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Incest रुतबा या वारिस

 
आगे..

मै-- सीता आज हमारी सुहागरात है आज आप एक औरत होने का सुख देखोगी,

माँ-- हा राज, आज सुहागरात है लेकिन मुझे कुछ आता नही क्या करना है

मै-- करूँगा तो मैं, तुम बस मेरा साथ देना,

माँ को नही पता था आज उसकी सबसे दर्द भरी रात होगी, मेरा लंड बहुत मोटा था,

माँ-- हा राज मै साथ हु,

राज आज बहुत खुश हु आज मेरी सही शादी हुई है,

शाम होने को आ गयी, मैने बेड को फूलो से सज़ा दिया, बेड पर फुल ही फुल थे,

आज दोनो को भूख नही थी,

माँ और मै कमरे मे आ गये और दरवाजा बन्द कर दिया, माँ बेड देख खुश थी,

माँ मेरे सामने खड़ी थी,
 
माँ एकदम परी लग रही थी, उसके लाल होठ मुझे पागल बना रहे थे, तभी

मै-- सीता, आज से हम नई दुनिया कि शुरूवात करेंगे, ये रात आपकी ज़िंदगी की सबसे हसीन रात होगी,,

माँ-- हा राज मै तैयार हु, नई ज़िंदगी के लिए

मैने अपने दोनो हाथ फैला दिये, माँ ने मुझे अपनी बाहों मे ले लिया, मैने भी माँ को पीछे हाथ डाल पकड़ लिया,

माँ-- i love You राज

मै-- Love you Too सीता,,

मैने धीरे से माँ के कोमल और मुलायम गाल को चूम लिया,

माँ-- आह राज, जब तु ऐसे करता है बड़ा अच्छा लगता है,

मै-- देखती जाओ आज क्या क्या होता है

तभी मैने माँ के लिपिस्टिक लगे लाल और गर्म होठो पर अपने होठ रख दिये,

और होठों को किस करने लगा,

मै ने मुझे कसकर पकड़ लिया, माँ के हाथ की चूड़ियों की आवाज से मै और पागल हो रहा था, मैने भी माँ को कसकर पकड़ लिया और माँ को पूरा मुझसे टच कर लिया,

मेरा लंड खडा हो गया पेंट मे और माँ की जांघों पर दबाव देने लगा, और माँ कि चुन्चिया मेरे सीने पर लगी हुई थी

हम दोनो की गर्म सांसे पुरे कमरे मे हो रही,

दोनो एक दूसरे के होठों का रसपान कर रहे थे,
 
दोनो एक दूसरे मे डूब गये थे, तभी मैने अपना हाथ माँ की कमर पर घुमाना शुरू कर दिया, माँ और मस्त हो गयी, माँ मेरे होठो को खाने लगी, माँ की आँखे बंद थी, मै माँ का मस्ती भरा चेहरा देख रहा था,

मैने अपना हाथ कमर से घुमाते घुमाते माँ की साडी के उपर से ही माँ के चुतड पर ले गया,

क्या ही चुतड है माँ का, एकदम माँस से भरा व कसा हुआ, बड़ा सा, जैसे ही मैने चुतड को हल्का सा दबाया, माँ ने मेरे होठ को दांतों मे ले लिया जोर से, और झटके खाने लगी,

मै समझ गया माँ झड़ रही है, लेकिन माँ ने मेरे होठ को काट लिया,

माँ को पसीना आ गया बहुत, दोनो की साँसे तेज थी,

माँ ने मेरे होठ को छोड़, दिया,

राज तुझे पास मे पाने पर मेरी चूत गीली हो जाती है मुझे मज़ा सा आता है

माँ के मुह से पहली बार चूत नाम सुना, मेरा लंड बिल्कुल तन गया,

मै-- सीता आज इसी का काम करना है, देखती जाओ क्या क्या करता हु,

मैने माँ के बालो की चोटी खोल दी, माँ के बाल खुल गये मैने माँ का साड़ी पकड़ खोलने लगा,

कुछ ही देर में माँ की साड़ी खोल एक तरफ कर दी,

मेरे सामने माँ ब्लाउस और पेटिकोट मे खड़ी थी, गोरे रंग पर बहुत अच्छी दिख रही थी,

मैने भी अपना कुर्ता और बनियानं उतार दिया दिया,

मैने माँ को फिर से पकड़ लिया, और एक हाथ उनकी गर्दन मे वालों को पकड़ लिया और फिर से माँ के होठो पर टूट पड़ा, माँ ने भी मेरी नंगी पीठ को हाथो से पकड़ लिया, मेरा लंड जैसे लौहे का हो तन कर चड्डी फाड़ रहा था, मैने अपना लंड पेटिकोट के उपर से ही माँ की चूत पर लगा लिया, माँ पूरी मस्ती से मज़ा ले रही थी, तभी मैने अपना दूसरा हाथ माँ के चुतड पर रख दिया और माँ के बड़े और मस्त चुतड को हाथ से दबाने लगा,

माँ पागलो की तरह मेरे होठो को चूस रही थी, मैने माँ के होठो से होते हुए माँ का कंधा और गला चाटने लगा, जैसे किसी गर्म लोहे को चूम रहा हु,

दोनो फिर से तेज साँसों मे हो गये,

माँ का गला चूमते चूमते मैने अपने होठ माँ की चुन्चो की खाई पर लगा दिया, माँ मस्ती से सिहर उठी,

माँ-- राज बड़ा मज़ा आ रहा है, राज पहले क्यु नही मिला, बोल रही थी

माँ ने मेरे बालो को हाथ से पकड़ लिया और चुन्चियो की खाई पर दबाने लगी, एक हाथ से माँ के चुतड को जोर से दबा रहा और चुन्चियो की खाई पर चूम रहा,और नीचे से लंड माँ की चूत पर कमर हिला हिला कर माँ को पागल कर रहा था, तभी माँ फिर से झटके खा के झड़ने लगी, माँ ने मुझे जोर से पकड़ लिया, मै भी रुक गया, माँ झड़ कर शांत हुई,

माँ-- राज आज मर ही जाऊंगी, इतना मज़ा आ रहा है,

मै-- सीता मज़ा तो अभी बाकी है ये तो अभी शुरुवात है,

माँ दो बार झड़ने से थक सी गयी, और बेड पर बैठ लेट गयी,

अब मेरा सब्र भी टूट रहा था, मै जल्दी से माँ को चोदना चाह रहा था,

मै भी माँ के पास लेट गया और माँ के बालो मे हाथ घुमाने लगा,
 
आगे.. फूलो से सजे बेड पर हम दोनो लेटे थे, माँ सीधी लेटी थी, मै उठा और अपनी पेंट निकाल दी, मेरा लंड चड्डी मे भी बाहर निकलने को उतावला था, माँ ने चड्डी का उभार देख आँखो मे मस्ती सी छा गयी, माँ को नही पता था की ये कितना बड़ा और मोटा है,

माँ-- मस्ती से,,, राज मुझे अपनी बाहों मे ले लो,,

मै-- सीता बस कुछ देर रुको, तुमको बाहों मे ही टूटना है,

मैने माँ के पैरो की तरफ़ आकर माँ के पैरो की उंगलियो को मुह मे लेकर चूमने लगा,,

माँ-- छोड़ो राज, मेरे उपर आ जाओ, और मुझे बाहों मे दबा लो,

माँ चुदाई के लिए कामुक हो गयी थी, और मै भी जल्दी चोदना चाहता था,

मै जल्दी से माँ के उपर लेट गया, मेरा और माँ का गर्म पेट आपस मे मिल गये, मेरा सीना माँ के ब्लाउस पर टिक गया, माँ ने भी दोनो हाथो से मुझे पीछे से पकड़ लिया,

माँ-- हाय राज, बड़ा अच्छा लगता है जब तु ऐसे चिपकता है,

तभी मैने अपने दोनो पेर माँ के पैरो मे फंसा माँ के पेर को चोड़ा कर दिया, और अपने दोनो हाथ माँ के ब्लाउस पर रख दिया,

माँ कसक सी गयी और मेरा मुह को पकड़ मेरे होठों पर टूट पड़ी, मै ब्लाउस के उपर से ही माँ के चुन्चो को दबाने लगा,, बहुत ही कैसे और बड़े थे,, जैसे जैसे माँ के चुन्चो को दबाता, माँ मेरे होठों को जोर से चूसने लगती,

मैने माँ का ब्लाउस पकड़ उसके बटन खोलने लगा,, जैसे जैसे बटन खोलता माँ के बड़े चुन्चो पर लगी ब्रा दिखती, कुछ ही देर में ब्लाउस के पूरे बटन खोल दिये, जैसे ही खोले सामने माँ के मस्ती और मांस से भरे चुन्चिया लाल रंग की ब्रा मै फड़फड़ा रहे थे, माँ के गोरे रंग पर लाल ब्रा बहुत अच्छी लग रही थी,

पहाड़ जैसे तने चुन्चो पर मैने झट से अपना मुह लगा दिया,

माँ-- आह आह राज, दिल कर रहा है खा जा इन्हे, माँ मस्ती मे पागल हो चुकी थी, माँ ने खुद ही एक ही झटके मे अपनी ब्रा उपर कर दी,

मेरे सामने एकदम से माँ के बड़े और कसे हुए चुन्चै सामने आ गये, उस पर छोटा सा गुलाबी सा गोला और बीच मे निप्पल बड़ा ही मस्त लग रहा था, लेकिन माँ जवानी की मस्ती मे बुरी तरह पागल हो चुकी थी, उसने मेरा सर पकड़ अपने एक चुन्चै पर दबा दिया,

माँ-- राज मेरा दिल कर रहा है तू खां जा इनको.. आह राज आह,, सिसकी लेती हुई, मै और मेरा लंड बेकाबू हो रहे थे,

मैने झट से अपना मुंह माँ के चुन्चो को चुम लिया,

माँ-- मस्ती से आह राज,, ऐसा मज़ा कभी नही आया,, राज, आह आह आ आ आह...

माँ की गर्म और मुलायम दूध जैसी चुन्चै को चूमते ही हम दोनो पागल ho गये,

मैने तभी अपने मुह माँ मे माँ का नीप्पल ले लिया, माँ तड़प सी उठी, और अपना हाथ मेरे सर को पीछे से पकड़ अपनी चुन्ची पर दबा दिया, और मैने दूसरे हाथ से माँ का दूसरा चुन्ची पकड़ दबाने लगा,

माँ-- आह राज,, मार डाला राज,, आह आह

मैने अपना पूरा मुह खोल माँ की चुन्ची को चूसने लगा,

माँ की मस्ती से चूत पानी पानी कर रही थी,

मै बदल बदल कर दोनो चुन्चो को जोर से चूसने लगा

माँ-- राज जल्दी कर कुछ, नही तो मै आज फट जाऊंगी,

आह राज,, जल्दी कुछ करो,,

मै समझ गया माँ चुदने को बेताब हो गयी है, और मै भी,,

मैने माँ की चुन्चियो को चूमता हुआ पेट को चूमने लगा, माँ का हाथ मेरा सर पर दबा रखा था,

मैने अपना मुह माँ की नाभि में लगा चूमने लगा,, माँ का पेट तेज से उपर नीचे होने लगा,

ज्युँ मै माँ की नाभि चूमता माँ अपना हाथ मेरे सर पर जोर से दबा देती, तभी माँ झटके खाने लगी, मै समझ गया माँ फिर झड़ रही है,

माँ-- रुक जा राज, रुक जा,, आह आह आह. .. आह...

मै कुछ देर रुक गया, लेकिन मेरा सब्र टूट रहा था,

तभी मैने अपने हाथ से माँ के पेटिकोट का नाड़ा खोल दिया, और पेटिकोट को नीचे खीचने लगा,

माँ ने भी अपनी कमर और चुतड उठा कर पेटिकोट निकालने मे मदद की,

माँ की लाल रंग की पैंटी से चूत ढकी हुई थी, जो पूरी तरह से चूत के पानी से गीली हो रखी थी,

मैने माँ की कमर से पैंटी पकड़ नीचे करने लगा, माँ ने भी अपनी कमरे को उठा दी, मैने माँ की पैंटी को निकाल फेंक दिया,

माँ पूरी नंगी लेटी थी, मैने माँ के पैरो मे बैठ माँ की जांघो को पकड़ जैसे ही अपना चेहरा माँ की चूत के पास ले जाने लगा, माँ ने मेरा चेहरा पकड़ लिया,

माँ-- नही राज यहाँ नही, ये गन्दी जगह अपना मुह मत लगा, वैसे भी बहुत थक सी गयी हु, जल्दी कुछ कर नही तो पागल हो जाऊंगी,

मै समझ गया माँ चुदाई के लिए के लिए बोल रही है,

मै-- क्या हुआ सीता, कहा आग सी लगी है,,

माँ-- राज मेरी चूत मे आग सी लगी हैं बहुत, कुछ कर राज,,

मै-- सीता इसके लिए मेरा लंड है ना, सब ठीक कर देगा,

मैने खड़े होकर, अपनी चड्डी निकाल दी,

माँ मेरे लंड को देख होश खो बेठी,

इतना बड़ा लंड देख माँ पागल हो रही,

माँ-- राज तेरा लंड बहुत मोटा है बिल्कुल घोड़े जैसा
 
आगे..

माँ-- राज ये कैसे जायेगा चूत मे, नही राज मै मर जाऊंगी,, इससे

मै-- नही सीता,, मै हु ना, नही मरने दूंगा,

माँ-- लेकिन राज, तेरे पापा का तो तेरे से बहुत छोटा और मोटा था, वो ही नही गया, ये कैसे जायेगा,,

मै-- माँ अगर प्यार से करेंगे और तुम मेरा साथ दोगी तो आराम से चला जायेगा,,

बताओ मेरी दुलहन दोगी ना साथ, और वैसे भी आज सुहागरात है, जो मै चाहू वो करूँगा,,

सीता जब ये अंदर जायेगा तब ही आप एक औरत होने का सुख ले सकोगी,,, और वैसे भी जब मै हुआ था तब भी दर्द हुआ था ना, तो आज भी सहना होगा,,

माँ-- ठीक है राज, जो होगा देखा जायेगा, बना दे मुझे पूरी औरत, मेरा सुहाग जो चाहेगा वो होगा,

मै माँ के पैरो को खोल चूत के सामने बैठ गया, माँ की चूत पानी से पूरी तरह गीली हो गयी थी,

मैने माँ से,

मै-- सीता तुम तैयार हो,

माँ-- हा राज मै तैयार हु, आराम से करना,,

मैने अपने एक हाथ से लंड को पकड़ लिया और माँ की चूत जो छोटे छोटे काले झांटो से ढकी हुई थी, चूत पर लंड का टोपा लगा दिया,

माँ एकदम से सिहर सी गयी, मैने लंड के टोपे को चूत की फांकों पर लगा उपर नीचे करने लगा,

माँ-- हाय राज, बड़ा मज़ा आ रहा है, राज

मैने थोड़ी देर चूत पर टोपे को ऐसे ही करता रहा, चूत के पानी से लंड का टोपा भी गिला हो चुका था,

तभी मैने माँ की दोनो टांगे पकड़ उपर कर माँ के कमर के दोनो तरफ कर दी,

माँ की गुलाबी चूत सामने आ गयी, क्या ही चूत थी माँ की, एकदम मस्त और गोरी गोरी,

पानी से भीगी हुई
 
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