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“सारे सबूत कहते हैं कि वंशिका असली है और दिल कहता है कि चंद्रेश साहब झूठ नहीं बोल रहे हैं और मैं दिल की बात पहले सुनता हूँ। लेकिन सबूतों को झूठला नहीं सकता।” उसके चेहरे पर सोच के भाव थे।
“मुझे आपकी बात समझ में नहीं आ रही सर।” गंभीर स्वर में निरंजन ने कहा।
अब सब का ध्यान भाटी की तरफ ही था।
“इन्वेस्टिगेशन लगता है तगड़ी करनी पड़ेगी।” भाटी ने चहल-कदमी करते हुए अपनी मूंछो पर हाथ फेरते हुए कहा।
अचानक कमरे के दरवाजे पर आहट हुई। सबने चौंक कर दरवाजे की दिशा में देखा। दरवाजे पर एक तीस- बत्तीस बर्षीय युवक खड़ा दिखायी दिया, जिसके बाल बिखरे हुए थे, शरीर गोरे रंग का, आँखों पर गॉगल्स टिके हुए थे। आगंतुक युवक काले कलर की जींस पहने हुए था, जो फैशन के मुताबिक जगह-जगह से फटी हुई थी। ऊपर यलो कलर का शॉर्ट कुर्ता पहना हुआ था, जिस पर राजस्थानी डिजाईन के कई जानवर बने हुए थे। वह अपनी तरफ से पूरा लापरवाह जान पड़ रहा था। उसके हाथ में गिफ्ट और मिठाई का डिब्बा था। सब अनजानी नज़रों से उसे घूर रहे थे। वंशिका उसे देख कर खुशी से फूली नहीं समा रही थी। वह दौड़ते हुए दरवाजे की तरफ भागी और दौड़ कर उसके गले लग गयी।
“कैसे हैं आप भाई साहब?” वंशिका ने मीठे स्वर में कहा।
अब चौंकने की बारी चंद्रेश मल्होत्रा की थी। उसने नवयुवक की तरफ देखते हुए कहा, “वंशिका का कोई भाई नहीं था।”
भाटी ने हैरानी से उस नवयुवक की तरफ देखा।
“आपकी तारीफ?” भाटी ने पूछा।
“तारीफ उस खुदा की कीजिये जिसने मुझे बनाया?” नवयुवक ने उसी तरह चंचल स्वर में जबाव दिया।
राहुल उसके होठों से निकले शब्द सुनकर चौंक पड़ा। निशा ने उसके चेहरे पर चौंकने के भाव देखे। फिर राहुल को उन भावों पर नियन्त्रण करते हुए भी देख लिया।
“कहानी में किरदार बढ़ते ही जा रहे हैं।” भाटी मन ही मन बड़बड़ाया।
वंशिका सबकी ओर देखते हुए बोली, “यही है वह, जिसने मुझे बचाया था।” वंशिका के स्वर में आभार के भाव थे।
नवयुवक ने वहाँ उपस्थित सभी लोगों पर नजरें घुमाई और मीठे स्वर में कहा, “बन्दे को सागर कहते हैं।”
“आप ठीक समय पर आये सागर भइया, ये सब मुझे गलत ठहरा रहे हैं।” वंशिका के स्वर में शिकायत के भाव थे।
“चिन्ता मत कर बहना, अब तेरा ये भाई आ गया है।” उसने सब को देखते हुए कहा और लाया हुआ सामान टेबल पर रख दिया।
“टेढ़े-मेढ़े जबाव देने के लिये हाजिर है, यह टेढ़ा-मेढ़ा आदमी।” उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी।
“आप कहाँ से पधारे।” उलझन भरी निगाहों से देखते हुए भाटी ने कहा।
“पधारे तो हम बत्तीस साल पहले ही थे, लेकिन लगता है हमारे जन्म लेने का कारण वंशिका को अपना हक दिलाना है।” गहरी साँस लेते हुए उसने जवाब दिया।
“जो भी पूछा जाये, उसका सीधा जवाब दो स्मार्ट बॉय, यह पुलिस की कार्यवाही है। अमिताभ जी का शो कौन बनेगा करोड़पति नहीं है।” भाटी ने कड़क स्वर में कहा।
“मुझे वंशिका ने फोन करके यहाँ बुलाया था।” उसके स्वर में व्यंग्य की जगह गंभीरता आ गयी।
“क्यों बुलाया था?” भाटी ने पूछा।
“क्योंकि इनके पतिदेव इन्हें अपनी पत्नी नहीं मान रहे थे।”
“तो आप इसमें क्या कर सकते हो?”
“इनके पति को समझाने की कोशिश करता।” सागर बोला।
अचानक निरंजन बोल पड़ा, “आपने इनको क्यों बचाया?”
“क्यों, किसी को बचाना जुर्म है क्या कानून की नजर में? अजीब मुसीबत है किसी को बचाओ, तो मुसीबत, नहीं बचाओ तो मुसीबत।” व्यंग्यभरे स्वर में सागर बोला। निरंजन कट के रह गया।
“ये आपको कहाँ मिली थी?” भाटी ने प्रश्न पूछा।
“इनका कार से एक्सीडेन्ट हो गया था। काफी दिनों तक इनकी याददाश्त गायब रही। याददश्त वापस आने पर यह अपने घर जाने की जिद करने लगी। मैं भी इनके साथ ही आने वाला था, लेकिन किसी कारणवश आ नहीं सका।” साधारण स्वर में सागर ने जबाव दिया।
“आपका पेशा क्या है?” निरंजन ने सवाल किया।
“झूठ को सच और सच को झूठ साबित करना ही मेरा पेशा है।”
“मतलब?” निरंजन ने पूछा।
“वकालत करता हूँ इंस्पेक्टर साहब।” लापरवाही से सागर ने जवाब दिया।
“तभी पुलिस का खौफ नहीं है।” भाटी बोला।
“क्या? पुलिस से डरना चाहिये?” सवालिया निगाह से भाटी को देखता सागर बोला।
तभी राहुल निशा की तरफ देख कर बोला, “हमें चलना चाहिये इंस्पेक्टर साहब। अब तो हमारी यहाँ कोई जरूरत नहीं है।”
“जाइये जनाब, आपकी तो क्या, अब तो हमारी भी यहाँ कोई जरुरत नहीं है।” भाटी ने उठते हुए कहा।
“इंस्पेक्टर साहब, अब मेरा क्या होगा?” बेचैनी से चंद्रेश ने कहा।
“आपकी चाल पीट गयी है चंद्रेश साहब, आप के गवाह खुद ही मुकर गये, इसमें हम क्या कर सकते हैं।” उखड़े स्वर में भाटी बोला।
“लेकिन यह सब झूठ है।”
“हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। चलो निरंजन।” भाटी ने बाहर की तरफ कदम बढ़ाते हुए कहा।
निरंजन भी उठ खड़ा हुआ और चंद्रेश के कन्धे पर हाथ रख कर बोला”संभालो अपने आपको।”
दरवाजे के पास आकर भाटी ठहर गया और घूम कर सागर की तरफ देखते हुए बोला, “मुझे लगता है हमारी मुलाकात बहुत जल्द होगी। तब जाकर पता चलेगा कि आप कितने पानी में हैं।” विश्वास भरे स्वर में भाटी बोला।
“शौक से भाटी साहब, उस वक्त का इस नाचीज को भी इन्तजार रहेगा।” शांत भाव से मुस्करा कर सागर ने जबाव दिया। भाटी और निरंजन घूम कर वापस चले गये।
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अब सब का ध्यान भाटी की तरफ ही था।
“इन्वेस्टिगेशन लगता है तगड़ी करनी पड़ेगी।” भाटी ने चहल-कदमी करते हुए अपनी मूंछो पर हाथ फेरते हुए कहा।
अचानक कमरे के दरवाजे पर आहट हुई। सबने चौंक कर दरवाजे की दिशा में देखा। दरवाजे पर एक तीस- बत्तीस बर्षीय युवक खड़ा दिखायी दिया, जिसके बाल बिखरे हुए थे, शरीर गोरे रंग का, आँखों पर गॉगल्स टिके हुए थे। आगंतुक युवक काले कलर की जींस पहने हुए था, जो फैशन के मुताबिक जगह-जगह से फटी हुई थी। ऊपर यलो कलर का शॉर्ट कुर्ता पहना हुआ था, जिस पर राजस्थानी डिजाईन के कई जानवर बने हुए थे। वह अपनी तरफ से पूरा लापरवाह जान पड़ रहा था। उसके हाथ में गिफ्ट और मिठाई का डिब्बा था। सब अनजानी नज़रों से उसे घूर रहे थे। वंशिका उसे देख कर खुशी से फूली नहीं समा रही थी। वह दौड़ते हुए दरवाजे की तरफ भागी और दौड़ कर उसके गले लग गयी।
“कैसे हैं आप भाई साहब?” वंशिका ने मीठे स्वर में कहा।
अब चौंकने की बारी चंद्रेश मल्होत्रा की थी। उसने नवयुवक की तरफ देखते हुए कहा, “वंशिका का कोई भाई नहीं था।”
भाटी ने हैरानी से उस नवयुवक की तरफ देखा।
“आपकी तारीफ?” भाटी ने पूछा।
“तारीफ उस खुदा की कीजिये जिसने मुझे बनाया?” नवयुवक ने उसी तरह चंचल स्वर में जबाव दिया।
राहुल उसके होठों से निकले शब्द सुनकर चौंक पड़ा। निशा ने उसके चेहरे पर चौंकने के भाव देखे। फिर राहुल को उन भावों पर नियन्त्रण करते हुए भी देख लिया।
“कहानी में किरदार बढ़ते ही जा रहे हैं।” भाटी मन ही मन बड़बड़ाया।
वंशिका सबकी ओर देखते हुए बोली, “यही है वह, जिसने मुझे बचाया था।” वंशिका के स्वर में आभार के भाव थे।
नवयुवक ने वहाँ उपस्थित सभी लोगों पर नजरें घुमाई और मीठे स्वर में कहा, “बन्दे को सागर कहते हैं।”
“आप ठीक समय पर आये सागर भइया, ये सब मुझे गलत ठहरा रहे हैं।” वंशिका के स्वर में शिकायत के भाव थे।
“चिन्ता मत कर बहना, अब तेरा ये भाई आ गया है।” उसने सब को देखते हुए कहा और लाया हुआ सामान टेबल पर रख दिया।
“टेढ़े-मेढ़े जबाव देने के लिये हाजिर है, यह टेढ़ा-मेढ़ा आदमी।” उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी।
“आप कहाँ से पधारे।” उलझन भरी निगाहों से देखते हुए भाटी ने कहा।
“पधारे तो हम बत्तीस साल पहले ही थे, लेकिन लगता है हमारे जन्म लेने का कारण वंशिका को अपना हक दिलाना है।” गहरी साँस लेते हुए उसने जवाब दिया।
“जो भी पूछा जाये, उसका सीधा जवाब दो स्मार्ट बॉय, यह पुलिस की कार्यवाही है। अमिताभ जी का शो कौन बनेगा करोड़पति नहीं है।” भाटी ने कड़क स्वर में कहा।
“मुझे वंशिका ने फोन करके यहाँ बुलाया था।” उसके स्वर में व्यंग्य की जगह गंभीरता आ गयी।
“क्यों बुलाया था?” भाटी ने पूछा।
“क्योंकि इनके पतिदेव इन्हें अपनी पत्नी नहीं मान रहे थे।”
“तो आप इसमें क्या कर सकते हो?”
“इनके पति को समझाने की कोशिश करता।” सागर बोला।
अचानक निरंजन बोल पड़ा, “आपने इनको क्यों बचाया?”
“क्यों, किसी को बचाना जुर्म है क्या कानून की नजर में? अजीब मुसीबत है किसी को बचाओ, तो मुसीबत, नहीं बचाओ तो मुसीबत।” व्यंग्यभरे स्वर में सागर बोला। निरंजन कट के रह गया।
“ये आपको कहाँ मिली थी?” भाटी ने प्रश्न पूछा।
“इनका कार से एक्सीडेन्ट हो गया था। काफी दिनों तक इनकी याददाश्त गायब रही। याददश्त वापस आने पर यह अपने घर जाने की जिद करने लगी। मैं भी इनके साथ ही आने वाला था, लेकिन किसी कारणवश आ नहीं सका।” साधारण स्वर में सागर ने जबाव दिया।
“आपका पेशा क्या है?” निरंजन ने सवाल किया।
“झूठ को सच और सच को झूठ साबित करना ही मेरा पेशा है।”
“मतलब?” निरंजन ने पूछा।
“वकालत करता हूँ इंस्पेक्टर साहब।” लापरवाही से सागर ने जवाब दिया।
“तभी पुलिस का खौफ नहीं है।” भाटी बोला।
“क्या? पुलिस से डरना चाहिये?” सवालिया निगाह से भाटी को देखता सागर बोला।
तभी राहुल निशा की तरफ देख कर बोला, “हमें चलना चाहिये इंस्पेक्टर साहब। अब तो हमारी यहाँ कोई जरूरत नहीं है।”
“जाइये जनाब, आपकी तो क्या, अब तो हमारी भी यहाँ कोई जरुरत नहीं है।” भाटी ने उठते हुए कहा।
“इंस्पेक्टर साहब, अब मेरा क्या होगा?” बेचैनी से चंद्रेश ने कहा।
“आपकी चाल पीट गयी है चंद्रेश साहब, आप के गवाह खुद ही मुकर गये, इसमें हम क्या कर सकते हैं।” उखड़े स्वर में भाटी बोला।
“लेकिन यह सब झूठ है।”
“हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। चलो निरंजन।” भाटी ने बाहर की तरफ कदम बढ़ाते हुए कहा।
निरंजन भी उठ खड़ा हुआ और चंद्रेश के कन्धे पर हाथ रख कर बोला”संभालो अपने आपको।”
दरवाजे के पास आकर भाटी ठहर गया और घूम कर सागर की तरफ देखते हुए बोला, “मुझे लगता है हमारी मुलाकात बहुत जल्द होगी। तब जाकर पता चलेगा कि आप कितने पानी में हैं।” विश्वास भरे स्वर में भाटी बोला।
“शौक से भाटी साहब, उस वक्त का इस नाचीज को भी इन्तजार रहेगा।” शांत भाव से मुस्करा कर सागर ने जबाव दिया। भाटी और निरंजन घूम कर वापस चले गये।
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