[color=rgb(41,]दोनो की लार मिलककर इतनी चाशनी बना रहे थे की उनके मुँह में नही संभाली गयी और बह बहकर उनके मुम्मो से होती हुई नीचे चूत तक जाने लगी.[/color]
[color=rgb(41,]वहां की ग्रीस में मिलकर वो उसे और भी चिकना बना रही थी.
कुल मिलाकर दोनो अपनी प्यास बुझाने के लिए प्यासी बिल्लियों की तरह एक दूसरे को चूस रही थी.
[/color]
[color=rgb(41,]ईशा का तो हाल बुरा था.
उसने अपनी माँ को अपनी चूत की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत की तरफ भेजा और चिल्लाई : "मोम ..प्लीज़..जब तक पापा कुछ नही करते..इट्स युवर ड्यूटी...सक मिईिइ..खा जाओ मुझे...इस चूत को.चाटो ..अंदर जीभ डालो..जैसे पापा डालते है आपकी चूत में .अपना लंड ..अपनी जीभ से चोदो मुझे मॉम .अपनी जीभ से चोदो मुझे..''
अपनी प्यारी बेटी की इस फरमाइश को रजनी कैसे ठुकरा सकती थी भला.
उसने तुरंत अपने होंठ उसकी गर्दन पर फेरते हुए, उसके नन्हे मगर कठोर बूब्स को चूसते हुए , ईशा की कुँवारी और नन्ही सी चूत तक लाये और उसपर लगाए और उसे चूसने लगी..
ईशा अपने एक हाथ से अपना मुम्मा और दूसरे से अपनी माँ का सिर सहलाते हुए उस चुसाई का मज़ा लेने लगी.

''ओह मोम ...योउ आआर ग्रेट.. उम्म्म्ममममममममममममममममममममम... कितना मज़ा आ रहा है...सुक्ककककक इट... मोम .. काश मेरा कोई भाई भी होता..उस से भी चुस्वा लेती..चुदवा लेती...अहह....''
सच में , इस बात का तो रजनी को भी पिछले कुछ दिनों से मलाल हो रहा था..
कि काश उसका कोई जवान बेटा होता.
जिसके कड़क लॅंड को वो अपनी चूत में लेती.
उसे चूसती .
उस से अपने मोठे मुम्मे चुस्वाति..
हाय ..जिनके लड़के होते है, उन्हे कितने फ़ायदे है इस बात के.
घर में ही जवान लंड है.
अपने हुस्न का जादू चलाओ उनपर और उसके मज़े लो..
पर इस बात को सोचने का कोई फायदा नही था..
इसलिए उसे अपने दिमाग़ से झटक कर वो पूरी ईमानदारी से अपनी बेटी की चूत चुसाई करने लगी..
और जल्द ही अपनी बेटी की किलकारियाँ उसे सुनाई देने लगी.
''ओह म्म्म्मों...आई एम कमिंग ..आआआआआआआआआअहह.. मैं आईईएयाया ...आआआआअ यययययययययययययययीी आईईईईईईईईईईईईईईईईईई''
और इतना कहते हुए उसने ढेर सारा रज निकाल कर अपनी माँ के चेहरे पर फेंक दिया..
जिसे रजनी आइस्क्रीम की तरह चाट गयी.

रजनी ने भी फिर उसे अपनी चूत को चुस्वाया और वैसे ही मज़े लिए जो उसने ईशा को दिए थे..
पर लंड का मज़ा तो लंड का ही होता है..
और इसलिए वो ईशा की बेसब्री भी समझ सकती थी.
पर अब वो पल भी जल्द ही आने वाला था जिसके लिए वो इतने दिनों से तरसी थी.
पर अभी कल के लिए तो उसने और राधिका ने एक प्लान बनाया था, जिसके बाद अब उनकी नही बल्कि राजेश की बेसब्री बढ़ने वाली थी.[/color]
[color=rgb(41,]अपनी बेटी को आज रात के लिए शांत करके वो अपने रूम में जाकर सो गयी... .[/color]
[color=rgb(41,]वहां की ग्रीस में मिलकर वो उसे और भी चिकना बना रही थी.
कुल मिलाकर दोनो अपनी प्यास बुझाने के लिए प्यासी बिल्लियों की तरह एक दूसरे को चूस रही थी.
[/color][color=rgb(41,]ईशा का तो हाल बुरा था.
उसने अपनी माँ को अपनी चूत की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत की तरफ भेजा और चिल्लाई : "मोम ..प्लीज़..जब तक पापा कुछ नही करते..इट्स युवर ड्यूटी...सक मिईिइ..खा जाओ मुझे...इस चूत को.चाटो ..अंदर जीभ डालो..जैसे पापा डालते है आपकी चूत में .अपना लंड ..अपनी जीभ से चोदो मुझे मॉम .अपनी जीभ से चोदो मुझे..''
अपनी प्यारी बेटी की इस फरमाइश को रजनी कैसे ठुकरा सकती थी भला.
उसने तुरंत अपने होंठ उसकी गर्दन पर फेरते हुए, उसके नन्हे मगर कठोर बूब्स को चूसते हुए , ईशा की कुँवारी और नन्ही सी चूत तक लाये और उसपर लगाए और उसे चूसने लगी..
ईशा अपने एक हाथ से अपना मुम्मा और दूसरे से अपनी माँ का सिर सहलाते हुए उस चुसाई का मज़ा लेने लगी.

''ओह मोम ...योउ आआर ग्रेट.. उम्म्म्ममममममममममममममममममममम... कितना मज़ा आ रहा है...सुक्ककककक इट... मोम .. काश मेरा कोई भाई भी होता..उस से भी चुस्वा लेती..चुदवा लेती...अहह....''
सच में , इस बात का तो रजनी को भी पिछले कुछ दिनों से मलाल हो रहा था..
कि काश उसका कोई जवान बेटा होता.
जिसके कड़क लॅंड को वो अपनी चूत में लेती.
उसे चूसती .
उस से अपने मोठे मुम्मे चुस्वाति..
हाय ..जिनके लड़के होते है, उन्हे कितने फ़ायदे है इस बात के.
घर में ही जवान लंड है.
अपने हुस्न का जादू चलाओ उनपर और उसके मज़े लो..
पर इस बात को सोचने का कोई फायदा नही था..
इसलिए उसे अपने दिमाग़ से झटक कर वो पूरी ईमानदारी से अपनी बेटी की चूत चुसाई करने लगी..
और जल्द ही अपनी बेटी की किलकारियाँ उसे सुनाई देने लगी.
''ओह म्म्म्मों...आई एम कमिंग ..आआआआआआआआआअहह.. मैं आईईएयाया ...आआआआअ यययययययययययययययीी आईईईईईईईईईईईईईईईईईई''
और इतना कहते हुए उसने ढेर सारा रज निकाल कर अपनी माँ के चेहरे पर फेंक दिया..
जिसे रजनी आइस्क्रीम की तरह चाट गयी.

रजनी ने भी फिर उसे अपनी चूत को चुस्वाया और वैसे ही मज़े लिए जो उसने ईशा को दिए थे..
पर लंड का मज़ा तो लंड का ही होता है..
और इसलिए वो ईशा की बेसब्री भी समझ सकती थी.
पर अब वो पल भी जल्द ही आने वाला था जिसके लिए वो इतने दिनों से तरसी थी.
पर अभी कल के लिए तो उसने और राधिका ने एक प्लान बनाया था, जिसके बाद अब उनकी नही बल्कि राजेश की बेसब्री बढ़ने वाली थी.[/color]
[color=rgb(41,]अपनी बेटी को आज रात के लिए शांत करके वो अपने रूम में जाकर सो गयी... .[/color]
[/url












[/color]


