[color=rgb(44,]पर अंदर ही अंदर उसे एक अजीब सी खुशी हो रही थी..
वो शायद इसलिए की उसे डॉक्टर राजेश शुरू से ही काफ़ी पसंद थे..
अचानक राजेश की गर्म साँसे उसे अपनी गर्दन पर महसूस हुई, वो बोले : "कैसा लगा..''
उसने हाथ लगाकर हार को देखा और खुशी से बोल उठी : "इट्स ब्यूटिफुल.डॉक्टर राजेश''
अब वो पल था जब राजेश को उस हार की सच्चाई जाननी थी..
और इसका सिर्फ़ एक ही तरीका था.
उसने रोज़ी को अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखो में देखते हुए धीरे-2 अपने होंठ उसकी तरफ बड़ा दिए.
अगर उसने शोर मचाया या गुस्सा होकर भाग गयी तो डायरी वाली बात ही सही थी.वरना.
वो ये सोच ही रहा था की उसने देखा की शरमाते हुए रोज़ी की आँखे बंद होती चली गयी और अगले ही पल उन दोनो के होंठ एक दूसरे से मिलकर कुश्ती लड़ रहे थे.

एक ही पल में राजेश के दिमाग़ की सेंकडो घंटियाँ बज उठी..
यानी इस नेकलेस के अंदर सच में शेफाली की आत्मा मोजूद थी.
पर कुछ और सोचने समझने का मौका नही मिला उसे.
क्योंकि रोज़ी के रसीले होंठो में पता नही कैसा स्वाद था जो उसके शरीर के अंदर घुलता चला गया.
ऐसे रसीले होंठ उसने अपनी पूरी लाइफ में आजतक नही चखे थे..
धीरे-2 उसने अपने हाथ उसकी नन्ही चुचियों पर रखे और उन्हे दबा दिया..
वो बेचारी तड़प उठी.
शायद ये उसके शरीर का सेन्सिटिव पॉइंट था.
होता भी क्यो नही.
साउथ इंडियन्स के निप्पल्स काफ़ी मोटे जो होते हैं.
शायद राजेश के हाथ उसका काला अंगूर आ गया था जिसे उसने ज़ोर से दबाकर उसकी चीख निकलवा दी थी.
''आआआआआआआहह...म्म्म्ममममममममममममममम...ओह डॉक्टर....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..''
राजेश ने तुरंत अपने रूम का दरवाजा बंद किया और बाहर डु नोट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा दिया.
और जैसे ही वो पलटा एक बार फिर से रोज़ी खुद ही उसके उपर झपट पड़ी..
दोनो ने एक दूसरे के हर अंग को अच्छे से मसला.
राजेश के हाथ जब उसके नन्हे स्तनो पर पड़े तो उसे ईशा की याद आ गयी.
लगभग वही साइज़ था उसका भी.
पर इस मद्रासन के चुच्चे कुछ ज़्यादा ही कठोर थे.
और उन्हे दबाने में भी उतना ही मज़ा मिल रहा था..
उसे नंगा करके चूसने में कितना मजा आएगा
पर अभी कपड़े उतारने का टाइम नही था
इसलिए राजेश ने उसे घुमाया और अपनी टेबल पर झुका कर उसकी स्कर्ट को गांड से उपर चड़ा दिया.
पेंटी नीचे खिसकाई और अपनी जिप्प खोलकर अपना कड़क लॅंड एक ही बार में उसकी चूत में पेल दिया..
बेचारी टेबल पर पड़ी हुई बिलबिला सी उठी राजेश के इस प्रहार से
''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......अहह....ओह डॉक्टर...यू आर टू स्ट्रॉंग...''
[/color]
[color=rgb(44,]रोज़ी ने ऐसा कड़क लॅंड शायद आज तक नही लिया था.
कुँवारी तो वो थी ही नही, और हॉस्पिटल के वॉर्ड बाय्स से चुदवाकर अपना टाइम चला रही थी.
पर आज बड़े दिनों बाद एक डॉक्टर का लॅंड उसकी चूत में गया था.
और वो भी इतना मोटा और लंबा.
सच में .उसे आज बहुत मज़ा मिल रहा था..
राजेश ने तेज गति से उसकी कमर को पकड़कर जोरदार शॉट लगाने शुरू कर दिए..
टेबल पर पड़ा समान धीरे-2 करके नीचे गिरने लगा और वो दोनो अपने-2 ऑर्गॅज़म के करीब पहुँचने लगे..
''आआआआआआआहह डॉक्टर...एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... फक्ककककक मी..फास्टर...मोर....और..तेज..यअहह...आई एम कमिंग डॉक्टर...एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... फककक मी ..अहह''
और अपनी चुदाई का आनंद लेती हुई वो वहीं डॉक्टर की टेबल पर झड़ गयी .
हॉस्पिटल में रहकर ऐसी क़्विकि तो पहले भी उसने की थी ..
पर इतना मज़ा पहली बार आया था उसको.
राजेश ने अपना लॅंड जैसे ही उसकी चूत से निकाला,
रोज़ी घूम कर उसके सामने बैठ गयी और उसके लैंड को अच्छी तरह से चूस - चाटकार सॉफ करके वापिस उसकी गुफा में धकेल कर बाहर से जीप लगा दी.

और एक बड़ी ही सैक्सी स्माइल के साथ उपर उठकर अपनी पेंटी को भी उपर चड़ाया और राजेश के होंठो पर एक प्यारा सा किस्स करके बोली
''मैं तो आपकी फेन हो गयी डॉक्टर राजेश..सी यू सून''
इतना कहकर वो अपनी छोटी सी गांड मटकाती हुई बाहर निकल गयी.
और पीछे रह गया राजेश.
जो अपनी चेयर पर बैठकर मुस्कुराए जा रहा था.
ये उस यकीन की मुस्कान थी जो उसे हो चुका था की ज़रूर इस नेकलेस में ही कुछ जादू है जो उसकी किस्मत का सितारा ऐसे बुलंद हो रहा है.
जाने से पहले वो नेकलेस को उतार कर वहीं टेबल पर रख गयी थी.
उसे वापिस अपने बेग में रखकर वो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट बनाने में लग गया...
और शाम होने के बाद वो अपने घर की तरफ चल दिया.
अब इस हार की ताकत वो जान चुका था , पर बेचारे को ये नहीं पता था की पहले वो सही था, अब गलत है
पर इस गलती में भी उसे शायद लाइफ के वो पल मिलने वाले थे जो उसने सोचे भी नहीं थे ।
जैसे आज की शाम, जो उसके लिए कुछ ख़ास होने वाली थी[/color]
वो शायद इसलिए की उसे डॉक्टर राजेश शुरू से ही काफ़ी पसंद थे..
अचानक राजेश की गर्म साँसे उसे अपनी गर्दन पर महसूस हुई, वो बोले : "कैसा लगा..''
उसने हाथ लगाकर हार को देखा और खुशी से बोल उठी : "इट्स ब्यूटिफुल.डॉक्टर राजेश''
अब वो पल था जब राजेश को उस हार की सच्चाई जाननी थी..
और इसका सिर्फ़ एक ही तरीका था.
उसने रोज़ी को अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखो में देखते हुए धीरे-2 अपने होंठ उसकी तरफ बड़ा दिए.
अगर उसने शोर मचाया या गुस्सा होकर भाग गयी तो डायरी वाली बात ही सही थी.वरना.
वो ये सोच ही रहा था की उसने देखा की शरमाते हुए रोज़ी की आँखे बंद होती चली गयी और अगले ही पल उन दोनो के होंठ एक दूसरे से मिलकर कुश्ती लड़ रहे थे.

एक ही पल में राजेश के दिमाग़ की सेंकडो घंटियाँ बज उठी..
यानी इस नेकलेस के अंदर सच में शेफाली की आत्मा मोजूद थी.
पर कुछ और सोचने समझने का मौका नही मिला उसे.
क्योंकि रोज़ी के रसीले होंठो में पता नही कैसा स्वाद था जो उसके शरीर के अंदर घुलता चला गया.
ऐसे रसीले होंठ उसने अपनी पूरी लाइफ में आजतक नही चखे थे..
धीरे-2 उसने अपने हाथ उसकी नन्ही चुचियों पर रखे और उन्हे दबा दिया..
वो बेचारी तड़प उठी.
शायद ये उसके शरीर का सेन्सिटिव पॉइंट था.
होता भी क्यो नही.
साउथ इंडियन्स के निप्पल्स काफ़ी मोटे जो होते हैं.
शायद राजेश के हाथ उसका काला अंगूर आ गया था जिसे उसने ज़ोर से दबाकर उसकी चीख निकलवा दी थी.
''आआआआआआआहह...म्म्म्ममममममममममममममम...ओह डॉक्टर....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..''
राजेश ने तुरंत अपने रूम का दरवाजा बंद किया और बाहर डु नोट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा दिया.
और जैसे ही वो पलटा एक बार फिर से रोज़ी खुद ही उसके उपर झपट पड़ी..
दोनो ने एक दूसरे के हर अंग को अच्छे से मसला.
राजेश के हाथ जब उसके नन्हे स्तनो पर पड़े तो उसे ईशा की याद आ गयी.
लगभग वही साइज़ था उसका भी.
पर इस मद्रासन के चुच्चे कुछ ज़्यादा ही कठोर थे.
और उन्हे दबाने में भी उतना ही मज़ा मिल रहा था..
उसे नंगा करके चूसने में कितना मजा आएगा
पर अभी कपड़े उतारने का टाइम नही था
इसलिए राजेश ने उसे घुमाया और अपनी टेबल पर झुका कर उसकी स्कर्ट को गांड से उपर चड़ा दिया.
पेंटी नीचे खिसकाई और अपनी जिप्प खोलकर अपना कड़क लॅंड एक ही बार में उसकी चूत में पेल दिया..
बेचारी टेबल पर पड़ी हुई बिलबिला सी उठी राजेश के इस प्रहार से
''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......अहह....ओह डॉक्टर...यू आर टू स्ट्रॉंग...''
[/color][color=rgb(44,]रोज़ी ने ऐसा कड़क लॅंड शायद आज तक नही लिया था.
कुँवारी तो वो थी ही नही, और हॉस्पिटल के वॉर्ड बाय्स से चुदवाकर अपना टाइम चला रही थी.
पर आज बड़े दिनों बाद एक डॉक्टर का लॅंड उसकी चूत में गया था.
और वो भी इतना मोटा और लंबा.
सच में .उसे आज बहुत मज़ा मिल रहा था..
राजेश ने तेज गति से उसकी कमर को पकड़कर जोरदार शॉट लगाने शुरू कर दिए..
टेबल पर पड़ा समान धीरे-2 करके नीचे गिरने लगा और वो दोनो अपने-2 ऑर्गॅज़म के करीब पहुँचने लगे..
''आआआआआआआहह डॉक्टर...एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... फक्ककककक मी..फास्टर...मोर....और..तेज..यअहह...आई एम कमिंग डॉक्टर...एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... फककक मी ..अहह''
और अपनी चुदाई का आनंद लेती हुई वो वहीं डॉक्टर की टेबल पर झड़ गयी .
हॉस्पिटल में रहकर ऐसी क़्विकि तो पहले भी उसने की थी ..
पर इतना मज़ा पहली बार आया था उसको.
राजेश ने अपना लॅंड जैसे ही उसकी चूत से निकाला,
रोज़ी घूम कर उसके सामने बैठ गयी और उसके लैंड को अच्छी तरह से चूस - चाटकार सॉफ करके वापिस उसकी गुफा में धकेल कर बाहर से जीप लगा दी.

और एक बड़ी ही सैक्सी स्माइल के साथ उपर उठकर अपनी पेंटी को भी उपर चड़ाया और राजेश के होंठो पर एक प्यारा सा किस्स करके बोली
''मैं तो आपकी फेन हो गयी डॉक्टर राजेश..सी यू सून''
इतना कहकर वो अपनी छोटी सी गांड मटकाती हुई बाहर निकल गयी.
और पीछे रह गया राजेश.
जो अपनी चेयर पर बैठकर मुस्कुराए जा रहा था.
ये उस यकीन की मुस्कान थी जो उसे हो चुका था की ज़रूर इस नेकलेस में ही कुछ जादू है जो उसकी किस्मत का सितारा ऐसे बुलंद हो रहा है.
जाने से पहले वो नेकलेस को उतार कर वहीं टेबल पर रख गयी थी.
उसे वापिस अपने बेग में रखकर वो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट बनाने में लग गया...
और शाम होने के बाद वो अपने घर की तरफ चल दिया.
अब इस हार की ताकत वो जान चुका था , पर बेचारे को ये नहीं पता था की पहले वो सही था, अब गलत है
पर इस गलती में भी उसे शायद लाइफ के वो पल मिलने वाले थे जो उसने सोचे भी नहीं थे ।
जैसे आज की शाम, जो उसके लिए कुछ ख़ास होने वाली थी[/color]
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