• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Thriller कागज की किश्ती

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
एंथोनी के माता-पिता के नये बंगले में क्रिसमस की अजीमोश्‍शान दावत का इन्तजाम था।

“हल्लो, ममा।” — एंथोनी अपनी मां से बोला — “मैरी क्रिसमस।”

“तू आ गया, बेटा!” — मां उसे गले लगाकर उसका माथा चूमती बोली।

“मैरी क्रिसमस, पापा।”

“मैरी क्रिसमस, बेटा, मैरी क्रिसमस।” — उसका बाप बोला।

मेहमान उसके पहुंचने से पहले ही आने शुरू हो चुके थे। उनमें से अधिकतर खंडाला के क्रिश्‍चयन समाज के गणमान्य व्यक्ति थे। एंथोनी सूरत से सबको पहचानता था लेकिन भरपूर कोशिश के बावजूद नाम किसी का याद नहीं रख पाता था। नाम तो वह उस कर्नल का भी याद नहीं रख पाया था जिसने पिछली बार उससे उसके काम-काज के बारे में सवाल किया था और जो उस वक्त वहां मौजूद था।

नाम याद रखना जरूरी भी कहां था! वह जानता था कि सबको बढ़िया मुफ्त के माल का चस्का वहां लेकर आता था। लोग उसके बाप की बढ़िया विस्की पीते थे, बढ़िया खाना खाते थे और फिर वहीं या रास्ते में या घर जाकर उल्टियां करते थे और पार्टी में अगले बुलावे का इन्तजार करते थे।

“हाउ आर यू, टोनी? मैरी क्रिसमस।”

“क्या हाल है, बेटा? मैरी क्रिसमस।”

धीरे-धीरे बंगले का विशाल हाल मेहमानों से भरता जा रहा था।

वहां आकर एंथोनी हमेशा बोर होता था लेकिन एक बात से उसे हमेशा खुशी होती थी कि वहां उसके बाप का रुतबा बना हुआ था। लोग झूठ-मूठ ही सही लेकिन उसके साथ सम्मान से पेश आते थे। वहीं आकर उसे महसूस होता था कि पैसे से रुतबा और सम्मान भी खरीदा जा सकता था।

वह और ज्यादा बोर हुआ तो जाकर बाथरूम में बैठ गया और वहां स्मैक का कश लगाने लगा।

समैक में बिगड़ा मूड सुधारने की भी अदूभुत शक्ति थी — उसने मन ही मन सोचा।

सिगरेट खत्म हुआ तो वह फिर मेहमानों में आ मिला। बस थोड़ी देर की सजा और थी। आज के बाद वह अपने मां-बाप को समझा देना चाहता था कि क्योंकि वह अपना आवास मुम्बई से बहुत दूर ले जा रहा था इसलिए अब उसका पहले की तरह बार-बार खंडाला आना मुमकिन नहीं हो पाने वाला था।

क्रिसमस की रौनक से बेखबर थका मांदा हलकान लल्लू मन-मन के कदम रखता घर वापिस लौटा।

वह धीरे-धीरे अपनी चाल की नीमअन्धेरी सीढ़ियां चढ़ने लगा।

वह अपनी मंजिल की आखिरी सीढ़ी पर पहुंचा तो एकाएक ठिठक गया।

सीढ़ियों के दहाने पर उसके सामने गुलफाम अली खड़ा था।

“गुलफाम!” — लल्लू के मुंह से निकला — “तू...”

“ऊपर चल।” — गुलफाम धीरे से बोला।

“ऊपर कहां?”

“छत पर।”

“वहां क्यों?”

“ताकि तेरी मां” — वह एक कदम आगे बढ़कर उसकी पसलियों में रिवॉल्वर सटाता बोला — “अपनी ही खोली के सामने अपने बेटे का खून बिखरा न देखे।”

“क्-क्या?”

“सोच ले। मेरे कू क्या फर्क पड़ेला है! अपुन तेरे को इदर भी शूट कर सकता है बरोबर।”

“तू मेरी जान क्यों लेना चाहता है?”

गुलफाम हंसा। एक बेहद क्रूर हंसी।

“ऊपर चलेंगा या अपना प्रोग्राम इदर ही फिनिश कराना मांगता है?”

“म-मैं ऊपर चलता हूं।”

“शाबाश!”

लल्लू ऊपर जाने वाली सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।

गुलफाम उसके ऐन पीछे था। उसकी पसलियों में रिवॉल्वर की नाल वह अभी भी सटाये था।

चारमंजिला चाल की सीढ़ियों के ऊपर के सिरे पर एक टीन का झूलता दरवाजा था जो कि छत पर खुलता था।

लल्लू ने दरवाजे को धक्का देकर खोला लेकिन उसका पल्ला न छोड़ा। वह दरवाजे के बाहर निकला तो उसने पल्ले को पूरी शक्ति से झुला कर छोड़ा। पल्ला भड़ाक से पीछे आते गुलफाम के थोबड़े से टकराया।

लल्लू छत पर भागा।

छत बहुत लम्बी थी और उस पर दायें से बायें लगी कई रस्सियों पर सूखते कपड़े झूल रहे थे। उन कपड़ों से उलझता, गिरता पड़ता, कूदता फांदता लल्लू भाग रहा था।

गुलफाम तब तक सम्भल चुका था और उसके पीछे लपक रहा था।

“छत पर कहां तक भागेगा, लल्लू!” — वह बोला — “रुक जा और मेरे पसन्द के तरीके से मर। मेरे कू गोली चलाने पर मजबूर न कर। मेरे कू तेरा गला काटने दे। तू भी चुपचाप मरेगा, अपुन को भी यूं तेरा मरना सूट करेगा।”

लल्लू भागता हुआ छत के सिरे पर पहुंचा।

उससे आगे अगली चाल थी। बीच में सिर्फ चार फुट की खाली जगह थी जिस में दोनों इमारतों के पानी के पाइप और परनाले वगैरह लगे हुए थे। लल्लू उन छतों को बचपन से फांदता आ रहा था, ऊपर से उसकी टांगें खूब लम्बी थीं।

उसने छलांग लगायी।

परली छत पर पहुंच कर वह ठिठका और वापिस घूमा।

उसने देखा गुलफाम ने अब अपना उस्तुरा भी निकाल लिया था। वह उस्तुरे के फल को हवा में लहरा रहा था और शैतान की तरह हंस रहा था।

लल्लू घूम कर फिर भागा।

गुलफाम ने उसके पीछे छलांग लगायी, बिना इस बात की तरफ ध्यान दिए लगायी कि लल्लू को बचपन से उन छतों को फांदने का तजुर्बा था और वह कद में उससे कहीं ज्यादा लम्बा था।

वह छत न फांद सका।

उसके पांव परली छत की मुंडेर से टकराये। एक क्षण के लिए उसका जिस्म मुंडेर पर कोई पैंतालीस अंश का कोण बनाता तिरछा हुआ फिर नीचे को गिरा। उसके दोनों हाथ हवा को थामने की कोशिश में अपने सामने फैले, उसका शरीर नीचे को गिरा और फिर तकदीर से ही उसके दोनों हाथ परली छत की मुंडेर पर पड़ गये।

उसने अपने आपको मुंडेर के सहारे सड़क से चार मंजिल ऊपर लटकता पाया तो उसके प्राण कांप गये।

“लल्लू!” — उसके आर्तनाद किया — “लल्लू!”

लल्लू ठिठका, घूमा और मुंडेर के करीब पहुंचा।

उसने देखा, उस्तुरा और रिवॉल्वर दोनों गुलफाम के हाथ से छूट चुके थे। उस्तुरा कहीं दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन रिवॉल्वर छत पर मुंडेर के पास पड़ी थी। गुलफाम बड़ी कठिनाई से, बड़ी नाजुक स्थिति में मुंडेर को थामे था। मुंडेर किसी भी क्षण उसकी पकड़ से छूट सकती थी।

“लल्लू!” — वह फरियाद करता बोला — “लल्लू, मेरी मदद कर। मेरे कू बचा।”

“क्यों?” — लल्लू बोला।

“लल्लू, प्लीज। प्लीज, मेरे कू बचा ले। मेरे कू पकड़ कर ऊपर खींच ले वर्ना...”

“वर्ना क्या होगा?”

“वर्ना मैं गिरकर मर जाऊंगा। लल्लू, मैं मरना नहीं चाहता।”

“इतना बड़ा मवाली होकर, इतना बड़ा सूरमा होकर, मौत से डरता है?”

“हां। हां।” — वह लगभग रोता बोला — “लल्लू, मेरे कू बचा ले। मैं मरना नहीं चाहता।”

“तू मरना नहीं चाहता।” — लल्लू बोला — “जैसे खुर्शीद नहीं मरना चाहती थी। जैसे वीरू तारदेव नहीं मरना चाहता था। जैसे रामचन्द्र नागप्पा नहीं मरना चाहता था। जैसे विलियम फ्रांसिस नहीं मरना चाहता था। वैसे ही तू नहीं मरना चाहता न, गुलफाम अली!”

“मैं मजबूर था, लल्लू।” — गुलफाम छटपटाता बोला, उसकी उंगलियों की पकड़ मुंडेर पर से छूटी जा रही थी — “अपुन हमेशा वही किया जो टोनी बोला।”

“सबके गले तूने काटे? टोनी के कहने पर?”

“हां।”

“क्यों?”

“बताता हूं। पहले मेरे कू ऊपर खींच।”

“नहीं। पहले बता। विलियम को क्यों मारा तूने?”

“क्योंकि टोनी मोनिका से मोहब्बत करेला था पण उसने विलियम से शादी बना ली। मोनिका को अपना बनाने की टोनी के पास विलियम के कत्ल के अलावा और तरकीब नहीं थी। अक्खे तीन साल तड़पा वो मोनिका के लिए। फिर उसके कत्ल से ही उसे मोनिका हासिल हुई। कत्ल का शक उस पर न हो इस वास्ते वह जानबूझ कर छोटा क्राइम करके, अष्टेकर पर हाथ उठा के जेल में बन्द हो गया।”

“और उस दौरान तूने विलियम का गला काट दिया!”

“टोनी की खातिर। टोनी की खातिर।”

“नागप्पा को क्यों मारा?”

“टोनी नींद में बड़बड़ाता है। वो जेल में भी बड़बड़ाता था। उधर जेल में बन्द नागप्पा का लंगड़ा भाई टोनी की बड़बड़ाहट में सब सुनेला था कि उसने कैसे मोनिका की खातिर अपुन से अपने जिगरी दोस्त विलियम का कत्ल करवाया। वो साला लंगड़ा सब कुछ अपने भाई को बता कर छोड़ा। नागप्पा नशे की गोलियों के चक्कर में पुलिस के फंदे में आने कू था। पकड़ा जाता तो वो साला बाकी सब कुछ भी बक के देता। इसलिए टोनी की खातिर अपुन हस्पताल में जाकर उसको भी खल्लास किया। अपुन उसकी खोली में एक उस्तुरा भी छुपा के रखेला था ताकि पुलिस समझे कि विलियम का गला नागप्पा का काम था।” — फिर वह लल्लू के बिना पूछे ही बोला — “वीरू तारदेव का इस्टोरी तो तेरे कू मालूम ही है। जो काम तेरे कू करना था, वो अपुन को करना पड़ेला था।”

“खुर्शीद!” — लल्लू भर्राए स्वर में बोला — “खुर्शीद ने तेरा क्या बिगाड़ा था जो...”

“अभी नहीं बिगाड़ा था। आगे बिगाड़ सकती थी। तू भी आगे बिगाड़ सकता था। क्योंकि तू हमारा साथ छोड़ रहा था और स्ट्रेट लाइफ जीना मांगता था। तू खुर्शीद से शादी बनाता तो अपनी बीवी से कुछ किदर छुपाता! टोनी बोला, सेफ्टी का वास्ते तुम दोनों को साइलेंट करना मांगता था।”

“जब मैंने जेल के प्रेशर में जुबान नहीं खोली तो बाद में खामखाह क्यों खोलता?”

“मेरे कू नेई मालूम पण टोनी तुम दोनों को साइलेंट करना मांगता था। लल्लू, अब मेरे कू बचा।”

“माल किधर है?”

“टोनी के फ्लैट पर।”

“टोनी के फ्लैट पर कहां?”

“वहां ड्राइंगरूम में एक सजावटी फायरप्लेस है जिसके आगे चिमनी से आने वाली हवा रोकने के वास्ते एक टीन की चादर फिट होयला है। उदर ही एक बहुत नन्हा सा बटन है जो बहुत गौर से देखने पर दिखता है। उस बटन को दबाने से चादर एक बाजू हो जाती है। माल उसके पीछू पड़ेला है।”

“हूं।”

“लल्लू, खुदा के वास्ते अब मेरे कू थाम।”

“मैं थामूं या तेरा खुदा थामे?”

“इस वक्त तू ही मेरा खुदा है, लल्लू।”

लल्लू ने नीचे झुककर उसका एक हाथ थामा। उसके उस मजबूत हाथ का सहारा मिलते ही गुलफाम ने अपनी सुन्न होती हुई दूसरे हाथ की उंगलियां मुंडेर पर से हटा लीं।

लल्लू ने उसका दूसरा हाथ भी थामा और उसे धीरे-धीरे ऊपर उठाने लगा।

इतना दुर्दान्त हत्यारा, इतना खतरनाक मवाली, उस वक्त उसे एकदम भारहीन लग रहा था।

लल्लू ने धीरे-धीरे अधर में लटकते उसके शरीर को इतना ऊंचा उठा लिया कि उसके पांव लगभग मुंडेर को छूने लगे।

तभी लल्लू के मानसपटल पर खुर्शीद का मुस्कुराता चेहरा उभरा।

‘भेजा फिरेला है साले किचू का।’ — वह जैसे उसके कान में बोली।

लल्लू ने अपने दोनों हाथों की पकड़ ढीली कर दी।

गुलफाम उसकी आंखों के सामने से गायब हो गया।

नीचे अन्धेरे में कहीं उसकी एक चीख गूंजी, फिर एक धम्म की आवाज हुई और फिर सन्नाटा।

कितनी ही देर लल्लू एक विशालकाय प्रेत की तरह मुंडेर के करीब खड़ा रहा और खुर्शीद को याद करता रहा।

मोनिका मंत्रमुग्ध होकर अपनी सास की बातें सुन रही थी।

रह-रहकर उसके जेहन पर अष्टेकर का बद्सूरत चेहरा उभर आता था।

यह उसके लिए एक नयी बात थी कि इतने बद्सूरत चेहरे के पीछे इतना खूबसूरत दिल छुपा हो सकता था।

तभी एकाएक फ्लैट की कालबैल बजी, साथ ही जोर से फ्लैट का दरवाजा भड़भड़ाया गया।

उसने जाकर दरवाजा खोला तो उसे एक तरफ धकेलता लल्लू बगूले की तरह फ्लैट में घुस आया। उसके बाल बिखरे हुए थे, आंखों में दीवानगी की झलक थी और हाथ में वही रिवॉल्वर थी जिससे थोड़ी देर पहले गुलफाम अली उसे शूट करने को आमादा था।

“कहां है?” — लल्लू विक्षिप्तों की तरह बोला — “कहां है?”

“यह क्या बद्तमीजी है” — मोनिका गुस्से से बोली — “कौन कहां है?”

जवाब देने की जगह लल्लू रिवॉल्वर ताने सारे फ्लैट में घूम गया।

एंथोनी कहीं नहीं था।

मार्था आतंकित भाव से कभी लल्लू की विकराल सूरत को तो कभी उसके हाथ में थमी खतरनाक रिवॉल्वर तो देख रही थी।

“कहां है वो?” — लल्लू फिर बोला।

“हजारे!” — मोनिका दांत पीसती बोली — “अगर मेरा बच्चा डर गया तो मै तेरा खून पी जाऊंगी। अगर तू टोनी के बारे में पूछ रहा है तो वो यहां नहीं है।”

“मुझे दिखाई दे रहा है लेकिन वो है कहां?”

“अपने मां-बाप से मिलने खंडाला गया हुआ है।”

“खंडाला!”

“तू उसे क्यों ढ़ूंढ़ रहा है? तेरे हाथ में रिवॉल्वर क्यों है? क्या चाहता है तू?”

“मैं उसका भेजा उड़ा देना चाहता हूं।”

“उसने तेरा क्या बिगाड़ा है?”

“उसने मेरा क्या, तेरा भी बिगाड़ा है।”

“मेरा! मेरा क्या बिगाड़ा है?”

“उसने तुझे विधवा बनाया है ताकि तू उसे हासिल हो सके।”

“क्या बकता है?”

“सब किया-धरा टोनी का है। विलियम समेत वह चार खूनों के लिए जिम्मेदार है।”

“विलियम समेत! विलियम के खून से उसका क्या मतलब? तब तो वो जेल में था!”

“तेरे तो धोखा देने के वास्ते जान बूझकर जेल में था ताकि तू उस पर विलियम के खून का शक न कर सके। खून गुलफाम ने किया लेकिन उसके कहने पर किया।”

“तू झूठ बोलता है।”

“मैं सब कुछ गुलफाम की जुबानी सुन कर आया हूं। उसने वो सब मुझे उस वक्त बताया था जब उसके सिर पर मौत खड़ी थी। उस घड़ी वो झूठ बोलने वाली हालत में नहीं था।”

“क्या बताया था?”

गुलफाम से सुना एक-एक शब्द लल्लू ने दोहरा दिया।

“टोनी ने मुझे बर्बाद कर दिया।” — अन्त तक पहुंचने तक लल्लू रोने लगा — “जिसको मैंने अपना उस्ताद माना, जिसको मैंने भगवान समझकर पूजा, उसी ने मेरी दुनिया उजाड़ दी। अब जब तक मैं टोनी का खून नहीं कर दूंगा, मुझे चैन नहीं मिलेगा।”

“उसके गन्दे खून से तुझे हाथ नहीं रंगने पड़ेंगे।” — एकाएक मोनिका बर्फ से सर्द स्वर में बोली।

“मतलब?” — लल्लू बोला।

मोनिका ने उत्तर न दिया। वह दृढ़ कदमों से चलती फायरप्लेस तक पहुंची। उसने वहां से सजावटी लट्ठे हटाकर एक ओर फेंके और खुफिया बटन दबाया।

टीन की चादर निशब्द अपने स्थान से हट गयी।

वहां नोटों का अम्बार लगा हुआ था और कई हथियार पड़े थे।

“इस माल में मेरा भी हिस्सा है।” — लल्लू बोला।

“तू सब ले जा।” — मोनिका बोली।

सौ-सौ के नोटों की लल्लू ने सिर्फ उतनी गड्डियां उठायीं जितनी कि उसकी जेबों में समा गयीं।

मोनिका ने वहां से सिर्फ एक चमचम करती हुई शॉटगन उठायी। वह शॉटगन टोनी का बहुत पसन्दीदा हथियार था। वह जब तब उसको निकाल कर बैठ जाता था और चमकाने लगता था।

उसने शॉटगन को खोलकर देखा, उसे भरी हुई पाया तो उसे यथापूर्व बन्द कर दिया।

फायरप्लेस को खुला छोड़कर वह उसके पास से हटी।

“मोनिका।” — मार्था आतंकित भाव से बोली — “तू क्या करने वाली है?”

“कुछ नहीं, ममा” — वह सहज भाव से बोली — “सिर्फ एक जरूरी काम।”

फिर वह टोनी की राइटिंग टेबल के करीब पहुंची। उसके एक दराज में से उसने टोनी की वह डायरी निकाली जिसमे से उसने टोनी के लिए नरेश माने का टेलीफोन नम्बर देखा था। उसने उसके पन्ने पलटने आरम्भ किए।

एक स्थान पर उसे टोनी के बाप का नाम, उसका खंडाला का नया पता और टेलीफोन नम्बर लिखा मिल गया।

“ममा” — फिर वह मार्था से बोली — “मिकी का खयाल रखना।”

“बेटी, तू कहां जा रही है?” — मार्था ने फरियाद की — “तू क्या...”

“खंडाला। खंडाला जा रही हूं मैं। अपने पति के हत्यारे का खून पीने।”

फिर वह शॉटगन सम्भाले बगूले की तरह वहां से बाहर निकल गयी।

लल्लू कुछ क्षण बुत बना पीछे खड़ा रहा, फिर मोनिका के पीछे भागा।

उसके नीचे पहुंचने से पहले मोनिका कार पर सवार हो चुकी थी। उसके देखते-देखते कार यूं सड़क पर भागी जैसे तोप से गोला छूटा हो।
 
लल्लू वापिस टोनी के फ्लैट में लौटा।

उसने मेज पर उलटी पड़ी डायरी उठाई। उस पर से खंडाला का पता पढ़ा और फिर डायरी वैसे ही वापिस रखकर मन ही मन वह पता दोहराता वापिस नीचे भागा।

अष्टेकर थाने में बैठा अपने ए.सी.पी. के उस मीमो को पढ़ रहा था जिसमें गोल-मोल शब्दों में अष्टेकर पर नाकारेपन का इलजाम लगाया गया था। इलाके में इतने कत्ल हो रहे थे और उसके बारे में कहा गया था कि वह उन केसों को हल करने के लिए कुछ भी नहीं कर रहा था।

तभी टेलीफोन की घंटी बजी।

घन्टी कुछ ऐसे अप्रत्याशित ढंग से बजी कि वह चिहुंक गया।

उसने हाथ बढ़ाकर फोन उठाया और बोला — “हल्लो।”

जवाब में उसे मार्था की आवाज सुनाई दी तो यह और भी ज्यादा चौंका।

मार्था फोन पर इतनी जल्दी-जल्दी बोल रही थी कि सब शब्द एक-दूसरे में गड्ड-मड्ड हुए जा रहे थे। कुछ टूटे-फूटे शब्दों के अलावा उसके पल्ले कुछ भी न पड़ा। हजारे, मोनिका, शॉटगन, टोनी, खंडाला, गुलफाम, बस यही कुछ सुनाई दिया उसे। जो कुछ वह कह कर हटती थी, उसी को वह फिर दोहराने लगती थी लेकिन उसके पल्ले फिर भी कुछ नहीं पड़ता था।

“मार्था, मार्था” — वह फोन में बोला — “भगवान के लिए हवाई जहाज की रफ्तार से बोलना बन्द कर और धीरे-धीरे बता, क्या हुआ है?”

फिर मार्था ने जो कुछ बताया, उससे उसकी समझ में यह आया कि हजारे हाथ में रिवॉल्वर लेकर टोनी का कत्ल करने उसके फ्लैट पर पहुंचा था। उसे गुलफाम से, जो कि मर चुका था, मालूम हुआ था कि टोनी के कहने पर गुलफाम ने विलियम का कत्ल किया था। वह बात सुनकर मोनिका हाथ में शॉटगन और आंखों में खून लिए खंडाला रवाना हो गयी थी।

खंडाला का पता!

मार्था ने बताया।

अष्टेकर ने रिसीवर क्रेडल पर पटका और मेज से अपनी पीक कैप उठाता बाहर को भागा।

लल्लू ने एक टैक्सी वाले को रोका।

“खंडाला चल।” — वह बोला — “मैं...”

“अरे, माथा फिरेला है!” — टैक्सी वाला झल्लाया — “रात के इस वक्त अपुन खंडाला जायेंगा!”

“जितने पैसे कहेगा दूंगा।”

“बाप, यह लोकल टैक्सी है। शहर के बाहर कैसे जाएंगा?”

“जुर्माना, चालान जो कुछ होगा, मैं दूंगा। मैं” — नोटों से भरी अपनी जेबों को याद करता लल्लू बोला — “टैक्सी की कीमत दूंगा।”

“साला बेवड़ा है।”

टैक्सी ड्राइवर ने इतनी रफ्तार से वहां से टैक्सी भगायी कि उसका सहारा लिए खड़ा लल्लू गिरता-गिरता बचा।

उसने दो-तीन और टैक्सियां रोकीं लेकिन खंडाला का नाम सुनते ही कोई ठीक से उसकी बात तक सुनने को न रुका।

अगली बार जब एक टैक्ली रुकी तो लल्लू पहले उसके भीतर बैठ गया।

“खंडाला चल।” — वह बोला।

“अरे, माथा फिरेला है!” — ड्राइवर झल्लाया — “उतर नीचे।”

लल्लू ने उसे सौ-सौ के नोटों की गड्डी दिखायी।

“बाप” — ड्राइवर बोला — “आज क्रिसमस का दिन है। मेरा बच्चा लोग मेरा इन्तजार कर रयेला है।”

लल्लू ने उसे रिवॉल्वर दिखायी।

“तू मेरे को जबरदस्ती खंडाला ले जाना मांगता है?” — ड्राइवर बोला।

“हां।”

“ठीक है। तू मेरे कू गोली ही मार। अपुन साला वैसे ही जिन्दगी से बहुत दुखी है। अच्छा है, कहानी खत्म हो। चल, चला गोली।”

लल्लू ने असहाय भाव से गरदन हिलाई और रिवॉल्वर वापिस जेब में रख ली।

वह कुछ क्षण सोचता रहा़ फिर टैक्सी ड्राइवर से विपरीत दिशा का दरवाजा खोलकर बाहर निकला। उसने जान-बूझकर दरवाजा पूरा खुला छोड़ दिया।

“बाप, दरवाजा तो बन्द कर।” — ड्राइवर बोला।

“खुद कर ले।” — लल्लू बड़ी रुखाई से बोला और फुटपाथ पर जा खड़ा हुआ।

ड्राइवर टैक्सी से बाहर निकला। वह खुले दरवाजे की तरफ गया तो लल्लू फुर्ती से ड्राइविंग सीट पर जा बैठा।

दरवाजा अभी ड्राइवर के हाथ में ही था कि लल्लू ने टैक्सी दौड़ा दी।

पीछे ड्राइवर हक्का-बक्का सा अपने से दूर होती जा रही अपनी टैक्सी को देखता रहा।

आधी रात होने को थी जब कि स्काच विस्की के नशे में झूमते कोई तीस मेहमान डायनिंग टेबल पर पहुंचे।

उस वक्त टोनी भी स्मैक और विस्की के मिले-जुले नशे की वजह से सातवें आसमान पर था और बार-बार, बिना वजह, बिना जरूरत, अट्टहास कर रहा था। यह देखकर उसे बड़ा आत्मसंतोष प्राप्त होता था कि लोग अट्टहास में उसका साथ देते थे।

नमक का हक अदा करते थे।

होटल से विशेष रूप से बुलाये गए दो वेटर खाना सर्व करने लगे।

तभी एक कार के बाहर बंगले के सामने आकर खड़ी होने की आवाज आई।

साला कोई और मुफ्तखोरा आ गया होगा जिसे आधी रात को याद आया होगा कि फ्रांकोजा के नये बंगले पर क्रिसमस की पार्टी थी।

डोरबैल बजी।

घर के नौकर ने जाकर दरवाजा खोला।

एंथोनी ने अपने स्काच के गिलास पर से सिर उठाया तो वह सन्नाटे में आ गया। वह आंखे फाड़-फाड़कर सामने देखने लगा।

उसे नशा हो गया था या जो कुछ वह देख रहा था, वह हकीकत था!

दरवाजे पर प्रलय की प्रतिमूर्ति बनी मोनिका खड़ी थी। उसके हाथ में उसी की शॉटगन थी जिसे वह बड़ी दृढ़ता से अपने सामने ताने थी।

एंथोनी हड़बड़ा कर उठ खड़ा हुआ।

उसके मां-बाप समेत सारे मेहमान हक्के-बक्के से कभी मोनिका का तो कभी एंथोनी का मुंह देख रहे थे।

हॉल में एकाएक मरघट का सा सन्नाटा छा गया था। यूं लगता था जैसे वक्त ठहर गया था।

“मोनिका!” — एंथोनी हिम्मत करके बोला — “तू यहां!”

“टोनी” — मोनिका कहरभरे स्वर में बोली — “कुत्ते! तूने विलियम का कत्ल करवाया। तेरे कहने पर गुलफाम अली ने मेरे पति का गला काटा। तू है मेरा मुजरिम।”

“मोनिका! होश में आ। देख नहीं रही कहां खड़ी है! क्यों आई यहां?”

“तेरा खून पीने आयी, कमीने।” — शॉटगन अपने सामने ताने वह टोनी की तरफ बढ़ने लगी — “अच्छा है तेरे घर में आज इतने मेहमान मौजूद हैं। अच्छा है तेरी मौत से पहले वो भी तेरी असलियत जान लें। तेरे मेहमान भी और तेरे मां-बाप भी। आज ये मेरी जुबानी सुनेंगे कि इनका मेजबान टोनी फ्रांकोजा असल में क्या बला है! या तू अपनी जुबानी बतायेगा कि तू कितना बड़ा गैंगस्टर है, कितना बड़ा स्मगलर है, कितना बड़ा डकैत है, कितना बड़ा हत्यारा है! खुद बता कि तू कितने खून कर चुका है, कितने बैंक लूट चुका है। खुद बता इन्हें कि जिस दौलत के सदके तेरे मेहमान दावत उड़ा रहे हैं, तेरे मां-बाप ऐश कर रहे हैं, वो तूने कमाई नहीं, वो तूने स्मगलिंग से, बैंक डकैती से, खून-खराबे से लूटी है। तू मुम्बई का सबसे बड़ा मवाली है।”

सबके मुंह खुले के खुले रह गए। सब के नशे हिरण हो गए। सब आतंकित भाव से टोनी का मुंह देखने लगे।

मेहमानों का वह रुख देखकर टोनी के मां-बाप के चेहरों का रंग उड़ गया।

“टोनी” — उसका बाप बोला — “ये... ये... क्या कह रही है। ये...”

“इसकी बकवास मत सुनो।” — एंथोनी दांत पीसता बोला — “यह पागल हो गई है। यह नहीं जानती यह क्या कह रही है!”

“कमीने! मैं ही जानती हूं मैं क्या कह रही हूं। या तू जानता है। तू खूनी है। तूने मुझे विधवा और मेरे बच्चे को अनाथ बनाया। तूने विलियम का खून करवाया। अगर इन्सान का बच्चा है। तो अपनी करतूत को कबूल करने का हौसला दिखा वर्ना लानत है तेरी जात पर और तेरे पैदा करने वालों पर।”

“तू मेरी चीज है।” — एंथोनी सांप की तरह फुंफकारा — “तू मेरी चीज थी और अगर अब मैंने तुझे जिन्दा छोड़ा तो तू आगे भी मेरी चीज रहेगी। टोनी जिस चीज को एक बार पसन्द कर लेता है, वह हमेशा के लिए उसकी हो जाती है। मैंने जब पहली बार तेरे को देखा था तो मैंने तभी तेरे पर अपनी मिल्कियत की मोहर लगा दी थी। विलियम को मैंने सिर्फ थोड़े अरसे के लिए तुझे उधार दिया था। जब मैंने चाहा, मैंने अपना उधार वापिस वसूल लिया।”

“मैं कोई जमीन-जायदाद या भेड़-बकरी नहीं जो...”

“और विलियम सिर्फ इसलिए नहीं मरा क्योंकि उसकी मौत के बिना तू मुझे वापिस नहीं हासिल होने वाली थी बल्कि इसलिए भी मरा क्योंकि वो यारमार निकल रहा था और पुलिस के हाथों की कठपुतली बन रहा था। वह अष्टेकर का इनफार्मर बन रहा था।”

“यह झूठ है।”

“अगर यह झूठ है तो यह क्योंकर हुआ कि जब एक बार मैं, गुलफाम और विलियम तीनों पकड़े गए थे तो अष्टेकर ने उसे तो छोड़ दिया था लेकिन हम दोनों को अन्दर कर दिया था?”

“कमीने, ऐसा इसलिए नहीं हुआ था क्योंकि विलियम पुलिस इनफार्मर बन गया था। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि विलियम अष्टेकर का बेटा था।”

“क्या!”

“विलियम को यह बात नहीं मालूम थी लेकिन यह हकीकत है कि विलियम अष्टेकर का बेटा था। वह बाप का प्यार था जो अष्टेकर जैसे सख्त पुलिस आफिसर को विलियम के साथ नर्मी से पेश आने को मजबूर करता था।”

एंथोनी के नेत्र सिकुड़ गये। अब उसे भी ऐसे कई मौके याद आने लगे जब कि अष्टेकर ने विलियम का लिहाज किया था और विलियम की वजह से उनका भी लिहाज किया था। उसे याद आने लगा कि उनके बचपन से ऐसा होता आ रहा था। जब अष्टेकर महज हवलदार था और रात को उनकी पीठ पर दो-दो डण्डे मार कर उन्हें बेवड़े के अड्डों पर से भगाया करता था, तब भी वह कभी विलियम पर हाथ नहीं उठाता था।

यानी कि उसके गलत समझा था कि विलियम, उसका बचपन का दोस्त, उसका जिगरी दोस्त पुलिस इनफार्मर बनता जा रहा था।

लेकिन मरना तो उसके फिर भी था — एंथोनी ने अपने आप को आश्‍वासन दिया — वह उसकी चीज जो दबाये बैठा था।

उसने एक निगाह मोनिका के हाथ में थमी शॉटगन पर और फिर उसकी कहर बरसाती सूरत पर डाली।

नहीं, नहीं। यह औरत उसका बुरा नहीं कर सकती थी। उस पर हाथ नहीं उठा सकती थी। यह तो उसकी चीज थी। स्मैक के एक सिगरेट की तरह उसके इस्तेमाल की चीज। विस्की के एक पैग की तरह उसके इस्तेमाल की चीज।

विशाल डायनिंग टेबल का घेरा काटती शॉटगन ताने वो अब भी उसकी तरफ बढ़ रही थी।

“क्या तेरे मेहमानों को” — वह कह रही थी — “तेरे मां-बाप को पता है कि तू जेल भी काट चुका है, तू सजायाफ्ता मुजरिम है?”

“मेरा बेटा” — उसकी मां दहशतनाक स्वर में बोली — “सजायाफ्ता मुजरिम!”

“मुम्बई चली जाओ, मिसेज़ फ्रांकोजा” — मोनिका बोली — “और जेल से जाकर पता कर लो कि अभी इसी साल तुम्हारे बेटे ने, तुम्हारे इस शराफत और सदाचार का पुतला बने खड़े बेटे ने, वहां छः महीने की चक्की पीसी या नहीं!”

“जीसस!” — उसकी मां व्यथित स्वर में बोली — “जीसस!”

तभी एकाएक कर्नल दानी अपने करीब से गुजरती मोनिका पर झपट पड़ा। मोनिका उससे जरा ही आगे हुई थी कि उसने उसके शॉटगन वाले हाथ पर हाथ मारा और एंथोनी की ओर तनी हुई शॉटगन का रुख ऊपर छत की ओर कर दिया। शॉटगन से गोली निकली और छत के सहारे लटकते झाड़ से टकराई। शीशे के झाड़ की धज्जियां उड़ गयीं। शीशे के टुकड़े अधिकतर डायनिंग टेबल पर और कुछ मेहमानों पर भी बरसे।

दोबारा गोली चलने से पहले कर्नल दानी ने शॉटगन मोनिका के हाथों से छीन ली।

एंथोनी को कर्नल दानी का नाम तब भी याद नहीं आ रहा था। वह लपक कर उसके पास पहुंचा।

“थैंक्यू।” — वह शॉटगन के लिये हाथ बढ़ाता बोला — “थैंक्यू, फ्रेंड।”

कर्नल दानी ने हिचकिचाते हुए शॉटगन एंथोनी को थमा दी।

एंथोनी ने चारों तरफ निगाह दौड़ायी।
 

Similar threads

S
Replies
14
Views
15
StoryPublisher
S
S
Replies
61
Views
62
StoryPublisher
S
S
Replies
74
Views
75
StoryPublisher
S
S
Replies
108
Views
109
StoryPublisher
S
Back
Top