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Incest सबका लाडला (फैमिली स्टोरी )

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# अपडेट - 89

मैने थोड़ा जोर लगाया तो थोड़ी सी उंगली गान्ड मे घुस गयी. शीला के बदन मे दर्द की लहर चल पड़ी उसने अपनी गान्ड को भीच लिया...

और बोली - क्या करते हो दर्द होता है..

तो मैं बोला - थोड़ी ढीली तो करो, गान्ड भी तो मारनी है तुम्हारी...

शीला - वो सब बाद मे देखेंगे अभी मेरी चूत की आग तो बुझाओ पहले.

मैं - हाँ मेरी जान तेरी आग बुझाने के लिए ही तो यहाँ हू और उसे अपने उपर से उतार दिया.. और लिटा दिया. अब वो अपनी टाँगो को फैलाए लेटी थी.

मैने उसके चुतडो़ के नीचे तकिया लगाया और लंड को चूत पर घिसने लगा. लंड चूत मे रास्ता ढूंढता चला गया.

मैं पूरी तरह से शीला पर आ गया, उसने अपनी बाहें कस दी. वो पूरा मज़ा लेते हुए मुझे भी काम सुख प्रदान कर रही थी. मेरे हर धक्के पे उसकी चूचिया उछल कूद मचा रही थी.

मेरा लंड चूत का भुर्ता बना रहा था. शीला की बाहें मुझे ऐसे जकड़े पड़ी थी कि जैसे मुझमें समाना चाहती हो...

उसके मुँह से - आहह.. उउफ्फु.. उम्हह जैसी कामुक आवाजें आ रही थी. वो बस पागलो की तरह आंहे भर रही थी.

मै- थोड़ा धीरे..

शीला - आआहह..आज मैं खुल के चुदुंगी, आज मैं अपने मन की करूँगी...

उसके नाख़ून मेरी पीठ को खरोच रहे थे. वो बस आहें भरे जा रही थी.

मैं भी जोश मे आ गया और उसके होंठो को अपने दांतो से काटने लगा, पर उसने बिल्कुल मना नही किया..

वो बोली - कुचल दो मुझे आज, लूट लो मुझे..आज मैं दिल खोल के चुदुंगी बस आइईस्स.. उऊह.. चोदो और्र्ररर जउ्उअ्अर्र्रर से चोदो...

मैने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी, वो जंगली हो चुकी थी. उसकी गान्ड पूरी तरह उपर उठी हुवी थी. वो बड़े ही मज़े से चुद रही थी.उसका कंपन बढ़ता जा रहा था.

मैं समझ गया था कि बस किसी भी पल वो झड़ सकती है. मैं पूरे दम से उसे चोदे जा रहा था.

कुछ ही देर मे उसने अपने शरीर को टाइट कर लिया. वो बुरी तरफ से मुझसे चिपक गयी और एक ठंडी आह के साथ वो झड़ने लगी. उसकी चूत से पानी बहने लगा..

मैं भी नजदीक ही था, 10-12 धक्को मे मैं भी ढेर हो गया. लंड से निकलती पिचकारी चूत के हर कोने को भिगोने लगी. दोनों का पानी इकट्ठा होने लगा, मैं उसके उपर ही लेट गया .

आज तक मैंने बहुत चुतो को चोदा था पर इतना मजा नहीं आया था. इसका कारण शीला थी. आज वो अलग ही रूप मे थी. आज की चुदाई मे तो मजा आ गया..

मैंने उसके होंठों को चुमा और उसके उपर से साइड मे लेट गया. शीला ने अपना चेहरा मेरे सीने पे रख दिया. मैं उसकी नंगी पीठ को सहलाने लगा.

फिर हम ऊठे और पेशाब करके आये. मैं मटके से पानी पीने लगा, वो भी पानी पीने लगी. उसके होंठो से टपकती पानी की बूंदे उसे और भी सेक्सी बना रही थी. हम कमरे मे आ गये.

मैं चारपाई पर अधलेटा हो गया, वो मेरी गोद में अपना सर रख के लेट गई, उसने अपना मूह खोला और बड़े ही प्यार से मेरे सिकुडे हुए लंड को अपने मूह मे भर लिया और उस पर अपनी जीभ गोल गोल घुमाने लगी मेरे सोये हुए लंड मे जान आने लगी...

मैं उसके सर के बालो को सहलाने लगा. वो वैसे ही लेटे लेटे मेरे लंड को चूसने लगी. लंड का साइज़ अब बढ़ने लगा था. मेरी आँखें बंद हो गई और मुखमैथून का आनंद लेने लगा.

उसने अपने मूह को थोड़ा ऐडजस्ट किया और एक बार फिर लंड पे टूट पड़ी एक सेकेंड के लिए भी वो उसे अपने मुंह से बाहर नही निकाल रही थी. थोड़ी देर और लंड चूसने के बाद मैने उसे हटाया और अपनी बाहों मे समेटते हुए कहा - रानी गान्ड मारने दोगी..

 


# अपडेट - 90

अपनी बाहों मे समेटते हुए कहा - रानी गान्ड मारने दोगी..

शीला - मेरी गान्ड के पीछे क्यो पड़े हो..

मैं - सब मरवाती है मज़े ले लेकर और एक तुम हो जो मना करती रहती हो.

शीला - आजतक मेरे पति ने नही मारी...

मैं - एक बार गांड मे लेकर तो देख तुम्हें मजा आएगा...

शीला - तुम्हारे लंड ने मेरी चुत फाड़ दी, तो मेरी गांड का क्या होगा. मेरी तो जान ही निकल जायेगी.. मुझे नहीं करवाना..

मैं - ऐसा कुछ नहीं होगा, मैं बड़े आराम से मांरूगा...तेल लगाके चिकनी कर दुंगा...

शीला ने उसने काफ़ी कुछ सोचा फिर बोली बस एक बार मरवांउगी..

मैं - ठीक है मेरी रानी.... अगर वो मना करती तो भी गांड तो मुझे मारनी ही थी, शील पैक गांड मारने का मजा ही अलग है...

मैंने जल्दी से उसे उल्टा लिटा दिया, उसकी गान्ड लाजवाब थी. आज उसकी सील पक्का टूटने वाली थी. मैने तेल की शीशी उठाई और बहुत सा तेल उसकी गान्ड के छेद पे फैला दिया और अपनी उंगली को चिकना करके उसकी गान्ड मे डालने की कोशिश करने लगा.

मैने कहा - थोड़ा ढीला करो चुतड़ो को वरना कैसे होगा..

उसने थोड़ी ढील दी मैने ज़ोर लगाते आधी उंगली गान्ड में फसां दी...

तो वो बोली - आआहहाहा.. दर्द होता है बाहर निकालो

मैं - एक मिनिट रूको तो सही...

मैंने थोड़ी उंगली और अंदर सरका दी और धीरे से अंदर बाहर करने लगा. गान्ड काफ़ी टाइट थी थोड़ी दिक्कत हो रही थी उपर से शीला कुछ नखरे भी कर रही थी पर मुझे तो झंडा गाढ़ना ही था चाहे कुछ भी हो.

मैने ढेर सारा तेल अपने लंड पे लगा लिया और थोड़ा और उसकी गान्ड पर ऊडेल दिया. मैने उसके कुल्हो को थोड़ा चौड़ा किया और लंड को गान्ड के छेद पे रख दिया. अब बस घुसने की देर थी पर ये इतना आसान नही था.

मैने अपने हाथो से शीला को दबोच लिया और टाँगो को अपनी टाँगो मे उलझा लिया. अब वो किसी पूरी तरह मेरी गिरफ़्त मे थी. पहली बार मे लंड फिसल गया.

मैंने सुपाडे़ को गांड के काले छेद पर सेट किया और धक्का लगा दिया, आधा सूपड़ा अंदर चला ही गया..

शीला - ओहहह.. आआहह.. म्माआअहाहाहा मररर्र्रररृिईईईईई... चिलाने लगी और मुझे हटने को कहने लगी पर मुझे पता था कि अगर अब हट गया तो दुबारा नहीं देगी..

मैने उसे अपने शिकंजे मे कसा और एक झटका और मारा तो सुपाडा उनकी गान्ड को फाड़ते हुए अंदर घुस गया.

शीला की आँखे दर्द से पथारा गयी आँसू टपकने लगे पर मैने अपनी पकड़ ढीली नही की,

शीला रोने लगी और उसका रोना बढ़ता ही जा रहा था..

तो मैं बोला - बस हो गया...

पर वो दर्द से दोहरी हुई जा रही थी मैने दो - तीन झटके और लगाए और पूरा लंड उसकी गान्ड मे डाल ही दिया. उसकी हालत बहुत ही बुरी हो गयी थी. शीला लगभग बेहोशी की कगार पर पहुँच गयी थी. मैने उसे दिलासा देना शुरू किया...

मैं - देखो तो पूरा ले लिया तुमने अपनी गान्ड मे अब थोड़ी ही देर मे तुम्हारा दर्द कम हो जाएगा.

उसकी तो सुध बुध ही खो गयी थी. उधर अंदर उसकी गान्ड मेरे लंड पे बहुत ज़्यादा दबाव डाल रही थी. मैं अपने हाथ नीचे ले गया और उसके बोबो को सहलाने लगा और उसके आंसुओ से भरे गाल को चुमने लगा.

इन सब मे कोई 5-7 मिनिट के लगभग बीत गये अब शीला थोड़ी नॉर्मल सी हुई...

वो दबी सी आवाज़ मे बोली - ये अच्छा नही किया मेरे साथ...

मैं- रानी एक बार तो दर्द होता ही है चाहे आगे से डालो या पीछे से...

शीला - तुम बहुत गंदे हो...

मैने लंड को थोड़ा सा बाहर खींचा और फिर से धकेल दिया..

शीला चिल्ला - आआआआह.. दर्द होता है ना..

मैं उनके बदन को सहलाने लगा. थोड़ी देर बाद वो कुछ नॉर्मल हुई.

मैने अब अपनी कमर हिलानी शुरू की और धीरे धीरे धक्के मारने लगा. वो अब भी दर्द भरी आवाज़ निकाल रही थी पर उनका तड़पना कम हो गया था.

मैं उसे गरम करने लगा, मैं उसके कान को अपने दाँतों से काटते हुए चूमने लगा उनके बदन मे गर्मी का संचार होने लगा था.

मैने अब स्पीड थोड़ी और बढ़ाई, आज मैंने एक और गांड की सील तोड़ दि थी..

पूरी तरह गान्ड की गर्मी मेरे लंड का दम घोंटने को तैयार खड़ी थी..

शीला - अहहा... आअआऐययईईई.. उफफफफफफु.. ऊऊहू.. ओहहह.. मां... करती हुई गान्ड चुदवा रही थी..

मेरे झटके उसके चुतडो़ पर धड़ा धड़ पड़ रहे थे. आज तो मज़े की सारी इंतेहा पार हो रही थी.

मैं शीला के गालो को चूमते हुए गान्ड मार रहा था. अब उसका दर्द कुछ कम हो गया था, उसे भी गान्ड मराई का मज़ा आ रहा था. पर अब भी वो कराहे ही जा रही थी पर अब वो मुझे ना तो रोक रही थी और ना ही लंड गान्ड से बाहर निकालने को कह रही थी. उसके चूतड़ बिल्कुल शांत से पड़ गये थे.

मैने धक्के मारते हुए पूछा - अगर ज़्यादा प्राब्लम हो रही है तो बाहर निकाल लूँ..

उसने अपना चेहरा मेरी तरफ घुमाया और बोली - जब मेरी गान्ड को फाड़ रहे थे तब तो नही पूछा पूरी गान्ड तो फाड़ दी अब बोल रहे हो.

मैं - गांड को कुछ नहीं हुआ है, अब तो ये और मस्त हो जायेगी..

शीला - तो मेरे कहने से कौनसा रूकोगे बस जल्दी से करलो...

मैंने ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू किये, वो आह आह आह करे जा रही थी पर मैने ध्यान ना देते हुए अपनी चुदाई चालू रखी.

कोई 7-8 मिनिट गान्ड मारने के बाद मैं छुटने वाला था... कुछ ही पलो मे मैंने अपना गाढ़ा सफेद पानी उसकी गान्ड में छोड़ा तो बहुत ही अच्छा महसूस हुआ.

मैने लंड को बाहर निकाल लिया तो मेरा वीर्य भी बाहर निकल आया और गान्ड से बहते हुए चुतडो के नीचे जाने लगा. शीला ने चैन की सांस ली. मैं साइड में लेट गया...

***

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# अपडेट - 91

मैने लंड को बाहर निकाल लिया तो मेरा वीर्य भी बाहर निकल आया और गान्ड से बहते हुए चुतडो के नीचे जाने लगा.

शीला ने चैन की सांस ली. मैं साइड में लेट गया...

आगे......

शीला बड़ी ही मुश्किल से बिस्तर से उठी ऐसा लग रहा था. जैस किसी ने टाँगो की जान ही निकाल दी हो. उसने अपना हाथ गान्ड पे लगाया और देखने लगी गान्ड का छेद बुरी तरफ से छिल गया था थोड़ा सा खून भी निकल गया था.

शीला ने बुरा सा मूह बनाया - ये क्या कर दिया मैं तो बर्बाद हो गयी हू अब कल जब वो वापिस आ जाएँगे तो मैं क्या करूँगी...

मैं - घबराओ मत नही हुआ है, और पप्पू तुम्हें कौनसा रोज चोदता हैं, और वो तुम्हारी गांड नहीं मारता ना उसे कुछ नहीं पता चलेगा...

मेरी बात सुनकर वो शांत हई, उससे खड़ा नहीं हुआ जा रहा था. मैंने उसे चारपाई पर लेटा दिया.

मैं नंगा ही रसोई में गया, मैंने गैस ऑन किया और थोड़ा गरम पानी किया और एक डब्बे मे लेके अंदर गया. शीला अब भी सूबक रही थी.

मैं बोला - अपने चुतडो़ को थोड़ा चौड़ा करो,

उसने अपने हाथों से उन्हे फैला दिया अब गान्ड का छेद मेरे सामने था, जो पूरा सूज गया था और काफ़ी खुल भी गया था मैने रूई को गरम पानी मे भिगोया और शीला की गान्ड पर लगाया.

उसकी सिसकारी निकल गयी. मैंने पूरी तरह से गान्ड को सॉफ किया और वहां पर मुझे दर्द की एक क्रीम मिली, मैंने वो क्रीम लगाई. गरम पानी की सिकाई से उसको बहुत आराम मिला. अब दर्द भी थोड़ा कम हो गया था.

मैं पलंग पर लेट गया. शीला मेरे सीने से लिपटकर सो गई. अब और चुदाई तो कर नहीं सकता था. मैं भी उसे अपनी बाहों मे लिए सो गया...

सुबह मेरी नींद जल्दी खुल गई, हमेशा की तरह... शीला मुझसे लिपटी हुई थी बच्चे के जैसे...

उसकी चुत मेरे लंड के ऊपर थी. जिसकी गरमी पाकर वो खड़ा हो गया था. वो उसकी चुत पर घिसने लगा, वो चुत मे जाने की कोशिश कर रहा था.

इन सब मे शीला की भी आँख खुल गई.. उसे अपनी चुत पर मेरे लंड का अहसास हुआ.. वो मेरी तरफ देखने लगी..

शीला - तुम्हारा लंड क्या कर रहा है, और उसने मेरे लंड को पकड़ लिया...

मैं - तुम्हारी चुत है ही इतनी गरम मेरा लंड़ बेचारा क्या करे. गांड कैसी है अब..?

शीला - थोड़ी थोड़ी दुख रही है..

मैं - हो जायेगी ठीक...

मैं उसके होंठो पर जीभ फेरने लगा. शीला का मुंह खुल गया. मैंने जीभ को उसके मुंह मे डाल दी. उसकी ज़ुबान मेरी से टकराने लगी एक मिठास सी मेरे मूह मे भरने लगी थी. उसके बोबे हमारे बीच दब गये.

सांस भरने तक मैं उसे किस करता रहा. फिर मैने उसे टेढ़ी किया और उसके पीछे आके लेट गया मेरा लंड उसकी गान्ड से टकरा रहा था. शीला के पसीने की उठती खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी. मैने एक हाथ उसकी साइड से निकाला और उसकी एक चुचि को पकड़ लिया और उसे दबाने लगा शीला की गान्ड खुद ही पीछे हो गयी. जिसकी गर्मी पाकर मेरा लंड़ बेकाबू होने लगा था.

वो गांड की दरार मे फिट हो गया, मेरे होंठ उसकी गर्दन को चूमने लगे. एक हाथ उसकी चूची को दबाने मे व्यस्त था तो मैने दूसरे हाथ को उसकी चूत पे रख दिया और उसके दाने को छेड़ने लगा. शीला जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी थी

शीला बोली - अब रहा नहीं जा रहा, जल्दी से चोदो मुझे.

मैं उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में भर के मसल्ने लगा. मैने दो उंगलिया उसकी चूत मे एक साथ घुसेड दी और उन्हे अंदर बाहर करने लगा.

शीला मेरी बाहों की क़ैद मे मचल रही थी मेरी उंगलिया उसके रस से पूरी भीग गयी थी. कुछ देर तक दोनो उंगलियो को अंदर बाहर करने के बाद मैने उन्हे चूत से निकाला और मुंह मे डाल दिया और चाटने लगा, मैंने अपनी उंगलियां शीला के मुंह मे डाल दी और वो अपनी चूत का रस चाटने लगी..ये सीन देख मैं रोमांचित हो गया.

मैंने उसकी एक टाँग को थोड़ा उँचा उठाया और अपना लंड उसकी गीली चूत पे टिका दिया. लंड को अपने मुंह पर महसूस करते ही चूत के होंठ अपने आप खुल गये. मैंने थोड़ा जोर लगाया और लंड अपना रास्ता बनाता हुआ. शीला की चूत की सैर करने लगा.

मेरे दोनो हाथ उसकी चुचियों पे कस चुके थे शीला मस्ती के आलम मे खोने लगी थी उसकी गरम आंहे चुदाई का जोश बढ़ा रही थी. औरत को टेढ़ी करके चोदने मे बड़ा ही मज़ा आता हैं वो भी शीला जैसी कमसिन को.

उसकी चूत लंड पर दबाव डाल रही थी. उसकी गर्मी से मेरे लंड की नसे और भी उभर आई थी. मैने अपने धक्को की गति को बढ़ाने दिया. शीला ने अपनी चूत को थोड़ा टाइट कर लिया था. जिससे उसे चोदने मे और भी मज़ा आ रहा था.

शीला - आआहहा... उऊह.. ह्यूम्म्म्... कर रही थी.

कुछ देर बाद मैने उसे गोदी मे उठाया और अपने लंड पर बिठा दिया. वो मेरी बाहों मे थी. मैने उसे मजबूती से थाम लिया और वो भी अपने कुल्हो को हिलाते हुए लंड पे उपर नीचे होने लगी थी. मेरे हाथ उसके चुतडो पर जमे हुए थे.

इस पोज़िशन मे लंड पूरा उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था. चुदाई की ये पोजीशन मुझे अच्छी लगती हैं.

उसके चूतड़ पसीने से गीले होने लगे थे. जिससे उसे थामने मे थोड़ी परेशानी होने लगी थी. चूत का पानी बहता हुआ उसकी जाँघो तक आ पहुँचा था, वो मुझसे किसी छोटे बच्चे की तरह चिपकी हुवी थी.

अब मेरी टाँगे दुखने लगी थी तो मैने उसे नीचे उतारा और उसे चारपाई पर लिटा दिया उसके पैर हवा मे थे. मैंने उसकी टाँगो को चौड़ा किया और एक बार फिर से मेरा लंड चूत मे था. मैं खड़ा खड़ा उसे चोद रहा था.

शीला बस मेरा साथ दे रही थी. मेरे अांड़ पूरी गति से उसकी गांड से टकरा रहे थे. कमरे मे बस थप थप की आवाज़ ही गूँज रही थी.

 


# अपडेट - 92

25-30 मिनट तक चली इस दमदार चुदाई मे शीला पहले झड़ चुकी थी. उसने फिर से हथियार डाल दिये और अपने काम सुख की ओर बढ़ चली.

मेरा भी बस होने ही वाला था मैने अपनी स्पीड बढ़ा दी और झटके खाते हुए लंड़ गरम गरम माल की पिचकारियां मारने लगा.

शीला मदहोश अवस्था मे पंलग पर पड़ी थी.. कुछ देर आराम करके मैं अपने कपड़े पहनने लगा.

मैं फटाफट वहां से निकला. चुदाई मे टाईम लगा था जिससे थोड़ी लेट हो गई थी.

मैं जल्दी घर पहुंच गया. मामी रसोई मे काम कर रही थी.

मैं हॉल मे जाकर बैठ गया, उन्होने मुझे एक कॉप दूध का दिया. मैंने दूध पिया और कुछ देर नानाजी के पास बैठा.फिर हमने नाश्ता किया.

कुछ देर बाद मैंने नानाजी की मालिश करी, फिर मैं नहाने चला गया. नहाकर मैं नीचे आया तो...

नानी बोली - बेटा.. इधर आ तो, तुझसे एक काम हैं...

मैं नानी के पास चला गया...

मैं - हाँ, नानी... क्या काम हैं...

नानी - तेरी मामी को सामान लाना है शहर से,वैसे तो जा नहीं पाती, तु चला जा...

मैं - जी नानी.. कब जाना है...

मामी - अभी कुछ देर मे चलते हैं, शाम होने ये पहले आ जायेंगे... फिर घर का काम भी करना है.

नानी - तुम चिंता करो.. आराम से खरीदारी करके आओ... कितने दिन हो गये तुम्हें अपने लिये खरीदारी किये हुए. तुम तो घर की जिम्मेदारियों मे लगी रहती हो... बेटा तुम इसे अच्छे से खरीदारी करना..

मैं - जी नानी, मैं तो तैयार हूँ...

मामी- मैं अभी आती हूँ...

कुछ देर मे वो तैयार होकर आ गई.. थोड़ा सा मेक-अप भी किया हुआ था.

(मामी कॉलेज तक पढ़ी थी,तब तो आप समझ रहे होंगे कि वो समझदार होगी )

उन्होंने साड़ी पहन रखी थी, वो साड़ी मे बहुत सुंदर लग रही थी. उनके चुतड़ कुच्छ ज़्यादा ही उभरे हुए लग रहे थे.

मुझे अपनी तरफ देखता पाकर मामी बोली - क्या हुआ.. कुछ खराब है...

मैं - नहीं मामी.. आप तो बहुत ब्यूटीफुल लग रहे हो...मैंने अपने उंगली और अंगूठे को मिलाकर इशारा किया...

वो शरमा कर मुस्कराते हुए बोली - क्या राहुल तुम भी कैसी मज़ाक करते हो.. मैं ऐसी भी सुंदर नही लग रही...

मैं - मामी.. आप सच मे अच्छी लग रही हो...

वहां नानी आ गई, तो हम बुलेट पर शहर जाने के लिए निकल पड़े..

मामी एक तरफ पैर करके बैठी थी.. वो बोली थोड़ा संभाल कर चलना... मुझे तो डर लगता है..

मैं - आप चिंता ना करो.. बस आप मुझे पकड़े रहना.. तो उन्होने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया. और थोड़ी तिरछी सी होकर बैठ गयी...

गाँव से बाहर निकलते ही मैंने स्पीड बढ़ा दी.. कभी गड्ढा आता तो मुझे ब्रेक लगाने पड़े, और मामी का वजन मेरे उपर आ जाता..

उनकी 36D के मस्त ठोस बोबे मेरी पीठ से दब जाते...

हाँ ये बात जरूर थी कि मामी के लिए मेरे मन मे कोई वैसा ख्याल नहीं था... सच्ची......

मामी ने मेरी कमर को पकड़ लिया और मुझसे सटकर बैठ गयी.. उनकी चुचियों की चुभन में अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था, जिससे मेरा मूसल में हरकत होने लगी...

हम 20-25 मिनट मे शहर पहुँच गये. मामी अपना समान खरीदने लगी.. उन्होंने कई दुकानों से सामान लिया.

हम एक कपड़ो के शोरूम मे गये.. ( इस शोरूम मे सस्ते और महंगे दोनों कपड़े मिलते थे. जैसे आप लेने चाहो ले सकते थे. )वहां वो साडी़या और सूट लेने लगी.. अब आपको तो पता है औरतों का...

मैं बोला - आप साड़ियां खरीदो मैं अभी आता हूं...

मामी - कहा जा रहे हो...

मैं झूठ बोलते हुए - वो वॉशरूम मे जा रहा हूँ...

मैं वहां से साईड़ मे आ गया... मैंने नाना, नानी और मामी के लिए कुछ लेने की सोची. मेरे पास पैसे तो थे ही...

मैं शोरूम के जेन्ट्स सेक्शन मे चला गया.. वहां से मैंने नानाजी के लिए एक अच्छा महंगा सा धोती कुर्ता और एक पगड़ी खरीदे. मैंने उनका प्राइज़ टैग निकाल दिया. फिर मैं लेडीज़ सेक्शन मे आया...

मामी साईड़ मे थी. मैं उन्हें नहीं दिख रहा था... वहां पर खड़ी सेल्स गर्ल ने पूछा - आपको क्या दिखाऊ सर...

मैं - मुझे एक साड़ी लेनी है, मेरी नानी के लिए तो एक अच्छी सी साड़ी दिखाईए...

उसने कुछ सस्ती सी दिखाई, तो मैं बोला ये क्या दिखा रही हो, कुछ अच्छी दिखाओ..

तो वो अच्छी साड़ियां दिखाने लगी... अब मुझे कौनसी समझ आने वाली थी, मेरे लिए बस एक जैसी थी..

तो मैं उसे बोला - मुझे तो कुछ पता नहीं है, आप ही पंसद कर दो...

सेल्स गर्ल - मैं..?

मैं - हा तुम.. प्लीज...

तो उसने एक अच्छी सी साड़ी पसंद की... मैंने वो फाइनल कर दी. उसका भी प्राइज़ टैग निकाल दिया.

फिर वो बोली - और कुछ सर..?

मैं - हां.. मुझे एक साड़ी और लेने है... फिर मैंने मामी की तरफ इशारा किया उनके लिए, पर उनको पता ना चले...

सेल्स गर्ल ने मामी की तरफ देखा और बोली - OK सर...

वो साडी़या दिखाने लगी.. वो अच्छी थी, पर मुझे पसंद नहीं आ रही थी...

मैं बोला - और अच्छी साड़ियां दिखाओ ना...

तभी उनका मैनेजर आ गया...

मैं - मैंने कहा था ना की पैसे की कोई बात नहीं है आप अच्छी साड़ी दिखाओ...

मेरी बात सुनकर मैनेजर सेल्स गर्ल से बोला - क्या हुआ..?

सेल्स गर्ल - सर इनको साड़ी पंसद नहीं आ रही हैं...

मैनेजर बोला - सर को दूसरे वाले सेक्शन मे ले जाओ...

सेल्स गर्ल मुझे वहां ले जाने लगी, मैंने उससे पूछा - दुसरे सेक्शन मे क्या है...

वो बोली - सर इसमें मंहगी साड़ियां हैं, ये स्पेशल कस्टमरो के लिए है...

वो मुझे वहां साड़ियां दिखाने लगी, उसने एक साड़ी दिखाई और बोली - सर ये उन मैडम पर अच्छी लगेगी...

साड़ी मुझे भी अच्छी लगी.. मैं बोला - अच्छी तो है, पक्का पर उन पर अच्छी लगेगी ना...

सेल्स गर्ल - हां श्योर सर...

मैं - तो इसे पैक कर दो और बिल बनवा दो...

हम काउंटर पर आ गये, मेरा बिल करीब चौबीस - पचीस हजार का बना. मैंने बिल पे कर दिया... सामान को काउंटर पर ही रख दिया...

मैं सेल्स गर्ल से - थैंक्यू.. आप ने मेरी मदद की..

सेल्स गर्ल - इसमें थैंक्यू की कोई बात नहीं है...

मैं - आपने मेरी मदद की है..

मैंने उसे दो हजार रूपये दिये, तो वो मना करने लगी. पर मैंने उसे रूपये दे दिये.

सेल्स गर्ल - थैंक्यू सर...

मैं मामी के पास आ गया..लगी.. वो अंडर गारमेंट देख रही थी...

मुझे देखकर वो शरमा गई...

सेल्स गर्ल ने उनको एक ब्रा दी - ये देखिए मैम ये आप पर फिट आयेगी..

तो मामी बोली - ये छोटी रहेगी इससे थोड़ा बड़ा साईज दीजिये... मामी मेरे सामने बुरी तरह शरमा रही थी.

फिर वो दो टाइप की ब्रा निकाल के लाई.. एक जो बड़े कप वाली, जिससे चुचियों का अधिकतर हिस्सा ढक सके, और एक ऐसी जिसमें से बोबो के साथ-साथ उनका निचला हिस्सा ही ढक पाता…

मामी ने बड़े कप वाली ब्रा सेलेक्ट कर ली… फिर वो सेल्स गर्ल पेंटी निकालने लगी,

तो मैंने मामी से धीरे से कहा - मामी ये दूसरी वाली ब्रा भी अच्छी लगेगी…

मामी ने मुझे गहरी नज़र से घूरा.. और बोली - छी.. कैसी बात कर रहे हो... इसमें तो कुछ नहीं... उन्होंने बात पूरी नहीं की

मैं - मामी..थोड़ा मॉर्डन बनो... आजकल तो ये ही सब चलता हैं...

मामी मेरी तरफ देखने लगी - तुम्हें बड़ा पता है...

मैं - पता है तभी तो बोल रहा हूं.. मामा को ज्यादा अच्छा लगेगा...आपको ज़्यादा प्यार करेंगे..

मामी - ये क्या बोल रहे हो.. कुछ तो शरम करो....

मैं चुप हो गया, और वो सेल्स गर्ल भी आ गई... वो दो-तीन तरह की पैंटी लेकर आयी..

उन्होंने दो पेंटी ले ली... इस बार मैं कुछ नहीं बोला.. फिर ना जाने क्या सोच कर उन्होने एक छोटे कप वाली ब्रा भी ले ली…

फिर हम वहां से आ गये मैने मेरे वाले पैकेट भी काउंटर से ले लिये, और उन्हें बाकी सामान के साथ ले लिया. जिससे मामी को पता नहीं चला..

***

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# अपडेट - 93

फिर हम वहां से आ गये मैने मेरे वाले पैकेट भी काउंटर से ले लिये, और उन्हें बाकी सामान के साथ ले लिया. जिससे मामी को पता नहीं चला..

आगे...

वहां से कुछ आगे आकर मैंने बुलेट एक रेस्टोरेंट पर रोक दी...

मामी - क्या हुआ राहुल...

मैं - कुछ नहीं...

मामी - तो रूक क्यों गये..

मैं - भूख नहीं लगी आपको..

मामी - लगी तो है..

मैं - तो चलिये.. खाना खाते हैं...

मामी - यहाँ.. नहीं, हम घर जाकर ही खाते हैं...

मैं - नहीं मामी.. आज हम यहीं खायेंगे...

मैं मामी को अंदर ले गया... हम दोनों चेयर पर बैठ गये... वेटर ऑर्डर लेने आया...

मैं - मामी आप क्या खायेंगी...

मामी - तुम ही मंगवालो...

मैंने खाना ऑर्डर कर दिया. जो मामी को भी अच्छा लगता...

मामी को रेस्टोरेंट अच्छा लग रहा था...

मामी - राहुल जगह तो अच्छी हैं...

वेटर हमारा खाना ले आया... मैंने मामी को सर्व किया. हम दोनों खाने लगे. मामी अच्छे से खा रही थी. शायद उनको खाना अच्छा लगा था...

खाने के बाद मैंने आइसक्रीम मंगवाई.. मामी बड़े चाव से आइसक्रीम खा रही थी, बिल्कुल बच्चे की तरह...

मैं - मामी खाना कैसा लगा...

मामी- बहुत अच्छा था, बहुत दिनों बाद बाहर खाया है..

मैं - क्यों, मामा नहीं लाते क्या...

मामी- वो कहाँ ले जाते हैं.. महिनों बाद तो छुट्टी आते हैं, फिर घर ही रहते हैं.

मैं - आइसक्रीम कैसी लगी...

मामी - बहुत अच्छी, मुझे आइसक्रीम बहुत ज्यादा पसंद हैं.

खाने के बाद हम वहां से आ गये...

कुछ पैकेट मामी ने ले लिये, कुछ मैंने आगे टांग लिये. हम वापिस गाँव के लिए निकल पड़े...

रास्ते में मामी ने मुझसे पुछा - राहुल तुमने किसी को पहले ऐसी ब्रा पहने देखा है..?

मामी का सवाल सुनकर मैं चौंक गया...

मैंने हड़बड़ाते हुए कहा - न..न..नही तो मामी.. मैंने तो किसी को नही देखा..

मामी - तो फिर तुम्हें कैसे पता कि वो अच्छी लगेगी...

मैं - वो तो बस ऐसे ही कहा था..

मामी कुछ नहीं बोली... कुछ देर मे हम घर पहुँच गये... मैंने शॉपिंग बैग हॉल मे रख दिये, और मेरे वाले बैग मैं ऊपर मेरे रूम मैं ले गया...

कुछ देर बाद मैं नीचे आया तो नानी और मामी हॉल मे बैठे हुए कपड़े देख रहे हैं... नाना जी भी पास मे सोफे पर बैठे हैं. मामी ने मुंह ढक रखा है.

मैंने सोचा कि मैं भी नाना नानी के लिए खरीदे कपड़े उनको दे देता हूँ. मैं रूम मे जाकर नाना, नानी के गिफ्ट ले आया. मामी का गिफ्ट मैं नहीं लाया. मैंने उनको बाद मे देने की सोची...

मैं दोनों बैग ले आया और उनके पास बैठ गया...

मैं - नानाजी, नानीजी मैं आपके लिए कुछ लाया हूँ...

मैंने नाना, नानी को उनके पैकेट दे दिये... नानाजी अपना बैग देखने लगे. जिसमें अच्छा धोती कुर्ता और एक पगड़ी थे...

नानाजी वो देखकर बहुत खुश हुए...

नानीजी - ये तो बहुत अच्छे हैं

नानाजी - हाँ.. पर ये महंगे लग रहे हैं, बेटा तुम्हारे पास इतने पैसे...

मैं - नानाजी मेरे पास थे पैसे, और मैं आपके लिये लाया हूं तो आप ये पैसे की बात मत करो. ये बताओ आपको कैसे लगे.

नानाजी - बहुत अच्छे हैं, इन्हें तो मैं प्रोग्राम मे ही पहंनुगा...

नानीजी भी अपनी साड़ी देखने लगी... नानी को भी साड़ी बहुत पंसद आई...

नानी - ऐसी साड़ी तो मेरे पास है ही नहीं.. बेटा तेरी पसंद तो बहुत अच्छी हैं.

मामी - हां माजी साड़ी बहुत सुंदर हैं...

फिर नानी बोली - अपनी मामी के लिए कुछ नहीं लाया...

मैं - नहीं नानी.. मैं भूल गया... सॉरी मामी...

मामी - कोई बात नहीं, मैं आज ही अपने लिये कपड़े लायी हूँ...

 


# अपडेट - 94

मामी - कोई बात नहीं, मैं आज कपड़े लायी हूँ...

मामी ने ये बात बोली तो, पर उनका चेहरा थोड़ा उदास हो गया...

हम कुछ देर तक बातें करते रहे. रात मे सब ने खाना खाया. खाना खाकर नाना नानी कमरे मे चले गये. मामी किचन मे काम कर रही थी.

कुछ देर बाद वो अपने रूम मे आ गई. मैं उनका गिफ्ट ले आया और उनके रूम मे आ गया...

मामी सोने की तैयारी कर रही थी. उन्होंने नाईटी पहन रखी थी. उसमें वो पूरी तरह ढकी हुई थी...

मुझे देखकर वो बोली - कुछ चाहिए राहुल...

मैं - कुछ काम हो तभी आपके पास आऊं, ऐसे नहीं आ सकता...

मामी- आ सकते हो ना... आओ बैठो...

मैं मामी के पास बैड़ पर बैठ गया...

मैं - मामी ये आपके लिये...

मामी- ये क्या है...

मैं उनको बैग देते हुए बोला - आप ही देख लीजिये...

मामी ने बैग से साड़ी निकाली... जिसे देखकर वो बोली - ये साड़ी...

मैं - ये आपके लिए...

मामी - तुम तो बोल रहे थे कि तुम मेरे लिये कुछ नहीं लाये...

मैं - मैं मजाक कर रहा था...मैं मेरी प्यारी सी मामी के लिये कुछ ना लाऊ, ऐसा नहीं हो सकता...

मामी बहुत खुश हो गई, वो साड़ी को खोलकर देखने लगी...

मामी- राहुल.. साड़ी बहुत सुंदर हैं...

मैं - पर आपके जितनी नहीं..

मामी मेरे कंधे पर चपत लगाते हुए - बदमाश...

मामी की नजर प्राइज टैग पर गई...

मामी - राहुल ये तो बहुत महंगी हैं... उन्होंने मुझे प्राइज टैग दिखाया. ओह शिट.. मैं इस साड़ी का टैग निकालना भूल गया.

मामी - इतनी महंगी साड़ी मैं नहीं ले सकती...

मैं - मामी मैं प्यार से दे रहा हूँ ना...

मामी - पर राहुल ये बहुत महंगी हैं, तेरे मामा ने भी मुझे इतनी महंगी साड़ी नहीं दी...

मैं - तो क्या हुआ, मैं दे रहा हूँ ना. क्या मैं आपका कुछ नहीं लगता...

मामी - पर राहुल...

मैं - आपको साड़ी पसंद नहीं आयी...

मामी - बहुत पसंद आयी, ऐसी साड़ी तो मेरे पास हैं ही नहीं.पर मैं ये साड़ी...

उनकी बात पूरी होने से पहले ही मैं बोला - मामी मैं ये साड़ी प्यार से लाया हूँ. अगर आपको नहीं रखनी तो आप इसे फेंक दीजिये.

इतना बोलकर मैं वहां से बाहर आ गया, और सीधे अपने रूम मे आकर सो गया.

सुबह मैं उठकर जॉगिंग करने चला गया. वापिस आया तो नानाजी बाहर बैठकर अखबार पढ़ रहे थे. अब उनकी हेल्थ मे बहुत सुधार आ गया था.

मैं भी उनके पास बैठ गया... फिर मामी मेरे लिये दूध ले आयी. मैंने दूध ले लिया पर उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया.

ऐसा नहीं था कि मुझे बहुत ज्यादा बुरा लगा या और कुछ... ये तो बस थोड़ा गुस्सा था...

थोड़ी देर बाद मैंने नानाजी की मालिश की और फिर मैं नहाने चला गया...

नहाकर मैं नीचे आया, तो नानी ने मुझे नाश्ता दिया... मामी नहीं दिख रही थी. मैंने नाश्ता कर लिया...

कुछ देर मामी कमरे से बाहर आई. उन्होंने वहीं पिंक साड़ी पहन रखी थी. जो मैंने उन्हें दी थी.

क्या लग रही थी मामी उस साड़ी मे एकदम गजब... उनके गोरे बदन पर साड़ी बहुत जच रही थी.

मामी हमारे पास आ गई. मामी को नई साड़ी मे देखकर नानी बोली - साड़ी तो बहुत सुंदर हैं. कल खरीदी है क्या . पर तुमने तो ये दिखाई ही नहीं...

मामी - माँजी ये साड़ी राहुल ने दी हैं...

नानी - राहुल ने... पर ये तो मना कर रहा था कि तेरे लिये कुछ नहीं लाया...

मैं - नानी मैं मजाक कर रहा था...

नानी - बेटा साड़ी तो बहुत अच्छी हैं. पर बहुत जच री है. तु सबका कितना ख्याल रखता हैं.

नानी ने प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरा और मेरे माथे को चुम लिया...

मैं - नानी मैं किसी दूसरे के लिए थोड़ी लाया हूँ, आप तो मेरे अपने हो...

फिर मैं गाँव मे घूमने चला गया. थोड़ी देर घूम कर मैं वापिस आया और नानाजी के पास बैठ गया. उन्होंने खाना खा लिया था तो उन्हें दवाई दी. कुछ देर तक मैं उनके पास बैठा रहा...

फिर मैं भी खाना खाने के लिए किचन मे आ गया... तो मामी बोली तुम बैठो मैं लाती हूँ...

मैं हॉल मे बैठ गया, मामी मेरे लिये खाना ले आई. वो मेरे पास बैठ गई...

मामी - अब तुम नाराज नहीं हो ना राहुल...

मैं - मामी मैं आप से नाराज कब था...

मामी - रात को, मैंने साड़ी के लिये मना कर दिया था तब...

मैं - नहीं मामी मैं नाराज नहीं था...

मामी - मुझे लगा तुम नाराज हो गये हो...

मैं - अच्छा... इसलिए आपने ये साड़ी पहनी हैं...

मामी - हां, मुझे लगा तुम नाराज हो इसलिए... कैसी लग रही है साड़ी...

मैं - बहुत अच्छी लग रही है. आप तो हीरोइन जैसे लग रहे हो...

मामी - झूठा..कुछ भी बोलता है..

मैं - मामी आप बहुत ब्यूटीफुल लग रहे हो. हॉट एंड सेक्सी...

मामी - धत्त्.. बेशरम मामी को कुछ भी बोलता है...

मैं - इसमें बेशरम क्या. आप बहुत अच्छे लग रहे हो...

मामी अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई. खासकर हॉट सुनकर...

मामी - सच मे मैं अच्छी लग रही हूँ...

मैं - हाँ.. आप किसी से भी पूछ लो...

तभी मामी बोली ये तुम्हारे होंठ को क्या हुआ है, मैंने कल देखा था, तब मैं पूछना भूल गई थी..

मामी की बात सुनकर मैं हड़बड़ा गया,ये निशान शीला की वजह से थे. उसने मुझे काट लिया था... हडबडाने से खाना गले मे अटक गया और मैं खांसने लगा.

मामी मेरे लिये पानी ले आई.

मामी - राहुल थोड़ा आराम से...लो पानी पिओ...

मै पानी पीते पीते सोचने लगा कि मामी को क्या बोलु...

मैं - मामी वो खेत मे सोया था ना तो वहाँ पर मच्छरों ने काट लिया...

मामी- मच्छर ने काट लिया.!

मैं - हां, वहां पर मच्छर बहुत हैं...

मामी ने कुछ सोचा और कहा...

मामी - ठीक हैं...

फिर मामी कुछ नहीं बोली, मैंने जल्दी से खाना खाया और बाहर आ गया, ताकि मामी और सवाल ना करने लगे...

शाम को मैं नानाजी को चोक मे टहलाने लगा. नानाजी की हालत मे अब काफी सुधार हो गया था.

रात को मैं अपने कपड़े बैग मे डालने लगा... परसो मैं वापिस घर जा रहा था. नानाजी की तबियत भी अब ठीक थी, और मुझे हुए भी 15 दिन से ज्यादा हो गये थे.

सुबह मैंने हमेशा की तरह अपने काम किये. नानाजी की मालिश की और दवाईयां दी. फिर मैं भी नहा धोकर रेडी हो गया...

 


# अपडेट - 95

कल मैं जाने वाला था तो सोचा कि एक बार शीला से मिल लुं...

मैं बाहर घूमने का बोलकर घर से निकल गया और खेत की तरफ चल पड़ा. मुझे पता नहीं था कि पप्पू है या नहीं...फिर भी मैं चल पड़ा.

कुछ ही दूरी पर पप्पू मिल गया. मैंने पूछा की कहां जा रहे हो तो वो बोला कि - गाँव मे चौपाल पर ताश खेलने जा रहा है.

पप्पू की बात सुनकर बहुत खुशी हुई. उसने पूछा कि मैं कहाँ जा रहा हूं. तो मैंने झूठ बोल दिया कि मैं तो गाँव मे ही घूम रहा हूँ.

फिर मैं खेत की तरफ चल पड़ा. खेत मे पहुंचकर जल्दी से शीला को नंगी किया, और उसके सांवले बदन का रसपान करने लगा.

एक बार उसकी चुत और एक बार गांड़ मारी. इस बार उसे गांड मरवाने मे पहले से कम दर्द हुआ.

मैंने जब उसे बताया कि मैं कल जा रहा हूँ, तो वो उदास हो गई. वो मुझे कुछ दिन रोकने लगी... तो मैंने उसे बताया कि अब मैं और नहीं रूक सकता..

तो वो कहने लगी कि वो अब मेरे लंड के बिना कैसे रहेगी... उसे तो आदत हो गई हैं..

तो मैंने उसे समझाया कि - तुम अपने पति को रिझाओ. उसे अपनी अदाए दिखा . जिससे वो तुझे रोज चोदेगा... और तेरे काबू मे रहेगा और तेरी बात मानेगा...

मेरी बात सुनकर वो बोली की वो जरूर कोशिश करेगी.

मैं जब चलने लगा तो उसने मेरा नंबर ले लिया, ताकि उसका मन हो तो वो बात कर सकें...

उसे नंबर दे कर मैं वहां से आ गया...

रात को सबने साथ मे बैठकर ही नानाजी के कमरे मे खाना खाया. पर मामी ने नहीं खाया... कल मैं जाने वाला था तो सभी उदास थे.

सुबह मैं जल्दी ही निकलने वाला था, ताकि धूप ज्यादा होने से पहले मैं घर पहुंच जाऊं... पर नाना नानी ने कहा की शाम को को चले जाना.

अगले दिन

मैं अपना सामान लेकर नीचे आ गया... सभी नीचे ही थे... मैंने सबका आशीर्वाद लिया...

नानी - तु चला जायेगा तो घर सुना हो जायेगा...

नानाजी - हां, तु इतने था तो पता ही नहीं चला कि दिन कैसे निकल गये...

मैं - नाना नानी.. मैं आऊंगा ना थोड़े दिनों मे. आप उदास मत होईए...

मामी - राहुल के होने से घर मैं रौनक थी...

नानी - हाँ रौनक थी... राहुल बेटा तु जल्दी आना...

मैं - जी नानी जल्दी ही आऊंगा...

फिर मैं बुलेट लेकर निकल पड़ा घर की तरफ. मैं आराम से ड्राइव करता हुआ घर पहुँच गया... घर पहुंचते पहुंचते अंधेरा हो गया...

***

कहानी अच्छी लगे तो अपने विचार जरूर दीजिये... Thanks For Reading...

 


# अपडेट - 96

फिर मैं बुलेट लेकर नानाजी के घर से निकल पड़ा अपने घर की तरफ. मैं आराम से ड्राइव करता हुआ घर पहुँच गया... घर पहुंचते पहुंचते अंधेरा हो गया...

आगे....

मैं सीधा किचन मे मम्मी के पास गया. मुझे देखते ही वो खुश हो गई...

मैं उनके गले लग गया, जो प्यार माँ के आँचल मे हैं वो कहीं नहीं हैं...

मम्मी - आ गया तु...

मैं - मैंने आपको बहुत मिस किया...

मम्मी - मैंने भी.. तेरे नाना कैसे हैं...

मैं - पहले से बहुत ज़्यादा ठीक है. मैं जो गया था ठीक तो होने ही थे..

मम्मी (मुस्कुरा कर)- हां.. सही हैं

हम कई देर तक बातें करते रहे... रात को हम खाना खा रहे थे तो...

पापा बोले - राहुल.. तुम्हारी ठाकुर के साथ कुछ बात हुई हैं क्या...

मैं - नहीं तो पापा. क्यों..?

पापा - तेरे जाने के बाद मुंशी जी दो बार आ गये तेरे बारे मे पुछने...

मम्मी - हां राहुल, कोई बात है क्या...

मैं - नहीं मम्मी कोई बात नहीं है...

पापा - उन्होंने कहा की तु आये तो हवेली मे ठाकुर से मिलना...

मैंने झूठ बोल दिया - वो ठाकुर ताऊजी को मेरी कॉलेज मे कुछ काम था तो बस वो ही बात होगी...

मम्मी - तब ठीक है...

पापा- तु कल मिल लेना...

मैं - जी.. ठीक

खाना खाकर मैं कुछ देर TV देखता रहा, आज मैं थक गया था तो सुबह जल्दी उठना नहीं था. मैंने मम्मी को भी बोल दिया कि मैं आराम से उठुंगा..फिर सो गया...

सुबह मैं सो रहा था तो मुझे अपने ऊपर वजन महसूस हुआ.. जैसे मेरे शरीर पर वजन रखा हुआ हैं.जैसे कोई लेटा हुआ हैं. जिससे अचानक से मेरी आंख खुल गई.

आंखें खुलते ही मुझे एक हसीन चेहरा दिखा, जिसे देखते ही मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई... वो हसीन चेहरा पंकज का था. वो मेरे ऊपर लेटी हुई थी...

मैं - क्या बात हैं जान सुबह सुबह... आज बहुत प्यार आ रहा हैं... मम्मी पापा ने देख लिया तो गड़बड़ हो जायेगी

पंकज ने मेरी तरफ देखा और अपना मुंह दूसरी तरफ कर लिया..

और बोली - चाचा चाची मंदिर गये हैं, और मुझे कोई बात नहीं करनी मैं नाराज हूं आपसे...

पंकज की बात सुनकर मुझे हंसी भी आई और प्यार भी. नाराज है तो यहां क्या कर रही हैं...

मैंने पंकज की पीठ पर हाथ रखकर उसे बाहों मे भरकर मैं बोला - क्या हुआ.. मेरी रानी नाराज क्यों हैं... मैंने क्या किया है.

पंकज - अच्छा तो अब पता ही नहीं है, क्या किया है...

मैंने पंकज के चेहरे को अपनी तरफ किया और जीभ से उसके होंठों को चाटने लगा. और बोला - क्या किया है मैंने...

पंकज - आप मुझे बिना बताये क्यों चले गये. बता नहीं सकते थे. इतना भी हक नहीं हैं क्या...

मैं - अच्छा तो ये बात है... मेरी भोली रानी उस दिन मम्मी ने आकर मुझे बताया कि जाना है और मैं कुछ ही देर मे निकल गया था. सब बहुत जल्दी हुआ था और तुम तब घर पर नहीं थी...

पंकज - झूठ मत बोलो...

मैं - अच्छा मैं झूठ बोल रहा हूँ... तब तुम ताईजी और संगीता भाभी के साथ कहीं गई थी, मैंने रौनक से पूछा था...

मेरी बात सुनकर पंकज सोचने लगी और बोली - हाँ... उस दिन *** काकी के घर पूजा थी तो वहाँ गई थी.

मैं - मैं तो झूठा हूँ ना, चलो हटो मुझे जाने दो, और मैंने पंकज के ऊपर से हाथ हटा लिये और उसे हटाने लगा.

पंकज ने मेरे हाथों को पकड़ लिया और बोली - अपनी रानी को माफ कर दो, और उसने मेरे होंठो को अपने होंठों मे दबा लिया. वो मुझे किस करने लगी. पहली बार था कि वो खुद मेरे होंठो का रसपान कर रही थी.

मैं भी कौनसा उससे नाराज था, मैं भी उसके रसीले होंठों को चुसने लगा. मैंने उसे बांहो मे भर लिया, उसने भी मुझे कस लिया...

कुछ देर मे पंकज ने मेरे होंठो को आजाद किया, और मेरे चेहरे को चुमने लगे. उसने पूरे चेहरे को अपने होंठों से नाप लिया...

आज वो अलग ही रूप मे थी...

मैंने पंकज के चेहरे को हाथों मे लिया, उसकी आँखें चमक रही थीं.

मैं - क्या बात है, आज इतना जोश और प्यार कैसे...

पंकज ने पास मे टेबल से एक कटोरी ऊठाई और बोली - पहले मुँह मीठा करो...

मैं - किस खुशी मे...

पंकज (बनावटी गुस्से मे )- पहले चुपचाप मुँह खोलो...

मैंने चुपचाप हलवा खा लिया...

मैं - अब तो बताओ क्या बात हैं...

 


अपडेट - 97

मैं - अब तो बताओ क्या बात हैं...

वो कुछ नहीं बोली. पंकज के चेहरे पर अलग ही खुशी के भाव थे.

उसने मेरा हाथ पकड़ा और उसे हम दोनों के बीच ले आई. और उसने मेरा हाथ अपने पेट पर लगा दिया... मुझे कुछ समझ नहीं आया...

पर जैसे ही मुझे समझ आया मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा...

मैं - सच मे...

पंकज ने अपनी गर्दन हां मे हिलाई और अपने चेहरे को मेरे सीने मे छुपा लिया... मुझे खुशी भी रही थी और अजीब भी लग रहा था कि वो मेरे बच्चे की माँ बनने वाली हैं. मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा भी होगा...

फिर वो बोली - थैंक्यू मेरे राजा... आपने मुझ पर बहोत बड़ा अहसान किया है. आपने मुझे खरीद लिया है...

मैंने उसे पलट दिया, अब वो नीचे और मैं ऊपर था. मैं उसके गोरे, मखमली पेट के पास आ गया...

मैं - मैंने कोई अहसान नहीं किया..

मैं पेट को प्यार से चुमने लगा. आखिरकार मेरा खून जो था.

मैं पेट को चुमते हुए पंकज के ऊपर लेट गया, और उसकी गर्दन को चुमते हुए बोला - तो रानी मुझे क्या गिफ्ट दोगी...

पंकज - क्या चाहिए आपको...

मैं - मैं चाहता हूं कि जैसे हमेशा मैं तुम्हें प्यार (चुदाई) करता हूं ना, तो आज तुम भी मुझे वैसे प्यार करो...

पंकज कुछ नहीं बोली...

मैंने चेहरा ऊपर किया और उसकी तरफ देखते हुए बोला - क्या हुआ.. नहीं करोगी...

पंकज - बिल्कुल करूंगी, आज पहली बार मुझसे कुछ मांगा है आप ने...

फिर अचानक से वो पलटी और ऊपर आ गई, अपनी पतली-2 लंबी बाहें मेरे गले में लपेट दी और मेरे सीने से लिपट गयी...

हम दोनो के होठ एक दूसरे से जुड़ गये.. और हम दोनों एक गहरे स्मूच में खो गये..

आज वो अलग ही जोश मे थी.. मैंने भी उसके निचले होठ को अपने मूह में भर लिया और उसके मुंह में अपनी जीभ डालने की कोशिश करने लगा... उसका मुंह खुल गया और मेरी जीभ उसके मुंह में घुसकर खेलने लगी..

मेरे हाथ उसके गोल-मटोल सुडौल नितंबों को मसलने लगे... पंकज की आँखें मस्ती में डूब गई. हमारी सांसे भरने लगी तो हम अलग हुए...

पंकज जोर जोर से सांसे ले रही थी... उसकी नजरे मेरी तरफ थी. वो मेरी आंखों मे देखते हुए ब्लाउज उतारने लगी. ब्लाउज के उतरते ही ब्रा मे कैद रसीले आम मेरे सामने आ गये.

मेरे हाथ उसके कुल्हों से हटकर उसकी पीठ पर आ गये. मेरी उंगलियों ने ब्रा को उस कटीले बदन से अलग कर दिया.

मेरा डंडा फुल अकड़ चुका था और इस समय उसकी गांड और चूत के होठों को सहारा दिए हुए था. वो उस पर अपनी गांड और चूत के होठों को घिस रही थी...

उसने अपना लंहगा और पेंटी को भी अलग कर दिया.. मेरी आँखों के सामने उसका रसीला बदन था.

मैं उसके बोबो को दबोचने वाला ही था कि वो साईड हो गई. मैं उसकी तरफ देखने लगा. उसने जल्दी से मुझे भी नंगा कर दिया.

और मेरे ऊपर आ गई. और अपने बोबो को मेरी आँखों के सामने कर दिये... मेरा मन भी उन्हें खाने के लिए मचलने लगा...

उसके अंगूर के दाने जैसे निपल कड़क होकर मुझे निमंत्रण दे रहे थे.

उसने बड़े प्यार से अपने एक बोबे को पकड़कर मेरे मुंह मे डाल दिया. मैं एक चुचे को जोर से चुसने लगा.

पंकज - उफ़फ्फ़...हां ऐसे ही चुसो... इस्से..खा.. जाओ.. आहह...

लिए पंकज थोड़ा नीचे आई और उसने मेरी छाती पर चुम्बन करना और फिर चूसना शुरू कर दिया...

वो मेरे महीन निप्पलो को मुँह में लेकर चूस रही थी, वो मेरे पूरे शरीर पर चुम्बन कर रही थी. मेरे पूरे शरीर मे करंट सा दौड़ रहा था.

वो धीरे धीरे मुझे चुमते हुए नीचे बढ़ रही थी. वो अब मेरे लंड के पास आ गई थी.

उसने एक हाथ से मेरे‌ लंड को पकड़ लिया था. जिससे मेरे लंड ने हल्की ठुनकी सी खाई.वो मेरी तरफ देखने लगी. मैं भी उसकी तरफ ही देख रहा था. वो समझ गई कि मैं क्या चाहता हूं..

बगैर कुछ बोले मेरे लंड को मुँह में लेने के लिए वो उस पर झुक गयी. इससे पहले मैं ही उसे बोलता था. पर आज वो खुद मेरा लंड चुसने वाली थी...

उसने धीरे से उसे अपने मुँह में भर लिया.

उफ्फ... क्या गर्म‌ गर्म‌ अहसास था पंकज के मुँह का. उसके वो नर्म‌ नर्म नाजुक होंठ और उसके गर्म गर्म गीले मुँह की‌ गर्मी...मेरे लंड से होते हुए मेरे पूरे बदन पर चढ़ने लगी थी.

मेरे लंड को चूसते हुए पंकज ने अब अपनी लचीली गर्म जीभ को भी धीरे धीरे मेरे सुपाड़े पर घुमाना शुरू कर दिया.आज वो मुझे पूरा मजा देना चाहती थी. आज बहुत मजा आ रहा था लंड चुसाने का.

कुछ देर चुसने के बाद पंकज ने लंड को मुंह से निकाल दिया. मैं उसकी तरफ देखने लगा.

उसने अपने पैर मेरी कमर के दोनों तरफ करके मेरे ऊपर बैठ गयी.

मेरे ऊपर बैठकर पंकज ने एक बार फिर से अब मेरी तरफ‌ देखा. इस बार उसकी आंखों में उत्तेजना के साथ साथ हल्की सी हया, शरम के भी भाव थे. तभी वो थोड़ा उठी और अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़कर उसे सीधा ही अपनी चुत के प्रवेशद्वार पर लगा लिया.

जैसे ही मुझे अपने लंड पर गर्म गर्म और गीली रसभरी का अहसास हुआ, खुशी के मारे मेरे लंड ने तुनक कर एक झटका सा खाया.

मेरे लंड को अपने चुत पर लगाकर वो अब धीरे धीरे उस पर बैठने लगी. उसकी चूत पहले ही गीली होने के कारण चिकनी हो रखी थी, इसलिए आसानी से ही मेरे सुपाड़ा पंकज की चुत में घुस गया. सुपाड़ा घुसने के बाद पंकज ने मेरे लंड पर से अपना हाथ हटा लिया और दोनों हाथ मेरे सीने पर रख कर धीरे धीरे मेरे लंड को अपनी चूत के अन्दर उतारते हुए उस पर बैठने लगी.

 


# अपडेट - 98

अब जैसे जैसे मेरा लंड उसकी चुत के अन्दर जा रहा था, वैसे वैसे ही पंकज रानी के चेहरे के भाव बदल रहे थे. शायद मजे के साथ साथ उसे हल्की पीड़ा का भी अहसास हो रहा था. मगर फिर भी वो रुकी नहीं. आधा लंड अपनी चुत में उतारने के बाद पंकज ने मेरी तरफ देखा.

पंकज ने अपने बोबे को मेरे आगे कर दिया, जिसे मैंने मुँह मैं भर लिया. वो मेरे माथे को चूमने लगी.और मेरे बालों को मसाज देती हुई, आँख बंद करके पूरी गान्ड मेरी जांघों पर रख दी...

एक साथ हम दोनों के मुंह से आवाजें, आंहे निकल गई, उसके मुंह से दर्द और मजे की आवाज थी तो मेरे मुंह से केवल आनंद की... और अब वो लंबी-2 साँसें ले रहे थे..

पंकज अब शांति से मेरी जांघों पर अपनी गान्ड को लंड पर रख कर बैठी थी, फिर उसने मेरे चेहरे के उपर झुक कर मेरे होंठो को चूम लिया और शरारती स्माइल अपने होठों पर लाकर बोली - सच में बड़ा कमाल का हैं मेरे राजा का.. कितनी बार भी लो ऐसे लगता हैं कि चीर डालेगा...

फिर धीरे धीरे उसने अपनी‌ कमर को आगे पीछे हिलाना शुरू कर दिया, जिससे मेरा लंड अब चुत की दीवारों पर घिसने लगा.

मैं - तो फिर शुरू करें अब..

मेरी बात सुनकर उसने अपनी गान्ड को धीरे से उपर उठाया, और मेरे आठ इंच से भी लंबे लंड को सुपाडे़ तक अपनी चूत के मूह तक लाई, और धीरे से बैठ गयी.

हम दोनो के अंगों में इतनी जोरदार सुर सुराहट हुई कि एक साथ दोनो की सिसकी निकल गयी और उनकी आँखें मूंद गई.

मैंने पंकज की दोनों चूचियों को हल्के हल्के दबाना और मसलना शुरू कर दिया. इससे उसके मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां फूटनी शुरू हो गईं और उसने अपनी कमर को‌ भी थोड़ी गति दे दी. अब धीरे-2 उसके उठने बैठने की गति बढ़ती जा रही थी...

उसने अपना मुँह ऊपर छत की तरफ किया हुआ था और मजे से - आआहह..इईईई श्श्शशश..आआह... अहह... इईईई..इश्श्शश...आआहह... की जोरों से सिसकारियां भरते हुए मेरे लंड की सवारी कर रही थी.

पंकज ने अपने दोनों हाथों से मेरी बांहों को पकड़ा हुआ था, और मेरे लंड पर बैठकर आगे पीछे हिल रही थी. इससे उसकी पूरी चुत मुझ पर घिस रही थी तो मेरा लंड भी उसकी चुत की दीवारों पर घिस रहा था. मैं भी अब मज़े से पंकज की दोनों चूचियों को दबा दबाकर मजे लेने लगा. तो वो भी अपनी कमर को हिला हिला कर मेरे लंड को अपनी चूत से चूसने लगी.

पंकज का ये बड़ा ही मादक और मनमोहक‌ अन्दाज था. कसम से बता रहा हूँ कि ये मेरी और पंकज की बेस्ट चुदाई मे से थी.

अभी तक मैंने ऐसी चुदाई कभी नहीं कि थी.मैं बयान नहीं कर सकता कि इस खेल में कितना आनन्द भरा है. ये तो उस वक़्त बस मैं समझ रहा था...

धीरे धीरे पंकज की कमर की हरकत अब तेज‌ होने लगी थी, उसने मेरे हाथों को छोड़ कर अब मेरे सीने‌ पर अपने हाथों को रख लिया और थोड़ा तेजी से अपनी कमर को हिलाने लगी‌. साथ ही‌ उसकी सिसकारियां भी अब तेज होती जा रही थीं.

पंकज की इस चुदाई से मैं तो मजे मे उड़ने लगा... वो लगातार ऊपर नीचे होकर चुद रही थी या फिर ये कहुं की अपनी चुत से मेरे लंड को चोद रही थी...

मेरे आनन्द की कोई सीमा नहीं थी, इसलिए उत्तेजना वश मैं अब थोड़ा सा उठ गया और एक चूची को अपने मुँह में भर लिया, जिससे वो और भी जोरों से सिसक उठी. उसने दोनों हाथों से मुझे अपनी बांहों में भर लिया, मैं भी उसकी तरफ चला गया , जिससे मैं अब उठकर बिस्तर पर बैठा सा हो गया‌.

चूची को चूसते हुए मैंने भी अब अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाकर उसके चुतडो़ को पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींच लिया. जिससे पंकज रानी मेरे लंड को अपनी चुत में घुसाये घुसाये ही मेरी गोद में बैठ गयी और हम दोनों के नंगे बदन एक दूसरे के साथ बिल्कुल चिपक गए.

पंकज की कमर की हरकत अब भी रूकी‌ नहीं थी. उसने अब अपनी बांहें मेरे गले में डाल ली थीं और जोरों से सिसकारियां भरते हुए अब भी लगातार अपनी कमर को हिला रही थी.

पंकज थक गई थी फिर भी वो उछलते हुए चुद रही थी. तो बोबो का रस पान करते हुए मैंने भी अब अपनी तरफ से धक्के लगाने शुरू कर दिए, जिससे पंकज की सिसकारियां अब किलकारियों में बदल गईं और उसकी‌ कमर‌ की‌ हरकत और भी तेज हो गयी.

पंकज अपनी बांहों‌ को मेरे गले में डाले हुए - ईईई श्श्शश... आआह.. ऊहह उऊंह... की सिसकारियां मारते हुए जोरों से मेरी गोद में ही मे‌रे लंड पर फुदक‌ने लगी थी.

मेरे लंड पर उछलते हुए पंकज ने अब दोनों हाथों से मेरी गर्दन को ऊपर उठा लिया. और अपने होंठों को मेरे होंठों पर लगा दिया...

मैं भी होंठों को अपने मुँह में भरकर उन्हें जोरों से चूसने लगा.

हमारा ये किस बड़ा ही मजेदार और वाइल्ड टाइप था.

 
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