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अंजाने में बहन ने ही चुदवाया पूरा परिवार complete

मैं- “लेकिन बाजी इस तरह मैं खुद को अगर कंट्रोल ना कर पाया और निदा से कोई छेड़छाड़ कर दी तो क्या होगा? नहीं बाजी ये ठीक नहीं है...”

बाजी ने हँसते हुये कहा- “घबराओ नहीं, मैं भी वहीं हँगी और अगर तुम कोई हद से ज्यादा बाहर की हरकत करोगे तो तुम्हें रोक लूंगी...”

शाम को 5:00 बजे अम्मी, निदा और बाजी फिर से निकल गईं घूमने के लिए और मैं भी अकेला ही घूमता रहा और 7:30 बजे वापिस आया तो देखा कि सब लोग आ चुके थे और अम्मी थक के अपने रूम में जा चुकी थीं और फरी मुझे किचेन में दिखाई दी। मैं भी किचेन में जा घुसा, तो देखा कि वहाँ निदा भी मौजूद थी। लेकिन तभी मुझे शरारत सूझी और मैंने अचानक फरी बाजी को पकड़कर अपनी तरफ घुमाया और अपने होंठ बाजी के होंठों पे रख दिए और किस करने लगा। मेरी इस अचानक हरकत से बाजी बौखला गई और तिरछी नजरों से निदा की तरफ देखा जो कि अब भी दूसरी तरफ मुँह किए अपने लिए जूस निकाल रही थी

बाजी ने मुझे पीछे धकेल दिया और बोली- “क्या है भाई, क्यों तंग कर रहे तुम?”

निदा जिसने कि अब तक हमारी तरफ नहीं देखा था दूसरी तरफ मुँह किए हुये बोली- “क्यों बाजी अब भाई तंग करता है तो इतना फ्री ही क्यों किया था?”

निदा की बात खतम होते ही बाजी ने निदा की तरफ देखा और बोली- “मैंने तुमसे मशवरा नहीं माँगा? अब काम करो अपना जल्दी से..." और फिर मेरी तरफ मुड़ते हुये बोली- “भाई खाना खाओगे?”

मैंने इनकार में सिर हिला दिया और बोला- “नहीं, मैं खाना खा चुका हूँ...” और इतना बोलकर किचेन से निकला और अपने रूम में आ गया और टीवी लगाकर लेट गया।

बाजी 9:00 बजे के करीब रूम में आई और आते ही मेरा कान पकड़कर मरोड़ दिया और बोली- “कुछ शर्म भी है। तुममें की नहीं? किचेन में तुम क्या कर रहे थे मेरे साथ? अगर निदा देख लेती तो?”

बाजी की बात सुनकर मेरी हँसी निकल गई और मैं बोला- “अरे बाजी, क्या आप भी? अभी थोड़ी देर बाद जब वो यहाँ आ जाएगी तो हमें पूरी तरह देखेगी, पास में बैठकर मजा लेगी, तब कुछ नहीं होगा क्या?”

बाजी का चेहरा मेरी बात से लाल हो गया और बाजी ने मेरा कान छोड़ दिया और बोली- “तुम और निदा भी ना पता नहीं क्या चीज हो? ना तुम्हें कुछ शर्म आती है ना उसे जरा लाज है...”

 
मैंने कहा- बाजी अगर इंसान मजा करना चाहता हो तो उसे शर्म लाज सब छोड़ना पड़ता है, वरना मजा तो मजा इंसान सांस भी ठीक से नहीं सकता। समझी?”

बाजी कुछ नहीं बोली और बाथरूम में जा घुसी जहाँ से कुछ देर के बाद वो नाइट सूट में बाहर निकली और मेरे साथ ही बैठकर मूवी देखने लगी।

मैंने कहा- क्या इरादा है बाजी?

बाजी ने कहा- थोड़ा सबर करो। उस कमीनी को तो रूम में आ लेने दो, वरना शोर मचाएगी।

10:00 बजे के करीब मुझे बाथरूम में आहट महसूस हुई तो मैंने बाथरूम की तरफ देखा तो वहाँ के दरवाजे से निदा दरवाजे को हमारे रूम की तरफ से लाक करके मुश्कुराती हुई आ गई। निदा रूम में आते ही बाजी की तरफ देखते हुये बोली- "तो बाजी मुझे बताओ कि मैं कहाँ बैठू?”

बाजी ने एक साइड पे पड़े सोफे की तरफ इशारा किया और बोली- वहाँ खामोशी से बैठ जाओ।

निदा बिना कुछ बोले सोफे पे जाकर बैठ गई और बड़े इश्तियाक से हमारी तरफ देखने लगी।

फरी बाजी को हँसी आ गई और फरी बाजी ने कहा- “यहाँ कोई नया तमाशा होने वाला है जो तुम इतनी जज़्बाती हो रही हो?

तो निदा ने बुरा मानते हुये कहा- बाजी प्लीज़... बातें नहीं।

निदा की बात सुनकर बाजी उठी और लाइट आफ करके हल्की पावर की लाइट ओन कर दी और मेरे पास आकर बैठ गई। मैंने बाजी की तरफ देखा और अपनी तरफ खींचकर बाजी की शर्ट उतार दी और फिर अपने साथ लिपटाकर बाजी को किस करने लगा, जिसमें बाजी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी।

 
इसी तरह किस करते हुये मैंने अपना एक हाथ बाजी के पाजामे में डाला और पाजामा नीचे खिसकाने लगा और धीरे-धीरे घुटनों तक उतार दिया और फिर बाजी से अलग होकर खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारकर साइड पे फेंक दिए और निदा की तरफ देखने लगा, जो कि मेरे पूरा हाई लण्ड की तरफ ही देखे जा रही थी।

तभी बाजी ने कहा- भाई बस अब बैठो जाओ यहाँ।

बाजी की बात सुनकर मैंने बाजी की तरफ देखा तो बाजी भी तब तक अपना पाजामा उतारकर साइड में करके बेड पे लेट चुकी थी और बड़ी प्यार भारी नजरों से मेरी तरफ देख रही थी। मैंने बाजी का हाथ पकड़ा और उठाकर बिठा दिया और थोड़ा अपने करीब खींच लिया और अपना लण्ड बाजी के मुँह पे हल्के से मारने लगा। बाजी ने भी हँसते हुये मेरा लण्ड पकड़ लिया और अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी और साथ ही मेरे लण्ड की गोलियों को सहलाते हुये मेरी तरफ देखने लगी।

थोड़ी देर तक बाजी मेरा लण्ड चूसती रही और फिर मैंने बाजी के मुँह में से अपना लण्ड निकाल लिया और बाजी को हल्का सा धक्का देकर बेड पे लिटा दिया और टाँगों से पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। अब मैंने बाजी की टाँगों को थोड़ा खोला और खुद बाजी की टाँगों के बीच में आ गया।

बाजी ने अपनी दोनों टाँगों को पूरी तरह खोलकर अपने हाथों से पकड़ लिया तो मैंने अपना लण्ड बाजी की फुद्दी पे रखकर सेट किया और हल्का झटका मारते हुये अपना लण्ड फरी बाजी की फुद्दी में घुसाने लगा। अब मैं एक और झटका मारा जिससे मेरा लण्ड फरी बाजी की फुद्दी में पूरा घुस गया।

बाजी के मुँह से- “आअहह... भाईई उनम्म्म

.. धीरे ऊओहह...” की आवाज आने लगी।

लेकिन मैंने अब अपना लण्ड पूरा बाहर निकालकर बाजी की फुद्दी में तेज झटके से घुसाना शुरू कर दिया।

बाजी हल्की आवाज में सिसकी- “सस्सीईई... ऊओहह.. भाईई उनम्म्मह... भाई पूरा घुसाकर चोदो भाई...” की आवाज करने लगी और मेरी गाण्ड को अपने पांव और हाथ से अपनी फुद्दी की तरफ दबाने लगी और साथ ही अपनी गाण्ड भी मेरे लण्ड की तरफ दबाने लगी

 
थोड़ी देर तक ऐसे ही मैंने बाजी की फुद्दी का मजा लिया और फिर मैंने अपना लण्ड बाजी की फुद्दी से निकाल लिया और खुद बेड पे चढ़कर बाजी को उल्टा लिटा दिया और अपना लण्ड बाजी की फुद्दी में सेट करके झटके से घुसा दिया। बाजी भी अपनी गाण्ड को ऊपर की तरफ उठाकर चुदवाने लगी, जिससे और भी मजा बढ़ गया बाजी की चुदाई का। मैं बाजी की फुद्दी में अपनी पूरी जान से लण्ड घुसाकर चुदाई कर रहा था।

तभी मेरी नजर निदा की तरफ गई तो मुझे एक झटका सा लगा, क्योंकी उस वक़्त निदा अपना पाजामा नीचे किए अपनी फुद्दी में उंगली कर रही थी।

जब मैंने निदा की तरफ देखा तो निदा की नजर भी मुझसे मिली लेकिन निदा शर्माये बिना मेरी आँखों में । देखकर मुश्कुराती रही और हल्का सा सोफे पे ही सीधी हो गई और अपनी फुद्दी में उंगली करना और भी तेज कर दिया तो मैं समझ गया कि लौंडिया पूरा हाट हो चुकी है। लेकिन मैं कर कुछ नहीं सकता था क्योंकी फरी मुझे करने नहीं देती कुछ भी।

निदा की तरफ से ये नजारा देखते ही पता नहीं मुझे क्या हुआ कि मैंने फरी बाजी को गाण्ड से पकड़कर थोड़ा ऊंचा किया और डोगी स्टाइल में कर दिया और अपनी पूरी जान लगाकर अपना लण्ड बाजी की फुद्दी में अंदरबाहर करने लगा।

बाजी के मुँह से- “ऊऊहह सन्नी मेरे भाई आअह्ह... पूरा घुसाकर करो प्लीज़्ज़... उनम्म्मह भाई बड़ा मजा आ रहा है सस्स्सीईई.. ऊऊह्ह..” की आवाज के साथ ही बाजी का जिश्म एक बार हल्का सा कांपा और फिर बाजी की। फुद्दी ने मेरे लण्ड को 3-4 बार अंदर ही भींचा और फिर बाजी की फुद्दी ने पानी छोड़ दिया।

मेरी भी हिम्मत जवाब देने लगी और मैं भी बाजी की फुददी में ही फारिघू हो गया और साइड पे होकर लेट गया और निदा की तरफ देखा तो उसने अब अपना पाजामा ऊपर कर लिया था और वो हमारी तरफ देखकर मुश्कुरा रही थी।

कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे। फिर मैं उठकर बैठ गया और निदा की तरफ देखने लगा। लेकिन निदा मेरे से नजर चुराने लगी।

फरी बाजी भी उठकर बैठ गई और हम दोनों की तरफ देख बोली- “निदा देख लिया ना तुमने? बस अब निकल यहाँ से...”

 
निदा उठ खड़ी हुई और बोली- “अच्छा बाजी, मैं जा रही हूँ.." और मेरी तरफ देखकर मुश्कुराई और बाथरूम के दरवाजा की तरफ चल दी और दरवाजा खोलकर जाने से पहले गर्दन घुमाकर मेरी तरफ देखते हुये आँख मारी और होंठों को किस करने के स्टाइल में गोल करके किस का इशारा करते हुये निकल गई।

निदा की ये हरकत बाजी ने भी देख ली और निदा के जाते ही मेरे पीछे पंजे झाड़कर पड़ गई और बोली- “देखो भाई, अभी वो बच्ची है। उसे इस सबका कुछ पता नहीं, तुम उससे दूर ही रहो समझे?"

मैं बाजी की बात सुनकर हँस दिया और बोला- “बाजी आपको निदा कहाँ से बच्ची नजर आती है? वैसे और बाकी जब आपने देख ही लिया है तो मैंने उसे कोई इशारा नहीं किया, बल्की वो किस का इशारा कर रही थी,

और फिर बाजी आप खुद ही तो कहती हो कि घर का सेक्स बेस्ट और सुरक्षित है, जिसमें ना तो कोई मसला है। और ना ज्यादा टेन्शन। तो फिर आप निदा से मुझे क्यों दूर रहने को बोल रही हो?"

बाजी कुछ देर तक मेरी आँखों में झांकती रही और फिर बोली- “देखो भाई अगर निदा भी ऐसा चाहती है तो मैं तुम्हारा साथ देंगी। लेकिन अगर तुम किसी हरामजदगी का सोच रहे हो तो ये बात अपने दिमाग से निकल देना

समझे? और इतना बोलकर साइड से अपना पर्स उठाया और उसमें से टेबलेट निकालकर पानी के साथ खा ली। और अपने कपड़े पहनकर लेट गई।

मैं भी बाजी के साथ ही लेट गया और अपना बाजू बाजी पे रख दिया और बोला- “बाजी आप क्यों इतनी टेन्शन ले रही हो? मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा जो आप सोच रही हो, मेरे लिए तो बस आप ही काफी हो..”

बाजी ने मेरी बात सुनकर मेरी तरफ देखा लेकिन कुछ बोली नहीं।

मैंने कहा- “अभी ये टेबलेट किस चीज की खा रही थी आप?”

बाजी ने कहा- “कोई मसला ना हो जाए इसलिए ये टेबलेट ली है मैंने, और अब अपने कपड़े पहनो और खामोशी से सो जाओ समझे? काफी जोर की नींद आ रही है...”

मैं बाजी की बात सुनकर उठा और अपने कपड़े पहनकर सो गया।

 
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मैं भी बाजी के साथ ही लेट गया और अपना बाजू बाजी पे रख दिया और बोला- “बाजी आप क्यों इतनी टेन्शन ले रही हो? मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा जो आप सोच रही हो, मेरे लिए तो बस आप ही काफी हो..”

बाजी ने मेरी बात सुनकर मेरी तरफ देखा लेकिन कुछ बोली नहीं।

मैंने कहा- “अभी ये टेबलेट किस चीज की खा रही थी आप?”

बाजी ने कहा- “कोई मसला ना हो जाए इसलिए ये टेबलेट ली है मैंने, और अब अपने कपड़े पहनो और खामोशी से सो जाओ समझे? काफी जोर की नींद आ रही है...”

मैं बाजी की बात सुनकर उठा और अपने कपड़े पहनकर सो गया।

अगली सुबह जब मेरी आँख खुली तो देखा कि 8:00 बज चुके थे और निदा मुझे उठा रही थी।

मैंने निदा की तरफ देखा और बोला- क्या है?

निदा ने बड़े अजीब अंदाज में कहा- भाई अम्मी और बाजी नहाकर बाहर गई हैं नाश्ता लाने, और मैं नहाने जा रही हूँ। तुम भी अब उठ ही जाओ..." और इतना बोलकर बाथरूम में जा घुसी।।

निदा के बाथरूम जाते ही मैं जल्दी से उठा और बाथरूम की तरफ गया तो देखा कि वहाँ बाथरूम का दरवाजा हल्का सा खुला हुआ है तो मैंने झट से अपनी आँख खुली झिरी से लगा दी। तभी निदा ने बाथरूम का दरवाजा खोल दिया तो मुझे निदा नजर आई जो कि अपनी सलवार उतार चुकी थी और एक हाथ से पैंटी उतारने के लिए अपनी पैंटी पकड़े हुये थी।

मुझे बाथरूम के दरवाजा के पास झुका देखकर निदा थोड़ा गुस्से का ड्रामा करते हुये बोली- “भाई कुछ तो शर्म करो? बहन हूँ मैं तुम्हारी और तुम हो कि घटिया इंसान की तरह मुझे छुप के देख रहे थे...”

मैं कुछ नहीं बोला और निदा का ड्रामा समझते हुये भी खामोशी से वापिस आ गया और आकर बेड पे बैठ गया।

तभी निदा ने आवाज लगाई- “भाई आपके रूम में अगर कोई तौलिया है तो देना प्लीज़्ज़..."

मुझे गुस्सा तो काफी आया, लेकिन मैं पी गया और कुछ बोले बिना ही बाजी वाला तौलिया उठाकर बाथरूम की तरफ चल दिया। जैसे ही बाथरूम के दरवाजा पे पहुँचा तो वहाँ का नजारा देखकर तो मेरा लण्ड पूरा हाई हो गया, क्योंकी अब निदा सिफ़ ब्रा और पैंटी में थी जिसमें उसकी गाण्ड देखते ही लण्ड उछालने लगा। दिल तो कर रहा था कि सब कुछ भूल जाऊँ और यहीं इस साली को पटक के गाण्ड फाड़ डालें। लेकिन मैंने अपने आपको कंट्रोल किया और निदा को आवाज दी, तो निदा ने मेरी तरफ अपना चेहरा घुमाया और मुझे देखकर मुँह बनाते । हुये तौलिया पकड़ लिया और साथ ही दरवाजा भी बंद कर लिया।

 
मैं वापिस आकर बेड पे बैठ गया और निदा के नहा लेने के बाद मैं भी नहाकर तैयार हो गया। तब तक अम्मी और बाजी ने नाश्ते के लिए आवाज लगा दी। फिर हमने मिलकर नाश्ता किया।

फिर बाजी ने कहा- “अम्मी आज सब मिलकर चलते हैं चेयर लिफ्ट पे...”

अम्मी ने कहा- “नहीं, तुम सन्नी के साथ चली जाओ हम कल हो आए थे...”

निदा ने कहा- “तो क्या हुआ अम्मी, आज फिर चलते हैं। भाई भी चलेगा हमारे साथ.."

अम्मी ने कहा- “ठीक है लेकिन मैं वापिस आ जाऊँगी फिर तुम लोग खुद ही घूम फिर के आ जाना ओके?”

अम्मी की बात को सबने मान लिया और फिर हम तैयार होकर चेयर लिफ्ट की तरफ चल दिए। टिकेट लेने के बाद हम लोग चेयर लिफ्ट में सवार हो गये। निदा और फरी बाजी अम्मी के साथ बैठ गईं तो मैं उनके सामने बैठ गया।

लिफ्ट की सैर करने के बाद अम्मी ने कहा- “अब तुम लोग घूमो फिरो, मैं वापिस जा रही हूँ..” और ये बोलकर अम्मी घर की तरफ चल दी।

हम वहाँ के बाजार में घूमने लगे कि तभी फरी बाजी का पांव मुड़ गया और उनको हल्की मोच आ गई। मैंने और निदा ने बाजी को सहारा दिया और डाक्टर के पास ले गये, जहाँ पट्टी करवाई और दवाई ली और बाजी को सहारा देकर घर की तरफ चल दिए। लेकिन अभी हम घर से कुछ ही दूर थे कि मेरी नजर अचानक अम्मी पे पड़ी और मैं चौंक गया।

 
मैंने अम्मी को अपने वाले मकान से 3 घर छोड़कर एक मकान में जाते देखा और साथ ही सिर घुमाकर फरी और निदा की तरफ देखा तो वो दोनों अपने ध्यान में थीं। यानी बाजी फरी तो पांव के दर्द की वजह से इधरउधर कोई ध्यान नहीं दे पा रही थी, लेकिन निदा जो कि बाजी को मेरे साथ मिलकर दूसरी तरफ से सहारा दिए हुये थी, उसका भी सारा ध्यान बाजी की तरफ ही लगा हुआ था।

मैंने उन दोनों को कुछ ना बताने का फैसला किया और बाजी को घर ले गया, जहाँ लाक हमारा मुँह चिढ़ा रहा था। निदा ने लाक की तरफ देखते हुये कहा- “यार अब अम्मी कहाँ चली गई लाक लगाकर?”

बाजी ने कहा- “यार जहाँ भी होंगी आ ही जायेंगी तुम क्यों टेन्शन ले रही हो?” और अपने पर्स में से चाबी निकालकर उसकी तरफ बढ़ा दी और बोली- “लो लाक खोलो...”

निदा ने बाजी से चाबी ली और लाक खोल दिया। हम सब घर में इन हो गये और बाजी को रूम में ले जाकर लिटा दिया। मैंने कहा- “बाजी आप यहाँ आराम करो, निदा यहाँ ही है। अगर किसी चीज की जरूरत हुई तो ये यहाँ आपके पास ही है। मैं जरा बाहर जा रहा हूँ अभी आ जाऊँगा...” और मैं इतना बोलकर बाहर निकलने लगा।

बाजी ने कहा- “क्यों भाई जाना जरूरी है क्या?”

मैंने हाँ में सिर हिला दिया और बोला- “जी बाजी जरूरी है। बस अभी थोड़ी ही देर में आ जाऊँगा मैं”

बाजी ने ओके कहा और बेड पे आराम से लेट गई। मैं घर से निकला और मकान के पिछली तरफ चल दिया जिस तरफ सारा जंगल था और मकान के पीछे चलते हुये उस जगह पे पहुँच गया, जहाँ मैंने अम्मी को जाते हुये देखा था। लेकिन अब समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं? तभी मेरी नजर किचेन की खिड़की पे पड़ी जो कि हल्की सी खुली हुई थी। मैंने इधर-उधर देखा तो मुझे जंगल के इलावा कुछ भी दिखाई ना दिया तो मैंने । खिड़की को थोड़ा सा पुश किया तो वो बिना आवाज के खुल गई। मैं झट से खिड़की को पकड़कर ऊपर उठा और अंदर घुस गया।

 
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