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हंसते खिलखिलाते वह रात भी बीत गई, अगले दिन सुबह नाहर के आने पर सारे पेपर नाहर के हिसाब से ही तैयार करवा लिया गया युवराज भैया और नाहर की बात मानते हुए आखिर राज ने उन कागजों पर साइन कर दिया।।
उसी दिन शाम को प्रिंस को आईसीयू से मेडिकल वार्ड में भर्ती कर दिया गया प्रिंस की हालत में पहले से सुधार होने लग गया था,, उन सभी का सारा दिन प्रिंस के साथ ही अस्पताल में बीत जाता प्रिंस को बोलने में अभी भी तकलीफ थी लेकिन इशारों में अपनी बात समझा पा रहा था।। मेडिकल वार्ड में शिफ्ट करने के बाद राज ने प्रिंस का हाथ पकड़कर उसे नाहर और भैया वाली सारी बात बता दी,, प्रिंस ने अपने हाथ से राज के हाथ को थपथपा कर उसे आश्वस्त कर दिया कि राज ने जो भी किया है वह सही है और इस बात से प्रिंस बिल्कुल भी दुखी नहीं है।।
लेकिन उन कागजों पर साइन करने के बाद भी जाने क्यों राज का मन नहीं मान रहा था।।
उस शाम फ्लैट में वापस आने के बाद जब युवराज भैया, राज और प्रेम हॉल में बैठे इसी केस के बारे में कुछ बात कर
रहे थे तभी प्रिया रसोई से बाहर आई
" युवराज भैया हमें एक आईडिया आया है"
" हो गया बंटाधार "बोलकर प्रेम दूसरे कमरे में चला गया।।
प्रेम की बात पर ध्यान ना देकर प्रिया ने युवराज भैया और राज से कहना शुरू किया
" देखिए भैया यह सारा फसाद इसी बात का है ना कि उस अंजानी जमीन को प्रिंस ने बेचा अगर हम उस जमीन का सच में कोई मालिक दिखा दें ,और यह साबित कर दें कि उस जमीन का कोई मालिक है जिससे प्रिंस ने उस जमीन को खरीदा था तब तो यह केस वही का वही खत्म हो जाता है,है ना?"
"हाँ बात तो तुम सही कह रहीं प्रिया, लेकिन ऐसे किसी को भी मालिक नहीं दिखा सकते।।"
युवराज भैया की इस बात पर प्रिया ने तुनक कर कहा" तो यह वकील किस दिन काम आएंगे अगर नाहर यह साबित नहीं कर पाएगा,तो हमारे पास दिल्ली का एक और बहुत बड़ा वकील है आप कहें तो हम उनसे बात करें।"
राज ने प्रिया की ओर देखा तो प्रिया ने राज से कहा "सिद्धार्थ सर के पिता जी वह भी तो दिल्ली में ही वकालत की प्रैक्टिस करते हैं हम सिद्धार्थ से बात करके उनके पिताजी से कहते हैं आपका केस लेने के लिए।।"
" कोई जरूरत नहीं है नाहर संभाल लेगा।" राज ने रूखा ,
सा जवाब दिया और वहाँ से उठ कर चला गया।।
3 दिन बाद प्रिंस की अस्पताल से छुट्टी हो गई और उसे लेकर सारे लोग घर वापस आ गये।।
अभी तक युवराज ने सारी बातों को दबा छुपा कर रखा हुआ था राज के ऑफिस में पुणे की कॉन्फ्रेंस के बाद उसकी छुट्टियों का आवेदन भेज दिया गया था वापस आकर उसे ज्वाइन करने से पहले अपने केस को रफा-दफा करना था।।
आखिर नियत तिथि पर, युवराज राज प्रेम प्रिंस नाहर सभी कलेक्ट्रेट ऑफिस में पटवारी के साथ-साथ उस जमीन से जुड़े सारे कागजों खसरे और नक्शे को लेकर उपस्थित हो गए।।
मौजूदा खसरे की ऑनलाइन जांच की गई सभी अफसरों के सामने हर दिशा से देखने के बाद पटवारी ने उस जमीन के बाबत सवाल करना शुरू किया3 Underscore इतना सिखाने पढ़ाने पर भी अंत समय में राज से झूठ नहीं कहा गया और उसने वहां सभी के सामने यह मान लिया कि उससे बहुत बड़ी चूक हो गई उसने सारे कागजातों पर बिना पढ़े ही दस्तखत कर दिये।।
चूंकि ज़मीन पे उस वक्त तक किसी ने मालिकाना हक के लिये वाद दायर नही किया था इसलिये राज और प्रिंस के ऊपर कोई भी कड़ी कार्यवाही ना कर उन्हे अपने पक्ष में वाद साबित करने का एक और मौका दिया गया,और एक हफ्ते का समय दे दिया गया।।
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वहाँ से बिना युवराज से नज़र मिलाए ही राज प्रेम के साथ निकल गया,उसने प्रिया को फ़ोन कर बड़े हनुमान मन्दिर बुला लिया।।
वहाँ साथ साथ दर्शन कर दोनो कुछ देर के लिये घाट पर चले गये,प्रिंस और प्रेम वहाँ से घर के लिये निकल गये।।
तालाब की सीढ़ियों पर बैठे बैठे राज ने दिन भर की सारी बात बन्सी को बता दी,बन्सी ने मुस्कुराते हुए राज को देखा और अपना पर्स खोल कुछ पेन जैसा निकाला__
" ये क्या है प्रिया ।"
" काजल है ,इधर आओ ज़रा !! हमारे पास अपना चेहरा लाओ।"
" कैसी बेशर्म हो गयी हो आजकल ,खुले आम किस करना चाहती हो,,छी . बन्सी को चिढा के राज हंसने लगा
" हवा में मत उड़िये पण्डित जी हम ऐसा कुछ नही करने वाले,,हम बस ये काजल का टीका आपको लगाना चाहते हैं,जिससे हमारे राज को किसी की नज़र ना लगे।"
" हम कोई छोटे बच्चे हैं,जो हमे काला टीका लगाओगी।।"
" छोटे बच्चे तो नही हो ,पर प्यारे बहुत हो,हम नही चाहते तुम्हे किसी की नज़र लगे।"
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प्रिया ने एक हाथ से राज का चेहरा जबर्दस्ती पकड़ा और दूसरे हाथ से सामने के बालों को थोड़ा पीछे कर राज के माथे पर टीका लगा दिया।।
राज ने प्रिया का हाथ झटक कर अपना चेहरा हटा लिया__" क्या बद्तमीज़ी है यार,,अम्मा का बोलेंगी देख कर, ये कौन नैकी अम्मा आ गयी तुम्हारी।"
" तो बता देना हमारे बारे में, पण्डित जी।"
" अब ये क्या नया राग है तुम्हारा पण्डित जी!! सीधे सीधे नाम लो ना।"
" नही अब हम राज नही बोलेंगे,,कल को बच्चे होंगे तो अच्छा लगेगा क्या बच्चो के सामने उनके पापा का हम नाम लें ।।"
" ओह्हओ!! अभी शादी हुई नही ,तुम बच्चो तक पहुंच गयी,,बड़ी जल्दी है तुम्हें ।।"
" जल्दी कैसे ना होगी!! अरे याद आया राज,हम 15 दिन की छुट्टी लेकर आये थे जिसमे 6 दिन तो खतम हो गये,अब इन बचे दिनों में हमारी शादी नही तो कम से कम सगाई तो हो ही जाये।"
" हम्म आज बाऊजी और युवराज भैया से बात करते हैं ।।"
दोनो अपनी बातों में खोये थे कि तभी कुछ पांच छै लड़के ,
ज़ोर ज़ोर से बात करते उसी तरफ चले आये और राज और प्रिया को देख उन लोगों की सीढियों के पास ही आकर खड़े हो बात करने लगे।।
"अरे गुड्डा भैया जी ई तो अपने राज भैया बैठे हैं।"
"का बोले कहां बैठे हैं?? हमें तो नजर नहीं आ रहे!! हां हां तुम तो सही बोले,, यह तो राज भैया बैठे हैं और किसके साथ बैठे हैं अरे यह तो प्रिया है! है ना,कैसी हो प्रिया??"
राज ने उन लोगों को देखा तो प्रिया का हाथ पकड़े वहाँ से जाने के लिये मुड़ने लगा।।
" अरे कहां चल दिए राज बाबू हम अभी आए और तुम अभी चल दिए।।"
" गुड्डा!! हमें तुमसे कोई बात नही करनी,,देखो जो झगड़ा फसाद था सब पुरानी बात थी,बचपना था,तुम्हारा भी और हमारा भी ,तो अब मिट्टी डालो उन सब बातों में।।क्या रखा है पुरानी बातों में ।।
राज के ऐसे बोलते ही गुड्डा राज के सामने हाथ जोड़ के खड़ा हो गया।।
" सही कहे गुरुदेव!! हम भी भूल जाना चाहते है, पर वो क्या है ना,तुम्हारा थप्पड़ अभी भी कान में गूंजता रहता है पर एक ही कान में,दूसरे से तो सुनाई ही देना बन्द हो गया था ना,उसका का करें,उसके लिये कोई उपाय बता दो।।"
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" अरे काहे इत्ता खींच रहे यार बात को,,,छोड़ भी दो ,अच्छा हमें मारना चाहते हो तो मार लो,अगर इसी से तुम्हारे कलेजे को ठंडक पड़ती है तो यही कर लो।प्रिया तुम जाओ।"
राज की बात पर प्रिया ने उसे घूर के देखा और गुड्डा की तरफ मुड़ गयी__
" काहे गुड्डा भूल गये हो क्या कि तुम राज से बात कर रहे हो??एक ही थप्पड़ में बहरे हो गये थे .
तुम्हे क्या लग रहा ,तुम छै हो और वो अकेला तो तुम जीत जाओगे ,अरे गधे हम उसके साथ है इसलिये इतना तमीज़ से तुमसे बात कर रहा ,समझे वर्ना अभी तुम्हे तुम्हारी नानी याद दिला देगा।।
" का बात है डाकू हसीना, बोलो ना अपने राज बाबू को ,की तुम्हारा हिस्सा बांटा कर ले हमारे साथ,हम सारा थप्पड़ वप्पड़ भूल जायेंगे .
गुड्डा की बात, पूरी होने के पहले ही उसके चेहरे पे एक घूंसा पड़ गया,,उसके बाद तो ताबड़तोड़ जो जो सामने आता गया राज ने सबकी लातों से घून्सो से जो धुनाई की कि उनमें से कोई वहाँ से उठ कर भागने की हालत में भी नही बचा।। पर सबसे बुरी हालत गुड्डा की ही करने के बाद जब राज प्रिया का हाथ पकड़ वहाँ से निकलने लगा तब गुड्डा ने अपने दोनों हाथों से राज का एक पैर पकड़ लिया,
राज ने पैर झटक कर छुड़ाने की कोशिश करी तब गुड्डा राज ,
को देख ज़ोर से हंसने लगा, राज अपना पैर छुड़ा कर चला गया__" यही तो हम चाहते थे राज बाबू।"
राज और प्रिया वहाँ से निकले ही थे कि राज के घर से फोन आ गया__ " हाँ अम्मा आ रहे,,घर ही आ रहें हैं ।"
सारे रास्ते दोनो चुपचाप बैठे रहे,,राज बुलेट चलाते हुए अपनी सोच में गुम था,और पीछे बैठी प्रिया अपनी सोच में ।
प्रिया को उसके घर उतार कर राज जाने को हुआ __" सुनो इतना मूड मत ऑफ़ करो,,भूल जाओ ना गुड्डा और उसके लड़कों को,,उनके आने के पहले इतनी प्यारी शाम थी ,उसे याद रखो बस!!"
राज मुस्कुरा के अपनी बुलेट मोड़ कर घर के लिये निकल गया।।
घर पहुंचते ही उसने देखा उसके घर के बाहर तीन चार बड़ी बड़ी गाडियाँ खड़ी थी,अपनी गाड़ी खड़ी कर अन्दर जाते ही युवराज ने आगे बढ़ कर हँसते हुए राज के हाथों को थाम कर उसे सबके सामने ले आया__" नेता जी,यही है हमारा छोटा भाई!! बहुत बहुत गर्व है हमें अपने भाई पर।।
हॉल में युवराज भैय्या और बाऊजी के अलावा रूपा भाभी के पिता जी उनके मौसा जी,भाभी के दोनो बड़े भाई,उनकी मौसी, नेता जी अपनी श्रीमती जी और दोनो लड़कों के साथ मौजूद थे।।
उन सभी को नमस्ते कर राज भीतर चला गया__
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" कहाँ रह गया था लल्ला,इत्ती अबेर कर दी,और ये क्या लग गया माथे पे ,दिखा ज़रा।।
बाहर खचाखच भरे हॉल में इतने लोगों को जो नही दिखा एक माँ की आंखों ने तुरंत ढूँढ लिया__
" अरे कुछ नही अम्मा,हल्की सी चोट है।।"
" कहाँ हल्की है,,दोनों भौंहो के बीच ऐसा सीधा कटा है,लग रहा शिव जी का तीसरा नेत्र बन गया है तेरे माथे पे," कहते हुए सुशीला ने ज़रा सी हल्दी राज की चोट पर लगा दी।।
" जा बेटा जल्दी से हाथ मुहँ धोकर कपड़े बदल कर आ जा,,मेहमान बैठे हैं नीचे।।
बिल्कुल ही बिना मन के राज अपने कमरे में चला गया,हाथ मुहँ धोकर निकला ही था कि अम्मा हाथ में दूध का गिलास थामे ऊपर चली आयी__
उसके बिस्तर पर उन्होने कुर्ता निकाल रख छोड़ा था__" अम्मा ये कुर्ता काहे निकाला,रात में हम लोवर टी शर्ट ही तो पहनते हैं,जानती हो फिर भी ।।"
"पहुना लोगन के सामने ई घर का कपड़ा में जाओगे, इत्ता बड़ा आदमी के लड़िका हो,बड़े भाई का भी नाम है,खुद आफीसर बन गये हो पर सुधरोगे काहे??ई हल्दी वाला दूध पी के नीचे आ जाओ जल्दी।।
राज ने हँस के अपनी अम्मा को देखा और कुर्ता डाल दूध पीकर वो नीचे हॉल में चला आया।।
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उसके नीचे आते ही नेता जी ने उठ कर उससे हाथ मिलाया और एक एक कर अपने साथ आये अपने सारे बंधु बांधवों का उससे परिचय कराने लगे, उसके बाद उन्होनें राज के पिता की तरफ हाथ जोड़ दिये__
" शर्मा जी,आपके राजकुमार हमारे पूरे परिवार को बहुत पसंद हैं,,दो भाइयों में इकलौती कन्या है हमारी,बड़े लाड़ प्यार में पली है . हमें हमेशा से ही संस्कारी घर द्वार की चाह थी,वर्ना नेता और राजनीतिज्ञों के एक से बढ़ कर एक रिश्ते आ रहे थे पर हमें आपके से घर की ही तलाश थी,बहुत पहले किसी शादी में आपके राजकुमार को देखे थे,तभी से हमें गौरी के लिये पसंद आ गये थे,फिर अभी जब दामाद बाबू हमसे मिलने आये तब पता चला की राजकुमार तो अधिकारी भी बन गये हैं,तब हम सोचे अब देर करना ठीक नही है नेता जी!!
शर्मा जी आप आज्ञा दें तो हम बरीक्षा संगे संग करे देते हैं,उसके बाद आराम से पत्रा वत्रा दिखा के तिलक और फेरों का मुहूर्त निकलवा लेंगे।
हमारी गौरी का फोटो आप सब देख ही चुके हैं, बहन जी तो चतुर्वेदी के यहाँ की शादी में गौरी से मिल भी चुकी हैं ।।"
राज के बाजू वाली कुर्सी में बैठी सुशीला ने तुरंत हाँ में सर हिला दिया,तभी नेता जी की श्रीमती जी ने एक तस्वीर सुशीला के हाथ में पकड़ा दी जिसे उन्होनें मुस्कुराते हुए राज के हाथ में रख दी, राज इन सब बातों से चकित अपनी अम्मा को देखने लगा।
अम्मा ने उसे मुस्कुरा के देखा और अपने आंचल से उसे ढांप कर उसके पीछे खड़ी हो गयी,,नेता जी की बहन के पति ,
जो पेशे से सचिवालय मे सेक्रेटरी थे ने अपनी पंडिताई का परिचय देते हुए मंत्रोच्चार प्रारम्भ कर दिया__
नेता जी के बड़े बेटे ने खड़े होकर सबसे पहले कुंकुम का तिलक राज के माथे खींचा और एक एक कर कीमती सुसज्जित थालों को उसकी गोद मे रखना शुरु कर दिया।
राज के दायीं और खड़ी रूपा सारे थाल उसकी गोद से लेकर अपने किनारे रखती चली गयी।।
युवराज के फोन पर तब तक प्रिंस और प्रेम भी वहाँ पहुंच चुके थे, दोनो हतप्रभ राज को और राज उन्हें देख रहा था।।
बारी बारी से वधु पक्ष से सभी सम्मानित पुरूष सदस्यों ने कुछ ना कुछ राज के हाथों पर रख दिया,अंत में वधु की माँ राज के सामने चली आयी।
लाल रेशमी साड़ी में लिपटी नेता जी की धर्मपत्नी स्वयं बहुत सुंदर थी,उन्हें देख कर ही उनकी कन्या के ओजस्वी रूप का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता था,,आगे बढ कर उन्होनें एक चार तोले की मोटी सी चेन राज के गले में डाल दी और राज की अम्मा के आगे हाथ जोड़ दिये__" बहन जी वैसे तो हमारे में औरतें बरीक्षा में आती नहीं पर हम इन सब दकियानूसी बातों को नही मानते,, आपका लड़का खरा सोना है,अब हमने गले में चेन डाल इसे हमेशा हमेशा के लिये अपना कर लिया है,,ध्यान रखियेगा हमारे कुंवर जी का।।"
सुशीला ने भी हँस कर दोनों हाथ जोड़ दिये।।
ये सारा कार्यक्रम ऐसी जल्दबाजी में हुआ कि राज को ,
अम्मा बाऊजी या युवराज भैया से बात करने का कोई मौका ही नही मिल पाया,इसके बाद खा पीकर देर रात सभी मेहमान एक एक कर चले गये पर रूपा के माता पिता और उसके दोनो भाई उस रात वही रूक गये।।
सभी का सोने का प्रबंध अलग अलग कमरों में करने पर भी रूपा के भाईयों के लिये कोई व्यवस्था बनती ना देख सुशीला ने उन दोनों का बिस्तर भी राज के कमरे में ही लगवा दिया।।
इस सारे फसाद में आधी रात बीत गयी और राज को अम्मा से कुछ भी कहने का मौका नही मिल पाया।।रात मे कमरे में भाभी के भाईयों की उपस्थिति के कारण राज प्रिया से कोई बात नही कर पाया ,,प्रिया बार बार फोन करेगी और बात करने की असमर्थता उसे समझानी मुश्किल होगी यह सोच कर राज ने फोन ही बन्द कर दिया और सो गया।।
क्रमशः
उसी दिन शाम को प्रिंस को आईसीयू से मेडिकल वार्ड में भर्ती कर दिया गया प्रिंस की हालत में पहले से सुधार होने लग गया था,, उन सभी का सारा दिन प्रिंस के साथ ही अस्पताल में बीत जाता प्रिंस को बोलने में अभी भी तकलीफ थी लेकिन इशारों में अपनी बात समझा पा रहा था।। मेडिकल वार्ड में शिफ्ट करने के बाद राज ने प्रिंस का हाथ पकड़कर उसे नाहर और भैया वाली सारी बात बता दी,, प्रिंस ने अपने हाथ से राज के हाथ को थपथपा कर उसे आश्वस्त कर दिया कि राज ने जो भी किया है वह सही है और इस बात से प्रिंस बिल्कुल भी दुखी नहीं है।।
लेकिन उन कागजों पर साइन करने के बाद भी जाने क्यों राज का मन नहीं मान रहा था।।
उस शाम फ्लैट में वापस आने के बाद जब युवराज भैया, राज और प्रेम हॉल में बैठे इसी केस के बारे में कुछ बात कर
रहे थे तभी प्रिया रसोई से बाहर आई
" युवराज भैया हमें एक आईडिया आया है"
" हो गया बंटाधार "बोलकर प्रेम दूसरे कमरे में चला गया।।
प्रेम की बात पर ध्यान ना देकर प्रिया ने युवराज भैया और राज से कहना शुरू किया
" देखिए भैया यह सारा फसाद इसी बात का है ना कि उस अंजानी जमीन को प्रिंस ने बेचा अगर हम उस जमीन का सच में कोई मालिक दिखा दें ,और यह साबित कर दें कि उस जमीन का कोई मालिक है जिससे प्रिंस ने उस जमीन को खरीदा था तब तो यह केस वही का वही खत्म हो जाता है,है ना?"
"हाँ बात तो तुम सही कह रहीं प्रिया, लेकिन ऐसे किसी को भी मालिक नहीं दिखा सकते।।"
युवराज भैया की इस बात पर प्रिया ने तुनक कर कहा" तो यह वकील किस दिन काम आएंगे अगर नाहर यह साबित नहीं कर पाएगा,तो हमारे पास दिल्ली का एक और बहुत बड़ा वकील है आप कहें तो हम उनसे बात करें।"
राज ने प्रिया की ओर देखा तो प्रिया ने राज से कहा "सिद्धार्थ सर के पिता जी वह भी तो दिल्ली में ही वकालत की प्रैक्टिस करते हैं हम सिद्धार्थ से बात करके उनके पिताजी से कहते हैं आपका केस लेने के लिए।।"
" कोई जरूरत नहीं है नाहर संभाल लेगा।" राज ने रूखा ,
सा जवाब दिया और वहाँ से उठ कर चला गया।।
3 दिन बाद प्रिंस की अस्पताल से छुट्टी हो गई और उसे लेकर सारे लोग घर वापस आ गये।।
अभी तक युवराज ने सारी बातों को दबा छुपा कर रखा हुआ था राज के ऑफिस में पुणे की कॉन्फ्रेंस के बाद उसकी छुट्टियों का आवेदन भेज दिया गया था वापस आकर उसे ज्वाइन करने से पहले अपने केस को रफा-दफा करना था।।
आखिर नियत तिथि पर, युवराज राज प्रेम प्रिंस नाहर सभी कलेक्ट्रेट ऑफिस में पटवारी के साथ-साथ उस जमीन से जुड़े सारे कागजों खसरे और नक्शे को लेकर उपस्थित हो गए।।
मौजूदा खसरे की ऑनलाइन जांच की गई सभी अफसरों के सामने हर दिशा से देखने के बाद पटवारी ने उस जमीन के बाबत सवाल करना शुरू किया3 Underscore इतना सिखाने पढ़ाने पर भी अंत समय में राज से झूठ नहीं कहा गया और उसने वहां सभी के सामने यह मान लिया कि उससे बहुत बड़ी चूक हो गई उसने सारे कागजातों पर बिना पढ़े ही दस्तखत कर दिये।।
चूंकि ज़मीन पे उस वक्त तक किसी ने मालिकाना हक के लिये वाद दायर नही किया था इसलिये राज और प्रिंस के ऊपर कोई भी कड़ी कार्यवाही ना कर उन्हे अपने पक्ष में वाद साबित करने का एक और मौका दिया गया,और एक हफ्ते का समय दे दिया गया।।
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वहाँ से बिना युवराज से नज़र मिलाए ही राज प्रेम के साथ निकल गया,उसने प्रिया को फ़ोन कर बड़े हनुमान मन्दिर बुला लिया।।
वहाँ साथ साथ दर्शन कर दोनो कुछ देर के लिये घाट पर चले गये,प्रिंस और प्रेम वहाँ से घर के लिये निकल गये।।
तालाब की सीढ़ियों पर बैठे बैठे राज ने दिन भर की सारी बात बन्सी को बता दी,बन्सी ने मुस्कुराते हुए राज को देखा और अपना पर्स खोल कुछ पेन जैसा निकाला__
" ये क्या है प्रिया ।"
" काजल है ,इधर आओ ज़रा !! हमारे पास अपना चेहरा लाओ।"
" कैसी बेशर्म हो गयी हो आजकल ,खुले आम किस करना चाहती हो,,छी . बन्सी को चिढा के राज हंसने लगा
" हवा में मत उड़िये पण्डित जी हम ऐसा कुछ नही करने वाले,,हम बस ये काजल का टीका आपको लगाना चाहते हैं,जिससे हमारे राज को किसी की नज़र ना लगे।"
" हम कोई छोटे बच्चे हैं,जो हमे काला टीका लगाओगी।।"
" छोटे बच्चे तो नही हो ,पर प्यारे बहुत हो,हम नही चाहते तुम्हे किसी की नज़र लगे।"
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प्रिया ने एक हाथ से राज का चेहरा जबर्दस्ती पकड़ा और दूसरे हाथ से सामने के बालों को थोड़ा पीछे कर राज के माथे पर टीका लगा दिया।।
राज ने प्रिया का हाथ झटक कर अपना चेहरा हटा लिया__" क्या बद्तमीज़ी है यार,,अम्मा का बोलेंगी देख कर, ये कौन नैकी अम्मा आ गयी तुम्हारी।"
" तो बता देना हमारे बारे में, पण्डित जी।"
" अब ये क्या नया राग है तुम्हारा पण्डित जी!! सीधे सीधे नाम लो ना।"
" नही अब हम राज नही बोलेंगे,,कल को बच्चे होंगे तो अच्छा लगेगा क्या बच्चो के सामने उनके पापा का हम नाम लें ।।"
" ओह्हओ!! अभी शादी हुई नही ,तुम बच्चो तक पहुंच गयी,,बड़ी जल्दी है तुम्हें ।।"
" जल्दी कैसे ना होगी!! अरे याद आया राज,हम 15 दिन की छुट्टी लेकर आये थे जिसमे 6 दिन तो खतम हो गये,अब इन बचे दिनों में हमारी शादी नही तो कम से कम सगाई तो हो ही जाये।"
" हम्म आज बाऊजी और युवराज भैया से बात करते हैं ।।"
दोनो अपनी बातों में खोये थे कि तभी कुछ पांच छै लड़के ,
ज़ोर ज़ोर से बात करते उसी तरफ चले आये और राज और प्रिया को देख उन लोगों की सीढियों के पास ही आकर खड़े हो बात करने लगे।।
"अरे गुड्डा भैया जी ई तो अपने राज भैया बैठे हैं।"
"का बोले कहां बैठे हैं?? हमें तो नजर नहीं आ रहे!! हां हां तुम तो सही बोले,, यह तो राज भैया बैठे हैं और किसके साथ बैठे हैं अरे यह तो प्रिया है! है ना,कैसी हो प्रिया??"
राज ने उन लोगों को देखा तो प्रिया का हाथ पकड़े वहाँ से जाने के लिये मुड़ने लगा।।
" अरे कहां चल दिए राज बाबू हम अभी आए और तुम अभी चल दिए।।"
" गुड्डा!! हमें तुमसे कोई बात नही करनी,,देखो जो झगड़ा फसाद था सब पुरानी बात थी,बचपना था,तुम्हारा भी और हमारा भी ,तो अब मिट्टी डालो उन सब बातों में।।क्या रखा है पुरानी बातों में ।।
राज के ऐसे बोलते ही गुड्डा राज के सामने हाथ जोड़ के खड़ा हो गया।।
" सही कहे गुरुदेव!! हम भी भूल जाना चाहते है, पर वो क्या है ना,तुम्हारा थप्पड़ अभी भी कान में गूंजता रहता है पर एक ही कान में,दूसरे से तो सुनाई ही देना बन्द हो गया था ना,उसका का करें,उसके लिये कोई उपाय बता दो।।"
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" अरे काहे इत्ता खींच रहे यार बात को,,,छोड़ भी दो ,अच्छा हमें मारना चाहते हो तो मार लो,अगर इसी से तुम्हारे कलेजे को ठंडक पड़ती है तो यही कर लो।प्रिया तुम जाओ।"
राज की बात पर प्रिया ने उसे घूर के देखा और गुड्डा की तरफ मुड़ गयी__
" काहे गुड्डा भूल गये हो क्या कि तुम राज से बात कर रहे हो??एक ही थप्पड़ में बहरे हो गये थे .
तुम्हे क्या लग रहा ,तुम छै हो और वो अकेला तो तुम जीत जाओगे ,अरे गधे हम उसके साथ है इसलिये इतना तमीज़ से तुमसे बात कर रहा ,समझे वर्ना अभी तुम्हे तुम्हारी नानी याद दिला देगा।।
" का बात है डाकू हसीना, बोलो ना अपने राज बाबू को ,की तुम्हारा हिस्सा बांटा कर ले हमारे साथ,हम सारा थप्पड़ वप्पड़ भूल जायेंगे .
गुड्डा की बात, पूरी होने के पहले ही उसके चेहरे पे एक घूंसा पड़ गया,,उसके बाद तो ताबड़तोड़ जो जो सामने आता गया राज ने सबकी लातों से घून्सो से जो धुनाई की कि उनमें से कोई वहाँ से उठ कर भागने की हालत में भी नही बचा।। पर सबसे बुरी हालत गुड्डा की ही करने के बाद जब राज प्रिया का हाथ पकड़ वहाँ से निकलने लगा तब गुड्डा ने अपने दोनों हाथों से राज का एक पैर पकड़ लिया,
राज ने पैर झटक कर छुड़ाने की कोशिश करी तब गुड्डा राज ,
को देख ज़ोर से हंसने लगा, राज अपना पैर छुड़ा कर चला गया__" यही तो हम चाहते थे राज बाबू।"
राज और प्रिया वहाँ से निकले ही थे कि राज के घर से फोन आ गया__ " हाँ अम्मा आ रहे,,घर ही आ रहें हैं ।"
सारे रास्ते दोनो चुपचाप बैठे रहे,,राज बुलेट चलाते हुए अपनी सोच में गुम था,और पीछे बैठी प्रिया अपनी सोच में ।
प्रिया को उसके घर उतार कर राज जाने को हुआ __" सुनो इतना मूड मत ऑफ़ करो,,भूल जाओ ना गुड्डा और उसके लड़कों को,,उनके आने के पहले इतनी प्यारी शाम थी ,उसे याद रखो बस!!"
राज मुस्कुरा के अपनी बुलेट मोड़ कर घर के लिये निकल गया।।
घर पहुंचते ही उसने देखा उसके घर के बाहर तीन चार बड़ी बड़ी गाडियाँ खड़ी थी,अपनी गाड़ी खड़ी कर अन्दर जाते ही युवराज ने आगे बढ़ कर हँसते हुए राज के हाथों को थाम कर उसे सबके सामने ले आया__" नेता जी,यही है हमारा छोटा भाई!! बहुत बहुत गर्व है हमें अपने भाई पर।।
हॉल में युवराज भैय्या और बाऊजी के अलावा रूपा भाभी के पिता जी उनके मौसा जी,भाभी के दोनो बड़े भाई,उनकी मौसी, नेता जी अपनी श्रीमती जी और दोनो लड़कों के साथ मौजूद थे।।
उन सभी को नमस्ते कर राज भीतर चला गया__
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" कहाँ रह गया था लल्ला,इत्ती अबेर कर दी,और ये क्या लग गया माथे पे ,दिखा ज़रा।।
बाहर खचाखच भरे हॉल में इतने लोगों को जो नही दिखा एक माँ की आंखों ने तुरंत ढूँढ लिया__
" अरे कुछ नही अम्मा,हल्की सी चोट है।।"
" कहाँ हल्की है,,दोनों भौंहो के बीच ऐसा सीधा कटा है,लग रहा शिव जी का तीसरा नेत्र बन गया है तेरे माथे पे," कहते हुए सुशीला ने ज़रा सी हल्दी राज की चोट पर लगा दी।।
" जा बेटा जल्दी से हाथ मुहँ धोकर कपड़े बदल कर आ जा,,मेहमान बैठे हैं नीचे।।
बिल्कुल ही बिना मन के राज अपने कमरे में चला गया,हाथ मुहँ धोकर निकला ही था कि अम्मा हाथ में दूध का गिलास थामे ऊपर चली आयी__
उसके बिस्तर पर उन्होने कुर्ता निकाल रख छोड़ा था__" अम्मा ये कुर्ता काहे निकाला,रात में हम लोवर टी शर्ट ही तो पहनते हैं,जानती हो फिर भी ।।"
"पहुना लोगन के सामने ई घर का कपड़ा में जाओगे, इत्ता बड़ा आदमी के लड़िका हो,बड़े भाई का भी नाम है,खुद आफीसर बन गये हो पर सुधरोगे काहे??ई हल्दी वाला दूध पी के नीचे आ जाओ जल्दी।।
राज ने हँस के अपनी अम्मा को देखा और कुर्ता डाल दूध पीकर वो नीचे हॉल में चला आया।।
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उसके नीचे आते ही नेता जी ने उठ कर उससे हाथ मिलाया और एक एक कर अपने साथ आये अपने सारे बंधु बांधवों का उससे परिचय कराने लगे, उसके बाद उन्होनें राज के पिता की तरफ हाथ जोड़ दिये__
" शर्मा जी,आपके राजकुमार हमारे पूरे परिवार को बहुत पसंद हैं,,दो भाइयों में इकलौती कन्या है हमारी,बड़े लाड़ प्यार में पली है . हमें हमेशा से ही संस्कारी घर द्वार की चाह थी,वर्ना नेता और राजनीतिज्ञों के एक से बढ़ कर एक रिश्ते आ रहे थे पर हमें आपके से घर की ही तलाश थी,बहुत पहले किसी शादी में आपके राजकुमार को देखे थे,तभी से हमें गौरी के लिये पसंद आ गये थे,फिर अभी जब दामाद बाबू हमसे मिलने आये तब पता चला की राजकुमार तो अधिकारी भी बन गये हैं,तब हम सोचे अब देर करना ठीक नही है नेता जी!!
शर्मा जी आप आज्ञा दें तो हम बरीक्षा संगे संग करे देते हैं,उसके बाद आराम से पत्रा वत्रा दिखा के तिलक और फेरों का मुहूर्त निकलवा लेंगे।
हमारी गौरी का फोटो आप सब देख ही चुके हैं, बहन जी तो चतुर्वेदी के यहाँ की शादी में गौरी से मिल भी चुकी हैं ।।"
राज के बाजू वाली कुर्सी में बैठी सुशीला ने तुरंत हाँ में सर हिला दिया,तभी नेता जी की श्रीमती जी ने एक तस्वीर सुशीला के हाथ में पकड़ा दी जिसे उन्होनें मुस्कुराते हुए राज के हाथ में रख दी, राज इन सब बातों से चकित अपनी अम्मा को देखने लगा।
अम्मा ने उसे मुस्कुरा के देखा और अपने आंचल से उसे ढांप कर उसके पीछे खड़ी हो गयी,,नेता जी की बहन के पति ,
जो पेशे से सचिवालय मे सेक्रेटरी थे ने अपनी पंडिताई का परिचय देते हुए मंत्रोच्चार प्रारम्भ कर दिया__
नेता जी के बड़े बेटे ने खड़े होकर सबसे पहले कुंकुम का तिलक राज के माथे खींचा और एक एक कर कीमती सुसज्जित थालों को उसकी गोद मे रखना शुरु कर दिया।
राज के दायीं और खड़ी रूपा सारे थाल उसकी गोद से लेकर अपने किनारे रखती चली गयी।।
युवराज के फोन पर तब तक प्रिंस और प्रेम भी वहाँ पहुंच चुके थे, दोनो हतप्रभ राज को और राज उन्हें देख रहा था।।
बारी बारी से वधु पक्ष से सभी सम्मानित पुरूष सदस्यों ने कुछ ना कुछ राज के हाथों पर रख दिया,अंत में वधु की माँ राज के सामने चली आयी।
लाल रेशमी साड़ी में लिपटी नेता जी की धर्मपत्नी स्वयं बहुत सुंदर थी,उन्हें देख कर ही उनकी कन्या के ओजस्वी रूप का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता था,,आगे बढ कर उन्होनें एक चार तोले की मोटी सी चेन राज के गले में डाल दी और राज की अम्मा के आगे हाथ जोड़ दिये__" बहन जी वैसे तो हमारे में औरतें बरीक्षा में आती नहीं पर हम इन सब दकियानूसी बातों को नही मानते,, आपका लड़का खरा सोना है,अब हमने गले में चेन डाल इसे हमेशा हमेशा के लिये अपना कर लिया है,,ध्यान रखियेगा हमारे कुंवर जी का।।"
सुशीला ने भी हँस कर दोनों हाथ जोड़ दिये।।
ये सारा कार्यक्रम ऐसी जल्दबाजी में हुआ कि राज को ,
अम्मा बाऊजी या युवराज भैया से बात करने का कोई मौका ही नही मिल पाया,इसके बाद खा पीकर देर रात सभी मेहमान एक एक कर चले गये पर रूपा के माता पिता और उसके दोनो भाई उस रात वही रूक गये।।
सभी का सोने का प्रबंध अलग अलग कमरों में करने पर भी रूपा के भाईयों के लिये कोई व्यवस्था बनती ना देख सुशीला ने उन दोनों का बिस्तर भी राज के कमरे में ही लगवा दिया।।
इस सारे फसाद में आधी रात बीत गयी और राज को अम्मा से कुछ भी कहने का मौका नही मिल पाया।।रात मे कमरे में भाभी के भाईयों की उपस्थिति के कारण राज प्रिया से कोई बात नही कर पाया ,,प्रिया बार बार फोन करेगी और बात करने की असमर्थता उसे समझानी मुश्किल होगी यह सोच कर राज ने फोन ही बन्द कर दिया और सो गया।।
क्रमशः