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उस वक्त रात के एक बज रहे थे। अजय सिंह अपने कमरे में अपनी बीवी प्रतिमा के साथ घमासान सेक्स करने में ब्यस्त था। दोनो ही मादरजात नंगे थे। इस वक्त अजय सिंह प्रतिमा को पिछवाड़े से ठोंके जा रहा था।
"ले मेरी जान और ले।" अजय सिंह प्रतिमा को घोड़ी बनाकर तथा एक हाॅथ से उसके सिर के बाल पकड़े उसके पिछवाड़े में दनादन पेलते हुए बोला__"अपने पिछवाड़े को और टाइट कर मेरी रंडी साली।"
"आहहहहह ऐसे ही आआआहहहह और जोर से अंदर तक घुसा न भड़वे साले।" प्रतिमा मजे में बोलती जा रही थी__"आआहहह हाॅ ऐसे ही..हुमच हुमच के बजा मेरी गाॅड को वर्ना तेरे लंड को काट कर फेंक दूॅगी आआआहहहहह।"
"साली मेरा लंड काट कर फेंक देगी तो फिर किससे अपनी चूॅत और गाॅड मरवाएगी बोल मादरचोद साली रंडी?"अजय सिंह ने प्रतिमा के गोरे गोरे किन्तु गद्देदार गाॅड पर जोर से थप्पड़ मारते हुए कहा।
"आआआहहहह उसकी चिंता तू मत कर अजय सिंह।" प्रतिमा ने कहा__"दुनियाॅ बहुत बड़ी है, जिसको भी अपनी चूत और गाॅड दिखाऊॅगी वो साला कुत्ते की तरह अपनी लार टपकाते हुए दौड़ा चला आएगा।"
"अच्छा....मतलब तू सारी दुनिया से अपनी चूत और गाॅड मरवा लेगी?" अजय सिंह ने फिर से उसके पिछवाड़े पर जोर से थप्पड़ मारते हुए कहा__"और किस किस से मरवाएगी साली?"
"आआआहहहह और जोर से पेल न भड़वे की औलाद साले दम नहीं है क्या?" प्रतिमा ने अपने सिर को उठा पीछे अजय सिंह की तरफ देख कर कहा__"मैं तो विजय से भी अपनी चूत और गाॅड मरवाना चाहती थी और इसके लिए मैंने कितनी कोशिश की, मगर वो हरामी साला हरिश्चंद्र था न। उसने हर बार मुझे इज्जत मर्यादा का पाठ पढ़ा कर दुत्कार दिया। मेरे जैसी खूबसूरत सेक्सी औरत को दुत्कार दिया था उस हिंजड़े ने। आआहहहह तभी तो मर गया हरामी।"
"अरे सही सही बोल कुतिया।" अजय सिंह ने प्रतिमा की गाॅड से अपने हथियार को निकाल कर उसे पलटा कर बिस्तर पर सीधा लेटाया और फिर उसकी दोनो टाॅगों को उठा कर प्रतिमा के सिर के दोनो तरफ झुका दिया जिससे उसका पिछवाड़ा अच्छे से उठकर पोजीशन में आ गया। अजय सिंह ने फिर से उसकी गाॅड में लंड डाल कर पेलना शुरू कर दिया।
"आआहहहह हाॅ सही से ही तो बोल रही हूॅ आआआहहह।" प्रतिमा ने मजे में आहें भरकर कहा।
"सही सही कहाॅ बोल रही है साली?" अजय सिंह अपने एक हाॅथ से प्रतिमा की एक चूॅची को जोर से मसल कर कहा__"मेरा भाई क्या ऐसे ही मर गया था??"
"आआआहहहह और जोर जोर से मसल न साले भड़वे।" प्रतिमा ने अपने एक हाॅथ को नीचे से बढ़ा कर अपनी चूॅत के दाने को मसलते हुए मजे में कहा__"आआआहहहह हाॅ ऐसे ही...हाय इस मज़े के लिए तो मैं सबकी रंडी बनने को तैयार हूॅ अजय। मेरी वो ख्वाहिश कब पूरी करोगे तुम??"
"कर दूॅगा मेरी जान।" अजय सिंह झुक कर प्रतिमा के होठों पर एक जोरदार चुंबन लिया फिर बोला__"मुझे याद है....तेरी ख्वाहिश...कि तू तीन तीन लंड से एक साथ मज़े करना चाहती है...अपने सभी छेंद पर एक साथ लंड डलवाना चाहती है। रुक जा कुछ दिन करता हूॅ कुछ। मगर पहले ये तो बता कि कैसे मेरा भाई मर गया था?"
"आआआहहहहहह मरना ही था उस कमीने को..आआहहह मेरी बात मान लेता तो आज ज़िंदा होता और ऐस भी करता। मगर सत्यवादी बने रह कर मर जाना ही नियति में लिखा लिया था उसने....आआआहहह मगर एक बात है उसका लंड तुमसे भी बड़ा था..पूरा का पूरा साॅड था वो।"
"ले मेरी जान और ले।" अजय सिंह प्रतिमा को घोड़ी बनाकर तथा एक हाॅथ से उसके सिर के बाल पकड़े उसके पिछवाड़े में दनादन पेलते हुए बोला__"अपने पिछवाड़े को और टाइट कर मेरी रंडी साली।"
"आहहहहह ऐसे ही आआआहहहह और जोर से अंदर तक घुसा न भड़वे साले।" प्रतिमा मजे में बोलती जा रही थी__"आआहहह हाॅ ऐसे ही..हुमच हुमच के बजा मेरी गाॅड को वर्ना तेरे लंड को काट कर फेंक दूॅगी आआआहहहहह।"
"साली मेरा लंड काट कर फेंक देगी तो फिर किससे अपनी चूॅत और गाॅड मरवाएगी बोल मादरचोद साली रंडी?"अजय सिंह ने प्रतिमा के गोरे गोरे किन्तु गद्देदार गाॅड पर जोर से थप्पड़ मारते हुए कहा।
"आआआहहहह उसकी चिंता तू मत कर अजय सिंह।" प्रतिमा ने कहा__"दुनियाॅ बहुत बड़ी है, जिसको भी अपनी चूत और गाॅड दिखाऊॅगी वो साला कुत्ते की तरह अपनी लार टपकाते हुए दौड़ा चला आएगा।"
"अच्छा....मतलब तू सारी दुनिया से अपनी चूत और गाॅड मरवा लेगी?" अजय सिंह ने फिर से उसके पिछवाड़े पर जोर से थप्पड़ मारते हुए कहा__"और किस किस से मरवाएगी साली?"
"आआआहहहह और जोर से पेल न भड़वे की औलाद साले दम नहीं है क्या?" प्रतिमा ने अपने सिर को उठा पीछे अजय सिंह की तरफ देख कर कहा__"मैं तो विजय से भी अपनी चूत और गाॅड मरवाना चाहती थी और इसके लिए मैंने कितनी कोशिश की, मगर वो हरामी साला हरिश्चंद्र था न। उसने हर बार मुझे इज्जत मर्यादा का पाठ पढ़ा कर दुत्कार दिया। मेरे जैसी खूबसूरत सेक्सी औरत को दुत्कार दिया था उस हिंजड़े ने। आआहहहह तभी तो मर गया हरामी।"
"अरे सही सही बोल कुतिया।" अजय सिंह ने प्रतिमा की गाॅड से अपने हथियार को निकाल कर उसे पलटा कर बिस्तर पर सीधा लेटाया और फिर उसकी दोनो टाॅगों को उठा कर प्रतिमा के सिर के दोनो तरफ झुका दिया जिससे उसका पिछवाड़ा अच्छे से उठकर पोजीशन में आ गया। अजय सिंह ने फिर से उसकी गाॅड में लंड डाल कर पेलना शुरू कर दिया।
"आआहहहह हाॅ सही से ही तो बोल रही हूॅ आआआहहह।" प्रतिमा ने मजे में आहें भरकर कहा।
"सही सही कहाॅ बोल रही है साली?" अजय सिंह अपने एक हाॅथ से प्रतिमा की एक चूॅची को जोर से मसल कर कहा__"मेरा भाई क्या ऐसे ही मर गया था??"
"आआआहहहह और जोर जोर से मसल न साले भड़वे।" प्रतिमा ने अपने एक हाॅथ को नीचे से बढ़ा कर अपनी चूॅत के दाने को मसलते हुए मजे में कहा__"आआआहहहह हाॅ ऐसे ही...हाय इस मज़े के लिए तो मैं सबकी रंडी बनने को तैयार हूॅ अजय। मेरी वो ख्वाहिश कब पूरी करोगे तुम??"
"कर दूॅगा मेरी जान।" अजय सिंह झुक कर प्रतिमा के होठों पर एक जोरदार चुंबन लिया फिर बोला__"मुझे याद है....तेरी ख्वाहिश...कि तू तीन तीन लंड से एक साथ मज़े करना चाहती है...अपने सभी छेंद पर एक साथ लंड डलवाना चाहती है। रुक जा कुछ दिन करता हूॅ कुछ। मगर पहले ये तो बता कि कैसे मेरा भाई मर गया था?"
"आआआहहहहहह मरना ही था उस कमीने को..आआहहह मेरी बात मान लेता तो आज ज़िंदा होता और ऐस भी करता। मगर सत्यवादी बने रह कर मर जाना ही नियति में लिखा लिया था उसने....आआआहहह मगर एक बात है उसका लंड तुमसे भी बड़ा था..पूरा का पूरा साॅड था वो।"