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उलझन मोहब्बत की

उस दिन अनजान में दर्द दिया तो इतना मलाल था और आज तुम जानबूझकर मुझे दर्द पर दर्द दिए जा रहे हो फिर , अब क्यों महसूस नहीं होती तुम्हें मेरी तकलीफ ।

नैना को इस कदर उदास देख राजेश के चेहरे पर भी अब दर्द उभर आया और जैसे ही गाड़ी स्टार्ट करने को हुआ तो नैना ने उसका हाथ पकड लिया।

नैना - मुझसे प्यार तो करते हो ना ?

राजेश दो पल खामोश रहा फिर मुस्कुराते हुए बोला - प्यार से भरोसा उठ गया है मेरा । नैना सच तो यह है कि अब मैं कभी भी किसी से प्यार नहीं कर पाऊंगा । मैं समझ चुका हूं कि प्यार एक ऐसा एहसास है जो अच्छे से अच्छे इंसान को कमजोर बना देता है और उसे तब तक तोड़ता है जब तक उस इंसान की आत्मा ना मर जाए।

अब हम दोनों को ही देख लो , हम दोनों पहले कैसे थे? लेकिन आज कैसे हैं ? मैं भले ही पहले अकेला था पर खुश था फिर तुम मेरी जिंदगी में आई तो लगा कि एक कमी जो जिंदगी में थी , वह भी पूरी हो गई लेकिन फिर तुम चली गई मुझे दर्द में तड़पता छोड़ । यह सुन नैना ने अपनी नजरें नीचे कर ली।

नैना - राज मैं....

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राजेश - हां जानता हूं कि कुछ मजबूरी थी पर उससे दर्द तो कम नहीं हो सकता ना । वजह चाहे जो कुछ भी हो पर धोखा धोखा ही होता है। जिस दिन तुम मुझे छोड़ कर गई, उस दिन से लेकर आज तक मैं कभी चैन से सो नहीं पाया । मेरी छोडो, खुद को ही देख लो। तुम्हें क्या मिला प्यार में ? जो लड़की कभी अपने आत्मसम्मान के लिए सबसे लड़ जाती थी पर वही लड़की अपने प्यार को धोखा देकर अपने ही शहर को छोड़कर सब से दूर यहां है ।

मैं समझ सकता हूं कि तुम्हारे लिए भी यह सब इतना आसान नहीं रहा होगा , तुम भी तो खुश नहीं हो आज यहां इसलिए कह रहा हूं छोड़ दो जिद। इस प्यार में कुछ भी नहीं है सिवाय दर्द के - कहते हुए राजेश चुप हो गया।

नैना ने राजेश को खामोश देखा तो बोली - क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम दोनों अपने प्यार को एक मौका और दे ?

राजेश ने अब नैना को एक पल को देखा फिर अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ा लिया - नहीं , ऐसा नहीं हो सकता । तुम्हारे धोखे ने मुझे इस कदर तोड़ दिया है कि प्यार शब्द से ही डर लगने लगता है । मेरा दिल और दिमाग तुम्हारे बारे में एक जैसा नहीं सोच पा रहे हैं । दिल कहता है कि तुम पर , भरोसा करूं पर दिमाग इसकी इजाजत नहीं देता । मैंने हर बार अपने दिल की ही सुनी और देखो आज यहां किस हाल में हूं इसलिए इस बार मैं सिर्फ और सिर्फ अपने दिमाग की सुनूंगा और यही मेरा फैसला है कि तुम मेरी जिंदगी में वापस नही आओगी।

राजेश की बात सुनकर नैना चुपचाप अपनी सीट पर बैठ गई, उसकी आंखों से आंसू बहने लगे । राजेश ने यह देखा तो चुपचाप गाड़ी स्टार्ट कर ऑफिस की ओर बढ़ चला।

नैना ने अपने आँसू पोंछ लिए, वह फैसला कर चुकी थी कि आगे क्या करना है । अब वह भी राजेश की तरह दिमाग से काम लेगी और राजेश को उसके प्यार का एहसास दिला कर रहेगी । नैना ने अब चुपचाप रिचा को एक मैसेज किया और अपनी सीट पर पीछे की तरफ लेट कर आंखें बंद कर ली।

उधर विशाल के साथ ऑफिस में बैठी रिचा ने जब नैना का मैसेज पढ़ा तो सोच में पड़ गई कि यह लड़की पागल तो नहीं हो गई है? मैं भला ऐसा कैसे कर सकती हूं और यह करने के बाद तो राजेश और विशाल ही मुझे मार डालेंगे पर करना तो पड़ेगा ।

राजेश और नैना अब ऑफिस पहुंचे। नैना जैसे ही गाड़ी से , उतरने को हुई कि राजेश बोला - नैना आज से हर रोज ऑफिस के लिए मैं तुम्हें लेने तुम्हारे घर आया करूंगा और शाम को घर भी मैं ही छोडूंगा ।

नैना - क्यों और तुम्हें क्या फर्क पड़ता है मुझसे ?

राजेश - इंसानियत नाम की भी कोई चीज होती है । एक तो तुम मेरी मंगेतर की दोस्त हो, दूसरा मेरी एम्पलाई हो तुम मेरी जिम्मेदारी हो। साहिल से थोड़ा दूर ही रहा करो , पता नहीं क्यों मुझे कुछ ठीक नहीं लगता ।

नैना राजेश को खुद के लिए परेशान देख मन ही मन मुस्कुरा रही थी - शायद तुम खुद भी नहीं जानते कि तुम्हें चाहिए क्या लेकिन अब मैं तुम्हें एहसास कराऊंगी कि हम दोनों एक दूसरे के लिए कितने जरूरी है , सोचते हुए नैना चुपचाप गाड़ी से उतरी ।

राजेश ने अपनी गाड़ी को पार्किंग एरिया में लगाया , अब नैना और राजेश दोनों ऑफिस की ओर बढ़ चले । ऑफिस में पहुंचते ही राजेश ने देखा कि रिचा स्टाफ के लोगों के साथ वहां खड़ी उसका इंतजार कर रही है , उससे कुछ ही दूरी पर विशाल परेशान सा खड़ा है ।

, रिचा अब मुस्कुराते हुए आगे बढ़े और राजेश के सामने आकर खड़ी हो गई, उसे देख नैना राजेश से थोड़ा दूर हट गई।

रिचा - एक गुड न्यूज है जो मैं सबसे बाँटना चाहती हूँ। पापा का फोन आया था, उन्होंने बताया कि हमारी शादी की तारीख पक्की हो गई है ।

यह सुन राजेश और विशाल एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे कि यह लड़की बोल क्या रही है ? ऐसा तो कुछ भी तय नहीं हुआ था हमारे प्लान में ।

राजेश गुस्से से रिचा को देखने लगा और बहुत धीमे से बोला - होश में तो हो, क्या बोल रही हो ? पर रिचा ने राजेश की बात को अनसुना कर दिया और उसके गले लग गई -मैं बहुत खुश हूं आज । सिर्फ 15 दिन और फिर हमारी शादी हो जाएगी - यह सुनते ही पूरा स्टाफ ताली बजाने लगा।

विशाल को तो जैसे सांप सूंघ गया और राजेश के चेहरे का उडा रंग साफ बता रहा था कि वह अपने ही जाल में फंस चुका था । नैना चुपचाप खडी हो मुस्कुरा रही थी - अब तुम्हें कौन बचाएगा मुझसे ?.....,
 
नैना अब राजेश के चेहरे के उड़े रंग को देख बहुत खुश थी, आखिर हो भी क्यों ना? राजेश ने भी तो उसे बहुत सताया था।

अब राजेश को याद आया कि नैना उसके पास ही खड़ी है, उसने जैसे ही नैना की ओर देखा तो नैना ने उसे देख कुछ इस तरह का चेहरा बनाया कि शायद इस वक्त दुनिया में उससे ज्यादा दुखी कोई और नही हो सकता।

राजेश ने अब विशाल की ओर देखा तो वह भी उसे कुछ इस तरह देख रहा था कि अब रिचा से शादी मत कर लेना , उसकी नजरों में हैरानी गुस्सा और जलन तीनों थे ।

राजेश ने अब फटाफट से रिचा को खुद से दूर किया , उसे बडा अजीब लग रहा था विशाल और नैना की नजरों का सामना करना। वह अब चुपचाप अपने कैबिन में जाने लगा कि पीछे से साहिल की आवाज आई - अरे होने वाले दूल्हे राजा , ऐसे कैसे जा रहे हो ? शादी की मुबारकबाद तो लेते जाओ ।

राजेश ने पीछे मुड़कर देखा तो साहिल मुस्कुराता हुआ खड़ा था , राजेश कुछ कह पाता कि साहिल ने आगे बढ़ उसे गले से लगा लिया और उसके कान में धीरे से बोला - थैंक यू सो मच राजेश, मुझे तो लगा था कि नैना को अपने साथ लाने के लिए मुझे बड़ी मेहनत करनी पड़ेगी पर तुमने खुद ही उसे मेरी झोली में डाल दिया । मै तो सोच कर परेशान था कि मुझे बहुत कड़ी टक्कर मिलने वाली है लेकिन यहां तो तुम खुद ही पीछे हट गए।

राजेश ने गुस्से से साहिल को खुद से अलग कर दिया ।

साहिल - अरे गुस्सा क्यों कर रहे हो ? अभी तो पार्टी टाइम , है। तुम सच में मेरे अच्छे दोस्त हो । जो चीज मुझे चाहिए थी, वह तुमने अपनी शादी की तारीख बता खुद ही मुझे हवाले कर दी। उधर देखो बेचारी नैना को (नैना की ओर इशारा कर) कितनी दुखी है बेचारी, क्यों करते हो तुम बार-बार ऐसा? अब मुझे ही जाना पड़ेगा उसे इस दुख से बाहर निकालने - कहते हुए साहिल मुस्कुरा दिया।

राजेश ने जब नैना की ओर देखा तो वह चुपचाप खड़ी उसे ही देख रही थी ।

राजेश अब गुस्से को दबाते हुए मुस्कुरा कर बोला - शायद तुमने सुना नहीं साहिल , शादी आज नहीं 15 दिन बाद है तो ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है - कहते हुए राजेश अपने केबिन में चला गया ।

विशाल ने रिचा को अपने पीछे आने का इशारा किया और झल्लाता हुआ राजेश के केबिन में चला गया।

नैना ने पास ही खड़ी रिचा को खुशी से गले लगा लिया - यार थैंक यू सो मच । क्या एक्टिंग की तूने ? मैं भी एक बार घबरा गई थी कि तु सच तो नहीं कह रही ?

साहिल और सारा हैरान से एक साथ खड़े हो उन दोनों की , बात सुन रहे थे कि आखिर बात क्या है?

रिचा - मैंने तेरे कहने पर कर तो दिया है लेकिन अभी वह दोनों मिलकर खूब क्लास लगाने वाले हैं । विशाल से तो मैं एक बार फिर भी झूठ बोलूं लेकिन पता नहीं क्यों ? राजेश के सामने जाते ही मेरी हालत खराब हो जाती है ।कहीं उसने मेरे झूठ को पकड़ लिया तो ?

नैना (मुस्कुराते हुए ) - अपनी दोस्त के लिए इतना तो कर ही सकती है ना ? अब जाकर विशाल और राजेश से वही कहना जो मैंने तुमसे कहा है । उसके बाद उनका क्या प्लान है, वह मुझे मैसेज कर देना ।

रिचा उदास चेहरे से बोली - मेरी तो जिंदगी ही खराब है । हर बार दोस्तों के बीच पिस जाती हूं , तुझे खुश करो तो राजेश दुखी और उसे खुश करो तो तू दुखी। तुम दोनों हर वक्त लड़ते रहते हो और तुम्हारे चक्कर में हम दोस्त बेचारे आफत में आ जाते है। पता नहीं विशाल भी क्या सोच रहा होगा ? कहीं वह गुस्से में आकर हमारी सगाई ना.....

नैना - ऐसा कुछ भी नहीं होगा, प्यार करता है वह तुमसे । मैं वादा करती हूं कि ऐसा कुछ नहीं होने दूंगी । अब केबिन में जाओ लेकिन हां संभलकर । कहीं राजेश को तुम पर शक , हुआ तो सब गड़बड़ हो जाएगा ।

रिचा - मैं पूरी कोशिश करूंगी - कहते हुए वह कैबिन में चली गई।

साहिल और सारा नैना को बस देखे ही जा रहे थे, नैना उन्हें देख मुस्कुराने लगी ।

साहिल - कहीं ऐसा तो नहीं कि ये सब तुम्हारा प्लान था।

सारा - तू पागल है क्या ?

साहिल - बिल्कुल नहीं । नैना ने बिल्कुल ठीक किया है । इसने तो सारा का सारा गेम ही पलट दिया ।

नैना - राजेश ने बताया कि उसका दिमाग मुझ पर भरोसा करने की इजाजत नहीं देता और वह दिमाग से सोचेगा इसलिए अब मैं भी दिल की जगह दिमाग का इस्तेमाल करूंगी और राजेश को एक बार फिर से जीत कर रहूंगी । देखते हैं राज कब तक नहीं मानेगा।

सारा - लेकिन यार, अगर राजेश सर ने सच में शादी कर ली तो ?

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यह सुनकर अब नैना और साहिल हंसने लगे ।

सारा (झल्लाते हुए) - हंस क्यों रहे हो ?

साहिल - क्योंकि तुमने बात ही ऐसी की। अरे राजेश रिचा से कैसे शादी कर सकता है ? वह तो विशाल की होने वाली बीवी है ।

सारा (मुस्कुराते हुए ) - अरे हां मैं तो भूल ही गई थी। अब राजेश सर को पीछे हटना ही होगा, उनका ड्रामा अब खत्म।

नैना - भगवान करे कि सब ऐसा ही हो ।

साहिल - लेकिन अगर राजेश पीछे नहीं हटा तो ?

नैना - उसके लिए भी मैंने पहले से ही सोच रखा है । अभी तो राजेश को एक झटका दिया है , अभी दूसरा बाकी है ।

नैना ने साहिल और सारा को अपना दूसरा प्लान बताया।

साहिल मन ही मन खुश हो गया -क्या बात है ? आज सब खुद ब खुद मेरे ही हिसाब से हो रहा है ।

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उधर केबिन में राजेश चुपचाप सर झुकाए अपनी चेयर पर बैठा था और विशाल रिचा को डांट रहा था । रिचा एक कोने में खड़ी चुपचाप उसकी डाँट सुन रही थी ।

विशाल -क्या सोचकर तुमने यह बोला और वह भी सबके सामने? एक बार मुझसे या राजेश से पूछ तो लिया होता । अब क्या करेगा वह , तुमने बहुत बुरी तरह फंसाया है हमें।

विशाल (राजेश को देखते हुए ) - अरे कुछ तो बोलो ? तुमने भी मौन व्रत धारण कर लिया है । जबसे केबिन में आए हो, यूं ही चुप बैठे हो । समझाओ उसको पर राजेश ने कोई जवाब नहीं दिया। वह किसी गहरी सोच में डूबा हुआ था ।

रिचा - मैने तो ये सब राजेश की मदद करने के लिए किया था। मैंने सोचा कि नैना को एक बड़ा झटका देते हैं लेकिन मुझे क्या पता था कि तुम दोनों ऐसे नाराज हो जाओगे? मैं तो उसे परेशान करना चाहती थी पर ....

विशाल - यार तुम तो चुप ही रहो रिचा। जब हमने कह दिया था कि तुम अपना दिमाग इस्तेमाल नहीं करना तो फिर क्यों नहीं सुना तुमने ?

, विशाल अब राजेश की ओर मुड़ा - यार बहुत हो गया है अब। हमें नाटक बंद कर देना चाहिए ।।

राजेश को अब भी चुप देख विशाल अपना आपा खो बैठा - कहां खो गए ? सुन रहे हो कुछ? क्या करोगे अब , सारा प्लान चौपट कर दिया रिचा ने।

राजेश अब उठ खड़ा हुआ और रिचा की ओर देखने लगा तो रिचा थोड़ा घबरा गई, उसने शर्मिन्दा हो सर झुका लिया और धीरे से बोली - सॉरी।

राजेश अब बडे आराम से बोला - तुम्हारी इस गलती से हमारा प्लान खराब हुआ सो हुआ, मुझे इस बात की चिंता नहीं है रिचा पर इसकी कीमत कहीं नैना कोई गलत कदम उठा कर ना चुकाए, इस बात की चिंता है।

अब रिचा और विशाल हैरानी से राजेश को देखने लगे ।

राजेश - रिचा, तुम जाओ विशाल के कैबिन में थोड़ी देर बैठो। इस गलती को कैसे सुधारा जाए या फिर आगे क्या करना है, यह हम बाद में देखेंगे ।

रिचा - पर.....

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राजेश - मैंने कहा ना , जाओ । अभी मुझे विशाल से कुछ बात करनी है ।

रिचा अब कैबिन से निकल सीधे नैना के पास गई।

नैना - ज्यादा गुस्सा तो नहीं किया उन दोनों ने?

रिचा - विशाल ने खूब डाँट लगाई पर राजेश ने तो कुछ नहीं किया। वह तो कहीं और ही खोया हुआ है ?

नैना - मतलब ?

रिचा - राजेश ने कह कर दिया कि अभी इसके बारे में बाद में सोचेंगे । ऐसा लगता है कि वह फिलहाल कहीं और खोया हुआ है ।

नैना यह सुन निराश हो गई क्योंकि उसे अब वही करना पड़ेगा जो वह नहीं करना चाहती थी । वह इस बार अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थी।

नैना ( कुछ सोच कर) - ठीक है तू जा , मैं देखती हूं कि क्या करना है ?

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नैना ने अब सारा और साहिल को अपने पास बुलाया - तुम दोनों ही मेरी आखिरी उम्मीद हो और तुम दोनों में से कोई भी मेरा भरोसा नहीं तोड़ना कभी।

सारा - कभी नहीं ।

वहीं साहिल सोचने लगा - धोखा तो देना पडेगा तुम्हें क्योंकि राजेश की हार मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी है ।

राजेश के केबिन में अब विशाल राजेश से बोला - यार खत्म करो सब।

राजेश - वो तो होगा ही पर यह सब बाद की बात है । पहले हमें साहिल नाम की परेशानी को नैना से दूर रखना होगा ।

विशाल - क्या मतलब?

राजेश - मतलब यह कि इस समय नैना मेरी और रिचा की शादी को लेकर मुझसे बहुत अपसेट है और साहिल इस बात का पूरा फायदा उठाएगा।

विशाल - लेकिन तुम्हें कैसे पता कि वह अभी...

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राजेश - अभी साहिल ने कुछ देर पहले मुझसे कहा था कि मैंने उसका रास्ता साफ कर दिया है । नैना गुस्से में और परेशान होगी तो वह सही और गलत का अंतर नहीं कर पाएगी । कहीं वह गुस्से में गलत फैसला ना ले ले ।

विशाल (परेशान हो) - अब क्या करें ?रिचा ने एक गलती कर हमारा सारा प्लान पहले ही खराब कर दिया है ।

यह सुनते ही राजेश के चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई - हमारा प्लान रिचा ने नहीं किसी और ने खराब किया है ।

विशाल (हैरानी से ) - क्या कह रहे हो?

राजेश - मतलब यह कि भले ही यह शादी वाली बात बोली रिचा ने है पर इसका आईडिया उसके दिमाग में किसी और ने डाला है या फिर किसी ने उसे जबरदस्ती बुलवाया है ।

विशाल - पर तू इतना श्योर कैसे है ?

राजेश - मैं रिचा को पिछले 5 सालों से जानता हूं । जानता हूं कि वह कितना सोच सकती है। तुमने शायद देखा नहीं कि जब मैने रिचा को देखा तो उसके चेहरे पर थोड़ी घबराहट , थी । मेरा शक दो लोगों पर है।

विशाल - कौन है वो ?

राजेश - पहला साहिल । हो सकता है कि साहिल ने उसे डरा धमकाकर यह बोलने को कहा हो क्योंकि इस वक्त इस बात का सबसे ज्यादा फायदा साहिल को ही है । उसे पता है कि इस बात को सुन नैना मुझसे दूर हो जाएगी और वह आसानी से उसे अपनी ओर कर सकता है ।

विशाल - लेकिन साहिल रिचा से कब मिला? ज्यादातर तो रिचा घर या हमारे साथ होती है।

राजेश - पता नहीं लेकिन इतना जानता हूं कि इस शादी वाले काम के पीछे रिचा का दिमाग नहीं है । अब यह तुम्हारी जिम्मेदारी है कि तुम रिचा से कैसे बात पता करते हो कि रिचा को यह सब कहने के लिए किसने कहा?

विशाल - ठीक है पर दूसरा शक किस पर है?

राजेश ( मुस्कुराते हुए) - नैना। नैना भी तो रिचा की दोस्त है और वह चाहे तो उससे यह कहलवा सकती है।

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विशाल - नहीं नहीं मैं नहीं मानता । नैना ऐसी हरकत नहीं कर सकती ।

राजेश - पहले की बात होती तो मैं भी विश्वास नहीं करता पर आजकल जैसी हरकतें वह कर रही है , उस हिसाब से तो उसके लिए यह कोई बड़ी बात नहीं होगी । वह बहुत जिद्दी है।

विशाल - हाँ, तुम्हारी तरह।

राजेश अब गुस्से से विशाल को देखने लगा।

विशाल - अच्छा साँरी पर ऐसा क्यों लग रहा है तुम्हें ?

राजेश - देखो मैं रिचा का दोस्त हूं , जब मेरे कहने पर रिचा नैना से इतना बड़ा झूठ बोल सकती है तो क्या रिचा नैना के कहने पर हमसे इतना बड़ा झूठ नहीं बोल सकती ।

विशाल - हम्म, बात में तो दम है पर अब आगे क्या ?

राजेश - तुम एक काम करो, रिचा के पास जाकर प्यार से उससे पूछो कि उसने यह शादी वाली बात क्यों की और मैं , नैना को अपने साथ बिजी रखने की कोशिश करता हूं जिससे कम से कम आज तो साहिल से उसको दूर रखू जब तक कि नैना का गुस्सा शांत ना हो जाए ।

विशाल- ठीक है , कहते हुए कैबिन से बाहर निकल गया।

विशाल के निकलने के बाद राजेश भी बाहर निकला और नैना की टेबल की ओर देखा तो वह वहां नहीं थी।

राजेश - यह कहां गई कि तभी राजेश को कुछ ही दूरी पर खड़ी सारा दिखाई दी । वह किसी से फोन पर बात कर रही थी राजेश ने सारा को कई बार आवाज दी पर सारा अपनी बातों में ही लगी हुई थी, उसने राजेश की आवाज अनसुनी कर दी।

राजेश उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया , जैसे ही राजेश सारा को पुकारने को हुआ कि उसका ध्यान सारा की बातों पर गया।

सारा - देख लेना साहिल, नैना मान जाएगी । हां , हो सकता है कि वह थोड़ा नाराज हो जाए तो पर तुम से बेस्ट और कोई नहीं हो सकता उसके लिए । ऑल द बेस्ट और आज बोल ही , देना ।

जैसे ही राजेश ने सारा की आवाज सुनी तो फटाफट उसने अपनी नजर पूरे ऑफिस में दौड़ाई पर वहां ना तो नैना थी और ना ही साहिल । यह देख वह अब बहुत परेशान हो गया।

सारा पीछे मुड़ी तो राजेश को खडा देखकर बोली - आप? कुछ काम था? एक पल तो राजेश को कुछ समझ में ही नहीं आया कि क्या कहे? वह बस हैरान सा सारा को देखता रह गया।

सारा - क्या हुआ सर, आप ठीक तो है ?

राजेश अब एकदम से होश में आया - हां मैं ठीक हूं । वह अभी तुम किस से बात कर रही थी ?

सारा - वह मैं साहिल से बात कर रही थी पर आप क्यों पूछ रहे हैं ?

राजेश - ओह! यह साहिल कहां है ? मुझे कुछ काम है इससे और नैना भी नहीं दिख रही। तुम क्या बात कर रही थी साहिल से ?

, सारा ( मुस्कुराते हुए) - प्लीज सर, किसी को बताना मत। यह मेरा और साहिल का सीक्रेट है । वह साहिल है ना , वो नैना को टैरेस पर लेकर गया है उसे प्रपोज करने , तो घबरा रहा था । मैं बस उसका हौसला बढ़ा रही थी । मुझे तो ये दोनों बड़े अच्छे लगते हैं साथ में, भगवान करे नैना हाँ कह दे ।

राजेश अब वही खड़ा रह गया कि कहीं गुस्से में नैना हाँ ना कह दे । उसको रोकना होगा, मैं साहिल को जीतने नहीं दे सकता, वो गलत इंसान है। वह फटाफट से टैरेस की सीढ़ियों की ओर भागा।

सारा ने नैना को मैसेज किया कि राजेश सर आ रहे है।

नैना बेसब्री से राजेश के आने का इंतजार कर रही थी, वो राजेश को पाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थी। पता नहीं पर उसे लग रहा था कि राजेश रिचा के झूठ को जल्द ही पकड़ लेगा या फिर हो सकता है कि पकड़ लिया हो। नैना के हाथ से बात निकले उससे पहले ही वह दूसरी चाल चलने को तैयार थी।

साहिल - नैना ध्यान रहे कि तुम अब पीछे नहीं हट सकती हो। दिल से नहीं दिमाग से ही राजेश के दिमाग को हराया जा , सकता है । तुम उसे देख कर बस इमोशनल मत हो जाना।

नैना - मैं समझ रही हूं और पूरी कोशिश करूंगी कि राजेश को परेशान देख मैं कमजोर ना पडूँ। राजेश को अपने प्यार का एहसास कराने के लिए मुझे उससे थोड़ा दूर जाना ही होगा, तभी वह समझेगा कि वह मुझे अब भी पहले की ही तरह चाहता है और हम दोनों एक दूसरे के बिना कभी खुश नहीं रह पाएँगे।

दोनों बात कर ही रहे थे कि सीढ़ियों से किसी के ऊपर आने की आवाज सुनाई दी । नैना का चेहरा टैरेस के दरवाजे की ओर था , साहिल जल्दी से उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया ।

एक तरफ राजेश के दिल की धड़कन बड़ी हुई थी कि कहीं उसे देर ना हो जाए तो दूसरी ओर नैना अपनी चाल चलने को तैयार थी पर अंदर ही अंदर उसका दिल बैठा जा रहा था कि कैसे वह राजेश के सामने किसी और से झूठा ही सही पर इकरार कर पाएगी? काश, राजेश मान जाता तो ये सब की जरूरत ही ना पडती।

साहिल भी अब मन ही मन खुश हो रहा था कि राजेश अपनी हार अपनी आंखों के सामने देखेगा। उस वक्त उसका चेहरा , देखने लायक होगा और कमाल की बात तो ये है कि राजेश को हराने वाला कोई और नहीं, खुद उसका प्यार है।

जैसे ही राजेश टैरेस पर पहुंचा तो कुछ ही दूरी पर साहिल और नैना दिखाई दिए ।

साहिल - मैं कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगा,अब आगे तुम्हारी मर्जी है। तुम जो कहोगी , मुझे मंजूर है पर हम दोस्त हमेशा रहेंगे ।

राजेश साहिल की बात सुन समझ गया कि साहिल नैना को प्रपोज कर चुका है , उसने अपने सामने खड़ी हुई नैना को देखा । नैना को खो देने के डर से ही उसकी सांसें अटकने लगी थी , वह बस जहां था वहीं खड़ा रह गया।

नैना ने अब साहिल की ओर से नजर उठाकर राजेश की ओर देखा तो उसका चेहरा बिल्कुल उतरा हुआ था, आंखें नम थी कि तभी साहिल की आवाज आई - कहो नैना, क्या जवाब है तुम्हारा?

नैना ने एक नजर साहिल को देख फिर राजेश को देखा। राजेश ने नैना को ना में सिर हिलाया। नैना अब चुप थी, , राजेश की हालत देख अब उसके मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी । वह समझ रही थी कि राजेश के दिल पर क्या गुजर रही होगी ।

इधर साहिल भी अंदर ही अंदर डर रहा था कि नैना कहीं आखिरी मौके पर पीछे ना हट जाए अगर ऐसा हुआ तो वह हार जाएगा जो कि वह किसी कीमत पर नहीं होने देना चाहता। वह जो हासिल करने आया है, कर के रहेगा।

राजेश अब नैना को देख रहा था कि उसकी हार जीत सब नैना के हाथ में है और वह सब सहन कर लेगा पर नैना को साहिल के जाल में नहीं फँसने देगा...,
 
राजेश नैना को बडी उम्मीद से देख रहा था । नैना ने आँखें बंद की और सोचा कि अगर मैं ना करती हूं तो पता नहीं राजेश को उसके प्यार का एहसास कैसे कराऊंगी? मै दिमाग की सुनुंगी अब।

नैना ने अब साहिल की ओर देखा।

साहिब धीरे से बोला - हां बोलो नैना ।

नैना ने अब बड़े ही भारी मन से कह दिया - हाँ, मै तैयार हूँ - कहते हुए उसकी आँख से आँसू बह चला। अब उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी राजेश की तरफ देखने की

नैना की हां सुनते ही साहिल की जान में जान आई कि चलो, आधी मंजिल तो उसने आज हासिल कर ही ली। वह खड़ा हुआ और मुस्कुराते हुए बोला - थैंक्स ए लॉट नैना , मैं तुम्हें दुनिया की वह हर खुशी दूंगा जो तुम्हें कोई और कभी नहीं दे पाएगा ।

नैना ने अब हिम्मत कर नजर उठा राजेश की ओर देखा तो हैरान रह गई - राजेश वहाँ नहीं था, वह जा चुका था।

नैना यह देख परेशान हो गई - साहिल, राजेश यहाँ नहीं है।

साहिल ने पीछे मुड़कर देखा तो राजेश सच में जा चुका था।

नैना ( रोते हुए) - वो चला गया और वो भी बिना कुछ कहे। ऐसे कैसे जा सकता है ? मैं अभी उससे बात करती हूं , नैना जैसे ही चलने को हुई कि तभी साहिल ने उसे रोक लिया ।

साहिल - नहीं नैना , उसके पीछे नही जाना । अगर तुम उसके पीछे गई तो सब खराब हो जाएगा । तुम उसे महसूस , होने दो कि तुम उससे नाराज हो । अगर यूँ कमजोर पडोगी तो कैसे काम चलेगा ? उसे अकेला रहने दो , तभी उसे तुम्हारी कमी का एहसास होगा ।

नैना अब चुपचाप साहिल को देखने लगी - साहिल , तुम्हें लगता है कि राजेश मेरा ही होगा?

साहिल यह सुनकर गंभीर हो गया - पता नहीं , मैं बस इतना कह सकता हूं कि तुम्हें हार नहीं माननी चाहिए। बिल्कुल वैसे ही , जैसे मैं नहीं मानता अपनी मंजिल हासिल करने तक।

उधर राजेश बडे शांत तरीके से जैसे की कुछ हुआ ही ना हो, सीढ़ियों से उतर सीधा विशाल के केबिन में पहुंचा तो वहाँ रिचा ना थी।

राजेश - कुछ पता चला?

विशाल - यार मैंने कोशिश की पर वह कह रही है कि खुद का आईडिया था ।

राजेश - ठीक है, मैं पूछता हूं उससे। कहाँ है वो?

विशाल - प्लीज यार बाद में । वह कह रही थी कि उसकी , तबीयत ठीक नहीं है तो मैने घर भेज दिया उसे।

राजेश - हम्म, ठीक है । रिचा के ठीक होने का इंतजार करता हूं । मैं कुछ काम से जा रहा हूं , तुम ऑफिस संभाल लेना।

विशाल - लेकिन साहिल और नैना का...

राजेश - कल बात करते हैं - कहते हुए ऑफिस से निकल लिफ्ट में चला गया ।

नैना, साहिल सीढ़ियों से नीचे उतरे पर उन्हें राजेश कहीं दिखाई नहीं दिया ।

नैना - कहां गया होगा?

साहिल - पता नहीं, यही कही होगा । मैं देखता हूं - कहते हुए वह राजेश को ढूँढने चला गया।

तभी सारा नैना के पास आई - यार तुमने अपना प्लान पूरा क्यों नहीं किया ? मुझे तो लगा था कि अब तक काम हो गया होगा ।

नैना (हैरानी से ) - यह क्या बोल रही है , तुझसे किसने कहा , कि प्लान पूरा नही किया? हम अपना प्लान कर चुके हैं पर यह राजेश पता नहीं कहां चला गया?

सारा नैना को ध्यान से देखने लगी ।

नैना - क्या हुआ ? ऐसे क्यों देख रही है ?

सारा - मैंने अभी राजेश सर को सीढ़ियों से नीचे आते देखा था और उनके चेहरे को देखकर तो ऐसा कुछ भी नहीं लग रहा था कि ऊपर टैरेस पर कुछ भी हुआ है ? वह तो बहुत शांत लग रहे थे । तभी तो मुझे लगा कि शायद तुम लोगों ने अपना प्लान पूरा नहीं किया है ।

नैना सोच में पड़ गई कि राजेश ने कोई रिएक्शन क्यों नहीं दिया और ऐसे टाइम पर वह शांत कैसे रह सकता है ? नैना का अब दिल बैठा जा रहा था। वह अब जल्दी से वाँशरूम गई और उसे अंदर से बंद कर जोर से रोने लगी। वह जानती थी कि यह नाटक है पर आज उसने राजेश के दिल को फिर से दुखा दिया।

उधर राजेश लिफ्ट में चुपचाप खड़ा था। उसकी आंखों के सामने थोड़ी देर पहले जो हुआ, वह सब घूमने लगा । राजेश की आंखों से आंसू बहने लगे और वह खुद को समझाने लगा , कि मैं तो पहले से ही जानता था कि इस लडकी को धोखा देने के सिवाय और कुछ आता ही नही। आज भी वही किया है, यह अच्छे से जानता हूं पर पता नहीं क्यों मुझे फिर भी तकलीफ हो रही है । मेरे मना करने के बाद भी नैना ने साहिल को हाँ कहा जबकि मैं उसे बता चुका था कि साहिल मुझे ठीक नहीं लगता पर इसनें कसम खा रखी है हर बार मेरे खिलाफ जाने की ।

राजेश बार-बार अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश करता पर आँसू थे कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे । कैसे कर लिया नैना ने यह ? कल तक तो मुझसे शादी करना चाहती थी, मुझसे प्यार करती थी और आज रिचा ने शादी की बात क्या कह दी कि बिना सोचे समझे इसने साहिल को हाँ कर दी।

नैना मुझसे प्यार करती है या नहीं? इसने मुझसे कभी सच में प्यार किया था भी या नहीं या मेरी शादी की बात सुन एकदम से नैन का प्यार खत्म ह गया - इस तरह के कई सवाल राजेश को जेहन में घूम रहे थे । वह बस यहां से बहुत दूर चला जाना चाहता था, कहीं दूर जहां लोगों की परछाई तक ना पड़े उस पर। जहां उसे कोई भी ना जानता हो । इतना सब कुछ हो गया पर नैना उसके दिल में बसी थी ।

, वह खुद से ही नाराज होने लगा और फूट-फूट कर रोने लगा कि आखिर क्यों उसका दिल ही उसके बस में नहीं था । राजेश पुराने दिनों को याद करने लगा कि आखिर क्यों उसने नैना से प्यार किया ? उसे पता होता कि इसके बाद वह कभी सुकून से नहीं जी पाएगा तो नैना को कभी अपनी जिंदगी में ना आने देता।

राजेश ने अपने आप को संभाला और आँसू पोछ खड़ा हो गया - नैना, तुमने यह ठीक नहीं किया । वह फिलहाल किसी से बात करने के मूड में नहीं था । बिल्डिंग से निकल वह चुपचाप गाड़ी में बैठकर वहाँ से निकल गया - कहां? यह तो खुद वो भी नहीं जानता था ।

नैना अब वॉशरूम से बाहर आई, उसे घबराहट हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि राजेश बहुत परेशान हुआ होगा। उसे ठेस पहुंची होगी पर ऐसे कैसे काम चलेगा? नैना बार-बार भगवान से प्रार्थना करने लगी कि राजेश सही सलामत हो।

राजेश जैसे ही अपनी गाड़ी से निकला कि वहाँ साहिल आ पहुंचा। राजेश को जाता देख साहिल दुखी हो गया - क्या यार, यह तो मिलने से पहले ही निकल गया । मैं एक बार अपनी हार से उतरा हुआ उसका चेहरा देख लेता तो मजा आ , जाता।

अब उसने चारों ओर देखा, वहाँ कोई और तो नहीं है। उसने फोन मिलाया- काम हो गया है । नैना को लग रहा है कि वो राजेश को अपने जाल में फंसा चुकी है पर उसे यह नहीं पता कि वह खुद मेरे जाल में फस गई है । हां , मैं ध्यान रखूंगा कि सब ठीक से हो जाए - कहते हुए साहिल ने फोन रख दिया और जैसे ही वह वापस बिल्डिंग की ओर मुड़ा कि पीछे से एक कार आकर रुकी ।

साहिल ने अब पीछे मुड़कर देखा तो उस कार में से निकलती रिया को देखते ही उसके चेहरे पर अपने आप ही एक मुस्कान तैर गई - यह यहां कैसे ?

रिया उसके बगल से होती हुई बिल्डिंग में चली गई । साहिल चुपचाप खड़ा हुआ उसे देखने लगा - यहां क्या कर रही है यह? यह तो बेंगलुरु में ..... ,
 
अब साहिल को डर लगने लगा कि रिया उसे पहचान ना जाए, उसे अब नैना की याद आई कि वह उसका इंतजार कर रही होगी । साहिल अब जल्दी से बिल्डिंग के अंदर चला गया।

रिया अब सीधे राजेश के कैबिन में पहुंची लेकिन वहां राजेश को ना पाकर वह सोच में पड़ गई कि आखिर भाई कहां चले गए ? रिया जब वापस केबिन से बाहर निकली तो उसे नैना दिखाई दी ।

वह नैना के पास पहुंची - कैसी हो नैना - कहते हुए उसने नैना को गले से लगा लिया ।

नैना (हैरानी से ) - तुम यहां ?

रिया - मेरा काम खत्म हो गया तो मैं आ गई पर भाई दिखाई नहीं दे रहे हैं।

नैना (उदास होकर) - पता नहीं।

रिया ( परेशान होकर) - क्या बात है , कुछ हुआ है क्या?

नैना - कुछ भी तो नहीं।

रिया सोच में पड़ गई कि आखिर यह सब हो क्या रहा है ? भाई बिना बताए गायब है और नैना उदास है ।

तभी विशाल केबिन से निकला , उसे देख रिया जल्दी से उसके पास पहुंची - भाई क्या हुआ है?

विशाल - अरे रिया? तुम कब आई?

, रिया - बस थोड़ी देर पहले लेकिन भाई...

विशाल - वो कुछ काम से गया है, कहाँ गया है ये तो मुझे भी नहीं पता। थोड़ी जल्दी में था।

रिया, विशाल की बात सुन नैना को शक होने लगा कि शायद वह गुस्से में गया है और विशाल से झूठ बोला है वरना विशाल को यह तो पता होता कि कहाँ गया है ।

रिया ने राजेश को कई बार फोन लगाया पर उसने नहीं उठाया ।

साहिल अंदर ऑफिस में आया और नैना के पास पहुंचा - नैना, यह लड़की कौन है?

नैना - राजेश की बहन है रिया ।

यह सुन साहिल हैरान रह गया - क्या?

नैना - इसमें इतना चौकने वाली क्या बात है? तुम बताओ कि राजेश मिला?

साहिल - हाँ , नीचे बिल्डिंग के बाहर था। मैं जब तक पहुंचा, , वह तब तक अपनी गाड़ी में बैठकर जा चुका था।

रिया -मै भाई को देखने जा रही हूं । पता नहीं क्यों पर मेरा दिल बहुत घबरा रहा है । आप कहते है कि काम से गए हैं पर वह फोन भी नहीं उठा रहे ,हो क्या रहा है यह सब?

साहिल एक कोने में खड़ा हो बस चुपचाप रिया को देख रहा था , अब उसे थोड़ा डर लगने लगा कि रिया उसे पहचान ना ले । अगर ऐसा हुआ तो मेरा सारा प्लान बिगड़ जाएगा और राजेश मेरे सच के बहुत करीब पहुंच जाएगा ।

अब विशाल समझ नहीं पा रहा था कि कुछ तो हुआ है लेकिन क्या ? राजेश तो शांत लग रहा था पर फिर ऐसे फोन क्यों नहीं उठा रहा?

उधर नैना अंदर ही अंदर घबरा रही थी कि कहीं राजेश गुस्से में कुछ गलत कदम ना उठा ले।

रिया जैसे ही ऑफिस से जाने को हुई कि तभी राजेश का फोन आया। राजेश से बात करने के बाद रिया विशाल से बोली - भाई कह रहे हैं कि फोन की बैटरी लो है तो फोन नहीं रिसीव कर रहे । वो आएँगे आफिस । भाई मैं घर जा रही हूं - कहते हुए वह ऑफिस से बाहर निकल गई ।

,

उसके जाते ही साहिल की जान में जान आई ।

पूरा दिन निकल गया, अभी ऑफिस बंद होने में एक घंटा बाकी था। नैना बार-बार घड़ी की ओर देखती कि बस कुछ वक्त और है फिर छुट्टी हो जाएगी। आखिर कब आएगा ?

राजेश वापस आओ , एक बार देखना है तुम्हें - सोचते हुए वह उदास हो गई ।

तभी नैना को सामने से राजेश आता दिखाई दिया। सारा सही कह रही थी कि राजेश एकदम शांत लग रहा था, उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि जैसे कुछ हुआ ही ना हो ।

राजेश अब आकर सीधे कैबिन में चला गया । थोड़ी देर बाद विशाल भी उसके कैबिन में पहुंचा।

विशाल - राजेश क्या हुआ ? कोई परेशानी है तो बताओ? कहां गायब हो गए थे ?

राजेश ( मुस्कुराते हुए) - कुछ खास काम नहीं था , मैंने बताया तो था रिया को कि फोन की बैटरी लो है - कहते हुए , राजेश अपने लैपटॉप पर काम करने लगा ।

विशाल एक पल को राजेश को चुपचाप देखता रहा फिर संजीदा होकर बोला - राजेश ?

राजेश - हम्म ।

विशाल - कुछ हुआ है क्या ?

राजेश ने अब लैपटॉप से नजर हटाकर विशाल की ओर देखा - क्यों कुछ होना चाहिए ?

विशाल - तुमसे कुछ पूछना है ।

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - तुम्हें मुझसे कुछ पूछने के लिए परमिशन की कब से जरूरत पड़ गई? पूछो जो पूछना है।

विशाल - तुम सुबह मुझसे कह कर गए थे कि नैना के पास जा रहे हो , उसे अपने साथ रखने के लिए। कुछ टाइम बाद तुम आए और कहा कि बाद में बात करते हैं । कुछ हुआ है क्या ? साहिल ने कुछ किया?

राजेश गहरी सांस लेकर विशाल को देखने लगा ।

,

विशाल - अब तुम डरा रहे हो यार?

राजेश - मैं डरा नहीं रहा बल्कि सोच रहा हूं कि जब कोई इंसान खुद की कब्र खोदने में लगा हो तो किसी दूसरे को दोष देने का क्या फायदा ?

विशाल ( हैरानी से ) - मतलब?

राजेश - मतलब यह है कि मैं नैना को अपने साथ काम में बिजी रखने के लिए बाहर उसकी टेबल पर पहुंचा तो वह वहाँ नहीं थी , तब सारा ने बताया कि वह साहिल के साथ टैरेस पर गई है और साहिल उसे प्रपोज करने वाला है ।

विशाल - फिर ?

राजेश - फिर क्या ? मैं भागा टैरेस की ओर और वहां पहुंचा तो साहिल नैना को प्रपोज कर चुका था और नैना के जवाब के इंतजार में चुप हो गया । तब नैना ने उसे ....

विशाल अब हंसने लगा - अब आगे मुझे पता है । नैना ने ना कह दिया होगा और उस बेचारे साहिल की बड़ी बेइज्जती हुई होगी । उसका चेहरा देखने लायक होगा, उसका एक फोटो , तो खींच लेते। मै उसी से काम चला लेता।

राजेश - विशाल मेरी बात तो सुनो कि.....

विशाल - पता है , नैना ने उससे वही कहा होगा जो मुझसे कहा था कुछ दिन पहले कि मैं किसी और से प्यार करती हूं और उससे ही करती रहूंगी। मैं समझ सकता हूं कि कितना बुरा लगा होगा साहिल को क्योंकि मुझे भी बड़ी बेइज्जती महसूस हुई थी। तभी मैं सोचू कि साहिल कैसे थोड़ा परेशान सा है आज- कहते हुए विशाल हँसने लगा।

राजेश अब झल्लाते हुए बोला - नैना ने हाँ कर दिया है।

विशाल ने जैसे ही यह सुना कि उसकी हंसी रुक गई और अविश्वास के साथ वह राजेश को देखने लगा - क्य.. क्या कहा तुमने ?

राजेश - हाँ कहा नैना ने।

विशाल (हैरानी से ) - ऐसे कैसे हो सकता है ? नैना तुमसे प्यार करती है ना?

राजेश - करती थी और क्या पता करती भी थी या नहीं?

,

विशाल - पर ऐसे कैसे ? मैं अभी उससे बात करता हूं - कहते हुए विशाल केबिन के दरवाजे की ओर बढा ।

राजेश ने झट से चेयर से उठ कर विशाल को पकड़ लिया - क्या कर रहे हो ?

विशाल ( गुस्से में) - क्या कर रहे हो? तुम मुझसे पूछ रहे हो यह? अरे यही तो मैं तुमसे पूछ रहा हूं कि तुम दोनों क्या कर रहे हो? इतनी जल्दी मान गई नैना किसी और का प्रपोजल बस तुम्हारी शादी की बात सुन ? और तुम? तुम भी कुछ कम नहीं हो । इतना सब हो गया और अब बता रहे हो मुझे इतना आराम से , जैसे कुछ हुआ ही ना हो ?

विशाल को गुस्सा देख राजेश मुस्कुराने लगा। यह देख विशाल का गुस्सा और बढ़ गया - लगता है तुम पूरी तरह पागल हो चुके हो । यहां सब कुछ बिगड़ता जा रहा है और तुम मुस्कुरा रहे हो ? तुमने नैना को रोका क्यों नहीं ?

राजेश अब गंभीर होकर बोला - आओ पहले चेयर बैठो और मेरी बात सुनो। पहले तो विशाल सुनने को राजी नहीं हुआ पर बाद में मान गया ।

, राजेश विशाल को चेयर पर बैठा उसके पास टेबल पर बैठ गया - मैंने नैना को इशारे से मना किया था और कुछ समय पहले भी बोला था कि साहिल मुझे ठीक नहीं लगता। अब तुम ही बताओ इसके बाद भी उसने जब साहिल से हां कर दी तो मैं क्या कर सकता हूं ? अगर वह भी जिंदगी की नई शुरुआत करना चाहती है , प्यार को दूसरा मौका देना चाहती है तो बुरा ही क्या है - कहते हुए राजेश चुप हो गया।

विशाल - और तुम ? तुम्हारा क्या होगा? तुम क्यों मौका नहीं देते प्यार को दूसरा मौका? लड़कियों की कमी तो तुम्हारे लिए भी नहीं है ।

राजेश - मैंने बस एक ही इंसान से सच्चे दिल से मोहब्बत की है ,अब किसी और से नहीं कर पाऊंगा। मुझे नैना के फैसले से कोई परेशानी नहीं , पर परेशानी इस बात की है कि उसने गलत इंसान को चुना और दूसरा उसने यह फैसला गुस्से में लिया है ।

विशाल- तुम उससे बात क्यों नहीं करते इस बारे में ?

राजेश उठकर अपनी चेयर पर जा बैठा - कोई फायदा नहीं, वह नहीं सुनेगी किसी की और मेरी तो बिल्कुल भी नहीं।

, विशाल (हैरानी से ) -तो तमाशा देखे हम ।

राजेश - फिलहाल मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा है कुछ। देखते हैं कि आगे क्या करना है । चलो कुछ काम कर लिया जाए।

थोड़ी देर बाद राजेश ने नैना को केबिन में बुलाया । नैना जो अब तक टेबल पर बैठी टेंशन में घुली जा रही थी , यह सुन घबरा गई कि राजेश बहुत लडेगा। वह भी कमजोर नहीं पड़ेगी अब । जब राजेश गुस्से में होता था तो उस की बोलती बंद हो जाती थी फिर आज तो वह अपनी जगह सही था ।

नैना ने खुद को हिम्मत देने लगी कि डरने की कोई जरूरत नहीं है , अंदर विशाल भी तो है जो राजेश से और उसके गुस्से से बचाने में उसकी हमेशा करता है ,आज भी करेगा। तुझे राजेश का सामना करना ही पड़ेगा - यह सोच नैना केबिन में चली गई । अब कुछ दूरी पर खड़ा साहिल नैना को राजेश के कैबिन में जाते देख रहा था , उसे अब डर लग रहा था कि कहीं नैना राजेश को बता ना दे कि यह सब नाटक है ।

नैना जैसे ही कैबिन में आई, उसकी नजर विशाल पर पड़ी तो वह कुछ उखडा सा था । नैना ने राजेश की ओर देखा तो उसका चेहरा बड़ा शांत था । नैना सोचने लगी कि यहां तो , उल्टा ही किस्सा हो गया , मैं तो सोच रही थी कि राजेश नाराज होगा पर यहां तो विशाल नाराज हुआ पड़ा है।

राजेश ने नैना की ओर देखे बिना ही उसकी ओर फाईल बढ़ा दी - इस फाइल की सारी डिटेल्स चेक करो और जो भी गलती मिले , उन्हें ठीक करो। नैना ने फाइल ली और उसे चैक कर बोली - पर यह सब करने में तो 3 घंटे से भी ज्यादा लग जाएंगे ।

राजेश - जानता हूं । विशाल तुम्हारे साथ यही रुकेगा और इस काम को खत्म करने में तुम्हारी मदद करेगा ।

नैना जानती थी कि जब राजेश किसी को बिना कुछ कहे अपनी नाराजगी जताना चाहता है तो वह उसे इग्नोर करना शुरू कर देता है जैसे की आज उसके साथ कर रहा था।

विशाल मैं चलता हूं , तुम जरा यह देख लेना - कहते हुए राजेश केबिन से बाहर निकल गया ।

नैना उसे जाते हुए देखने लगी , वह सब कुछ सहन कर सकती थी पर राजेश जब उसे इग्नोर करता था तो उसे सबसे , ज्यादा बुरा लगता था। वह चुपचाप कैबिन के दरवाजे को देखने लगी कि विशाल बोला - राजेश जा चुका है नैना।

नैना अब जैसे होश में आई और विशाल को देखने लगी - क्या ?

विशाल - मैंने कहा ,राजेश गया । अब फाइल पर काम करें

नैना -हां ।

दोनों फाइल को लेकर साथ बैठे और काम में लग गए ।

उधर राजेश जैसे ही पार्किंग एरिया में पहुंचा कि उसे महसूस हुआ कि कोई उसका पीछा कर रहा है।

राजेश ने पीछे मुड़कर देखा तो सामने मुस्कुराता हुआ साहिल खड़ा था ।

राजेश को पहले तो उस पर बहुत गुस्सा आया और फिर अपने गुस्से को काबू कर वह मुस्कुराता हुआ बोला - कैसे हो साहिल ? वह साहिल की ओर बढ़ चला ।

साहिल भी राजेश के करीब पहुंचा - सुबह अचानक कहां , गायब हो गए थे ?

राजेश - कुछ काम था । तुम सुनाओ अपनी, सब ठीक है।

साहिल (हंसते हुए ) - मैं तो बहुत खुश हूं यार, पता है आज मैंने नैना को प्रपोज किया और उसने हाँ कह दिया - कहते हुए राजेश की ओर देख मुस्कुराने लगा ।

राजेश ( मुस्कुराते हुए) - जानता हूं , कांग्रेचुलेशन साहिल।

साहिल- थैंक्स यार , बड़ा लकी हूं मैं कि नैना जैसी लड़की मिली है वरना उसका साथ तो हर किसी को नसीब की बात नहीं, अब खुद को ही देख लो ।

राजेश - हां वह तो है पर इसमें तुम्हारा ही फायदा हुआ। अगर मैं पीछे नहीं हटता तो नैना तुम्हें कैसे मिलती?

साहिल - तुम गलत कर रहे हो मेरे साथ ।

राजेश - मैं समझा नहीं ।

साहिल - मैं तो सोच रहा था कि तुम अपनी इस हार के बाद बड़े दुखी होंगे पर यहां तो तुम बिल्कुल ठीक-ठाक लग रहे , हो। यार यह हक मत छीनो मुझसे । कह दो कि तुम्हें बहुत बुरा लग रहा है अपनी हार देख कर । मैं तुम्हारा उतरा हुआ चेहरा देखना चाहता हूं । मैंने कहा था ना कि नैना को तुम्हारी आंखों के सामने से ले जाऊंगा। लो देख लो , मैंने आधा सफर तय कर लिया है । अब तुम कुछ नहीं कर पाओगे।

राजेश - हां , मैं देख रहा हूं पर शायद तुम यह नहीं देख पा रहे हो कि नैना तुमसे प्यार नहीं करती है । वह मुझसे नाराज है इसलिए गुस्से में उसने तुम्हें हां कर दी लेकिन एक ना एक दिन उसे अपनी गलती का एहसास होगा , तब वह खुद पीछे हट जाएगी ।

साहिल - देखते हैं कि नैना किसके साथ जाती है - कहते हुए वह अपनी गाड़ी की ओर बढ़ने लगा ।

राजेश ने साहिल को आवाज दी - साफ साफ कहो , चाहते क्या हो ?

साहिल - नैना ।

राजेश - तुम्हारे यहां आने की वजह पूछ रहा हूं ।

, साहिल (हैरानी से ) - मतलब?

राजेश - मतलब यह है कि मैं जानता हूं तुम यहां नैना के लिए नहीं मुझ से बदला लेने आए हो और तुम्हारे पीछे कोई और है जो यह सब तुम से करवा रहा है ।

साहिल चुपचाप हैरान सा राजेश को देखे जा रहा था।

राजेश ( मुस्कराते हुए) - क्या हुआ, हैरान रह गए? मैं तुम्हारा सच जानना चाहता हूं कि उस दिन इनवेंटरी में किस से बात कर रहे थे ? मैंने तुम्हें सुन लिया था । कहो , क्या चाहिए तुम्हें और किसने भेजा है यहा? बदले में मैं तुम्हें मुँह माँगी कीमत दूंगा।

साहिल अब मुस्कुराते हुए बोला - बताऊंगा सही वक्त आने पर । उससे पहले थोड़ा खेल तो लूँ तुम्हारे साथ। तुम्हारे जैसा इंसान फिर कहां मिलेगा जो मुझे बराबर की टक्कर दे सके - कहते हुए वह अपनी गाड़ी में बैठ गया और वहाँ से चला गया।

राजेश कुछ देर वहीं खड़ा रहा - आखिर किसने भेजा है इसे?

, रात को नैना थकी हुई सी घर पहुंची । उसने जैसे ही दरवाजे को खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तो दरवाजा खुला हुआ था। नैना चौंक गई कि चाबी तो मेरे पास है फिर यह कैसे खुला है? कहीं माँ तो नहीं आ गई है ।

नैना जल्दी से घर के अंदर गई तो चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा था, लग रहा था कि यहां कोई भी नहीं है । नैना ने अब दरवाजे के पास के स्वीच को ऑन कर घर की लाइट ऑन की तो सामने का नजारा देख हैरान रह गई - पूरा ड्राइंग बहुत ही सुंदर तरीके से सजा हुआ था - बहुत सारे गुब्बारे, कैंडिल्स और भी बहुत कुछ।

नैना सोच में पड़ गई कि आखिर यह सब किसने और क्यों किया। तभी उसे किसी के किचिन से बाहर आने की आहट सुनाई दी , वह अब उत्सुकता से उधर देखने लगी कि आखिर कौन है जिसने इतना सब कुछ इंतजाम किया है और क्यों....,
 
नैना हैरानी से राजेश को देखती रह गई - क्या यह सच में राजेश है लेकिन वह यहां कैसे ? और यह सब डेकोरेशन क्यों? क्या चल रहा है इसके दिमाग में ?

राजेश नें अब नैना को खुद को घूरते पाया तो हंसकर बोला - ऐसे मत देखो, राजेश ही हूँ। बताता हूं, सब बताता हूं पर पहले जाकर फ्रेश होकर आओ।

नैना अब अपने कमरे की ओर बढ़ी कि राजेश बोला - नैना।

नैना ने मुड़कर राजेश की ओर देखा ।

राजेश ( मुस्कुराते हुए ) - थोड़ा जल्दी आना , काफी देर से इंतजार कर रहा हूं ।

नैना चुपचाप अपने रूम में चली गई , उसके जाने के बाद अब राजेश के चेहरे की मुस्कुराहट गायब हो गई । वह गंभीर भाव से चुपचाप बैठ गया। थोड़ी देर में नैना बाहर आई और हिचकिचाते हुए राजेश की ओर बढ़ चली ।

राजेश ने जो अपने ही ख्यालों में डूबा हुआ था, नैना को आते देखा तो मुस्कुराते हुए खड़ा हो गया -तो कैसी लगी , डेकोरेशन ? सब कुछ बिल्कुल वैसा ही है जैसा तुम्हें पसंद हैं।

नैना सवालिया नजरों से राजेश को देखने लगी ।

राजेश - ऐसे क्यों देख रही हो? क्या तुम और चीजों के साथ साथ मुझे भी भूल गई हो? कहकर वह कुछ पल के लिए खामोश हो गया फिर हँसते हुए बोला - मजाक कर रहा था। क्या हुआ तुम्हें पसंद नहीं आई डेकोरेशन?

नैना (धीमे स्वर में ) - नहीं ऐसा कुछ नहीं है , सब बहुत अच्छा है पर तुम यहां कैसे आए ?

राजेश - खिड़की से ।

नैना (हैरान होकर) - क्या ? पर ...

राजेश - हां जानता हूं कि तुम्हारी किचन की कोई खिड़की बाहर सड़क की ओर नहीं खुलती है । दरअसल मैं दरवाजे से ही आया हूं ।

नैना - पर कैसे और यह क्या तरीका है किसी की इजाजत के बिना उसके घर में घुस जाना ?

, राजेश यह सुनकर हंसने लगा - यह तुम कह रही हो ? तुम तो बोलो ही मत । तुम भी कुछ दिन पहले ऐसे ही मेरे घर में बिना मेरे इजाजत के घुसी थी।

नैना - अच्छा और तुम्हें याद है कि तुमने मुझे पुलिस को बुलाने की धमकी दी थी तो कहो अब मैं पुलिस को बुलाऊँ?

राजेश - बिल्कुल बुलाओ और तुम्हारे पास क्या सबूत है कि मैं यहां तुम्हारी मर्जी के खिलाफ आया हूं ? है कोई फोटो या वीडियो?

नैना यह सुन अब चुप हो गई क्योंकि सबूत उसके पास सच में नही थी।

राजेश - मैं तो आराम से मेन डोर से आया हूं - कहते हुए राजेश ने अपनी जेब से चाबी निकालकर नैना को दिखाई

नैना ( हैरानी से ) - तुम्हारे पास मेरे घर के दरवाजे की चाबी कैसे ?

राजेश - भूल गई जिस दिन तुम सब छोड़ कर जा रही थी और बेहोश हो गई थी, तब तुम्हारे घर की चाबी की एक डुप्लीकेट चाबी मैंने बनवा कर अपने पास रख ली थी कि , पता नहीं कब , कैसे समय में काम पड़ जाए।

नैना (गुस्से से ) - लेकिन क्यों? तुम ऐसे मेरी प्राइवेसी में दखल नहीं दे सकते और साफ-साफ बताओ कि यह सब डेकोरेशन किस लिए की है?

राजेश - सेलिब्रेशन तो बनता है ना। आज तुम्हारी जिंदगी का इतना खास दिन है या फिर यूं कहें कि हम दोनों की ही जिंदगी का खास दिन है । देखो, आज मेरी शादी की तारीख पक्की हो गई और आज ही तुम्हें नया बॉयफ्रेंड मिल गया तो हुआ ना सेलिब्रेशन टाइम। इसलिए सोचा कि साथ में बैठकर थोड़ा पार्टी करते हैं , उसके बाद तो हम अपनी लाइफ में बिजी हो जाएंगे ।

पहले मैंने सोचा कि अपने घर करूँ पार्टी फिर याद आया कि तुम तो मेरे घर आओगी नहीं तो इसलिए मैं यहीं आ गया ।

नैना समझ नहीं पा रही थी कि राजेश सच में खुश है या फिर अपनी नाराजगी को छुपा रहा है?

राजेश अब गंभीर होकर बोला - तुम खुश हो ना नैना ?

नैना - हां मैं खुश हूं और तुम ?

,

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - हां बिल्कुल, मैं भी खुश हूं ।

अब माहौल में एकदम शांति छा गई , दोनों एक दूसरे के सामने खामोश खड़े थे । कहने को बहुत कुछ था पर शब्द नहीं थे।

काफी देर बाद राजेश बोला - एक बात पूछूं नैना?

नैना - हां ।

राजेश - जब मैंने तुम्हें मना किया था साहिल को हां कहने से तो फिर तुमने उसे हां क्यों कहा ? मैं तुम्हें पहले ही आगाह कर चुका था कि मुझे साहिल सही नहीं लगता है पर फिर भी ? कहते हुए राजेश नैना को गुस्से से देखने लगा ।

नैना - किस हक से पूछ रहे हो? मेरी जिंदगी के फैसले तुम नहीं ले सकते। मुझे साहिल में कोई कमी नहीं दिखती। तुम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हो तो अब मैं इंतजार भी तो नहीं कर सकती तुम्हारा।

राजेश - लेकिन साहिल ही क्यों ? मैं फिर कह रहा हूं तुमसे, यह लड़का सही नहीं है। समझो मेरी बात को, तुम्हें साहिल , को अभी मना.....

नैना - प्लीज राजेश , मैं अपनी लाइफ के डिसीजन खुद ले सकती हूं , अभी भूख लगी है तो खाना खाते है - कहते हुए वह डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ी ।

नैना की यह बेरुखी देख राजेश का छुपा हुआ गुस्सा अब बाहर निकल कर आने लगा जिसे वो सुबह से छुपाने की कोशिश कर रहा था।

राजेश - क्या कहा तुमने ? अपनी जिंदगी के फैसले तुम खुद ले सकती हो ? तुम्हें तो यह भी नहीं पता कि तुम सही कर रही हो या गलत। मेरी शादी की बात सुनते ही तुमने साहिल को हां कह दिया और वह भी बिना सोचे समझे।

तुमने गलत फैसला लिया है , तुम्हें साहिल से अभी मना करना होगा।

नैना - क्या मना करना होगा?

राजेश - उसे अभी फोन करो और कहो कि तुम उसके साथ कोई रिलेशन नहीं रखना चाहती, तुमने बस गुस्से में उसे हां बोल दिया था।

, नैना (मुस्कुराते हुए) - और ना मना करूँ तो ?

राजेश अपना आपा खोने लगा - मैं कह रहा हूं तुमसे नैना, साहिल को फोन लगाओ और मना करो अभी इसी वक्त ।

अब राजेश का चेहरा गुस्से से लाल हो गया, नैना उसे इस तरह से गुस्से में देख अंदर ही अंदर सहम सी गई, उसने फिर खुद को संभाला और बोली - मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी, वो अच्छा लड़का है और मैंने सोच कर ही फैसला लिया है।

राजेश गुस्से में नैना की ओर बढ़ा - हां वह अच्छा लड़का है, सब अच्छे हैं। बस मैं ही बुरा हूं , ठीक है करो जो करना है। तुम्हारी जैसी लड़की के साथ ऐसा ही होना चाहिए।

नैना (हैरानी से ) - मेरे जैसी लड़की ? क्या मतलब है तुम्हारा?

राजेश - तुम्हारे जैसी धोखेबाज लड़की। अभी कल तक तो तुम मेरे पीछे थी कि तुम्हें सिर्फ मुझसे शादी करनी है , तुम प्यार हो मेरा। ऐसा क्या हो गया अब कि तुम साहिल से एक ही दिन में इतनी खुश हो गई? कल तक मेरे प्यार की दुहाई देते नहीं थकती थी और अब यह सब?

, यह कैसा प्यार है तुम्हारा जो हर मौसम बदलता है ? तुम क्या चाहती हो - खुद को भी पता है तुम्हें ? नैना कॉलेज टाइम से तुम्हारा यही हाल देख रहा हूं - कॉलेज में पहले बोला करती थी कि प्यार में भरोसा नहीं फिर मुझसे प्यार हो गया । जब शादी की बात आई तो प्यार खत्म, अब मैंने सगाई कर ली तो फिर प्यार जाग गया एकदम से । अब मेरी शादी की खबर सुनते ही तुमने साहिल से हां कर दी। क्या है यह सब ? तंग आ चुका हूं मैं तुमसे और तुम्हारी इन हरकतों से ।

नैना (गुस्से में ) - तो क्या करूं , तुम्हारे इंतजार में बैठी रहूं? मैंने कहा तुमसे कि छोड़ दो रिचा को पर तुम माने? नहीं ना। क्या चाहते हो कि तुम्हारी याद में रोती रहूँ और मुझसे सवाल जवाब करने का हक तुम्हें नहीं है । पहले तुम रिचा को हमारे बीच में लाए थे ।

राजेश - पर तुम साहिल से प्यार नहीं करती हो ।

नैना - हां नहीं करती पर क्या तुम रिचा से प्यार करते हो?

यह सुनकर राजेश अब हैरानी से नैना को देखने लगा ।

नैना -कोई जवाब नहीं है तुम्हारे पास? जानती थी। प्यार करके हम दोनों को ही कुछ नहीं मिला । यही कहा था ना , तुमने सुबह गाड़ी में ? तुमने तो साफ-साफ कह दिया था मुझसे कि दोबारा लौट कर नहीं आओगे मेरे पास और तुम्हारा दिमाग भरोसा नहीं करता मुझ पर । अगर तुम कहते कि तुम्हें कुछ वक्त चाहिए तो मैं तुम्हारा इंतजार करती पर तुमने तो दो टूक मना कर दिया।

राजेश ( झल्लाकर) - हां, कहा था मैंने । मानता हूं सब पर इसका मतलब यह तो नहीं कि तुम इतनी आगे बढ़ जाओगी वह भी एक ही झटके में ?

नैना ( मुस्कुराकर) - मैंने तो अभी बस हां कहां है राजेश पर तुम्हारी तो शादी की तारीख तक तय हो गई । धोखेबाज मैं नहीं तुम हो जो मेरी खुशी सहन नहीं कर पा रहे ।

राजेश ( गुस्से में) - बस बंद करो अपनी बकवास , मैं जो कह रहा हूं सुनो। साहिल से अभी इसी वक्त फोन पर मना करो।

नैना (बेरुखी से) - बिल्कुल नहीं ।

यह सुनकर अब राजेश अपना आपा खो बैठा , उसने वहां ड्राइंग हॉल में रखा सारा सामान उठाकर इधर-उधर फेंकना शुरू कर दिया फिर क्या ग्लास क्या कुर्सी, क्या गुलदस्ता और , क्या डेकोरेशन ? जो भी कुछ उसके हाथ में आता , वह सबको गुस्से से जमीन पर फेंकने लगा और चिल्लाने लगा - नफरत करता हूँ तुमसे।

नैना अब एक कोने में खड़ी होकर डर से काँपने लगी। उसने राजेश को कभी भी इतने गुस्से में नहीं देखा था कि वह सामान ही फेकनेें लग जाए । जब राजेश शांत नहीं हुआ तो वह बोली - ठीक है , मैं मना कर दूंगी साहिल से । पर मेरी दो शर्त हैं ।

राजेश अब थोड़ा शांत हुआ और नैना की ओर देखने लगा ।

नैना - मैं मना कर दूंगी साहिल से लेकिन तुम्हें रिचा से रिश्ता तोड़ना होगा ।

राजेश यह सुनकर कुछ देर चुप रहा फिर बोला - ठीक है, मंजूर है।

नैना - और दूसरी यह कि तुम मुझसे प्यार करते हो और मुझसे शादी करोगे , यह बात तुम्हें कबूल करनी होगी ।

राजेश यह सुनते ही हैरान रह गया - क्या ? नहीं मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा । हां , इतना कह सकता हूं कि मैं किसी से भी , शादी नहीं करूंगा लेकिन तुमसे भी नहीं ।

नैना राजेश का इंकार सुन दंग रह गई, उसे लगा था कि अब तो राजेश मान ही जाएगा - तो ठीक है , तुम्हें जो करना है वह तुम करो और मैं वह करूंगी जो मुझे अच्छा लगेगा।

राजेश - नैना मेरी बात....

नैना - नहीं , अब कुछ नहीं सुनूंगी मैं। या तो तुम मुझसे शादी करो वरना मैं फिर अपनी मर्जी से शादी करूंगी । फैसला तुम्हारा है , जवाब मुझे अभी के अभी चाहिए।

राजेश - यह क्या बचपना है तुम्हारा?

नैना (हंसते हुए ) - बचपना? यह बचपना मेरा नहीं तुम्हारा है। तुम्हें क्या लगा कि मैं बच्ची हूं कि इस तरह से घर को डेकोरेट कर तुम मुझे खुश कर दोगे और फिर मुझसे ना करवा दोगे पर मैं कुछ नहीं करूंगी ऐसा। मैं अपना फैसला सुना चुकी हूं , अब बारी तुम्हारी है । तुम बताओ कि तुम मुझसे शादी करोगे या नहीं ?

राजेश यह सुनकर चुप हो गया , उसका दिमाग फिर से उसके दिल पर हावी होने लगा । वह खामोश रहा।

,

नैना - ठीक है । मुझे मेरा जवाब मिल चुका है , अब तुम अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते ।

राजेश अब गुस्से में बोला - ठीक है , जो करना है करो पर याद रखना कि तुम पछताओगी साहिल के साथ रिश्ता रख कर - कहते हुए वह नैना के घर से बाहर निकल गया।

नैना की आंखों से आंसू बहने लगे , उसे लगा था कि राजेश अब हाँ कह देगा तो सारा नाटक यहीं खत्म हो जाएगा पर उसकी ईगो उसे बार-बार रोक रही थी । अब मैं भी पीछे नहीं हटूंगी , तुम्हारी ईगो को तोड़ना है मुझे वरना मैं तुम्हें हमेशा के लिए खो दूंगी जो मैं कभी नहीं होने दे सकती - यह सोच नैना ने आँसू पोंछे और फर्श पर बिखरे पड़े सामान को साफ करना शुरू कर दिया ।

राजेश नैना के घर से बाहर निकल सड़क पर आ गया - क्यों कर रही हो ऐसा ? मैं अब भरोसा नहीं कर सकता प्यार पर लेकिन तुम अपनी जिंदगी खराब कर रही हो इस चक्कर में। वह कुछ ही दूरी पर खड़ी अपनी गाड़ी में बैठ अपने घर के लिए निकल गया ।

राजेश घर पहुंचा तो रिया ने पूछा - क्या बात है, कुछ टेंशन , चल रही है आपके और नैना के बीच ? बताइए ना भाई , क्या हुआ है?

राजेश ने अब सारी बात रिया को बताई ।

रिया (हैरानी से ) - पर आप क्यों मना कर रहे हो शादी से? अब तो सब कुछ ठीक हो गया है भाई।

राजेश - पता नहीं पर अब मुझे नैना और उसके प्यार पर कोई भरोसा नहीं । आज उसने मेरा भरोसा फिर तोड़ दिया साहिल से हां कह कर ।

रिया - यह गलत है भाई । यह बात आप भी अच्छे तरीके से जानते हैं कि आप आज भी नैना से ही प्यार करते हो लेकिन अब इस तरह पीछे हटना क्या सही है ? आप बात को खामखाँ आगे बढ़ा रहे हैं ।

राजेश ( गुस्से में) - मैं खामखाँ आगे बढ़ा रहा हूं ? तुम मेरी बहन हो या उसकी ? किस दौर से गुजरा हूं मैं , तुम जानते हुए भी मुझे ही सुना रही हो ?
 
रिया - शांत हो जाइए , गलती आपकी या नैना कि नहीं हालात की थी लेकिन अब जब सब कुछ ठीक हो गया है तो , आपकी यह जिद आड़े आ रही है , ऊपर से यह रिचा के साथ शादी का टेंशन । मैंने पहले ही मना किया था आपसे कि यह सब मत करो ।

राजेश - हां जानता हूं । सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन रिचा की शादी वाली बात ने सब बिगाड़ दिया ।

रिया - अब कैसे छुटकारा पाएंगे आप रिचा के साथ शादी से?

राजेश - वह मैं देख लूंगा , अभी रात बहुत हो गई है कल देखते हैं ।

रिया - भाई एक बात समझ नहीं आई कि साहिल को किसने भेजा है और क्या प्लान है इसका?

राजेश - मैंने उसका इंतजाम सोच लिया है । अब जो भी होगा आमने सामने होगा ।

रिया - पर संभाल कर भाई।

राजेश मुस्कुराकर जैसे ही अपने कमरे के लिए सीढ़ियों की ओर बढ़ा ।

, रिया - भाई , मां आपके बारे में पूछ रही थी कि आप कैसे हैं?

राजेश यह सुन रिया की ओर हैरानी से देखने लगा - मिसेज मल्होत्रा मेरे बारे में पूछ रही थी ? फिर वह हंसने लगा ।

रिया - इतनी भी बुरी नहीं है वह भाई, मां है आपकी।

राजेश संजीदा स्वर में बोला - मेरी नहीं , सिर्फ तुम्हारी रिया।

रिया अब नम आंखों से राजेश को देखने लगी - भाई प्लीज।

राजेश - यह मैं नहीं कहता । यह उन्होंने खुद कई बार मुझसे कहा है कि वह सिर्फ तुम्हारी मां है ।

रिया - वह बस मेरे भविष्य को लेकर डरती है भाई ।

राजेश - तो फिर उनके लिए मेरा एक ही जवाब है कि तुम मेरी बहन हो , मेरी जिम्मेदारी हो । तुम्हारी खुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं पर अगर हम दोनों भाई बहन के रिश्ते को उन्होंने खराब करने की कोशिश की तो मैं उन्हें आसानी से नहीं जाने दूंगा ।

रिया अब उदास हो चुप हो गई ।

,

राजेश ने जब उसे उदास देखा तो प्यार से बोला - अपने भाई पर भरोसा नहीं ? क्या तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हें कभी नुकसान पहुंचाऊंगा या तुम्हें धोखा दूंगा ?

रिया - मुझे आप पर खुद से भी ज्यादा भरोसा है।

राजेश - फिर क्यों उदास हो रही हो ? हम दोनों का तो आपस में चलता ही रहता है । तुम्हें इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है ।

रिया - एक डर सा लगा रहता है भाई।

राजेश -क्या ?

रिया - अगर कभी मां की वजह से आपके - मेरे रिश्ते में खटास पड़ गई तो?

राजेश (मुस्कुराते हुए) - मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगा और दुनिया की कोई भी ताकत तो क्या मिसेज मल्होत्रा की कोई भी हरकत तुम्हारे और मेरे रिश्ते में दरार नहीं डाल सकती।

सच कहूं तो समझ सकता हूं एक मां का डर अपने बच्चे के , लिए पर वो मुझे ही तुम्हारा दुश्मन समझती हैं।

रिया - आप मुझसे कितना प्यार करते हो?

राजेश (हंसते हुए) - बहुत बहुत ज्यादा।

रिया - नैना से भी ज्यादा ?

राजेश खामोश सा रिया को देखने लगा ।

रिया (हंसते हुए ) - जाइए, रात बहुत हो गई है । इस सवाल का जवाब आप भले ही मुझे ना दे पर खुद को जरुर देना - रिया अपने कमरे में चली गई।

राजेश अब वहीं बैठा रह गया और सोचने लगा - इस साहिल का जल्दी ही कुछ ना कुछ करना पड़ेगा पर उससे पहले इससे नैना को दूर करना पड़ेगा।

अगले दिन राजेश जब ऑफिस पहुंचा तो देखा कि नैना और साहिल बड़े खुश होकर आपस में बात कर रहे थे । राजेश अब खड़ा उन दोनों की हंसी मजाक को देखकर अंदर ही अंदर जल भुन रहा था कि तभी पीछे से आवाज आई - दोनों , साथ में कितने अच्छे लगते हैं ना सर?

राजेश ने पलट कर देखा तो सारा खड़ी मुस्कुरा रही थी - सही कहा ना मैने सर?

राजेश (झल्लाकर ) - तुम कुछ काम नहीं कर सकती क्या आँफिस में, जो सारा दिन मेरे पीछे खड़े हो कमेंट करती रहती हो? अपनी सीट पर जाइए और अपना काम कीजिए - कहते हुए राजेश गुस्सा करता हुआ अपने कैबिन में चला गया।

उसे यूं जाता देख सारा , साहिल और नैना हंसने लगे ।

साहिल - अच्छा कर रही हो नैना। अगर यही हाल रहा तो राजेश को तोड़ने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

नैना - भगवान करे , जल्दी राजेश अपने दिल की बात सुन ले और इस नाटक को खत्म करें ।

राजेश अब अपने कैबिन में इधर से उधर चक्कर काट रहा था, उसे नैना पर बहुत गुस्सा आ रहा था - ऐसा भी क्या है उस साहिल में ? और हंस तो दोनों ऐसे रहे थे कि पता नहीं , एक दूसरे को कब से जानते हो ।

विशाल चेयर पर बैठा उसे यूं इधर-उधर चक्कर लगाते और खुद से बडबडाते देखकर बोला - और कितने चक्कर लगाओगे ? बैठो आराम से।

राजेश - मै यहां परेशान हूं और तुम हो कि...

विशाल - और इस परेशानी का कारण कौन है ? तुम ।

जब नैना खुद चलकर तुम्हारे पास आई थी तब माफ कर देते उसे पर जब तो तुम्हारी अक्ल बंद हो गई और अब ऐसे परेशान हो रहे हो। जा कर कह दो नैना से अपने दिल की बात ।

राजेश - विशाल कितनी बार कहूं कि मेरी जिंदगी में किसी के लिए कोई जगह नहीं है।

विशाल - तुम रह पाओगे नैना के बिना जिंदगी भर ?

राजेश कुछ देर चुप पड़ गया फिर बोला - हां , बिल्कुल।

विशाल - तो ठीक है ना, फिर तुम क्यों जल भून रहे हो ?

तुम खुश रहो और उन्हें भी खुश रहने दो ।

,

राजेश अब अपनी चेयर पर जाकर बैठ गया - खुश रहता अगर साहिल अच्छा लड़का होता ।

विशाल - वह सब ठीक है लेकिन मेरा भी सोचो । रिचा से शादी कैसे कर सकते हो तुम ? कैसे खत्म करोगे नाटक?

राजेश (मुस्कुराते हुए) - रिचा का मैंने सोच लिया है ।

विशाल (उत्सुकता से ) - क्या ?

राजेश - सब पता चल जाएगा लेकिन तुमसे मैंने साहिल की डिटेल्स मांगी थी , उनका क्या हुआ ?

विशाल - उसने दो कंपनी में काम किया है और दोनों में ही उसका रिकॉर्ड बढ़िया रहा है। शक करने लायक कुछ भी नहीं है ।

राजेश - तुम रहने दो , अब इस साहिल के मैटर को मैं खुद सॉल्व करूंगा । वैसे भी काफी छूट दे चुका हूं उसे पहले ही।

विशाल - जैसा तुम्हें ठीक लगे।

, दोपहर के करीब राजेश कुछ फाइल्स ले ऑफिस से बाहर निकला , तभी पीछे से साहिल भागता हुआ आया - अरे रुको तो राजेश, इतना भी क्या गुस्सा करना?

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - सॉरी मैं रुक नहीं सकता। बात करनी है साथ चलते हुए कर सकते हो ।

साहिल - ओके। तुम्हें बहुत बुरा लग रहा है ना नैना को मेरे साथ देख ?

राजेश (हँसते हुए ) - लगता है तुम सास बहू वाले सीरियल ज्यादा देखते हो ।

साहिल - मतलब ?

राजेश - उनमें सास हर वक्त अपनी बहू को ताने मारती रहती है , ऐसे ही तुम हर वक्त मेरा दिमाग खाते रहते हो पर यह फिल्मी दुनिया नहीं है, हकीकत है ।

साहिल ( हंसते हुए ) - अच्छा जोक है लेकिन तुम्हें नहीं लगता कि तुम हार रहे हो ?

राजेश यह सुनकर रुक गया - शायद तुम कुछ भूल रहे हो।

,

साहिल - अच्छा और वह क्या है ?

राजेश - तुम भूल रहे हो कि अब तक तुम इस लिए जीते हो क्योंकि मैंने कुछ किया ही नहीं था लेकिन अब मैं चुप नहीं बैठूंगा । तुम्हें जो करना है करो और अब मुझे जो करना है मैं करूंगा । देखते है कि तुम्हारे इस खेल में कौन जीतता है ? बस कुछ दिन और उछल कूद कर लो और मेरी दी हुई छूट का फायदा उठा लो क्योंकि फिर तुम्हें पता चलेगा कि राजेश मल्होत्रा को हराना तुम्हारे जैसे झूठे और धोखेबाज इंसान के बस की बात नहीं है । मैं बहुत जल्द तुम्हारे सच के करीब पहुंच जाऊँगा और तब तुम्हें और तुम्हारे मालिक को मुझसे कोई नहीं बचा पाएगा - कहकर राजेश बिल्डिंग से बाहर निकल गया।

साहिल वहां थोड़ी देर तक खड़ा रहा कि इसे कुछ पता तो नहीं चल गया। अब उसे याद आया कि राजेश ने अगर उसकी डिटेल्स वाली फाइल देख ली तो वह उसके आधे सच के करीब पहुंच सकता है इसलिए राजेश के हाथ में पहुंचने से पहले ही उसे वह फाइल गायब करनी होगी । वह जल्दी से वापस ऑफिस पहुंचा और जगन से इन्वेंटरी की चाबी ले उस ओर भागा ।

, उधर राजेश गाड़ी में बैठ थोड़ी ही दूर गया था कि उसे कुछ याद आया और वह वापस ऑफिस की ओर मुड़ चला।

साहिल ने इन्वेंटरी में से अपनी फाइल इनवेंटरी मे शुरू की जो जल्दी उसे मिल गई । यह देख साहिल की जान में जान आई, वह फाइल ले जैसे ही इन्वेंटरी से बाहर निकला कि सामने खड़े इंसान को देख हैरान रह गया कि ये यहाँ कैसे?

सामने रिया थी।

रिया - तुम ... तुम साहिल हो ना ?

साहिल उसे देखकर हडबड़ा गया - हां मेरा नाम साहिल है।

रिया (सोचते हुए) - मैंने तुम्हें कहीं देखा है ।

यह सुन साहिल के चेहरे का रंग उड़ गया, वह अब संभलकर बोला - नहीं , हम कभी नहीं मिले । मुझे कुछ काम है , मैं चलता हूं ।

रिया - पर तुम यहां इन्वेंटरी में क्या कर रहे थे और यह फाइल किसकी है तुम्हारे हाथ में ?

, साहिल - व.. वो यह फाइल एडमिन में सबमिट करनी है। जगन बिजी था तो मैं खुद ही आ गया लेने । मैं जाता हूं , लेट हो रहा हूं - कहकर वो लिफ्ट की तरफ बढ़ चला।

उसके जाने के बाद रिया सोचने लगी कि कहां देखा है इसे तभी पीछे से राजेश आ गया- रिया, यहां क्या कर रही हो इन्वेंटरी के आगे ?

रिया - हां भाई, ऊपर जा ही रही थी लेकिन ....

राजेश - लेकिन क्या?

रिया - वह मैंने साहिल को यहां देखा, एक फाइल लेकर निकला यहां से । थोड़ा हडबढ़ाया हुआ था ।

राजेश - फाइल ? कौन सी फाइल?

रिया मैंने पूछा था, उसने कहा कि एडमिन को चाहिए।

राजेश को अब समझते देर न लगी कि साहिल ने क्या गड़बड़ की है क्योंकि इसी फाईल के लिए वह वापस लौट कर आया था - कहां गया वह?

, रिया - लिफ्ट की तरफ।

राजेश अब भागकर लिफ्ट के पास पहुंचा पर लिफ्ट तब तक बंद हो चुकी थी। राजेश बिना देर किए सीढ़ियों से ऑफिस की ओर भागा ।

लिफ्ट के अंदर ही साहिल ने उस फाइल में से अपनी पर्सनल जानकारी के सारे पेज निकाल छोटे-छोटे टुकड़ों में फाड़ दिए - अब कैसे पता लगाओगे राजेश ? - कहकर में मुस्कुराता हुआ खड़ा हो गया। थोड़ी ही देर में वह ऑफिस वाले फ्लोर पर पहुंच चुका था ।

वह मुस्कुराता हुआ लिफ्ट से बाहर निकला और सारे टुकड़ों को डस्टबिन में डाल दिया ।साहिल कुछ कदम ही चला होगा कि पीछे से राजेश हाँफता हुआ वहां आ पहुंचा - साहिल।

साहिल ने पीछे मुड़कर देखा तो राजेश खड़ा था - तुम तो काम से गए थे फिर इतनी जल्दी कैसे लौट आए ?

राजेश - वह फाइल कहां है ?

साहिल (मासूमियत से) - कौन सी फाइल?

, राजेश - तुम्हारी रिकॉर्ड वाली फाइल जिसे तुम अभी इन्वेंटरी से निकाल कर लाए हो ।

यह सुन साहिल हंसते हुए बोला - वह तो मैंने फाड़ दी । ऐसा करो तुम कुछ और सोचो , यह तो मैंने तुम्हारा काम खराब कर दिया ।

राजेश गुस्से में साहिल को देखने लगा ।

साहिल - अब कुछ नहीं हो सकता, सॉरी - कहते हुए जैसे ही आगे बढ़ा कि राजेश की आवाज आई - वैसे मुझे उस फाइल की कोई जरूरत है भी नहीं । तुमने खामखाँ इतनी मेहनत की।

साहिल यह सुनकर हैरान रह गया , उसने पलट कर देखा तो राजेश मुस्कुरा रहा था।

राजेश ने अब अपने हाथ में लगी फाइल्स में से एक फाइल निकाल कर उसकी ओर इशारा किया - तुम्हारी फाइल यहां है साहिल । वो तो बस एक डुप्लीकेट काँपी थी।

साहिल अब हैरानी से कभी राजेश को तो कभी उसके हाथ में लगी अपनी फाइल को देखता...... वह अब फुर्ती से राजेश , से वह फाइल छीनने भागा पर राजेश बडे आराम से उसे देख रहा था......,
 
राजेश तो चाहता ही था कि साहिल उसके पास आकर वह फाइल ले , उसने बाकी फाइल्स वही साइड में रख दी और उस एक फाइल को लेकर खड़ा हो गया । साहिल फटाफट से उसके पास आया और राजेश के हाथ से फाइल छीनने की कोशिश करने लगा पर राजेश कभी फाइल को ऊपर तो कभी नीचे , कभी दाएं तो कभी बाये कर देता ।

साहिल बार-बार फाइल को झपटने की कोशिश करता पर नाकाम रहा । दोनों में अब आपस में थोड़ी धक्का-मुक्की भी हुई पर साहिल फाइल तक नहीं पहुंच पाया ।

अब साहिल गुस्से में राजेश से बोला - यह फाइल मुझे दे दो!राजेश वरना मेरा हाथ उठ जाएगा ।

यह सुनकर राजेश हंसने लगा - यह कोशिश करके भी देख लो शायद तुम्हारा काम बन जाए ।

साहिल गुस्से में राजेश को देखने लगा ।

राजेश मुस्कुराते हुए बोला - अच्छा चलो, नाराज नहीं हो । लो यह फाइल ले लो - कहते हुए राजेश ने अब फाइल साहिल ओर बढ़ा दी ।

साहिल ने जैसे ही वह फाईल लेनी चाही कि राजेश ने उसे ऊपर हवा में उछाल दिया । अब फाइल के सारे पन्ने बिखर कर हवा में उड़ गए ।

साहिल गुस्से में राजेश से बोला - यह क्या किया तुमने और जमीन पर बैठ इधर-उधर बिखरेे पड़े पेजों को जल्दी से उठाने लगा ।

राजेश साहिल के करीब आकर खड़ा हो गया- तुम्हें समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि वापस लौट जाओ वरना तुम्हारी हर कोशिश इसी तरह जमीन पर इधर-उधर बिखरी पड़ी नजर आएगी लेकिन तुम्हें मिलेगा कुछ भी नहीं । ठीक वैसे , ही जैसे अब कुछ नहीं मिलेगा।

साहिल यह सुन हैरानी से राजेश की ओर देखा - मतलब क्या है तुम्हारा ?

राजेश मतलब इस फाइल के पेजों को खुद ही देख लो , समझ जाओगे। साहिल ने अब हाथ में लगे पेज़ों को देखा तो पाया कि वह कोई और ही फाइल थी - यह क्या मजाक है?

राजेश - यह मजाक नहीं तुम्हारा भविष्य है । जैसे आज तुम मेरे सामने झुककर जमीन पर बैठे हो , वैसे ही कुछ दिन बाद तुम यूँ ही झुक कर मुझसे माफी मांगोगे ।

साहिल ने अब खुद को देखा तो वह सच में राजेश के पैरों के पास बैठा था। वह अब झल्लाते हुए खड़ा हो गया - बहुत गुरूर है ना तुम्हें, इसी को तोडूंगा । ऐसा हाल कर दूंगा कि तुम्हारे पास कुछ भी नहीं बचेगा , यहां तक कि नैना भी नहीं।

राजेश सुन मुस्कुराने लगा जिसे तुम गुरूर का नाम दे रहे हो, उसे मैं अपना आत्मविश्वास मानता हूं जो तुम्हारे जैसे धोखेबाज लोग नहीं समझते । तुम्हारे जैसे लोग सिर्फ सामने , वाले को नीचा दिखाना जानते हैं पर आखिर में तुम खुद ही सबकी नजरों में गिर जाते हो । रही बात नैना की , तो मेरा उससे कोई मतलब नहीं । वह चाहे तुम्हारे साथ रहे या किसी और के साथ, यह उसकी मर्जी है ।

साहिल - चुपचाप मेरी रिकार्ड वाली फाइल मुझे देदो ।

राजेश -सॉरी वह फाइल मेरे पास नहीं है , मैंने तुमसे झूठ बोला था ।

अब यह सुनकर साहिल की जान में जान आई ।

राजेश उसे खुश देखकर बोला - पर खुश मत हो क्योंकि तुम्हारी फाइल मैं आज सुबह ही पढ़ चुका हूं और मुझे जो कुछ भी जानना था , जान चुका हूं । तुम बस कुछ वक्त और खैर मना लो अपनी।

साहिल - कितनी भी कोशिश कर लो पर तुम मेरे इरादे जान नहीं पाओगे ।

राजेश - ओह! ऐसी बात है तो ......

तभी नैना वहाँ आ गई - क्या हो रहा है यहां साहिल - कहते , हुए उसने बेरुखी से एक बार राजेश को देखा और फिर साहिल को देखने लगी।

साहिल कुछ बोल पाता उससे पहले ही राजेश बोल पड़ा - कुछ नहीं , तुम्हारा नया पार्टनर मुझसे उलझना चाहता है । उसे मैं पसंद नहीं हूं क्योंकि मैं तुम्हारा पहला प्यार हूं तो बस मैं समझा रहा था कि उसे मुझसे डरने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन यह है कि मुझे धमकी दे रहा है । राजेश ने अपने हाथ पीठ के पीछे बांध लिए और वह साहिल को देख मुस्कुराने लगा ।

नैना अब हैरानी से साहिल को देखने लगी - साहिल तुम...

साहिल - यह झूठ बोल रहा है नैना।

राजेश (मासूम सा चेहरा बनाकर ) - मैं झूठ बोल रहा हूं ? अभी जो थोड़ी देर पहले तुमने मुझे इतनी जोर से धक्का दिया और मेरे हाथ से फाइल छीन ली, उसका क्या कहोगे ?

साहिल ( हैरानी से ) - मैंने कब धक्का दिया ?

,

राजेश - अभी यहीं पर थोड़ी देर पहले । सबूत के तौर पर देखो, फर्श पर कुछ पेज बिखरे पड़े हैं फाइल के और तुम्हारे हाथ में भी उसीफाइल के पेज लगे हुए हैं जो तुमने अभी मुझसे छीनी थी।

नैना ने देखा कि फर्श पर सच में कुछ पेज बिखरे पड़े हैं और साहिल के हाथ में भी फाइल थी ।

साहिल (हडबड़ा कर) - नैना यह झूठ बोल रहा है , ऐसा कुछ भी नहीं है ।

नैना ने साहिल के हाथ से फाइल लेकर देखी तो वह सच में राजेश की ही फाइल थी।

नैना को अब साहिल पर बहुत गुस्सा आया कि इसको ये सब करने की क्या जरूरत थी , वह कैसे मेरे राज को धक्का मार सकता है?

तभी राजेश बोला - समझा लो इसे। आज तो मैं चुप रहा क्योंकि इसने एक बार मेरी मदद की थी। मैं चुप हूं , इसका मतलब यह नहीं कि मैं कमजोर हूं ।

, नैना (राजेश की ओर फाईल बढ़ाते हुए) - आई एम सॉरी। यह आगे से ऐसी गलती नहीं करेगा - कहते हुए वह साहिल को हाथ पकड़ ऑफिस के अंदर की ओर खींचते हुए ले चली।

साहिल - मेरी बात तो सुनो.....

नैना - कुछ नहीं सुनना चलो यहां से ।

साहिल ने पलट कर राजेश को देखा तो वह उसे देख मुस्कुरा रहा था ।

साहिल की आंखों से ओझल होते ही राजेश ने अपने हाथ आगे कर उनमें साहिल के पर्स को देखा जो उसने साहिल से धक्का-मुक्की वक्त उसकी जेब से निकाला था ।

साहिल को राजेश ने जानबूझकर उकसाया था । उसने फटाफट से पर्स खोल कर चेक किया तो उसमें साहिल का आई कार्ड था । राजेश ने उसका फोटो खींच जल्दी से वापस पर्स में रख दिया और पर्स को फर्श पर फेंक दिया।

कुछ ही पलों में साहिल वापस आया , उसने फर्श पर पड़ा अपना पर्स उठाया और राजेश की ओर देखा । राजेश साईड में रखी अपनी फाइल्स उठाने में लगा रहा जैसे कुछ पता ही ,! ना हो ।

साहिल ने देखा कि राजेश का ध्यान नहीं है तो फटाफट से उसने पर्स अपनी जेब में रखा और बोला - तुम तो झूठ भी बोलना जानते हो ?

राजेश मुस्कुराते हुए उसे देखने लगा और बोला - क्योंकि मैं जानता हूं कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते ।

साहिल कुछ कहने को हुआ कि पीछे से रिया आ गई उसे देखते ही साहिल चुप हो गया और वापस ऑफिस की ओर मुड़कर चला गया।

राजेश ने पीछे मुड़कर देखा तो सामने से उसे रिया नजर आई - क्या हुआ भाई?

राजेश (मुस्कुराकर ) - कुछ नहीं , चलो चलते हैं ।

राजेश को साहिल का रिया के आने पर चुपचाप चले जाना कुछ अजीब सा लगा।

अंदर ऑफिस में नैना साहिल को डांट रही थी - तुम पागल हो क्या ? राजेश को धक्का देने की हिम्मत कैसे की?

,

वह तो मैं एक्टिंग कर रहा था जिससे उसे भरोसा हो जाए कि हम दोनों रिलेशन में है कि कहीं उसे शक ना हो जाए।

नैना - यह एक्टिंग कुछ ज्यादा ही हो गई । तुम बस संभाल कर रहना और आइंदा उसे चोट पहुंचाने की या धमकी देने की कोशिश भी मत करना वह तुमसे ज्यादा ताकतवर है , दो मिनट में हरा देगा तुम्हें और ना ही मुझे पसंद है कि कोई उसे चोट पहुंचाए।

साहिल (कान पकड़कर ) - अच्छा सॉरी यार, अगली बार से ध्यान रखूंगा।

इतने में रिया और राजेश आपस में बातें करते हुए आँफिस में अंदर आए।

साहिल उठकर राजेश के पास गया - सॉरी राजेश , मैं गुस्से में पता नहीं तुमसे क्या-क्या बोल गया । तुम तो समझ ही सकते हो मेरा हाल , नया नया रिश्ता है तो डर तो लगता ही है पर मैं जानता हूं कि तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है और फिर हम दोस्त भी हैं तो तुम मुझे माफ कर दोगे - कहते हुए वह राजेश के गले लग गया और धीरे से उसके कान में बोला - तो कैसी रही? तुम मुझे नैना की नजरों में गिराना चाहते थे पर अब तुम , उसकी नजरों में गिरने को तैयार हो जाओ।

राजेश (मुस्कुराकर) - अरे कोई बात नहीं , मैं समझ सकता हूं मैंने तुम्हें तभी माफ कर दिया था। इट्स ओके।

यह देख अब नैना को कुछ राहत महसूस हुई और उसके चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई। साहिल और राजेश अब एक दूसरे से अलग हुए ।

साहिल ने देखा कि राजेश के पास ही खड़ी रिया उसे देख कुछ सोच में डूबी हुई है । वह जल्दी से नैना की ओर बढ़ा कि उसके पैर से कुछ टकराया और वह धडाम से जमीन पर गिर पड़ा ।
 
राजेश अपनी हंसी को दबाते हुए आगे बढ़ा और हाथ बढ़ाकर बोला - अरे साहिल तुम तो गिर गए, थोड़ा संभल कर चला करो - कहते हुए उसने हाथ पकड़ साहिल को उठाया।

नैना और सारा जल्दी से साहिल के पास आए ।

नैना - चोट तो नहीं आई ?

, साहिल - नहीं नहीं मैं ठीक हूं ।

सारा - तुम गिर कैसे गए ?

साहिल - पता नहीं पैरों से जैसे कुछ टकरा गया और मेरा ध्यान भी नहीं था , तो संभल नहीं पाया ।

राजेश - पक्का तुम्हें कहीं चोट नहीं आई ।

साहिल - हम्म, नहीं आई ।

राजेश अब चिंतित स्वर से बोला - ध्यान रखना कि कहीं कोई अंदरूनी चोट ना आई हो ।

साहिल अब राजेश की ओर देखा तो वह प्यार से मुस्कुरा दिया ।

रिया - शुक्र मनाओ कि भाई ने उठा दिया वरना पता नहीं कब तक गिरे पड़े रहते और फिर तुम्हें भाई को थैंक्स बोलना चाहिए ।

साहिल - थैंक्स राजेश ।

, राजेश - कोई बात नहीं , मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं । कभी तुम्हें नहीं छोडूंगा - कहते हुए मुस्कुरा दिया।

साहिल - जानता हूं , कहकर अब धीरे-धीरे चल कर अपनी सीट पर जाकर बैठ गया । नैना और सारा उसके पास जाकर खड़े हो गए। रिया राजेश के कैबिन में चली गई , कुछ पल बाद राजेश जैसे ही केबिन में घुसा तो रिया वहां चुपचाप खड़ी थी , उसने राजेश को देखा। राजेश ने केबिन का दरवाजा बंद किया और रिया के पास जाकर खड़ा हो गया।

दोनों एक पल को एक दूसरे को खामोशी से देखते रहे फिर दोनों ही जोर से हंसने लगे।

राजेश (हँसते हुए ) - बेचारे को गिराने की क्या जरूरत थी, वह तो पहले से ही गिरा हुआ था।

रिया - नहीं भाई , जो कोई भी मेरे भाई से पंगा लेगा उसे मैं ऐसे आसानी से नहीं छोडूंगी । मैंने तो उसे बस उसकी असली जगह दिखाई है कि वह एक गिरा हुआ इंसान है।

राजेश - अगर किसी ने देख लिया होता तो?

रिया - बिल्कुल नहीं , नैना और साहिल दोनों का ध्यान बस , आप पर था पर वो आपकी बहन को तो भूल ही गए। मैं भी किसी से कम नहीं - कहते हुए वह हँसने लगी कि तभी विशाल वहाँ आया - सॉरी राजेश आज थोड़ा लेट हो गया।

राजेश - कोई बात नहीं कहते हुए वह अपनी कुर्सी जा बैठा।

विशाल - वैसे क्या बात है ,आज तो दोनों भाई बहन बड़े खुश दिख रहे हो ? लगता है किसी का बैंड बजा दिया है तुमने ।

रिया - साहिल का ।

विशाल (चौक कर ) -साहिल का ? कैसे?

राजेश ने उसे सारी बात बताई और साहिल का आई कार्ड की फोटो सेंड कर बोला - इससे पता लगा उसके बारे में , कुछ जानकारी मिल जाएगी जैसे एड्रेस तो उससे भी हम बहुत कुछ पता कर सकते हैं ।

विशाल - पर तुमने तो साहिल से कहा था कि तुम उसकी फाइल पड़ चुके हो।

राजेश - झूठ कहा था उसे डराने को जिससे वह घबरा जाए और हड़बड़ी में कोई गलती करें । सबसे पहले तो यह पता , लगाना है कि वह क्यों मेरे पीछे है, कोई प्रोफेशनल दुश्मनी है या फिर पर्सनल है? इससे हमें आसानी रहेगी।

विशाल - ठीक है मैं पता करता हूं ।

अभी राजेश ने लैपटॉप पर काम करना शुरू किया था कि उसका मोबाइल बज उठा। राजेश ने स्क्रीन पर फ्लैश होता नाम देखा - मिसेज मल्होत्रा।

राजेश यह देख कर रिया ले बोला - सुबह तुम कुछ दिखाने वाली थी ना , तो कहां है तुम्हारी प्रेजेंटेशन ?

रिया - मैं तो भूल ही गई , गाड़ी में रह गई - लेकर आती हूं, कहकर बाहर चली गई।

राजेश - हेलो ।

मिसेज मल्होत्रा - हेलो राजेश , इतना टाइम क्यों लगा दिया फोन उठाने में ? (दोनों की ही आवाज में एक अनकही तल्खी थी )

राजेश - मैं कहीं बिजी था, आप सुनाएं कैसे याद किया , आपने ?

मिसेज मल्होत्रा - रिया कैसी है ? पहुंच तो गई ना वह कल आराम से ?

राजेश - हां पहुंच चुकी है , क्या आपने यही जानने के लिए फोन किया था ?

मिसेज मल्होत्रा - नहीं पर एक वजह यह भी थी । उसका फोन बंद आ रहा था तो सोचा तुम से ही पूछ लूँ क्योंकि मेरी बेटी को मेरी कम तुम्हारी फिकर ज्यादा रहती है । जब देखो तुम्हारे आसपास घूमती रहती है , पता नहीं क्या पट्टी पढ़ाई है तुमने उसे ?

विशाल -जो वहीं खड़ा था, राजेश की तल्खी को देख समझ गया कि जरूर मिसेज मल्होत्रा का फोन है। वह चुपचाप राजेश के सामने वाली सीट पर बैठ गया।

मिसेज मल्होत्रा की बात सुन राजेश को गुस्सा आने लगा पर फिर उसने खुद को शांत किया और बोला - इसे पट्टी पढाना नहीं प्यार कहते हैं जो हम दोनों भाई-बहनों के बीच है । अगर आपने सिर्फ इन्हीं बेकार बातों के लिए फोन किया है तो मेरे पास जाया करने को वक्त नहीं है ।

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मिसेज मल्होत्रा (गुस्से में ) - हां तो मेरे पास भी वक्त नहीं है तुम पर जाया करने को, काम था इसलिए फोन किया ।

राजेश - सुन रहा हूं ।

मिसेज मल्होत्रा - मैं अपनी बेटी के लिए अच्छा सा बंगला लेना चाहती हूं तो मैंने यहां देखा है एक, काफी अच्छा है और मुझे पसंद आया तो पैसे चाहिए।

राजेश ( हैरानी से ) - बंगला? लेकिन मैंने पहले ही रिया के नाम पर दो बंगले ले रखे हैं और एक यहां मुंबई में देख रहा हूं। मेरे हिसाब से यहाँ बेहतर रहेगा उसके लिए और.....

मिसेज मल्होत्रा - तुम्हारी राय नहीं मांगी है , पैसे मांगे हैं । दो ले रखे हैं और तीसरा देख रहे हो तो क्या ? कुछ सालों में तो मेरी बेटी शादी करके अपने घर चली जाएगी फिर जायदाद और सब कुछ तुम्हारे नाम ही तो है । आराम से लुफ्त उठाओगे पर भूलो मत कि मेरी बेटी का भी इस प्रॉपर्टी में बराबर का हिस्सा है ।

राजेश - तो आप पापा से पैसे मांग ले ।

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मिसेज मल्होत्रा - वह बिजनेस टूर पर बाहर गए हैं और उन्होंने तो पूरा मालिकाना हक तो तुम्हें दे रखा है । मैं बस तुम्हारे आगे हाथ फैलाती रहूँ? क्या मेरा कोई हक नहीं ?

राजेश - ठीक है, आप मुझे उस बंगले सारी जानकारी भेज दीजिए, मैं देख लूंगा और खरीद लूँगा रिया के नाम पर ।

मिसेज मल्होत्रा - कोई जरूरत नहीं है , मैं खुद खरीदना चाहती हूं । तुम्हारी हेल्प की जरूरत नहीं है मुझे, मैं खुद कर सकती हूं इतना काम ।

राजेश - ठीक है इंतजाम करा दूंगा पैसों का ।

मिसेज मल्होत्रा - सुनो, मैं तो इसे खरीद लूंगी पर तुमने जो वहाँ देखा है , उसे भी खरीद लेना । वहां उसका खुद का घर होगा तो आराम से रहेगी और किसी और का ( राजेश ) मुंह नहीं देखना पड़ेगा ।

राजेश - ठीक है और कुछ?

मिसेज मल्होत्रा - ध्यान रखना मेरी बेटी का ।

, राजेश ने फोन काट दिया और चेयर पर पीछे होकर लेट अपनी आंखें बंद कर ली।

विशाल - माफ करना , तुम्हारी पर्सनल लाइफ में दखल दे रहा हूं पर मिसेज मल्होत्रा को जरा तो लिहाज करना चाहिए। रिया के पास अब चार चार बंगले हो जाएंगे और मैं खुश भी हूं उसके लिए पर तुम? तुम्हारा क्या ?

तुम तो बस एक कैशियर हो उनके लिए , वो जब जितना पैसा चाहिए होता है , मांग लेती है। मुझको लगता है कि रिया की शादी होने तक यह सब कुछ रिया के नाम कर चुकी होंगी और तुम्हारे पास कुछ भी नहीं होगा । सारा दिन यहां मेहनत करते हो तुम और तुम्हारे पास क्या है ?

बस यह एक मुंबई वाला घर! क्या यह उन्हें दिखाई नहीं देता? मेरे ख्याल से तुम्हें रिया को बाहर नहीं भेजना चाहिए था । आखिर वह भी तो देख ती अपनी मां के ऐसे चेहरे को।
 
राजेश अब सीधा होकर बैठ गया - बिल्कुल नहीं , मैं नहीं चाहता कि दोनों मां-बेटी में मेरी वजह से लड़ाई हो फिर ठीक है ना , मेरे लिए यह घर काफी बड़ा है फिर रिया भी तो बराबर की हकदार है इस जायदाद में। तुम बस उन्हें पैसे भिजवा दो।

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विशाल (नाराजगी से ) - कितने रुपए चाहिए उन्हें ?

राजेश - पता नहीं , मैंने नहीं पूछा पर जितने भी चाहिए ,उतने का इंतजाम करा देना ।

विशाल - तुम अंकल से क्यों बात नहीं करते?

राजेश - नहीं , वह पहले ही मुझे लेकर परेशान रहते हैं और ऊपर से मिसेज मल्होत्रा का व्यवहार । वह पहले से ही मेरे और मिसेज मल्होत्रा के रिश्ते में खटास से दुखी हैं, यह सब झेल नहीं पाएंगे और फिर पैसों की ही तो बात है । मुझे उनका करना भी क्या है ? कहते हुए वह अपने काम में लग गया। विशाल अब हार कर उठ बाहर की ओर चल दिया।

विशाल जैसे ही केबिन से बाहर निकला कि उसे सामने रिया खड़ी दिखाई दी। उसे वहां देख वह एकदम से हड़बड़ा गया कि रिया ने कि कहीं उनकी बात तो नहीं सुन ली।

रिया - क्या हुआ?

विशाल - क...कुछ नहीं ।

, रिया (मुस्कुराकर) - अरे आप इतना घबरा क्यों रहे हैं , मैं तो बस यूं ही पूछ रही हूं ।

विशाल - नहीं तो , तुम अचानक से सामने आ गई तो मैं घबरा गया ।

रिया - अच्छा आप कहां जा रहे हो ? चलो प्रेजेंटेशन दिखाती हूं आपको भी ।

विशाल - नहीं , मुझे अभी कुछ काम है , मैं आता हूं थोड़ी देर में । तब देखूंगा ।

रिया अच्छा जल्दी आ रहा विशाल हां बस थोड़ी देर कहते हुए वह चला गया।

उधर साहिल टेरेस पर अकेले गुमसुम सा बैठा था , उसने अपना मोबाइल निकाला और उसे अनलॉक कर गैलरी में पिक्चर्स देखने लगा । वो सारी पिक्चर्स को फटाफट बदल रहा था कि तभी एक फोटो उसकी स्क्रीन पर आई कि साहिल की उँगलियाँ थम गईं , उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गई ......,
 
रिया केबिन में आई तो देखा कि राजेश कुछ उदास सा बैठा है।

रिया - क्या हुआ भाई, सब ठीक है ना।

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - हां , सब ठीक है। अच्छा तुम्हारा फोन कहां है ?

रिया - वह तो बंद पड़ा है, बैटरी डाउन हो गई थी।

राजेश - कितनी बार कहा है तुमसे कि फोन को चार्ज रखा करो । पता नहीं कब, कहां और कैसे जरूरत पड़ जाए ।मिसेज मल्होत्रा का फोन आया था तुम्हारा हालचाल जानने, उनसे एक बार बात कर लेना ।

रिया - ठीक है , अच्छा चलो मैं प्रेजेंटेशन दिखाती हूं आपको।

अब राजेश और रिया दोनों प्रेजेंटेशन देखने लगे । थोड़ी देर में ही रिया किसी काम से बाहर चली गई ।

साहिल की नजर फोटो पर ही टिकी थी - रिया तुम आज मेरी आंखों के सामने हो और 3 साल पहले भी थी पर ना तब तुमसे अपने दिल का हाल कह पाया था और ना अब कह पा रहा हूं । इस प्यार की मंजिल ना तब थी और ना आज है।

आज अगर हिम्मत करके कह भी दूं तो भी कोई फायदा नहीं क्योंकि तुम्हारे सामने राजेश खड़ा है और तुम कभी भी उस इंसान के प्यार में नहीं पडा़ेगी जो कि तुम्हारे भाई के खिलाफ है । अजीब है यह प्यार भी , ले देकर उसी से होता है जिसका मिलना लगभग नामुमकिन होता है - सोचते हुए साहिल पुरानी यादों में खो गया ।

" रिया ने बेंगलुरु में जब कॉलेज ज्वाइन किया था, तब साहिल उस समय सुपर सीनियर था । दोनों के कोर्स अलग थे और बिल्डिंग भी । साहिल ने जब पहले ही दिन रिया को , कॉलेज में आते देखा तो एक अलग ही खिंचाव सा महसूस हुआ । वह अब रोज अपनी क्लास रूम की खिड़की से , जो रिया की बिल्डिंग की तरफ खुलती थी, रिया को आते जाते देखता था । उसकी कभी हिम्मत नहीं होती थी रिया से कुछ कहने की, बस चुपचाप खिड़की पर बैठे उसकी एक झलक पाने का इंतजार करता।

ऐसे ही लगभग 1 साल गुजर गया , अब साहिल के फाइनल पेपर्स शुरू होने वाले थे । उसने सोचा कि क्यों ना अब तो रिया से अपने दिल की बात बोल ही दूं, आखिर कब तक यूं ही चुपचाप अपनी भावनाओं को दबा कर रखूंगा ?

उसने उस पूरे दिन खुद को समझाया और एक लव लेटर लिख दिया । रिया अपने दोस्तों के साथ बाहर गार्डन में बैठी थी कि तभी साहिल वहाँ आ पहुंचा। उसने देखा कि रिया दोस्तों के साथ बातें करने में लगी हुई है ।

वह जैसे ही हिम्मत कर रिया की तरफ बढ़ा कि कहीं से कोई भागता हुआ लड़का आकर उससे टकरा गया और अचानक से धक्का लगने की वजह से साहिल रिया के पास आ गिरा।

यह देख रिया और बाकी लड़कियां उसे देखने लगी. वह अब उठ उस लड़के को गुस्से से देखने लगा । वह लड़का सॉरी , कहकर वहां से भाग गया । साहिल इस बात से बेखबर था कि उसका लव लैटर रिया के पैरों के पास गिर पड़ा है ।

तभी रिया की नजर उस लैटर पर पड़ी , उसने उठाकर वह लैटर पढ़ा । साहिल अपने कपडे साफ करने लगा कि रिया की आवाज उसके कानों में पड़ी - क्या यह आपका है?

साहिल ने जब रिया की ओर देखा तो उसका लव लेटर रिया के हाथ में था । यह देख वह एक बार को तो हैरान रह गया , फिर उसे याद आया कि उस लैटर में इजहारे मोहब्बत तो था पर रिया का नाम नहीं था ।

रिया - किसका है यह ?

साहिल जैसे ही रिया को बताने को हुआ कि यह लेटर उसके लिए ही है कि तभी पीछे से आवाज आई - वह तुम्हारे हाथ में क्या है रिया ?

रिया ने जब साहिल के पीछे जाकर देखा तो उसकी मां मिसेज मल्होत्रा वहां खड़ी थी , जो उससे मिलने आई थी।

रिया के हाथ से वह लेटर छूटकर वहीं जमीन पर गिर पड़ा, वह खुशी से आगे कदम बढ़ाते हुए उनके पास पहुंची और , गले लग गई। साहिल ने देखा कि रिया ने अनजाने में ही उसके लव लेटर पर पैर रख दिया था।

माँ, आप यहाँ? चलो मेरे साथ ढेर सारी बातें करनी है आपसे - कहते हुए रिया माँ को अपने साथ ले गई पर मिसेज मल्होत्रा की अनुभवी नजरों ने सब कुछ भांप लिया था।

साहिल पूरे दिन अपनी खराब किस्मत पर नाराज रहा कि इतनी हिम्मत कर के रिया के पास पहुंचा पर सब गड़बड़ हो गया। पहले किसी ने धक्का दिया फिर रिया की माँ आ गईं।

रिया ने भी तो उसे बिल्कुल इग्नोर कर दिया था । शायद इसलिए कि उसके दिल में मेरे लिए कोई फीलिंग ही ना हो और होगी भी कैसे ? आज पहली बार ही तो मिला हूं, इसी उधेड़बुन में उसका पूरा दिन निकल गया।

शाम को जब वह वापस घर जा रहा था तो उसके सामने रास्ते में एक बड़ी सी गाड़ी आकर रूकी जिसमें से मिसेज मल्होत्रा उतर कर उसके पास आईं.....

मिसेज मल्होत्रा - लगता है , तुम मेरी बेटी को पसंद करते हो?

, साहिल हड़बड़ा कर बोला - न...नहीं , ऐसा तो कुछ भी नहीं है ।

मिसेज मल्होत्रा (हंसते हुए ) - शरमाओ मत। मैंने तुम्हें रिया को प्यार भरी नजरों से देखते हुए पकड़ लिया था।

साहिल - जी हाँ।

मिसेज मल्होत्रा - हम्म, देखने में तो तुम ठीक-ठाक हो लेकिन तुम्हारी हैसियत मेरी बेटी के बराबर नहीं है । मेरी बेटी राजकुमारियों की तरह पली बढ़ी है और तुम्हारे जैसे मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले लड़के के लिए मेरी बेटी को पाने का सपना देखना भी एक गुनाह है । अपनी हैसियत से बढ़कर कभी मत सोचना ।

अगर दोबारा मैंने तुम्हें अपनी बेटी के आसपास कहीं पाया तो तुम्हारा वह हाल करूंगी कि जिंदगी भर याद रखोगे । मेरी बेटी को पाना तो दूर उसका सपना देखना भी छोड़ देना, अपनी औकात में रहो और मत भूलो कि तुम हमारे पैरों की धूल के बराबर हो - कहते हुए मिसेज मल्होत्रा अपनी गाड़ी में बैठ कर वहां से चली गई।"

, एक वो दिन था और एक आज का दिन है । साहिल फाइनल ईयर के एग्जाम खत्म होते ही जॉब में बिजी हो गया लेकिन उसके फोन में चुपके से ली गई रिया की वह एक फोटो आज तक मौजूद है ।

आज जब वह अपने काम को अंजाम देने आया तो पता चला कि रिया राजेश की बहन है पर क्या करे? अपने काम से भी तो पीछे नहीं हट सकता । रिया के दिल में ना तो मै तब था और ना ही कभी आगे होंगा ।

यह सोच कर वह खड़ा हुआ और फोन को जेब मे रख सीढ़ियों से उतर गया ।

राजेश अपने कैबिन में बैठा काम कर रहा था , आज सुबह से ही उसके सर में हल्का सा दर्द था ,जो समय के साथ और बढ़ गया । उसने जगन को बुलाकर एक पेनकिलर दवा मँगाई, थोड़ी ही देर में जगन उसे दवा और एक ग्लास पानी दे चला गया ।

काम करते ही राजेश ने वह दवा उठाई और जैसे मुंह में डालने वाला था कि तभी किसी ने उसका हाथ झटके से दूर कर दिया। राजेश ने गुस्से में उस इंसान की ओर देखा तो हैरान रह गया- नैना तुम ? यह क्या किया तुमने ?

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नैना - तो और क्या करती ? तुम्हारा दिमाग तो आजकल पता नहीं कहां रहता है ।

राजेश (गुस्से में )- अब क्या सांस भी तुम्हारी मर्जी से लूंगा ? यह रोब उस साहिल पर झाड़ना। एक तो मेरी दवा गिरा दी, ऊपर से मुझे ही सुना रही हो

नैना - मेरी बात तो....

राजेश - क्यों ? क्यों सुनु तुम्हारी बात? जाओ यहां से और देखो साहिल को कोई चोट तो नहीं आई, सुबह बहुत फिक्र हो रही थी उसकी जैसे कि वह कोई 2 साल का छोटा बच्चा है।

नैना (हैरानी से ) - तुम इस बात को कहां से कहां ले जा रहे हो ? कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हें जलन हो रही है ।

राजेश - ऐसा कुछ भी नहीं है, तुम बिना परमिशन दिए अंदर कैसे आ गई? एक तो वैसे ही सर में इतना दर्द है और ऊपर से तुम .....

राजेश अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि नैना उसके , केबिन से बाहर चली गई ।

राजेश ( हैरानी से ) - चली गई बिना पूरी बात सुने? लगता है कुछ ज्यादा ही असर है साहिल की संगति का। मुझे भी क्या करना है , अपनी लाइफ है जैसे चाहे बर्बाद करे । मुझे क्या फर्क पड़ता है पर उसका ध्यान बार बार नैना की बेरूखी पर जा रहा था कि तभी दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी।

राजेश - कम इन।

दरवाजा खोल नैना अंदर आई और एक टेबलेट उसकी ओर बढ़ा दी ।

राजेश - यह क्या है ? जब मैं खुद ले रहा था तो गिरा दी और अब क्या दिखाना चाहती हो ?

नैना ( गुस्से में ) - बस करो , कितना बोलोगे ? एक बार मेरी बात तो सुनो कि मैं क्या कह रही हूं ?

राजेश नैना को गुस्से में देख चुप पड़ गया।

नैना राजेश को शांत देखकर बोली - तुम पहले जो दवा लेने ,!वाले थे, वह पेरासिटामोल थी और तुम्हें उससे एलर्जी है ।भूल गए ?

अब राजेश को ध्यान आया कि नैना सही कह रही है ।

नैना - क्या हुआ ?अब बोलती कैसे बंद है ?

राजेश - हां तो मुझे क्या पता था कि वह पेरासिटामोल है।

नैना - अच्छा ठीक है। ये फ्लेक्सोन है, ले लो - कहते हुए नैना ने दवा राजेश की ओर बढ़ा दी ।

राजेश ने दवा ली और वापस अपने काम लग गया । थोड़ी देर बाद उसने देखा कि नैना वहीं खड़ी है

राजेश - अब क्या ?

नैना - तुम कुछ भूल रहे हो।

राजेश हैरानी से बोला - मैं क्या भूल रहा हूं ?

नैना - मैंने तुम्हारी मदद की तो थैंक्स तो बनता है।

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राजेश - पर मैं यह जरूरी समझता, तुम जा सकती हो।

नैना ( हैरानी से)- एक थैंक्स से तुम्हारी नाक कट जाएगी क्या ?

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - नहीं , तुम्हारा दिमाग जरूर सातवें आसमान पर चढ़ जाएगा ।

नैना - ठीक है तो मैं जा रही हूं कहते हुए कैबिन के दरवाजे को यूंही खुला छोड़ा टेबल पर जाकर बैठ गई ।

राजेश मन ही मन मुस्कुरा उठा - अभी भी पागल है यह लड़की । राजेश ने जब केबिन का दरवाजा खुला देखा तो उसे बंद करने के लिए उठा ही था कि तभी उसका फोन बज उठा । राजेश ने मिसेज मल्होत्रा का नाम देखा तो एक बार को मन किया कि फोन को उठाए ही नहीं पर कुछ भी हो, है तो रिया की माँ ही ना ।

राजेश ने फोन उठाया - बोलिए ।

, मिसेज मल्होत्रा - तो तुमने अपना असली रंग दिखा ही दिया कि सौतेला आखिरी सोतेला ही होता है । एक ओर मुझसे तो बड़ा कह रहे थे कि पैसे भिजवा दूंगा पर दूसरी ओर रिया को मेरे खिलाफ भर दिया । वह कुछ देर पहले मुझे फोन कर कितना लड़ी है , तुम जानते हो?

राजेश (हैरानी से) - रिया ? पर मैंने उसे कुछ भी नहीं बताया। आप बिना वजह..

मिसेज मल्होत्रा - बिना वजह ? यह ड्रामा अपने पापा के सामने करना। मैं सब समझती हूं तुम्हारी चालबाजी । तुम मुझसे मेरी बेटी को छीनना चाहते हो ना , लेकिन मैं यह होने नहीं दूंगी।

राजेश (गुस्से में ) - यह क्या बकवास है ? और मैं क्यों करूंगा ऐसा , मुझे क्या मिलेगा यह सब करके ?

मिसेज मल्होत्रा - तुम करोगे ऐसा क्योंकि तुम सौतेले हो ।आज तुम्हारी वजह से मेरी बेटी ने मुझसे यहां तक कह दिया कि उसे मुझसे नफरत होने लगी है । एक बात सुनो राजेश, अगर मेरी बेटी मुझसे दूर हुई तो मैं तुम्हें भी चैन से नहीं जीने दूंगी । तुम झूठे मक्कार लड़के हो।

, राजेश अपने गुस्से को काबू करने की कोशिश करने लगा, उसका पूरा चेहरा गुस्से से लाल हो गया ।

(दरवाजा खुला होने की वजह से नैना राजेश को देख सकती थी उसने देखा कि मैं बहुत ही गुस्से में है नैना सोचने लगी कि आखिर बात क्या है ? और फोन पर कौन है जिससे यह इतना गुस्सा कर रहा है )

मिसेज मल्होत्रा - तुमने तो मेरी जिंदगी बर्बाद कर रखी है। दूर रहकर भी नहीं जीने दे रहे । मैं तो बस भगवान से यही प्रार्थना करूंगी कि वह किसी को भी तुम्हारे जैसा सौतेला तो क्या सगा बेटा भी किसी को ना दे और शायद इसलिए तुम्हारी मां मर ....

यह सुनते ही राजेश ने गुस्से में अपना फोन जमीन पर फेंक दिया और केबिन से बाहर निकल गया ।
 
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