सच्ची बेटा, क्या ऐसा हो सकता हैं,

मै-- हा माँ, आप बस देखती जाओ, जब तक पापा ठीक होते है आप क्या क्या करती हो,

मै माँ को लेकर पार्लर मे घुस गया, वहा एक लड़की आती है,

सर मै आपकी क्या सहायता कर सकती हु,

मैने माँ की तरफ देखता हुआ, ये मेरी दोस्त है आप इनका मैक अप कर एकदम मोर्डन बना दो,

सर आप बेफिक्र रहे, आप बाहर इंतज़ार कीजिये एक घण्टे मे आपकी दोस्त को तैयार कर देंगे,

मै-- एक काम और करना इनको काली साड़ी और पहना देना,

माँ चुपचाप पास खड़ी मेरी तरफ देख सुन रही थी,

सर आप बाहर इंतज़ार करे, तब तक

मै बाहर आ गया, माँ को लड़की ट्रायल रूम मे लेकर गयी, वहा पर बहुत सारी काली साड़ी माँ के सामने रख दी, मैडम आप पसंद कर लीजिये इन मे से,

माँ सोच रही मैने काली साड़ी क्यु कहा, और भी रंग बहुत है,

माँ ने एक साड़ी पसंद की,

मैडम ये ब्लाउस और पेटिकोट लो और कमरे मे जाके बदल लो,

माँ-- ब्लाउस और पेटिकोट मैने पहले से ही पहन रखी हैं

मैडम ये इस साड़ी के साथ मे है इसलिए ये अच्छी लगेगी,

माँ काले ब्लाउस और पेटिकोट को उठा कमरे मे घुस गयी, माँ ने अपनी साड़ी और ब्लाउस, पेटिकोट निकाल, काले वाले पहन रही थी, पेटिकोट तो सही से आ गया था, लेकिन ब्लाउस बहुत छोटा लग रहा था, माँ ने जोर लगा कर ब्लाउस के बटन बन्द किये, ब्लाउस स्लीवलेस था, माँ के चुन्चिया उपर से दिख रही थी, दोनो चुन्चियो की खाई बाहर दिख रही थी, ब्लाउस बहुत ही छोटा और टाईट था, माँ इतना छोटा ब्लाउस कभी नही पहना था, माँ पहन बाहर आई,

लड़की ने माँ को देख बोली, मैडम आप पर काला रंग अच्छा लगता है,

तभी माँ के सामने आकर उसने माँ से बोला मैडम पेटिकोट थोड़ा नीचे करना होगा,

और पेटिकोट को पकड़ नीचे करने लगी, पेटिकोट कमरे की हड्डी पर और रुका दी,

माँ का पेट, और उस पर छोटी सी नाभि बहुत ही मस्त लग रही थी, माँ का फिट बदन देख बोली मैडम आप काफी फिट है, कैसे किया ये सब

माँ को पकड़ उसने एक कुर्सी पर बिठा दिया, फिर माँ को तैयार करने लगे, मैडम आप आँखे बन्द कर लो, सर ने बोला है, वो सबसे पहले आपको देखना चाहता है,

माँ चुपचाप आँखे बन्द कर बैठी थी, एक घण्टे बाद माँ को तैयार कर मुझे आवाज दी,

सर आपकी दोस्त तैयार है, मैने उसको इशारा किया आप बाहर चली जाए,

अब कमरे मे मै और माँ थे, काले रंग की साड़ी मे गोरा बदन मस्त लग रहा था,, लाल लाल होठ,ब्लाउस से गोरी गोरी चुन्चिया आधी सी बाहर दिख रही थी, एकदम सेब की तरह थी जो ब्लाउस मे फसी पड़ी थी,

नीचे गोरा पेट और छोटी सी नाभि

माँ एक अप्सरा लग रही थी, तभी

मै-- माँ आप कयामत लग रही हो, आप तो पूरी तरह से बदल गई हो,

माँ की आँखे बन्द थी

मैने माँ को घुमा कर कांच के सामने कर दिया,

मै-- आप आँखे खोलो अब,,

माँ ने धीरे से आँखे खोली, सामने कांच मै एक अप्सरा सी खड़ी थी,

काले रंग माँ के गोरे रंग पर बड़ा मस्त लग रहा था

माँ खुद का ये रूप देख हकी बकी रह गयी, जैसे कोई लड़की खड़ी हो, माँ पहली बार ऐसी सजी थी, लाल लाल होता, बालो को साफ और सीधा कर एक तरफ कंधा पर डाल रखे थे, हाथो मे चूड़िया,, माँ अपना रूप देख रोने लगी,

मै-- माँ क्या हुआ

माँ-- तूने तो मेरा रूप ही बदल दिया लाल, मुझे क्या से क्या बना दिया, मै तेरा अहसान कभी नहीं भूलूंगी, माँ रो रही थी,

मै-- क्या माँ, सब बताया तो है आपको पुरा बदल दूंगा, अभी देखती जाओ, जी लो अपनी ज़िंदगी,

अब चुप हो जाओ माँ,

माँ चुप हो गयी, हमने वहा से निकल बाहर आ गए, माँ आज अच्छे होटल मे खाना खाते है,

मैने माँ का हाथ पकड़ साथ चल पड़े, ,
 
आगे..

जैसे ही हम होटल पहुंचे सब हम दोनो की तरफ देखने लगे,

माँ-- धीरे से, ये सब हमारी तरफ क्यु देख रहे है बेटा,

मै-- माँ आप बहुत खूबसूरत लग रही हो इसलिए ये देख रहे है,

माँ यहा बेटा मत बोलो, दोस्त बोलो, केवल घर पर बेटा बोलना,

माँ-- ठीक है

मै और माँ एक टेबल पर बैठ जाते है तभी वेटर आता है, मै उसे खाना ऑर्डर करता हु, हम जैसे ही खाना खाकर उठते है, होटल का मैनेजर आता है, और फूलों का गुलदस्ता देते हुए,

सर हमारे यहा नये जोड़े को उपहार देते है, आपका आज का और अगली बार जब भी आयेंगे आपका बिल माफ रहेगा, आप दोनो खुश रहे,

माँ कुछ समझ नही रही थी,

मैने उपहार लिया और माँ का हाथ पकड़ बाहर आ गया,

माँ-- राज क्या बोल रहा था वो,

पहली बार माँ ने मुझे मेरे नाम से पुकारा, बड़ा ही अच्छा लगा,

माँ वो हम दोनो को पति पत्नी समझ रहे थे

माँ-- क्या,,

मै-- हा माँ, देखा आप कितनी सुंदर है,

माँ-- पागल तु तो बोल सकता था ना, की मै माँ हु, पत्नी नही

मै-- कैसे बोल दु, आज आप एक लड़की लग रही हो, और उपर से बिल माफ भी था,

माँ-- अच्छा माँ को पत्नी बोलता हुआ तुझे बुरा नही लगा,

मै-- माँ बुरा क्यु, आज आप लग ही ऐसी रही हो, और खेर मानने से क्या होता है, हमारा काम बनता है बहुत है,

माँ-- पागल, कभी माँ, कभी दोस्त, कभी पत्नी, पता नही और क्या क्या करेगा

मै-- माँ सब आपकी खुशी के लिए ही तो कर रहा हु, क्या आपको अच्छा नही लग रहा

माँ-- राज सच मे बहुत अच्छा लग रहा है, मै और अच्छे से जीना चाहती हु,

मै-- हा माँ, आप देखती जाओ होता है क्या

धीरे धीरे शाम होने को चली, मै और माँ घर पेदल ही चल पड़े,

रास्ते मे देखा एक गधा गधी के पीछे खडा है, अपना लंड निकाल कर, माँ की नज़र जैसे ही उस पर गयी, माँ चोंक सी गयी, बिल्कुल मेरे जैसे लंड था उसका,

गधे ने अपने पेर गधी पर डाल लंड को एक ही झटके लंड गधी की चूत मे डाल दिया पुरा, माँ ने मेरा हाथ पकडा हुआ था, तो जोर से दाब दिया,

गधी की चूत मे लंड जाते ही जोर जोर से बोलने लगी, तभी गधा नीचे उतर गया, और लंड चूत से बाहर निकाल लिया, गधी की चूत से बहुत सारा पानी नीचे गिरने लगा,

माँ ये सब देख रही थी, माँ जानती थी की ये चुड़ाई चल रही है, माँ के साथ पापा ऐसा कर चुके थे, माँ की साँसे तेज हो गयी, मै समझ गया माँ आग में जल रही है, माँ ने मेरी तरफ देखा और नज़र नीचे करली,

मै और माँ चुपचाप चल रहे थे,

मैं-- क्या हुआ यार चुपचाप क्यु हो, कुछ बोलती क्यु नही,

ये जानवर भी ना, बीच रास्ते मे ही कर देते है,

माँ समझ गयी, की मै सब समझ चुका हु

माँ कल आपको साड़ी नही पहनी है कल लड़कियों वाली ड्रेस पहन लेना आप,

माँ राम जाने तु क्या क्या पहना देगा,

माँ कल नई साल लगेगी यहा बड़ी धूमधाम से मानते है हम भी चलेंगे

माँ-- ठीक है राज,

मै और माँ घर आ गये, माँ जल्दी से दारू लगा राज, मै तब तक खाना लगा देती हु,

रुको माँ पहले एक एक पेग लगाते है फिर काम करते है,

माँ-- ठीक है तू दारू रसोई मे ले आ,

मै जल्दी से दारू रसोई मे ले आया और जल्दी से दोनो ने पेग लगा लिया, माँ सब्जी काटने लगी थी, तभी मैने माँ के पीछे से जाकर चिपक गया, और अपने दोनो हाथो से माँ कै पेट को पकड़ लिया,

माँ पहली बार किसी से ऐसे चिपकी थी, पहली बार किसी मर्द का हाथ माँ के कोमल और मुलायम पेट पर लगा है, माँ ने एक जोर से साँसे ली, मै पीछे से माँ से एकदम टच था, मेरा लंड हल्का खडा था जो माँ के चुतडो की खाई से लगा था, माँ तुरंत समझ गयी की वो मेरा लंड ही है, लेकिन माँ चुपचाप सब्जी काट रही थी, मैने माँ के बाल एक तरफ कर माँ की गर्दन पर हल्का सा किस कर दिया, माँ की आँखे बन्द हो गयी,

मै-- माँ आज कैसा लगा दिन में,

माँ-- आँखे बन्द थी, अच्छा लगा, मुझे तूने आज एक लड़की बना दिया,

मैने माँ को कस कर पेट से दबा दिया, और लंड को खाई मे जोर से लगा दिया, माँ जोर जोर से साँसे लेने लगी, मै समझ गया माँ मस्ती मे है,

मै-- माँ क्या हुआ,

माँ-- पता नही बेटा अजीब सा लग रहा है, छोड़ो मुझे खाना बनाने दो,

मै- माँ ऐसे कैसे छोड़ दु, बहुत प्यार करता हु माँ, मैने चुपके से एक ऊँगली माँ की नाभि से लगा दी, जैसे ही नाभि से लगी माँ

माँ-- हाय,, मर गयी,,,

मै समझ गया माँ पहला टच पाकर झड़ गयी है

मै-- माँ क्या हुआ,

माँ-- पता नही बेटा, अजीब सा भी लगा और अच्छा भी,,

माँ की चूत पहली बार गीली हुई थी, और माँ पहली बार झड़ी थी,

माँ मुझे अलग करती हुई मुझे पैसाब जाने दे,

माँ टॉयलेट मे घुस साड़ी उपर करती है, तो देखती है उनकी पैंटी थोड़ी सी गीली हो चुकी है, आज पहली बार चूत मे अच्छा सा लगा था माँ को,

माँ पैसाब कर वापिस खाना बनाने लगती है और सोचती है, आज ऐसा कैसे हुआ और क्यु हुआ, लेकिन जो भी हुआ अच्छा लगा, पहली वार अच्छा लगा,

लेकिन राज मेरे पीछे क्यु चिपक रहा था और उसके छूने से मुझे अच्छा क्यु लगने लगा, वो अपना लंड मेरी गांड से क्यु लगा रहा था,

शायद वो नशे मे हो गया होगा, और आज तो सजी हुई थी तो बहक गया होगा शायद,,

लेकिन जो भी राज ने मेरी ज़िंदगी बदल दी है, मै बाकी ज़िंदगी ऐसे ही जीना चाहती हु, जो राज कहेगा मै वो करूँगी,,

मै और माँ ने दारू पी खाना खाया,और सो गये, सुबह फिर तैयार हुए आज 31dec. था, आज माँ को पार्टी मे लेकर जाना था, मै माँ को फिर उसी पार्लर मे ले गया, और बोला आज इनको स्कर्ट पहन देना और वैसे ही तैयार कर देना,

माँ को उस लड़की ने बड़ी मुश्किल से स्कर्ट पहनाई, और एकदम मस्त तैयार कर माँ को बाहर लेकर आई,

माँ को देख मै पागल हो गया, स्कर्ट माँ के बदन से पूरा चिपका हुआ था, उनकी छाती फूली हुई दिख रही और गांड बाहर निकली हुई, और स्कर्ट घुटनों तक था, और ऊँची सैंडल, मानो माँ कोई हेरोइन हो,

मै माँ को देख सुन रह गया, क्या माल लग रही थी, माँ मेरे पास आई, क्या हुआ राज,,

मै-- माँ कुछ नही, बहुत खूबसूरत लग रही हो, चलो खाना खाते है

हम फिर उसी होटल मे आये एक बिल और माफ था, मैने और माँ ने खाना खाया तभी फिर मैनेजर आ गया, सर आप आज फिर उपहार जीत चुके है, आप दोनो की जोड़ी बनी रहे,

मै और माँ वहा से बाहर आ गये मैने दुकान से सिगरेट ली और जला कर पीने लगा,

माँ -- क्या हुआ राज आज चुप क्यु है, बताओ

मै-- माँ ऐसा कुछ नही, आज आप बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी, अगर आप मेरी माँ नही होती तो..

माँ-- तो राज

मै-- कुछ नही माँ

माँ-- देखो राज तुम दोस्ती नही निभा रहे हो, बताओ माँ नही होती तो

मै-- माँ अगर आप माँ नही होती तो मै आपको भगा कर ले जाता, और आपसे सी शादी करता,

माँ-- ओह ओ, अच्छा बच्चु, इतनी अच्छी लगी,

मै-- हा माँ

माँ-- जब तक तेरे पापा ठीक नही होते तब तक तो तेरे पास ही हु,

मै-- माँ चलो अभी बहुत समय बाकी है फिल्म देखने चलते है, फिर रात को पार्टी भी करनी है,

माँ को मेरी भगा ले जाने वाली बात अच्छी लगी, शाम हो चली थी

मै और माँ दोनो फिल्म हाल मे आ गये हमने ऊँची कोने वाली सीट ली जहा अंधेरा होता है,

फिल्म मे भूतो की फिल्म लगी थी, बहुत ही डरावनी और सेक्सी फिल्म थी,

हाल पूरा भर गया सब अपनी दोस्तो को लेकर आ गये थे,

फिल्म शुरू होती है मै और माँ चुपचाप देखते है,

एक लड़की और और लड़का जंगल मे किस कर रहे होते है, जैसे ही लड़का लड़की का ब्लाउस खोलने की कोशिश करता है अचानक से लड़की भूत बन जाती है, हाल मे वैसे भी अंधेरा सा होता है

सब लोग डर है
 
आगे..

हम सब डर से गये, मै और माँ कोने मे थे, जहा बिल्कुल अंधेरा था,

माँ धीरे से राज ये बहुत दरावनी फिल्म है,

मैने पीछे से हाथ डाल माँ की दूसरी तरफ कमर पर रख दीया, माँ भी मेरी तरफ सी हो गयी, मैने धीरे धीरे कमर पर हाथ घुमाया,

तभी एक और जोर से डरावना सीन आया सब डर से गये, माँ ने डर से अचानक से अपना हाथ मेरी टांग पर रख दिया, मेरा ध्यान तो सिर्फ माँ पर था, तभी फिल्म मे एक आदमी एक औरत को कमरे मे बेड पर लिटाकर किस कर रहा होता है, साथ ही उसके चुन्चै दबा रहा होता है,

हाल मै सब लोग अपनी अपनी दोस्त से किस करने लगते है, माँ एक नज़र से फिल्म देख रही होती है, मैने माँ की कमर से हाथ नीचे चुतड की साइड तक ले जाने लगा, स्कर्ट होने से उनका बदन का स्पर्श नही हो रहा था लेकिन मज़ा आ रहा था,

फिर मैने अपना हाथ वापिस वहा से निकाल लिया और जहा माँ ने पकड़ रखा था मेरी टांग, उस पर रख दिया,

अचानक से एक डर वाली आवाज होती है, मैने जानबूझकर अपना हाथ माँ की जांघ पर रख दिया, माँ चुपचाप फिल्म देख रही थी मैने स्कर्ट के उपर से ही जांघ पर हाथ घुमाने लगा, माँ मेरी हरकत से गर्म होने लगी, लेकिन अंधेरे मे वो मुझे देख नही पा रही थी, मैने हाथ माँ के घुटनों तक ले गया जहा तक स्कर्ट थी,

माँ का नंगा घुटना हाथ लगते ही मज़ा सा गया, लेकिन तभी माँ ने मेरा हाथ पकड़ अलग कर दिया,

मै डर गया माँ कहीं नाराज ना हो जाए,

हम दोनो चुपचाप फिल्म देख बाहर आ गये,

12 बजने वाले थे, 1 घण्टा बाकी था,

तभी मै माँ को खडा कर 2 बोतल बीयर ले आया, एक माँ को दी और एक मै पीने लगा,

बहुत सारे लोग पार्टी कर रहे थे, दारू पी रहे, एक तरफ मै और माँ भी पीने लगे, कुछ देर पीने के बाद 12 बज गये, सब लोग एक दूसरे को नई साल की मुबारक बाद दे रहे थे, आसमान मे आतिश बाजिया हो रही, सब लोग खुश हो रहे थे,

माँ ये नजारा देख खुश हो गयी, मैने माँ को गले लगाया, नई साल मुबारक हो आपको

माँ-- आपको भी राज

मैने जैसे ही गले से दूर होना चाहा, माँ के गाल पर एक छोटा सा किस कर दिया,

माँ झरा गयी,, एकदम से,

तभी वहा रोमांटिक गाने बजने लगे, मै और माँ एक दूसरे की आँखों मे देखने लगे,

माँ-- राज क्या देख रहे हो ऐसे

मै-- एक हसीना को देख रहा हूँ, जिसने मुझे पागल कर दिया है,

माँ-- राज ऐसे मत देखो मुझे कुछ हो रहा है,

तभी गाने बन्द हो जाते है, हम दोनो का ध्यान भी टूट जाता है,

माँ-- राज अब हमे चलना चाहिए, बहुत रात हो गयी है सब जा रहे है,

मै-- हा चलो, आज बस मे चलते है,,

हम बस का इंतज़ार करते है,..
 
 
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