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नैना ने जब सामने देखा तो चौक पड़ी - आप... आप कौन हैं? और यहां क्या कर रहे हैं - कहते हुए नैना अब सामने खड़े अनजान शख्स से दूर हट गई। नैना के सामने एक अनजान शख्स खड़ा था, उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कुराहट थी ।
वह बोला - माफ कीजिएगा, मेरा मकसद आप को डराना नहीं था । मैं तो खुद एक परेशान इंसान हूं जो भटकते हुए यहां पहुंच गया ।
नैना ( हैरानी से ) - भटकते हुए ? आप बच्चे तो है नहीं कि भटकते हुए यहां पहुंच गए , आपको बिल्डिंग के अंदर किसने आने दिया? रूकिए, मैं सिक्योरिटी को बुलाती हूं - कहते हुए नैना जैसे ही इन्वेंटरी से बाहर जाने को हुई कि उस इंसान ने उसका रास्ता रोक लिया - अरे मेरी बात तो सुनिए, दरअसल मैं यहां इंटरव्यू के लिए आया हूं पर मुझसे एड्रेस खो गया। बिल्डिंग का नाम पता था तो यहां पहुंच गया पर यहां कोई दिखाई नहीं दिया जिससे मदद ले सकूं कि तभी आप पर नजर पड़ी तो आपके पीछे पीछे आ गया।
यहां आप बहुत बिजी थी तो चुपचाप खड़ा हो गया कि जब आपका काम हो जाएगा, तब आप से सवाल पूछ लूंगा पर आप तो अचानक से घबरा गई मुझे देख कर और यह सब हो गया ।
नैना - अच्छा ठीक है । बताइए, कहां है इंटरव्यू आपका ? मैं मदद करती हूं ।
अब वह अनजान लड़का मुस्कुराते हुए बोला - मिस्टर राजेश मल्होत्रा है कंपनी के मालिक, उन्हीं के ऑफिस में आज मेरा इंटरव्यू है ।
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नैना (मुस्कुराते हुए ) - ठीक है तो चलिए फिर, मैं उसी ऑफिस में काम करती हूं ।
यह सुन वह शख्स बोला - यह तो बहुत अच्छा हुआ , मुझे ऑफिस में अब ज्यादा अजीब नहीं लगेगा क्योंकि वहां मेरी दोस्त जो है तो वह है ना मेरी हेल्प करने के लिए।
नैना - कौन ? किसकी बात कर रहे हैं आप मिस्टर .....
वह शख्स मुस्कुराते हुए बोला - मेरा नाम साहिल है और मैं आपकी बात कर रहा हूं ।आपने मेरी मदद की एड्रेस में और मैंने आपको गिरने से बचाया तो हम दोनों ही एक दूसरे की मुसीबत में काम आए और दोस्त ही तो दोस्त की मुसीबत में काम आते हैं इसलिए मैंने आपको दोस्ती का दर्जा दे दिया मिस....
नैना - नैना नाम है मेरा, बात तो अच्छी बना लेते हैं तो चलिए।
नैना और साहिल अब ऑफिस पहुंचे तो साहिल थोड़ा नर्वस होने लगा ।
, नैना - क्या हुआ?
साहिल - कुछ नहीं , टेंशन है कि जॉब मिलेगी या नहीं ?
नैना ने उसका रिज्यूम चेक किया और मुस्कुरा कर बोली - आप अपने काम में बहुत एक्सपर्ट है , टेंशन मत लो। आपको जाँब जरूर मिलेगी ।
साहिल - अच्छा तो फिर बेस्ट ऑफ लक तो कहो? कहते हैं कि कब किस की दुआ कहां काम आ जाए और हम दोस्त हैं तो तुम मुझे आप नही कहो वरना अजनबी वाली फीलिंग आती है।
नैना मन ही मन सोचने लगी - ( कितना बोलता है ये, अभी मिले 10 मिनट भी नहीं हुए कि इसने मुझ से दोस्ती कर ली और मुझे पता ही ना चला।) अच्छा , ठीक है । ऑल द बेस्ट।
साहिल - थैंक्स नैना ,अब थोड़ा ठीक लग रहा है ।
राजेश किसी काम से कैबिन सेबाहर निकला तो देखा कि नैना किसी से बात कर रही है , कौन हो सकता है ? यह सोच वह दोनों के करीब पहुंचा कि उसके आने की आहट सुन नैना और साहिल राजेश की ओर मुडे।
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साहिल और राजेश ने जैसे ही एक दूसरे को देखा तो पहले तो हैरान रह गए फिर आगे बढ़कर दोनों ने एक दूसरे को गले से लगा लिया । यह देख नैना चौक गई कि भला साहिल और राजेश एक दूसरे को कैसे जानते हैं ?
राजेश - थैंक यू सो मच उस दिन के लिए, उस दिन मैं जल्दबाजी में था इसलिए तुमसे बात भी ना कर पाया । अगर तुम नहीं होते पता नहीं मेरा क्या होता ?
साहिल - अरे नहीं , ऐसा कुछ भी नहीं है । यह तो मेरा फर्ज था , तुम्हें याद है मैंने कहा था कि अगर किस्मत में होगा तो जरूर मिलेंगे और देखो हम आज यहां हैं।
राजेश (मुस्कुराकर ) - बिल्कुल पर तुम यहां कैसे ?
साहिल - वो मैं राजेश मल्होत्रा की .....1 मिनट कहीं यह तुम्हारी कंपनी तो नहीं है ? तुम भी तो राजेश हो ।
राजेश - हां यह मेरी कंपनी है ।
साहिल - कमाल हो गया, मेरा तो यहां इंटरव्यू है ।
, राजेश - अच्छा तो फिर ठीक है , ऑल द बेस्ट।
साहिल - थैंक्स।
राजेश नैना की ओर मुडा - मिस शर्मा आप इनके साथ ?
साहिल - वह मैं बताता हूं । दरअसल मुझसे यहां का एड्रेस खोया था और मुझे यह नीचे ग्राउंड फ्लोर पर मिली तो मुझे यही यहां तक लेकर आईं, बहुत अच्छी है यह दिल की और अब तो हम दूसरे के दोस्त बन गए हैं ।
राजेश अब नैना को शिकायत भरी नजरों से देखने लगा , नैना ने राजेश को इग्नोर कर दिया और साहिल को साथ ले एडमिन डिपार्टमेंट की ओर बढ़ गई । राजेश उसे खुद को इस तरह इग्नोर करता देख हैरान रह गया कि नैना ने मुझे इस तरह इग्नोर क्यों किया? उसे अब साहिल से थोड़ा इनसिक्योरिटी महसूस हुई कि कहीं इस लड़के की जिंदादिली नैना का दिल ना जीत ले (विशाल से तो उसकी बात दिल्ली में हो चुकी थी, वह विशाल को प्यार मिले इंकार के बारे में भी जानता था ) या फिर नैना की सादगी साहिल का दिल न जीत ले?
राजेश काफी देर तक वहीं खड़ा रहा कि इतने मे रिचा आ गई , - क्या हुआ ?
राजेश - नहीं ,कुछ नहीं ।
रिचा - वह लडका कौन है जो नैना के साथ गया है हम एक लड़की को जाते देखा कौन था वह ?
राजेश - साहिल नाम है उसका, इंटरव्यू के लिए आया है ।
रिचा - नैना और वह दोनों अच्छे दिख रहे थे ना साथ में।
राजेश ने अब गुस्से से रिचा की ओर देखा फिर बिना कोई जवाब दिए वहां से चला गया ।
रिचा - इसे क्या हुआ?
साहिल का इंटरव्यू हो चुका था और सेलेक्ट भी कर लिया गया था , कल से उसे ऑफिस ज्वाइन करना था , वह बहुत खुश हुआ कि ऑफिस में उसे नैना, राजेश जैसे दोस्त मिल गए थे।
नैना अब अपनी टेबल पर बैठी थी , राजेश का कैबिन ठीक उसके सामने था। कैबिन का दरवाजा खुला हुआ था , रिचा , राजेश से कुछ बात कर रही थी पर वह कहीं खोया हुआ था। उसे देखकर साफ पता चल रहा था कि रिचा की बातों को नहीं सुन रहा था कि तभी अचानक से राजेश की नजर नैना
पर पड़ी ।
यह देख नैना ने झट से अपनी नजर नीचे कर ली पर राजेश अभी भी शांत भाव से नैना को लगातार देखे जा रहा था । नैना को यह अजीब लग रहा था क्योंकि राजेश अब रिचा का मंगेतर था पर फिर भी उसका ध्यान नैना पर ही और था पता नहीं क्या चल रहा था उसके दिमाग में ?
नैना को पीछे से किसी ने पुकारा, नैना ने मुड़कर देखा तो रिया सामने खड़ी थी - क्या हुआ नैना ? थोड़ी परेशान हो।
नैना - नहीं तो , ऐसा कुछ भी नहीं है ।बस थोड़ा काम का प्रेशर है ।
रिया (मुस्कुराकर) - हां बिल्कुल क्योंकि भाई के नाम का प्रेशर तो अब तुम्हारी जिंदगी से हमेशा के लिए दूर जा चुका है, भाई ने आगे बढ़ने का फैसला जो किया है पर देखो ना नैना भाई खुश नहीं है ।
नैना ने राजेश की ओर देखा तो वह चुपचाप कहीं खोया हुआ , सा बैठा था और रिचा लगातार उससे हंस हंस के बात की जा रही थी । यह देख नैना का चेहरा उतर गया ।
रिया - वैसे खुश तो तुम भी नहीं लग रही हो नैना ?
नैना - ऐसा कुछ नहीं है रिया, मैं खुश हूं राजेश और रिचा दोनों के लिए ।
रिया - चलो अच्छा है पर मैं बाकी तुम लोगों की तरह नहीं हूं जो दिल में कुछ और बाहर कुछ रखते हैं।
नैना अब रिचा को रिया को सवालिया नजरों से देखने लगी - कहना क्या चाहती हो ?
रिया - बस इतना कि मुझे रिचा पसंद नहीं है । मुझे अपने भाई के लिए तुम परफेक्ट लगती हो , काश तुम मेरी भाभी होती ।
नैना - रिया प्लीज , मेरे ख्याल से तुम्हें राजेश के फैसले की इज्जत करनी चाहिए। रिचा बहुत ही अच्छी लड़की है । वह खुश रखेगी तुम्हारे भाई को।
रिया (खींझते हुए ) - तुम क्यों नहीं समझती हो जो मैं कहना , चाहती हूं । तुम्हारी आंखों मैं साफ दिखाई देता है कि तुम भाई से कितना प्यार करती हो लेकिन फिर भी अगर कभी भी तुम्हें किसी भी तरह की हेल्प की जरूरत हो तो मुझे याद कर सकती हो। फिलहाल मैं किसी जरूरी काम से दिल्ली जा रही हूं - कहते हुए रिया वहाँ से चली गई।
नैना को अब याद आया कि उसे भी मां को रेलवे स्टेशन छोड़ना है , वह जल्दी से अपना बैग ले ऑफिस से बाहर की ओर से भागी। वो टैक्सी का वेट कर ही रही थी कि पीछे से विशाल ने पुकारा - नैना आ जाओ , अभी मैं घर ही जा रहा हूं तो आपको घर छोड़ दूंगा ।
नैना वैसे ही काफी लेट हो चुकी थी तो वह विशाल के साथ उसकी गाड़ी में बैठ गई , तभी जगन कुछ फाईल्स लेकर पीछे वाली सीट पर रख गया।
नैना - ये क्या है ?
विशाल - कुछ प्रोजेक्ट्स की जरूरी फाइल्स है , राजेश के घर रखनी है ।
नैना - वहां क्यों ?
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विशाल - क्योंकि राजेश को जो भी फाइल बहुत ज्यादा जरूरी लगती है , उन्हें अपने घर रखता है यहां नहीं ।
नैना को अब समझ में आया कि क्यों उसे यहाँ अपनी फाइल नहीं मिली । राजेश ने उसे जब इन्वेंटरी में काम दिया था तो शायद उससे पहले ही वह फाइल वहां से हट वाली होगी ।
नैना - विशाल मै जब इन्वेंटरी में काम कर रही थी तो मैंने नोटिस किया कि कुछ फाइल्स मिसिंग है तो क्या वह भी राजेश सर के घर पर ही होंगी ?
विशाल - हां, राजेश ने कई फाइल्स वहां से निकलवाई थी, वैसे तुम क्यों पूछ रही हो ?
नैना (मुस्कुराते हुए) - नहीं , बस यूं ही ।
उसे समझ आ गया था कि अगर उसे सब कुछ सही करना है तो पहले राजेश के घर से वह अपनी वाली फाइल गायब करनी होगी ।
विशाल - नैना , अगर हम पहले राजेश के घर चल फाईल्स रखें और फिर मैं आपको घर ड्राप करू तो कोई प्रॉब्लम तो , नहीं होगी क्योंकि यह बहुत जरूरी फाइल्स है , इधर से उधर हुई तो राजेश मुझे छोड़ेगा नहीं।
नैना की तो जैसे मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई - नहीं आप पहले यह काम कर लें।
विशाल - थैंक्स नैना - कहते हुए विशाल गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ चला।
नैना ने माँ को फोन किया - हेलो , मैं कह रही थी कि आज जरा काम में फंस गई हूं तो आप ऐसा करिए कि आज रात और रुक जाइए। मैं कल आपको दिल्ली के लिए छोड़ दूंगी।
रेखा जी - ठीक है बेटा , आज वो कई दिनों बाद खुश थी क्योंकि अपनी बेटी के साथ उन्हें कुछ समय और नसीब होगा एक साथ बिताने को ।
कुछ ही समय में विशाल और नैना राजेश के घर के बाहर थे, विशाल ने सारी फाइल्स उठाई और नैना के साथ राजेश के घर के दरवाजे की ओर बढ़ दिए। विशाल ने अपनी जेब से चाबी निकाल दरवाजा खोला और दोनों घर के अंदर पहुँचे।
नैना उस घर को निहारने लगी , वह घर बहुत ही खूबसूरत , था, वहां नैना को एक अजीब तरह का सुकून मिल रहा था कि तभी उसका ध्यान विशाल की ओर गया ।
विशाल - आओ नैना , आप पहली बार यहां आई है तो मैं आपको आपके बाँस का घर दिखा दूँ (हंसते हुए) - तो यह ड्राइंग रूम और उधर राजेश का स्टडी रूम है। उसका कमरा ऊपर है । स्टडी रूम में राजेश का सबसे ज्यादा समय गुजरता है , विशाल नैना को राजेश के स्टडी रूम में ले गया। नैना ने देखा कि वहाँ कई फाईल्स एक बड़ी सी रैक प करीने से रखी हुई थी , विशाल ने अपने साथ लाई फाईल्स भी वही रख दी ।
और यह देखो सामने किचन है - कहते हुए विशाल नैना को किचन में ले गया । अभी विशाल और नैना आपस में बात कर ही रहे थे कि तभी विशाल को किसी का फोन आया।
विशाल - नैना 1 मिनट, मैं अभी आया - कहते हुए बाहर ड्राइंग रूम में चला गया ।
वह बोला - माफ कीजिएगा, मेरा मकसद आप को डराना नहीं था । मैं तो खुद एक परेशान इंसान हूं जो भटकते हुए यहां पहुंच गया ।
नैना ( हैरानी से ) - भटकते हुए ? आप बच्चे तो है नहीं कि भटकते हुए यहां पहुंच गए , आपको बिल्डिंग के अंदर किसने आने दिया? रूकिए, मैं सिक्योरिटी को बुलाती हूं - कहते हुए नैना जैसे ही इन्वेंटरी से बाहर जाने को हुई कि उस इंसान ने उसका रास्ता रोक लिया - अरे मेरी बात तो सुनिए, दरअसल मैं यहां इंटरव्यू के लिए आया हूं पर मुझसे एड्रेस खो गया। बिल्डिंग का नाम पता था तो यहां पहुंच गया पर यहां कोई दिखाई नहीं दिया जिससे मदद ले सकूं कि तभी आप पर नजर पड़ी तो आपके पीछे पीछे आ गया।
यहां आप बहुत बिजी थी तो चुपचाप खड़ा हो गया कि जब आपका काम हो जाएगा, तब आप से सवाल पूछ लूंगा पर आप तो अचानक से घबरा गई मुझे देख कर और यह सब हो गया ।
नैना - अच्छा ठीक है । बताइए, कहां है इंटरव्यू आपका ? मैं मदद करती हूं ।
अब वह अनजान लड़का मुस्कुराते हुए बोला - मिस्टर राजेश मल्होत्रा है कंपनी के मालिक, उन्हीं के ऑफिस में आज मेरा इंटरव्यू है ।
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नैना (मुस्कुराते हुए ) - ठीक है तो चलिए फिर, मैं उसी ऑफिस में काम करती हूं ।
यह सुन वह शख्स बोला - यह तो बहुत अच्छा हुआ , मुझे ऑफिस में अब ज्यादा अजीब नहीं लगेगा क्योंकि वहां मेरी दोस्त जो है तो वह है ना मेरी हेल्प करने के लिए।
नैना - कौन ? किसकी बात कर रहे हैं आप मिस्टर .....
वह शख्स मुस्कुराते हुए बोला - मेरा नाम साहिल है और मैं आपकी बात कर रहा हूं ।आपने मेरी मदद की एड्रेस में और मैंने आपको गिरने से बचाया तो हम दोनों ही एक दूसरे की मुसीबत में काम आए और दोस्त ही तो दोस्त की मुसीबत में काम आते हैं इसलिए मैंने आपको दोस्ती का दर्जा दे दिया मिस....
नैना - नैना नाम है मेरा, बात तो अच्छी बना लेते हैं तो चलिए।
नैना और साहिल अब ऑफिस पहुंचे तो साहिल थोड़ा नर्वस होने लगा ।
, नैना - क्या हुआ?
साहिल - कुछ नहीं , टेंशन है कि जॉब मिलेगी या नहीं ?
नैना ने उसका रिज्यूम चेक किया और मुस्कुरा कर बोली - आप अपने काम में बहुत एक्सपर्ट है , टेंशन मत लो। आपको जाँब जरूर मिलेगी ।
साहिल - अच्छा तो फिर बेस्ट ऑफ लक तो कहो? कहते हैं कि कब किस की दुआ कहां काम आ जाए और हम दोस्त हैं तो तुम मुझे आप नही कहो वरना अजनबी वाली फीलिंग आती है।
नैना मन ही मन सोचने लगी - ( कितना बोलता है ये, अभी मिले 10 मिनट भी नहीं हुए कि इसने मुझ से दोस्ती कर ली और मुझे पता ही ना चला।) अच्छा , ठीक है । ऑल द बेस्ट।
साहिल - थैंक्स नैना ,अब थोड़ा ठीक लग रहा है ।
राजेश किसी काम से कैबिन सेबाहर निकला तो देखा कि नैना किसी से बात कर रही है , कौन हो सकता है ? यह सोच वह दोनों के करीब पहुंचा कि उसके आने की आहट सुन नैना और साहिल राजेश की ओर मुडे।
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साहिल और राजेश ने जैसे ही एक दूसरे को देखा तो पहले तो हैरान रह गए फिर आगे बढ़कर दोनों ने एक दूसरे को गले से लगा लिया । यह देख नैना चौक गई कि भला साहिल और राजेश एक दूसरे को कैसे जानते हैं ?
राजेश - थैंक यू सो मच उस दिन के लिए, उस दिन मैं जल्दबाजी में था इसलिए तुमसे बात भी ना कर पाया । अगर तुम नहीं होते पता नहीं मेरा क्या होता ?
साहिल - अरे नहीं , ऐसा कुछ भी नहीं है । यह तो मेरा फर्ज था , तुम्हें याद है मैंने कहा था कि अगर किस्मत में होगा तो जरूर मिलेंगे और देखो हम आज यहां हैं।
राजेश (मुस्कुराकर ) - बिल्कुल पर तुम यहां कैसे ?
साहिल - वो मैं राजेश मल्होत्रा की .....1 मिनट कहीं यह तुम्हारी कंपनी तो नहीं है ? तुम भी तो राजेश हो ।
राजेश - हां यह मेरी कंपनी है ।
साहिल - कमाल हो गया, मेरा तो यहां इंटरव्यू है ।
, राजेश - अच्छा तो फिर ठीक है , ऑल द बेस्ट।
साहिल - थैंक्स।
राजेश नैना की ओर मुडा - मिस शर्मा आप इनके साथ ?
साहिल - वह मैं बताता हूं । दरअसल मुझसे यहां का एड्रेस खोया था और मुझे यह नीचे ग्राउंड फ्लोर पर मिली तो मुझे यही यहां तक लेकर आईं, बहुत अच्छी है यह दिल की और अब तो हम दूसरे के दोस्त बन गए हैं ।
राजेश अब नैना को शिकायत भरी नजरों से देखने लगा , नैना ने राजेश को इग्नोर कर दिया और साहिल को साथ ले एडमिन डिपार्टमेंट की ओर बढ़ गई । राजेश उसे खुद को इस तरह इग्नोर करता देख हैरान रह गया कि नैना ने मुझे इस तरह इग्नोर क्यों किया? उसे अब साहिल से थोड़ा इनसिक्योरिटी महसूस हुई कि कहीं इस लड़के की जिंदादिली नैना का दिल ना जीत ले (विशाल से तो उसकी बात दिल्ली में हो चुकी थी, वह विशाल को प्यार मिले इंकार के बारे में भी जानता था ) या फिर नैना की सादगी साहिल का दिल न जीत ले?
राजेश काफी देर तक वहीं खड़ा रहा कि इतने मे रिचा आ गई , - क्या हुआ ?
राजेश - नहीं ,कुछ नहीं ।
रिचा - वह लडका कौन है जो नैना के साथ गया है हम एक लड़की को जाते देखा कौन था वह ?
राजेश - साहिल नाम है उसका, इंटरव्यू के लिए आया है ।
रिचा - नैना और वह दोनों अच्छे दिख रहे थे ना साथ में।
राजेश ने अब गुस्से से रिचा की ओर देखा फिर बिना कोई जवाब दिए वहां से चला गया ।
रिचा - इसे क्या हुआ?
साहिल का इंटरव्यू हो चुका था और सेलेक्ट भी कर लिया गया था , कल से उसे ऑफिस ज्वाइन करना था , वह बहुत खुश हुआ कि ऑफिस में उसे नैना, राजेश जैसे दोस्त मिल गए थे।
नैना अब अपनी टेबल पर बैठी थी , राजेश का कैबिन ठीक उसके सामने था। कैबिन का दरवाजा खुला हुआ था , रिचा , राजेश से कुछ बात कर रही थी पर वह कहीं खोया हुआ था। उसे देखकर साफ पता चल रहा था कि रिचा की बातों को नहीं सुन रहा था कि तभी अचानक से राजेश की नजर नैना
पर पड़ी ।
यह देख नैना ने झट से अपनी नजर नीचे कर ली पर राजेश अभी भी शांत भाव से नैना को लगातार देखे जा रहा था । नैना को यह अजीब लग रहा था क्योंकि राजेश अब रिचा का मंगेतर था पर फिर भी उसका ध्यान नैना पर ही और था पता नहीं क्या चल रहा था उसके दिमाग में ?
नैना को पीछे से किसी ने पुकारा, नैना ने मुड़कर देखा तो रिया सामने खड़ी थी - क्या हुआ नैना ? थोड़ी परेशान हो।
नैना - नहीं तो , ऐसा कुछ भी नहीं है ।बस थोड़ा काम का प्रेशर है ।
रिया (मुस्कुराकर) - हां बिल्कुल क्योंकि भाई के नाम का प्रेशर तो अब तुम्हारी जिंदगी से हमेशा के लिए दूर जा चुका है, भाई ने आगे बढ़ने का फैसला जो किया है पर देखो ना नैना भाई खुश नहीं है ।
नैना ने राजेश की ओर देखा तो वह चुपचाप कहीं खोया हुआ , सा बैठा था और रिचा लगातार उससे हंस हंस के बात की जा रही थी । यह देख नैना का चेहरा उतर गया ।
रिया - वैसे खुश तो तुम भी नहीं लग रही हो नैना ?
नैना - ऐसा कुछ नहीं है रिया, मैं खुश हूं राजेश और रिचा दोनों के लिए ।
रिया - चलो अच्छा है पर मैं बाकी तुम लोगों की तरह नहीं हूं जो दिल में कुछ और बाहर कुछ रखते हैं।
नैना अब रिचा को रिया को सवालिया नजरों से देखने लगी - कहना क्या चाहती हो ?
रिया - बस इतना कि मुझे रिचा पसंद नहीं है । मुझे अपने भाई के लिए तुम परफेक्ट लगती हो , काश तुम मेरी भाभी होती ।
नैना - रिया प्लीज , मेरे ख्याल से तुम्हें राजेश के फैसले की इज्जत करनी चाहिए। रिचा बहुत ही अच्छी लड़की है । वह खुश रखेगी तुम्हारे भाई को।
रिया (खींझते हुए ) - तुम क्यों नहीं समझती हो जो मैं कहना , चाहती हूं । तुम्हारी आंखों मैं साफ दिखाई देता है कि तुम भाई से कितना प्यार करती हो लेकिन फिर भी अगर कभी भी तुम्हें किसी भी तरह की हेल्प की जरूरत हो तो मुझे याद कर सकती हो। फिलहाल मैं किसी जरूरी काम से दिल्ली जा रही हूं - कहते हुए रिया वहाँ से चली गई।
नैना को अब याद आया कि उसे भी मां को रेलवे स्टेशन छोड़ना है , वह जल्दी से अपना बैग ले ऑफिस से बाहर की ओर से भागी। वो टैक्सी का वेट कर ही रही थी कि पीछे से विशाल ने पुकारा - नैना आ जाओ , अभी मैं घर ही जा रहा हूं तो आपको घर छोड़ दूंगा ।
नैना वैसे ही काफी लेट हो चुकी थी तो वह विशाल के साथ उसकी गाड़ी में बैठ गई , तभी जगन कुछ फाईल्स लेकर पीछे वाली सीट पर रख गया।
नैना - ये क्या है ?
विशाल - कुछ प्रोजेक्ट्स की जरूरी फाइल्स है , राजेश के घर रखनी है ।
नैना - वहां क्यों ?
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विशाल - क्योंकि राजेश को जो भी फाइल बहुत ज्यादा जरूरी लगती है , उन्हें अपने घर रखता है यहां नहीं ।
नैना को अब समझ में आया कि क्यों उसे यहाँ अपनी फाइल नहीं मिली । राजेश ने उसे जब इन्वेंटरी में काम दिया था तो शायद उससे पहले ही वह फाइल वहां से हट वाली होगी ।
नैना - विशाल मै जब इन्वेंटरी में काम कर रही थी तो मैंने नोटिस किया कि कुछ फाइल्स मिसिंग है तो क्या वह भी राजेश सर के घर पर ही होंगी ?
विशाल - हां, राजेश ने कई फाइल्स वहां से निकलवाई थी, वैसे तुम क्यों पूछ रही हो ?
नैना (मुस्कुराते हुए) - नहीं , बस यूं ही ।
उसे समझ आ गया था कि अगर उसे सब कुछ सही करना है तो पहले राजेश के घर से वह अपनी वाली फाइल गायब करनी होगी ।
विशाल - नैना , अगर हम पहले राजेश के घर चल फाईल्स रखें और फिर मैं आपको घर ड्राप करू तो कोई प्रॉब्लम तो , नहीं होगी क्योंकि यह बहुत जरूरी फाइल्स है , इधर से उधर हुई तो राजेश मुझे छोड़ेगा नहीं।
नैना की तो जैसे मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई - नहीं आप पहले यह काम कर लें।
विशाल - थैंक्स नैना - कहते हुए विशाल गाड़ी स्टार्ट कर आगे बढ़ चला।
नैना ने माँ को फोन किया - हेलो , मैं कह रही थी कि आज जरा काम में फंस गई हूं तो आप ऐसा करिए कि आज रात और रुक जाइए। मैं कल आपको दिल्ली के लिए छोड़ दूंगी।
रेखा जी - ठीक है बेटा , आज वो कई दिनों बाद खुश थी क्योंकि अपनी बेटी के साथ उन्हें कुछ समय और नसीब होगा एक साथ बिताने को ।
कुछ ही समय में विशाल और नैना राजेश के घर के बाहर थे, विशाल ने सारी फाइल्स उठाई और नैना के साथ राजेश के घर के दरवाजे की ओर बढ़ दिए। विशाल ने अपनी जेब से चाबी निकाल दरवाजा खोला और दोनों घर के अंदर पहुँचे।
नैना उस घर को निहारने लगी , वह घर बहुत ही खूबसूरत , था, वहां नैना को एक अजीब तरह का सुकून मिल रहा था कि तभी उसका ध्यान विशाल की ओर गया ।
विशाल - आओ नैना , आप पहली बार यहां आई है तो मैं आपको आपके बाँस का घर दिखा दूँ (हंसते हुए) - तो यह ड्राइंग रूम और उधर राजेश का स्टडी रूम है। उसका कमरा ऊपर है । स्टडी रूम में राजेश का सबसे ज्यादा समय गुजरता है , विशाल नैना को राजेश के स्टडी रूम में ले गया। नैना ने देखा कि वहाँ कई फाईल्स एक बड़ी सी रैक प करीने से रखी हुई थी , विशाल ने अपने साथ लाई फाईल्स भी वही रख दी ।
और यह देखो सामने किचन है - कहते हुए विशाल नैना को किचन में ले गया । अभी विशाल और नैना आपस में बात कर ही रहे थे कि तभी विशाल को किसी का फोन आया।
विशाल - नैना 1 मिनट, मैं अभी आया - कहते हुए बाहर ड्राइंग रूम में चला गया ।