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Guest
मैंने अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया और बस ऐसे ही उसपे अपना हाथ फेरने लगा उन मादक दृश्यों को देख कर मेरा मन काबू से बाहर होने लगा काश पिस्ता इस समय होती तो चोद लेता ऐसे ही सोचते हूँए मैं मुठमार रहा था की किसी की आवाज आई-शाबाश,बहूँत अच्छे
आवाज की दिशा में गर्दन घुमी तो मैंने देखा कृष्णा जी खड़ी थी ,पिस्ता की जेठानी मैंने जल्दबाज़ी में अपनी ज़िप बंद की तो वो हँसते हूँए बोली- ना न कोई बात नहीं, होता है पर थोडा आजु बाजु देख लिया करो
ये बोलके वो ऊपर कमरे में जाने लगी फिर सीढ़ियों पे रुकी और एक चाय लाने को कहा दस मिनट बाद मैं उनके कमरे में गया कृष्णा जी ने साडी उतार दी थी और अब वो एक टाइट फिटिंग वाले सूट सलवार में थी जिसमे से उनका यौवन बाहर आने को मचल रहा था
मैंने चाय टेबल पे रखी और बाहर जाने लगा तो उन्होंने मुझे बैठने को कहा और खुद भी सामने वाली कुर्सी पे बैठ गयी
वो-शादी क्यों नहीं करते तुम
मैं-जी करूँगा
वो-कब
मैं-जल्दी ही
वो-कोई देख रखी है मेरा मतलब कोई गर्लफ्रेंड है
मैं-जी ज़िन्दगी के सफर में लोग मिलते गए बिछड़ते गए बस इतनी सी बात है
वो-मतलब कोई है
मैं- हाँ है मालिक है जिन्होंने घर दिया, मालिकन है जिन्होंने बेटे सामान स्नेह दिया सब अपने है और आप भी
जैसे ही मैंने आप भी कहा कृष्णा के होंठो पे एक मुस्कान सी आ गयी एक शोखी सी आ गयी साथ ही मैंने पेंट के ऊपर से अपने लण्ड को खुजा दिया वो अपनी पैनी नजरो से जैसे मेरा निरिक्षण कर रही थी फिर उन्होंने अपनी चुन्नी उतार के पास में रख दी मेरी नजरे उनकी छातियो पे पड़ी
उस टाइट सूट की कैद में वो जैसे आज़ाद होने को मचल रही थी उनके निप्प्ल्स साफ़ दिख रहे थे मतलब अंदर ब्रा नहीं पहनी थी कृष्णा जी एक गेहुंए रंग की महिला थी पांच फुट की लंबाई, थोड़ी ज्यादा मोटी छातियाँ और बाहर को निकले हूँए नितम्ब कमर तक आते लंबे बाल और सबसे बड़ी बात जिस तरह से उन्होंने खुद को फिट रखा था कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था उम्र का
वो कुछ कहने वाली थी की उनका फ़ोन बजा करीब पांच मिनट उन्होंने बात की फिर मुझे बोली-मौसम ख़राब है उनलोगो को आने में देर हो जायेगी शायद सुबह ही आये तो तुम्हे इधर ही रुकना होगा
मैं-जी ठीक है मैं एक बार सब दरवाजो को चेक कर लेता हूँ
वो- शायद बारिश होने वाली है मैं टैरेस पे हूँ कुछ कपड़े है तुम उधर ही आ जाना
मैंने निचे जाके सब देखा और फिर ऊपर गया तो ठंडी हवा ने मेरा स्वागत किया गाँव की याद आ गयी जब ऐसे ही बरसातों में खूब नहाया करते थे और ना जाने ऐसी कितनी ही बरसातों में रात रंगीन की थी हलकी हल्की सी फुहारे पड़ने लगी थी उस ठंडी हवा को अपने फेफड़ों में महसूस करता हूँआ मैं टैरेस पे पहुंचा
कृष्णा छत पर खड़ी उन बारिश की ताजा बूंदों को अपने बदन पर महसूस कर रही थी बरसात में भीगे उसके बदन को देख कर मन में एक तरंग सी जाग गयी थी वैसे भी जबसे पिस्ता दुबारा ज़िन्दगी में आई थी अपने अरमाँ कुछ ज्यादा ही मचलने लगे थे
कृष्णा को ऐसे गीले बदन देख कर मेरा लण्ड तन गया था वो मेरे पास आई और बोली- ऐसे क्या देख रहे हो
मैं-आपकी सुंदरता को
वो- सच में सुंदर लग रही हूँ क्या
मैं- हां, आज तो आप एक खिला गुलाब लग रही हो
वो मेरी पेंट में बने उभार की तरफ इशारा करते हूँए - हाँ, तभी तो तुम्हारा ये कुछ ज्यादा जोश में आ रहा है
मैं समझने लगा था की इसके मन में भी चुदने की लालसा है बस थोडा गर्म करना होगा इसको
मैं- अब आप हो ही सेक्सी इतनी तो इसका क्या कसूर
वो-लाइन मार रहे हो
मैं-लाइन नहीं बस जो फील किया वो बता दिया अब आपकी नजर में इसे लाइन मारना कहते है तो वो ही सही
वो- पर ऐसा सोचना गलत होता है ना
मैं-इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में किसे दो पल नहीं चाहिए होते सुकून के और फिर इंसान अपने लिए कुछ खास पल अपने लिए चुरा ले तो उसमे गलत क्या है
ये कहके मैंने अपनी ज़िप खोली और अपने मचलते लण्ड को आज़ाद कर दिया कृष्णा की आँखे उस पर जैसे जम सी गयी
वो- ये क्या किया इसको बाहर क्यों निकाला
मैं-आपको पसंद नहीं आया क्या
वो कुछ नहीं बोली पर उसकी तेजी से ऊपर निचे होती छातिया बता रही थी की वो भी सुलगने लगी थी मैं उसकी आआँखो में देखते हूँए अपने लण्ड पर हाथ फिरा रहा था कृष्णा का गीला बदन ऊपर से बारिश की बूंदे जिस्मो में आग को हवा देने लगे थे
मैं थोडा सा उसकी तरफ बढ़ा उसने अपने होंठ को दांतो से हलके से काटा मैंने उसके हाथ को अपने लण्ड पर रख दिया वो कुछ कहने ही वाली थी की मैंने अपनी ऊँगली उसके होंठो पे रखी और बोला-आज की रात अपनी है आप चाहो तो कुछ लम्हे आप अपने लिए जी सकते हो
मैंने महसूस किया उसकी पकड़ मेरे लण्ड पर कुछ टाइट हो गयी थी और उसी पल मैंने अपने होंठ उसके होंठो से जोड़ दिए उसकी डार्क चॉकलेट फ्लेवर की लिपस्टिक मेरे मुह में घुलने लगी इधर हमारा किस्स चालू था और निचे वो अपनी मनपसन्द चीज़ को हिलाने लगी थी
मैंने महसूस किया उसकी पकड़ मेरे लण्ड पर कुछ टाइट हो गयी थी और उसी पल मैंने अपने होंठ उसके होंठो से जोड़ दिए उसकी डार्क चॉकलेट फ्लेवर की लिपस्टिक मेरे मुह में घुलने लगी इधर हमारा किस्स चालू था और निचे वो अपनी मनपसन्द चीज़ को हिलाने लगी थी
कृष्णा के मीठे मीठे होंठो को कई देर तक चूमा चूसा मैंने उसको चूमते चूमते ही मैंने सलवार का नाडा खोल दिया था अब उसकी सलवार उसके पांवो में पड़ी थी इधर वो खूब जोर से मेरे लण्ड से खेल रही थी जब बारिश थोड़ी तेज हो गयी तो हम वहाँ से बालकोनी में आ गए
मैं भाग के कमरे में गया और एक गद्दा और चादर ले आया मैंने जल्दी से अपने कपडे उतारे और फिर कृष्णा के सूट को भी उतार दिया क्या गजब सेक्सी औरत थी थोड़ी मोटी होने के बावजूद भी फिटनेस थी ऊपर से एक बेहद छोटी सी पेंटी जो बस किसी तरह से उसके अंग को ढके हूँई थी
आवाज की दिशा में गर्दन घुमी तो मैंने देखा कृष्णा जी खड़ी थी ,पिस्ता की जेठानी मैंने जल्दबाज़ी में अपनी ज़िप बंद की तो वो हँसते हूँए बोली- ना न कोई बात नहीं, होता है पर थोडा आजु बाजु देख लिया करो
ये बोलके वो ऊपर कमरे में जाने लगी फिर सीढ़ियों पे रुकी और एक चाय लाने को कहा दस मिनट बाद मैं उनके कमरे में गया कृष्णा जी ने साडी उतार दी थी और अब वो एक टाइट फिटिंग वाले सूट सलवार में थी जिसमे से उनका यौवन बाहर आने को मचल रहा था
मैंने चाय टेबल पे रखी और बाहर जाने लगा तो उन्होंने मुझे बैठने को कहा और खुद भी सामने वाली कुर्सी पे बैठ गयी
वो-शादी क्यों नहीं करते तुम
मैं-जी करूँगा
वो-कब
मैं-जल्दी ही
वो-कोई देख रखी है मेरा मतलब कोई गर्लफ्रेंड है
मैं-जी ज़िन्दगी के सफर में लोग मिलते गए बिछड़ते गए बस इतनी सी बात है
वो-मतलब कोई है
मैं- हाँ है मालिक है जिन्होंने घर दिया, मालिकन है जिन्होंने बेटे सामान स्नेह दिया सब अपने है और आप भी
जैसे ही मैंने आप भी कहा कृष्णा के होंठो पे एक मुस्कान सी आ गयी एक शोखी सी आ गयी साथ ही मैंने पेंट के ऊपर से अपने लण्ड को खुजा दिया वो अपनी पैनी नजरो से जैसे मेरा निरिक्षण कर रही थी फिर उन्होंने अपनी चुन्नी उतार के पास में रख दी मेरी नजरे उनकी छातियो पे पड़ी
उस टाइट सूट की कैद में वो जैसे आज़ाद होने को मचल रही थी उनके निप्प्ल्स साफ़ दिख रहे थे मतलब अंदर ब्रा नहीं पहनी थी कृष्णा जी एक गेहुंए रंग की महिला थी पांच फुट की लंबाई, थोड़ी ज्यादा मोटी छातियाँ और बाहर को निकले हूँए नितम्ब कमर तक आते लंबे बाल और सबसे बड़ी बात जिस तरह से उन्होंने खुद को फिट रखा था कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था उम्र का
वो कुछ कहने वाली थी की उनका फ़ोन बजा करीब पांच मिनट उन्होंने बात की फिर मुझे बोली-मौसम ख़राब है उनलोगो को आने में देर हो जायेगी शायद सुबह ही आये तो तुम्हे इधर ही रुकना होगा
मैं-जी ठीक है मैं एक बार सब दरवाजो को चेक कर लेता हूँ
वो- शायद बारिश होने वाली है मैं टैरेस पे हूँ कुछ कपड़े है तुम उधर ही आ जाना
मैंने निचे जाके सब देखा और फिर ऊपर गया तो ठंडी हवा ने मेरा स्वागत किया गाँव की याद आ गयी जब ऐसे ही बरसातों में खूब नहाया करते थे और ना जाने ऐसी कितनी ही बरसातों में रात रंगीन की थी हलकी हल्की सी फुहारे पड़ने लगी थी उस ठंडी हवा को अपने फेफड़ों में महसूस करता हूँआ मैं टैरेस पे पहुंचा
कृष्णा छत पर खड़ी उन बारिश की ताजा बूंदों को अपने बदन पर महसूस कर रही थी बरसात में भीगे उसके बदन को देख कर मन में एक तरंग सी जाग गयी थी वैसे भी जबसे पिस्ता दुबारा ज़िन्दगी में आई थी अपने अरमाँ कुछ ज्यादा ही मचलने लगे थे
कृष्णा को ऐसे गीले बदन देख कर मेरा लण्ड तन गया था वो मेरे पास आई और बोली- ऐसे क्या देख रहे हो
मैं-आपकी सुंदरता को
वो- सच में सुंदर लग रही हूँ क्या
मैं- हां, आज तो आप एक खिला गुलाब लग रही हो
वो मेरी पेंट में बने उभार की तरफ इशारा करते हूँए - हाँ, तभी तो तुम्हारा ये कुछ ज्यादा जोश में आ रहा है
मैं समझने लगा था की इसके मन में भी चुदने की लालसा है बस थोडा गर्म करना होगा इसको
मैं- अब आप हो ही सेक्सी इतनी तो इसका क्या कसूर
वो-लाइन मार रहे हो
मैं-लाइन नहीं बस जो फील किया वो बता दिया अब आपकी नजर में इसे लाइन मारना कहते है तो वो ही सही
वो- पर ऐसा सोचना गलत होता है ना
मैं-इस भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में किसे दो पल नहीं चाहिए होते सुकून के और फिर इंसान अपने लिए कुछ खास पल अपने लिए चुरा ले तो उसमे गलत क्या है
ये कहके मैंने अपनी ज़िप खोली और अपने मचलते लण्ड को आज़ाद कर दिया कृष्णा की आँखे उस पर जैसे जम सी गयी
वो- ये क्या किया इसको बाहर क्यों निकाला
मैं-आपको पसंद नहीं आया क्या
वो कुछ नहीं बोली पर उसकी तेजी से ऊपर निचे होती छातिया बता रही थी की वो भी सुलगने लगी थी मैं उसकी आआँखो में देखते हूँए अपने लण्ड पर हाथ फिरा रहा था कृष्णा का गीला बदन ऊपर से बारिश की बूंदे जिस्मो में आग को हवा देने लगे थे
मैं थोडा सा उसकी तरफ बढ़ा उसने अपने होंठ को दांतो से हलके से काटा मैंने उसके हाथ को अपने लण्ड पर रख दिया वो कुछ कहने ही वाली थी की मैंने अपनी ऊँगली उसके होंठो पे रखी और बोला-आज की रात अपनी है आप चाहो तो कुछ लम्हे आप अपने लिए जी सकते हो
मैंने महसूस किया उसकी पकड़ मेरे लण्ड पर कुछ टाइट हो गयी थी और उसी पल मैंने अपने होंठ उसके होंठो से जोड़ दिए उसकी डार्क चॉकलेट फ्लेवर की लिपस्टिक मेरे मुह में घुलने लगी इधर हमारा किस्स चालू था और निचे वो अपनी मनपसन्द चीज़ को हिलाने लगी थी
मैंने महसूस किया उसकी पकड़ मेरे लण्ड पर कुछ टाइट हो गयी थी और उसी पल मैंने अपने होंठ उसके होंठो से जोड़ दिए उसकी डार्क चॉकलेट फ्लेवर की लिपस्टिक मेरे मुह में घुलने लगी इधर हमारा किस्स चालू था और निचे वो अपनी मनपसन्द चीज़ को हिलाने लगी थी
कृष्णा के मीठे मीठे होंठो को कई देर तक चूमा चूसा मैंने उसको चूमते चूमते ही मैंने सलवार का नाडा खोल दिया था अब उसकी सलवार उसके पांवो में पड़ी थी इधर वो खूब जोर से मेरे लण्ड से खेल रही थी जब बारिश थोड़ी तेज हो गयी तो हम वहाँ से बालकोनी में आ गए
मैं भाग के कमरे में गया और एक गद्दा और चादर ले आया मैंने जल्दी से अपने कपडे उतारे और फिर कृष्णा के सूट को भी उतार दिया क्या गजब सेक्सी औरत थी थोड़ी मोटी होने के बावजूद भी फिटनेस थी ऊपर से एक बेहद छोटी सी पेंटी जो बस किसी तरह से उसके अंग को ढके हूँई थी