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रजनी की हालत ऐसी हो रही थी की उसे किचन से बाथरूम तक का सफ़र कोसो दूर लग रहा था...
वो अपनी गीली छूट को जाँघो के बीच दबाती हुई धीरे-2 कदमो से उस तरफ जा रही थी ,
और उसकी चूत हर कदम पर जांघो के बीच दबकर निम्बू की तरह खुद ब खुद निचुड़ रही थी

इस वक़्त अगर उसकी रसीली गांड पर कोई ज़ोर से चांटा मारता तो चूत में से झनझनाकर गाड़े रस की बारिश हो जाती..

उसने कुरती और नीचे एक ढीला सा पयज़ामा पहना हुआ था, कुरती उसने निकाल फेंकी और ब्रा भी खोल कर नीचे गिरा दी...
इतनी बेशरम शायद वो आज से पहले कभी नही हुई थी जब उसकी बेटी घर पर हो और वो राजेश के साथ ऐसी रासलीला मनाने जा रही हो..
पर इस वक़्त शायद उसका खुद पर भी काबू नही रह गया था और ये बात उसके खड़े हुए निप्पल्स सॉफ दर्शा रहे थे...
नंगे होने के बाद उसके मुम्मे और उनपर लगे निप्पल्स और भी कठोर हो चुके थे.

अब तो बस उसका मन कर रहा था की राजेश उन्हे पकड़े और निचोड़ डाले...
अंदर ही अंदर उसकी रगों में जो मीठा सा दर्द उठ रहा था वो इसी तरीके से जा सकता था.

उसने जल्दी से अपना पायजामा भी उतार फेंका और बाथरूम के अंदर जा घुसी.

अंदर का नज़ारा देखकर उसके तन बदन की आग और भी भड़क उठी...
राजेश अपने पूरे शरीर में साबुन लगाकर अपने खड़े लंड को बड़े ही प्यार से अपने हाथो में लेकर मसल रहा था...
शायद ईशा के जवान जिस्म को सोचकर वो अपने नाग को सहला कर शांत करने की कोशिश कर रहा था.

उसने भी जब रजनी को नंगी ही अंदर आते देखा तो उसके हाथो की गति और तेज हो गयी...
पर फिर उसने हाथो को बड़ी मुश्किल से रोका, क्योंकि ऐसा करके तो वो खुद ही अपना माल निकाल देता और फिर रजनी को बुलाने का कोई मतलब ही नही रह जाना था.

और आज तो उसे रजनी की चूत अच्छी तरह से चोदनी थी...
उसने रजनी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अपने गले से लगाकर उसके पूरे शरीर पर अपना बदन रगड़ने लगा...उसके होंठो को मुँह में लेकर उन्हे चूसने लगा और उसकी देसी शराब जैसे होंठो का मज़ा लेने लगा.

रजनी भी अपने भरे पूरे मुम्मो को राजेश के बदन से रगड़कर अपनी खुजली कम करने की कोशिश करने लगी... राजेश ने उसे सामने से पूरा रगड़ा और फिर उसे पलटाकार उसकी गांड से चिपक गया और अपने हाथ आगे करके उसके मोटे मुम्मो को अपने हाथो से निचोड़ने लगा.

उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या जादू था राजेश के हाथो में...
इन्फेक्ट मुम्मो को कैसे निचोड़ा जाता है ये एक मर्द ही अच्छे से जान सकता है
यही तो सोचती हुई आ रही थी वो की उसका पति उसके मुम्मो को पकड़े और निचोड़ डाले.

राजेश के हाथ उसके मुम्मो पर फिसलकर उनकी मसाज करने लगे..

साथ ही साथ वो उसकी भरंवा गांड पर अपने खड़े लंड की रगड़ाई भी कर रहा था...
साबुन की फिसलन इतनी थी की वो अगर अपने लंड को पकड़कर उसकी गांड पर लगाता तो भी वो वहाँ जा घुसता...
हालाँकि आज तक राजेश ने कभी गांड नही मारी थी रजनी की पर अब शायद शेफाली की कृपा से वो काम भी कर सकता था...
पर ये जगह पहली बार गांड मरवाई के लिए सही नही थी क्योंकि उसमे दर्द भी होना था उसे
और इस वक़्त वो उसे दर्द नही बल्कि मज़े देना चाहता था
 
पर मज़े देने के बारे में तो रजनी ने भी सोच रखा था,
वो पलटी और नीचे बैठकर उसने राजेश के लंड को पकड़ लिया...
एक बार फिर से अपने लंड की चुसाई के बारे में सोचते ही उसका लंड और कड़क हो उठा...
रजनी ने बड़े प्यार से राजेश के कड़क लंड को देखा और अपनी जीभ निकाल कर उसे चाटने लगी..
राजेश ने शावर ओंन कर दिया था ताकि उन दोनो के जिस्म की गर्मी कम भी होती रहे.

कुछ देर तक लंड को जीभ से चाटने के बाद वो उसे निगल गयी और जोरों से चूसने लगी.

राजेश ने बड़ी मुश्किल से अपने आप को झड़ने से बचाया जब रजनी ने अपनी पूरी ताकत से उसके लंड को चूसा और उसकी बाल्स को अपने हाथो से मसला.

ये नये-2 तरीके पता नही रजनी कहाँ से सीख रही थी पर उसे भी अब इन सबको करने में काफ़ी मज़ा मिल रहा था..

अब राजेश के बस की बात नही रह गयी थी और देर तक रुके रहना..
उसने रजनी को खड़ा किया आर उसकी एक टाँग उठा कर उसे कमान की तरह तिरछा किया और उसकी चूत में तीर की तरह अपना लंड पेल दिया.

''आआआआआआआआअहह मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गयी...................... उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़...... धीरे राजेश..........तुम तो फाड़ ही डालोगे मेरी चूत को.....''

ये उसने इसलिए कहा था क्योंकि राजेश का तरीका बड़ा ही वहशियाना था...
आज तक उसने इतनी ज़ोर से झटका मारकर अपना लंड अंदर नही डाला था...
पर ये शायद उसकी उत्तेजना थी या फिर इतनी देर से खड़े लंड की फरमाइश जो उसने ऐसा तरीका अपनाया था उसकी चूत में जाने का.

एक हाथ से उसने जाँघ को पकड़ा और दूसरे से उसकी गांड को सहारा दिया ताकि वो नीचे ना गिर जाए...
रजनी ने भी अपने लचीले शरीर को पूरा खोलकर सामने वाली दीवार पर अपना पैर टीकाया और राजेश के लंड को अंदर बाहर करते हुए उसके मज़े लेने लगी..

और जब रजनी चीखी थी तो अपने रूम में नंगी होकर अपने कपड़े पहनने की कोशिश कर रही ईशा भी चोंक गयी....
अपनी माँ की चीख और बाद में आ रही सिसकारियों का ऐसा असर हुआ उसपर की वो कपड़े पहनना छोड़कर नंगी ही बिस्तर पर लेट गयी और अपनी गीली चूत को बुरी तरह से रगड़ने लगी..

और अपनी अधूरी चुदाई की शिकायत करती हुई बुदबुदाने लगी.

''आआआआहह......पापा......गंदे पापा.....मोंम को चोद रहे हो....आआआहह......मुझे कब.... उम्म्म्ममम चोदोगे पापा..... कितने गंदे हो आप..... कल रात भी नही किया....अहह और आज भी नही...... कर तो सकते थे ना ....अभी.... बाथरूम में ...जैसे मोंम को फक्क कर रहे हो....वैसे ही.... मुझे भी कर देते........अहह......बड़े गंदे हो आप.....आई हेट यू पापा.........गंदे पापा........उननननहहहह ''

और ये बड़बड़ाते हुए उसकी आँखो के सामने पापा का नंगा लंड भी नाच रहा था....
जिसे वो इस वक़्त अपनी चूत में महसूस कर रही थी उंगली के रूप में...
और उसी एहसास को एक आनंदमयी सिसकारी के साथ अंदर तक महसूस करके वो झड़ गयी....
10 मिनट में ये दूसरी बार था जब वो झड़ी थी पर उसकी प्यास अभी भी नही बुझी थी.

दूसरी तरफ राजेश ने रजनी को घुमाकर उसका मुँह सामने कर दिया और उसकी दोनो बाहें पकड़कर अपना लंड उसकी बुर में पेलकर उसे पीछे से चोदने लगा.

ये एक ऐसा पोज़ था जिसमें उसका गीला लंड उसकी रसीली चूत में अंदर तक ठोकर मार रहा था.

हर झटके से रजनी के मुम्मे उछलकर उसके चेहरे से टकराने की कोशिश करते और फिर वापिस आकर उसकी छाती पर ठोकर मारते...
पीछे से राजेश के लंड की ठोकर और आगे से उसके खुद के मुम्मो का प्रहार उस से सहन नही हो रहा था.

वो चीखने लगी

चिल्लाने लगी
''आआआआआआआआआहह साआआआआआआआाालल्ल्ले.........मार डाला..... अहह........ फकककककककक मिईिइ राजेश.......... ऐसे ही.....मारो मेरी ......अहह...... चूऊऊऊऊऊऊऊऊत....... म्‍म्म्ममममममम ममममममममम ....... मैं तो गयी......... मैं ग...ईईईईईईईईईईईईई आआआआआहहहहहह ''

और एक लंबी सिसकारी मारकर उसने राजेश के लंड का अभिषेक कर दिया अपनी चूत के रस से.

और राजेश ने भी उसकी भरंवा गांड मसलते हुए उसकी चूत के लॉकर में अपने लंड का पानी डिपॉज़िट करवाना शुरू कर दिया....
पर वो माल इतना ज़्यादा था की बैंक का लॉकर तोड़कर बाहर तक आ गया और जाँघो से होता हुआ पानी में बहने लगा..

उसके बाद दोनो ने एक दूसरे के शरीर को अच्छी तरह से सॉफ किया, और नहा धोकर अपने कमरे में आ गये.

तब तक अपने कमरे में नंगी लेटी ईशा ने भी अपने कपड़े पहन लिए थे और अपनी सुबकती हुई चूत को दिलासा देकर उसे जल्द ही पापा के लंड से मिलवाने का वादा भी किया उसने.

रजनी जल्दी से कपड़े पहन कर वापिस किचन में चली गयी,
उसे अभी नाश्ता भी तैयार करना था और राजेश के लिए लंच भी पेक करना था.
 
राजेश अपने कमरे में तैयार हो ही रहा था की तभी उसका ध्यान घर की सफाई करती पिंकी पर गया...
वो उनके घर की नौकरानी थी, जो करीब 2 साल से उनके घर का काम किया करती थी...
देखने में काफी सैक्सी थी, साँवले रंग के बावजूद एक आकर्षण था उसके चेहरे पर...शरीर कसा हुआ था था.

राजेश ने आज तक उसके बारे में कभी दूसरी तरह से नही सोचा था
पर आज वो सोच रहा था और सोचते-2 उसने एक प्लान भी बना लिया...
और ऐसा प्लान जिसमें खुद रजनी उसे उसके सामने परोसेगी.

मुस्कुराते हुए उसने अपनी ड्रॉयर खोली और उसमें से शेफाली वाला नेकलेस निकाल लिया,
उसे देखते हुए वो सोचने लगा की आज तक वो टेबल के दूसरी तरफ बैठकर उस हार के बारे में सोचा करता था पर आज वो टेबल के इस तरफ आकर बैठ चुका था और अब वो उस हार की असलियत जानता था..
हालाँकि उसमें ऐसी कोई शक्ति नही थी जो उसके पहनने वाले को उसके प्रति सेक्सुअली अट्रेक्ट करे पर आज जो उसने प्लानिंग की थी उसके बाद उस हार में वो शक्ति आने वाली थी..

फिर उसने पिंकी को देखा और बोला : "अर्रे पिंकी, ये देखो ज़रा...कैसा हार है ये...''

पिंकी ने उसे देखा तो उसकी आँखे चमक उठी...
उसे हाथ मे लेते हुए बोली : "अर्रे वाह , ये तो बहुत अक्चा हार है साहब...मेमसाब का है क्या ''

राजेश : "अर्रे नही...ये तो बस ऐसे ही ऑनलाइन मंगवाया था....पर उसका नही है....उसे पसंद भी नहीं आया, मैं सोच रहा था की ये तुम रख लो...''

पिंकी ने चौंकते हुए उसे देखा और उसे वापिस देते हुए बोली बोली : "नही साहब...मैं कैसे...?? ''

राजेश ने ज़बरदस्ती उसके हाथ में वो हार धकेलते हुए कहा : " अर्रे चिंता मत करो...तुम रखो...मैं बोल रहा हूँ ना...रजनी के लिए मंगवाया था पर उसे पसंद नही है...इसलिए तुम रख लो,''

राजेश के इस गिफ्ट को पाकर उसका चेहरा खिल उठा...
वो भी सोचने लगी की इस खड़ूस को अचानक क्या हो गया...
आज तक उसे ढंग से देखा तो है नही और आज एकदम से उसे गिफ्ट दे रहा है...
कही उसपर लाइन तो नही मार रहा...
वैसे मार भी रहा है तो उसे बुरा थोड़े ही लगेगा...
इतने हेंडसम है साहब.

ये सोचकर वो खुद ही शर्मा गयी और उसने तुरंत राजेश के दिए गिफ्ट को अपने गले में डाल लिया...
और फिर गुनगुनाते हुए घर की सफाई करने लगी.

राजेश भी मुस्कराते हुए कमरे से निकलकर बाहर आया और डाइनिंग टेबल पर बैठकर उसने नाश्ता किया और फिर टिफ़िन लेकर वो अपने हॉस्पिटल की तरफ चल दिया....

उसने अपना जाल फेंक दिया था, अब बाकी का काम शेफाली के हार ने करना था.
 
हार पहेन्ने के बाद टोपींकी खुद को कहीं की महारानी समझ रही थी...उसने अपनी सॅडी का आँचल तोड़ा और नीचे किया ताकि हार पूरा दिखाई दे...बातरूम मे जाकर वो काफ़ी देर तक उसे निहारती भी रही.

फिर वो एक गाना गुनगुनाती हुई घर का काम करने लगी...
आज सच में उसे अंदर से खुशी हो रही थी...
शादी को 5 साल हो चुके थे उसकी पर आज तक उसके बेवड़े पति ने एक भी गिफ्ट नही दिया था उसे...
हालाँकि दूसरे घरों में काम करने की वजह से वहां की मेमसाब् पुराने कपड़े दे दिया करती थी पर आज तक किसी ने ऐसा नया हार नही दिया था.

ईशा अपने रूम में नाश्ता करने के बाद दवाई लेकर फिर से सो गयी..
रजनी बैठ कर अपना सीरियल देख ही रही थी की तभी उसकी नज़र पिंकी के गले में पड़े नेकलेस पर गयी...
और उसे देखते ही उसके तोते उड़ गये.

वो लगभग चिल्लाते हुए बोली : "अर्रे पिंकी.....ये....ये हार तेरे पास कैसे....''

वो मुस्कुराते हुए बोली : "ये....ये तो साहब ने दिया है मुझे....''

रजनी ने अपना माथा पीट लिया...
ये राजेश को क्या हो गया है...
ये उसे क्यों दे दिया...
आज तक की जो प्लानिंग उन लोगो ने की थी वो इसी हार के इर्द गिर्द ही तो थी...
अगर ये हार पिंकी के पास चला गया तो उनका सारा प्लान ही खराब हो जाएगा...
वैसे तो राजेश को इस बात का अब भरोसा हो चुका था की सिर्फ़ हार को पहनने मात्र से ही शेफाली की आत्मा उस शरीर पर जादू सा कर देती है, बाद में वो हार पहना हो या ना पहना हो, शेफाली का वो जादू बरकरार ही रहता है...
और अभी तक वो, ईशा और चाँदनी तो उस हार को पहन कर मज़े भी ले चुके थे...
पर अभी तो राधिका भी बची थी और हो सकता है बाद में भी वो हार काम आता.

लेकिन राजेश ने वो हार पिंकी को देकर उनके सारे मंसूबों पर पानी ही फेर दिया था.

और पिंकी को वो हार देने के 2 ही मतलब ही सकते थे....
एक, वो उस हार को उसे देकर अपने घर से शेफाली के साए को दूर करना चाहता था ,
दूसरा, वो शायद ये हार पिंकी को देकर उसके उपर भी शेफाली का असर देखना चाहता था...
यानी राजेश का मन पिंकी को चोदने का था.

नही नही....
ऐसा नही हो सकता....
जब राजेश के सामने इतने अच्छे विकल्प है, कच्ची जवानियां है तो वो उस कामवाली के पीछे क्यों भागेगा.

पर ये भी तो हो सकता है की वो देखना चाहता हो की उस हार का असर पिंकी पर होता है या नही...
हाँ , ये पासिबल है,
और शायद इसलिए उसने ऑफीस जाने से पहले वो हार उसे दिया हो ताकि शाम तक या कल उसका असर देखने को मिल जाए..

पर कोई जादू या शेफाली की आत्मा हो तभी तो असर होगा,
ये तो उन सबका प्लान था जो आपस में मिलकर बनाया गया था...
पर अब पिंकी के बीच में आ जाने से उस प्लान की ऐसी तैसी हो चुकी थी.

उसने तुरंत राधिका को कॉल मिलाया और उसे विस्तार से सारी बाते बताई...
और जिन बातों का उसे अंदेशा हो रहा था वो भी बताया.

राधिका भी चकरा गयी इस बात को सुनकर...
फिर दोनो ने यही उपाय निकाला की या तो पिंकी को अपने खेल में शामिल कर लो या फिर उसे एक्टिंग करने के लिए कहा जाए ताकि राजेश का भरोसा उस हार पर बना रहे. और साथ ही उससे वो हार भी वापिस ले लिया जाए.

उस कामवाली को अपने प्लान में शामिल करने का तो सवाल ही नही उठता था,
वो 10 घरों में काम करने वाली औरत अगर बाहर जाकर ये बोल दे की राजेश की बीबी और बेटी ने उसका लंड लेने के लिए ये सब प्लानिंग की है तो वो दुनिया को मुँह दिखाने लायक नही रहेगी.

इसलिए उसे पटाकर राजेश के साथ चुदाई के लिए तैय्यार करवाना पड़ेगा...
और उससे वो हार भी वापिस लेना पड़ेगा
यही सही ऑप्शन था.

कुछ देर बाद जब पिंकी घर का सारा काम निपटा कर जाने लगी तो रजनी ने उसे अपने कमरे में आने के लिए कहा...

उसके अंदर आते ही रजनी ने उसके हाथ में 500 का नोट रख दिया और बोली : "ये पैसे रख ले और आज से अगले 3-4 दिन तक मेरे बदन की मालिश भी कर दिया कर...पिछले कुछ दिनों से काफ़ी दर्द हो रहा है..''

पहले हार और अब 500 रुपय पाकर पिंकी तो खुशी के मारे चहकने ही लगी...

वो बोली : "ठीक है मेमसाब्....आप कपड़े निकालो, मैं तेल गर्म करके लाती हूँ ''

और वो पैसे अपने ब्लाउज़ में ठूसकर वो किचन में चल दी.
 
रजनी भी इन लोगो का नेचर अच्छे से जानती थी, इसलिए पहले ही पैसे दिखाकर उसे खुश कर दिया ताकि बाद में वो उस काम के लिए मना ना कर पाए..

एक बार पहले भी उसने पिंकी से मालिश करवाई थी, तब उसे 50 रुपय दिए थे.और तब उसने ब्लाउज़ और पेटीकोट पहन कर मालिश करवाई थी...
पर आज उसने वो दोनो चीज़े भी उतार दी और सिर्फ़ पेंटी और ब्रा में अपने बेड पर लेट गयी.

जब पिंकी अंदर आई तो एक पल के लिए रजनी को ऐसी अवस्था में लेटे देखकर वो चोंक गयी...
पर फिर मंद-2 मुस्कुराते हुए वो बेड के किनारे पर बैठी और गर्म तेल लेकर रजनी के कंधे और बाजुओं को रगड़ने लगी.

पिंकी : "आप तो कपड़ो के अंदर और भी ज़्यादा सुंदर दिखते हो मेमसाब्...साहब तो देखकर पागल हो जाते होंगे इतने गोरे जो हो आप...''

रजनी : "होरे रंग से क्या होता है...दिखने में सैक्सी होना चाहिए...छाती और गांड में चर्बी होनी चाहिए, कोई भी मर्द खुश हो जाएगा...''

पिंकी भी अपनी रजनी के मुंह से इतनी खुली बातों को सुनकर खिलखिला कर हंस दी..

पिंकी : "आप सही बोली मेमसाब्...पर मेरा मरद है ना...वो तो गोरे रंग को देखकर लार टपकाता है....वो तो एक दिन आपके बारे में भी...''

कहते-2 वो रुक गयी...

रजनी के पूरे शरीर में चींटियां सी रेंगने लगी जब उसने ये सुना तो....

वो बोली : "क्या बोला तेरा मरद ....बोल ना....क्या बोला बिरजू''

पिंकी : "वो...वो कुछ नहीं ...बस ऐसे ही....सॉरी...ग़लती से निकल गया...''

रजनी : "देख, जल्दी से बोल, मैं कुछ नही कहूँगी...''

पिंकी (डरते-2 बोली) : "वो...वो उस दिन जब घर की चाबी लेने यहाँ आया था और आपको देखा था तो..तो....रात को...मेरे उपर चड के....वो...बोल रा था....की...''

रजनी : "अर्रे, आगे भी बोल, क्या बोल रहा था....तेरी तो गाड़ी ही रुक गयी...''

पिंकी : "वो बोल रहा था की तेरी मेमसाब् कितनी चिकनी है...मेरे नीचे आए तो फाड़ कर रख दूँ उनकी...''

पिंकी का पति बिरजू दिहाड़ी पर काम करने वाला एक मजदूर था, जो कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करता था

रजनी का दिल धक्क से रह गया ये सुनकर...
वैसे वो अक्सर रिक्शे वाले या धोबी को देखकर उत्तेजित हो जाया करती थी...
पर इस तरह एक मजदूर के दिल की बात अपने बारे में सुनकर उसकी चूत में पानी ज़रूर भर आया...
और निप्पल भी गर्व के मारे फूल कर कुप्पा हो गये..

पिंकी ने उसके बाद कोई वैसी बात नही की...
बस धीरे-2 रजनी के बदन पर तेल लगाती रही...
जब वो कमर से नीचे तेल लगा रही थी तो रजनी ने हाथ नीचे करके अपनी पेंटी उतार दी....
अब उसकी नंगी और चिकनी गांड पिंकी की आँखो के सामने थी.

एक पल के लिए तो बेचारी पिंकी की समझ में भी नही आया की उसकी मेमसाब् ऐसा क्यों कर रही है...
पर अभी जो वाक़या हुआ था उसके बाद उसकी ज़ुबान पर जैसे ताला लग गया था,
इसलिए गर्म तेल लेकर वो उसके दोनो चूतड़ों को रगड़ने लगी.

रजनी की चूत इस वक़्त बुरी तरह पनिया रही थी....
शायद बिरजू की बात सुन सुनकर और उसके बारे में सोचकर...
वो आँखे बंद किए सोच रही थी की बिरजू उसे घोड़ी बनाकर, पीछे से उसकी चूत को बुरी तरह से चोद रहा है.

वो अपनी जाँघो को आपस में रगड़कर चूत को सहलाने का काम भी कर रही थी,
बाकी की कसर पीछे से पिंकी के हाथ उसकी गांड को रगड़कर कर रहे थे....
एक अलग ही सेंसेशन फील हो रहा था उसे इस वक़्त.

फिर अपनी नशीली आवाज़ में रजनी बोली : "तेरे पति को तो गोरे रंग वाली मेमसाब् पसंद आती है....तुझे भी तो आते होंगे गोरे रंग वाले साब लोग पसंद...''

पिंकी ये सुनते ही मुस्कुरा उठी और बेझिझक बोली : "हाँ ...आते है ना....गोरे-2 साब लोगो का हथियार भी तो गोरा होता होगा...उसे चूसने में कितना मज़ा आएगा....''

और एक बार फिर से अपनी कही बात को बोलकर वो पछता गयी....
और अपनी जीभ को दांतो तले दबाकर अपने सिर पर एक चपत लगाई और मन ही मन खुद पर कंट्रोल करने को कहा..

और यहाँ रजनी के ख्यालात उससे अलग थे...
उसे काला पसंद था...
हालाँकि राजेश का भी कोई गोरा चिट्टा नही था...
पर उसे काला नही कहा जा सकता था...
रजनी के हिसाब से तो मोटा, काला , घने बालो से घिरा हुआ लंड उसकी उत्तेजना को किसी दूसरी ही दुनिया में ले जाएगा...
 
और एक बार फिर से वो बिरजू के मोटे और काले लंड के बारे में सोचने लगी की अगर वो मिल जाए तो कैसे वो उसे गले के अंदर तक चूस्कर निगलेगी..

पर रजनी ने फिर अपने दिमाग़ को झटका दिया...
इस वक़्त उसे दूसरे मर्द के बारे में नही सोचना था बल्कि पिंकी को अपने मर्द के लिए तैयार करना था..

और फिर अचानक बिना किसी चेतावनी के वो पलट गयी और पीठ के बल लेट गयी

पिंकी को शायद ये उम्मीद तो बिल्कुल भी नही थी उनसे...
रजनी का अधनंगा बदन उसकी आँखो के सामने था...
ख़ासकर उसकी नंगी चूत , जिसमें से गाड़ा पानी रिस-रिसकर बाहर बह रहा था.

उसकी ब्रा उसके मोटे मुम्मो को संभालने में असमर्थ थी...
इसलिए रजनी ने अपनी बा के स्ट्रेप्स भी नीचे करते हुए उसे घुमाया और ब्रा को भी निकाल फेंका अपने जिस्म से...
अब वो पूरी नंगी होकर लेटी हुई थी पिंकी के सामने...

और पिंकी अपलक रजनी के गोरे और नंगे बदन को देखकर बुत्त सी बनकर बैठी थी..

रजनी : "क्या हो गया तुझे....पहले कभी नंगी औरत नही देखी क्या...सब कुछ तेरे जैसा ही तो है...चल लगा तेल अब अच्छे से...''

पिंकी : "जी...जी मेमसाब्....''

और फिर वो जल्दी-2 अपने हाथ में तेल लेकर रजनी के मखमली बदन को रगड़ने लगी...

वो उसके मुम्मो को बड़े ही प्यार से तेल से नहलाकर रगड़ रही थी...
मानो काँच के बर्तन धो रही हो..

फिर अपनी योजना अनुसार रजनी बोल पड़ी : "अच्छा सोच....अगर तुझे मौका मिले किसी गोरे साहब के साथ सोने का...तो तू क्या करेगी...''

पिंकी की आँखो में गुलाबी डोरे तेर गये ये सुनते ही...
और ना चाहते हुए भी उसके जहन में राजेश का अक्स उभर आया जो नंगा होकर उसके नंगे बदन से खेलता हुआ, अपना लंड उसकी बुर में पेल रहा था...

पिंकी : "धत्त ...ऐसे कैसे.....मैं ऐसा कुछ नही सोचती....''

रजनी : "पर मैं तो ऐसा सोचती हूँ ....''

पिंकी (चौंकते हुए) : "ऐसा मतलब ?''

रजनी (अपनी चूत को अपनी उंगली से मसलते हुए) : "यही...किसी दूसरे काले लंड वाले मर्द के साथ मज़े लेने के बारे में ...किसी रिक्शे वाले के साथ...या धोबी के साथ....या किसी मजदूर के साथ....''

पिंकी : "हाए दैयया....आप तो बड़ी बेशरम हो मेमसाब्....''

इतना कहकर वो मुस्कुरा दी...

रजनी : "मुझे कोई अगर सामने से आकर बोले तो मैं शायद पिघल जाऊं ....''

पिंकी उसकी बात का इशारा समझ गयी....
वो बिरजू के लिए बोल रही थी

पिंकी : "हे भगवान....मेमसाब्...यानी आप...अगर वो बिरजू आपसे आकर बोले तो....''

ये सुनते हू रजनी ने पिंकी का हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रखा और उसकी 2 उंगलियाँ अपनी चूत में उतार दी....
एकदम गीली हुई पड़ी थी वो चूत , पिंकी की उंगलियाँ फिसलती चली गयी अंदर तक....

और रजनी की तेज सिसकारी पूरे कमरे में गूँज उठी...

'''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... अहह...............''

ये तो पिंकी के लिए किसी झटके जैसा था....
उसकी मेमसाब् उसी के पति के लिए ऐसा सोच रही थी.

वैसे तो उसे इस बात से कोई फ़र्क नही पड़ता था, क्योंकि वो अच्छे से जानती थी की उसका मर्द एक नंबर का हरामी है, दारुबाज भी है और लौंडिया बाज भी....
अक्सर वो धंधे वालियों को भी चोदकर आता था और आकर बड़े मज़े ले-लेकर अपनी चुदाई की कहानियां उसे भी सुनाता था...
 
पिंकी ने अपनी दो और उंगलियाँ रजनी की चूत में उतार दी....
सिर्फ़ अंगूठा बाहर था बाकी का हाथ और हथेली रजनी की चूत में थी इस वक़्त.
''ओह्ह मेमसाब्.....आप तो सच में एक नंबर की छिनाल औरत हो....मेरे ही मर्द से चुदवाने के बारे में सोच रही हो.....पता भी है कितना मोटा है उसका हथियार....एक ही बार में फाड़ देगा वो आपकी बुर को....''

रजनी का बदन किसी मछली की तरह मचल उठा और वो बोली : "आह्हहह....... तो डरता कौन है...... बुला ले अपने मर्द को...देखती हूँ कितना मोटा है.....राजेश का भी काफ़ी मोटा है....एकदम कड़क लंड है उनका....वो भी अंदर जाता है तो चीखे निकलवा देता है....गोरा चिट्टा लंड चूसने में भी काफ़ी मज़ा आता है....''

एकदम से गेम ही पलट दी थी रजनी ने....
बिरजू के लंड की बात करते-2 राजेश के लंड की तरफ घूम गयी थी वो....
और वो इसलिए ताकि अपनी योजना को अंजाम तक पहुँचा सके.

और उसका असर भी एकदम देखने को मिल गया उसे...
राजेश के लंड की बात करते हुए पिंकी का दूसरा हाथ खुद की छूट पर पहुँच गया...
अब वो एक हाथ से अपनी चूत मसल रही थी और दूसरे हाथ की उंगलियों से रजनी की चूत की गहराई नाप रही थी.

''आआआआआआआआआहह मेमसाआब.......सच में मोटा है क्या साब का लंड ......उम्म्म्मममममममममममम....... गोरा भी है ना....... मुझे पता था..... साब इतने गोरे है तो .....उनका लंड भी गोरा होगा...... उनके टट्टे भी गोरे होंगे.......चूसने में कितना मज़ा आएगा....एकदम रसगुल्ले जैसे गोरे और मीठे....''

रजनी : "हाँ .......साब के रसगुल्ले तू चूस....बिरजू के गुलाब जामुन मैं चुसूंगी.......''

दोनो की हँसी निकल गयी इस बात पर....
और दोनो एक दूसरे को देखकर काफ़ी देर तक हंसते भी रहे....

और हंसते-2 जब दोनो की नज़रें इस बार आपस मे मिली तो अगले ही पल , एक झटके में रजनी ने पिंकी को अपने उपर खींच लिया और उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूसने लगी....
पिंकी भी पागलों की तरह अपनी गोरी मेमसाब् के रसीले बदन को उपर से नीचे तक मसलते हुए, उनके होंठों का रस पीने लगी....
रजनी ने आनन फानन में उसकी साड़ी को खींचकर निकाल फेंका...
उसके कसे हुए ब्लाउज़ को खींचकर चिथड़े -2 करके फाड़ दिया और फटी हुई ब्रा को भी एक झटके में खींचकर तोड़ दिया...
पेटीकोट और पेंटी का भी वही हश्र हुआ....
1 मिनट के अंदर उसका कसा हुआ बदन पूरा नंगा होकर रजनी के सामने था...
और अब दोनो एक दूसरे के शरीर को ऐसे चाट रहे थे मानो खा ही जाएँगे एक दूसरे को.

अब सच में उस कमरे का तापमान पहले से काफ़ी बढ़ चुका था...
जो एक आने वाले तूफान का संकेत था.
 
रजनी : "हाँ .......साब के रसगुल्ले तू चूस....बिरजू के गुलाब जामुन मैं चुसूंगी.......''

दोनो की हँसी निकल गयी इस बात पर....और दोनो एक दूसरे को देखकर काफ़ी देर तक हंसते भी रहे....
और हंसते-2 जब दोनो की नज़रें इस बार आपस मे मिली तो अगले ही पल , एक झटके में रजनी ने पिंकी को अपने उपर खींच लिया और उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूसने लगी....पिंकी भी पागलों की तरह अपनी गोरी मेमसाब् के रसीले बदन को उपर से नीचे तक मसलते हुए, उनके होंठों का रस पीने लगी....रजनी ने आनन फानन में उसकी साड़ी को खींचकर निकाल फेंका...

उसके कसे हुए ब्लाउज़ को खींचकर चिथड़े -2 करके फाड़ दिया और फटी हुई ब्रा को भी एक झटके में खींचकर तोड़ दिया...पेटीकोट और पेंटी का भी वही हश्र हुआ....1 मिनट के अंदर उसका कसा हुआ बदन पूरा नंगा होकर रजनी के सामने था...और अब दोनो एक दूसरे के शरीर को ऐसे चाट रहे थे मानो खा ही जाएँगे एक दूसरे को.अब सच में उस कमरे का तापमान पहले से काफ़ी बढ़ चुका था...जो एक आने वाले तूफान का संकेत था.

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अब आगे
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रजनी ने जब पिंकी की चूत को देखा तो एक बार के लिए उसकी सिहरन सी निकल गयी.....
चूत पर घने बालों का गुच्छा लटक रहा था उसकी...
जैसे बरसों से काटे ही ना हो वहाँ के बाल..

उसे याद आया की वो भी तो ऐसी ही थी शादी से पहले तक...
जब उसने जवानी में कदम रखा था तब से लेकर शादी तक उसने भी अपनी चूत के बालों को काटा नही था...
वो तो सहेलियो के कहने पर उसने चूत सॉफ करवाई थी सुहागरात के लिए वरना उसे अपने बालों से बहुत प्यार था...
उसके बाद उसे कभी मौका ही नही मिला बाल बड़ाने का,वो खुद ही काट दिया करती थी उन्हे ताकि सफाई बनी रहे और राजेश को बुरा ना लगे......

पर उन बालों की गर्मी का एहसास अलग ही हुआ करता था उन दिनों।
आज वैसे ही बाल पिंकी की चूत पर देखते ही वो और ज़्यादा उत्तेजित हो गयी और एक ही बार में उसे बिस्तर पर धकेलकर उसने अपना चेहरा उन बालों पर रख दिया...
एक अजीब सी गंध आ रही थी उनमें से...
पसीने और पेशाब की मिली जुली गंध मिलकर एक नशा सा उत्पन कर रहे थे....
और उस नशे में डूबती हुई रजनी ने अपने होंठ खोलकर उसकी चूत पर रखे और उसे चूसने लगी....
और जब उसकी चूत की नर्मी महसूस हुई तो उसकी चूसने की गति और भी ज़्यादा बढ़ गयी.

और शायद ये पिंकी के साथ पहली बार था जब उसकी चूत को कोई चूस रहा था....
क्योंकि गीली जीभ के एहसास ने उसकी चूत से गर्म पानी के फव्वारे निकालने शुरू कर दिए थे.
''आआआआआआआहह मेंमसाआआआआआआअब्ब्ब........ ये.....ये तो बहुत मजेदार है....... अहह..... मेरे मर्द ने तो आज तक सिर्फ़ इसमें अपना लॅंड ही डाला है..... उम्म्म्मममममममममममम..... आअज्जजज...... आाज पहली बार....... किसी ने मुँह लगाया है यहाँ..... अहह......... कसम से......... बहुत मज़ा...... आआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई....... आआआहह ..... आआआआआ रहाआआआआआअ है...................... अहह मेंसाआआआआअब्ब्ब्ब चूसो ना ....और ज़ोर से चूसो........''

और रजनी को तो जैसे कोई छुपा हुआ खजाना मिल गया था....
वो खजाना जिसे बरसों से किसी ने निकाला नही था....
और जिसे वो अब अपनी जीभ के फावड़े से खोदकर निकाल रही थी...
उफफफफफफफफफफफफफ्फ़....
कितना नशा भरा हुआ था पिंकी की चूत में ...
जैसे पुरानी शराब का कोई ड्रम खोल दिया हो.....
उसमें से शराब रिस-रिसकर बाहर निकलती जा रही थी और रजनी उस शराब को पीकर मस्त हुए जा रही थी.

लेकिन वो ये नही जान पाई की उसकी खुद की शेम्पेन बहे जा रही है उसकी चूत से और बर्बाद हुए जा रही है.
पर पिंकी वो कैसे बर्बाद होने देती.....
उसने जब देखा की गाड़े रस की धार निकालकर मेमसाब की जाँघो से होती हुई नीचे गिर रही है तो उसने तुरंत उनकी जांघे पकड़ कर अपनी तरफ खींची और उनकी चूत को अपने मुँह के उपर लाकर पटक लिया....
आज उसका भी पहली बार था इस तरह से किसी दूसरी औरत की चूत का जाम पीना....
लॅंड तो उसने कई बार चूसा था बिरजू का पर चूत रस चखने का पहला मौका था.
 
दोनो 69 की पोज़िशन में थी.....
रजनी तो अपनी जीभ से खोद-खोदकर उसकी चूत की मलाई चाट रही थी और उसकी देखा देखी पिंकी ने भी उसी अंदाज से अपने होंठ और जीभ को उस काम पर लगा दिया और उसे जोरों से चूसने लगी...

उफ़फ्फ़......
क्या चटपटा सा स्वाद था उसका....
एकदम नमकीन पानी था मेमसाब की चूत का....
जैसे जल्जीरा पी रही हो वो....
उपर से एकदम चिकनी चूत .....

उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी चिकने हीरो के होंठो को चूस रही थी वो....
एक बार उसे जब स्वाद आने लगा उस पानी का तो वो रुकी ही नही....
चूत क्या उसके आस पास का सारा हिस्सा और जाँघो तक को वो चाट गयी....
जितना हो सकता था उतना उसने उस जल्जीरे को इकट्ठा किया और पी गयी.

दोनो उस खेल को करीब 10 मिनट तक खेलती रही और फिर उनके अंदर कुछ उबलने सा लगा...
जैसे कोई ज्वालामुखी...
और लगभग एक साथ ही उस ज्वालामुखी ने उनकी चूत पर दस्तक दी और जो पानी रिस-2 कर निकल रहा था वो एक ही बार में तूफान बनकर बाहर की तरफ बह निकला......
दोनो के चेहरे उस बौछार से गीले हो गये पर उन्होने चूत को चूसना और पानी को पीना नही छोड़ा.
और करीब 5 मिनट बाद एक दूसरे को अच्छी तरह से सॉफ करने के बाद वो दोनो एक दूसरे की बाहों में ऐसे चिपककर लेट गयीं जैसे बरसों पुराने प्रेमी हो...

पिंकी : "वाह मेमसाब ......ये जो तरीका आज आपने बताया है वो करके मज़ा आ गया....मुझे तो लगता था की सिर्फ़ मरद औरत ही इस खेल में मज़े करते है पर अब लगता है की इस खेल में इंसानो ने और भी ज़्यादा तरक्की कर ली है...''
इतना कहकर वो ज़ोर-2 से हँसने लगी...
रजनी : "पर मर्द के लंड का अपना ही मज़ा होता है....''
पिंकी (मंद मंद मुस्कुराते हुए) : "सही कहा मेमसाब ....उसका तो अलग ही मज़ा है....लंबा लंड जब चूत में अंदर तक जाकर रगड़ पैदा करता है तो शरीर से धुंवा सा निकालने लगता है....मन करता है की बस वो लंड ऐसे ही अंदर बाहर होता रहे....होता रहे...होता रहे...''

कहते -2 जैसे वो किसी ख्वाब में खो गयी....
और उस ख्वाब में राजेश उसकी चूत का धनिया बुरी तरह से पीस कर उसकी चटनी बना रहा था...

और वो सोचकर ही उसके मुँह से एक दबी हुई सी सिसकारी निकल गयी.
''आआआआअहह''
और फिर जब उसने आँखे खोलकर रजनी की तरफ देखा तो वो उसे ही देखकर मुस्कुरा रही थी..
वो शायद समझ चुकी थी की वो राजेश के लॅंड के बारे में ही सोच रही थी..
रजनी : "अंदर बाहर होने में मज़ा आता है जब लॅंड लंबा और गोरा हो..जैसे तेरे साब का है..लेगी क्या ??''
ये तो जैसे एकदम खुल्ला ऑफर ही दे डाला था रजनी ने .
और पिंकी पीछे क्यों रहती भला जब साब की बीबी ही सामने से ऑफर दे रही है
''हाँ हाँ क्यों नही मेमसाब ...ऐसा हो गया तो मज़ा ही आ जाएगा.मैं आपके घर का काम फ्री में कर दिया करूँगी...''

रजनी भी हंस पड़ी उसकी दिलदारी सुनकर..
राजेश के लॅंड के लिए तो वो अपनी जेब से पैसे देने तक के लिए तैयार थी
रजनी : "तू उसकी चिंता मत कर..मैं तेरा काम भी करवा दूँगी और तुझे अलग से पैसे भी दूँगी..बस तू वैसा करी रह जैसा मैं बोलू..''
पिंकी का चेहरा चमक उठा..वो बोली " ठीक है मेमसाब ..आप मेरा काम कारवओ, मैं आपका करवा दूँगी..''
रजनी : "मेरा...मेरा कौनसा काम..??''
पिंकी : "अर्रे वही..बिरजू वाला.''
कहकर वो ज़ोर-2 से हँसने लगी..उसके साथ-2 रजनी भी उसका साथ देते हुए हँसने लगी
 
फिर जो बाते रजनी ने पिंकी को समझाई, उसे सुनकर पिंकी की आँखे फैलती चली गयी..

और वो सोचने लगी की एक पत्नी ऐसा कैसे कर सकती है और ये सब करके उसे क्या मिलेगा भला.

पर उसका तो फायदा ही था ..

साब का लंड जो मिल रहा था उसे और उपर से एक्सट्रा पैसे भी..

उसे तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई फिल्म बन रही है जिसकी वो हेरोयिन है, साब हीरो और मेमसाब डायरेक्टर.

पर बेचारी को ये बात नही पता थी की वो हेरोयिन तो बन रही है पर जो रोल उसे मिल रहा है वो शेफाली का है.
खैर, सबसे पहले तो रजनी को उसका हुलिया ठीक करना था.

और ऐसा करने के लिए वो उसे पहले अपने बाथरूम में ले गयी और शावर चला कर उसे खूब रगड़ -2 कर नहलाया..

बॉडी वॉश से उसके पूरे शरीर को सुगंधित किया..

एन फ्रेंच लगाकर उसकी चूत के साथ-2 उसकी टॅंगो और बाहों के बाल भी निकाल दिए.
पूरी तरह से नहा धोकर वो ऐसे चमक उठी जैसे सच में उसकी सुहागरात हो आज..
अब तो बस शाम का इंतजार था उन्हे..जब राजेश को घर आना था.
पिंकी के कपड़े तो पहले ही फाड़ चुकी थी रजनी , इसलिए उसे उसने खुद का एक ब्लाउज़ निकाल कर दिया जो उसे अब फिट नही आता था..
पर था वो बहुत ही सैक्सी..

आगे से गला थोड़ा गहरा था और पीछे से डोरियों से बाँधने वाला..
उसे पहन कर तो पिंकी रति की मूरत जैसी लग रही थी..
रजनी ने एक बार फिर से पिंकी को सारी बातें समझाई और राजेश के आने से पहले वो ईशा के रूम में जाकर उसके साथ सोने का नाटक करने लगी.
और उसे बोल दिया की साब पूछे तो बोल देना की मेमसाब आज काम करके थक गयी थी इसलिए वो ईशा के साथ सो रही है.

कुछ ही देर में राजेश आ गया..

उसने जब बेल बजाई तो पिंकी ने धड़कते दिल से जाकर दरवाजा खोला..

राजेश की नज़र जब उसपर पड़ी तो उसके लंड ने एक जोरदार अंगड़ाई ली..

'उफ़फ्फ़..ये तो पक्का मरवाएगी मुझे आज..पूरे मूड में लग रही है..लगता है मेरा तीर निशाने पर बैठा है..'

उसे उपर से नीचे तक देखकर वो अंदर आ गया..

पिंकी ने दरवाजा बंद किया और किचन से उसके लिए पानी ले आई.

और जैसा रजनी ने समझाया था, उसे झुककर जब उसने पानी दिया तो उसका पल्लू नीचे खिसक गया और उसके मोटे तरबूज जैसे मुम्मे बाहर आने को आतुर हो उठे..

राजेश की नज़रें उसके मुम्मो को देखती ही रह गयी.
मन तो कर रहा था की उन्हे अभी के अभी दबोच कर मसल डाले और वो जानता था की वो कुछ कहेगी भी नही.
पर वो जल्दबाज़ी करके उनके खेल का मज़ा नही बिगाड़ना चाहता था.

पानी पीकर उसने पूछा : "पिंकी.मेमसाब कहाँ है..''

पिंकी : "साब वो ईशा बैबी के रूम में सो रहीं है..आज काफ़ी थक गयी थी मेमसाब ..और बैबी भी दवाई लेकर गहरी नींद में है..''

वो जैसे बता रही थी की आप कर लो जो करना है.रास्ता सॉफ है.
राजेश : " ओ के ..तुम चाय बनाओ.मैं फ्रेश होकर आता हूँ ..''
पिंकी किचन में चली गयी और राजेश अपने रूम में .

ईशा के रूम के दरवाजे के पीछे छुपी रजनी चोरी छुपे सब देख रही थी..

वो भी देखना चाहती थी अपने पति को अपनी नौकरानी के साथ मज़े लेते हुए.ईशा तो सच में सो रही थी, इसलिए उसका डर नहीं था .
राजेश रूम में गया और उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके और जल्दी से शावर लेकर ढीले-ढाले से कपड़े पहन लिए.

अंदर उसने अंडरवीयर नही पहना।
फिर वो किचन में आया और पिंकी के बिल्कुल पीछे आकर खड़ा हो गया, उसकी गर्म साँसे पिंकी अपनी गर्दन पर महसूस कर पा रही थी..

उसके शरीर के सारे रोँये खड़े हो गये, राजेश का शरीर पीछे से उसे टच कर रहा था जिसे महसूस करके वो काँप रही थी.
पर जैसा की रजनी ने उसे समझाया था अब वो काम करने का वक़्त आ चुका था.
वो बोली : "साब..आपने जब से ये हार दिया है.तब से कुछ अजीब सा लग रहा है..''

राजेश के होंठो पर मुस्कान आ गयी ये सुनते ही..

वो बोला : "अच्छा ..क्या महसूस हो रहा है.''

पिंकी : "ऐसा जैसे मेरे अंदर कोई और है..जैसे..वो मुझसे कुछ ..कुछ कहना चाहती है..''
राजेश समझ गया की बोल तो वो रही है ये सब पर शब्द रजनी के दिए हुए हैं.
पिंकी आगे बोली : "देखो ना साब..शरीर में हर जगह दर्द सा हो रहा है मीठा वाला.मन कर रहा है की कोई मेरे बदन को पकड़कर ज़ोर से दबा दे.मसल दे.रगड़ दे..''

इतना कहते-2 वो राजेश की तरफ घूम गयी..
दोनो की आँखे मिली, राजेश को उसकी नज़रों में हवस की आग जलती हुई दिखाई दे रही थी..
राजेश : "अच्छा ..ये तो बहुत ख़तरनाक लक्षण है..चलो ज़रा मेरे कमरे में .मैं तुम्हारा चेकअप करता हूँ ..''

डॉक्टर राजेश अपने असली रूप में आ चुका था.
राजेश आगे चल दिया और मुस्कुराती हुई पिंकी गैस बंद करके उसके पीछे-2 अपनी गांड मटकाती हुई चल दी.
किचन के साथ ही ईशा का रूम था, जिसके दरवाजे के पीछे छिपी रजनी ये सब सुन रही थी.

और जैसा उसने पिंकी को समझाया था वो ठीक वैसा ही कर रही थी.
सब उसके प्लान के हिसाब से ही चल रहा था.
वो खुश थी की राजेश को उसकी चाल का पता नही चला था.
पर बेचारी ये नही जानती थी की चाल वो नही बल्कि राजेश ने चली थी..
वो तो बस वही कर रही थी जो राजेश उसे करवाना चाहता था.

राजेश ने जान बूझकर कमरे का दरवाजा आधा खुला छोड़ दिया ताकि रजनी बाहर खड़ी होकर उनकी रासलीला देख सके..
कमरे में पहुँचकर राजेश ने उसे एक चेयर पर बिठाया और अपना स्टेथोस्कोप निकाल लाया..
और उसे कान में लगाकर दूसरा सिरा उसने पिंकी की छाती के उपर रख कर उसे साँस लेने को कहा..
उसने जब साँस ली तो उसकी छाती के गुब्बारे और भी ज़्यादा फूलकर उसके सामने आ गये.
ब्लाउज़ इतना टाइट था की पीछे बँधी डोरी उसके साँस लेने से अपने आप खुल गयी और ब्लाउज़ ढलक कर आगे की तरफ लटक सा गया.
राजेश ये देखकर मुस्कुराया पर कुछ बोला नही और उसका चेकअप करने का नाटक करने लगा.
उसके हाथ उसकी छाती के मुलायम हिस्से पर पड़कर वहां की नरमी को महसूस कर रहे थे.
 
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