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Raj sharma stories चूतो का मेला compleet

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इस बार जैसे ही मेरा लंड चूत में घुसा करार ही आ गया मुझे तो चूत का छेद लंड की मोटाई के हिसाब से खुला हुआ था बहुत ही सुन्दर लग रहा था वो मैंने वाही पर थोडा सा थूक टपका दिया और चिकनाई हो गयी चुदाई में और मजा आने लगा मंजू तो जैसे मस्ती में बावली सी ही हो गयी थी , ओहा आः उह आः आआआअह्ह्ह की आवाजे गोदाम में चारो तरफ गूँज रही थी मंजू बार बार अपनी गांड को पीछे करके मेरा पूरा सहयोग कर रही थी उसकी पीठ कंधो पर पसीने को अपनी जीभ से चाटने लगा मैं और उसको चोद रहा था हाय रे मंजू तेरा बहुत बहुत धन्यवाद

आज तो तूने मेरा दिन ही बना दिया वह मेरी जानेमन जैसे जैसे मेरी स्पीड बढती जा रही थी मेरे शरीर में खून का दौरा बढ़ता जा रहा था मंजू के पैर जवाब दे गए थे वो वैसे ही औंधी बोरी पर गिर गयी थी पर मैं रुकने वाला नहीं था मुझे अब मेरे बदन में जैसे शोले भड़क गए हो , ऐसे लग रहा था बस अब कुछ ही पलो की बात थी अन्डकोशो से मेरा खून वीर्य बनकर बिखरने को चल पड़ा था बस थोड़ी देर और , और तभी मंजू फिर से झड़ने लगी उसके मुह से तरह तरह की अव्वाजे निकल रही थी और उसके झड़ते झड़ते ही मेरा वीर्य भी निकल गया उसकी चूत को भरने लगा दोनों का रस जो मिला मजा ही आ गया

करीब आधे घंटे तक उसको अपनी बाहों में लिए मैं पड़ा रहा वहा पर बार बार चूमा उसको मैं एक बार और मंजू को रगड़ना चाहता था पर उसने दी नहीं हमने अपने कपडे पहने और घर में आ गये, मंजू ने मुझे ठंडी पेप्सी पिलाई और वादा किया की जल्दी ही फिर देगी वो मुझे , फिर मैं अपने घर आ गया

बड़े दिनों बाद मैंने तबियत से चूत मारी थी तो शरीर जैसे निचुड़ ही गया था घर जाते ही मैं सो गया फिर शाम को ही उठा, उठते ही मम्मी ने बताया की पिताजी खेत में है तुझे बुलाया गया है पहूँच जल्दी से मैं पंहूँचा वहा पर पिताजी जैसे आज मुआयना कर रहे थे हर चीज़ का

मुझे देख कर उन्होंने पुछा- पानी क्यों नहीं दिया सब्जियों को टाइम से

मैं- पिताजी, मेरा कोई दोष नहीं , चाचा की जिम्मेदारी है ये वो ही रहते है खेत पर

मुझे तो मजा ही आ गया अपना पल्ला तो झड गया अब चाचा जाने , पर मेरी ख़ुशी जल्दी ही काफूर हो गयी पिताजी ने उनसे बस इतना ही कहा की थोडा ध्यान से काम किया करो, फसल का नुकसान अपना नुकसान है , कम से कम दो डांट तो मारनी ही थी ,

मैंने पुछा- चाचा, पानी क्यों नहीं दिया ध्यान कहा है आपका

वो हडबडा से गए और बोले- तू तेरे काम से काम रख

मैंने भी सोच लिया था की जल्दी ही इनकी गांड पे लात मारनी है कुछ भी करके पर क्या वो समझ नहीं आ रहा था बिमला भी आजकल कुछ ज्यादा ही खुश रहने लगी थी ऊपर से चाचा के बदले बदले व्यवहार को अब चाची भी समझने लगी थी , कभी कभी वो बहुत चिडचिडा महसोस करने लगती थी मैं उनके हाल को बहुत अच्छे से समझता था पर मैं चाह कर भी उन्हें कुछ बता नहीं सकता था उनकी हालात भी मुझसे देखि नहीं जाती थी उनकी उदासी की वजह से मैं भी बुझा बुझा सा रहने लगा था

पढाई में भी मन नहीं लगता था नीनू काफ़ी बार पूछती थी क्या परेशानी है पर मैं टाल जाता था तो भी मेरी वजह से दुखी थी , मंजू की चूत मिल जाती थी तो गुजरा हो रहा था पिस्ता भोसड़ी की जैसे मामा के यहाँ ही बस गयी थी दस दिन से ज्यादा हो गए थे उसको आई ही नहीं थी वर्ना उस से मदद ले लेता , पर वो कहते है ना की कोई ना कोई रास्ता जरुर मिलता है उस दिन नोटिस बोर्ड पे सुचना पढ़ी की एक स्कीम आई है जिसमे कोई भी स्टूडेंट अगर एक घंटे काम करेगा तो उसको पचास रूपये मिलेंगे बहुत कम लोगो ने नाम लिखवाया जिसमे मैं भी था पर लोग जल्दी ही उकता गयी पर मैं हर दिन सो का एक नोट कमाता था

उस दिन मैं और नीनू क्लास बंक करके बैठे थे तो उसने जिद करली की आज तो बताना ही पड़ेगा तो मैंने उसको पूरी बात बता दी पर उसे कोई भी उपाय ना सूझा और ये बात तो तय थी की चाची को जब पता चलेगा तो घर में कलेश मचना ही था , तो बहुत विचार किया , नीनू ने भी यही कहा की बात तब बने जब चाची उनको रंगे हाथ पकडे वर्ना क्या पता बिमला खुद को बचने के लिए चाचा पर भी जबरदस्ती करने का इल्जाम लगा दे बात में दम था पर क्या करू कुछ समझ नहीं आ रहा था

उस दिन शाम को करीब चार बज रहे थे आज मेरा काम मास्टरों के शोचालय को चमकाना था , उसकी सफाई करनी थी हाथ में झाड़ू पोंचा और फिनाइल की बोतल लेकर मैं पंहूँचा उधर कैंपस तक़रीबन इस समय तक खाली हो ही जाया करता था तो मैं पंहूँचा और सफाई करने लगा एक पोर्शन को चमकाने के बाद मैं महिला शोचालय में गया और सफाई करने लगा तभी मुझे लगा की परले कोने की तरफ से किसी औरत की आवाज आ रही है मेरे कान खड़े हो गए मैंने पोचा छोड़ा और दबे पाँव उधर गया तो देखा की एक बाथरूम में गणित के मास्टर ने शांति मैडम को घोड़ी बनाया हुआ था मैडम की सलवार घुटनों पर पड़ी थी और मास्टर मजे से चोद रहा था

मैंने कहा ओह मास्टर जी बस शो खत्म,

मुझे देख कर दोनों हक्के बक्के रह गए मास्टर ने अपनी पेंट सम्हाई और भाग गया रह गयी मैडम और मैं मैडम अपनी सलवार बाँधने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और बोला- मैडम, शर्म नहीं आती आपको ऐसे ये सब करते हुए

मैडम ने नजरे नीची कर ली और बोली- किसी ...... को किसी को कुछ बताना मत तुम जो चाहे वो मैं करुँगी मेरी बहुत बदनामी हो जाएगी

मैं- थोड़ी देर पहले तो आपको गोल्ड मैडल मिल रहा था ना

मैडम कुछ ना बोली-

मैं – मैं तो सबको बताऊंगा

वो- नहीं मैं तुम्हारे पाँव पड़ती हूँ , किसी को मत बताना तुम जो चाहो मेरे साथ कर लो,

मैं- मुझे कुछ नहीं करना

मैडम- प्लीज् मैं बदनाम हो जाउंगी, मेरी नोकरी चली जाएगी

मैं- ठीक है पर आपको मेरा एक छोटा सा काम करना पड़ेगा

मैडम- जो तुम चाहो,

मैं- ठीक है जी, मैं कल आपको बताऊंगा

मैडम ने अपने कपडे सही किये बाल वाल बनाये और निकल गयी मैं सफाई करने लगा और तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया आईडिया क्या आया बस समझो बात बन ही गयी मुझे खुद पर यकीन था पर ये एक रिस्क था जिसमे चाची का घर आँगन टूट जाना ही था , आग से खेलने वाली बात थी मैंने सोचा था की किसी को बताना तो है नहीं पर सबूत जरुर होना चाहिए क्या पता कब जरुरत हो जाये , मेरे एक तरफ चाचा की बेवफाई थी तो दूसरी तरफ चाची की दोस्ती थी उलझ कर रह गए थे बस अपने आप में

 
उस शाम चाचा और चाची में किसी बात को लेकर थोड़ी सी बहस हो रही थी तो मैंने अपने कान लगा दिए चाची कुछ गिले शिकवे कर रही थी पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था , पता नहीं मेरे कान काम की बात को सुन ही नहीं पाते थे क्यों , अब सीधा उनके कमरे में भी तो नहीं जा सकता था न तो क्या करे बस आईडिया ही लगा सकते थे की क्या बात है पर जल्दी ही उनकी आवाजे बंद हो गयी तो मैं भी नीचे चला गया थोड़ी देर टीवी देखा एक साला दूरदर्शन पर कभी कुछ आता नहीं था और केबल टीवी घर वाले लगवाते नहीं थे हम तो दुखी ही दुखी थे

फिर मैं खाना खाकर सीधा सोने ही चला गया , रेडियो सुनते सुनते कब नींद आई पता नहीं चला पर रात को मेरी आँख खुली तो मैं देखा रेडियो बज ही रहा है तो बंद किया उसको और पानी पीने के लिए बहार आया तो देखा की आज छत पर चाची खड़ी है , अक्सर तो वहा मैं पाया जाता था था पर आज वो थी , मुझे तो उनके दिल का हाल पता था ही मैं उनके पास गया और बोला- नींद नहीं आ रही क्या

वो- शायद तुम्हारी बीमारी लग गयी मुझे भी

मैं- क्या बात है

वो- कुछ नहीं

मैं- चाची, कभी कभी मुझे लगता है की आप और मैं एक ही कश्ती के सवार है आप भी बातो को छुपाती है मैं भी वैसे ना तो एक दोस्त होने के नाते ही बता दो, वैसे भी बताने से दिल का बोझ कुछ कम हो जाया करता है

वो- कुछ बाते तू अभी नहीं समझेगा

मुझे हँसी आ गयी

मैं- चाचा से झगडा हुआ उसी का टेंशन है ना

वो- ना वो सब तो चलता रहता है

मैं- वो ही तो बात है ,

वो- आजकल ये कुछ बदले बदले से लग रहे है

मैं- वो तो है

वो- न पहले की तरह बात करते है ना और कुछ बस ऑफिस से आते है खाना खाया और खेत में , पहले तो बहुत मन मार कर जाते थे पर आजकल बड़ा दिल लगने लगा है इनका खेत में कुछ समझ में नहीं आता मुझे , आज मैंने पूछ लिया तो झगडा कर बैठे

मैं- शायद काम का बोझ हो आप तो जीवन साथी हो उनको मुझसे बेहतर जानते हो

वो- बात तेरी शायद ठीक हो पर उन्हें भी तो इतना गुस्सा नहीं करना चाहिए था , कोई परेशानी हो तो बता भी सकते है

मैं- आप मिया-बीवी सुलझाओ अपने मामले को अपने को क्या है , रात बहुत हुई है सो जाओ

वो अपने कमरे में चली गयी मैं अपने कमरे में

अगले दिन मैंने सुबह सुबह ही शांति मैडम को पकड़ लिया और उनको अपना प्लान बताया की कैसे चाचा को वो अपने जाल में फ़साये और मैं उनकी मैडम को चोदते हुए तस्वीरे ले सकू , मैडम बहुत नखरे कर रही थी की मैं ना दूंगी पराये आदमी को ये हो जायेगा वो हो जायेगा तो मुझे थोडा गुस्सा आ गया मैंने कहा बहन की लोडी मास्टर जी से तो लपालप चुद रही थी और अब नखरे कर रही है , देख ले वैसे भी तू लंड की भूखी है तेरा काम भी हो जायेगा और मेरा भी , राज़ी हो जा वर्ना आज के आज सबको तेरी कहानी पता चल जाएगी

तो बुझे मन से शांति मैडम ने हां, कर दी मैंने उसको समझाया की तू चाचा के ऑफिस में जा एक फर्जी काम करवाने को और उनको फसा ले तू बेशक उनको चूत मत देना बस मैं तेरे साथ उनकी कुछ फोटो खीच लू तो भी काम चल जायेगा

शांन्ति\- पर उन तस्वीरों में मैं भी आउंगी

मैं- तुजे कौन जानता है , तेरा बस इतना ही रोल है और मेरी जबान है तुझे, मेरी इतनी मदद कर दे मैं तेरे राज़ को सीने में दबा लूँगा

तो आखिर मैडम मान ही गयी तो मैं उनको लेकर चाचा की ऑफिस में आया चाचा का नाम बताया और प्लान समझाया मैडम ऑफिस में चली गयी मैं बाहर ही रह गया

दस मिनट, बीस मिनट बाद बीत गयी, मेरी बेचैनी बढ़ी करीब आधे घंटे बाद वो आई हम वहा से निकले और साइड में बैठ गए

मैं- क्या हुआ ,

वो- मैंने उनको वो कहानी बताई जो तुमने कहा था , पहले तो वो माने ही नहीं पर फिर मैंने थोड़ी अदाए दिखाई तो वो बोले- की काम थोडा मुस्किल होगा आपको भी मदद करनी पड़ेगी मुझे एक घंटे बाद इस रेस्टोरेंट में बुलाया है

मैं- चाचा बड़ी जल्दी में है तुम टेंशन मत लेना और वो जो भी कहे तुम हा कर देना

हमने और थोडा समय काटा, मैंने देखा की करीब घंटे भर बाद चाचा ऑफिस से निकले और सामने वाले रेस्तौरेंट में घुस गए, थोड़ी देर बाद मैंने शान्ति को भी भेज दिया और इंतज़ार करने लगा ये इंतज़ार करना भी बड़ा कठिन काम होता है पर क्या करे करना ही था करीब एक घंटे बाद वो लोग वहा से बहार आये चाचा ऑफिस में चले गए मैडम मेरी तरफ आने लगी ,

मैं- क्या हुआ

वो- तुम्हारा कहना सही था, तेरा चाचा पूरा ठरकी है मैंने कल उसे अपने घर आने का बोल दिया है

मैं- इतनी भी क्या जल्दी थी , कही उन्हें शक ना हो जाये

वो- तू टेंशन मत लेना सब काम सेट कर दिया है बस तू कल रात टाइम से पहूँच जाना

मैंने अपना माथा पीट लिया और बोला- जे तो चाह रहा है की तुम्हारी गांड पर लात दू, मैं रात को कैसे आ पाउँगा और तुम्हारे घरवाले भी तो रहेंगे ना

शान्ति- मैं तो अकेली रहती हूँ इसलिए रात का बोला ताकि पूरा काम आराम से हो सके

मैं- चल कोई ना मैं करूँगा कुछ ना कुछ जुगाड़, पर रात को फोटू कैसे खीचूँगा कैमरा का फ़्लैश भी तो होगा

मैडम-मेरे पास नए ज़माने का डिजिटल कैमरा है वो फ़्लैश बंद करके भी ठीक फोटो खीच लेता है , देखो मैं तुम्हारे लिए इतना कर रही हूँ, तुम भी अपने वादे पर रहना

मैं- टेंशन ना लो मेरी तरफ से

रात को गाँव से शहर आना मेरे लिए बहुत ही मुश्किल था बहुत सोचने के बाद मैने घर पे फ़ोन किया और कहा की कुछ काम से मैं कैंपस में ही रुकुंगा , मम्मी ने काफ़ी सवाल पूछे पर मैंने बस उतना ही कह के फ़ोन काट दिया और शान्ति के साथ उसके घर आ गया ,मैडम का दो कमरों का घर था मैडम ने मुझे बैठने को कहा और मेरे लिए पेप्सी ले आई

पिटे पीते मैं मैडम को पूरी बात समझाने लगा की कैसे क्या क्या करना है , अब मैंने मैडम पे थोडा गौर किया मैडम ३६-37 साल की तो होंगी रंग भी ठीक ठाक था थोड़ी पतली सी थी पर फिगेर मस्त था मैडम ने साड़ी पहनी हुई थी मुझे वैसे भी साडी वाली औरते बहुत पसंद थी मेरे मन में विचार आया की क्यों ना मैडम को ही चोद लिया जाए एक बार अब चूत की तलब किसे नहीं होती वैसे भी उस समय हम दोनों ही थे तो कोई परेशानी वाली बात नहीं थी

मैं- आपके परिवार में कौन कौन है

वो- मैं मेरे पति है और दो बचे है

मैं- यही रहते है

वो- नहीं पति दुसरे स्टेट में मास्टर है और बच्चे बोर्डिंग में है

मैं- आप ऐसे काम क्यों करती हो

वो- पता नहीं कैसे मुझे लत लगगई अब तो आदत हो चली है

मैं उनके पास गया और उनकी जांघ को सहलाने लगा मैडम भी समझ रही थी पर वो मुझ से दूर होने लगी मैं –“मैडम जी मुझे भी एक बार गोता लगा लेने दो आपकी झील में ”

वो- देखो तुम .............

मैं मैडम की छाती पर हाथ लगाते हुए- मैडम जो आपको तो मजे लेने की आदत है तो कर्लोना मेरे साथ भी

मैडम बस मुस्कुराने लगी

मैंने उसकी साडी का पल्लू हटाया और उसके बोबो को दबाने लगा मैं धीरे धीरे चूचियो से खेलने लगा तो मैडम भी जल्दी ही अपने रंग में आने लगी मैंने ऊनके ब्लाउज के हूँक खोलने शुरू किये और उसको उतार दिया मैडम ने सफ़ेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी मैंने उसे भी उतार दिया मैडम ने एक आह भरी मीठी सी मैंने उसकी पीठ पर एक चुम्बन अंकित किया वो मेरे आगे खड़ी थी मैं धीरे धीरे उसकी गेंदों से खेलने लगा मेरा लंड उनकी गांड से लगातार रगड खा रहा था

बोबो को सहलाते सहलाते मैं उनकी साडी को उतारने लगा फिर मैंने धीरे से उनके पेटीकोट ने नाड़े को खीच दिया नीली कच्छी मैडम की कसी हुई टांगो पर खूब फब रही थी मैंने उनकी जांघो पर अपना हाथ फेरा और मैडम को गोद में उठा कर उनके बेड की तरफ ले चला उन्होंने अपनी बाहे मेरे गले में डाल दी मैंने अब उनको पटका बेड पर अपने कपडे उतारने लगा जल्दी ही मेरा लंड खुली हवा में झूल रहा था मैडम की आँखे मेरे लंड पर जैसे जम सी गयी थी उन्होंने खुद ही अपनी कच्छी उतार दी और मुझे बोली- जरा मेरा पर्स ले आओ

मैं- दोड़ कर गया और दोड़ कर वापिस आया

 


मैडम ने पर्स से निरोध का पैकेट निकला और मेरे लंड पर लगा दिया, मैडम ने थोडा सा थूक अपनी चूत पर लगाया और टाँगे फैला ली उनकी ट्रिम बालो से झांकती चूत मेरे लंड को आमंत्रण दे रही थी , मैंने अपने लंड को चूत से भिड़ाया और पहले ही झटके में मेरा लंड चूत म, नहीं भोसड़े में घुसता चला गया मैडम की चूत बहुत ही खुली खुली सी थी पर अपने को मिल रही थी वो ही बहुत था मैंने उनकी जांघो पर अपने हाथ रखे और करदी कार्यवाही शुरू

मैडम की ताल से ताल मिलाते हुए मैंने चुदाई शुरू की मैडम एक नंबर की चुदासी औरत थी और चुदाई के हर लटके झटके में माहिर थी , मैं उनको चोदते चोदते उनकी चूची के काले निप्पल को अपने दांतों में दबा के शरारत करने लगा तो मेरी इस हरकत से मैडम को अपने जवान होने का अहसास होने लगा , मैडम के गले से स्वर फूटने लगे, वो नीचे से अपनी गांड को उठा उठा कर पटक रही थी मजा आ रहा था , उनकी निपल्स उत्तेजना के कारण ऊपर को तन गए थे मैडम और मैं लगातार एक दुसरे को तौलते जा रहे थे जैसे ही मैंने तेज तेज धक्का मारता मैडम भी अपने चुतड उठा उठा कर मजे ले रही है

अब मैंने चूची से मुह हटाया और उनके लिप्स की तरफ हो गया मैडम ने अपनी टांगो को ऊपर की तरफ उठा लिया लापा लापा ठप्प ठप्प करते हुए मेरी गोलिया उनके चुतड से टकरा रहा था मधुर ध्वनी के साथ मैडम की हर सांस मेरे मुह में जाकर कही खो रही थी, मैडम की सांस और मेरी सांस एक साथ चुदाई के संगीत पर थिरक रही थी उनकी चूत की चिकनी घाटी में लंड महाराज विध्वंस मचाये हुए थे, मैडम की आहे जल्दी ही पुरे कमरे में गूँज रही थी , मैं अब बेड से नीचे उतर गया और मैडम को किनारे पर खीच लिया और रख लिया दोनों टांगो को कन्धो पर नब्बे डिग्री का कौन बनाते हुए

मैडम तो मस्ती से दोहरी ही हो गयी थी इस पोज में मैडम ने अपनी आँखों को कर लिया बंद और अपने बोबो को खुद दबाते हुए चुदने लगी मैं अब दांत भींचे धडा धड उनको चोदने लगा अगले कुछ मिनट तक मैं बस तेज तेज उनको चोद्ता रहा मैडम की हिलती छातीया उनकी मनोदशा को बयान कर रही थी मैं अब झड़ने वाला था तो मैं अब उनके ऊपर लेट गया और जल्दी जल्दी धक्के मारने लगा करीब ५ मिनट बाद मैंने मैडम को अपनी बाहों में कस के दबा लिया और झड़ने लगा मेरा सारा वीर्य निरोध में इक्कठा होने लगा थोड़ी देर बाद मैं शान्ति के ऊपर से उतरा और बगल में लेट गया .

मैडम उठी और बाथरूम में चली गयी मैंने भी अपने कपडे पहन लिए मैडम ने उसके बाद चाय बनायीं और मुझे बढ़िया सा नाश्ता करवाया , शाम होने वाली थी तो अब हम लोगो को तैयारिया करनी थी मैडम ने मुझे बता दिया था की डिजिटल कैमरा को बिना फ़्लैश के कैसे यूज़ करते है

मैडम- पर तुम छुपोगे कहा पर

मैं- वाही सोच रहा हूँ

मैडम- परदे के पीछे

मैं- ना

वो- तो मैं सोचने दो

मैडम रसोई में बिजी हो गयी मैं गहन सोच में डूब गया की कैसे होगा क्या , बस यही पहला और आखिरी मौका था , मैंने ऊपर वाले से दुआ मांगी की सब सही निपट गया तो ग्यारह रूपये का प्रसाद चढाऊंगा , टाइम साला परीक्षा लेने पे आतुर हो गया पर मैंने भी सोच लिया था की चाहे कुछ भी हो शान्ति मैडम जब अपना जलवा दिखाएगी तो चाचा जैसा ठरकी जल्दी ही पिघल जाएगा ,

मैडम ने खाना लगा दिया था मैंने वाही पे खाया और फिर करीब घंटे भर बाद चाचा भी आ गए, मैं अलमारी के पीछे छुप गया, चाचा अन्दर आये तो उनके हाथ में दो पैकेट थे, उन्होंने वो शान्ति को दिए और अन्दर आ गए मैडम ने उन्हें सोफे पे बिठाया और थोडा पानी वाणी दिया मैडम भी फिर उनके पास ही बैठ गयी और उनकी बाते शुरू हो गयी

मैडम- सर मेरा काम हो तो जाये गा ना

चाचा- देखिये, भाभीजी काम बड़ा मुश्किल है वैसे भी आप दुसरे स्टेट की है तो यहाँ का मूल निवास ऐसे तो बन नहीं सकता ना

मैडम- तो फिर मेरे लिए मुश्किल होगी, आप दोपहर में तो बोल रहे थे की काम हो जायेगा

चाचा- मैंने कहा मुश्किल है , नामुमकिन नहीं

मैडम- तो कर दीजिये ना

चाचा- भाभीजी, आप को पता तो है ही की ऐसे पेचीदा कामो के लिए थोडा बहुत एडजस्ट करना तो पड़ता है ना

मैडम- वो तो मैं आपको बता ही चुकी हूँ नाऔर मैडम ने उनकी और कातिल स्माइल फेकी

चाचा मुस्कुराया , मैडम सरक कर चाचा के पास बैठ गयी और अपने आँचल को थोडा सा सरका दिया चाचा की नजर उन पर पड़ी तो आँखे लाल होने लगी, मैडम अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए बोली- तो क्या एडजस्ट करना चाहोगे क्लर्क बाबु

चाचा- आपको तो पता ही है मुझे क्या चाहिए

चाचा ने मैडम का हाथ अपने हाथ में लेकर दबा दिया मैडम थोडा सा और सरक गयी उनकी टाँगे आपस में रगड़ने लगी, मैडम मादक अंगड़ाई लेते हुए, मेरा काम जल्दी ही करना होगा और उन्होंने चाचा के लंड को पेंट के ऊपर से ही सहला दिया शान्ति बड़ी मस्त अदाकारी कर रही थी , चाचा ने मैडम के बोबो को मसल दिया तो मैडम अदा दिखाते हुए बोली- ऐसे क्यों करते हो, प्यार करने की चीज़ है प्यार कीजिए आराम से

चाचा मैडम को किस करने ही वाले थे की मैडम उठ कर रसोई में चली गयी और फिर थोड़ी देर में शराब की बोतल जो चाचा लाया था वो कुछ स्नैक और बरफ ले आई , चाचा सोच रहा होगा की आज तो ऐसे ही बिना बात के चूत का जुगाड़ हो गया पर उसको ये पता नहीं था की उसकी गांड टूटने का पक्का जुगाड़ कर रहा था मैं , मैडम ने गिलास में बरफ डाली और थोड़ी सी शराब पर चाचा ने पटियाला पेग ही बनवाया और दो पेग गटक गया फटाफट से और फिर मैडम को बिठा लिया अपनी गोदी में

मैडम- आह क्या करते हो आप

चाचा- भाभी जी, अभी कहा कुछ किया मैंने

चाचा ने मैडम के गाल चूमने शुरू किया शान्ति भी चुदक्कड औरत थी उसको तो बस लंड से मतलब था मैं सोचने लगा की ये साली बहक गयी तो प्लान की माँ चुद जाएगी , पर चाचा को मैडम के रूप-रंग में घोटना भी बेहद जरुरी था चाचा ने मैडम के ब्लाउज और ब्रा को उतार दिया था और बोबो के मसलते हुए बोला- “वह,भाभी जी वाह क्या मस्त करारी चूचिया है आपकी, मैं तो अभी से दीवाना हो गया हूँ आपका ”

मैडम- सब आप के लिए ही है जी भर कर लीजिये मजा आपकी खिदमत में हूँ मैं तो

चाचा खुश हो गया , उसने मैडम को अपनी गोदी में लिटा सा लिया था और मैडम के बोबो को चूमने लगा मैडम मचलने लगी, उनकी नजर मुझ पर पड़ी तो मैंने इशारा किया की इसको अऔर पिलाओ थोड़ी और कपडे उतारो , मैडम झट से उठी और बोतल को उठाते हुए बोली- पहले इसे तो ख़तम कर लो फिर जी भर के मुझे प्यार करना

चाचा- भाभीजी, इसमें वो नशा कहा जो आप में है, चाचा ने बोतल को सीधा ही अपने मुह में लगया और गतागत कुछ घूँट खीच गया , नशे और वासना से उनकी आँखे लाल होने लगी थी, मैं सोचने लगा की घर पे इनको देख कर कोई सोच भी नहीं सकता की ये इंसान इतना गिरा हुआ है

चाचा ने कुछ दारु मैडम के ऊपर टपका दी और उसको चाटने लगा , मैडम को घिन्न सी आने लगी थी पर वो करवा रही थी मैंने मन ही मन उनका बहुत धन्यावाद किया और कैमरा निकाल लिया चाचा मैडम के बोबे चूस रहे थे मैंने दो चार फोटो उतार लिए काफ़ी देर तक वो बोबो को निचोड़ता रहा मैडम भी धीरे धीरे से गरम होने लगी थी वो चाचा की बाहों में मचलने लगी उनके बोबे फूलने लगे थे फिर चाचा ने मैडम की साड़ी को हटा दिया मैडम के शरीर पर बस एक छोटी सी कच्छी थी, गुलाबी रंग की जिसने बस नाम मात्र के हिस्से को ही ढक रखा था चाचा ने मैडम की चूत को मुट्टी में भर के मसला तो मैडम कामुकता से मचलने लगी कमरे का वातावरण बहुत गरम हो गया था , खुद मेरा लंड मचल रहा था

चाचा ने धीरे से अपनी ऊँगली कच्छी में सरका दी और मैडम की चूत से खेलने लगा मैडम पर भी पूरी मस्ती चढ़ चुकी थी,मैडम ने अपनी बाहे चाचा के गले में डाल दी और उनको किस करने लगी साथ ही साथ उन्होंने चाचा की शर्ट भी खोल दी चाचा ने अपनी पेंट जल्दी से उतार दी दोनों नंगे हो गए थे चाचा का लंड तन के उनकी जांघो के मध्य में झूल रहा था, थोड़ी देर किस करने के बाद मैडम ने अपनी चालाकी दिखाई और दारू की बोतल उठा कर बोली- आज मैं आपको ऐसे पिलाऊंगी की आप हमेशा याद करेंगे की किसके साथ समय बिताया था

उन्होंने खुद पे शराब उदेलनी शुरू कर दी चाचा उनके बदन से नीचे टपकती बूंदों को चाटने लगे हूँस्न और शराब जब मिल जाये तो फिर इंसान कहा खुद पर काबू रख पता है मैडम अब सोफे पर बैठ गयी और अपने पेट पर शराब टपकाने लगी चाचा उनकी नाभि को चूसने लगे, बोतल इसी कशमकश ने आधी से थोड़ी ज्यादा हो गयी थी ऊपर से नीट चल रही थी तो नशा जल्दी ही उन्हें अपनी गिरफ्त में लेने वाला था और हुआ भी ऐसा ही ऊपर से मैडम ने गजब कर दिया वो चाचा का लंड चूसने लगी चाचा तो वासना में बह ही गया था उस समय में वो मैडम के मुह में लंड को आगे पीछे करने लगा वो एंगल एक दम सही था मैं तस्वीरे खीचने लगा फटाफट से

मैंने मैडम को इशारे से कहा की पोज़ दे कुछ तो मैडम ने लंड को मुह में से बहार निकाला और उनको किस करने लगी अब बनी ना बात, उसके बाद वो उनकी गोद में चढ़ गयी चाचा ने गोदी में उठा कर ही चुदाई शुरू की मैडम उनके लंड पर झूलने लगी , दोनों पूरी मस्ती में डूब चुके थे चाचा पूरी तरह नशे में उनको चोद रहे थे बडबडा रहे थे कुछ आधी अधूरी बाते , नसे से बोझिल वो मैडम पे चढ़े हुए थे, कबी मैडम को ऊपर ले कभी नीचे और मैडम भी हर बार ऐसा एंगल बना रही थी की जिसमे वो साफ़ साफ चोदते हुए दिखे, पर मैडम के शरीर की भी हदे थी जब मस्ती चढ़ी उनके सर पर तो वो सब कुछ भूल कर चुदने लगी अब उनको भी क्या कह सकता था मैं उनको तो हमेशा लंड की जरुरत रहती थी

तो दोस्तों करीब पन्द्रह बीस मिनट तक दोनों ने घमासान चुदाई मचाई, दोनों चोदु थे तो चुदाई धांसू होनी थी थी फिर चाचा मैडम पे पसर गए मैं अब अलमारी की आड़ में अच्छे से चुप गया , मैडम सोफे पर ही पड़ी थी चाचा उठे और एक पेग बनाया और पीने लगे,

मैडम- इतनी मत पियो, कही पीने के चक्कर में मुझे भूल ही जाओ

तो चाचा बोले- इसका नशा तेरे आगे कुछ नहीं बस दो पेग में अभी इसको ख़तम कर देता हूँ, दारू के साथ चूत मारने में बड़ा मजा आता है मुझे और मोका भी कम मिलता है तो आज अपने जी की करूँगा चाचा ने जल्दी ही बोतल को बिठा दिया और मैडम पर टूट पड़े, पूरी रात उन्होंने मैडम को दबा के बजाय डाला, मैडम तो मजे में ही उडती रही पूरी रात और मैंने अपना काम कर लिया सुबह करीब पांच बजे चाचा सो गया मैडम मेरे पास आई और बोली- काम हो गया ना

मैं- हां बहुत तस्वीरे हो गयी है पर अभी एक काम और करो आप , वो क्या

मैं- वो सोया पड़ा है अब आप पोस दो कुछ बेह्त्ररिन फोटू तो अभी लूँगा तो मैडम भी बिस्तर पर चढ़ गयी और किसी मस्त हेरोइन की तरह अदाए दिखने लगी, अपना काम हो गया था

मैं- ठीक है अब मैं चलता हूँ, और अब इनको मुह मत लगाना

वो- कभी कभी तो मिल सकती हूँ

मैं- देखो वो आपका रिस्क होगा , मैं न पडूंगा उसमे

मैंने कहा – कैमरा बाद में दे दूंगा ,

वो- जब भी मर्ज़ी हो दे देना

मैं उनके घर से निकल आया , अब करना भी तो क्या था उधर

बहार आके मैंने एक दूकान पे सुबह सुबह ही चाय मट्ठी का नास्ता किया और कॉलेज की तरफ निकल गया अब सुबह सुबह का टाइम था आँखे नींद की वजह से झुलस रही थी पर मेरे लिए एक समस्या और थी की फोटो धुल्वायेंगे कहा , किसी स्टूडियो में या लैब में तो करवा न सकू क्योंकि अश्लील माल था इसमें , सोच विचार में बहुत टाइम निकल गया ये नयी समसया था , दोपहर में मैंने नीनू को सारी बात बता दी तो वो बहुत हैरान हुई और बोली- देखो , तुम ये जो भी कर रहे हो उसका अंजाम तो सोचो तो सही

 


मैं- उसी से तो डरता हूँ मैं

वो- तो फिर सब कुछ हालात पर छोड़ दो ना , जब चाची को पता चलेगा तो वो टूट जाएगी, कोई भी औरत पति की बेवफाई को सह नहीं पाती, उनकी गृहस्ती टूट जाएगी

मैं- नीनू, सब पता है मुझे पर तू ही कोई रास्ता दिखा

वो- देखो तुम चाचा से बात करो तस्सल्ली से, थोड़ी मुस्किल होगी पर बात करो और रही बात उस बिमला की उसके साथ तुम सख्ती कर सकते हो पर वो भी तुम्हारे काबू में जब आएगी जब ऐसा ही सबूत उसका भी हो

मैं- बात तो सही है पर एक समस्या और है

वो- क्या

मैं- इन तस्वीरों कहा धुलवाऊंगा

वो- तुम ना एक दम लल्लू लाल हो , डिजिटल है ये इनकी प्रिंटिंग होती है

मैं- हां पर वो भी लैब में होगी ना बता कैसे करवाऊंगा

नीनू- मैं क्या जानू

मैं- तो बात वाही आ गयी घूम कर के

वो- एक काम हो सकता है,

मैं- क्या .....................

मैं- क्या

वो- सुनेगा तो बताउंगी ना

मैं- जल्दी बता

वो- देख तू शाम को काम करता है तो हर डिपार्टमेंट में जाता है ना

मैं- हां

वो- तो कंप्यूटर लैब में भी जाता है ना

मैं- हां पर उस से क्या

वो- घडेदी, तो लैब में रंगीन प्रिंटर है उधर प्रिंट ले ले ना

मैं- पागल हुई है क्या , कितना रिस्की काम है यार, ऊपर से वो इंस्ट्रक्टर उधर ही पड़ा रहता है बता कैसे होगा

वो- उसको हटाना पड़ेगा ना

मैं- देख तस्वीरे बहुत है , मुझे कम से कम घंटा भर तो चाहिए गा ना

वो- तब तो समस्या जटिल है

मैं- वो तो मुझे भी पता है उपाय बता ना तू कोई

वो- कुछ सोचने तो दे यार

मेरा एक तो दिमाग ख़राब हो रहा था ऊपर से मुझे नींद आ रही थी रात को जागा जो था ,अब फोटू है तो प्रिन्ट कहा करू यार , तभी मैंने कुछ सोचा

मैं- नीनू, मैं इंस्ट्रक्टर को किसी अहने से अगर उलझा लू तो तू ये प्रिंट निकाल लेगी

वो- हां, जिंदगी में बस ये ही देखना बाकी रहा है मेरे लिए , शर्म ना आ रही तुझे कहते हुए

मैं- यार कर ना मदद

वो- देख, यु कर प्रिंटर चुरा ले , मेरे घर पे भाई का कंप्यूटर बंद पड़ा है मैं उसपे निकाल दूंगी

मैं- थारो, दिमाग चल पड़ा है , कैसे चुराऊंगा प्रिंटर और दूसरी बात उसे कोई जेब में लेके थोड़ी न जा सकू

वो- देख रिस्क तो लेना पड़ेगा ना , कुछ ऐसा कर की लैब खाली मिल जाए ज्यादा ना थोड़ी देर के लिए ताकि कुछ तस्वीरे तो हाथ में आये

मैं- बात तो सही है , तो ऐसा कर तू रुक जा और दे चोकिदारी मैं करता हूँ कुछ

वो- तू मरवाएगा मुझे एक दिन

मैं- दोस्त का साथ न देगी तू

वो- भाड़ में जाये तेरी दोस्ती

मैं- तो सुन एक मस्त आईडिया आया है जिस से अपना काम हो सकता है

वो- क्या

मैं- अगर मैं प्रिंसिपल ऑफिस और रिकॉर्ड रूम के कंप्यूटर में कुछ गडबड कर दू दो इंस्ट्रक्टर उधर सही करने तो जायेगा उतनी देर में अपना थोडा बहुत काम कर लेंगे

वो- एक बात बता जरा, तू कोई फ़िल्मी हीरो है रिकॉर्ड रूम में आदमी रहते और प्रिंसिपल ऑफिस भी खाली नहीं रहता बता कैसे करेगा तू

मैं- तो फेर के करू कुछ तो बता

वो- मुझे ना पता लैब में ही ट्राई कर ले कुछ हो सके तो , बाहर तो फोटो लेनी फुल खतरा है

मैं- नीनुड़ी, नया प्रिंटर कितने का आएगा

वो- महंगा ही आता होगा

मैं- चल लैब में चलते है

वो- ना मैं ना जाती तू ही जा

मैं- ठीक है

मैं वहा से चला लैब की तरफ रास्ते में ही मुझे मंजू मिल गयी मैंने उसको इशारे से अपने पास बुलाया और बोला- मंजू एक मदद चाहिए करेगी क्या

वो- क्लास है मेरी बाद में कर दूंगी

मैं- छोड़ ना क्लास को और मेरी बात सुन

मैंने पूरी बात उसको बताई तो वो बोली- मैं ना कर सकू तेरी मदद कोई कुछ गड़बड़ हो गयी तो मैं तो गयी तूने क्या ठेका ले रखा है मुझे बदनाम करवाने का

मैं- भोसड़ी की, जैसे बहुत लहर चल रही है तेरी इज्जत की चल मेरे साथ चुप चाप

मैं उसको अपने साथ ले आया लैब में और एक कंप्यूटर पर बिठाया उसको , लैब खाली पड़ी थी उस समय

मंजू- जल्दी ही निपटा ले अपना काम कही फास ना जाए

मैं बस कैमरा को कंप्यूटर से जोड़ने ही वाला था की मेरी नजर लैब के कोने में पड़ी, वहा पर सामन रखा था कुछ मैं उधर गया तो देखा की लैब का सामान जैसे, की बोर्ड, डेस्कटाप, उनके पार्ट्स पड़े थे मेरी निगाह एक बॉक्स में गयी तो उधर प्रिंटिंग की कलर श्याई के कार्तिज़ थे, मेरे मन में एक विचार आया मैंने दो डिब्बे निकाले और मंजू के बैग में रख दिए

वो- क्या कर रहा है मरवाएगा क्या

मैं- साली चुप रह ना तू

वो- क्या चुप रहू चोरी कर रहा है तू

मैं- चुप रह जा और सुन किसी को कुछ पता नहीं चलने वाला

हम बात कर ही रहे थे की इंस्ट्रक्टर आ गया तो थोड़ी देर बाद हम वहा से खिसक लिए और मिले नीनू से

मंजू- तू तो मरवाएगा मुझे

नीनू- इसको भी पता है क्या

मैं- सुन, मैंने कलर, कार्त्रेज़ चुरा ली है

नीनू- तू क्या करना चाहता है, हमे तो प्रिंटर चाहिए ना

मंजू- पर तू प्रिंट क्या करेगा वो तो बता

मैं- बाद में बताऊंगा तू जा क्लास में

वो- अब कहे की क्लास अब तो मैं घर ही जाउंगी

मैं- ठीक है

नीनू- क्या सोच लिया

मैं- शांति मैडम के घर मैंने कंप्यूटर देखा था प्रिंटर होगा तो काम बन जायेगा वर्ना तक़दीर अपनी

वो- ट्राई करले

मैं- तू चलेगी

वो-ना तू ही जा

तो मैंने ली अपनी साइकिल और मोड़ दी मैडम के घर की तरफ , दो तीन बार घंटी बजायी तब मैडम आई सो रही थी शायद

वो- तुम यहाँ

मैं- और कहा जाऊंगा

 


अन्दर आके मैंने मैडम को प्लान बताया तो उन्होंने बताया की उनके पास प्रिंटर नहीं है मेरी तो सारी आस टूट गयी अब क्या करू मैं सारे रास्ते बंद जो हो गए थे ,

मैं- मैडम जी कोई तो उपाय करो

वो- कालिज की लैब में करले ना कोई मन नहीं करेगा

मैं- इंस्ट्रक्टर से क्या कहूँगा की नंगी फोटू का प्रिंट लेना है

मैडम मेरी गोदी में आ गयी और बोली- अगर मैं ये काम करवा दू तो

मैं- मैडम मेहर होगी आपकी , आपकी वजह से ही तो सबूत मिला है मुझे

मैडम- मेरे लंड पर अपनी गांड घिसते हुए- तो फिर ठीक है , जाके सुरेश जी को मेरा नाम ले दियो की शान्ति मैडम ने कहा है की लैब इस्तेमाल करने दू बिना रोक टोक के , और हां इतना ध्यान रखना की फोटो में मेरी शकल न आये, तुम्हारे सामने तो नंगी हो ही चुकी हूँ पर फिर भी ........

मैं- आप टेंशन मत लो , मेरा विश्वास रखो पहले तो मेरा इरादा कुछ और था पर आपने मेरी जो मदद की है वो बहुत बड़ी बात है , आपका त ओ एहसान हो गया है मुझे पर

मैडम- वो सब छोड़ो अभी क्या इरादा है वो बातो, मैडम मेरे सीने पर अपन हाथ फिराने लगी

मैं- मैडम जी अभी मैं लैब जाता हूँ , एक बार प्रिंट हाथ में आ जाये फिर तसल्ली हो जाएगी उसके बाद आप को भी खुश कर दूंगा

मैडम का मन तो तभी चुदवाने का था पर मैं अपनी उलझनों में उलझा पड़ा था तो मैंने फिर से अपनी खटारा साइकिल उठाई और पहूँच गया वापिस , और इंस्ट्रक्टर को बताया की शान्ति मैडम ने कहा है की लैब के कंप्यूटर को उसे कर लू ,

इंस्ट्रक्टर- मैडम जी न कहा है तो ठीक है वैसे तो कॉलेज बंद हो गया है एक काम करो ये लो चाबी, तुम्हारा काम हो जाये तो चाबी मेरे रूम में दे जाना , और ध्यान रखना कोई नुक्सान न होने पाए

मैं- बेफिक्र रहे सर

उसके जाते ही मैंने लैब को बंद किया और कैमरा को जोड़ दिया कंप्यूटर में तो फोटू मस्त दीख रहे थे पर प्रिंट इतना मस्त नहीं आ रहा था ऊपर से मैं कोई प्रोफेशनल तो था नहीं , जैसे तक्से करके छाप ली सारी के सारी , हां इतना था की देख के कोई भी पहचान सकता था अपना काम इतने में से भी हो सकता था , शाम को करीब ६ बजे मैं गाँव के लिए चला आधा घंटा और लग गया घर गया तो हाल बुरा था

मम्मी – आ गया नालायक तू, कहा रह गया था और कल क्यों नहीं आया

मैं- मैंने बहाना मार दिया पर उनको कोई विश्वास था नहीं मेरी बात पर मैं अपना बैग लेके ऊपर कमरे में चला गया, तो चाची मिली

वो- कल कहा थे तुम

मैं- कॉलेज में कुछ काम हो गयाथा तो रुकना पड़ा

वो—अजीब बात है तुम्हारे चाचा को भी कल ऑफिस में ही रुकना पड़ा

मैं- अच्छा , हो गया होगा कुछ काम

चाची मेरे पीछे पीछे कमरे में आ गयी और बोली- मुझे ना कुछ बात करनी है तुझसे , मुझे आजकल न एक अजीब सी फीलिंग हो रही है

मैं जानता था की उनको भी चाचा के व्यवहार से परेशानी हो रही है , पर मैं अभी मूड में नहीं था तो मैंने मना कर दिया और कपडे बदल कर घर से बहार चला गया

मैं दूकान की तरफ जा रहा था तो मुझे रस्ते में पिस्ता मिल गयी मैं उसे देख कर खुश हो गया उसने बस इतना कहा- रात को खेत पर मिलियो वाही बात करेंगे

हम पर तो जुलम ही हो गया बीच बाजार , पिस्ता आ गयी और आते ही न्योता भी दे गयी पर हमारी राशी में शनिदेव चाचा जी करे तो क्या करे, मैं वही से वापिस मुड गया और सीधा गया चाची के पास वो रसोई में सब्जी बना रही थी मैं जाके बोला – जी बात ऐसी है , आपकी मदद चाहिए अर्जेंट में

वो- क्या हुआ पैसे वैसे चाहिए क्या

मैं- ना , आज खेत में मैं जाना चाहता तू तो आप चाचा को मन लेना

वो- मेरी आजकल सुनते कहा है वो , ऐसे लगता है जैसे की बदल गए है

मैं- चाची बात ऐसी है की , मुझे आज अर्जेंट काम है किसी से और चाचा जी रहेंगे कुएँ पर तो मेरी परेशानी बढ़ेगी तो आप उन्हें माना लेना

वो- ऐसा क्या क्या काम है तेरा ,

मैं- फिर कभी बताऊंगा

वो- मैं कोशिश करुँगी

पर हमारी किस्मत में कहा सुख लिखा था साहेबान, चूत के नशे में डूबा इंसान कहा किसी की सुनता है मैंने बार बार कहा की आज मैं जाऊंगा खेत में पर चाचा ने पाना रॉब झाडा मुझ पर और चलने लगा घर से बाहर , मैंने फिर से कहा की मैं चला जाऊंगा तो वो गुस्से से बोले- के आग लग री साईं तेरे जो खेत में ही बुझेगी पढाई तो होती ना क़ानून दुनिया भर की

मैं मन ही मन में- आग तो जो तेरे है वो मेरे है , चाचू तो तेरी गांड एक मिनट में तोड़ दू , पर ये साली जुबान थी जो टाइम पे कभी खुलती नहीं थी मैं पैर पटकते हुए अन्दर जा ही रहा था की बिमला आ गयी

बिमला- क्या बात है देवर जी खफा खफा लग रहे हो

मैं- तू तेरा काम कर ना

वो क्या बात हुई

मैं- कुछ ना मेरा दिमाग थोडा खराब है

मेरा मन तो कर रहा था की अभी क अभी इसकी गांड पे दू साली तेरे मजे के चक्कर में हमारी लग गयी थी हमारा सुख स्वाहा हुए जा रहा था , पर हम भी पुरे रसिया थे ज़माने का कहा हमपे कोई जोर था पिस्ता से तो मिलना ही था कैद होती तो उसे भी तोड़ देता मैं , मुझे पता था टेंशन की तो कोई बात है नहीं , चाचा पहूँचे गा बिमला के घर ही , तो बस इंतज़ार था सबके सोने का , काम- धाम निपटा कर चाहि भी ऊपर आ गयी ,

और बोली- क्या बोल रहे थे तेरे चाचा

मैं- कुछ नहीं आजकल खेत में बड़ा मन लग रहा है उनका , पहले तो कभी जाते ना थे

वो- क्या कहना चाहता है

मैं- मुझे घर मन नहीं लग रहा था तो मैं सोचा की खेत में ही टाइमपास कर लूँगा

चाची- मैं सब समझती हूँ तेरे इरादे , चल सच बता क्या प्रोग्राम है तेरा

मैं- अब तो बस सोना है

वो- बाते ना बना , मुझे दोस्त समझता है ना तो बता किसलिए जाना था खेत में

मैं- बस ऐसे ही

वो- बता दे नहीं तो मैं बात नहीं करुँगी तुझसे , वैसे भी तेरी कितनी बात पता है मुझे क्या मैंने कही किसी से

मैं- मेरा ना चक्कर चल रहा है किसी से , तो बस उस से ही मिलने जन था पर आपके पतिदेव ने सारे प्लान की ऐसी तैसी कर दी , अब उनका तो इंटरेस्ट है ना आप में , तो दुसरो की जिंदगी भी परेशान कर रहे है वो

चाची मेरा कान मरोड़ते हुए- तुझे बहुत पता है इंटरेस्ट का , एक नंबर का कमीना हो गया है तू

मैं- छोड़ो चाची दर्द हो रहा है, मैं तो ऐसे ही बोल रहा था मुझे नींद आ रही है मैं सोऊंगा

 


पर मेरी बात सुके वो कही ना कही गंभीर हो गयी थी मैं तो अहेशा एक अनसुलझी पहेली में उलझा रहता था अपनों में मैं बेगाना रहता था , सब कुछ था मेरा पास पर फिर भी मेरे सीने में जो एक तूफ़ान धधकता रहता था , मेरी धडकनों में जो जोश था वो हर दम मुझसे कुछ ना कुछ कहता रहता था पर मैं उन इशारों को कभी समझ नहीं पाता था , मेरी धड़कने जिस से गुफ्तुफु करना चाहती थी वो इंसान मेरे पास नहीं था मैं कही टुकडो में जी रहा था वो कही जी रही थी, पता नहीं ऐसा क्यों होता था मेरे साथ जिस की भी मुझे चाह होती थी वो मिलता नहीं था , बस मैं था और मेरे दिल में सुलगते हुए मेरे अरमान थे, उन अरमानो का धुआ याद बनकर असमान में बादलो का रूप ले रहा था पर ये बादल कभी मोहब्बत की बारिश में मुझे भिगोते भी तो नहीं थे

करीब घंटे भर का इंतज़ार करने के बाद मैं चुपके से उठा और बहार आया, चाची के कमरे का लट्टू अब भी जल रहा था मतलब वो जाग रही थी , मैं जनता था की वो मुझसे हज़ार सवाल पूछेंगी जब उन्हें पता चलेगा की एक बार फिर से रात को मैं गहर से लापता था पर मैं भी अपने आप में उलझा था पिस्ता से मिलना भी तो बहुत जरुरी था मुझे , वो बस मेरे जिस्म की आग ही नहीं बुझाती थी बल्कि मुझसे जुडी हुई थी दिल का एक हिस्सा उसके लिए रिज़र्व था घर से निकल कर मैं चला सूनी गलियों में किसी चोर की तरह अँधेरे को चीरता हुआ खेत की तरफ

मैं अपने खेत पर गया पर कुएँ पर लगा था ताला, मतलब चाचा होगा बिमला के घर मने उस तरफ ज्यादा ध्यान दिया नहीं और अपने खेत को पार करके पिस्ता के खेत की तरफ चला , जल्दी ही वो मुझे दिख गयी पानी दे रही थी वो सलवार को घुटनों तक ऊपर किये हुए, उसकी गोरी पिंडलिया बड़ी मस्त लग रही थी , उसके मांसल जिस्म पर टाइट फिटिंग का सूट एक दम मस्त लग रहा था चुन्नी को सर पर किसी पगड़ी की तरह बाँधा हुआ था उसने , उसने मुझे अपनी तरफ आने का इशारा किया मैं दोड़ ते हुए गया और पिस्ता को अपनी बाहों में भर लिया और बिना कुछ कहे उसको किस करने लगा

मेरे उस चुम्बन में वना का कोई नामो निशाँ नहीं था बस वो एक ऐसी भावना था जिसे या वो समझती थी या मैं समझता था , थोड़ी देर बाद मैंने उसके शरबती होंठो से खुद को अलग किया और बोला- कितना टाइम लगाया तूने, मैं तो सोचा की वाही बस गयी है तू

वो- अब मैं तेरी तरह ठाली तो हूँ नहीं, तुझे पता है मेरी माँ कितना शक करती मुझे अकेली छोडती ही नहीं तो क्या करती मेरा जी जानता है कितनी मुस्किल से आई हूँ बस तेरे लिए

मैं- मैं भी तो पल पल तेरे लिए तदपा हूँ यार, हर पल मैं जो जी रहा हूँ मुझे ही पता है जब तू मुझे नहीं दिखती तो कसम से बहुत अजीब सा लगता है

पिस्ता ने मेरा हाथ थाम लिया

पिस्ता में मेरा हाथ थाम लिया अपने हाथ में आँखे आँखों से टकराई, ऐसे लगा की जैसे दिल के सितार के सारे तारो को किसी मधुर तान ने छेड़ दिया हो, एक ठंडी हवा का झोंका मेरे बदन से टकराता हुआ मुझे कुछ यु छुकर निकल गया की उसकी कंपकपी को आज भी महसूस करता हूँ मैं, वो मुझे देखे मैं उसे देखू चांदनी रात में खेत की गीली मिटटी पर हम दोनों धीरे धीरे से सुलगने लगे थे मेरी आँख से एक बूँद आंसू की निकल कर गिर पड़ी जिसे उस अँधेरे माहौल में भी पिस्ता की कजरारी आँखों ने देख लिया था

वो- क्या बात है कुछ परेशान लगते हो

मैं- नहीं ऐसी कोई बात नहीं

वो- अब मुझसे भी छुपाओगे तुम

मैं- यार, कभी कभी ऐसा लगता है की जैसे थक सा गया हूँ मैं, हर पल कुछ ना होते हुए भी ऐसा लगता है की जैसे मेरा सब कुछ छीन लिया हो किसी ने, पल पल हर पल खुद को अकेलेपन की इन्तहा तक अकेला महसूस करता हूँ मैं, पता नहीं मेरे मन में ऐसी कौन सी बात है जिसके बोझ से हर पल दबा रहता हूँ मैं, कभी अकेले में गुनगुनाने का मन करता है कभी जोर जोर से दहाड़े मार के रोने का मन करता है तू ही बता करू तो क्या करू

वो- देख, हर चीज़ को ना अपने ऊपर मत लिया कर, जो होता है होने दे तेरे कुछ चाहने ना चाहने से कोई फरक नहीं पड़ना , हर इंसान का जिंदगी को देखने का अपना नजरिया होता है कोई जहा खाए वो मरे तू मस्ती से जी जिंदगी बहुत लम्बी है अभी से थक जाओगे तो कैसे पार पड़ेगी, मेरे राजा जी

मैं- तो क्या करू

वो- करना है है मुझसे बाते करो, थोडा प्यार करो वो हसने लगी

मैं- तो चल फिर कुएँ पे

वो – ऐसे ना चलूंगी गोद में उठा के ले चल

मैंने पिस्ता को उठा लिया और ले चला कुएँ पर बने कमरे की तरफ आज फिर से हम दोनों अपनी हसरतो को परवान चढाने वाले थे , मैंने सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना शुर किया तो पिस्ता बोली- आह कस के मसल इसको बहुत दिन से प्यासी पड़ी हूँ , आज इसकी सारी खुजली मिटानी है

पिस्ता ने अपनी कच्छी और सलवार उतार कर साइड पे पटक दी और दिवार का सहारा लेकर अपनी मोटी गांड मेरी तरफ करके खड़ी हो गयी , मैं अपने कपडे उतारते हुए पिस्ता की गांड को देखने लगा

uffffffffffffffff कितनी प्यारी लग रही थी वो नंगा होते ही मैं उस से चिपक गया और पाने लंड को पिस्ता की गांड पर रगड़ने लगा पिस्ता ने मेरा हाथ अपनी छाती पर रख दिया और उसको दबाने लगी, आज पूरी तरह से चुदने को वो सुलग रही थी मैं उसके बोबो को दबा कर उनमे हवा भरने लगा

पिस्ता ने मेरे लंड के अगले हिस्से को अपनी मुट्ठी में लिया और उस पर अपनी उन्लियो से छेड़खानी करने लगी, मुझे मजा आने के साथ गुदगुदी भी होने लगी, पिस्ता ने अपनी आँखे बंद कर ली और मेरी मुट्ठी मारने लगी मैं भी हौले हौले से सिसकने लगा था मैंने अपना हाथ उसकी जांघो के बीच से लिया और उसकी चूत को दबाने लगा पिस्ता हूँस्न के बोझ से दबी पड़ी थी तो चूत हद से ज्यादा गीली हो गयी थी कामुकता धीरे धीरे अपना नशा चला रही थी हम पर मैं अब उसकी गांड की दरार को सहलाते हुए उसकी गांड के छेद पर आ गया था काम रस में सनी अपनी ऊँगली को मैं उसकी गांड के छेद पर रगड़ने लगा तो पिस्ता आहे भरने लगी

uffffffffffffffff कितनी गरम हो रही थी ये लड़की मैंने अपनी ऊँगली उसकी गांड में घुसना चालू किया तो पिस्ता अपने चुतड टाइट करने लगी पर मैंने जोर लगाते हुए थोड़ी सी ऊँगली अन्दर घुसा ही दी पिस्ता दर्द से उछल पड़ी और मेरी तरफ घूम गयी तभी मैंने उसके होंठो को चूम लिया और लग्भग आधी ऊँगली उसकी गांड में डाल दी पिस्ता दर्द से उछलने लगी मलाई दार होंठो को चूसते चूसते मैं उसकी गांड से छेड़खानी करने लगा था पिस्ता का पूरा चेहरा लाल सुर्ख हो गया था , मेरा लिंग उसकी जांघो से रगड खा रहा था मस्ती में चूर पिस्ता ने उसको अपनी चूत की घाटी पर रगड़ना शुरू कर दिया

गरम चूत की जानी पहचानी रगड पाकर लंड का सुपाडा खुश हो गया पिस्ता तेजी से मेरे सुपाडे को चूत की तरफ धकेलने लगी उसकी हर सांस मेरे मुह में घुल रही थी एक तो आज रात उमस भरी थी ऊपर से पिस्ता की गरम जवानी ने इस कमरे में आग लगा रक्खी थी, आज फिर हमे इस आग में जलकर वासना के दरिया को पार करना था , फिर से पिस्ता के लेराते जोबन का स्वाद चखना था मुझे ,अबकी बार उसने जैसे ही मेरे लिंग को अपनी चूत पर रगडा मैंने थोडा सा जोर लगाया और मेरा लंड चूत में घुसने लगा पिस्ता की जांघे अपने आप खुलने लगी उसने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया

पिस्ता के एक छेद में लंड था दुसरे में मेरी ऊँगली उसकी आँखे कामभावना से बोझिल हो चुकी थी ऊपर से वो काफ़ी दिन में चुद रही तो वैसे ही शरीर में फीलिंग कुछ ज्यादा थी मैं और वो खड़े खड़े चुदाई कर रहे थे पिस्ता की चूत के दोनों छेद खीच रहे थे उसकी गांड में खासकर दर्द हो रहा था

“आह, निकाल लो ना ऊँगली दुखता है , दर्द हो raaahhhhhhh आआअ aaahhhhhhhhhhhhh ”

पर मैंने उसको अनसुना कर दिया पिस्ता कौन सी कम थी जोर आजमाइश करने लगी वो उसने मेरे कंधे पर जोर से काट लिया और मुझसे अलग हो गयी ,

मैं- क्या हुआ

वो- क्या सोच रखा है तुमने

मैं- कुछ नहीं बीच में बकवास मत कर जो कहना है बाद में आ पास आ जरा

पिस्ता पास में पड़ी खाट पर पसर गयी और टांगो को चौड़ा कर लिया और मेरी तरफ आँख मारी , मैंने अपने चिकने लंड पर और थूक लगाया और खाट पर चढ़ गया पिस्ता की जांघो को अपनी जांघो पर चढ़ाया और अपने लंड को गीली चूत की रस से भीगी पंखुडियो पर रगड़ने लगा पिस्ता के बदन में जो ज्वाला भड़क रही थी वो उसकी चूत से गाढे रस के रूप में बह रही थी , मैंने अपने हाथो से खाट की बाई को पकड़ लिया और पिस्ता की चूत पर फिर से धक्को की बोछार करने लगा

पिस्ता मेरे सीने को अपने हाथो से सहलाने लगी उसकी इस हरकत से मेरे शरीर में और भी उत्तेजना बढ़ने लगी मेरे लंड में और ज्यादा तनाव आने लगा , पिस्ता चुदते हुए अपने होंठो पर जीभ फेरने लगी अब मैंने उसकी फूली हुई छातियो को कस कस के दबाते हुए चुदाई की रफ़्तार तेज कर दी पिस्ता और मेरे संयुक्त रूप से लगाये गए धक्को से पुरानी खाट बुरी तरह से चरमराने लगी थी , चुदाई का आलम बहुत जबरदस्त था लंड बड़ी शान से उसकी चूत के छेद को बार बार फैलता , हुआ अन्दर बाहर हो रहा था

 


उसने अब अपनी बाहे मेरे कमर पे कस दी और मेरे चेहरे को चूमते हुए तेजी से अपनी गांड को ऊपर की तरफ उचकाने लगी पिस्ता तेजी से अपने स्खलन की तरफ बढ़ रही थी चुदते चुदते उसने बड़ी जोर से मेरे गाल पर काट लिया बड़ा दर्द हुआ मुझे तो मैंने उसकी चूची के निप्पल को मरोड़ दिया पर उसने गाल को नहीं छोड़ा, चुदाई के आलम और ये छेड़खानी , हाय रे, क्या मजा आ रहा था मेरे गाल में बहुत तेज दर्द हो रहा था पर पिस्ता साली छोड़ ही नहीं रही थी उसका पूरा बदन टाइट हुआ पड़ा था आँखे फ़ैल गयी थी और फिर धडाम से निढाल होकर वो बिस्तर पर गिर पड़ी

“aaahhhhhhhhhhhhh अआः बस अब निकाल भी लो बाहर , बस हो गया ना ” बोली वो

मैं- क्या हो गया अभी नहीं हुआ हा

वो मेरे बाल नोचते हुए- सांस तो लेने दे जरा कितना भारी है तू उठ मेरे ऊपर से सांस नहीं आ रही है

मैं उसको चोदते हुए- पड़ी रह ना थोड़ी देर और, वैसे तो कहती है की पूरी रात चोदले पर अभी खुद का होते ही नखरे करने लगी है , पड़ी रह चुप चाप

पिस्ता की चूत सूखने सी लगी थी तो उसको अब थोड़ी जलन सी हो रही थी तो वो मिन्नतें करने लगी रुकने की तो मैं उतर गया उसके ऊपर से

मैं खाट पर बैठा था पिस्ता उठी और कोढ़ी होकर मेरे लंड को चूसने लगी मैं उसकी गांड पर अपने हाथ फिराने लगा पिस्ता अपनी चूत के पानी से सने हुए मेरे लंड को जोर जोर से चूस रही थी मैं उसके चुतड सहलाते हुए उसकी गांड के छेद को सहलाने लगा तो पिस्ता बोली- आज तो मेरी गांड के पीछे ही पड़ गया है इरादा क्या है तेरा

मैं- गांड लूँगा तेरी अभी

वो- पगला गया है क्या चूत देती हूँ वो क्या कम है गांड मारेगा, मुझे क्या मरना है इस मोटे लोडे को गांड में डलवा के

मैं- चूत में भी तो डलवाती है गांड भी दे दे

पिस्ता- मेरी जान भी लेले

मैं- दे दे फिर

मैंने पिस्ता को खाट पर औंधी लिटा दिया वो मान ही नहीं रही थी तो मैंने अपनी कसम दे दी तो वो तैयार हो गयी मैं उसकी गांड के छेद पर ढेर सारा थूक लगा के उसको चिकना करने लगा उसके चुतड हलके हलके सेहिल रहे थे थूक लगा के मैंने कहा हाथो से गांड को छोड़ा कर तो उसने अपने कुलहो को फैला लिया और मैंने अपने लंड को टाइट गांड के छेद को खोलने के लिए पूरा तैयार कर लिया

चूत तो काफ़ी बार मार चूका था गांड आज मारने जा रहा था दिल में अजीब सी खुशी हो रही थी मैंने थोडा सा थूक और लगा लिया और पिस्ता की गांड पर लंड को रगड़ना शुरू किया पिस्ता का बदन पता नही क्यों कुछ कांप सा रहा था मैंने पूरा जोर लगा के धक्का मारा तो मेरा सुपाडा उसकी गांड को फाड़ते हुए अन्दर घुस गया और उसी के साथ पिस्ता की तेज चीख से वो पूरा कमरा गूँज उठा “आह आः

आआआआआआआआआआआआआ फाड़ दी रे मेरी तो दुश्मान आह निकाल ले रे बहार मैं तो मरीईईईईईईईईईईईईईईई

aaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh पिस्ता का पूरा बदन अकड़ गया था दर्द के मारे वो तेजी से रोने लगी मैं उसको चुप करवाने लगा पर जिसकी गांड फट रही हो वो क्या रोये भी ना मैंने एक झटका और मारा और आधे लंड को अन्दर पंहूँचा दिया अब चूत की अपेक्षा गांड बहुत ही टाइट थी मुझे लगा की मेरा लंड छिल गया है पर गांड तो लेनी ही थी आज मुझे

पिस्ता दर्द के मार बुरी तरफ रो रही थी पर मुझ पर ना जाने कैसा जूनून चढ़ गया था उसकी तकलीफ को नजर अंदाज करते हुए मैंने पूरा लंड उसकी गांड में उतार दिया और कुछ देर के लिए शांत पड़ गया पर पिस्ता की सुबकिया कम नहीं हुई कुछ देर बाद मैं धीरे धीरे करके लंड को आगे पीछे करने लगा पर पिस्ता को बहुत दर्द हो रहा था मेरे लंड में भी जलन सी हो रही थी पर जब तक उत्तेजना हो कुछ महसूस होता नहीं कैसे ही कुछ मिनट और निकल गए

मैंने अब धीमे धीमे से धक्के लगाने शुरू कर दिए पिस्ता मेरे नीचे दबी हुई अपनी रुलाई को थामने की पूरी कोशिश कर रही थी, एक तरफ पिस्ता को देख कर मुझे दर्द सा भी हो रहा था और गांड मारने की ख़ुशी भी हो रही थी उसकी गांड वास्तव में ही बहुत टाइट थी तो मैं तेजी से धक्के भी नहीं लगा पा रहा था पिस्ता तो ऐसे अधमरी सी होकर पड़ी थी जैसे की प्राण निकल लिए हो , इधर मैं भी जल्दी से फारिग हो जाना चाहता था तो मैं पूरा दम लगा की उसको चोदने लगा

तभी पिस्ता बोली- छोड़ मुझे छोड़

मैं- छोड़ दूंगा थोड़ी देर में

वो- अरे छोड़ दे कुत्ते

मैं- ना छोड़ूगा

वो- टट्टी निकलने वाली है कमीने छोड़ दे मुझे पिस्ता ने अपनी टाँगे पटकते हुए कहा मैं थोडा सा ढीला पड़ा और वो उठ के भागी बाहर खेत की तरफ

ना जाने क्यों मुझे हँसी आ गयी तेजी से

- अरी, डिब्बा तो लेजा पिस्ता नंगी ही भाग गयी थी

मैंने अपने लंड को देखा उस पर खून लगा हुआ था पिस्ता की गांड सच में ही फट गयी थी कुछ टट्टी भी लगी हुई थी मैंने पानी से उसको धोया और फिर एक डिब्बा लेकर पिस्ता को देने चला गया , करीब दस मिनट बाद हम जब वापिस आये तो पिस्ता लंगड़ा लंगड़ा कर चल रही थी

मैं- क्या हुआ

वो- तेरी गांड में बेलन डलवा ले फिर पूछना क्या हुआ, मेरी गांड फाड़ दी तूने

मैं- एक बार में तो दर्द होता ही है अब सब सही हो जायेगा

वो- भाड़ में जा तू

मैं- जाऊंगा, तुझे लेके

पिस्ता अपने पिछवाड़े पर उन्लिया फेर फेर कर जायजा ले रही थी मैं उसे पुचकारने लगा थोडा समय लग गया उसको मानाने में हम दोनों अब जमीं पर ही लेट गयी एक चादर बिछा के पिस्ता ने अपना सर मेरे सीने पर रख दिया मैं उसके बालो को सहलाने लगा पिस्ता मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी धीरे धीरे से हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे बस ऐसे ही लेटे हुए थे मेरी रांड मेरी बाहों में सिमटी पड़ी थी

मैं- तेरी नानी ठीक हुई

वो- अब तो वो बस ऊपर को ही निकलेगी

मैं- हम्म्म ज्यादा बीमार है क्या

वो- 80 की हो गयी है अब क्या जादा क्या थोडा

मैं- और तेरे भाई की सगाई कब है

वो- इस इतवार को गोद भरने जायेंगे

मै- तू कब गोद भरवाएगी

वो- तू भर दे , कर दे प्रेग्नेंट अपने आप भर जाएगी

मैं- कोई पूछेगा तो क्या कहेगी

वो- कहना क्या है बता दूंगी तेरा है

मैं- सच में

वो- झूट समझ ले , तू खुश रह

मैं- तेरी भाई के बाद बस तेरा ही नंबर है फिर तेरा ब्याह भी कर देंगे

वो- तो क्या तेरे लिए कुंवारी ही रहू सदा

मैं- ना ना तेरा जब जी करे करवा ले ब्याह किसने रोका है

वो- मेरी माँ तो कह रही थी की कोई लड़का मिल जाये तो दो भाई-बहन को फ्री कर दे

मैं- तेरी माँ को बड़ी पंचायत है

वो- अब कब तक मेरा बोझ उठाएगी वो

मैं- तो तू चली जाएगी मुझे छोड़ के

वो- तो क्या कभी आउंगी नहीं आया करुँगी जब तेरे लिए जन्नत का दरवाजा खोल दूंगी मेरे प्यारे

उसके सहलाने से मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था मैंने कहा – अब देगी

वो- चूत मारले, पीछे दर्द हो रहा है फिर कभी कर लिए उधर

तो एक बार उसने तबियत से अपनी चूत दी मुझे और रात को करीब ढाई बजे मैं घर की तरफ चल पड़ा

 


बुरी तरह से निचोड़ा था मुझे पिस्ता ने बदन के हर तार को हिला कर रख दिया था घर आया मैं चुपचाप तीन चार गिलास पानी पीने के बाद मैं अपने कमरे में आया तो देखा की चाची श्री मेरे पलंग पर सोयी पड़ी है , देखो लोगो को खुद के कमरे है फिर भी गरीबो का बिस्तर पसंद है , इसका मतलब उनको भान था की मैं घर से बाहर हूँ, पर उनसे अब इतना भी डर नहीं लगता था मुझे तो मैंने उनको जगाया और अपने कमरे में जाने को कहा पर उन्होंने इग्नोर करते हुए मुझ पर सवालों की बोछार कर दी

वो- कहा थे तुम

मैं- इधर ही था

वो- झूट मत बोलो

मैं- एक दोस्त के साथ था

वो- ऐसे कौन से दोस्त है तुम्हारे जो बस रात के अंधेरो में मिला करते है

चुप रहा

वो- मुझे क्या उल्लू समझ रखा है तुमने , अनपढ़ गंवार हूँ क्या मैं सब समझती हूँ

मैं- आप कुछ नहीं समझती हो , आप अपने कमरे में जाओ मुझे सोने दो

वो- बिमला के घर पे थे ना तुम

अब इनको क्या हुआ, चाची ने ये कैसा बम फोड़ा था जिसमे से जरा भी चिंगारी नहीं निकलने वाली थी मुझे हँसी आ गयी

वो- लाइट चली गयी थी तो मैं बहार सोने को आई थी सोचा तुम्हे भी जगा दू पर तुम कमरे में थे नहीं तभी मैंने बिमला की छत पर दो लोगो को देखा, अब उसके घर में वो ही अकेली औरत है तो वो ही थी अँधेरे के कारण आदमी को मैं देख नहीं पाई , और जाहिर है की तुम भी घर नहीं थे उसी समय तो ये जो खिचड़ी तुमने पकाई है ना वो सब बता दो अभी मुझे

चाची बड़े गुस्से में लग रही थी , वो मेरे पास आई और बोली- ये तुम्हारे गाल पर कैसा निशाँ है

मैं- कुछ भी तो नहीं है

वो- बेटा, जिस रास्ते पर तुम चल रहे हो ना वो रस्ते बहुत पहले ख़तम हो गए हमारे गुजरने से , तो तुम कबूल कर रहे हो की तुम बिमला के साथ थे

मैं- आपको जो समझना है आप समझो अभी मुझे सोने दो नींद बहुत आ रही है

तडाक से एक थप्पड़ मेरे गाल पर पड़ा , मैं संभालता उस से पहले ही इक थप्पड़ और पड़ गया चाची- मैंने सोचा की बराबर के हो गए हो , तो बेटा न समझ कर दोस्त मान ने लगी पर तुम हो की झूठ पे झूठ बस यही सिखाया क्या इस परिवार ने तुम्हे , इतने बेगैरत ह गए हो की अपनी भाभी को ही फसा लिया तुमने, इतनी गन्दी सोच हो गयी तुम्हारी घर में मैं हूँ तुम्हारी मम्मी है कल को हम पे भी डोरे डाल लो, कल क्यों जब तुम अपनी भाभी के साथ रात गुजार कर आये हो तो चाची के साथ भी गुजार लो उतारू कपडे

चाची का पूरा मुह गुस्से से लाल हो गया था वो किसी नागिन की तरह बिफर रही थी तो बात ये थी की चाची ने छत पर देखा अपने पति को पर चूँकि मैं भी अनुपस्थित था तो उन्होंने समझ लिया की मैं बिमला के साथ हूँ

वो- बिमला को तो मैं अपने हिसाब से हैंडल कर लुंगी पर पहले तुम कबूल कर लो की तुम ही थे ना उसकी छत पर

मैं- मुझे कुछ नहीं कहना

वो- कह दो वर्ना मैं अभी तुम्हारे माँ- पिताजी को बुला रही हूँ

मैं अब उनको क्या कहता की वो मैं नहीं था वो थे उनके प्रानपति उनके भरतार मुझे उनकी नजरो से गिरने का कोई दुख नहीं था बल्कि मैं तो पूरी कोशिश कर रहा था की उनकी गृहस्थी को बचा सकू, मुझे पता था की चाचा की बेवफाई से वो टूट कर बिखर जायेंगी , और फिर घर में जो मनहूसियत फैलेगी वो अलग , गुस्सा मुझे भी बहुत था पर अब अपनी इज्जत नीलम होने से उनका घर बचे तो क्या बुराई है

चाची- तुम ही थे ना

मैं- हां मैं ही था मेरा और बिमला का काफ़ी दिन से फुल चक्कर चल रहा है

वो- बेशरम, लड़के दूर हो जा मेरी नजरो से

मैं- तो जाओ ना अपने कमरे में मुझ से क्या उम्मीद है

वो- उस बिमला की तो मैं ऐसी रेल बनाती हूँ की याद रखेगी हमारे लड़के को बिगाड़ने चली है तुझे तो मैं बाद में देखूंगी पहले उसकी चोटी पादुंगी

चाची बहुत गुस्से में थी वो बिमला के घर जाने को कमरे से बहार निकलने लगी , मैंने उसको रोका और कहा अगर आपने इस बात का जीकर किसी से भी किया ना तो मैं अभी सल्फाज़ खा लूँगा

चाची जैसे पत्थर की बन गयी वो ध्हम से कुर्सी पर बैठ गयी उनकी आँखों से आंसू टपकने लगे इधर मेरा भी दिमाग खराब हो गया कमरे में जैसे अभी तूफ्फान आकर गुजरा था मेरे पास बहुत कुछ था कहने को पर मेरी एक चुप्पी की बहुत अहमियत थी उस पल में , चाची को समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या कहे गुस्से में कांप रही थी वो इधर वो विवश थी पर उसके बाद उन्होंने कुछ नहीं बोला सुबह तक वो कुर्सी पर बैठी रही मैं पलंग पर न उन्होंने मेरी तरफ देखा ना मैंने उनकी तरफ देखा

उस दिन मैं मैं पढने भी नहीं गया बस दोपहर को खाना खाने नीचे आया ही था की बिमला घर पर आ गयी मम्मी भी घर पर थी बिमला को देखते ही चाची ने बड़ी मुस्किल से खुद पर काबू किया पर उनकी जलती आँखों की तपिश पूरी तरह से मैं ही देख रहा था

बिमला- देवर जी कल ना मुझे शहर से कुछ सामान लाना है आपको चलना पड़ेगा मेरे साथ

मम्मी- हां चला जायेगा इसमें कहने की क्या बात है

चाची- नहीं ये नहीं जायेगा , इसको और भी काम है ऊपर से पढाई का भी काम है तुम अकेले ही जाना

बिमला- पर चाची मैं अकेले नहीं जा पाऊँगी

चाची- एक बार कह दिया ना की ये नहीं जायेगा कह कर वो ऊपर चली गयी

मम्मी ने मुझे घूर कर देखा पर कहा कुछ नहीं थोड़ी देर बाद बिमला चली गयी तो मम्मी बोली – क्या हुआ

मैं- चाची थोड़ी सी अपसेट है तो झुंझला गयी आजकल चाचा और उनके बीच कुछ प्रॉब्लम है उसी का स्ट्रेस है शायद

मम्मी- हू , लगता है दोनों से खुल के बात करनी पड़ेगी

करीब दस दिन गुजर गए इस बीच पिस्ता के भाई का रोका भी हो गया था, और वो ड्यूटी भी चला गया था पिस्ता ने काफ़ी बार मिलने को कहा था पर मैं हद से ज्यादा परेशान था तो मैंने मना कर दिया अब ये परेशानी मैंने नीनू को भी नहीं बताई बस घुट रहा था खुद चाची मुझसे बात करती ही नहीं थी बल्कि हर वक्त बस नजर रखने का पूरा प्रयास होता था उनका और इन सब का फायदा मिल रहा था चोदु चाचा को जब भी बिमला कुछ काम करवाने आती तो चाची चाचा को कह देती की बिमला का फलाना काम आप करदो वो सोचती थी की ऐसा करके वो मुझे बिमला से दूर रख लेगी,जबकि उसे पता नहीं था की वो आग के ढेर पर बैठ कर माचिस जला रही है

चोदु चाचा तो पुरे मजे ले रहा था उधर शान्ति मैडम ने अपना रिश्ता जोड़ लिया था इधर बिमला चाची तो थी ही तीन तीन चूत मारके मस्त जिन्दगी के मजे ले रहा था वो , रात को चाची काफ़ी बार उठ कर चेक करती की मैं घर पे हूँ या निकल लिया बिमला से बोलचाल भी बंद कर दी थी उन्होंने , मैं मन में सोचता की मेरी चोकिदारी से क्या होगा भोसड़ी की अपने पति जो संभाल जो तुझे चोदने के बजाय बहार मुह मारता फिर रहा है पर अपना क्या था अभी तो बस नजरो से गिरे थे इज्जत सारे बाजार तो उतरनी बाकी थी

 
उस दिन करीब 11बज रहे होंगे मैं बाहर चबूतरे पर कपडे धो रहा था की रेडियो सुनते सुनते घर पे कोई था नहीं सुबह से मम्मी आज बाजार गयी हुई थी खरीदारी करने को , मस्ती में सर्फ़ लगाके कपड़ो को चमका रहा था मैं की मन्जुडी निकल आई हमारे घर की तरफ, वो भी साली भटक रही थी लंड के लिए मैं छोटा सा कच्छा पहने हुए कपडे धो रहा था , वो उसको देख कर मेरा लंड साला हिचकोले खाने लगा उसको भी काफ़ी दिनों से खुराक मिली थी नहीं ऊपर से साली सफ़ेद सूट में एक दम पटाखा लग रही थी

मंजू मेरे पास आके बोली- क्या कर रहा है

मैं- कपडे धो रहा हूँ तू बता आज हमारी तरफ निकल आई कैसे

वो- बिमला के घर जा रही हूँ, कुछ पैसे लेने थे दूकान के

मैं- अभी नहीं है वो घर

वो- कहा गयी

मैं- वो छोड़ ये बता इतने दिन हो गए देती क्यों नहीं

वो- मैं तो कबसे तैयार हूँ , पर तू मेरी तरफ अब देखता ही नहीं

मैं- अभी देगी

वो- ना घर जाना है

मैं- ५ मिनट तो लगेगी

वो- तुम काफ़ी देर लेते हो

मैं- जल्दी से करलूँगा घर पे कोई नहीं है

वो- ठीक है पर जल्दी से कर लेना

मैं- आ तो सही

मैं और मंजू दोनों घर के अन्दर आ गए मैंने मेन गेट बंद किया और मंजू को अपनी गोदी में उठा लिया और मंजू में समा जाने की पूरी तयारी करने लगा मंजू ने झट से अपनी सलवार को नीचे किया

मैं- नंगी होजा घर में कोई नहीं है

वो- कही कोई आ जाये

मैं- बेफिक्र रह और मस्त होके चुद आज

मंजू शरमाते हुए नंगी होने लगी मैंने भी कच्छे को उतार कर फेक दिया मेरा लंड तो मंजू को देखते ही तन गया था मंजू और मैं एक दुसरे को देखने लगे मैंने अपने लंड को सहलाते हुए मंजू जो नीचे बैठने को कहा मंजू समझ गयी की मेरी चाहत क्या है तो वो मेरी टांगो के बीच घुटनों के बल बैठ गयी और मेरे लिंग को अपने होठो से लगा लिया , किसी लड़की की गरम सांसे जब जब लंड की खाल पर पड़ती है तो बड़ी ही मस्त फीलिंग आती है मैंने बड़े ही प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा तो मंजू ने अपना मुह खोल कर मेरे लंड के अगले हिस्से को मुह में ले लिया

मस्ती ऐसी आई की मेरी तो टाँगे ही काप गयी मंजू बड़े प्यार से मेरे लंड को चूसने लगी मजाल क्या जो थूक की एक बूँद भी नीचे गिर जाये, थोड़ी देर बाद उसने अपनी टाँगे चोडी कर ली और अपनी योनी को हाथ से मसलने लगी और जोर जोर से अपने मुह को लंड पर ऊपर नीचे करने लगी उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़ क्या सॉलिड मस्ती छाई हुई थी फुल मजा आ रहा था मन ही मन मैंने सोच लिया था की आज मंजू को दो बार तो पेलूँगा ही पेलूँगा मंजू की आँखों में आधी बोतल का नशा उतर चूका था मेरे लंड को उसने अब अपने गले के अन्दर तक उतार लिया था और एक सेकंड भी बह़ार नहीं निकाल रही थी

पर अब चूत मारने का टाइम हो गया था मैंने मंजू को उठाया और उसकी गांड को भीचते हुए उसके गाल चूमने लगा उसका बदन बहुत गरम हो रहा था मंजू के कुल्हे बहुत ही ज्यादा सुडौल और मुलायम थे मंजू की पतली पतली टाँगे मेरी टांगो से रगड खा रही थी धीरे से मैं उसके लबो की तरह आ गया था मंजू न अपनी आँखों को मूँद लिए और किस करने लगी दो चार पप्पियो के बाद मैंने उसको सोफे पर पटक दिया और उसकी टांगो को फैला दिया

हलके हलके रेशमी बालो से ढकी हुई उसकी चूत बड़ी सुन्दर लग रही थी मंजू मेरी तरफ देखने लगी मैं मुस्कुरा दिया और सोफे पर चढ़ गया उसकी टांगो को सेट किया और मेरा लंड उसकी योनी को चूमने लगा लंड का स्पर्श पाते ही मंजू बहकने लगी , वो अपने आप अपने बोबो को दबाने लगी , बड़ी कामातुर हो रही थी वो चुदने के लिए और कुछ ऐसा ही हाल मेरा था मैंने उसकी एक टांग को अब अपने कंधे पर रखा और चढ़ गया उसपे लंड चूत की फांको को फैलाते हुए अन्दर को घुसने लगा मंजू ने आह भरी और अपने जिस्म को टाइट करने लगी मैंने उसकी जांघ को पकड़ लिया और उसको सहलाते हुए चुदाई शुरू कर दी

मंजू की चूत न लंड को अपनी कैद में कर लिया था

मंजू- जल्दी से कर ले अब, घर जाने में देर हो गयी तो माँ काफ़ी बात कहेगी

मैं- कर तो रहा हूँ मेरे कोई बस का है होगा जब होगा

मंजू- तुझे तो देनी ही नहीं चाहिए

मैं- तो क्यों देने आई

मंजू कुछ ना बोली मैंने उसकी ऊपर वाली टांग को सोफे से नीचे लटका दिया और उसके ऊपर लेट कर चूत मारने लगा उसके बोबे मेरे सीने के नीचे भींचने लगे मंजू को अब चुदाई की मस्ती चढ़ने लगी मेरा लंड किसी पिस्टन की तरह चूत को चोद रहा था जल्दी जल्दी करने का रोना जो रो रही थी मंजू , पर अब जब लंड की मर्ज़ी हो तभी वो झाडे , मंजू की चूत में लंड जल्दी ही सेट हो गया था तो अब मंजू भी उछलने लगी थी मैंने उसको अब अपने लंड पर बिठा लिया और वो लगी कूदने इस पोजीशन में पूरा लंड चूत में धाड़ धाड़ करके टिक रहा था मैं उसकी नंगी पीठ को चूमने लगा , कभी वहा दांत लगता तो कभी उसकी गांड पर चिकोटी काटता

मंजू की चूत से बहती रसधार मेरे अन्डकोशो को गीला कर रही थी , मंजू अपनी उफनती हुई साँसों को समेट कर चूत चुदवा रही थी , गर्मी के उस दोपहर में जब की लाइट भी नहीं आ रही थी हमारी पसीने से सराबोर चुदाई चालु थी धक्के पे धक्के पड़ रहे थे हम दोनों शारीरक सुख को भोग रहे थे पर जल्दी ही मंजू थकने लगी तो मैंने उसको वाही सोफे पर घोड़ी बना दिया उसकी चोटी को किया साइड में और बोबो को बेरहमी से मसलते हुए दे दनादन चोदने लगा उसको मंजू की हिलती गांड इस बात का सबूत थी की कितने मजे में है वो उस पल ठप्प थापा ठप्प मेरा लंड चूत के सुराख़ को और खोले जा रहा था

मस्ती में चूत मैं और मंजू चुदाई में खोये हुए अपने अपने स्खलन को तलाश कर रहे थे की तभी........

 


“”हरामखोरो ,नीचो ये क्या हो रहा है “

जैसे ही ये आवाज हमारे कानो में पड़ी फट के हाथ में आ गयी, मैं मंजू को सोफे पर घोड़ी बनाये हुए था दरवाजे पर चाची श्री खड़ी थी, रंगे हाथ पकडे गया था मैं आज समझ ही गम हो गयी मैं उतरा मंजू के ऊपर से आज तो माजना ही पिट गया था बीच बाजार में अब कुछ नहो सकता था

“गन्दी, औलादों ये सब नीच हरकते, करते हुए शर्म नहीं आई , चिल्लाई वो

दरअसल वो घर पर ही थी ऊपर पर मुझसे चूक हो गयी थी मैंने समझ लिया था की वो घर पर है नहीं तो प्लान बना लिया था , अब बिमला वाली बात से चाची वैसे ही किलसी पड़ी थी , मंजू ने फ़ौरन अपनी सलवार सम्हाई और सूट को पहन ने लगी मैं भी अपने कच्छे को ढूंढ ने लगा पर वो साला पता नहीं किस साइड गिर गया था तो और फजीहत हो गयी

चाची – आज तो ऐसा हाल करुँगी की सारी जवानी निकल जाएगी मंजू बोली- मैं तो मर गयी आज

मुझे कुछ ना सूझे मंजू ने तो जैसे तैसे अपने कपडे उलझा लिए थे मैं नंगा करू तो क्या करू मैं बेड की चादर उठा ही रहा था की तभी पीठ पर एक लट्ठ आ पड़ा, भील गया मैं तो एक में ही एक पड़ा मंजू पर मंजू भागी दरवाजे की तरफ तो एक और टिका चाची चिल्लाते हुए बोली- तेरी तो खबर तेरी माँ लेगी आ रही हूँ तेरे घर मंजू बिना कुछ सुने भागी बहार को

मैं अब कहा जाऊ दे दाना दान ७-8 लट्ठ टिक गए शरीर पर चादर निकली हाथ से वो अलग आज तो लुट गए रे हम तो , मैं बचने के लिए भागने लगा वो सीढियों पर वो मेरे पीछे आई मैं सीढिय चढ़ ही रहा था की तभी मेरे पाँव पर लट्ठ पड़ा और मेरा बैलेंस बिगड़ गया

अब हमारी जो सीढिया थी ना उन पर ग्रिल न लगवाई हुई थी हालाँकि उसके लिए लोहे के खुस्से छोड़े हुए थे मैं नीचे लगा गिरने तो वो खुस्सा मेरी बगल में फास गया और काट ता हुआ नीचे तक आ गया दर्द से मैं चीखा बुरी तरह , आँखों के आगे जैसे अँधेरा सा छा गया मेरे , गिरते हुए बस कुछ याद नहीं आया फिर मुझे बस इतना जरुर महसूस हुआ की किसी चीज़ से मेरा सर टकराया हो आँखे मुंदती चली गयी दर्द के आलम में मैं डूबता चला गया क्या हुआ कुछ पता नहीं फिर

आँख खुली तो दर्द की लहर ने मेरे होश में आने पर स्वागत किया, धुंधलाते हुए मेरी आँखे खुली तो दखा की मम्मी, चाची, बिमला, पिताजी सब लोग मेरे पास ही बैठे हुए है मैंने उठने की कोशिश की तो मम्मी ने मुझे लेटे ही रहने को कहा मुझे बहुत दर्द हो रहा था

मैं- कहा हूँ

पिताजी- हस्पताल में

मैं- आह, दर्द हो रहा है

मम्मी- ठीक हो जाओगे

परिस्तिथि का भान किया तो देखा मेरे सर पर पट्टी बंधी है और साइड में भी मैं जरा सा हिल्ला तो बदन दर्द से कांप गया , अब ये क्या हुआ मैं सोचने लगा तो पूरी बात समझ में आई, तो पता चला की काफ़ी देर में होश आया था सर पर गहरी चोट लगी थी और बगल में गहरा घाव था ,

डॉक्टर ने आके कुछ सुई लगायी दवाई दी और चला गया थोड़ी देर बाद माँ- पिताजी भी बहार चले गए, बिमला भी घर जाने का कह गयी बचे मैं और चाची , मैंने देखा उनकी आँखों में आंसू थे, उन्होंने मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और रोने लगी , हालंकि मुझे बहुत दर्द हो रहा था पर वो दर्द जो उनकी गीली आँखों में था उसके अन्दर दर्द ज्यादा था

काफ़ी देर तक उनकी आँखों से आंसू झरते रहे,

मैं- मैं ठीक हूँ अब, थोडा सा मुस्कुरा दिया

वो- मुझे माफ़ करना बेटा, सब मेरी वजह से हुआ है

- कुछ नहीं हुआ आपकी वजह से मेरी ही गलती थी

वो- बेटे, मुझे कठोर नहीं होना चाहिए था

मैं- छोड़ो जो हुआ घर कब जाना होगा

वो- जब ठीक हो जाओगे

चाची ने मुझे जूस का गिलास दिया मैंने थोडा बहुत गटका कमजोरी की वजह से नींद आ गयी , जब मैं उठा तो शायद रात का वक़्त था , बल्ब जल रहा था मुझे सुसु आई थी चाची पास में रखे स्टूल पर ही सोयी पड़ी थी मेरी हरकत से वो जाग गयी ,

वो-क्या हुआ

मैं- सुसु आई है मम्मी को बुला दो

वो- मम्मी अभी सोयी है तुम यही कर लो

मैं- यहाँ नहीं कर पाउँगा

वो- रुको जरा,

उन्होंने बेड के नीचे से एक डिब्बा सा निकाला और बोली- अभी तुम्हारी हालात बेड से उतरने की नहीं है इस में कर लो मैं बहार फेक दूंगी

मैं- पर आपके सामने कैसे कर पाउँगा

चाची- मेरे सामने जब इतना कर चुके हो तो सुसु में क्या दिक्कत है

उन्होंने मेरे पायजामे को सरकाया और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर डिब्बे की तरफ करते हुए बोली- चलो जल्दी से करलो

अब अपनी भी मज़बूरी थी मूतना भी जरुरी था ऊपर से उनके नरम हाथो के सपर्श से लंड गरम होने लगा उन्होंने भी उसमे उत्तेजना महसूस की पर कुछ कहा नहीं जल्दी ही मैंने मूत लिया उन्होंने लंड को पायजामे में डाल दिया और डिब्बे को लेकर बहार चली गयी , थोड़ी देर बाद वो आई

मैं- माफ़ करना चाची, आपको मेरी वजह से तकलीफ हुई

वो- शर्मिंदा तो मैं हूँ, मेरी वजह से तुम्हारी ये हालात हुई

मैं कुछ नहीं बोला

वो- बेटे, हम सब तुम्हारी भलाई चाहते है तुम जो भी कर रहे हो उसके लिए अभी टाइम है एब बार तुम्हारी पढाई पूरी हो जाये फिर तुम्हारी शादी कर देंगे , तुम्हे ऐसे किस के साथ भी मुह मारने की जरुरत नहीं है , मैं जानती हूँ ये जो भी बात हम कर रहे है बहुत ही असामान्य है पर तुम जवानी की दहलीज पर फिसल रहे हो पहले अपनी भाभी के साथ फिर मोहल्ले की लड़की के साथ, हमे नहीं पता की हमारी परवरिश में क्या कमी रह गयी जो तुम ऐसे हो गए

मैं बस सुनता रहा , मैं जानता था की मेरी ख़ामोशी ही मेरी कमजोरी है पर ख़ामोशी जरुरी थी , वो भी जब हालत बिलकुल ठीक नहीं थी पूरा बदन दर्द से दोहरा हुआ पड़ा था दर्द निवारक दवाई होने के बावजूद भी दर्द को सहना मुश्किल हो रहा था , वो एक हफ्ता बड़ा ही खोफ्नाक सा था चाची को आत्मग्लानी सी हो रही थी तो वो थोड़ी कटी कटी सी रहती थी मेरे जो भी काम थे पानी- पेशाब की वो ही करवाती थी जैसे की वो प्रायश्चित करना चाहती हो पर मुझे चिंता उनकी ना थी ना अपनी थी घर पर चाचा रहते थे और बच्चो का बहाना करके बिमला तो उनकी पूरी मौज आई हुई थी

उनको हमसे क्या लेना देना था उनकी चुदाई तो बदस्तूर जारी थी दाना दन करके, इस बीच पिताजी जिन्हें मैं हमेशा खडूस समझता था उनका एक अलग पहलु भी जाना मैंने, एक कठोर पिता के सीने में भी मासूम दिल होता है जाना मैंने, पिताजी उस एक हफ्ते में जैसे टूट ही गए थे, उनके चेहरे पर एक मुर्झाहत सी आ गयी थी बहुत देर तक वो मेरे पास बैठ ते थे पर कुछ बोलते नहीं थे, बस मेरे बालो पर हाथ फेर देते, एक बाप की विवशता को महसूस किया मैंने ,

मम्मी तो रो कर सुबक कर फिर भी अपने दुःख को जता दिया करती थी पर पिताजी की चश्मे में छुपी आँखों में आये पानी को बस मैं महसोस कर पता था , दो करीब दस कठोर दिन हस्पताल में निकाल कर मैं घर आ गया चल फिर तो मैं लेता था पर कमजोरी थी ही, घर आने के बाद भी ज्यादातर समय बिस्तर पर ही कटता था , इधर मैं परेशान था उधर चाचा और चाची के बीच कुछ भी ठीक नहीं लग रहा था , लगभग उनमे हर रोज ही झगडा होता था किसी ना किसी बात को लेकर

इधर मैं कशमकश में था की चाची को बता दू या नहीं , हलाकि आज नहीं तो कल उन्हें पता चल ही जाना था पर उनका रिएक्शन क्या होगा वो सोच कर मैं उलझा पड़ा था कलेश तो होना तय था ही देखो कितने दिन टलता है

 
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