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चैप्टर १०८७
मैन छोटी चाची से मिलने चला गया.
मुझे घर में देखते बड़ी चाची मेरे गैल लग गायी.
अवी-“चाची”
बडी चाची-“तुम तो बड़े हो गए”
अवी-“हाइट में तो आप से बड़ा हु”.
बडी चाची-“अपने काम से भी तू बड़ा हो गया है”
अवी-“मैं ने कुछ भी तो नहीं किया, कोमल और कविता अभी भी रो रही है”.
बडी चाची-“उनका रोना तू जल्दी बंद करेगा मुझे पता है,पर नेहा के साथ तू जो कर रहा है क्या वो ठीक होगा”?
अवी-“उसके सिवा दुसरा रास्ता नहीं है”.
बडी चाची-“पर नेहा का गुस्सा अभी तक कम नहीं हुआ है”
अवी-“जल्दी करूँगा”.
बडी चाची-“जो करना है करना चल खाना खाते है”.
अवी-“बहोत दिन हो गए आपके हाथ का खाना खाये हुए”
बडी चाची मेरे लिए खाना लेकर आ गयी. और अपने हाथ से मुझे खाना खिलाने लगी.
बडी चाची के हाथों से खाना खाने से मेरे ऑंखों में आँसु आ गये.
बडी चाची-“क्या हुआ, मिर्ची लगी”
मैने कुछ नहीं कहा और चाची के गले लग गया.
चाची ने जो आज तक मुझे माँ जैसा प्यार दिया था उसे याद करते मेरी ऑंखों में पाणी आ गया.
अवी-“माँ आपके हाथ के खाने से ही पेट् भरता है”.
मेरे मुह से “माँ” वर्ड सुनते ही बड़ी चाची के आँखों में भी पाणी आ गया.
छोटी चाची-“क्या कर रहे हो, अपनी माँ को रुला दिया”
बडी चाची-“ये तो ख़ुशी के आँसु है”.
अवी-“आप भी ना,मै अपनी माँ को क्यों रुलाऊंगा”
बडी चाची-“पहले खाना खा लो,फीर बाते करेंगे”
बडी चाची ने मुझे प्यार के साथ खाना खिलाया.
फिर मैंने थोड़ी देर बड़ी चाची के साथ बाते की और छोटी चाची को अपने कमरे में बुलाया.
१५ दिनों में मेरा कमरा पहले की तरह साफ था. ऐसा लग नहीं रहा था की में १५ दिन से यहाँ नहीं आया हु.
अवी-“चाची”
छोटी चाची-“मुझे चाची और दीदी को माँ”
अवी-“बड़ी चाची को आज के बाद माँ ही कहूंग,रहि बात आपकी तो आप मेरी धर्म पत्नी हो आप के गले में मेरे नाम का मंगल सूत्र है भूल गयी, सबके सामने आप मेरी चाची है पर अकेले में बीवी”
छोटी चाची-“फिर ठीक है”.
कवि –“न जाने हमारे बिच का फ़ासला कब मिटेगा आप कब माँ से बात करेगी”
छोटी चाची-“क्या बात है आज बिवी बड़ी याद आ रही है,यह सब निपट जाने दे फिर मैं दीदी को सब बता दूंगी मै भी तुम्हारे संग अब रहना चाहती हूँ तब तक वेट करो”
अवी-“चाची मैं अकेले में आपको नाम से बुलाना चाहता हु”
छोटी चाची-“अभी नहीं जब मैं दीदी से बात करुँगी तब हम साथ साथ रहेंगे तब जो बुलना हो बुला लेना,तब तक कण्ट्रोल करो”
अवी-“अब तक कण्ट्रोल ही कर रहा हूँ शादी शुदा होते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहा हु,क्या एक किस मिल सकती है”?
छोटी चाची-“यह भी कोई पुछने की बात है मै सिर्फ तुम्हारी हूँ मुझ पर सिर्फ तुम्हारा हक़ है, पर कुछ दिन के बाद तब तक ऊपर से जो करना है कर सकते हो”
चाची की इजाजत मिलते ही.
मैने चाची को अपनी बांहो में ले लिया और मै चाची के करीब गया और उन्हें कस कर गले लगा लिया १० मिनट बाद हमारा बंधन कुछ ढीला हुआ मैंने अभी भी चाची को अपनी बाँहों में पकड़ रक्खा था मैं उनके चेहरे के करीब अपना चेहरा लाकर उनके होठो पर अपने होठ रख दिए और उनके होठो को चुमने लगा चाची का चेहरा लाल होगया था वह अपनी ऑंखे बंद करके इसका पूरा आनंद ले रही थी
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छोटी चाची
मै धीरे धीरे उनके नीचले होठ को चुस रहा था और चाची मेरे ऊपर के होठ को चुस रही थी फिर मैंने अपनी जबान उनके मुह में सरका दी जिसका चाची ने स्वागत किया हमारी जीभ एक दूसरे के मुह में खेल रही थी
मै उनकी जीभ चुस रहा था क्या मीठी जीभ है चाची की अब चाची भी पूरा साथ दे रही थी एक दूसरे को किस करना चुसना चाटना एक दूसरे के होठ और जीभ को काटना हम एक दूसरे को जोश के साथ चूम रहे थे २० मिनट तक उस पोजीशन में रहे फिर मेरा हाथ चाची के दूध पर चला गया मैंने उन्हें हाथ में पकड़कर मसल दिया तब चाची होश में आई और मुझे धकेल दिया और अपनी साँसे कण्ट्रोल करने लगी,मैं भी तब तक होश में आगया,चाचि ने अपने आप को ठीक किया और और कहा
छोटी चाची-"अब तो खुश हो"
अवी-" कहा चाची,पर मैं इंतजार करूँगा,चाचि आपके पास नींद की गोली है”?
छोटी चाची-“हां है”
अवी-“मुझे चाहिये थी”.
छोटी चाची-“क्यों?
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मैन छोटी चाची से मिलने चला गया.
मुझे घर में देखते बड़ी चाची मेरे गैल लग गायी.
अवी-“चाची”
बडी चाची-“तुम तो बड़े हो गए”
अवी-“हाइट में तो आप से बड़ा हु”.
बडी चाची-“अपने काम से भी तू बड़ा हो गया है”
अवी-“मैं ने कुछ भी तो नहीं किया, कोमल और कविता अभी भी रो रही है”.
बडी चाची-“उनका रोना तू जल्दी बंद करेगा मुझे पता है,पर नेहा के साथ तू जो कर रहा है क्या वो ठीक होगा”?
अवी-“उसके सिवा दुसरा रास्ता नहीं है”.
बडी चाची-“पर नेहा का गुस्सा अभी तक कम नहीं हुआ है”
अवी-“जल्दी करूँगा”.
बडी चाची-“जो करना है करना चल खाना खाते है”.
अवी-“बहोत दिन हो गए आपके हाथ का खाना खाये हुए”
बडी चाची मेरे लिए खाना लेकर आ गयी. और अपने हाथ से मुझे खाना खिलाने लगी.
बडी चाची के हाथों से खाना खाने से मेरे ऑंखों में आँसु आ गये.
बडी चाची-“क्या हुआ, मिर्ची लगी”
मैने कुछ नहीं कहा और चाची के गले लग गया.
चाची ने जो आज तक मुझे माँ जैसा प्यार दिया था उसे याद करते मेरी ऑंखों में पाणी आ गया.
अवी-“माँ आपके हाथ के खाने से ही पेट् भरता है”.
मेरे मुह से “माँ” वर्ड सुनते ही बड़ी चाची के आँखों में भी पाणी आ गया.
छोटी चाची-“क्या कर रहे हो, अपनी माँ को रुला दिया”
बडी चाची-“ये तो ख़ुशी के आँसु है”.
अवी-“आप भी ना,मै अपनी माँ को क्यों रुलाऊंगा”
बडी चाची-“पहले खाना खा लो,फीर बाते करेंगे”
बडी चाची ने मुझे प्यार के साथ खाना खिलाया.
फिर मैंने थोड़ी देर बड़ी चाची के साथ बाते की और छोटी चाची को अपने कमरे में बुलाया.
१५ दिनों में मेरा कमरा पहले की तरह साफ था. ऐसा लग नहीं रहा था की में १५ दिन से यहाँ नहीं आया हु.
अवी-“चाची”
छोटी चाची-“मुझे चाची और दीदी को माँ”
अवी-“बड़ी चाची को आज के बाद माँ ही कहूंग,रहि बात आपकी तो आप मेरी धर्म पत्नी हो आप के गले में मेरे नाम का मंगल सूत्र है भूल गयी, सबके सामने आप मेरी चाची है पर अकेले में बीवी”
छोटी चाची-“फिर ठीक है”.
कवि –“न जाने हमारे बिच का फ़ासला कब मिटेगा आप कब माँ से बात करेगी”
छोटी चाची-“क्या बात है आज बिवी बड़ी याद आ रही है,यह सब निपट जाने दे फिर मैं दीदी को सब बता दूंगी मै भी तुम्हारे संग अब रहना चाहती हूँ तब तक वेट करो”
अवी-“चाची मैं अकेले में आपको नाम से बुलाना चाहता हु”
छोटी चाची-“अभी नहीं जब मैं दीदी से बात करुँगी तब हम साथ साथ रहेंगे तब जो बुलना हो बुला लेना,तब तक कण्ट्रोल करो”
अवी-“अब तक कण्ट्रोल ही कर रहा हूँ शादी शुदा होते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहा हु,क्या एक किस मिल सकती है”?
छोटी चाची-“यह भी कोई पुछने की बात है मै सिर्फ तुम्हारी हूँ मुझ पर सिर्फ तुम्हारा हक़ है, पर कुछ दिन के बाद तब तक ऊपर से जो करना है कर सकते हो”
चाची की इजाजत मिलते ही.
मैने चाची को अपनी बांहो में ले लिया और मै चाची के करीब गया और उन्हें कस कर गले लगा लिया १० मिनट बाद हमारा बंधन कुछ ढीला हुआ मैंने अभी भी चाची को अपनी बाँहों में पकड़ रक्खा था मैं उनके चेहरे के करीब अपना चेहरा लाकर उनके होठो पर अपने होठ रख दिए और उनके होठो को चुमने लगा चाची का चेहरा लाल होगया था वह अपनी ऑंखे बंद करके इसका पूरा आनंद ले रही थी
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छोटी चाची
मै धीरे धीरे उनके नीचले होठ को चुस रहा था और चाची मेरे ऊपर के होठ को चुस रही थी फिर मैंने अपनी जबान उनके मुह में सरका दी जिसका चाची ने स्वागत किया हमारी जीभ एक दूसरे के मुह में खेल रही थी
मै उनकी जीभ चुस रहा था क्या मीठी जीभ है चाची की अब चाची भी पूरा साथ दे रही थी एक दूसरे को किस करना चुसना चाटना एक दूसरे के होठ और जीभ को काटना हम एक दूसरे को जोश के साथ चूम रहे थे २० मिनट तक उस पोजीशन में रहे फिर मेरा हाथ चाची के दूध पर चला गया मैंने उन्हें हाथ में पकड़कर मसल दिया तब चाची होश में आई और मुझे धकेल दिया और अपनी साँसे कण्ट्रोल करने लगी,मैं भी तब तक होश में आगया,चाचि ने अपने आप को ठीक किया और और कहा
छोटी चाची-"अब तो खुश हो"
अवी-" कहा चाची,पर मैं इंतजार करूँगा,चाचि आपके पास नींद की गोली है”?
छोटी चाची-“हां है”
अवी-“मुझे चाहिये थी”.
छोटी चाची-“क्यों?
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