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अंदाज़

'रुपये पाकर ?'

'अगर तुम्हें अचानक इतने रुपये मिल जाते तो क्या तुम खुश नहीं होती ?'

__ 'अरी, नीचे आकर भी तो खुश हो सकी थी? ऊपर से गिरकर मर गई होती तो हम सब तेरे मरने पर बहुत खुश होते । आटी तो शायद रो-रोकर मर ही जाती।'

'सचमुच...!' जुओं वाली लड़की ने कंपकंपाती आवाज में कहा।

'और नहीं तो क्या झूठ ?'

__ 'तुम लोग और आंटी मुझ से इतना प्यार करती हो?' उसकी आवाज में कंपन था और आंखों में आंसू थे। 'इसका मतलब है, मैं अनाथ नहीं हूं । तुम सब मेरी बहनें हो और आंटी मेरी मां है।'

डॉली गुस्से से बोली 'नहीं, आंटी सिर्फ इस दूध पीने वाली की मां हैं।'

'सिर्फ इसी की क्यों?'

'क्योंकि आंटी अब इसे दूध पिलाया करेंगी।'

दूध पीने वाली उछल पड़ी 'अरे बाप रे! मैं तो कभी नहीं पियूंगी।'

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'काहे कू...?'

उसने दोनों हाथों से मुंह ढंककर लजाते हुए कहा-'मुझे शर्म आएगी।'

अचानक जुओंवाली लड़की की निगाहें नीचे पड़े फोटो पर पड़ी और उसने तुरन्त डॉली से संबोधित होकर कहा

'यह फोटो किसके ब्वाय-फ्रेंड का गिर गया

डॉली ने चौंककर अपना गिरेहबान टटोला । फिर तुरन्त झुककर फोटो उठाती हुई उसे साफ करते-करते बोली-'ओहो, यह कैसे गिर गया ? यह आंटी के बेटे की फोटो है।'

जुओंवाली ने चौंककर कहा 'आंटी के बेटे की फोटो | यह कहां से मिली थी?'

'जब तू ऊपर बैठी मालदार बनने की कोशिश कर रही थी, तब मैंने आंटी के दफ्तर में से ढूंढकर निकाली थी।

'काहे कू...?'

'अबे! हम लोग ने फैसला किया है ना कि आंटी के बेटे को ढुंढेगी।'

'अच्छा, तो फोटो के पीछे पता लिखा है ?'

'पता नहीं । बस, ढूंढना है।'

'कैसे मिलेगा फिर ?'

'हम सब लोग फोटो देख लेते है, जिसे भी पहले नजर आ जाए, वह मुझे खबर कर दे।'

'सिर्फ तुझे ही क्यों?'

'इसलिए कि मैं उससे बात करुगी । तुम सब तो गधी हो ।'

एक ने जलकर कहा

'यह क्यों नहीं कहती कि वह इतना सुन्दर है | तू चाहती है कि तू ही उससे बात करे ।'

दूसरी ने कहा

'और क्या ? तू इसीलिए तो हम लोगों की लीडर बनकर रहती है कि जो लड़का मिले, पहले तू उसे ले उड़े।'

जुओंवाली ने जल्दी-जल्दी सिर खुजाकर

'क्या वह सचमुच बहुत सुन्दर है ?'

'बहुत ज्यादा ।' 'बिल्कुल अनिल कपूर!'

'नहीं...त्रुषि कपूर!'

'नहीं...संजय दत्त ।'

'नहीं सलमान खान ।'
 
जुओंवाली ने जल्दी से डॉली के हाथ से फोटो झपटकर कहा

'मैं भी तो देखू ।'

उसने फोटो देखा और छाती पर हाथ रखकर बोली 'हाय, यह तो रिकार्ड-ब्रेकर है ।'

'यह क्या चीज होती है?'

'जो स्पीड-ब्रेकर से ज्यादा तेज होती है। इसने सब हीरों की सुन्दरता का रिकार्ड तोड़ दिया है-जैसे उस दिन बिल्ली ने गिलास मेज तोड़ दिया था दूध का ।'

सहसा वह बुरी तरह उछल पड़ी और दोनों हाथों से फोटो पकड़ लिया। उछलने से उसके बाल चेहरे पर आ गए।

उसी ने जल्दी से कहा 'अरे! कोई जल्दी से मेरे बाल पीछे करना ।'

एक ने मुंह बनाकर कहा 'धत्! मेरे हाथ में जुएं चढ़ जाएंगी।'

'बाल ऊपर करो । नहीं तो कोई बहुत बड़ी मुसीबत चढ़ जाएगी।'

एक लड़की ने जल्दी से उसके बाल ऊपर किए। वह फोटो देखकर बरबस बहुत जोर से उछालती हुई बोली

'वही है...सौ प्रतिशत वही है।'

डॉली ने उसे घूरकर पूछा 'कौन है...?'

जुओंवाली में जल्दी-जल्दी सिर खुजाकर कहा

'वही, जिसने रुपयों का बैग ऊपर फेंका था

डॉली के साथ सारी लड़कियां उछल पड़ी। डॉली ने हैरत से कहा

'क्या बोला...फिर से बोल?'

'मैं सच बोलती...यह वही है।'

डॉली ने उसे घूरकर कहा

'जिसने रुपयों का बैग ऊपर फेंका था ?'

'हां, सेंट-परसेंट वही ।'

डॉली चक्कर खाकर दरी पर बैठती हुई बोली 'हे भगवान! अब क्या होगा?'

एक लड़की ने तुरन्त कहा

होगा क्या? हम लोग पुलिस को यह फोटो और ये दोनों दे देंगे । पुलिस उसे पकड़ लेगी । फिर हमारे लिए कोई खतरा नहीं रहेगा।'

'डॉली ने उसे घूरकर कहा 'ईडियट! यह आंटी का बेटा है।'

दूसरी ने कहा

'हम आंटी के बेटे को पकड़वा देगे । तो क्या आंटी को दुःख नही होगा?'

'दुख नहीं, सदमा होगा...सदमा ।' 'आंटी! यह कैसे सहन करेगी कि उसका बेटा कोई चोर स्मगलर या डाकू निकले?'

'नहीं, हम आंटी के बेटे को नहीं पकड़वाएगे

'फिर क्या करें?'

'कुछ सोचना पड़ेगा।'

वे सब फिर से सोचने बैठ गई।

डॉली ने कहा 'यह तो बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई ।' दूसरी ने कहा

'हम तो सोच रहे थे कि आंटी के बेटे को किसी तरह आंटी से मिलाएंगे।'

दूध पीने वाली ने एक लम्बी डकार ली और बोली-'अब तो वह हम सबको ऊपर वाले से मिला देगा

डॉली ने उसे घूरकर कहा 'क्या बकती है?'

'अरे, पहले उसे सिर्फ इसने ही देखा था ।' उसने जुओंवाली की तरफ इशारा करके कहा-'अब हम सबने उसका फोटो देख लिया है।'

एक और लड़की बोली

'और वह इसलिए हम सबको मार डालेगा कि हम सब उसके खिलाफ गवाह बन सकती हैं कि वह चोर, डाकू या स्मगलर है।'

डॉली ने उसे घूरकर कहा 'और हम सब बगलों में हाथ दबाकर मर जाएंगी?'

'और नहीं तो क्या उस पर हाथ दिखाएंगी ? अरे, वह अपनी आंटी का बेटा है

'तुम लोग चुप रहो तो कोई काम की बात सोची जाए ।' उन सबने जल्दी-जल्दी मुंह बंद कर लिए।

डॉली कुछ देर तक सोचती रही । फिर चौंकते हुए बोली 'आया आइडिया ।'

सब लड़कियां चौंक पड़ी।

'जल्दी बोल ।'

'कल सुबह ही मैं यह बैग ले जाकर पुलिस को दे दूंगी।'

'क्या कहेगी पुलिस से ?'

'मैं कहूंगी कि हम लोगों ने चोर को देखा ही नहीं।'

'वे पूछेगे, बैग कहां से आया ?'

'किसी ने छत पर फेंका था । जब यह जुएं निकाल रही थी।'

जुओं वाली ने उछलकर कहा 'हे....तू पुलिसवालों को बता देगी कि मेरे सिर में जुएं हैं ।'

डॉली ने उसे घूरकर कहा 'यह सब आफत तेरी जुओं की ही लाई हुई है

जुओंवाली ने भोलेपन से कहा 'तो पुरखों ने झूठ कहा था कि जुएं आदमी को मालदार बना देती है।'

__'आदमी को बना देती होंगी । हम लोग तो लड़कियां है।' दूधवाली ने कहा
 
'अच्छा चलो । रुपये पुलिस को देकर कह दिया कि यह छत पर गिरा था । फिर....?'

'फिर हम उस लड़के को ढूंढकर समझाएंगी कि वह चोरी करना छोड़ दे ।'

'और वह हमारी बात मानकर पुजारी बन जाएगा।'

'यह बात तो ठीक है ।'

अचानक एक लड़की ने चुटकी बजाकर कहा 'आइडिया...।'

सबने उसकी तरफ देखा।

डॉली ने आग्रह किया जल्दी बोल?'

'हम सब उससे प्यार करेंगी।'

'फिर...?'

'अरे, तुमने सुना नहीं | प्यार से जंगली जानवर भी सुधर जाते हैं । हम लोगों का प्यार उसे सुधार देगा । फिर जब वह अच्छा आदमी बन जाएगा तो हम लोग उसे आंटी से मिलाकर बता देंगी कि आंटी उसकी मां हैं।'

फिर उसने सबकी तरफ देखकर कहा

'कैसी रही?'

डॉली ने बुरा-सा मुंह बनाकर कहा 'भैंसे जैसी ।'

'काहे कू?'

'अबे, गधी। हम बारह लड़कियां मिलकर एक लड़के से प्यार करेंगी?'

'अरे! तो कौन-सी हमें उससे शादी करनी है। झूठ-मूठ प्यार का नाटक ही तो करना है।'

'हम बारह यानि पूरी एक दर्जन उससे प्यार का नाटक करेंगी और वह हम सबको यानि एक दर्जन से प्यार करेगा। और हम सबके प्यार में वह चोरी करना छोड़ देगा।'

उस लड़की ने माथा पीटकर कहा 'अरे, तो फिर तू खुद ही सोच ना । तू तो हमारी गैंग लीडर बनती है।'

डॉली ने कुछ सोचते हुए कहा 'प्यार करने का आइडिया तो बुरा नहीं । प्यार ने बड़े-बडे अपराधियों को शरीफ बना दिया है। बिगड़े हुओं को सुधार दिया है ।'

एक ने आंखें निकालकर कहा

'देखा...देखा...यह उससे प्यार करेगी ।'

+

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'इसलिए ना कि वह खूबसूरत है।'

'वह अनिल कपूर से मिलता है।'

'ऋषि कपूर मालूम होता है ।'

'संजय दत्त लगता है।'

'सलमान खान मालूम होता है।'

'और अगर सचमुच प्यार करने लगा तो मजा ही आ जाएगा।'

'उससे शादी बनाएगी और आंटी की बहू बन जाएगी।'

'फिर हम सबको अनाथ अश्राम से निकलवा देगी, ताकि हम उसकी तरफ नजरें भी उठाकर न देख सकें।'

डॉली के होंठ अचानक कांपे आंखें भीग गई । अगले ही पल वह घटनों में मुंह छुपाकर रोने लगी।

एक लड़की ने कहा 'देखा...देखा, अभी से रोने की प्रेक्टिस शुरू

'विदाई के समय रोना पड़ेगा ना ।'

'जब दुल्हन बनकर बैठेगी...लो बोली...'

डॉली ने झटके से गर्दन उठाकर गुस्से से कहा 'तुम सब नीच हो ।'

वे सब भौंचक्का -सी रह गई ।

डॉली ने फिर से कहा 'कमीनी हो ।'

वे चुप रही। डॉली ने फिर ले कहा 'स्वार्थी हो ।'

एक लड़की ने कहा 'ऐ बस...आगे नहीं बोलने का...'

'आगे की बच्ची । मैं तुम लोग के साथ पली-बढ़ी, इतनी बड़ी हुई और तुम लोग के हर दुःख में साथ रही । मैं अपने बर्थ-डे पर तुम लोग के लिए चोरी करके यह बढ़िया कपड़े लाई, जूते लाई श्रृंगार का सामान लेकर आई...और तुम लोग मेरे कु स्वार्थी समझती हो ।'

वह फिर घुटनों में मुंह छुपाकर रोने लगी।
 
उन सबके चेहरों पर भी भूचाल के लक्षण नजर आए । फिर वे सब भी घुटनों में मुंह छुपाकर रोने लगी।

अचानक डॉली ने झटके से सिर उठाकर कहा 'खामोश...!'

वे सब तुरंत खामोश हो गई और उन लड़कियों ने सिर भी उठा दिए ।

डॉली ने उन सबको बारी-बारी गुस्से से घूरकर कहा 'तुम लोग कू मेरे ऊपर विश्वास नहीं है ना ?'

सबने एक साथ कहा 'हम से भूल हो गई । हमें माफी दे दो ।'

'हम सब कू तुम पर विश्वास है ।'

डॉली ने सब कू घूरकर कहा 'नहीं । अब मेरे कू तुम्हारे पर विश्वास नहीं रहा ।'

'फिर क्या होगा ?'

'तुम सब अपने-अपने नाम एक पर्ची पर लिखो।'

'फिर...?'

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'मैं अपना नाम लिखती हूं।'

'फिर...?'

'सब पर्चियां एक जगह मिलाकर एक परची निकालेंगे। जिसके नाम की पर्ची निकलेगी-वही लड़की उस लड़के से प्यार करेगी।'

सब चुप रही।

डॉली ने जोर से पूछा 'बोलो....मंजूर....?'

सबने कहा 'मंजूर!'

'चली, कागज...बाल-पैन लाओ..!'

एक कापी उठाकर बारह पर्चियां फाड़ी गई । सबसे पहले डॉली ने अपना नाम लिखकर पर्ची आगे डाल दी । फिर उन सबने एक-एक पर्ची पर नाम लिख-लिखकर पर्ची डाल दी।

डॉली ने उन सबसे संबोधित होकर कहा 'अब तुम खुद ही पर्ची निकालो।'

'नहीं, तुम निकालो।'

'मैं नहीं उठाऊंगी।'

'अच्छा, मैं उठाती है।'

एक लड़की ने एक पर्ची उठाई और खोलकर उछल पड़ी 'डॉली....!'

डॉली ने झपटकर पर्ची ली और खोली । उस पर लिखा नाम लिखा देखा ।

फिर दूसरी पर्ची उठाकर खोली।

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उसके ऊपर भी डॉली लिखा था। तीसरी चौथी से बारहवीं पर्ची तक...सब पर डॉली लिखा हुआ था ।

डॉली ने पर्चियां उनके मुंह पर मारकर कहा 'बेईमान...दगाबाज...!'

एक लड़की ने घिघियाकर कहा "डॉली, प्लीज! यह काम तुम्ही करो।'

डॉली ने व्यंग्य से कहा 'लेकिन वह तो अनिल कपूर है, ऋषि कपूर है, संजय दत्त और सलमान खान है ।'

'वह जो कुछ भी है । यह काम सिर्फ तुम्ही कर सकती हों ।'

'क्यों...?'

'इसलिए कि हमारे पास उतनी बुद्धि नहीं, जितनी तुम्हारे पास है।'

'मैं सोचेगी।'

'नो सोचना-वोचना ।'

'इट इज फाइनल डिसीजन ।'

'यह काम तेरे कू ही करने का है।'
 
'अरे! तो मैं अकेली उसे किधर ढूंढेगी।'

'उसकू ढूंढने का काम हम सब मिलकर करेंगी।'

'और तू सुबह यह बैग लेकर पुलिस-स्टेशन जाएगी।'

उन लोगों में टय हो गया । फिर वै लेट-गई । अचानक एक लड़की ने उठकर जोर-जोर से जुओंवाली लड़की की झकझोर डाला ।

वह चीख मारकर बैठ गई । वे सब भी घबराकर उठकर बैठ गई।

झकझोरने वाली लड़की ने जुओंवाली को दबोच कर दूसरी से कहा

'लाओ, जल्दी कैंची लाओ।'

'काहे कू...?'

'अरे, यह सारा लफड़ा इसके सिर की जुओंका है । इसके सिर के बाल ही काट दो । न बाल होंगे न इसमें जुएं पड़ेगी।'

'नहीं...।'

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फिर वह उन लोगों से बाकायदा कुश्ती लड़ने लगी।

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रात के ठीक बारह बजे होंगे।

काली पतलून, काली टी-शर्ट, काले जूते पहने एक नौजवान, जिसके सिर पर काली नाइट-कैप थी, आंखों पर काला चश्मा और चेहरे पर काला रूमाल बंधा हुआ था-एक दूसरे नकाबपोश आदमी के साथ अनाथ-आश्रम की इमारत के पास रुक गया।

दूसरे ने पूछा

'क्या यही जगह थी ?' चश्मेवाले ने कहा

'हां, यही से मैंने बैग ऊपर फेंक दिया था।'

दूसरे ने छत की तरफ इशारा करके कहा 'उस छत पर ?'

'हां, उसी छत पर ।'

'यह तो अनाथ-आश्रम की छत है।'

'अनाथ-आश्रम की छत में छेद होते है ?'

'मै कभी अनाथ-आश्रम में रहा ही नहीं। कैसे बता सकता हूं?'

'हां, मेरी तो उम्र अनाथ-आश्रम में गुजरी है

'चलो, अनाथ-आश्नम का दरवाजा उधर है ।'

'दरवाजे पर क्यों?'

'दरवाजा खट-खटाएंगे नहीं तो खुलेगा कैसे?'

'और दरवाजा खुलवाकर क्या करेंगे?'

'छत पर जाएंगे, वरना बैग कैसे लाएंगे?'

'अबे, उल्लु के पढे! वह बैग है रुपयों से भरा, रुपये भी चोरी के । वह कोई पालतु जानवर कबूतर नहीं कि दरवाजा खटखटाकर कहें बहनजी, हमारा कबूतर उड़कर आपकी छत पर आ गया है, ऊपर जाकर उतार लें ?'

दूसरे ने सिर खुजाकर कहा 'बीमारी...यह मेरे कू खानदानी बीमारी है ।'

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'कौन-सी बीमारी ?'

'जब तक गाली नहीं खाता । मुझे अक्ल की बात नहीं सूझती।'

'अबे गधे के बच्चे तो यह बात पहले ही बता दी होती।'

'पहली बात तो मालूम हो गई । अब दूसरी बात भी मालूम कर लो।'

'क्या ?'

दूसरे ने पहले के मुंह पर बूंसा मारा और वह लड़खड़ाकर पीछे हटता हुआ बोला

'अबे! यह क्या कर रहा है ?'

'दूसरी बात बता रहा हूं। मुझे सिर्फ एक गाली खाकर अक्ल आती है। दूसरी गाली खाकर गुस्सा आ जाता है और तीसरी गाली खाकर तो मैं खूनी हो जाता हूं।'

'यह तेरी खानदानी आदत है ।'

'बेशक! क्योंकि मैं भी एक पुरुष अनाथ-आश्रम में पला था ।'

'तेरे मां-बाप भिखारी थे, जो तुझे आश्रम में छोड़ गए थे।'

'मां-बाप का पता नहीं-कौन थे ।'

'फिर तेरा खानदान कहां से आ गया और खानदानी आदत कहां से?'

'अनाथ-आश्रम के साथी ही मेरा खानदान थे और फादर डिसूजा कहते थे-एक गाली खाकर अपनी गलती का अहसास करो दूसरी गाली पड़ने पर समझो कि सामने वाला तुम्हें जलील कर रहा है । तीसरी गाली बिल्कुल सहन मत करो । वरना कभी सेल्फ रेस्पेक्ट नहीं पैदा होगी तुम में ।'

'अच्छा, बाबा । समझ गया । फिलहाल तो अंदर जाने का प्राब्लम है।'

'कैसे जाओगे?'

'इसी छत पर चढ़कर ।'
 
'तो फिर आओ। तुम्हारी प्राब्लम मैं सॉल्व करता हूं।'

दूसरा छत के नीचे आया और पीठ दीवार से लगाकर बैठता हुआ बोला 'चढ़ जाओ कंधों पर ।'

'व्हाट? कंधों पर?'

'हां, भई । खड़ा हो जाऊंगा । तुम छत पर चढ़ जाना ।'

चश्मे वाले ने सिर हिलाकर कहा

'ठीक कहता है । चींटी की कमर बताती है कि गुड़ की भेली उठकर ले जाएगा।'

'व्हॉट डू यू मीन बाई दिस इग्जाम्पल !'

'सुबह बताऊंगा । रात में मेरी अंग्रेजी कमजोर हो जाती है।'

दूसरे ने चुटकी बजाई और बोला 'बन गया काम ।'

'कैसे...?'

'वह सामने देखो।'

-

सामने एक आदमी कंधे पर सीढ़ी लटकाए, हाथ में बिजली ठीक करने का थैला लिए हुए ऊंघता और जम्हाई लेता हुआ जा रहा था।

पहले ने कहा 'अबे, यह बिजली का मिस्त्री है।'

'मैं मिस्त्री के कंधों की नहीं-उसके कंधे पर लटकी सीढ़ी की बात कर रहा हूं | आई समझ में बात?'

पहले ने कहा 'दिमाग खराब हुआ है?'

'क्यों...?'

'वह हम दोनों को पकड़वा देगा।'

'अगर उसने पकड़वा दिया तो फिर मैं खानदानी ही कहां रहा?'

'मगर तू उससे कहेगा क्या?'

'तुम देखते रहो । पहले एक सौ रुपये का नोट दो ।'

'क्यों...?'

'अब तुम्हें पच्चीस लाख रुपये चाहिये तो सौ रुपये खर्च करने ही पड़ेंगे।'

पहले ने सौ का नोट देकर कहा 'अगर पकड़ने की नौबत आई तो मैं भाग जाऊंगा।'

'डन...मुझे तुम्हारे घर का पता मालूम है ।'

फिर दूसरे ने जल्दी से बिजली के मिस्त्री की तरफ बढ़ते हुए चापलूसी भरे अंदाज में पुकारकर कहा

'भाई साहब ! जरा, बात सुनिएगा।'

मिस्त्री रुक गया।

उसकी आंटी नींद से बोझिल थी । जैसे ही दूसरा समीप पहुंचा और उसके चेहरे पर मिस्त्री ने रूमाल किला, वह डर के मारे चिल्ला पड़ा

'चोर...चोर...!'

दूसरे ने हड़बड़ाकर जल्दी से उसका मुंह बंद कर लिया और बोला 'अरे भाई साहब । मैं चोर का भाई गिरहकट

'म...म...मैं...।'

'सच कहता हूं, भाई साहब । चोर तो उधर अंधेरे में खड़ा है।' फिर उसने अपना चेहरा खोलकर कहा 'अब देखिए ध्यान से । क्या मैं आपको सूरत से चोर नजर आता हूं या अनाथ?'

'अनाथ...!'

'देट्स ओ० के० । मैं एक बड़ा दर्द भरा अनाथ हूं | इस वक्त मुझे आपकी मदद की सख्त जरूरत है, जिसके लिए मैं आपको सौ रुपये दे सकता हूं।'

मिस्त्री ने अपने होश दुरुस्त किए और आंखें फाड़कर बोला 'सौ रुपये।
 
'देट्स ओ० के० । मैं एक बड़ा दर्द भरा अनाथ हूं | इस वक्त मुझे आपकी मदद की सख्त जरूरत है, जिसके लिए मैं आपको सौ रुपये दे सकता हूं।'

मिस्त्री ने अपने होश दुरुस्त किए और आंखें फाड़कर बोला 'सौ रुपये।

दूसरे ने सौ का नोट निकालकर कहा 'यह लीजिए, एडवांस में रख लीजिए।'

मैकेनिक ने झपटकर नोट जेब में रखा और बोला 'अब बताइए, कैसी मदद चाहिए?'

.

.

.

'बस कुछ देर के लिए यह सीढ़ी चाहिए।'

'बिजली ठीक करनी है।'

'हां...।'

'तो चलिए...मैं ठीक कर दूं । दस रुपये और दे दीजिएगा।' वह तुरन्त बोला

'अरे...नही...नहीं । बिजली नहीं ठीक करनी, नौ सौ रुपये की शर्त जीतनी है।'

'नौ सौ रुपये की शर्त?'

'जी, हां । शर्त तो हजार रुपये की थी । सौ रुपये उसमें से आपको दे दिए ।'

'लेकिन शर्त कैसी है?'

'वह...हमारी यू० पी. में कबूतरबाजी का मुकाबला होता है । कभी आप यू० पी० गए हैं ?'

'श्रीमान मैं पैदा ही यू० पी० में हुआ हूं

'अच्छा, तो मुम्बई हीरो बनने आए होंगे मगर यहां पहले ही अभिताभ बच्चन आ चुका था । इसलिए आपकी दाल नहीं गल सकी । क्यों ठीक है ना?'

___ही...ही...ही, आप तो ज्योतिषी मालूम होते

-

-

'एनी वे । हमारी यू. पी० में कबूतरबाजी होती है ना?'

'क्या अब भी होती है । मैंने तीस वर्ष हुए जब यू० पी० छोड़ दिया था ।'

'अरे, कबूतरबाजी हमारा राष्ट्रीय शौक है । क्या आपको मालूमे नहीं, शंहशाह बाबर जब रियासत फरगनाका शहजादा था, तब वह भी कबूतर उड़ाता था । एक बार छत से गिरकर उसकी टांग भी टूट गई थी?'

'अच्छा! साहब, मैं पढ़ा-लिखा नहीं ।' ।

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'ओहो, इसीलिए आप हीरो बनने आए थे। खैर, शहंशाह बाबर लंगड़ा था इसीलिए समूचा मुगल शासन लंगड़ाता रहा।

'आखिर में बहादुरशाह जफर ने अंग्रेजों के कंधे पर हाथ रखकर सहारा लिया तो अंग्रेजों ने अपने कंधे निकाल लिए और बहादुरशाह जफर मुंह के बल गिर पड़ा।'

'समझ गया...समझ गया, साहब ।'

'तो जिस तरह सारी दुनिया में कबड्डी का शौक हमारे हिन्दुस्तान से एक्सपोर्ट हुआ है । उसी तरह कबूतरबाजी का शौक शहंशाह बाबर ने हिन्दुस्तान में इम्पोर्ट किया था ।'

'अच्छा, तो उसका एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट का बिजनेस था ।'

'जी हां उसका बिजनेस था । वह फंसा हम लोगो की गया । अब मैंने अपने एक दोस्त से एक हजार रुपये की शर्त लगाकर कबूतर उड़ाया था ।

'दोस्त का कबूतर तो माधुरी दीक्षित के बंगले की छत पर उतर गया, मेरा कबूतर इस अनाथ-आश्रम की छत पर !'

'ओहो...।'
 
_ 'मैं खानदानी अनाथ हूं ना । इसलिए मेरा कबूतर मेरे खानदानकी बड़ी इज्जत करता है ।

लेकिन अगर मुझे नौ सौरुपये का नुकसान हो गया तो क्या मैं खानदानी इज्जत को ओढुंगा या बिछाऊंगा।'

'सच कहते हैं आप?'

'अब अगर मैं अपना कबूतर उतारकर अपने घर की छत पर पहुंचा दूं तो मैं नौ सौ रुपये की शर्त जीत जाऊंगा ना?'

'बेशक...!'

'तो प्लीज कुछ देर के लिए यह सीढ़ी मुझे दे दीजिए!'

'जरूर...जरूर...' मिस्त्री ने सीढ़ी देते हुए कहा

'तब तक मैं सामने वाले फुटपाथ पर थोड़ी देर के लिए सो लेता हूं । कबूतर उतारकर मुझे जगा दीजिएगा।'

'शुक्रिया...शुक्रिया..! आप विशुद्ध यू० पी० के मालूम होते है ।'

'ही...ही...ही...!'

दूसरा सीढ़ी लेकर चला और मिस्त्री दूसरे फुटपाथ पर गया और थैला सिर के नीचे रखकर लोट गया । दूसरा सीढ़ी लेकर पहुंचा तो पहले ने कहा

'अबे, इतनी देर?'

'अरे, कोई काम करने के लिए क्या ग्राउंड नहीं बनानी पड़ती? मैं क्या उससे सीधा कह देता कि भाई साहब जरा सीढ़ी देना । हमें चोरी के रुपयों का बैग उतारना है।'

दूसरे ने झट उसका मुंह बंद कर दिया

'अबे, धीरे बोल । किसी ने सुन लिया तो?'

'ऐ...तुमने दूसरी बार अबे कहा है । फादर डिसूजा ने कहा था कि यह शब्द 'अबे' भी एक तरह से गाली में ही शामिल है।'

'अच्छा-अच्छा क्षमा कर दे । तू तो सचमुच बहुत चतुर आदमी है ।'

फिर उन दोनों ने सीढ़ी अनाथ-आश्रम से लगाई और पहला वाला ऊपर चढ़ने लगा।

जब पहला ऊपर पहुंच गया तो एक आदमी चुपके-चुपके पहले वाले के पास आया और कानाफूसी में बोला 'भाई साहब! आपने सीढ़ी गलत जगह लगाई है।'

दूसरे ने नथुने फुलाकर कहा 'क्या मतलब?'

वह गोपनीयता सें बोला 'मतलब यह कि मेरा बंगला उधर है ।'

'हमें आपके बंगले से क्या मतलब?'

'आज रात मेरी पत्नी आपके साथ भागने वाली थी ना?'

'व्हाट! आपकी बीवी ? ऐ मिस्टर, हम इतने बड़े मूर्ख नहीं हैं कि विवाहिताओं को भगाते फिरें।'

'क्षमा कीजिए । फिर वह कोई दूसरा होगा। अभागा जाने कहां मर गया ।'

फिर अजनबी बेचैनी से तेज-तेज चला गया ।

ऊपर से पहले ने कानाफूसी में पूछा

'गया...?'

दूसरे ने चौंककर कहा 'हे, तुम अभी तक बीच में लटके हो? मैं कब तक सीढ़ी पकड़े खड़ा रहूंगा।'

'जाता हूं...जाता हूं...' फिर वह फटाफट छत पर पहुंच गया ।

ठीक उसी समय एक मोटरसाइकिल की आवाज आई और वह चौंक पड़ा।

फिर जब उसे मोटरसाइकिल पर एक दारोगा नजर आया तो उसके हाथ-पांव फूल गए

'अरे...बाप रे...!'

मोटर साइकिल रोककर दारोगा ने जोर से कहा 'यह क्या हो रहा है ?'

दूसरा जल्दी से बोला

'स...स...सर! बिजली ठीक हो रही है ।' 'क्या...तुम बिजली ठीक कर रहे हो?'

'ज...जू...जी...जी हां ।'

'म...म...मगर बिजली घर के मैकेनिक एक नंबर के हरामखोर हो गए है।'



'क्या मतलब?'

'हमने फोन पर कम्पलेंट की थी । दो घंटे बाद यह मैकेनिक आया ।'

उसने दूसरे तरफ फुटपाथ पर सोते हुए मैकेनिक की तरफ इशारा करके कहा 'कहने लगा, कल मेरी पत्नी की शादी की वर्षगांठ है । साड़ी लानी है उसके लिए ढाई सौ रुपये दो तो बिजली ठीक करुगा।'

'अच्छा ...?'

'जी, हां । बड़ी मुश्किल से सौ रुपये लेकर इस बात पर सहमत हुआ कि हम सीढ़ी लेकर खुद काम करें और वह कुछ देर के लिए सो जाए।'

_ 'ठीक है । उस मैकेनिक का नाम नोट करके रिपोर्ट का देना, उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा
 
'बहुत-बहुत शुक्रिया साहब! आप भी यु. पी० के मालूम होते हैं।'

दरोगा ने गुस्से से कहा

'मैं यु० पी० का नहीं, बिहा र का हूं।'

फिर मोटरसाइकिल चली गई और दूसरे ने ठंडी सांस लेकर कहा

'थैक्स गॉड!'

फिर वह ऊपर देखने लगा।

नकाबपोश ने पूरी छत देख डाली । मगर बैग कहीं नहीं नजर आया।

वह कुछ देर सोचता रहा। फिर अपने-आपसे बड़बड़ाया 'कहीं वह लड़की तो बैग नहीं ले गई ?' ।

फिर वह चुपके-चुपके सीढ़ियां उतरने लगा। एक खुली जगह पहुंचकर उसने एक दरवाजे को धीरे-से धक्का दिया तो उसे किसी की सिसकियों की आवाजें आई।

उसने कुछ सोचा। फिर बड़बड़ाया 'वह लड़की हो सकती है।'

उसने बाहर इस प्रकार फर्श पर जूता बजाया कि आहट अंदर तक पहुंची और अंदर से जुओंवाली लड़की की आवाज आई

'कौन है?'

नकाबपोश ने जवाब दिए बिना फिर से आहटें पैदा की । कुछ देर बाद कपड़ों की सरसराहट हुई । दरवाजा खुला । फिर एक नारी स्वर गूंजा 'कौन है?'

नकाबपोश ने गुर्राकर कहा 'बाहर आओ!'

जुओंवाली ने झटके से दरवाजा बंद करना चाहा तो नकाबपोश ने जल्दी से दरवाजे के पटों के बीच में टांग अड़ा दी।

और गुर्राया 'खबरदार! दरवाजा खोलो!'

लड़की ने दरवाजा छोड़ दिया । नकाबपोश ने टार्च की रोशनी उसके चेहरे पर डाली । साथ ही उसके सामने एक सिर मुंडी लड़की का चेहरा नजर आया जो एकदम जोर से चिल्लाई 'बचाओ...!'

साथ ही नकाबपोश भी चिल्लाया

'बचाओ...बचाओ...भूत...भूत...!'

फिर उसने हांफते हुए गिरते-पड़ते सीढ़ियां चढ़ी और जैसे ही बांसों की सीढ़ी तक पहुंचा, नीचे से आवाज आई

'हे, इतनी देर?'

ऊपर से वह चीखता हुआ बांसों की सीढ़ी पर आया-'भूत...भूत...!'

दूसरे ही पल नीचे से दूसरा वाला भी सीढ़ी छोड़कर चिल्लाने लगा

'भूत...भूत..!'

फिर बह सीढ़ी छोड़कर भाग खड़ा हुआ । सीढ़ी छत से अलग होकर सड़क की तरफ आई और चश्मेवाला चिल्लाता हुआ एक गुजरती हुई कार की छत पर गिरा।

'भूत...भूत...।' दूसरे ही पल कर के अंदर से कई चीखें गूंजी

'भूत...भूत...!'

और कार लहरें लेती हुई फरटि भरने लगी।

अचानक फुटपाथ पर सोए मैकेनिक की आंख खुली और उसके कानों में आवाज आई

'भूत...भूत...!'

दूसरे ही पल वह उठकर बुरी तरह चिल्लाता हुआ भागा

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'भूत...भूत...!'

फिर उसे कुछ ख्याल आया और वह पलटकर भागकर आया । थैला उठाया, सौ का नोट उठाया और चिल्लाता हुआ फिर से भागने लगा

'भूत...भूत...भूत...!'

उसकी सीढ़ी कार में पीछे अटक गई थी, जो कार के साथ घिसटती चली जा रही थी। फिर जिस घर की खिड़की खुलती, उसी में से चीजें सुनाई देने लगती

'भूत...भूत...!'

थोड़ी देर बाद पूरे इलाके में 'भूत-भूत' की आवाजें गूंज रही थी। लेकिन अब कोई अपने घर की खिड़की भी नहीं खोल रहा था । जो खिड़कियां खुली थी या शोर सुनकर खोली गई थीं, वे भी बंद हो गई थी

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