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Guest
इस बार जैसे ही मेरा लंड चूत में घुसा करार ही आ गया मुझे तो चूत का छेद लंड की मोटाई के हिसाब से खुला हुआ था बहुत ही सुन्दर लग रहा था वो मैंने वाही पर थोडा सा थूक टपका दिया और चिकनाई हो गयी चुदाई में और मजा आने लगा मंजू तो जैसे मस्ती में बावली सी ही हो गयी थी , ओहा आः उह आः आआआअह्ह्ह की आवाजे गोदाम में चारो तरफ गूँज रही थी मंजू बार बार अपनी गांड को पीछे करके मेरा पूरा सहयोग कर रही थी उसकी पीठ कंधो पर पसीने को अपनी जीभ से चाटने लगा मैं और उसको चोद रहा था हाय रे मंजू तेरा बहुत बहुत धन्यवाद
आज तो तूने मेरा दिन ही बना दिया वह मेरी जानेमन जैसे जैसे मेरी स्पीड बढती जा रही थी मेरे शरीर में खून का दौरा बढ़ता जा रहा था मंजू के पैर जवाब दे गए थे वो वैसे ही औंधी बोरी पर गिर गयी थी पर मैं रुकने वाला नहीं था मुझे अब मेरे बदन में जैसे शोले भड़क गए हो , ऐसे लग रहा था बस अब कुछ ही पलो की बात थी अन्डकोशो से मेरा खून वीर्य बनकर बिखरने को चल पड़ा था बस थोड़ी देर और , और तभी मंजू फिर से झड़ने लगी उसके मुह से तरह तरह की अव्वाजे निकल रही थी और उसके झड़ते झड़ते ही मेरा वीर्य भी निकल गया उसकी चूत को भरने लगा दोनों का रस जो मिला मजा ही आ गया
करीब आधे घंटे तक उसको अपनी बाहों में लिए मैं पड़ा रहा वहा पर बार बार चूमा उसको मैं एक बार और मंजू को रगड़ना चाहता था पर उसने दी नहीं हमने अपने कपडे पहने और घर में आ गये, मंजू ने मुझे ठंडी पेप्सी पिलाई और वादा किया की जल्दी ही फिर देगी वो मुझे , फिर मैं अपने घर आ गया
बड़े दिनों बाद मैंने तबियत से चूत मारी थी तो शरीर जैसे निचुड़ ही गया था घर जाते ही मैं सो गया फिर शाम को ही उठा, उठते ही मम्मी ने बताया की पिताजी खेत में है तुझे बुलाया गया है पहूँच जल्दी से मैं पंहूँचा वहा पर पिताजी जैसे आज मुआयना कर रहे थे हर चीज़ का
मुझे देख कर उन्होंने पुछा- पानी क्यों नहीं दिया सब्जियों को टाइम से
मैं- पिताजी, मेरा कोई दोष नहीं , चाचा की जिम्मेदारी है ये वो ही रहते है खेत पर
मुझे तो मजा ही आ गया अपना पल्ला तो झड गया अब चाचा जाने , पर मेरी ख़ुशी जल्दी ही काफूर हो गयी पिताजी ने उनसे बस इतना ही कहा की थोडा ध्यान से काम किया करो, फसल का नुकसान अपना नुकसान है , कम से कम दो डांट तो मारनी ही थी ,
मैंने पुछा- चाचा, पानी क्यों नहीं दिया ध्यान कहा है आपका
वो हडबडा से गए और बोले- तू तेरे काम से काम रख
मैंने भी सोच लिया था की जल्दी ही इनकी गांड पे लात मारनी है कुछ भी करके पर क्या वो समझ नहीं आ रहा था बिमला भी आजकल कुछ ज्यादा ही खुश रहने लगी थी ऊपर से चाचा के बदले बदले व्यवहार को अब चाची भी समझने लगी थी , कभी कभी वो बहुत चिडचिडा महसोस करने लगती थी मैं उनके हाल को बहुत अच्छे से समझता था पर मैं चाह कर भी उन्हें कुछ बता नहीं सकता था उनकी हालात भी मुझसे देखि नहीं जाती थी उनकी उदासी की वजह से मैं भी बुझा बुझा सा रहने लगा था
पढाई में भी मन नहीं लगता था नीनू काफ़ी बार पूछती थी क्या परेशानी है पर मैं टाल जाता था तो भी मेरी वजह से दुखी थी , मंजू की चूत मिल जाती थी तो गुजरा हो रहा था पिस्ता भोसड़ी की जैसे मामा के यहाँ ही बस गयी थी दस दिन से ज्यादा हो गए थे उसको आई ही नहीं थी वर्ना उस से मदद ले लेता , पर वो कहते है ना की कोई ना कोई रास्ता जरुर मिलता है उस दिन नोटिस बोर्ड पे सुचना पढ़ी की एक स्कीम आई है जिसमे कोई भी स्टूडेंट अगर एक घंटे काम करेगा तो उसको पचास रूपये मिलेंगे बहुत कम लोगो ने नाम लिखवाया जिसमे मैं भी था पर लोग जल्दी ही उकता गयी पर मैं हर दिन सो का एक नोट कमाता था
उस दिन मैं और नीनू क्लास बंक करके बैठे थे तो उसने जिद करली की आज तो बताना ही पड़ेगा तो मैंने उसको पूरी बात बता दी पर उसे कोई भी उपाय ना सूझा और ये बात तो तय थी की चाची को जब पता चलेगा तो घर में कलेश मचना ही था , तो बहुत विचार किया , नीनू ने भी यही कहा की बात तब बने जब चाची उनको रंगे हाथ पकडे वर्ना क्या पता बिमला खुद को बचने के लिए चाचा पर भी जबरदस्ती करने का इल्जाम लगा दे बात में दम था पर क्या करू कुछ समझ नहीं आ रहा था
उस दिन शाम को करीब चार बज रहे थे आज मेरा काम मास्टरों के शोचालय को चमकाना था , उसकी सफाई करनी थी हाथ में झाड़ू पोंचा और फिनाइल की बोतल लेकर मैं पंहूँचा उधर कैंपस तक़रीबन इस समय तक खाली हो ही जाया करता था तो मैं पंहूँचा और सफाई करने लगा एक पोर्शन को चमकाने के बाद मैं महिला शोचालय में गया और सफाई करने लगा तभी मुझे लगा की परले कोने की तरफ से किसी औरत की आवाज आ रही है मेरे कान खड़े हो गए मैंने पोचा छोड़ा और दबे पाँव उधर गया तो देखा की एक बाथरूम में गणित के मास्टर ने शांति मैडम को घोड़ी बनाया हुआ था मैडम की सलवार घुटनों पर पड़ी थी और मास्टर मजे से चोद रहा था
मैंने कहा ओह मास्टर जी बस शो खत्म,
मुझे देख कर दोनों हक्के बक्के रह गए मास्टर ने अपनी पेंट सम्हाई और भाग गया रह गयी मैडम और मैं मैडम अपनी सलवार बाँधने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और बोला- मैडम, शर्म नहीं आती आपको ऐसे ये सब करते हुए
मैडम ने नजरे नीची कर ली और बोली- किसी ...... को किसी को कुछ बताना मत तुम जो चाहे वो मैं करुँगी मेरी बहुत बदनामी हो जाएगी
मैं- थोड़ी देर पहले तो आपको गोल्ड मैडल मिल रहा था ना
मैडम कुछ ना बोली-
मैं – मैं तो सबको बताऊंगा
वो- नहीं मैं तुम्हारे पाँव पड़ती हूँ , किसी को मत बताना तुम जो चाहो मेरे साथ कर लो,
मैं- मुझे कुछ नहीं करना
मैडम- प्लीज् मैं बदनाम हो जाउंगी, मेरी नोकरी चली जाएगी
मैं- ठीक है पर आपको मेरा एक छोटा सा काम करना पड़ेगा
मैडम- जो तुम चाहो,
मैं- ठीक है जी, मैं कल आपको बताऊंगा
मैडम ने अपने कपडे सही किये बाल वाल बनाये और निकल गयी मैं सफाई करने लगा और तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया आईडिया क्या आया बस समझो बात बन ही गयी मुझे खुद पर यकीन था पर ये एक रिस्क था जिसमे चाची का घर आँगन टूट जाना ही था , आग से खेलने वाली बात थी मैंने सोचा था की किसी को बताना तो है नहीं पर सबूत जरुर होना चाहिए क्या पता कब जरुरत हो जाये , मेरे एक तरफ चाचा की बेवफाई थी तो दूसरी तरफ चाची की दोस्ती थी उलझ कर रह गए थे बस अपने आप में