• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
* अपडेट - 59

मैने जल्दी से उनको नंगा किया और मै भी नंगा हो गया और दादी को बैड पर ले गया...

मै दादी ऊपर आ गया और उनके दोनो खरबूजों को ज़ोर से मसलने लगा...

मुन्नी - आअहह...लल्ला अहयाया... इतने ज़ोर से नही... रज्जाआ...प्यार से सहलाते रहो... सीईईई...ऊहह...

मैने अपने होंठ बोबो पर रख दिये और बारी -2 से चुसने लगा...

मुन्नी - आआहह...सस्स्सिईईईईईईईईईई...रज्जआ...मुझे खूब सारा प्यार दो हहुऊन्न्ं...

चुचो को चुसने के बाद मै नीचे आया... मैने देखा की दादी की चुत पनिया गई है, उससे हल्का -2 रस टपक रहा है...

मैने देर ना करते हुए मुसल दादी की बुढी़ चुत पर सेट किया और एक झटका लगा दिया...

मुन्नी - आहह... धीरीईए...सीईईईईईई... बहुत मोटा है ऊह्ह...

मैंने फिर एक और धक्का मार दिया और मेरा 3/4 लंड उनकी कसी हुई चूत में पेल दिया , इस बार वो कराहने लगी... मै धीरे-2 लंड को अंदर बाहर करने लगा...

दादी की चूत पानी छोड़ रही थी.. मैंने धक्के तेज कर दिए...

मै- आहह... मेरी रानी क्या चुत हैं तेरी... बुढी़ हो गई फिर भी बहुत मजा देती हैं... देख कैसे गीली हो गई हैं...

वो मुझसे पूरी तरह से खुल चुकी थीं तो वो भी पूरा साथ दे रही थी...

वो आह..ससिईहह..आआहह... करके मज़े लेने लगी...

लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया.

मुन्नी (दादी) - ओह्ह्ह... मेरे राजा... तेरा मूसल है ही इतना तगड़ा... देख कितनी ज़ोर से कुटाई कर रहा है...

मै दादी के ऊपर झुक गया और उसके चुचो को चुसने लगा...

दादी के हाथ मेरे सिर पर आ गये... वो जोर -जोर से सिसकियां लेते हुए मेरे बालों को सहलाने लगी...

मै वैसे ही धक्के मारते रहा... मेरे डंडे की मार उनकी रामप्यारी ज़्यादा देर नही झेल पाई और जल्दी ही पानी फेंकने लगी...

मै पलट कर नीचे आ गया... और उन्हें अपने ऊपर खींच लिया...

और होंठ चूसने लगा , और चुचों को मसलने लगा...

मुन्नी - अह्ह्ह्ह.. थोड़ा तो सबर कर... थोड़ा रूक...थक गई हूँ... उम्र हो गई हैं मेरी...

मै - मेरी रानी सब्र नहीं होता हैं... उम्र हो गई पर चुदवाने की इच्छा कम नहीं हुई...

मेरी बात सुनकर वो धीरे से मुस्कुराने लगी...

मैने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को मुट्ठी में जकड़ कर उसे गीली चूत के होठों पर रगड़ने लगा, जिससे वो फिरसे गरम होने लगी...

मै - वाह... क्या चुत हैं मेरी रानी... तेरी बेटियों कि चुत भी ऐसी ही रसीली होगी...

मेरी बात सुनकर दादी मेरी तरफ देखने लगी...

मै बोलते -2 ही लंड डालने लगा... जैसे जैसे लंड अंदर होता जा रहा था...साथ साथ दादी के मूह से हल्की -2 आह, कराहने निकलने लगी... आँखें मूंद गयी थी उनकी...

पूरा लंड अंदर लेने के बाद वो हाँफने सी लगी...

मै - बोल ना मेरी रखेल तेरी बेटियों की भी ऐसी रसीली होगी ना...

मुन्नी - हाइईए...आआहह...कितना बड़ा लंड है तुम्हारा...

उफफफफ्फ़...कितना अंदर तक जाता हैं आआह... वो दोनों तेरी बुआ है...

मै - तो क्या हुआ चुत चुत होती हैं, वैसे तुम भी तो मेरी दादी हो...

मैने उन्हें अपने पर झुका लिया और चुमने लगा... साथ - साथ मैं नीचे से धक्के मारने लगा...

वो जोर -2 से सिसकने लगी... मै कभी उनके चुचो को मसलता तो कभी होंठो को चुसता...

धीरे - धीरे वो फिर से चरम की तरफ बढ़ने लगी... उनकी सिसकियां तेज होने लगी...

मै थोड़ा तेज धक्के मारने लगा... कुछ ही देर मैं मेरी रखेल दादी की चुत पानी बहाने लगी

मै पलट गया और फिर से ऊपर आ गया... और जोर से धक्के लगाने लगा.

कमरे में ठप-ठप की अवजें गूँज रही थी... मै पसीने से भर चुका था...

मैं - आआह मेरी रानी तेरी बेटियों को भी ऐसे ही चोदुंगा... बोल चुदवायेगी ना अपने इस आशिक पोते से अपनी बेटियों को...

मुन्नी - आआहह... ध्ईधीरररे... हा... अगर तु चोदना चाहता है तो चोदना दौनो को उम्म्ह...

मै - आआह... मेरी जान तेरी बहुओं को भी चोदुंगा...

मुन्नी - आआह.. मेरे राजा सब को चोद देना... इस घर की सभी चुतो को फाड़ देना... सब को चोदकर अपनी रखेल बना लेना उऊम्मह..आआहह...

मेरा भी होने वाला था, मैने 20-25 तूफ़ानी धक्के लगा कर उनकी चूत को अपने वीर्य से भर दिया...

और बेड़ पर लेट गया वो झड़ कर आँखें बंद किये हुए लेटी थी...

मै दादी से चिपक गया और उन्हें अपने ऊपर खींच लिया...

मै - कैसा लगा मेरी रानी..मजा आया...

मुन्नी - हर बार पूरा बदन तोड़ के रख देता हैं, मै तेरी तरह जवान थोड़ी हूँ.. बुढी़ हो गई हूँ... दादी हूँ तेरी...

मै - मेरी रानी कंट्रोल ही नहीं होता... बिस्तर पर तुम मेरी दादी नहीं तुम तो मेरी रखेल मेरी रानी हो...दादी तो सबके सामने हो

मुन्नी - हा... यहाँ मै तेरी रखेल हूँ...

वो मेरे बालों को सहलाने लगी...

मुन्नी (माथे को चुमकर ) - तु जादूगर हैं...

मेै उनके आमों को सहलाने लगा...

मुन्नी - सच बोलु तो इता सकुन मुझे और कहीं नही मिलता हैं और ना ही कभी मिला है... जितना तेरे साथ में मिलता है… अब तु ही मेरे लिए सब कुछ है.

मै- दादी

मेरे आगे बोलने से पहले ही - मुन्नी - अभी तो बोल रहा था कि मै यहाँ तेरी रखेल हूँ, अब दादी बोल रहा है... तु मुझे रानी, रखेल ही बोल, तेरे मुँह से सुनना अच्छा लगता हैं...

मै- ठीक है मेरी रानी. ये बताओ तुम अपनी बेटियों, बहुओं को चुदवाओगी मुझसे,

मुन्नी - हा... तु उनको चोदना चाहता है तो चोद दे...

मै - कोई दिक्कत नही है ?

मुन्नी (दादी)- मुझे कोई दिक्कत ना है.

मै- तो तुम मदद करोगी मेरी...

मुन्नी - मेरी तुझे कोई जरूरत नहीं हैं, तेरा ये मुसल है ना... और जो तु कहेगा वो मै कर दुंगी...

मै(चुमते हुए ) - वाह मेरी रखेल रानी...

मैने उन्हें बांहो मे भर लिया, वो भी मेरे सीने पर सिर रखकर मेरे ऊपर लेट गई...

कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे... फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और पहले दादी को बाहर भेज दिया.

वो थोड़ी थक गई थी.

उनके जाने के कुछ देर बाद मै भी बाहर आ गया...
 
* अपडेट - 60

कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे... फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और पहले दादी को बाहर भेज दिया.

वो थोड़ी थक गई थी.

उनके जाने के कुछ देर बाद मै भी बाहर आ गया...

बाहर आया तो देखा कि राजू भाई आये हुए हैं, तो मै उनसे मिलने चला गया...

मै - हैलो भाई जी...

राजु- अरे राहुल..आ भाई, आ जा बैठ.

मै- कैसे हो, छुट्टी पर आये हो...

राजू - हा भाई कल की छुट्टी है तो आ गया, परसो सुबह चला जाऊंगा. तु बता कैसा है.

मै- ठीक हूँ भाई जी... देवीलाल भाई भी आये हैं?

राजू - नहीं, वो नहीं आया. कॉलेज मे उसका कुछ काम था इसलिए वो नहीं आ पाया...

मै - तो आपको काम सैट हो गया...

राजू - हा,एकदम सैट हो गया, सैलरी भी अच्छी है.

मै - तब तो ठीक है... मीनाक्षी भाभी कब आ रहे हैं.

राजू - कुछ दिन रुक कर ही आयेगी. उसके भाई का फोन आया था, उसने बताया की कुछ दिन बाद वो छोड़ जायेगा.

आ जायेगी कौनसा उसके बिना यहाँ काम अटका हैं.

(मुझे उनका तरीका ठीक नहीं लगा, पर मैं कुछ नहीं बोला. )

मैं - ठीक है भाई जी जाता हूँ, आप आराम करिए बाद मे आता हूँ.

राजू - राहुल, चाचा चाची आ गये क्या?

मै - नहीं भाईजी, कुछ दिन में आंयेगे. नानाजी की तबीयत मे थोड़ा ही सुधार हुआ है...

राजू - तो तू रात में यही खाना खा लेना...

मै - ठीक है भाई जी...

उन्हें बाय बोलकर मै वहाँ से बाहर आ गया... बाहर आते ही मुझे पंकज(भाभी) दिखी पशुओं के बाडे़ मे जाते हुए. मै भी खुश होते हुए पीछे चला गया.

अंदर जाते ही मेरे सारे अरमानों पर पानी फिर गया. अंदर रेखा भाभी भी थी. जो चारा काट रही थीं...

रेखा भाभी की नजर मुझ पर पड़ी.

रेखा - अरे देवर जी आप यहाँ क्या कर रहे हैं.

उनकी बात सुनकर पंकज का ध्यान मेरी तरफ गया, वो भी मेरी तरफ देखने लगी.

मै ( मस्का मारते हुए ) - कुछ नहीं भाभी मै तो ऐसे ही आपके पास आ गया.

बोलकर मै वहाँ पर रखी चारपाई पर बैठ गया...

मै - आप क्या कर रही हो भाभी.

रेखा - चारा काट रही हूँ...

मै - आज हाथ से काटने वाली मशीन से क्यों, वो बिजली वाली मशीन को क्या हुआ...

रेखा - मशीन खराब हो गई हैं, आपके भाई को बोला था, पर वो बोले की कल ठीक होगी, इसलिए परेशान हो रहे हैं.

मै - आप परेशान क्यों हो रही हैं, मै हूँ ना... मै आपकी मदद करता हूँ.

मै खड़ा होकर उनके पास आ गया...

पंकज - नहीं आप रहने दीजिये, हम कर लेंगे...

रेखा- हा... आप परेशान ना होईए.

मै- इसमें परेशानी क्या है... आपके लिए इतना भी नहीं कर सकता क्या...

मैने उनको साईड़ मे कर दिया और चारा काटने लगा... वो दौनो पिछे से चारा डालने लगी.

मै स्पीड से मशीन घुमाने लगा और जल्दी जल्दी जल्दी जल्दी जल्दी जल्दी चारा काटने लगा. मैंने जल्दी ही सारा चारा काट दिया...

रेखा- अरे वाह... देवर जी आपने तो कितना जल्दी काट दिया. हम दोनों को तो बहुत टाइम लगता... अगली बार काटना पड़ा तो आपको ही बोलुंगी ( बोलकर वो हँसने लगी ).

मै - बिल्कुल भाभी...

फिर वो दोनों चारा समेटने लगी.

- समेटने के बाद...

रेखा - पंकज तु गाय भैंसो को चारा डाल दे, मैं घर मे जाती हूँ वहाँ संगीता अकेली हैं, और रात के खाने का भी देखना है...

पंकज - जी... आप जाईये, मै यहाँ का काम कर लुंगी...
 
* अपडेट - 61

पंकज - जी... आप जाईये, मै यहाँ का काम कर लुंगी...

रेखा भाभी वहाँ से चली गई... उनके जाते ही मैं पंकज के पास आ गया, और मै भी चारा डालने लगा...

पंकज - ये आप क्या कर रहे हैं.

मै- मेरी रानी की मदद कर रहा हूँ...

पंकज - आप रहने दीजिये मै कर लुंगी... आपने पहले ही इतना काम किया है...

मै - तो क्या हुआ, मेरी जान के लिए कुछ भी...

मेरी बात सुनकर वो शरमाने लगी...

मै- चलो जल्दी सबको चारा डाल देते हैं.

हमने जल्दी सबको चारा डाल दिया,बस एक भैंस बची तो उसे पंकज चारा डालने लगी. मै भी उसके पीछे पशुओं के कमरे मे चला गया...वो चारा डालकर आने लगी, मैने उसे बाहों मे भर कर दीवार से लगा दिया और उसके होंठों पर किस करने लगा.

पंकज ने खुद को मेरी बांहो में ढीला छोड़ दिया, खुद को मुझे समर्पित कर दिया...उसके हाथ मेरे सर पर आ गये, उसकी उंगलियां मेरे सिर को सहलाने लगी...

जब मेरी सांसे फुल गई तब मैने उसके होंठों को आजाद किया... उसकी भी सांस फुल गई थी.

इस समय वो बड़ी प्यारी लग रही थी, मुझे अपनी तरफ देखते पाकर वो शरमा गई, और वो मेरे गले लग गई...मैने भी उसे अपनी बांहों मे भरकर कसके गले लगा लिया.

कुछ देर तक वो ऐसे ही मुझसे लिपटी रही, मैने उसे अलग किया तो देखा कि उसकी आँखों मे हल्के - हल्के आंसू थे.

मै - क्या हुआ... मैने कुछ गलत कर दिया...

पंकज - नहीं.. नहीं... आपने कुछ गलत नहीं किया. ये तो बस ऐसे ही आ गये.

हम बात कर ही रहे थे की बाहर कुछ आवाज आई, हम दोनों जल्दी से बाहर आ गये. मैने पहले पंकज को बाहर भेज दिया ताकि किसी को कुछ शक ना हो, कुछ देर बाद में भी बाहर आ गया.

वहाँ से मै घर आ गया फिर रूम मे आकर नहाने चला गया, जिससे फ्रेश हो जाऊं... फ्रेश होने के बाद कुछ देर टी वी देखा फिर मैं राजू भाई जी के घर चला गया खाना खाने. वहाँ कुछ देर बाते करने के बाद हमने खाना खाया, खाना खाने के बाद कुछ देर रूक कर मैं घर आ गया.

कुछ देर टहलने के बाद मैं सो गया...

जैसा की मैने पहले बताया है कि मुझे सुबह जल्दी ऊठने की आदत हैं, आज भी हमेशा की तरह मैं जल्दी उठ गया...

फ्रेश होकर रनिंग कपडे, शुज वगैरह पहनकर दौड़ने चल पड़ा, इस समय कम ही लोग ऊठे होते हैं.

आज ग्राउंड की तरफ दौड़ने को मन हुआ, तो वहाँ का चक्कर लगा लिया.

ग्राउंड थोड़ी दूरी पर है जिससे टाइम ज्यादा लग गया...

वापिस आकर सीधा छत पर आ गया जहाँ पर सारा जिम का सामान था...

बहुत देर तक जिम मे लगा रहा और जमकर पसीना बहाया.

फिर थककर पसीने में भरा हुआ बाहर आ गया और छत पर टहलने लगा और सुबह के ठंडे मौसम का आनंद लेने लगा...

(जैसा कि पहले बताया गया है कि चारों भाइयों के मकान पास -2 ही है,

सबसे बड़े व सबसे छोटे भाई पुश्तैनी मकान मे रहते हैं, वैसे तो एक है लेकिन राहुल के परिवार ने अपने मकान को अच्छे से रेनोवेट करा लिया है, जिससे उनका घर अच्छा और आस -पास के मकानो से ऊँचा हो गया. और बड़े ताऊजी वाले घर की तरफ हॉल हैं जिसमें कांच लगे हुए हैं और बीच मे बड़ा गेट भी है. पूरे मे पर्दे लगे हुए हैं जिससे privacy बनी रहे. )

घरो मे अब लोग उठ गये थे, और अपने -2 काम मे लग गये थे, हमारे घर के पास में और भी कई घर थे, जो हमारे ही कुनबे के थे. अधिकतर घर हमारी ही बिरादरी के थे.

हमारी छत से सभी के घर दिखते थे, क्योंकि हमारा घर थोड़ा ऊंचा था.

मै टहलते हुए सभी घरो मे देखने लगा. अचानक ही मेरे कदम रूक गये और साथ में मेरी नजरे भी. मैने कुछ ऐसा देख लिया जिससे मुझे रूकना पड़ा.

सामने के नजारे को देखकर मेरे शरीर मे हलचल होने लगी, ये हलचल कहीं और नहीं मेरे ट्रेक पेंट मे होने लगी.

मैने देखा सामने घर में एक औरत नहा रही है... आप समझ सकते हैं कि गाँव मे लोग बाथरूम पर कम ही ध्यान देते हैं, लेकिन उस घर मे बाथरूम तो था, लेकिन उसमे गेट लगा हुआ नहीं था.

पानी मे भीगा हुआ उसका गोरा बदन देख कर मेरे बदन मे झुरझुरी सी होने लगी. उसकी उम्र 23-24 साल लग रही थी. क्या मस्त गोरा बदन था उसका... मेरी तरफ उसकी नंगी पीठ थी,

उसके गोरे मखमली बदन पर बस काले रंग की पेंटी ही थी, जिसमे उसके चिकने चुतड़ कैद थे.

वो मजे मे अपने बदन को रगड़ते हुए नहा रही थी, नहाते -2 वो पलटी जिससे उसका चेहरा मेरी तरफ आ गया, उसे देखते ही मेरे होश उड़ गये...

मै(मन में)- ओ तेरी... ये तो अनिता भाभी हैं...

मै तो भुल गया था कि ये तो परिवार मे एक ताउजी हैं उनका घर है.

( ताउजी और ताई का कहानी में ज्यादा महत्व नहीं हैं, जब इनके बारे मे कुछ होगा तो बता दिया जायेगा..

ताउजी का बेटा - सुरेश

ताउजी की बहु (सुरेश की पत्नी )- अनिता

अनिता एक मस्त औरत हैं, पढी - लिखी भी हैं... हंसमुख टाइप है...
 


पहले तो आप सब से माफी मांगता हूँ, इतने दिन अपडेट नहीं देते के लिए. आप सब तो जानते हैं कि हालात क्या इसका असर सभी पर पड़ रहा हैं, मैं भी थोड़ी प्रॉब्लम मे था. माफी चाहता हूँ...

* अपडेट - 62

अनिता एक मस्त औरत हैं, पढी - लिखी भी हैं... हंसमुख टाइप है...

आगे-

मेरी भी कभी -2 बात हो जाती हैं, हम भी थोड़ा बहुत हँसी मजाक कर लेते हैं. ज्यादा तो नहीं लेकिन मुझसे कुछ खुल गई है...)

जैसे ही वो पलटी मेरे सामने उसका खिला हुआ यौवन आ गया... उसकी बड़ी बड़ी चूचिया मेरे सामने आ गई, उसकी बड़ी - बड़ी चुचियों को देख कर मेरा तो दिमाग़ ही खराब हो गया.

मेरा लंड एकदम टाईट हो गया, मै उसके भीगे हुए मादक बदन का रसपान करने लगा... तभी उसका हाथ पेट के नीचे उसकी कछी के ऊपर गया, हाथ अंदर जाने ही वाला था कि अचानक ही उसकी नज़र मुझ पे पड़ी...

मुझे देखकर वो हडबडा गई, मेरी भी कुछ ऐसी ही हालत थी...

उसने जल्दी से खुद को ढक लिया, मै उसकी तरफ ही देख रहा था वो मेरी ओर देखने लगी...

अब मेरा खड़ा रहना ठीक नहीं था मै जाने लगा. मैने जाते हुए अनिता भाभी की तरफ देखा, ना जाने मुझे ऐसा लगा की उनके चेहरे के भाव अलग हैं... ये भाव मुझे गुस्से के तो नहीं लगे.

मै जल्दी से नीचे आ गया, और बाथरूम में चला गया.

शावर चालु करके नहाने लगा, और लंड को ठंडे पानी से शांत करने लगा.

नहाते हुए अनिता भाभी के बारे मे ही ख्याल आ रहा था.

मै सोचने लगा कि - ये तो पंंगा हो गया, अगर उन्होंने किसी को बता दिया तो गड़बड़ हो जायेगी.

मुझे उनसे बात करनी होगी वरना प्रोब्लम होगी.

लेकिन उनके चेहरे पर एक्सप्रेशन कैसे थे, गुस्से के तो नहीं लग रहें थे, शायद कुछ और थे.

सोचते - सोचते मै नहा कर तैयार हो गया, तैयार होकर बड़े ताऊजी के घर आ गया नाश्ता करने...घर मे कोई दिख नहीं रहा था,

शायद आज मै लेट हो गया जिससे बच्चे स्कूल और बड़े खेत मे चले गये.

मै किचन मे संगीता भाभी के पास चला गया... लेकिन वहाँ पर ताईजी भी थी. मुझे देखकर भाभी के चेहरे पर एक चमक आ गई, जिसे मैंने देख लिया.

भाभी ने मुझे नाश्ता दिया... मैने भाभी की तरफ देखा उनकी आँखों मे

मै नाश्ता लेकर बाहर आ गया,और नाश्ता करने लगा. कुछ देर मे ताईजी भी बाहर आ गई,

ताईजी - संगीता मै खेत मे जा रही हूँ, तु बाकी का काम कर लिये...

संगीता - जी माजी...

बोलकर वो मेरी तरफ देखने लगी...

भाभी मेरे मेरे पास आई और झुककर नाश्ते की प्लेट उठाने लगी... वो कुछ ज्यादा ही झुकी हुई थी जिससे उनके मम्मे कुर्ते से बाहर झांक रहे थे... उनके आधे चुच्चे मेरी आँखों के सामने थे.

मैंने जब उनकी तरफ देखा तो वो मेरी तरफ देखकर हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी.

वो प्लेट लेके रसोई मे चली गई और ताईजी खेत में चली गई,

अब घर में और कोई नहीं था, आज मैने काम पूरा करने का फैसला कर लिया...

और मैं भी रसोई की और चल दिया...

भाभी मेरी और देख के बोली - क्या हुआ कुछ चाहिए आपको...

मै- कुछ चाहिए हो तभी आपके पास आऊ क्या , मै तो मेरी प्यारी भाभी के पास ऐसे ही आ गया...

और इतना बोलकर मैने भाभी को पीछे से अपनी बाहों मे भर लिया और उनसे चिपक के खड़ा हो गया...

मै- और मुझे आपसे कुछ चाहिए हो गया तो मै ले लुंगा, आप मुझे दोगी ना.

मैने उन्हें कस लिया, जिससे उनके मुँह से हल्की सी सिसकी निकल गई...

संगीता (भाभी)- आआहह... हा आप जो मांगेगे मै वो दे दुंगी...

अब हम एकदम चिपके हुए थे , मै अपने हाथों से कुर्ते के ऊपर से ही उनके पेट को सहलाने लगा...और उनके गरम शरीर का मज़ा लेने लगा, मेरा लंड उनके चुतडो की दरार में फंसा हुआ था और गर्मी पाकर धीरे धीरे फूलने लगा...

मै धीरे - धीरे अपने हाथ कुर्ते के अंदर करने लगा, मेरा लंड फुलकर टाईट हो गया जिससे वो भाभी की चुत और गांड के पास दस्तक देने लगा...

मैने हाथ उनके नंगे पेट पर रख दिये और उनके मखमली पेट को सहलाने लगा, जिससे भाभी उतेजित होने लगी, उनकी सांसे भारी होने लगी थी...

भाभी उतेजित हुए बोली कि - ये मेरे पिछे क्या चुभ रहा है...

मै भी मजे लेते हुए बोला - कहाँ पर भाभी...

मुझे लगा वो नहीं बोलेगी, लेकिन आज वो भी कुछ करना चाहती थी...

भाभी - पिछे मेरे चुतडो़ मे...

मै- पता नहीं, आप खुद ही देख लो...

मेरी बात सुनते ही भाभी ने अपना हाथ नीचे किया और मेरे लंड को पकड़ते हुये बोली कि- हाय.. ये क्या हैं (और उन्होंने अपना हाथ हटा लिया )

मैने अपने पजामे और अंडरवीयर को नीचे किया और मुसल को आजाद कर दिया जो लोहे की रोड जैसे तना हुआ था...

मैने भाभी का हाथ पकड़ा और मुसल पर रख कर दबा दिया, जिससे उंगलियां लंड के चारों तरफ आ गई...

मेरा लंड एकदम कड़क हो गया, वो भाभी की मुट्ठी मे मुश्किल से समा रहा था, 2-3 सेकंड तक वो लंड की साईज का अंदाजा लगाती रही, जैसे ही उन्हें लंड की साईज का अहसास हुआ वो आगे खिसक गई और पलट गई...

उनकी नजरे मेरे लंड पर थी...

संगीता भाभी(हैरानी से) - हे भगवान... ये क्या है..इतना बड़ा और मोटा...

मै- क्यों भाभी पंसद नहीं आपको...

मै भाभी के पास गया और उनकी चूत को हाथ से हल्का सा भींच दिया, जिससे उनके मूह से सिसकारी निकल गयी.

वो मुझसे दूर हो गयी...

संगीता - ये क्या कर रहे हो राहुल... मैं भाभी हूँ तुम्हारी, ये गलत हैं.

मुझे पता था कि ये नाटक कर रही हैं, ये भी मेरा लंड लेना चाहती हैं, इसके दो कारण हैं -

पहला तो ये कि देवीलाल भाई नहीं हैं जिससे कई दिनों से इनकी चुदाई नहीं हुई हैं.

दुसरा ये कि जैसा मैने शुरुआत में बताया है कि इन्होंने जवानी मे बहुत गुल खिलाये है, जो किसी को नहीं पता ( मुझे कॉलेज मे दोस्त से पता चला ).

मुझे पता था थोड़े टाइम मे ये भी साथ देगी, मैने आगे बढने का सोचा.

मैं - कुछ गलत नहीं है, मुझे पता है आप भी प्यासी हैं... भाभी मै और मेरा ये अच्छे नहीं लगे आपको...

वो मेरी तरफ देखने लगी...

 


*अपडेट - 63

मैं - कुछ गलत नहीं है, मुझे पता है आप भी प्यासी हैं... भाभी मै और मेरा ये अच्छे नहीं लगे आपको...

वो मेरी तरफ देखने लगी...

मैं भाभी के पास गया और उनसे लिपट गया, फिर मैने उनके होंठो पर होंठ रखे और चूसना शुरू किया कुछ देर मैं किस करता रहा फिर उन्होने किस तोड़ा और मेरी ओर देखने लगी...

लेकिन मै दुबारा किस करने लगा और अपने हाथ उनकी पीठ पर फेरता रहा अब भाभी की साँसे उखड़ने लगी थी मेरे हाथ उनकी गोलमटोल सुडोल छातियों पे पहुँच गये थे जैसे ही मैने उनकी चूचियो को हल्का सा दबाया भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया...

मै- भाभी क्या हुआ...

संगीता -अगर किसी को मालूम हो गया तो...

मुझे पता था कि वो नाटक कर रही हैं...

मै- किसी को पता नहीं चलेगा... आप बस मजे लो.

मेरे हाथ उनकी चूचियो पर कस गये, और उन्हें भींचने लगे, उनके मूह से एक हल्की -2 सिसकारी निकलने लगी...

मैंने उन्हें गोद मे उठा लिया, और उनके कमरे की तरफ चल पड़ा...

संगीता - कहाँ ले जा रहे हो राहुल...

मैं - सब्र करो भाभी बड़ी जल्दी है चुदने की...

कमरे मे आते ही मेने उन्हें नीचे उतार दिया...

उतरते ही वो मेरे पास आई और मुझे किस करने लगी. मै भी किस करने लगा. कई देर तक हम किस करते रहें...

मै- लगता है बहुत आग लगी हैं भाभी, बहुत प्यासी हो...

संगीता - हा देवर जी, मेरी सारी प्यास मिटा दो... मैं भी बहुत दिनों से आपसे चुदना चाहती थी...

मै- तो बोली क्यों नहीं

संगीता - मै कैसे बोलती, बहुत मन था मेरा...

मै - देवीलाल भाईजी नहीं करते

संगीता - वो क्या करेंगे, कभी -2 करते हैं और मुझे प्यासा ही छोड़ देते हैं, उनका तो इससे आधा है...

अब भाभी पूरी खुल गई थी,खुलकर बाते कर रही थीं... एक बात थी अभी तक इतना खुलकर ओरो ने बात नहीं की, शायद तभी भाभी ने जवानी मे मजे लिये है...

मैने जल्दी से भाभी का कुर्ता निकाल दिया और ब्रा के उपर से ही चुचों को मसल्ने लगा फिर मैने ब्रा को भी उतार दिया और एक चूची को अपने मूह मे भर कर चूसने लगा और दूसरी को अपने हाथ से मसल्ने लगा जैसे जैसे भाभी की निप्पल को चूस्ता गया उनके मूह से - ऊउफ्फफ आआहह हीईीईई जैसी आवाज़े हल्के हल्के निकलने लगी.

मैं बारी - बारी से दोनों चुचियो को पीता रहा अब भाभी की आँखो मे खुमारी छाने लगी थी.

मैने भाभी क़ी सलवार का नाडा खींच दिया जैसे ही वो नीचे गिरा मेरी अाँखे खुशी से चमक उठी उन्होने पेंटी नही पहनी थी...

मै - पेंटी क्यो नहीं पहन रखी...

संगीता - मुझे पता था कि आप आंयेगे और मेरे पिछे खड़े होकर...

मै- बडी़ चालु हो आप...

वो पूर्ण रूप से नंगी मेरे सामने खड़ी थी... मेरी नज़रे उनकी चूत पर ही थी...हल्के काले काले बालों से ढकी हुई हल्की लाल लाल सी चूत.

चुत को देख कर मेरा लंड बेकाबू होने लगा...

अब रुकना मुश्किल था मैने अपने सारे कपड़े उतार दिए.

मैने भाभी को लिटा दिया और उनके बदन को चूमना शुरू कर दिया. मैने एक हाथ उनकी चूत पे रख दिया और उसको सहलाने लगा जैसे ही मेरी उंगलिया उनकी चुत से टकराई उनकी आँखे मस्ती से बोझिल होने लगी...

मै चुत के पास आया और अपना मूह उनकी गदराई चूत पे रख दिया और उसको अपने मूह मे भर लिया जैसे ही मैने ऐसा किया भाभी की सिसकारियो से कमरा गूँज उठा.

भाभी ने अपने हाथ मेरे सिर पे रख दिए और मेरे सर को अपनी चूत पे दबाते हुए बोली " मेरे राजा पी जा आज से मैं तेरी हो गई - आआह अहहाअ उफफ ओह...

मैं भी पूरे जोश मे उनकी चूत चाट रहा था, वो बहुत दिनो से प्यासी थी जिस कारण जल्दी ही उनका पूरा बदन अकड़ गया और वो काँपते हुए लंबी लंबी साँसे लेने लगी उनकी चूत से बहुत सारा रस निकलने लगा... मैने अपना मुँह चुत पर लगाये रखा और सारा रस पी गया. भाभी बेड पे निढाल से पड़ गयी

मै भाभी के साथ लेट गया और उनसे लिपट ते हुए बोला - भाभी जान आप भी मेरे लंड को प्यार करो ना...

संगीता - अभी मै तुम्हारी भाभी नहीं हूँ, मुझे सिर्फ संगीता बोलो...

मै - तुम तो मेरी रानी हो...

संगीता - हां मेरे राजा...

वो लंड के पास आ गई और मेरे लंड को सहलाते हुए बोली - कितना लंबा और मोटा है...

वो नीचे झुक गई और मेरे लंड के सुपाडे पर जीभ फेरने लगी..फिर उन्होने मेरे लंड को मुँह मे भर लिया और चूसने लगी, मेरे मुँह से तो मस्ती मे आंनदमयी आआह निकलने लगी...

कुछ देर चुसने के बाद वो अलग हुई...

 


* अपडेट - 64

कुछ देर चुसने के बाद वो अलग हुई...

संगीता - वाह... ये अभी तक नहीं झड़ा, उनका तो इतने समय मे कब का ही...

मै - मेरी रानी ये ऐसे नहीं झडे़गा...

बोलकर मैने उनको बिस्तर पे लिटा दिया और उनके उपर आ गया और उनके होंठो का रस पीने लगा आग दोनो तरफ बराबर की लगी थी...

लंड चूत पर रगड़ खा रहा था, संगीता से अब सहन नहीं हो रहा था...

संगीता - अब देर मत करो घुसा दो...

मैने हल्का सा धक्का मारा तो लंड दो इंच चूत मे चला गया... उनके मूह से आआअहह की आवाज़ निकल गयी...

संगीता - आआहह... आराम से बहुत मोटा है...

मैने एक झटका मारा और आधा लंड अंदर डाल दिया...

उनके मुँह से हल्की सी चीख निकल गईं...

मैने उसके होंठो को चुसने लगा और एक तगडा धक्का मारा और मेरा लंड पूरा उनकी मस्त चूत मे घुस गया...

वो हल्के से झटपटाने लगी उसकी आवाज मेरे मुँह मे ही दब गई, उन्होने अपनी आँखे बंद करली.

उनकी आँखों के किनारों से आंसू की कुछ बूंदें बाहर आ गई. मैने हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए... और धीरे धीरे उसके चुचो को मसलने लगा...

थोड़ी देर मैं वो भी सहज होने लगी और आनंद लेने लगी...

संगीता - आआह... हा.. हा.. ऐसे ही. उऊम्मह...

भाभी ने अपनी जांघे मेरी कमर पर लिपेट दी और बोली शाबाश ऐसे ही लगे रहो... कुछ ही देर मे उनका बदन फिर ऐंठ गया और वो झडने लगी...

संगीता - आआआह... मेरे राजा मै गइई...

मैने एक दूसरे के होंठो को जोड़ लिया और चुसने लगा... मैं खुल कर मजे मे तगडे़ धक्के मारने लगा.

संगीता - उहह... आआहह जोर्ररर.. से आआह इतना मजा कभी नहीं आइअ्यया...

मै भी बस झड़ने की कगार पर था... मै जोर -2 से धक्के मारने लगा... 15-20 धक्को बाद मुझे मेरे शरीर मे तनाव महसूस होने लगा... और संगीता भाभी के मादक बदन से चिपकते हुए मैंने अपना वीर्य उनकी चूत मे छोड़ दिया, साथ मे वो भी तीसरी बार झड़ गई...

संगीता भाभी की सांसे तेज चल रही थी और मजे मे उनकी आँखें बंद हो गई, 2-3 मिनट बाद उन्होंने अपनी आँखें खोली और वो मेरी ओर देख के मुस्कुराई और मेरे गाल को चूम लिया...

मैं - कैसा लगा... मजा आया.

संगीता - मजा... बहुत ज्यादा मजा आया...हवा मे उड़ने लगी थी मै तो...

मै - अच्छा..! मैने जब डाला तो दर्द मे आवाज क्यूँ निकाल रही थी और तुम्हारी आँखों मे पानी कैसे आया...

संगीता(लंड को पकड़कर सहलाते हुए ) - मेरे राजा..तुम्हारा हथियार हैं ही इतना तगड़ा की किसी की भी चीखे निकलवा दे. और आँसू तो आयेंगे ही जब तुम्हारा ये घोड़े जैसा लंड अंदर जायेगा...

मैंने भाभी को अपने ऊपर खींच लिया और उसका रस पान करने लगा...

वो पूरी तरह से मेरे ऊपर आ गई जिससे उसकी चुत मेरे लंड के ऊपर आ गई...

मै - मेरी जान इतने साल हो गये चुदवाते हुए अभी तक तुम्हारी चुत खुली नहीं, और तुमने एक बच्चे को भी जन्म दिया है...

संगीता - अरे मेरे भोले राजा तुम्हारे भाई का तुम्हारे से तो आधा ही है,और माँ बने हुए मुझे 15-16 साल हो गई, अब तो ये सही हो गई हैं.

और तुम्हारे हथियार ने तो मेरी हालत खराब कर दी, ये तो मेरे पेट तक मार रहा था, ऐसा लग रहा था कि ये मेरी बच्चेदानी को फाड़ ही देगा.

मेरे होंठ उसकी गर्दन पर आ गये थे, मै उसकी गर्दन को जीभ से चाटने लगा, साथ साथ मे चुमते हुए दाँतों से हल्का - हल्का काटने लगा...

मस्ती मे उसके मुँह से सिसकारीया निकलने लगी...

मै-अब टेंशन मत लो मै हूँ ना... अब तुम्हारी इस रसीली चुत को पूरा उधेड़ दुंगा.

 
# अपडेट - 65

मै-अब टेंशन मत लो मै हूँ ना... अब तुम्हारी इस रसीली चुत को पूरा उधेड़ दुंगा.

आगे -

मैने उसके कान को दांतों मे दबा लिया और उसे जीभ से कुरेदने लगा. साथ साथ मे उसे होंठो मे भींच कर चुसने लगा.

मेरे ऐसा करने से वो मदहोश होने लगी.

वो अपनी चुत को जोर - जोर मेरे लंड पर रगड़ने लगी और जोर जोर से मदहोश आंहे भरने लगी.

संगीता - उऊंह..आआहह..ह्अ्आहहा..मेरे राजा इस निगेडी़ को पुरा फाड़ दअ्ओ.. आइईह्ह... अपने हथियार से इसे रगड़ डालो बहुत तंग करती हैं...

उसकी चुत की गर्मी से मेरा लंड तन गया और चुत पर ठोकर मारने लगा...

भाभी की सिसकियां बढ़ने लगी, वो जोर जोर से बड़बड़ाने लगी.

संगीता - उऊम्मह.. आआआहह... राज्ज्अहहा... ये क्या कर दिया...इतना मजा कभी नहीं अअअअ...

अपनी बात पूरी करने से पहले ही उसका शरीर झटके खाने लगा, उसके हाथ मेरी बाजुओं पर कस गये... वो झड़ने लगी..और अपने पानी से मेरे मुसल को भिगोने लगी.

भाभी मे कुछ ज्यादा ही गर्मी थी तभी वो इतना झड़ गई.

10 सैंकड बाद उनका शरीर शांत पड़ गया. वो मेरे सीने पर सो चिपक कर सो गई. उनके मुँह से गर्म सांसे निकल रही थी जो मेरे सीने पर पड़ रही थीं.

मैने उन्हें बेड़ पर लेटा दिया.. मै खड़ा होकर बाहर बाथरूम मे चला गया. वहाँ पर खुद को साफ किया और कपड़े पहन कर आ गया.

वापिस आया तो देखा वो अभी भी लेटी हुई थी. मै उनके पास आकर बैठ गया.

मैंने दो उँगली उनकी चुत मे डाल दी, अचानक हुए इस हमले से वो हड़बडाकर ऊठ गई. और मेरी तरफ देखने लगी. मेरी आँखे उनकी तरफ ही थी...

मैंने उंगलियां बाहर निकालकर मुँह मे डाल ली और चुत का नमकीन पानी टेस्ट करने लगा... मुझे ऐसा करते देखकर वो हल्का सा शरमाई...

मै- बहुत देर हो गई है, जल्दी से खड़ी हो जाओ. कोई भी आ सकता हैं.

वो हल्का सा उठी और मेरे गले लग गई. मैने भी भाभी को बांहों मे भर लिया.

अब वो नंगी ही मेरी गोद मे बैठी थीं मुझे जकड़े हुए...

संगीता - बहुत मजा आया...मैं ये कभी नहीं भुल सकती

इतना मजा मुझे कभी नहीं आया, बहुत खुश हूँ आज मैं

मै- मेरी रानी मुझे भी बहुत मजा आया तुम्हारी चुत मारने मे...अब तो इसे पूरा फाड दुंगा...

संगीता - मेरे राजा अब तो ये तुम्हारी है, अपने हथियार से रोज कुटाई करना...

मैंने उसे कस लिया और बोला - बस ये ही मेरी है?

संगीता - आआह... मैं भी तुम्हारी ही हूँ. मेरा तन, मन सब तुम्हारा है मेरे राजा...हमेशा मुझे ऐसे प्यार करोगे ना?

मै- हा... अब तो ये चुत मेरी है जब मन करेगा तब मारूंगा... पर मेरी शर्त हैं...

संगीता - कैसी शर्त...

मैं - तुम्हें हमेशा मेरी बात माननी होगी और मैं जो कहूंगा वो करना होगा, तभी ये रिश्ता रहेगा.

संगीता - मुझे तुम्हारी हर शर्त मंजूर हैं. तुम हमेशा मेरा और इसका (चुत) ख्याल रखना...

मै- पक्का.. सोच लो...

संगीता - पक्का

उसकी बात सुनते ही मैंने उसके होंठो को दबोच लिया और किस करने लगा... हम दोनों एक - दूसरे के होंठो को निचोड़ रहे थे. 4-5 मिनट बाद हम अलग हुए...

मै- अब आप कपडे पहन लो, कोई भी आ सकता हैं...

मेरी बात सुनकर वो खडी होकर अपने कपड़े लेने लगी... जैसे ही भाभी ने कदम रखा तो उनके पैर डगमगा गये, और मुँह से दर्द भरी आह निकल गई...

मैने उनको संभाला और बेड पर बैठा दिया.

मै- क्या हुआ...

संगीता - खुद ही ऐसी हालत करते हो ओर पूछते हो...

अपने इस मुसल से मेरी चुत फाड़ कर रख दी...अंदर तक खुल गई हैं दर्द तो होगा ही...

मै- मेरी रानी अब तो इसे ऐसे ही फांडुगा...

संगीता - आज तक इतनी एक साथ कभी नहीं झड़ी जितना अभी झड़ी हूँ , पैरों मे तो जान ही नहीं बची हैं...

मैं - टेंशन ना तो लो जान, मै बाथरूम तक छोड़ देता हूँ...

फिर मैंने उन्हें गोद मे उठाकर बाथरूम मे छोड़ा और एक किस करके वहाँ से बाहर आ गया...

मै सीधा घर आ गया...

दिमाग मे बार -2 सुबह वाली बात ही आ रही थी.

मेरा अनीता भाभी से बात करना जरूरी था, उनको सब समझाना था.क्योंकि अगर उन्होंने किसी को कुछ भी बता दिया या मेरी शिकायत कर दी तो गड़बड़ हो जायेगी.

मुझे जल्दी ही उनसे बात करनी थी...

और उनसे बात करने का शायद ये सबसे सही समय हैं, क्योंकि इस समय वो घर पर अकेली ही होगी.

क्योंकि ताई और ताउजी इस समय खेत मे गये होंगे और सुरेश भाई तो अपनी ड्यूटी पर हैं वो तो महिने मे एक दो बार आते हैं.

तो भाभी अकेली ही होगी...

मै जल्दी से बाहर आया और उनके घर चल पड़ा, 1-2 मिनट मे मै उनके घर पहुँच गया.

मै गेट से अंदर चला गया... भाभी अंदर थी.

मुझे देखकर वो बोली - अरे राहुल आप...आईये बैठिए

भाभी गुस्से मे तो नहीं लग रही थी...

मै उनके पास मे बैठ गया... वो अकेली ही थी.

मै इधर उधर की बात करने लगा...

पर मुझे सुबह वाली बात क्लियर करनी थी...
#
 


# अपडेट - 66

पर मुझे सुबह वाली बात क्लियर करनी थी...

फिर मैं बोला - भाभी सुबह के लिए सॉरी... उसमे मेरी कोई गलती नहीं थी, वो सब अचानक से हो गया...

मेरी बात सुनकर वो बोली - अच्छा तो किसकी गलती थी

मै- भाभी वो सब अचानक ही हो गया.. सॉरी

मेरी बात सुनकर वो हल्का सा मुस्कुराई और बोली - कोई बात नहीं हो जाता है ऐसा

मै - आप नाराज तो नहीं हैं ना

अनिता - नहीं तो

उनकी आँखों मे गुस्सा नहीं था बल्कि कुछ और था

मै- एक बात बोलु भाभी... आप बहुत सुंदर हो

अनिता - क्या...कुछ भी बोलते हो...

मै- सच्ची भाभी आप एकदम हॉट एण्ड सेक्सी हो...

अनिता - धत्त्.. क्या बोल रहे हो... भाभी के बोरे मे बोलते हुए शरम नहीं आती...

भाभी के चेहरे पर गुस्सा नहीं था, हल्की -2 मुस्कान थी... अपनी तारीफ से वो खुश हो रही थी...

मैंने थोड़ा आगे बढ़ने की सोची...

मै- इसमें शरम कैसी.. मै तो सच ही बोल रहा हूँ...

मै उनके पास खिसक गया और मैने उसको पकड़ लिया और उनको चुमने लगा... वो एकदम से पीछे हुई और मेरी ओर देखने लगी...

मैने बिना देर किए बोला - आप बहुत सुंदर हो... आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो...

और मैंने उनको गले लगा लिया, 5-7 सैंकड वो अलग हो गई...

और बोली - नहीं.. ये सब सही नहीं हैं, ये गलत हैं.

मै- भाभी आप मुझे बहुत पसंद हो...

वो बोली - तुम अभी जाओ यहां से... क्योंकि उसके सास - ससुर आने वाले थे...

फिर मैं वहाँ से आ गया... रास्ते मे मुझे ताई और ताउजी आते हुए दिखाई दिये... अच्छा हुआ कि मैं जल्दी आ गया.

वहां से सीधा खेतों की तरफ चल पड़ा... खेत मे पहुँचकर कुछ देर खेत का निरिक्षण किया, फिर मै खाली जमीन की तरफ चल पड़ा...जहाँ पर दादा ने पैसे & गहने रखे थे, जो अब मेरे थे...

वहां पहुँचकर मैंने चारों तरफ निगाह दौडाई की कहीं कोई देख तो नहीं रहा...आस पास कोई नहीं था.

मैंने मिट्टी खोदकर एक बक्सा बाहर निकाल लिया और उसमे से पैसे निकाल लिये और उसे वापिस वैसे ही रख दिया...

फावड़े को भी वही पर साईड़ मे ही छुपा दिया...

पैसों को जेब मे डालकर मे घर तरफ आने लगा... थोड़ा आगे आया तो जोर जोर से बोलने चिलाने की आवाज आ रही थी...

ये आवाज कर्ण सिंह ताउजी की थी और ये उनके खेत से आ रही थी...

उनकी आवाज सुनकर मैं उनकी तरफ चल पड़ा, कि कुछ प्रोब्लम हो सकती हैं...

वहाँ पर जाकर देखा कि वो खेत मे बने कमरे के बाहर चारपाई पर बैठे हैं और पास मे ताईजी भी खड़ी हैं...

वो ताईजी पर चिल्ला रहे हैं, उनको गंदी - गंदी गालियां दे रहे हैं... ताउजी ने शराब पी रखी थी...

कर्ण सिंह - साली कुत्ती..तु होती कौन हैं मुझे रोकने वाली. मै तो पिउंगा... मेरे पैसो की पीता हूँ तेरे बाप के नहीं.

कमला ताई- उम्र होगी है अब तो रूक जाओ.. बहुत दिन पिली, पोतो हो रो है अब तो रूक जाओ...

कर्ण सिंह - साली भैनचोद कूती...

ताउजी खडे हुए और ताईजी को मारने लगे और बोलने लगे की - मै तो पिउंगो. कोनी रूकु कर वो करले...

मै जल्दी से उनके पास गया और ताउजी को हटाया...

मै- ये आप क्या कर रहे हैं ताऊजी... ताईजी को क्यों मार रहे हैं...

कर्ण सिंह - आ साली म न रोक री है...

मै- सही तो बोल रहे है ताईजी... अब तो बंद कर देनी चाहिए...

कर्ण सिंह - तु भी इक साथ म ही हैं... कोनी छोडु मै पिंउगो...

इतना बोलकर वो वहाँ से घर की तरफ जाने लगे.. मैंने उनको रोकना ठीक नहीं समझा...

उनके जाने के बाद मैंने देखा कि ताईजी नीचे बैठी हुई हैं उनकी आँखों मे हल्के आंसू हैं...

मै उनके पास गया...

मै- क्या हुआ ताईजी...

कमला - बेटा मैने कुछ गलत बोला था क्या... इस दारू ने सब खराब कर दिया हैं... मेरी तो आज तक पूरी जिंदगी खराब हुई हैं...

मै उनको उठाते हुए - आप चिंता मत किए सब ठीक हो जायेगा... ताऊजी समझ जायेंगे...

कमला - मैं भी कब से ये ही आस लगाये बैठी हूँ... सोचा था कि टाबर बड़ा होंगा तब सुधर जायेंगा, लेकिन बेटे बेटियों के भी बच्चे हो गये पर ये नहीं सुधरे...

उनकी आँखें नम थी... मै उनको दिलासा देने लगा. मै बिल्कुल उनके पास था...

मै उनको समझाने लगा, वो भावुक होकर मेरे गले लग गई, मैने भी उनको गले लगा लिया..

मेरे हाथ उनकी पीठ पर थे. उनके मुलायम चुचे दोनों के बीच मे दब गये...

जिससे मेरा लंड गरम होने लगा...

हम जल्दी ही अलग हो गये...

मै और ताईजी घर कि और चल पड़े... उनके सिर पर चारे की गठरी थी, वो मेरे आगे थी और मैं पिछे था... उनकी बड़ी गांड मेरे आँखों के सामने उछल रही थी...

घर आकर वो बाडे़ मे चली गई , उनको छोड़कर मैं घर की तरफ आ गया...

फिर पूरे दिन कुछ खास नहीं हुआ.

शाम को कुलदीप का फोन आ गया तो पैदल मैदान की तरफ चला गया.

वापिस आते अंधेरा हो गया. मै घर के अंदर जा रहा था तो देखा की रेखा भाभी घर को तरफ जा रही हैं और पंकज बाडे़ की तरफ.
 


अपडेट - 67

मै घर के अंदर जा रहा था तो देखा की रेखा भाभी घर को तरफ जा रही हैं और पंकज बाडे़ की तरफ.

सूरज ढल गया था तो अंधेरा हो गया था, आस पास कोई नहीं था.

मैंने इस मौके को भुनाने की सोची और बाडे़ की और चल पड़ा.

मैं अंदर गया तो देखा पंकज अंदर कमरे मे थी. मैं धीरे से कमरे मे गया, मेरी तरफ पीठ किये हुए वो काम कर रही थी.

मै एकदम पास चला गया तभी वो मेरी तरफ पलटी मैंने बिना देर किये हुए उन्हें दबोच लिया और बांहों मे भर लिया.

उसकी चूचियां मेरे सीने में धँस गईं... वो एक पल के लिए तो चौंक गई, पर मुझे देखकर वो शांत हो गई...

पंकज - आह्ह..ओह.. क्या कर रहे है.. छोड़ीए मुझे..

वो बोल तो रही थी पर बातों मे वो विरोध नहीं था, वो अलग हट भी नहीं रही थीं.

मैने हाथ पीछे ले जाकर पंकज के चुतडो़ को अपनी हथेलयों में भर लिया था, जिससे उनके मुँह से सिसकी निकल गई और वो मुझसे चिपक गई...

उसके बदन से आ रही खुशबू से मैं उतेजित होने लगा..

मेरे लंड ने पजामे में तंबू बना लिया था जो सीधा पंकज के लहँगे के ऊपर से उसकी चूत पर चोट कर रहा था.

पंकज - आहह.. छोड़ो ना कोई आ जाएगा.

मैंने पंकज के सिर को पकड़ा और अपने होंठ उसके रसीले होंठो पर रख दिये और चुमने लगा...

एक मिनट तक मैं होंठो को चुसता रहा फिर मेैं अलग हुआ...

वो मेरी तरफ देखने लगी... उसकी चूचियाँ तेज सांस लेने से ऊपर-नीचे हो रही थीं

मैं - छोड़ दूँ रानी...

पंकज - नहीं... इतना बोलकर उसने भी मुझे बांहो मे भर लिया

पंकज - पहले तड़पाते हो और फिर ऐसा...

उसकी बात पूरी होने से पहले ही मैंने लँहगे के नाडे़ को खोल दिया, जिससे लंहगा सरकता हुआ गिर गया. मैंने अपनी पेंट और अंडरवीयर निकाल दिये.

पंकज - यहाँ कोई देख लेगा...

मैं - कोई नहीं देखेगा मेरी जान

मैंने पंकज के पैरों को जांघों से पकड़कर गोद मे उठा लिया...और हाथों को उनकी पीठ पर कस लिये.

पंकज ने भी अपने पैर मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट लिये और हाथों को गर्दन पर डाल लिया...

मैं थोड़ा आगे खिसका और पंकज की पीठ को वहां रखी बोरियो से सटा दिया जिससे मुझे आसानी हो...

मैंने एक हाथ से लंड को पकड़ा और चुत पर रगड़ने लगा, जिससे उसके मुँह से सिसकियां निकलने लगी..और वो उतेजित होकर बोली - अब मत तड़पाइए...

 


# अपडेट - 68

मैंने एक हाथ से लंड को पकड़ा और चुत पर रगड़ने लगा, जिससे उसके मुँह से सिसकियां निकलने लगी..और वो उतेजित होकर बोली - अब मत तड़पाइए...

मैने भी देर ना करते हुए लंड को सेट किया और एक धक्का मारा..

मेरा लण्ड आधा उनकी गीली चूत में जा घुसा...

पंकज - ओह्ह.. मेरे राजा कब से तरस रही थी..आहह..

ये कहते हुए वो मेरे कंधे से चिपक गई...

मैने बिना रूके एक ओर तगड़ा धक्का लगा दिया..लण्ड चूत की दीवारों को फ़ैलाता हुआ अन्दर तक घुस गया...

जिसे महसूस करते ही वो सिसक उठी और उसके मुँह से दर्द भरी, मस्ती भरी हल्की सी आवाज़ निकल गई.

और उसने अपनी टाँगों को मेरी पीठ पर और जोर से कस लिया.

पंकज - ऊंह मा... आआहह..बहुत मोटा लण्ड है आपका हर बार दर्द करता.. ओह्ह...

मैं लण्ड को चूत के अन्दर-बाहर करने लगा... मेरे होंठ पंकज के होंठो से चिपक गये और उनका रस निचोड़ने लगे...

वो भी अब जोश मे आ गई और अपनी गाण्ड को धीरे-धीरे ऊपर नीचे करने लगी...

चूत की दीवारें मेरे मोटे लण्ड के ऊपर एकदम कसी हुई थीं...

मैं ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा... अब पंकज की जीभ मेरे मुँह मे थी जिसे मैं बड़े प्यार से चुस रहा था. मेरे मुँह का पानी पंकज के मुँह मे जा रहा था.

5 मिनट बाद पंकज के शरीर मे कंपन होने लगा.. कुछ देर बाद वो मेरे सीने से चिपक गई...

मेरी समझ मे नहीं आया, लेकिन जल्द ही मुझे मेरी जांघों पर पानी महसूस हुआ, मैं समझ गया कि वो झड़ गई हैं.

मैं उसी स्पीड मे धक्के मारता रहा... वो फिर से उतेजित हो गई..

हमारी चुदाई को 10 मिनट से ऊपर हो गये थे.. हम दोनों पसीने से भर गये..

आज सेक्स करने मे बड़ा मजा आ रहा था...

मेरी जीभ पंकज के हसीन चेहरे पर घूम रही थी. पंकज का पूरा चेहरा मेरे थुक से गिला हो गया..

मै फिर से उसके होंठो को चुसने लगा और एक के बाद एक ताबड़तोड़ धक्के चूत में लगाने लगा.

हमारी चुदाई को 15-20 मिनट हो गये थे, अब मैं भी झड़ने वाला था, मैं फुल स्पीड में चोदने लगा.

पंकज का मुँह खुला हुआ था और आँखें ऊपर को चढ़ी हुई थीं..

उसके मुँह से ‘आ..आह’ की आवाजे निकल रही थी.

उसकी चुत एक बार फिर झड़ने की कगार पर थी, वो भी अपनी गांड हिलाने लगी, और जोर जोर से सिसकते हुए - आहह मेरे राज्जा.. ऐसे ही.. आप कितने अच्छे हो आह... बोलते हुए मेरे चेहरे को चुमने लगी...

5-7 धक्को मे ही मेरे लण्ड से वीर्य का सैलाब निकल कर चूत की दीवारों को भिगोने लगा.

मेरे गरम वीर्य को अपनी चूत की दीवारों पर महसूस करते ही पंकज भाभी मुझसे कस के लिपट गई और रसधार बहाने लगी...

1 मिनट तक वो मुझसे ऐसे ही लिपटी रही, मैंने उसके चेहरे को हाथों से पकड़ा - कैसा लगा मेरी जान, मजा आया...

पंकज ने हा मे सिर हिलाया...

मैंने धीरे से उसे नीचे उतारा, और हम दौनो कपड़े पहनने लगे.

मैंने देखा की उसके होंठ से हल्का सा खून निकल रहा है वो उसे साफ कर रही हैं.

मैं - सॉरी जान ये मेरी वजह से हुआ...

पंकज - आप माफी मत मांगो... मुझे कुछ नहीं हुआ.

मैंने उसे बांहों मे भर लिया...

फिर मैंने पहले उसे बाहर भेज दिया कुछ देर बाद मैं भी घर आ गया...

घर आकर मैं सीधा फ्रेश होने चला गया... फ्रेश होकर ताउजी के घर खाना खाकर वापिस घर आ गया.

आज मै जल्दी ही सो गया,क्योंकि कल कॉलेज जाना था...

सुबह मैं रेडी़ होकर बुलेट लेके कॉलेज के लिए निकल गया.

 
Back
Top