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एंथोनी के माता-पिता के नये बंगले में क्रिसमस की अजीमोश्शान दावत का इन्तजाम था।
“हल्लो, ममा।” — एंथोनी अपनी मां से बोला — “मैरी क्रिसमस।”
“तू आ गया, बेटा!” — मां उसे गले लगाकर उसका माथा चूमती बोली।
“मैरी क्रिसमस, पापा।”
“मैरी क्रिसमस, बेटा, मैरी क्रिसमस।” — उसका बाप बोला।
मेहमान उसके पहुंचने से पहले ही आने शुरू हो चुके थे। उनमें से अधिकतर खंडाला के क्रिश्चयन समाज के गणमान्य व्यक्ति थे। एंथोनी सूरत से सबको पहचानता था लेकिन भरपूर कोशिश के बावजूद नाम किसी का याद नहीं रख पाता था। नाम तो वह उस कर्नल का भी याद नहीं रख पाया था जिसने पिछली बार उससे उसके काम-काज के बारे में सवाल किया था और जो उस वक्त वहां मौजूद था।
नाम याद रखना जरूरी भी कहां था! वह जानता था कि सबको बढ़िया मुफ्त के माल का चस्का वहां लेकर आता था। लोग उसके बाप की बढ़िया विस्की पीते थे, बढ़िया खाना खाते थे और फिर वहीं या रास्ते में या घर जाकर उल्टियां करते थे और पार्टी में अगले बुलावे का इन्तजार करते थे।
“हाउ आर यू, टोनी? मैरी क्रिसमस।”
“क्या हाल है, बेटा? मैरी क्रिसमस।”
धीरे-धीरे बंगले का विशाल हाल मेहमानों से भरता जा रहा था।
वहां आकर एंथोनी हमेशा बोर होता था लेकिन एक बात से उसे हमेशा खुशी होती थी कि वहां उसके बाप का रुतबा बना हुआ था। लोग झूठ-मूठ ही सही लेकिन उसके साथ सम्मान से पेश आते थे। वहीं आकर उसे महसूस होता था कि पैसे से रुतबा और सम्मान भी खरीदा जा सकता था।
वह और ज्यादा बोर हुआ तो जाकर बाथरूम में बैठ गया और वहां स्मैक का कश लगाने लगा।
समैक में बिगड़ा मूड सुधारने की भी अदूभुत शक्ति थी — उसने मन ही मन सोचा।
सिगरेट खत्म हुआ तो वह फिर मेहमानों में आ मिला। बस थोड़ी देर की सजा और थी। आज के बाद वह अपने मां-बाप को समझा देना चाहता था कि क्योंकि वह अपना आवास मुम्बई से बहुत दूर ले जा रहा था इसलिए अब उसका पहले की तरह बार-बार खंडाला आना मुमकिन नहीं हो पाने वाला था।
क्रिसमस की रौनक से बेखबर थका मांदा हलकान लल्लू मन-मन के कदम रखता घर वापिस लौटा।
वह धीरे-धीरे अपनी चाल की नीमअन्धेरी सीढ़ियां चढ़ने लगा।
वह अपनी मंजिल की आखिरी सीढ़ी पर पहुंचा तो एकाएक ठिठक गया।
सीढ़ियों के दहाने पर उसके सामने गुलफाम अली खड़ा था।
“गुलफाम!” — लल्लू के मुंह से निकला — “तू...”
“ऊपर चल।” — गुलफाम धीरे से बोला।
“ऊपर कहां?”
“छत पर।”
“वहां क्यों?”
“ताकि तेरी मां” — वह एक कदम आगे बढ़कर उसकी पसलियों में रिवॉल्वर सटाता बोला — “अपनी ही खोली के सामने अपने बेटे का खून बिखरा न देखे।”
“क्-क्या?”
“सोच ले। मेरे कू क्या फर्क पड़ेला है! अपुन तेरे को इदर भी शूट कर सकता है बरोबर।”
“तू मेरी जान क्यों लेना चाहता है?”
गुलफाम हंसा। एक बेहद क्रूर हंसी।
“ऊपर चलेंगा या अपना प्रोग्राम इदर ही फिनिश कराना मांगता है?”
“म-मैं ऊपर चलता हूं।”
“शाबाश!”
लल्लू ऊपर जाने वाली सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।
गुलफाम उसके ऐन पीछे था। उसकी पसलियों में रिवॉल्वर की नाल वह अभी भी सटाये था।
चारमंजिला चाल की सीढ़ियों के ऊपर के सिरे पर एक टीन का झूलता दरवाजा था जो कि छत पर खुलता था।
लल्लू ने दरवाजे को धक्का देकर खोला लेकिन उसका पल्ला न छोड़ा। वह दरवाजे के बाहर निकला तो उसने पल्ले को पूरी शक्ति से झुला कर छोड़ा। पल्ला भड़ाक से पीछे आते गुलफाम के थोबड़े से टकराया।
लल्लू छत पर भागा।
छत बहुत लम्बी थी और उस पर दायें से बायें लगी कई रस्सियों पर सूखते कपड़े झूल रहे थे। उन कपड़ों से उलझता, गिरता पड़ता, कूदता फांदता लल्लू भाग रहा था।
गुलफाम तब तक सम्भल चुका था और उसके पीछे लपक रहा था।
“छत पर कहां तक भागेगा, लल्लू!” — वह बोला — “रुक जा और मेरे पसन्द के तरीके से मर। मेरे कू गोली चलाने पर मजबूर न कर। मेरे कू तेरा गला काटने दे। तू भी चुपचाप मरेगा, अपुन को भी यूं तेरा मरना सूट करेगा।”
लल्लू भागता हुआ छत के सिरे पर पहुंचा।
उससे आगे अगली चाल थी। बीच में सिर्फ चार फुट की खाली जगह थी जिस में दोनों इमारतों के पानी के पाइप और परनाले वगैरह लगे हुए थे। लल्लू उन छतों को बचपन से फांदता आ रहा था, ऊपर से उसकी टांगें खूब लम्बी थीं।
उसने छलांग लगायी।
परली छत पर पहुंच कर वह ठिठका और वापिस घूमा।
उसने देखा गुलफाम ने अब अपना उस्तुरा भी निकाल लिया था। वह उस्तुरे के फल को हवा में लहरा रहा था और शैतान की तरह हंस रहा था।
लल्लू घूम कर फिर भागा।
गुलफाम ने उसके पीछे छलांग लगायी, बिना इस बात की तरफ ध्यान दिए लगायी कि लल्लू को बचपन से उन छतों को फांदने का तजुर्बा था और वह कद में उससे कहीं ज्यादा लम्बा था।
वह छत न फांद सका।
उसके पांव परली छत की मुंडेर से टकराये। एक क्षण के लिए उसका जिस्म मुंडेर पर कोई पैंतालीस अंश का कोण बनाता तिरछा हुआ फिर नीचे को गिरा। उसके दोनों हाथ हवा को थामने की कोशिश में अपने सामने फैले, उसका शरीर नीचे को गिरा और फिर तकदीर से ही उसके दोनों हाथ परली छत की मुंडेर पर पड़ गये।
उसने अपने आपको मुंडेर के सहारे सड़क से चार मंजिल ऊपर लटकता पाया तो उसके प्राण कांप गये।
“लल्लू!” — उसके आर्तनाद किया — “लल्लू!”
लल्लू ठिठका, घूमा और मुंडेर के करीब पहुंचा।
उसने देखा, उस्तुरा और रिवॉल्वर दोनों गुलफाम के हाथ से छूट चुके थे। उस्तुरा कहीं दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन रिवॉल्वर छत पर मुंडेर के पास पड़ी थी। गुलफाम बड़ी कठिनाई से, बड़ी नाजुक स्थिति में मुंडेर को थामे था। मुंडेर किसी भी क्षण उसकी पकड़ से छूट सकती थी।
“लल्लू!” — वह फरियाद करता बोला — “लल्लू, मेरी मदद कर। मेरे कू बचा।”
“क्यों?” — लल्लू बोला।
“लल्लू, प्लीज। प्लीज, मेरे कू बचा ले। मेरे कू पकड़ कर ऊपर खींच ले वर्ना...”
“वर्ना क्या होगा?”
“वर्ना मैं गिरकर मर जाऊंगा। लल्लू, मैं मरना नहीं चाहता।”
“इतना बड़ा मवाली होकर, इतना बड़ा सूरमा होकर, मौत से डरता है?”
“हां। हां।” — वह लगभग रोता बोला — “लल्लू, मेरे कू बचा ले। मैं मरना नहीं चाहता।”
“तू मरना नहीं चाहता।” — लल्लू बोला — “जैसे खुर्शीद नहीं मरना चाहती थी। जैसे वीरू तारदेव नहीं मरना चाहता था। जैसे रामचन्द्र नागप्पा नहीं मरना चाहता था। जैसे विलियम फ्रांसिस नहीं मरना चाहता था। वैसे ही तू नहीं मरना चाहता न, गुलफाम अली!”
“मैं मजबूर था, लल्लू।” — गुलफाम छटपटाता बोला, उसकी उंगलियों की पकड़ मुंडेर पर से छूटी जा रही थी — “अपुन हमेशा वही किया जो टोनी बोला।”
“सबके गले तूने काटे? टोनी के कहने पर?”
“हां।”
“क्यों?”
“बताता हूं। पहले मेरे कू ऊपर खींच।”
“नहीं। पहले बता। विलियम को क्यों मारा तूने?”
“क्योंकि टोनी मोनिका से मोहब्बत करेला था पण उसने विलियम से शादी बना ली। मोनिका को अपना बनाने की टोनी के पास विलियम के कत्ल के अलावा और तरकीब नहीं थी। अक्खे तीन साल तड़पा वो मोनिका के लिए। फिर उसके कत्ल से ही उसे मोनिका हासिल हुई। कत्ल का शक उस पर न हो इस वास्ते वह जानबूझ कर छोटा क्राइम करके, अष्टेकर पर हाथ उठा के जेल में बन्द हो गया।”
“और उस दौरान तूने विलियम का गला काट दिया!”
“टोनी की खातिर। टोनी की खातिर।”
“नागप्पा को क्यों मारा?”
“टोनी नींद में बड़बड़ाता है। वो जेल में भी बड़बड़ाता था। उधर जेल में बन्द नागप्पा का लंगड़ा भाई टोनी की बड़बड़ाहट में सब सुनेला था कि उसने कैसे मोनिका की खातिर अपुन से अपने जिगरी दोस्त विलियम का कत्ल करवाया। वो साला लंगड़ा सब कुछ अपने भाई को बता कर छोड़ा। नागप्पा नशे की गोलियों के चक्कर में पुलिस के फंदे में आने कू था। पकड़ा जाता तो वो साला बाकी सब कुछ भी बक के देता। इसलिए टोनी की खातिर अपुन हस्पताल में जाकर उसको भी खल्लास किया। अपुन उसकी खोली में एक उस्तुरा भी छुपा के रखेला था ताकि पुलिस समझे कि विलियम का गला नागप्पा का काम था।” — फिर वह लल्लू के बिना पूछे ही बोला — “वीरू तारदेव का इस्टोरी तो तेरे कू मालूम ही है। जो काम तेरे कू करना था, वो अपुन को करना पड़ेला था।”
“खुर्शीद!” — लल्लू भर्राए स्वर में बोला — “खुर्शीद ने तेरा क्या बिगाड़ा था जो...”
“अभी नहीं बिगाड़ा था। आगे बिगाड़ सकती थी। तू भी आगे बिगाड़ सकता था। क्योंकि तू हमारा साथ छोड़ रहा था और स्ट्रेट लाइफ जीना मांगता था। तू खुर्शीद से शादी बनाता तो अपनी बीवी से कुछ किदर छुपाता! टोनी बोला, सेफ्टी का वास्ते तुम दोनों को साइलेंट करना मांगता था।”
“जब मैंने जेल के प्रेशर में जुबान नहीं खोली तो बाद में खामखाह क्यों खोलता?”
“मेरे कू नेई मालूम पण टोनी तुम दोनों को साइलेंट करना मांगता था। लल्लू, अब मेरे कू बचा।”
“माल किधर है?”
“टोनी के फ्लैट पर।”
“टोनी के फ्लैट पर कहां?”
“वहां ड्राइंगरूम में एक सजावटी फायरप्लेस है जिसके आगे चिमनी से आने वाली हवा रोकने के वास्ते एक टीन की चादर फिट होयला है। उदर ही एक बहुत नन्हा सा बटन है जो बहुत गौर से देखने पर दिखता है। उस बटन को दबाने से चादर एक बाजू हो जाती है। माल उसके पीछू पड़ेला है।”
“हूं।”
“लल्लू, खुदा के वास्ते अब मेरे कू थाम।”
“मैं थामूं या तेरा खुदा थामे?”
“इस वक्त तू ही मेरा खुदा है, लल्लू।”
लल्लू ने नीचे झुककर उसका एक हाथ थामा। उसके उस मजबूत हाथ का सहारा मिलते ही गुलफाम ने अपनी सुन्न होती हुई दूसरे हाथ की उंगलियां मुंडेर पर से हटा लीं।
लल्लू ने उसका दूसरा हाथ भी थामा और उसे धीरे-धीरे ऊपर उठाने लगा।
इतना दुर्दान्त हत्यारा, इतना खतरनाक मवाली, उस वक्त उसे एकदम भारहीन लग रहा था।
लल्लू ने धीरे-धीरे अधर में लटकते उसके शरीर को इतना ऊंचा उठा लिया कि उसके पांव लगभग मुंडेर को छूने लगे।
तभी लल्लू के मानसपटल पर खुर्शीद का मुस्कुराता चेहरा उभरा।
‘भेजा फिरेला है साले किचू का।’ — वह जैसे उसके कान में बोली।
लल्लू ने अपने दोनों हाथों की पकड़ ढीली कर दी।
गुलफाम उसकी आंखों के सामने से गायब हो गया।
नीचे अन्धेरे में कहीं उसकी एक चीख गूंजी, फिर एक धम्म की आवाज हुई और फिर सन्नाटा।
कितनी ही देर लल्लू एक विशालकाय प्रेत की तरह मुंडेर के करीब खड़ा रहा और खुर्शीद को याद करता रहा।
मोनिका मंत्रमुग्ध होकर अपनी सास की बातें सुन रही थी।
रह-रहकर उसके जेहन पर अष्टेकर का बद्सूरत चेहरा उभर आता था।
यह उसके लिए एक नयी बात थी कि इतने बद्सूरत चेहरे के पीछे इतना खूबसूरत दिल छुपा हो सकता था।
तभी एकाएक फ्लैट की कालबैल बजी, साथ ही जोर से फ्लैट का दरवाजा भड़भड़ाया गया।
उसने जाकर दरवाजा खोला तो उसे एक तरफ धकेलता लल्लू बगूले की तरह फ्लैट में घुस आया। उसके बाल बिखरे हुए थे, आंखों में दीवानगी की झलक थी और हाथ में वही रिवॉल्वर थी जिससे थोड़ी देर पहले गुलफाम अली उसे शूट करने को आमादा था।
“कहां है?” — लल्लू विक्षिप्तों की तरह बोला — “कहां है?”
“यह क्या बद्तमीजी है” — मोनिका गुस्से से बोली — “कौन कहां है?”
जवाब देने की जगह लल्लू रिवॉल्वर ताने सारे फ्लैट में घूम गया।
एंथोनी कहीं नहीं था।
मार्था आतंकित भाव से कभी लल्लू की विकराल सूरत को तो कभी उसके हाथ में थमी खतरनाक रिवॉल्वर तो देख रही थी।
“कहां है वो?” — लल्लू फिर बोला।
“हजारे!” — मोनिका दांत पीसती बोली — “अगर मेरा बच्चा डर गया तो मै तेरा खून पी जाऊंगी। अगर तू टोनी के बारे में पूछ रहा है तो वो यहां नहीं है।”
“मुझे दिखाई दे रहा है लेकिन वो है कहां?”
“अपने मां-बाप से मिलने खंडाला गया हुआ है।”
“खंडाला!”
“तू उसे क्यों ढ़ूंढ़ रहा है? तेरे हाथ में रिवॉल्वर क्यों है? क्या चाहता है तू?”
“मैं उसका भेजा उड़ा देना चाहता हूं।”
“उसने तेरा क्या बिगाड़ा है?”
“उसने मेरा क्या, तेरा भी बिगाड़ा है।”
“मेरा! मेरा क्या बिगाड़ा है?”
“उसने तुझे विधवा बनाया है ताकि तू उसे हासिल हो सके।”
“क्या बकता है?”
“सब किया-धरा टोनी का है। विलियम समेत वह चार खूनों के लिए जिम्मेदार है।”
“विलियम समेत! विलियम के खून से उसका क्या मतलब? तब तो वो जेल में था!”
“तेरे तो धोखा देने के वास्ते जान बूझकर जेल में था ताकि तू उस पर विलियम के खून का शक न कर सके। खून गुलफाम ने किया लेकिन उसके कहने पर किया।”
“तू झूठ बोलता है।”
“मैं सब कुछ गुलफाम की जुबानी सुन कर आया हूं। उसने वो सब मुझे उस वक्त बताया था जब उसके सिर पर मौत खड़ी थी। उस घड़ी वो झूठ बोलने वाली हालत में नहीं था।”
“क्या बताया था?”
गुलफाम से सुना एक-एक शब्द लल्लू ने दोहरा दिया।
“टोनी ने मुझे बर्बाद कर दिया।” — अन्त तक पहुंचने तक लल्लू रोने लगा — “जिसको मैंने अपना उस्ताद माना, जिसको मैंने भगवान समझकर पूजा, उसी ने मेरी दुनिया उजाड़ दी। अब जब तक मैं टोनी का खून नहीं कर दूंगा, मुझे चैन नहीं मिलेगा।”
“उसके गन्दे खून से तुझे हाथ नहीं रंगने पड़ेंगे।” — एकाएक मोनिका बर्फ से सर्द स्वर में बोली।
“मतलब?” — लल्लू बोला।
मोनिका ने उत्तर न दिया। वह दृढ़ कदमों से चलती फायरप्लेस तक पहुंची। उसने वहां से सजावटी लट्ठे हटाकर एक ओर फेंके और खुफिया बटन दबाया।
टीन की चादर निशब्द अपने स्थान से हट गयी।
वहां नोटों का अम्बार लगा हुआ था और कई हथियार पड़े थे।
“इस माल में मेरा भी हिस्सा है।” — लल्लू बोला।
“तू सब ले जा।” — मोनिका बोली।
सौ-सौ के नोटों की लल्लू ने सिर्फ उतनी गड्डियां उठायीं जितनी कि उसकी जेबों में समा गयीं।
मोनिका ने वहां से सिर्फ एक चमचम करती हुई शॉटगन उठायी। वह शॉटगन टोनी का बहुत पसन्दीदा हथियार था। वह जब तब उसको निकाल कर बैठ जाता था और चमकाने लगता था।
उसने शॉटगन को खोलकर देखा, उसे भरी हुई पाया तो उसे यथापूर्व बन्द कर दिया।
फायरप्लेस को खुला छोड़कर वह उसके पास से हटी।
“मोनिका।” — मार्था आतंकित भाव से बोली — “तू क्या करने वाली है?”
“कुछ नहीं, ममा” — वह सहज भाव से बोली — “सिर्फ एक जरूरी काम।”
फिर वह टोनी की राइटिंग टेबल के करीब पहुंची। उसके एक दराज में से उसने टोनी की वह डायरी निकाली जिसमे से उसने टोनी के लिए नरेश माने का टेलीफोन नम्बर देखा था। उसने उसके पन्ने पलटने आरम्भ किए।
एक स्थान पर उसे टोनी के बाप का नाम, उसका खंडाला का नया पता और टेलीफोन नम्बर लिखा मिल गया।
“ममा” — फिर वह मार्था से बोली — “मिकी का खयाल रखना।”
“बेटी, तू कहां जा रही है?” — मार्था ने फरियाद की — “तू क्या...”
“खंडाला। खंडाला जा रही हूं मैं। अपने पति के हत्यारे का खून पीने।”
फिर वह शॉटगन सम्भाले बगूले की तरह वहां से बाहर निकल गयी।
लल्लू कुछ क्षण बुत बना पीछे खड़ा रहा, फिर मोनिका के पीछे भागा।
उसके नीचे पहुंचने से पहले मोनिका कार पर सवार हो चुकी थी। उसके देखते-देखते कार यूं सड़क पर भागी जैसे तोप से गोला छूटा हो।
“हल्लो, ममा।” — एंथोनी अपनी मां से बोला — “मैरी क्रिसमस।”
“तू आ गया, बेटा!” — मां उसे गले लगाकर उसका माथा चूमती बोली।
“मैरी क्रिसमस, पापा।”
“मैरी क्रिसमस, बेटा, मैरी क्रिसमस।” — उसका बाप बोला।
मेहमान उसके पहुंचने से पहले ही आने शुरू हो चुके थे। उनमें से अधिकतर खंडाला के क्रिश्चयन समाज के गणमान्य व्यक्ति थे। एंथोनी सूरत से सबको पहचानता था लेकिन भरपूर कोशिश के बावजूद नाम किसी का याद नहीं रख पाता था। नाम तो वह उस कर्नल का भी याद नहीं रख पाया था जिसने पिछली बार उससे उसके काम-काज के बारे में सवाल किया था और जो उस वक्त वहां मौजूद था।
नाम याद रखना जरूरी भी कहां था! वह जानता था कि सबको बढ़िया मुफ्त के माल का चस्का वहां लेकर आता था। लोग उसके बाप की बढ़िया विस्की पीते थे, बढ़िया खाना खाते थे और फिर वहीं या रास्ते में या घर जाकर उल्टियां करते थे और पार्टी में अगले बुलावे का इन्तजार करते थे।
“हाउ आर यू, टोनी? मैरी क्रिसमस।”
“क्या हाल है, बेटा? मैरी क्रिसमस।”
धीरे-धीरे बंगले का विशाल हाल मेहमानों से भरता जा रहा था।
वहां आकर एंथोनी हमेशा बोर होता था लेकिन एक बात से उसे हमेशा खुशी होती थी कि वहां उसके बाप का रुतबा बना हुआ था। लोग झूठ-मूठ ही सही लेकिन उसके साथ सम्मान से पेश आते थे। वहीं आकर उसे महसूस होता था कि पैसे से रुतबा और सम्मान भी खरीदा जा सकता था।
वह और ज्यादा बोर हुआ तो जाकर बाथरूम में बैठ गया और वहां स्मैक का कश लगाने लगा।
समैक में बिगड़ा मूड सुधारने की भी अदूभुत शक्ति थी — उसने मन ही मन सोचा।
सिगरेट खत्म हुआ तो वह फिर मेहमानों में आ मिला। बस थोड़ी देर की सजा और थी। आज के बाद वह अपने मां-बाप को समझा देना चाहता था कि क्योंकि वह अपना आवास मुम्बई से बहुत दूर ले जा रहा था इसलिए अब उसका पहले की तरह बार-बार खंडाला आना मुमकिन नहीं हो पाने वाला था।
क्रिसमस की रौनक से बेखबर थका मांदा हलकान लल्लू मन-मन के कदम रखता घर वापिस लौटा।
वह धीरे-धीरे अपनी चाल की नीमअन्धेरी सीढ़ियां चढ़ने लगा।
वह अपनी मंजिल की आखिरी सीढ़ी पर पहुंचा तो एकाएक ठिठक गया।
सीढ़ियों के दहाने पर उसके सामने गुलफाम अली खड़ा था।
“गुलफाम!” — लल्लू के मुंह से निकला — “तू...”
“ऊपर चल।” — गुलफाम धीरे से बोला।
“ऊपर कहां?”
“छत पर।”
“वहां क्यों?”
“ताकि तेरी मां” — वह एक कदम आगे बढ़कर उसकी पसलियों में रिवॉल्वर सटाता बोला — “अपनी ही खोली के सामने अपने बेटे का खून बिखरा न देखे।”
“क्-क्या?”
“सोच ले। मेरे कू क्या फर्क पड़ेला है! अपुन तेरे को इदर भी शूट कर सकता है बरोबर।”
“तू मेरी जान क्यों लेना चाहता है?”
गुलफाम हंसा। एक बेहद क्रूर हंसी।
“ऊपर चलेंगा या अपना प्रोग्राम इदर ही फिनिश कराना मांगता है?”
“म-मैं ऊपर चलता हूं।”
“शाबाश!”
लल्लू ऊपर जाने वाली सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।
गुलफाम उसके ऐन पीछे था। उसकी पसलियों में रिवॉल्वर की नाल वह अभी भी सटाये था।
चारमंजिला चाल की सीढ़ियों के ऊपर के सिरे पर एक टीन का झूलता दरवाजा था जो कि छत पर खुलता था।
लल्लू ने दरवाजे को धक्का देकर खोला लेकिन उसका पल्ला न छोड़ा। वह दरवाजे के बाहर निकला तो उसने पल्ले को पूरी शक्ति से झुला कर छोड़ा। पल्ला भड़ाक से पीछे आते गुलफाम के थोबड़े से टकराया।
लल्लू छत पर भागा।
छत बहुत लम्बी थी और उस पर दायें से बायें लगी कई रस्सियों पर सूखते कपड़े झूल रहे थे। उन कपड़ों से उलझता, गिरता पड़ता, कूदता फांदता लल्लू भाग रहा था।
गुलफाम तब तक सम्भल चुका था और उसके पीछे लपक रहा था।
“छत पर कहां तक भागेगा, लल्लू!” — वह बोला — “रुक जा और मेरे पसन्द के तरीके से मर। मेरे कू गोली चलाने पर मजबूर न कर। मेरे कू तेरा गला काटने दे। तू भी चुपचाप मरेगा, अपुन को भी यूं तेरा मरना सूट करेगा।”
लल्लू भागता हुआ छत के सिरे पर पहुंचा।
उससे आगे अगली चाल थी। बीच में सिर्फ चार फुट की खाली जगह थी जिस में दोनों इमारतों के पानी के पाइप और परनाले वगैरह लगे हुए थे। लल्लू उन छतों को बचपन से फांदता आ रहा था, ऊपर से उसकी टांगें खूब लम्बी थीं।
उसने छलांग लगायी।
परली छत पर पहुंच कर वह ठिठका और वापिस घूमा।
उसने देखा गुलफाम ने अब अपना उस्तुरा भी निकाल लिया था। वह उस्तुरे के फल को हवा में लहरा रहा था और शैतान की तरह हंस रहा था।
लल्लू घूम कर फिर भागा।
गुलफाम ने उसके पीछे छलांग लगायी, बिना इस बात की तरफ ध्यान दिए लगायी कि लल्लू को बचपन से उन छतों को फांदने का तजुर्बा था और वह कद में उससे कहीं ज्यादा लम्बा था।
वह छत न फांद सका।
उसके पांव परली छत की मुंडेर से टकराये। एक क्षण के लिए उसका जिस्म मुंडेर पर कोई पैंतालीस अंश का कोण बनाता तिरछा हुआ फिर नीचे को गिरा। उसके दोनों हाथ हवा को थामने की कोशिश में अपने सामने फैले, उसका शरीर नीचे को गिरा और फिर तकदीर से ही उसके दोनों हाथ परली छत की मुंडेर पर पड़ गये।
उसने अपने आपको मुंडेर के सहारे सड़क से चार मंजिल ऊपर लटकता पाया तो उसके प्राण कांप गये।
“लल्लू!” — उसके आर्तनाद किया — “लल्लू!”
लल्लू ठिठका, घूमा और मुंडेर के करीब पहुंचा।
उसने देखा, उस्तुरा और रिवॉल्वर दोनों गुलफाम के हाथ से छूट चुके थे। उस्तुरा कहीं दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन रिवॉल्वर छत पर मुंडेर के पास पड़ी थी। गुलफाम बड़ी कठिनाई से, बड़ी नाजुक स्थिति में मुंडेर को थामे था। मुंडेर किसी भी क्षण उसकी पकड़ से छूट सकती थी।
“लल्लू!” — वह फरियाद करता बोला — “लल्लू, मेरी मदद कर। मेरे कू बचा।”
“क्यों?” — लल्लू बोला।
“लल्लू, प्लीज। प्लीज, मेरे कू बचा ले। मेरे कू पकड़ कर ऊपर खींच ले वर्ना...”
“वर्ना क्या होगा?”
“वर्ना मैं गिरकर मर जाऊंगा। लल्लू, मैं मरना नहीं चाहता।”
“इतना बड़ा मवाली होकर, इतना बड़ा सूरमा होकर, मौत से डरता है?”
“हां। हां।” — वह लगभग रोता बोला — “लल्लू, मेरे कू बचा ले। मैं मरना नहीं चाहता।”
“तू मरना नहीं चाहता।” — लल्लू बोला — “जैसे खुर्शीद नहीं मरना चाहती थी। जैसे वीरू तारदेव नहीं मरना चाहता था। जैसे रामचन्द्र नागप्पा नहीं मरना चाहता था। जैसे विलियम फ्रांसिस नहीं मरना चाहता था। वैसे ही तू नहीं मरना चाहता न, गुलफाम अली!”
“मैं मजबूर था, लल्लू।” — गुलफाम छटपटाता बोला, उसकी उंगलियों की पकड़ मुंडेर पर से छूटी जा रही थी — “अपुन हमेशा वही किया जो टोनी बोला।”
“सबके गले तूने काटे? टोनी के कहने पर?”
“हां।”
“क्यों?”
“बताता हूं। पहले मेरे कू ऊपर खींच।”
“नहीं। पहले बता। विलियम को क्यों मारा तूने?”
“क्योंकि टोनी मोनिका से मोहब्बत करेला था पण उसने विलियम से शादी बना ली। मोनिका को अपना बनाने की टोनी के पास विलियम के कत्ल के अलावा और तरकीब नहीं थी। अक्खे तीन साल तड़पा वो मोनिका के लिए। फिर उसके कत्ल से ही उसे मोनिका हासिल हुई। कत्ल का शक उस पर न हो इस वास्ते वह जानबूझ कर छोटा क्राइम करके, अष्टेकर पर हाथ उठा के जेल में बन्द हो गया।”
“और उस दौरान तूने विलियम का गला काट दिया!”
“टोनी की खातिर। टोनी की खातिर।”
“नागप्पा को क्यों मारा?”
“टोनी नींद में बड़बड़ाता है। वो जेल में भी बड़बड़ाता था। उधर जेल में बन्द नागप्पा का लंगड़ा भाई टोनी की बड़बड़ाहट में सब सुनेला था कि उसने कैसे मोनिका की खातिर अपुन से अपने जिगरी दोस्त विलियम का कत्ल करवाया। वो साला लंगड़ा सब कुछ अपने भाई को बता कर छोड़ा। नागप्पा नशे की गोलियों के चक्कर में पुलिस के फंदे में आने कू था। पकड़ा जाता तो वो साला बाकी सब कुछ भी बक के देता। इसलिए टोनी की खातिर अपुन हस्पताल में जाकर उसको भी खल्लास किया। अपुन उसकी खोली में एक उस्तुरा भी छुपा के रखेला था ताकि पुलिस समझे कि विलियम का गला नागप्पा का काम था।” — फिर वह लल्लू के बिना पूछे ही बोला — “वीरू तारदेव का इस्टोरी तो तेरे कू मालूम ही है। जो काम तेरे कू करना था, वो अपुन को करना पड़ेला था।”
“खुर्शीद!” — लल्लू भर्राए स्वर में बोला — “खुर्शीद ने तेरा क्या बिगाड़ा था जो...”
“अभी नहीं बिगाड़ा था। आगे बिगाड़ सकती थी। तू भी आगे बिगाड़ सकता था। क्योंकि तू हमारा साथ छोड़ रहा था और स्ट्रेट लाइफ जीना मांगता था। तू खुर्शीद से शादी बनाता तो अपनी बीवी से कुछ किदर छुपाता! टोनी बोला, सेफ्टी का वास्ते तुम दोनों को साइलेंट करना मांगता था।”
“जब मैंने जेल के प्रेशर में जुबान नहीं खोली तो बाद में खामखाह क्यों खोलता?”
“मेरे कू नेई मालूम पण टोनी तुम दोनों को साइलेंट करना मांगता था। लल्लू, अब मेरे कू बचा।”
“माल किधर है?”
“टोनी के फ्लैट पर।”
“टोनी के फ्लैट पर कहां?”
“वहां ड्राइंगरूम में एक सजावटी फायरप्लेस है जिसके आगे चिमनी से आने वाली हवा रोकने के वास्ते एक टीन की चादर फिट होयला है। उदर ही एक बहुत नन्हा सा बटन है जो बहुत गौर से देखने पर दिखता है। उस बटन को दबाने से चादर एक बाजू हो जाती है। माल उसके पीछू पड़ेला है।”
“हूं।”
“लल्लू, खुदा के वास्ते अब मेरे कू थाम।”
“मैं थामूं या तेरा खुदा थामे?”
“इस वक्त तू ही मेरा खुदा है, लल्लू।”
लल्लू ने नीचे झुककर उसका एक हाथ थामा। उसके उस मजबूत हाथ का सहारा मिलते ही गुलफाम ने अपनी सुन्न होती हुई दूसरे हाथ की उंगलियां मुंडेर पर से हटा लीं।
लल्लू ने उसका दूसरा हाथ भी थामा और उसे धीरे-धीरे ऊपर उठाने लगा।
इतना दुर्दान्त हत्यारा, इतना खतरनाक मवाली, उस वक्त उसे एकदम भारहीन लग रहा था।
लल्लू ने धीरे-धीरे अधर में लटकते उसके शरीर को इतना ऊंचा उठा लिया कि उसके पांव लगभग मुंडेर को छूने लगे।
तभी लल्लू के मानसपटल पर खुर्शीद का मुस्कुराता चेहरा उभरा।
‘भेजा फिरेला है साले किचू का।’ — वह जैसे उसके कान में बोली।
लल्लू ने अपने दोनों हाथों की पकड़ ढीली कर दी।
गुलफाम उसकी आंखों के सामने से गायब हो गया।
नीचे अन्धेरे में कहीं उसकी एक चीख गूंजी, फिर एक धम्म की आवाज हुई और फिर सन्नाटा।
कितनी ही देर लल्लू एक विशालकाय प्रेत की तरह मुंडेर के करीब खड़ा रहा और खुर्शीद को याद करता रहा।
मोनिका मंत्रमुग्ध होकर अपनी सास की बातें सुन रही थी।
रह-रहकर उसके जेहन पर अष्टेकर का बद्सूरत चेहरा उभर आता था।
यह उसके लिए एक नयी बात थी कि इतने बद्सूरत चेहरे के पीछे इतना खूबसूरत दिल छुपा हो सकता था।
तभी एकाएक फ्लैट की कालबैल बजी, साथ ही जोर से फ्लैट का दरवाजा भड़भड़ाया गया।
उसने जाकर दरवाजा खोला तो उसे एक तरफ धकेलता लल्लू बगूले की तरह फ्लैट में घुस आया। उसके बाल बिखरे हुए थे, आंखों में दीवानगी की झलक थी और हाथ में वही रिवॉल्वर थी जिससे थोड़ी देर पहले गुलफाम अली उसे शूट करने को आमादा था।
“कहां है?” — लल्लू विक्षिप्तों की तरह बोला — “कहां है?”
“यह क्या बद्तमीजी है” — मोनिका गुस्से से बोली — “कौन कहां है?”
जवाब देने की जगह लल्लू रिवॉल्वर ताने सारे फ्लैट में घूम गया।
एंथोनी कहीं नहीं था।
मार्था आतंकित भाव से कभी लल्लू की विकराल सूरत को तो कभी उसके हाथ में थमी खतरनाक रिवॉल्वर तो देख रही थी।
“कहां है वो?” — लल्लू फिर बोला।
“हजारे!” — मोनिका दांत पीसती बोली — “अगर मेरा बच्चा डर गया तो मै तेरा खून पी जाऊंगी। अगर तू टोनी के बारे में पूछ रहा है तो वो यहां नहीं है।”
“मुझे दिखाई दे रहा है लेकिन वो है कहां?”
“अपने मां-बाप से मिलने खंडाला गया हुआ है।”
“खंडाला!”
“तू उसे क्यों ढ़ूंढ़ रहा है? तेरे हाथ में रिवॉल्वर क्यों है? क्या चाहता है तू?”
“मैं उसका भेजा उड़ा देना चाहता हूं।”
“उसने तेरा क्या बिगाड़ा है?”
“उसने मेरा क्या, तेरा भी बिगाड़ा है।”
“मेरा! मेरा क्या बिगाड़ा है?”
“उसने तुझे विधवा बनाया है ताकि तू उसे हासिल हो सके।”
“क्या बकता है?”
“सब किया-धरा टोनी का है। विलियम समेत वह चार खूनों के लिए जिम्मेदार है।”
“विलियम समेत! विलियम के खून से उसका क्या मतलब? तब तो वो जेल में था!”
“तेरे तो धोखा देने के वास्ते जान बूझकर जेल में था ताकि तू उस पर विलियम के खून का शक न कर सके। खून गुलफाम ने किया लेकिन उसके कहने पर किया।”
“तू झूठ बोलता है।”
“मैं सब कुछ गुलफाम की जुबानी सुन कर आया हूं। उसने वो सब मुझे उस वक्त बताया था जब उसके सिर पर मौत खड़ी थी। उस घड़ी वो झूठ बोलने वाली हालत में नहीं था।”
“क्या बताया था?”
गुलफाम से सुना एक-एक शब्द लल्लू ने दोहरा दिया।
“टोनी ने मुझे बर्बाद कर दिया।” — अन्त तक पहुंचने तक लल्लू रोने लगा — “जिसको मैंने अपना उस्ताद माना, जिसको मैंने भगवान समझकर पूजा, उसी ने मेरी दुनिया उजाड़ दी। अब जब तक मैं टोनी का खून नहीं कर दूंगा, मुझे चैन नहीं मिलेगा।”
“उसके गन्दे खून से तुझे हाथ नहीं रंगने पड़ेंगे।” — एकाएक मोनिका बर्फ से सर्द स्वर में बोली।
“मतलब?” — लल्लू बोला।
मोनिका ने उत्तर न दिया। वह दृढ़ कदमों से चलती फायरप्लेस तक पहुंची। उसने वहां से सजावटी लट्ठे हटाकर एक ओर फेंके और खुफिया बटन दबाया।
टीन की चादर निशब्द अपने स्थान से हट गयी।
वहां नोटों का अम्बार लगा हुआ था और कई हथियार पड़े थे।
“इस माल में मेरा भी हिस्सा है।” — लल्लू बोला।
“तू सब ले जा।” — मोनिका बोली।
सौ-सौ के नोटों की लल्लू ने सिर्फ उतनी गड्डियां उठायीं जितनी कि उसकी जेबों में समा गयीं।
मोनिका ने वहां से सिर्फ एक चमचम करती हुई शॉटगन उठायी। वह शॉटगन टोनी का बहुत पसन्दीदा हथियार था। वह जब तब उसको निकाल कर बैठ जाता था और चमकाने लगता था।
उसने शॉटगन को खोलकर देखा, उसे भरी हुई पाया तो उसे यथापूर्व बन्द कर दिया।
फायरप्लेस को खुला छोड़कर वह उसके पास से हटी।
“मोनिका।” — मार्था आतंकित भाव से बोली — “तू क्या करने वाली है?”
“कुछ नहीं, ममा” — वह सहज भाव से बोली — “सिर्फ एक जरूरी काम।”
फिर वह टोनी की राइटिंग टेबल के करीब पहुंची। उसके एक दराज में से उसने टोनी की वह डायरी निकाली जिसमे से उसने टोनी के लिए नरेश माने का टेलीफोन नम्बर देखा था। उसने उसके पन्ने पलटने आरम्भ किए।
एक स्थान पर उसे टोनी के बाप का नाम, उसका खंडाला का नया पता और टेलीफोन नम्बर लिखा मिल गया।
“ममा” — फिर वह मार्था से बोली — “मिकी का खयाल रखना।”
“बेटी, तू कहां जा रही है?” — मार्था ने फरियाद की — “तू क्या...”
“खंडाला। खंडाला जा रही हूं मैं। अपने पति के हत्यारे का खून पीने।”
फिर वह शॉटगन सम्भाले बगूले की तरह वहां से बाहर निकल गयी।
लल्लू कुछ क्षण बुत बना पीछे खड़ा रहा, फिर मोनिका के पीछे भागा।
उसके नीचे पहुंचने से पहले मोनिका कार पर सवार हो चुकी थी। उसके देखते-देखते कार यूं सड़क पर भागी जैसे तोप से गोला छूटा हो।