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XXX Kahani - हीरोइन

[color=rgb(41,]दोनो की लार मिलककर इतनी चाशनी बना रहे थे की उनके मुँह में नही संभाली गयी और बह बहकर उनके मुम्मो से होती हुई नीचे चूत तक जाने लगी.[/color]

[color=rgb(41,]वहां की ग्रीस में मिलकर वो उसे और भी चिकना बना रही थी.

कुल मिलाकर दोनो अपनी प्यास बुझाने के लिए प्यासी बिल्लियों की तरह एक दूसरे को चूस रही थी.

[/color]
[color=rgb(41,]ईशा का तो हाल बुरा था.
उसने अपनी माँ को अपनी चूत की तरफ धकेलते हुए अपनी चूत की तरफ भेजा और चिल्लाई : "मोम ..प्लीज़..जब तक पापा कुछ नही करते..इट्स युवर ड्यूटी...सक मिईिइ..खा जाओ मुझे...इस चूत को.चाटो ..अंदर जीभ डालो..जैसे पापा डालते है आपकी चूत में .अपना लंड ..अपनी जीभ से चोदो मुझे मॉम .अपनी जीभ से चोदो मुझे..''
अपनी प्यारी बेटी की इस फरमाइश को रजनी कैसे ठुकरा सकती थी भला.
उसने तुरंत अपने होंठ उसकी गर्दन पर फेरते हुए, उसके नन्हे मगर कठोर बूब्स को चूसते हुए , ईशा की कुँवारी और नन्ही सी चूत तक लाये और उसपर लगाए और उसे चूसने लगी..
ईशा अपने एक हाथ से अपना मुम्मा और दूसरे से अपनी माँ का सिर सहलाते हुए उस चुसाई का मज़ा लेने लगी.

''ओह मोम ...योउ आआर ग्रेट.. उम्म्म्ममममममममममममममममममममम... कितना मज़ा आ रहा है...सुक्ककककक इट... मोम .. काश मेरा कोई भाई भी होता..उस से भी चुस्वा लेती..चुदवा लेती...अहह....''
सच में , इस बात का तो रजनी को भी पिछले कुछ दिनों से मलाल हो रहा था..
कि काश उसका कोई जवान बेटा होता.
जिसके कड़क लॅंड को वो अपनी चूत में लेती.
उसे चूसती .
उस से अपने मोठे मुम्मे चुस्वाति..
हाय ..जिनके लड़के होते है, उन्हे कितने फ़ायदे है इस बात के.
घर में ही जवान लंड है.
अपने हुस्न का जादू चलाओ उनपर और उसके मज़े लो..
पर इस बात को सोचने का कोई फायदा नही था..
इसलिए उसे अपने दिमाग़ से झटक कर वो पूरी ईमानदारी से अपनी बेटी की चूत चुसाई करने लगी..
और जल्द ही अपनी बेटी की किलकारियाँ उसे सुनाई देने लगी.
''ओह म्‍म्म्मों...आई एम कमिंग ..आआआआआआआआआअहह.. मैं आईईएयाया ...आआआआअ यययययययययययययययीी आईईईईईईईईईईईईईईईईईई''
और इतना कहते हुए उसने ढेर सारा रज निकाल कर अपनी माँ के चेहरे पर फेंक दिया..
जिसे रजनी आइस्क्रीम की तरह चाट गयी.

रजनी ने भी फिर उसे अपनी चूत को चुस्वाया और वैसे ही मज़े लिए जो उसने ईशा को दिए थे..
पर लंड का मज़ा तो लंड का ही होता है..
और इसलिए वो ईशा की बेसब्री भी समझ सकती थी.
पर अब वो पल भी जल्द ही आने वाला था जिसके लिए वो इतने दिनों से तरसी थी.
पर अभी कल के लिए तो उसने और राधिका ने एक प्लान बनाया था, जिसके बाद अब उनकी नही बल्कि राजेश की बेसब्री बढ़ने वाली थी.[/color]

[color=rgb(41,]अपनी बेटी को आज रात के लिए शांत करके वो अपने रूम में जाकर सो गयी... .[/color]
 
[color=rgb(44,]
रजनी ने भी फिर उसे अपनी चूत को चुस्वाया और वैसे ही मज़े लिए जो उसने ईशा को दिए थे..

पर लंड का मज़ा तो लंड का ही होता है..

और इसलिए वो ईशा की बेसब्री भी समझ सकती थी.

पर अब वो पल भी जल्द ही आने वाला था जिसके लिए वो इतने दिनों से तरसी थी.

पर अभी कल के लिए तो उसने और राधिका ने एक प्लान बनाया था, जिसके बाद अब उनकी नही बल्कि राजेश की बेसब्री बढ़ने वाली थी.

अपनी बेटी को आज रात के लिए शांत करके वो अपने रूम में जाकर सो गयी... .

**************
अब आगे
**************

अगले दिन रजनी ने राजेश के उठने से पहले ही ईशा और पिंकी को उस प्लान के हिसाब से समझा दिया.
और प्लान ये था की जो महत्त्व राजेश को इतने दिनों से दिया जा रहा था वो उस से ले लिया जाए यानी वो लोग राजेश को पूरी तरहा से अनदेखा करने वाले थे आज के दिन.
हालाँकि ईशा की रिस रही चूत इस बात की गवाही बिल्कुल नही दे रही थी की उसकी चुदाई को एक दिन के लिए और क्यो बढ़ाया जाए पर रजनी ने जब पूरा प्लान उसे समझाया तो उसे यकीन हो गया की इस तरीके से उसकी चुदाई काफ़ी धमाकेदार होगी..

खैर, राजेश की जब आँख खुली तो हर रोज की तरह उसका लॅंड खड़ा हुआ था.

रजनी उठकर किचन में काम कर रही थी.

ईशा शायद अपने रूम में सो रही होगी यही सोचकर वो ऐसे ही नंगा उठकर किचन में चल दिया.

उसका खड़ा हुआ लॅंड उसके आगे-2 चल रहा था.

रजनी ने नाईट गाउन पहना हुआ था जो काफी टाइट था , उसमे उसकी गांड और बूब्स अलग ही चमक रहे थे.[/color]

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]

[color=rgb(44,]उसने अपना खड़ा लॅंड सीधा लेजाकर उसकी उभरी हुई गांड से सटा दिया और उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ कर उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए..

रजनी एकदम से चोंक गयी और कसमसाकर उससे छूटने का प्रयास करने लगी.

पर वो उसे चूमता रहा और अपने हाथो को उसके मोटे मुम्मो पर रखकर ज़ोर से दबा दिया.

इस बार रजनी चिल्ला ही पड़ी.

और छिटककर उससे दूर होकर खड़ी हो गयी.

उसकी आँखो मे गुस्सा सॉफ देखा जा सकता था..

रजनी : "ये क्या बदतमीज़ी है राजेश..दिमाग़ तो सही है ना तुम्हारा.जब देखो, जहाँ देखो शुरू हो जाते हो.और ये क्या, तुम ऐसे ही आ गये.नंगे..शर्म नाम की कोई चीज़ है या नही.घर में जवान बेटी है.वो देख लेगी तो क्या बोलेगी.''

वो बोले जा रही थी और राजेश आँखे फाड़े उसके इस रूप को देखे जा रहा था.

जाहिर सी बात थी,

उसके साथ पिछले कुछ दिनों से एक राजा की तरहा व्यवहार हो रहा था उसे अचानक इस तरह से खरी खोटी सुनाई जा रही थी जो उसकी समझ से परे था.

और वैसे भी, शेफाली के हार वाले वाक्ये से पहले भी रजनी ने इस तरह से उससे बात नही की थी .

ऐसे डांटा नही था उसे.

इसलिए उसका आश्चर्यचकित होना स्वभाविक था.

और सबसे बड़ी बात, ईशा के घर पर होने के बावजूद उसने पिछले कुछ दिनों में उसे किसी भी बात के लिए मना नही किया था.

उल्टा शेफाली की आत्मा का चमत्कार दिखाकर वो उन बातो को भी अनदेखा कर रही थी जिसमें वो अपनी बेटी के साथ सो रहा था या उसके अर्धनग्न बदन को निहार रहा था.

अब एकदम से उसे ईशा का डर क्यों सताने लगा भला.

कही वो अपने नाटक से भटक तो नही गयी.

क्योंकि उसकी डाइयरी में जो लिखा था उसके अनुसार तो उन्हे मिलकर राजेश को शेफाली की आत्मा का चमत्कार दिखाकर उसे हर तरह की छूट देनी थी.

खैर, राजेश को लगा की शायद उसका मूड किसी और बात पर खराब है, इसलिए वो चुपचाप अपने कमरे में गया और नहा धोकर ही बाहर निकला.

हॉस्पिटल जाने के लिए उसने अपने कपड़े भी पहन लिए थे.

बाहर आकर देखा तो नाश्ता टेबल पर लग चुका था, रजनी के चेहरे पर गुस्सा अभी तक बरकरात था, वो उसकी तरफ ढंग से देख भी नही रही थी..

उसने माहौल को हल्का करने के लिए रजनी की तारीफ कर दी..

राजेश : "अर्रे वाह , आलू के पराँठे..माय फ़ेवरेट.''

पर उसने फिर भी मुड़कर नही देखा.

खैर, वो नाश्ता करने लगा.

तभी बाथरूम से कपड़ो की बाल्टी लेकर पिंकी निकली, जो कपड़ो को बाल्कनी में सूखने के लिए डालने जा रही थी.

राजेश ने उसे देखकर आँख मार दी.

बस, उसे लगा जैसे उसने जिंदगी की बहुत बड़ी ग़लती कर दी हो.

पिंकी ने कपड़ो की बाल्टी वहीं पटकी और ज़ोर-2 से चिल्लाने लगी

''हाय दैयया..साब कितने बेशरम हो गये है..अपनी जोरू के सामने ही मेरे को आँख मारते है.क्या जमाना आ गया है रे .देखने में कितने शरीफ है..उपर से डॉक्टर है.पर हरकत देखो..हमारे मोहल्ले के आवारा लड़को जैसी..गंदी नज़र..''

उसकी बाते सुनकर रजनी भी वहां आ गयी और उसे बड़ी मुश्किल से चुप करवाया.

और फिर राजेश की तरफ देखकर वो भड़कते हुए बोली : "हो क्या गया है आपको.दिमाग़ खराब हो गया है क्या.कामवाली को भी नही छोड़ रहे अब.इतने नीच कैसे हो गये.''

राजेश की तो समझ मे कुछ नही आया की हो क्या रहा है उसके साथ.

कल जो पिंकी उसके लॅंड को अंदर लेकर चीखे मार रही थी वही आज उसके आँख मारने पर उतनी ही ज़ोर से चीख रही है..

और रजनी को क्या हो गया है, वो भी तो उसके लॅंड के पीछे पागल सी हुई पड़ी थी और अब उसके हाथ लगाने से भी परेशानी हो रही है उसे ..

उपर से वो पिंकी का साथ भी दे रही है.[/color]
 
[color=rgb(44,]राजेश का दिमाग़ चकरा रहा था, इसलिए उसने वहां से निकलने में ही भलाई समझी.

जाते हुए वो ईशा के रूम में गया जो अभी तक बेसूध होकर सो रही थी.

उसकी शॉर्ट्स इतनी छोटी थी की उसकी जाँघो का मिलन बस कुछ ही इंच से ढका हुआ था.

उसे उसके इस रूप पर इतना प्यार आया की उसने झुकते हुए उसकी मांसल जांगो पर हाथ रखकर उसे दबाया और उसके होंठो पर एक गहरा किस कर दिया.

ये आज की सुबह की उसकी तीसरी ग़लती निकली.

चूमने के साथ ही उसकी आँखे झट्ट से खुली और वो भी उतनी ही ज़ोर से चिल्लाई जितनी ज़ोर से पिंकी चीखी थी..

इस बार फिर से रजनी भागती हुई सी अंदर आई..

ईशा हालाँकि कुछ बोली नही पर जिस तरह से वो सहमी हुई सी अपने पापा को एकटूक देखे जा रही थी वो हाव भाव बता रहे थे की राजेश ने उसके साथ जो किया है वो उसे पसंद नही आया.

रजनी के बार-2 पूछने पर भी ईशा कुछ बोली नही पर रोने का नाटक ज़रूर करने लगी.

एक बार फिर से राजेश बेचारा शर्म से पानी -2 हो गया.

पीछे मुड़कर बाहर जाने लगा तो गुस्से से घूरती हुई पिंकी की आँखे फिर से दिखी उसे.

जैसे बोल रही हो की 'ओ जानवर, अपनी बेटी को तो छोड़ देता कम से कम..'

अब और कुछ देखना राजेश के बस की बात नही थी.

उसने अपना बेग उठाया और हॉस्पिटल के लिए निकल गया तुरंत.

पिंकी ने दरवाजा बंद किया और वापिस उस रूम में आई जहाँ ईशा और रजनी बैठे थे.

तीनो ने एक दूसरे के चेहरे देखे और फिर एकसाथ सभी ठहाका लगाकर हँसने लगे.

हालाँकि तीनों की चूत कुलबुला रही थी

पर राजेश के लॅंड को ठेस पहुँचाने के बाद उसके चेहरे पर आए भाव देखकर उन्होने काफ़ी देर से जो हँसी दबा रखी थी वो अब खुलकर निकल रही थी.

वो काफ़ी देर तक हंसते रहे और फिर जब शांत हुए तो आगे क्या होगा इस विषय पर काफ़ी देर तक बातें भी करते रहे.

शाम को वैसे भी राधिका और चाँदनी ने आना था, बाकी की प्लॅनिंग उनके साथ बैठकर करनी थी..

अभी वो सब बैठकर बातें कर ही रहे थे की बाहर की बेल बाजी.

रजनी ने पिंकी को दरवाजा खोलने के लिए भेजा.

जब वो वापिस आई तो उसके चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान थी.

रजनी ने जब पूछा की क्या हुआ.ऐसे क्यू मुस्कुरा रही है.. कौन है बाहर.?''

वो धारे से फुसफुसाई : "वो..वो .मेरा मरद आया है..बिरजू''

बिरजू का नाम सुनते ही रजनी के पूरे शरीर में चींटियां सी रेंगने लगी..

पिंकी के चेहरे को देखकर सॉफ पता चल रहा था की उसने कल रात घर जाते ही बिरजू को अपनी मालकिन और उनकी इच्छा के बारे में सब बता दिया था.हे भगवान..

ये औरत पागल है क्या.

अपने पति को खुद ही बोल आई अपनी मालकिन की फॅंटेसी के बारे में ..

और वो बेवड़ा भी सुबह -2 यहाँ पहुँच गया.

रजनी (सकपकाकर बात संभालते हुए) : " ओह्ह्ह ..अच्छा वो जो मैने कल काम बताया था , उपर पानी की टंकी की सफाई के लिए.उसी के लिए आया है क्या..''

पिंकी ने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिला दिया..

रजनी (ईशा से नज़रें चुराते हुए) " बेटा, तुम तब तक नहा लो, पिंकी तुम्हारी हेल्प कर देगी.मैं बिरजू से उपर वाली टंकी की सफाई करवा लेती हूँ .''

इतना कहकर वो तेज कदमों से बाहर निकल गयी.

ईशा को अपनी माँ का व्यवहार थोड़ा अटपटा ज़रूर लगा पर उसे किसी बात का शक़ नही हुआ.

बाहर निकालकर जब वो बिरजू के सामने पहुँची तो उसके दिल की धड़कन काफ़ी तेज चल रही थी..

उसके निप्पल्स गाउन के उपर से सॉफ दिखाई दे रहे थे.

रजनी को देखते ही वो सोफे से खड़ा हो गया और हाथ जोड़कर नमस्ते की उसने ..

बिरजू एक हट्टा कट्टा , मोटा और काला आदमी था..

उसकी घनी मूँछो के नीचे छुपे काले होंठ इतने मोटे थे जैसे मधुमक्खी ने काट लिया हो.

उसकी आँखो की चमक बता रही थी की वो रजनी के रसीले बदन को देखकर कितना खुश है..

रजनी : "हाँ .बिरजू.कैसे आना हुआ.''

अब वो एकदम से तो उसे बोल नही सकती थी की चुदाई कैसे करोगे.

बिरजू भी बड़ा चालाक था, उसकी बात का जवाब उसने उतनी ही चतुराई से दिया

वो बोला : "वो पिंकी बोल रही थी की आपकी पीठ में दर्द रहता है.मैं देसी पहेलवान हूँ , मई तेल लगाकर आपकी कमर का सारा दर्द ठीक कर दूँगा..''

कल रजनी ने पिंकी को अपने बदन की मसाज करवाकर उसे अपने जाल में फँसाया था,

शायद पिंकी ने वो बात वैसे ही जाकर अपने पति को सुना दी, तभी उसे ये आइडिया आया होगा.

रजनी चाहती तो बात को टाल मटोल करके उसे वहाँ से भगा सकती थी.

पर उसने कल ही सोच लिया था की बिरजू के मोटे और काले लॅंड को अपनी चूत में लेकर रहेगी,

हालाँकि उसने ये नही सोचा था की अगले ही दिन उसे ये मौका मिलेगा..

इसलिए जो आगे चलकर होना था वो अभी हो जाए, यही सही रहेगा.

वैसे भी सुबह से उसकी चूत में काफ़ी खुजली हो रही थी.

बिरजू से वो किसी गुलाम की तरह काम लेगी.

अपने पैर चटवाएगी..

अपनी चूत में उसकी मूँछो वाला मुँह घुस्वाकार उससे चुस्वाएगी.

और उसके मोटे लॅंड से ...

उफ़फ्फ़..

इतना सोचते ही उसकी चूत ऐसे चोने लगी जैसे किसी ने पानी के गुब्बारे में पिन मार दी हो..

वो हड़बड़ाते हुए बोली :"ठीक है..जल्दी से उपर आओ.''

इतना कहकर वो सीढ़ियों से उपर वाले कमरे में चल दी.

बिरजू भी मुस्कुराता हुआ उसके पीछे-2 चल दिया, रजनी की मटक रही मोटी गांड देखकर उसके मुँह में पानी आ चुका था.

और उसने सोच लिया की वो उसकी गांड मारकर रहेगा.

कमरे में पहुँचकर रजनी ने उसे देखा तो बिरजू बोला : "आप कपड़े उतारकर लेट जाओ.मैं तेल गर्म करवाकर लाता हूँ पिंकी से.''

इतना कहकर वो भागता हुआ सा नीचे चला गया.

रजनी को इस वक़्त अपने ही घर में ऐसा लग रहा था जैसे अपने प्रेमी के साथ किसी होटल रूम में आई है चुदाई करवाने के लिए..[/color]
 
[color=rgb(44,]उसने जल्दी से अपना गाउन निकाल फेंका .

पहले तो वो सोच रही थी की पेंटी और ब्रा पहने रखे, पर वो जानती थी की चुदाई तो होकर ही रहेगी, इसलिए उसने उन्हे भी निकाल फेंका.

पूरी नंगी होकर जब उसने खुद को आईने में देखा तो खुद ही शर्मा गयी.

उसका योवन गज़ब ढा रहा था..

मुम्मे मोटे होकर और भी ज़्यादा खूबसूरत लग रहे थे और निप्पल्स तो फटने की कगार पर थे.

बिरजू ने उन्हे मुँह में लेकर अगर दांतो से दबा दिया तो शायद उनमे से दूध ही फुट निकलेगा आज.

ऐसा हाल हो रहा था उनका.[/color]



[color=rgb(44,]फिर वो अपने बदन पर चादर बिछा कर उल्टी होकर लेट गयी..
कुछ ही देर में बिरजू तेल गरम करवाकर ले आया.
कपड़े नीचे पड़े थे, बेड पर कंधो तक नंगा बदन देखकर वो समझ गया की अंदर कुछ नहीं पहना है रजनी भाभी ने.
उसके लंड ने करवट लेनी शुरू कर दी उसी वक़्त.
वो बेड पर चड़ा और गर्म तेल हाथो में लेकर उसके कंधे पर रगड़ने लगा.
जैसे ही बिरजू के कठोर हाथ उसके रेशमी बदन पर पड़े तो उसके मुँह से सिसकारी निकल गयी.
आज तक उसने डॉक्टर का स्पर्श ही महसूस किया था.
जो एकदम डेलीकेटेड सा था.
आज पहली बार इतने कठोर हाथ उसके जिस्म का मर्दन करने चले थे..
ये सोचकर ही उसकी मुनिया ने एक बार फिर से खुशी के आँसू निकाल फेंके..
बिरजू ने टी शर्ट और एक खुला सा लोवर पहना हुआ था जिसमे से उसका लॅंड अब पूरा खड़ा होकर तन चुका था..
वो इस वक़्त रजनी की गांड के नर्म हिस्से पर बैठकर उसे तेल लगा रहा था.
रजनी भी उसके कठोर स्पर्श को महसूस करके सिसकारियां ले रही थी..
कल तक जिस इंसान का अता-पता नही था उसकी लाइफ में, उसके सामने वो इस वक़्त नंगी होकर उससे मालिश करवा रही थी..
वैसे ये बॉडी मसाज वाला आइडिया हर बार काम का सिद्ध हो रहा था उसके लिए.
वो आँखे बंद करके खुमारी की एक अलग ही दुनिया में पहुँच गयी जहाँ वो किसी रानी की तरह अपने आलीशान कक्ष मे लेटकर अपने खादिम से अपने बदन की सेवा करवा रही थी..
बिरजू के हाथ धीरे-2 नीचे खिसकने लगे और उसके जिस्म पर पड़ी चादर भी नीचे आने लगी.
इंच-2 करके उसके नंगे बदन ने बिरजू की आँखो की सिकाई करनी शुरू कर दी.
हालाँकि उसकी बीबी पिंकी का बदन भी काफ़ी गदराया हुआ था पर दूसरी औरत को हाथ लगाकर मर्द को हमेशा एक अलग ही तरह का एहसास होता है.
उसकी गहरी साँसे इतनी भारी हो चुकी थी की उनका ताप रजनी को अपनी पीठ पर गिरता हुआ महसूस हो रहा था.
धीरे-2 बिरजू ने वो चादर पूरी उतारकर फेंक दी.
अब वो किसी अप्सरा की तरह उसकी भूखी आँखो के सामने पूरी नंगी पड़ी थी.
और उसके जिन कुल्हो को देखकर वो सीडियों पर आहें भर रहा था वो नंगी गांड इस वक़्त उसकी आँखो के सामने गहरी साँसे लेती हुई पड़ी थी.
एक अलग ही तरह का नशा भी फैलने लगा था कमरे में और बिरजू को पता था की वो गंध उस मधु के छत्ते से आ रही है जो इस गांड के पीछे छुपा कर रखा है रजनी ने.
यानी उसकी चूत से.
और उस चाटते से निकल रहे शहद को पीने की कल्पना मात्र से ही उसके लॅंड ने एक जोरदार हुंकार भरी.[/color]



[color=rgb(44,]उसकी वो रसीली गांड देखकर बिरजू से सब्र नही हुआ और उसने एक झटके में अपने कपड़े निकाल फेंके.
अब वो पूरा नंगा होकर उसके पीछे बैठा था.
रजनी भी जान चुकी थी की बिरजू ने कपड़े निकाल दिए है पर पता नही शर्म की कौनसी चादर थी जो वो मुड़कर देख ही नही पाई.
बस उसके मोटे और काले लॅंड की कल्पना मात्र से ही अपनी चूत को वो कॉटन की चादर पर रगड़ने लग गयी..
बिरजू ने तेल लगाकर उसकी गदराई कमर और फिर ऊँचे गांड के शिखर को जब अपने कड़क हाथो से मसला तो उसके मुँह से सिसकारियाँ ज़ोर-2 से फूट पड़ी
''आआआआआआआआहह..उम्म्म्मममममममममममममममममममममम..... क्या कड़क हाथ है तेरे बिरजू.. मज़ा आ गया...''
बिरजू ने मन में सोचा 'कड़क तो मेरा बहुत कुछ है...जब वो महसूस करोगी तब देखना.'
बिरजू को तो अब भी विश्वास नहीं हो रहा था की रजनी जैसी रसीले जिस्म की मालकिन उसके सामने नंगी लेटी है,
उसने आज तक अनगिनत रंडियां चोदी थी.... 100 रूपए से लेकर 2000 वाली भी , पर ऐसी रंडी ना तो उसने आज तक देखी थी और ना ही ऐसे जिस्म वाली रंडी को चोदने के लिए उसके पास पैसे थे, कम से कम 10 हज़ार मिलेंगे इसके तो एक रात के, जो उसकी औकात से परे था , पर आज फ्री में उसे ऐसा माल चोदने को मिल रहा था इसलिए वो बहुत खुश था आज.
वो अपने हाथ उसकी कमर से लेकर उसके भरे हुए चूतड़ों तक लाकर उनकी मसाज कर रहा था.
धीरे-2 रजनी के कूल्हे अपने आप उपर की तरफ उठने लगे..
और बिरजू खिसक कर पीछे होता चला गया...
अब हाल ये था की बिरजू रजनी के पीछे अपने घुटनो के बल बैठा था और रजनी घोड़ी बनकर अपनी गांड उसके सामने करके आँखे बंद किए गहरी साँसे ले रही थी..
बिरजू ने जब उसकी गुलाबी चूत में से झाँक रहे मोटे दाने को बाहर निकलते देखा तो उसके सब्र का बाँध टूट गया और उसने उन दोनो कुल्हों को अपने हाथों से पकड़कर अपना मुँह उसकी गांड पर चिपका दिया..
ये वो पल था जब उसकी ठंडी सिसकारी से पूरा घर गूँज उठा..[/color]
 
[color=rgb(44,]ये तो शुक्र था की उस वक़्त ईशा नहा रही थी वरना अपना माँ की ऐसी सिसकारी सुनकर वो शायद नंगी ही एक पैर से दौड़ी-2 उपर चली जाती..

अलबत्ता पिंकी को वो सिसकारी ज़रूर सुनाई दे गयी जो इस वक़्त ईशा की पीठ पर साबुन लगाकर उसे नहला रही थी.

और उसे सुनकर वो मुस्कुरा दी.

शायद वो जानती थी की उपर क्या हो रहा है..

ऐसा ही कुछ कल रात उसके साथ भी हुआ था.

जब उसने अपनी मेंमसाब् की फॅंटेसी उसे सुनाई थी.

जिसे सुनकर बिरजू रात भर उत्तेजना में भरकर उसकी भरपूर चुदाई करता रहा.

और सुबह उसके साथ ही वो यहां भी आ गया था.

वो तो बस राजेश के निकलने का इंतजार कर रहा था घर के बाहर छुपकर और जब वो गया तो तुरंत अपना कड़क लॅंड लिए घर के अंदर आ पहुँचा.

और उसके बाद की कहानी तो ऊपर चल ही रही थी.

पिंकी धीरे से बुदबुदाई 'आज तो आप गयी मेंमसाब्...'

और उपर हो भी ऐसा ही कुछ रहा था..

रजनी की गांड के छेद को अच्छी तरह से गीला करने के बाद बिरजू ने अपने लॅंड पर ढेर सारी थूक लगाई और उसे रजनी की गांड के छेद पर टीका दिया..

रजनी मुँह घुमा कर बोलने ही वाली थी की यहाँ नही पर तबतक तो बिरजू की बैलगाड़ी चल चुकी थी

और एक जोरदार हुंकार के साथ उसने अपनी पूरी ताक़त लगा कर अपने बेल को उसकी गांड की गुफा में धकेल दिया..

संकरी सी जगह में उस मोटे काले लॅंड को जाने में काफ़ी मुश्किल हो रही थी और उतनी ही मुश्किल रजनी को भी हो रही थी..

आज तक राजेश ने भी इतनी निर्दयता के साथ उसकी गांड नही मारी थी

पर बिरजू को देखकर लग रहा था की वो इस खेल का पुराना खिलाड़ी था

क्योंकि उसे रजनी के कराहने और चिल्लाने का भी असर नही हो रहा था...

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[color=rgb(44,]''आआआआआआआआहह नाआआआहियीईईईईईईईईईईईईईईईई बिरजू..... बहुत दर्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड हो रहाआआआआआआआअ है यहा........निक्ाआलूऊऊऊओ वाहा से..आआआआआआआआआहह''
पर वो उसकी एक नही सुन रहा था.
अपनी ही धुन में उसकी गांड के गोदाम में अपना लंड पेलने में लगा हुआ था ..
उसके लॅंड का हर प्रहार रजनी की गांड के तानपुरे में एक साथ कई राग छेड़ देता जिससे उसका पूरा शरीर झंनझना उठता
वो चीख रही थी पर वो रुका नही...
अपना मोटा लोढ़ा उसके अंदर पेलता चला गया.
उसकी हर आहह उसके मन में एक अजीब सी ठंडक पहुँचा रही थी..
ऐसी हाइ सोसाइटी में रहने वाली भाभियों की गांड मारने को रोजाना नही मिलती.
आज इस मौके का वो अच्छी तरह से फायदा उठा रहा था..



और जल्द ही उसके लॅंड ने संकेत देने शुरू कर दिए की अब बाढ़ आने वाली है ...
उसने रजनी को खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया.
उसके दोनो पैरों को पकड़ कर नीचे से उसकी गांड के छेद में अपना लॅंड पेलता रहा.
और तब तक पेला जब तक उसके लॅंड ने उसकी गोल मटोल गांड में एक छोटी नहर का निर्माण करना नही शुरू कर दिया.



तब तक रजनी भी उसके झटकों की अभयस्त हो चुकी थी और अपने शरीर के अंदर से आ रही गुलाबी तरंगो को महसूस करके उत्तेजना के चरम पर वो भी पहुँच चुकी थी..उसके हर झटके को वो मजे से झेल भी रही थी और अपनी चूत के दाने को मसलकर खुद भी अपने ओर्गास्म के करीब पहुँच रही थी
''आआआआआआआआआअहह बिरजू....क्या मोटा लॅंड है रे तेरा...कसम से..तूने तो जीवन भर के लिए मेरा छेद बड़ा कर दिया... ...इतना मोटा लॅंड लेने के लिए तो मैं कब से तरस रही थी..आज मेरी इच्छा पूरी हुई है...अहह, और जोर से कर ...... उम्मम्मम्मम अह्ह्ह्हह्हह ''
और फिर उसकी गांड से रिस रिसकर ढेर सारा बिरजू का रस निकलने लगा और चूत में से उसका खुद का.
माहौल एकदम शांत हो चुका था.
दोनो गहरी साँसे लेते हुए एक दूसरे के उपर गिरकर संभलने की कोशिश कर रहे थे.
तब रजनी ने पहली बार उसके काले भूसंद लॅंड को देखा..
काले नाग जैसा ख़ूँख़ार था वो..
गांड मारने के बाद अपने ही रस में डूबकर अब सुस्ता रहा था..
उसकी नसें दूर से ही चमक रही थी..
और जिस काले लॅंड की कल्पना उसने आज तक की थी, वो उससे भी ज़्यादा निकला..
और एक अंजान सम्मोहन में बँधी रजनी का सिर खिसक-2 कर अपने आप उसके लॅंड की तरफ जाने लगा..
बिरजू के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी ये सोचते ही की अब ये रसीली भाभी उसके मोटे लॅंड को मुँह में लेगी..
अभी तो पूरा दिन पड़ा था.
और इस पूरे दिन में उसे क्या-2 करना है ये वो अच्छी तरह से जानता था.[/color]
 
[color=rgb(44,]रजनी की गांड से रिस रिसकर ढेर सारा बिरजू का रस निकलने लगा और चूत में से उसका खुद का.माहौल एकदम शांत हो चुका था.दोनो गहरी साँसे लेते हुए एक दूसरे के उपर गिरकर संभलने की कोशिश कर रहे थे.

तब रजनी ने पहली बार उसके काले भूसंद लॅंड को देखा..काले नाग जैसा ख़ूँख़ार था वो..गांड मारने के बाद अपने ही रस में डूबकर अब सुस्ता रहा था..उसकी नसें दूर से ही चमक रही थी..

और जिस काले लॅंड की कल्पना उसने आज तक की थी, वो उससे भी ज़्यादा निकला..और एक अंजान सम्मोहन में बँधी रजनी का सिर खिसक-2 कर अपने आप उसके लॅंड की तरफ जाने लगा..

बिरजू के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी ये सोचते ही की अब ये रसीली भाभी उसके मोटे लॅंड को मुँह में लेगी..अभी तो पूरा दिन पड़ा था.और इस पूरे दिन में उसे क्या-2 करना है ये वो अच्छी तरह से जानता था.

*****************
अब आगे
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रजनी की लपलपाती जीभ ने बिरजू के लॅंड को छुआ तो उसे करंट सा लगा..
बिरजू ने शायद कल्पना भी नही की थी की इतने ऊँचे घराने की औरत उसके लॅंड को चूसने के लिए इतनी बेकरार होगी..
बिरजू की आँखो में भी हवस की परछाईयाँ एकदम से उमड़ी और उसने रजनी के बाल पकड़कर अपना पूरा लौड़ा एक ही बार में उसके मुँह में घुसेड डाला.

बेचारी गुं गुं करती हुई छटपटाने लगी.
शायद उसकी साँस अटक रही थी इतना बड़ा लॅंड मुँह में लेने से.
पर उसे मज़ा बहुत आ रहा था.
इसलिए जब बिरजू ला रस से सना लॅंड उसके मुँह मे गया तो वो उसे बुरी तरह से चूसने लगी.
जैसे लॉलिपोप..
और उसकी नसों में फंसी आख़िर की चंद बूंदे भी उसने अंदर फूँक मारकर निगल डाली.

तभी दरवाजे पर एक आहट सी हुई.
बिरजू ने देखा तो उसकी बीबी पिंकी खड़ी थी.
वो उसे देखकर मुस्कुरा दिया.
उसके हाथ में ट्रे थी जिसमे बड़े से काँच के ग्लास में बादाम वाला दूध था..

रजनी ने तिरछी नज़रों से देखा की कौन है, और पिंकी को देखकर वो एक बार फिर से अपने काम में लग गयी.
पिंकी का बदन अपने सामने का नज़ारा देखकर सुलग सा उठा.
वैसे तो उसे पता था की उसका मर्द दूसरी औरतों के पास जाता है पर ऐसे उसे किसी दूसरी औरत के साथ देखने के ये पहला मौका था.
अपनी मालकिन को अपने पति के लॅंड को चूसते देखकर उसे इस वक़्त खुद मालकिन होने का एहसास हो रहा था.
कैसे ये बड़े घर की औरतें मोटे लॅंड की दीवानी होती है.
अपने ही घर में काम करने वाली औरत के पति का लॅंड वो ऐसे चूस रही थी जैसे इसी दिन के लिए पैदा हुई थी वो..
मालकिन और नौकर के अंतर को ख़त्म करते इस दृश्य ने एक अलग सा एहसास करवाया पिंकी को.



पिंकी आगे चलकर आई और बादाम मिल्क अपने पति को देते हुए बोली : "लो जी.ये पी लो, इस से ताक़त मिलेगी..ताकि आप मालकिन की अच्छी तरह से सेवा कर सके.''
बिरजू ने मुस्कुराते हुए वो ग्लास ले लिया और एक लंबे घूंठ के साथ वो दूध पी डाला.
उसने देखा की पिंकी की नज़रें नागिन बनकर उल्टी लेती मालकिन के जिस्म पर फिसल रही थी.
उसे देखकर बिरजू को एक ख़याल आया और वो बोला : "एक काम करो..तुम भी आओ.और नीचे से मालकिन को चूसो.तैयार करो इनकी चूत को मेरे लॅंड को लेने के लिए.''
बिरजू की बात सुनकर रजनी का शरीर काँप सा उठा.
एक साथ दोहरे मज़े की कल्पना मात्र से ही उसकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.
नीचे ईशा नहाने के बाद सो चुकी थी, इसलिए पिंकी भी खाली थी अब.
और ऐसे रसीले दृश्य को देखकर सच कहो तो उसकी चूत भी पनिया चुकी थी.
इस वक़्त उसकी चूत का हाल ये था की चाहे तो उसके पति का लंड मिल जाए या उसकी मालकिन की चूत की रगड़ ,वो दोनो से ही काम चला लेगी
पर उसके लिए पहले मालकिन की सेवा भी तो करनी पड़ेगी ना.
उसने जल्दी-2 अपने कपड़े निकालने शुरू कर दिए.
पहले साड़ी और फिर पेटीकोट और ब्लाउज़.
कच्छी वो पहनती नही थी..
और ब्रा उसकी फट चुकी थी जो फेंकने वाली हो रही थी..
इसलिए उसने उसे खुद ही फाड़ते हुए निकाल कर फेंक दिया.
एक मिनट से भी कम समय में वो जन्मजात नंगी खड़ी थी.

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[color=rgb(44,]ऐसे मौके पर जब औरत नंगी होती है तो उसके हर रंग से वासना टपक रही होती है, यही हाल इस वक़्त पिंकी का हो रहा था.

उसके होंठ फड़फडा से रहे थे मानो जो भी पहली चीज़ मिलेगी उन्हे चूस कर पी जाएगी पूरा.चाहो वो होंठ हो, लॅंड हो या फिर चूत.
उसके स्तन पूर्ण रूप से उत्तेजना में भरकर कड़क हो चुके थे और अंदर की मांसपेशियाँ अपना मर्दन करवाने के लिए मछली की तरह मचलकर व्याकुल हो रही थी.
उसके मोटे निप्पल्स तन कर इतने कठोर हो चुके थे की उन्हे कोई उंगलियो के बीच रखकर दबा दे तो वो पानी के गुब्बारे की तरह फट पड़ते
यही हाल उसके समतल पेट का था जो गहरी साँसे छोड़ते हुए थोड़ा बाहर निकलता तो अंदर धँसी नाभि उसे तुरंत वापिस खींचकर अपने अंदर समेट लेती..
और सबसे ज़्यादा उत्तेजना तो उसकी चूत से निकल रही थी.
निकल क्या बह रही थी.
इस वक़्त उसकी चूत का हाल उस सरकारी नल की तरह था जो खराब होने के कारण लगातार बहे जा रहा था..
अपनी चूत से निकल रहे गाड़े रस को वो अपनी जाँघो पर लकीर बनकर नीचे जाते हुए सॉफ महसूस कर पा रही थी.
कुल मिलाकर उसका पूरा बदन इस वक़्त उस प्यार के खेल में डुबकी लगाने के लिए पूरा तैयार था.

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[color=rgb(44,]और जैसा की बिरजू ने उसे कहा था, वो रेंगती हुई रजनी के पैरों की तरफ लेट गयी और उनकी दोनो टांगो के बीच घुसकर अपना मुँह उनकी रिस रही चूत से लगाकर उसे चूसने लगी.
बिरजू का लॅंड चूस रही रजनी को जब ये एहसास हुआ की उसकी लीक कर रही चूत को ठीक करने के लिए पिंकी प्लम्बर बनकर आ गयी है तो उसकी दोनो टांगे खुद ब खुद और भी ज़्यादा फैल गयी..
लगातार दूसरे दिन वो पिंकी के होंठो को अपनी चूत पर महसूस कर रही थी.
और मानना पड़ेगा की उसके चूसने की कला की वो कायल हो चुकी थी.
शायद उसके होंठ मोटे थे
इस वजह से उन्हे अपनी चूत पर महसूस करके उसे ये एहसास मिल रहा था जैसे कोई रबड़ से बनी मशीन उसकी चूत की चुसाई कर रही है.
पिंकी के होंठ और जीभ अंदर तक जाकर उसकी चूत को पी रहे थे और बदले में रजनी भी उतनी ही ज़्यादा उत्तेजना में भरकर उसके पति का लॅंड चूस रही थी.
कुछ ही देर में पिंकी ने उसकी चूत का सारा रस चाट कर सॉफ कर दिया.
पर उसकी चूत की चिकनाहट ना ख़त्म कर पाई क्योंकि वो तो अंदर से रिस रहा था .
और वो ज़रूरी भी था क्योंकि बिरजू के मोटे लॅंड को अंदर धकेलने में इसी चिकनाहट ने बहुत बड़ी भूमिका जो निभानी थी..
नीचे का सारा काम निपटा कर पिंकी भी साँप की तरहा रेंगती हुई उपर की तरफ आ गयी .
रजनी ने थोड़ा साइड होकर उसे भी जगह दे दी और पिंकी ने उसके मुँह से थोड़ा नीचे होकर अपने पति बिरजू के लटक रहे टट्टों को चूसना शुरू कर दिया.
''आआआआआआआआआहह...शाबाश..भेंन की लौड़ी ....आज सच में मज़ा मिला है मुझे ....चूस मेरे टट्टों को....तू भी चूस कुतिया मेरे लॅंड को..आज जैसा मज़ा तो मुझे कभी नही मिला.''



एक नौकर जात इंसान के मुँह से अपने लिए कुतिया शब्द भी इस वक़्त रजनी को अपनी तारीफ जैसा लग रहा था..
लगता भी क्यों नही..
आख़िर वो चूस ही किसी कुतिया की तरह रही थी उसके लंड को..
इतने मोटे..
इतने स्वादिष्ट लॅंड को तो खा जाने का मन कर रहा था उसका.
पर अभी तो उसे चूत में भी लेना था..
और अब उससे ज़्यादा इंतजार नही हो रहा था..[/color]
 
[color=rgb(44,]वो पीछे होकर अपनी टांगे फेला कर लेट गयी..
बिरजू भी समझ गया की अब वक़्त आ चुका है.
ज़्यादा देर करना अब ठीक नही.

वो भी खिसककर आगे आया और उसकी दोनो जाँघो को पकड़कर उसकी आँखों में देखा..
जो न्योता देकर उसके लंड को अपने अंदर बुला रही थी.

बिरजू ने लॅंड का काला सुपाड़ा उसकी गोरी चूत पर रखा और उसके कुछ समझने से पहले ही एक जोरदार झटका मारकर अपना मोटा लॅंड अंदर खिसका दिया.

''आआआआआआआआआआययययययययययययययययययययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई...... मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गयी.......''

[/color]

[color=rgb(44,]पिंकी भी मुस्कुरा दी अपनी मालकिन का रोना सुनकर...
वो जानती थी अपने पति के स्टाइल को..
उसके साथ भी वो ऐसे ही करता था..
चूत चाहे गीली हो या सुखी,
एक ही झटके में लॅंड अंदर डालने का हुनर था उसके पास..
हालाँकि हर बार उसे दर्द ज़रूर होता था ऐसा करवाने में .
पर थोड़ी देर बाद उतना ही मज़ा भी आने लगता था.
और यही हाल अब रजनी का भी हो रहा था..
पहले तो उसे लगा जैसे एक बाँस का मोटा टुकड़ा उसकी टॅंगो के बीच डाल दिया है.
जो उसकी संतरे की फांको को चीरा हुआ अंदर घुसता चला गया..
पर जब 2-4 घिस्से लगवाने के बाद उसके मज़े का एहसास हुआ उसे तो एक मीठी सी सिसकारी निकली उसके मुँह से...
आँखे खुद ब खुद बंद हो गयी..
होंठो ने फड़कना छोड़ दिया.
और गीली जीभ निकलकर उसके खुद के सूखे होंठो को गीला करने लगी..



बिरजू ने नीचे झुकते हुए अपना पूरा भार उसके उपर डाला और अपना लंड उसकी जड़ तक घुसा कर अंदर ठोकर मारी और साथ ही साथ उसके रसीले होंठो को अपने मुँह मे लेकर ऐसे चूसने लगा जैसे ग़रीब बच्चे को सिल्क चॉक्लेट मिल गयी हो..
वो उसे बुरी तरह से नोचकर चूस रहा था..
और साथ ही साथ नीचे से अपने लंड के करारे धक्के मारकर उसकी चूत का बेंड भी बजा रहा था.
उस बेंड पर अपने शरीर की थिरकन के साथ रजनी ऐसे नाच रही थी मानो जिंदगी में पहली बार चुदाई करवा रही हो.
''आआआआआआआआआआआआअहह...बिरजू.........क्या लॅंड है रे तेरा..मजाआाआआआआआअ आ गय्ाआआआआआआआआआ..... उम्म्म्मममममममममममममममम... चूत पूरी भर गयी है रे मेरी..''



अपनी और अपने लॅंड की तारीफ भला किसे पसंद नही आती.
बिरजू को भी आई और उसके परिणाम स्वरूप उसने और तेज़ी से अपने लॅंड के धक्के रजनी की चूत में मारने शुरू कर दिए..
उसके हर झटके से रजनी के मोटे मुम्मे उसके खुद के ही मुँह पर आकर लग रहे थे..
ऐसी वहशिपन से भरी चुदाई उसकी राजेश ने भी नही की थी आज तक.
और इसलिए भी उसे बिरजू की ये चुदाई कुछ ज़्यादा पसंद आ रही थी.

[/color]
 
[color=rgb(44,]सामने ही बिस्तर पर पड़ी पिंकी भी अपनी काले रंग की चूत को बुरी तरह से मसल रही थी..
और बुदबुदा रही थी..

''अहह...क्या चोद रहा है रे बिरजू...ऐसे मुझे तो ना चोदा तूने आज तक...जल्दी निपटा मालकिन को..मेरी चूत की प्यास भी बुझानी है तुझे...अहह''

रजनी तो अपने ऑर्गॅज़म के काफ़ी करीब थी..
पहले अपनी गांड मरवाते हुए भी उसकी चूत से काफ़ी रस निकला था.
और अब भी उसकी चूत फटने के कगार पर थी..
और जल्द ही उसने अपनी दोनो टांगे बिरजू के गठीले बदन के चारों तरफ लेपेटी और अपने मुम्मे उसके गले से लगाकर उसे अपने उपर खींच लिया...
और झड़ते हुए ज़ोर से चिल्ला उठी..

''आआआआआआआआआआआआआहह... मैं तो गयी ...बिरजू...अहह.. मैं तो गयी रे...''

[/color]

[color=rgb(44,]बिरजू ने जब अपना तना हुआ लॅंड रजनी की चूत से बाहर खींचा तो पिंकी लपक कर उसके करीब आई और उस रस से सने लॅंड को अपने मुँह में लेकर उसे चूसने लगी.
ये उसने इसलिए किया क्योंकि उसे लॅंड चूसना पसंद था
और इसलिए भी क्योंकि उसे रजनी के जूस का स्वाद और भी ज़्यादा पसंद था.
अपने पति के लॅंड को चूसने में शायद उसे आज तक इतना रोमांच महसूस नही हुआ था जितना आज हो रहा था.
सामने गहरी साँसे ले रही रजनी उन दोनो की प्रेम लीला देखकर अपने आप को संभालने की कोशिश कर रही थी..
बिरजू के लॅंड को पूरा सॉफ करके उसने उसे बेड पर धक्का दिया और टांगे तिरछी करके उसपर चढ़ गयी.
और उसकी आँखो में देखते हुए बोली
''तुझे पता है ना.मुझे उपर बैठकर करवाना ज़्यादा पसंद है.''
और फिर मुस्कुराते हुए उसने लॅंड को चूत पर टीकाया और उसपर फिसलती चलयी गयी...
ऐसा लागास जैसे वॉटर पार्क में किसी स्लाइड से पूल में फिसल रही हो..
और फिर दोनो ने एक दूसरे के हाथ पकड़े और लय से लय मिलाकर चुदाई करने लगे.
बिरजू के झटके नीचे से उपर आ रहे थे और पिंकी के उपर से नीचे..
दोनो की चुदाई देखकर रजनी को भी काफ़ी मज़ा आ रहा था..



और जल्द ही उस चुदाई का फल दोनो के चेहरे पर दिखाई देने लगा.
बिरजू तो दूसरी चूत मारने के कारण झड़ने के कगार पर पहुँच गया और पिंकी इतनी देर से अपनी चूत में उत्तेजना के सैलाब को दबाए रखने के बाद उसे निकालने की जल्दी में ..
और जब दोनो एक साथ झडे तो उनकी सिसकारियों ने पूरे घर को सिर पर उठा लिया.
पूरा कमरा सैक्स से भरी सिसकारियो से गूँज उठा..
''आआआआआआआआआअहह...बिरजू...आअह्ह्हहह.. मैं तो गयी रे...अहह....''
सब कुछ शांत होने के बाद वो बिरजू के साइड में लूड़क गयी..
एक तरफ रजनी थी और दूसरी तरफ पिंकी..
और बीच में दोनो की चुदाई के बाद गहरी साँसे लेता हुआ बिरजू.
आज उसे शायद अपनी किस्मत पर विश्वास नही हो रहा था.
पर जो भी था.
आज का दिन उसका था.
बाद में वो कपड़े पहन कर बाहर निकल गया..
ऐसी मस्ती से भरी चुदाई करवाने के बाद रजनी का अंग-2 टूट रहा था.
उसने तो उठने की भी जहमत नही उठाई.
वैसे ही नंगी अवस्था में सो गयी.



पिंकी ने सारे कपड़े समेत कर साइड में रखे और खुद अपने कपड़े पहन कर नीचे जाकर काम करने लगी.
आज के दिन का रोमांच पूरे दिन रहने वाला वाला था[/color]
 
[color=rgb(44,]
बाद में बिरजू कपड़े पहन कर बाहर निकल गया..
ऐसी मस्ती से भरी चुदाई करवाने के बाद रजनी का अंग-2 टूट रहा था.
उसने तो उठने की भी जहमत नही उठाई.
वैसे ही नंगी अवस्था में सो गयी.

पिंकी ने सारे कपड़े समेत कर साइड में रखे और खुद अपने कपड़े पहन कर नीचे जाकर काम करने लगी.
आज के दिन का रोमांच पूरे दिन रहने वाला वाला था

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अब आगे
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वहाँ हॉस्पिटल में पहुँचकर राजेश का किसी भी काम में मन नही लग रहा था..
हालाँकि एक डेड बॉडी का पोस्टमॉर्टम करना था उसे पर उसका दिमाग़ घर पर हुई बातों से हट ही नही रहा था.

उसका असिस्टेंट 2 बार उसे बुलाकर जा चुका था पर वो अपने केबिन में बैठा हुआ सुबह हुई बातों की गहराई में उतरने का प्रयास कर रहा था..

उसके दिमाग़ में शुरू से अंत तक सब कुछ फिल्म की भाँति चल रहा था.
जैसा की शुरू में उसने सोचा था की ये जो कुछ भी हो रहा है वो शेफाली की आत्मा का ही असर है
पर बाद में जब उसने रजनी की डायरी पढ़ी तो उसे सच्चाई का पता चला.
और उस सच्चाई के साथ-2 उसे ये भी पता चला की उसकी खुद की ही बेटी उस से चुदने के लिए कितनी लालायित है.
और यही हाल उसकी सहेली चाँदनी का भी था.
रजनी भी अपनी सैक्स लाइफ में थोड़ा मसाला घोलने के लिए ये सब कर रही थी और ये सब वो चाँदनी की माँ यानी राधिका के साथ मिलकर कर रहे थे.उनके साथ-2 पिंकी भी बीच में आकर फ्री के मज़े दे गयी.

यानी हर तरफ चुदाई का अच्छा ख़ासा इंतज़ाम था.
फिर अचानक ऐसा क्या हो गया की आज सुबह वो सब उसके साथ ऐसा व्यवहार कर रहे थे.
जैसे आज से पहले कुछ हुआ ही ना हो.
ऐसा क्यों किया होगा उन्होने.

कहीं सच में तो उस हार में शेफाली की आत्मा का असर नही था.
जो शायद अब उनके उपर से निकल चुका था.
उसने हिसाब लगाकर देखा की कब शेफ़ाली की मौत हुई थी ,
पूरे 10 दिन हो चुके थे ,
यानी मान लिया जाए की हार का असर है तो वो 10 दिन तक ही रहता है
और उन्हें फिर से उसके असर में लाने के लिए वो हार उन्हें दोबारा पहनाना होगा

ओर क्या सच में ऐसा होना मुमकिन है
नही-नही..ऐसा नही हो सकता.
उसने खुद उनकी योजना उस डाइयरी में पढ़ी थी.
पर ये भी तो हो सकता है की शेफाली की आत्मा ने ही वो सब करवाया हो.
उस डायरी में जादुई तरीके से खुद ही वो सब कुछ लिख दिया हो..
इस तरह के उल्टे-सीधे अनेक विचार आ-जा रहे थे उसके दिमाग़ में.

उसने अपने बेग से वो शेफाली का हार निकाल लिया जो घर से निकलने से पहले उसने बेग में डाल लिया था.
और वो सोचने लगा की कहीं इसकी सच्चाई सही तो नही है.
उसकी चमक में वो शायद कुछ ढूढ़ने का प्रयास कर रहा .
शायद ये हार फिर से उनके गले मे डालना पड़ेगा, ताकि उनपर शेफाली का असर एक बार दोबारा हो सके.
वो गहरी सोच में डूबकर ये सोच ही रहा था की तभी उसे रोज़ी की आवाज़ सुनाई दी, जो उसके डिपार्टमेंट में नर्स थी.

''सर ...सर ..वो डॉक्टर महेश आपका इंतजार कर रहे है काफ़ी देर से.प्लीज़ चलिए.''
उसने गुस्से में रोज़ी को देखा, वो बेचारी सहम कर कमरे से बाहर निकल गयी.
राजेश ने बुदबुदाते हुए वो हार वहीं रखा और बाहर निकल गया.

करीब एक घंटे बाद जब पोस्टमार्टम ख़त्म हुआ तो हाथ-मुँह सॉफ करके वो वापिस अपने केबिन की तरफ चल दिया..
अपने केबिन में पहुँचकर उसने देखा की रोज़ी उस हार को हाथ में लेकर बड़े गोर से देख रही थी..
उसके चेहरे की चमक बता रही थी की वो उसे पसंद आया था.

तभी राजेश के दिमाग़ में एक विचार आया.की चलो इस रोज़ी पर इस हार का असर देखा जाए.
वो तो रजनी और उस प्लान का हिस्सा नही थी.
इस हार को पहनने के बाद भी उसपर कोई असर नही होता तो उस डायरी में लिखी बाते ही सच थी.
वरना शेफाली की आत्मा का असर था उस हार पर.

उसने रोज़ी को उपर से नीचे तक देखा, उसकी बेक थी इस वक़्त राजेश की तरफ..
थोड़ी साँवली थी वो, साउथ की रहने वाली थी पर हिन्दी अच्छी बोल लेती थी वो.
एकदम छरहरा सा बदन था उसका.
हल्के-फुल्के से चुचे थे और हल्की सी ही गांड निक्लीहुई थी उसकी ....
पर चेहरा बड़ा ही नशीला सा था उसका.
ख़ासकर उसके मोटे होंठ.
25 की उम्र थी पर अभी तक शादी नही हुई थी.
कुँवारी थी या नही ये उसे पता नही था.



खैर, कुछ सोचकर वो आगे आया और एकदम उसके चेहरे के पास आकर बोला : "ये पसंद आया तुम्हे रोज़ी..''
वो बेचारी एकदम से घबरा गयी.जैसे कोई चोरी पकड़ी गयी हो उसकी..

''वो.वो..सॉरी सर ..ये आपकी टेबल पर पड़ा था तो..तो..मैने..''

राजेश : "इट्स ओक..घबराव मत..वैसे एक बात कहूं , ये तुमपर अच्छा लगेगा , पहन कर देखो जरा ..''

रोज़ी की आँखे बाहर निकालने को हो गयी ये सुनकर : "मैं। ....... नो...नो सर ये तो शायद आप अपनी वाइफ के लिए !!!!!!!! मैं ..ऐसे .कैसे .पहन लू .''

राजेश ने उसके हाथ से वो नेकलेस लिया और घूमकर उसके पीछे आ गया.
उसके गले में वो हार डालकर पीछे से उसका हुक्क लगा दिया.

और रोज़ी बेचारी ये सोचकर परेशान हुए जा रही थी की आज इस खड़ुस डॉक्टर को हो क्या गया है.
आज से पहले तो ढंग से उसे देखता भी नही था.
और आज उसे ये हार पहना रहा है और वो भी इतना खूबसूरत हार..
इस वक़्त वो खुद को हीरोइन और राजेश को हीरो जैसे देख रही थी
उसके दिल की धड़कन इस वक़्त तेज गति से चल रही थी..
उसे तो लग रहा था की उसका दिल सीने से निकलकर बाहर ही ना आ जाए.[/color]
 
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