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Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

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* अपडेट - 40

मैने लंड पे ज़ोर डाला , लंड का टोपा चूत के अंदर चला गया.

पंकज को दर्द नही हुआ. फिर एक जोरदार झटका मारा कि 4 इंच तक लंड अंदर गया.

मै पूरी तरह से पंकज के उपर आ कर अपने हाथ बूब्स पे रख कर किरण के होंटो को चूसने लगा.

वो ये 3 तरफ का हमला झेल नही पाई, और वो सेक्स के नशे मे डूब कर पूरा मज़ा लेने लगी...

पंकज को नशे मे देख कर मैं ने आख़िरी झटका मारा . पूरा लंड अंदर चला गया. वो पहले से मदहोश थी जिस की वजह से दर्द कम हुआ. और होन्ट चूसने और बूब्स दबाने से उसको ज़्यादा दर्द नही हुआ.

मैने थोड़ी देर अपने लंड को इसी तरह चूत मे रहने दिया.

फिर मैं ने किस करना बंद कर दिया. और लंड को हल्का सा बाहर निकाल कर अंदर डाल दिया. उसके मूह से आहह निकल गयी.

मैंने होंठो को आज़ाद कर दिया था .अब सिर्फ़ बूब्स को दबा रहा था. फिर आधा लंड बाहर निकाल कर अंदर डाल दिया. फिर से आधा लंड बाहर कर अंदर डाल दिया. फिर पूरा लंड बाहर निकाल कर अंदर डाल दिया.

अब उनको मज़ा आ रहा था.इस तरह धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करने से वो लंड को अच्छे से फील कर रही थी.

फिर मैं ने धक्के लगाना शुरू किया.पहले धीरे धीरे फिर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा. हर धक्के के साथ उनके मुंह से आहह निकलती...

अब उन्हें पुरा मजा आने लगा वो कहती और ज़ोर से मारो.फिर मैं ज़ोर से धक्के मारता. फिर से कहती और ज़ोर से मारो.

हमारा यही खेल चलता रहा .मैं धक्के मारता वो ज़ोर से मारने को कहती.

इसी तरह चुदाई करने के बाद मैं ने अपना वीर्य पंकज की चूत मे डाल दिया. वो 3 बार झाड़ चुकी थी.

हम दौनो ने चुदाई का भरपूर मज़ा लिया, हम दोनो हाँफने लगे.

थोड़ी देर बाद हम नॉर्मल हो गये.

मै- अब तो खुश हो मेरी जान.

पंकज - बहुत - बहुत खुश हूँ.

फिर हम दोनों एक -दुसरे से लिपट कर लेट गये...मैने अपने हाथ उसकी गांड पर रख दिये और धीरे -2 दोनो चुतडो को सहलाने लगा...

मै- मुझे तुम्हारी ये गांड मारनी है...

पंकज - वो गंदी जगह है, वहाँ पर कौन करता है...

मै- गांड तो बहुत रसीली होती है, गांड मारने का तो अलग ही मजा है.. बहुत मजा आता है. मुझे मारनी है.

पंकज - ठीक है अगर आपका मन है तो कर लीजिए. मेरा सबकुछ आपका ही है...

मै- मेरी रानी...

पंकज - पर आराम से करिएगा, और आप अपना पानी मेरी चुत मे ही छोड़ना...

मै-ठीक है मेरी रानी...

मैने पंकज के होंठों को चूसना सुरू किया. और पंकज को बेड पर लिटा दिया. मैने पंकज के नीचे पिल्लो रख दिया, जिस से कि उसकी की गांड उपर हो गयी.

मैं पंकज के उपर आकर पहले उनको गरम करना चाहता था.मैंने उसको किस करना शुरू किया. किस करने के बाद मैं निपल के साथ खेलने लगा.

निपल को जीभ से चाटने लगा. निपल टाइट हो गये. फिर बूब्स को मूह मे लेकर चूसने लगा. बूब्स चूसते समय मैं ने एक उंगली चूत मे डाल कर आगे पीछे करने लगा.

अब वो पूरी तरह से गरम हो गयी...

फिर मैं ने लंड को गंद की छेद पे रखा

पंकज - पहले थोड़ा तेल लगा लीजिए...

मै-कहाँ है तेल

पंकज - वो टेबल पे रखा है

मैंने तेल को अपने लंड पे लगा लिया. बाकी तेल को उनकी गांड मे डाल दिया. गांड पर तेल लगते समय मैंने उंगली को गांड मे डाल दिया. जिस से गंद मे तेल अच्छे से लग गया.

मै उंगली को अंदर बाहर करने लगा....

फिर मैंने लंड को गांड पर रख दिया...

पंकज - थोड़ा धीरे करना...

एक बार मैने पंकज की तरफ देखा .उन्होंने अपनी आँखे बंद कर दी और अपने होंटो को दबा दिया.

मैं एक ज़ोर का झटका मारा मेरा आधा लंड गंद मे चला गया. पंकज की चीख निकल गयी.

पंकज - आअहह आराम से करिए.... आहह दर्द हो रहा है.

मैंने बूब्स को दबाना सुरू किया. बूब्स दबाने से पंकज को अच्छा लग रहा था.

मैने पंकज के होंठों पर अपने होन्ठ रख दिए और एक ज़ोर का झटका मारा जिस से पूरा लंड अंदर चला गया. भाभी की चीख निकल गयी. उनकी चीख मेरे मूह मे दब गयी. मैने बूब्स को दबाना जारी रखा.

और होंटो को चूसने लगा. और लंड को वैसे ही गंद मे रहने दिया.

पंकज की आंखों मे आंसू आ गये...

पंकज - आपने तो मेरी गांड फाड ही दी आआहह...

5 मिनट तक मैं ऐसा ही पड़ा रहा .

जब उनको थोड़ा अच्छा लगने लगा तब मैं ने लंड को हिलाना सुरू किया.

मैं धीरे -2 धक्के मारने लगा .मेरे धक्को की वजह से उसकी गांड लाल हो गयी.

लंड अंदर बाहर करने से पंकज को दर्द हो रहा था.

पर जैसे जैसे लंड अंदर बाहर हो रहा था वैसे वैसे उसका दर्द कम हो रहा था.

थोड़ी देर बाद उनका दर्द कम हो गया. मैं धक्के लगाता गया वो मज़े लेती गयी. कमरे मे सिर्फ़ चुदाई की आवाज़ आ रही थी.

अब भाभी को भी मजा आने लगा था...

मैं धक्के मारने लगा और चूत को अपने हाथो से मसल्ने i लगा .लगभग 20-25 मिनट तक मैं भाभी की गांड मारता रहा.

मेरा लावा छूटने वाला था तो मैने अपना लंड गांड से निकाल कर चुत मे डाल दिया, और जोर जोर से धक्के मारने लगा...

पंकज जोर -2 से सिसकियां लेने लगी...

15-20 धक्को के बाद लंड ने अपना लावा उगल दिया... मेरे गरम माल को चुत मे महसूस करते ही पंकज भी एक बार फिर झड़ गई...

मैने लंड को चुत से बाहर निकाल लिया. और बेड पर लेट कर सासे लेने लगा.

पंकज भी मेरे पास लेट गई, हम दोनों ने एक बार और खेल खेला, फिर हम दोनो नंगे ही एक - दुसरे की बांहो मे सो गये...
 
* अपडेट - 41

हम दोनो नंगे ही एक - दुसरे की बांहो मे सो गये...

सुबह मेरी उठकर अपने रूम मे आ गया, रूम मे आकर फ्रेश हुआ. तैयार होने के बाद मैने ताउजी के घर पर नाश्ता किया. वहां पर अनिल भाई मिल गये

मै- भाई कैसे हो. खेत से आ गये

अनिल - ठीक हू यार, हा इतने दिन तक रात मे पानी देना होता था, आज से दिन का टाइम शुरू हो गया है.

फिर मै बुलेट लेकर घुमने चल पड़ा...

कुलदीप के घर गया तो पता चला की वो ग्राउंड पर गया, तो मै भी वही चल पड़ा...

ग्राउंड गांव के बाहर की तरफ साईड में है, उसके पास मे ही एक पुराना मंदिर है, ये गाँव मे प्रसिद्ध है...

मै जब मंदिर के पास पहुँचा तो देखा की वहाँ पर तीन लड़के लड़के है जिनकी उम्र लगभग 23-24 साल है, वो किसी औरत को जबरदस्ती खींच कर झाड़ियों की तरफ ले जा रहे है...

मैने बाईक रोक दी ओर उनके पास गया, मैने देखा की उन्होंने औरत नीचे लेटा दिया और वो उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे है वो औरत उनका विरोध कर रही है....

पास मे एक आदमी गिरा हुआ था शायद इन्होंने मारा है उसे..

मुझसे रहा नहीं गया...

मै- क्या कर रहे हो तुम लोग, छोड़ दो इनको और दूर हो जाओ.

आदमी 1- तु कौन है बे.. चल भाग यहाँ से

आदमी 2- चला जा वरना तेरा भी इसके जैसा हाल कर देंगे(उस आदमी की तरफ इशारा करके )...

मै- तुम लोगों को आखिरी बार बोल रहा हूँ...

आदमी3- तु ऐसे नहीं मानेगा... और वो मेरी तरफ बढ़ने लगा...

उसने जैसे ही मुक्का मेरी तरफ किया, तो मैने उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया और उसकी गर्दन पर जोर से मुक्का मारा...

वो नीचे गिर गया..

फिर दुसरा आदमी मेरी तरफ लपका... उसके हाथ मे लकड़ी थी, उसने मुझ पर वार किया तो मै साईड मे हो गया, मैने उसके एक लात की दी...

वो खडा हुआ और दुबारा वार किया इस बार मै चुक गया और डंडा सीधे मेरे हाथ पर लगा... जिससे मै नीचे गिर गया.

आदमी 2- साले मजा आया,

वो डायलॉग मार रहा था, इतनी देर मे मै संभल गया..

उसने फिर से डंडा मेरी तरफ बढ़ाया, इस बार मै संभल गया और वो थोड़ी देर मे जमीन पर धुल चाट रहा था...

ये देखकर तीसरा आदमी उस औरत का छोड़ हाथ मेरी तरफ आया...

उसने जेब से चाकू निकाल लिया, और मेरी तरफ वार किया,

पर मै बच गया...

उसने दुबारा वार किया तो मैने उसका हाथ पकड़ लिया और एक मुक्का मार दिया, वो दूर नीचे गिर गया...

जिससे वो औरत के नजदीक हो गया, उसने मौके का फायदा उठाया और उस औरत को पकड़ लिया... वो उस पर हमला करने वाला था कि मै बीच मे पहुँच गया जिससे चाकू मुझे लग गया... मेरे मुँह से दर्द भरी चीख निकल गई...

वो दुसरा वार करने ही वाला था तो मैने उसका हाथ पकड़ लिया.

अब मुझे गुस्सा आ गया तो मै उसे जोर जोर से मारने लगा.

अब वो तीनो डर गये और मौके का फायदा उठाकर भागने लगे...

आदमी 1- तुझे हम देख लेंगे, इसका बदला लेंगे हम.

मेै उस औरत के पास आया

मै- आप ठीक तो है ना

औरत - जी

मेरी बाजु से खून निकल रहा था...

औरत - अरे आपके हाथ से तो खुद निकल रहा है...

मै- चिंता मत करिए, ज्यादा नहीं है

उसने अपनी साड़ी को फाड़ लिया और वो मेरी बाजु पर बांधने लगी...

मैने उसकी तरफ देखा.. मै देखता ही रह गया...

इतनी सुंदर औरत मैने इस गाँव मे नहीं देखी...

ऊपर से नीचे तक गोरा बदन.. काली आँखें, गुलाबी होंठ... ब्लाउज मे कैद सुडोल चुचे... एकदम कामिनी का रूप लग रही है...

मेरी नज़र उसके खुले गले से लगभग आधे गोरे-गोरे सुडौल दूधिया मम्मों पर पड़ी, मेरी तो साँसें ही थम गयी...

इतने सुंदर दूधों को देखकर मेरा लॉडा सिर उठाने लगा...

मै- आपका नाम क्या है.

औरत - जी मेरा नाम पायल है...

मै-आप यहाँ क्या कर रही है, और आप कौन है.

पायल - मै यहाँ दर्शन करने आयी थी... मेरा घर यहीं है...

मै ठाकुर रणजीत सिंह की पत्नी हूँ...

मै उसकी बात सुनकर चौंक गया...

मै( मन मे) - ओ तेरी... इसका मतलब ये ठाकुर परिवार की बहू है.

*** परिचय -

ठाकुर सज्जन सिंह (64) -

गोरा लाल सुर्ख रंग, 5’10” की हाइट, पेट थोड़ा सा बाहर को निकला हुआ, बडी मूँछे रखते है,

लंबा चौड़ा कद, एक रोबदार इंसान.

अपनी जवानी मे बहुत ताकतवर और शक्तिशाली था, लेकिन अब उम्र होने के कारण शरीर बुढा़ और कमजोर हो गया है. चेहरे पर अभी भी कुछ तेज बरकरार है.

ठाकुर का स्वभाव शांत और अच्छा है... सभी के साथ प्यार से बर्ताव करता है.

ये गाँव का मुखिया है. गांव मे ठाकुर परिवार का बहुत मान सम्मान और दबदबा है.

बहुत पहले यहाँ इनकी जागीरदारी थी. जिस कारण ठाकुर परिवार का राज है.

इनका राज होने कारण इनके पास बहुत पैसा है.

आस पास के इलाके मे इनकी बहुत जमीन है. इनके पास कई मीले तथा फैक्ट्रिया है...

जिस कारण इनके पैसे मे लगातार बढोतरी हो रही है...

इसकी दो शादी हुई है, पहली पत्नी शादी के कुछ समय बाद से ही बीमार रहने लगी थी. धीरे धीरे उसकी बीमारी बढती चली गई. कुछ वर्ष मे उसकी मौत हो गई.

ठाकुर को उससे कोई संतान नहीं हुई, क्योंकि बीमारी के कारण मिलाप कम ही होता था.

ठाकुर जल्दी ही इसको भुल गया. और कुछ समय बाद ही ठाकुर ने दूसरी शादी कर ली कौशल्या से. कौशल्या का परिवार भी धनवान था.

पत्नी - कौशल्या देवी (52), साईज(36D - 30 -38)

लंबाई -5'5", रंग गोरा.

आज भी इसने खुद को पुरी तरह से फिट रखा है. अभी भी इसको देखकर कई लंडो के पानी निकल जाते है.

इसके शरीर मे एक दबी हुई सेक्स की आग जल रही है, परन्तु ये एक पतिव्रता पत्नी है.

कभी -2 ये चुत मे उंगली करके ही खुद को शांत कर लेती है.

बेटा - रणजीतसिंह (26)

हल्का गेम हुआ रंग, 5'8" की हाईट, सामान्य शरीर, पेट बाहर निकला हुआ है

बचपन से पढाई मे नॉर्मल ही है, बड़े होने पर इसको पढाई के लिए बड़े शहर भेज दिया गया...

वहां पर ये गलत संगत में पड़ गया, वो कॉलेज जाने की बजाय अपने दोस्तों के साथ पिक्चर देखता, बाहर घूमता..

पैसों की उसको कोई कमी नही थी, जितना माँगता उतने उसे मिल जाते.

समय धीरे-धीरे आगे बढ़ता जा रहा था,धीरे-धीरे उसकी आदते भी बढ़ने लगी, उसने शराब पीना भी शुरू कर दिया और ग़लत औरतों के साथ भी संबंध बना लिए, जो अपने शरीर का इस्तेमाल करके उससे पैसे ऐंठती रहती थी..

रणजीत की बुरी आदतों के बारे में इधर उधर से ठाकुर को पता चल गया, वो उसे लेकर चिंतित होने लगे….

रणजीत की पढाई पूरी हो गई थी तो ठाकुर ने उसको वापिस बुला लिया.

ठाकुर ने उसे ग़लत रास्ते पर चलने से रोकने के लिए अपने ही परिवार के जैसे दुसरे इलाक़े के ठाकुर जो बिजनेस मैन था उसकी लड़की के साथ उसकी शादी करदी…

और वैसे भी वो शादी लायक तो हो ही गया था…

रणजीत की पत्नी - पायल (23) साईज (34-28-34), हाईट -5'6"

सुंदर गोरी चिटी, छरहरे बदन की लड़की थी...

सुडोल तने हुए चुचे उन पर गुलाबी निप्पल... पतली कमर और 34" से भी कुछ बडी गांड.

ये एज्युकेटेड लडकी है,

..............***

 
अपडेट - 42

मै पायल को अपनी बुलेट पर बैठाकर ठाकुर की हवेली ले आया

ये हवेली पुश्तैनी है, तीन मंज़िला लंबी चौड़ी हवेली, गाओं की शोभा बढ़ाती है...

मेैन गेट से बहुत सारा लंबा चौड़ी खुली जगह है उसमे दोनों तरफ शानदार गार्डन बने हुए है , उसके बाद आगे बारादरी, जिसके बीचो-बीच से एक गॅलरी से होते हुए अंदर फिर एक बड़ा सा चौक, जिसके चारों तरफ बहुत सारे कमरे…

ठाकुर की बैठक हवेली के आगे के हिस्से मे थी, एक बड़े से हॉल नुमा कमरे के बीचो-बीच.बैठक बहुत ही शानदार और बड़ी है... ठाकुर अपना अधिकतर समय यहीं व्यतीत करता है. लोगों से मिलना और मदद करना सभी यही पर करता है..

बाहर गेट पर दो गार्ड खडे थे, मैने अपनी बुलेट अंदर ले जाकर रोक दी...

सुबह का समय था तो ठाकुर और ठकुराइन बाहर गार्डन मे बैठे हुए थे.

पायल और मै नीचे उतर कर उनके पास चले गए...

ठाकुर और ठकुराइन मुझे जानते है, क्योंकि हमारे परिवार मे काफी मेलजोल है.ठाकुर और बड़े ताऊजी दोस्त भी है. एक दुसरे के घर आना जाना है.

मै ठाकुर और ठकुराइन दोनों को ठाकुर ताउजी और ठकुराइन ताईजी बोलता हूँ .

मै उनके पास गया और दोनों के पैर छुए...

मै- प्रणाम ठाकुर ताऊजी, प्रणाम ठकुराइन ताईजी...

वो दोनों ही - जीते रहो बेटा...

ठाकुर - बेटा आज कैसे आना हुआ और बहु तुम्हारे साथ कैसे...

मै- ताउजी वो मै मंदिर के पास से गुजर रहा था तो ये वहां पर थी, तो मै इनको ले आया...

ठकुराइन - बहु तुम तो मंदिर गाड़ी मे गई थी, गाड़ी और ड्राइवर कहाँ पर हैं...

फिर पायल ने शुरू से पूरी बात उन दोनों को बता दी...

जिसे सुनकर ठाकुर गुस्से मे आ गया...

ठाकुर - किसकी इतनी हिम्मत हुई जिसने ठाकुर खानदान की बहु के साथ ऐसी हरकत की..

उन हरामजादो को तो अब छोड़ूँगा नहीं, उन्हें मरना ही होगा...

मैने और ठकुराइन ने उन्हें शांत किया...

मै- ठाकुर ताउजी शांत हो जाइये मैने उन हरामजादो को सबक सिखा दिया है...

ठाकुर - नहीं बेटा हम उन्हें सजा देंगे. तुम बताओ कौन थे वो लोग, कहाँ के थे...

मै - पता नहीं, मै उन्हें नहीं जानता... वो यहाँ के तो नहीं लग रहे थे बाहर के ही थे...

ठाकुर - हम उन्हें जल्दी ही ढूंढ लेंगे.और इसकी सजा जरूर देंगे.

पायल ने मेरे हाथ पर जो कपड़ा बांधा था उससे हल्का -2 खून आ रहा था.

उसे देखकर ठाकुर बोला - ये चोट कैसे लगी....

तो पायल ने जवाब दिया- पिताजी इन्हें ये चोट हमे बचाते हुए लगी. वो लोग मुझे चाकू मारने वाले थे की मुझे बचाने के लिए ये आ गये.

आज ये नहीं होते तो पता नहीं मेरे साथ क्या होता...

ठाकुर - बेटा तुम बहुत बहादुर हो... आज तुमने जो हमारे लिए किया है पता नहीं हम तुम्हारा शुक्रिया अदा कैसे करे...

आज तुमने ठाकुर खानदान के मान सम्मान की रक्षा की है...

मै- नहीं ताउजी ऐसा मत बोलिए, ये तो मेरा कर्तव्य था... मैने कुछ नहीं किया

ठकुराइन - कितने अच्छे संस्कार मिले है तुम्हें

ठाकुर - कौशल्या इसे अंदर ले जाओ और मरहम पट्टी करो, देखो खून निकल रहा है...

फिर मै ठकुराइन और पायल के साथ अंदर हॉल मे आ गया, मैं वहाँ सोफे पर बैठ गया...

ठकुराइन दवाइयों का बॉक्स ले आई...

ठकुराइन - बहु तुम राहुल के लिए हल्दी वाला दूध ले आओ..

पायल - जी माजी

ठकुराइन ( कौशल्या )- बेटा तुम आराम से बैठ जाओ...

ठकुराइन ने मेरे हाथ पर बंधा कपड़ा हटा दिया...

ठकुराइन (कौशल्या )- बेटा तुम ये शर्ट निकाल दो, ये खराब हो गई है

मैने अपनी शर्ट निकाल दी, जिससे मेरी कसरती बॉडी नंगी हो गई और मेरे हल्के सिक्स पैक्स दिखने लगे...

ठकुराइन - बेटा तुम्हारा शरीर तो बहुत मजबूत लग रहा है, एकदम पहलवान जैसे...

इतने मै पायल नौकरानी के साथ किचन से दूध लेके आ गई...

ठकुराइन मेरे घाव को साफ करने लगी...

ठकुराइन -कमिनों ने कैसे मारा है, कितना लंबा चिर गया है...

बेटा ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा..

मै- नहीं, बस थोडा ही बो रहा है...

ठकुराइन ने मेरे हाथ पर पट्टी कर दी, और पायल ने मुझे दूध दे दिया.. मैने पूरा दूध ख़त्म कर दिया...

मै खड़ा हो गया, मै अभी उपर से पूरा नंगा ही था.

पायल की आंखें बार -2 मेरे जिस्म पर आ रही थी...

ठकुराइन - शर्ट तो खराब हो गई, बहु एक काम करो इसे कमरे मे ले जाओ और रणजीत की शर्ट दिखा दो वो पहन लेगा...

पायल - जी माजी...

मै पायल के पिछे-2 उसके कमरे मे आ गया...

पायल ने अलमीरा को खोल दिया...

पायल - देख लीजिए आपको जो पसंद आये...

मैने देखा की पायल की आंखें मुझे घूर कर देख रही है

मै- आप ही दे दीजिये, जो अच्छी लगे.

पायल ने मुझे एक शर्ट निकाल के दे दी, मै वो शर्ट पहनने लगा. तभी मेरे कानों मे पायल के रोने की आवाज आई...

पायल दूसरी तरफ़ मुँह करके रो रही थीं...

मै- क्या हुआ पायल जी, आप रो क्यों रही है...

पायल - आज आप नहीं होते तो पता नहीं मेरा क्या होता.

मै- कुछ नहीं होता, मै था ना कुछ नहीं होने देता, आप ये सब मत सोचिए

पायल- आपने मुझे नया जीवन दिया है, आपने मेरे लिए चोट खाई, आपने मुझ पर बहुत बड़ा अहसान किया है..

मै उसके पास गया और उसे पानी पिलाया

मै- मैने आप पर कोई अहसान नहीं किया है, ये तो मेरा फर्ज है.

पायल अब कुछ चुप हो गई, उसका सिर नीचे था और मेरी तरफ देखने

मै- अच्छा आप ये समझ लीजिए की मै आपका दोस्त हूँ, ठीक... आप मुझे अपना दोस्त मान सकती है.

वो मेरी तरफ देखने लगी

पायल - आप मुझे अपना दोस्त बना रहे हैं.

मै- हाँ, आप बनेगी?

पायल कुछ नहीं बोली...

मै- नहीं, अच्छा कोई बात नहीं

पायल- नही ये बात नहीं है, यहाँ कोई किसी ने पूछा नहीं है ना इसलिए.

मै जरूर बनुंगी.

मैने अपना हाथ आगे किया और कहा - so we are friends.

पायल - yes

मुझे पायल के मुँह से English सुनकर अंचम्भा नहीं हुआ, क्योंकि वो भी बड़े, पढे लिखे परिवार से है.

मैने पायल से पूछा

मै- आपने कहाँ तक study की है

पायल- मैने कॉमर्स से मास्टर्स की डिग्री (Mcom. )ली है. ********* कॉलेज से.

पायल ने जिस कॉलेज का नाम बताया वो बड़ी कॉलेज है, मतलब ये English medium से है मेरी तरह.

मै- वाह भाभीजी मुझे तो पता नहीं था.

पायल - हम फ्रेंड्स हैं ना तो आप मुझे नाम से बुलाए सबके सामने भाभी बोल लीजिए..

मै- ठीक है

तभी नीचे से ठकुराइन की आवाज आयी तो हम नीचे आ गये... नीचे ठाकुर और ठकुराइन दोनों थे...

ठाकुर - बेटा हम तुम्हें कुछ देना चाहते है, तुम जो चाहो वो मांग लो...

मै- नही ठाकुर ताउजी मुझे कुछ नहीं चाहिए...

ठकुराइन - बेटा मांग लो शरमाओ मत. जो भी चाहिए ये मना नहीं करेंगे..

मै- ताईजी, ताउजी माफ करिएगा पर मुझे कुछ नहीं चाहिए, मैने कोई अहसान नहीं किया है...

ठाकुर - ठीक है बेटा, पर कभी कोई जरूरत हो तो बोल देना

मै- ठीक है, अब मुझे चलना चाहिए...

मै बाहर आ गया..

ठकुराइन (कौशल्या ) - देखिए तो कितना संस्कारी और कितना अच्छा है.

ठाकुर - हा कौशल्या वो तो है, काश हमारा रणजीत भी ऐसा होता...

मै बुलेट लेकर वहाँ से आ गया...

 
अपडेट - 43

मै वहाँ से सीधा घर पर आ गया किसी को भी आज के बारे मे नहीं बताया...

रूम मे आकर मै सो गया...

थोड़ी देर बाद खुशी आ गई और आते ही मेरे उपर लेट गई...

खुशी - आपको चोट कैसे लगी.

मै- मेरी जान मै गिर गया था तो लग गई, पर ये बात किसी के मत बताना, ठीक है

और मै उसके होठों पर किस करने लगा..

खुशी - ठीक है जानू.

मैने उसे ऊपर से नंगा कर दिया और उसके संतरो को दबाने लगा.

खुशी - आआहह.. जानू धीरेे... जानू मुझे आपका वो चुसना है.

मै- क्या चुसना है, ठीक से बोल...

खुशी - आपका लंड

मै- तुम्हारा ही है जो करना है कर लो...

इतना सुनते ही खुशी नीचे आई और मेरे कपड़े निकाल दिए, और मेरे लंड को हाथ मे लेकर चाटने लगी...

फिर उसने अपने मुँह मे ले लिया और चुसने लगी, कोई नहीं कह सकता था कि ये दुसरी बार ऐसा कर रही है...

खुशी किसी रंडी की तरह मेरे लंड को चाटने, चुसने लगी... मेरे लंड ने भी उसका साथ दिया और कुछ देर बाद उसने लावा उगल दिया...

वो सारा माल चट कर गई और लंड पर लगे हुए माल को भी चाट -2 कर साफ कर दिया...

मै- तु तो पुरी एक्सपर्ट हो गई...

फिर मैंने उसको नंगा किया और उसकी चुत पर टूट पड़ा, मै चुत को चाटने लगा और एक उंगली डाल दी जिससे वो चिंहुक पड़ी,

मै उंगली को अंदर बाहर करने लगा... वो ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और झड गई...

मैने उसको बाहर भेज दिया और मै भी फ्रेश होकर बाहर आ गया...

शाम को कुछ खास नहीं हुआ, रात को खाना खाया.

कुछ देर बाद पंकज के पास चला गया, वो मेरा ही इंतजार कर रही थी.

फिर दो बार उसे रगडा़, पंकज को बहुत जल्दी हो रही है मेरे बच्चे को पैदा करने की तो अपना सारा माल उसकी प्यासी चुत मे डाल कर उसे भर दिया...

सुबह उठकर मै तैयार हुआ और नाश्ता करके बाहर निकला गया...

मै छोटे ताउजी के घर की तरफ चला गया... वहां पर ताईजी आंगन मे झाड़ू लगा रही थी, झुकने से घाघरे मे कैद उसकी गांड बड़ी मस्त लग रही थी.

मै- ताईजी बाकी घर वाले कहाँ हैं.

छोटी ताईजी (संतोष )- बेटा राकेश तो कल का ट्रैक्टर लेके गया है और तेरे ताउजी खेत मे है, और तेरी दादी अभी -2 गाँव मे किसी औरत से मिलने गई है शाम तक आयेगी .

मै- तो क्या तुम घर पर अकेली हो.

ताईजी कोई जवाब नहीं देती और मुड के झुक जाती है और अपनी गाण्ड हिलाते हुए झाड़ू लगाने लगती है.

ये देखकर मेरे तन और लंड मे हलचल होने लगी...

मैने पीछे से जाके ताई को अपने बाहों में भर लेता है.

संतोष - आहह रे ज़ालिम उस दिन से तूने मुझे नशा चढ़ा के रखा है,इतने दिनो बाद याद आयी मेरी...

मै दोनों हाथों से ताईजी की चुचियाँ मसलते हुए- मेरी ताई, मेरी जान मेरा भी बहुत मन था तेरी चुत मारने का लेकिन काम था इसलिए, तु चिंता मत कर आज तेरी सारी खुजली मिटा दुंगा. आज इन आमों का सारा रस पीना है मुझे.

संतोष - आआह... तू अंदर जा मै अभी आती हूँ..

मै ताई के कमरे मे आ गया और थोड़ी देर बाद वो भी आ गई...

उसे देखते ही मैने अपनी शर्ट उतार के फ़ेंक दी...

और आगे बढ़ कर ताईजी है को पीछे से पकड़ के उसके घाघरे के ऊपर से अपना लंड उसकी गांड की दरार में घीसने लगा...

जिससे संतोष का पूरा जिस्म काँपने लगता है।

संतोष - आआहह बेटटा.. क्या करता है रे बड़ा बेसब्र है.

मै दोनों हाथों से ताई के चुचे मसलते हुए - तुम हो ही इतनी करारी मेरी जान सब्र ही नहीं हो रहा...

ताई अपनी चुचियों पे मेरे मज़बूत हाथों की पकड़ से और जोश में आने लगती है-

- आहहह... कर ले जो करना है मै तो तेरी ही हूं मेरे राजजजा...

अब सब्र नहीं हो रहा है मै अपने कपडे भी उतारने लगा...

ताईजी भी मेरी आँखों में देखते हुए अपना लहंगा और ब्लाउज उतारने लगती है...

कुछ ही पलों में हम दोनों बिलकुल नंगे हो चुके थे.. आज ताई को भी बहुत जल्दी थी अपनी चुदाई करवाने की.

मै पलंग पर बैठ गया, ताईजी भी अपनी गाण्ड हिलाते हुए मेरे पास आकर बैठ जाती है.

ताई की के मोटे चुतड और चुचे देखकर मेरा लंड झटके मारने लगता है...

दो बड़ी रस मलाई से भरी हुई चूचियां... ऐसा लगता था जैसे इन में दूध ही दूध भरा हुआ है.

मै ताई की नरम चूचियों को पूरे ताकत से दबाने लगा...

एक्सरसाईज और कसरत करने से मेरे हाथ सख्त और मज़बूत हो गये थे...

संतोष - आह... बेटा धीरे करना. निचोड ही डालेगा आआहह...

मैने अपने लंड को ताई के हाथ में थमा दिया...

मै - इसे अपने रसीले मुंह में लेके ज़रा गीला तो करो मेरी जान...

वो कुछ नहीं बोली... वो मेरे लंड को हिलाने लगती है.

मै- ताई मेरी जान मुंह में लो ना...

ताई मेरे लंड को अपने मुंह के पास लाती है- बेटा तेरा ये मुसल बहुत बड़ा है, पिछली बार भी थोड़ा ही लिया था मुश्किल से...

मुझे थोड़ा गुस्सा आ गया, मैने जोर से ताई की चूची मरोड़ दी...

साली चूत में लेने का शौक है और मुंह में लेने को नाटक कर रही है... मुँह मे लेगी तभी तुझे चोदुंगा...

वो अपना मुंह खोलने लगती है और मै लंड को पकड़ के उनके मुंह के पास ले आया...

वो किसी तरह लंड को आधा अपने मुंह में ले लेती है...और धीरे धीरे प्यार से चुसने लगती है...

मै( थोड़ा मसका मारते हुए प्यार से) - आआह शाबाश मेरी रानी... देख तु मेरी ताई नहीं तु तु मेरी रखेल, मेरी जान है... ऐसे ही आहह तेरा मुंह इतना नरम और गरम है...

ताई को भी अब लंड अपने मुंह में आते जाते बड़ा अच्छा लग रहा था, वो बड़े चाव से लंड को अपने मुंह के गहराइयों में लेने लगती है।

मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था, लंड की मोटी मोटी नसें पूरे तरह तन चुकी थी।

मैने लंड को ताई के मुंह से निकाल लिया और ताईजी को अपने सीने से चिपका के उसके मीठे मीठे होंठों को चुसने लगा

मैने ताई की चूत में एक ऊँगली पेल दी और आगे पीछे करने लगा...

 
अपडेट - 44

दो उँगलियाँ एक साथ मिला के उसे ताई की चिपचिपी चूत में घुसा दी और आगे पीछे करने लगा, जिससे वो उछलने लगी...

संतोष - आहह.... ज़ालिम आहह मत तड़पा एक बार चोद दे मुझे, और कितना तड़पाएंगा आहह...चोद ना आआहह...

हम दोनो एक दूसरे के मुंह में मुंह डाले एक दूसरे को चूसने चाटने लगते है...

थूक से दोनों के चेहरे पूरी तरह भीग चुके थे पर जोश अपने पूरे उफान पे था...

मैने ताई जी को बेड पर लेटा दिया...

ताईजी अपनी टाँगें खोल देती है - आहह आजा बेटा देख कैसे पानी छोड रही है तेरे लंड के बिना तेरी ताई की चूत. कितनी तड़प रही है...

ताई की चूत से निकलता पानी इस बात का सुबूत था की वो बहुत गरम हो चुकी है.

मै ताई जी की तरफ बढ़ता हूँ और उसके पैर ऊपर उठाके अपने लंड को उसकी गीली चूत के मुंह पे रख देता हूँ, और लंड को अपने हाथ में पकड़ के उसे चूत के दाने पे घिसता हूँ.

संतोष - आहह घुसा दे मेरे राजा...

मैने अपने लंड को उसके चूत के मुंह पे लगा के एक ज़ोरदार झटका मारा. ये इतना ज़ोरदार धक्का था की लंड पाँच इंच तक अंदर घुस जाता हैं...

जिससे ताई चिखने लगती है, उसकी आँखों मे हल्के आँसू आ जाते है...

संतोष - आहह बेटा तुने तो फाड़ दि मेरी चूत आआह.. तेरा मुसल मेरी मुनिया को चीर रह है धीरे कर थोड़ा... आआहह मममा...

मै- उस दिन भी ऐसे ही कर रही थीं और आज भी. अभी तक तेरी चुत खुली नहीं...

संतोष - आआहह नही बेटा... बहुत समय बाद जा रहा है...

मैने एक झटका ओर मारा मेरा लंड ताई की चुत मे पूरा चला गया..

पता है जो इतनी बुरी तरह चोद रहा है आहह.... माममा...

मै बिना रुके चूत में लंड को आगे पीछे करने लगता हूँ..

लंड के झटको से ताई की चुत इतनी चिकनी हो चुकी थी की हर झटके के साथ फच फच की आवाज़ आने लगी थी...

अब ताई को भी मजा आने लगा था, उसकी गांड हिलने लगती है, वो सिसकियां लेने लगती है.

संतोष - आहह मेरे ज़ालिम राजा आहह चोद ना अपनी रखेल को जोर -2 से. आआहह... फाड़ दे मेरी चूत. मै कल चल भी न पाऊँ ऐसे रगड के चोद दे मुझे राजजजा... आआहहह...

मै काफी देर तक ताईजी को चोदता हू, वो दो बार झड़ जाती है जिससे वो पूरी तरह से थक जाती है..

संतोष (हाँफते हुए )- आहह बस थोड़ा आराम करने दे बेटा... आहह...

मेरा माल निकलने ही वाला था तो मैने 7-8 ताक़तवर झटके अंदर की तरफ मारे और पूरा माल ताई की टाईट चुत मे उगल दिया.

मै भी बैड पर लेट गया.

ताईजी मेरे बाल सहलाते हुए - आज तो मेरी फाड ही दी तुने... बड़ा जानदार है तू

मै- मेरी अभी तो तेरी ये चिकनी गांड भी मारनी है...

संतोष - वहाँ कौन करता है, मै वहां नहीं लुंगी...

मै- सब करते है मेरी जान, बहुत मजा आयेगा.

संतोष - नही, तेरे इस मुसल ने मेरी चुत का क्या हाल कर दिया, ये तो मेरी गांड को फाड़ ही देगा...

मै- कुछ नहीं होगा, आराम से करूगा...

इसे एक बार मुंह में ले के और तैयार कर दो.

ताई भी बहुत चुदासी औरत थी, वो मेरे लंड को मुंह में भर के गलप्प गल्प चुसने लग जाती है.

2-3 मिनट बाद ही मेरा लंड धीरे धीरे टाइट होने लगता है.

मैने ताईजी को घोड़ी बना दिया मेरा इरादा अब गांड मारने का था...

संतोष - ऊपर आ ना...

मै- मुझे गांड मारनी है...

संतोष - नहीं नहीं बेटा ऐसा मत कर... मैंने आज तक वहां नहीं लिया बेटा मर जाएगी तेरी ताई...

मै(कमर पे हलके हलके थप्पड मारते हुए )- तु तो मेरी रखेल है, ह ना. और एक बार लेके देख तू रोज़ लेने लगेगी...

संतोष - हाहाहा... मै तेरी रखेल हूँ आआहह...

मै ताईजी के चुतडो़ पर थप्पड़ ज़्यादा ज़ोर से मारने लगा जिससे उसकी चूतड़ लाल हो गये.

जिससे उसे एक अजीब तरह की खुमारी छाने लगती है...

अब वो मुझे मना तो नहीं कर रही थी...बस सिसकियाँ भर रही थी.

मैने अपनी दो उगलियाँ ताईजी की चूत में डाल के अंदर बाहर करने लगा जिससे वो चिप चीपी हो गई,

मै उंगलियों को पीछे से धीरे धीरे गाण्ड में घूसाने लगा...

संतोष का मुंह और गाण्ड का सुराख़ दौनो खुलते चले गये...

संतोष - आह मत कररर... चूत में डाल दे पूरे दिन खड़ा कर के चूत मार, मै कुछ नहीं बोलूँगी राजा पर गाण्ड में मत डाल आहह...

मै ज़ोर ज़ोर से उंगलियों को अंदर बाहर करने लगा...जिससे उसकी गांड का सुराख़ खुल गया...

संतोष मेरी उँगलियों को अब बर्दाशत कर रही थी...

मैने अपने लंड का सुपाडा संतोष की गाण्ड पर लगा दिया और उँगलियों को बाहर खिंच के लंड अंदर की तरफ पेल दिया...

मेरा मोटा फुला हुआ सुपाडा़ गांड मे फिट हो गया...

संतोष चीख पडती है... उसकी ऑखों में आंसू आ जाते है...

अब रुकना ठीक नहीं था तो मैने एक धक्का मारा जिससे मेरा लंड आधा( 4इंच) अंदर चला गया...

संतोष ताई की गांड बहुत टाईट थी उसने मेरे लंड को कसके जकड़ लिया

संतोष (दर्द मे) - आआआह... ममामा... मरर गई... आआह बेटा रूक जा...

मै कुछ देर रूका रहा और एक हाथ से ताई की चुत मसलने लगा, जिससे संतोष कुछ ठीक हुई...

मैने फिर से एक धक्का मारा और लंड पूरा अंदर ठोक दिया...

वो झटपटाने लगी... मैने उसे जकड़ रखा था, मै कुछ देर शांत रहा फिर

मै धीरे धीरे गाण्ड मारने लगा और उसकी चुत और चुचे मसलने लगा...

मै लगातार धक्के मारने लगा

संतोष ताई को ज़ोर से चीखने वाली आवाज़ अब सिसकियाे मे शामिल हो गई थी वो रोक भी नहीं रही थी बस कमर को आगे पीछे करके आहह माँ...आहह माँ करते हुए हलके हलके सिसक रही थी...

मैरा हर झटका उसे आगे धकेलता वो फिर से कमर हिलाते हुए पीछे को हो जाती...

मैने ताई की कमर को दोनों हाथों में थाम के सटा सट लंड गाण्ड में घुसाने लगा...

मै- आहह बहुत मजा आ रहा है मेरी जान...

संतोष - मेरी जान निकाल दी तुने तो, लगता है गांड फट गई है...

मै- संतोष रानी तेरी चूत से ज़्यादा नरम तो तेरी गाण्ड है... मजा आ गया...

संतोष - ओह आह मार ले आआह...मै सब कुछ तुझे दे चुकी हूँ राजा. अपनी संतोष को भूलना मत आहह...नहीं रह पाऊँगी तेरे लंड के बिना आह...

मै अब जोर जोर से धक्के मारने लगा...

20 मिनट के बाद मैरे लंड ने लावा उगल दिया...

मैने लंड को बाहर खिंच लिया, मेरा लंड संतोष ताई के खून से लतपथ था, उसकी गांड पर खून लगा हुआ था उसका छेद खुल गया था...

मैने अपने लंड को कपडे से साफ़ किया और बैड पर लेट गया.

ताईजी अभी भी उसी तरह बेसुध पड़ी हुई थी उस मे जैसे जान ही नहीं थी उठके कुछ करने की...

मैंने उसे अपने उपर खींच लिया...

मै-क्या हुआ रानी.

संतोष - अब पूछ रहा है क्या हुआ. मेरी हालत खराब कर दी, बहुत दर्द हो रहा है.

मै- तुम मेरे लिए इतना नहीं कर सकती.

संतोष - तेरे लिए कुछ भी कर सकती हू, तभी तो अपनी गांड फड़वा ली...

मै उसके होठों को चुसने लगा, कुछ देर बाद मै खडा हुआ और कपड़े पहन लिये...

फिर ताईजी को एक पेनकीलर दी...

वो कुछ देर आराम करना चाहती थी तो मै उसे छोड़कर बाहर आ गया...

 
अपडेट - 45

वो कुछ देर आराम करना चाहती थी तो मै उसे छोड़कर बाहर आ गया...

वहां से मै बड़े ताऊजी के घर आ गया, वहाँ संगीता भाभी रसोई मे काम कर रही थी...

उसने साड़ी पहन रखी थी, जिसमें उसकी गांड एकदम कसी हुई थी...

मै- भाभी कैसे हो, क्या कर रही हो...

संगीता - कुछ नहीं देवर जी घर का काम कर रही हू, मै तो ठीक ही हूँ... आज भाभी की याद कैसे आई.

मै- मै भुला कब हूँ जो याद आयेगी...

संगीता - भले नहीं तो कभी याद भी कहाँ करते हो...

मै भाभी के पिछे चला गया...

मै-(भाभी से सटते हुए ) - ऐसी कोई बात नहीं है...

मै पिछे से चिपक गया और अपने हाथ उनके गोरे मखमली पेट पर रख दिये,

जिससे उनके मुँह से आआह निकल गई...

मेरा लंड खड़ा होने लगा था जिससे वो उनकी गांड मे चुभने लगा...

मै अपने हाथ धीरे -2 उनके पेट पर फेरने लगा...

मै- भाभी आप बहुत सुंदर हो...

संगीता - अच्छा, सच्ची मे...

मै- हा भाभी...

मैने अपने लंड का दबाव उनकी गांड पर बढ़ा दिया...

संगीता - देवर जी आप भी कम नहीं हो, एकदम लंबे चौड़े, कसरती शरीर, एकदम हैंडसम...

मैने भाभी को कस लिया... और हल्के -2 आगे पीछे होने लगा.. जिससे भाभी भी उतेजित होने लगी...

एक तो देवीलाल भाई के नहीं होने से बहुत दिनों से उनकी चुदाई नहीं हुई थी, दुसरा ये कि भाभी भी अपनी जवानी के दिनों मे रंगीन थी और अब भी है...

मै- थैंक्यू भाभी...और मैने गाल पर किस कर लिया...

संगीता (मन मे) - हाय राहुल का लंड मेरे पिछे चुप रहा है, लगता है ये मुझे देखकर. कितना तो बड़ा लग रहा है...

भाभी ने भी मेरे लंड पर दबाव बना दिया...

संगीता - राहुल मुझे वह बर्तन उतार दो, दूध डालना है उनमे

मैने कोशिश की पर वो आगे रखे हुए थे...

मै- भाभी ज्यादा आगे है हाथ नहीं आ रहे है... एक काम करते है मै आपको उठा लेता हू आप उतार लेना

संगीता - आप उठा लोगे मुझे, इतना दम है आप मे

मै- जम तो बहुत है, आपने अभी देखा कहाँ है...

मैने भाभी की कमर में बाहें ड़ालते हुए उसे ऊपर उठा लिया...

संगीता- आप मे तो बहुत ताकत है...

फिर वो बर्तन उतारने लगी...

उनका पेट मेरे सामने था, मैंने भाभी के नंगे गोरे पेट पर अपने होंठ रख दिए...

"आह्ह" - मेरे होंठ अपने नंगे पेट पर पडते ही भाभी के पूरे जिस्म में करंट के एक झटके की लहर दौड गई

क्या हुआ भाभी - मैने अन्जान बनते हुए कहा...

संगीता ( काबु पाते हुए )- कुछ नहीं, वह एक मकोडा़ था.

मै- भाभी थोडा ख़याल रखो ये कहीं भी घुस जाते हैं...

मै अपने होंठ भाभी के गोरे पेट पर ऊपर से नीचे तक फिराने लगा...

संगीता - राहुल ज़रा यह बर्तन तो लेना

मैने अपना ऊपर किया तो मैंने देखा की - भाभी की साड़ी का पल्लु उनकी चुचियों से नीचे गिरा हुआ था और उसके ब्लाउज से आधि चुचियां नंगी होकर मुझे दिखाई दे रही थी.

भाभी का ब्लाउज गर्मी होने के कारण पूरा भीग चूका था... जिस वजह से उनके ब्लाउज के अंदर की ब्रा बिलकुल साफ़ नज़र आ रही थी...

संगीता - क्या देख रहे हो देवर जी, कभी देखि नहीं क्या

मै- आप सच मे बहुत सुंदर हो...

संगीता - अच्छा जी, आज बहुत सुंदर लग रही हू...

मेरी मदद करिए...

उनके हाथों में बर्तन थे...

उसने बर्तनों को नीचे झुककर नीचे रखते हुए कहा...

मैने डबल मीनिंग मे बोलते हुए कहा - भाभी आपके दूध के बर्तन तो बहुत बड़े और अच्छे है...

संगीता - हा इनमे बहुत ज़्यादा दूध आ जाता है

भाभी के झुकने से उनकी चुचियां मेरे मूह से रगड़ खाने लगी (शायद वो जानबूझकर भी कर रही होगी ).

मैने भी अपने होंठ अपनी भाभी की चुचियों के बने उभार पर रख दिये ।

जिससे उनके मुँह से सिसकी निकल गई - आह्ह्ह्ह हहह

मै मजा ले ही रहा था कि तभी बाहर से ताईजी की आवाज आई...

मैने भाभी को नीचे ऊतार दिया... वो जल्दी से अपनी साड़ी सही करने लगी और मै बाहर आ गया...

शाम को छोटे ताउजी से पता चला कि आज छोटी बुआ बिमला आने वाली है, मुझे उन्हें पास के स्टैंड से लाना है...

*** परिचय

बिमला बुआ (42)- साईज (36D-32-38)

गोरी चिटी, कतिलाना नैन नक्स, बडे-2 ठोस और मोटे चुचे और बडे -2 चुतड. हल्का सा उभरा हुआ मुलायम पेट...

ये मुन्नी की सबसे छोटी संतान है.इस कारण थोड़ी लाडली सी है...थोड़ी नखरे वाली सी है, ये हंसमुख टाईप है.

पति- विनोद (46)

ये सैंकड ग्रेड का टीचर है... ये बहुत ही साधा और शरीफ इंसान है.

इनके एक लड़का और एक लड़की है...

बेटी की शादी हो गई है...

मै जब स्टैंड पर पहुँचा तो बुआ पहले से वहाँ खड़ी इंतजार कर रही थी... बुआ लाल सुट मे एकदम जवान माल लग रही थी...

मैने उनके पास जाकर बाईक रोक दी

बिमला- कितनी लेट कर दी राहुल मै कब से यहाँ खड़ी हूँ

मै- हैलो बुआ, मैने उनके पैर छुए...

बुआ ने मुझे गले लगा लिया, बुआ के मोटे -2 बोबे मेरे सीने मे धंस गये...

मैने बुआ को जोर से कस लिया और उसके मोटे चुचो का आनंद लेने लगा...

बुआ - राहुल धीरे, तुने तो मुझे भींच ही दिया

हम दौनो अलग हो गये, बुआ का दुपट्टा साईड से नीचे गिर गया जिससे उनके मोटे खरबुजे मेरे सामने आ गये...

बुआ के चुचे सुट मे एकदम कसे हुए थे,

वो सुट मे पुरी तरह से समा नहीं रहे थे, जिससे वो सुट से आधे बाहर निकले हुए थे...

मेरी नजर उनसे हट ही नहीं रही थी, मुझे घुरते देखकर...

बुआ- ऐसे क्या देख रहे हो राहुल...

मै- आपको, आप बहुत सुंदर हो...

औरतो को अपनी तारीफ सुनना बहुत अच्छा लगता है, बुआ अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई...

बुआ- सच्ची मे, ओह मेरा बेटा...

और उन्होंने अपने रसीले होठ मेरे गालों पर रख दिये, फिर मैने भी उनके गाल पर एक किस ले लिया

मै उनको घर ले आया, हम छोटे ताउजी के घर पर आ गये...

वहाँ पर सब बैठे हुए थे...

बुआ सब से मिली और फिर बातों का दौर चल पड़ा...मै वहाँ से अपने रूम मे आ गया...
 
* अपडेट - 46

शाम हो गई थी मै वहाँ से अपने रूम मे आ गया...

रात मे खाना खाने छोटे ताउजी के घर चला गया, क्योकि आज संतोष ताई ने खाने के लिए कहा चला गया...

कुछ देर तक हमने बाते की फिर खाना खाने लगे... खाना खाते -2 लाईट चली गई...

गर्मी होने के कारण हल्का -2 पसीना आने लगा...

बिमला बुआ- ओहो... इस लाईट को भी अभी जाना था...

दादी - बहुत बार चली जाती है, अब पता नहीं कब आयेगी...

बिमला बुआ- तो हम क्या करेंगे, सोंयेगे कैसे गर्मी मे...

दादी - ऐसे ही सोना पड़ेगा...

बिमला - नींद कैसे आयेगी...

दादी- क्या कर सकते है बेटी अब. सुमेर बोल रहा था की कुछ दिन मे इनटर लंगायेगे...

बिमला बुआ- इनटर क्या मा...

मै- अरे बुआजी दादी इन्वर्टर की बात कर रही है...

दादी - हा बेटी, मुन्ना के घर तो लगा हुआ है, वहाँ पर हमेशा ही लाईट रहती है... तु एक काम कर रात मे तु वही सो जा राहुल भी है....

बिमला बुआ- हा माँ ये बात सही है, मै वहीं सो जाती हूँ...

मैने खाना खाया और घर आ गया, बुआ कुछ देर बाद आने वाली थी...

मैने रूम मे आकर कपड़े निकाल लिये, अब मै सिर्फ अंडरवीयर मे था,

मै फ्रेश होने वॉशरूम मे चला गया...

कुछ देर बाद मै बाहर आया तो बुआ बेड पर बैठी हुई थी...

वो मेरी तरफ गोर से देखने लगी...

मै- बुआ मै रात को ऐसे ही सोता हू, आपको प्रोब्लम तो नहीं है...

बुआ - नहीं बेटा मुझे कोई दिक्कत नहीं है...

मै और बुआ बेड पर बैठकर बातें करने लगे

बुआ- राहुल तेरी बॉडी तो अच्छी है,

वो मेरे सीने को हाथ लगाकर देखने लगी...

मै- मै रोज एक्सरसाईज करता हू इसलिए...

बुआ- तु रात को ऐसे क्यों सोता है...

मै- रात को कपड़े पहन के सोना अच्छा नहीं लगता... आप ऐसे ही कपड़ों मे सोते हो,

बुआ-नही बेटा मै रात को मैक्सी पहन कर सोती हू... पर वो लायी नहीं...

मै- आपको इनमें नींद आ जायेगी...

बुआ- अजीब तो लग रहे है, पर अब क्या करू

मै- आप एक काम करो आप इनको निकाल दो और अंडगार्मेंटस मे सो जाओ. अभी कोई है भी नहीं...

बुआ को मेरी ये बात सही लगी...

बुआ- बात तो तेरी सही है, अभी कोई है भी नहीं और तेरे से क्या शरमाना.

बुआ ने सलवार और कुर्ता निकाल दिया, जिससे उनके खरबुजे उछल कर बाहर आ गये, वो ब्रा को फाड़ने की पूरी कोशिश कर रहे थे...

बुआ इस समय बहुत हॉट लग रही थी...

बड़े -2 चुचे, बीच मे गोरा उभरा हुआ पेट उस पर गहरी नाभि और बड़ी मखमली गांड...

मेरा लंड टाईट होने लगा...

बिमला बुआ- ऐसे क्या देख रहा है

मै- आपको, बुआ आप बहुत खूबसूरत हो...

बुआ- मै कहाँ, देख मोटी होने लगी हूँ.. चर्बी बढने लगी है...

मै- नहीं बुआ, आप कहाँ मोटी हो,आपकी चर्बी तो सही जगह से ही बढ रहीं है...

मैने बुआ के पेट पर हाथ रख दिये और पेट को सहलाने लगा...

बुआ- बदमाश बुआ के साथ मजाक करता है...

और वो मुझे हल्का -2 मारने लगी... मै उन्हें रोकने लगा और उनके पेट को सहलाने लगा, जिससे वो जोर लगाने लगी...

इस गहरा गहमी मे मै बेड पर गिर गया जिससे बुआ मुझ पर हावी हो गई... और वो मेरे उपर आ गई और मुझे गुदगुदी करने लगी...

मै उन्हें रोकने लगा...

मेरे दिमाग मे एक हरामी आइडिया आया... मै अपने हाथ बुआ की पीठ पर ले गया... और हाथो को ब्रा की स्ट्रिप पर घुमाने लगा...

मै ब्रा के हुक को खोलने लगा... ब्रा कुछ ज्यादा टाईट थी उनके चुचे बड़ी मुश्किल से उसमे आ रहे थे...

मै उन्हे रोकने के बहाने बार-2 कोशिश कर रहा था, आखिरकार मुझे कामयाबी मिली और मैने हुक खोल दिया , बुआ मुझे गुदगुदी कर रही थी, जिस कारण उनको पता नहीं चली...

मैने धीरे से ब्रा उनके कंधो पर सरका दी, और उन्हे जोर से गुदगुदी करने लगा... जिस कारण वो इधर - उधर लगी.

जिससे उनकी ब्रा नीचे मेरे सीने पर गिर गई...

बुआ के मोटे -2 खरबुजे उछल कर बाहर आ गये...

बिमला बुआ - ओहोहो ये कैसे खुल गई

वो सीधी बैठ गई जिससे उनकी गांड मेरे लंड पर टिक गई. वो ब्रा को उपर करने लगी...

मै- खुल गई होगी ऐसे ही, अब खुल ही गई है तो निकाल दो आप अच्छे से सो पाओगे...

मैने भी बनियान निकाल रखी है ना...

बुआ कुछ सोच के- हा सही कह रहा है, अब तो निकल ही गई है, वैसे भी थोड़ा तंग कर रही थी...

मैने बुआ की ब्रा निकाल के साईड मे रख दी...

अब बुआ मेरे सामने उपर से नंगी थी, मै उनकी गौरी और मलाई जैसी चिकनी और मुलायम पीठ पर हाथ फेरने लगा, उसे सहलाने लगा...

जिससे बुआ के शरीर मे झुरझुरी होने लगी...

मै उन्हें सहलाते हुए गुदगुदी करने लगा...

बुआ- अच्छा बच्चु, रूक तु मै बताती हूँ...

बुआ भी मुझे गुदगुदी करने लगी...

मैने बुआ के हाथो को पकड़ लिया, जिससे वो थोड़ा नीचे की तरफ झुक गई, और उनके खरबुजे मेरे मुँह पर आ गये.

उनके बुब्स के निप्पल मेरे होठों से थोड़े से उपर की तरफ थे...

मैने अपनी जीभ निकाल निकाल कर एक निप्पल पर रगड़ दी, जिससे बुआ के मुँह से सिसकारी निकल गई -आआहह...

बुआ कुछ नहीं बोली... वो अब छुटने का प्रयास कर रही थी...

मैने भी कस कर पकड़ लिया

मै- बुआ छुट के तो दिखाओ...

बुआ- रूक, अभी देख... और वो जोर लगाने लगी...

वो हिलने लगी, जिससे उनके चुचे मेरे सीने और मुँह पर घिसने लगे.

मैने भी जोर लगा दिया और बुआ को नीचे कर दिया और धीरे से उनके मोटे चुचे का निप्पल अपने होठों के बीच मे दबा लिया... और उस पर जीभ फिराने लगा...

बुआ- आआयआईईईई... बेटा ये क्या कर रहा है.. आह...

मै नाटक करते हुए - सॉरी बुआ गलती से मेरे मुँह मे आ गये. आपको बुरा लगा माफ करदो...

बुआ- नहीं माफी मत मांग, गलती से हो गया कोई नहीं...

मै- बुआ आपके तो बहुत बड़े है, और सुंदर भी

बिमला बुआ- धत्त् बदमाश कहीं का कुछ भी बोलता है

मै- सच्ची बुआ, मेरा तो मन दूध पिने का कर रहा है...

मै बिल्कुल मासूम बनते हुए - बुआ मै एक बार इन्हें चुम लु

बुआ ने मेरा चेहरा और मासूमियत देखकर कहा - ठीक है करले अपने मन की.

मै- थैंक्यू बुआ...

मैने हाथ से एक चुचे को पकड़ लिया, मेरे दोनो हाथों मे ही समा रहा था वो.

मैने उसे हल्का सा भींच दिया- आआह क्या अहसास था...

मैने उसे पकड़ा और अपने मुँह से लगा दिया... और उसे मुँह मे भर लिया...

बुआ- आआअहह….

मैं चुचे को चूस रहा था और मैने अपना हाथ दूसरे चुचे पर रख दिया...

बुआ के मुँह से सिसकी निकलने लगी... मैने दुसरे बोबे को बिल्कुल हल्के -2 सहलाना शुरू कर दिया...

इसका असर ये हुआ की बुआ के हाथ मेरे बालों पर आ गये, वो उन्हें सहलाने लगी...

बुआ -आआहह….राहुल आआह चुसले बेटा …आआहह….चूवस्ससस बेटा...

मै बुब्स को चुसता और मसलता रहा... बुआ भी मस्ती मे सिसकारी लेकर मज़ा ले रही थी...

तभी बुआ बोली - बस बेटा...

बुआ ऊपर होने की कोशिश करने लगी, मैने बुआ पर हाथ रखकर उन्हें नीचे कर दिया जिससे उनके खरबुजे मेरे सीने मे धंस गये, वो अब मेरे ऊपर लेटे हुई थी...

मैं - बुआ थोड़ी देर और चुसने दो ना प्लीज...

 
* अपडेट - 47

मैं - बुआ थोड़ी देर और चुसने दो ना प्लीज...

मैने अपने दौनो हाथ बुआ के मोटे -2 चुतडो़ पर रख दिये और पेंटी के ऊपर से उन्हें सहलाने लगा...

बुुआ- आआहहह.. राहहहुल...

मै- बुआ आप बहुत ब्यूटीफुल हो, आपका पूरा बदन सुंदर और मस्त है...

मै आपको थोड़ा सा प्यार कर लु

मेरा लंड एकदम हो गया था जो सीधे बुआ की मुनिया पर चोट कर रहा था, साथ मे मेरे हाथ बुआ के चुतडो़ को मसल रहे थे...

बुआ को हल्की -2 खुमारी छाने लगी...

बुआ- पागल... अपनी बुआ को प्यार करेगा

मै- हा, जिसकी बुआ इतनी सुंदर हो वो करेगा ही... बुआ कर लु थोड़ा सा प्यार...

बुआ कुछ नहीं बोली, शायद वो मौन स्वीकृति दे रही थी...

मैने बुआ के चेहरे को हाथों मे लिया, मैने उनके माथे पर किस किया, बुआ ने आँखे बंद कर ली...

फिर मैने अपने होंठ बुआ के गोल मटोल, एकदम मुलायम गाल पर रख दिये और गाल को मुँह मे भरकर चुसने लगा...

मेरे होठ बुआ के गालो को निचोड़ रहे थे, कभी मेरे दाँत चिकनी त्वचा पर घिस रहे थे.

मैने बुआ के गालो का जमकर रस पान किया, जब मै हटा तो देखा की बुआ के गाल लाल हो चुके है...

मै हाथों मे पकड़े हुए बुआ के हसीन चेहरे को देखने लगा...

मुझे शांत देखकर बुआ ने आंखें खोल ली, वो मेरी तरफ देखने लगी...

मै बुआ के चेहरे को मेरी तरफ झुकाने लगा... और मेरे होठों को बुआ को होंठो से मिला दिया, और उनका रसपान करने लगा...

मुझे बुआ के शरीर मे हल्का कंपन महसूस हुआ...

मै करीब 1 मिनट तक बुआ के होंठ चुसता रहा, बुआ कुछ नहीं कर रही थी...

अचानक बुआ को होश आया और वो मेरे से अलग हुई...

बिमला बुआ- राहुल ये क्या कर रहा है बेटा... मै तेरी बुआ हूँ...

मै( थोड़ा सा मस्का मारते हुए )- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मेरा मन आपको प्यार करने का होता है...

बुआ- बेटा ये सब गलत है...

मै- कुछ गलत नहीं है,

बुआ- ये सब गलत हैं राहुल, किसी को पता चला तो क्या होगा, मै तो बदनाम हो जाऊगी...

मै- किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, आपको अच्छा नहीं लग रहा क्या?

बुआ कुछ नहीं बोली

मै- बोलो ना बुआ...

बुआ- अच्छा...... तो तो... लगा पर... ये सब...

(बुआ का मन तो है, लेकिन वो थोड़ा हिचकिचा रही है... अब मुझे ही करना था... )

मैने बुआ को पकड़ा और वैसे ही पलट गया, अब बुआ मेरे नीचे थी और मै ऊपर...

मै नीचे की तरफ झुक गया... हम दोनों का चेहरा बिल्कुल पास था,

बुआ की सांसे तेज चल रही थी, उनकी गरम -2 सासे मेरे चेहरे पर आ रही थी...

मैंने अपने होठ बुआ के होठों पर रख दिये और उन्हें चुमने लगा, मेरे हाथ बुआ के चुचो को मसल रहे थे...

मेरे नीचे का हिस्सा बुआ की टांगों के बीच मे था, जिससे मेरा लंड बुआ की चुत पर टिका था, मेरा लंड बुआ की चुत पर घिस रहा था...

तीन जगह पर हमले से बुआ उत्तेजित होने लगी, बुआ की चुत अब गीली होने लगी थी...

मैने बुआ को किस करता रहा, फिर मैने बुआ के होंठो को आजाद कर दिया...

मै- बुआ मै आपके साथ कोई जबरदस्ती नहीं करूगा, आप कहेगी तभी प्यार करूंगा वरना नहीं करूँगा...

बुआ- तो अभी क्या कर रहा था...

मै- आप बोलो करू प्यार... मै धीरे -2 ऊपर होने लगा...

बुआ ने मेरी बाजुओं को पकड़ लिया...

बुआ- हाय... अरे जालीम क्यों तड़पा रहा है... आग लगा के बीच मे छोड़ रहा है...

मै- कैसी आग...

बुआ- मेरे शरीर की आग,,, क्यू तड़पा रहा है... करले अपनी बुआ को प्यार, जैसे करना है जितना करना है कर ले...

मै बुआ की चुचियों को मसलते हुए - पक्का मुझे जैसे और जितना करना है कर लू...

बुआ-आआआहह... हहहाहा कर ले... जल्दी कर राहुल मेरी इस आग को भुजा दे...

मै बुआ के होंठो को चुमने लगा और साथ मे बोबो को जोर से भींचने लगा

बिमला बुआ- आआहह... आराम से

मैं(बुआ के चुचो को मसल्ते हुए)- इन्हे देखने के बाद कौन कम्बख़्त आराम कर सकता है

बुआ अपने बोबो की तारीफ़ सुन कर शरमा गई…

मै नीचे हुआ, मैने उसी समय 1 चुचे को मुँह मे भर लिया...

बुआ - आआअहह….मममामा...

मैं चुचे को चूस रहा था और दूसरे को हाथ से मसल रहा था…

बुआ - आआहह.....आअक्कययहा चूस्ता है...आआहह... चूस्ससस बेटा...

मैं बूब्स चूस्ता रहा और मसलता रहा...बुआ भी मस्ती मे सिसकारी लेकर मज़ा ले रही थी...

मै चुचो को जोर -2 से चुसने लगा, उन्हें दाँतों से कुरेदने, काटने लगा...

काटने से बुआ के मुंह से दर्द भरी आह निकलने लगी...

बुआ- आआह ममामा... राहुल धीरे कर ना... काट मत जोर से... मैने बुआ की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया...

मै चुचो को छोड़कर नीचे की तरफ आने लगा...

मै बुआ के चर्बी से भरे हुए मखमली पेट जीभ घुमाने लगा, और अपनी जीभ को उनकी गहरी नाभि मे डाल दिया... और चुमने लगा...

बुआ- आआहह राहुल....बहुत अच्छा लग रहा है... कुछ देर तक मै उसे चुमता रहा.

फिर मै बुआ की चुत के पास आ गया...

पेंटी ऊपर से पूरी गिली हो गई, जिस कारण बुआ की कचौरी की फुली हुई दोनों फांके दिख रही थी.

मैने पेंटी को पकड़ कर निकाल दिया, बुआ शरमाने लगी...

शरम के मारे बुआ ने हाथ से चुत को ढक लिया

मैने बुआ के हाथ हटा दिये...

बिमला बुआ की रस से भरी हुई कचौरी जैसी फुली चुत मेरे सामने आ गई...

बुआ की चुत पर छोटे -2 बाल उगे हुए थे...जिसे देखकर मेरे मुँह मे पानी आ गया.

मैं - बुआ क्या मस्त चूत है आपकी,रस से भरी, फुली हुई...

बुआ- ऐसे मत बोल मुझे शरम आ रही है

मै- इसमे शरमाना क्या, पूरी की पूरी नंगी तो मेरे सामने हो...

बुआ- राहुल चुप हो जाना...जो करना है कर ले...

मैने जीभ से चूत को चाट लिया

बुआ- आअहह…बेटा ये क्यया किया..आआहह...

मैं मुँह को चूत पर रख कर चाट ने लगा... बुआ के शरीर मे कंरट सो दौड़ गया...

बुआ- आअहह…आआहह्…आहहह छछछी...

मैं - इसमे छी क्या, बहुत अच्छी जगह ये...तुम तो बस मजे लो मेरी रानी...

बुआ- आअहह…आआहह…..उउउंम्म….

मैने अचानक जीभ को नुकीला करके बुआ की चूत के अंदर डाल दिया और जीभ से चूत को चोदना स्टार्ट किया ऑर बुआ मस्ती मे आके बड़बड़ाने लगी

बुआ - आअहह…ये कक्क्क्यय्य्आ…क्क्कीिईयय्या आआआहह... आइय्यये... तो तेरे फुंफा ने…भी नही…ककक्कीईयय्याअा... आअहह

मैने अपनी स्पीड बढ़ा दी ओर जीभ से चुदाई चालू रखी

बुआ - आआहह…..म्म्म्माज़्जजय् अअआ... गयगगयययाअआ.. अआववीभीइ तत्तकक्कक कक्खहहाआ.. था तततुउउ

बुआ जोर से सिसकियां लेने लगी और मेरे सिर को दबाने लगी, मै मज़े से चूत चुदाई करते हुए बुआ की बाते सुनने लगा...

बुआ - आऐईीइसस्साअ...पता होता...त्त्त्तूओ...कककाब्ब का तेरे.प्प्पाआससस्स...एयाया ज्ज्जात्त्तीइ...आआआहह... उूुुउउम्म्म्मम...आहह...माआईयईईई...

इतना बोलते ही बुआ झड गई ऑर मैं चूत रस पीने लगा जब मैने चूत रस पूरा पी लिया.....

चूत रस पी कर मैं खड़ा होकर बुआ के ऊपर आकर बोला

मैं - मज़ा आया मेरी रानी

मेरे मुँह से रानी सुनकर बुआ मेरी तरफ देखने लगी...

मै- अब तो तुम मेरी रानी हो, हो ना?

आंटी-आअहह…हा मेरे राजा, इतना मज़ा पहली बार आया

मैं-खुश हो ना

आंटी-हाँ बेटा,….आज पहली बार जीभ से चुदि हूँ…खुश कर दिया तूने तो

मैं-अभी तो शुरुआत है…आगे-2 देखते जाओ

बुआ - हां...जल्दी दिखा…अभी इतना मजा आया तो आगे कितना आयेगा...

मैने टाइम ना लेते हुए अपनी अंडरवीयर निकाल दी...मेरा लंड जो पूरा खड़ा था... उछल कर बाहर आ गया...

जैसे ही बुआ ने देखा तो -

बुआ- हे भगवान...ये क्या है... इतना लंबा और मोटा...

मैं- तो आपने क्या समझा था

मैने लंड बुआ के हाथ मे दे दिया वो लंड को हाथ मे लेकर देखने लगी

बुआ - इतना बड़ा कैसे.....क्या ख़ाता है तू

मैं - आपको पसंद आया कि नही

बुआ- बहुत...

मै- बुआ इसे प्यार करो ना... इसे चुमकर, अपने मुँह मे लेकर...

बुआ- मुझसे नहीं होगा, पहले कभी नहीं किया है...

मै- तो आज ले लो,लेके देखो बहुत मजा आयेगा.

मै अपना लंड बुआ के मुँह के पास ले गया, और बुआ के होंठो से लगा दिया...

बुआ मेरे लंड को किस करके मुँह मे ले गई और चूसने लगी...

मैं - आआहह... बुआ...क्कक्या चूस्ति हो...और तेज...हाँ ऐसे ही

कुछ देर तक चुसाने के बाद मैने मुँह से लंड निकाल लिया.

मैने बुआ के पैरो को पकड़ कर उन्हे चौड़ा कर दिया... और लंड को चूत पर सेट करने लगा...

 
* अपडेट - 48

लंड को चूत पर सेट करने लगा...

मै - बुआ...

बिमला बुआ- हा...

मैं - डा़ल दूं...

बुआ- हाँ बेटा जल्दी डाल दे अब बर्दास्त नही होता

मैने लंड चूत के उपर रगड़ते हुए उनकी आखो में देखा...तो वो शरमाने लगी...

बुआ- क्या हुआ बेटा, ऐसे क्या देख रहा है

मैं- आज से आप मेरी रखैल बनोगी

बुआ शरम से नीचे देखने लगी, कुछ नहीं बोली...

मै लंड को चुत पर रगड़ते हुए बोला - बोलो ना बुआ मेरी रखेल, मेरी रानी बनोगी

बुआ(शरमाते हुए) - बना ले ना...

मैं- सच

बुआ - सच मे...आहह...अब डाल भी दे

मैने बुआ को तड़पते हुए फिर कहा - पहले मेरी रखैल की तरह बोलो

बुआ - राहुल मान जा ना...

मैं - पहले रखैल की तरह मिन्नते करो

बुआ- मेरे राजा...अपनी रखेल पर तरस खाओ और मुझे अपनी बना लो...जल्दी

मैने हल्का सा धक्का लगाया तो मेरा लंड चुत की चूत मे चला गया...अभी टोपा ही अंदर गया था

बुआ - आआअहह...

मैने 1 तेज झटका मारा तो 5 इंच लंड चूत के अंदर

बुआ - आआहह...ब्बबाअदददाअ हहाऐईयइ...आअहह

मैं - दर्द हो रहा है बुआ...निकाल लूँ क्या

बुआ - नाआंहही...

मैं - डा़ल दूँ...

बिमला बुआ- आआहहा...

मै- तो ये लो... और मैने बाकी का 3 इंच भी अंदर कर दिया

बुआ को दर्द होने लगा, वो झटपटाने लगी...

बुआ - आआहह...म्म्ममाआआ...आआअहह...म्म्मररर गगाआयई

शायद इनके पति यानि मेरे फुंफा का लंड छोटा होगा...तभी ये चीख पड़ी

बुआ- आअहह...म्म्माअररर दडाल्लला…ररिउउक्क्क ज्जाआ

बुआ की आँखो मे आंसू आ गये थे...

मै बुआ के चुचे मसलने लगा और उनके गले के चुमने लगा...

मैने लंड को धीरे से पीछे लिया और आधे लंड को धीरे -2 अंदर बाहर करने लगा... और दो मिनट तक ऐसे किया...

अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था...

मैने लंड को पीछे लिया ओर आधे से ज़्यादा बाहर करके एक तेज धक्का मारा और लंड पूरा अंदर डाल दिया...

इस शॉट से बुआ का मुँह खुला रह गया और आँखे फटी रह गई

मैने अब तेज़ी से धक्के मारने शुरू कर दिये...

बुआ- आआहह...अहहहह...आउऊह म्म्मारर... ग्ग्ग्गगाऐइ... अर्ररेररूउउउक्क्क.....ज्ज्जाआ...म्म्म...म्म्म्माअररर ददडाल्ल्लला... आआआहह...

मैं - तु मेरी रखेल है...आज तेरी फाड़ डालुगा...

बिमला बुआ - आअहह...ररुउउउक्क्क ज्ज्जजाआाअ

आआहहह....म्म्मा.अररर ग्ग्गाऐइ

बुआ की चुत ने दम तोड़ दिया और वो पानी -2 हो गई,

मै बुआ के चुचो मसलता रहा और साथ मे उसके होंठ चुसने लगा...

मै लगातार धक्के मारता रहा, और बुआ को चोदने लगा...

थोड़ी देर बाद बुआ की चीखे सिसकारियों मे बदल गई...

मैं- बुआ...मज़ा आ रहा है.

बुआ - आअहह.... ककुचल्ल डाललला तततुनने ने त्त्ततो आअहह. फफाआद्डददीए बबेतत्टाआ...अआब्बब ततुउउ... आअहह...

मैं - बुआ मेरी जान...खुश हो

बिमला बुआ - आअहह…तततुउउउ,,,,हहिि म्म्मरीएरररीि कक्चहूवततत ककक्काअ म्म्मा ल्ल्लीक्कककक….आअहह…ऊररर त्तीएज्ज्ज्ज..आअहह…म्म्माएअज़्जज आआ गगग्गययाअ

मैने लंड बाहर निकाला तो मै शॉक्ड हो गया...क्योकि लंड पर खून लगा हुआ था...

मै- ये खुद कैसे आया...

बुआ ने नीचे देखा और बोली - आज असली मर्द से चुदि हूँ ना

इतना बोलते ही मैने उनको घुमाते हुए साथ मे साइड मे बेड पर लेट गया...और बुआ की चूत मे एक झटके मे लंड डाल दिया...

अब मैं, बुआ के साइड मे था ओर मेरा लंड बुआ की चूत में...

मैने बुआ के एक पैर को हाथ से उठाकर धक्के देने स्टार्ट कर दिए...

बुआ - आआहह...म्म्म्माएअआ...

म्मई ग्गऐईयईई...आऐईीइसस्साअ... आआआह...

और बुआ जोर से झटके खाते हुए झडने लगी...

मैं अब और तेज़ी से बुआ को चोदने लगा... रूम मे फच - फच की आवाज़ गूजने लगी...

बुआ- आअहह...आअज्जज...सस्सीए तततुउउ म्मइएरररा... प्पअत्त्त्तीइ...फ्फाड़ दईए... अआब्ब ययेईई ततुउम्महाअररी... आअहह...

पूरा रूम - पूच... पूच... पूचक...पकुहह...थप—थप... आहह... य्ययहहाअ...आअहह

ऐसी आवाज़ो से रूम भर गया

15-20 मिनट की चुदाई मे बुआ फिर से झड गई और मैं भी झड़ने के करीब था...

मैने लंड चूत से बाहर निकाला और बुआ को सीधा कर दिया और लंड को आंटी की चूत मे डाल दिया...

मैं बुआ के बोबो को दबाते हुए हुए प्यार से उनकी चूत मारने लगा...

अगले 5-10 मिनट मैने बुआ के बूब्स को बारी-बारी दबाते हुए चोद रहा था...

बुआ - आअहह...ऊओ..ऊओररर ततेएज्ज्ज... ब्बबीएत्टटाअ... म्म्माउअररर ल्ल्ल्ल्लीए...आअहह ब्ब्बबीएतत्टाअ…म्म्म्मा ऐ आऐईयईईईई...

बोलते ही बुआ झड़ने लगी, साथ मे मेरा भी बाँध टूट गया और मै भी जोर से बुआ की चुत मे झड़ने लगा और बुआ की चूत को भर दिया...

मेै साइड मे बेड का सहारा लेकर अधलेटा सा हो गया, वो वैसे ही बेड पर लेट गई...

करीब 10 मिनट बाद बुआ को होश आया... वो मेरी तरफ देखने लगी...उनका चेहरा ख़ुसी से चमक रहा था...

मैं - क्या बात है बुआ...

बुआ उठकर मेरे पास आकर मेरी गोद मे बैठ गई

वो मुझे किस करके बोली - आज असली सुहागरात हुई है मेरी... आज से मैं तेरी

मैं - हां खून भी निकला था...आपको मजा आया

बुआ- बहुत मजा आया...सच मे सोचा नही था की इतना मजा आयेगा... आज तूने मुझे पहली बार चुदाई का असली मजा चखाया है.

मैं - मैने आपको रुलाया उसके लिए सॉरी

बुआ- स्स्श्ह्ह - ये दर्द तो मैं हमेशा सहना चाहुगी. इतना लंबा ऑर इतना मोटा पहली बार लिया है...

मैने बुआ को एक किस किया...

मैं- तो आप खुश हो, आज से आप मेरी बुआ बाद मे मेरी रानी मेरी रखेल पहले हो..

बुआ - हा मेरे राजा, मेरे बालम आज से मै तुम्हारी रानी हूँ

मैं - मेरी हर बात माननी होगी आप वही करोगी जो मैं कहुगा

बिमला बुआ - हा हर बात मानुंगी...

मै- पक्का

बुआ- हा पक्का, कसम से

मै बुआ को किस करने लगा, वो मेरा पूरा साथ दे रही थी...

रात मे एक बार और मेरी नई रखेल बुआ की चुत की कुटाई की...

फिर हम दौनो थक कर नंगे ही लिपटे हुए सो गये...

 
Hello दोस्तों...

देरी के लिए माफी चाहता हूँ... मैने पहले भी बताया है कि कुछ ऐसी problems है जिस कारण मै अपडेट नहीं कर पाता. आज ही साईट पर आया हू. उम्मीद है कि आप सब समझेंगे जब भी आता हू अपडेट करता हूँ.

आगे से पूरी कोशिश होगी टाईम पर अपडेट करने की...

और आप सब के प्यार & support के लिए धन्यवाद

उन सभी दोस्तों का भी बहुत - बहुत धन्यवाद जो लगातार comment करते है, support करते है

 
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