आउटस्टैंडिंग अपडेट अंकिता जी !
वैशाली ने बिल्कुल सही कहा पंच तत्वों के बारे में । हमारे पौराणिक कथाओं में इसका वर्णन किया गया है ।
शरीर पांच तत्वों से बना है - पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु और आकाश ।
पृथ्वी - पृथ्वी से हमारा भौतिक शरीर बनता है । जिन तत्वों - धातुओं और अधातुओं - से पृथ्वी बनी उन्हीं से हमारे भौतिक शरीर की रचना हुई है ।
जल - जल मतलब तरलता से है । जितने भी तरल तत्व - पानी , खून , शरीर में बनने वाले सभी तरह के रस , एंजाइम - वे सभी जल तत्व है । इसे आयुर्वेद में कफ के नाम से जाना जाता है ।
अग्नि - यह उर्जा , ऊष्मा , शक्ति और ताप का प्रतीक है । हमारे शरीर में जितनी गर्माहट है , सब अग्नि तत्व से है । यह तत्व भोजन को पचाकर शरीर को स्वस्थ रखता है । इसे आयुर्वेद में पित के नाम से जाना जाता है ।
वायु - जिनमें प्राण है , इन सभी में वायु तत्व है । हम सांस के रूप में हवा ( आक्सीजन ) लेते हैं , जिससे हमारा जीवन है । इसे आयुर्वेद में वात नाम से जानते हैं ।
आकाश - ये अभौतिक रूप से मन है । जैसे आकाश अनन्त है वैसे ही मन की भी कोई सीमा नहीं है । जैसे आकाश अनन्त ऊर्जाओं से भरा है , वैसे ही मन की शक्ति की कोई सीमा नहीं है
। आकाश में कभी बादल , कभी धुल नजर आते हैं तो कभी वो बिल्कुल साफ होता है , वैसे ही मन भी कभी खुशी , कभी उदास तो कभी शांत रहता है ।
इन पंचतत्व से उपर एक तत्व है - आत्मा ।
इसके होने से ही ये पंचतत्व अपना काम करते हैं ।
हमारे हाथ की पांच उंगलियां इन्हीं पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती है । अंगूठा अग्नि का , तर्जनी वायु का , मध्यमा आकाश का , अनामिका पृथ्वी का और कनिष्का जल का प्रतिनिधित्व करती है । इन उंगलियों में विद्युत धारा प्रवाहित होती है ।
वैशाली का कहना कि इन पंचतत्वों को अपने आध्यात्म और योग से काबू किया जा सकता है... बिल्कुल सही है ।
स्टोरी में बाद की दो घटनाएं शायद फ्लैश बैक से जुड़ी हुई लग रही है । जयपुर के एक कालेज में आरती का प्रोजेक्ट बनाना और होटल मेघदूत में आशा का कत्ल । इन दोनों का जिक्र पहले कभी आया नहीं तो इनके बारे में कुछ कहना वाजिब नहीं है ।
एक और चमत्कारिक अपडेट अंकिता जी ।
वैशाली ने बिल्कुल सही कहा पंच तत्वों के बारे में । हमारे पौराणिक कथाओं में इसका वर्णन किया गया है ।
शरीर पांच तत्वों से बना है - पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु और आकाश ।
पृथ्वी - पृथ्वी से हमारा भौतिक शरीर बनता है । जिन तत्वों - धातुओं और अधातुओं - से पृथ्वी बनी उन्हीं से हमारे भौतिक शरीर की रचना हुई है ।
जल - जल मतलब तरलता से है । जितने भी तरल तत्व - पानी , खून , शरीर में बनने वाले सभी तरह के रस , एंजाइम - वे सभी जल तत्व है । इसे आयुर्वेद में कफ के नाम से जाना जाता है ।
अग्नि - यह उर्जा , ऊष्मा , शक्ति और ताप का प्रतीक है । हमारे शरीर में जितनी गर्माहट है , सब अग्नि तत्व से है । यह तत्व भोजन को पचाकर शरीर को स्वस्थ रखता है । इसे आयुर्वेद में पित के नाम से जाना जाता है ।
वायु - जिनमें प्राण है , इन सभी में वायु तत्व है । हम सांस के रूप में हवा ( आक्सीजन ) लेते हैं , जिससे हमारा जीवन है । इसे आयुर्वेद में वात नाम से जानते हैं ।
आकाश - ये अभौतिक रूप से मन है । जैसे आकाश अनन्त है वैसे ही मन की भी कोई सीमा नहीं है । जैसे आकाश अनन्त ऊर्जाओं से भरा है , वैसे ही मन की शक्ति की कोई सीमा नहीं है
। आकाश में कभी बादल , कभी धुल नजर आते हैं तो कभी वो बिल्कुल साफ होता है , वैसे ही मन भी कभी खुशी , कभी उदास तो कभी शांत रहता है ।
इन पंचतत्व से उपर एक तत्व है - आत्मा ।
इसके होने से ही ये पंचतत्व अपना काम करते हैं ।
हमारे हाथ की पांच उंगलियां इन्हीं पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करती है । अंगूठा अग्नि का , तर्जनी वायु का , मध्यमा आकाश का , अनामिका पृथ्वी का और कनिष्का जल का प्रतिनिधित्व करती है । इन उंगलियों में विद्युत धारा प्रवाहित होती है ।
वैशाली का कहना कि इन पंचतत्वों को अपने आध्यात्म और योग से काबू किया जा सकता है... बिल्कुल सही है ।
स्टोरी में बाद की दो घटनाएं शायद फ्लैश बैक से जुड़ी हुई लग रही है । जयपुर के एक कालेज में आरती का प्रोजेक्ट बनाना और होटल मेघदूत में आशा का कत्ल । इन दोनों का जिक्र पहले कभी आया नहीं तो इनके बारे में कुछ कहना वाजिब नहीं है ।
एक और चमत्कारिक अपडेट अंकिता जी ।