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Incest रुतबा या वारिस

सुबह हुई माँ चाय लेकर मुझे जगा रही थी,

माँ-- राज उठ जा, चाय पि, और आज तेरी बुआ के पास जाने को बोल रहे है तेरे पापा,

आज तेरे दादा की पुण्यतिथि भी है तेरी दादी का भी ध्यान रखना है जल्दी चल,

मै-- जल्दबाजी के चक्कर मे तो रात को माया को पता चल जाता,

माँ-- क्या हुआ राज डरती हुई

मैने माँ को वीर्य वाली सारी बात बताई,

माँ-- माया को तो नही पता चला, आगे से ध्यान रखना होगा राज, जब कोई नही होगा तब ही करेंगे, वैसे रात को मुझे बहुत अच्छी नींद आई,

चल हम भी तैयार होते है तुम भी तैयार हो जाओ,

मै माँ और पापा तैयार होकर बुआ के पास चले गये,...

बुआ और दादी ने पापा को साथ देख खुश होती हुई

बुआ-- भैया आपको यहा देखकर दिल खुश हो गया,

पापा-- रमा सब राज का कमाल है, भगवान ने हमारी सहायता के लिए इसको यहा भेजा है,

मै बुआ और दादी को मस्त नजरो से देख रहा,

तभी माँ दादी से माँ जी आज ससुर जी की पुण्यतिथि है हम उनको याद करते है और हर दम आपके साथ है, इतना सुनते ही दादी ने माँ को जोर से रोती हुई माँ को गले लगा लिया,

दोनो की चुन्चिया आपस मे मिल गयी,

दादी ने पहली बार माँ को गले लगाया था आज

सब देख कर खुश थे की आज सास बहू एक जगह हो गयी,

माँ ने पापा के पास गयी और उनका हालचाल पूछा, तभी मेरे सामने दादी आई,,

दादी-- क्यु बेटा अपनी दादी को भूल गया क्या

मै-- नही दादी आपको कैसे भूल सकता हु, आप ही तो सब कुछ हो, कहते हुए दादी को गले लगा लिया,

बुआ-- चलो अंदर चलो खाना खाते है,

हम सब अंदर आ गये,, अंदर शाम तक बाते करते रहे तभी

माँ-- ठीक है रमा अब हम चलते है घर पर

बुआ-- नहीं भाभी, आज आज रुक जाओ कल चले जाना,

दादी-- नही रमा आज जाना है मुझे तेरे पापा की यादे है उस घर मे,

बुआ-- ठीक है माँ एक काम करो, आप और राज दोनो चले जाओ, भैया और भाभी कल आ जायेंगे,

दादी आज उदास सी थी,

दादी-- ठीक है बेटा चल हम चलते हैं

मै मन ही मन मे खुश हुआ, आज दादी और मै अकेले होंगे आज दादी की चूत का स्वाद लूंगा,

माँ-- मेरी तरफ देखती हुई, बेटा राज अपनी दादी का ख्याल रखना,

मै-- हा माँ मै दादी का अच्छे से ख्याल रखूँगा

मै और दादी गाड़ी मे बैठ घर आ जाते है, दादी गाड़ी मे भी उदास लग रही थी कुछ नही बोल रही थी,

दादी अपने कमरे मे चली गयी, माया आई भैया खाना तैयार है आप दोनो खा लो,

मै दादी के पास कमरे मे गया दादी आओ खाना खाते है,

दादी बेड पर उदास सी बैठी हुई, नही बेटा मुझे भूख नही है तुम खा लो,

मै दादी के पास गया, दादी क्या हुआ इतनी उदास क्यु हो,

दादी-- बेटा आज तेरे दादा की पुण्यतिथि है आज उनकी बहुत याद आ रही है,

मै-- दादी पहले खाना खाओ फिर हम बैठकर बात करते है

दादी-- तुम खा लो बेटा,

मै-- दादी का हाथ पकड़ कर, नही आपको मेरे साथ खाना है, अगर आप खाना नही खाओगी तो दादा जी को भी अच्छा नही लगेगा, चलो आओ

दादी मेरी तरफ देखती हुई चल बेटा तु नही मानेगा

मै-- मेरी दादी को भूखी कैसे रहने दु, बताओ,

दादी थोड़ी सी हस्ती हुई झूठा कही का, इतने दिन तो याद भी नही किया

मै-- दादी बहुत याद आई आपकी लेकिन पापा के ईलाज मे व्यस्त था,

मै दादी दोनो खा लेते है दादी अपने कमरे मे चली जाती है

माया-- भैया हुक्का लगा दु क्या,

मै-- नही दीदी आज दादी उदास है उनको खुश करता हु हसी मज़ाक से,

एक काम करो तुम जाओ आराम करो

माया चली जाती है मै दादी के पास कमरे मै आता हु,

दादी खड़ी हुई दीवार पर लगी दादा की फोटो को देख रही थी,

मैने अपनी पेंट निकाल लुंगी पहन ली,

मै-- दादी दादा को देख रही हो, दादी की नज़र फोटो पर थी

मैने आज सोच लिया था की आज दादी को चोद कर ही मानुगा,,

दादी-- बेटा तेरे दादा बहुत अच्छे थे, मुझे बहुत प्यार करते थे, लेकिन मुझे अकेला छोड़ कर चले गये, दादी की आवाज मे भारीपन आने लगा,

मैने दादी को पीछे से पकड़ अपने दोनो हाथ दादी के पेट से पकड़,

मै-- दादी ऐसा मत कहो, आप अकेली कैसे है, मै हु ना आपके साथ,

दादी-- हा मेरे लाल तु ही तो अब सहारा है मेरा, तु भी अपने दादा की तरह ही है जो मेरी इतनी परवाह करता है

मै दादी के पीछे एकदम चिपक गया,

दादी--- बेटा तेरे दादा मुझे बहुत प्यार करते थे, हमेशा मेरे साथ ही रहते,

मैने दादी का पेट सहलाना शुरु कर दिया, और अपना लंड को दादी के बड़े बड़े चुतडो की खाई मे लगा दिया,

मै-- दादी मै भी तो प्यार करता हु आपसे,

दादी-- हा मेरे लाल, लेकिन उनका प्यार अलग था तु तो बेटा है

मै-- तो क्या हुआ दादी, चलो आज से मै भी दादा वाला प्यार करूँगा,

मै दादी को चोदने की कह रहा था,

दादी के चुतडो मे लंड खडा हो गया पूरा,

और मै पूरा जोर से चिपक रहा, दादी भी मेरे लंड को खूब जानती थी, लेकिन दादी आराम से खड़ी थी,

दादी पीछे मुड़ी और मेरी तरफ देखती हुई बड़ा आया दादा का प्यार देने, चल सोते है, मेरा लंड लुंगी मै खडा तम्बू बना रखा था, मै और दादी बेड पर लेट गये और कंबल ओढ़ ली,

लेकिन मुझे कहा नींद आ रही थी, मैने तो दादी को चोदने का प्लान बना रखा था,

दादी ब्लाउस और पेटिकोट मे लेटी थी सीधी,

उनकी पहाड़ जैसी चुन्चिया ब्लाउस को उपर कर रही थी,

दादी-- बेटा तुझे मैने बहुत याद किया, तेरे बिना तो मै अकेली सी हो गयी थी,

और तो मुझ बुढी औरत से बात कोन करेगा, बस तु ही करता था,

वैसे बेटा तूने सीता को भी अच्छे से समझाया है, पूरी ही बदल गयी वो तो,

मै-- दादी किसने कहा आप बुढी हो, आप तो अभी बहुत जवान हो, आप तो पापा की माँ नही बहन जैसे दिखती हो,

दादी आपने अच्छा खान पान किया है

दादी-- हा बेटा तेरे दादा मेरा बहुत ध्यान रखते थे,

मै-- तभी तो अब तक जवान हो,

दादी-- तुझे बड़ी जवान लगी,

मै-- दादी मैने तो आपको देखा है इसलिए बता रहा हूँ

दादी-- अच्छा दादी को तभी जवान बता रहा है

चल सोजा अब, दादी अपना चेहरा मेरी तरफ कर लेट गयी

कुछ देर मै दादी की तरफ देखता रहा और एकदम पास आकर दादी की टांग पर मैने अपनी एक टांग रख रख दी और अपना मुंह दादी के ब्लाउस के पास ले जाके और हाथ दादी की कमर पर रख दिया,

दादी वैसे पहले कई बार मेरे साथ ऐसे सोई थी ,

मेरी आँखों के सामने दादी का ब्लाउस सांस के साथ उपर नीचे हो रहा था, और थोड़ी सी चुन्चि की घाटी भी दिख रही,

दादी -- बेटा आज सर्दी बहुत है शायद, मुझे तो बहुत ठण्ड लग रही हैं

मै-- हा दादी आज कुछ ज्यादा ही है दादी सरक कर पूरी मेरे से चिपक गयी, और अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया, मेरे चेहरे से ब्लाउस एक दम पास हो गया था, मेरी साँसे गर्म होने लगी जो सीधी चुन्चियो की घाटी पर लग रही थी,

मैने अपने हाथ से दादी की कमर पर जोर देकर मै और पास हो गया जिससे मेरा मुंह सीधा चुन्चियो की घाटी पर लगा, दादी की कोमल चुन्चियो को मैने होठों से छु लिया, और अपनी टांग को दादी की मासल जांघो पर चडा दिया, मेरा खड़ा लंड लुंगी मे फड़ फड़ा रहा था,

मैने दादी की कमर से हाथ हटा अपनी लुंगी को खोल लंड को आजाद कर दिया, लंड का टोपा सीधा दादी के पेट पर लगा,

दादी-- समझ गयी थी lakin,

दादी-- क्या हुआ बेटा नींद नही आ रही क्या,

मै-- दादी कई दिन हो गये ऐसे सोये हुए, आज कपड़े खोल कर सोना चाहता हु

दादी-- लुंगी खोल तो दी है तुमने

मै-- दादी आपको कैसे पता चला

दादी-- देख मेरे पेट से लग रहा है तेरा

कोई नही सोजा बेटा,

दादी ने करवट लेली और मेरी तरफ पीठ कर दी,

मैने फिर से दादी के चिपक अपना हाथ पेट पर डाल दिया, और लंड अब जो की दादी के चुतडो की खाई पर लगा पड़ा था, मेरी गर्म साँसे दादी की गर्दन से लग रही थी,

मैने धीरे धीरे अपना हाथ दादी के पेट पर घुमान शुरु कर दिया, दादी आँख बंद किये लेटी थी

तभी मैने अपनी एक उंगली दादी की नाभि मे लगा दी,

दादी अचानक से पीछे हुई और मेरे से पूरी तरह टच हो गयी,

मैने दादी की नाभि मै उंगली घुमाने लगा, दादी की साँसे तेज होने लगी, मै समझ गया दादी गर्म हो रही है

दादी-- बेटा नींद नही आ रही क्या, तु अभी तक ऐसे सोना भुला नही क्या,

मै-- दादी आपके साथ होता हु तो अपने आप ही नींद उड़ जाती है

कहते हुए मैने लंड पर जोर देकर चुतडो की खाई मे लगाने लगा,

दादी-- वो तो दिख रहा है तभी तूने अपना लंड खडा कर रखा है

मै-- दादी आपके साथ सोता हु तो खडा हो ही जाता है

दादी-- ठीक है खडा रख, मुझे तो सोने दे,

कहती हुई फिर आँखों को बंद कर लिया,

मै कुछ देर तक दादी की नाभि मे उंगली करता रहा

तभी मैने अपना हाथ नीचे कर धीरे से पेटिकोट के नाड़े की गांठ खोल दी,

दादी चुपचाप लेटी रही , मै एक हाथ से पेटिकोट को धीरे धीरे नीचे करने लगा,

उपर की कमर से तो हो रहा, मैने उपर से तो पेटिकोट नीचे कर एक चुतड को नंगा कर दिया था,लेकिन नीचे वाली कमर से पेटिकोट दबा पड़ा था तभी दादी ने मेरी तरफ करवट ली, मेरा काम आसान हो गया, नीचे वाली साइड अब उपर हो गयी थी, मैने पेटिकोट पकड़ नीचे किया और घुटनों तक लाकर छोड़ दिया, दादी पैंटी मे थी नीचे से, दादी की साँसे तेज थी, मेरा लंड सीधा दादी की पैंटी से लग रहा था, तभी मैने अपना एक हाथ दादी के बड़े चुतड पर रख दिया,
 
मैने अपने लंड को दादी की जांघो के बीच डाल पैंटी के उपर से फँसा दिया, मेरा एक हाथ दादी के चुतड को दबाने लगा,

दादी मेरे गर्म लंड से गर्म होने लगी,

मैने अपना मुह दादी की घाटियों पर लगा किस करने लगा धीरे धीरे,

दादी की साँसे तेज हो चली, दादी की चुन्चियो का स्पर्श से मेरे लंड मे उबाल आना शुरु हो गया, मै अपनी कमर हिलाने लगा जिससे दादी की चूत पर रगड़ होने लगी,

मैने अपना मुंह दादी की चुन्चियो की घाटी पर लगा उनको होठो से चुम रहा था,

फिर मैने अपना हाथ चुतड से हटा दादी के ब्लाउस पर रख दिया, दादी थोड़ी सी हिली और अपनी कमर को आगे कर चूत को लंड पर दबाने लगी,

दादी नींद का बहाना कर सब मज़ा ले रही थी,

मैने अपने हाथ से दादी का ब्लाउस के बटन खोलने लगा, थोड़ी ही देर मे पूरा ब्लाउस के बटन खोल दिये,

दादी की ब्रा मे बड़ी बड़ी चुन्चियो का नज़ारा बड़ा ही मस्त था, मैने जल्दी से अपना चेहरा दोनो चुन्चो के बीच लगा दिया,

दादी अचानक से हिली और बोली, क्या कर रहा है बेटा,

दादी मेरे साथ पहले खुल चुकी थी पूरी,

मै-- दादी कुछ नही, दादी आपको दूध आता है क्या,

दादी-- नही रे पागल, अब दूध नही आता, पहले तो बताया था,

मैने अपना हाथ ब्रा के उपर से ही एक चुन्ची को पकड़ दबा दिया,

दादी आह..... सी...

क्या कर रहा है लाल

मै-- दादी आपके चुन्चै इतने बड़े क्यु है, जब की इनमे तो दूध नही आता बता रही हो,

दादी पूरी गर्म हो गयी थी मेरे हाथ से चुन्चै दबाने से से,,

दादी-- बेटा ये सब जवानी मे हुआ है, अब दूध सुख गया है,

मै- दादी आप झुठ बोल रही हो, कहता हुआ एक साइड से ब्रा को उपर कर दिया, दादी का एक बड़ा सा पहाड जैसे आज़ाद हो गया हो, निकल कर थोडा सा लटकने लगा, गोरी गोरी चुन्ची और उस पर काला सा निप्पल, मानो कश्मीर मे कोई फुल खिला हो,

मैने चुन्ची को हाथ मे ले जोर से मुलायम चुन्ची को दबा दिया,

दादी--- आह... ई..... क्या कर रहा है बेटा,

मै-- दबा कर देख रहा हु क्या पता दूध निकल आये,

दादी-- नही अरे पागल अब नही आयेगा,

मैने अगले ही पल अपना मुंह को चुन्ची के पास ले जाके चुन्ची को मुंह मे ले लिया,

दादी--- आई... ई..... ई........

दादी का हाथ मेरी पीठ पर आ गया और जोर लगा कर मुझे अपने से चिपका लिया,

दादी-- पागल आज क्या हो गया तुझे,

दादी ने चूत को लंड पर दबा रखा था, और चुन्ची मेरे मुंह मे थी,

दादी का निप्पल कड़ा हो गया, और मे उसको मस्ती से चुस रहा था,

दादी की साँसे तेज हो गयी,, आह.. बेटा.. सी....

क्यु अपनी दादी को परेशान कर रहा है,

सी.... अम्म...

मै दादी के चुन्चै को पूरा मुंह खोल चूसने लगा, दादी का हाथ मेरे सर पर आ गया और दादी जोर देकर दाब देने लगी, दादी चूत को लंड पर पूरा जोर देकर दाबने लगी,

और मस्ती से आह.. बेटा.. लगता है तू दूध निकाल कर ही मानेगा,, सी.. ई...

दादी मस्ती सहन नहीं कर सकी, और मेरे लंड पर पूरा जोर दे मेरे सर को जोर से दबा झटके खाने लगी, और झटको के साथ ही दादी का पैसाब निकल गया,

चल... चल्.... की आवाज से गर्म पैसाब पैंटी मे से निकल लंड को भिगो रहा,

दादी-- आह,, गई.. ई... रे..... कहती हुई झड़ने लगी

मेरे लंड और पेर दादी के पैसाब से गीले हो चुके,

दादी की पकड़ थोड़ी देर मे ढ़ीली हुई,

दादी-- बेटा तू तो मुझे जवानी की याद दिला देता है,,, कई दिनों बाद आज तूने मुझे शांति दी है, देख मेरा पैसाब भी निकल गया,

दादी ने अपनी गीली पैंटी कंबल मे ही निकाल दी

मै-- दादी मुझे भी मस्त होना है मेरा भी पानी निकाल दो ना,

दादी-- बेटा तो निकाल ले ना, देख कैसे खडा कर रखा है जल्दी से निकाल ले और इसको आराम दे,

मै-- हा दादी कई देर से खडा है अब इसका भी पानी निकाल आराम दे देता हु,

दादी मै आपकी चूत पर रगड़ कर पानी निकाल दु क्या,

दादी-- अरी अभी तो रगड़ दिया है, मुझे क्यु सता रहा है,

मै-- दादी आपकी चूत से जल्दी से मेरा पानी निकल जायेगा, इसलिए बोल रहा हु,

दादी-- ठीक है बेटा, आजा जल्दी करले,, वैसे भी कई दिनों बाद निकालेंगा,

दादी को नही पता की की मैने चूत का स्वाद चख लिया है

मै-- हा दादी,, दादी मे आपके पेरो के बीच आता हु, वहा सही से होगा,,

दादी अपने पेरो को खोलते हुए आजा बेटा जल्दी कर,, क्यु की दादी की चूत मे आग लगी हुई थी, वो तो लंड के लिए वैसे भी तड़प रही थी,

मै जैसे ही दादी के पेरो के बीच आया, सामने देखा दादी की काले झांटो मे अपनी पंखुड़ियों को खोले हुए चूत मेरे लंड का इंतज़ार कर रही थी,

दादी-- जल्दी कर लो ना,

मै-- हा दादी लो,,

मैने लंड को पकडा, और लंड का टोपा दादी की चूत की फांकों के बीच लगा गीली और गर्म चूत पर टोपा रगड़ने लगा,

दादी--- आह,, उई..... बेटा तेरा लंड बहुत गर्म है रे,,

जैसे जैसे मै लंड रगड़ता दादी की सिसकियां निकल जाती,

मै-- दादी आप लंड को पकड़ कर चूत पर रगड़ दो ना

दादी पूरी गर्म और मस्ती मे थी ही

दादी ने मेरे लंड को पकड़ लिया और गीली चूत पर लंड के टोपे को रगड़ने लगी,

मै-- दादी आपने झांट इतने बड़े क्यु कर रखे है काट लिया करो ना,,

दादी लंड की रगड़ से आह,, हाय,, .... बेटा अब जरूरत नही पड़ती,

कितना मोटा कर रखा है तूने मेरे लाल.. सी..... लंड के लिए बोलती हुई

मै-- क्यु दादी, अब क्यु नही पड़ती जरूरत

दादी-- बेटा तेरे दादा थे तब साफ रखती थी अब वो नही है तो कई दिनो से करती हूँ साफ,,

दादी लंड की रगड़ से पागल हो चुकी थी, और तेज साँसों से सिसकारिया ले रही थी, लंड की रगड़ से पक.... पक.. पक ... की आवाज आ रही थी,

दादी की आँखे मस्ती से लाल हो चली थी, मैने अपना कुर्ता उतार दिया, अब मै पूरा नंगा हो गया था,

दादी की चूत और झांटे पूरी तरह से पानी से गीली हो गयी थी,

मैने दादी का हाथ से लंड को छुड़ा खुद पकड़ लंड के टोपे को जल्दी जल्दी रगड़ने लगा,.

दादी मद्होश हो गयी पूरी, हाय... आह.... बेटा...... ओ.......

मैने थोड़ा झुक कर दादी की ब्रा नीचे कर दोनो पहाड जैसे चुन्चियो को बाहर निकाल दिया,,

और एक हाथ से बारी बारी दोनो चुन्चियो को दबाने लगा,,

दादी-- हाय तेरे हाथो मे कैसा जादू है बेटा,, इतना मज़ा तो तेरे दादा भी नही देते थे आह.. दबा बेटा जोर से पूरा रस निकाल दे इनका आह... सी....

दादी पूरी मस्ती से अपने पेरो को और खोल दिया, जिससे उनकी चूत का गुलाबी भाग दिखने लगा,

मैने बिना देर करते हुए चूत के छेद पर लंड को रोक कर थोड़ा सा जोर दिया जिससे दादी की चूत मे टोपा घुस गया और फस गया, लंड मोटा और लम्बा होने के कारण.

दादी.. उई....... मार दिया र... उफ.... ऊ.......

गीली चूत होने के कारण मैने और जोर दिया जिससे आधा लंड दादी की चूत मे उतर गया,

दादी-- लाल.. उफ़.... क्या डाल दिया रे.. मारेगा.. उफ..... सी...........

मेरा आधा लंड दादी की चूत मे फसा पड़ा, दादी की चूत की गर्मी बहुत ज्यादा हो रखी थी, मैने लंड से हाथ हटा मै दादी के उपर झुक गया, और अपना चेहरा दादी के चेहरे के पास ले जाके दादी के होठो पर अपने होठो को रख दिया,,

दादी लंड से पागल हो चुकी थी, उसने मेरे सर को पकड लिया और होठों को चूमने लगी,

मै और दादी आपस मे होठों को खाने लगे, मैने अपनी कमर को ढीला छोड़ दिया,

मेरा लंड घुसता हुआ दादी के बच्चेदानी से लगा, दादी मस्ती मे हो गयी पूरी और मेरे होठो को खाने लगी,

मेरे दोनो दादी की चुन्चियो पर आ गये और उनको जोर जोर से दबाने लगा,

दादी मेरे होठो को इस कदर खा रही थी जैसे किसी शेरनी को कई सालों बाद कोई शिकार मिला हो,,

मैने अपनी कमर को पीछे ले कर फिर से जोर दिया, लंड पीछे होकर फिर से अंदर घुस गया,

दादी मेरे होठों से दूर हो..

हाय..... आह... बेटा........ मस्ती से बोली..

मैने भी अपना चेहरा नीचे कर लिया और दोनो चुन्चियो पर टूट पड़ा,

और अपनी कमर के झटके लगाने शुरु कर दिये,

दादी मेरे सर पर हाथ रख मेरे मुंह से चुन्चियो को चूसवा रही थी,

दादी के पेर मेरी कमर पर आ गये, और मैने दादी की चूत में लंड से चुदाई शुरू कर दी,

चलक्.... चलक्.... चल्....... की आवाज से दादी की चुदाई चल रही थी,

दादी-- आह... मेरे घोड़े..... आह.. फाड़ दिया रे.... आह....

मेरे लंड की चोट दादी के बच्चेदानी पर लग रही थी,

चुदाई मे हम दोनो की झांटे आपस मे मिल रही थी,

दादी की चूत बुरी तरह से पानी पानी हो रही थी.

मैने दादी की चुदाई तेज करनी शुरू कर दी,

अब लंड गिला होने से आराम से दादी की चुदाई कर रहा था, तभी दादी अकड़ने लगी, मै समझ गया अब दादी झड़ने वाली है

दादी ने अपने पेरो को जोर देकर कमर पर लगाने लगी, और मेरे सर को जोर से अपनी चुन्चियो पर दबाने लगी,

दादी की चूत की गर्मी मेरे लंड से अब सहन नही हो रही थी, और मेरे लंड की पिचकारी दादी की बच्चेदानी से लगने लगी,

दादी कई सालों बाद चूत मे गर्म वीर्य पाकर मेरे साथ ही झटके खाकर झड़ने लगी,

दोनो एक दूसरे की बाहों मे कस कर झड़ रहे थे, कुछ देर तक झड़ने के बाद दोनो शांत हुए,

दोनो की साँसे धीमी हो चली,

मैने अपना लंड निकाल एक तरफ लेट गया, लंड के साथ ही दादी की चूत से वीर्य की नदी निकलने लगी,

दादी आज कई सालों बाद चुदाई से खुश थी,

कुछ देर हम दोनो ऐसे ही लेटे रहे...

आगे.......
 
 
दादी-- बेटा तूने तो मेरी ज़िंदगी में आज खुशिया भर दी, तेरे लंड से मेरी जान ही निकल रही थी, बड़ा ही दमदार है तेरा लंड,,

मै-- दादी आज से ये आपका ही तो है, जब दिल करे बता दिया करो, आपको खुश कर देगा ये लंड,

दादी-- हा बेटा लेकिन समाज मे इस बात का पता नही चले, ये सही है या गलत, पता नही लेकिन तूने मुझे बहुत खुश किया है, तेरा दिल इस बुढी पर कैसे आ गया पता नही,

मै-- अरे दादी आप बुढी कहा हो आपकी चूत मे अभी बहुत गर्मी है

दादी-- बेटा ये तेरे लंड ने आग लगा रखी थी, इतने दिन तो इसकी रगड़ से झड़ती थी, तूने आज इसकी गर्मी शांत की है, मेरी दो बार चूत झड़ी है लाल,,

मै थक गयी हु बेटा, अब तु भी सोजा,

मै-- दादी एक बार और चूत मारने दो ना,

दादी-- नही बेटा अब मेरी हिम्मत नहीं है, तूने थका दिया है देख कितना सारा वीर्य पड़ा है, पूरा घोड़ा है और लंड भी घोड़े जैसे लिया हुआ है,

मै-- दादी आपको बच्चा पैदा हो गया तो मैने तो आपकी चूत मे वीर्य डाला है,

दादी-- नही बेटा अब मुझे बच्चा नही हो सकता, मुझे माहवारी नही आती अब, तुम चिंता मत करो,

अगर मुझे माहवारी आती होती तो पक्का तु बच्चा लगा देता, तेरे वीर्य मे बहुत ताकत है लाल,

लो खडा हो ये गीले बेडशीट अलग कर रख दे देती हु, पूरी वीर्य से गीली पड़ी है

मै और दादी दोनो नंगे खड़े हो बेडशीट को अलग कर कोने मे रख कंबल ओढ़ आपस मे लिपट कर सो गये,

दादी अपने पेर मेरे पेरो मे फसा और चुन्चिया मेरे सीने पर लगा सो गयी,

सुबह के 6 बजे सी मेरी नींद टूटी, दादी आज मस्त होकर सो रही थी मेरी बाहों मे,

दोनो आपस मे लिपट कर सोने से मेरे लंड मे हलचल हो गयी और लंड पूरा खडा हो गया,

मैने दादी की चुन्चियो को मुंह मे ले चूसने लगा,

थोड़ी ही देर मे दादी नींद से जगी, आँख खोलती हुई मुझे देखा मै दादी की चुन्चियो को चूस रहा,

दादी-- अरे बेटा इतनी जल्दी उठ गया, मेरी चुन्चियो को पी रहा है कहती हुई मेरे सर पर हाथ रख सहलाने लगी,

दादी-- हा दादी आपको और चोदने का दिल किया इसलिए नींद नही आई,

दादी-- अरे चोद लेना बेटा, मै कहा जा रही हु, वैसे तेरी चुदाई से मुझे बड़ी अच्छी नींद आई, ऐसी चुदाई तेरे दादा ने भी नही की,

चल अब खडा हो जा, माया आती होगी,

मै-- दादी चोदने दो ना एक बार,, देखो मेरा लंड पूरा खडा हो गया है,

दादी-- अभी नही बेटा, अभी माया आती होगी, रात मे कर लेना फिर से चुदाई, मेरी भी तो इच्छा है बेटा,

दादी मुझसे दूर होती हुई खड़ी हो गयी, और अपने कपड़े पहनने लगी,

इतने में ही माया आवाज दी, दादी आओ चाय तैयार है चाय पी लो,

दादी ने जल्दी से कपड़े पहने और बाहर चली गयी, मैने जल्दी से लुंगी पहन ली,

माया चाय लेती हुई,

माया-- भैया आप उठ गये, लो चाय पिलो,

माया चाय देती हुई बैठ गयी,

माया-- भैया हुक्का लगाऊ क्या, आप आये नही घर की तरफ हुक्का पीने,

मै-- दीदी आप पिलाओ और हम ना पिये, ये तो हो नही सकता,

माया हुक्का लगा कर ले आती है हम दोनो हुक्का पीते है, माया के दिमाग मे अब भी फर्श पे पड़ा उस दिन वाला वीर्य याद आ रहा था,

मै हुक्का पी शौच के लिए चला गया माया कमरा साफ करने लगी,

माया ने देखा बेडशीट नही है बेड पर, बेडशीट एक कोने मे पड़ी थी,

माया सोचने लगी की बेडशीट यहाँ कैसे,,

माया बेडशीट को उठाई तो देखा बेडशीट गीली थी उसमे वीर्य की खुशबू आ रही थी

माया सोचती हुई ये गिला पैसाब का तो नही है इसमे तो वीर्य की खुशबू आ रही हैं, लेकिन ये कैसे...

कही भैया तो नही,.. लेकिन वीर्य.... कही भैया मुठ तो नही मारते, लेकिन पूरी रात दादी थी पास, अगर मुठ मारा भी तो कैसे, और बेडशीट यहा,,

माया के दिमाग मे चक्कर चल रहा था,

माया ने सोच लिया कभी अकेला मिला तो जरूर पूछूँगी,

तभी गाड़ी की आवाज आती है माँ और पापा दोनो जल्दी घर आ जाते है,

मै-- माँ पापा इतनी जल्दी कैसे आ गये,

माँ-- बेटा राज तेरे पापा की दवाई यही भूल गयी थी, रात को भी नही दी इसलिए जल्दी आ गये,

पापा-- हा बेटा, तुझे और तेरी दादी को भी बुलाया है, अभी चले जाओ,

मै तो माँ को आज चोदने की सोच रहा लेकिन अब दादी के साथ बुआ के घर जाके दादी को ही चोद लूंगा,

इतने मे दादी बेटा मै नहा लेती हू फिर तु भी नहा ले, हम तेरी बुआ के घर ही रहेंगे कुछ दिन, दादी खुश होती हुई, क्यु की वहा चुदाई आराम से हो सकेगी..

दादी नहाने चली गयी, माँ पापा को कमरे मे छोड़ कर दूसरे कमरे मे चली गयी, माया घर के काम मे लगी हुई थी,

मै माँ के कमरे मे गया, माँ दुसरी तरफ मुंह करके अपनी साड़ी निकाल रही थी,

मैने माँ को पीछे से पकड़ लिया,

सीता मेरी जान तेरे बिना रुका नही जाता यार,

माँ जल्दी से खुद को छुड़ाते हुए, क्या कर रहा है राज,

कितनी बार बोल दिया है की घर मे माँ ही बोलना, कोई सुन या देख लेगा, राज

माँ-- राज हमारा ये रिश्ता ऐसे ही रहेगा, दुनिया के सामने हम माँ बेटे ही है, राज मै भी तुमसे बहुत प्यार करती हु, लेकिन मजबूर हु, हमे जब भी सही मोका मिलेगा हम जरूर मिलेंगे,,

मै-- ठीक है माँ,, लेकिन मेरा आपको चोदने का मन कर रहा है,

माँ-- नही राज अभी सही मौका नहीं है, अभी तुम दादी के साथ बुआ के पास जाओ, जब आ जाओगे तब मौका देखेंगे,

इतने मे ही पापा की आवाज आती है माँ को आवाज दे रहे थे, माँ पापा के पास चली जाती है
 
मै और दादी नहा कर बुआ के घर चले गये, बुआ और फूफा दोनो को देख खुश हुए, दिन भर साथ बैठे रहे सभी, बाते करते रहे, शाम होने को चली..

बुआ-- आप लोग बाते करो, मै खाना बना लेती हु, कहती हुई दूसरे कमरे मे चली गयी, बुआ भी माँ नही बन पाई अभी तक, उनका बदन बिल्कुल दादी की तरह ही बड़ी चुन्चिया और बड़ी गांड, मोटी सी नाभि, मटकी हुई जवानी लिए हुए थी,

खेर सभी लोगो ने खाना खाया, मै और दादी कमरे मे जा रहे थे, तभी बुआ.. माँ आप हुक्का लगा लो, मै आती हु अभी

दादी हुक्का लगाने लगी, कुछ ही देर मे बुआ भी आ गयी, हम तीनो बेड पर बैठ कंबल उपर ओढ़ ली,

तीनो हुक्के का कस लगा रहे थे,

तभी दादी.. बेटा तूने सीता को जिस डॉक्टर को दिखाया था, उस डॉक्टर से तेरी बुआ को भी दिखा ला,

क्या पता इसको भी बच्चा लग जाए,

बुआ चुपचाप सुन रही और हुक्का पी रही,

अब इनको कोन समझाए की डॉक्टर मैं ही हु,

मै-- हा दादी जरूर, बुआ को लेकर जाऊंगा,

तीनो हुक्का पूरा पी लिया,,,

बुआ-- हा माँ अब और नही सहा जाता ये दर्द, आखिर मै भी तो माँ बननी चाहती हु,

बुआ का गला भर आया,,

दादी-- रो मत बच्ची, भगवान सब ठीक करेगा,

बुआ-- ठीक है माँ आप सो जाओ, सुबह मिलते है,,

दादी बुआ को देख दुखी हो गयी,

बुआ कमरे से बाहर चली गयी,,, दादी दुखी दिल से अपनी चुनरी निकाल ब्लाउस और पेटिकोट मे लेट गयी,,

मै-- क्या हुआ दादी, उदास क्यु हो गयी

दादी-- बेटा तेरी बुआ को देख मै भी दुखी हो जाती हु, पता नही उसको बच्चा कब होगा,,

मै-- दादी मै हु ना, उनको डॉक्टर से दिखा दूंगा, देखना जल्दी ही आपको अच्छी खबर मिलेगी,,

दादी खुश होती हुई अपनी बाहे खोल दी, मै सीधा दादी के उपर लेट गया,...

और दादी के गालो को चाटने लगा,,

दादी-- जीता रह मेरे लाल,,

मै-- दादी आओ अब अपनी रात को रंगीन करते है,

दादी-- हा बेटा, अब यहा कोई नही होगा, कुछ दिन यही मजे करेंगे,,

मै-- आप भी कुछ किया करो, मै ही सब करता हु, आपको सब ज्ञान है चुदाई का

दादी-- हा बेटा आज मै पूरा मज़ा लुंगी,

दादी ने अपना ब्लाउस पेटिकोट ब्रा पैंटी निकाल खड़ी हो गयी,

दादी-- बेटा तु भी नंगा हो जा,

मैने भी पूरा कपड़ा निकाल दिया, दोनो नंगे हो गये,

दादी-- लेट जा बेटा आज मुझे करने दे, आज तु कुछ मत करना,,

दादी बेड पर आकर मेरे पेरो को खोलती हुई मेरे खड़े लण्ड को हाथ में पकड़ लिया,

वा मेरे राजा दादी के लिए खडा कर रखा है

मै--हा दादी आपको देखकर खडा हुआ है लंड,

दादी -- बेटा कल मेरी चूत की गर्मी शांत करदी इसने, बड़ा ही प्यारा है लंड तेरा, इतना मोटा,,, कहती हुई लंड के सुपाडे पर कीस ले लिया,

दादी-- हाय ये तो मेरे मुंह मे कैसे जायेगा,

कहती हुई लंड के टोपे को मुंह में ले लिया,

मेरे लंड का पूरा टोपा दादी के मुंह मे फस गया था, दादी ने बाहर निकाल

दादी-- इतना मोटा लंड है रे, मुंह मे भी नही जा रहा,

मै-- दादी जल्दी करो ना,

दादी --बेटा मै तेरा लंड चूसना चाहती थी लेकिन ये मुंह मे नही आ रहा ठीक से,

एक काम कर तु ही मेरी चूत चाट ले,,

दादी कहती हुई मेरी मुंह के उपर आकर अपने दोनो पेर मेरे दोनो कानों के पास रख घुटने टेक दिये, मेरी आँखो के सामने झांटो से भरी दादी की गुलाबी चूत दिख रही रही,

दादी-- बेटा अपनी दादी की चूत को चाट अब,

मैने बिना देर करते हुए दादी के चुतडो को पकड़ सीधा अपना मुंह दादी की चूत पर लगा दिया..

दादी-- आई...... ई.... उफ..........

मैने अपनी जीभ दादी की गुलाबी चूत मे चलाने लगा,

दादी-- आह...... सी....... सी......

कर रही थी,

मै दादी की चूत को चाटने के साथ साथ उनके बड़े बड़े चुतडो को दबा रहा था,,

दोनो पुरे गर्म हो चूत की चटाई कर रहे थे,

दादी की सिसकारिया निकलने लगी,,

दादी-- बेटा तु बड़ा मस्त चूत चाटता है, अपने दादा की तरह,,

उई...... उफ.......... आह.....

दादी की चूत अब पूरी पानी पानी हो रही थी, और मेरे मुंह को भिगो रही थी, दादी अब मस्ती मे हो गयी दादी अपनी चुन्चिया को पकड़ खुद दबाने लगी..

आह... बेटा..... आह..... कर रही थी

कुछ देर बाद दादी थोड़ी अकड़ने लगी, मै समझ गया दादी अब झड़ने वाली है और मैने अपनी जीभ की रफ्तार और तेज कर चूत को चाटने लगा,, दादी की आँखे बंद हो गयी,

दादी-- गई रे..... आह आह..

करती हुई मेरे उपर पैसाब की तेज धार के साथ झड़ती हुई चूत को मेरे उपर टिका दिया, और झटके खाने लगी,

दादी का गर्म और नमकीन पैसाब को मै पूरा सा पी गया,,

दादी को मस्ती के बाद होश सा आया, वो साइड मे लेट गयी,

दादी-- माफ करना बेटा, तेरी जीभ ने मेरी ताकत को कमज़ोर कर दिया, और मैं पैसाब रोक नही पायी बेटा,,

मै-- दादी कोई बात नही, मुझे आपकी हर चीज अच्छी लगती है, आपका पैसाब भी बहुत नमकीन था, मज़ा आ गया दादी..

दादी-- वा मेरे लाल, इतना प्यार तो मुझे कभी नही किया तेरे दादा ने,

दादी-- मै हु ना प्यार करने के लिए,

दादी-- हा बेटा, तू ही सब कुछ है अब, थोड़ा सा आराम कर लू, फिर मेरी चूत की चुदाई कर देना बेटा,,,

आगे...

...
 
मै अपने खड़े लंड को हाथ से सहला रहा था,

दादी-- रुक बेटे सहला मत, मै हु ना

दादी कहती हुई फिर से मेरे पेरो के उपर खड़ी हो गयी,

दादी का बदन देख मुझसे भी रहा नही जा रहा था, दादी कि बड़ी बड़ी चुन्चियो और चूत देख मै बेकाबू हो रहा था,

मै-- दादी कुछ करो ना.. जल्दी

दादी-- हा बेटा ले..

कहती हुई एक हाथ से लंड को पकड़ लिया और लण्ड को सीधा रख अपनी चूत उस पर लगा दी,

दादी-- हाय राजा बेटा,, आज पूरा मज़ा लुंगी लंड से

मैं-- हा दादी लो ना,, किसने रोक लगाई है

दादी लंड के उपर चूत रख थोड़ा सा नीचे हुई चिकनी चूत मे लण्ड का सुपाडा घुस गया..

दादी-- हाय मेरी,, .... चूत मे देख कैसे फस गया है बहुत मोटा है मेरे राजा तेरा लंड..

आह.....

दादी ने लण्ड से हाथ हटा मेरी छाती पर रख लिए और अपनी कमर को नीचे जोर दे कर लंड को चूत मे उतारने लगी,,,

हाय...... ओह... आह......

करती हुई पुरे लण्ड को चूत मे घुसा दिया, और पागल सी होकर मेरे सीने पर लेट गयी..

दादी-- आह....... ओह..... ई..... ऊ........

दादी की चिकनी चूत ने मेरा पूरा लण्ड अंदर ले लिया,

मै-- क्या हुआ दादी,,

दादी-- आह.. बेटा.... उ.. तेरा लंड मोटा बहुत है रे,, कुछ देर संभलने तो दे,

मै-- दादी ऐसे थोड़ी होता है.

कहता हुआ मैने दोनो हाथ दादी के चुतडो को पकड़ लिया और जोर से कमर का उपर धक्का मार डाला जिससे दादी की चूत मे लंड की रगड़ लगी,,

दादी-- हाय रे,... आह... उई....

दादी की आँखे बन्द हो गयी थी..

मैने दादी के चुतडो को पकड़ दादी को थोड़ा उपर कर रहा और नीचे मेरी कमर से झटका मारने लगा..

दादी-- मर गयी रे...... उए... उई..... आह.... कहती हुई मेरे होठों पर टूट पड़ी..

मैने अब अपनी कमर की स्पीड बढ़ा दी,

दादी पगली सी हो गयी,,

और मेरे होठों को चूमने और काटने लगी,,

दादी की चिकनी चूत चपक....चपक... करने लगी

दादी- हाय बेटा, ऐसे ही चोद तेरी दादी को, आह.... आह... आह.....

लंड सीधा दादी के बच्चेदानी से टकरा रहा था,

हाय.. आह.... बेटा..... ऐसी चुदाई के लिए तड़प रही थी,... आह..

दादी अब खुद कमर हिला हिला कर मेरे साथ झटके लगाने लगी..

थप.... थप... थप... की आवाज से कमरे में गूंजने लगी..

तभी दादी ने अपनी कमर की रफ्तारऔर तेज कर दी...

आय.... सी.... ई..... ई.... आह.....

दादी ने मेरे सीने पर हाथ रख लिए और खुद लंड पर कमर हिला कर चुदने लगी,

दादी की चूत का रस से मेरे झांट भी गिले हो गये,

आह... आह......... आ.....

तभी दादी ने मेरे सीने से हाथ हटा लंड पर बैठ गयी और कुदने लगी,

मेरा लंड दादी की बहुत अच्छी चुदाई कर रहा था,

मैने दोनो हाथ दादी की चुन्चियो को पकड़ लिया और दबाने लगा,

पचक.......पचक....... पचक... की आवाज से चुदाई चल रही थी, दादी कमज़ोर होने लगी और आगे की तरफ झुक मेरे चेहरे पर अपनी चुन्चियो को रख दिया, मैने अपना मुंह खोल चुन्चियो का रस पीने लगा और अपनी कमर की रफ्तार और तेज कर दी,

दादी--- आई.... ई.... उ...... ई..... स्..... स्.......... कर रही थी, मै और दादी अब झड़ने वाले थे, तभी मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी निकल दादी की बच्चेदानी से टकराने लगी, दादी भी गर्म वीर्य के साथ मेरे साथ झड़ने लगी और लण्ड को अंदर जोर लगा कर झटके खाने लगी....

कुछ देर तक दोनो झड़ते रहे, कुछ देर बाद दादी थोड़ी सी खड़ी सी हुई जिससे लंड बाहर आ गया, और बहुत सारा वीर्य मेरे झांटो पर गिरने लगा, दादी थक कर एक तरफ लेट गयी...

दादी-- हाय रे, तूने मज़ा दे दिया बेटा,,,, ऐसी चुदाई से तो मज़ा आ गया,पूरा घोड़े का लण्ड लिए हुए है तू बेटा,

दोनो अब धीरे धीरे से शांत हुए,, दादी की चूत से अब भी थोड़ा वीर्य निकल रहा था, दादी ने अपनी चुनरी से चूत और मेरे उपर गिरे वीर्य और लंड को साफ किया, और चुनरी एक तरफ रख दी,

दादी-- बेटा अब थक गयी हु, आजा मेरी बाहों में आजा, ऐसे ही सोयेंगे हम,

मै-- दादी अभी तो और चोदना है एक बार

दादी-- अब नही बेटा कल चोद लेना तेरी दादी को, अब हिम्मत नही है, कल चोदना,

अब सोते है, दादी ने दोनो पर कंबल डाली, और दोनो एक दूसरे की बाहों मे लिपट कर सो गये,...

आगे.....
 
सुबह हुई दादी अपने कपड़े पहन बाहर आ गयी थी, बुआ चाय लेकर कमरे मे घुसती हुई,

बुआ-- अरे बेटा उठ जा ले चाय, पी ले,

मेरी नींद खुली सामने देखा बुआ चाय लिए हुए खड़ी थी, मै तो कंबल मे नंगा ही सो रहा था, मैने जल्दी से अपने आप को पूरा कंबल से ढक लिया,

बुआ का बदन सामने दिख रहा था, बड़ी बड़ी चुन्चिया, गोल सी नाभि चिकनी कमर, जवानी की बहार लिए हुए थी, जैसे ही बुआ ने चाय रखने के लिए झुकी उनकी चुन्चिया मानो ब्लाउस से बहार निकलने को बेताब हो रही हो दिखने लगी, मेरा लंड कंबल मै ही पूरा खडा हो गाय,

मै-- बुआ आप क्यु परेशान हो रही हु, मे बाद मे पी लेता, चाय,,

बुआ-- अरे बेटा अभी चाय पिलो, बाद मै दूध पी लेना,

मै-- हा बुआ, दूध भी पीना है आप पिलाओगी ना बुआ दूध,

बुआ-- हा बेटा, क्यु नही पिलाऊँगी, जरूर पिलाऊँगी, एक तु ही तो है इस घर मे दूध पीने वाला और कोई नही है,

बुआ मेरी बात को समझ नही रही की मै कोनसा दूध पीने की बात कर रहा हु,

मै-- हा बुआ, लेकिन आप देखना जल्दी ही एक और होगा जो दूध पीने वाला होगा,

बुआ हस्ती हुई, हट पागल चल जल्दी उठ जा, और तैयार हो जाओ,

मै उठ कर नहा धो लिया,

दादी-- बेटा आज खेत संभाल कर आते है चल

बुआ-- माँ मै भी चलती हु, कई दिन हो गये मुझे भी खेत मे गये हुए,

मै दादी और बुआ तीनो खेत मे निकल पड़ते है,

मै थोड़ा आगे चल रहा था बुआ दादी पीछे चल रही थी,

दादी--- रमा, कुछ बात बनी क्या,

बुआ-- मेरी तरफ देखती हुई, माँ राज सुन लेगा, ये सब बाते, वो बच्चा है अभी, क्या सोचेगा

दादी-- अरे नही सुनेगा उसको, वो आगे अपनी मस्ती मे मस्त है, तु बता,

बुआ-- नही माँ, कुछ बात नही बनी, अब तो कभी कभी ही उनका खडा होता है, पता नही मेरी ज़िंदगी मे ऐसा क्यु हुआ,

दादी-- रमा तुम चिंता मत करो, भगवान सब ठीक करेगा,

कल हम पंडित जी को बुलाते है क्या पता वो कोई समाधान बता दे,

अब हम खेत मे आ गये,

दादी कुछ काम करने लगी, मुझे पैसाब लगा, मैने चारो तरफ देखा कोई नही दिखा मे एक पेड़ के पीछे गया जहा सरसो उगी हुई थी, पीछे जाकर पैसाब करने लगा,

अचानक सामने देखा मेरी तो गांड ही फट गयी,

सरसो मे से सामने बुआ खड़ी थी, उनकी आँखे पूरी खुली हुई, और मेरे लंड को देख रही, उनका मुंह खुला का खुला रह गया, क्यु की उन्होंने ऐसा लंड कभी नही देखा,,

मैने डरकर अपना चेहरा दुसरी तरफ कर लिया,

मै-- बुआ माफ करना, मैने आपको देखा नही इसलिए यहाँ पैसाब करने लगा,

बुआ एकदम चुपचाप खड़ी थी, मुझे दर लग रहा था, बुआ गुस्सा करेगी,

क्यु की बुआ बहुत ही ज्यादा पतिवृता नारी थी,

मैने जल्दी से पैसाब कर वहा से चला गया,

मुझे दर था की बुआ या तो गुस्सा करेगी या दादी को बताएगी,

हम तीनो खेत से घर की तरफ चल पडे,

मै चुपचाप आगे चल रहा था, बुआ मेरी शिकायत ना करे कही,

लेकिन बुआ ने दादी से कुछ भी नही कहा, खेर शाम होने को चली मै फूफा जी के पास बैठ कर बाते कर रहा था, बुआ और दादी रसोई मे खाना बना रही थी,

बुआ-- माँ आपको एक बात बताऊ,

दादी-- हा बोलो ना

बुआ-- माँ आज खेत मे राज जब पैसाब कर रहा था, तब उसको नही पता था की मै सरसो मे हु, वो मेरी तरफ पैसाब कर रहा था,

दादी-- अरे तो क्या हुआ, बच्चा है अभी

बुआ-- माँ राज अब बच्चा नही रहा, मैने उसको नंगा देखा था,

दादी-- मन ही मन मे, हा अब बच्चा नही रहा वो, मैने तो उसकी चुदाई सही है कितना मोटा लंड है उसका,

बुआ-- माँ उसका लंड बहुत बड़ा और मोटा हो रखा है, इतना बड़ा तो किसी का नही होता,

दादी-- तु भी ना रमा, क्या क्या बोल रही है, अरे अब वो जवान हो रहा है तो ये तो होना ही था,

बुआ-- हा माँ, लेकिन इतना बड़ा और मोटा,

दादी-- रमा ये किसी किसी को भगवान का वरदान होता है, खेर छोड़ इन बातो को, तु अपना आज रात को काम करना, तु लगी रहा कर जमाई जी के, क्या पता तेरे बच्चा लग जाए

बुआ-- हा माँ आज रात को कोशिश करूँगी,

बुआ आवाज लगाती हैं खाना तैयार है आजाओ खाना खाते है,

हम सबने साथ मे बैठकर खाना खाया, बुआ-- चलो माँ आप कमरे मे, मै हुक्का लगाकर लाती हु,

मै और दादी कमरे मे आ गये,

दादी-- बेटा, तुझे आज तेरी बुआ ने पैसाब करते देख लिया था, बता रही थी,

मै-- हा दादी वो भूल से हो गया, क्या बुआ गुस्सा है

दादी-- नही रे, गुस्सा क्यु करेगी,

इतने में बुआ हुक्का लेती हुई आ जाती है,

हम तीनो हुक्का लेकर बेड पर बैठ जाते है

बुआ मेरी तरफ ही देख रही थी,,

बुआ-- माँ अब भैया को बोलना पड़ेगा , राज की शादी के लिए, अब ये जवान हो गया है

दादी-- नही रमा, अभी कहा, अभी तो बच्चा है, अभी नही होने दूंगी मेरे लाल की,

मन ही मन मे खुश होती हुई,

बुआ- अच्छा, आपका ही तो थोड़ी बच्चा है मेरा भी तो है

दादी-- हा सही है,

राज बेटा कल हम गाँव चलते है वहा अच्छा पंडित है, उससे कुछ पूछना है,

मै--- हा दादी सुबह चलते है,

दादी-- रमा तुम जाओ अब अपने कमरे मे, हमे भी अब सोना है,

दादी चुदाई के लिए तड़प रही थी,

बुआ वहा से उठकर चली गयी

तभी दादी दरवाजा बन्द करती हुई, अभी नही होने दूंगी शादी तेरी, अभी तू मुझे भी मजे करने हैं

मै-- दादी चिंता मत करो, आपकी चुदाई तो रोज़ होगी, चाहे शादी हो या ना हो

कहता हुआ खडा हुआ और दादी को बाहों मे भर लिया, और दोनो हाथो से दादी के चुतडो को दबाने लगा,

दादी-- हाय,, तेरे हाथो मे जान है बेटा, तेरे छूते ही मज़ा सा आता है,

मै-- दादी आप हो ही मस्त, इतनी बड़ी चुन्चिया और गांड जो है,

दादी-- हा बेटा, तेरे दादा को भी बहुत पसंद थी ये सब,

मै-- दादी अब मै हु ना इन सबके लिए कहता हुआ दादी के होठों पर टूट पड़ा,

दादी भी मस्त होकर होठों पर टूट पड़ी,

मैने पीछे से दादी का पेटिकोट उठा लिया और उनके नंगे चुतडो को दबाने लगा,

मै-- दादी अब जल्दी से बेड पर आजाओ, अब रुका नही जा रहा है,

दादी-- हा बेटा, मेरा भी यही हाल है, जल्दी से चुदाई करदे,

पहले चल मै पैसाब कर आती हु, वरना तु फिर निकाल देगा,

मै --दादी लुंगी पहन लेता हु, फिर चलते है

.मै और दादी साथ मे पैसाब करने चल पड़े...

आगे......
 
हम दोनो पैसाब करके जैसे ही वापिस कमरे की तरफ चले, दादी बोली रुक बेटा अभी,, कहती हुई बुआ के कमरे की खिड़की के पास चली गयी,

मै भी दादी के पीछे पीछे चल दिया,

दादी ने थोड़ी सी खुली खिड़की के पास आकर अपना चेहरा लगा बुआ और फूफा को देखने लगी,

मैने धीरे से दादी क्या देख रही हो,

दादी-- धीरे से बोल बेटा, तेरी बुआ और फूफा को देख रही हु, उनको बच्चा नही हो रहा है ना, देख रही हु क्या करते है

मै-- ठीक है दादी मै भी देखता हु,

दादी-- तुम जाओ ना, कमरे मे, मै आती हु अभी

मै-- नही दादी मुझे भी देखना है, मेरी दादी देखेंगी तो मै भी देखूंगा,

दादी-- ठीक है लेकिन आवाज मत करना,

मै-- ठीक है दादी,

कहता हुआ दादी के पीछे खडा हो गया,

दादी आगे झुकी और अपना चेहरा खिड़की से लगा देखने लगी,

मै भी दादी के पीछे उनके चुतडो के बीच अपना लंड लगा खडा हो देखने लगा,

अंदर...

बुआ अपनी चुनरी निकालते हुए, फूफा से

बुआ-- सुनो जी, आप तैयार हो ना, अपने कपड़े निकाल दो ना,

फूफा-- तु क्यु पीछे पड़ी है, तुझे बोल दिया है मेरी हिम्मत नहीं है अब, मै कैसे तुम्हे बच्चा दु,

बुआ-- आप बस लेटे रहे, जो करना है मै कर लुंगी, मुझे चाहिए बच्चा,, ठीक है कहती हुई फूफा की पैंट खोल निकालने लगी, बुआ ने पेटिकोट उपर कर अपनी पैंटी को निकाल दी, बुआ की पीठ हमारी तरफ थी, बुआ ने जब पैंटी निकाली झुक कर उनकी फूली हुए चुतड जो बिल्कुल दादी की तरफ ही बड़े बड़े थे देख कर मेरा लंड पूरा खडा हो गया जो दादी के चुतडो पर पड़ा था, मैने कमर पर जोर दिया जो दादी को लंड खडा महसूस होने लगा,

बुआ ने फूफा की चड्डी निकाली तो छोटा सा लंड पड़ा था,

बुआ खड़ी खड़ी झुककर फूफा का लंड पकड़ लिया, बुआ का पेटिकोट नीचे जरूर हो गया था लेकिन उनके चुतडो का आकार अब भी दिख रहा था,

बुआ फूफा के लंड को पकड़ खडा करने की कोशिश करने लगी,

मै धीरे से-- दादी फूफा का लण्ड को बिल्कुल छोटा सा है,

दादी-- हा बेटा, तभी तो समस्या है

मैने अपनी कमर हिला कर लंड को दादी के चुतडो पर पेटिकोट के उपर से ही रगड़ने लगा,

दादी-- चल बेटा, लंड तो तेरा है जो खडा ही रहता है, चल कमरे मे, इसको शांत करदु

मै-- नही दादी अभी देखना है, मुझे बुआ क्या करती है

दादी एक बात कहु,

दादी-- हा बोल बेटा,,

मै-- दादी बुआ के चुतड बिल्कुल आप पर गये है, कहता हुआ दादी के पेटिकोट को उपर करने लगा,

दादी-- बेटा क्या कर रहा है यहाँ नही कमरे मे चल,

मै -- रुको ना दादी अभी,

उधर बुआ....

फूफा के लण्ड को खडा करने की कोशिश कर रही थी, बुआ ने मरे हुए चूहे जैसे लंड को मुंह मे लेने लगी, लेकिन लंड पूरा खडा नही होने के कारण मुंह से बार बार निकल जाता,

मै दादी के थोड़ा पीछे हुआ और पेटिकोट को कमर तक दादी की पैंटी निकालने लगा,

दादी-- यहा नही बेटा, सुन..

मै-- नही दादी आप चुपचाप उनको देखती रहो, मै सब अपने आप कर लूंगा,

मै फर्श पर अपने घुटने टेक दादी के पीछे बैठ गया,

दादी झुकी हुई थी जिससे दादी के चुतड और चूत फैली हुई थी,

मैने दादी के चुतडो को पकड़ अपना चेहरा दादी की चूत पर लगा दिया, दादी एकदम से हिली, क्या कर रहा है यहा, चल कमरे में वहा कर लेना,

मै-- नही दादी, यही, और आप चुपचाप रहो, वरना बुआ को पता चल जायेगा,

दादी फिर से खिड़की पकड़ झुक गयी,

मैने अपनी जीभ निकाल दादी की चूत पर लगा चूत का नमकीन पानी चाटने लगा,

दादी मस्ती मे, धीरे से आह.... आह. .

दादी अब मस्त हो गयी,

मैने अपना पूरा चेहरा दादी के चुतडो पर लगा और गुलाबी चूत का रस पी रहा था,

दादी की कमर अब धीरे धीरे हिलने लगी, दादी-- आह,, हाय... उफ.... चाट.. बेटा चाट, बड़ा मज़ा आ रहा है.. उफ......

उधर फूफा का लंड थोड़ा सा ही खडा हुआ, की फूफा बोले रमा मेरा पानी निकलने वाला है, बुआ ने लंड को मुंह से बाहर निकाल हाथ मे ले हिलाने लगी,

इधर दादी-- आह... बेटा...... बड़ा मज़ा आ रहा है आह.... आह.....

दादी की चूत पानी से एकदम चिकनी हो गयी थी,

उधर...

बुआ फूफा का मुठ मार रही थी की फूफा ने बुआ के हाथ मे ही पानी छोड़ दिया, बुआ ने जल्दी से वीर्य को उँगली से चूत मे लगाने लगी,,

दादी--आह... आह. ... उई...... दादी चूत की चटाई सहन नही कर सकी, और अचानक से नीचे झुक गयी झड़ने लगी,

मरी रे.... आह आह. .. आह..........

दादी के दोनो पेरो में जकड़न होकर झड़ रही थी,

दादी जल्दी से उठी और मेरे खड़े लण्ड को पकड़ कमरे की तरफ चल पड़ी,,

दादी-- बेटा तु चूत की चटाई भी बहुत अच्छी करता है मै तो वही झड़ गई, अब जल्दी से चूत मार बेटा,,

दोनो कमरे मै आ गये दादी ने दरवाजा बन्द कर दिया,

दादी जैसे ही बेड के पास आई मैने दादी को पकड़ फिर से झुका दिया

दादी-- क्या इरादा है आज झुका ही रहा है,

झुकी हुई दादी की गांड और चूत दोनो मेरे सामने आ गयी,

मैने अपना लंड पकड़ दादी की चूतपर रखा,

दादी-- आह आज मुझे कुतिया बनाकर चोदना चाहता है, मेरे लाल

मै-- हा दादी तेरे चुतड बड़े मस्त है इसलिए आज ऐसे ही चोदुगा,

इतना कह मैने लंड को चूत पर रख धक्का दिया जोर से, लंड दादी की चूत को चिरता हुआ बच्चेदानी से टकराया.

दादी-- उई.............. माँ.... ....... मरि रे......... आ...... .. आ........... क्या डाल दिया रे........ आ.......

बेटा आराम से,,, आह. ........ आ....... ..

मैने चुपचाप दादी की कमर को पकड़ लिया और अपनी कमर को हिला कर दादी की चूत की चुदाई करने लगा,

दादी दर्द और मस्ती मे अपने हाथ पीछे ला मेरे हाथो को पकड़ लिया,

आह.......... आह............ आह..........

बेटा तेरा लंड तो जन्नत की शेर कराता है आह.,.. आह.... .. .. मेरा लंड अब दादी के चूत के पानी से पूरा गिला होकर पचक ........ पचक........ पचक.... की आवाज कर चूत मार रहा था,

मेरे हर झटके मे दादी खुद झटका खा रही थी,... आह... . .... आह..... . . आह.....

कुछ ही देर मे दादी फिर से अकड़ने लगी, लगी, मै समझ गया दादी फिर से झड़ने वाली है, मैने अपनी कमर की रफ्तार बड़ा दी,

दादी सहन नही कर पायी और अकड़ती हुई झड़ने लगी, और नीचे बैठने लगी,

आई..........गई....... रे........ई.......ई......... गई......

दादी कह रही थी

लेकिन मैने दादी को बैठने नही दिया, और उनको कमर से जोर से पकड़ कमर सेउठा लिया और तेज चुदाई करने लगा,

दादी पहले से ही झड़ रही और अब और तेज चुदाई हो रही

दादी-- उई....... माँ....... छोड़..... दे.......... ई.............. आ........... आह.......... मरी......

दादी का बदन अकड़ता हुआ दादी खड़ी हो गयी पूरी, दादी का पूरा वजन मेरे लंड पर आ गया, और मै भी दादी की चूत मे झटके खाकर झड़ने लगा, मेरे झटके के साथ दादी भी हिल रही थी,

दादी-- मार दिया... बेटा..... आज...... आह..... आह....... हम दोनो झड़ कर शांत हुए की मैने अपनी पकड़ दादी की कमर से छोड़ी, दादी अचानक थक कर बेड पर गिर पड़ी, और चूत से बहुत सारा वीर्य निकल कर फर्श पर गिर पड़ा, मै भी दादी के बगल मे लेट गया,

दादी-- बेटा तूने तो आज पूरी आग बुझा दी, मै 5 मिनट तक झड़ी हु, आज

तूने तो मेरी जान ही निकाल दी, बेटा, इतना तड़प रहा रहा तु,

मै-- दादी आप हो ही ऐसी, आपको चोदने का मन बहुत करता है, अभी एक बार और करना है

दादी-- नही बेटे, तूने आज मेरी हिम्मत ही तोड़ दी है, अब मुझमे हिम्मत नही है, अब तो कई दिन भी नही चोदेगा तो भी चुदाई का दिल नही करेगा मेरा,

बेटा अब सोजा कल गाँव भी चलना है, मेरे लाल सोजा,,

मै-- ठीक है दादी,

हम दोनो सही से बेड पर लेट सोने लगे,,

मुझे माँ की याद आने लगी,, कई दिन हो गये उनको चोदे हुए, पता नही कब मौका मिलेगा,

...... खेर हम दोनो सो जाते है....

आगे....
 
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