इतना कहकर वो अपने रूम की तरफ चल दिया.
दोनो सहेलियां एक दूसरे को देखकर हाथ पे हाथ मारकर जोरों से हंस दी.
जैसे आगे क्या होने वाला है वो उन्हे सब पता हो.
एक मिनट के अंदर ही राजेश वापिस वहां आ गया..
चाँदनी अपनी गांड उभार कर उलटी होकर लेट गयी.
राजेश ने अपनी हथेली पर मूव निकाली और उसकी नर्म जाँघो पर अपने हाथ से उसे रगड़ने लगा..
ऐसा लग रहा था जैसे मैदे वाला आटा गूँध रहा था वो.
इतना नर्म और उतना ही गर्म..
मालिश करते हुए राजेश के हाथ उसके कूल्हे के उभार को भी अपनी हथेली से सहला रहे थे जिसे महसूस करके उसके मुँह से दबी हुई सी सिसकारियाँ निकल रही थी.
राजेश ने थोड़ी और उंगलियाँ अंदर की तो उसकी उंगली चाँदनी की गांड के छेद से जा टकराई..
अंदर उसने कच्छी भी नहीं पहनी हुई थी..
ये वो मौका था जब वो अपनी सुध बुध खोकर पिल्लो में सिर दबाकर ज़ोर से चीख पड़ी.
दोनो बाप बेटी की नज़रें एक दूसरे से मिली.
ईशा भी मुस्कुरा रही थी अपने पापा का ये कमाल देखकर.
वो जानती थी की उसके शरारती पापा इस वक़्त क्या कर रहे है जिसकी वजह से उसकी सहेली को ये सब फील हो रहा था.
चाँदनी ने आवेश में भरकर अपने हाथ को पटकते हुए पास लेती हुई ईशा की जाँघ को दबोच लिया.
ये ईशा का भी वीक पॉइंट था.
उसकी जाँघ से लेकर उसकी चूत तक का सारा एरिया एक दम से सुन्न सा पड़ गया जैसे..
राजेश ने अपने अंगूठे को अंदर धकेल कर उसकी गांड के रिंग को मसलना शुरू कर दिया.
अभी तक तो वो आगे से भी नहीं चुदी थी,
पिछले छेद के बारे में तो सोचा भी नही था उसने.
पर राजेश अंकल का हाथ वहां महसूस करके एक बात तो उसे पता चल ही गयी थी की वहां भी लॅंड लेने में उतना ही मज़ा आने वाला था जितना की चूत में.
पर अभी के लिए तो वो अपनी नर्म चूत को मखमली चादर पर रगड़ते हुए हिचकोले ले रही थी और उसी लय में उसका हाथ भी थिरकता हुआ ईशा की जाँघो पर नाच रहा था.
नाचते-2 उसके हाथ की उंगलियाँ उसकी चूत की तरफ आकर्षित होती चली गयी और कुछ ही पलों में वो उसकी अंदरूनी दीवारों को अपनी उंगलियों से कुरेद रही थी.
अब ईशा का नंबर था अपनी सुध बुध खोकर सिसकारी मारने का.
ये वो पल था जिसमें वो कहीं भी होती और उसके साथ ऐसा कुछ होता तो वो ऐसे ही रिएक्ट करती.
अभी तो गनीमत थी की वो अपने कमरे में थी और अपनी सहेली और प्यारे पापा के सामने थी.
इसलिए उसके मुँह से निकलने वाली सिसकारियों की गर्माहट कुछ ज़्यादा ही थी..
'''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ....... उम्म्म्ममममममममममममममममममममममममममम ......अहह ... एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.... बैबी.... रब्ब्ब्बबब इट...''
ईशा ने खुद ही अपनी शॉर्ट्स को खोलते हुए नीचे खिसका दिया.
अंदर उसने भी पेंटी नही पहनी थी.
एकदम चिकनी छूट थी उसकी.
जिसे देखकर राजेश के मुँह में तो पानी भर आया..
उसने चाँदनी की शॉर्ट्स भी खींचते हुए नीचे उतार दी क्योंकि अब उसे पहने रहने का कोई मतलब नही रह गया था.
और ईशा तो एक कदम आगे निकली,
उसने तो अपना टॉप भी निकाल फेंका.
अब अपने पापा की परी उनके सामने नंगी बैठी थी.
और उसकी सहेली अधनंगी लेटी थी..
राजेश शायद इस वक़्त अपने आप को दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान समझ रहा था.
एक जवान बेटी को चोदने का एहसास क्या होता है ये उसके जैसा ठरकी बाप ही जान सकता था.
और साथ में उसकी कुँवारी सहेली बोनस में मिल रही थी उसे,
ये तो सोने पे सुहागा जैसे था.
राजेश ने भी अपने कपड़े निकाल फेंके.
ईशा के पैर में अभी भी प्लास्टर था इसलिए वो ज़्यादा मूव्मेंट नही कर सकती थी..
वरना अब तक वो अपने पापा पर कूद पड़ी होती और उनके लॅंड को चूस रही होती.
पर शायद अपनी बेटी के चेहरे को देखकर राजेश समझ गया था की वो क्या चाहती है,
वो खुद ही जगह बनाकर बीच लेती चाँदनी और उसके करीब बैठी ईशा के बीच आकर बैठ गया.
अब वो एक हाथ से चाँदनी कि नरम गांड को मसल रहा था और दूसरी तरफ उसने अपनी बेटी को अपने आगोश में लेकर उसे अपने सीने से चिपका लिया.
उसके नर्म मुलायम नन्हे बूब्स जब उसकी चौड़ी छाती से टकराए तो ईशा के मुँह से सिसकारी फिर से निकल पड़ी.
उपर से राजेश ने उसकी पीठ पर दबाव बनाकर उसे और ज़ोर से अपने साथ चिपका लिया जिसके परिणामस्वरूप उसके बूब्स चटनी की तरह पिस गये अपने पापा की छाती से..
और आनंद से कराहते हुए उसने अपना चेहरा उपर किया और अपने प्यारे पापा के होंठो पर होंठ रखके उन्हे चूसने लगी.
राजेश को ऐसा लगा जैसे ठंडे पानी की मछली ने उसके होंठो पर अटॅक कर दिया हो.
इतने नर्म मुलायम और ठंडे होंठ थे उसके.
और वो मछली की तरह उसे चूस रही थी.
अपनी जीभ उसके मुँह में धकेल कर उसे और ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी.
अपनी नन्ही-2 बूबियाँ उसकी चौड़ी छाती पर रगड़कर उसके शरीर का तापमान बड़ा रही थी.
ये सब राजेश के साथ उपर हो रहा था और नीचे उसके अंडरवीयर पर अटॅक हो गया.
चाँदनी जो इतनी देर से उल्टी लेटकर अपनी गांड की मसाज करवा रही थी , वो उठी और उसने राजेश के अंडरवीयर को नीचे खींचकर उसके कड़क लॅंड को आज़ाद कर दिया और बिना किसी चेतावनी के उसे अपने मुँह में लेकर ऐसे चूसने लगी जैसे किसी प्रतियोगता में प्रथम आने के लिए ये सब करना पड़ रहा हो.
वैसे भी उसे राजेश अंकल के लॅंड का स्वाद काफ़ी पसंद आया था पिछली बार ..
इसलिए आज फिर से उसी से शुरूवात करके वो अपनी उत्तेजना को एक ऐसे आयाम पर ले जाना चाहती थी जिसके बाद चुदाई का मज़ा दुगना हो जाए..
राजेश ने ईशा के होंठ अच्छी तरह चूसने के बाद उसे थोड़ा उपर खींचा और उसके नन्हे बूब्स को एक-2 करके चूसा..
और फिर उसे भी नीचे धकेलते हुए अपने लॅंड की तरफ रवाना कर दिया.
एक मर्द की सबसे बड़ी फॅंटेसी होती है एक साथ 2 से अपना लॅंड चुसवाना,
और यही इस वक़्त राजेश पूरी कर रहा था..
दोनो सहेलियां एक दूसरे को देखकर हाथ पे हाथ मारकर जोरों से हंस दी.
जैसे आगे क्या होने वाला है वो उन्हे सब पता हो.
एक मिनट के अंदर ही राजेश वापिस वहां आ गया..
चाँदनी अपनी गांड उभार कर उलटी होकर लेट गयी.
राजेश ने अपनी हथेली पर मूव निकाली और उसकी नर्म जाँघो पर अपने हाथ से उसे रगड़ने लगा..
ऐसा लग रहा था जैसे मैदे वाला आटा गूँध रहा था वो.
इतना नर्म और उतना ही गर्म..
मालिश करते हुए राजेश के हाथ उसके कूल्हे के उभार को भी अपनी हथेली से सहला रहे थे जिसे महसूस करके उसके मुँह से दबी हुई सी सिसकारियाँ निकल रही थी.
राजेश ने थोड़ी और उंगलियाँ अंदर की तो उसकी उंगली चाँदनी की गांड के छेद से जा टकराई..
अंदर उसने कच्छी भी नहीं पहनी हुई थी..
ये वो मौका था जब वो अपनी सुध बुध खोकर पिल्लो में सिर दबाकर ज़ोर से चीख पड़ी.
दोनो बाप बेटी की नज़रें एक दूसरे से मिली.
ईशा भी मुस्कुरा रही थी अपने पापा का ये कमाल देखकर.
वो जानती थी की उसके शरारती पापा इस वक़्त क्या कर रहे है जिसकी वजह से उसकी सहेली को ये सब फील हो रहा था.
चाँदनी ने आवेश में भरकर अपने हाथ को पटकते हुए पास लेती हुई ईशा की जाँघ को दबोच लिया.
ये ईशा का भी वीक पॉइंट था.
उसकी जाँघ से लेकर उसकी चूत तक का सारा एरिया एक दम से सुन्न सा पड़ गया जैसे..
राजेश ने अपने अंगूठे को अंदर धकेल कर उसकी गांड के रिंग को मसलना शुरू कर दिया.
अभी तक तो वो आगे से भी नहीं चुदी थी,
पिछले छेद के बारे में तो सोचा भी नही था उसने.
पर राजेश अंकल का हाथ वहां महसूस करके एक बात तो उसे पता चल ही गयी थी की वहां भी लॅंड लेने में उतना ही मज़ा आने वाला था जितना की चूत में.
पर अभी के लिए तो वो अपनी नर्म चूत को मखमली चादर पर रगड़ते हुए हिचकोले ले रही थी और उसी लय में उसका हाथ भी थिरकता हुआ ईशा की जाँघो पर नाच रहा था.
नाचते-2 उसके हाथ की उंगलियाँ उसकी चूत की तरफ आकर्षित होती चली गयी और कुछ ही पलों में वो उसकी अंदरूनी दीवारों को अपनी उंगलियों से कुरेद रही थी.
अब ईशा का नंबर था अपनी सुध बुध खोकर सिसकारी मारने का.
ये वो पल था जिसमें वो कहीं भी होती और उसके साथ ऐसा कुछ होता तो वो ऐसे ही रिएक्ट करती.
अभी तो गनीमत थी की वो अपने कमरे में थी और अपनी सहेली और प्यारे पापा के सामने थी.
इसलिए उसके मुँह से निकलने वाली सिसकारियों की गर्माहट कुछ ज़्यादा ही थी..
'''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ....... उम्म्म्ममममममममममममममममममममममममममम ......अहह ... एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.... बैबी.... रब्ब्ब्बबब इट...''
ईशा ने खुद ही अपनी शॉर्ट्स को खोलते हुए नीचे खिसका दिया.
अंदर उसने भी पेंटी नही पहनी थी.
एकदम चिकनी छूट थी उसकी.
जिसे देखकर राजेश के मुँह में तो पानी भर आया..
उसने चाँदनी की शॉर्ट्स भी खींचते हुए नीचे उतार दी क्योंकि अब उसे पहने रहने का कोई मतलब नही रह गया था.
और ईशा तो एक कदम आगे निकली,
उसने तो अपना टॉप भी निकाल फेंका.
अब अपने पापा की परी उनके सामने नंगी बैठी थी.
और उसकी सहेली अधनंगी लेटी थी..
राजेश शायद इस वक़्त अपने आप को दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान समझ रहा था.
एक जवान बेटी को चोदने का एहसास क्या होता है ये उसके जैसा ठरकी बाप ही जान सकता था.
और साथ में उसकी कुँवारी सहेली बोनस में मिल रही थी उसे,
ये तो सोने पे सुहागा जैसे था.
राजेश ने भी अपने कपड़े निकाल फेंके.
ईशा के पैर में अभी भी प्लास्टर था इसलिए वो ज़्यादा मूव्मेंट नही कर सकती थी..
वरना अब तक वो अपने पापा पर कूद पड़ी होती और उनके लॅंड को चूस रही होती.
पर शायद अपनी बेटी के चेहरे को देखकर राजेश समझ गया था की वो क्या चाहती है,
वो खुद ही जगह बनाकर बीच लेती चाँदनी और उसके करीब बैठी ईशा के बीच आकर बैठ गया.
अब वो एक हाथ से चाँदनी कि नरम गांड को मसल रहा था और दूसरी तरफ उसने अपनी बेटी को अपने आगोश में लेकर उसे अपने सीने से चिपका लिया.
उसके नर्म मुलायम नन्हे बूब्स जब उसकी चौड़ी छाती से टकराए तो ईशा के मुँह से सिसकारी फिर से निकल पड़ी.
उपर से राजेश ने उसकी पीठ पर दबाव बनाकर उसे और ज़ोर से अपने साथ चिपका लिया जिसके परिणामस्वरूप उसके बूब्स चटनी की तरह पिस गये अपने पापा की छाती से..
और आनंद से कराहते हुए उसने अपना चेहरा उपर किया और अपने प्यारे पापा के होंठो पर होंठ रखके उन्हे चूसने लगी.
राजेश को ऐसा लगा जैसे ठंडे पानी की मछली ने उसके होंठो पर अटॅक कर दिया हो.
इतने नर्म मुलायम और ठंडे होंठ थे उसके.
और वो मछली की तरह उसे चूस रही थी.
अपनी जीभ उसके मुँह में धकेल कर उसे और ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी.
अपनी नन्ही-2 बूबियाँ उसकी चौड़ी छाती पर रगड़कर उसके शरीर का तापमान बड़ा रही थी.
ये सब राजेश के साथ उपर हो रहा था और नीचे उसके अंडरवीयर पर अटॅक हो गया.
चाँदनी जो इतनी देर से उल्टी लेटकर अपनी गांड की मसाज करवा रही थी , वो उठी और उसने राजेश के अंडरवीयर को नीचे खींचकर उसके कड़क लॅंड को आज़ाद कर दिया और बिना किसी चेतावनी के उसे अपने मुँह में लेकर ऐसे चूसने लगी जैसे किसी प्रतियोगता में प्रथम आने के लिए ये सब करना पड़ रहा हो.
वैसे भी उसे राजेश अंकल के लॅंड का स्वाद काफ़ी पसंद आया था पिछली बार ..
इसलिए आज फिर से उसी से शुरूवात करके वो अपनी उत्तेजना को एक ऐसे आयाम पर ले जाना चाहती थी जिसके बाद चुदाई का मज़ा दुगना हो जाए..
राजेश ने ईशा के होंठ अच्छी तरह चूसने के बाद उसे थोड़ा उपर खींचा और उसके नन्हे बूब्स को एक-2 करके चूसा..
और फिर उसे भी नीचे धकेलते हुए अपने लॅंड की तरफ रवाना कर दिया.
एक मर्द की सबसे बड़ी फॅंटेसी होती है एक साथ 2 से अपना लॅंड चुसवाना,
और यही इस वक़्त राजेश पूरी कर रहा था..