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Raj sharma stories चूतो का मेला compleet

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मुझ् को लगने लगा था की कुछ तो लोचा है पर वो मुझे बता नहीं रहा था तो मैंने शांति मैडम को वाही पर छोड़ा और राहुल के साथ बाहर की और चल पड़ा उसने गाड़ी स्टार्ट की और हम चल पड़े पर जब उसने गाड़ी को सीकर की तरफ मोड़ा तो मेरा दिमाग सरक गया

मैं-सच बता क्या बात है गाड़ी कहा ले जा रहा है

उसने गाडी रोकी और रोते हुए बोला- भाई घर वालो का एक्सीडेंट हो गया है

क्क्या, ये सुनते ही जैसे मैं जम गया दिमाग सुन्न हो गया आँखों के सामने अँधेरा छा गया हाथ काम्पने लगे, आँखों से आंसू से सैलाब बह चला दर्द का , दिल जोरो से धड़क रहा था मैंने खुद ड्राइविंग संभाली फिर कुछ याद नहीं रहा बस याद था तो की जल्दी से जल्दी अपने परिवार तक पहुंचना

पुरे रस्ते में मैंने हर देवता को सुमर लिया मेरे होंठो से बस प्रार्थना ही थी उस उपरवाले से की सब ठीक रखना मैं पूरी कोशिश कर रहा था पर हॉस्पिटल तक पहुँचने में घंटे भर से ज्यादा लग गया ,गाडी रोकते ही मैं तेजी से अंदर भगा अंदर चारो तरफ गहमा गहमी मची हुई थी

फिर मुझे कुछ जाने पहचाने गाव के लोग मिले मैं तड़प रहा था घरवालो को देखने को पर उन लोगो ने मुझे पकड़ लिया

छोड़ो मुझको मैं चीखते हुए बोला पर वो मुझे पकडे रहे मेरा दिल धाड़ धाड़ करके बज रहा था तभी मैंने स्ट्रेचर पर वार्ड बॉय को किसी को ले जाते देखा जब वो मेरे पास से गुजरा तो एक हाथ निचे को झूल गया खून से लथपथ जैसे ही मेरी नजर उस कंगन पर पड़ी मेरी रुलाई छुट पड़ी वो चाची थी मैंने जैसे तैसे खुद को छुड़ाया और उस स्ट्रेचर को रोक लिया

कांपते हाथो से मैंने वो खून से सनी चादर हटाई और जो देखा मेरा कालेजा कांप गया मेरी प्यारी चाची अब एक लाश बन गयी थी मैं दहाड़े मार कर रोने लगा मेरे रुदन से समूचा हॉस्पिटल काम्प् गया राहुल मुझ्को संभाल रहा था पर आज किसे संभालना था तभी मुझे माँ का ध्यान आया तो मैंने पुछा-माँ कहा है

राहुल ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और रोने लगा रोते हुए उसने अपने सर को हिलाया मुझ पर जैसे वज्रपात हो गया तभी डॉक्टर आया और बोला- आपसे एक मिनट अर्जेंट बात करणी है वो मुझे ओटी में ले गया जहा मैंने अपने जीवन का सबसे खुफनाक दृश्य देखा

ऐसा वीभत्स दृश्य मुजको उलटी आने को हुई ,पिताजी खून में डूबे हुए पर होश में थे डॉक्टर ने मुझहे कहा टाइम कम है सांसे उखड रही है ये बार बार तुम्हे पुकार रहे है बात करलो

मैं- क्या टाइम कम है डॉक्टर ,कुछ भी करो पिताजी को कुछ नहीं होना चाहिये मैं तुझे तोल दूंगा रुपयो में पर इनको कुछ नहीं होना चाहिये

पर आज नसिब खोटा था ,पिताजी का हाथ जरा सा हिला तो मैं उनके पास गया वो कुछ बोलना चाह रहे थे पर आवाज साथ नहीं दे रही थी ,मैंने उनका हाथ अपने हाथ में लिया मेरे आंसू उन के हाथ पर गिरने लगे बस एक मिनट ही बीता होगा की वो तड़पने लगे

मैं चिल्लआने लगा डॉक्टर बचाओ इनको डॉक्टर कोशिश कर रहे थे की उनके जिस्म ने एक झटका खाया और सब शांत पड़ गया वो भी मुझे छोड़ कर चले गए थे ,मेरी सबसे बड़ी ताकत मेरा बाप आज मुझे अकेला कर गया था

बहुत देर तक मैं उनके निर्जीव जिस्म से लिपटा रहा गर्मी अभी तक थी उसमे बस कुछ नहीं था तो सांसो की वो डोर जो टूट कर बिखर गयी थी गाँव के लोगो ने बड़ी मुश्किल से काबू किया मुझे आज मेरी हर दुआ नामंजूर हुई थी ऊपर वाले की अदालत में

जब कुछ होश आया तो मैंने माँ और बाकि घरवालो के बारे में पुछा तो राहुल मुझे अपने साथ एक सीली सी जगह पर ले गया ,हल्का सा अँधेरा था पर अब मेरे घुटने जवाब दे गए थे मैं समझ गया था की अब मुझे क्या देखना है हम मौर्ग में जो थे

 


तबी डॉक्टर ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोला- आईएम सॉरी हम लोग एक को भी नहीं बचा सके

उसने एक चादर हटाई और मैं गिर पड़ा वो लाश मम्मी की थीमैं जोर जोर से रोने लगा किसी ने चुप करवाने की कोशिश नहीं की अब दिल का दर्द तो आंसुओ के रस्ते ही निकलता है ना

मम्मी ,मम्मी बोलो न कुछ देखो मैं आ गया हु,मम्मी न्नाराज़ हो क्या बोलते बोलते मेरा गाला रुंध गया पर वो कैसे बोलती उनका चेहरा हमेशा की तरह शांत था बस वो जनि पहचानी मुस्कान गायब हो गयी थी दिल किया की मैं भी माँ बाप के साथ मर जाऊ पास में ही ताऊ ताई की लाशे भी रखी थी हस्ता खेलता मेरा परिवार बर्बाद हो गया था

आज मैं अनाथ हो गया था ,अब दिल के हालात को क्या ब्याज करू मैं, ज़ुन्दगी ताश के पत्तो की तरह बिखर गयी थी मेरी जिस परिवार के ऊपर मैं कूदता था वो आज मांस के निजीव लोथड़ों के रूप में बिखरा पड़ा था पर अभी एक बिजली और गिरनी थी मुझ पर

और जो वो बिजली गिरी तो मैं टूट गया बिमला के दोनों बच्चों की लाश मुझ से ना देखि गयी,उनको जिनको कल तक मैं अपने कंधो पे बैठकर घुमाता था आज उनकी निष्प्राण देह को जो कलेजे से लगाया तो कलेजा फट गया मेरा हे प्रभु ये कैसी सजा दी तूने ओह मेरे रब्बा तुझे जरा भी दया नहीं आई इन बच्चों पर क्रूरता करते हहुए मुझको मार देता

आज दुनिया लूट गयी थी मेरी राहुल मुझ को सहारा देके वह से बाहर लाया पर ये एक ऐसा सच था जिस को मैं झुठला भी नहीं सकता था, क्या से क्या हो गया था हर ख़ुशी आज रूठ गयी थी बहुत देर तक कागज़ी कार्यवाही चालू रही अब एक्सीडेंट था तो फिर पुलीस कार्यआवहि के बाद सारि लाशे मेरे सुपुर्द कर दी गयी,जिन माँ बाप के साथ कल तक मैं खूब हँसता खेलता था आज उनकी ही लाशो को लेकर चला मैं अब वो माँ का दुलार कभी ना मिलने वाला था ना वो बाप की झिड़की।

अपने माँ बाप ही नहीं बल्कि पुरे परिवार की लाशो को ढोना किसी के लिये भी आसान नहीं होता जबकि मुझ पर तो जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा था पर शायद ये ही अग्निपथ होता होगा अपने अंतरमन से जूझते हुए जो ये मान ने को तैयार नहीं था की सब खत्म हो गया है , हम लोग अंतिम संस्कार के लिए चल पड़े

पूरा ही गाँव जैसे टूट पड़ा था एक साथ सात लाशे जो थी जिन परिवार वालो की ऊँगली पकड कर मैंने चलना सीखा था आज उनको राख होते हुए देख रहा था मैं दिल का गुबार आंसू बन कर बह रहा था

जब तक उन चिताओ में लपटे उठती रही मैं वहीँ बैठा रहा फिर मंजू मेरे पास आई डबडबाई आँखों से मैंने उसको देखा उसने मेरा हाथ पकड़ा और घर ले आई ,पर अब घर कहा था बस चार दीवारे ही रह गयी थी एक कोने में बिमला बेहोश पड़ी थी कुछ महिलाये उसको समझा रही थी कुछ लोग चाचा के पास बैठे थे

मंजू मेरे लिए पानी का गिलास लायी पर वो भी मेरे सीने में धधकती आग को शांत नहीं कर पाया ,जी रोने को कर रहा था पर आंसू सूख गए थे ,पर ये बहुत भारी समय था साँझ रात में ढल गयी पता नहीं कितने बज रहे थे मैं अपने कमरे में बैठा था तनहा अकेला

की पिस्ता मेरे पास आकर बैठ गयी मैंने अपना सर उसकी गोद में रखा और रोने लगा वो कुछ नहीं बस चुपचाप मेरे बालो में हाथ फिराती रही बहुत सुकून मिला उन पलो में मुझे ले देकर अब वो ही तो बची थी जिसे अपना कह सकता था जाने कब उसके आगोश में नींद आ गयी

जब मैं जागा तो वो वहा नहीं थी अब सामना हुआ वास्तविकता से ,चाहे दिल माने या ना माने पर यही हकीकत थी जिसको अब हर रोज ही सामना करना था,धीरे धीरे रिश्तेदार आने शुरू हो गए थे घर में रोना पीटना मचा हुआ था मैं घर से बाहर आकर उस कच्चे छप्पर की तरफ जाकर बैठ गया

थोड़ी डेर बाद पिस्ता मुझे ढूंढते हुए आ गयी कुछ देर बाद वो चुप्पी तोड़ते हुए बोली- कब तक ऐसे रहेगा,कल से अन्न का दाना न लिया ,अब जो हुआ उसे कोई वापिस नहीं कर सकता पर तुझे तो जीना होगा ना मैं रोटी लाती हु खा ले

मैं-भूख नहीं है

वो-भूख तो नहीं है पर फिर भी कुछ निवाले खा ले मेरा मान रखने को ही खा ले

वो एक थाली ले आई और अपने हाथो से खिलाने लगी पर रोटी गले से निचे उतरी ही नहीं जैसे तैसे पानी के साहरे कुछ निवाले गटके तभी मेरा ध्यान पिस्ता के हाथो पर लगी मेहँदी पर गयी तो याद आया कल ब्याह है उसका

तो मैं बोला-तुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था तू बान बैठी हुई कल ब्याह है तेरा

वो-आज फेरे होते तो भी आती,ब्याह का क्या अब दिन आ गया तो ब्याह सरक तो नहीं सकता पर घरवालो ने ससुराल खबर करदी है तो बस कुछ लोग आकर फेरे पड़वा लेंगे

मैं-ना री, तू ऐसा मत कर ब्याह बस एक बार होता है तू गाजे बाजे से ब्याह करवा

वो- तेरे दुःख पर अपनी खुशिया सजाउ अभी इतनी बेगैरत नहीं हुई हु मैं

मैं-पर?

वो-पर क्या मेरे लिए तू पहले है

पिस्ता को मैं कभी समझ नहीं पाया था कभी वो कुछ लगती थी कभी कुछ पर बस वो जानती थी या मैं जानता था की हमारा रिश्ता किस तरह का था जैसे वो मेरे दर्द का मरहम थी उसकी भी मज़बूरी थी की वो ज्यादा देर मेरे पास रुक नहीं सकती थी

मेरे ननिहाल से लोग आ गये थे मुझे संभालने को पर इस दुःख को तो मुझे ही झेलना था। वो बारह दिन तो रिश्तेदारो के सहारे निकल गए ,पर अब अकेलापन काट ता था मुझे घरवालो की कुछ पालिसी थी तो उसका पैसा मिल गया था मुझे पर ये पैसा उनकी कमी पूरी नहीं कर सकता था

चाची के भाई ने मुझे कुछ डॉक्यूमेंट दिए जो ज़मीन पिताजी ने चाची को दी थी वो मेरे नाम कर गयी थी पर ये सब मेरे किस काम का था मेरे मन में बस एक सवाल था की बिमला ने ऐन टाइम पे जाने को क्यों मना किया पर दूसरी तरफ पुलिस रिपोर्ट थी जिसमे साफ़ लिखा था की गाडी कण्ट्रोल खो गयी थी जिस वजह से एक्सीडेंट हुआ अब गाडी बुरी तहस नहस हो गयी थी तो जांच ज्यादा नहीं हो सकती थी

इधर मेरे नाना मेरे लिए बहुत चिंतित थे तो उन्होंने ये फैसला लिया की अब मैं ननिहाल में ही रहूँगा हालाँकि मैं ऐसा नहीं चाहता था पर नाना मामाँ के आगे चली नहीं मेरी पर जाने से पहले कुछ काम करने थे मैंने अपनी सारी जमीं की जिम्मेदारी गीता को दी पिस्ता के बाद वो ही थी अब मेरे पास

तो करीब दो महीने बाद मैं अपने ननिहाल आ गया शुरू शुरू में मेरा मन नहीं लगता था पर फिर आदत होने लगी थी सबका व्यवहार मेरे प्रति ठीक था मैं रोज सुबह पढ़ने निकल जाता और साँझ ढले आता बस यही दिनचर्या बन गयी थी वो लोग अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे थे पर मैं चाह कर भी उनसे घुलमिल नहीं पा रहा था

थोडा टाइम और गुजर गया अब मुझे भी उनकी आदत होने लगी थी पर पुराणी याद अब भी हावी थी मुझ पर जबकि वर्तमान मुझे कह रहा था की घुटने मत टेक मंजिले और भी है इधर मेरी एक दोस्त बन गयी थी इंदु जो मेरी मम्मी के चाचा की लड़की थी,मेरी मौसी लगती थी पर हमउम्र थी तो अक्सर बाते होने लगी

 
मैं फिर से जीने की कोशिश कर रहा था सभी लोग मेरी पूरी मदद कर रहे थे की मैं मानसिक रूप से थोडा ठीक हो जाऊ अब लगभग मेरी हर शाम इंदु के साथ ही गुजरती थी पर साथ ही मुझे नीनू की याद भी बहुत आती थी काश उस से यहाँ आने से पहले एक बार बात हो जाती तो उसका कांटेक्ट नंबर ले लेता

पर अभी क्या कर सकते थे इंदु की चुलबुलाहट मुझे अछी लगती थी पर बस ऐसे ही उस शाम हम लोग ऐसे ही छत पर बैठे थे ये सर्दियो की शुरुआत थी सूरज ढल रहा था तो उसकी लाली में इंदु का गोरा चेहरा चमक रहा था

मैं- पता नहीं क्यों आज तुम क्यों इतनी सूंदर लग रही हो

वो- चलो आज इतने दिन बाद तुमने ये तो जाना

मैं-एक बात पुछु

वो-हाँ

मैं-तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है

वो- स्सह्ह्ह् धीरे बोलो कोई सुन लेगा तो मेरी शामत आ जायेगी वैसे तुम्हे ये विचार कहा से आया की मेरा बॉयफ्रेंड है

मैं- बस ऐसे ही पूछ रहा था

वो- ना ऐसा कुछ नहीं है और ना मेरा इरादा है

पर तभी उसको नानी ने निचे बुला लिया तो बात अधूरी रह गई कुछ दिनों से मेरी कमर में दर्द हो रहा था तो मैं रात को नीचे फर्श पर बिस्तर लगा के सोता था ताकि कुछ आराम मिल सके अब सर्दी की शुरुआत थी तो सुबह बड़ी ज़ोरो की नींद आती थी मैं अपने कम्बल में लिपटा पड़ा था की इंदु कमरे में झाड़ू लगाने आई

ऊपर से उसी टाइम मैं एक सपना देख रहा था मस्त सा इधर वो मुझे उठाने लगी थोडा गुस्सा सा आया पर मैं उठ गया अब मैं बस कच्छे में ही था ऊपर से सपने की वजह से मेरा लण्ड खड़ा हुआ था अब कमरे में एक जवान लड़का और लड़की ऊपर से मेरा खड़ा लंड

इंदु की निगाह जैसे ही उधर पड़ी उसकी नजर जैसे जम गयी उसके गाल लाल हो गए पर तभी मुझे होश सा आया तो मैंने जल्दी से कम्बल को अपने शारीर पर लपेटा

मैं-क्या ऐसे ही घुस जाती हो

वो-और जो तुम ऐसे बेशर्मो की तरह

मैं- क्या बेशर्मो की तरह

वो-कुछ नहीं अब हटाओ अपना तामझाम मुझे झाड़ू निकालनी है

मैं अपने कपडे लेकर बाहर आ गया और कुछ देर बाद वापिस गया तो इंदु झाड़ू निकाल रही थी उसकी पीठ मेरी तरफ थी वो झुकी हुई थी उसकी कुर्ती भी थोडा साइड में हुई पड़ी थी तो चाह कर भी मैं खुद को उसकी गोल मटोल गांड को निहारने से ना रोक पाया

टाइट सलवार में कैद उसके उन्नत नितम्बो पर जो नजर गयी लंड में सुरसुराहट सी होने लगी आज कई महीनो बाद मुझे ये अनुभूती हो रही थी तो दिमाग सा ख़राब होने लगा मैंने अपना तौलिया लिया और बाथरूम में आ गया

पर आज कई दिनों बाद मेरा लिंग इस तरह गरम हुआ था की अब इसको शांत करना बेहद जरुरी हो गया था तो मैं उसको हिलाने लगा की मेरी नजर सामने राखी कछि पर पड़ी मैंने उसको हाथ में लिया और सूँघने लगा चूत की जनि पहचानी खुशबू मेरे नथुनो से टकराई

मेरे लण्ड में और कसावट आ गयी मैं तेजी से उसको हिलाने लगा और थोडी देर बाद मैंने उस कच्छी पर ही अपना गाढ़ा पानी गिरा दिया उसको लापरवाही से ऐसे ही फेंक कर मैं नहा कर बाहर आ गया

फिर मैं शहर चला गया शाम को ही आया मामी ने मुझे चाय पकड़ाई जब वो चाय पकड़ा रही थी तो उनका आँचल थोडा सा सरक गया तो मेरी नजर उनके ब्लाउज़ से आधे बहार को आते उभारो पर पडी और वाही पर रुक गयी तो मामी धीरे से बोली- कहा खो गये, चाय लो

तो मेरा ध्यान टूटा मैं चाय की चुस्किया लेने लगा पर दिमाग में मामी की चूचियो का दृश्य घूम रहा था घर के कुछ छोटे मोटे काम करके बैठ कर मैं टीवी देख रहा था तो नानी बोली इंदु को जगा ला दोपहर से सोई पड़ी है

तो मैं ऊपर गया इंदु नींद में मगन बिस्तर पर औंधी पड़ी थी उसके फ़ुटबाल जैसे चूतड़ मेरी आँखों के सामने थे मैंने देखा उसकी सलवार का कुछ हिस्सा गांड की दरार में घुसा पड़ा था इतना उत्तेजक नजारा देख कर मेरा हाल बुरा हुआ तभी उसने करवट ली और अब सीधी हो गयी

उसकी छातियाँ साँस लेने से ऊपर निचे हो रही थी मेरा गला सूखने लगा मैंने धीरे से अपना हाथ उसके उन्नत उभारो पर रखा और हलके से दबाया तो ऐसा लगा की मेरे हाथ में जैसे ढेर सारी मुलायम रुई मेरे हाथ में आ गयी हो पर तभी उसके बदन में सरसरहट हुई तो मैं उस से दूर हो गया और उसको जगा के निचे आ गया

उत्तेजना के मारे मेरा बुरा हाल था तो मैं फिर से बाथरूम में गया और एक बार से वहा रखी पेंटी में से एक को अपने लंड पर लपेट कर मुठ मारके आया

 
इधर इंदु के प्रति मेरे मन में विचार बदलने लगे थे उसकी हर बात उसकी वो बेफिक्री अच्छी लगने लगी थी पर अब ज्यादातर मेरा ध्यान। उसके शरीर पर ही रहने लगा था उसकी पर्वत सी खड़ी चूचिया और बेहद ही मस्त गांड मेरा लण्ड आजकल बहुत परेशान कर रहा था मुझे

पर उसको डायरेक्ट बोल भी तो नहीं सकता था की दे देगी दिल में एक सैलाब उमड़ने लगा था इस बीच मैंने गौर किया की मेरी मामी आजकल अजीब सी नजरो से मुझे देखती है कई बार वो मेरे पास बैठी रहती पर चुन्नी नहीं ओढ़ती या फिर आँगन में बैठ कर अपनी एड़ी घिसती रहती उस समय उनका घाघरा थोडा ऊँचा होता जिस से मुझे गोरी पिण्डियों के पुरे दर्शन होते थे

दिन ऐसे ही गुजर रहे थे दिल में एक बार फिर से हसरते जागने लगी थी पर किया क्या जाए इसी उडेढ़बुन में लगा था मन मेरा ,इंदु रात को लेट तक पढाई करती थी तो मैं भी उसके साथ पढता रहता था ठण्ड बढ़ने लगी थी तो उस रात ना हवा भी कुछ तेज सी थी ऊपर से लाइट भी चली गयी तो वो बोली जी मैं उसके पास आ जाऊ और पढ़ु क्योंकि उसके पलंग के किनारे लैंप था

मैं उसके पास विपरीत दिशा में बैठ गया उसने अपने कम्बल को मेरे पैरो पर सरका दिया ताकि मुझे जाड़ा न लगे थोड़ी देर तो सब सही लगा पर अब स्तिथि कुछ ऐसी थी की मेरे पैर उसके पैरो से टकरा रहे थे तो मजा सा आने लगा एक दो बार उसने मेरी तरफ देखा पर कहा कुछ नहीं

कुछ देर बाद उसने अपनी किताब साइड में रख दी और बोली-एक बात पुछु

मैं-हाँ

वो-तेरे गाँव में तेरी कोई गर्लफ्रेंड थी

मैं- आपको क्या मतलब

वो- बस ऐसे ही मेरे मन में आया तो पूछ लिया

मैं-अब मुझसे कौन दोस्ती करेगा

वो-तूने किसी को कहा था क्या

मैं- नहीं तो पर मुझे लगता है एक गर्लफ्रेंड तो होनी ही चाहिए

वो-अच्छा और कैसी होनी चाहिए

मैं-बिलकुल आप जैसी

ये सुनकर इंदु का चेहरा लैंप की रौशनी में चमक उठा उसके होंठो पर जो दो पल को एक मुस्कान सी आई थी उसको मैंने देख लिया था

वो- मेरे जैसी, फिर तो प्रॉब्लम हो गयी, अब मैं तो अपने जैसा एक लौटा पीस हु

मैं- तो क्या आप बनोगे

वो- मैं कैसे बन सकती हु मैं तो मौसी हु तुम्हारी

मैं- तो क्या हुआ आप हमउम्र हो मेरी मुझे अच्छी भी लगती हो आप बन जाओ

वो- तू अभी नासमझ है तू समझेगा नहीं

अब उसको कौन समझाता की इस छेत्र में अपने झंडे कई जगह गडे हुए है खैर मैं उसके मन को टटोल रहा था

मैं अब उसके थोड़े करीब गया मेरी सांसे जैसे सुलगने लगी थी

मैं-ईन्दू क्या मुझसे फ्रेंडशिप करोगी

वो- अब सच में ज्यादा हो रहा है

मैं-कम ज्यादा का पता नहीं पर इतना जरूर पता है की तुम बहुत अच्छी लगती हो मुझे

वो- मुझे जाना चाहिए

मैं- जाती हो तो जाओ पर मैं तुम्हारे जवाब का इंतज़ार करूँगा

वो मुझे घूरते हुए चली गयी मैंने अपने कपडे उतारे और रोज की तरह निचे गुदड़ी बिछा के सो गया सुबह किसी की पायल की झंकार की आवाज से मेरी नींद टूट गयी तो मैंने अधखुली आँखों से देखा की आज इंदु की जगह मामी झाड़ू निकाल रही थी

मुझे सोया जानकार वो बेख्याली में थी उनकी पतली कमर पर जो मेरी नजर पड़ी कसम से लंड खड़ा हो गया मुझे अब समझ आया की मामी भी कम नहीं थी पतली थी पर फिगर एक दम पटाखा थी मैं अपने लण्ड को एडजस्ट कर रहा था की मेरी टांगो से कम्बल हट गया और तभी मामी मेरी और पलट गयी मेरा नन्गा तना हुआ लौड़ा उनकी आँखों के सामने था

इस परिस्तिथि में मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता था तो आँखों को मूँद लिया और सोने का अभिनय करने लगा मामी प्यारी अपनी आँखे फाड़े मेरे लण्ड को देख रही थी कुछ देर बाद वो मेरे पास आई और हौले से मेरे लंड पर अपना हाथ रखा कई दिनों बाद औरत के हाथ का स्पर्श पाकर लण्ड और टाइट हो गया मामी ने धीरे से मेरे सुपाड़े की खाल को निचे सरकाया

मेरा हाल बुरा हुआ पर मैं चुपचाप पड़ा रहा कुछ देर सहलाने के बाद उन्होंने कम्बल मेरे ऊपर डाल दिया और मुझे जगाने का नाटक करने लगी मैं समझ गया था की मामी मेरे मजे लेने के मूड में है सुबह सुबह क्योंकि कम्बल के निचे मैं नंगा था तो कैसे उठता

इधर वो हंसती हुई मुझको उठा रही तो आखिर मैंने भी कच्ची गोलिया खेली नहीं थी मैं सीधा उठ गया अब मैं बिल्कुल नंगा मामी के सामने खड़ा था मैंने ऐसा दर्शाया जैसे की अभी भी नींद में हु जबकि अब मामी चिल्लाई-हई दइया ये क्या और ऐसे करने लगी जैसे ज़िन्दगी में पहली बार लण्ड देखा हो

तो मैंने तुरंत कम्बल लपेट लिया और माफ़ी मांगने लगा तो मामी कमरे से बाहर जाते हुए धीरे से बोली- कपडे पहन कर सोया करो अब तुम पुरे जवान हो गए हो

उनके जाने के बाद मैं ये सोचते हुए कपडे पहन ने लगा की दिन की शुरआत ऐसी हुई है तो आगे क्या होगा

 


जल्दी ही मैं एक दम तैयार था सहर जाने के लिये बस मैं अपनी साइकिल की धुल साफ़ कर रहा था की इंदु बोली मैं भी तुम्हारे साथ चलती हु तो हम दोनों शहर की ओर चल पड़े रस्ते में मैने उसको पुछा फ्रेंडशिप के बारे में तो उसने कुछ जवाब नहीं दिया

तो मैंने भी उसको ज्यादा फ़ोर्स नहीं किया उस शाम को मैं छत की मुंडेर पर बैठ कर नजारा ले रहा था इंदु चौबारे की चौखट पर खड़ी थी आज पीले सूट में वो गजब लग रही थी तभी उसने अपने पेट वाले हिस्से से अपनी कुर्ती को थोडा सा खिसकाया मुझे उसका फूला हुआ गोरा पेट दिखने लगा

वो मुझे ऐसे ही देख रही थी मैं उसको देख रहा था ना जाने क्यों आज उसकी आँखे कुछ अलग सी लग रही थी मैं मुंडेर से उतरा और चौबारे की तरफ चल पड़ा

वो चौखट पर ही रुकी रही अब हम दोनों एक दुसरे के सामने खड़े थे मैं थोडा सा उसकी तरफ बढ़ा वो बिलकुल दरवाजे से सट गयी हमारे बीच अब बहुत थोडा फासला था इतना थोडा की मेरी सांसे उसके चेहरे पर पड़ने लगी थी दो पल के लिए हमारी नजर मिली और बिना किसी हिचक के मैंने अपने होठ उसके अनछुए होंठो पर रख दिए

ईन्दू ने मेरी शर्ट को अपने हाथो से पकड़ लिया मैं उसके मलाईदार होंठो का रस चूसने लगा उसके होंठ थोडा सा खुले और तभी मैंने उसके निचले होंठ को अपने दोनों होंठो में दबा लिया और उस गुलाबी स्वाद को महसूस करने लगा

करीब दो मिनट तक हमारा किस्स चला उसके बाद मैं उस से अलग हो गया इंदु का पूरा चेहरा हल्का गुलाबी हो गया था उसके चेहरे पर जो हया थी जो चमक थी या जो भी था समझ न सका मैं वो निचे को जाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसको अपनी और खींच भारी भरकम इंदु मेरे सीने से आ लगी अब मेरे हाथ उसकी पीठ पर थे

उसके बदन को सहलाते हुए एक बार फिर से हमारी किसिंग चालू हो गयी उफ्फ्फ आज कितने दिनों बाद एक सुकून सा मिल रहा था पर हमारा रिश्ता भी अजीब था उसने धक्का देकर मुझे खुद से अलग किया और निचे को भाग गयी मैं वही रह गया अपने होंठो पर उस स्वाद को महसूस करते हुए

थोड़ी देर बाद मैं भी निचे आ गया तो पता चला की नाना के एक दोस्त के घर शादी है तो सभी को उधर जाना है शाम तो वैसे ही हो रही थी और नाना अब बता रहे थे तो फिर सब जल्दबाज़ी में तैयार हुए सिवाय मामा के क्योंकि वो काम के चलते बस शनिवार और रविवार को ही घर आते थे पर फिर भी पूरा कुनबा था तो तैयार होने में थोडा टाइम लग गया

अब हम लोग गाड़ी में बैठे नाना और मेरा ममेरा भाई आगे थे मैं नानी और मामी बीच में और बच्चे और इंदु पीछे मैं वैसे तो जाना नहीं चाहता था पर नानी की इच्छा थी तो मैं मना नहीं कर पाया वहा पर हमे बहूत रात हो गयी थी टाइम बारह से ऊपर हो गया था ऊपर से सर्दियो के दिन

खाना वाना खाके बस चलने की तयारी ही थी की नाना को उनका एक दोस्त और मिल गया अब नाना ने उसको घर चलने के लिए कहा पुराना दोस्त था तो वो मना नहीं कर पाया तो वो उसकी पत्नी और एक लड़की और हमसे जुड़ गए अब समस्या हुई गाडी में बैठने की पर मेहमानो को जगह भी देनी थी

थोड़ी दिक्कत तो होनी ही थी पर अब क्या किया जाये तो सब लोग जैसे तैसे एडजस्ट हो गए थे इंदु ने पीछे बैठने से साफ़ मना कर दिया क्योंकि वो आई जब उधर ही बैठ के आई थी और अब उसने खाना थोडा ज्यादा खा लिया था

ऊपर से एक बड़ा कार्टून मिठाई का और कुछ डिब्बे और थे तो उनको पीछे रखने के बाद इतनी ही जगह बनती थी की एक आदमी ही बैठ सके पर लोग दो थे तो मामी ने कहा की आगे पीछे करके बैठ जाएंगे तो मेरे चढ़ने के बाद वो भी आ गयी पर सच में इतनी जगह नहीं थी

मामी मेरी एक जांघ पर अपना पूरा बोझ डाले हुए थी इधर नाना ने गाडी की लाइट बंद की और अब मामी सरक कर मेरी गोद में आ गयी मैं हैरान रह गया मामी धीरे से बोली- कोई परेशानी तो नहीं है ना

मैं बस मुस्कुरा दिया पर परेशानी तो होनी ही थी मामी की गांड को महसूस करते ही मेरे लण्ड में करंट आना शुरू हो गया ऊपर से सड़क पर हिचकोले खाती गाडी तो मामी की गांड की दरार पर मेरा लण्ड एकदम सही सेट हो गया था मुझे बहुत मजा आने लगा था

ऊपर से हिचकोले,तो मैंने अपने दोनों हाथो को मामी की पतली कमर पर रख दिया मामी के मुह से एक आह निकल गयी धीमे से , एक मस्त औरत मेरी गोदी में बैठी थी यही सोच कर मेरे मन में तूफ़ान आ गया था मेरा खुद पर काबू छूट रहा था ऊपर से उनके बदन से जो सुगंध आ रही थी क्या कहना

मैं अब धीरे से अपनी उंगलिया उनके पेट पर चलाने लगा मामी का बदन अँगड़ाई लेने लगा मैं उनकी नाभि से छेड़खानी करने लगा मामी हौले हौले से सिसकिया भरने लगी थोड़ी हिममत करते हुए मैंने अपने हाथो को ऊपर किया और उनकी चूचियो के निचले हिस्से को छूने लगा तो मामी का बदन हिला और वो पीछे हो गय

मामी की गर्दन अब मेरे गालो पर आ गयी थी उनकी सांसो में जो गर्मी थी वो मैं महसूस कर रहा था मेरा जी तो कर रहा था की मामी के गाल चूम लू ,,मैं इतना तो समझ रहा था की वो गरम हो रही है तो मैंने एक दम से अपने दोनों हाथो को उनकी चूचियो पर रख दिया और दबा दिए

मामी ने बड़ी मुश्किल स अपनी आहो को रोका औरबोलि-आः आराम से

बस ये सुनते ही मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया और मैं उनके बोबो से खेलने लगा अब मैं बड़े प्यार से उनकी गेंदों से खेल रहा था

मामी धीरे से बोली- ये मुझे क्या चुभ रहा है

मैं-खुद ही देख लो

तो उन्होंने अपने आप को थोडा सा उठाया और अपने हाथ से मेरे लण्ड को पेंट के ऊपर से ही सहलाने लगी अब वो मेरी जांघ पर आ गयी थी उन्हीने मेरी चैन को खोल कर लण्ड को अपनी मुट्ठी में ले लिया हम दोनों बहुत चुपचाप ऐसा कर रहे थे

 


मामी मेरे सुपाड़े पर अपना अंगूठा रगड़ने लगी मैं उत्तेजना की परकाष्ठा से गुजरने लगा मैंने मामी की साडी को कमर तक उठाया और फिर अपनी गोद में ले लिया अब बस एक कच्छी ही थी मैंने अपना हाथ आगे से चूत पर रखा था वो हिस्सा पूरा गीला था

मैं मामी की चूत को सहलाने लगा मामी की हालात बस पूछो ही मत पर उनको भी तड़पाना खूब आता था ,मामी ने अपनी पैंटी साइड से हटाई और मेरे लण्ड को चूत की दीवार पर रगड़ने लगी ये मैं ही जानता था की किस तरह से मैंने खुद को रोक कर रखा हुआ था

मेरे हाथ बार बार उनकी छातियो को भींच रहे थे मैं बार बार कमर को उचका रहा था की लण्ड चूत में घुस जाए पर वो बस मुझे तड़पाने में लगी हुई थी ऐसे ही वो सफ़र कट गया हमारा और हुमलोग घर आये

घर आने के बाद इंदु सीधा सोने चली गयी मेहमानो को मेरे कमरे में शिफ्ट कर दिया गया मामी शायद रसोई में कुछ करने गयी थी तो मैंने अपने कपडे चेंज किये और बैठक में सोने की तैयारी करते हुए बिस्तर लगा रहा था की मेरे छोटे मामा बोले तू इधर मत सो क्योंकि उनका आज फ़िल्म देखने का प्रोग्राम था

तो अब गर्मी का मौसम होता तो मैं छत पर सो जाता पर अब मैं कहा जाऊ फिर सोचा की बरामदे में सो जाता हु तो मैं उधर जा रहा था की मामी रासोई से आती दिखी

मामी-कहा घूम रहे हो सोये नहीं अभी तक

मैं-जी वो आज जगह नहीं मिली सोचा बरामदे में सो जाऊंगा

मामी- पागल हो क्या इतनी ठण्ड में उधर सोवोगे सुबह तक कुल्फी जम जानी है और ये क्या रज़ाई क्यों नहीं लेते अब कम्बल से काम नहीं चलने वाला ,एक काम करो मेरे रूम में आ जाओ वहाँ सो जाना

ये कह कर मामी रूम में चली गयी मैंने अपना बिस्तर वहीं छोड़ा और बाथरूम। में चला गया थोड़ी देर बाद मैं कमरे में गया मामी कमरे में अकेली थी

मैं-बच्चे कहा है

वो-वो तो इंदु के साथ सोते है

मैं-अच्छा ,रात बहुत हुई सोते है

मामी- इधर मेरे पास आ जाओ

तो हम लोग बेड पर आ गए एक रजाई में सरीर में एक दम से गर्मी सी आ गयी मामी ने बस एक पतली सी नाइटी पहनी हुई थी ,इधर मामी के बदन से टच होते ही मेरे बदन में सुरसुराहट होने लगी थी गाडी में जो कुछ हुआ था उस से मैं जान गया था की मामी फुल तैयार है चुदने के लिए

बस शुरुआत करने की ढील थी पर पता नहीं क्यों मैं झिझक रहा था

मामी ने मेरी जांघ पर हाथ रखा और बोली- ये क्या रोज तो कच्छे में सोते हो आज पायजामा क्यों पहन रखा है

मैं-वो आज आपके साथ हु ना इसलिए

वो-तो क्या हुआ, उतार दो इसको जैसे रोज सोते हो वैसे ही सोवो

मैंने पायजामा उतार दिया मामी ने फिर से मेरी जांघ पर फिर से हाथ रख दिया और सहलाने लगी उनके स्पर्श मात्र से ही मेरे लंड में आग लगनी शुरू हो गयी थी ,मामी के बदन की मनमोहक खुशबु मेरी उत्तेजना को परकाष्ठा पर ले जाने लगी

उनकी उंगलिया अब मेरे लण्ड को ऐसे छु रही थी जैसे अनजाने में हाथ लग रहा हो पर जो हो रहा था वो सब अनजाने में नहीं बल्कि राजी ख़ुशी में हो रहा था और फिर मामी ने कच्छे के ऊपर से ही मेरे लण्ड को कस कर पकड़ लिया

अब मैं बेकाबू हो गया और मामी को अपनी बाहो में भर लिया और उनकी चूची को दबाते हुए किस्स करने लगा मामी की मदहोश आहे मेरे मुह में घुलने लगी चॉकलेट फ्लेवर की लिपस्टिक लगे होंठो के उस मदमस्त स्वाद ने मेरे तन में आग लगा दी थी

इधर मामी के हाथ मेरे लण्ड को छोड़ ही नहीं रहे थे उन्होंने मेरे कच्छे को घुटनो तक सरका दिया था और मेरे मोटे लण्ड को अपनी मुट्ठी में भर के उसका भूगोल नाप रही थी

मामी की मैक्सी के अंदर पहुच चुके मेरे हाथो ने महसूस कर लिया था की अंदर ब्रा-पेंटी कुछ नहीं है बस मेरी उंगलिया उनकी छातियो में उत्तेजना भर रही थी हमारे होठ एक दूसरे से ऐसे चिपके हुए थे जैसे फेविकोल का जोड़ हो

मामी का हाथ तेजी से मेरे लण्ड पर चल रहा था रजाई कब की हमारे बदन से उतर कर साइड में हो गयी थी पता ही नहीं चला था अब हमारी किस्स टूटी मैंने नाइटी को उतार दिया हम दोनों नंगे हो चुके थे मैं उनकी चिकनी टांगो को सहलाते हुए उनके गालो को खाने लगा

 
मामी का बदन गरम हो रहा था एक बार फिर से हम दोनों एक दूसरे का मधुरस चखने लगे थे मैं अपनी जीभ को मामी के मुह के अंदर घुमा रहा था मैंने अब अपने हाथ को उस जन्नत के दरवाजे की और ले जाना शुरू किया मामी की टाँगे अपने आप मुझे रास्ता दे रही थी

और जैसे ही मैंने मामी की बिना बालो वाली चूत को छुआ तो मामी ने अपनी जांघो को भींच लिया उफ्फ्फ्फ़ कितनी गीली हो राखी थी मामी मैं अपनी बीच वाली ऊँगली को उनके भगनसे पर रगड़ने लगा अब हमारे होठ अलग हुए चेहरे को जी भर के चूमने के बाद मैं अब मामी के पेट पर किस्स करने लगा उफ्फ्फ कितनी चीकनि औरत थी ये

मैं उनकी नाभि में अपनी जीभ को घुमा रहा था मामी की आहे अब तेज हो गयी थी मैं अपनी ठोड़ी को उनके मांसल बदन पर रगड़ते हुए योनि की तरफ बढ़ रहा था की तभी मामी ने मुझे हटाया और बेड से उतर गयी

मैं उनकी नाभि में अपनी जीभ को घुमा रहा था मामी की आहे अब तेज हो गयी थी मैं अपनी ठोड़ी को उनके मांसल बदन पर रगड़ते हुए योनि की तरफ बढ़ रहा था की तभी मामी ने मुझे हटाया और बेड से उतर गयी

मामी इस तरह खड़ी थी की उनकी पीठ मेरी तरफ थी मैं भी उतरा और मामी को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया मेरा लण्ड उनके चूतड़ो की दरार में घुसने लगा मैं उनके दोनों उभारो को अपनी मुट्ठी में कैद किये मामी के सुडोल कंधो को चूमने लगा

मामी-आअह हाआआआ

मामी के कुल्हो की मादक थिरकन ने मुझे हद से ज्यादा गरम कर दिया था इधर मैं उनकी गर्दन के पिछले हिस्से को चूमने लगा था हम दोनों के जिस्म इस उतेजना की आग में तपने लगे थे किसी मछली की तरह मामी अब मेरे आगोश से निकल गयी अच्छी अदा थी तड़पाने की पर मै भी कम नहीं था

मैंने फिर से मामी को पकड़ लिया और अपनी एक ऊँगली चूत में सरका दी मामी हलके से चीखी पर अब कौन सुनने वाला था उनकी मैं तेजी से अपनी ऊँगली का जादू चलाने लगा मामी पसीना पसीना होने लगी थी

फिर मैंने अपनी ऊँगली बाहर निकाली और मामी के होंठो पर रगड़ने लगा उन्होंने अपनी आँखों को बंद कर लिया अब मैंने उनको पटक दिया बिस्तर पर उनकी टांगो को फैलाते हुए बीच में आ गया और मामी की योनि पर अपने हथियार को रगड़ने लगा मामी अब सिसकारियाँ भरने लगी

उनकी चूत के रिस्ते पानी में मेरा सुपाड़ा भीगने लगा पर उसकी मंजिल अभी बाकी थी मामी की टांगो को एडजस्ट करते हुए अब मैंने लण्ड को सरकाना शुरू किया तो वो मामी की चूत को फैलाता हुआ अंदर जाने लगा

मामी-आअह आराम से दर्द करोगे क्या

मैं-इस दर्द का ही तो मजा है

ये कह कर मैंने एक तेज झटका लगाते हुए अपने लोडे को छूट के और अंदर धकेल दिया मामी की टाँगे अपने आप खुलती चली गई दो बच्चों की माँ होने के बाद भी चूत में कसावट थी मैं धीरे धीरे अपने लण्ड को अंदर बाहर करने लगा

मामी ने अपने दोनों हाथ मेरे सीने पर रख दिए और सहलाने लगी मुझे ऐसे लग रहा था की जैसे लण्ड पर किसी ने स्क्रू कस दिया हो बिना कुछ बोले हमारी चुदाई चालू थी

मेरा लण्ड उस रसीली चूत के एक एक बूँद से नहा रहा था धीरे धीरे करते हुए अब मैं पूरी तरह मामी पर चढ़ चूका था वो अपनी बाहे मेरी पीठ पर रगड़ रही थी मैं हुमच हिमच कर चोद रहा था मामी को

जल्दी ही वो भी अब एक्सप्रेस हो गयी थी और निचे से धक्के लगा रही थी मैंने फिर से मामी के शहद से भरे होंठो को अपने मुह में ले लिया वो बार बार अपनी चूत को टाइट करती फिर ढीली करती फिर टाइट करती अब जहा हुस्न होता है वहा अदा तो होती ही है

अब किसे सर्दी लग रही थी दोनों के बदन जल जो रहे थे मेरे धक्को की रफ़्तार से मामी का समूचा बदन बुरी तरह से हिल रहा था खासकर उनकी चूचिया लगभग मंझधार में आ कर मैंने मामी को अब घोड़ी बना दिया

उनकी गांड पीछे की तरफ उभर आई थी मामी के बेहद दिलकश सुडोल चूतड़ किसी का भी मन मोह ले मेरी तो बिसात ही क्या थी,मैंने बिना देर किये चूतड़ो को चूमना शुरू किया मांस से भरे चूतड़ो का काफी हिस्सा मेरे मुह में जा रहा था

मामी की आहो में एक दम से तेजी आ गयी थी वो अपने चुतड मेरे मुह पर पटकने लगी उफ्फ्फ्फ़ ये उत्तेजना मामी ने अपनी दोनों जांघो को चिपका लिया जिस से पिछवाड़ा और उभर आया और फिर मैं अपनी जीभ से उस रस टपकती चूत को चाटने लगा तो मामी की टाँगे कांप गयी

उन्होंने अपना मुह तकिये में छुपा लिया और गांड को हिला हिला के चूत चटवाने लगी ढेर सारा खारा पानी मेरे मुह में घुल रहा था पर मैंने ऐसा ज्यादा देर नहीं किया क्योकि अभी इस घोड़ी की सवारी जो करनी थी

मैंने एक बार से अपने औज़ार को फिट किया और मामी फिर से चुदने लगी उनकी पतली कमर को थामे हुए मैं अब पूरी रफ्तार से चुदाई करने लगा मामी भी कुल्हो को आगे पीछे कर रही थी बस सांसे सुलग रही थी शुरआत हो गयी थी अंत की आस थी

करीब दस मिनट तक वो घोड़ी बनी रही वो मैं चोदता रहा और फिर उनके बदन ने झटका खाया और वो बिस्तर पर गिर गयी मैं भी उनके ऊपर लेटा हुआ चूत माँर रहा था मामी झड़ रही थी और साथ ही मेरा पानी भी उनकी चूत में गिरने लगा

 
मामी और मैं कुछ देर के लिए तृप्त हो गए थे पर अरमानो की आग के कुछ शोले अभी बाकी थे जिन्हें बस एक हवा की जरुरत थी मामी मेरी बाहों में पड़ी थी उनके बदन की खुसबू बड़ी मनमोहक थी और चुदाई के बाद तो जैसे वो महक ही उठी थी

अपनी सांसो को सँभालने के बाद मैंने मामी को फिर से अपने बदन से चिपका लिया और उनके कुल्हो को सहलाने लगा एक जानी पहचानी खुमारी फिर से हम पर चढ़ने लगी और कुछ पलो बाद मामी मेरी गोद में चढ़ी हुई थी

गोद में चढ़के मामी ने अपनी टांगो को मेरी कमर पर लपेट लिया और मेरी गर्दन पर अपने हाथ रखते हुए मेरे चेहरे को चूमने लगी मेरा आधा खड़ा लण्ड उनकी गांड की दरार में रगड़ पैदा करने लगा मामी के होंठ से बहता थूक मेरे चेहरे को भिगो रहा था

उत्तेजना से वशिभूत वो बहुत जोरो से किस्स कर रही थी अपने दोनों कुल्हो के बीच दबाये मेरे लण्ड में वो आग भर रही थी अब मामी ने अपने चेहरे को हटाया और मेरे मुह में अपनी एक चूची दे दी जोश में आके

मैंने निप्पल पर जोर से काट लिया तो वो सिसक उठी "आह:" पर उनको भी पता था की इन हरकतों का भी अपना ही मजा था मामी की पीठ को रगड़ते हुए मैं बारी बारी उनके दोनों उभारो को निचोड़ रहा था

अपनी उत्तेजना को अरमानो के पंख दिए मामी फिर से तैयार हो रही थी वासना के आकाश में उड़ने के लिए दोनों बोबे जगह जगह से लाल हो गए थे साथ ही थोड़े फ़ूल गए थे मामी ने मेरे सीने पर किस किया और मेरी गोद से उठ गयी

मेरा लण्ड जो अब पूरी तरह से तैयार था एक बार फिर से उनकी चूत में खुदाई के लिए मामी ने उसे देख कर अपने होंठो पर जीभ फ़िराई और अपने लाल सुर्ख होंठो को मेरे लण्ड पर रख दिया मेरे सुपाड़े पर हुए इस चुम्बन से तन बदन में खलबली मच गयी

लण्ड से जो प्री कम निकल रहा था वो अपनी जीभ से उसे चाट रही थी बल्कि उनकी कोशिश थी की जीभ को उस छेद में घुसा सके लगभग आधा लण्ड उनके मुह में था और हाथ दोनों अन्डकोशों पर जिसे वो बड़े प्यार से सहला रही थी

मैं तो पूरी तरह से मस्ती के सागर में डूब गया था अनुभवी औरतो के साथ सेक्स का यहितो सबसे बड़ा फायदा होता है की वो पल भर में ही समझ जाती है की बन्दे को क्या चाहिए अब उन्होंने पुरे लण्ड को अपने गले तक ले लिया था और मुझे मुख मैथुन का पूरा मजा दे रही थी

पर साथ ही अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था तो वैसे भी वो कई देर से चूस ही रही थी तो अब उनके कुल्हो को थपथपाया और उनको फिर से घोड़ी बना दिया मामी की बड़ी सी गांड मेरे सामने थी मैंने अपने दोनों हाथो से कुल्हो को थाम लिया हाय कितने मुलायम थे

मैं बारी बारी से मामी के सुडोल चूतड़ो पर किस्स करने लगा कसम से बहुत मजा आ रहा था कई बार मैंने काटा उनको तो मामी बस चिहुंक कर रह गयी चूमते चूमते मेरी नाक मामी की चूत से टकराई उफ्फ्फ्फ़ क्या गजब खुसबू आ रही थी मैंने अपने चेहरे को चूतड़ो के बीच दे दिया

और चूत को अपने मुह में भर लिया ढेर सारा गाढ़ा खारा खट्टा पानी मेरे मुह में भर गया जिसे मैं गटकने लगा इधर मामी के बदन में खलबली सी मच गयी थी अब उनकी आहे बाहूत तेज हो गयी थी बदन झटके खाने लगा था उनके चूतड़ जैसे थिरक रहे थे मेरी जीभ अब अंदर के लाल वाले हिस्से पर रगड़ पैदा कर रही तो जिस से मामी मस्ती की लहरो पर सवारी कर रही थी

इधर मेरे लण्ड में हो रही ऐंठन परेशान कर रही थी तो मैंने लंड पर थूक लगाया और मामी की चूत पर लगा दिया मैंने अपने हाथ चूतड़ो पर रखे और मामी की चूत में लण्ड घुसाने लगा मामी आगे को सरकी पर मैंने। उन्हें फिर से पीछे कर लिया और धक्कमपेल चालू कर दी

मामी की कद काठी वास्तव में ही बहूत सेक्सी थी बेशक वो थोड़ी पतली टाइप थी पर कामुकता छलकती थी अंग अंग से और ये आज उन्होंने प्रूव भी कर दिया था की बिस्तर पर वो किसी से कम नहीं है

चुदाई की थाप गूँज रही थी कमरे में सर्दी के मौसम में भी पसीना चल पड़ा था बदन से बहकर करीब दस मिनट तक वो घोड़ी बने चुदती रही फिर झटके से मैंने लण्ड को बाहर निकाल लिया वो हवा में झूलने लगा मामी मेरी और देखने लगी

मैंने उन्हें लिटाया और उनकी टांगो को अपने कंधे पर रखते हुए फिर से चोदना शुरू कर दिया मामी की छातियाँ बुरी तरह से हिल रही थी चिकनी चुत मे मेरा तूफानी लण्ड आतंक मचाये हुआ था मामी भी पूरी तरह मस्ती से भरी हुई थी लिहाज़ा अब उन्होंने

मुझे पूरी तरह अपने उपर खीच लिया और अपने होंठो की शबनम मुझे पिलाते हुए चूत मरवा रही थी उन्होंने अपने चूतड़ पूरी तरह से ऊपर उठा रखे थे इधर मेरे धक्के चालू थे उधर उनके परिणाम स्वरूप अब गाड़ी मंजिल पर पहुंचने ही वाली थी

मामी का हाल तो नहीं पता पर मैं अब झड़ने ही वाला था तो मैं तेज तेज करने लगा उन्होंने कस के मुझे अपनी बाहो में जकड़। रखा था और जैसे ही मेरा वीर्य उनकी चूत को गीली करने लगा मामी भी अपने चरम पर पहुच गयी और मेरी बाहों में झूल गया

उस रात हम दोनों ने अपनी प्यास जी भर के मिटाइ सुबह कुछ हलकी हलकी सी लग रही थी मैं उठके रसोई में चाय लेने गया तो मामी ने मुझे दूध का गिलास दिया और बोली-तुम्हे इसकी जरुरत है

मैं-पर मुझे चाय ही पीनी है

वो- समझा करो तुम दूध पियोगे तभी तो मैं मलाई खा पाऊँगी ये बोलकर हँसते हुए उन्होंने मुझे गिलास पकड़ा दिया और फिर अपना काम करने लगी

मैं कुछ कह ही नहीं लाया जबकि वो पूरी एडवांटेज ले रही थी दूध पीके मैं बैठक में आया तो नाना और उनके दोस्त नाश्ता कर रहे थे तो मैं इंदु के कमरे में आकर बैठ गया पर आज मैंने देखा की वो किताबो से चिपटी नहीं थी

बल्कि आराम से बैठ कर डेक चला के गाने सुन रही थी मैने देखा उसके बालो से पानी झर रहा था शायद कुछ देर पहले ही नहा के आई थी अब इतनी जोर की सर्दी पड रही थी और ये नहाने में लगी थी

उसने मुझे देखा और बोली-उठ गए तुम मैं जगाने आ ही रही थी मेरी एक सहेली के घर चलना है

मैं-तुम्हारी सहेली तुम जानो मेरा क्या काम

वो- अरे चल ना जल्दी ही आ जायेंगे

मैं- चल तो पडूंगा पर एक किस्स दो तो

इंदु अपनी आँखे फाड़े मेरी तरफ देखने लगी

मैं-ऐसे क्या देख रही हो अब तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो की नहीं

वो-तो क्या हर बात के लिए ऐसे शर्ते रखोगे

मैं- नाराज हो गयी तुम तो

वो-तो और क्या करू

मैं-किस्स करो मुझे और क्या करोगी

इंदु के बदन से पानी की महक आ रही थी और वो लग भी तो रही थी कितनी ताज़ा जैसे किसी गुलाब पर पड़ी ओस की बूंदे उसकी आँखों में हां पढ़ कर मैंने अपने होंठ आगे बढ़ाये और उसके नरम होंठो को मसलने लगा जैसे गुलकन्द घुलने लगी हो मेरे मुह में

पर उसने मुझे हटा दिया और बोली-ब्रश नहीं किया न तूने

अब किस्स में ब्रश कहा से आ गया उसने कहा जल्दी से तैयार हो जाऊ तो मैं नहाने के लिए आ गया गरम पानी रख के बस तौलिया लेके घुस ही रहा था की मामी मेरे पास आई और बोली- आराम से नहाना पानी थोडा ज्यादा गरम है और हां अब तुम्हे मेरी पेंटी ख़राब करने की जरुरत नहीं है

मामी ने हस्ते हुए कहा और ठुमकते हुए चली गयी मैं दो पल उनकी गांड को निहारता रहा फिर नहाने लगा तैयार होक मैं और इंदु उसकी दोस्त के घर की और चल दिया जो थोड़ी दूर था रस्ते में मेरा पूरा ध्यान इंदु की और था हल्का गुलाबी रंग उसके गोरे बदन पर खूब जन्च रहा था

मेरे मन में बस उसकी लेने का ही विचार आ रहा था उस टाइम और वो थी भी इतनी खूबसूरत की हर कोई उसको पाना चाहे तो थोड़ी देर बाद हम पहुच गए उसकी दोस्त ने हमारा खूब सत्कार किया पर मैं उसको जानता नहीं था तो अब मैं क्या बात करता खैर वहाँ हमे कई देर लगी और दोपहर का खाना खाकर ही हैं लोग आये

घर आने के बाद इंदु ऊपर चली गयी मैं टीवी देखने लगा कुछ देर बाद नानी ने कहा की जरा इंदु को बुला के ला तो मैं चौबारे में गया और यही गजब हो गया दरवाजे पर खड़े खड़े ही मेरा बुरा हाल हुआ दरअसल उस टाइम इंदु कपडे बदल रही थी

वो बस ब्रा और सलवार में खड़ी थी उसको उस अवस्था में देख कर मेरा सब्र टूटने लगा काली ब्रा में कैद उसके उभार जिनका बोझ वो ब्रा उठा नहीं पा रहा था वो भी मुझे देख कर चोंक गयी और जल्दी से अपनी कुर्ती को पहनने लगी पर उस से पहले ही मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसको किस्स करने लगा

साथ ही उसकी चूचियो को मसलने लगा सम्भवत ये उसके अंगो पर पहला पुरुष स्पर्श था मैं जितना जोर से उसके उभारो को दबाता वो उतना ही उत्तेजित हो रही थी उसके होंठ चूसते हुए मैं अब सलवार के ऊपर से ही उसकी योनि को सहलाने लगा कुछ पलो के लिए हम लोग दुनियादारी छोड़ एक दूसरे में खोने लगे थे

पर जैसे ही मैंने सलवार के अंदर हाथ डालना चाहा उसने मुझे परे धकेल दिया और अपनी कुर्ती पहन ने लगी मैंने उसे बताया की नानी बुला रही है कुछ देर बाद हम लोग निचे आ गए अब बार बार हमारी नजर टकरा रही थी इंदु को इन सब चीज़ों की आदत नहीं थी तो वो असहज महसूस कर रही थी

इधर पड़ोस में ही एक लड़का बंटी मेरा दोस्त बन गया था तो मैंने सोचा उसके घर हो आता हु तो मैं उसके घर गया पर वो नहीं मिला वहाँ बस उसकी बहन मिली वो भी इंदु की तरह एक मस्त भरी हुई लड़की थी जवानी में चूर अल्हड एक दम मुझसे बहुत हँसी ठठोली करती थी वो

पर मैं ऐसे ही जाने देता था तो उस दिन मैं गया पर बंटी मिला नहीं

मैं- कब तक आएगा

वो-तू बस उस से ही मिलने आता है कभी मुझसे मिलने भी आया कर

मैं-आपसे मिलके क्या करूँगा

वो-क्यों कुछ करने के लिए ही मिलते है क्या आजा चाय बनायीं है पिके जाना

मैंने सोचा की कही इसको बुरा न लगे तो मैं घर के अन्दर चला गया उसकी बड़ी सी गांड को देखते हुए मैं सोचने लगा की माल तो मस्त है जल्दी ही वो चाय ले आई और मुझे पकड़ाने लगी तभी उसके हाथ से कप छूट गया और .....................

 
चाय का गर्म कप मेरे ऊपर आ पड़ा मेरी पेंट ख़राब हो गयी और गर्म चाय की वजह से थोड़ी तकलीफ होने लगी वो अपनी चुन्नी से मेरी पेंट पर पड़ी चाय को साफ़ करने लगी पर ये तो उसका बहाना था उसकी उंगलिया मेरे लिंग प्रदेश पर फिसलने लगी

वो थोड़ी सी झुकी हुई थी तो उसकी चुन्नी सरक गयी थी और सूट से उसके गोल मटोल उभार मेरी आँखों के सामने लहरा कर मुझे लालच दे रहे थे इधर उसने पेंट के ऊपर से ही मेरे लण्ड को दबाया तो मेरी आह निकल पड़ी उसने मुस्कुरा कर मेरी और देखा और मेरे हाथ को अपने सीने पर रख दिया

ये उसका निमन्त्रण था मुझको पर शायद मैं इसके लिए तैयार नहीं था तो मैंने उसको दूर झटक दिया और अपने घर आ गया ऐसी बात नहीं थी की बंटी की बहन मुझे पसंद नहीं थी पर पता नहीं क्यों मैं उस से सम्बन्ध बनाने को तैयार नहीं हो पा रहा था

उस रात मामी ने फिर से अपने कमरे में आने को कहा पर मैंने ध्यान नहीं दिया सुबह मैं पढ़ने के लिए चला गया इधर मेरे मन में बस नीनू का ही ख्याल था , की कैसे मैं कांटेक्ट करू उसको मैं अपने गाँव जाना चाहता था

पर नानाजी पता नहीं क्यों चाहते थे की मैं अब उस जगह से दूर रहु,मैंने कई बार उनसे इस बारे में बात की पर हर बार उन्होंने इतना ही कहा की अब मुझे इधर ही रहना है तो मैं कुछ नहीं बोल सका

तो उस दिन मुझे आने में देर हो गयी थी ऊपर से अँधेरा हो रहा था मैंने शॉर्टकट लिया ये थोडा सुनसान सा कच्चा रास्ता था सड़क के दोनों और काफी घने पेड़ लगे हुए थे ठंडी हवा चल रही थी सांय सांय करते हुए करीब दो किलोमीटर चलने के बाद मेरी साइकिल की चैन टूट गयी

ये नयी मुसीबत हुई मैं पैदल पैदल ही चल रहा था पक्की सड़क कब की पीछे छूट गयी थी अँधेरा तेजी से घिरने लगा था कुछ दूर जाने के बाद मैंने देखा की 8-10 लोग सड़क किनारे आग जला के बैठे थे मैं उनके पास से गुजरा तो उनमे से एक ने मुझे रोका

वो-भाई ,इधर से फलाने गाँव का रास्ता किधर से जाएगा

मैं उसको रास्ता बता रहा था की तभी मेरी आवाज जैसे बनद हो गयी शरीर में एक दर्द की लहर दौड़ गयी कुछ समझ पाता उस से पहले ही पीछे से किसी ने वार किया मेरी कमर के साइड में चाकू घुसा हुआ था

लबालब खून बह रहा था ये सब क्या हुआ आँखों के आगे अँधेरा छा गया एकदम से तभी सर में एक धमाका सा हुआ उनमे से किसी ने सर पर किसी डंडे से वार किया था ये सब इतनी जल्दी जल्दी हो रहा था की मैं खुद को संभाल ही नहीं पा रहा था जिधर से देखो मार पड़ रही थी

होश सांस छोड़ रहा था पर मैंने भी सोच लिया था की ऐसे नहीं मरना एक कोशिश तो अपनी भी बनती थी यार पर इतने लोगो के आगे मेरा क्या बस चलना था जितना मैं प्रतिकार करता उतने ही उनके वार बढते जा रहे थे

मेरी सफ़ेद शर्ट लाल हो चली थी मुह से खून निकल रहा था पर वो लोग बस मारते जा रहे थे और मेरा बस नहीं चल रहा था तभी एक की कलाई मेरी पकड़ में आई और मैंने उसको धर लिया हाथो में अब ताकत बचीं नहीं थी पर मैं कोशिश कर रहा था

और एक बार फिर से कुछ लोहे सा मेरे पेट में घुस पड़ा और मैं जमीं पर गिर पड़ा साँस जैसे रुक सी गयी लगा की प्राण छूट गए फिर कुछ पता नहीं रहा चारो तरफ अँधेरा छाता चला गया

पता नही कितनी देर हुई जब आँख खुली तो हर तरफ अँधेरा था आह ओह खांसते हुए मेरी आवाज उस बियाबान में गूंजने लगी मेरा सर दर्द से फ़टे जा रहा था मैंने अपनी हथेली धरती पर रखी और उठना चाहा पर उठ नहीं पाया उंगलिया पेट से टकराई तो पता चला की गहरा ज़ख्म है अपनी फ़टी शर्ट को पेट पर बाँधा

आज ये बनी मेरे साथ इधर उधर टटोला तो एक लकड़ी मिल गयी उस का ही सहारा लेकर मैं खड़ा हुआ पर शायद पैर में भी चोट लगी थी टाँगे साथ नहीं दे रही थी पर हिम्मत नहीं हारनी थी वर्ना ज़िंदगी की जंग भी हार जानी थी

दर्द से चीखते हुए मैं उस सड़क पर घिसटने लगा पर अँधेरे की वजह से मैं समझ नहीं पा रहा था की शहर किस और है हर गुजरते लम्हे के साथ धड़कन मंदी पड़ने लगी थी शहर भी करीब दो कोस दूर था

 


आँखों से बहते आंसू का नमक मेरे ज़ख्मो में मिल कर मेरे दर्द को और बढ़ा रहा था पता नहीं मैं रो रहा था या तड़प रहा था पर मुश्किल बहुत हो रही थी नब्ज़ जैसे डूब रही थी आस का दामन पल पल छूट रहा था और फिर मैं गिर पड़ा आँखे बस बुझने ही वाली थी की

घुन्ध को चीरते हुए कुछ रौशनी सी दिखने लगी अपनी डूबती आँखों को मैंने कुछ हिम्मत दी और सारा दम लगाते हुए एक बार फिर से मैं उठ खड़ा हुआ ये एक दूध वाले की गाडी थी वो शायद भगवन का दूत था मेरी हालात देखते ही वो समझ गया कुछ तो गलत हुआ है

मुझे फिर कुछ याद ना रहा बस मेरा बेहोश शरीर उस की बाहों में झूल गया सब शांत होते चला गया दर्द मिटता चला गया

पता नहीं उसके बाद क्या हुआ पर जब आँख खुली तो सर चकरा रहा था मैंने अधखिली आँखों से देखा तो पता चला की मैं हॉस्पिटल में था बदन पर

पता नहीं उसके बाद क्या हुआ पर जब आँख खुली तो सर चकरा रहा था मैंने अधखिली आँखों से देखा तो पता चला की मैं हॉस्पिटल में था बदन पर जगह जगह पट्टी और प्लास्टर बंधा हुआ था हिलने की कोशिश की पर हिल नहीं पाया कुछ देर बाद डॉक्टर अंदर आया

मुझे होश में देखकर वो खुस होते हुए बोला -तो आखिर होश आ ही गया तुम्हे

मैं-मेरे घरवाले कहा है

डॉ-रेलक्स यंग मेन रिलैक्स

मैं- पर

डॉ- बरखुरदार, मैंने कहा ना रिलैक्स ,दिमाग पे ज्यादा जोर मत डालो पुरे 2 महीने बाद होश में आये हो

मैं-2 महीने

डॉ- हाँ, इतस अ मिरेकल जिस हाल में तुम यहाँ आये थे मैं खुद सोचता हु

मैं- मेरे घर वाले

वो- थोडा इंतज़ार रखो कुछ टेस्ट करते है फिर मिल लेना

करीब शाम को नाना नानी से मिलने दिया दोनों मुझे देख कर फुट फुट के रोने लगे उनकी बेटी की एकलौती निशानी इस हाल में जो थी होश में आने की इत्तिला शायद पुलिस को भी कर दी गयी थी तो वो बयान लेने लगे पर मुझे तो बस इतना ही पता था की

अचानक से हमला हुआ था तो वो लोग चले गए इधर मैं किसी को क्या कहता मैं तो खुद एक लंबी नींद से जगा था नाना मामा ने किसी प्रकार की कोताही ना की सबकी यही इच्छा थी की बस मैं जल्दी से ठीक हो जाऊ

पर मेरे दिमाग में बस यही एक सवाल घूमता रहता था की उन लोगो ने मुझ पर हमला किया तो क्यों पहले मेरे परिवार की एक्सीडेंट में मौत हो गयी और फिर मुझ पर हमला मेरा दिमाग बिमला की और जाने लगा उसने कहा भी था की वो मुझे बर्बाद कर देगी बदला लेगी तो क्या ये सब उसकी चाल थी

कुछ भी करके मुझे इन सब बातो का पता करना था हर हाल में पर उसके लिए मुझे सबसे पहले ठीक होना था अपनी बिखरी ताकत समेटनी थी

दिन हॉस्पिटल के बेड पर गुजर रहे थे ठीक होने की जद्दोजहद जारी थी हर दिन इंदु मिलने आती थी मामी कभी कभी रात को भी रुक जाया करती थी पर एक सवाल और मेरे मन में था की गाँव से चाचा या बिमला भी मिलने नहीं आये ले देकर अब वो लोग ही तो थे परिवार के नाम पे

मामी ने बताया की उनको इत्तिला तो की थी पर कोई जवाब नहीं आया न वो आये टाइम टाइम की बात थी सब बुरा दौर था ये भी बीत ही जाना था करीब एक महीना ऐसे ही बीत गया और मैं घर आ गया तबियत में सुधार तो था पर इतना भी नहीं था

इधर मैंने एक बात पे और गौर किया की मेरे मामा का व्यवहार मेरे प्रति बदल गया था और वो नाना या और घरवालो से भी ठीक से बात नहीं करते थे हमेशा झल्लाए से रहते थे उस दिन जब मामी मेरी मालिश करने आ रही थी तो भी उनकी कहासुनी हो रही थी

तो मैंने मामी से कारण पुछा पर उन्होंने टाल दिया पर कोई तो बात थी ही दिन कटने लगे अब पढाई लिखाई तो छूट गयी थी पैरो में जान आने लगी थी तो हलकी फुलकी कसरत भी शुरू कर दी थी एक शाम घर पर बस मैं और मामी ही थे

तो मामी मेरे पांवो की मालिश कर रही थी

मैं- गाँव की क्या खबर आई कुछ

वो- नहीं तो

मैं-मुझे लगता है की अब मुझे अपने गाँव जाना चाहिए

वो-ये क्या तुम्हारा घर नहीं है

मैं-घर तो है पर मेरा इधर मन नहीं लगता है

वो- मन क्यों नहीं लगेगा मैं हु ना तुम्हारा ख्याल रखने के लिए

ये कहकर वो मुस्काई और मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया

मैं-क्या करती हो

उन्होंने मेरे होंठो पर ऊँगली रखी और बोली-शह्हह चुप ,तुम कहा जाओगे अभी तो तुमसे ठीक से बात भी नहीं की उस रात तुमने एक आग लगा दी मेरे अंदर पर उस से ज्यादा बात ये है की तुम बहुत पसंद हो मुझे

मैं-पर ये सब गलत है

वो-कुछ सही गलत नहीं होता बस कुछ लम्हे होते है जो बाद में याद बन जाया करते है

मामी ने मेरे कच्छे को निचे सरका दिया और अपने तेल से सने हाथो से मेरे सोये हुए हथियार की मालिश करने लगी तो कई दिनों बाद शरीर में एक जानी पहचानी सी सुरसुराहट होने लगी थी मामी के हाथो में जैसे जादू था लण्ड महाराज जल्दी ही तन कर फुफकार मारने लगे

मामी की आँखों में एक गुलाबी नशा सा चढ़ने लगा था कुछ देर तक वो उसको सहलाती रही फिर उन्होंने अपने चेहरे को मेरी टांगो के मध्य झुका दिया जैसे ही उनकी गुलाबी जीभ लपलपाती हुई मेरे सुपाड़े से टकराई मेरा पूरा बदन सिहर उठा

बदन किसी धनुष की भाँती तन सा गया था मामी ने किसी गोलगप्पे की तरह सुपाड़े को मुह में ले लिया और चूसने लगी एक अजीब सी झनझनाहट होने लगी थी मस्ती चढ़ने लगी थी मेरी आँखे बंद होने लगी थी पर ये मस्ती से नहीं था ये कमजोरी से था

पर मामी ज़िद पे जो अडी थी वो अपनी हवस से मजबूर थी बड़ी तल्लीनता से वो चुसाई में मशगूल थी की दरवाजा पीटा किसी ने तो वो हड़बड़ा गयी अपने कपड़ो को सही किया जल्दबाजी में और गेट खोलने चली गयी ,मैंने भी कछे को ऊपर चढ़ा लिया पर मेरा हथियार तेल में सना हुआ था और ऊपर से तना हुआ भी तो मैं अब कैसे छुपाऊ उसको

तो मैंने तकिये को गोदी में रख लिया बंटी की बहन आई थी मामी का दिमाग उसको देखते ही खराब हो गया पर ऐसे उसको जाने को बोल भी नहीं सकती थी रवि की बहन ने बताया की मामी को नानी ने उनके घर बुलाया था कोई कपडे वाला आया हुआ था

तो मामी चली गयी वो मेरे पास आ गयी

 
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