राज ने मुझे उसी हालात में अपनी बॉहों में जकड़े हुए रखते कहा, “डार्लिंग, समीर जो कह रहा है वह सच है। आज मैं तुम्हारा गुनाहगार हूँ। तुम चाहो वह सजा मुझे दे सकती हो। यह सच है की समीर और मैंने मिलकर रुखसार भाभी जान से जमकर प्यार भरा सेक्स किया है। और मैं चाहता हूँ की आज तुम भी हम दोनों से जम कर सेक्स का पूरा आनंद लो। मैंने तुम्हें जरूर इसके बारेमें स्पष्ट रूप से नहीं बताया, परंतु मैंने तुम्हें आगाह जरूर किया था। फिर भी अगर मुझे तुम सजा दोगी तो मुझे मंजूर है। यदि तुम कहोगी तो मैं आगे से कभी भी रुखसार से नहीं मिलूंगा। यदि तुम कहोगी तो मैं समीर और रुखसार से रिश्ता तोड़ दूंगा। मेरे लिए तुम सबकुछ हो।”
ऐसे कहते हुए मेरे पति भावुक हो गए और उनकी आँखों में आंसू आ गये। मैं एक अजीब दुविधा में फंसी हुई थी। मैं क्या बोलती? एक और मैं स्वयं गुनहगार थी, पर मुझे दोष देने के बजाय मेरे पति अपने आप को गुनहगार बतला रहे थे। हालांकि मेरे पति की इन गतिविधियों से भलीभाँती वाकिफ थी। भला इस हालात मैं एक बीबी क्या कर सकती थी?
मुझसे मेरे पति की आँखों में आंसू देखे नहीं गए। मैं अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख पायी और एकदम रो पड़ी। उस समय मैं इतना रोई की शायद मेरी युवावस्था में विदाई के समय ही मैं उतना रोई थी। मैंने मेरे पति राज को गले लगा लिया और रोते रोते कहा, “डार्लिंग, तुम मेरे सर्वश्व हो। मैं तुम्हारे बगैर अधूरी हूँ। मुझे तुम अति प्रिय हो। तुमने कुछ भी गलत नहीं किया। जो भी किया वह ठीक किया। मैं तो तुम्हारा आधा अंग हूँ। यदि तुम गलत तो मैं गलत। बल्कि मैं अभी अभी समीर के साथ कुछ गलत करने वाली थी. मैं तुम्हारी गुनहगार हूँ।”
मेरी बात सुनकर राज के चेहरे से मायूसी हट गयी और एक अजीब सी शरारत छा गयी। राज अनायास ही मुस्कुराये और बोले, “मेरी भोली पागल बीबी। तुम इतनी परेशान मत हो। मैं हमारे वैवाहिक जीवन में नवीनीकरण लाना चाहता हूँ। जो तुमने समीर के साथ किया वह कुछ भी नहीं है। मैं चाहता हूँ की आज तुम न सिर्फ समीर के साथ परंतु हम दोनों के साथ कस कर, पुरे जोश के साथ सम्भोग करो। डार्लिंग, मैं तुम्हें सच कहूँ? मैं तुम्हें समीर के साथ मिलकर रात भर चोदना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ की तुम आज शर्म और लाज के सारे बंधन तोड़कर हम दोनों को उच्छृंखल हो कर चोदो और हम दोनों से स्वच्छन्दता से चुद्वाओ।
मेरे पति की बात सुनकर मेरे पुरे बदन में एक आग से दौड़ गयी। मेरी काम वासना एकदम से मेरे पुरे बदन में फैलने लगी। मैं हकीकत में समीर से चुदवाना चाहती थी। मेरे पति ने आज न सिर्फ खुली छूट देदी, बल्कि वह भी मेरे साथ शामिल हो गए। मेरी शादी के बाद मन ही मन में बड़ी इच्छा थी की मैं कभी दो मर्दों से चुदवाऊँ। पर लाज और शर्म के अलावा यह बात नामुमकिन थी। पर आज वह मेरी मन की एक विलक्षण कल्पना सच में बदलती नजर आ रही थी।
मै अपने पति राज की बाहोंमें सिमट कर अपनी आँखें झुका कर बोली, “जानूँ मैं तुम्हारी अर्धांगिनी और सह भागिनी हूँ। तुम्हारी इच्छा मेरे लिए आज्ञा के समान है।” वक्त आ गया था की मैं अब सारे सामाजिक बंधनों को दूर दूर फैंक कर वह करूँ जो मेरा मन चाहता है और मेरे पति की इच्छा भी पूरी करूँ। मैं अपने पति को देखने लगी। उनकी आँखों में एक अजीब सा नशा था। मुझे समीर के साथ एक बिस्तर में देख उनको जलन नहीं बल्कि एक तरह की उत्तेजना हो रही थी ऐसा मुझे लगा।
मेरे पति राज ने पलट कर एक झटके में मेरी रजाई को मेरे और समीर के ऊपर से हटा दिया। मेरे स्तन खुले हुए थे और मेरी निप्पले ऐसी तनी हुई थी जैसे धनुष्य में तीर कसके रखा हो। राज ने मेरे एक स्तनको अपनी हथेली में उठाया और समीर की और देखा और बोला, “समीर, दोस्त, मेरी बीबी की चूंचियां भी रुखसार की चूँचियों से कोई कम नहीं हैं। आओ और खुद अनुभव करो।”
समीर हमारे संवाद सुन रहा था। कुछ जिझक और कुछ शर्म के मारे डरते डरते थोड़ा खिसक कर और मेरे दूसरे स्तन पर हलके से हाथ फिराते हुए मेरी निप्पल को अपनी उँगलियों से दबाता हुआ एकदम धीमी आवाज में बोला, बोला, “डॉली वास्तव में तुम्हारे स्तन बहुत सुन्दर और सेक्सी हैं। मेरा मन करता है की मैं इन्हें चूमता और चूसता ही रहूँ।”
न जाने कहाँ से मेरी जबान फिसल गयी और मैं बोल पड़ी, “तो समीर, तुम्हें रोका किसने है?”
बस मेरा इतना ही बोलना था की मेरे दोनों प्रेमी एकदम मुझ पर टूट पड़े। मेरे एक स्तन को समीर और दूसरे को राज जैसे कोई आम चूस रहे हों ऐसे चूसने लगे। मेरे स्तन मेरी बहोत बड़ी कमजोरी है। जब मेरी बेटी भी मेरा स्तन पान करती थी तो मेरी टाँगों के बीच से झरना बहने लगता था। कही भूल से भी बस या ट्रैन में सफर करते हुए या कोई भीड़ वाले इलाके में गुजरते हुए यदि किसी का हाथ मेरे स्तन को छू जाए तो मैं बड़ी विचलित हो जाती थी।
मेरे पुरे बदन में काम की ज्वाला भड़कने लगी। इतेने दिनों की दबी वासना पुरे शरीर में फ़ैल रही थी और अब चूँकि मेरे पति ने भी मुझे पूरी छूट दे छूट दे दी थी जिससे तो मैं जैसे नियत्रण विहीन हो गयी थी। एक वाहन जैसे चालक के नियत्रण से बाहर हो जाए तो रास्ते पर स्वच्छंदता पूर्वक दौड़ने लगता है वैसे ही मेरा हाल था। मेरा मन मेरे नियत्रण के परे हो गया था।
मैने मेरे दोनों प्रेमियों के सर मेरे दोनों बाहों में लिए प्यार से अपने कन्धों पर टिकाकर उन्हें प्यारसे चूमने लगी। मुझे पता नहीं क्या हो रहा था। मैं उस समय अर्ध नग्नावस्था में थी। मेरे परिपक्व लहराते हुए स्तन मेरे दोनों प्रेमियों के हाथों में थे और वह मेरे स्तनों को जोश खरोश से मसल रहे थे।
सामान्यतः हम बीबियों को अपने पति, अपने बच्चों और समाज से अपनी मर्यादा बना कर रखनी पड़ती ही जिससे की हमारे चरित्र पर कोई लांछन न लगे। पर यहां ऐसा कोई भय नहीं था। मेरा पति खुद मुझे किसी और पुरुष से चुदवाने के लिए उकसा रहा था, मेरी छोटी सी बच्ची गहरी नींद में सोई हुई थी और जब मेरा पति ही मेरी ढाल बना हुआ था तो फिर समाज को क्या पता लगना था?
वक्त आगया था की मैं भी अपनी हवस को संतृप्त करूँ। मैंने मेरे दिमाग से सारे असमंजस और दुविधाओं को उखाड़ फेंका और मैं निःसंकोच होगयी। मैंने मेरे पति की नाक पकड़ी और बोली, “डार्लिंग, मुझे यह बताओ की तुम तो टूर पर जा रहे थे और यहां कैसे पहुँच गए? क्या तुम मेरी जासूसी कर रहे थे?”
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ जब मेरे पति राज ठहाका लगा कर हंस पड़े और बोले, “अरे मेरी नासमझ बीबी, क्या अभी भी नहीं समझी? यह मेरा प्लान था। मैं जान गया था की तुम समीर से आकर्षित तो थी पर लाज और मर्यादा के कारण उसे आगे बढ़ने नहीं दे रही थी। और समीर तो खैर तुम्हारे पीछे पागल था ही। मैं स्वीकार करता हूँ की मैं रुखसार की और आकर्षित था।”