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Guest
मैंने अपना सर उठाकर देखा तो मुझे बड़ी हैरानी हुई कि वो यूँ इस तरह हमारे सामने बिना दुपट्टा लिए ही चाय देने आई थी जिस पे काशी ने भी उसे कुछ बोलना जरूरी नहीं समझा था। मेरे लिए हैरानी की बात इसलिए थी कि हमारे मज़हब में ये चीज बड़ी खराब समझी जाती है कि कोई लड़की किसी भी अपने भाई या बाप के दोस्त के सामने इस तरह बिना दुपट्टे के जाए। क्योंकी बाहर वालों से हटकर घर वाले ही ऐसा नहीं होने देते, क्योंकि ये कोई अच्छी बात नहीं थी।
मैं नीलू की तरफ देखे जा रहा था हैरानी भरी नजरों से।
जिस पे नीलू ने काशी की तरफ देखा और बोली- “भाई लगता है तुम्हारे दोस्त ने कभी कोई लड़की नहीं देखी है। कभी, जो मुझे यूँ घूरे जा रहा है।
काशी उसकी बात सुनकर हँस दिया और बोला- “तुम ऐसा करो, अभी जाओ यहाँ से हमें कुछ बात करनी है..”
तो नीलू रूम से बाहर घर की तरफ चल दी और दरवाजा के पास जाकर वापिस मुड़ी और काशी से बोली- “भाई अगर तुम्हारा दोस्त रात यहाँ ही रहेगा तो मैं रात को पूरे घर में अकेली कैसे रहूंगी...”
काशी ने कहा- “यार, उसका भी कुछ करते हैं अभी तुम जाओ...”
तो नीलू रूम से निकल गई। तो काशी ने चाय लेते हुये कहा- “यार वो छोटी और अम्मी अब्बू शादी में गये हुये हैं, एक हफ्ते के लिए तो घर पे मेरे साथ बस नीलू ही रह गई है और रात को इसे काफी डर लगता है अकेले में...”
मैंने काशी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और खामोश बैठा चाय पीता रहा।
तो काशी चाय खतम करके उठा और बाहर दुकान में चला गया सिगरेट लाने के लिए।
उसके जाते ही नीलू रूम में आ गई और खाली कप उठाने लगी और बोली- “वैसे आप अगर हँसते रहो तो अच्छे लगोगे..."
मैंने नीलू की तरफ देखा और अचानक मेरे दिल में ख्याल आया कि क्यों ना देखा जाए नीलू पे लाइन मारकर तो मैंने कहा- “अगर मैं मुश्कुराने लगूँ तो आप मेरे साथ थोड़ा टाइम बैठोगी?”
नीलू ने फौरन कप वापिस रखे और मेरे सामने जहाँ कुछ देर पहले काशी बैठा था बैठ गई और बोली- “अगर आप ज्यादा फ्री ना होने का वादा करो तो आप जब तक यहाँ हो मैं यहाँ बैठने को तैयार हूँ..”
मुझे नीलू की बात से बड़ी हैरानी हुई, लेकिन मैंने इसका इजहार नहीं किया और बोला- “लेकिन काशी शायद इस बात को बुरा समझे कि आप मेरे साथ बैठोगी?”
मैं नीलू की तरफ देखे जा रहा था हैरानी भरी नजरों से।
जिस पे नीलू ने काशी की तरफ देखा और बोली- “भाई लगता है तुम्हारे दोस्त ने कभी कोई लड़की नहीं देखी है। कभी, जो मुझे यूँ घूरे जा रहा है।
काशी उसकी बात सुनकर हँस दिया और बोला- “तुम ऐसा करो, अभी जाओ यहाँ से हमें कुछ बात करनी है..”
तो नीलू रूम से बाहर घर की तरफ चल दी और दरवाजा के पास जाकर वापिस मुड़ी और काशी से बोली- “भाई अगर तुम्हारा दोस्त रात यहाँ ही रहेगा तो मैं रात को पूरे घर में अकेली कैसे रहूंगी...”
काशी ने कहा- “यार, उसका भी कुछ करते हैं अभी तुम जाओ...”
तो नीलू रूम से निकल गई। तो काशी ने चाय लेते हुये कहा- “यार वो छोटी और अम्मी अब्बू शादी में गये हुये हैं, एक हफ्ते के लिए तो घर पे मेरे साथ बस नीलू ही रह गई है और रात को इसे काफी डर लगता है अकेले में...”
मैंने काशी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और खामोश बैठा चाय पीता रहा।
तो काशी चाय खतम करके उठा और बाहर दुकान में चला गया सिगरेट लाने के लिए।
उसके जाते ही नीलू रूम में आ गई और खाली कप उठाने लगी और बोली- “वैसे आप अगर हँसते रहो तो अच्छे लगोगे..."
मैंने नीलू की तरफ देखा और अचानक मेरे दिल में ख्याल आया कि क्यों ना देखा जाए नीलू पे लाइन मारकर तो मैंने कहा- “अगर मैं मुश्कुराने लगूँ तो आप मेरे साथ थोड़ा टाइम बैठोगी?”
नीलू ने फौरन कप वापिस रखे और मेरे सामने जहाँ कुछ देर पहले काशी बैठा था बैठ गई और बोली- “अगर आप ज्यादा फ्री ना होने का वादा करो तो आप जब तक यहाँ हो मैं यहाँ बैठने को तैयार हूँ..”
मुझे नीलू की बात से बड़ी हैरानी हुई, लेकिन मैंने इसका इजहार नहीं किया और बोला- “लेकिन काशी शायद इस बात को बुरा समझे कि आप मेरे साथ बैठोगी?”