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चाहत और आर्यन उसे देखने लगे। ये देख इशांत मुस्कुराने लगा और कहा - दोनो भाई बहन एक जैसे है... कुछ बोलते ही नहीं... पता नहीं घर में कैसे रहते होंगे... जब उसने ये कहा तो चाहत उसे गुस्से में घूरने लगीं। तो इशांत ने कान पकड़ कर सॉरी कहा ये देख चाहत ने उसे घुरा और मुस्कुराने लगी। फिर चाहत ने एड्रेस बता दिया।
थोड़ी देर में दोनों चाहत के घर के बाहर थे। चाहत नीचे उतरी फिर आर्यन भी को भी उतार दिया। उसने मुड़ कर इशांत को देखा फिर चाहत - थैंक्यू भैय...
इशांत उसे टोकते हुए - ना बिल्कुल भी नहीं... नो भैया... इट्स इशांत...
चाहत ने फिर हा में सिर हिला दिया।
चाहत ने इशांत को बाय बोला।
आर्यन बस मुंह फुलाए इशांत को देख रहा था। तभी इशांत ने आर्यन को चॉकलेट दी और कहा - सॉरी यार... मेरी मिनी को वो डॉल बहुत पहले से पसंद थी...तो मुझे लेना पड़ा... मेरा कोई इरादा नहीं था...तुम्हे हर्ट करने का...आई एम् सॉरी...
आर्यन ने चाहत को देखा तो उसने पलके झपका कर इशांत को माफ करने को कहा। आर्यन ने चॉक्लेट ली फिर इशांत को देख - इट्स ओके...
इशांत ने आर्यन को देखा फिर उसके गाल खींचे और बाय बोल कर बाइक आगे बढ़ा दी। चाहत मेन गेट की तरफ आ गई और उसे खोल अंदर जाने लगी। इशांत गली के पास आकर रुक गया और बैक मिरर से चाहत को घर जाते हुए देखने लगा।
चाहत का घर
चाहत अंदर अाई तो रीमा जी डायनिंग टेबल पर बैठ कर उनका वेट कर रही है। आर्यन उन्हें देख भागते हुए उनके पास आया।
रीमा जी उसे गले लगाते हुए - आ गया मेरा बच्चा...कैसी रही पार्टी...
आर्यन रीमा जी से - बहुत अच्छी थी...आपको भी जाना चाहिए था...
रीमा जी उसके बाल ठीक करते हुए - ठीक है...अब खाना खा लो...
आर्यन उनके गोद से उठते हुए - नहीं भूख नहीं है... मै नहीं खाऊंगा.... आप और दी खा लो...ये बोल वो अपने रूम की तरफ चला गया।
चाहत - मम्मी मै फ्रेश होकर आती हूं...
चाहत वहा से रूम चले गई वहा से फ्रेश होकर अाई फिर रीमा जी के साथ खाना खा कर रूम आ गई।
चाहत रूम में आकर बेड में लेट गई वो बेड में लेटे हुए विंड
चाइम को देखने लगीं उसकी आवाज़ हमेशा चाहत को सुकून देती थी वो अध्यन के बारे में सोचने लगी। फिर मुस्कुराते हुए सो गई।
अगली सुबह
चाहत ने अपने काम कंप्लीट किए और नाश्ता कर स्कूल की तरफ निकल गई। स्कूल पहुंच कर चाहत क्लास में अाई और अपना बेग रख कर प्रेयर के लिए बाहर की तरफ जाने लगी।
तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ा चाहत ने मुड़ कर देखा तो वहा काजल खड़ी थी उसने सिर झुकाए हुए कहा - सॉरी.....मैंने तुझे गलत समझा ..... वो तुम दोनों ऐसी सिचुएशन में थे तो मुझे समझ ही नहीं आया...आई एम् सोरी ....आगे से ऐसा कुछ नहीं करूंगी....
चाहत कुछ देर तक ऐसे ही खड़ी रही फिर आगे बढ़ काजल को गले लगा लिया काजल ने भी उसे कस कर पकड़ लिया।
चाहत उसके गले लगे हुए ही - इट्स ओके तुझे तेरी गलती पता चल गई वहीं काफी है...
दोनों कुछ देर तक ऐसे ही खड़ी रही फिर अलग हुई तो देखा
अंश अपने गाल पर हाथ रख उन्हें देख रहा था। अंश का ऐसे देखना चाहत और काजल को अजीब लगा ।
तभी काजल अंश से - क्या हुआ ......ऐसे क्यू देख रहे हो???
अंश मुस्कुराते हुए - देख रहा हूं....तुम लड़कियां कितनी चिपकु होती हो.....मतलब कहीं भी शुरू हो जाती हो....
काजल और चाहत ने उसकी बात सुनी फिर एक दूसरे को देखा।
चाहत अंश से - क्या कहा...जरा फिर से कहना...ये बोल वो अंश के पीछे दौड़ने लगी काजल भी चाहत का साथ देने लगी । अंश कभी टेबल पर चढ़ता तो कभी दरवाज़े के पीछे छुपता ऐसे ही तीनो इधर उधर हो रहे थे। तभी चाहत का पैर फिसला और वो नीचे गिरने लगीं तभी किसी ने उसे कमर से पकड़ा और अपने पास खींचा। चाहत डर के कारण बस आंखे बंद किए वैसे ही उसकी तरफ खींची चली गई।
अब चाहत के दोनो हाथ उस शख्स के सीने पर थे और उसने हाथ चाहत के कमर के इर्द गिर्द थे। चाहत को उसकी धड़कन महसूस हो रही थी। चाहत ने सिर उठा कर ऊपर देखा तो उसकी नज़रे उस शख्स के नज़रों से जा मिली। उसने उस शख्स को देख कर कहा - अध्यन...
अध्यन जो उसे पकड़े खड़ा था उसे इतने देर बाद चाहत की
आवाज़ सुन सुकून आया उसने कुछ पल के लिए अपनी आंखे बंद कर ली और चाहत को महसूस करने लगा ।
तभी अंश और काजल उसके पास आकर जोर से चिल्लाते है। दोनों झटके से अलग हो जाते है। अंश उन दोनों के इर्द गिर्द घूमते हुए - शर्म नहीं आती तुम दोनों को....क्लास में ऐसी हरकतें करते हुए ...
काजल भी उसका साथ देते हुए - हा सच में...18+ तो हो जाओ कम से कम..
अंश सिर पर हाथ रख - वहीं तो....नाक कटवा देनी है तुम लोगो ने मेरी ...
अंश की बात सुन चाहत - कोई ना...हम प्लास्टिक की नाक लगवा देंगे..
ये सब अंश हैरानी से उसे देखता है ।और उसके माथे पर हाथ रख कर कहता है - तुम ठीक तो हो ना... मै इतनी बकवास कर रहा हूं और तुम हो की मस्ती में जवाब दे रही हो....
चाहत उसका हाथ हटा कर - हा मेरे झींगुर मै ठीक हूं..और अगर अब तुम बाहर नहीं गए ना तो शायद तुम ठीक नहीं रहोगे...
अंश और काजल एक साथ - वो क्यू..???
चाहत उन दोनों को घूरते हुए - क्युकी प्रेयर बेल बज गई है...और तुम दोनों अभी तक यही हो..
अंश और काजल एक साथ - पर तुम भी तो हो...
चाहत - हा मै तो हूं... बट मै हूं कैप्टन ...अगर लेट हुई तो भी चलेगा...पर तुम दोनों लेट हुए तो ...
अंश और काजल - तो..
चाहत - तो पूरे प्ले ग्राउंड के 10 चक्कर...
अंश और काजल ने पहले चाहत को देखा फिर प्रेयर ग्राउंड की तरफ भाग गए।
अब रूम में बस चाहत और अध्यन थे। चाहत जैसे ही जाने को हुई तभी अध्यन - चाहत ..
चाहत रूकी और मुड़ कर अध्यन को देखने लगी तभी अध्यन - मै भी तो यही हूं ...चलो साथ में ग्राउंड चलते है...
चाहत ने कुछ नहीं कहा बस हा में सिर हिला दिया। और साथ चलने लगे।
चाहत को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले ....?
तभी अध्यन और चाहत एक साथ - कैसे हो...??
दोनों ने अजीब तरह से एक दूसरे को देखा फिर दोनो साथ में - मै ठीक....
अब दोनो मुस्कुराने लगे। चाहत का मुस्कुराता चेहरा देख
अध्यन को सुकून मिल रहा था। आज पूरे दो दिन बाद वो चाहत को देख रहा था । उसकी एग्जिस्टेंस फील कर पा रहा था। इसके बाद दोनों ने कुछ नहीं कहा बस एक खामोशी से चलने लगे।
अध्यन उसके पास आया और दोनो साथ में ग्राउंड की तरफ आने लगे।
प्रेयर ग्राउंड में आकर चाहत अपने क्लास की लाइन पर लास्ट में खड़ी हो गई। तभी उसे किसी की आवाज़ सुनाई दी। कोई जूनियर लड़की थी शायद वह । उसने अपने साथ वाली फ्रेंड से कहा - अरे यार...ये अध्यन को हो क्या गया है...जब देखो तब इस चाहत के साथ घूमते रहते है...
दूसरी लड़की - हा यार...पता नहीं उनका टेस्ट इतना खराब कैसे हो गया है...
पहली लड़की - वहीं तो ...इतने स्मार्ट है...स्कूल की कोई भी लड़की पसंद करेगी पर नहीं ...इनको तो इस चाहत के साथ घूमना है...
दूसरी लड़की - मुझे तो लगता है..रहम कर रहे होंगे चाहत पर...ताकि बेचारी अकेले ना रहे....
पहली लड़की - हमे क्या...चलो छोड़ो....
ये बोल वो प्रेयर करने लगी।
उनकी बात सुन कर चाहत वहीं जड़ हो गई। उसके दाए आंख से एक आंसू गिरा और उसने तुरन्त साफ़ कर अपना ध्यान प्रेयर में लगाया। पर दिल को तो चोट पहुंच ही चुकी थी ।
प्रेयर कब शुरू हुई और कब ख़तम चाहत को तो पता भी नहीं चला उसका मन तो यही सोच रहा था कहीं अध्यन उसे रहम की नज़रों से तो नहीं देखता ना ये सोच कर ही उसका दिल रों रहा था। उसे ये सब सुनने की आदत थी पर रहम ये वर्ड उसके कानों में चोट कर रहे थे। चाहत ने किसी तरह खुद को संभाला और क्लास आ गई।
वहा अंश और अध्यन मुस्कुरा रहे थे। चाहत ने एक पल के लिए रुकीं उसने अध्यन को देखा जो मुस्कुराते हुए बहुत प्यारा लग रहा था मुस्कुराते हुए उसकी छोटी आंखें बंद हो जाती है उसके गालों पर पड़ने वाले डिंपल उसके चेहरे पर बहुत प्यारी लग रही थी। खिड़की से आतीं धूप में उसका चेहरा और भी दमक रहा था।
को आवाज़ दी - चाहत
चाहत रुक गई और पलट कर अध्यन की तरफ देखने लगी। अध्यन ने उसे रुका हुआ देखा तो वो उसके पास जाने लगा। तभी वहा सोनिया अाई और अध्यन के गले लग गईं। थोड़ी देर बाद उससे दूर हुई।
सोनिया - तुम ठीक तो हो ना...मैंने सुना था कि तुम्हे पैर पर मोच आ गईं थीं..
अध्यन - हा मै ठीक हूं... बस छोटी सी मोच ही तो थी।
ये बोल उसने सामने देखा तो चाहत वहा नहीं थी।
अध्यन उसे इधर उधर देखने लगा उसने चारो तरफ अपनी नज़रे घुमाई पर वो उसे कहीं नहीं दिखीं।
सोनिया उसके कंधे पर हाथ रख - किसे ढूंढ रहे हो??
अध्यन - किसी को नहीं ...ये बोल वो सोनिया के साथ क्लास आ गया।
चाहत वहीं पिलर के पीछे छुपी थी । वो बाहर निकली कुछ देर तक जाते हुए अध्यन को देखा फिर बच्चो की क्लास चले गई वालंटियर होने के नाते उसे आज उसे वहा का कॉम्पटीशन देखना था आज उसके साथ कोई टीचर भी थे।
चाहत अपने दिमाग से सारी बाते निकाल देना चाहती थी इसीलिए उसने खुद को काम में बिजी रखना जरूरी समझा।
चाहत उसे देख रही थी तभी किसी ने उसे धक्का दिया चाहत थोड़ी देर के लिए लड़खड़ा गई तभी धक्का देने वाली लड़की ने उसे संभालते हुए सॉरी कहा। चाहत ने भी उठते हुए उसे इट्स ओके कहा। चाहत ने सिर उठा कर सामने देखा तो उसकी नज़र क्लासरूम में रखे अलमारी की तरफ गई जिसके दरवाज़े पर शीशा लगा था। ये एक लोहे की अलमारी थी। जिसमे नोट बुक और चॉक डस्टर रखा जाता था। क्लास टीचर भी अपनी जरूरत की चीज़े यही रखते थे।
चाहत ने उस शीशे में जब खुद को देखा तो अपने अश्क को देख कर वो सोचने लगी - सही तो कह रही थी....वो गर्ल्स ....मेरे अंदर तो ऐसा कुछ है ही नही.....तो अध्यन क्यू मेरे साथ है.....कहीं सच में वह मेरे ऊपर ....रहम ..उसने जैसे ही ये सब सोचा उसके आंखो से फिर आंसू निकाल पड़े ।
चाहत अब क्लास में नहीं रुकना चाहती थी वो पहले अपने डेस्क के पास पहुंची और नोटपैड और पेन निकाला फिर क्लास से बाहर आ गई ।
अध्यन चाहत को बहुत पहले से नोटिस कर रहा था। वो जैसे ही बाहर जाने लगी अध्यन भी उसके पीछे बाहर निकला चाहत जल्दी जल्दी आगे बढ़ रही थी। तभी अध्यन ने चाहत
वो वहीं सभी बच्चो के बीच बैठ गई। वहा उसने उनका नाम लिख कॉम्पिटिशन स्टार्ट किया ।
इधर क्लास में अध्यन अपनी डेस्क में बैठा था और सोनिया उससे बात किए जा रही थी। जिसका जवाब वो हा हूं में दे रहा था वो डेस्क में बैठे दरवाज़े को देखे जा रहा था। अचानक सोनिया को कुछ याद आया वो बाय बोल कर क्लास से चले गई। अध्यन को अब मौका मिल गया वो बाहर जाने के लिए उठा ही था तभी किसी ने अध्यन को आवाज़ लगाई। अध्यन ने पहले अपनी आंखे बंद की फिर पलट कर देखा तो अंश हाथ बांधे उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था ।
अंश अध्यन के पास आते हुए - कहा जा रहा है तू?
अध्यन - कहीं नहीं...वो मै बस
अंश उसे टोकते हुए - हा हा.. सोच ले बहाना तब तक मै यही हूं..
अध्यन उसे देखते हुए - कोई बहाना नहीं...मै बस चाहत के पास जा रहा था..प्रेयर के बाद उसे देखा ही नहीं तो...
अंश - ओहो...इतनी बेकरारी.... ये बोल उसने अध्यन को आंख मारी...
अध्यन ने अपने दोनों हाथो को झटका दिया और उसकी तरफ बढ़ते हुए - बेकारार तो मै बहुत हूं.. रुक अभी तुझे मेरी बेकरारी बताता हूं...
ये बोल अध्यन ने अंश को पकड़ लिया फिर शुरू हुई असली बेकरारी । अध्यन और अंश बच्चो की तरह लड़ रहे थे।
थोड़े देर बाद दोनो शांत हुए और पास रखी डेस्क पर बैठ गए और हाफने लगे। अंश मुस्कुराते हुए अध्यन को देखने लगा। फिर अचानक से उसने अध्यन को गले से लगा लिया ।
अंश - ये दो दिन बहुत भारी थे यार ....मैंने तुझे बहुत मिस किया।
अध्यन उससे दूर होते हुए - मैंने भी...
अंश मुस्कुराते हुए - और चाहत को..
अंश की बात सुन अध्यन मुस्कुराने लगा फिर उसने कहा - मिस उसे किया जाता है...जिसे भुला दिया गया हो...पर वो तो मेरे जहन से कभी दूर गई ही नहीं...तुझे पता है...पहले यकीन नहीं था..पर इन दो दिनों में मुझे इस बात का यकीन हो गया है...की वो मेरे लिए कितनी जरूरी है...ये जो मै फील करता हूं ...ये प्यार ही है...आज जब उसने मेरा नाम लिया....जब उसका हाथ मेरे सीने पर था...मै ..मै बता नहीं सकता यार ...दिल किया उसे ऐसे ही रखु अपने पास अपने करीब ...उसकी काली बड़ी पलकों वालीं आंखे जब मुझे देखती है ...तब मुझे यही लगता है...बस यही एक पल है ...जब वो मेरे लिए...सिर्फ मेरे लिए है....
अंश उसकी बाते गौर से सुन रहा था । उसने अध्यन के कंधे पर हाथ रखा फिर कहा - तो तू उसे कब बता रहा है...अंश की बात सुन अध्यन ने उसे देखा तो अंश अपनी बात जारी रखते हुए - देख मुझे पता है...तेरे दिल में उसके लिए प्यार है...पर प्यार को दिल में रख कर कुछ नहीं होगा..उसे एक्सप्रेस भी तो करना पड़ेगा ना...
अंश ने कहा तो अध्यन कुछ देर खामोश हो गया।
थोड़े देर बाद अध्यन - ठीक है ...मै उसे जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी बता दूंगा...पर
अंश उसकी तरफ देखते हुए - पर
अध्यन - पर अगर उसने ना कह दिया तो...
अंश अपने सिर पर हाथ रख कर - तू जब भी बोलेगा ...अशुभ ही बोलेगा... उसे देख कर तुझे नहीं लगता कि वो भी तुझे पसंद करती है...जिस तरह तुझे देखती है...तुझसे मिल कर ही उसके चेहरे पर अलग ही नुर आ जाता है...तेरी फिक्र करती है...तुझे दर्द हो तो आंख उसकी भी नम हो जाती है..इतना सब के बाद अब भी तुझे लगता है...वो तुझे ना कहेगी।
अध्यन ने अंश की बात सुनी फिर उसे देखते हुए कहा - वहीं तो...वहीं तो दिक्कत है...
अंश अब हैरान सा अध्यन को देखने लगा ।
अध्यन बात जारी रखते हुए - वो दूसरी लड़कियों की तरह नहीं है...अगर मैंने उसे अभी बता दिया तो..उसके मन में मुझे लेकर सेम फीलिंग हो या नहीं भी हो...पर फिर भी वो मुझे हा बोल देगी...और एक फ्रेंड की तरह भी ट्रीट नहीं करेगी...वो मुझसे दूर हो जाएगी...जो मै नहीं चाहता ...मै बस उसके दिल की बात जानना चाहता हूं... अगर उसके मन में मेरे लिए कुछ हो तब ही मुझे वो हा बोले...और अगर उसके मन में प्यार नहीं होगा तो मै उस...
अंश उसे टोक कर - तो तू क्या उसे भूल जाएगा...
अध्यन उसे घूरते हुए - नहीं ...उसे अपने प्यार का अहसास करवा दूंगा...उसे ये बताऊंगा वो कितनी जरूरी है...और एक ना एक दिन उसे मान ही जाना है...
अंश उसे देखते हुए - अरे वाह ...मुझे लगा तू मुझे भूल जाएगा...पर नहीं तूने तो दिल जीत लिया...
अध्यन - अरे ऐसे कैसे भूल जाऊंगा....पहला प्यार है...भाई चाहूं तो भी भूल नहीं सकता ....और हार भी नहीं मान सकता...
अंश - अरे वाह मेरे शेर ....मुझे तो लगा था तू बहुत ज्यादा सीधा बंदा होगा ...पर नहीं तू तो टेडी खीर निकला...
अध्यन उसकी बात सुन मुस्कुराते हुए - हूं तो मै सीधा ही ...पर जब बात चाहत की हो तो थोड़ा टेडा होना जरूरी
है...
अब दोनो मुस्कुराने लगे।
इधर चाहत ने अपना काम कंप्लीट कर सीधे क्लास आ गई। वो अपनी डेस्क के पास आ गई उसने नोटपैड बेग में रखा तभी लंच की बेल बजी चाहत का मन कुछ खाने का नहीं कर रहा था वो क्लास रूम से बाहर चले गईं । अध्यन ने जब उसे ऐसे जाते देखा तो उसने चाहत को आवाज़ लगाई पर चाहत तो अपने धुन में ही बाहर निकल गई । अध्यन भी उसके पीछे जाने लगा ।
चाहत गार्डन की तरफ चलें अाई वहा वो हमेशा की तरह पेड़ के पास बैठ गई। उसका दिमाग अभी भी सुबह की बाते ही सोच रहा था। वो बाते रह रह कर चाहत की आंखो को नम कर रहा था। चाहत खुद में ही खोई हुई थी। उसे पता ही नहीं चला कब अध्यन वहा आया । अध्यन वहीं चाहत के बगल बैठ कर उसे देखने लगा चाहत उसे तो जैसे होश ही नहीं था। अध्यन ने चाहत को पुकारा पर चाहत ने कोई जवाब नहीं दिया।
अध्यन ने चाहत के कंधे पर हाथ रखा तो उसने झट से नजर उठा कर अध्यन को देखा। अध्यन ने जब उसकी आंखो को
देखा जिसमे आंसू ऐसे रुके थे जैसे काले बादल जो बरसने को बेकरार हो..अध्यन उसे एकटक देख रहा था। उसे कुछ दर्द महसूस हुआ पर पता नहीं ये दर्द किस चीज का था शायद वो चाहत की आसुओं से भरी आंखे बर्दास्त नहीं कर पा रहा था । चाहत ने कुछ नहीं कहा बस वो वहा से उठ कर जाने लगी।
अध्यन को अब लगने लगा कोई उससे उसकी जान खींच कर ले जा रहा है वो भागते हुए चाहत के पास पहुंचा और उसने सामने खड़ा हो गया। चाहत ने फिर अपनी पलको को उठा कर उसे एक नजर देखा और साइड से जाने लगी। अध्यन ने उसका हाथ पकड़ भरे गले से कहा - क्या हुआ...? तुम ऐसे क्यू..? वो इससे आगे कुछ कह पाता उससे पहले ही चाहत ने आगे जाना चाहा ।
अध्यन ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली और उसे झटके से खुद के करीब खींचा । चाहत उसके करीब आ गईं उसने चाहत की आंखो में देखते हुए गुस्से से कहा - क्या हुआ???
चाहत ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की मगर छुड़ा ना सकी उसकी इस हरकत ने अध्यन का गुस्सा और बढ़ा दिया उसने अपनी पकड़ चाहत के हाथो पर और मजबूत कर के पूछा - क्या हुआ????
चाहत ने कुछ नहीं कहा बस उसके आंखों से आंसू गिरने
लगे। इन आंसुओ ने अध्यन की बेचैनी और बढ़ा दी उसने चाहत का हाथ छोड़ कर उसके चेहरे को अपने हाथो में पकड़ा और अपना सिर उसके सिर से लगा कर बोला - कुछ तो बोलो ...ऐसे चुप मत रहो...तुम्हारी ये खामोशी मेरी जान ना ले ले...
चाहत थोड़े देर वैसे ही रही फिर से उसके दिमाग में रहम ये शब्द गूंज गया । उसने अध्यन से कहा - छोड़ो मुझे... अध्यन ने उसकी बात सुनी पर तब भी उसे नहीं छोड़ा । चाहत को अब गुस्सा आने लगा वो एक झटके में अध्यन से दूर हुई । अध्यन उसे देखने लगा ।
चाहत की आंखे गुस्से में लाल थी फिर उसने कहा - दूर रहो मुझसे ....कोई रहम नहीं चाहिए मुझे ....समझे तुम।
ये बोल चाहत जोर जोर से रोने लगी। अध्यन को समझ ही नहीं आ रहा था। वो आगे बढ़ उसके पास जाने लगा तभी चाहत - कहा ना दूर रहो...ये बोल चाहत झट से मुड़ी और अपने आंसू पोछते हुए क्लास की तरफ आ गई। अध्यन वहीं बैठ गया उसे अब समझ नहीं आ रहा था आखिर उसकी गलती क्या है। उसे रह रह कर चाहत का रोना याद आ रहा था। चाहत के आंसू तो वो बर्दास्त कर ही नहीं पा रहा था। वो वहीं उसके कहे हुए शब्दों को समझने की कोशिश कर रहा था।...
अध्यन जो वहीं बैठ गया था वो एकदम से उठा और कहा - तुम अगर चाहो भी ..तब भी मै तुमसे दूर नहीं जाऊंगा.. ये बोल वह चाहत को ढूंढने लगा।
थोड़े देर तक यूं ही ढूंढते रहने के बाद उसे चाहत क्लास की तरफ जाते हुए दिखी वो चाहत के पीछे क्लास जाने के लिए आगे बढ़ा ही था। तभी अंश उसके पीछे से आवाज़ दी अध्यन ने पलट कर देखा तो अंश उसके पास आ कर - चल तुझे कोच ने बुलाया है।
अध्यन वहा से सीधा कोच के ऑफिस गया।
इधर चाहत क्लासरूम में पहुंची तो लंच के कारण पूरी क्लास खाली थी वो अपनी डेस्क के बैठ गई और मुंह पर हाथ रख कर रोने लगी। उसे ऐसा लग रहा था मानो किसी ने कोई बड़ा सा पत्थर उसके सीने पर रख दिया हो.... वो ना जाने कितने ही देर तक रोती रही फिर उसने अपने सिर पर दर्द महसूस किया वो वहा से सीधा कॉमन रूम गई वहा उसने अपना चेहरा साफ किया और बाहर आ गई। वो चल ही रही थी तभी उसे चक्कर आने लगे । उसका सिर उसे भरी लगने लगा। वो क्लास गई और अपना बेग लेकर सीधे टीचर के पास गई।
अध्यन जब दोबारा क्लास आया तो उसे चाहत कहीं नहीं दिखी वो चाहत को ढूंढने लगा तो चाहत उसे कहीं जाते हुए दिखीं अध्यन ने उसे कुछ नहीं कहा बस उसके पीछे चलने लगा।
मेडिकल रूम
चाहत - मैम ... मे आई गेट इन..?
मैम - ओह चाहत ..कम ना।
चाहत रूम में इंटर करते हुए - मैम मुझे headache हो रहा है...आपके पास कोई मेडिसिन होगी??
मैम - हा है ना....ये लो..
चाहत ने मेडिसिन ली और जैसे ही खाने वाली थी वैसे ही किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया । चाहत ने जब मुड़ कर देखा तो अध्यन उसे गुस्से से घुर रहा था।
चाहत ने जैसे उसे देखा वो रुक गई। अध्यन मैम से - मैम मेडिसिन हमेशा खाने के बाद लेनी चाहिए ना .....ये बोल उसने चाहत को घुरा।
मैम जो अभी रजिस्टर में कुछ एंट्री कर रही थी उन्होंने कहा -
हा अध्यन... फिर चाहत को देखते हुए - तुमने कुछ खाया तो है ना .... चाहत कुछ बोलने को हुई तभी अध्यन - यस मैम ...इसने तो कुछ ज्यादा ही खा लिया है।
चाहत अध्यन की बात सुन कर उसे घूरने लगीं तभी अध्यन ने भी उसे घुरा चाहत अध्यन का घूरना देख थोड़े देर के लिए डर गई फिर उसने मेडिकल रूम से बाहर जाना ही सही समझा। चाहत आगे जाने लगी तो वो दो कदम से ज्यादा आगे बढ़ ही नहीं पाई उसने मुड़ कर देखा तो अध्यन ने उसका हाथ मजबूती से पकड़ रखा है। चाहत को अब समझ नहीं आ रहा था वो क्या कहे क्युकी सामने मैम थी तो वो ज्यादा बोल भी नहीं सकती थीं।
अध्यन ने चाहत की उंगलियों में अपनी उंगलियां फसाई चाहत उसे हैरानी से देखने लगी।
अध्यन मैम से - गुड डे मैम।
मैम ने उन दोनों को देख कर बस मुस्कुरा दी।
उन्होंने चाहत को देख कर कहां - अपना ख्याल रखना। अध्यन और चाहत दोनो मेडिकल रूम से बाहर आ चुके थे। अध्यन चाहत का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ लेकर चलने लगा। चाहत ने पहले हाथ छुड़ाने की कोशिश की पर छुड़ा नहीं पाईं। चाहत ने कुछ कहना चाहा तो अध्यन उसकी
आंखो में देखते हुए - यहां कैमरा लगा है ...अगर यहां तुमने कुछ किया..तो प्रिंसिपल तुम्हे तो कुछ नहीं बोलेंगे पर मुझे पक्का सुना देंगे।
अध्यन की बात सुन चाहत ने कुछ नहीं कहा बस उसके साथ चलने लगी। दोनों कुछ देर में गार्डन में थे। अध्यन ने चाहत को पास रखे टेबल पर बैठाना चाहा पर चाहत नहीं बैठी अध्यन ने जबरदस्ती उसे कंधो से पकड़ कर बैठाया।
अध्यन उसे बैठाते हुए - हर बात पर जिद करना अच्छी बात नहीं....ये कह कर उसने चाहत के बेग से टिफिन निकला और उसे खोलने लगा। चाहत उसे ऐसा करते देखते रही फिर उसने कहा - तुम क्यू ये सब कर रहे हो....मै इस लायक नहीं हूं...?
अध्यन टिफिन खोलते हुए - तुम किस लायक हो....मुझे बताने की जरूरत नहीं। ये बोल उसने टिफिन खोला। आज चाहत के टिफिन में सुजी का उपमा था। अध्यन ने चम्मच लिया फिर उसमे उपमा लेकर चाहत की तरफ बढ़ा दिया। चाहत ने जब ना में सिर हिलाया तो अध्यन ने आंखें दिखा कर कहा - दोस्त हूं तुम्हारा...इतना हक तो रखता हूं..
अब चाहत ने कुछ नहीं कहा वो बस खाने लगीं। जब खाते हुए गलती से चाहत को मिर्ची लगी तो अध्यन ने उसे झट से
पानी पिलाया। थोड़े देर में उनका खाना ख़तम हुआ। चाहत को मेडिसिन खिला लेने के बाद अध्यन ने कुछ नहीं कहा। वो अपनी चेयर से उठ कर जाने लगा।
चाहत उसे जाते हुए देखने लगी वो कुछ पल के लिए रुका और बिना पल्टे ही कहा - कल मेरा फुटबॉल मैच है तुम आना ...मै.....तुम आओगी तो मुझे अच्छा लगेगा... ये बोल अध्यन वहा से चला गया। चाहत बस उसे देखती रही।
कुछ देर बाद छुट्टी भी हो गई। चाहत रास्ते भर आज जो हुआ उसके बारे में सोच रही थी कहीं ना कहीं उसे अपनी गलती का एहसास हो गया था। जो भी बाते हुई थी वो बस उन लड़कियों की थिंकिंग थी अध्यन ने तो उनसे कुछ कहा भी नहीं था। चाहत को अब अपने किए पर गुस्सा आने लगा। वो घर पहुंची और अपनी साइकिल रख कर अंदर आ गई।
थोड़ी देर में दोनों चाहत के घर के बाहर थे। चाहत नीचे उतरी फिर आर्यन भी को भी उतार दिया। उसने मुड़ कर इशांत को देखा फिर चाहत - थैंक्यू भैय...
इशांत उसे टोकते हुए - ना बिल्कुल भी नहीं... नो भैया... इट्स इशांत...
चाहत ने फिर हा में सिर हिला दिया।
चाहत ने इशांत को बाय बोला।
आर्यन बस मुंह फुलाए इशांत को देख रहा था। तभी इशांत ने आर्यन को चॉकलेट दी और कहा - सॉरी यार... मेरी मिनी को वो डॉल बहुत पहले से पसंद थी...तो मुझे लेना पड़ा... मेरा कोई इरादा नहीं था...तुम्हे हर्ट करने का...आई एम् सॉरी...
आर्यन ने चाहत को देखा तो उसने पलके झपका कर इशांत को माफ करने को कहा। आर्यन ने चॉक्लेट ली फिर इशांत को देख - इट्स ओके...
इशांत ने आर्यन को देखा फिर उसके गाल खींचे और बाय बोल कर बाइक आगे बढ़ा दी। चाहत मेन गेट की तरफ आ गई और उसे खोल अंदर जाने लगी। इशांत गली के पास आकर रुक गया और बैक मिरर से चाहत को घर जाते हुए देखने लगा।
चाहत का घर
चाहत अंदर अाई तो रीमा जी डायनिंग टेबल पर बैठ कर उनका वेट कर रही है। आर्यन उन्हें देख भागते हुए उनके पास आया।
रीमा जी उसे गले लगाते हुए - आ गया मेरा बच्चा...कैसी रही पार्टी...
आर्यन रीमा जी से - बहुत अच्छी थी...आपको भी जाना चाहिए था...
रीमा जी उसके बाल ठीक करते हुए - ठीक है...अब खाना खा लो...
आर्यन उनके गोद से उठते हुए - नहीं भूख नहीं है... मै नहीं खाऊंगा.... आप और दी खा लो...ये बोल वो अपने रूम की तरफ चला गया।
चाहत - मम्मी मै फ्रेश होकर आती हूं...
चाहत वहा से रूम चले गई वहा से फ्रेश होकर अाई फिर रीमा जी के साथ खाना खा कर रूम आ गई।
चाहत रूम में आकर बेड में लेट गई वो बेड में लेटे हुए विंड
चाइम को देखने लगीं उसकी आवाज़ हमेशा चाहत को सुकून देती थी वो अध्यन के बारे में सोचने लगी। फिर मुस्कुराते हुए सो गई।
अगली सुबह
चाहत ने अपने काम कंप्लीट किए और नाश्ता कर स्कूल की तरफ निकल गई। स्कूल पहुंच कर चाहत क्लास में अाई और अपना बेग रख कर प्रेयर के लिए बाहर की तरफ जाने लगी।
तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ा चाहत ने मुड़ कर देखा तो वहा काजल खड़ी थी उसने सिर झुकाए हुए कहा - सॉरी.....मैंने तुझे गलत समझा ..... वो तुम दोनों ऐसी सिचुएशन में थे तो मुझे समझ ही नहीं आया...आई एम् सोरी ....आगे से ऐसा कुछ नहीं करूंगी....
चाहत कुछ देर तक ऐसे ही खड़ी रही फिर आगे बढ़ काजल को गले लगा लिया काजल ने भी उसे कस कर पकड़ लिया।
चाहत उसके गले लगे हुए ही - इट्स ओके तुझे तेरी गलती पता चल गई वहीं काफी है...
दोनों कुछ देर तक ऐसे ही खड़ी रही फिर अलग हुई तो देखा
अंश अपने गाल पर हाथ रख उन्हें देख रहा था। अंश का ऐसे देखना चाहत और काजल को अजीब लगा ।
तभी काजल अंश से - क्या हुआ ......ऐसे क्यू देख रहे हो???
अंश मुस्कुराते हुए - देख रहा हूं....तुम लड़कियां कितनी चिपकु होती हो.....मतलब कहीं भी शुरू हो जाती हो....
काजल और चाहत ने उसकी बात सुनी फिर एक दूसरे को देखा।
चाहत अंश से - क्या कहा...जरा फिर से कहना...ये बोल वो अंश के पीछे दौड़ने लगी काजल भी चाहत का साथ देने लगी । अंश कभी टेबल पर चढ़ता तो कभी दरवाज़े के पीछे छुपता ऐसे ही तीनो इधर उधर हो रहे थे। तभी चाहत का पैर फिसला और वो नीचे गिरने लगीं तभी किसी ने उसे कमर से पकड़ा और अपने पास खींचा। चाहत डर के कारण बस आंखे बंद किए वैसे ही उसकी तरफ खींची चली गई।
अब चाहत के दोनो हाथ उस शख्स के सीने पर थे और उसने हाथ चाहत के कमर के इर्द गिर्द थे। चाहत को उसकी धड़कन महसूस हो रही थी। चाहत ने सिर उठा कर ऊपर देखा तो उसकी नज़रे उस शख्स के नज़रों से जा मिली। उसने उस शख्स को देख कर कहा - अध्यन...
अध्यन जो उसे पकड़े खड़ा था उसे इतने देर बाद चाहत की
आवाज़ सुन सुकून आया उसने कुछ पल के लिए अपनी आंखे बंद कर ली और चाहत को महसूस करने लगा ।
तभी अंश और काजल उसके पास आकर जोर से चिल्लाते है। दोनों झटके से अलग हो जाते है। अंश उन दोनों के इर्द गिर्द घूमते हुए - शर्म नहीं आती तुम दोनों को....क्लास में ऐसी हरकतें करते हुए ...
काजल भी उसका साथ देते हुए - हा सच में...18+ तो हो जाओ कम से कम..
अंश सिर पर हाथ रख - वहीं तो....नाक कटवा देनी है तुम लोगो ने मेरी ...
अंश की बात सुन चाहत - कोई ना...हम प्लास्टिक की नाक लगवा देंगे..
ये सब अंश हैरानी से उसे देखता है ।और उसके माथे पर हाथ रख कर कहता है - तुम ठीक तो हो ना... मै इतनी बकवास कर रहा हूं और तुम हो की मस्ती में जवाब दे रही हो....
चाहत उसका हाथ हटा कर - हा मेरे झींगुर मै ठीक हूं..और अगर अब तुम बाहर नहीं गए ना तो शायद तुम ठीक नहीं रहोगे...
अंश और काजल एक साथ - वो क्यू..???
चाहत उन दोनों को घूरते हुए - क्युकी प्रेयर बेल बज गई है...और तुम दोनों अभी तक यही हो..
अंश और काजल एक साथ - पर तुम भी तो हो...
चाहत - हा मै तो हूं... बट मै हूं कैप्टन ...अगर लेट हुई तो भी चलेगा...पर तुम दोनों लेट हुए तो ...
अंश और काजल - तो..
चाहत - तो पूरे प्ले ग्राउंड के 10 चक्कर...
अंश और काजल ने पहले चाहत को देखा फिर प्रेयर ग्राउंड की तरफ भाग गए।
अब रूम में बस चाहत और अध्यन थे। चाहत जैसे ही जाने को हुई तभी अध्यन - चाहत ..
चाहत रूकी और मुड़ कर अध्यन को देखने लगी तभी अध्यन - मै भी तो यही हूं ...चलो साथ में ग्राउंड चलते है...
चाहत ने कुछ नहीं कहा बस हा में सिर हिला दिया। और साथ चलने लगे।
चाहत को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले ....?
तभी अध्यन और चाहत एक साथ - कैसे हो...??
दोनों ने अजीब तरह से एक दूसरे को देखा फिर दोनो साथ में - मै ठीक....
अब दोनो मुस्कुराने लगे। चाहत का मुस्कुराता चेहरा देख
अध्यन को सुकून मिल रहा था। आज पूरे दो दिन बाद वो चाहत को देख रहा था । उसकी एग्जिस्टेंस फील कर पा रहा था। इसके बाद दोनों ने कुछ नहीं कहा बस एक खामोशी से चलने लगे।
अध्यन उसके पास आया और दोनो साथ में ग्राउंड की तरफ आने लगे।
प्रेयर ग्राउंड में आकर चाहत अपने क्लास की लाइन पर लास्ट में खड़ी हो गई। तभी उसे किसी की आवाज़ सुनाई दी। कोई जूनियर लड़की थी शायद वह । उसने अपने साथ वाली फ्रेंड से कहा - अरे यार...ये अध्यन को हो क्या गया है...जब देखो तब इस चाहत के साथ घूमते रहते है...
दूसरी लड़की - हा यार...पता नहीं उनका टेस्ट इतना खराब कैसे हो गया है...
पहली लड़की - वहीं तो ...इतने स्मार्ट है...स्कूल की कोई भी लड़की पसंद करेगी पर नहीं ...इनको तो इस चाहत के साथ घूमना है...
दूसरी लड़की - मुझे तो लगता है..रहम कर रहे होंगे चाहत पर...ताकि बेचारी अकेले ना रहे....
पहली लड़की - हमे क्या...चलो छोड़ो....
ये बोल वो प्रेयर करने लगी।
उनकी बात सुन कर चाहत वहीं जड़ हो गई। उसके दाए आंख से एक आंसू गिरा और उसने तुरन्त साफ़ कर अपना ध्यान प्रेयर में लगाया। पर दिल को तो चोट पहुंच ही चुकी थी ।
प्रेयर कब शुरू हुई और कब ख़तम चाहत को तो पता भी नहीं चला उसका मन तो यही सोच रहा था कहीं अध्यन उसे रहम की नज़रों से तो नहीं देखता ना ये सोच कर ही उसका दिल रों रहा था। उसे ये सब सुनने की आदत थी पर रहम ये वर्ड उसके कानों में चोट कर रहे थे। चाहत ने किसी तरह खुद को संभाला और क्लास आ गई।
वहा अंश और अध्यन मुस्कुरा रहे थे। चाहत ने एक पल के लिए रुकीं उसने अध्यन को देखा जो मुस्कुराते हुए बहुत प्यारा लग रहा था मुस्कुराते हुए उसकी छोटी आंखें बंद हो जाती है उसके गालों पर पड़ने वाले डिंपल उसके चेहरे पर बहुत प्यारी लग रही थी। खिड़की से आतीं धूप में उसका चेहरा और भी दमक रहा था।
को आवाज़ दी - चाहत
चाहत रुक गई और पलट कर अध्यन की तरफ देखने लगी। अध्यन ने उसे रुका हुआ देखा तो वो उसके पास जाने लगा। तभी वहा सोनिया अाई और अध्यन के गले लग गईं। थोड़ी देर बाद उससे दूर हुई।
सोनिया - तुम ठीक तो हो ना...मैंने सुना था कि तुम्हे पैर पर मोच आ गईं थीं..
अध्यन - हा मै ठीक हूं... बस छोटी सी मोच ही तो थी।
ये बोल उसने सामने देखा तो चाहत वहा नहीं थी।
अध्यन उसे इधर उधर देखने लगा उसने चारो तरफ अपनी नज़रे घुमाई पर वो उसे कहीं नहीं दिखीं।
सोनिया उसके कंधे पर हाथ रख - किसे ढूंढ रहे हो??
अध्यन - किसी को नहीं ...ये बोल वो सोनिया के साथ क्लास आ गया।
चाहत वहीं पिलर के पीछे छुपी थी । वो बाहर निकली कुछ देर तक जाते हुए अध्यन को देखा फिर बच्चो की क्लास चले गई वालंटियर होने के नाते उसे आज उसे वहा का कॉम्पटीशन देखना था आज उसके साथ कोई टीचर भी थे।
चाहत अपने दिमाग से सारी बाते निकाल देना चाहती थी इसीलिए उसने खुद को काम में बिजी रखना जरूरी समझा।
चाहत उसे देख रही थी तभी किसी ने उसे धक्का दिया चाहत थोड़ी देर के लिए लड़खड़ा गई तभी धक्का देने वाली लड़की ने उसे संभालते हुए सॉरी कहा। चाहत ने भी उठते हुए उसे इट्स ओके कहा। चाहत ने सिर उठा कर सामने देखा तो उसकी नज़र क्लासरूम में रखे अलमारी की तरफ गई जिसके दरवाज़े पर शीशा लगा था। ये एक लोहे की अलमारी थी। जिसमे नोट बुक और चॉक डस्टर रखा जाता था। क्लास टीचर भी अपनी जरूरत की चीज़े यही रखते थे।
चाहत ने उस शीशे में जब खुद को देखा तो अपने अश्क को देख कर वो सोचने लगी - सही तो कह रही थी....वो गर्ल्स ....मेरे अंदर तो ऐसा कुछ है ही नही.....तो अध्यन क्यू मेरे साथ है.....कहीं सच में वह मेरे ऊपर ....रहम ..उसने जैसे ही ये सब सोचा उसके आंखो से फिर आंसू निकाल पड़े ।
चाहत अब क्लास में नहीं रुकना चाहती थी वो पहले अपने डेस्क के पास पहुंची और नोटपैड और पेन निकाला फिर क्लास से बाहर आ गई ।
अध्यन चाहत को बहुत पहले से नोटिस कर रहा था। वो जैसे ही बाहर जाने लगी अध्यन भी उसके पीछे बाहर निकला चाहत जल्दी जल्दी आगे बढ़ रही थी। तभी अध्यन ने चाहत
वो वहीं सभी बच्चो के बीच बैठ गई। वहा उसने उनका नाम लिख कॉम्पिटिशन स्टार्ट किया ।
इधर क्लास में अध्यन अपनी डेस्क में बैठा था और सोनिया उससे बात किए जा रही थी। जिसका जवाब वो हा हूं में दे रहा था वो डेस्क में बैठे दरवाज़े को देखे जा रहा था। अचानक सोनिया को कुछ याद आया वो बाय बोल कर क्लास से चले गई। अध्यन को अब मौका मिल गया वो बाहर जाने के लिए उठा ही था तभी किसी ने अध्यन को आवाज़ लगाई। अध्यन ने पहले अपनी आंखे बंद की फिर पलट कर देखा तो अंश हाथ बांधे उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था ।
अंश अध्यन के पास आते हुए - कहा जा रहा है तू?
अध्यन - कहीं नहीं...वो मै बस
अंश उसे टोकते हुए - हा हा.. सोच ले बहाना तब तक मै यही हूं..
अध्यन उसे देखते हुए - कोई बहाना नहीं...मै बस चाहत के पास जा रहा था..प्रेयर के बाद उसे देखा ही नहीं तो...
अंश - ओहो...इतनी बेकरारी.... ये बोल उसने अध्यन को आंख मारी...
अध्यन ने अपने दोनों हाथो को झटका दिया और उसकी तरफ बढ़ते हुए - बेकारार तो मै बहुत हूं.. रुक अभी तुझे मेरी बेकरारी बताता हूं...
ये बोल अध्यन ने अंश को पकड़ लिया फिर शुरू हुई असली बेकरारी । अध्यन और अंश बच्चो की तरह लड़ रहे थे।
थोड़े देर बाद दोनो शांत हुए और पास रखी डेस्क पर बैठ गए और हाफने लगे। अंश मुस्कुराते हुए अध्यन को देखने लगा। फिर अचानक से उसने अध्यन को गले से लगा लिया ।
अंश - ये दो दिन बहुत भारी थे यार ....मैंने तुझे बहुत मिस किया।
अध्यन उससे दूर होते हुए - मैंने भी...
अंश मुस्कुराते हुए - और चाहत को..
अंश की बात सुन अध्यन मुस्कुराने लगा फिर उसने कहा - मिस उसे किया जाता है...जिसे भुला दिया गया हो...पर वो तो मेरे जहन से कभी दूर गई ही नहीं...तुझे पता है...पहले यकीन नहीं था..पर इन दो दिनों में मुझे इस बात का यकीन हो गया है...की वो मेरे लिए कितनी जरूरी है...ये जो मै फील करता हूं ...ये प्यार ही है...आज जब उसने मेरा नाम लिया....जब उसका हाथ मेरे सीने पर था...मै ..मै बता नहीं सकता यार ...दिल किया उसे ऐसे ही रखु अपने पास अपने करीब ...उसकी काली बड़ी पलकों वालीं आंखे जब मुझे देखती है ...तब मुझे यही लगता है...बस यही एक पल है ...जब वो मेरे लिए...सिर्फ मेरे लिए है....
अंश उसकी बाते गौर से सुन रहा था । उसने अध्यन के कंधे पर हाथ रखा फिर कहा - तो तू उसे कब बता रहा है...अंश की बात सुन अध्यन ने उसे देखा तो अंश अपनी बात जारी रखते हुए - देख मुझे पता है...तेरे दिल में उसके लिए प्यार है...पर प्यार को दिल में रख कर कुछ नहीं होगा..उसे एक्सप्रेस भी तो करना पड़ेगा ना...
अंश ने कहा तो अध्यन कुछ देर खामोश हो गया।
थोड़े देर बाद अध्यन - ठीक है ...मै उसे जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी बता दूंगा...पर
अंश उसकी तरफ देखते हुए - पर
अध्यन - पर अगर उसने ना कह दिया तो...
अंश अपने सिर पर हाथ रख कर - तू जब भी बोलेगा ...अशुभ ही बोलेगा... उसे देख कर तुझे नहीं लगता कि वो भी तुझे पसंद करती है...जिस तरह तुझे देखती है...तुझसे मिल कर ही उसके चेहरे पर अलग ही नुर आ जाता है...तेरी फिक्र करती है...तुझे दर्द हो तो आंख उसकी भी नम हो जाती है..इतना सब के बाद अब भी तुझे लगता है...वो तुझे ना कहेगी।
अध्यन ने अंश की बात सुनी फिर उसे देखते हुए कहा - वहीं तो...वहीं तो दिक्कत है...
अंश अब हैरान सा अध्यन को देखने लगा ।
अध्यन बात जारी रखते हुए - वो दूसरी लड़कियों की तरह नहीं है...अगर मैंने उसे अभी बता दिया तो..उसके मन में मुझे लेकर सेम फीलिंग हो या नहीं भी हो...पर फिर भी वो मुझे हा बोल देगी...और एक फ्रेंड की तरह भी ट्रीट नहीं करेगी...वो मुझसे दूर हो जाएगी...जो मै नहीं चाहता ...मै बस उसके दिल की बात जानना चाहता हूं... अगर उसके मन में मेरे लिए कुछ हो तब ही मुझे वो हा बोले...और अगर उसके मन में प्यार नहीं होगा तो मै उस...
अंश उसे टोक कर - तो तू क्या उसे भूल जाएगा...
अध्यन उसे घूरते हुए - नहीं ...उसे अपने प्यार का अहसास करवा दूंगा...उसे ये बताऊंगा वो कितनी जरूरी है...और एक ना एक दिन उसे मान ही जाना है...
अंश उसे देखते हुए - अरे वाह ...मुझे लगा तू मुझे भूल जाएगा...पर नहीं तूने तो दिल जीत लिया...
अध्यन - अरे ऐसे कैसे भूल जाऊंगा....पहला प्यार है...भाई चाहूं तो भी भूल नहीं सकता ....और हार भी नहीं मान सकता...
अंश - अरे वाह मेरे शेर ....मुझे तो लगा था तू बहुत ज्यादा सीधा बंदा होगा ...पर नहीं तू तो टेडी खीर निकला...
अध्यन उसकी बात सुन मुस्कुराते हुए - हूं तो मै सीधा ही ...पर जब बात चाहत की हो तो थोड़ा टेडा होना जरूरी
है...
अब दोनो मुस्कुराने लगे।
इधर चाहत ने अपना काम कंप्लीट कर सीधे क्लास आ गई। वो अपनी डेस्क के पास आ गई उसने नोटपैड बेग में रखा तभी लंच की बेल बजी चाहत का मन कुछ खाने का नहीं कर रहा था वो क्लास रूम से बाहर चले गईं । अध्यन ने जब उसे ऐसे जाते देखा तो उसने चाहत को आवाज़ लगाई पर चाहत तो अपने धुन में ही बाहर निकल गई । अध्यन भी उसके पीछे जाने लगा ।
चाहत गार्डन की तरफ चलें अाई वहा वो हमेशा की तरह पेड़ के पास बैठ गई। उसका दिमाग अभी भी सुबह की बाते ही सोच रहा था। वो बाते रह रह कर चाहत की आंखो को नम कर रहा था। चाहत खुद में ही खोई हुई थी। उसे पता ही नहीं चला कब अध्यन वहा आया । अध्यन वहीं चाहत के बगल बैठ कर उसे देखने लगा चाहत उसे तो जैसे होश ही नहीं था। अध्यन ने चाहत को पुकारा पर चाहत ने कोई जवाब नहीं दिया।
अध्यन ने चाहत के कंधे पर हाथ रखा तो उसने झट से नजर उठा कर अध्यन को देखा। अध्यन ने जब उसकी आंखो को
देखा जिसमे आंसू ऐसे रुके थे जैसे काले बादल जो बरसने को बेकरार हो..अध्यन उसे एकटक देख रहा था। उसे कुछ दर्द महसूस हुआ पर पता नहीं ये दर्द किस चीज का था शायद वो चाहत की आसुओं से भरी आंखे बर्दास्त नहीं कर पा रहा था । चाहत ने कुछ नहीं कहा बस वो वहा से उठ कर जाने लगी।
अध्यन को अब लगने लगा कोई उससे उसकी जान खींच कर ले जा रहा है वो भागते हुए चाहत के पास पहुंचा और उसने सामने खड़ा हो गया। चाहत ने फिर अपनी पलको को उठा कर उसे एक नजर देखा और साइड से जाने लगी। अध्यन ने उसका हाथ पकड़ भरे गले से कहा - क्या हुआ...? तुम ऐसे क्यू..? वो इससे आगे कुछ कह पाता उससे पहले ही चाहत ने आगे जाना चाहा ।
अध्यन ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली और उसे झटके से खुद के करीब खींचा । चाहत उसके करीब आ गईं उसने चाहत की आंखो में देखते हुए गुस्से से कहा - क्या हुआ???
चाहत ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की मगर छुड़ा ना सकी उसकी इस हरकत ने अध्यन का गुस्सा और बढ़ा दिया उसने अपनी पकड़ चाहत के हाथो पर और मजबूत कर के पूछा - क्या हुआ????
चाहत ने कुछ नहीं कहा बस उसके आंखों से आंसू गिरने
लगे। इन आंसुओ ने अध्यन की बेचैनी और बढ़ा दी उसने चाहत का हाथ छोड़ कर उसके चेहरे को अपने हाथो में पकड़ा और अपना सिर उसके सिर से लगा कर बोला - कुछ तो बोलो ...ऐसे चुप मत रहो...तुम्हारी ये खामोशी मेरी जान ना ले ले...
चाहत थोड़े देर वैसे ही रही फिर से उसके दिमाग में रहम ये शब्द गूंज गया । उसने अध्यन से कहा - छोड़ो मुझे... अध्यन ने उसकी बात सुनी पर तब भी उसे नहीं छोड़ा । चाहत को अब गुस्सा आने लगा वो एक झटके में अध्यन से दूर हुई । अध्यन उसे देखने लगा ।
चाहत की आंखे गुस्से में लाल थी फिर उसने कहा - दूर रहो मुझसे ....कोई रहम नहीं चाहिए मुझे ....समझे तुम।
ये बोल चाहत जोर जोर से रोने लगी। अध्यन को समझ ही नहीं आ रहा था। वो आगे बढ़ उसके पास जाने लगा तभी चाहत - कहा ना दूर रहो...ये बोल चाहत झट से मुड़ी और अपने आंसू पोछते हुए क्लास की तरफ आ गई। अध्यन वहीं बैठ गया उसे अब समझ नहीं आ रहा था आखिर उसकी गलती क्या है। उसे रह रह कर चाहत का रोना याद आ रहा था। चाहत के आंसू तो वो बर्दास्त कर ही नहीं पा रहा था। वो वहीं उसके कहे हुए शब्दों को समझने की कोशिश कर रहा था।...
अध्यन जो वहीं बैठ गया था वो एकदम से उठा और कहा - तुम अगर चाहो भी ..तब भी मै तुमसे दूर नहीं जाऊंगा.. ये बोल वह चाहत को ढूंढने लगा।
थोड़े देर तक यूं ही ढूंढते रहने के बाद उसे चाहत क्लास की तरफ जाते हुए दिखी वो चाहत के पीछे क्लास जाने के लिए आगे बढ़ा ही था। तभी अंश उसके पीछे से आवाज़ दी अध्यन ने पलट कर देखा तो अंश उसके पास आ कर - चल तुझे कोच ने बुलाया है।
अध्यन वहा से सीधा कोच के ऑफिस गया।
इधर चाहत क्लासरूम में पहुंची तो लंच के कारण पूरी क्लास खाली थी वो अपनी डेस्क के बैठ गई और मुंह पर हाथ रख कर रोने लगी। उसे ऐसा लग रहा था मानो किसी ने कोई बड़ा सा पत्थर उसके सीने पर रख दिया हो.... वो ना जाने कितने ही देर तक रोती रही फिर उसने अपने सिर पर दर्द महसूस किया वो वहा से सीधा कॉमन रूम गई वहा उसने अपना चेहरा साफ किया और बाहर आ गई। वो चल ही रही थी तभी उसे चक्कर आने लगे । उसका सिर उसे भरी लगने लगा। वो क्लास गई और अपना बेग लेकर सीधे टीचर के पास गई।
अध्यन जब दोबारा क्लास आया तो उसे चाहत कहीं नहीं दिखी वो चाहत को ढूंढने लगा तो चाहत उसे कहीं जाते हुए दिखीं अध्यन ने उसे कुछ नहीं कहा बस उसके पीछे चलने लगा।
मेडिकल रूम
चाहत - मैम ... मे आई गेट इन..?
मैम - ओह चाहत ..कम ना।
चाहत रूम में इंटर करते हुए - मैम मुझे headache हो रहा है...आपके पास कोई मेडिसिन होगी??
मैम - हा है ना....ये लो..
चाहत ने मेडिसिन ली और जैसे ही खाने वाली थी वैसे ही किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया । चाहत ने जब मुड़ कर देखा तो अध्यन उसे गुस्से से घुर रहा था।
चाहत ने जैसे उसे देखा वो रुक गई। अध्यन मैम से - मैम मेडिसिन हमेशा खाने के बाद लेनी चाहिए ना .....ये बोल उसने चाहत को घुरा।
मैम जो अभी रजिस्टर में कुछ एंट्री कर रही थी उन्होंने कहा -
हा अध्यन... फिर चाहत को देखते हुए - तुमने कुछ खाया तो है ना .... चाहत कुछ बोलने को हुई तभी अध्यन - यस मैम ...इसने तो कुछ ज्यादा ही खा लिया है।
चाहत अध्यन की बात सुन कर उसे घूरने लगीं तभी अध्यन ने भी उसे घुरा चाहत अध्यन का घूरना देख थोड़े देर के लिए डर गई फिर उसने मेडिकल रूम से बाहर जाना ही सही समझा। चाहत आगे जाने लगी तो वो दो कदम से ज्यादा आगे बढ़ ही नहीं पाई उसने मुड़ कर देखा तो अध्यन ने उसका हाथ मजबूती से पकड़ रखा है। चाहत को अब समझ नहीं आ रहा था वो क्या कहे क्युकी सामने मैम थी तो वो ज्यादा बोल भी नहीं सकती थीं।
अध्यन ने चाहत की उंगलियों में अपनी उंगलियां फसाई चाहत उसे हैरानी से देखने लगी।
अध्यन मैम से - गुड डे मैम।
मैम ने उन दोनों को देख कर बस मुस्कुरा दी।
उन्होंने चाहत को देख कर कहां - अपना ख्याल रखना। अध्यन और चाहत दोनो मेडिकल रूम से बाहर आ चुके थे। अध्यन चाहत का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ लेकर चलने लगा। चाहत ने पहले हाथ छुड़ाने की कोशिश की पर छुड़ा नहीं पाईं। चाहत ने कुछ कहना चाहा तो अध्यन उसकी
आंखो में देखते हुए - यहां कैमरा लगा है ...अगर यहां तुमने कुछ किया..तो प्रिंसिपल तुम्हे तो कुछ नहीं बोलेंगे पर मुझे पक्का सुना देंगे।
अध्यन की बात सुन चाहत ने कुछ नहीं कहा बस उसके साथ चलने लगी। दोनों कुछ देर में गार्डन में थे। अध्यन ने चाहत को पास रखे टेबल पर बैठाना चाहा पर चाहत नहीं बैठी अध्यन ने जबरदस्ती उसे कंधो से पकड़ कर बैठाया।
अध्यन उसे बैठाते हुए - हर बात पर जिद करना अच्छी बात नहीं....ये कह कर उसने चाहत के बेग से टिफिन निकला और उसे खोलने लगा। चाहत उसे ऐसा करते देखते रही फिर उसने कहा - तुम क्यू ये सब कर रहे हो....मै इस लायक नहीं हूं...?
अध्यन टिफिन खोलते हुए - तुम किस लायक हो....मुझे बताने की जरूरत नहीं। ये बोल उसने टिफिन खोला। आज चाहत के टिफिन में सुजी का उपमा था। अध्यन ने चम्मच लिया फिर उसमे उपमा लेकर चाहत की तरफ बढ़ा दिया। चाहत ने जब ना में सिर हिलाया तो अध्यन ने आंखें दिखा कर कहा - दोस्त हूं तुम्हारा...इतना हक तो रखता हूं..
अब चाहत ने कुछ नहीं कहा वो बस खाने लगीं। जब खाते हुए गलती से चाहत को मिर्ची लगी तो अध्यन ने उसे झट से
पानी पिलाया। थोड़े देर में उनका खाना ख़तम हुआ। चाहत को मेडिसिन खिला लेने के बाद अध्यन ने कुछ नहीं कहा। वो अपनी चेयर से उठ कर जाने लगा।
चाहत उसे जाते हुए देखने लगी वो कुछ पल के लिए रुका और बिना पल्टे ही कहा - कल मेरा फुटबॉल मैच है तुम आना ...मै.....तुम आओगी तो मुझे अच्छा लगेगा... ये बोल अध्यन वहा से चला गया। चाहत बस उसे देखती रही।
कुछ देर बाद छुट्टी भी हो गई। चाहत रास्ते भर आज जो हुआ उसके बारे में सोच रही थी कहीं ना कहीं उसे अपनी गलती का एहसास हो गया था। जो भी बाते हुई थी वो बस उन लड़कियों की थिंकिंग थी अध्यन ने तो उनसे कुछ कहा भी नहीं था। चाहत को अब अपने किए पर गुस्सा आने लगा। वो घर पहुंची और अपनी साइकिल रख कर अंदर आ गई।