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XXX Kahani - हीरोइन

और एक बार फिर से वो बिरजू के मोटे और काले लंड के बारे में सोचने लगी की अगर वो मिल जाए तो कैसे वो उसे गले के अंदर तक चूस्कर निगलेगी..



पर रजनी ने फिर अपने दिमाग़ को झटका दिया...
इस वक़्त उसे दूसरे मर्द के बारे में नही सोचना था बल्कि पिंकी को अपने मर्द के लिए तैयार करना था..

और फिर अचानक बिना किसी चेतावनी के वो पलट गयी और पीठ के बल लेट गयी

पिंकी को शायद ये उम्मीद तो बिल्कुल भी नही थी उनसे...
रजनी का अधनंगा बदन उसकी आँखो के सामने था...
ख़ासकर उसकी नंगी चूत , जिसमें से गाड़ा पानी रिस-रिसकर बाहर बह रहा था.

उसकी ब्रा उसके मोटे मुम्मो को संभालने में असमर्थ थी...
इसलिए रजनी ने अपनी बा के स्ट्रेप्स भी नीचे करते हुए उसे घुमाया और ब्रा को भी निकाल फेंका अपने जिस्म से...
अब वो पूरी नंगी होकर लेटी हुई थी पिंकी के सामने...



और पिंकी अपलक रजनी के गोरे और नंगे बदन को देखकर बुत्त सी बनकर बैठी थी..

रजनी : "क्या हो गया तुझे....पहले कभी नंगी औरत नही देखी क्या...सब कुछ तेरे जैसा ही तो है...चल लगा तेल अब अच्छे से...''

पिंकी : "जी...जी मेमसाब्....''

और फिर वो जल्दी-2 अपने हाथ में तेल लेकर रजनी के मखमली बदन को रगड़ने लगी...

वो उसके मुम्मो को बड़े ही प्यार से तेल से नहलाकर रगड़ रही थी...
मानो काँच के बर्तन धो रही हो..



फिर अपनी योजना अनुसार रजनी बोल पड़ी : "अच्छा सोच....अगर तुझे मौका मिले किसी गोरे साहब के साथ सोने का...तो तू क्या करेगी...''

पिंकी की आँखो में गुलाबी डोरे तेर गये ये सुनते ही...
और ना चाहते हुए भी उसके जहन में राजेश का अक्स उभर आया जो नंगा होकर उसके नंगे बदन से खेलता हुआ, अपना लंड उसकी बुर में पेल रहा था...



पिंकी : "धत्त ...ऐसे कैसे.....मैं ऐसा कुछ नही सोचती....''

रजनी : "पर मैं तो ऐसा सोचती हूँ ....''

पिंकी (चौंकते हुए) : "ऐसा मतलब ?''

रजनी (अपनी चूत को अपनी उंगली से मसलते हुए) : "यही...किसी दूसरे काले लंड वाले मर्द के साथ मज़े लेने के बारे में ...किसी रिक्शे वाले के साथ...या धोबी के साथ....या किसी मजदूर के साथ....''

पिंकी : "हाए दैयया....आप तो बड़ी बेशरम हो मेमसाब्....''

इतना कहकर वो मुस्कुरा दी...

रजनी : "मुझे कोई अगर सामने से आकर बोले तो मैं शायद पिघल जाऊं ....''

पिंकी उसकी बात का इशारा समझ गयी....
वो बिरजू के लिए बोल रही थी

पिंकी : "हे भगवान....मेमसाब्...यानी आप...अगर वो बिरजू आपसे आकर बोले तो....''

ये सुनते हू रजनी ने पिंकी का हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रखा और उसकी 2 उंगलियाँ अपनी चूत में उतार दी....
एकदम गीली हुई पड़ी थी वो चूत , पिंकी की उंगलियाँ फिसलती चली गयी अंदर तक....

और रजनी की तेज सिसकारी पूरे कमरे में गूँज उठी...

'''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... अहह...............''

ये तो पिंकी के लिए किसी झटके जैसा था....
उसकी मेमसाब् उसी के पति के लिए ऐसा सोच रही थी.

वैसे तो उसे इस बात से कोई फ़र्क नही पड़ता था, क्योंकि वो अच्छे से जानती थी की उसका मर्द एक नंबर का हरामी है, दारुबाज भी है और लौंडिया बाज भी....
अक्सर वो धंधे वालियों को भी चोदकर आता था और आकर बड़े मज़े ले-लेकर अपनी चुदाई की कहानियां उसे भी सुनाता था...
 
पिंकी ने अपनी दो और उंगलियाँ रजनी की चूत में उतार दी....
सिर्फ़ अंगूठा बाहर था बाकी का हाथ और हथेली रजनी की चूत में थी इस वक़्त.


''ओह्ह मेमसाब्.....आप तो सच में एक नंबर की छिनाल औरत हो....मेरे ही मर्द से चुदवाने के बारे में सोच रही हो.....पता भी है कितना मोटा है उसका हथियार....एक ही बार में फाड़ देगा वो आपकी बुर को....''

रजनी का बदन किसी मछली की तरह मचल उठा और वो बोली : "आह्हहह....... तो डरता कौन है...... बुला ले अपने मर्द को...देखती हूँ कितना मोटा है.....राजेश का भी काफ़ी मोटा है....एकदम कड़क लंड है उनका....वो भी अंदर जाता है तो चीखे निकलवा देता है....गोरा चिट्टा लंड चूसने में भी काफ़ी मज़ा आता है....''

एकदम से गेम ही पलट दी थी रजनी ने....
बिरजू के लंड की बात करते-2 राजेश के लंड की तरफ घूम गयी थी वो....
और वो इसलिए ताकि अपनी योजना को अंजाम तक पहुँचा सके.

और उसका असर भी एकदम देखने को मिल गया उसे...
राजेश के लंड की बात करते हुए पिंकी का दूसरा हाथ खुद की छूट पर पहुँच गया...
अब वो एक हाथ से अपनी चूत मसल रही थी और दूसरे हाथ की उंगलियों से रजनी की चूत की गहराई नाप रही थी.

''आआआआआआआआआहह मेमसाआब.......सच में मोटा है क्या साब का लंड ......उम्म्म्मममममममममममम....... गोरा भी है ना....... मुझे पता था..... साब इतने गोरे है तो .....उनका लंड भी गोरा होगा...... उनके टट्टे भी गोरे होंगे.......चूसने में कितना मज़ा आएगा....एकदम रसगुल्ले जैसे गोरे और मीठे....''

रजनी : "हाँ .......साब के रसगुल्ले तू चूस....बिरजू के गुलाब जामुन मैं चुसूंगी.......''

दोनो की हँसी निकल गयी इस बात पर....
और दोनो एक दूसरे को देखकर काफ़ी देर तक हंसते भी रहे....

और हंसते-2 जब दोनो की नज़रें इस बार आपस मे मिली तो अगले ही पल , एक झटके में रजनी ने पिंकी को अपने उपर खींच लिया और उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूसने लगी....
पिंकी भी पागलों की तरह अपनी गोरी मेमसाब् के रसीले बदन को उपर से नीचे तक मसलते हुए, उनके होंठों का रस पीने लगी....
रजनी ने आनन फानन में उसकी साड़ी को खींचकर निकाल फेंका...
उसके कसे हुए ब्लाउज़ को खींचकर चिथड़े -2 करके फाड़ दिया और फटी हुई ब्रा को भी एक झटके में खींचकर तोड़ दिया...
पेटीकोट और पेंटी का भी वही हश्र हुआ....
1 मिनट के अंदर उसका कसा हुआ बदन पूरा नंगा होकर रजनी के सामने था...
और अब दोनो एक दूसरे के शरीर को ऐसे चाट रहे थे मानो खा ही जाएँगे एक दूसरे को.



अब सच में उस कमरे का तापमान पहले से काफ़ी बढ़ चुका था...
जो एक आने वाले तूफान का संकेत था.
 
रजनी : "हाँ .......साब के रसगुल्ले तू चूस....बिरजू के गुलाब जामुन मैं चुसूंगी.......''

दोनो की हँसी निकल गयी इस बात पर....और दोनो एक दूसरे को देखकर काफ़ी देर तक हंसते भी रहे....

[color=rgb(0,]और हंसते-2 जब दोनो की नज़रें इस बार आपस मे मिली तो अगले ही पल , एक झटके में रजनी ने पिंकी को अपने उपर खींच लिया और उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूसने लगी....पिंकी भी पागलों की तरह अपनी गोरी मेमसाब् के रसीले बदन को उपर से नीचे तक मसलते हुए, उनके होंठों का रस पीने लगी....रजनी ने आनन फानन में उसकी साड़ी को खींचकर निकाल फेंका...[/color]

उसके कसे हुए ब्लाउज़ को खींचकर चिथड़े -2 करके फाड़ दिया और फटी हुई ब्रा को भी एक झटके में खींचकर तोड़ दिया...पेटीकोट और पेंटी का भी वही हश्र हुआ....1 मिनट के अंदर उसका कसा हुआ बदन पूरा नंगा होकर रजनी के सामने था...और अब दोनो एक दूसरे के शरीर को ऐसे चाट रहे थे मानो खा ही जाएँगे एक दूसरे को.अब सच में उस कमरे का तापमान पहले से काफ़ी बढ़ चुका था...जो एक आने वाले तूफान का संकेत था.


***************
[color=rgb(0,]अब आगे[/color]
***************
[color=rgb(0,]रजनी ने जब पिंकी की चूत को देखा तो एक बार के लिए उसकी सिहरन सी निकल गयी.....
चूत पर घने बालों का गुच्छा लटक रहा था उसकी...
जैसे बरसों से काटे ही ना हो वहाँ के बाल..[/color]




उसे याद आया की वो भी तो ऐसी ही थी शादी से पहले तक...
[color=rgb(0,]जब उसने जवानी में कदम रखा था तब से लेकर शादी तक उसने भी अपनी चूत के बालों को काटा नही था...
वो तो सहेलियो के कहने पर उसने चूत सॉफ करवाई थी सुहागरात के लिए वरना उसे अपने बालों से बहुत प्यार था...
उसके बाद उसे कभी मौका ही नही मिला बाल बड़ाने का,वो खुद ही काट दिया करती थी उन्हे ताकि सफाई बनी रहे और राजेश को बुरा ना लगे......[/color]


पर उन बालों की गर्मी का एहसास अलग ही हुआ करता था उन दिनों।

[color=rgb(0,]आज वैसे ही बाल पिंकी की चूत पर देखते ही वो और ज़्यादा उत्तेजित हो गयी और एक ही बार में उसे बिस्तर पर धकेलकर उसने अपना चेहरा उन बालों पर रख दिया...
एक अजीब सी गंध आ रही थी उनमें से...
पसीने और पेशाब की मिली जुली गंध मिलकर एक नशा सा उत्पन कर रहे थे....
और उस नशे में डूबती हुई रजनी ने अपने होंठ खोलकर उसकी चूत पर रखे और उसे चूसने लगी....
और जब उसकी चूत की नर्मी महसूस हुई तो उसकी चूसने की गति और भी ज़्यादा बढ़ गयी.[/color]



[color=rgb(0,]और शायद ये पिंकी के साथ पहली बार था जब उसकी चूत को कोई चूस रहा था....
क्योंकि गीली जीभ के एहसास ने उसकी चूत से गर्म पानी के फव्वारे निकालने शुरू कर दिए थे.
''आआआआआआआहह मेंमसाआआआआआआअब्ब्ब........ ये.....ये तो बहुत मजेदार है....... अहह..... मेरे मर्द ने तो आज तक सिर्फ़ इसमें अपना लॅंड ही डाला है..... उम्म्म्मममममममममममम..... आअज्जजज...... आाज पहली बार....... किसी ने मुँह लगाया है यहाँ..... अहह......... कसम से......... बहुत मज़ा...... आआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई....... आआआहह ..... आआआआआ रहाआआआआआअ है...................... अहह मेंसाआआआआअब्ब्ब्ब चूसो ना ....और ज़ोर से चूसो........''[/color]




और रजनी को तो जैसे कोई छुपा हुआ खजाना मिल गया था....
[color=rgb(0,]वो खजाना जिसे बरसों से किसी ने निकाला नही था....
और जिसे वो अब अपनी जीभ के फावड़े से खोदकर निकाल रही थी...
उफफफफफफफफफफफफफ्फ़....
कितना नशा भरा हुआ था पिंकी की चूत में ...
जैसे पुरानी शराब का कोई ड्रम खोल दिया हो.....
उसमें से शराब रिस-रिसकर बाहर निकलती जा रही थी और रजनी उस शराब को पीकर मस्त हुए जा रही थी.[/color]




लेकिन वो ये नही जान पाई की उसकी खुद की शेम्पेन बहे जा रही है उसकी चूत से और बर्बाद हुए जा रही है.
[color=rgb(0,]पर पिंकी वो कैसे बर्बाद होने देती.....
उसने जब देखा की गाड़े रस की धार निकालकर मेमसाब की जाँघो से होती हुई नीचे गिर रही है तो उसने तुरंत उनकी जांघे पकड़ कर अपनी तरफ खींची और उनकी चूत को अपने मुँह के उपर लाकर पटक लिया....
आज उसका भी पहली बार था इस तरह से किसी दूसरी औरत की चूत का जाम पीना....
लॅंड तो उसने कई बार चूसा था बिरजू का पर चूत रस चखने का पहला मौका था.[/color]
 
दोनो 69 की पोज़िशन में थी.....
[color=rgb(0,]रजनी तो अपनी जीभ से खोद-खोदकर उसकी चूत की मलाई चाट रही थी और उसकी देखा देखी पिंकी ने भी उसी अंदाज से अपने होंठ और जीभ को उस काम पर लगा दिया और उसे जोरों से चूसने लगी...[/color]


[color=rgb(0,]उफ़फ्फ़......
क्या चटपटा सा स्वाद था उसका....
एकदम नमकीन पानी था मेमसाब की चूत का....
जैसे जल्जीरा पी रही हो वो....
उपर से एकदम चिकनी चूत .....[/color]


उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी चिकने हीरो के होंठो को चूस रही थी वो....

[color=rgb(0,]एक बार उसे जब स्वाद आने लगा उस पानी का तो वो रुकी ही नही....
चूत क्या उसके आस पास का सारा हिस्सा और जाँघो तक को वो चाट गयी....
जितना हो सकता था उतना उसने उस जल्जीरे को इकट्ठा किया और पी गयी.[/color]



[color=rgb(0,]दोनो उस खेल को करीब 10 मिनट तक खेलती रही और फिर उनके अंदर कुछ उबलने सा लगा...
जैसे कोई ज्वालामुखी...
और लगभग एक साथ ही उस ज्वालामुखी ने उनकी चूत पर दस्तक दी और जो पानी रिस-2 कर निकल रहा था वो एक ही बार में तूफान बनकर बाहर की तरफ बह निकला......
दोनो के चेहरे उस बौछार से गीले हो गये पर उन्होने चूत को चूसना और पानी को पीना नही छोड़ा.
और करीब 5 मिनट बाद एक दूसरे को अच्छी तरह से सॉफ करने के बाद वो दोनो एक दूसरे की बाहों में ऐसे चिपककर लेट गयीं जैसे बरसों पुराने प्रेमी हो...[/color]




पिंकी : "वाह मेमसाब ......ये जो तरीका आज आपने बताया है वो करके मज़ा आ गया....मुझे तो लगता था की सिर्फ़ मरद औरत ही इस खेल में मज़े करते है पर अब लगता है की इस खेल में इंसानो ने और भी ज़्यादा तरक्की कर ली है...''
[color=rgb(0,]इतना कहकर वो ज़ोर-2 से हँसने लगी...
रजनी : "पर मर्द के लंड का अपना ही मज़ा होता है....''
पिंकी (मंद मंद मुस्कुराते हुए) : "सही कहा मेमसाब ....उसका तो अलग ही मज़ा है....लंबा लंड जब चूत में अंदर तक जाकर रगड़ पैदा करता है तो शरीर से धुंवा सा निकालने लगता है....मन करता है की बस वो लंड ऐसे ही अंदर बाहर होता रहे....होता रहे...होता रहे...''[/color]


कहते -2 जैसे वो किसी ख्वाब में खो गयी....
[color=rgb(0,]और उस ख्वाब में राजेश उसकी चूत का धनिया बुरी तरह से पीस कर उसकी चटनी बना रहा था...[/color]


[color=rgb(0,]और वो सोचकर ही उसके मुँह से एक दबी हुई सी सिसकारी निकल गयी.
''आआआआअहह''
और फिर जब उसने आँखे खोलकर रजनी की तरफ देखा तो वो उसे ही देखकर मुस्कुरा रही थी..
वो शायद समझ चुकी थी की वो राजेश के लॅंड के बारे में ही सोच रही थी..
रजनी : "अंदर बाहर होने में मज़ा आता है जब लॅंड लंबा और गोरा हो..जैसे तेरे साब का है..लेगी क्या ??''
ये तो जैसे एकदम खुल्ला ऑफर ही दे डाला था रजनी ने .
और पिंकी पीछे क्यों रहती भला जब साब की बीबी ही सामने से ऑफर दे रही है
''हाँ हाँ क्यों नही मेमसाब ...ऐसा हो गया तो मज़ा ही आ जाएगा.मैं आपके घर का काम फ्री में कर दिया करूँगी...''[/color]


रजनी भी हंस पड़ी उसकी दिलदारी सुनकर..
[color=rgb(0,]राजेश के लॅंड के लिए तो वो अपनी जेब से पैसे देने तक के लिए तैयार थी
रजनी : "तू उसकी चिंता मत कर..मैं तेरा काम भी करवा दूँगी और तुझे अलग से पैसे भी दूँगी..बस तू वैसा करी रह जैसा मैं बोलू..''
पिंकी का चेहरा चमक उठा..वो बोली " ठीक है मेमसाब ..आप मेरा काम कारवओ, मैं आपका करवा दूँगी..''
रजनी : "मेरा...मेरा कौनसा काम..??''
पिंकी : "अर्रे वही..बिरजू वाला.''
कहकर वो ज़ोर-2 से हँसने लगी..उसके साथ-2 रजनी भी उसका साथ देते हुए हँसने लगी[/color]
 
फिर जो बाते रजनी ने पिंकी को समझाई, उसे सुनकर पिंकी की आँखे फैलती चली गयी..

और वो सोचने लगी की एक पत्नी ऐसा कैसे कर सकती है और ये सब करके उसे क्या मिलेगा भला.

पर उसका तो फायदा ही था ..

साब का लंड जो मिल रहा था उसे और उपर से एक्सट्रा पैसे भी..

उसे तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई फिल्म बन रही है जिसकी वो हेरोयिन है, साब हीरो और मेमसाब डायरेक्टर.



पर बेचारी को ये बात नही पता थी की वो हेरोयिन तो बन रही है पर जो रोल उसे मिल रहा है वो शेफाली का है.
खैर, सबसे पहले तो रजनी को उसका हुलिया ठीक करना था.

और ऐसा करने के लिए वो उसे पहले अपने बाथरूम में ले गयी और शावर चला कर उसे खूब रगड़ -2 कर नहलाया..

बॉडी वॉश से उसके पूरे शरीर को सुगंधित किया..

एन फ्रेंच लगाकर उसकी चूत के साथ-2 उसकी टॅंगो और बाहों के बाल भी निकाल दिए.
पूरी तरह से नहा धोकर वो ऐसे चमक उठी जैसे सच में उसकी सुहागरात हो आज..


अब तो बस शाम का इंतजार था उन्हे..जब राजेश को घर आना था.
पिंकी के कपड़े तो पहले ही फाड़ चुकी थी रजनी , इसलिए उसे उसने खुद का एक ब्लाउज़ निकाल कर दिया जो उसे अब फिट नही आता था..
पर था वो बहुत ही सैक्सी..

आगे से गला थोड़ा गहरा था और पीछे से डोरियों से बाँधने वाला..
उसे पहन कर तो पिंकी रति की मूरत जैसी लग रही थी..
रजनी ने एक बार फिर से पिंकी को सारी बातें समझाई और राजेश के आने से पहले वो ईशा के रूम में जाकर उसके साथ सोने का नाटक करने लगी.
और उसे बोल दिया की साब पूछे तो बोल देना की मेमसाब आज काम करके थक गयी थी इसलिए वो ईशा के साथ सो रही है.

कुछ ही देर में राजेश आ गया..

उसने जब बेल बजाई तो पिंकी ने धड़कते दिल से जाकर दरवाजा खोला..

राजेश की नज़र जब उसपर पड़ी तो उसके लंड ने एक जोरदार अंगड़ाई ली..

'उफ़फ्फ़..ये तो पक्का मरवाएगी मुझे आज..पूरे मूड में लग रही है..लगता है मेरा तीर निशाने पर बैठा है..'



उसे उपर से नीचे तक देखकर वो अंदर आ गया..

पिंकी ने दरवाजा बंद किया और किचन से उसके लिए पानी ले आई.

और जैसा रजनी ने समझाया था, उसे झुककर जब उसने पानी दिया तो उसका पल्लू नीचे खिसक गया और उसके मोटे तरबूज जैसे मुम्मे बाहर आने को आतुर हो उठे..

राजेश की नज़रें उसके मुम्मो को देखती ही रह गयी.
मन तो कर रहा था की उन्हे अभी के अभी दबोच कर मसल डाले और वो जानता था की वो कुछ कहेगी भी नही.
पर वो जल्दबाज़ी करके उनके खेल का मज़ा नही बिगाड़ना चाहता था.

पानी पीकर उसने पूछा : "पिंकी.मेमसाब कहाँ है..''

पिंकी : "साब वो ईशा बैबी के रूम में सो रहीं है..आज काफ़ी थक गयी थी मेमसाब ..और बैबी भी दवाई लेकर गहरी नींद में है..''

वो जैसे बता रही थी की आप कर लो जो करना है.रास्ता सॉफ है.
राजेश : " ओ के ..तुम चाय बनाओ.मैं फ्रेश होकर आता हूँ ..''
पिंकी किचन में चली गयी और राजेश अपने रूम में .

ईशा के रूम के दरवाजे के पीछे छुपी रजनी चोरी छुपे सब देख रही थी..

वो भी देखना चाहती थी अपने पति को अपनी नौकरानी के साथ मज़े लेते हुए.ईशा तो सच में सो रही थी, इसलिए उसका डर नहीं था .
राजेश रूम में गया और उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके और जल्दी से शावर लेकर ढीले-ढाले से कपड़े पहन लिए.

अंदर उसने अंडरवीयर नही पहना।
फिर वो किचन में आया और पिंकी के बिल्कुल पीछे आकर खड़ा हो गया, उसकी गर्म साँसे पिंकी अपनी गर्दन पर महसूस कर पा रही थी..


उसके शरीर के सारे रोँये खड़े हो गये, राजेश का शरीर पीछे से उसे टच कर रहा था जिसे महसूस करके वो काँप रही थी.
पर जैसा की रजनी ने उसे समझाया था अब वो काम करने का वक़्त आ चुका था.
वो बोली : "साब..आपने जब से ये हार दिया है.तब से कुछ अजीब सा लग रहा है..''

राजेश के होंठो पर मुस्कान आ गयी ये सुनते ही..

वो बोला : "अच्छा ..क्या महसूस हो रहा है.''

पिंकी : "ऐसा जैसे मेरे अंदर कोई और है..जैसे..वो मुझसे कुछ ..कुछ कहना चाहती है..''
राजेश समझ गया की बोल तो वो रही है ये सब पर शब्द रजनी के दिए हुए हैं.
पिंकी आगे बोली : "देखो ना साब..शरीर में हर जगह दर्द सा हो रहा है मीठा वाला.मन कर रहा है की कोई मेरे बदन को पकड़कर ज़ोर से दबा दे.मसल दे.रगड़ दे..''

इतना कहते-2 वो राजेश की तरफ घूम गयी..
दोनो की आँखे मिली, राजेश को उसकी नज़रों में हवस की आग जलती हुई दिखाई दे रही थी..
राजेश : "अच्छा ..ये तो बहुत ख़तरनाक लक्षण है..चलो ज़रा मेरे कमरे में .मैं तुम्हारा चेकअप करता हूँ ..''

डॉक्टर राजेश अपने असली रूप में आ चुका था.
राजेश आगे चल दिया और मुस्कुराती हुई पिंकी गैस बंद करके उसके पीछे-2 अपनी गांड मटकाती हुई चल दी.
किचन के साथ ही ईशा का रूम था, जिसके दरवाजे के पीछे छिपी रजनी ये सब सुन रही थी.

और जैसा उसने पिंकी को समझाया था वो ठीक वैसा ही कर रही थी.
सब उसके प्लान के हिसाब से ही चल रहा था.
वो खुश थी की राजेश को उसकी चाल का पता नही चला था.
पर बेचारी ये नही जानती थी की चाल वो नही बल्कि राजेश ने चली थी..
वो तो बस वही कर रही थी जो राजेश उसे करवाना चाहता था.

राजेश ने जान बूझकर कमरे का दरवाजा आधा खुला छोड़ दिया ताकि रजनी बाहर खड़ी होकर उनकी रासलीला देख सके..
कमरे में पहुँचकर राजेश ने उसे एक चेयर पर बिठाया और अपना स्टेथोस्कोप निकाल लाया..
और उसे कान में लगाकर दूसरा सिरा उसने पिंकी की छाती के उपर रख कर उसे साँस लेने को कहा..
उसने जब साँस ली तो उसकी छाती के गुब्बारे और भी ज़्यादा फूलकर उसके सामने आ गये.
ब्लाउज़ इतना टाइट था की पीछे बँधी डोरी उसके साँस लेने से अपने आप खुल गयी और ब्लाउज़ ढलक कर आगे की तरफ लटक सा गया.
राजेश ये देखकर मुस्कुराया पर कुछ बोला नही और उसका चेकअप करने का नाटक करने लगा.
उसके हाथ उसकी छाती के मुलायम हिस्से पर पड़कर वहां की नरमी को महसूस कर रहे थे.
 
पिंकी के मुँह से आहह निकल गयी उस दबाव को महसूस करके.

''आआआआहह साब...यहाँ तो सबसे ज़्यादा दर्द हो रहा है...''

राजेश ने मुस्कुराते हुए उसके गले में बँधे हार को हाथो मे पकड़ा और बोला : "लगता है इस हार के भार की वजह से ये हो रहा है..इसे उतार दो.शायद ठीक महसूस हो..''

पिंकी ने बेमन से उसे उतार कर साइड में रख दिया..

राजेश घूमकर उसके पीछे आया और उसकी पीठ पर स्टेथोस्कोप लगा कर उसका मुआयना करने लगा..

पीठ पर बँधी डोरी तो खुल कर लटक चुकी थी इसलिए उसकी पूरी नंगी पीठ उसकी आँखो के सामने थी..

राजेश ने पूरी जाँच की और फिर अपने हाथ से उसकी पीठ पर दबाव बनाकर उसे थोड़ा सा दबाया.

एक बार फिर से एक मीठी सी सिसकारी निकल गयी पिंकी के मुँह से..

''आआआआआआआआआआआआआआआहह हाआँ साआब बहुत मीठा सा दर्द हो रहा है...ऐसे दबाने से आराम मिला है..''

राजेश : "ओह्ह मैं समझ गया..ऐसा ही एक केस मेरे हॉस्पिटल में आया था पहले भी...इसका बस एक ही इलाज है, तुम्हारे बदन की मालिश करनी पड़ेगी..''

पिंकी ने बिना सोचे समझे सिर्फ़ एक ही बात बोली : "तो कर दो ना साब.''
ये एक खुल्ला ऑफर था राजेश के लिए.
दोनो जानते थे की यही होने वाला है बाद में .
बस बेकार की बाते चोदने में लगे हुए थे इतनी देर से.
दरवाजे के पीछे छुपी रजनी भी पक सी गयी थी इतनी देर से वहां खड़े हुए..
पर अब वो मुस्कुरा रही थी क्योंकि असली एक्शन शुरू होने वाला था.

राजेश : "तो एक काम करो..ये कपड़े उतार दो और बेड पर लेट जाओ.''

पिंकी बिना कुछ बोले उठी और एक-2 करके उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके..
उसका बदन जल सा रहा था.


उसके शरीर की गर्मी को राजेश भी महसूस कर पा रहा था.
पहले रजनी के कमरे का तापमान बड़ा था जब पिंकी ने उसकी मसाज की थी ..
अब इस कमरे का तापमान बढ़ चुका था जब राजेश उसकी मसाज करने वाला था.
आज पिंकी को उसके काम का फल मसाज और एक खड़े लंड के रूप में मिलने जा रहा था.

अब असली तूफान आने वाला था कमरे में .
लॅंड का तूफान.
 
[color=rgb(41,]

राजेश : "तो एक काम करो..ये कपड़े उतार दो और बेड पर लेट जाओ.''

पिंकी बिना कुछ बोले उठी और एक-2 करके उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके..उसका बदन जल सा रहा था.
उसके शरीर की गर्मी को राजेश भी महसूस कर पा रहा था.पहले रजनी के कमरे का तापमान बड़ा था जब पिंकी ने उसकी मसाज की थी ..
अब इस कमरे का तापमान बढ़ चुका था जब राजेश उसकी मसाज करने वाला था.आज पिंकी को उसके काम का फल मसाज और एक खड़े लंड के रूप में मिलने जा रहा था.

अब असली तूफान आने वाला था कमरे में .लॅंड का तूफान.

**************
अब आगे
**************

राजेश इस वक़्त बनियान और पायजामे में था..
पिंकी के नंगे बंदन को देखकर उसका लॅंड फटने को हो रहा था..
सच में.
आज तक उसकी नज़र से वो पता नही कैसे बची रह गयी थी..
शायद अपने मैले कपड़ो में अपनी उफनती जवानी को बाँध कर रखती थी वो आज तक.
पर अब उस जवानी का उफान अपनी चरम सीमा पर था और बिल्कुल नंगा होकर उसकी नज़रों के सामने था.



राजेश ने पास पड़ी तेल की शीशी से तेल लेकर अपने हाथ पर लगाया और उसे बेड पर लेटने को कहा.
और फिर अपने गर्म हाथ उसके तपते बदन पर रखकर मालिश करने लगा.
सबसे पहले उसके हाथ पिंकी की मोटी जाँघ से टकराए.
ऐसा लगा जैसे चिकने पेड़ का तना पकड़ लिया हो.
एकदम कठोर था वहाँ का माँस.
पूरा दिन काम करने के कारण जिम जैसी बॉडी बन चुकी थी पिंकी की.
वो इस वक़्त उल्टी होकर लेटी हुई थी.
राजेश के हाथ लगते ही उसका बदन अकड़ सा गया और उसकी गांड अपने आप कमान की तरह हवा में उठती चली गयी..
और साथ में एक ठंडी सिसकारी निकली उसके होंठो से.

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआआआआआआआआआआआअहह''

राजेश के हाथ थोड़ा उपर गये और उसने उसके उभरे हुए पुट्ठ को पकड़कर नीचे की तरफ दबाया और फिर से धरातल पर ला पटका.
ऐसा करते हुए उसके हाथों ने अच्छी तरह से उसकी गांड के माँस को अंदर तक महसूस किया.
जो लोग भरी हुई गांड के दीवाने होते है वो अच्छी तरह जानते है की इस तरह से गांड को दबाने पर कैसा महसूस होता है.
ठीक वैसा ही राजेश को फील हो रहा था इस वक़्त.
मन तो उसका कर रहा था की अपना मुँह उसके पीछे डाल कर उसकी चूत चूस डाले, पर वो अभी जल्दबाज़ी नही करना चाहता था.

धीरे-2 उसके हाथ उपर तक जाकर उसकी चिकनी पीठ और कंधो को भी मसल रहे थे..
ऐसा करते-2 वो उसकी पीठ पर सवार होकर अपना खड़ा लंड भी उसके उपर रगड़ रहा था..
पायज़ामे में खड़े लॅंड ने जब उसके बदन को छुआ तो एक गीलेपन की लकीर पिंकी के बदन पर खींचती चली गयी..
उसके गर्म बदन पर राजेश का प्रीकम इस वक़्त गर्म तवे पर पानी जैसा लग रहा था.
पड़ने के साथ ही भाप बॅंकर उड़ जाता.
ऐसी आग लगी हुई थी उसके बदन में.

उसे पीछे से अच्छी तरह मसलने के बाद राजेश ने उसे पलटने के लिए कहा.
पिंकी तो कब से इसी पल का इंतजार कर रही थी..
पलटने के बाद उसकी नज़रें सबसे पहले राजेश के खड़े लंड पर गयी जो काफ़ी देर से उसकी पीठ पर चुभकर उसे परेशान कर रहा था.
और राजेश की नज़रें उसके मोटे -2 मुम्मों पर जिन्हे मसलने के लिए उसके हाथ कब से तरस रहे थे.

उसने ढेर सारा तेल लेकर अपने हाथ जब उसके मुम्मो पर रखे तो आनंद के मारे पिंकी ने राजेश की जाँघो को पकड़ लिया और ज़ोर से चिल्लाई " आआआआआआहह साआआआब्ब्बब .. बोला था ना ..यहाँ सबसे ज़्यादा दर्द है...''

राजेश : "फ़िक्र ना करो..तुम्हारा डॉक्टर अब तुम्हारा इलाज कर रहा है..सब ठीक हो जाएगा..''

ऐसा कहते हुए उसने अपनी उंगलियो मे पकड़कर उसके निप्पल को ज़ोर से मसल दिया..
वो चिहुंक उठी और उसके हाथ राजेश की जाँघो से थोड़ा उपर खिसक कर उसके खड़े लॅंड पर पहुँच गये और उसे उसने ज़ोर से दबा दिया...

अब सिसकने की बारी राजेश की थी

''आआआआआआआआआआआआआआआआअहह भेंन चोद ...''

इस वक़्त तो पिंकी को वो गाली भी आई लव यू जैसी लग रही थी..
लॅंड की मोटाई और लंबाई महसूस करके वो जान गयी की उसे काफ़ी मज़ा आने वाला है..
अब राजेश के हाथ उसके जिस्म पर उपर से नीचे तक जा रहे थे पर पिंकी उसके लॅंड को छोड़ने को तैयार ही नही थी..
राजेश के हाथ जब उसकी चूत को सहला रहे थे तो उसके मुँह से शब्द फूटने से लगे, जिनको राजेश समझ भी नही पा रहा था.

''आआआआअहह उम्म्म्ममम ज्ज्ज्जाआाआअ द्दद्डूऊऊऊऊऊऊ इसस्सीईई.. उम्म्म्मममममम हाआआआअ मीईरीईईईईईईई अन्न्ननननननन्णन्द...मीईई..अहह''[/color]
 
[color=rgb(41,]राजेश की डॉक्टरी उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर का जायजा भी ले रही थी..
पिंकी ने सिसकारी मारते हुए कहा : "अंदर तो सब जल सा रहा है...साआबब...कुछ करो ना..''

अब राजेश समझ गया की वक़्त आ चुका है..वैसे भी तेल लगने के बाद वो पूरी तरह से चुदने के लिए तैयार हो चुकी थी , उसकी पूरी बॉडी तेल और जवानी की आग में जल सी रही थी



राजेश ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और वो भी मुस्कुराते हुए खड़ा हुआ और उसने अपनी बनियान और पायज़ामा निकाल कर साइड में फेंक दिया..
अब वो पिंकी के सामने पूरा नंगा होकर खड़ा था.

और जिस गोरे लॅंड को देखने के सपने पिंकी ने देखे थे वो साकार हो चुका था..
राजेश का गोरा, मोटा और लंबा लंड फुफ्कारते हुए उसके सामने खड़ा था.

दरवाजे के पीछे छिपी रजनी भी इस वक़्त अपनी चूत को रगड़ रही थी.
मन तो उसका भी कर रहा था की बीच में कूद पड़े और पिंकी के साथ मिलकर राजेश के लॅंड के मज़े ले..
पर वो ऐसा करके अपने प्लान को बिगाड़ना नही चाहती थी.
इसलिए फिलहाल के लिए वो अपनी चूत को मसलते हुए उनका शो देखने लगी.

राजेश के लॅंड को मंत्रमुग्ध होकर निहारति हुई पिंकी से राजेश ने पूछा : "कैसा लगा .''

पिंकी : "सुंदर.बहुत सुंदर..बिरजू से लॅंड से भी सुंदर..''

एक पत्नी जब ये बात किसी दूसरे मर्द से कहे तो वो सच ही बोल रही होती है..
इस वक़्त पिंकी के लिए लंबाई, मोटाई ज़्यादा मायने नही रखती थी .
सुंदरता भी कोई चीज़ होती है.
बस उसी को देखकर वो मुस्कुराए जा रही थी.

राजेश : "अब इस से तुम्हारे अंदर का दर्द मिटाऊंगा मैं .''

राजेश ने उसकी चूत की तरफ इशारा करते हुए अपने लॅंड को मसलते हुए ये बात कही.

पिंकी : "वो तो मैं कब से चाहती हूँ ..पर क्या..थोड़ी देर के लिए.इसे मैं ..अपने मुँह में ..लेकर..चूस लूँ ''

उफफफ्फ़...
इतनी रसीली बात कितनी आसानी से बोल गयी थी पिंकी..
ये तो वो काम था जिसे करवाने के लिए हर मर्द मरा जाता है...
राजेश ने तुरंत उसे खड़ा करके बेड के किनारे पर बिठाया और अपने लंड को उसके चेहरे के करीब लाकर छोड़ दिया.
बाकी का काम पिंकी ने खुद कर लिया.
उसके लॅंड को पकड़कर सीधा अपने गर्म मुँह में लेजाकर उसका रसपान करने लगी.

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[color=rgb(41,]सही सोचा था उसने.
गोरा लॅंड सुंदर भी था और मीठा भी...एक अलग ही तरह की भीनी सी खुश्बू आ रही थी डॉक्टर के लंड से.
शायद अच्छी तरह से सेनेटाईस करके लाया था राजेश अपने लॅंड को.
राजेश ने उसके सिर पर हाथ रखकर अपना पूरा लॅंड उसके मुँह में डाल दिया जो उसके गले के टॉन्सिल्स तक को टच करने लगा..
मन तो उसका कर रहा था की वहीं लंड हिलाकर अपना माल उसके गले में गिरा दे पर पूरा मज़ा लेना तो बनता ही था उसका.
इसलिए कुछ देर तक लॅंड चुसवाने के बाद उसने उसे बाहर निकाला और पिंकी को धक्का देकर पीछे लिटा दिया.
और बड़े ही रॅफ तरीके से उसकी टांगे पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उतने ही जंगली तरीके से अपना लॅंड एक ही बार में उसकी रसीली चूत पर रखकर जोरदार झटका मारकर उसे चूत में भेज दिया.
''आआआआआआआआआआआआआआअहह साआआआआआआआआआब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बबब धीईरीईईईईईईईईईईईईयेssssss ....''
शायद ये उसने एक्सपेक्ट नही किया था राजेश जैसे सभ्य इंसान से..
वो तो उसके पति जैसे जंगलिपन के साथ उसकी चूत मार रहा था..
वो थी ही इतनी हॉट की राजेश से सब्र ही नही हुआ..
इलाज के नाम पर शुरू हुई मसाज चुदाई तक कब पहुँच गयी , दोनो को ही पता नही चला.
वैसे होना तो यही था आख़िर में जाकर पर ये सब करने में भी काफ़ी मज़ा आया पहले..
और जो अब हो रहा था उसमें तो सबसे ज़्यादा मज़ा मिल रहा था दोनो को.
एकदम धाकड़ तरीके से चुदाई चल रही थी..
चलती भी भला क्यू नही.
पति को बीबी का डर नही था और नौकरानी को अपनी मालकिन का..
सबकी सहमति से ही ये काम हो रहा था.

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[color=rgb(41,]उसके हर प्रहार से पिंकी कराह रही थी...
सिसकारियाँ मार रही थी..
और ये सिसकारियाँ मज़े की थी.
जो उसके तन के अंदर से आ रही थी..

''आआआआआआआआआआआआआअहह साआआआआआआब्ब्बब मजाआाआआआआआ आआआआआआआआआआअ रहाआआआआआ है.... ज़ोर से छोड़ो मुझे...

राजेश को तो यही शब्द पसंद थे.
जैसे रजनी उसे बोलती थी और वो उसे बेतहाशा चोदने में लग जाता था..
ठीक वैसे ही वो इस वक़्त अपनी नौकरानी पिंकी को चोद रहा था..

मर्द भी कितना सीधा होता है, बीबी हो या नौकरानी, हर अंदाज में, उतने ही प्यार से चोदता है, कोई भेदभाव नहीं करता ।

खैर
अचानक राजेश को सामने पड़े ड्रेसिंग टेबल में दरवाजे के पीछे खड़ी रजनी भी झाँकति हुई दिखाई दे गयी..
उसकी आँखो में गुलाबीपन था.
चेहरे पर हवस थी और हाथ उसके खुद की चूत और मुम्मे पर था..
अपना मुम्मा तो उसने ब्लाउस में से पूरा निकाल रखा था और एक हाथ से उसे मसल रही थी और दूसरे हाथ को उसने अपनी साडी उठाकर अंदर डाला हुआ था

उसे ऐसी हालत मे देखकर राजेश की उत्तेजना और भी ज़्यादा बढ़ गयी..
और आख़िर में उसने 4-5 तेज झटके मारते हुए अपने लॅंड का पानी उसकी चूत के अंदर खाली करना शुरू कर दिया.
उसके वीर्य को महसूस करके पिंकी भी झड़ने लगी और आनंद के मारे दोहरी हो गयी

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[color=rgb(41,]झड़ते हुए राजेश ने पिंकी की जाँघ पकड़ ली.
वरना अपने खुद के ऑर्गॅज़म के बाद वो दोहरी होकर बीएड से नीचे गिर जाती
सब कुछ शांत होने के बाद दोनो ने एक दूसरे को देखा और एक दूसरे से लिपट गये..
पिंकी ने झिझकते हुए अपने होंठ राजेश के होंठो से सटा दिए.
हैरानी की बात थी की चुदाई पूरी हो गयी थी पर एक भी बार चूमा नही था राजेश ने उसे..
पर जब चूमा तो राजेश को एहसास हुआ की कितनी बड़ी भूल की थी उसने..
उसके नर्म मुलायम होंठो से जैसे शराब बह रही थी.
एक नशा सा उसकी लार में .
उसके प्यार में ..
उसके किस्स करने के अंदाज में
और जिस अंदाज से वो राजेश के होंठो को चूस रही थी , पोर्नस्टार्स भी फैल थी उसके सामने.
उसके इस अंदाज की वजह से राजेश के लॅंड ने दोबारा हरकत करनी शुरू कर दी थी..
दरवाजे के पीछे खड़ी रजनी, जो खुद झड़ने के बाद निढाल होकर ज़मीन पर पड़ी थी, ये सब देखकर समझ गयी की राजेश अब एक बार और चोदेगा पिंकी को..
पर अब उसका मिशन पूरा हो चुका था..
उसने पिंकी को अपने पति के सामने इस तरह से हथियार डलवाकर चुदाई करवाके ये साबित कर दिया था की वो हार पहनने वाली के उपर शैफाली की आत्मा कब्जा कर लेती है और उसे राजेश से चुदवाने पर विवश कर देती है.
और वो भी बिना किसी दबाव के.
और उसे ये रिपोर्ट अपनी सहेली राधिका को देनी बहुत ज़रूरी थी.
क्योंकि उसी के बाद उन्हे अपने अगले कदम के बारे में सोचना था.
इसलिए राजेश और पिंकी को उनकी अगली चुदाई के लिए छोड़कर वो वहाँ से उठी और दूसरे कमरे में जाकर राधिका से बात करने लगी.
अब तक तो उनके हिसाब से सब कुछ अच्छा ही जा रहा था.
पर अगला दिन सबसे ज़्यादा मुश्किल से भरा होने वाला था.
और इस बार रजनी और उसके गैंग के लिए नही
बल्कि राजेश के लिए.[/color]
 
[color=rgb(41,]इसलिए राजेश और पिंकी को उनकी अगली चुदाई के लिए छोड़कर वो वहाँ से उठी और दूसरे कमरे में जाकर राधिका से बात करने लगी.
अब तक तो उनके हिसाब से सब कुछ अच्छा ही जा रहा था.
पर अगला दिन सबसे ज़्यादा मुश्किल से भरा होने वाला था.
और इस बार रजनी और उसके गैंग के लिए नही
बल्कि राजेश के लिए.


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अब आगे
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रात को राजेश बहुत थका हुआ था, इसलिए वो बेड पर लेटते ही सो गया, पर रजनी के दिमाग़ में वो सब चल रहा था जो उसे राधिका ने कहा था.

राधिका ने जब वो पिंकी की चुदाई की कहानी सुनी तो उसे आभास हो गया की शायद राजेश को उनके प्लान पर थोड़ा शक हो चुका है, इसलिए उसने इतनी आसानी से पिंकी को एक ही बार में चोद डाला और उसका हार भी निकाल कर रख लिया.

ये कोई इत्तेफ़ाक़ नही हो सकता था.

इसलिए उसने अगले दिन राजेश को एक छोटा सा झटका देने की सोची ताकि राजेश उन्हे अपने हाथो की कठपुतली ना बना डाले.

अपना पूरा प्लान उसने रजनी को समझा दिया और उसे ईशा को भी समझाने को कहा.

चुदाई के बाद गहरी नींद सो रहे राजेश को बेड पर छोड़कर रजनी ईशा के रूम में गयी .

वो पूरा दिन सोए रहने की वजह से इस वक़्त जाग रही थी और फोन पर चाँदनी से अपने पापा के बारे में और उनके मोटे लॅंड के बारे में ही बात कर रही थी और दोनो ही अपनी कच्ची चूत रगड़कर उस पल का मज़ा भी ले रही थी...

अपनी माँ को रूम में आते देखकर उसने बाइ कहकर फोन काट दिया..

रजनी जैसे ही बेड पर बैठी ईशा ने अपनी छोटी सी स्कर्ट उठा कर अपनी नंगी चूत रजनी को दिखाई और शिकायत भरे लहजे में बोली : "मोम , देखो ना..कितनी गीली हो रही है ये पापा के लंड के बारे में सोचकर..वो इतना टाइम क्यों लगा रे है भला.उन्हे तो मौका भी मिला था पर कुछ किया ही नही.सिर्फ़ उपर-2 के मज़े लेकर छोड़ दिया.माना की उनके कॉक का टेस्ट अच्छा है पर मुझे वो मेरे मुँह में नही, यहाँ चाहिए.मेरे अंदर.''

वो अपनी लिश्कारे मार रही चूत की तरफ इशारा कर रही थी, जिसे देखकर रजनी की चूत भी पनिया उठी..


उसका बस चलता तो उसे उठाकर इसी वक़्त राजेश के मुँह पर बिठा देती और उसके बाद अपने आप वो लॅंड तक भी पहुँच ही जाती..
पर जो मज़ा इस तरह से धीरे-2 आगे बढ़ने में था, वो जल्दबाज़ी में नही था,
इसलिए उसने अपनी बेटी को समझाया और राधिका आंटी का प्लान भी समझाया.
वो बड़े ध्यान से उसे सुनती रही और अंत में बोली : "वो सब तो ठीक है , पर इसका क्या करू मैं अभी .''
उसका इशारा अभी भी अपनी गीली चूत की तरफ था.
रजनी ने मुस्कुरआअतए हुए उसे देखा और धीरे-2 उसने अपना गाउन पैरों से उपर करते हुए कमर तक खिसका लिया , उसने भी नीचे पेंटी नही पहनी हुई थी, जिसकी वजह से उसकी चूत भी गीली होकर चमक रही ती.
और बोली : "उसके लिए ये है ना..आजा.''
इतना कहकर उसने अपनी बेटी की पतली कमर को पकड़कर अपने उपर खींच लिया..
और उसकी टांगो को अपनी टांगो के बीच केँची बनाकर, अपनी चूत से उसकी चूत को चिपका दिया.
दोनो की प्यासी चूतें एक दूसरे को स्मूच करती हुई आपस में रगड़ खाने लगी.
ईशा तो अपने पापा के लंड के बारे में सोचकर पहले से ही उत्तेजित थी,
अपनी माँ की चूत से अपनी बुर मिलते ही उसमें से ढेर सारा देसी घी निकलकर बाहर बहने लगा और उनकी चूत की स्मूच को और भी चिकना बना दिया..

दोनो ने आनन् फानन में अपने कपड़े निकाल फेंके और एक दूसरे के उपरी होंठो पर भी टूट पड़े.
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[color=rgb(41,]जितनी शिद्दत से दोनो आपस में नीचे के होंठ रगड़ रहे थे उतनी ही शिद्दत से दोनो अपने उपर के होंठो को भी रगड़ और चूस रहे थे.[/color]
 
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