S
StoryPublisher
Guest
मोनिका घर से मछली खरीदने की नीयत से निकली थी लेकिन मछली खरीदने की जगह वह जाकर समुद्र के किनारे बैठ गयी।
अष्टेकर के आगमन ने उसे बहुत आन्दोलित कर दिया था।
उसने मिकी की तरफ देखा जो कि आते ही रेत में खेलने लग गया था।
वाकई एकदम अपने बाप का डुप्लीकेट लगता था।
उसके जेहन पर तीन साल पहले की उस रात का अक्स उभरा जब वह पहली बार मिकी के बाप से — विलियम से — क्रिसमस बाल में मिली थी। उस क्रिसमस बाल में धारावी का लगभग सारा क्रिश्चियन समुदाय उपस्थित था। बच्चे, बूढ़े, नौजवान, सब। खूब रौनक थी। विलियम अपने दोस्त एंथोनी फ्रांकोजा के साथ था। दोनों खूब पी रहे थे लेकिन विलियम को ज्यादा चढ़ गयी थी। फिर वह नशे में मोनिका के पीछे पड़ गया था, मोनिका पहले उससे रुखाई से पेश आयी थी, फिर उसने उसे डांटा था, थोड़ा-बहुत इंसल्ट भी किया था लेकिन विलियम हतोत्साहित नहीं हुआ था। वहां दर्जनों और विलियम जैसे लड़कों को फौरन हामी भरने वाली लड़कियां मौजूद थीं लेकिन विलियम ने उसका पीछा नहीं छोड़ा था। खुद उसके पीछे विलियम के दोस्त एंथोनी समेत कई लड़के पड़ रहे थे लेकिन उसने किसी को लिफ्ट नहीं दी थी।
फिर आधी रात के करीब एकाएक विलियम उसके सामने आ खड़ा हुआ और नशे में झूमता बोला — “चलो यहां से।”
“कहां?” — मोनिका हड़बड़ाई।
“कहीं भी। यहां से चलो।”
“तुम्हारे साथ?”
“हां।”
“मैं नहीं जाती।”
“तुम नहीं जाओगी तो मैं चला जाऊंगा।”
“अरे जाओ, न जाओ। मेरी बला से।”
“ठीक है। जाता हूं।”
उसने हाथ में थमा विस्की का गिलास जोर से फर्श पर पटका और फर्श को लगभग रौंदता हुआ वहां से विदा हो गया।
वह अविचलित भाव से उसे जाता देखती रही।
थोड़ी देर बाद एंथोनी फ्रांकोजा उसके करीब पहुंचा।
“क्या कह दिया था तुमने मेरे यार को?” — उसने पूछा।
“मैंने तो कुछ भी नहीं कहा था।” — वह बोली।
“चर्च की छत पर जो विशाल क्रॉस लगा हुआ है न, वह उस पर चढ़ कर बैठ गया है। कहता है तभी उतरेगा जब तुम उतरने को कहोगी।”
“क्या!”
“हां। यकीन नहीं तो बाहर चल कर देख लो।”
वह एंथोनी के साथ बाहर आयी।
विलियम इतनी खतरनाक हालत में क्रॉस पर चढ़ा बैठा था कि उसका कलेजा मुंह को आने लगा। क्रॉस टूट सकता था, नशे में होने की वजह से खुद उसकी पकड़ क्रॉस से छूट सकता था और वह सीधा साठ फुट नीचे सड़क पर आकर गिर सकता था।
“नाम क्या है तुम्हारे यार का?” — मोनिका ने पूछा।
“विलियम।” — एंथोनी ने बताया — “विलियम फ्रांसिस।”
“विलियम!” — वह चिल्लाकर बोली — “नीचे उतरो।”
“पहले वादा करो” — बड़ी खतरनाक हालत में क्रॉस के साथ झूलता विलियम बोला — “तुम मेरे साथ चलोगी।”
“अच्छा बाबा, चलूंगी।”
“वादा करो।”
“किया, बाबा।”
“से क्रॉस माई हार्ट एण्ड होप टु डाई।”
“क्रॉस माई हार्ट एण्ड होप टू डाई।”
“मेरा यार टोनी तुम्हारे वादे का गवाह है। ठीक?”
“ठीक।”
तब कहीं जाकर विलियम नीचे उतरा।
उस रोज सारी रात वह विलियम के साथ, उसकी दीवानगी के साथ, मुम्बई की सड़कों पर घूमती रही थी।
सुबह छः बजे वह उसे उसके घर छोड़ने आया था तो तब पहली बार विलियम ने उसका बदन छुआ था, तब उसने उसको अपनी बांहों में लेकर उसके होंठों पर एक चुम्बन जड़ दिया था।
“बस!” — वह बोली — “एक किस हासिल करने की खातिर इतना ड्रामा किया?”
“नहीं।” — वह गम्भीरता से बोला।
“तो?”
“किस वाली को हासिल करने की खातिर।”
“मतलब!”
“मैं आज ही तुमसे शादी कर रहा हूं।”
“क-क्या?”
“मैं ग्यारह बजे आऊंगा। तुम्हें चर्च ले जाने कि लिए। तैयार रहना। ब्राइड्स मेड बनने के लिए अपनी किसी सहेली को बुलाकर रखना। मेरा बैस्टमैन तो टोनी है ही!”
“लेकिन... लेकिन...”
वह चला गया।
मोनिका ने उसे नशे का प्रलाप समझा लेकिन ग्यारह बजे वह दुल्हे की सजधज में एंथोनी के साथ सचमुच आ धमका।
वह तैयार नहीं थी। तैयार होने का कोई मतलब ही नहीं था।
शादी फिर भी उसी रोज हुई। विलियम की जिद उस पर इस कद्र हावी हुई कि इंकार करना अपना भेजा खपाना था।
उसी रात को वह उसे हनीमून के लिए गोवा ले गया।
हनीमून से जब वह वापिस लौटी तो मिकी उसके पेट में था।
तब तक उसे यह मालूम हो चुका था कि उसका यूं आनन-फानन बना पति वास्तव में एक गैंगस्टर था।
लेकिन विलियम ने उससे वादा किया कि वह एक बड़ा हाथ मारेगा और फिर वह न सिर्फ अपना वो नामुराद धन्धा बल्कि वो शहर भी छोड़ देगा और अपनी खूबसूरत बीवी और होने वाले बच्चे के साथ कहीं और जाकर रहेगा।
अगले साल सितम्बर में मिकी पैदा हुआ।
मिकी के दूसरे जन्म दिन वाले दिन विलियम का कत्ल हो गया।
उस दौरान उसका जिगरी दोस्त एंथोनी जेल में था और ऑन ड्यूटी पुलिस अधिकारी पर आक्रमण करने की सजा काट रहा था। विलियम ने उसे हमेशा समझाया था कि अगर कभी उसे कुछ हो जाए तो संकट की घड़ी में वह सिर्फ टोनी के पास जाए। लेकिन संकट की घड़ी जब सचमुच आई तो टोनी जेल में था।
अपने पति के कहे मुताबिक वह जेल में ही टोनी से मिलने गयी।
जेल में से ही टोनी ने ऐसा इन्तजाम किया कि वह उसके जेल से छूटने तक अपने बच्चे के साथ पूरी सुख-सुविधा से उसके फ्लैट में रह सके।
और दो महीने बाद वह जेल से छूटा तो मोनिका ने वहां से चले जाना चाहा लेकिन उसने मोनिका को अपने दिवंगत दोस्त का वास्ता देकर रोके रखा।
आज की तारीख में उसके टोनी के साथ जो ताल्लुकात थे, उस घड़ी तो उसने उनकी कल्पना भी नहीं की थी।
उसके मुंह से एक आह सी निकली।
फिर उसका ध्यान अष्टेकर की तरफ गया।
कैसा आदमी था? मिकी को कितनी अनुरागभरी निगाहों से देखता था। विलियम के कातिल को गिरफ्तार करने के लिए कितनी मेहनत कर रहा था बेचारा। दिन-रात एक किए दे रहा था एक ही केस पर। इन बातों की वजह से मोनिका को अष्टेकर अच्छा लगता था लेकिन पुलिसिया होने की वजह से नफरत के काबिल लगता था। टोनी ने हमेशा उसे यही कहा था कि अष्टेकर का भरोसा करना और सांप का भरोसा करना एक ही बात थी। ऐरे-गैरे की तो बात ही क्या थी, अपनी मुलाजमत में, अपनी लाइन आफ ड्यूटी वह अपने सगे बाप को बख्शने वाला नहीं था।
उसका ध्यान एंथोनी की तरफ गया।
कैसा आदमी था वो!
वह उसके पति का दोस्त था लेकिन अपने दोस्त की बीवी का पति और उसके बच्चे का बाप बनना चाहता था। क्या उसने कभी सोचा था कि जैसे आनन-फानन वह एक बार विधवा हुई थी, वैसे वह दोबारा भी विधवा हो सकती थी? विलियम अपराध की दुनिया को छोड़ने का ख्वाहिशमन्द था लेकिन टोनी का तो अपराध की दुनिया से रिश्ता मांस और नाखून का था। क्या वह उसको अपराध की दुनिया छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकती थी? शायद नहीं। शायद उसकी किस्मत में पति का सुख लिखा ही नहीं था। क्या होगा उसका! क्या होगा मिकी का! विलियम की निशानी का!
“ममा चलो।”
उसने चौंक कर सिर उठाया।
मिकी उसका कन्धा हिला रहा था और अपलक उसे देख रहा था।
ऐन यूं ही विलियम उसकी तरफ देखा करता था।
उसने फिर एक आह भरी और उठ खड़ी हुई।
अष्टेकर के आगमन ने उसे बहुत आन्दोलित कर दिया था।
उसने मिकी की तरफ देखा जो कि आते ही रेत में खेलने लग गया था।
वाकई एकदम अपने बाप का डुप्लीकेट लगता था।
उसके जेहन पर तीन साल पहले की उस रात का अक्स उभरा जब वह पहली बार मिकी के बाप से — विलियम से — क्रिसमस बाल में मिली थी। उस क्रिसमस बाल में धारावी का लगभग सारा क्रिश्चियन समुदाय उपस्थित था। बच्चे, बूढ़े, नौजवान, सब। खूब रौनक थी। विलियम अपने दोस्त एंथोनी फ्रांकोजा के साथ था। दोनों खूब पी रहे थे लेकिन विलियम को ज्यादा चढ़ गयी थी। फिर वह नशे में मोनिका के पीछे पड़ गया था, मोनिका पहले उससे रुखाई से पेश आयी थी, फिर उसने उसे डांटा था, थोड़ा-बहुत इंसल्ट भी किया था लेकिन विलियम हतोत्साहित नहीं हुआ था। वहां दर्जनों और विलियम जैसे लड़कों को फौरन हामी भरने वाली लड़कियां मौजूद थीं लेकिन विलियम ने उसका पीछा नहीं छोड़ा था। खुद उसके पीछे विलियम के दोस्त एंथोनी समेत कई लड़के पड़ रहे थे लेकिन उसने किसी को लिफ्ट नहीं दी थी।
फिर आधी रात के करीब एकाएक विलियम उसके सामने आ खड़ा हुआ और नशे में झूमता बोला — “चलो यहां से।”
“कहां?” — मोनिका हड़बड़ाई।
“कहीं भी। यहां से चलो।”
“तुम्हारे साथ?”
“हां।”
“मैं नहीं जाती।”
“तुम नहीं जाओगी तो मैं चला जाऊंगा।”
“अरे जाओ, न जाओ। मेरी बला से।”
“ठीक है। जाता हूं।”
उसने हाथ में थमा विस्की का गिलास जोर से फर्श पर पटका और फर्श को लगभग रौंदता हुआ वहां से विदा हो गया।
वह अविचलित भाव से उसे जाता देखती रही।
थोड़ी देर बाद एंथोनी फ्रांकोजा उसके करीब पहुंचा।
“क्या कह दिया था तुमने मेरे यार को?” — उसने पूछा।
“मैंने तो कुछ भी नहीं कहा था।” — वह बोली।
“चर्च की छत पर जो विशाल क्रॉस लगा हुआ है न, वह उस पर चढ़ कर बैठ गया है। कहता है तभी उतरेगा जब तुम उतरने को कहोगी।”
“क्या!”
“हां। यकीन नहीं तो बाहर चल कर देख लो।”
वह एंथोनी के साथ बाहर आयी।
विलियम इतनी खतरनाक हालत में क्रॉस पर चढ़ा बैठा था कि उसका कलेजा मुंह को आने लगा। क्रॉस टूट सकता था, नशे में होने की वजह से खुद उसकी पकड़ क्रॉस से छूट सकता था और वह सीधा साठ फुट नीचे सड़क पर आकर गिर सकता था।
“नाम क्या है तुम्हारे यार का?” — मोनिका ने पूछा।
“विलियम।” — एंथोनी ने बताया — “विलियम फ्रांसिस।”
“विलियम!” — वह चिल्लाकर बोली — “नीचे उतरो।”
“पहले वादा करो” — बड़ी खतरनाक हालत में क्रॉस के साथ झूलता विलियम बोला — “तुम मेरे साथ चलोगी।”
“अच्छा बाबा, चलूंगी।”
“वादा करो।”
“किया, बाबा।”
“से क्रॉस माई हार्ट एण्ड होप टु डाई।”
“क्रॉस माई हार्ट एण्ड होप टू डाई।”
“मेरा यार टोनी तुम्हारे वादे का गवाह है। ठीक?”
“ठीक।”
तब कहीं जाकर विलियम नीचे उतरा।
उस रोज सारी रात वह विलियम के साथ, उसकी दीवानगी के साथ, मुम्बई की सड़कों पर घूमती रही थी।
सुबह छः बजे वह उसे उसके घर छोड़ने आया था तो तब पहली बार विलियम ने उसका बदन छुआ था, तब उसने उसको अपनी बांहों में लेकर उसके होंठों पर एक चुम्बन जड़ दिया था।
“बस!” — वह बोली — “एक किस हासिल करने की खातिर इतना ड्रामा किया?”
“नहीं।” — वह गम्भीरता से बोला।
“तो?”
“किस वाली को हासिल करने की खातिर।”
“मतलब!”
“मैं आज ही तुमसे शादी कर रहा हूं।”
“क-क्या?”
“मैं ग्यारह बजे आऊंगा। तुम्हें चर्च ले जाने कि लिए। तैयार रहना। ब्राइड्स मेड बनने के लिए अपनी किसी सहेली को बुलाकर रखना। मेरा बैस्टमैन तो टोनी है ही!”
“लेकिन... लेकिन...”
वह चला गया।
मोनिका ने उसे नशे का प्रलाप समझा लेकिन ग्यारह बजे वह दुल्हे की सजधज में एंथोनी के साथ सचमुच आ धमका।
वह तैयार नहीं थी। तैयार होने का कोई मतलब ही नहीं था।
शादी फिर भी उसी रोज हुई। विलियम की जिद उस पर इस कद्र हावी हुई कि इंकार करना अपना भेजा खपाना था।
उसी रात को वह उसे हनीमून के लिए गोवा ले गया।
हनीमून से जब वह वापिस लौटी तो मिकी उसके पेट में था।
तब तक उसे यह मालूम हो चुका था कि उसका यूं आनन-फानन बना पति वास्तव में एक गैंगस्टर था।
लेकिन विलियम ने उससे वादा किया कि वह एक बड़ा हाथ मारेगा और फिर वह न सिर्फ अपना वो नामुराद धन्धा बल्कि वो शहर भी छोड़ देगा और अपनी खूबसूरत बीवी और होने वाले बच्चे के साथ कहीं और जाकर रहेगा।
अगले साल सितम्बर में मिकी पैदा हुआ।
मिकी के दूसरे जन्म दिन वाले दिन विलियम का कत्ल हो गया।
उस दौरान उसका जिगरी दोस्त एंथोनी जेल में था और ऑन ड्यूटी पुलिस अधिकारी पर आक्रमण करने की सजा काट रहा था। विलियम ने उसे हमेशा समझाया था कि अगर कभी उसे कुछ हो जाए तो संकट की घड़ी में वह सिर्फ टोनी के पास जाए। लेकिन संकट की घड़ी जब सचमुच आई तो टोनी जेल में था।
अपने पति के कहे मुताबिक वह जेल में ही टोनी से मिलने गयी।
जेल में से ही टोनी ने ऐसा इन्तजाम किया कि वह उसके जेल से छूटने तक अपने बच्चे के साथ पूरी सुख-सुविधा से उसके फ्लैट में रह सके।
और दो महीने बाद वह जेल से छूटा तो मोनिका ने वहां से चले जाना चाहा लेकिन उसने मोनिका को अपने दिवंगत दोस्त का वास्ता देकर रोके रखा।
आज की तारीख में उसके टोनी के साथ जो ताल्लुकात थे, उस घड़ी तो उसने उनकी कल्पना भी नहीं की थी।
उसके मुंह से एक आह सी निकली।
फिर उसका ध्यान अष्टेकर की तरफ गया।
कैसा आदमी था? मिकी को कितनी अनुरागभरी निगाहों से देखता था। विलियम के कातिल को गिरफ्तार करने के लिए कितनी मेहनत कर रहा था बेचारा। दिन-रात एक किए दे रहा था एक ही केस पर। इन बातों की वजह से मोनिका को अष्टेकर अच्छा लगता था लेकिन पुलिसिया होने की वजह से नफरत के काबिल लगता था। टोनी ने हमेशा उसे यही कहा था कि अष्टेकर का भरोसा करना और सांप का भरोसा करना एक ही बात थी। ऐरे-गैरे की तो बात ही क्या थी, अपनी मुलाजमत में, अपनी लाइन आफ ड्यूटी वह अपने सगे बाप को बख्शने वाला नहीं था।
उसका ध्यान एंथोनी की तरफ गया।
कैसा आदमी था वो!
वह उसके पति का दोस्त था लेकिन अपने दोस्त की बीवी का पति और उसके बच्चे का बाप बनना चाहता था। क्या उसने कभी सोचा था कि जैसे आनन-फानन वह एक बार विधवा हुई थी, वैसे वह दोबारा भी विधवा हो सकती थी? विलियम अपराध की दुनिया को छोड़ने का ख्वाहिशमन्द था लेकिन टोनी का तो अपराध की दुनिया से रिश्ता मांस और नाखून का था। क्या वह उसको अपराध की दुनिया छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकती थी? शायद नहीं। शायद उसकी किस्मत में पति का सुख लिखा ही नहीं था। क्या होगा उसका! क्या होगा मिकी का! विलियम की निशानी का!
“ममा चलो।”
उसने चौंक कर सिर उठाया।
मिकी उसका कन्धा हिला रहा था और अपलक उसे देख रहा था।
ऐन यूं ही विलियम उसकी तरफ देखा करता था।
उसने फिर एक आह भरी और उठ खड़ी हुई।