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25 मार्च 2015
फ्लाईट 301
अरब सागर का वायुमंडल
फलक प्लेन की खिड़की के बगल वाली सीट पर मौजूद थी। वह उत्साह से बाहर के नज़ारे देख रही थी। मोहसीन उसके बाजू में था जो उसे कहीं दूर आसमान में बादल दिखा रहा था।
“वो देख फल्लू- पहाड़!”
“वो पहाड़ थोड़ी न है मामू। क्लाउड है।”
“अरे नहीं वो बर्फ का पहाड़ है। माउंट एवरेस्ट।”
“मम्मी देखो मामू झूठ बोल रहे हैं।”
सरीना मैगज़ीन पढ़ रही थी। उसने मोहसिन पर नज़र डाली और सर हिलाते हुए मुस्करा दी।
“टीचर ने बताया है...माउंट एवरेस्ट इज इन नेपाल। मामू आपकी टीचर ने आपको इतना भी नहीं सिखाया ?”
“अच्छा! बहुत बोलने लगी है।” कहकर मोहसिन उसके गुदगुदी करने लगा। फलक बुरी तरह से हंसने लगी।
“मोहसिन!” सरीना डांटते हुए बोली, “ज्यादा मस्ती नहीं। सीधे बैठो दोनों।”
तभी प्लेन बाएँ तरफ धीरे-धीरे झुकने लगा। एयरहोस्टेस जो फिलहाल पैसेंजर्स को चाय-कॉफ़ी सर्व कर रहीं थीं– लड़खड़ा गईं।
मोहसिन हंसकर बोला, “जीजी! जब प्लेन ही सीधा नहीं चल रहा तो हम कैसे सीधे बैठें।”
फलक भी दांत दिखाते हुए हंसने लगी।
प्लेन में सीट बैल्ट्स पहनने के निर्देश ज़ारी हो गए थे।
प्लेन में अधिकतर लोग सामान्य ढंग से बैठे थे पर कुछ ज़रूर थे जो व्यग्र होने लगे थे। एक संभ्रांत बिजनसमैन-सा प्रतीत होता व्यक्ति खड़े होकर एयरहोस्टेस से पूछने लगा, “ये प्लेन मुड़ क्यों रहा है ? कोई इमरजेंसी है क्या ?”
“सर प्लीज़! आप अपनी सीट पर बैठ जाएँ और सीट बैल्ट लगा लें। कभी-कभार खराब मौसम के कारण रूट चेंज करना पड़ जाता है।”
वह व्यक्ति बैठ तो गया पर फिर भी रोष भरे स्वर में बोलता गया। “मुझे मत सिखाओ मैं हजारों बार प्लेन में ट्रेवल कर चुका हूँ। जिस तरह ये प्लेन मुड़ा है- लग रहा है इसने पूरा नब्बे का कोण मारा है। आप पता करिए और इस दिशा बदलाव की क्या वजह है उसकी प्लेन में घोषणा करवाइए।”
“ज़रूर सर! प्लीज़ बी पेशेंट। पायलट जल्दी घोषणा करेंगे।”
एयरहोस्टेस जिसका नाम हिना था तेजी से आगे बढ़ते हुए बिजनस क्लास पहुंची फिर उसे पार करते हुए कॉकपिट के दरवाजे पर पहुंची। वह खड़े एक स्टीवर्ड और एयरहोस्टेस से वह मुखातिब हुई। वे दोनों परेशान से नज़र आ रहे थे।
“क्या हुआ प्लेन ने दिशा क्यों बदली ?” हिना ने पूछा।
“हम भी यहीं पता करने की कोशिश कर रहे हैं।” दूसरी एयरहोस्टेस बोली।
“तो ? क्या कह रहे हैं कैप्टन ?”
“अन्दर से कोई जवाब मिले तो न।” कहते हुए स्टीवर्ड ने कॉकपिट के बाहर लगे टचपेड पर पासकोड डाला पर दरवाजा फिर भी नहीं खुला।
हिना ने दरवाजा धकेलने की कोशिश की। “लगता है कोई टेक्नीकल फाल्ट है दरवाजे में।”
“आई हॉप सो...” दूसरी एयरहोस्टेस सहमे हुए स्वर में बोली। उसका चेहरा डर से सफ़ेद पड़ गया था।
हिना दरवाजे पर नॉक करने लगी, पर अन्दर से कोई प्रतिक्रिया हासिल नहीं हुई।
“कहीं दोनों ही पायलट्स को तो कुछ नहीं हो गया।” स्टीवर्ड बोला।
“कम ऑन!” दूसरी एयरहोस्टेस बोली, “दोनों पायलेट्स को एक साथ...कोई चांस नहीं।”
“क्यों नहीं! ऐसा पहले हो चुका है। तुम्हें वो सिप्रस से ग्रीस वाली फ्लाईट के बारे में नहीं पता ?”
उसने न में सर हिलाया।
“तभी! उस फ्लाईट में केबिन प्रेशर सिस्टम गलती से मैन्युअल पर रह गया था और प्लेन हवा में उठने के बाद अन्दर प्रेशर गिरता चला गया और प्लेन में दोनों पायलेट्स की मौत हो गई।”
“ओह गॉड! फिर क्या हुआ ?”
“फिर क्या। सबकुछ होने के बाद भी किसी को शायद नहीं सूझा कि प्रॉब्लम कहाँ है। अंत में एक अटेंडेंट ने कॉकपिट में आकर प्लेन सँभालने की कोशिश की पर...”
“पर... ?” एयरहोस्टेस के चेहरे पर हाहाकारी भाव थे।
“प्लेन पहाड़ों में क्रेश हो गया। सब मारे गए।”
“प्लीज़!” हिना बोली, “डराओ नहीं! आई एम श्योर दरवाजे में कुछ प्रॉब्लम है। इसे फिर से ट्राई करो...”
“अरे, कितनी बार...” स्टीवर्ड ने नंबर पंच किया। पर नतीज़ा सिफर निकला। उसने दरवाजे को खटखटाकर गहरी सांस ली।
“ज़रूर कैप्टन विक्रम या अजय में से किसी एक को कुछ हुआ है।” हिना चिंतित स्वर में बोली।
“तो वो अकेले क्या कर लेंगे ? दरवाजा तो खोलना चाहिए।” स्टीवर्ड बोला।
“प्लेन का दिशा बदलना फिर भी जस्टिफाई नहीं होता।” दूसरी एयरहोस्टेस बोली।
हिना चिंतित मुद्रा में कॉकपिट के दरवाजे को देखती रह गई।
☐☐☐
फ्लाईट 301
अरब सागर का वायुमंडल
फलक प्लेन की खिड़की के बगल वाली सीट पर मौजूद थी। वह उत्साह से बाहर के नज़ारे देख रही थी। मोहसीन उसके बाजू में था जो उसे कहीं दूर आसमान में बादल दिखा रहा था।
“वो देख फल्लू- पहाड़!”
“वो पहाड़ थोड़ी न है मामू। क्लाउड है।”
“अरे नहीं वो बर्फ का पहाड़ है। माउंट एवरेस्ट।”
“मम्मी देखो मामू झूठ बोल रहे हैं।”
सरीना मैगज़ीन पढ़ रही थी। उसने मोहसिन पर नज़र डाली और सर हिलाते हुए मुस्करा दी।
“टीचर ने बताया है...माउंट एवरेस्ट इज इन नेपाल। मामू आपकी टीचर ने आपको इतना भी नहीं सिखाया ?”
“अच्छा! बहुत बोलने लगी है।” कहकर मोहसिन उसके गुदगुदी करने लगा। फलक बुरी तरह से हंसने लगी।
“मोहसिन!” सरीना डांटते हुए बोली, “ज्यादा मस्ती नहीं। सीधे बैठो दोनों।”
तभी प्लेन बाएँ तरफ धीरे-धीरे झुकने लगा। एयरहोस्टेस जो फिलहाल पैसेंजर्स को चाय-कॉफ़ी सर्व कर रहीं थीं– लड़खड़ा गईं।
मोहसिन हंसकर बोला, “जीजी! जब प्लेन ही सीधा नहीं चल रहा तो हम कैसे सीधे बैठें।”
फलक भी दांत दिखाते हुए हंसने लगी।
प्लेन में सीट बैल्ट्स पहनने के निर्देश ज़ारी हो गए थे।
प्लेन में अधिकतर लोग सामान्य ढंग से बैठे थे पर कुछ ज़रूर थे जो व्यग्र होने लगे थे। एक संभ्रांत बिजनसमैन-सा प्रतीत होता व्यक्ति खड़े होकर एयरहोस्टेस से पूछने लगा, “ये प्लेन मुड़ क्यों रहा है ? कोई इमरजेंसी है क्या ?”
“सर प्लीज़! आप अपनी सीट पर बैठ जाएँ और सीट बैल्ट लगा लें। कभी-कभार खराब मौसम के कारण रूट चेंज करना पड़ जाता है।”
वह व्यक्ति बैठ तो गया पर फिर भी रोष भरे स्वर में बोलता गया। “मुझे मत सिखाओ मैं हजारों बार प्लेन में ट्रेवल कर चुका हूँ। जिस तरह ये प्लेन मुड़ा है- लग रहा है इसने पूरा नब्बे का कोण मारा है। आप पता करिए और इस दिशा बदलाव की क्या वजह है उसकी प्लेन में घोषणा करवाइए।”
“ज़रूर सर! प्लीज़ बी पेशेंट। पायलट जल्दी घोषणा करेंगे।”
एयरहोस्टेस जिसका नाम हिना था तेजी से आगे बढ़ते हुए बिजनस क्लास पहुंची फिर उसे पार करते हुए कॉकपिट के दरवाजे पर पहुंची। वह खड़े एक स्टीवर्ड और एयरहोस्टेस से वह मुखातिब हुई। वे दोनों परेशान से नज़र आ रहे थे।
“क्या हुआ प्लेन ने दिशा क्यों बदली ?” हिना ने पूछा।
“हम भी यहीं पता करने की कोशिश कर रहे हैं।” दूसरी एयरहोस्टेस बोली।
“तो ? क्या कह रहे हैं कैप्टन ?”
“अन्दर से कोई जवाब मिले तो न।” कहते हुए स्टीवर्ड ने कॉकपिट के बाहर लगे टचपेड पर पासकोड डाला पर दरवाजा फिर भी नहीं खुला।
हिना ने दरवाजा धकेलने की कोशिश की। “लगता है कोई टेक्नीकल फाल्ट है दरवाजे में।”
“आई हॉप सो...” दूसरी एयरहोस्टेस सहमे हुए स्वर में बोली। उसका चेहरा डर से सफ़ेद पड़ गया था।
हिना दरवाजे पर नॉक करने लगी, पर अन्दर से कोई प्रतिक्रिया हासिल नहीं हुई।
“कहीं दोनों ही पायलट्स को तो कुछ नहीं हो गया।” स्टीवर्ड बोला।
“कम ऑन!” दूसरी एयरहोस्टेस बोली, “दोनों पायलेट्स को एक साथ...कोई चांस नहीं।”
“क्यों नहीं! ऐसा पहले हो चुका है। तुम्हें वो सिप्रस से ग्रीस वाली फ्लाईट के बारे में नहीं पता ?”
उसने न में सर हिलाया।
“तभी! उस फ्लाईट में केबिन प्रेशर सिस्टम गलती से मैन्युअल पर रह गया था और प्लेन हवा में उठने के बाद अन्दर प्रेशर गिरता चला गया और प्लेन में दोनों पायलेट्स की मौत हो गई।”
“ओह गॉड! फिर क्या हुआ ?”
“फिर क्या। सबकुछ होने के बाद भी किसी को शायद नहीं सूझा कि प्रॉब्लम कहाँ है। अंत में एक अटेंडेंट ने कॉकपिट में आकर प्लेन सँभालने की कोशिश की पर...”
“पर... ?” एयरहोस्टेस के चेहरे पर हाहाकारी भाव थे।
“प्लेन पहाड़ों में क्रेश हो गया। सब मारे गए।”
“प्लीज़!” हिना बोली, “डराओ नहीं! आई एम श्योर दरवाजे में कुछ प्रॉब्लम है। इसे फिर से ट्राई करो...”
“अरे, कितनी बार...” स्टीवर्ड ने नंबर पंच किया। पर नतीज़ा सिफर निकला। उसने दरवाजे को खटखटाकर गहरी सांस ली।
“ज़रूर कैप्टन विक्रम या अजय में से किसी एक को कुछ हुआ है।” हिना चिंतित स्वर में बोली।
“तो वो अकेले क्या कर लेंगे ? दरवाजा तो खोलना चाहिए।” स्टीवर्ड बोला।
“प्लेन का दिशा बदलना फिर भी जस्टिफाई नहीं होता।” दूसरी एयरहोस्टेस बोली।
हिना चिंतित मुद्रा में कॉकपिट के दरवाजे को देखती रह गई।
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