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उलझन मोहब्बत की

नैना ने जब सामने देखा तो चौक पड़ी - आप... आप कौन हैं? और यहां क्या कर रहे हैं - कहते हुए नैना अब सामने खड़े अनजान शख्स से दूर हट गई। नैना के सामने एक अनजान शख्स खड़ा था, उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुराहट थी ।

वह बोला - माफ कीजिएगा, मेरा मकसद आप को डराना नहीं था । मैं तो खुद एक परेशान इंसान हूं जो भटकते हुए यहां पहुंच गया ।

नैना ( हैरानी से ) - भटकते हुए ? आप बच्चे तो है नहीं कि भटकते हुए यहां पहुंच गए , आपको बिल्डिंग के अंदर किसने आने दिया? रूकिए, मैं सिक्योरिटी को बुलाती हूं - कहते हुए नैना जैसे ही इन्वेंटरी से बाहर जाने को हुई कि उस इंसान ने उसका रास्ता रोक लिया - अरे मेरी बात तो सुनिए, दरअसल मैं यहां इंटरव्यू के लिए आया हूं पर मुझसे एड्रेस खो गया। बिल्डिंग का नाम पता था तो यहां पहुंच गया पर यहां कोई दिखाई नहीं दिया जिससे मदद ले सकूं कि तभी आप पर नजर पड़ी तो आपके पीछे पीछे आ गया।

यहां आप बहुत बिजी थी तो चुपचाप खड़ा हो गया कि जब आपका काम हो जाएगा, तब आप से सवाल पूछ लूंगा पर आप तो अचानक से घबरा गई मुझे देख कर और यह सब हो गया ।

नैना - अच्छा ठीक है । बताइए, कहां है इंटरव्यू आपका ? मैं मदद करती हूं ।

अब वह अनजान लड़का मुस्कुराते हुए बोला - मिस्टर राजेश मल्होत्रा है कंपनी के मालिक, उन्हीं के ऑफिस में आज मेरा इंटरव्यू है ।

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नैना (मुस्कुराते हुए ) - ठीक है तो चलिए फिर, मैं उसी ऑफिस में काम करती हूं ।

यह सुन वह शख्स बोला - यह तो बहुत अच्छा हुआ , मुझे ऑफिस में अब ज्यादा अजीब नहीं लगेगा क्योंकि वहां मेरी दोस्त जो है तो वह है ना मेरी हेल्प करने के लिए।

नैना - कौन ? किसकी बात कर रहे हैं आप मिस्टर .....

वह शख्स मुस्कुराते हुए बोला - मेरा नाम साहिल है और मैं आपकी बात कर रहा हूं ।आपने मेरी मदद की एड्रेस में और मैंने आपको गिरने से बचाया तो हम दोनों ही एक दूसरे की मुसीबत में काम आए और दोस्त ही तो दोस्त की मुसीबत में काम आते हैं इसलिए मैंने आपको दोस्ती का दर्जा दे दिया मिस....

नैना - नैना नाम है मेरा, बात तो अच्छी बना लेते हैं तो चलिए।

नैना और साहिल अब ऑफिस पहुंचे तो साहिल थोड़ा नर्वस होने लगा ।

, नैना - क्या हुआ?

साहिल - कुछ नहीं , टेंशन है कि जॉब मिलेगी या नहीं ?

नैना ने उसका रिज्यूम चेक किया और मुस्कुरा कर बोली - आप अपने काम में बहुत एक्सपर्ट है , टेंशन मत लो। आपको जाँब जरूर मिलेगी ।

साहिल - अच्छा तो फिर बेस्ट ऑफ लक तो कहो? कहते हैं कि कब किस की दुआ कहां काम आ जाए और हम दोस्त हैं तो तुम मुझे आप नही कहो वरना अजनबी वाली फीलिंग आती है।

नैना मन ही मन सोचने लगी - ( कितना बोलता है ये, अभी मिले 10 मिनट भी नहीं हुए कि इसने मुझ से दोस्ती कर ली और मुझे पता ही ना चला।) अच्छा , ठीक है । ऑल द बेस्ट।

साहिल - थैंक्स नैना ,अब थोड़ा ठीक लग रहा है ।

राजेश किसी काम से कैबिन सेबाहर निकला तो देखा कि नैना किसी से बात कर रही है , कौन हो सकता है ? यह सोच वह दोनों के करीब पहुंचा कि उसके आने की आहट सुन नैना और साहिल राजेश की ओर मुडे।

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साहिल और राजेश ने जैसे ही एक दूसरे को देखा तो पहले तो हैरान रह गए फिर आगे बढ़कर दोनों ने एक दूसरे को गले से लगा लिया । यह देख नैना चौक गई कि भला साहिल और राजेश एक दूसरे को कैसे जानते हैं ?

राजेश - थैंक यू सो मच उस दिन के लिए, उस दिन मैं जल्दबाजी में था इसलिए तुमसे बात भी ना कर पाया । अगर तुम नहीं होते पता नहीं मेरा क्या होता ?

साहिल - अरे नहीं , ऐसा कुछ भी नहीं है । यह तो मेरा फर्ज था , तुम्हें याद है मैंने कहा था कि अगर किस्मत में होगा तो जरूर मिलेंगे और देखो हम आज यहां हैं।

राजेश (मुस्कुराकर ) - बिल्कुल पर तुम यहां कैसे ?

साहिल - वो मैं राजेश मल्होत्रा की .....1 मिनट कहीं यह तुम्हारी कंपनी तो नहीं है ? तुम भी तो राजेश हो ।

राजेश - हां यह मेरी कंपनी है ।

साहिल - कमाल हो गया, मेरा तो यहां इंटरव्यू है ।

, राजेश - अच्छा तो फिर ठीक है , ऑल द बेस्ट।

साहिल - थैंक्स।

राजेश नैना की ओर मुडा - मिस शर्मा आप इनके साथ ?

साहिल - वह मैं बताता हूं । दरअसल मुझसे यहां का एड्रेस खोया था और मुझे यह नीचे ग्राउंड फ्लोर पर मिली तो मुझे यही यहां तक लेकर आईं, बहुत अच्छी है यह दिल की और अब तो हम दूसरे के दोस्त बन गए हैं ।

राजेश अब नैना को शिकायत भरी नजरों से देखने लगा , नैना ने राजेश को इग्नोर कर दिया और साहिल को साथ ले एडमिन डिपार्टमेंट की ओर बढ़ गई । राजेश उसे खुद को इस तरह इग्नोर करता देख हैरान रह गया कि नैना ने मुझे इस तरह इग्नोर क्यों किया? उसे अब साहिल से थोड़ा इनसिक्योरिटी महसूस हुई कि कहीं इस लड़के की जिंदादिली नैना का दिल ना जीत ले (विशाल से तो उसकी बात दिल्ली में हो चुकी थी, वह विशाल को प्यार मिले इंकार के बारे में भी जानता था ) या फिर नैना की सादगी साहिल का दिल न जीत ले?

राजेश काफी देर तक वहीं खड़ा रहा कि इतने मे रिचा आ गई , - क्या हुआ ?

राजेश - नहीं ,कुछ नहीं ।

रिचा - वह लडका कौन है जो नैना के साथ गया है हम एक लड़की को जाते देखा कौन था वह ?

राजेश - साहिल नाम है उसका, इंटरव्यू के लिए आया है ।

रिचा - नैना और वह दोनों अच्छे दिख रहे थे ना साथ में।

राजेश ने अब गुस्से से रिचा की ओर देखा फिर बिना कोई जवाब दिए वहां से चला गया ।

रिचा - इसे क्या हुआ?

साहिल का इंटरव्यू हो चुका था और सेलेक्ट भी कर लिया गया था , कल से उसे ऑफिस ज्वाइन करना था , वह बहुत खुश हुआ कि ऑफिस में उसे नैना, राजेश जैसे दोस्त मिल गए थे।

नैना अब अपनी टेबल पर बैठी थी , राजेश का कैबिन ठीक उसके सामने था। कैबिन का दरवाजा खुला हुआ था , रिचा , राजेश से कुछ बात कर रही थी पर वह कहीं खोया हुआ था। उसे देखकर साफ पता चल रहा था कि रिचा की बातों को नहीं सुन रहा था कि तभी अचानक से राजेश की नजर नैना

पर पड़ी ।

यह देख नैना ने झट से अपनी नजर नीचे कर ली पर राजेश अभी भी शांत भाव से नैना को लगातार देखे जा रहा था । नैना को यह अजीब लग रहा था क्योंकि राजेश अब रिचा का मंगेतर था पर फिर भी उसका ध्यान नैना पर ही और था पता नहीं क्या चल रहा था उसके दिमाग में ?

नैना को पीछे से किसी ने पुकारा, नैना ने मुड़कर देखा तो रिया सामने खड़ी थी - क्या हुआ नैना ? थोड़ी परेशान हो।

नैना - नहीं तो , ऐसा कुछ भी नहीं है ।बस थोड़ा काम का प्रेशर है ।

रिया (मुस्कुराकर) - हां बिल्कुल क्योंकि भाई के नाम का प्रेशर तो अब तुम्हारी जिंदगी से हमेशा के लिए दूर जा चुका है, भाई ने आगे बढ़ने का फैसला जो किया है पर देखो ना नैना भाई खुश नहीं है ।

नैना ने राजेश की ओर देखा तो वह चुपचाप कहीं खोया हुआ , सा बैठा था और रिचा लगातार उससे हंस हंस के बात की जा रही थी । यह देख नैना का चेहरा उतर गया ।

रिया - वैसे खुश तो तुम भी नहीं लग रही हो नैना ?

नैना - ऐसा कुछ नहीं है रिया, मैं खुश हूं राजेश और रिचा दोनों के लिए ।

रिया - चलो अच्छा है पर मैं बाकी तुम लोगों की तरह नहीं हूं जो दिल में कुछ और बाहर कुछ रखते हैं।

नैना अब रिचा को रिया को सवालिया नजरों से देखने लगी - कहना क्या चाहती हो ?

रिया - बस इतना कि मुझे रिचा पसंद नहीं है । मुझे अपने भाई के लिए तुम परफेक्ट लगती हो , काश तुम मेरी भाभी होती ।

नैना - रिया प्लीज , मेरे ख्याल से तुम्हें राजेश के फैसले की इज्जत करनी चाहिए। रिचा बहुत ही अच्छी लड़की है । वह खुश रखेगी तुम्हारे भाई को।

रिया (खींझते हुए ) - तुम क्यों नहीं समझती हो जो मैं कहना , चाहती हूं । तुम्हारी आंखों मैं साफ दिखाई देता है कि तुम भाई से कितना प्यार करती हो लेकिन फिर भी अगर कभी भी तुम्हें किसी भी तरह की हेल्प की जरूरत हो तो मुझे याद कर सकती हो। फिलहाल मैं किसी जरूरी काम से दिल्ली जा रही हूं - कहते हुए रिया वहाँ से चली गई।

नैना को अब याद आया कि उसे भी मां को रेलवे स्टेशन छोड़ना है , वह जल्दी से अपना बैग ले ऑफिस से बाहर की ओर से भागी। वो टैक्सी का वेट कर ही रही थी कि पीछे से विशाल ने पुकारा - नैना आ जाओ , अभी मैं घर ही जा रहा हूं तो आपको घर छोड़ दूंगा ।

नैना वैसे ही काफी लेट हो चुकी थी तो वह विशाल के साथ उसकी गाड़ी में बैठ गई , तभी जगन कुछ फाईल्स लेकर पीछे वाली सीट पर रख गया।

नैना - ये क्या है ?

विशाल - कुछ प्रोजेक्ट्स की जरूरी फाइल्स है , राजेश के घर रखनी है ।

नैना - वहां क्यों ?

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विशाल - क्योंकि राजेश को जो भी फाइल बहुत ज्यादा जरूरी लगती है , उन्हें अपने घर रखता है यहां नहीं ।

नैना को अब समझ में आया कि क्यों उसे यहाँ अपनी फाइल नहीं मिली । राजेश ने उसे जब इन्वेंटरी में काम दिया था तो शायद उससे पहले ही वह फाइल वहां से हट वाली होगी ।

नैना - विशाल मै जब इन्वेंटरी में काम कर रही थी तो मैंने नोटिस किया कि कुछ फाइल्स मिसिंग है तो क्या वह भी राजेश सर के घर पर ही होंगी ?

विशाल - हां, राजेश ने कई फाइल्स वहां से निकलवाई थी, वैसे तुम क्यों पूछ रही हो ?

नैना (मुस्कुराते हुए) - नहीं , बस यूं ही ।

उसे समझ आ गया था कि अगर उसे सब कुछ सही करना है तो पहले राजेश के घर से वह अपनी वाली फाइल गायब करनी होगी ।

विशाल - नैना , अगर हम पहले राजेश के घर चल फाईल्स रखें और फिर मैं आपको घर ड्राप करू तो कोई प्रॉब्लम तो , नहीं होगी क्योंकि यह बहुत जरूरी फाइल्स है , इधर से उधर हुई तो राजेश मुझे छोड़ेगा नहीं।

नैना की तो जैसे मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई - नहीं आप पहले यह काम कर लें।

विशाल - थैंक्स नैना - कहते हुए विशाल गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ चला।

नैना ने माँ को फोन किया - हेलो , मैं कह रही थी कि आज जरा काम में फंस गई हूं तो आप ऐसा करिए कि आज रात और रुक जाइए। मैं कल आपको दिल्ली के लिए छोड़ दूंगी।

रेखा जी - ठीक है बेटा , आज वो कई दिनों बाद खुश थी क्योंकि अपनी बेटी के साथ उन्हें कुछ समय और नसीब होगा एक साथ बिताने को ।

कुछ ही समय में विशाल और नैना राजेश के घर के बाहर थे, विशाल ने सारी फाइल्स उठाई और नैना के साथ राजेश के घर के दरवाजे की ओर बढ़ दिए। विशाल ने अपनी जेब से चाबी निकाल दरवाजा खोला और दोनों घर के अंदर पहुँचे।

नैना उस घर को निहारने लगी , वह घर बहुत ही खूबसूरत , था, वहां नैना को एक अजीब तरह का सुकून मिल रहा था कि तभी उसका ध्यान विशाल की ओर गया ।

विशाल - आओ नैना , आप पहली बार यहां आई है तो मैं आपको आपके बाँस का घर दिखा दूँ (हंसते हुए) - तो यह ड्राइंग रूम और उधर राजेश का स्टडी रूम है। उसका कमरा ऊपर है । स्टडी रूम में राजेश का सबसे ज्यादा समय गुजरता है , विशाल नैना को राजेश के स्टडी रूम में ले गया। नैना ने देखा कि वहाँ कई फाईल्स एक बड़ी सी रैक प करीने से रखी हुई थी , विशाल ने अपने साथ लाई फाईल्स भी वही रख दी ।

और यह देखो सामने किचन है - कहते हुए विशाल नैना को किचन में ले गया । अभी विशाल और नैना आपस में बात कर ही रहे थे कि तभी विशाल को किसी का फोन आया।

विशाल - नैना 1 मिनट, मैं अभी आया - कहते हुए बाहर ड्राइंग रूम में चला गया ।
 
नैना बस किसी भी तरह अपनी फाइल ढूंढ कर उसे हासिल करना चाहती थी पर करे तो करे कैसे कि तभी उसकी नजर किचन की उस खिड़की पर गई जो कि बाहर सडक की ओर खुलती थी। नैना ने जल्दी से जाकर उस खिड़की के लॉक को , खोल दिया और किचन से बाहर आ सोफे पर बैठ गई। उसे अंदर ही अंदर बहुत घबराहट हो रही थी कि उसे अब चोरी भी करनी पड़ेगी? और कोई रास्ता भी तो नहीं है क्योंकि वैसे तो राजेश उसे जाने देगा नहीं और फिर अगर वह उसकी आंखों के सामने रही तो वह अपनी जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पाएगा । ऐसे तो राजेश और रिचा दोनों की जिंदगी खराब हो जाएगी । अगर नैना खुद ही चली जाती है तो राजेश उसकी फैमिली को तंग करेगा ।

इतना कुछ गलत हुआ है नैना की जिंदगी में सही करके भी क्यों ना कुछ गलत कर सभी की जिंदगी को आसान बना दिया जाए । नैना जानती थी कि उसके पास आज रात कुछ घंटे हैं यह फाइल लेने के लिए क्योंकि राजेश रिया को छोड़ने एयरपोर्ट जाने वाला था और फिर उसे कुछ जरूरी काम था, दूसरी ओर रिचा अभी अपने किसी रिश्तेदार के यहां रहने जाने वाली थी ।

विशाल - चले नैना ?

नैना - हाँ।

विशाल नैना अब घर के बाहर निकल गए और विशाल नैना को उसके घर ड्राप कर दिया।

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मुरझाए हुए चेहरे के साथ जब नैना घर के अंदर दाखिल हुई तो रेखा जी ने बड़ी प्यार भरी मुस्कान के साथ उसका स्वागत किया - आ गई बेटा ।

नैना ने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और सीधे अपने कमरे में चली गई ।

रेखा जी भी अब उसके पीछे पीछे कमरे में गईं - क्या बात है नैना ? परेशान लग रही हो ।

नैना ने मां की ओर देखा और बोली - मैं तो पिछले 2 साल से परेशान हूं पर फर्क इतना है कि यह परेशानी आपको अब दिख रही है । वैसे आपके लिए खुशखबरी है। मैं जिस कंपनी में काम करती हूं , राजेश ने उस कंपनी को खरीद लिया और अपने वहां का बॉस है । उसने मुझे हर रोज उस दुख की सजा देने की कोशिश की है जो मैंने उसे दिया है पर सच तो यह है कि मेरी मां ने मुझे धोखा दिया है । जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तो आपने अपने कदम पीछे खींच लिए , मैं तो आपके साथ खड़े होकर इस समाज का मुकाबला करना चाहती थी पर आपने ही मुझे अकेला छोड़ दिया हर रोज नफरत भरी बातें सुनने के लिए ।

, खैर , अब तो सब ठीक हो गया है । पता है कैसे ? राजेश ने सगाई कर ली है और वह भी अब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने को तैयार है । उसकी मंगेतर कोई और नहीं , मेरी खास दोस्त रिचा है ।

यह सुन रेखा जी हैरान रह गई - क्या ? रिचा ऐसा कैसे कर सकती है तुम्हारे साथ ?

नैना (मुस्कुराते हुए ) - बिल्कुल वैसे ही ,जैसे कि आपने अपनी बेटी के साथ किया था और हां झूठ तो आपने 2 साल पहले एक और भी बोला था कि राजेश ने शादी के लिए हां कर दी है और उसकी शादी होने वाली है तो आप किसी और पर उंगली ना उठाए तो बेहतर है । रिचा को तो यही लगता है कि मैं राजेश से प्यार नहीं करती इसलिए उसने राजेश को हाँ कहा था

रेखा जी - वह मैंने इसलिए कहा था क्योंकि मैं चाहती थी कि तुम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो ।

नैना - ओह , तो यह बात है। आप खुद पिछले 25 सालों से अपनी जिंदगी में आगे नहीं बढ़ पाई और मुझे बढाना चाहती है ? मेहरबानी कर जाइए यहां से , मुझे बहुत काम है ।

, रेखा जी - बेटा वो खाना ....

नैना - भूख नहीं है मुझे , आप बस यहां से जाइए।

रेखा जी अब बाहर ड्राइंग रूम में आ कर बैठ गई, उन्हें अपने अतीत की काली परछाई नैना के भविष्य को निगलती दिख रही थी । अब उन्हें कुछ ना कुछ तो करना ही होगा और अपनी बेटी के लिए आगे बढ़कर हिम्मत दिखानी होगी।

नैना तकरीबन 1 घंटे बाद रूम से बाहर निकल घर के दरवाजे की ओर बढ़ चली कि रेखा जी ने पूछा - कहाँ जा रही हो?

नैना - कुछ काम है , कह कर निकल गई ।

आज नैना किसी भी कीमत पर राजेश के घर से अपनी फाइल निकालना चाहती थी जिससे वह यहाँ से हमेशा के लिए दूर चली जाए और फिर सब कुछ ठीक हो जाए।,

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नैना जब राजेश के घर पहुंची तो रात गहरा चुकी थी, उसने चारों ओर देखा पर वहां कोई नहीं था । अब वह कांपते पैरों से धीरे-धीरे राजेश के घर की ओर बढ़ चली, घर के बाहर राजेश की गाड़ी ना देख उसकी जान में जान आई । अब वह राजेश के घर की किचन की ओर जल्दी से बढी, वहां उसने धीरे से किचन की खिड़की खोली ।

नैना को अब डर के मारे पसीने छूट रहे थे , हाथ पैर बुरी तरह से काँप रहे थे और दिल बहुत जोरों से धड़क रहा था ।

बस इस चोरी के बाद एक कतल करना ही बाकी रह गया है मेरा तो , अच्छी खासी जिंदगी गुजार रही थी आराम से कि इन साहबजादे को पूरी दुनिया में मैं ही प्यार करने को मिली। क्या क्या नहीं करना पड़ रहा - झूठ, धोखा, बेवफाई और अब चोरी भी ! प्यार में यह सब करना पड़ता है, अगर पहले से पता होता तो मैं कभी राजेश की तरफ आंख उठाकर भी ना देखती पर अब गलती की है तो सजा भुगतनी पड़ेगी।सबकी खुशियों का सवाल जो है - नैना अब नर्वस हो कर बडबडाए जा रही थी।

उसने किचन की खिड़की से अंदर झाँककर देखा कि कहीं कोई है तो नहीं पर घर में सन्नाटा पसरा था, वह चुपचाप खिड़की के सहारे घर में घुस गई।

दूसरी ओर रिया और राजेश एयरपोर्ट पर बैठे थे , राजेश कुछ परेशान सा लग रहा था - कभी उठ जाता तो कभी बैठ जाता ।

रिया - क्या बात है भाई ? कुछ परेशान लग रहे हो ?

राजेश - नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। बस मेरा सिर दर्द से फटा जा रहा है ।

रिया - आप एक काम कीजिए ,घर जाकर आराम करें । मेरी फ्लाइट का वक्त हो ही रहा है , मैं खुद चली जाऊंगी।

रिया ने जोर जबस्ती कर राजेश को वापस घर भेज दिया। राजेश का जो काम था ,आज वह भी नहीं हो पाया तो वह सीधा घर के लिए निकल पड़ा ।

नैना किचन के रास्ते राजेश के घर में आ गई , उसने अपने , मोबाइल की लाइट जलाई और राजेश के स्टडी रूम की ओर बढ चली। उसे डर लग रहा था कि राजेश वापस ना आ जाए।

स्टडी रूम में अब जल्दी से कमरे की लाइट ऑन कर उसने फटाफट से अपना मोबाइल टेबल पर रख दिया और रैक से निकाल कर सारी फाइल चेक कर ली पर उसकी फाइल वहां नहीं थी। राजेश की स्टडी टेबल पर भी नैना ने चेक किया पर वह भी उसे फाइल ना मिली ।

नैना अब राजेश पर गुस्सा करने लगी - अजीब इंसान है । इतनी सारी जरूरी फाइल्स तो यहां यूं ही पड़ी है, बस मेरी एक फाइल ही इसने पता नहीं कहां छुपा कर रखी है ? कितनी मुश्किल से तो यहां तक पहुंची हूं मैं और फिर भी खाली हाथ गई तो क्या फायदा - अब नैना यह सोच रही थी कि उसे घर के दरवाजे पर किसी गाड़ी के रुकने की आवाज आई।

गाड़ी की आवाज सुनकर नैना घबरा गई, आज जिंदगी में पहली बार गलत काम किया जिससे सबका भला हो जाए लेकिन यहां तो मैं अब खुद ही फँस गई। अब क्या होगा अौर यह इतनी जल्दी कैसे आ गया ? अगर इसने मुझे देख लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगी - सोचते हुए नैना जल्दी से स्टडी , रूम की लाइट ऑफ कर छुपने की जगह ढूँढने लगी फिर उसे याद आया कि किचन की खिड़की खुली है ,वह जल्दी से उधर की ओर भागी जिससे उसके सहारे वह घर से बाहर निकल सके।

राजेश गाड़ी से निकला ही था उसकी नजर किचन की खुली खिड़की पर पड़ी।

राजेश यह देख हैरान रह गया - यह खिड़की खुली कैसे रह गई? वह सुबह ही तो सारे खिड़की दरवाजे बंद करके गया था। हो सकता है कि वह भूल गया हो, यह सोच अब राजेश उस खिड़की की ओर बढ़ा ।

इधर जैसे ही नैना खिड़की के पास पहुंची तो उसे राजेश के पैरों की आहट उसी और आती सुनाई दी। वह वापस घबराकर पीछे हटी और ड्राइंग रूम की तरफ जाकर दीवार के पीछे छुप गई।

हे भगवान प्लीज प्लीज आज बचा लो , क्यों मेरे पीछे पड़े हो? एक यह शैतान कम है मुझे परेशान करने को कि आप भगवान हो कर भी मुझे परेशान कर रहे हैं - नैना भगवान से कहने लगी।

, राजेश ने खिड़की से अंदर की ओर झांका पर उसे वहां कोई हलचल दिखाई नहीं दी, उसे लगा कि शायद यह उसका वहम होगा। हो सकता है कि उससे ही खिड़की खुली रह गयी हो। राजेश ने अब उस खिड़की को बाहर से बंद कर दिया और वापस घर की ओर चल पड़ा ।

नैना राजेश के दूर जाने की आवाज सुन वापस खिड़की पर आई और भाग जाने के लिए खिड़की को खोलने लगी लेकिन यह क्या? खिड़की तो बाहर से बंद है , वह कैसे निकलेगी?

नैना को एहसास हुआ कि राजेश दरवाजे पर पहुंच गया है और लॉक खोल रहा है । राजेश ने जैसे ही लॉक खोल दरवाजा खोला तो सामने अंधेरे के सिवाय कुछ और नहीं था। राजेश ने आगे बड़ घर की लाइट आँन की और सामने रखे सोफे पर जाकर बैठ गया । वह काफी थका हुआ था और ऊपर से सिर दर्द भी था । उसने अपने पैर सामने वाले टेबल पर रखे और सोफे पर थोड़ा सा आराम से आँखें बंद कर लेट गया ।

नैना उसी सोफे के पीछे छुपीे बैठी थी, उसने सोचा था कि राजेश जब अपने कमरे में जाएगा तो वह चुपचाप वहां से निकल जाएगी लेकिन यह तो यहीं बैठ गया है । नैना को अब , ध्यान, आया कि उसका फोन तो राजेश के स्टडी रूम की टेबल पर ही रह गया है ।

नैना - हे भगवान , अब मैं क्या करूं ? अगर राज ने फोन देख लिया तो या फिर किसी का फोन आ गया तो? वह चुपचाप बैठ गआ कि अब जो होगा, सो देखा जाएगा। आखिर उसे ऐसा करने को मजबूर करने वाला भी तो राजेश ही था ।

काफी देर तक नैना चुपचाप बैठी रही , अब उसे ध्यान आया कि राजेश काफी देर से चुपचाप लेटा हुआ है , शायद यह यही सो गया है । नैना अब हिम्मत करके सोफे के पीछे से उठी और दबे पांव से स्टडी रूम की तरफ चली। उसकी नजरें लगातार राजेश पर ही थी । राजेश बिल्कुल शांत से लेटा हुआ था , शायद वह सच में सो गया था।

नैना ने अब स्टडी रूम में जाकर अपना फोन उठा कर साइलेंट कर दिया , मारे डर के उसका गला सूख रहा था और एसी में भी वह पसीने - पसीने हो रही थी । अब उसने स्टडी रूम से चुपचाप झाँक कर देखा कि क्या राज अभी भी सो रहा है या जाग गया है ?

राजेश वैसे ही चुपचाप लेटा हुआ था , उसका चेहरा दरवाजे , की ओर ही था । नैना के पास अब इसी वक्त का फायदा उठा कर घर से निकलने के अलावा कोई चारा भी ना था। वह बहुत निराश हो गई कि उसकी सारी मेहनत बेकार गई , इतनी हिम्मत कर तो वह वह यहां आई लेकिन फाइल ही उसे नहीं मिली उल्टे राजेश और यहां आ गया ।

नैना ने अब एक गहरी सांस ली और अब स्टडी रूम से निकलकर ड्राइंग रूम में आई, जहां राजेश लेटा हुआ था ।नैना बड़ी सावधानी से राजेश के पास से होकर गुजरी और दरवाजे की ओर बढ़ी। दरवाजा उससे बस कुछ कदम ही दूर था , यह देख नैना की जान में जान आई। फाइनली आज वह बाल-बाल बची है , सोचते हुए वह राजेश की तरफ से दरवाजे की ओर घूमी और जैसे ही दरवाजे के पास पहुंची कि उसके कानों में आवाज गूँज उठी -

" क्या हुआ , इतनी जल्दी हार मान गई मिस शर्मा जो खाली हाथ लौट रही हो "

यह सुनते ही नैना की सांसे अटक गई, वह जहां थी वहीं खड़ी रह गई । उसे अब बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई,।उसने अब भारी मन से पीछे मुड़कर देखा तो राजेश चेहरे पर मुस्कान के साथ अभी भी सोफे पर आराम से लेटा हुआ उसे देख रहा था। उसे देखकर साफ लग रहा था कि वह नैना की , को रंगे हाथ पकड बहुत खुश था ।

नैना को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें, वह वापस दरवाजे की ओर मुड़ी और दरवाजा खोल बाहर जाने को हुई लेकिन यह क्या? दरवाजा तो लाँक था।

नैना अब बार-बार दरवाजा खोलने की कोशिश कर रही थी।

राजेश (हंसकर ) - दरवाजा लॉक है नैना , बेकार की कोशिश कर रही हो और इसकी चाबी तो मेरे पास है इसलिए अब चुपचाप यहां वापस आ जाओ।

नैना - नहीं , मुझे घर जाना है । खोलो दरवाजे को ।

राजेश (मुस्कुराकर) - मैं कोई तुम्हारा गुलाम थोड़ी हूं कि तुम जो कहोगी ,करूंगा । जैसे आई थी, वैसे ही चली जाओ - कहते हुए उसने किचन की खिड़की की ओर इशारा किया।

मानना पड़ेगा तुम्हें, जब भी मैं सोचता हूं कि तुम्हें अच्छी तरह समझ गया हूं तो तुम कुछ ऐसा कर जाती हो कि मुझे ऐसा महसूस होता है कि मैं तुम्हें बिल्कुल भी नहीं जानता। दाद देनी पड़ेगी तुम्हारी हिम्मत की, सीधा मेरे घर में घुस आई। तुमने तो मुझे सच में हैरान कर दिया - कहते हुए राजेश जोरों से हँसने लगा।

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नैना (झुँझलाते हुए)- ऐसा कुछ भी नहीं है , मैं तो बस......

राजेश - अपनी बांड वाली फाइल लेने आई थी पर वह तुम्हें मिली ही नहीं फिर खाली हाथ जा रही हो ?

नैना (हैरानी से ) - तुम्हें कैसे पता कि मैं फाइल लेने आई थी और तुम्हें कैसे पता चला कि मैं यहां हूं ?

राजेश - इसे दिमाग कहते हैं मैडम । अब तुम ही बताओ , तुम्हें मेरे घर से और क्या चाहिए होगा ? पेशेवर चोर तो हो नहीं और तुम्हारे काम की सिर्फ एक ही चीज यहाँ मौजूद है और वह है तुम्हारी फाइल और रही बात मुझे तुम्हारे यहां होने का पता होने की तो मेरे पड़ोसी ने तुम्हें किचन की खिड़की के रास्ते यहाँ घुसते हुए देख लिया था तो उन्होंने मुझे फोन कर खरबर दी और साथ ही तुम्हारा फोटो भी लेके भेजा - कहते हुए उसने नैना को अपने फोन मे फोटो दिखाया।

नैना अब शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश - मानना पड़ेगा तुम्हें। पता नहीं तुम्हें कैसे पता लग गया कि फाइल यहां घर में है लेकिन सच में तुमने मुझे आज , फिर हैरान कर दिया । मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि तुम इतना कुछ भी कर सकती हो ।

नैना ( खीझकर) - सोच तो मैं भी नहीं सकती थी कि तुम ऐसे निकलोगे , मेरी फाइल का गलत इस्तेमाल कर रहे हो तुम। तुम ऐसा कर मुझे जबरदस्ती रोक नहीं सकते । मैं बस जाना चाहती हूं यहां से । दम घुटता है मेरा यहां शहर में , तुम्हें देख कर गुस्सा आता है मुझे , नफरत होती है । तुम जानबूझकर मुझे तंग कर रहे हो , दरवाजा खोलो अभी इसी वक्त ।

राजेश कुछ देर सोच कर बोला - ठीक है । अब बातें बाद में होंगी , जाओ जाकर पहले मेरे लिए एक गिलास पानी लेकर आओ ।

नैना (गुस्से से ) - नौकर नहीं हूं तुम्हारी। खुद जाकर ले लो और दरवाजा खोलो ।

राजेश - ठीक है तो मैं अभी पुलिस को फोन करता हूं और बताता हूं कि मेरे ऑफिस की एक लड़की मेरे घर में चोरी करने आई थी , मैंने उसे रंगे हाथों पकड़ा है तो वह आए और आकर तुम्हे गिरफ्तार कर ले जाएं फिर तुम्हारी और तुम्हारे घरवालों की इज्जत में जो दाग लगेगा , उसे बैठकर जिंदगी , भर साफ करते रहना ।

नैना (हैरानी से ) - तुम ऐसा नहीं कर सकते , प्लीज ऐसा मत करो ।

राजेश ( मुस्कुराते हुए) - मैं कुछ भी कर सकता हूं । अगर तुम चाहती हो कि मैं ऐसा ना करूं तो चुपचाप वही करो , जो मैं कह रहा हूं ।

नैना मन मसोस कर रह गई ।
 
राजेश - किचन का तो तुम्हें पता ही होगा ,आखिर उसकी खिड़की से तो तुम यहां आई हो ।

नैना अब उदास होकर किचन में पानी लेने चली गई और पानी का गिलास ला राजेश की हाथों में थमा दिया। राजेश को नैना को तंग करने में बहुत मजा आ रहा था । वह पानी पी कर बोला - नैना मेरे पास बैठो।

नैना - नहीं मैं यही ठीक हूं ।

राजेश - मैं रिक्वेस्ट नहीं कर रहा हूं , ऑर्डर दे रहा हूं ।चुपचाप बैठो वरना ...... - कहते हुए राजेश ने अपना फोन , उठाया कि नैना झट से उसके पास बैठ गई ।

राजेश - अब ठीक है। अच्छा सुनो, मेरे सिर में बहुत दर्द है। प्लीज , थोड़ा दबा दो और हां आराम से वरना मैं क्या कर सकता हूं , यह मुझे तुम्हें याद दिलाने की जरूरत नहीं - कहते हुए राजेश अब नैना की गोद में सर रखकर लेट गया ।

नैना - यह तुम.......

राजेश (बड़े इत्मीनान से ) - तुम्हें याद है, नैना कॉलेज में हम दोनों ऐसे ही बैठ कर खूब सारी बातें किया करते थे । नैना ने अब राजेश के सर को बड़े आराम से दबाना शुरू किया , कुछ देर बाद राजेश करवट लेकर लेट गया और उसकी आँखों से आँसू बह निकले। वह उन्हें पोंछ पाता कि नैना ने उसे देख लिया और उसके आँसू पोंछ दिए।

थोड़ी देर तक वहां सन्नाटा पसरा रहा।

राजेश - तुम्हारे हाथों में सच में जादू है नैना।

नैना - राजेश, अब तो दरवाजा खोल दो ।मुझे लेट हो रहा है।

राजेश - अभी नहीं , पहले मुझे बहुत भूख लगी है। तुम , जाकर कुछ अच्छा सा बना कर लाओ। काफी वक्त हो गया है तुम्हारे हाथ का खाना खाए । कितना कुछ बदल गया वक्त के साथ - यहां तक कि तुम और मैं भी।

राजेश अब चुप हो उठा और सीढ़ियों से होते हुए अपने कमरे में चला गया। नैना उसे बस यूं ही जाते हुए देखती रही । थोड़ी ही देर में राजेश वापस आया लेकिन इस बार उसके हाथ में फाइल थी । राजेश नैना के पास आकर बैठ गया और फाइल टेबल पर रख दी ।

नैना - यह क्या है?

राजेश - वहीं फाइल जिसके लिए तुम ने आज अपने सारे उसूलों को तोड दिया ।

नैना हैरानी से राजेश को देखने लगी - पर तुम इसे ऐसे......

राजेश - इस बारे में बाद में बात करेंगे पर पहले खाना खिला दो।

नैना किचन में चली गई। राजेश अब गहरी सोच में डूबा हुआ था - क्या उसका नैना को इस तरह जबरदस्ती रोकना सही था ? क्या नैना वाकई उससे दूर जाना चाहती है और वह भी , इस कदर कि वह आज राजेश के घर में चोरों की तरह घुसकर आ गई । नहीं नहीं मैं अब अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका हूं , इस तरह कमजोर पडूंगा तो कैसे काम चलेगा । इसी तरह के सवालों से जूझते हुए राजेश के कानों में नैना की आवाज आई ।

नैना ने खाना बनाकर डाइनिंग टेबल पर लगा दिया था और राजेश को अावाज दी - खाना खा लो राजेश ।

राजेश अब जैसे नींद से जागा हो - हां आया - कहकर वह फाइल ले डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ा ।

नैना - राजेश यह फाइल प्लीज मुझे दे दो ।

राजेश कुर्सी पर बैठते हुए - दे दूंगा पर मेरी एक शर्त है ।

नैना - कैसी शर्त?

राजेश - मेरी शर्त यह है कि मेरी और रिचा की शादी की पूरी तैयारियां तुम करोगी । शादी के बाद यह फाइल मैं खुद तुम्हें दे दूंगा।

नैना हडबड़ा कर बोली - मैं..... मैं नहीं कर सकती।

,

राजेश - क्यों नहीं कर सकती? कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम मुझसे.....

नैना - नहीं , ऐसी बात नहीं है । वह मैंने कभी ऐसा काम किया नहीं है और फिर यहां तो इतने अच्छे वेडिंग प्लानर है तो उन्हें देख लो।

राजेश - जितना मैंने पूछा है उसका जवाब दो ।

नैना अब अजीब सी कशमकश में फंस गई कि कैसे अपने प्यार को अपने ही हाथों से किसी और को सौंप दें ? इससे बेहतर वह मर जाना पसंद करेगी ।

राजेश - तो फिर ठीक है , यह फाइल भी 1 साल तक तुम भूल ही जाओ । अब जल्दी से खाना दो,भूख लगी है बहुत तेज - कहते हुए उसने फाइल और दरवाजे की चाबी अपने बगल वाली सीट पर रख ली । अरे वाह ! भिंडी की सब्जी -यह तो मेरी फेवरेट है और जब भी तुम्हारे हाथ की होती है तो बस मजा ही आ जाता है - कहकर राजेश बच्चों की तरह चहकने लगा ।

नैेना - और मीठे में मैंने यह बनाया है - कहते हुए नैना ने खीर , की ओर इशारा किया ।

राजेश - थैंक्स नैना , तुम नहीं जानती कि तुम्हारे जाने के बाद आज कितने टाइम बाद मैं सुकून से खाना.... कहते हुए राजेश रुक गया और नम आँखों से नैना की ओर देखने लगा।

उसे यूँ देख नैना की भी आंखे भर आई ।

राजेश अब उठ कर जाने लगा कि नैना ने राजेश का हाथ पकड़ उसे वापस कुर्सी पर बैठा दिया।

नैना - खाना ऐसे बीच में छोड़कर नहीं जाते फिर तुम्हें तो भूख भी लगी है । अाज मैं तुम्हें अपने हाथों से खाना खिलाऊंगी।

राजेश हैरान हो नैना की ओर देखने लगा - क्या कहा तुमने? तुम खिलाओगे जैसे कॉलेज में खिलाती थी? क्या हो गया है तुम्हें?

नैना - बस ज्यादा सवाल जवाब मत करो । क्या हम कुछ देर के लिए शांति के साथ नहीं बैठ सकते ।

राजेश नैना के बदले रूप को देश हैरान सा रह गया - तुम्हारी तबीयत ठीक है ?

,

नैना ने अब राजेश की प्लेट से एक निवाला तोडा़ और राजेश की ओर बढ़ा दिया ।

राजेश हैरानी से - क्या बात है नैना ,आज बड़ा प्यार आ रहा है तुम्हें मुझ पर । कहीं ऐसा तो नहीं कि तुमने इसमें कुछ मिला दिया जैसे कि जहर ?

नैना (गुस्से में) -राजेश क्या बकवास कर रहे हो ? मैं जहर क्यों दूंगी तुम्हें ?

राजेश -ठीक है तो पहला निवाला तुम खाओगी ।

नैना को यह बहुत बुरा लगा ,उसका चेहरा एकदम उतर सा गया । उसने जैसे ही उस निवाले को खाने के लिए अपना मुंह खोला कि राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया - रहने दो , वैसे भी इसमें जहर हुआ भी तो कौन सा मुझे जी कर कुछ करना है । जिंदा रह कर नही तो मर कर ही तुम्हारे काम आ जाऊंगा - कहकर उसने नैना के हाथ से निवाला खा लिया । नैना बड़े प्यार से राजेश को खाना खिला रही थी । दोनों अब चुपचाप एक दूसरे को निहारे जा रहे थे ।

नैना और राजेश की आंखों में आंसू आ गए, दोनों अब , एक-दूसरे से नजरें चुराने लगे। दर्द तो दोनों के ही दिलों में बेइंतहा था पर कोई किसी को अपना दर्द दिखा नहीं सकता था । नैना ने अब बड़े प्यार से उसे खीर खिलाई , राजेश को आज फिर वही कॉलेज वाली नैना याद आने लगी । नैना के चेहरे पर फिर वही प्यार और फिक्र थी। राजेश ने नैना को भी खाना खाने को कहा पर उसने मना कर दिया।

खाना खिलाने के बाद नैना अपनी कुर्सी से उठी और राजेश का हाथ पकड़ उसे सीढ़ियों से ऊपर कमरे में ले जाने लगी।

राजेश कुछ समझ नहीं पाया कि नैना कर क्या रही है - नैना तुम ....

नैना - चुपचाप चलो मेरे साथ , आज तुम कुछ नही कहोगे, सिर्फ सुनोगे - कहते हुए उसे उसके कमरे में ले गई । वहां नैना ने राजेश को उसके बिस्तर पर लेटा दिया और खुद उसका हाथ पकड़ वही उसके पास बैठ गई । राजेश के लिए नैना आज फिर एक अनसुलझी पहेली बनकर खड़ी हो गई।

नैना - राजेश , मैं जो भी कह रही हूं वह ध्यान से सुनना।

राजेश - हम्म ।

, नैना - जब तक मैं यहां रहूंगी , तुम अंदर ही अंदर खुद से जूझते रहोगे । मैंने कई बार तुम्हें चोट पहुंचाई है - कभी जानबूझ कर तो कभी अनजाने में । आज फिर मैंने तुम्हें धोखा दिया है पर वह भी सब की खुशी के लिए । अगर मैं यहां से नहीं गई तो तुम और रिचा कभी खुश नहीं रह पाओगे और तुम भी मुझे खुद से दूर नहीं जाने दोगे।

मैं जानती हूं कि तुम्हें मुझ पर बहुत गुस्सा आएगा पर एक ना एक दिन तुम समझोगे कि आज मैंने जो भी किया , वह इस समय सबसे सही है ।

राजेश हैरानी से नैना को देखे जा रहा था कि आखिरी यह सब नैना कह क्या रही है ?

नैना की आंखों से आंसू बहने लगे - मुझे अपनी जिंदगी का एक बुरा सपना समझकर भूल जाना । तुम्हें मैने इतनी तकलीफ दी है और आज आखरी बार तुम्हें एक और तकलीफ दे रही हूं। कल सुबह जब तुम उठोगे , तब तक सब कुछ ठीक हो चुका होगा । मैं तुमसे बहुत दूर जा चुकी होंगी, तुम सुकून के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करना और यह तुम्हारा हक भी है।

राजेश - कहना क्या चाह...... तभी राजेश को अपना सिर , भारी सा लगने लगा । उसकी आंखें धीरे धीरे बंद होने लगी, वह नैना से बोला - ये क्या किया है तुमने? क्या मिलाया खाने में मेरे?

नैना - मैंने खीर में नींद की दवा मिलाई थी जो तुम्हारे किचन में टेबल की रैक में मेडिसिन के डिब्बे में रखी थी। मैं जानती थी कि तुम जिद्दी हो, नहीं मानोगे इसलिए यह करना पड़ा - कहकर नैना उठने को हुई कि राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया , वह गुस्से में बोला - दिमाग खराब हो गया है तुम्हारा? यह क्या किया तुमने ? मैं ही पागल था जो तुम पर फिर से भरोसा किया , तुम ऐसे नहीं जा सक... धीरे-धीरे राजेश की आंखें बंद होने लगी , वह पूरी कोशिश कर रहा था कि सोए नहीं पर कुछ ही पलों में वह गहरी नींद में सो गया ।

नैना अब राजेश के पास बैठ उसे जी भर कर देखने लगी क्योंकि वह जानती थी कि अब वह कभी राजेश को नहीं देख पाएगी । नैना जैसे ही चार कदम राजेश से दूर चली तो उसे ऐसा लगा कि जैसे वह अपनी आत्मा को ही छोड़ कर जा रही है , वह वापस लौट कर आई और राजेश के सीने पर सर रखकर फूट-फूट कर रोने लगी - बहुत, प्यार करती हूं तुमसे। खुद से भी ज्यादा इसलिए तुम्हारी खुशी के लिए खुद को तकलीफ देने से भी पीछे नहीं हटूंगी।काफी देर तक सिसकते रहने के बाद नैना ने अपने आंसू पोंछ खुद को संभाला और सीधी कमरे से बाहर निकल गई।

अगले दिन जब दोपहर को राजेश की नींद खुली तो उसे ध्यान आया कि नैना ने रात को उसके खाने में नींद की दवा मिलाई थी । वह अब हडबड़ाकर उठा और सीढ़ियों के रास्ते नीचे उतर दरवाजे की ओर भागा कि तभी उसे डाइनिंग टेबल पर रखी नैना की फाइल की याद आई । वह वापस डाइनिंग टेबल की ओर भागा, वहां जाकर उसने देखा कि नैना की फाइल गायब थी ।

राजेश अब गुस्से में आग बबूला हो गया - यह तुमने अच्छा नहीं किया नैना , इसके लिए मैं तुम्हें मैं कभी माफ नहीं करूंगा । एक बार फिर तुमने मुझे धोखा दिया है - बड़बड़ाते हुए कार की चाबी ले दरवाजे की ओर भागा । वह कार में बैठकर नैना के घर की ओर चल दिया । उसके हाथ पैर अब सुन्न से होने लगे ,उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करे। दिल जोरो से धड़कने लगा कि नैना कहीं चली ना गई हो - यह सोच कर इसी उलझन में और उलझते हुए वह नैना के घर तक पहुंच गया ।

जैसे ही वह कार से निकल नैना के घर के दरवाजे की ओर बढ़ा तो वहां लगे ताले को देख दंग रह गया । उसने पड़ोस , वालों से पूछा तो उन्होंने बताया कि नैना तो कई घंटे पहले ही अपनी मां के साथ यहां से निकल गई है ।

नैना चली गई , वह चली गई मुझे छोड़कर - सोचते हुए वह वही दरवाजे से टिक कर बैठ गया । वह अब कभी नैना से नहीं मिल पाएगा । अब राजेश कभी नैना पर उसके धोखे की वजह से कभी उस पर गुस्सा करता तो कभी उसके जाने के ग़म में फूट-फूट कर रोता ।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि करें तो करें क्या? आखिरकार गुस्से को दर्द ने हरा ही दिया और राजेश चुपचाप उठकर गाड़ी में आ बैठा , अब वह वहीं बैठा रोता रहा। विशाल बार-बार राजेश को फोन कर रहा था क्योंकि आज एक बहुत जरूरी मीटिंग थी पर राजेश के लिए अब सब कुछ खत्म हो चुका था । उसे ना दुनिया से मतलब था और ना ही दुनिया वालों से । उस पूरे दिन वह गाड़ी से शहर की गलियों के चक्कर लगाता रहा , जब शाम हुई तो विशाल के बार बार फोन आने पर वह अब ऑफिस की ओर चल पड़ा ।

ऑफिस पहुंचते ही विशाल भाग कर उसके पास आया और बोला - कहां थे तुम यार ? कितनी जरूरी मीटिंग थी?

विशाल ने देखा कि राजेश का ध्यान उसकी ओर नहीं था, वह , तो किसी और ही दुनिया में खोया था ।

विशाल - क्या हुआ, तुम ठीक तो हो ?

राजेश ने अब विशाल से कहा - मुझे कोई मीटिंग नहीं लेनी, मैं किसी से बात करना नहीं चाहता।

विशाल - इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि मीटिंग अच्छे से हो चुकी है , उसने सब हैंडल कर लिया ।

राजेश (बुझे स्वर में ) - किसने ?

विशाल - अरे अपनी नैना ने और किसने ?

नैना का नाम सुनते ही राजेश ने हैरानी से विशाल की ओर देखा - क्य...... क्या कहा तुमने ?

विशाल ने अब खुद से कुछ ही दूरी पर राजेश के पीछे खड़ी नैना की ओर इशारा किया और बोला - नैना ने ।

राजेश ने अब जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो सामने मुस्कुराती हुई नैना को देख वह दंग रह गया ।

, नैना राजेश की ओर देख मुस्कुरा रही थी ।

राजेश ( हैरानी से) - नैना तुम, यहां......?,
 
राजेश - नैना तुम यहां....

विशाल ( हंसकर ) - यार इतना चौक क्यों रहे हो ? नैना ही है।

राजेश (गुस्से में ) - 1 मिनट विशाल , मैं तुमसे बात नहीं कर रहा हूं - कहते हुए वह नैना की ओर बढ़ा ।

राजेश के चेहरे पर अब गुस्सा था एक बार फिर उसे धोखा देने का , नैना की फितरत ही ऐसी थी। हर बार राजेश को धोखा ही तो देती आई है , कल भी उसने राजेश के खाने में नींद की दवा मिलाई । उसने देखा कि नैना अभी भी खड़े मुस्कुरा रही है । उसे राजेश के गुस्से से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था ।

राजेश अब नैना के सामने आ खड़ा हुआ ।

विशाल - राजेश तुम....

नैना - विशाल प्लीज, यह मेरे और राजेश सर के बीच का मामला है । आप इससे दूर ही रहे ।

विशाल - ठीक है - कहते हुए वहां से चला गया।

राजेश ने नैना का हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ केबिन में ले गया । नैना चुपचाप उसके साथ चली जा रही थी , राजेश अब नैना को केबिन के अंदर ले आया ।

राजेश (गुस्से से ) - क्यों आई हो तुम, अब क्या रह गया है तुम्हारा ? मेरे पास फाइल ही तो थी जो मिल गई ना तुम्हें फिर क्यों लौटी ? मैं ही बेवकूफ हूं और वह भी बहुत बड़ा वाला बेवकूफ जो बार-बार तुम्हारी बातों में आ जाता हूं लेकिन बस बहुत हो गया । अब मैं तुम्हारी किसी भी बात में नहीं आऊंगा, तुम एक धोखेबाज लड़की हो जो धोखा देने के सिवाय कुछ नहीं जानती। अब क्या चाहिए तुम्हें ?

नैना अभी भी चुपचाप राजेश की सारी बातें सुन रही थी ।

फ्लैशबैक

, नैना राजेश के यहां से सीधे घर पहुंची, वह बस चुपचाप रोये जा रही थी, उसे एक-एक कदम बड़ा भारी पड़ रहा था।

अब वह बदहवास सी हालत में अपने कमरे की ओर बढ़ने लगी ।

उसके आने की आवाज सुन रेखा जी कमरे से बाहर निकल कर आईं, उन्होंने जब नैना को ऐसे रोते हुए पाया तो वह घबरा गई और नैना की ओर बढ़ चली - नैना, क्या हुआ बेटा?

पर नैना बिना रुके अपने कमरे में चली गई और सामान पैक करने लगी । रेखा जी भी , जो उसके पीछे कमरे में गई -यह देख दंग रह गई कि नैना आखिर कर क्या रही है ?

रेखा जी - नैना क्या कर रही हो बेटा ? क्या हुआ ?

नैना - कुछ नहीं । मैं बस यहां से दूर जा रही हूं - बहुत दूर जहां से फिर कभी राजेश मुझे ढूंढ ना पाए ।

रेखा जी हैरानी से - पर ऐसे कैसे ?

नैना अब रोते हुए बैठ गई - क्योंकि राजेश अब रिचा से शादी कर रहा है और मैं उससे शादी कर नहीं सकती तो आप क्या , चाहती हैं कि मैं यहां रह कर तमाशा देखू और राजेश को किसी और के साथ देख खुशी मनाँऊ ? आज फिर से मैंने उसे धोखा दिया मां, वह कभी भी मुझे माफ नहीं करेगा पर मैं मजबूर हूं । उसकी खुशियों के लिए यह करना जरूरी था लेकिन आप नहीं समझेंगी मां कि कितना बुरा लगता है अपने प्यार को किसी और के साथ देख और वह भी तब जब आप अपने प्यार से यह भी ना कह पाए कि आप उसे कितना प्यार करते हैं ।

रेखा जी की आंखों से आंसू बहने लगे - मैं समझ सकती हूं बेटा तेरा दर्द ।

नैना (खीझते हुए )आप नहीं समझती कुछ क्योंकि आपने कभी प्यार किया ही नहीं ?

तभी रेखा जी गुस्से में चिल्लाते हुए बोली - हां किया था मैंने प्यार , सब समझती हूं मैं । बहुत अच्छी तरह से जानती हूं कि अधूरी मोहब्बत की तकलीफ क्या होती है ?

नैना यह सुन हैरानी से अपनी मां को देखने लगी - मां यह...

रेखा जी अब रोने लगी और नैना के पास बैठ उसका हाथ , अपने हाथों में लेते हुए बोली - हां , मैं भी किसी से प्यार करती थी और वह भी मुझसे सच्ची मोहब्बत करता था । हम दोनों ने साथ जीने मरने की कसमें खाई थी , हम दोनों एक साथ खुश थे कि पता नहीं मेरे पापा को हमारे बारे में कहां से पता चल गया।

उस दिन घर में बहुत कोहराम मचा, मुझसे कह दिया गया कि प्यार या परिवार में से किसी एक को चुनना है । उस वक्त मैंने अपने परिवार को चुना क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से समाज में मेरे परिवार की नाक कट जाए और वह लोगों के ताने सुने ।

मैंने अपने प्यार को ठुकरा दिया , उसे धोखा दे दिया । साथ जीने मरने की सारी कसमें तोड़ दी। वह यह सब सहन ना कर पाया और शहर छोड़ चला गया ।

मैंने पापा की मर्जी से तुम्हारे पापा से शादी तो कर ली पर कभी खुश नहीं रह पाई। शादी के 4 साल बाद जब तुम्हारे पापा को मेरे पहले प्यार के बारे में पता चला तो पहली बार उन्होंने मुझ पर हाथ उठाया फिर तो यह सिलसिला आम हो गया । वह बात बात पर मुझ पर हाथ उठाते , उन्हें नाराजगी थी कि मैंने उन्हें धोखा दिया है और वह मेरा पहला प्यार नहीं है ।

,

तुम्हारे पापा एक अच्छे पिता तो है नैना , वह तुमसे बहुत प्यार करते हैं पर वह एक अच्छे इंसान और पति नहीं बन पाए ।वह तुम्हारे सामने मुझसे बड़े प्यार से पेश आते थे पर तुम्हारे बाद वह बेरहम इंसान हो छोटी-छोटी बातों पर मुझसे मारपीट करते थे । वह हर वक्त मेरे मां-बाप की परवरिश पर, सवाल उठाते थे और कहते थे कि मेरी परवरिश कभी गलत नहीं हो सकती । नैना सिर्फ मेरी पसंद के लड़के से ही शादी करेगी लेकिन उस दिन जब तुमने राजेश से शादी करने की बात कही , तब सब कुछ बदल गया । उनके अहंकार को ठेस पहुंची फिर उस रात क्या हुआ ? यह तो तुम जानती ही हो।

नैना मां को बस चुपचाप देखी जा रही थी , उसे याद आया कि

"दो साल पहले की उस रात वो राजेश के साथ जिंदगी बिताने के हसीन सपने देखते सो गई थी कि आधी रात को दरवाजे पर दस्तक हुई । नैना ने जब दरवाजा खोला तो उसकी मां रोते हुए उसके सामने खड़ी थी। उनके शरीर पर जगह-जगह चोटों के निशान थे , सर से भी हल्का सा खून बह रहा था ।

, माँ की यह हालत देख नैना बुरी तरह घबरा गई - मां ,क्या हुआ यह सब? कहते हुए उसने मां को गले से लगा लिया कि पीछे से पापा आ पहुंचे । वह बहुत गुस्से में थे। नैना को देखते ही वह बरस पड़े - देख नैना , बेटी है तू मेरी और मेरा स्वाभिमान है तू । इस तरह मेरी नाक समाज में नहीं कटा सकती ।,वह लड़का अलग जात का है , अगर तूने उससे शादी की बात भी की तो तेरा भी यही हाल करूंगा ।

नैना अपने आदर्श पिता के इस रूप को देख हैरान रह गई - यह इंसान भला कैसे उसका पिता हो सकता है जिसने अपनी पत्नी की यह हालत कर दी?

नैना गुस्से में बोली - आप मां के साथ ऐसा कैसे कर सकते हो पापा , देखिए तो इतनी बुरी तरह उन्हें चोट लगी है। जल्दी से हॉस्पिटल ले चलिए।

मिस्टर शर्मा - कोई कहीं नहीं जाएगा । जो कह रहा हूं , वह सुनो । राजेश को भूल जाओ और मेरी पसंद के लड़के से शादी करने को तैयार हो जाओ ।

नैना - बिल्कुल नहीं। अगर मैं शादी करूंगी तो बस राजेश से वरना किसी से नहीं फिर चाहे कुछ भी क्यों ना हो जाए।

, मिस्टर शर्मा - तो ठीक है ,।बैठी रहो कुंवारी जिंदगी भर लेकिन आज से राजेश का नाम भी नहीं लोगी ।

नैना - आप मेरी जिंदगी का फैसला करने का हक खो चुके हैं। देखिए तो कितनी बुरी तरह से मारा है आपने मां को? उनका सिर....

मिस्टर शर्मा - यह तो उसका रोज का काम है, कई सालों से मार खा रही है । मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे यह मरे या जिए। एक बोझ ही कम हो जाएगा।

नैना हैरानी से पापा को देखने लगी - आप ऐसे कैसे...

मिस्टर शर्मा - बस बस ज्यादा बहस करने की जरूरत नहीं है। चुपचाप जाओ कमरे में , राजेश का फोन आए तो उसे साफ मना कर देना रिश्ते का।

नैना - और अगर मना ना करूं तो ?

मिस्टर शर्मा अब नैना के इस विद्रोही रुको देख एक पल को शांत हो गए, फिर अगले ही पल कुछ सोच कर बोले - ठीक है, अगर तुमने राजेश से शादी की तो मैं तुम्हारी मां को तलाक दे दूंगा ।

,

यह सुन नैना और उसकी मां हैरानी से मिस्टर शर्मा को देखने लगे । कुछ देर वहां सन्नाटा पसरा रहा ।

नैना (आंसू पोंछते हुए) - ठीक है पापा , आप मां को इस घुटन भरी रिश्ते से आजाद कर सकते हैं। मैं और माँ अलग रहेंगे , मैं अपनी मां का ख्याल खुद रख सकती हूं । ऐसे पति के साथ रहने से तो अच्छा है मां अकेली ही रहे - कहते हुए नैना ने मां का हाथ पकड़ा और चलने को हुई कि माँ ने नैना के हाथ से अपना हाथ छुड़ा लिया - यह क्या कर रही हो तुम? पति है वह मेरे , अगर इस उम्र में उन्होंने मुझे तलाक दिया तो समाज में हमारी क्या इज्जत रह जाएगी ? सब जगह बदनामी होगी और इसी वजह से राजेश ने तुम्हें अपनाने से इंकार कर दिया तो....

नैना (खींझते हुए) - मां ऐसा कुछ भी नहीं होगा। राजेश मेरा साथ कभी नहीं छोड़ेगा फिर चाहे कुछ भी हो जाए और क्या यह समाज की रट लगा रखी है ? समाज तो हम लोगों से ही बनता है। आपकी शादी तो आपकी जाति में हीं हुई थी ना पर क्या आप खुश है ? नहीं ना ! पर राजेश मुझे बहुत खुश रखेगा और आपको भी वह अपनी मां की तरह पूरा सम्मान देगा , चलिए मेरे साथ पर रेखा जी टस से मस ना हुई और नैना के आगे अपने सुहाग की भीख मांगते रहेंगे लेकिन जब , नैना पीछे नहीं हटी तो उन्होंने कह दिया कि अगर तूने राजेश से शादी की तो मेरा मरा मुंह देखेगी ।

आखिरकार नैना को उनकी जिद के आगे हार मानी पड़ी , उस दिन के बाद से नैना के दिल में पिता के लिए खटास तो हो ही रही थी पर मां के लिए भी एक बहुत बड़ी नाराजगी पैदा हुई थी और वह अपने परिवार से हमेशा के लिए दूर हो गई।"

रेखा जी - नैना ..नैना ..? तुम सुन तो रही हो?

नैना एकदम से जैसे सपने से जागी और मां की ओर देखने लगी ।

रेखा जी - मैं तुम्हारे जैसी तरह स्ट्रांग नहीं हूं बेटा । इस समाज के डर से पहले मैंने अपने प्यार को ठुकरा दिया और 2 साल पहले अपनी बेटी की खुशियों को भी छीन लिया । मैं बहुत कमजोर हूं ,मैं क्या करूं - कुछ समझ नहीं आ रहा ।

आज तेरे साथ भी वही होने जा रहा है जो मेरे साथ हुआ। मैं भी समाज के खातिर अपने प्यार को छोड़कर दूसरे के घर चली गई और तू अपने प्यार को छोड़कर जा रही है अपने , परिवार, दोस्त और, प्यार की खुशी के खातिर। मुझे माफ कर दे , मैंने तेरी जिंदगी बर्बाद कर दी - रेखा जी अब जोरों से रोने लगी ।

नैना ने मां को गले से लगा लिया, 2 साल बाद आज मां बेटी जिंदगी और अपनों से मिले दर्द को याद कर रोने लगी । आज उन्हें एक दूसरे का सहारा मिल गया था इसलिए अब उनका दर्द थोड़ा हल्का हो गया ।

रेखा जी - क्या अब कुछ नहीं हो सकता नैना?

नैना - मतलब....

रेखा जी - वह राजेश....

नैना - माँ प्लीज, मैं जानती हूं कि आप पापा से बहुत प्यार करती है । राजेश का साथ शायद मेरी किस्मत में ही नहीं है , मैंने अपने दिल को समझा लिया है । मैं अपनी बाकी की जिंदगी खुशी-खुशी बिताना चाहती हूं हमारी खूबसूरत यादों के साथ । कम से कम यादों में कोई धोखा गुस्सा या नाराजगी तो नहीं है ।

, रेखा जी चुपचाप नैना को सुन रही थी -उनकी नन्ही सी बेटी कितनी समझदार हो गई थी।

नैना - माँ अब आप जाकर थोड़ा आराम कर ले , मैं भी कर लेती हूं सुबह जल्दी निकलना है ।

रेखा जी - कहां जाओगी तुम?

नैना फीकी मुस्कान के साथ - पता नहीं पर जहां भी जाऊंगी, आपको फोन करती रहूंगी ।

रेखा जी - क्या तुम हमारे साथ दिल्ली ...

नैना गुस्से में- बिल्कुल नहीं ,मैं उस घर में कदम तक नहीं रखूंगी ।अब आप जाइए और आराम करिए -कहते हुए नैना बेड पर सो गई । रेखा जी 2 मिनट तक वहीं खड़ी रही फिर कमरे से बाहर चली गई । नैना बिस्तर पर पड़ी पड़ी चुपचाप रोती रही, उसने कह तो दिया था कि राजेश के बिना जी लेगी लेकिन यह इतना आसान भी ना था उसके लिए राजेश को छोड़ कर जाना । इन 2 सालों में ही वह हर पल तड़पती थी तो फिर यह तो पूरी जिंदगी का सवाल था । उधर रेखा जी चुपचाप नैना के कमरे के बाहर खड़ी हो उसे रोते हुए देख रही थी , काफी देर बाद जब नैना रोते रोते सो गई तो वह भी , अपने कमरे में चली गई।

सुबह नैना और उसकी मां रेलवे स्टेशन के लिए निकल गए, वहां पहुंच दिल्ली वाली ट्रेन का इंतजार करने लगी ।

रेखा जी - नैना बेटा, एक बार फिर सोच लो ।

नैना -सोच लिया है ।

रेखा जी -मैं कुछ सोच रही हूं ।

नैना - क्या?

रेखा जी - क्यों ना हम अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करें, एक नए सिरे से ।

नैना - मतलब ? मैं समझी नही।

रेखा जी - बहुत हो गया । मैं खुल कर जीना चाहती हूं , आजाद की साँस लेना है ।

नैना हैरानी से माँ को देख रही थी।

, रेखा जी - ऐसे क्या देख रही हो? तुममे इतनी हिम्मत है तो फिर मैं तो तुम्हारी मां हूं - सोचों मुझमें कितनी हिम्मत होगी।

बस बहुत हो गया , अब ना तो मैं सहन करूंगी और ना तुझे करने दूंगी ।

नैना - क्या मतलब ?

रेखा जी - आज हम दोनों की जिंदगी की नई शुरुआत है बेटा। मैं अपने पति के पास जा रही हूं , हाँ मैं अपने पति से प्यार करती हूं लेकिन जब प्यार पैर की जंजीर बन जाए तो उसे तोड़ देना ही बेहतर है और तुम जिसे सच्ची मोहब्बत करती हो , उससे इजहार करना भी जरूरी है इसलिए तुम जाओ और आज उसको सारी सच्चाई बता दो कि तुमने उसे धोखा अपने परिवार के लिए दिया। आगे का फैसला उसका होगा और मैं जानती हूं कि वह सब कुछ भुला तुम्हें आज नहीं तो कल अपना ही लेगा ।

नैना उदास हो बोली - नहीं मां , अब बहुत देर हो चुकी है। वह मुझे कभी नहीं माफ करेगा।

रेखा जी - यह फैसला लेने का हक उसका है , तुम्हारा नहीं ।, तुम बस जाओ।

नैना - मां पर....

रेखा जी - अगर तुमने राजेश से अपने दिल की बात नहीं की तो सोच लेना कि तुम्हारी मां मर गई।

नैना गुस्से में - आप क्या कह रही है मां, यह कोई गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीं कि जब चाहे....

रेखा जी - जानती हूं तभी कह रही हूं कि राजेश कभी रिचा को नहीं अपना पाएगा। तुम तीनों की जिंदगी खराब हो , उससे अच्छा है यह है कि अभी थोड़ा दुख हो जाए ।

आज मैंने कई सालों बाद गलत के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत जुटाई है , समाज से लड़ने का फैसला किया है। प्लीज पीछे मत हटो , जाओ राजेश से अपनी दिल की बात कह दो और उसे बता देना कि तुमने उसे धोखा मेरी वजह से दिया था ।

नैना - नहीं मां , मैं नहीं चाहती कि आपको किसी के सामने अपनी नजरें नीची करनी पड़े । राजेश को मुझे अपनाना है तो यूं ही अपनाना होगा।

,

दोनों माँ बेटी अपनी जिंदगी के सफर पर निकल

चली । एक और मां अपने पति से अपने हिस्से का मान सम्मान लेने चली तो दूसरी ओर बेटी अपना प्यार ।
 
नैना जब ऑफिस पहुँची तो पता चला कि राजेश ऑफिस नहीं आया, अब वह राजेश के ऑफिस आने का इंतजार करने लगी । आज वह बहुत खुश थी कि एक बार फिर उसका राजेश के साथ जिंदगी गुजारने का सपना पूरा होगा ।

जवाब दो , कुछ पूछ रहा हूं मैं - राजेश गुस्से से चिल्ला कर बोला तो नैना होश में आई और राजेश को प्यार से देखने लगी । वह बहुत गुस्से में था और उसका हक भी था ।

राजेश नैना को मुस्कुराता देख हैरान था कि इसके दिमाग में चल क्या रहा है ? मेरी बात का जवाब क्यों नहीं दे रही ?

वह लगभग चिल्लाते हुए बोला - तुम होश में तो हो ? मैं यहां तुमसे कुछ पूछ रहा हूं और तुम चुपचाप खड़े मुस्कुरा रही हो पागल हो गई हो यह भी तुम्हारा कोई नया धोखा है। मैं अब तुम्हारे किसी भी दूसरे...

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नैना - राजेश मैने यह बात कल रात ही कह दी थी कि यह मेरा आखिरी धोखा है।

राजेश - तो फिर तुम गई क्यों आई ? अब तुम्हारे पास रुकने की कोई वजह नहीं है । तुम तो आजाद हो, जहां चाहे जा सकती हो । कल रात तुमने जो किया उसके बाद मैं तुम्हारी शक्ल भी देखना नहीं चाहता और ना ही तुम्हें यहां आने की जरूरत है । तुम जा सकती हो ।

नैना (मुस्कुराते हुए) - जरूरत है, तभी तो आई हूं ।

राजेश - साफ-साफ कहो जो कहना है वरना अभी यहां से निकल .......

नैना -आई लव यू ।

राजेश ने जैसे ही सुना तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई, उसे समझ नहीं आया कि क्या उसने जो सुना, नैना ने वही कहा है कि उसकी कोई गलतफहमी है ।

राजेश क्य... क्या कहा तुमने ?

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नैना - वही जो तुमने सुना। प्यार करती हूं तुमसे , शादी करोगे मुझसे ??

राजेश अब हैरान सा खड़ा रह, गया,
 
यूं खामोश देख नैना बोली - चुप क्यों हो राजेश? कुछ तो बोलो।

राजेश के चेहरे पर मुस्कान तैर गई और वह बोला - क्या बोलूं ? तुमने तो मेरी बोलती ही बंद कर दी ।

नैना आगे बढ़कर राजेश के गले लग गई , वह आज बहुत खुश थी कि फाइनली 2 साल की तकलीफों के बाद उसे उसका प्यार मिल ही गया।

राजेश - सच में नैना तुमने तो आज एक बार फिर मुझे चौंका दिया , कैसे कर लेती हो यह सब तुम ? कहां से लाती हो इतनी हिम्मत? डर नहीं लगता?

राजेश की बात सुन अब नैना ने उसके चेहरे की ओर देखा तो उसके चेहरे पर कोई खुशी नही थी बल्कि वह तो गुस्से में नैना को देख रहा था।

नैना यह देख अब दो कदम पीछे हट गई - राजेश तुम खुश नहीं हो या फिर मैंने वापस आने में देर कर दी?

राजेश - देर का तो पता नहीं पर हां , गलती मैंने कर दी जो तुम्हारे जैसी लड़की से प्यार किया । पहले खुद ही चीख चीख , कर कहा कि मुझसे प्यार नहीं और अब अचानक से तुम्हें मुझसे प्यार हो गया ? यह सुनकर तुम्हें कुछ अजीब नहीं लगता? मुझे कैसे भरोसा होगा तुम्हें?

नैना - मैं सच में शुरू से तुमसे प्यार करती हूं राज । पहले मैं मजबूर थी इसलिए झूठ बोला तुमसे ।

राजेश - अच्छा ? तो बताओ कैसी मजबूरी थी ?

नैना - वह मैं तुम्हें नहीं बता सकती।

राजेश - ओह तो यह बात है , फिर साफ-साफ क्यों नहीं कहती कि तुम मुझे एक बार फिर धोखा दे रही हो ।

नैना - राजेश मेरी बात को समझो पहले मैं मजबूर थी पर मैं समझ सकती हूं कि तुम अपनी जगह बिल्कुल सही हो । तुम्हें हक है पूरा मुझसे नाराज होने का पर प्लीज मेरा यकीन करो कि मैं तुम्हें अब कोई धोखा नहीं दे रही ।

राजेश (गुस्से से चिल्लाते हुए) - बस नैना। तुम सिर्फ धोखा देना जानती हो और तुमने आज तक वही तो किया है । तुम चाहे कितनी भी कोशिश कर लो , अब मैं तुम्हें अपनी जिंदगी , में वापस नहीं आने दूंगा । तुम्हारे लिए अब मेरी जिंदगी में कोई जगह नहीं है । नफरत होती है मुझे अब तुमसे , किस मिट्टी की बनी हो तुम ?

यह जानने के बाद भी कि मैं तुम्हारा असली चेहरा जान चुका हूं ,फिर आ गई धोखा देने ? आई एम सॉरी पर अब और बेवकूफ नहीं बनूंगा।

नैना - राज मैं सच में तुमसे प्यार करती हूं । यह सिर्फ तुम्हारी नाराजगी है , नफरत नहीं । ठीक है , मैं इंतजार करूंगी तुम्हारा गुस्सा शांत होने का ।

राजेश (हंसते हुए ) - ठीक है, करती रहो पर अब मुझे और मेरी कंपनी को तुम्हारी कोई जरूरत नहीं है । अब तुम जा सकती हो ।

नैना अब हैरानी से राजेश को देखने लगी, राजेश के चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।

नैना - और अगर मैं ना जाऊं तो ?

राजेश - जाना तो पड़ेगा मिस शर्मा । यह मेरा ऑफिस है, आपका घर नहीं कि छोड़कर नहीं जाएंगी।

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नैना - शायद तुम बांड वाली बात...

राजेश - कुछ नहीं भूला हूं मैं , 1 महीने का नोटिस और 3 महीने की सैलरी । सब मंजूर है मुझे , एक महीना और फिर तुम इस ऑफिस से बाहर ।

नैना (मुस्कराते हुए ) - मेरे लिए एक महीना काफी है ।

राजेश (चौक कर) - क्या मतलब?

नैना - तुम्हें वापस पाने के लिए एक महीना काफी है।

राजेश - सोचना भी मत। रिचा मेरी मंगेतर है और तुम्हारी दोस्त भी । कम से कम उसका तो लिहाज करो और मैं तुम्हें कभी भी नहीं मिलूंगा ।

नैना (मुस्कुराते हुए) - देखते हैं कि तुम्हारी शादी किससे होती है ? जानती हूं कि रिचा मेरी दोस्त है इसलिए उसे ऐसे लड़के से शादी करने से बचा रही हूं जो उससे प्यार नहीं करता और ना ही करेगा क्योंकि वह तो सिर्फ मुझसे प्यार करता है ।

राजेश (खीझ कर) - देखो तुम....

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कि तभी नैना और राजेश का ध्यान केबिन के दरवाजे पर खड़ी रिचा की ओर गया। वह वहां खड़ी चुपचाप दोनों की बात को सुन रही थी । उसे देखकर राजेश और नैना उसकी ओर बढ़े ।

राजेश - रिचा ऐसा कुछ भी नहीं है । मैं इस लड़की से कोई प्यार नहीं करता ,मैं सिर्फ तुमसे शादी करूंगा और वह भी बहुत जल्द।

नैना (आत्मविश्वास के साथ ) - रिचा ,देखो मैं समझ सकती हूं कि तुम्हें फिलहाल बहुत बुरा लग रहा होगा लेकिन सच यही है कि राजेश तुम्हें कभी खुश नहीं रख पाएगा । यह सिर्फ और सिर्फ मुझसे प्यार करता है।

राजेश (चिल्लाकर) - बस करो नैना। मैं नहीं करता तुमसे प्यार । मैं किसी से भी शादी कर लूंगा पर तुम जैसी धोखेबाज लड़की से नहीं ।

नैना ने राजेश की बात को अनसुना कर दिया और रिचा के कंधे पर हाथ रखते हुए बोली - यह बात राजेश अच्छे से जानता है और तुम भी जान लो कि राजेश सिर्फ मेरा है और बड़ी मुश्किलों के बाद आज मैं यह बात खुलकर कह पा रही , हूं।

तुम अपने लिए कोई और लडका ढूंढ लो या कहो तो मैं ढूंढूं तुम्हारे लिए पर प्लीज राजेश को तो भूल ही जाओ - कहते हुए नैना ने अब एक बार राजेश को देखा तो उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई थी और वह बस हैरानी से नैना को देख रहा था।

नैना में आज गजब का आत्मविश्वास था , वह केबिन से बाहर निकल गई और अब रिचा और राजेश एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे ।

नैना अब अपनी कुर्सी पर बैठ सोच रही थी कि कहीं उसे राजेश के पास वापस लौटने में सच में देर तो नहीं हो गई? उसे राजेश की नाराजगी से डर लगने लगा कि कहीं वह नहीं माना तो? और कहीं वह ज्यादा तो नहीं बोल आई ? इतने में उसे किसी की आहट सुनाई दी , उसने देखा कि सामने सारा खड़ी है ।

सारा - यार तू तो छुपे रुस्तम निकली।

नैना (चौकते हुए ) - मतलब मैं समझी नहीं कुछ?

, सारा (मुंह बनाते हुए ) - अब इतनी भी नादान मत बन। मैं तो पहले से ही जानती थी कि कुछ गडबड है क्योंकि जिस तरह से तुम और राजेश सर एक दूसरे को देखते थे, वैसे तो प्यार करने वाले ही देखते हैं पर आज पता चल गया।

नैना (हैरानी से ) - तुझे कैसे पता?

सारा - धीरे बोल । अभी मैं सर के केबिन में गई थी तब मैंने उन्हें और रिचा को बात करते सुना था ।

नैना (उत्सुकता से ) - क्या सुना ?

सारा - वह राजेश सर रिचा से कह रहे थे कि वह टेंशन ना ले। सब सही होगा और उन्हें तुमसे परेशान होने की जरूरत नहीं है ।वह है उसके साथ।

नैना यह सुन उदास हो गई ।

सारा - नैना , प्लीज यार मुझे भी बताना कि क्या हुआ था तुम्हारे साथ?

तब नैना ने उसे शुरू से लेकर अंत तक की सारी कहानी सुनाई।

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सारा - ओह ! तो यह बात है फिर तो यार राजेश सर तुझसे बहुत नाराज होंगे ना अभी और वह भी अपनी जगह सही है।

नैना - जानती हूं पर मैं भी मजबूर थी। कहीं ऐसा ना हो कि मैं राजेश को हमेशा के लिए....

ऐसा कभी नहीं होगा , मैं हूं ना यार (किसी की आवाज आई) - यह सुनते ही नैना और सारा ने जब आवाज की ओर देखा तो सामने मुस्कुराता हुआ साहिल खडा था ।

नैना (गुस्से में) - तुम हमारी बातें सुन रहे थे साहिल ?

साहिल - सॉरी सॉरी पर क्या करता ? आज मेरा पहला दिन है ऑफिस का और पहले ही दिन मेरे दोनों दोस्त नाराज है तो मेरा बीच में आना तो बनता है ना।

नैना यह सुन अब शांत हो गई।

सारा - अब क्या होगा नैना? राजेश सर तो बहुत गुस्से में है अगर उन्होंने सच में रिचा से .......

साहिल - ऐसा कुछ नहीं होगा सारा , राजेश सिर्फ नैना से , प्यार करता है पर उसने नैना से हर बार चोट खाई है तो वह बस नाराज है उससे ।

नैना को उसकी चोट पर मरहम लगाना है , उसे भरोसा दिलाना होगा कि यह वही नैना है जिससे कभी राजेश ने प्यार किया था । जब उसके जख्म ठीक हो जाएंगे तो गुस्से के पीछे छुपा हुआ पुराना राजेश खुद ब खुद बाहर निकल आएगा।

नैना - हम्म, तुम बिलकुल ठीक कर रही हो लेकिन रिचा था क्याेंकि वह हर बार गेहूं में घुन की तरह पिस जाती है और इस बार भी यही होगा। मुझे उसकी बहुत फिक्र हो रही है,मै सही तो कर रही हूँ ना?

सारा - ऐसा कुछ नहीं है नैना। रिचा को जिंदगी भर पछताना पड़े, उससे अच्छा यही है कि अभी कुछ दिनों की तकलीफ उठा ले । राजेश सर सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं , वह रिचा को कभी खुश नहीं रख पाएंगे । राजेश सर गुस्से में अपनी जिद पर अड़ गए हैं जिससे उन पर, तुम्हारा और रिचा तीनों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ेगा । तुम बस हार मत मानना।

नैना - बिल्कुल नहीं । मैं राजेश को गुस्से में ऐसी कोई गलती नहीं करने दूंगी जिसे बाद में सिर्फ दर्द और पछतावा मिले।

, साहिल और सारा मुस्कुराते हुए - और इसमें अब हम तुम्हारे साथ है नैना।

अभी नैना, साहिल और सारा आपस में बात कर ही रहे थे कि रिचा वहाँ आई - नैना मुझे तुमसे कुछ बात करनी है , चलो मेरे साथ ।

नैना और रिचा दोनों अब एक साथ बिल्डिंग की टेरेस पर पहुंचे ।

रिचा (गुस्से से ) - नैना तुम ऐसी तो नहीं थी ? तुम जानती हो कि राजेश मेरा मंगेतर है, उसके बावजूद भी तुम उसके पीछे पड़ रही हो?

नैना - रिचा तुम जानती हो कि राजेश मुझसे प्यार करता है और मैं भी उससे।

रिचा - ओह, सच में ? पर तुम तो 2 साल पहले ही उसे और उसके प्यार को बदनाम कर चुकी हो तो फिर अब क्यों वापस आई हो?

नैना - रिचा प्लीज, समझो मेरी बात को। वह मेरी मजबूरी थी पर अब ऐसा कुछ भी नहीं है । मैं राजेश के साथ अपनी , जिंदगी की नई शुरुआत करना चाहती हूं ।

रिचा - तुम मेरे और राजेश के बीच में आ रही हो ।

नैना - बीच में मैं नहीं ,तुम आ रही हो रिचा । हम दोनों ही एक दूसरे से प्यार करते हैं और अब मैं राजेश को फिर से किसी भी कीमत पर नहीं खोना चाहती। तुम कभी खुश नहीं रह पाओगी राजेश के साथ फिर तुम भी तो राज से प्यार नहीं करती , वह बस एक दोस्त है तुम्हारा ।

रिचा - नैना, सच तो यह है कि अब मैं भी राजेश से प्यार करती हूं , मंगेतर है वह मेरा तो इसमें गलत ही क्या है ?राजेश भी मुझसे शादी करना चाहता है।

नैना अब हैरानी से रिचा को देखने लगी - क्या कहा तुमने? तुम राजेश से....तुम ऐसा कैसे कर सकती हो रिचा, तुम झूठ बोल रही हो ना?

रिचा अब रोने लगी - जब हम दोनों का रिश्ता तय हुआ था तो हम दोनों की ही दिल टूटे हुए थे और फिर राजेश का सहारा मिला । अब मैं उसे नहीं खो सकती, तुम प्लीज पीछे हट जाओ वरना मैं राजेश के बिना नहीं जी पाऊंगी - कहते हुए रिचा टैरेस से नीचे चली गई।

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नैना यह बात सुन दंग रह गई थी - हे भगवान , इतनी मुश्किल से तो तुमने सब कुछ ठीक किया था, अब यह मुसीबत और कहां से आ गई ? क्या करूं इसका? दो साल बाद जब मैं अपने प्यार के करीब हूं तो अब दोस्ती आडे आ रही है ।दोस्ती को चुनूँ या प्यार को ? अब नैना के सामने फिर एक नई उलझन खड़ी हो गई ।

वहीं दूसरी ओर राजेश ने देखा कि रिचा कहीं दिखाई नहीं दे रही है तो वह परेशान हो उसे ढूंढने लगा कि तभी उसे रिचा ऑफिस से बाहर जाती हुई दिखाई दी । राजेश ने उसे आवाज भी दी पर रिचा ने उसकी आवाज नहीं सुनी और आगे बढ़ चली ।

राजेश उसके पीछे पीछे गया और जब तक वो रिचा के पास पहुंच पाता , रिचा बिल्डिंग से निकल गाड़ी में बैठकर चली गई । राजेश परेशान सा हो गया कि इसे क्या हुआ है अब?

वह वापस ऑफिस आने के लिए जैसे ही बिल्डिंग में अंदर आया और लिफ्ट की तरफ बढ़ा कि उसे कुछ हल्की सी आवाज सुनाई दी । राजेश ने गौर किया तो यह आवाज उसकी इन्वेंटरी से ही आ रही थी । कोई धीमी सी आवाज में फोन पर बात कर रहा था। राजेश इन्वेंटरी की ओर बढ़ चला, , वहां पहुंच राजेश ने जैसे ही इन्वेंटरी का दरवाजा खोलने के लिए हाथ उठाया तो अंदर से आती हुई आवाज उसके कानों में पड़ी ।

आवाज सुनते ही राजेश हैरान रह गया, अब एक-एक बात उसके कानों में साफ-साफ सुनाई दे रही थी । वह वहां खड़ा चुपचाप सारी बातें सुनता रहा ।

काफी देर बाद उदास चेहरे के साथ वह ऑफिस पहुंचा और सामने देखा तो दूर ही सही पर वो और रिचा एक दूसरे के सामने थे । दोनों के चेहरे पर अजीब सी मायूसी थी।

नैना ने राजेश को ऐसे देखा कि जैसे पूछ रही हो कि तुम्हारा फैसला क्या है - रिचा या मैं ?

राजेश बस चुपचाप उसे देखे जा रहा था , जैसे किसी गहरी सोच में हो । नैना उसकी खामोशी को देख आगे बढ उसक सामने आ खड़ी हुई - राजेश, प्लीज ऐसा नहीं करो । तुम अभी गुस्से में हो । भूल जाओ सारी बातें, कहीं ऐसा ना हो कि बाद में बहुत देर हो जाए। मैं जानती हूं कि तुम रिचा से प्यार नहीं करते लेकिन अगर वह तुमसे प्यार कर बैठी तो या कर चुकी हो तो ? हम कभी एक नहीं हो पाएंगे । सच बता दो उसे और झूठे सपने मत दिखाओ , यह हम दोनों के बीच का , मामला है तो इसे हम आपस में बैठकर सुलझा लेंगे ।

राजेश अब गुस्से में बोला - अच्छा? क्या क्या सुलझा लोगी? हर बार तो तुमने ही धोखा दिया है, हर बार नऊ उलझन ही तुमने पैदा की हैं और इस बार भी जरूर तुम्हारे दिमाग में कुछ ना कुछ चल रहा है । अब तुम ही बताओ कि अगर तुम मेरी जगह होती तो क्या करती ? करती मुझको भरोसा ?

नैना - मैं कितनी बार कहूं तुमसे मैंने जो भी कुछ किया, उसके पीछे मेरी मजबूरी थी पर मेरा प्यार सिर्फ तुम ही रहे हो और आगे भी रहोगे । क्या इतना भी भरोसा नहीं है अपने प्यार पर? गुस्से में तुम्हें कुछ नहीं सूझ रहा ।

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - तुम अब मेरा प्यार नहीं रही नैना । मैं अब सच में तुमसे प्यार नहीं करता । खत्म हो गए वह सारे एहसास जो कभी मुझे तुम्हारे लिए महसूस होते थे ।

नैना - अब तुम ही बताओ , मैं क्या करूं कि तुम्हें यकीन हो जाए कि मैं सच कह रही हूं और कोई धोखा नहीं दे रही । तुम जो कहोगे मैं वह करूंगी ।

राजेश अब गंभीर हो गया - मुझे अब तुमसे कुछ भी उम्मीद नहीं है - कह कर वो जैसे ही नैना से दूर जाने लगा कि नैना ने , उसका हाथ थाम लिया । राजेश मेरी बात तो..

इतने में विशाल वहां आ गया - नैना , मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है ।

नैना ने विशाल को देख राजेश का हाथ छोड़ दिया, राजेश अब कुछ ही दूरी पर जाकर खड़ा हो गया।

नैना की नजरें अभी भी राजेश पर ही थी। वह उसे अब अपनी नजरों से एक पल को भी ओझल नहीं होने देना चाहती थी । राजेश भी चुपचाप खड़ा हुआ नैना को ही देख रहा था।

विशाल - नैना मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं।

नैना (अनमने मन से ) - हां मैं सुन रही हूं ।

विशाल - नैना मैंने तुमसे झूठ बोला था।

नैना अब विशाल को देखने लगी - मतलब? मैं समझी नहीं।

विशाल - नैना मैंने जिस लड़की के बारे में तुमसे कहा था कि मैं उससे प्यार करता हूं, दरअसल वह झूठी कहानी थी । मैं , जिस लड़की से प्यार करता हूं, इसी ऑफिस में है ।

नैना अब हैरानी से विशाल को देखने लगी - पर आपने मुझसे झूठ क्यों बोला था ।

विशाल - नैना आई लव यू। पहले दिन से ही जब से तुम्हें देखा है , तभी से मैं तुमसे प्यार कर बैठा पर कभी हिम्मत नहीं कर पाया । आज हिम्मत की है । बोलो क्या जवाब है तुम्हारा?

नैना अब हैरानी से राजेश को देखने लगी । राजेश कुछ ही दूरी पर खड़ा उनकी सारी बात सुन रहा था । विशाल की बात सुन उसे बहुत बुर लगा पर चुपचाप खड़ा रहा।

नैना समझ रही थी कि राजेश को इस वक्त बहुत बुरा लग रहा होगा क्योंकि उसका ही दोस्त उसके सामने उसकी ही प्यार को प्रपोज कर रहा था। नैना की आँखें नम हो गई, राजेश अपने गुस्से को दबा चुपचाप नैना को देखे जा रहा था जैसे कि विशाल के साथ साथ वह भी नैना के जवाब का इंतजार कर रहा हो।

नैना ने अब एक गहरी सांस ली और विशाल से बोली - माफ कीजिएगा विशाल , मैंने आपको कभी एक अच्छे दोस्त से , बढ़कर नहीं देखा। मैं किसी और से बेइंतहा प्यार करती हूं (कहते हुए राजेश को देखने लगी) और हमेशा करती रहूंगी ।

आप किसी और को अपना लाइफ पार्टनर चुन लें, आई एम सॉरी - कहते हुए नैना वहां से निकल गई ।

नैना अब जैसे ही थोड़ा आगे बढ़ी तो सामने साहिल चुपचाप खड़ा हुआ उसे देख रहा था । उसने नैना और विशाल की सारी बातें सुन ली थी , नैना को देखते ही उसने अपनी नजरें नीचे कर ली ।

नैना भी वहां से बिना कुछ कहे निकल गई। उस वक्त वहाँ बस राजेश, विशाल और साहिल खड़े हुए थे, वह तीनों खामोशी के साथ बस एक दूसरे के चेहरे को देख रहे थे जैसे एक दूसरे के दिमाग को पढ़ने की कोशिश कर रहे हो क्योंकि वो जानते थे कि कुछ तो चल रहा था उन तीनों के दिमाग, में.....।,
 
कितना कुछ हो गया था उसके साथ और अब यह विशाल भी।

पता नहीं क्या हो रहा है यह सब उसके साथ - नैना अभी इसी सोच में डूबी हुई थी कि पीछे से साहिल भागता हुआ आया।

नैना - साहिल क्या हुआ ? ऐसे क्यों भाग रहे हो?

साहिल ( हाँफते हुए ) - अरे कब से आवाज दे रहा हूँ पर तुम सुनती ही कहां हो? पता नहीं किन ख्यालों में डूबी हुई हो।

नैना - पता नहीं साहिल आज इतना कुछ हो गया कि दिमाग काम नहीं कर रहा मेरा। जितना संभालने की कोशिश करती हूं , चीजें उतनी ही बिगड़ जाती है । अब विशाल को ही देख लो - वह हमेशा से मेरे साथ अच्छे तरीके से रहे हैं , राजेश जब गुस्से में मुझे परेशान करता तो भी वह मुझे बचाने की कोशिश करते पर मैंने यह नहीं सोचा था कि उनके दिमाग में ऐसी भी कोई बात हो सकती है।

साहिल अब गंभीर होते हुए बोला - अच्छा नैना , एक बात बताओ कि कभी तो तुम्हें विशाल की तरफ से ऐसा कुछ महसूस हुआ है कि वह तुम्हें पसंद करता हैं क्योंकि लड़कियों को तो ऐसी बातें जल्दी फील हो जाती है ना।

नैना - हां यह सच है पर मुझे ऐसा कभी भी फील नहीं हुआ , कि उनके दिमाग में ऐसा भी कुछ है । पता नहीं आज अचानक उन्हें क्या हो गया और सबसे बड़ी बात यह कि वहाँ राजेश भी था । इतना बुरा लगा राजेश को विशाल की बात सुनकर कि वह उदास हो गया।

साहिल नैना की बातों को सुन गहरी सोच में डूब गया । नैना ने उसे इस तरह देखा तो खीझते हुए बोली - अब तुम्हें क्या हो गया? कहां खो गए ?

साहिल( मुस्कुराते हुए) - नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है । वह तो मैं बस कुछ सोच रहा था ।

नैना - क्या सोच रहे थे , कोई परेशानी है ?

साहिल - वह मैं..... चलो छोड़ो ,कुछ नहीं कहते हुएअब वापस ऑफिस की ओर चल पड़ा ।

नैना ने उसे रूकने को आवाज़ दी - साहिल बात क्या है , कुछ बताओ भी?

साहिल रुक गया और बोला - नहीं , शायद तुम्हें बुरा लगे। रहने दो ।

नैना (झल्लाते हुए ) - अब बताओ भी ।

, साहिल - ठीक है तो सुनो । तुम कह रही हो कि विशाल की तरफ से तुम्हें कभी कुछ ऐसा नहीं लगा लेकिन आज उसने ऐसे अचानक से तुम्हें तो प्रपोज कर दिया । यह सब तुम्हें कुछ अजीब सा नहीं लग रहा ?

नैना सोचते हुए बोली - लग तो रहा है पर कुछ समझ नहीं आ रहा।

साहिल - देखो नैना , हर परेशानी को हल करने के कई तरीके होते हैं । कुछ दिल से सोचते हैं तो कुछ दिमाग से ।कहीं ऐसा तो नहीं कि विशाल के प्रपोजल के पीछे किसी का दिमाग हो ?

नैना - साफ साफ कहो,कहना क्या चाहते हो ?

साहिल - तुम्हारा यही प्रॉब्लम है कि तुम दिल से सोचती हो देखो आज से पहले तुम्हें कभी नहीं लगा कि विशाल के दिल में ऐसा कुछ है लेकिन आज जब तुमने राजेश को अपने दिल की बात कही तो शाम होते होते अचानक विशाल भी अपने दिल का हाल कहने तुम्हारे सामने आ पहुंचा । कुछ तो अजीब है यहाँ।

नैना चुपचाप साहिल को देखे जा रही थी ।

साहिल - नैना मुझे ऐसा लगता है कि यह गड़बड़ तुम्हारे राज , की है क्योंकि तुम उसके और रिचा के बीच आ गई हो आज और खुलकर कह भी दिया है कि तुम शादी करोगी तो राजेश से तो शायद तुम्हारा ध्यान खुद से भटकाने के लिए राजेश ने यह किया हो । तुम्हे विशाल के साथ कर दे जिससे उसकी शादी में कोई परेशानी ना हो ।

नैना गुस्से में बोली - मुझे लगता है कि तुम कुछ ज्यादा ही सोच रहे हो , राजेश ऐसा नहीं कर सकता । मैं जानती हूं उसे, वह भले ही मुझसे नाराज हो पर वह मेरी तो क्या, किसी की भी फीलिंग्स के साथ नहीं खेल सकता । तुम ऐसा सोचा भी कैसे सकते हो?

साहिल - अरे यार मैं बस अंदाजा लगा रहा हूं कि शायद ऐसा हुआ हो । एक बार सोचो तो सही ।

नैना - नहीं , बिल्कुल नहीं फिर विशाल को क्या मिलेगा यह सब करके ?

साहिल - क्योंकि वह अभी सिंगल है। तुम इंटेलीजेंट,स्मार्ट हो और उसकी दोस्त भी ।अगर तुम हां करती हो तो उसे फायदा ही होगा और अगर ना करती हो तो भी वह अपने दोस्त की मदद तो कर ही देगा तुम्हारा ध्यान भटका कर । मेरे हिसाब से यह पूरा प्लान राजेश का है तुम्हें खुद से दूर रखने का और विशाल ने बस सच्चा दोस्त होने के नाते उसका साथ दिया है।, राजेश ही है जो तुम्हारा माइंड डाइवर्ट करना चाहता है।

नैना अब यह सुनकर हंसने लगी और बोली - साहिल तुम सच में पागल हो । अरे राजेश प्यार करता है मुझे और भला वह खुद अपने दोस्त को मुझे प्रपोज करने कैसे भेजेगा ? तुम भी ना कहां से कहां पहुंच गए ?

साहिल (मुस्कुराते हुए ) - अगर ऐसी ही बात है नैना तो ठीक है । तुम राजेश से खुद ही क्यों नहीं पूछ लेती कि यह बात सच है या झूठ क्योंकि मुझे कुछ तो गड़बड़ लग रही है फिर शक को दूर करने में बुराई क्या है ?

नैना शांत होकर बोली - ठीक है , तुम्हारी तसल्ली के लिए पूछ लूंगी उससे । खुश?

साहिल (मुस्कुराते हुए) - हां ।

नैना (उदास हो) - परेशानी यह है कि मैं उससे पूछूंगी कब क्योंकि वह तो मुझसे बात करने को भी तैयार नहीं है ।

साहिल - राजेश भी अभी बाहर आता ही होगा , तब बात कर लेना उससे ।

नैना -हम्म , मैं बात करती हूं उससे पर सिर्फ तुम्हारा शक दूर , करने के लिए वरना मैं जानती हूं , राजेश ऐसा कुछ नहीं कर सकता - कहते हुए वह पार्किंग एरिया की ओर चली गई।

उसके जाने के बाद गंभीर चेहरे के साथ खड़ा साहिल अब मुस्कुराने लगा और गुनगुनाता हुआ चला गया।

थोड़ी ही देर बाद जब अंधेरा होने लगा तो राजेश बिल्डिंग से निकला और पार्किंग एरिया की ओर चला। वहां पहुंचकर जैसे ही उसने अपनी गाड़ी का दरवाजा खोला और बैठा कि नैना वहाँ आ गई और उसके बगल वाली सीट का दरवाजा खोल गाड़ी में बैठ गई ।

राजेश यह देख चौंक गया - यहां क्या कर रही हो तुम? अभी तक घर नहीं गई ?

नैना (मुस्कुराते हुए) - नहीं , दरअसल मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी । आज मैं तुम्हारे साथ ही.....

राजेश - क्यों? सारी टैक्सी खराब हो गई है ? और मैं तुम्हारा नौकर नही हूं कि जो तुम कहोगी, मै करूंगा। उतरो मेरी गाड़ी से ।

नैना अब हंसने लगी ।

राजेश नैना को इस कदर हंसते देख हैरान हो गया कि वह तो , इसे डांट रहा है लेकिन यह हंस रही है - क्या हुआ , कोई चुटकुला सुनाया मैंने?

नैना - और नहीं तो क्या । जब मेरे राज के पास गाड़ी है तो मैं भला टैक्सी से क्यों जाऊंगी और सॉरी मैं तुम्हारे जैसा स्मार्ट, इंटेलीजेंट और हाई-फाई नौकर अफोर्ड नहीं कर सकती।

राजेश - तुम होश में तो हो ना? उतरो मेरी गाड़ी से ।

नैना (मुस्कुराते हुए) -होश में तो अब आई हूं मैं और एक बात बताओ कि मैं तुम तो गुस्सा क्यों करूंगी ? अब मुझे तुम पर गुस्सा नहीं प्यार आता है और इन सब चीजों के मामले में तो तुम ही मेरे गुरु हो । भूल गए कॉलेज के दिनों को ?

यह सुनते ही राजेश झेंपकर रह गया, उसे यूँ देख नैना जोर से हंसने लगी ।

राजेश - बस बहुत हो गया, मुझे घर जाना है । जल्दी निकलो गाड़ी से ।

नैना - मैं नहीं जाऊंगी और यह क्या तेरी मेरी लगा रखा है? जब तुम ही मेरे हो तो तुम्हारी हर चीज भी तो मेरी हुई ना?

राजेश - अच्छा और तुमसे किसने कहा कि मैं तुम्हारा हूं ?

, इस वहम को अपने दिमाग से निकाल दो , मुझ पर तुम्हारा कोई हक नहीं है ।

नैना - अच्छा ठीक है , बहस बाद में करेंगे । पहले चलो तो, मुझे बहुत भूख लग रही है ।

राजेश - नहीं , मैं कहीं नहीं जा रहा हूं । जब तक तुम गाड़ी में बैठी रहोगी , मैं इसे नहीं चलाऊंगा - कहते हुए वह आराम से पीछे सीट पर टिक कर बैठ गया ।

नैना - ठीक है , मैं भी गाड़ी से नहीं जाऊंगी - नैना आराम से अपनी सीट पर बैठ गई।

दोनों ही अब जिद पर अड गए , कोई हार मानने को तैयार नहीं था । धीरे-धीरे पार्किंग एरिया खाली होने लगा, राजेश ने नैना को देखा तो वह पेट पकड़ कर बैठी हुई थी। उसे बहुत तेज भूख लग रही थी ।

राजेश - तुम बहुत जिद्दी हो , मुझे घर जाना है ।

नैना मासूमियत के साथ बोली - मुझे हमारे घर जाना है और वही खाना खाऊंगी वरना नहीं ।

राजेश अब सवालिया नजरों से नैना की ओर देखने लगा - हमारा घर ? अब यह कहां है ?

,

नैना (हंसते हुए ) - बुद्धू कहीं के । अरे शादी के बाद तुम्हारा घर भी तो मेरा ही घर हो जाएगा तो हुआ ना हमारा घर ।

राजेश हैरानी से नैना को देख अब गाड़ी चलाने लगा।

नैना अब सोच में पड़ी हुई थी कि राजेश से विशाल के बारे में बात करें या ना करें फिर उसने तय किया कि वह इस मामले में राज से कोई बात नहीं करेगी क्योंकि वह जानती है कि उसका राजेश ऐसा कुछ भी नहीं कर सकता जिससे उसे तकलीफ हो ।

राजेश ने जब नैना को सोच में डूबे हुए देखा तो बड़े ही सधे लहजे में बोला - वैसे विशाल अच्छी चॉइस है और लड़कियां उसे रिजेक्ट ना करें तो ही बेहतर है । लड़का अच्छा है , मेरे हिसाब से तुम्हें हां कर देनी चाहिए थी उसे । आगे जाकर शादी भी तो करनी है तो कोई तो हमसफ़र...... कहते हुए उसने अब जैसे ही नैना की ओर देखा तो वह मुस्कुरा कर उसे ही देख रही थी ।

राजेश - क्य... क्या देख रही हो ऐसे ?

नैना - यही कि तुम्हें आज तक झूठ बोलना भी नहीं आया। अगर ऐसा ही है तो तुम्हें उस वक्त इतना बुरा क्यों लग रहा था , जब विशाल ने मुझे प्रपोज किया।

,

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - हां बुरा जरूर लगा था पर तुम्हारे लिए नहीं , विशाल के लिए क्योंकि वह बेचारा एक गलत लड़की को अपना दिल दे बैठा ।

नैना अब शांत हो गई और अपनी तरफ की खिड़की से बाहर झांकने लगी ,राजेश ने उसे जब यूँ देखा तो समझ गया कि शायद उसकी बात नैना को चुभ गई है ।

अब राजेश ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप अपने घर की तरफ गाड़ी मोड ली । घर पहुंच कर नैना जाकर सोफे पर बैठ गई और बोली - राजेश मुझे बहुत भूख लग रही है, प्लीज जल्दी से कुछ खाने को बना कर लाओ ना?

राजेश - 1 मिनट मैं क्यों बनाऊं ? तुम्हें भूख लगी है तो तुम बनाओ - कहते हुए वह सीढ़ियों से ऊपर जाने लगा तो नैना जोर-जोर से चीखने लगी - प्लीज .... प्लीज.... प्लीज.... प्लीज....

राजेश ( खीझते हुए) - अच्छा ठीक है , शोर मत मचाओ। जा रहा हूं - कहते हुए वापस लौटकर किचन की ओर चल पड़ा ।

नैना (मुस्कुराते हुए ) - सुनो ना , वह पास्ता बनाओ ना जो तुम कॉलेज में मुझे खिलाते थे ।

,

राजेश - अच्छा और कुछ हुकुम?

नैना - नहीं बस इतना ही ।

राजेश अब जाकर किचन में पास्ता बनाने लगा कुछ ही देर बाद जब पास्ता तैयार कर राजेश किचन से बाहर निकला तो नैना वहाँ ना थी ।

राजेश नैना को ढूंढता हुआ ऊपर अपने कमरे पहुंचा तो देखा कि नैना उसके बेड पर बड़े आराम से सो रही थी , वह उसे उठाने के लिए आगे बढ़ा फिर नैना के पास पहुंच जैसे ही हाथ आगे बढ़ाया तो सोच में पड़ गया कि नैना को उठाए नहीं पर फिर उसे याद आया कि नैना को बहुत तेज भूख लगी है।

वह वापस किचन में गया और नैना के लिए पास्ता लाया और नैना को जगाया।

नैना - क्या है ?

राजेश - वह मैं पास्ता ....

नैना - मैं बहुत थक गई हूं आज, प्लीज अपने हाथों से खिला दो ना।

, राजेश - खुद खाओ, बच्ची नहीं हो ।

नैना - ठीक है तो फिर मैं नहीं खाऊंगी।

राजेश ( झुँझलाते हुए) - ठीक है लेकिन इसके बाद सीधे अपने घर जाओगी ।

नैना - ठीक है , खिलाओ तो सही ।

नैना को पास्ता खिलाते हुए राजेश के समझ नहीं आ रहा था कि आखिर नैना को हुआ क्या है जो बात बात पर जिद कर रही है ?

पास्ता खिला अब राजेश बोला - जाओ अब घर पर।

नैना - पानी ...

राजेश जैसे ही किचन से पानी ले वापस आया तो नैना फिर से उसके बेड पर सो गई थी । राजेश ने उसे पुकारा पर नैना ने कोई जवाब नहीं दिया । राजेश ने भी अब उसे जगाना सही नहीं समझा और कमरे से बाहर निकल गया।

अब वह ड्राइंग रूम में आ कर सोफे पर बैठ गया। आज उसके साथ जो कुछ भी हुआ , वह सब उसके दिमाग में घूमने लगा - नैना का खुद के लिए प्यार के इजहार को याद कर , उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर गई फिर जब उसे अगले ही पल नैना के लिए दिये धोखों की याद आई तो उसके चेहरे पर गुस्सा आ गया ।

वह अब यह सब सोच ही रहा था कि अचानक से उसे किसी फोन की बजने की आवाज आई , उसने चारों ओर देखा पर उसे कहीं भी फोन ना दिखा । अब उसकी नजर सामने रखे टेबल के कोने पर गई , वहां नैना का फोन रखा था जो बार-बार बज रहा था। राजेश ने जब फोन उठाया तो स्क्रीन पर साहिल का नाम आ रहा था।

राजेश ने फोन रिसीव किया और जैसे ही कुछ बोलने को हुआ तो दूसरी तरफ से साहिल की आवाज आई - हेलो ,नैना तुमने पूछा क्या राजेश से कि मैं जो कह रहा हूं कि राजेश ने ही विशाल को तुम्हें प्रपोज करने भेजा था या नहीं ?

तुम सुन रही हो या नही ?

राजेश (गुस्से से ) - हां सब सुन रहा हूं मैं ।

राजेश की आवाज सुनते ही साहिल इक पल को हैरान रह गया - राजेश तुम ?

राजेश - हां, मैं बोल रहा हूं । नैना फिलहाल मेरे घर में सो रही है इसलिए फोन नहीं उठाया ।

, साहिल - ठीक है फिर मैं बाद में बात करता हूं ।

राजेश - वह सब तो ठीक है लेकिन अभी तुम क्या कर रहे थे मेरे और विशाल के बारे में ?

साहिल - कुछ नहीं वह मेरे और नैना के बीच की बात है।

राजेश अब गुस्से में बोला - साफ कहो क्या कहना चाहते हो?

साहिल - ठीक है तो सुनो , मुझे शक है कि विशाल नैना से प्यार नहीं करता और तुमने ही उसे कहा था नैना को प्रपोज करने के लिए ।

राजेश - हां , तुम सही सोच रहे हो । मैंने हीं विशाल को भेजा था नैना को प्रपोज करने के लिए।

साहिल हैरानी से - लेकिन क्यों ?

राजेश - यह मेरे और नैना की बीच की बात है इसलिए तुम मुझसे दूर ही रहो - कहते हुए राजेश ने साहिल का फोन काट दिया । अब जैसे ही वह अपने कमरे की तरफ सीढ़ियों पर चढ़ने को हुआ तो उसे सामने नैना खड़ी हुई दिखाई दी ।

नैना उसे सवालिया नजरों से देख रही थी.....,
 
राजेश ने जब नैना को खुद को यूँ सवालिया निगाहों से देखते पाया तो चुपचाप मुंह फेर कर खड़ा हो गया , वह नैना से नजरें नहीं मिलााना चाहता था।

नैना अब खुद ही सीढ़ियों से नीचे उतरी और राजेश के सामने आ खड़ी हुई । राजेश नैना से नजर नहीं मिला कभी इधर तो कभी उधर देख रहा था । नैना के चेहरे पर अब एक मुस्कान तैर गई , उसने आगे बढ़कर राजेश के हाथ में एक चादर और एक तकिया पकड़ा दिया फिर बोली - तुम्हें आज यहीं सोना होगा क्योंकि कमरे में तो मैं सोंउगी, अभी बहुत थक गई हूँ तो घर नहीं जा रही मैं - कह कर वह वापस सीढ़ियों से ऊपर बढ़ चली।

राजेश उसे यू चुपचाप जाता देख हैरान रह गया कि उसने क्यों कोई सवाल जवाब नहीं किया ?

राजेश - नैना तुम कुछ जानना नहीं चाहती कि मैंने ऐसा क्यों किया ?

नैना ने पलटकर राजेश को एक पल को देखा फिर अगले ही पल मुस्कुराते हुए बोली - नहीं , मैं कुछ नहीं जानना चाहती। मैं अब बस आंखें बंद करके तुम पर भरोसा करना चाहती हूं, अब वह सब तुम्हारे ऊपर है कि तुम मेरा भरोसा तोड़ते हो या फिर उसे और मजबूत करते हो - कहते हुए नैना वापस कमरे की ओर बढ़ चली कि राजेश की आवाज उसके कानों में फिर से पड़ी - अगर मैंने तुम्हारा भरोसा तोड़ा तो ?

नैना (गहरी सांस लेकर) - ऐसा कभी नहीं होगा राजेश, मुझे तुम पर खुद से ज्यादा भरोसा है ।

राजेश - मैंने यह सब तुम्हारी वजह से किया , तुम मेरे पीछे जो पढ़ रही हो । मैं बस तुमसे कैसे भी करके पीछा छुड़ाना चाहता हूं, क्यों तुम्हें इतनी सी बात समझ नहीं आती ? नहीं करता तुमसे प्यार ।

नैना (मुस्कुराते हुए ) - तुम कुछ भी कर लो पर मैं हमेशा तुम पर भरोसा ही करूंगी - गुड नाइट , अब मैं सोने जा रही हूं - कहते हुए वह कमरे में चली गई।

यह देख राजेश गहरी सोच में डूब गया , दिल कहता था कि नैना सही है और दिमाग कहता था कि शायद यह फिर कोई , धोखा दे रही है । इसी उधेड़बुन में वह वापस आकर सोफे पर नैना की दी हुई तकिया लगा और चादर ओढ कर लेट गया। पता नहीं कब उसे नींद आ गई । अगले दिन जब करीब 8 बजे राजेश की आंखें खुली तो सामने टेबल पर एक नोट मिला

"नाश्ता डाइनिंग टेबल पर लगा कर रख दिया है , टाइम से ऑफिस पहुंच जाना। रात के लिए थैंक यू "

नैना

राजेश फटाफट तैयार होकर ऑफिस पहुँचा तो सामने से साहिल आता दिखाई दिया । राजेश उसे इग्नोर कर आगे बढ़ना चाहता था कि साहिल ने उसका रास्ता रोक लिया -

गुड मॉर्निंग राजेश ।

राजेश (बेरुखी से ) - गुड मॉर्निंग ।

राजेश अब आगे बढा तो एक बार फिर साहिल ने उसे आगे बढ़ने से रोका - लगता है तुम्हारे और नैना के बीच अब सब ठीक है कल तो तुम्हारे घर भी थी वह लेकिन फिर तुम दोनों साथ साथ ऑफिस क्यों नहीं आए? - कहते हुए साहिल मुस्कुराने लगा ।

, राजेश ने गुस्से में साहिल की ओर देखा और बोला - देखो साहिल, यह मेरा और नैना का पर्सनल मैटर है तो हर वक्त अपनी टांग अड़ाना बंद करो। मैं देख लूंगा कि मुझे क्या करना है , तुम बस अपने काम पर फोकस करो ।

साहिल - तुम्हें सच में लगता है कि तुम सब कुछ संभाल लोगे? जैसे कल विशाल को नैना के पास भेज झूठी मोहब्बत का इजहार करने को कहा? माफ करना दोस्त, कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारी ऐसी हरकतों से नैना हमेशा के लिए तुमसे दूर हो जाए और उसके दिल में कोई और आ जाए । तब तुम्हारे पास पछतावे के सिवाय कुछ और नहीं होगा ।

राजेश (खींझते हुए) - साहिल बस । दोस्त हो तो दोस्त की तरह रहो - यह मेरे और नैना के बीच का मामला है और मैं बता दूं कि नैना के दिल में और कोई नहीं आ सकता।

साहिल - पर तुम्हारी बेरुखी को कब तक सहन करेगी वह? एक ना एक दिन तो दूर हो ही जाएगी। यह मेरी दोस्त की जिंदगी का सवाल है और मैं उसे ऐसे जाने नहीं दे सकता।

राजेश - तो ठीक है समझाओ अपनी दोस्त को कि मेरी जिंदगी से चली जाए, उसकी मेरी जिंदगी में कोई जगह नहीं है ।

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साहिल ( गुस्से में )- चली जाएगी वह । तुम्हारे अलावा भी और कई लोग हैं इस दुनिया में जो उसकी फिक्र करते हैं।

राजेश - किस की बात कर रहे हो तुम?

साहिल - कुछ भी समझ लो पर याद रहे कि अगर तुमने या किसी ने मेरी दोस्त को तकलीफ दी तो मैं उसे नहीं छोडूंगा। वह एक बहुत सुलझी हुई लड़की है , तुम उसे परेशान नहीं कर सकते।

राजेश - तुम्हें नैना के ऊपर हक दिया किसने ? नैना ने?

साहिल - दोस्तों के लिए हक की जरूरत नहीं पड़ती, तुम उसकी फीलिंग्स का मजाक उड़ा रहे हो ।

राजेश (गुस्से में ) - और उसने जो हर बार मेरी फीलिंग्स का मजाक उड़ाया , उसका क्या ? क्या वह सही था ?

साहिल - नैना ने बताया ना कि उसकी कोई मजबूरी थी।

राजेश - मैं यकीन नहीं करता उस पर ।

, साहिल - तो यह तुम्हारी परेशानी है लेकिन अगर उसकी आंखों में तुम्हारी वजह से आंसू आए तो... कहकर वह राजेश की ओर गुस्से से देखने लगा ।

अब राजेश भी गुस्से में साहिल को देखते हुए थोड़ा आगे बढ बोला - तो.. तो क्या ? धमकी दे रहे हो मुझे ? जाओ जो करना है , कर लो लेकिन नैना को उसके किए की सजा मैं दूंगा जरूर।

साहिल - ठीक है फिर मैं भी अब देखता हूं कि नैना तुम्हें कैसे मिलती है ? मैं उसे तुम्हारी कभी नहीं होने दूंगा फिर उसके लिए मुझे चाहे जो भी करना पड़े और तो और नैना के खिलाफ ही क्यों न जाना पड़े ? तुम उसके काबिल ही नहीं हो। जब एक दोस्त को अपना भला ना समझ आए तो दूसरे दोस्त को आगे बढ़कर उसे सही रास्ता दिखाना चाहिए ।

राजेश - डू व्हाट एवर यू वांट टू डू मैं वैसे भी तुम्हारी दोस्त में इंटरेस्टेड नहीं हूं लेकिन अगर उसने मेरे पीछे आने की कोशिश की तो फिर उसे दर्द मिलेगा । कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम दोस्ती की आड़ में .....

साहिल - हां पसंद करता हूं नैना को पर चुप था क्योंकि वह तुम्हें पसंद करती है पर तुम बार-बार उससे रुखा व्यवहार , करते हो तो तुम उसके लायक ही नहीं

राजेश - और तुम लायक हो? एक बात याद रखना, नैना के दिल में तुम कभी जगह नहीं बना पाओगे ।

साहिल - ना सही लेकिन याद रखना, एक दिन मैं नैना को तुम से हमेशा के लिए दूर ले जाऊंगा और फिर उसके साथ अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करूंगा। तुम शायद उसे यह सोच तकलीफ दे रहे हो कि वो तुम्हें कभी छोड़कर नही जाएगी लेकिन देख लेना , नैना कुछ ही दिनों में मेरी होगी और तब तुम्हें पता चलेगा कि तुम ने क्या खोया है ?

राजेश ( गुस्से में ) - डाँन्ट यू डेयर...... कि तभी नैना की आवाज आई - क्या हो रहा है यहाँ? क्या बात चल रही है दोनों दोस्तों की ?

राजेश और साहिल अब जैसे होश में आए और नैना की तरफ देखने लगे।

नैना मुस्कुराते हुए उन दोनों के करीब आ खड़ी हुई - क्या बात है सुबह-सुबह गपशप हो रही है ? राजेश और साहिल दोनों एक दूसरे को देखने लगे कि नैना ने आगे बढ राजेश का हाथ अपने हाथों में थाम लिया - नाश्ता किया तुमने ?

,

राजेश कुछ कह पाता कि उससे पहले ही साहिल ने नैना के हाथों से राजेश का हाथ छुड़ा लिया और बोला - चलो चले, सारा तुम्हारा इंतजार कर रही है , कहते हुए वह नैना को राजेश से दूर ले जाने लगा ।

नैना राजेश की ओर देखते हुए - पर साहिल मैं...

साहिल ( बेरुखी से) - चलो ना , राजेश कहां भागा जा रहा है - कहते हुए उसे वहां से ले गया ।

राजेश चुपचाप खड़े सब देखता रह गया , उसे साहिल का खुद के हाथ से नैना का हाथ छुड़ाना जरा भी पसंद नहीं आया और वह खामोश सा इसी उलझन में था कि नैना को जाने दे या फिर उस पर एक बार फिर से भरोसा करें ?

राजेश अब केविन में जाकर बैठ गया, उसके दिमाग में अब साहिल की बातें घूमने लगी - अगर साहिल सच में कामयाब हो गया तो ? कहीं वह नैना को मुझसे दूर ले गया तो ? पर मैं तो नैना से नफरत करता हूं ना क्योंकि उसने हर बार मुझे धोखा दिया है फिर नैना कहीं भी जाए , मुझे इससे क्या फर्क पड़ता है ?

, राजेश के दिमाग में यह सब चल ही रहा था कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई तो वह होश में आया - कम इन।

अब विशाल थोड़ा परेशान सा राजेश के सामने वाली कुर्सी पर बैठा , उसने देखा कि राजेश भी कुछ परेशान है ।

राजेश - क्या हुआ ? सब ठीक तो है ?

विशाल - क्या ठीक है यार , तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि नैना को हमारे झूठ के बारे में पता चल गया है?

राजेश - वो मैं भूल गया था तुम्हें बताना, रात ही उसे सब पता चल गया ।

विशाल ( हैरानी से ) - कैसे?

राजेश - साहिल।

विशाल - यार, तुम इसे बाहर क्यों नहीं निकालते ऑफिस से? दो ही दिन हुए हैं और यह बार-बार हमारे रास्ते में आ रहा है।

राजेश नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि एक तो यह अपने काम में बिल्कुल परफेक्ट है और दूसरा, अगर मैं इसे , बाहर निकालता हूं तो इस पर नजर रखना मुश्किल हो जाएगा ।

विशाल (खींझते हुए ) - तो क्या करें ? ऐसे चुप कब तक बैठोगे ?

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - नहीं मैं बस समझना चाहता हूं इसे थोड़ा और ,आज तो ये खुलकर मेरे सामने आ गया, कहता है कि नैना को मुझसे दूर ले जाएगा , उसके साथ नई जिंदगी की शुरुआत करेगा लेकिन वह यह नहीं जानता कि नैना उसके साथ कभी नहीं जाएगी ।

विशाल (थोड़ा हिचकिचाते हुए) - अगर यार सच में नैना को हमेशा के लिए वह अपने साथ ले गया तो ?

राजेश अब गुस्से में विशाल की ओर देखने लगा।

विशाल - तुम पुरानी बातों को भूल क्यों नहीं जाते ?

राजेश - भूल जाऊं पिछले 2 सालों से मैं हर पल कितना तड़पा हूँ? हर बार भरोसे की जगह धोखा खाया है मैंने इस लड़की से और क्या पता इस बार भी उसका कुछ प्लान हो?

, विशाल - अब मैं क्या कहूं तुमसे , तुम्हें जो ठीक लगे वह करो । मैं बस तुम दोनों को खुश देखना चाहता हूं लेकिन पहले साहिल का कुछ करो , पता लगाओ कि यह उस दिन इनवेंटरी में किस से बात कर रहा था ? क्या खास मकसद है इसका यहां आने का और इसे यहां भेजा किसने है ?

राजेश अब सोच में पड़ गया -

"कल जब राजेश रिचा से मिलने बिल्डिंग से बाहर गया था पर उसके गाड़ी में निकल जाने के बाद वापस लौटा तब उसने इन्वेंटरी से धीमी धीमी सी आवाज सुनी । राजेश जब इनवेंटरी के पास पहुंचा तो उसने साहिल की आवाज सुनी, वह किसी से फोन पर कह रहा था कि मुझे नौकरी तो मिल गई है , कोई खास परेशानी नहीं हुई । बस जल्द से जल्द अपना मकसद पूरा करना है... हां , एक बार मेरा प्लान काम कर जाए फिर इन सबके चेहरे केउड़े रंगों को देख कर जो मजा आएगा , वह तुम्हें मैं शब्दों में नहीं बता सकता । तुम टेंशन मत लो , जीत हमारी होगी । नैना को राजेश के खिलाफ कब कहां कैसे इस्तेमाल करना है ,मैं जानता हूं ।

नैना एक बार वश में आ जाए तो राजेश खुद काबू में आ जाएगा ।

राजेश अब वहाँ से हट बिल्डिंग के बाहर आ गया और फोन , कर विशाल को भी वहां बुलाया। विशाल जब बाहर आकर राजेश से मिला और अचानक बुलाने का कारण पूछा तो राजेश ने उसे सब कुछ कह सुनाया ।

विशाल यह सब सुनकर हैरान रह गया - तो तुमने तभी उस साहिल को रंगे हाथों पकड़ा क्यों नहीं?

राजेश - उसे तो पकड़ लेता लेकिन वो जिससे बात कर रहा था , उसके बारे में कैसे पता लगता ?

विशाल- कह तो सही रहे हो, अब ?

राजेश (कुछ देर सोचते हुए ) - मेरे ख्याल से वह जो कर रहा है , उसे करने दो। पता तो चले कि आखिर करना क्या चाहता है लेकिन नैना...

विशाल - नैना क्या ?

राजेश (गंभीरता से ) - साहिल को पता नहीं क्यों ऐसा लगता है कि नैना मेरी कमजोरी है और वह मुझ तक पहुंचने या मुझे नुकसान पहुंचाने के लिए उसका इस्तेमाल करना चाहता है। मुझे साहिल को दिखाना होगा कि नैना मेरी कमजोरी नहीं है।

,

विशाल - वह कैसे ?

राजेश - तुम नैना को प्रपोज करना ,तब जब साहिल नैना के आसपास हो । मैं भी वहीं रहूंगा । जाहिर है कि नैना मना करेगी।

विशाल - लेकिन इससे क्या होगा ?

राजेश - इससे यह होगा कि साहिल जैसा शातिर दिमाग वाला इंसान आज नहीं तो कल आसानी से समझ जाएगा कि मैंने ही तुम्हें यह करने को कहा है तो वह नैना को मेरे खिलाफ जरूर भडकाएगा। जब नैना को पता चलेगा कि मैंने ही तुम्हें उसके पास भेजा था तो वह मुझसे नाराज हो दूर रहेगी।

साहिल को भी महसूस होगा कि नैना को मैं तकलीफ दे रहा हूं , इसका मतलब नैना मेरी कमजोरी नहीं है तो साहिल उसका इस्तेमाल नहीं करेगा । तब देखेंगे कि वह क्या करता है फिर आमने सामने बात करेंगे ।"

राजेश अब यह सब सोच ही रहा था कि विशाल ने उसे पुकारा - क्या सोच रहे हो ?

,

राजेश - कुछ नहीं , सब कुछ प्लान के हिसाब से जा रहा था पर नैना ने सब गड़बड़ कर दिया । उसने लड़ने की जगह मुझसे कह दिया कि उसे भरोसा है मुझ पर । अगर वह गुस्से में लड़कर चली जाती तो मेरा काम आसान हो जाता ।

विशाल - तो अब क्या करना है ?

राजेश ने अभी थोड़ी देर पहले हुई साहिल के साथ बातचीत विशाल को बताई।

विशाल (परेशान होकर) - अगर साहिल ने सच में नैना को अपने प्यार के जाल में फंसा लिया तो ?

राजेश (गहरी सांस लेकर ) - जहां तक मैं नैना को समझता हूं, वह साहिल की बातों में कभी नहीं आएगी।

विशाल - वैसे एक रास्ता और है ।

राजेश - क्या ?

विशाल - तुम रिचा को छोड़ नैना को अपना क्यों नहीं लेते? , फिर देखते हैं कि साहिल कैसे नैना का इस्तेमाल करता है?

राजेश (गुस्से में ) - बिल्कुल नहीं। मैं नैना को कभी नहीं अपनाउंगा।

राजेश और विशाल अभी आपस में बात कर ही रहे थे कि केबिन के दरवाजे पर दस्तक हुई।

राजेश - कम इन।

दरवाजा खोल सारा मुस्कुराते हुए जल्दी से अंदर आई - राजेश सर जल्दी आइए , रिचा मैम आ गई है । बाहर सभी आपका इंतजार कर रहे है - कहते हुए वह वापस कैबिन से बाहर चली गई।

राजेश और विशाल हैरानी से एक दूसरे को देखने लगे कि आखरी माजरा क्या है , दोनों फटाफट से उठे और केबिन से बाहर चल पड़े। आगे राजेश और पीछे विशाल था।

राजेश जैसे ही केबिन से बाहर निकला कि सामने से रिचा आती हुई दिखाई दी। सारा स्टाफ राजेश के पास आ खड़ा हो गया। राजेश कुछ कह पाता कि तभी नैना जल्दी से रिचा के पास गई और उसे हाथ पकड़ राजेश के पास ले आईकि तभी , पूरा स्टाफ एक साथ जोर से खुशी के साथ चिल्लाने लगा - हैप्पी बर्थडे रिचा मैम।

यह सुनते ही राजेश के चेहरे का रंग पीला पड़ गया , उसने इशारे से रिचा को पूछा तो रिचा ने हाँ में सिर हिला दिया।

राजेश अब मन ही मन खुद कोसने लगा कि आखिर वह कैसे रिचा का जन्मदिन भूल गया ? यह सोचते हुए जब राजेश की नजर नैना पर पड़ी तो वह उसे ही देख चुपचाप मुस्कुराए जा रही थी ।

उसकी नजरों से साफ पता चल रहा था कि यह शरारत उसी की है । शायद वह जानती थी कि राजेश रिचा का बर्थडे भूल गया है और राजेश को रिचा से लडवाने के लिए उसने ऐसा किया है । साहिल सबसे पीछे खड़ा हुआ राजेश को देख रहा था , उसके चेहरे पर एक व्यंगात्मक मुस्कान थी।

शायद नैना को यह प्लान उसी ने सुझाया था । राजेश ने अब नैना की ओर देखा तो वह मुस्कुराते हुए बोली - राजेश सर, अब यह मत कहना कि आप रिचा मैम का बर्थडे भूल गए थे। हमें पता है कि आप उन्हें सरप्राइज देना चाहते थे । अब आपका सरप्राइस तो हमनें खराब कर दिया पर अभी भी ज्यादा कुछ नहीं बिगड़ा है ।

,

आप रिचा मैम के लिए गिफ्ट तो जरूर लाए होंगे तो चलिए, वो अभी दे दीजिए सबके सामने ।

सारा स्टाफ नैना की हां में हां मिलाने लगा ।

सारा - हां सर , हमें भी देखना है कि आप रिचा मैम के लिए क्या गिफ्ट लाए हैं ? एक मिनट, कहीं आप सच में गिफ्ट ऐर रिचा मैम का बर्थ डे तो नहीं भूल गए ?

राजेश ने अब रिचा की ओर देखा तो वह मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी राजेश को अब समझ नहीं आ रहा था कि करे तो करे क्या क्योंकि वह सच में रिचा का बर्थडे भूल चुका था तो गिफ्ट कहाँ से लाता और अभी अगर उसने रिचा को कोई गिफ्ट नहीं दिया तो नैना पक्का इस बात का इशू बनाएगी।

नैना - अरे सारा तुम पागल हो, सर तो रिचा मैम को बहुत प्यार करते है। वो कुछ भी भूल जाए पर अपनी मंगेतर का बर्थ डे नहीं भूल सकते फिर रिचा मैम का दिल ही टूट जाएगा ना अगर ऐसा कुछ हुआ तो और यह हमारे राजेश सर कभी होने देंगे।

अब प्लीज सर दीजिए ना गिफ्ट रिचा मैम को - कहते हुए वह , राजेश को देखते हुए मुस्कुराए जा रही थी क्योंकि राजेश उसके जाल में फँस चुका था....,
 
राजेश अब इधर-उधर देखने लगा, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करें कि तभी पीछे से विशाल की आवाज आई - अरे यार, इतना भी क्या सीक्रेट रखना? अब दे भी दो अपना गिफ्ट - कहते हुए वह आगे बड़ा और एक छोटा सा गिफ्ट पैक राजेश के हाथ में थमा दिया ।

अब राजेश ने हैरानी से विशाल की ओर देखा तो वह बोला - मैंने तुम्हें टेबल की रैक में इस गिफ्ट को रखते हुए देख लिया था - कहते हुए वह राजेश को देख मुस्कुरा दिया। राजेश की अब जान में जान आई, उसने राहत की सांस ली और वह छोटा सा गिफ्ट बॉक्स रिचा की ओर बढ़ा दिया - हैप्पी बर्थडे रिचा , मैं तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था पर कोई बात नहीं । अब सारा स्टाफ अगर तुम्हारे साथ बर्थडे सेलिब्रेट करना चाहता है तो जैसी उनकी मर्जी - कहते हुए वह मुस्कुराता हुआ नैना और साहिल की ओर देखने लगा।

साहिल अब वहां से चला गया और नैना का चेहरा एकदम से उतर गया । राजेश नें अब आगे बढ़ विशाल को गले से लगा लिया और धीरे से उसके कान में बोला - थैंक्स यार, आज बचा लिया तूने ।

विशाल - दोस्त के लिए कुछ भी । तु भूल गया पर मुझे याद था रिचा का बर्थ डे । नैना अब उदास हो वहां से जाने लगी तो राजेश ने उसे रोका - अरे मिस शर्मा , कहां जा रही है ? पहले गिफ्ट तो देखती जाइए। रिचा ने जब वह गिफ्ट बॉक्स खोला तो उसमें एक बड़ी ही प्यारी डायमंड रिंग थी। यह देख रिचा के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर गई - थैंक्स ....थैंक यू सो मच ।

सारा स्टाफ उस खूबसूरत रिंग को देख राजेश की पसंद की तारीफ करने लगा । राजेश ने देखा कि नैना का चेहरा एकदम से उतर गया, वह दुखी मन से वापस अपनी टेबल की ओर बढ़ी कि राजेश ने उसे फिर पुकारा - मिस शर्मा ?

नैना ने पीछे मुड़कर देखा तो राजेश मुस्कुराते हुए बोला - आप कैंटीन में फोन कर बोल दीजिए कि सारे स्टाफ की आज पार्टी है मेरी तरफ से । आज का पूरा बिल मैं पे करूंगा , आखिर मेरी मंगेतर का बर्थडे जो है , सेलिब्रेशन तो बनता है।

नैना ने अब रिचा की ओर देखा तो वह भी कुछ यूं मुस्कुरा रही थी जैसे कह रही हो कि देख नैना, राजेश तुम्हारा नहीं मेरा है।

राजेश (विशाल से ) - विशाल, आज दोपहर में जो बाहर होटल में जो मीटिंग है , वहां तुम चले जाना । कुछ घंटे के लिए ऑफिस मिस शर्मा संभाल लेंगी और मैं रिचा के साथ लंच करने बाहर जा रहा हूँ - कहते हुए वह व्यंगात्मक तरीके से हंसते हुए नैना को देख रिचा के साथ ऑफिस से बाहर निकल गया।

नैना को राजेश पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि तभी सारा बहुत दुखी होते हुए आई और बोली - क्या नैना? हमने तो सोचा था कि बर्थडे भूलने पर शायद उनका झगड़ा होगा लेकिन यहां तो गिफ्ट भी था और अब साथ में लंच भी ।

नैना अब सारा को देखने लगी।

सारा - तू यहां इतनी परेशान है और वहां राजेश सर अपनी मंगेतर के साथ लंच करने जा रहे हैं ।

नैना (मुस्कुराते हुए) - कोई नहीं यार , एक लंच की ही तो , बात है । कौन सा एक लंच में यह राजेश को मुझसे छीन लेगी? चलो थोड़ा काम कर लिया जाए - कहते हुए नैना जैसे ही अपने टेबल की ओर बढ़ी कि साहिल आ गया ।

साहिल - नैना मुझे एक बहुत जरूरी काम है, प्लीज मुझे एक घंटा दे दो । मैं अपना काम करके वापस आ जाऊंगा ।

नैना- ठीक है पर जल्दी आना।

साहिल ( मुस्कुराता हुआ ) - अब मन ही मन सोचने लगा कि बस यह निशाना ठीक लग जाए फिर तो नैना मेरे कब्जे में होगी और तब चलूंगा मैं अपनी चाल। फिर देखता हूं कि राजेश कैसे हार नहीं मानता है ।

तकरीबन आधा घंटा हो चुका था साहिल को ऑफिस से गए हुए । नैना अपने काम में बिजी थी और सारा भी उसकी मदद करवा रही थी कि तभी नैना के फोन पर साहिल का मैसेज आया । वह जल्द से जल्द नैना को होटल रायल्स पहुंचने की कह रहा था , वह उसे वहां कुछ दिखाना चाहता था।

नैना को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह दिखाना क्या चाहता है ? वह अब ऑफिस से बाहर निकल टैक्सी ले कुछ ही देर में होटल पहुंच गई । साहिल होटल के बाहर ही नैना , का इंतजार कर रहा था ।

नैना को देखते ही वह जल्दी से भागता हुआ उसके पास आया और उसे हाथ पकड़ होटल के अंदर ले गया। नैना उससे पूछती रही कि आखिर बात क्या है पर साहिल बार-बार यही कहे जा रहा था कि खुद अपनी आंखों से देख लो ।

होटल के अंदर पहुंचते ही साहिल नैना को एक कॉर्नर वाली सीट पर ले गया और नैना के साथ बैठ गया।

नैना (हैरानी से ) - क्या इसीलिए तुमने मुझे बुलाया था?

साहिल - मेरी बात तो सुनो, मेरे ठीक पीछे पाँच टेबल छोड़ कर देखो कि कौन बैठा है? नैना ने अब साहिल के पीछे उसकी कहे अनुसार 5 टेबल छोड़कर देखा तो कुछ लोगों की वहां मीटिंग चल रही थी।

नैना अब साहिल को सवालिया निगाहों से देखने लगी - क्या देखूं ? वहां तो कुछ लोगों की मीटिंग चल रही है ।

साहिल (अपना सिर पकड कर बैठ गया ) - यार यह वहीं , मीटिंग है जो आज हमारी कंपनी के साथ में थी। तुम यह देखो कि मीटिंग अटेंड कौन कर रहा है हमारी कंपनी की तरफ से ?

नैना ने फिर पीछे झांक कर देखा तो वह हैरान रह गई । वह मीटिंग कोई और नहीं राजेश खुद ले रहा था । नैना अब हैरानी से कभी साहिल को तो कभी राजेश को देखने लगी।

साहिल (मुस्कुराते हुए)- कुछ समझ आया?

नैना (हैरानी से ) - पर मीटिंग तो विशाल को.. फिर राजेश यहां कैसे और रिचा कहां गई ?

साहिल (मुस्कुराते हुए ) - वह दोनों भी यही है। राजेश की टेबल के लेफ्ट साइड टेबल छोड़ कर देखो, तुम्हें तुम्हारा जवाब मिल जाएगा ।

नैना ने जब उधर देखा तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई - रिचा और विशाल एक दूसरे के साथ हाथ में हाथ डाले बैठे थे , दोनों एक साथ बहुत खुश लग रहे थे ।

नैना साहिल की ओर देखने लगी।

, साहिल - कुछ समझ आया मिस शर्मा ?

नैना के चेहरे पर अब एक बड़ी सी मुस्कान तैर गई - हां।

साहिल (मुस्कुराते हुए) - क्या ?

नैना (खुशी से चहक़ते हुए) - यही कि रिचा का मंगेतर राजेश नहीं विशाल है और मेरा राजेश सिर्फ मेरा है । उसने कोई सगाई नहीं की है ।

साहिल - धीरे बोलो वह सुन लेंगे ।

नैना - तो सुनने दो । आज रंगे हाथों पकड़ा है उन्हें , अभी जाकर राजेश की खबर लेती हूं । इसने बहुत सताया है यह कह नैना जैसे ही उठने को हुई कि साहिल ने उसे हाथ पकड़ वापस बैठा दिया।

नैना (हैरानी से ) - क्या हुआ?

साहिल - अगर तुम वहां गई तो वो लोग कुछ बहाना बना देंगे और क्या पता राजेश अगली बार सच में किसी से शादी ही कर ले?

, नैना - तो?

साहिल -इन तीनों दोस्तों ने मिलकर तुम्हें पागल बनाया है, अब तुम्हें भी इन्हें पागल बनाना होगा , कुछ ऐसा करना होगा कि राजेश खुद आकर तुमसे कहे कि उसने रिचा से कोई सगाई नहीं की है और वह सिर्फ और सिर्फ तुमसे प्यार करता है वरना वह कभी भी अपने गुस्से के चलते नहीं मानेगा कि उसे तुमसे प्यार है ।

नैना - वह सब तो ठीक है पर मैं राजेश को और धोखा नहीं दे सकती ।

साहिल (गंभीर होकर ) - तो ठीक है , जा कर बता दो उसे कि तुम उसका सच जान चुकी हो पर प्यार तो तुम्हें उसका फिर भी नहीं मिलेगा ।

नैना अब गुमसुम सी साहिल को देखने लगी ।

साहिल - पता है ,जब आज सुबह राजेश से मेरी बात हुई तो वह क्या कह रहा था ?

नैना - क्या?

, साहिल- मैंने उसे कहा कि इतनी बेरुखी भी ठीक नहीं है, तुम्हारा गुस्सा जायज है पर कब तक रूठे रहोगे उससे ? कहीं नैना तुमसे दूर चली गई तो? तब राजेश मुस्कुराता हुआ बोला कि तुम उसके अलावा किसी और को अपनी जिंदगी में कभी नहीं लाओगी। समझती हो इस बात का मतलब ?

नैना - सच ही तो कहा है राजेश ने, मेरी जिंदगी में उसके सिवाय और कोई नहीं आएगा ।

साहिल - बस यही बात है जो सारा मामला खराब कर रही है। राजेश को तुम्हें खोने का डर नहीं है इसलिए अपने गुस्से के पीछे छुपे प्यार को छुपा कर ही बैठा है लेकिन जब उसे महसूस होगा कि तुम उसे दूर जा रही हो, तभी तो वह अपने प्यार का इजहार करेगा । प्यार को खोने का डर अच्छे से अच्छे मजबूत इंसान को कमजोर बना देता है ।

नैना - चाहते क्या हो ?

साहिल (मुस्कुराते हुए) - देखना चाहता हूं मैं राजेश के चेहरे पर डर तुम्हें खोने का ।जब तक उसे डर महसूस नहीं होगा, वह कभी तुम्हारी और कदम नही बडा पाएगा फिर दोनों खेलते रहना जिंदगी भर लुका छिपी का खेल।

,

नैना सोच में पड़ गई । साहिल ने जब नैना को यू सोचते देखा तो समझ गया कि नैना पर उसकी बातों का असर हो रहा है, अब नैना उसकी बात जरुर मानेगी ।

नैना - लेकिन मैं क्या कहूंगी और राजेश से किस को मिलवाऊंगी उससे ? ऐसे मामलों में मैं हर किसी पर भी तो भरोसा नहीं कर सकती।

साहिल (हंसते हुए) - अरे मैं हूं ना , देखो राजेश ने तुम्हें तंग करने के लिए तुम्हारी दोस्त इस्तेमाल किया , वैसे ही अब मैं भी तो राजेश का दोस्त हूं तो तुम राजेश को तंग करने के लिए मेरा इस्तेमाल करो। मेरे साथ तुम और तुम्हारा सीक्रेट दोनों सेफ है।

नैना उदासी से राजेश को देखने लगी , वह अपनी मीटिंग में बिजी था। नैना का मन किया कि एक बार जाकर उसके गले लग जाए और अपनी हर गलती की माफी मांगे लेकिन क्या राजेश उसे माफ कर देगा ?

साहिल नैना को राजेश की तरफ प्यार से देखते हुए देख रहा था - इस बार दिल से नहीं दिमाग से काम लेना । कहीं ऐसा , ना हो कि दिल की सुनते सुनते राजेश को खो दो।

नैना (असमंजस की स्थिति में) - क्या यह गलत नहीं होगा?

साहिल (हंसते हुए) - शायद तुमने सुना नहीं है कि प्यार और जंग में सब जायज है फिर खुद राजेश ने भी यही रास्ता चुना है तुम्हें तंग करने का। तुम बस जैसे का तैसा करोगी, इसमें कोई बुराई नहीं ।

नैना - मैं सोचकर बताऊं तुम्हें ? मुझे कुछ वक्त दो ।

साहिल - बिल्कुल। तुम आराम से सोच कर बताओ लेकिन याद रहे इस बार फैसला तुम्हें दिमाग से लेना है।

अच्छे से सोच लेना क्योंकि तुम्हारा एक फैसला राजेश को तुम से हमेशा के लिए दूर ना ले जाए नैना। चलो अब चलते हैं, इससे पहले कि कोई हमें देख ले।

साहिल और नैना चुपचाप अपने टेबल से उठ राजेश, विशाल और रिचा की नजरों से बचकर होटल से बाहर निकल आए।नैना के मन में एक सवाल आया - साहिल, एक बात समझ नहीं आई । तुम तो कह रहे थे कि कुछ जरूरी काम है लेकिन यहां होटल में तुम क्या करने आए थे और क्या तुम्हें पहले से पता था कि राजेश रिचा के साथ अपने रिश्ते के लिए झूठ , बोल रहा है ।

यह सुन साहिल एकदम से घबरा गया क्योंकि वह शुरू से ही जानता था कि राजेश की सगाई नहीं हुई है , वह बस सही मौके की तलाश में था जो उसे आज मिला । उसने नैना से राजेश को रंगे हाथों पकड़वाने का सोचा था , जो आज उसने कर दिया ।

नैना - साहिल कहां खो गए?

साहिल - वह मुझे विशाल से कुछ काम था तो मैंने पता किया कि उसकी मीटिंग किस होटल में है? मैं उसी से मिलने आया था कि यह सब देखा तो मैं सारा माजरा समझ गया और तुम्हें बुला लिया।

नैना ( मुस्कुराते हुए) - थैंक्स साहिल, तुम्हें नहीं पता कि तुमने कितनी बड़ी टेंशन खत्म कर दी।

साहिल - अब चलो जल्दी से यहाँ से - और दोनों साहिल की गाड़ी से वहाँ से निकल गए।

नैना और साहिल ऑफिस पहुंचे ,नैना आज बहुत ही हल्का महसूस कर रही थी क्योंकि कहीं ना कहीं उसके दिमाग में , यह बात थी कि रिचा के साथ गलत कर रही है लेकिन अब वह सच जान चुकी थी । नैना और साहिल ने जब सारा को सब बताया तो वह भी बड़ी खुश हो गई।

अभी तीनों आपस में हंसी मजाक कर ही रहे थे कि साहिल की नजर ऑफिस में आते विशाल और राजेश पर पड़ी। अब वह उठ कर चला और उनके सामने खड़ा हुआ - एक बात कहूं तुम दोनों से ? राजेश और विशाल अब चुपचाप उसे देखने लगे।

साहिल - तुम दोनों की दोस्ती बहुत गहरी निकली मतलब एक दूसरे के लिए कुछ भी कर सकते हो । भगवान तुम्हारी दोस्ती हमेशा बना कर रखे -कहकर हंसता हुआ वह.आगे बढ़ चला।

राजेश और विशाल अब एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे।

विशाल - यह क्या कहकर गया है? कहीं इसके दिमाग में हमारी दोस्ती तो टारगेट नहीं है ?

राजेश (सोचते हुए) - पता नहीं और क्या पता यह सिर्फ हमारा ध्यान भटकाने के लिए यह सब बोल कर गया हो ? बस तुम थोड़ा होशियार रहना ।रिचा घर पहुंच गई ?

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विशाल - हां वह पहुंच चुकी है ।

अब राजेश और विशाल अपने अपने केबिन में चले गए। राजेश अपने केबिन में बैठकर काम कर रहा था कि उसे अब पुरानी बातें याद आई - कैसे नैना से लड़ने के बाद जब वापस दिल्ली पहुंचा तो उसे विशाल मिला .विशाल ने उसे अपने और रिचा के बारे में बताया। रिचा ने विशाल को हां कह दिया था। तब घर वालों की मर्जी से विशाल और रिचा की दो ही दिनों में सगाई हो गई । राजेश ने विशाल और रिचा से हेल्प मांगी नैना को परेशान करने के लिए।

पहले तो रिचा ने मना कर दिया पर फिर बाद में मान गयी, विशाल को भी राजेश ने जैसे तैसे करके मना ही लिया ।

राजेश अभी यह सब सोच ही रहा था कि तभी उसे अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस हुआ । उसने जब नजरें उठाकर देखा तो सामने नैना मुस्कुराती हुई खड़ी थी - क्या हुआ? किसके ख्यालों में खोए हुए हो ? मेरे या रिचा के ?

राजेश (बेरूखी से) - तुम से मतलब ?और मैं तुम्हारे ख्यालों में क्यों खाऊंगा ? फिर रिचा है ना मेरे पास, वह तुम से लाख गुना अच्छी है ।

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नैना ने अब अपने हाथ में लगी कॉफी राजेश की टेबल पर रख दी - मुझे याद है आज भी कि जब तुम थके होते हो तो तुम्हें इसकी जरूरत पड़ती है ।

राजेश - थैंक्स ।

नैना - अच्छा अब अपनी कॉफी पी लो ठंडी हो जाएगी।

राजेश- मैं पी लूंगा।

नैना - नहीं प्लीज एक बार टेस्ट करके बताओ ना कैसी बनी है ?

राजेश(झुँझलाते हुए) - नैना तुम.....

नैना (मासूम सा चेहरा बनाकर) - प्लीज टेस्ट करो ना ।

राजेश - ठीक है ,कहकर उसने जैसे ही कॉफी का एक घूंट मुंह में लिया कि अगले ही पल उसने वह बाहर फर्श पर उगल दिया और गुस्से में नैना पर चिल्लाते हुए खड़ा हो गया - यह सब क्या है नैना ?

, नैना (मुस्कुराते हुए ) - क्यों ?।अच्छी नहीं बनी ?

राजेश - इतनी कड़वी कॉफी कब से बनाने लगी तुम ? यह कॉफी है या जहर?

नैना - यही तो मैं पूछ रही हूं कि तुम और तुम्हारी पसंद कब से बदल गई ? पहले मैं तुम्हारा प्यार थी पर अब तुम्हें रिचा से आगे कुछ नहीं दिखता । पता है , जब मैं तुम्हें उस रिचा के साथ देखती हूं तो इस कड़वी कॉफी से भी दुगना कड़वा जहर का घूंट पीकर रहना पड़ता है ।

राजेश - तुम पागल हो गई हो ,जा कर अपने दिमाग का इलाज कराओ ।

नैना - करवाऊंगी पर तुम्हें भी साथ ले कर जाऊंगी किसी बच्चे के डॉक्टर के पास ।

राजेश (हैरानी से ) - बच्चे के डॉक्टर के पास ?

नैना - हां , क्योंकि तुमने भी तो बच्चों की तरह जिद पकड़ रखी है कि नैना को माफ नहीं करना है।

राजेश - यह मेरी जिंदगी का सवाल है और मैं डिसाइड , करुंगा कि मुझे अपनी जिंदगी किसके साथ गुजारनी है और मैं तय कर चुका हूं कि अपनी जिंदगी तुम्हारे जैसे धोखेबाज के साथ नहीं बिता सकता?

नैना अब खामोशी के साथ राजेश को देखने लगी - ठीक है,अब मुझे ही कुछ करना होगा - कहते हुए वह कैबिन से बाहर निकल गई और अपना बैग उठा ऑफिस से चली गई।

नैना को यूं जाता देख राजेश थोड़ा परेशान हो गया कि कहीं वह कुछ कर ना बैठे लेकिन नहीं , यह एक सुलझी लड़की है। ऐसा वैसा कुछ भी नहीं करेगी - यह सोचते हुए वापस चेयर पर बैठ गया । अब राजेश ने जगन को बुलाया ।

जगन - जी सर ।

राजेश - फर्श पर यह जो कॉफी फैली है, इसे साफ करो।

जगन ने फटाफट से फर्श साफ किया और टेबल पर रखी कॉफी को देख बोला - सर यह कॉफी ....

राजेश का ध्यान अब कॉफी पर गया - हम्म बहुत ही कड़वी है ।

, जगन - जी सर । आपके लिए दूसरी बना लाता हूं - कहते हुए वह जैसे ही उसे उठाने को हुआ कि तभी राजेश ने उसका हाथ पकड़ लिया और गुस्से में उसे देखते हुए बोला - कड़वी जरूर है पर ले जाने को नहीं बोला ।

जगन - सर फिर आप इसे पिएंगे कैसे ? हम इसे फेंक देते हैं और आपके लिए दूसरी बना लाते हैं ।

राजेश ने अब जगन को गुस्से में देखा तो उसने डर के मारे अपनी नजरें नीचे कर ली। राजेश ने अब एक पल को कॉफी को देखा और गहरी सांस लें अगले ही पल उसे उठा एक ही घूंट में पी गया ।

जगन हैरानी से राजेश को देखने लगा - सर आप की तबीयत तो ठीक है ना ? यह कड़वी कॉफी ....

राजेश (खींझते हुए) - तुमसे मतलब? कहते हुए उसने जगन केबिन से बाहर जाने का इशारा किया । जगन चुपचाप केबिन से बाहर चला गया।

दूसरी ओर विशाल के घर पर रिचा उसके आने का इंतजार कर रही थी । दोनों एक साथ घूमने जाने वाले थे कि तभी डोर बेल बजी , रिचा को लगा कि विशाल आ गया होगा । , वह खुशी से चहकते हुए दरवाजे तक पहुंची और फटाफट से खोल दिया लेकिन यह क्या ? सामने नैना थी।

साहिल ने नैना को बता दिया था कि रिचा विशाल के यहां ठहरी है तो नैना भी वही पहुंच गई। सामने नैना को यूं अचानक देख रिचा घबरा गई।

नैना ( मुस्कुराते हुए) - अंदर आने को नहीं कहोगी ?

रिचा (झेप कर ) - आओ ना।

नैना ने पूछा -। तुम यहां विशाल के घर?

रिचा (घबराते हुए) - वह राजेश ने कहा था कि वह मुझे यही से पिक करेगा - कहते हुए पास ही रखी कुर्सी पर बैठ गई ( रिचा अभी भी बिलकुल वैसी थी , एकदम पागल। बस एक्टिंग अच्छी कर लेती थी लेकिन आज तो वह एकदम अकेली थी नैना के सामने । अगर नैना को उसके झूठ का पता चल गया तो वे उसे छोडेगी नहीं )

रिचा मन ही मन नैना के जाने की प्रार्थना करने लगी । उसे चुपचाप देख नैना मुस्कुरा कर बोली - क्या हुआ, कहां खो , गई?

रिचा - नही, कुछ नहीं । राजेश और विशाल तो यहां है नहीं, अगर कुछ काम है तो बता दो ।

नैना अब आगे बढ़कर रिचा के बिल्कुल सामने बैठ गई और बोली - क्यों , तुम मेरी दोस्त नहीं हो क्या ? मैं तुमसे नहीं मिल सकती ?

रिचा - हां क्यों नहीं ?

अब अचानक से नैना रोने लगी - प्लीज रिचा, मेरी बात सुन लो एक बार।

रिचा नैना को रोता देख उदास हो गई - हां बोलो ।

नैना - प्लीज यार रिचा , राजेश से शादी करने से मना कर दे। दोस्त है मेरी तु, मेरे लिए इतना तो कर ही सकती है । मैं राजेश के बिना नहीं जी सकती ।

रिचा (हिचकिचाते हुए) - पर मैं भी तो राजेश के बिना नहीं जी सकती।

नैना - ऐसा कैसे हो सकता है ?

,

रिचा को अब याद आया कि एक बार राजेश ने कहा था कि नैना की बातों में मत आना कभी भी । वह बोली - नहीं यार, मैं राजेश से ही शादी करूंगी । मैं भी अब उसके बिना नहीं रह सकती ।

नैना ने शांत हो अपने आंसू पोंछे - क्या यह तुम्हारा आखिरी फैसला है ?

रिचा - हां यह मेरा आखिरी फैसला है।

नैना ने अपने कंधे पर से अपना बैग उतारा और उसकी चेन खोलते हुए बोली - तो ठीक है , इस परेशानी का अब एक ही हल है ।

रिचा (हैरानी से ) - क्या ?

नैना - ना तुम राजेश के बिना जी सकते हो और ना मैं तो क्यों ना हम एक साथ मर ही जाए - कहते हुए उसने अपने बैग में से एक बड़ा सा तेज धार वाला चाकू निकाला । सॉरी यार रिचा, अब कोई ऑप्शन नहीं है ।

रिचा नेजैसे ही नैना के हाथ में वह बड़ा सा चाकू देखा तो बुरी , तरह घबरा गई - यह यह क्या है ?

नैना (मुस्कुराते हुए ) - हमारी हर परेशानी का हल । राजेश को ना तुम छोड़ने को तैयार हो, ना मैं तो ऐसा करते हैं कि तीनों मर ही जाते हैं । जिंदा ना सही , हम मर कर तो साथ रहेंगे ।

रिचा डर कर कुर्सी से उठ खड़ी हुई - मतलब क्या है तुम्हारा?

नैना - मतलब साफ है यार कि मैं राजेश को छोड़ नहीं सकती पर वह तुम्हें पसंद करता है और अब तुम भी उसे पसंद करने लगी हो जो मैं सहन नहीं कर सकती इसलिए अब मैंने बहुत सोच समझ कर फैसला किया है कि पहले तुम्हें मारूंगी फिर ऑफिस पहुंचकर राजेश को और आखिर में खुद को भी खत्म कर लूंगी । सारा किस्सा एक साथ ही खत्म।

पहले मैं खुद को और राजेश को मारने वाली थी पर अब तुम भी राजेश से प्यार करने लगी हो और कहती हो कि उसके बिना नहीं जी पाओगी तो फिर तुम राजेश के बिना इस दुनिया में रह कर क्या करोगी इसलिए मरते मरते एक अच्छा काम कर चलूं और तुम्हें दर्द भरी जिंदगी जीने से आजाद कर दू - कहते हुए वह हाथ में चाकू लिए रिचा की ओर बढ , चली .....
 
नैना को अब यूं चाकू लेकर अपने करीब आता देख रिचा के होश उड़ गए - नैना यह क्या कर रही है यार मैं दोस्त हूं तेरी?

नैना (गुस्से में ) - दोस्त थी पर अब तुम सौतन बनने की कोशिश कर रही हो , काश तुम हमारे बीच कभी आई ही ना होती तो आज यह दिन ना देखना पड़ता लेकिन अब होनी को कौन टाल सकता है।

रिचा के गले से अब डर की वजह से आवाज भी नहीं निकल रही थी, वह बड़ी हिम्मत जुटा कर बोली - यार मेरी तो अभी शादी भी नहीं हुई है । अगर मैं मर जाऊंगी तो उसका क्या होगा ?

नैना (मुस्कुराते हुए) - कह तो रही हूं कि तुम्हें मारने के बाद राजेश को भी मारूंगी फिर वह भी तुम्हारे पास ही पहुंच जाएगा - कहते हुए उसने चाकू से रिचा पर हमला किया।

रिचा चीख कर पीछे हट गई - पा... पागल हो गई हो तुम? मुझे क्यों मार रही हो ? मारना है तो राजेश को मारो, मैंने क्या बिगाडा है तेरा यार ?

नैना - क्यों तुमने भी तो सगाई की थी ना राजेश से और वह भी यह जानते हुए कि वह मेरा प्यार है । अब मैं सोच रही हूं कि प्लान थोड़ा चेंज कर दूँ, बस तुम्हें ही मारती हूं । तुम मर जाओगी तो सारा झंझट ही खत्म हो जाएगा । राजेश को सहारा देने वाला भी तो कोई होना चाहिए उसके मंगेतर की मौत के गम में।

रिचा हैरानी से नैना को देखने लगी।

नैना (हसँते हुए) - हां यह ठीक रहेगा। अब यही करती हूँ।

रिचा अब डर से रोने लगी - अरे यार क्या बोले जा रही है तु? सम्भाल खुद को, मै तेरी स्कूल की प्यारी दोस्त हूँ। मारना है तो राजेश को मार, उसी नें गड़बड क़ी है यह। मैं नहीं मरना चाहती और ना ही प्यार करती हूँ उससे ।

नैना - तू झूठ बोल रही है बचने के लिए, रुक आज तुझे हमेशा के लिए रास्ते से हटा देती हूं - कहते हुए नैना ने रिचा का हाथ पकड़ लिया जिससे वह भागने ना पाए।

, जैसे ही नैना चाकू मारने को हुई कि रिचा ने नीचे बैठ उसके पैर पकड़ लिए और उसे अपनी जान की भीख मांगने लगी - यार मेरी कोई सगाई नहीं हुई है राजेश से , मेरी सगाई तो विशाल से हुई है । यह सब राजेश का प्लान था तुझे परेशान करने का । मैं चुपचाप दिल्ली चली जाऊंगी और राजेश से भी कह दूंगी कि मुझसे नाटक अब और नहीं होता। प्लीज यार मारना मत, मेरे विशाल की तो सोच , मैं तो बस दोस्ती निभा रही थी । सॉरी यार , माफ कर दे।

अब रिचा नैना के पकड़ कर रोने लगी कि तभी उसे नैना की हंसने की आवाज आई । उसने अपना चेहरा उठा कर देखा तो नैना उसे डरा सहमा देख जोरों से हंस रही थी ।

रिचा अब खडी हो गई - क्या हुआ नैना ? तू ठीक तो है ना?

नैना (हंसते हुए ) - तू भी ना अब तक झल्ली है ,तूने कैसे सोच लिया कि मैं किसी का खून भी कर सकती हूं ?

रिचा (हैरानी से ) - तो फिर यह गुस्सा और यह चाकू ?

नैना - तुझसे सच उगलवाने के लिए ।

रिचा को अब याद आया कि उसने डर में राजेश और उसकी , सगाई का सच नैना को बता दिया है ।

नैना (मुस्कराते हुए) - याद आया ? अब मेरी बात ध्यान से सुन। तू राजेश के साथ जैसे पहले एक्टिंग कर रही थी, ऐसे ही करते रहना। उसे बताना मत कि मैं तुम्हारे रिश्ते का सच जानती हूं वरना अगली बार चाकू सीधा तेरे पेट में जाएगा।

रिचा - यार कसम से कुछ नहीं बताऊंगी।

नैना - ठीक है , जा माफ किया।

रिचा - यार तू जब सच जान ही गयी है तो राजेश को बताने में क्या बुराई है ?

नैना - वो इसलिए कि अगर उसको पता चल गया कि मुझे तुम्हारे बारे में पता चल गया है तो वह अगली बार किसी और लड़की से भी नाटक कर सकता है इसलिए मैं नहीं चाहती कि कोई और मुसीबत गले पड़े । तू मुझे बस राजेश का प्लान बताते रहना और हां राजेश से थोड़ा दूरी बनाकर रहना वरना... - कहते हुए नैना रिचा को चाकू दिखाने लगी ।

रिचा (सहम कर ) - समझ गई यार । बस इस चाकू को दूर रख ।

,

नैना - ठीक है , अब आँसू पोंछ अपना चेहरा ठीक कर और जैसा मैं तुझ से कहूंगी , तू अब बिल्कुल वैसा ही करेगी।

उधर ऑफिस में राजेश परेशान से बैठा था कि नैना ठीक भी है या नहीं । वह बार-बार फोन उठाता और नैना का नंबर डायल करने की सोचता पर फिर अगले ही पल फोन वापस रख देता। इसी तरह पूरा दिन निकल गया।

अगले दिन जब सुबह राजेश ऑफिस जाने के लिए अपने घर से निकला तो गाड़ी के पास खडी नैना को देख हैरान रह गया - तुम यहां ?

नैना ( मुस्कुराते हुए) - दरअसल आज कोई टैक्सी ही नहीं मिल रही थी तो बड़ी मुश्किल से किसी से लिफ्ट ले यहां तक पहुंची हूं । सोचा कि जब हमारी मंजिल एक है तो रास्ता अलग अलग चुनने का क्या फायदा ? दोनों साथ में चलते हैं।

राजेश - हम्म, बात तो सही है तुम्हारी। वैसे जिस से लिफ्ट लेकर यहां तक आ सकती हो , उसी से लिफ्ट लेकर ऑफिस भी तो पहुंच सकती थी ना ?

नैना (मासूमियत से ) - पर वह तो अलग जगह पर जा रहा , था ना । मुश्किल से यहां तक छोड़ने को माना।

राजेश - मैं तुम्हारी सारी चालाकी समझ रहा हूं कि तुम क्या करना चाह रही हो ?

नैना (बनावटी गुस्सा करते हुए ) - तुम सच में कितने अजीब हो ? अरे तुम भी ऑफिस जा रहे हो और मैं भी , अगर मैं तुम्हारी गाड़ी में बैठ जाऊं तो कौन सा घिस जाएगी या फिर ऐसा तो नहीं कि रिचा ने मना किया है उसके अलावा किसी और लडकी को गाडी में बैठाने से -कहते हुए वह हँसने लगी।

राजेश -अजीब मैं हूं या तुम ? तुम कब से इस तरह की ऊँटपटांग हरकते करने लगी ? अगर तुम्हें लगता है कि इस तरह की हरकतों से तुम्हें कुछ हासिल हो जाएगा तो बता दूं कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा ।

नैना -तुम हर बात को इतना नेगेटिवली क्यों लेते हो ? यह बातें बाद में भी होती रहेंगी ,चलो ऑफिस के लिए लेट हो रहे हैं - कहते हुए नैना ने राजेश की कार का दरवाजा खोला पर वह लाँक था ।

नैना (राजेश की तरफ देखते हुए) - खोलो इसे ।

, राजेश गंभीर स्वर से बोला - बिल्कुल नहीं ।

नैना - मतलब ?

राजेश - तुम्हारे लिए ना मेरे दिल में कोई जगह है और ना ही गाड़ी में ।

नैना - राजेश तुम ...

राजेश - मैंने कह दिया ना । तुम मेरे साथ ऑफिस नहीं जा रही हो ।

नैना - पर ....

राजेश -नहीं मतलब नहीं ।

तभी उन्हें किसी गाड़ी के हार्न की आवाज सुनाई दी , दोनों ने अब उस ओर देखा तो कुछ ही दूरी पर अपनी गाड़ी में बैठा साहिल उन दोनों को देख मुस्कुरा रहा था । उसने गाड़ी में से ही नैना को आवाज दी - नैना , ऑफिस नहीं जाना है क्या?

यह सुनते ही राजेश और नैना अब एक दूसरे को देखने लगे।

, साहिल - नैना तुम्हारी और मेरी मंजिल एक ही है और रास्ता भी, चलो चलते हैं - कहते हुए वह राजेश को देख कुछ यूँ मुस्कुराया कि देख लो , तुम्हारे सामने से नैना को लेकर जा रहा हूं ।

नैना ने अब राजेश की ओर देखा तो वह चुपचाप खड़ा था।

नैना अब उदास होकर साहिल की ओर बढ़ी कि तभी राजेश बोला - रुको ।

नैना ने राजेश की ओर देखा तो वह बोला -तुम मेरे साथ ऑफिस जा रही हो , बैठो गाड़ी में ।

नैना (हैरानी से ) -पर अभी तो तुम...

राजेश (खींझते हुए) - अब कह रहा हूं ना - कहते हुए उसने गाड़ी का लॉक खोला और नैना को हाथ पकड़ गाड़ी में बैठा दिया ।

राजेश - 2 मिनट रुको, मैं अभी आया - कहते हुए वह मुस्कुराता हुआ साहिल के पास पहुंचा। साहिल गुस्से में राजेश को देख रहा था।

, राजेश - सॉरी दोस्त, तुम्हें अकेले ही अपनी मंजिल तक सफर तय करना होगा , नैना तो मेरे साथ ही जाएगी। तुम ऑफिस पहुंचो, वैसे भी लेट हो रहे हो - कहते हुए राजेश वापस अपनी गाड़ी में आकर बैठ गया।

नैना - अगर तुम्हें कुछ प्रॉब्लम है तो मैं साहिल के साथ...

राजेश (झल्लाते हुए ) - चुपचाप बैठी रहो गाड़ी में , चल रहा हूं ना कि राजेश ने गाड़ी स्टार्ट की और ऑफिस के लिए निकल गया ।

साहिल अभी भी अपनी गाड़ी में बैठा हुआ था - देख लेना राजेश, एक दिन नैना को तुम्हारी आंखों के सामने से ले जाऊंगा तब देखूंगा कि तुम क्या करोगे ?

रास्ते में नैना चुपचाप बैठी थी , वह कभी-कभी राजेश की ओर देखती तो उसके चेहरे पर दिख रहे गुस्से को देख चुप हो जाती ।

राजेश अब चुप्पी तोडते हुए बोला - ये साहिल मुझे कुछ ठीक नहीं लगता है , इससे थोड़ा दूर ही रहा करो ।

नैना राजेश को सवालिया नजरों से देखने लगी - क्यों , कुछ , परेशानी है?

राजेश - जितना कह रहा हूं , उतना सुनो । ऑफिस में इतने सारे लोग हैं - सारा है, विशाल है और भी हैं पर तुम्हें बस साहिल नजर आता है ।

नैना - गलत , मुझे हर वक्त साहिल नहीं तुम नजर आते हो पर तुम्हें यह नजर कहां आता है ?

राजेश (गुस्से से) - तो ठीक है , मत घूमा करो मेरे आस-पास। आई डोंट लाइक इट।

नैना अब जोर से हंसने लगी, उसे यू हंसता देख राजेश ने सड़क किनारे गाड़ी रोक ले और बोला - हंस क्यों रही हो?

नैना हंसी को रोकने की कोशिश करते हुए बोली - लोग सही कहते हैं कि दुनिया गोल है ।

राजेश अब हैरानी से नैना को देखने लगा - मतलब?

नैना - मतलब यह है कि देखो ना समय के साथ साथ कितना कुछ बदल जाता है । पहले कॉलेज में तो हमेशा मेरे , आसपास घूमते थे और मैं परेशान होती थी पर अब मैं तुम्हारे आसपास घूमती हूं तो तुम्हें परेशानी होती है लेकिन मुझे ऐसा बनाया किसने ? तुमने ना। तो तुम्हें तो झेलना ही पड़ेगा मुझे।

वैसे तुम भी कहां माने थे कॉलेज में , जो अब मैं मान जाऊंगी।

राजेश बस चुपचाप नैना की ओर देखे जा रहा था । अब नैना के चेहरे से हंसी गायब हो गई और उसकी जगह एक दर्द ने ले ली जिसे वो आजकल महसूस कर रही थी राजेश की खुद से नाराजगी की वजह से ।

नैना ने अब राजेश की ओर देखा और बोली - समझ नहीं आता कि कोई इंसान इतना कैसे बदल सकता है ? तुम्हें याद है ,एक बार मैं तुम्हें कॉलेज में ढूंढ रही थी और तुम अचानक से मेरे सामने आ गए थे । मैं घबरा कर गिर गई और मेरे हाथ में चोट आई थी । तब तुम ही थे जिसकी आंखों से आंसू आ गए थे सिर्फ इतना सोचते ही कि मेरी तकलीफ की वजह तुम हो लेकिन आज मुझे इस तरह नजरअंदाज कर तुम मुझे कितनी तकलीफ दे रहे हो, इस बात का तुम्हें जरा भी अंदाजा नहीं है ।
 
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