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तारा अब उस स्थिति में था कि उससे कुछ भी नहीं जाना जा सकता था क्योंकि मुर्दे बोलते नहीं।
“कपड़े उठा मेरे।” उसने दूसरे को घूरते हुए कहा।
दूसरा उठा और कोने में पड़े डॉली के कपड़े उठा लाया।
डॉली ने पहले को धक्का देकर नीचे गिराया और फिर शर्ट के बटन खोलने लगी।
उसने दूसरे से अपने कपड़े लिये। बड़े इत्मिनान से उन्हें पहना और फिर शर्ट उठा ली।
उसने दोनों को कहर भरी निगाहों से देखा और गुर्राई—“तुम जगवीर के कुत्ते तो हो—लेकिन तुम्हें उसका पता नहीं मालूम इसी वजह से तुम्हारी जान बची है—वर्ना अब तक इसकी तरह तुम भी लाशों में तब्दील हो चुके होते।”
दोनों के चेहरों पर हल्की-सी राहत उभर आई। लेकिन खौफ अभी भी बरकरार था।
“फिर भी....सांप तो हो ही तुम....! क्या पता कब डस लो।” डॉली बोली—“इलाके की पुलिस के आने तक तुम बेहोश ही रहो तो बेहतर होगा।”
कहने के साथ ही उसने अपने सामने खड़े दूसरे की कनपटी पर घूंसा दे मारा।
दूसरा उछलकर पीछे गिरा।
एकबारगी उसने उठने की कोशिश की—फिर वह अंधेरे की गर्त में डूबता चला गया।
उसी तरह उसने पहले को भी बेहोश कर दिया। उसने जरा भी प्रतिरोध नहीं किया।
दोनों को बेहोश कर डॉली पीछे खिड़की की तरफ बढ़ी।
खिड़की के करीब आकर उसने उसका पल्ला खोला और आवाज लगाई—
“भैया रंगीला!”
शीघ्र ही रंगीला खिड़की के बाहर खड़ा था।
“आ जाओ।”
कहते हुए डॉली पीछे हट गई।
रंगीला खिड़की में से कूद कर भीतर आ गया।
भीतर आते ही उसकी नजरें बेहोश पड़े दोनों गुण्डों पर पड़ीं तो वह फौरन बोल पड़ा—
“य....यही थे वे दोनों जो आपको होटल से लेकर आये थे और यह....।” कहते हुए जैसे ही उसने तीसरे को देखा, उसका कलेजा कांप उठा। आवाज वहीं-की-वहीं ठहर गई।
लाश की कनपटी में घुसी रिवॉल्वर बड़ी ही भयानक लग रही थी।
तभी पीछे से डॉली ने उसके कंधे पर हाथ रखा।
बुरी तरह से चिहुंक उठा रंगीला और डॉली की तरफ देखा।
उसके पसीने से तर-बतर चेहरे को देख डॉली मुस्कुरा दी।
“कमाल है।” वह बोली—“डॉली का भाई—और इतने छोटे दिल का मालिक।”
“म....मैंने आज तक किसी की लाश नहीं देखी न....इसलिये।”
हड़बड़ाते हुए रंगीला ने आस्तीन से मुंह पोंछा।
“अभी एक और है गेट पर।” डॉली बोली।
“वो भाग गया है।”
“क्या?”
“हां....आप ने जब मुझे बाहर भेजा तो मैंने सोचा कि क्यों न मैं गेट वाले को काबू करके आपका हाथ बटाऊं—मैंने सोच ही लिया—मगर हिम्मत नहीं पड़ रही थी। उधर जब भीतर से गोली चलने की आवाजें आईं तो मैं और घबरा गया। समझ में नहीं आया कि क्या करूं। आखिर हिम्मत करके मैंने बाहर से भीतर झांका। उसने खिड़की की तरफ इशारा किया—उस वक्त यह आप पर रिवॉल्वर फैंक रहा था—जिसे आपने कैच कर लिया था। आपको कुशल देख मेरी हिम्मत बढ़ी और तब मैं गेटमैन को काबू करने के लिये गेट की तरफ बढ़ा। जब मैंने दूर गेटमैन को देखा तो वह मोबाईल पर किसी से बात कर रहा था—और फिर मेरे देखते-ही-देखते वह गेट खोलकर बाहर निकल गया।”
“ओह!” डॉली के मुंह से निकला—“फिर तो यहां ठहरना बेकार है।”
“क्या मतलब?”
“यहां मुझे जगवीर के लिये लाया गया था। लगता है भीतर हुई गोलीबारी की आवाज सुनकर गेटमैन ने जगवीर को सूचित कर दिया होगा। ऐसे में वह यहां आने की बेवकूफी हरगिज नहीं करेगा।”
“यह जगवीर वही तो नहीं—जिसका हाथ हाल ही में हुए बम धमाकों में था।”
“हां....उसी जगवीर की तलाश में मैं यहां आई थी।”
“ओह!”
“खैर, कोई बात नहीं....अब वह बचकर नहीं जा सकता। वह जिस भी बिल में छुपा है—मैं उसे निकाल लूंगी।”
रंगीला कुछ नहीं बोला—बस सिर हिला दिया।
“आओ....चलें।” डॉली बोली।
दोनों बाहर की तरफ बढ़ गये।
रंगीला ने ठीक ही कहा था—गेट पर से गेटमैन गायब था।
“आप यहीं रुको....मैं बाईक लेकर आता हूं।”
कोठी से बाहर आकर बोला रंगीला और उधर बढ़ गया जिधर कि उसने बाईक खड़ी की थी।
डॉली वहीं गेट के पास खड़ी उसका इंतजार करने लगी।
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“कपड़े उठा मेरे।” उसने दूसरे को घूरते हुए कहा।
दूसरा उठा और कोने में पड़े डॉली के कपड़े उठा लाया।
डॉली ने पहले को धक्का देकर नीचे गिराया और फिर शर्ट के बटन खोलने लगी।
उसने दूसरे से अपने कपड़े लिये। बड़े इत्मिनान से उन्हें पहना और फिर शर्ट उठा ली।
उसने दोनों को कहर भरी निगाहों से देखा और गुर्राई—“तुम जगवीर के कुत्ते तो हो—लेकिन तुम्हें उसका पता नहीं मालूम इसी वजह से तुम्हारी जान बची है—वर्ना अब तक इसकी तरह तुम भी लाशों में तब्दील हो चुके होते।”
दोनों के चेहरों पर हल्की-सी राहत उभर आई। लेकिन खौफ अभी भी बरकरार था।
“फिर भी....सांप तो हो ही तुम....! क्या पता कब डस लो।” डॉली बोली—“इलाके की पुलिस के आने तक तुम बेहोश ही रहो तो बेहतर होगा।”
कहने के साथ ही उसने अपने सामने खड़े दूसरे की कनपटी पर घूंसा दे मारा।
दूसरा उछलकर पीछे गिरा।
एकबारगी उसने उठने की कोशिश की—फिर वह अंधेरे की गर्त में डूबता चला गया।
उसी तरह उसने पहले को भी बेहोश कर दिया। उसने जरा भी प्रतिरोध नहीं किया।
दोनों को बेहोश कर डॉली पीछे खिड़की की तरफ बढ़ी।
खिड़की के करीब आकर उसने उसका पल्ला खोला और आवाज लगाई—
“भैया रंगीला!”
शीघ्र ही रंगीला खिड़की के बाहर खड़ा था।
“आ जाओ।”
कहते हुए डॉली पीछे हट गई।
रंगीला खिड़की में से कूद कर भीतर आ गया।
भीतर आते ही उसकी नजरें बेहोश पड़े दोनों गुण्डों पर पड़ीं तो वह फौरन बोल पड़ा—
“य....यही थे वे दोनों जो आपको होटल से लेकर आये थे और यह....।” कहते हुए जैसे ही उसने तीसरे को देखा, उसका कलेजा कांप उठा। आवाज वहीं-की-वहीं ठहर गई।
लाश की कनपटी में घुसी रिवॉल्वर बड़ी ही भयानक लग रही थी।
तभी पीछे से डॉली ने उसके कंधे पर हाथ रखा।
बुरी तरह से चिहुंक उठा रंगीला और डॉली की तरफ देखा।
उसके पसीने से तर-बतर चेहरे को देख डॉली मुस्कुरा दी।
“कमाल है।” वह बोली—“डॉली का भाई—और इतने छोटे दिल का मालिक।”
“म....मैंने आज तक किसी की लाश नहीं देखी न....इसलिये।”
हड़बड़ाते हुए रंगीला ने आस्तीन से मुंह पोंछा।
“अभी एक और है गेट पर।” डॉली बोली।
“वो भाग गया है।”
“क्या?”
“हां....आप ने जब मुझे बाहर भेजा तो मैंने सोचा कि क्यों न मैं गेट वाले को काबू करके आपका हाथ बटाऊं—मैंने सोच ही लिया—मगर हिम्मत नहीं पड़ रही थी। उधर जब भीतर से गोली चलने की आवाजें आईं तो मैं और घबरा गया। समझ में नहीं आया कि क्या करूं। आखिर हिम्मत करके मैंने बाहर से भीतर झांका। उसने खिड़की की तरफ इशारा किया—उस वक्त यह आप पर रिवॉल्वर फैंक रहा था—जिसे आपने कैच कर लिया था। आपको कुशल देख मेरी हिम्मत बढ़ी और तब मैं गेटमैन को काबू करने के लिये गेट की तरफ बढ़ा। जब मैंने दूर गेटमैन को देखा तो वह मोबाईल पर किसी से बात कर रहा था—और फिर मेरे देखते-ही-देखते वह गेट खोलकर बाहर निकल गया।”
“ओह!” डॉली के मुंह से निकला—“फिर तो यहां ठहरना बेकार है।”
“क्या मतलब?”
“यहां मुझे जगवीर के लिये लाया गया था। लगता है भीतर हुई गोलीबारी की आवाज सुनकर गेटमैन ने जगवीर को सूचित कर दिया होगा। ऐसे में वह यहां आने की बेवकूफी हरगिज नहीं करेगा।”
“यह जगवीर वही तो नहीं—जिसका हाथ हाल ही में हुए बम धमाकों में था।”
“हां....उसी जगवीर की तलाश में मैं यहां आई थी।”
“ओह!”
“खैर, कोई बात नहीं....अब वह बचकर नहीं जा सकता। वह जिस भी बिल में छुपा है—मैं उसे निकाल लूंगी।”
रंगीला कुछ नहीं बोला—बस सिर हिला दिया।
“आओ....चलें।” डॉली बोली।
दोनों बाहर की तरफ बढ़ गये।
रंगीला ने ठीक ही कहा था—गेट पर से गेटमैन गायब था।
“आप यहीं रुको....मैं बाईक लेकर आता हूं।”
कोठी से बाहर आकर बोला रंगीला और उधर बढ़ गया जिधर कि उसने बाईक खड़ी की थी।
डॉली वहीं गेट के पास खड़ी उसका इंतजार करने लगी।
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