S
StoryPublisher
Guest
लेकिन ऐसा महज इस वजह से नहीं हुआ , कयोंकि मैंने निशाना गलत लिया था। क्योंकि अभी मैं तुम्हें सिर्फ यह समझाना चाह रहा था कि माफिया का सबसे बड़ा डॉन भी अगर गोली के रास्ते में आएगा तो गोली उसे भी उड़ा डा लेगी। गोली पर किसी तरह का कोई फर्की पड़ने वाला नहीं। खोपड़ी किसी की भी हो , गरीब आदमी की या अमीर आदमी- की, उसके
रास्ते में आएगी तो उड़ जाएगी।'
पटिर ने गले में फंसा थू की निगला।
'अब सिर्फ इतना बता दो कि मेरे सवालों का जवा ब देना जरूरी है या नहीं?'
उसने सहमी हुई नजर से लाम्बा की ओर देखा, फिर बोला- ' पूछो।'
'तुझसे मेरी दुश्मनी नहीं फिर तूने काने को मेरे नाम की सुपारी क्यों दी?'
'मुझे किसी ने तुम्हारी हत्या का कान , सौंपों था।'
' किसने-किसने जार्ज?'
वह हिचकिचाया।
'नाम बता, उसका...नाम बता? '
'जोजफ।'
'जोजफ !' लाम्बा के नेत्र आश्चर्य से फैल गए - ' वही जोजफ न जो माणिकी देशमुख के यहां उसकी बेटी के शैडो की हैसियत से काम करता है ? '
'वही।।
'आई सी...तो यह जोजफ का काम था। ' वह बड़बड़ाया।
पीटर खामोश रहा।
'काने !' लाम्बा ने दलपत का ने से संबोधित होते हुए कहा- इसे दूसरे कमरे में बांधकर डाल दे ताकि यह किसी प्रकार का शोर न मचा सके। '
'जो हुक्म मालिक।'
आनन-फानन में दलपत का ने ने आदेश के पालन में कार्यवाही कर डाली।
जार्ज को बांध कर दूसरे कमरे में बूंद करने के बाद वह रंजीत लाम्बा के साथ कोठी से बाहर निकल
आया!
ए की बार फिर उसे कार की ड्राइविंग सीट पर बैठना पड़ा।
सब कुछ प्लान के मुताबिकी हुआ। ' लाम्बा सिगरेट सुलगाता हुआ बोला।
लेकिन माई-बाप मेरी तो मुसीबत है।
' वह किसलिए?'
' इसलिए कि पीटर कभी न कभी तो कमरे के बाहर निकलेगा ही उसके बाहर आते ही मेरे लिए मुसीबत शुरू हो जाएगी।'
'कोई मुसीब त नहीं होगी।'
'क्यों?'
' क्योंकि यह सब तो मेरा किया-धरा है। अगर उसे कोई कार्यवाही करनी होगी तो वहमेरे खिलाफ करेगा।'
' मेरे खिलाफ नहीं करेगा , इस बात की भी तो कोई गारंटी नहीं है।'
'तू मर मत ...अगर तेरे खिलाफ ऐसा-वैसा कुछ हो तो तू मुझे फोन कर सकता है। यह ले मेरा फोन नम्बर। ' लाम्बा ने विजिटिंग कार्ड निकालकर दलपत काने की ओर बढ़ा दिया।
काने ने कार्ड इस तरह संभालकर रख लिया मानो वह उसकी सुरक्षा का गारंटी कार्ड हो।
__ 'किधर चलूं मालिकी ?' कुछ देर बाद मोड़ आने पर उसने पूछा।'
__'तू जहां जाना चाहता हो वहीं चल। मैं तुझे वहां तक तो छोड़ ही सकता हूं।'
'जो आज्ञा साई।'
| पर दलपत कानाकार से उतर गया।
.0
00
__ 'हैलो...कोठारी...! ' दूसरी ओर से कोठारी की आवाज सुनने के पश्चात् रंजीत लाम्बा माउथ पीस में बोला- ' मैं लाम्बा बोल रहा हूं।'
___ 'तुम कहां हो लाम्बा ? देशमुख साहब कबसे तुम्हारी तलाश करवा रहे हैं ?' दूसरी ओर से उभरने वाले कोठारी के उत्तेजित स्वर में शिकायत के स्पष्ट भाव थे।
'कब से?'
' बहुत देर हो गई।' ' और उसब हुत देर में मैं उन्हें नहीं मिला ?'
_' हां...तुम कहीं नहीं मिले। अभी कहां से फोन कर रहे हो?'
' टेलीफोन बूथ से।'
'कौन-से टेलीफोन बूथ से?'
' मेरा पता जानने के लिए बड़े उतावले हो रहे हो कोठारी।'
.
.
___ 'नहीं...मैं पता जानने को उतावला नहीं हो रहा।'
'फिर?'
' मैं चाहता हूं तुम जल्द से जल्द देशमुख साह ब के सामने हाजिर हो जाओ। देशमुख साहब को तुमसे कोई बेहद जरूरी काम कराना है।'
'माणिकी देखमुख के जरूरी काम से मैं वाकिफ हूं।'
'अच्छा !'
'हां कोठारी...मैं सब-कुछ जान चुका हूं। तुम्हारे झूठे स्टेटमेन्ट भी अब मेरे सामने नंगे हो चुके
' मेरे झूठे स्टेटमेन्ट ?'
'हां-हां , अब तुम तक मुझसे जो झूठ कहते आए कि तुम मेरी और पूनम की कहानी की खबर देशमुख को नहीं करोगे।'
'हां...वो खबर तो मैंने अभी-भी छिपाकर रखी है।'
'झूठ बकते हो।'
'नहीं रंजीत... मैं सच कह रहा हूं।'
.
.
.
___ 'झूठ है...झूठ! मैं हर रहस्य की तह तक प हुंच चुका हूं।'
'कैसा रहस्य ?'
'मुझ पर हो ने वाले जानलेवा हमलों का रहस्य ।'
'मुझे ... मुझे कुछ नहीं- मालूम। ' __'लेकिन मुझे सब कुछ मालूम है। मैं जा नता हूं, पेशेवर हत्यारे दलपत को मेरे पीछे अण्डरवर्ल्ड के बादशाह जार् ज पीटर ने लगाया और पीटर को मेरी हत्या की सुपारी देने वाला है जोजफ...जोजफ , पूनम'का शैडो !'
'ओह नो...जोजफ ने किया ये सब। मैं उसे कितना समझाया था कि वह देशमुख साहब को कुछ न बता ए। मेरे सामने मुंह बन्द रखने की बात कहकर , इसका मतलब उसने सब - कुछ देशमुख साहब के
सामने उगल दिया है।'
'कोठारी तुम कुछ भी कहो...मैं अब वहां की किसी भी बात पर यकीन करने वाला नहीं।'
__ 'शायद तुम ठीकी कह रहे हो , इसी वजह से जोजफ फिलने ही आद मियों की भीड़ लेकर तुम्हारी तलाश कर रहा था और पूनम की चीख-पुकार भी सुनाई दी थी।'
___ 'पूनम... क्या हुआपूनम को ? कोठारी मुझे बताओ पूनम को क्या हुआ ?' एकाएक ही लाम्बा उत्तेजित स्वर में चिल्लाया।
___ 'मुझे ठीकी तरह नहीं मालूम , मगर ऐसा लगता है कि उसे पीछे बाले दो कमरों में रखा गया है और शायद बाहर निकलने का दरवाजा लॉक्ड है। '
___ 'कोठारी !' लाम्बा दांत पीसता हुआ गुर्राया - मैं पूनम पर होने वाला जुल्म बर्दाश्त नहीं करूंगा।
कह देना अपने आका माणिकी देखमुख से-बारूद से खेलोगे तो जल जाओगे, फिर मैं तो बारूद का वो ढेर हूं जो माणिकी देशमुख को लाखों टुकड़ों में बदल डालने में पूरी तरह सक्षम है। '
रंजीत ... रिलैक्स रंजीत। देखो..सुनो...।'
'न मुझे देखना है , न सुनना है...समझ गए तुम। तुम माणि की देशमुख के लैफ्टीनेंट हो... उसे समझा सको तो समझा देना। मैं सब-कुछ बर्दाश्त कर लूंगा लेकिन पूनम पर किसी भी तरह का जुल्म बर्दाश्त नहीं कर सकूँगा।'
'पूनम को कुछ नहीं होगा रंजीत। तुम मेरे पास आजाओ, मैं सारी-उलझनों का हल निकाल
लूंगा।'
लाम्बा हंसा।
जहरीली हंसी।
बोला-को ठारी मुझे पुड़िया देने की कोशिश म त करो। बहलाया बच्चों को जाता है । जहां मेरे लिए जाल तैया र करके रखा गया है , तुम मुझे वहां पुचकार के बुलाना चाहते ही ताकि मै उस जाल में जाकर फंस जाऊं।'
' नहीं...यह बात नहीं।'
'अब मुझे तुम्हारी किसी बात पर यकीन नहीं।' माणिकी देशमुख से कह देना कि बगावत हो चुकी है। उसने जितने वार करने थे वो कर चुका , अब मेरी बारी है।'
'नहीं रंजीत!'
__ ' उसे कहना कि अगर बचा सकता है तो वह अपने-आपको बचा ले। मौत का काला साया उसे कभी-भी अपने शिकंजे में जकड़ सकी ता है।'
रास्ते में आएगी तो उड़ जाएगी।'
पटिर ने गले में फंसा थू की निगला।
'अब सिर्फ इतना बता दो कि मेरे सवालों का जवा ब देना जरूरी है या नहीं?'
उसने सहमी हुई नजर से लाम्बा की ओर देखा, फिर बोला- ' पूछो।'
'तुझसे मेरी दुश्मनी नहीं फिर तूने काने को मेरे नाम की सुपारी क्यों दी?'
'मुझे किसी ने तुम्हारी हत्या का कान , सौंपों था।'
' किसने-किसने जार्ज?'
वह हिचकिचाया।
'नाम बता, उसका...नाम बता? '
'जोजफ।'
'जोजफ !' लाम्बा के नेत्र आश्चर्य से फैल गए - ' वही जोजफ न जो माणिकी देशमुख के यहां उसकी बेटी के शैडो की हैसियत से काम करता है ? '
'वही।।
'आई सी...तो यह जोजफ का काम था। ' वह बड़बड़ाया।
पीटर खामोश रहा।
'काने !' लाम्बा ने दलपत का ने से संबोधित होते हुए कहा- इसे दूसरे कमरे में बांधकर डाल दे ताकि यह किसी प्रकार का शोर न मचा सके। '
'जो हुक्म मालिक।'
आनन-फानन में दलपत का ने ने आदेश के पालन में कार्यवाही कर डाली।
जार्ज को बांध कर दूसरे कमरे में बूंद करने के बाद वह रंजीत लाम्बा के साथ कोठी से बाहर निकल
आया!
ए की बार फिर उसे कार की ड्राइविंग सीट पर बैठना पड़ा।
सब कुछ प्लान के मुताबिकी हुआ। ' लाम्बा सिगरेट सुलगाता हुआ बोला।
लेकिन माई-बाप मेरी तो मुसीबत है।
' वह किसलिए?'
' इसलिए कि पीटर कभी न कभी तो कमरे के बाहर निकलेगा ही उसके बाहर आते ही मेरे लिए मुसीबत शुरू हो जाएगी।'
'कोई मुसीब त नहीं होगी।'
'क्यों?'
' क्योंकि यह सब तो मेरा किया-धरा है। अगर उसे कोई कार्यवाही करनी होगी तो वहमेरे खिलाफ करेगा।'
' मेरे खिलाफ नहीं करेगा , इस बात की भी तो कोई गारंटी नहीं है।'
'तू मर मत ...अगर तेरे खिलाफ ऐसा-वैसा कुछ हो तो तू मुझे फोन कर सकता है। यह ले मेरा फोन नम्बर। ' लाम्बा ने विजिटिंग कार्ड निकालकर दलपत काने की ओर बढ़ा दिया।
काने ने कार्ड इस तरह संभालकर रख लिया मानो वह उसकी सुरक्षा का गारंटी कार्ड हो।
__ 'किधर चलूं मालिकी ?' कुछ देर बाद मोड़ आने पर उसने पूछा।'
__'तू जहां जाना चाहता हो वहीं चल। मैं तुझे वहां तक तो छोड़ ही सकता हूं।'
'जो आज्ञा साई।'
| पर दलपत कानाकार से उतर गया।
.0
00
__ 'हैलो...कोठारी...! ' दूसरी ओर से कोठारी की आवाज सुनने के पश्चात् रंजीत लाम्बा माउथ पीस में बोला- ' मैं लाम्बा बोल रहा हूं।'
___ 'तुम कहां हो लाम्बा ? देशमुख साहब कबसे तुम्हारी तलाश करवा रहे हैं ?' दूसरी ओर से उभरने वाले कोठारी के उत्तेजित स्वर में शिकायत के स्पष्ट भाव थे।
'कब से?'
' बहुत देर हो गई।' ' और उसब हुत देर में मैं उन्हें नहीं मिला ?'
_' हां...तुम कहीं नहीं मिले। अभी कहां से फोन कर रहे हो?'
' टेलीफोन बूथ से।'
'कौन-से टेलीफोन बूथ से?'
' मेरा पता जानने के लिए बड़े उतावले हो रहे हो कोठारी।'
.
.
___ 'नहीं...मैं पता जानने को उतावला नहीं हो रहा।'
'फिर?'
' मैं चाहता हूं तुम जल्द से जल्द देशमुख साह ब के सामने हाजिर हो जाओ। देशमुख साहब को तुमसे कोई बेहद जरूरी काम कराना है।'
'माणिकी देखमुख के जरूरी काम से मैं वाकिफ हूं।'
'अच्छा !'
'हां कोठारी...मैं सब-कुछ जान चुका हूं। तुम्हारे झूठे स्टेटमेन्ट भी अब मेरे सामने नंगे हो चुके
' मेरे झूठे स्टेटमेन्ट ?'
'हां-हां , अब तुम तक मुझसे जो झूठ कहते आए कि तुम मेरी और पूनम की कहानी की खबर देशमुख को नहीं करोगे।'
'हां...वो खबर तो मैंने अभी-भी छिपाकर रखी है।'
'झूठ बकते हो।'
'नहीं रंजीत... मैं सच कह रहा हूं।'
.
.
.
___ 'झूठ है...झूठ! मैं हर रहस्य की तह तक प हुंच चुका हूं।'
'कैसा रहस्य ?'
'मुझ पर हो ने वाले जानलेवा हमलों का रहस्य ।'
'मुझे ... मुझे कुछ नहीं- मालूम। ' __'लेकिन मुझे सब कुछ मालूम है। मैं जा नता हूं, पेशेवर हत्यारे दलपत को मेरे पीछे अण्डरवर्ल्ड के बादशाह जार् ज पीटर ने लगाया और पीटर को मेरी हत्या की सुपारी देने वाला है जोजफ...जोजफ , पूनम'का शैडो !'
'ओह नो...जोजफ ने किया ये सब। मैं उसे कितना समझाया था कि वह देशमुख साहब को कुछ न बता ए। मेरे सामने मुंह बन्द रखने की बात कहकर , इसका मतलब उसने सब - कुछ देशमुख साहब के
सामने उगल दिया है।'
'कोठारी तुम कुछ भी कहो...मैं अब वहां की किसी भी बात पर यकीन करने वाला नहीं।'
__ 'शायद तुम ठीकी कह रहे हो , इसी वजह से जोजफ फिलने ही आद मियों की भीड़ लेकर तुम्हारी तलाश कर रहा था और पूनम की चीख-पुकार भी सुनाई दी थी।'
___ 'पूनम... क्या हुआपूनम को ? कोठारी मुझे बताओ पूनम को क्या हुआ ?' एकाएक ही लाम्बा उत्तेजित स्वर में चिल्लाया।
___ 'मुझे ठीकी तरह नहीं मालूम , मगर ऐसा लगता है कि उसे पीछे बाले दो कमरों में रखा गया है और शायद बाहर निकलने का दरवाजा लॉक्ड है। '
___ 'कोठारी !' लाम्बा दांत पीसता हुआ गुर्राया - मैं पूनम पर होने वाला जुल्म बर्दाश्त नहीं करूंगा।
कह देना अपने आका माणिकी देखमुख से-बारूद से खेलोगे तो जल जाओगे, फिर मैं तो बारूद का वो ढेर हूं जो माणिकी देशमुख को लाखों टुकड़ों में बदल डालने में पूरी तरह सक्षम है। '
रंजीत ... रिलैक्स रंजीत। देखो..सुनो...।'
'न मुझे देखना है , न सुनना है...समझ गए तुम। तुम माणि की देशमुख के लैफ्टीनेंट हो... उसे समझा सको तो समझा देना। मैं सब-कुछ बर्दाश्त कर लूंगा लेकिन पूनम पर किसी भी तरह का जुल्म बर्दाश्त नहीं कर सकूँगा।'
'पूनम को कुछ नहीं होगा रंजीत। तुम मेरे पास आजाओ, मैं सारी-उलझनों का हल निकाल
लूंगा।'
लाम्बा हंसा।
जहरीली हंसी।
बोला-को ठारी मुझे पुड़िया देने की कोशिश म त करो। बहलाया बच्चों को जाता है । जहां मेरे लिए जाल तैया र करके रखा गया है , तुम मुझे वहां पुचकार के बुलाना चाहते ही ताकि मै उस जाल में जाकर फंस जाऊं।'
' नहीं...यह बात नहीं।'
'अब मुझे तुम्हारी किसी बात पर यकीन नहीं।' माणिकी देशमुख से कह देना कि बगावत हो चुकी है। उसने जितने वार करने थे वो कर चुका , अब मेरी बारी है।'
'नहीं रंजीत!'
__ ' उसे कहना कि अगर बचा सकता है तो वह अपने-आपको बचा ले। मौत का काला साया उसे कभी-भी अपने शिकंजे में जकड़ सकी ता है।'