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एक नया संसार

"अब क्या होगा अजय?" प्रतिमा ने कहा__"तुम्हारी ख्वाहिशों ने आज क्या सिला दिया है तुम्हें और तुम्हारे साथ साथ हम सबको भी। क्या होगा जब सबको ये मालूम होगा कि तुम गैर कानूनी धंधा भी करते हो?"

"मुझे और किसी की परवाह नहीं है प्रतिमा।" अजय सिंह बोला__"मुझे तो बस इस बात की चिन्ता है कि इस सबके बाद मैं अपनी ही बेटी की नज़रों में गिर जाऊॅगा। कानून के प्रति उसकी ईमानदारी और आस्था देख कर यही लगता है कि वह मुझे इस काम की वजह से जेल की सलाखों के पीछे भी डाल सकती है।"

"ये कैसे कह सकते हो तुम?" प्रतिमा ने चौंकते हुए कहा__"हमारी बेटी भला ऐसा कैसे कर सकती है?"

"वो यकीनन ऐसा ही कर सकती है प्रतिमा।" अजय सिंह ने कहा__"क्यों कि फैक्टरी में हो रही छानबीन में उसे वो सब मिल जाएगा जो ये साबित करेगा कि मैं गैर कानूनी धंधा करता हूॅ।"

"तुम्हारे कहने का मतलब है कि फैक्टरी में ही तुमने अपने गैर कानूनी धंधों के सबूत छोंड़ रखे हैं?" प्रतिमा की धड़कनें रुकती सी प्रतीत हुई उसे__"और वो सब सबूत अब रितू के हाॅथ लग जाएंगे?"

"बिलकुल।" अजय सिंह के चेहरे पर चिंता के भाव थे__"यही सच है प्रतिमा। फैक्टरी में ही मैंने एक गुप्त तहखाना बनवाया हुआ था, और उसी तहखाने में मैं गुप्तरूप से अपना ये गैर कानूनी धंधा करता था। इस धंधे में कानून के द्वारा पकड़े जाने का मुझे कोई डर नहीं था क्योंकि मेरे संबंध कानून तथा मंत्रियों से थे। ये सब मेरे इस धंधे से होने वाले मुनाफे से हिस्सा पाते थे। अगर ये कहूॅ तो ग़लत न होगा कि इन्हीं लोगों की कृपा से मेरा ये धंधा चल रहा था।"

"अगर ऐसी बात है तो तुम्हें इतना परेशान और चिन्ता करने की क्या ज़रूरत है?" प्रतिमा ने कहा__"ये सब तुम रोंकवा भी तो सकते हो। कानून और मंत्रियों में तो सब तुम्हारे ही आदमी हैं, तो उनसे कह कर इस छानबीन को रुकवाया भी तो जा सकता है?"

"अब ऐसा नहीं हो सकता प्रतिमा।" अजय सिंह बोला__"क्योंकि इसके पहले जो छानबीन हुई थी वो मेरे अनुरूप हुई थी। उसमें सब मेरे ही आदमीं थे लेकिन अब जो छानबीन हो रही है उसमें मैं कुछ नहीं कर सकता।"

"क्यों?" प्रतिमा चौंकी__"क्यों नहीं कर सकते? अब क्या हो गया है ऐसा?"

"अब वो हुआ है प्रतिमा।" अजय सिंह ने गहरी साॅस छोंड़ी__"जिसके बारे में मैं कभी सोच भी नहीं सकता था।"

"क्या मतलब??" प्रतिमा हैरान।

"मतलब कि रातों रात सारे पुलिस डिपार्टमेंट को बदल दिया गया।" अजय सिंह कह रहा था__"पुलिस में कमिश्नर तक जो भी मेरे आदमी थे उन सबका तबादला कर दिया गया है। अब तुम समझ सकती हो कि इन हालात में मैं क्या कर सकता हूॅ। मंत्री से मदद माॅगी लेकिन उसने भी अपने हाॅथ खड़े कर लिए। मंत्री ने कहा कि वो कुछ नहीं कर सकता क्योंकि ये सब ऊपर हाई कमान के आदेश पर हो रहा है।"

"हे भगवान!" प्रतिमा चकित भाव से बोली__"ये तो बहुत ही सीरियस मामला हो गया है।"

"वही तो।" अजय सिंह ने कहा__"मुझे समझ में नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों हो रहा है? आखिर क्या वजह है जो इस सबके लिए हाई कमान से आदेश दिया गया? आखिर किस वजह से रातों रात इस शहर के सारे पुलिस विभाग का तबादला कर दिया गया?"

"यकीनन अजय।" प्रतिमा ने कुछ सोचते हुए कहा__"ये तो बड़ा ही पेंचीदा मामला हो गया है। लेकिन रितु ने तो कहा था कि इस केस को उसने रिओपेन करवाया है, उस सूरत में मामले को इतना सीरियस नहीं होना चाहिए था। कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारी बेटी ने ही हाई कमान को किसी ज़रिये इस सबके लिए सूचित किया हो?"

"हो भी सकता है और नहीं भी?" अजय सिंह ने सोचने वाले अंदाज़ से कहा।

"क्या मतलब?" प्रतिमा के माथे पर सिलवटें उभरी।

"साधारण रूप से अगर हम ये सोच कर चलें।" अजय सिंह बोला__"कि रितू ने सिर्फ अपने पिता की फैक्टरी में आग लगने से हुए भारी नुकसान के चलते ये सोच कर इस केस को रिओपेन करवाया है कि कदाचित ये सब हमारे किसी दुश्मन के द्वारा ही किया गया हो सकता है तो इस मामले की छानबीन साधारण तरीके से ही होती। लेकिन अगर हम ये सोचें कि हो सकता है रितू को किसी वजह से ये पता चला हो कि उसका बाप इस बिजनेस की आड़ में गैर कानूनी धंधा भी करता है तो यकीनन इस केस की छानबीन का ये मामला संगीन है।"
 
"बात तो तुम्हारी बिलकुल दुरुस्त है अजय।" प्रतिमा ने कहा__"लेकिन सवाल ये उठता है कि रितू को ये कैसे पता चल सकता है कि उसका बाप ये सब भी करता है??"

"संभव है कि पुलिस में आते ही थाने में उसने बारीकी से सभी फाइलों का अध्ययन किया हो?" अजय सिंह ने कहा__"उन्हीं फाइलों में कहीं उसे कोई ऐसा सबूत मिला हो जिससे उसे इस सबका पता चल गया हो। कानून में आस्था रखने वाली हमारी बेटी ने इस सबके पता चलते ही ये सोच लिया हो कि उसे अपने बाप को गैर कानूनी धंधा करने के जुर्म में गिरफ्तार करके जेल की सलाखों के पीछे डाल देना चाहिए।"

"ये सब तो ठीक है अजय।" प्रतिमा ने कहा__"लेकिन क्या ये संभव है कि किसी थाने में तुम्हारे खिलाफ कोई ऐसा सबूत फाइल के रूप में कहीं दबा हो सकता है? जैसा कि तुमने कहा था कि इसके पहले इस शहर में पुलिस महकमें में कमिश्नर तक की रैंक का कानूनी नुमाइंदा तुम्हारा ही आदमी था, तो क्या ये संभव है कि पुलिस के तुम्हारे ही आदमियों ने अपने थाने में कहीं तुम्हारे ही खिलाफ़ कोई सबूत बना कर रखा हुआ हो सकता था?"

"इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता।" अजय सिंह ने कहा__"ऐसा हो भी सकता है। संभव है किसी पुलिस के नुमाइंदे ने गुप्त रूप से मेरे खिलाफ़ किसी प्रकार का सबूत बना कर रखा रहा हो। आखिरकार पुलिस तो पुलिस ही होती है, वो न तो किसी की दोस्त हो सकती है और न ही दुश्मन।"

"इन सब बातों के बाद तो यही निष्कर्स निकलता है।" प्रतिमा ने गंभीरता से कहा__"कि हमारी बेटी को किसी वजह से अपने पिता के खिलाफ कोई सबूत मिला और अब वह पक्के तौर पर बारीकी से छानबीन करके कुछ और ठोस सबूत हासिल करना चाहती है जिससे उसे तुमको जेल की सलाखों के पीछे डालने में कोई अड़चन न हो सके।"

"हो सकता है प्रतिमा।" अजय सिंह ने कुछ सोचते हुए कहा__"लेकिन एक बात समझ में नहीं आ रही।"

"कौन सी बात अजय?" प्रतिमा ने ना समझने वाले भाव से अजय सिंह की तरफ देखते हुए कहा था।

"यही कि रातों रात सारे पुलिस डिपार्टमेंट का तबादला क्यों कर दिया गया?" अजय सिंह बोला__"ये छानबीन तो वैसे भी हो जाती। कोई भी पुलिस का अफसर इस छानबीन में किसी भी प्रकार का हस्ताक्षेप नहीं करता। फिर क्यों तबादला कर दिया गया सबका?"

"अगर इस बात को हम अपनी इंस्पेक्टर बेटी के हिसाब से सोचें तो संभव है उसी ने इस सबके लिए ऊपर हाई कमान को अर्जी लिख कर गुज़ारिश की हो या फिर इसकी माॅग की हो?" प्रतिमा ने संभावना ब्यक्त की__"क्योकि शायद उसे इस बात की खबर हो कि इस शहर का सारा पुलिस विभाग तुम्हारे हाॅथों में है।"

"नहीं प्रतिमा।" अजय सिंह ने मजबूती से अपने सिर को इंकार के भाव से हिलाते हुए कहा__"रातों रात शहर के सारे पुलिस विभाग का तबादला कर देना कोई मामूली बात नहीं है, और उस सूरत में तो बिलकुल भी नहीं जबकि हमारी बेटी ने अभी अभी पुलिस फोर्स ज्वाइन किया हो। किसी भी नये पुलिस वाले के लिए इतनी दूर तक पहुॅच रखना नामुमकिन है प्रतिमा। पुलिस में रह कर बहुत दिन तक पहले पुलिस के दाॅव पेंच सीख कर उसका अनुभव करना पड़ता है। मैं ये बात मानता हूॅ कि हमारी बेटी ने पुलिस में आते ही किसी मॅझे हुए पुलिस अफसर की भाति पुलिसिया तौर तरीका अपना लिया है और उसका अंदाज़ भी अनुभवी लगता है लेकिन फिर भी इस बात को हजम करना मुश्किल है कि उसने ही शहर के सारे पुलिस विभाग को बदल देने की अपील की हो सकती है।"

"तो फिर।" प्रतिमा ने कहा__"तुम्हारे ख़याल से ये सब किसने किया हो सकता है?"

"यही तो समझ नहीं आ रहा।" अजय सिंह ने कहा__"दिमाग़ की नशें दर्द करने लगी हैं इस सबके बारे में सोचते सोचते।"
 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
"तो फिर।" प्रतिमा ने कहा__"तुम्हारे ख़याल से ये सब किसने किया हो सकता है?"

"यही तो समझ नहीं आ रहा।" अजय सिंह ने कहा__"दिमाग़ की नशें दर्द करने लगी हैं इस सबके बारे में सोचते सोचते।"

"तुम एक शख्स को तो भूल ही गए हो अजय।" प्रतिमा ने मानो धमाका करने वाले भाव से कहा__"ये सब उसने भी तो किया हो सकता है?"

"किसकी बात कर रही हो तुम?" अजय सिंह चौंका था।

"तुम्हारे भतीजे विराज की बात कर रही हूॅ मैं।" प्रतिमा ने कहा।

"वो साला इस मामले में कहाॅ से फिट होता है प्रतिमा?" अजय सिंह ने अजीब भाव से कहा।

"बात इस मामले में उसके फिट होने की नहीं है अजय।" प्रतिमा ने गहरी साॅस लेकर कहा__"बल्कि बात है ऐसे मामले में हर तरह की संभावना की। हमें भले ही लगता है कि विराज का इस मामले में कोई हाॅथ नहीं हो सकता किन्तु सवाल है कि क्यों नहीं हो सकता उसका हाॅथ?"

"बेवकूफों की तरह बात मत करो प्रतिमा।" अजय सिंह ने झुंझलाते हुए कहा__"मामले की गंभीरता और उसकी पेंचीदगियों को समझो। उसकी कोई औकात नहीं हो सकती इस सबमें शहर के सारे पुलिस विभाग का तबादला करवा देने की और न ही ये औकात हो सकती है कि वह सीधा हाई कमान से इस सबके लिए बात कर सके। तुम्हारा दिमाग़ फिर गया लगता है।"

"चलो मान लिया कि उसकी कोई औकात नहीं हो सकती इन सब कामों को करवाने की।" प्रतिमा ने ज़ोर देकर कहा__"मगर क्या ये नहीं हो सकता कि उसने ही हमारी फैक्टरी में बम्ब लगा कर सब कुछ आग के हवाले कर दिया हो? तुम हर बार उसकी औकात की बात करके उसे तुच्छ समझ लेते हो अजय जबकि उसे तुच्छ समझ लेने का भी तुम्हारे पास कोई सबूत नहीं है। जबकि कम से कम उसकी इतनी तो औकात हो ही सकती है कि वह फैक्टरी में किसी भी तरह ही सही लेकिन आग लगा सके।"

अजय सिंह खामोश रह गया। प्रतिमा की बातों में उसे सौ मन की सच्चाई नज़र आई। और इस एहसास ने ही उसे हिला कर रख दिया कि ये सब उसके भतीजे विराज ने किया हो सकता है।

"ये तो तुम भी अच्छी तरह समझते हो अजय कि वो हमें अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझता है।" प्रतिमा कह रही थी__"उसे लगता है कि हमने उसे और उसके परिवार को बरबाद कर दिया है। इस लिए इस सबका प्रतिशोध लेने के लिए वह क्या नहीं कर सकता? वह हर उस काम को कर गुज़रने पर अमादा हो सकता है जिस काम से वह हमारा बाल भी बाॅका कर सके।"

अजय सिंह कुछ कह न सका। किसी गहरी सोच में डूबा नज़र आने लगा था वह।
 
"तुमने कहा था कि तुम्हारे आदमी उन्हें ढूॅढ़ने के लिए मुम्बई की खाक़ छान रहे है।" प्रतिमा मजबूत लहजे में कहती जा रही थी__"जबकि आज तक तुम्हारे आदमियों के हाॅथ में उनसे संबंधित कोई छोटा सा सुराग़ भी नहीं लग सका। इस बारे में क्या कहोगे तुम, बताओ?"

"क्या कहूॅ यार?" अजय सिंह के चेहरे पर कठोर भाव उभरे__"जाने कहाॅ गुम हो गए हैं वो सब? उन सुअर की औलादों को ये ज़मीन खा गई है या आसमान निगल गया है। एक बार....सिर्फ एक बार मेरे हाॅथ लग जाएॅ फिर देखना क्या हस्र करता हूॅ मैं उन सबका।"

"मुझे नहीं लगता अजय कि तुम उन लोगों का कुछ कर लोगे।" प्रतिमा ने अजीब भाव से कहा__"जबकि लग ये रहा है कि वो कमीना रंडी की औलाद विराज हमारा ही बेड़ा गर्क़ कर रहा है।"

अभी ये सब बातें ही कर रहे थे कि बाहर से किसी के आने की आहट सुनाई दी। कुछ ही पल में इंस्पेक्टर रितू ड्राइंग रूम में दाखिल हुई। उसके चेहरे पर थकान के भाव गर्दिश करते नज़र आ रहे थे। अजय सिंह अपनी बेटी को देखकर घबरा सा गया। उसे लगा फैक्टरी की छानबीन में रितू को उसके काले कारनामों का सारा काला चिट्ठा मिल गया है और अब वह उसे गिरफ्तार करने आई है।

"आई एम साॅरी डैड।" रितू ने आते ही अजय सिंह का हाॅथ पकड़ कर तथा खेद भरे लहजे में कहा__"मैं आपके साथ हास्पिटल नहीं जा सकी। आप तो मेरी मजबूरी समझ सकते हैं डैड, उस वक्त मैं अपनी ड्यूटी को छोंड़ कर नहीं जा सकती थी आपके साथ। उस सूरत में तो हर्गिज़ नहीं जब किसी केस की छानबीन चल रही हो। एनीवे, अब आपकी तबियत कैसी है?"

अजय सिंह को समझ नहीं आ रहा था कि रितू को देख कर अब वह कैसा रिऐक्ट करे? मनो-मस्तिष्क में हज़ारों ख़याल मानो ताण्डव सा करने लगे थे। पल भर में ढेर सारा पसीना उसके सफेद पड़ चुके चेहरे पर उभर आया था। दोनो कानों में दिल पर धम्म धम्म करके पड़ने वाली किसी भारी हथौड़े की चोंट उसकी हृदय की गति को रोंक देने के लिए काफी थी जो सुनाई दे रही थी। जबकि उसके अंदर की हालत से अनभिज्ञ रितु ने अपने पिता को खामोश देख कर पुनः कहा__"प्लीज डैड, अब माफ भी कर दीजिए न अपनी इस बेटी को। आपको पता है आपकी उस हालत से मैं कितना परेशान और दुखी हो गई थी। लेकिन घटना स्थल पर मौजूद रहना मेरी मजबूरी थी, आप तो समझ सकते हैं न डैड? लेकिन इस सबसे फुर्सत होकर मैं सीघ्र ही पुलिस स्टेशन से भागी भागी आपसे मिलने आई हूॅ।"

अजय सिंह के मन मस्तिष्क में एकाएक मानो झनाका सा हुआ। दिमाग़ की सारी बत्तियाॅ जल उठीं। दिमाग़ ने सही तरीके से काम करना शुरू कर दिया। मन में बिजली की सी तेज़ी से ये ख़याल उभरा कि 'उसकी बेटी इस तरह बिहैव क्यों कर रही है जैसे कहीं कुछ हुआ ही न हो? इसके मासूम बर्ताव से तो यही लग रहा है जैसे छानबीन करते हुए तहखाने में इसे कुछ नहीं मिला वर्ना उसके हाथ अगर कोई गैर कानूनी चीज़ लग गई होती तो ये यहाॅ अपने पीछे पुलिस फोर्स लेकर तथा अपने हाॅथ में हॅथकड़ी लेकर उसे गिरफ्तार करने आती। लेकिन ऐसा तो दूर दूर तक होता हुआ दिखाई नहीं देता। इसका क्या मतलब हो सकता है?'

अजय सिंह के दिमाग़ में एकाएक जैसे हज़ार तरह के सवाल खड़े हो गए थे लेकिन जवाब किसी का नहीं था उसके पास। मन में ये ख़याल बार बार किसी हथौड़े की भाॅति चोंट मार रहे थे कि आख़िर क्या हुआ फैक्टरी की छानबीन में? उसकी बेटी को तहकीकात में उसके खिलाफ क्या कोई गैर कानूनी चीज़ मिली?

"क्या बात है डैड?" अपने पिता को गहरे समुद्र में डूबे देख रितू ने इस बार अपने दोनों हाॅथों की मदद से झिंझोड़ते हुए कहा था__"आप कुछ बोलते क्यों नहीं है? कहाॅ खोए हुए हैं आप?"

"आॅ..हाॅ...तु..तुमने कुछ कहा क्या बेटी?" अजय सिंह बुरी तरह चौंकते हुए कहा था। एकाएक ही उसके मन में ये ख़याल उभरा कि 'ये क्या बेवकूफी कर रहा है अजय सिंह, अपने आपको सम्हाल वर्ना तेरी हालत और तेरे चेहरे की ये हालत देख कर तेरी बेटी को कहीं सचमुच कुछ पता न चल जाए।' इस ख़याल के द्वारा खुद को समझाए जाने पर अजय सिंह ने तुरंत ही अपने आपको सम्हाला। और फिर मुस्कुरा कर उसने अपनी बेटी की तरफ देखा।

"मैं ये कह रही हूॅ डैड कि आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे थे?" रितू कह रही थी__"पता नहीं कहाॅ खोए हुए थे आप?"

"कुछ नहीं बेटा।" अजय सिंह ने एक नज़र अपनी पत्नी की तरफ डालने के बाद कहा__"तुम सुनाओ, कैसा रहा पुलिस के रूप में आज का तुम्हारा पहला दिन?"

अजय सिंह ये पूॅछने से हिचकिचाने के साथ साथ डर भी रहा कि 'आज तहकीकात में क्या हुआ?' इस लिए ये न पूछ कर कुछ और ही पूॅछ बेठा था।
 
"बहुत अच्छा था डैड।" रितू ने मुस्कुरा कर कहा__"बस थोड़ा थक गई हूॅ।"

"अभी आदत नहीं है न।" सहसा इस बीच प्रतिमा कह उठी__"जब इस सबकी आदत हो जाएगी तो सब ठीक हो जाएगा।"

"आप ठीक कहती हैं माॅम।" रितू ने कहा__"धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा। लेकिन अभी तो आप मुझे मस्त गरमा गरम काॅफी पिलाइए प्लीज।"

"अभी बना कर लाती हूॅ बेटी।" प्रतिमा ने हॅस कर कहा और सोफे से उठ कर अंदर किचेन की तरफ चली गई।

इधर अजय सिंह सोच रहा था कि आज की छानबीन के संबंध में उसकी बेटी ने अभी तक कोई बात क्यों नहीं की?? वह खुद इस बारे में पूॅछने से हिचकिचा भी रहा था और डर भी रहा था। लेकिन ये भी सच था कि उसके लिए इस सबके बारे में जानना निहायत ही ज़रूरी था। मगर सबसे बड़ा सवाल था कि वह अपनी बेटी से पूॅछें कैसे???

"डैड, आपने अभी तक मुझसे पूछा नहीं।" सहसा रितू ने अजीब से अंदाज़ में कहा__"कि आज फैक्टरी में हुई छानबीन में क्या नतीजा निकला??"

अजय सिंह मन ही मन बुरी तरह चौंका भी और घबरा भी गया, किन्तु अपने किसी भी भाव को चेहरे पर उभरने नहीं दिया। खुद को मजबूती से सम्हाल कर संतुलित लहजे से कहा__"पूॅछ कर क्या करूॅगा बेटी? इस सबसे कुछ होने वाला तो है नहीं। क्या इस सबसे वो सब कुछ वापस मिल जाएगा जो जल कर खाक़ में मिल चुका है?"

"बात सब कुछ मिल जाने की नहीं है डैड।" रितू ने कहा__"बल्कि इस बात की है कि ये सब किसने और किस वजह से किया? आपको ये जानकर हैरानी के साथ साथ शायद खुशी भी होगी कि फैक्टरी में आग किसी सार्ट शर्किट की वजह से नहीं बल्कि फैक्टरी के तहखाने में किसी के द्वारा लगाए गए टाइम बम्ब के भीषण धमाके से उत्पन्न हुई आग से लगी थी।"

"क् क्या????" अजय सिंह बुरी तरह चौंकने का बेहतरीन नाटक किया था फिर बोला__"ये ये क्या कह रही हो तुम?"

"ये सच है डैड।" रितू ने कहा__"मगर मैं इस बात से हैरान हूॅ कि इसके पहले हुई छानबीन में ये सब क्यों नहीं बताया पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में? जबकि ये सब बातें कोई भी साधारण ब्यक्ति जाॅच करके बता सकता था। ये अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल है डैड। ख़ैर पुलिस इंक्वायरी में इस सबका जवाब उन पुलिस आफिसर्स को ही देना पड़ेगा जिन्होंने इसके पहले फैक्टरी की छानबीन की थी। मगर इस सबका जवाब आपको भी देना पड़ेगा डैड। मुझे पक्का यकीन है कि पुलिस द्वारा इस प्रकार की छानबीन करके रिपोर्ट आपके कहने पर ही बनाई गई थी।"

अजय सिंह अवाक् सा देखता रह गया अपनी बेटी को। फिर तुरंत ही खुद को सम्हालते हुए कहा__"ये सब झूॅठ है बेटी। हमने ऐसी कोई रिपोर्ट बनाने के लिए नहीं कहा।"

"आप अपनी इस बात को साबित नहीं कर पाएंगे डैड।" रितू ने कहा__"सारे हालात इस बात की चीख चीख कर गवाही दे रहे हैं कि इसके पहले की गई छानबीन महज एक औपचारिकता बस थी। वर्ना कोई भी पुलिस वाले अंधे नहीं थे जो उन्हें ये न दिखता कि फैक्टरी में लगी आग किसी के द्वारा लगाए गए टाइम बम्ब की मेहरबानी थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी रिपोर्ट में यही दिखाया कि फैक्टरी में आग सिर्फ शार्ट शर्किट की वजह से लगी थी। यहाॅ पर कोई भी सवाल खड़ा कर सकता है डैड कि सब कुछ स्पष्ट नज़र आते हुए भी पुलिस ने ऐसी रिपोर्ट क्यों बनाई? इसमें पुलिस का क्या मकसद था? या फिर एक ही बात हो सकती है कि पुलिस को ऐसी ही रिपोर्ट बनाने के लिए खुद आपने कहा हो। अगर यही सच है तो फिर यहाॅ पर सवाल खड़ा हो जाता है कि आपने पुलिस को ऐसी रिपोर्ट बनाने के लिए क्यों कहा??? बात यहीं पर खत्म नहीं हो जाती डैड, बल्कि ऐसी स्थिति में फिर और भी सवाल खड़े होने लगते हैं जिनका जवाब मिलना ज़रूरी हो जाता है।"
 
अजय सिंह को लगा कि अभी ज़मीन फटे और वह उसमें पाताल तक समाता चला जाए। हलाॅकि रितू ने कोई तीर नहीं मार लिया था ये सब करके क्योंकि फैक्टरी की छानबीन अगर पहले ही पूरी ईमानदारी से की गई होती तो पहले ही पुलिस को ये सब पता चल जाता। लेकिन क्योंकि ऐसा हुआ नहीं था। बल्कि अजय सिंह अपने तरीके से रिपोर्ट बनवा कर चैन से बैठ गया था। वो भला कैसे इस बात की कल्पना कर लेता कि अगले ही दिन उसकी अपनी बेटी इन गड़े मुर्दों को निकाल कर उसकी हालत को खराब करना शुरू कर देगी।

"आपकी ख़ामोशी इस बात का सबूत है डैड कि आप ही ने पुलिस को ऐसी रिपोर्ट बनाने को कहा था।" रितू ने कहा__"क्या आप बताने का कष्ट करेंगे कि आपने ऐसा क्यों किया?"

अजय सिंह क्योंकि जानता था कि इस संबंध में अब झूॅठ बोलने का कोई मतलब नहीं है इस लिए सच बताना ही बेहतर समझा उसने।

"ये सच है बेटी कि मेरे ही कहने पर पुलिस ने वैसी रिपोर्ट बनाई थी।" अजय सिंह ने गंभीरता से कहा__"लेकिन ये सब करना मेरी मजबूरी थी बेटी क्योंकि मैं इस सबको और अधिक उछालना नहीं चाहता था। मैं नहीं चाहता था बेटी कि मेरी इज्जत का अब और कचरा हो। सब कुछ तो जल ही गया था, कुछ मिलना तो था नहीं, इस लिए कम से कम अपनी इज्जत को तो नीलाम होने से बचा लेता। इसी वजह से बेटी...सिर्फ इसी वजह से मैंने पुलिस अधिकारियों से मिन्नतें कर करके ऐसी रिपोर्ट बनाने को कहा था।"

रितू देखती रही अपने पिता के चेहरे की तरफ। अंदाज़ ऐसा था जैसे परख रही हो कि उसके बाप की बातों में कितनी सच्चाई है? जबकि अपनी बेटी को इस तरह अपनी तरफ देखते हुए देख अजय सिंह के दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं थी।

"वाह डैड वाह!" रितू ने अजीब भाव से कहा__"आपने तो ये सब करके कमाल ही कर दिया। मतलब आपने ये भी नहीं सोचा कि अगर इस सबकी पुलिस द्वारा बारीकी से तहकीकात करवाई जाए तो इससे आपको कुछ हासिल भी हो सकता है?"

तभी प्रतिमा हाॅथ में ट्रे लिए ड्राइंगरूम में दाखिल हुई। उसने एक एक कप सबको पकड़ाया और खुद भी एक कप लेकर वहीं सोफे पर बैठ गई।

"इससे भला क्या हासिल होता बेटी?" अजय सिंह ने कहा था।

"छानबीन से ये तो पता चल ही गया है डैड कि फैक्टरी में आग टाइम बम्ब के फटने से लगी थी।" रितू ने कप में भरी काॅफी का एक सिप लेकर कहा__"अब ये पता लगाना पुलिस का काम है कि फैक्टरी में टाइम बम्ब किसने फिट किया था? आपके अनुसार उस दिन और रात अवकाश के चलते फैक्टरी बंद थी तथा बाहर से फैक्टरी में ताला भी लगा था। अब सोचने वाली बात है कि कोई बाहरी आदमी कैसे ये सब कर सकता है? क्योंकि सबसे पहले तो उसे फैक्टरी के अंदर पहुॅच पाना ही नामुमकिन था, कारण फैक्टरी में जो ताला लगा था वो कोई साधारण झूलने वाला ताला नहीं था जिसे आराम से तोड़ कर फैक्टरी अंदर जाया जा सके, बल्कि गेट पर जो ताला था वो लोहे वाले गेट के अंदर फिक्स था।"

"ताला खोलना कोई बड़ी बात या कोई समस्या नहीं है बेटी।" सहसा प्रतिमा ने हस्ताक्षेप किया__"आज के समय में एक से बढ़ कर एक खलीफा हैं जो पलक झपकते ही कोई भी ताला खोल भी सकते हैं और उसे तोड़ भी सकते हैं।"

"यू आर अब्सोल्यूटली राइट माॅम।" रितू ने मुस्कुरा कर कहा__"पर उस स्थिति में ये संभव नहीं है जबकि फैक्टरी के गेट पर दरबान मौजूद हों। मैंने इसकी जाॅच की है और पता चला है कि गेट पर दरबान मौजूद था। अब सवाल ये है कि दरबान की मौजूदगी में कोई बाहरी आदमी अंदर कैसे जा सकता है?"

 
"इसका मतलब तो यही हुआ कि गेट पर तैनात दरबान झूॅठ बोल रहा है।" प्रतिमा ने कहा__"या फिर ऐसा भी हो सकता है कि फैक्टरी का ही कोई स्टाफ मेंबर फैक्टरी के अंदर गया हो। स्टाफ के अंदर जाने पर गेट में मौजूद दरबान को कोई ऐतराज़ नहीं हो सकता था।"

"अगर कोई स्टाफ का ही आदमी फैक्टरी के अंदर गया था।" रितू ने कहा__"तो दरबान को इस बात की जानकारी पुलिस के पूछने पर देनी चाहिए थी। मगर इस संबंध में दरबान का हर बार यही कहना है कि रात कोई भी ब्यक्ति फैक्टरी के अंदर नहीं गया।"

"बड़ी हैरत की बात है ये।" प्रतिमा कह उठी__"जब फैक्टरी के अंदर कोई गया ही नहीं तो फैक्टरी के अंदर, वो भी तहखाने में टाइम बम्ब क्या कोई भूत लगा कर चला गया था???"

"यही तो सोचने वाली बात है माॅम।" रितू ने हॅस कर कहा__"खैर, पता चल ही जाएगा देर सवेर ही सही। मैं तो डैड से ये कह रही थी कि उन्होंने इस सबके बारे में जानना ज़रूरी क्यों नहीं समझा? आखिर ये जानना तो ज़रूरी ही था कि किसने ये सब किया?"

अजय सिंह के मन में सिर्फ यही सवाल चकरा रहे थे, और वो ये थे कि 'तहखाने में उसकी बेटी को और क्या मिला? क्या उसके हाॅथ कोई ऐसी चीज़ लगी जिससे उसकी असलियत रितू को पता चल सके? इस बारे में रितू ने अभी तक कोई बात नहीं की, इसका मतलब उसे कुछ भी नहीं मिला। मगर ऐसा कैसे हो सकता है???? तहखाने में तो गैर काननी वस्तुओं का अच्छा खासा स्टाक था। क्या वह सब भी आग में जल गया है??? कहीं ऐसा तो नहीं कि रितु को सब पता चल गया हो किन्तु इस वक्त वह अंजान बनी होने का नाटक कर रही हो? हे भगवान! कैसे पता चले इस सबके बारे में??? मेरे गले में तो अभी भी जैसे कोई तलवार लटक रही है।

अभी ये सब बातें ही कर रहे थे कि बाहर से किसी के आने की आहट सुनाई दी उन्हें। पलट कर देखा तो अभय और शिवा के साथ नीलम अपने हाथ में एक हैण्डबैग लिए आ रही थी।

"डैड...।" अपने पिता को देखते ही नीलम दौड़ कर आई और अजय सिंह से लिपट गई। अजय सिंह ने उसके सिर पर प्यार से हाॅथ फेर कर कहा__"कैसी है मेरी बेटी??"

"मैं बिलकुल अच्छी हूॅ डैड।" नीलम ने कहा__"आपकी याद बहुत आती थी वहाॅ।"

"ओह अच्छा जी।" अजय सिंह ने मुस्कुरा कर कहा और फिर नीलम को साइड से छुपका लिया।

अभय व शिवा भी आकर वहाॅ पर रखे सोफों पर बैठ गए। अपने डैड से अलग होने के बाद नीलम अपनी माॅ और बहन से गले मिली।

"कन्ग्रैट्स दी।" नीलम ने रितू के गले मिलते हुए कहा__"आख़िर आपकी ख़्वाहिश पूरी हो ही गई। आप अब एक पुलिस इंस्पेक्टर बन गई हैं।"

"थैंक्यू छोटी।" रितू ने मुस्कुरा कर कहा__"और बता, मुम्बई में तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है? काॅलेज अच्छा है न? और माॅसी लोग सब कैसे हैं?"

"सब अच्छे हैं दी।" नीलम ने मुस्कुराते हुए कहा__"और काॅलेज भी अच्छा ही होगा?"

"अच्छा होगा?" रितू ने ना समझने वाले भाव से कहा__"इस बात से क्या मतलब है तेरा?"

"मतलब ये कि काॅलेज जाना अभी शुरू नहीं किया है मैने।" नीलम ने कहा__"क्योंकि काॅलेज खुलने में अभी पाॅच दिन का समय शेष है।"

"ओह।" रितू ने कहा__"चल कोई बात नहीं। तू बैठ, मैं ज़रा कपड़े चेन्ज कर लूॅ। अभी भी पुलिस की यूनीफार्म ही पहन रखी हूॅ मैं।"

"ओके दी।" नीलम ने कहा और एक बार फिर अपने पिता की तरफ पलटते हुए कहा__"डैड, ये सब कैसे हुआ?"

"बस हो गया बेटी।" अजय सिंह भला अब उसे क्या बताता__"सब नसीब की बातें हैं।"

"ऐसा क्यों कहते हैं डैड?" नीलम ने अजय सिंह का हाॅथ अपने हाॅथ में लेकर कहा__"बिना वजह के कैसे हमारी फैक्टरी में आग लग सकती है? ज़रूर कोई वजह रही होगी। आप पुलिस के द्वारा पता लगवाइए डैड।"

"पुलिस पता लगा रही है दी।" सहसा शिवा कह उठा__"और आपको पता है, रितू दीदी ही इस सबका पता लगा रही हैं? देखना सब कुछ पता लग जाएगा जल्द ही। जिसने भी ये सब किया होगा न मैं उसे छोंड़ूॅगा नहीं।"
 
"ज़्यादा सूरमा बनने की ज़रूरत नहीं है तुम्हें।" नीलम ने कहा__"अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो। और ये तो अच्छी बात है कि इस सबकी जाॅच दीदी कर रही हैं, है न डैड?" अंतिम वाक्य उसने अपने पिता की तरफ देख कर कहा था।

"ह हाॅ बेटी।" अजय सिंह चौंकते हुए बोला था__"यकीनन इस सबका पता चल ही जाएगा।"

"क्या अभी तक कुछ पता नहीं चला भइया?" अभय ने कहा__"मेरा मतलब है कि रितू ने इस बारे में अभी तक क्या कुछ नहीं बताया कि उसकी छानबीन में क्या नतीजा निकला?"

"नतीजा सिर्फ इतना ही निकला है चाचा जी कि हमारी फैक्टरी में आग किसी के द्वारा फैक्टरी के तहखाने में लगाए गए टाइम बम्ब से लगी थी।" अंदर की तरफ से आते हुए रितू ने कहा__"और आपको ये जानकर हैरानी होगी कि फैक्टरी के तहखाने में लगभग दो से तीन टाइम बम्ब लगाए गए थे।"

"क्या??????" लगभग वहाॅ मौजूद हर कोई बुरी तरह चौंका था, फिर अभय ने पूॅछा__"लेकिन फैक्टरी के अंदर तहखाना कहाॅ से आ गया और तो और उस तहखाने के अंदर जाकर किसने टाइम बम्ब लगाया हो सकता है??"

"ये सवाल तो मेरे पास भी है चाचा जी कि फैक्टरी में कोई तहखाना कैसे था?" रितू ने अभय से कहने के बाद अपने पिता की तरफ देखा__"क्या आप बताएॅगे डैड कि फैक्टरी में तहखाने का क्या काम था?"

अजय सिंह बुरी तरह घबरा गया, लेकिन तुरंत ही सहल कर बोला__"फैक्टरी के अंदर अगर कोई तहखाना था तो इसमें कौन सी बड़ी बात है बेटी? मैंने तो बस शौक के लिए बनवाया था। क्या तहखाना बनवाना भी कोई कानूनन जुर्म है?"

"जुर्म तो नहीं है डैड।" रितू ने सपाट लहजे में कहा__"लेकिन तहखाने का निर्माण आम तौर पर लोग अपनी किसी प्राइवेसी के चलते बनवाते हैं। ख़ैर, क्योंकि तहखाने में तीन तीन टाइम बम्ब लगाए गए थे और जब वो फटे तो सब कुछ जल कर खाक़ में मिल गया। हलाॅकि तहखाने में शायद कुछ नहीं था क्योंकि अगर होता तो हमारे हाॅथ कुछ न कुछ ज़रूर लगता। वहाॅ तो बस फैक्टरी के जले हुए कुछ अवशेष ही पड़े थे।"

रितू की ये बात सुन कर कि 'तहखाने में कुछ नहीं था' अजय सिंह बुरी तरह मन ही मन चौंका था। उसके दिमाग़ का फ्यूज उड़ गया। फिर जब दिमाग़ ने काम करना शुरू किया तो सबसे पहले उसके दिमाग़ में यही सवाल उभरा कि ऐसा कैसे हो सकता है? तहखाने में मौजूद उसकी गैरकानूनी चीज़ें कहाॅ गईं? क्या सब कुछ जल गया??? मगर सवाल ये है कि अगर जल गया होता तो रितू को कुछ तो उसके अवशेष सबूत के तौर पर मिलते?

अजय सिंह कुछ समझ नहीं पा रहा था कि ये सब क्या है? कहीं ऐसा तो नहीं कि उसकी बेटी इस बारे में झूॅठ बोल रही हो कि तहखाने में उसे कुछ नहीं मिला है? मगर रितू उससे झूॅठ क्यों बोलेगी? बल्कि होना तो ये चाहिए था कि अगर उसके खिलाफ कोई सबूत उसे मिल जाता तो अब तक रितू को उसे हॅथकड़ी लगा कर गिरफ्तार कर लेना चाहिए था। मगर उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया, क्यों? आख़िर क्या चक्कर है ये? अजय सिंह जितना सोचता उतना ही उलझता जा रहा था। यहाॅ तक कि सोचते सोचते उसका दिमाग़ हैंग सा होने लगा था।

"ये तो बहुत ही गंभीर बात है रितू बेटी।" अभय ने कहा__"फैक्टरी में बम्ब लगाया किसी ने और सब कुछ जला कर खाक़ कर दिया। भला ये सब किसने किया होगा? क्या ये किसी दुश्मन का किया धरा है?"

"ये तो डैड ही बता सकते हैं।" रितू ने कहा__"डैड को ये अच्छी तरह पता होगा कि इस बिजनेस में उनका कौन दुश्मन है? जिसने इतने बड़े काम को अंजाम दिया है।"

"मैं खुद इस बात से हैरान व परेशान हूॅ बेटी।" अजय सिंह बोला__"क्योंकि मेरी समझ में मेरा ऐसा कोई भी शत्रू नहीं है जिसने ये सब किया हो। मेरे सबसे बहुत अच्छे संबंध थे और हैं बेटी। भला मैं बिना वजह और बिना सबूत के किसका नाम लूॅ कि हाॅ इसी ने मेरी फैक्टरी में आग लगाई है?"

"लेकिन बिना वजह के ये भी तो संभव नहीं है भइया कि कोई भी शख्स हमारे साथ इतना बड़ा कारनामा करे?" अभय ने कहा__"मैं समझ सकता हूॅ और जानता हूॅ कि यकीनन आपका कोई दुश्मन नहीं है लेकिन आप खुद सोचिए कि बिना किसी वजह के ये सब कोई क्यों करेगा?"

"मैं नहीं जानता छोटे।" अजय सिंह हताश भाव से बोला__"मैं नहीं जानता कि किसने ये सब करके मुझसे अपनी दुश्मनी निकाली है? अगर जानता तो क्या मैं इस तरह चुप चाप बैठा होता? बल्कि अगर जानता कि ये सब किसने किया है तो अपने हाथों से उसे गोली मार देता। ये भी न पूॅछता गोली मारने से पहले उससे कि ये सब उसने क्यों किया था?"

"आप परेशान मत होइए डैड।" रितू ने कहा__"मैं इस सबका पता लगा कर ही रहूॅगी कि किसने ये सब किया है?"

इसके साथ ही ड्राइंग रूम में सन्नाटा छा गया। कुछ देर बाद सब वहाॅ से चले गए। अजय सिंह अपने कमरे में चला गया, उसका सिर बड़ा ज़ोरों से दर्द कर रहा था। कमरे में आकर वह बेड पर आखें बंद करके लेट गया।

"क्या हुआ अजय?" कमरे के अंदर आते ही प्रतिमा ने कमरे का दरवाज़ा बंद करने के बाद कहा__"तबीयत तो ठीक है न तुम्हारी?"

"सिर में बड़ा दर्द हो रहा है प्रतिमा ज़रा कोई टेबलेट तो दो।" अजय सिंह ने कहा__"ऐसा लगता है जैसे सिर फट जाएगा।"
 
प्रतिमा ने पास ही रखी आलमारी से एक बाक्स मे रखी कुछ दवाइयों से एक गोली निकाली और अजय सिंह की तरफ बढ़ा दिया।

"अरे क्या गोली ऐसे ही खाऊॅगा?" अजय सिंह बोला__"पानी भी दो न।"

"पानी बगल से टेबल में रखा है।" प्रतिमा ने कहा__"मैं पहले पानी ही लाई थी यहाॅ, जानती थी कि तुम्हारा सिर दर्द कर रहा है और तुम्हें इसके लिए गोली खानी पड़ेगी।"

अजय सिंह कुछ न बोला। बगल में टेबल पर रखे पानी के ग्लास को एक हाॅथ से उठाया और गोली को मुह में डालने के बाद उसे पानी के साथ निगल गया। जबकि प्रतिमा बेड पर उसके समीप ही बैठ गई।

"अब तो तुम्हें इतना परेशान नहीं होना चाहिए अजय।" प्रतिमा ने हल्के स्वर में कहा__"क्योंकि तुम जिस बात से डर रहे थे वो तो हुई ही नहीं। हमारी बेटी को फैक्टरी के तहखाने में कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे ये साबित हो कि तुम गैर कानूनी धंधा भी करते हो। इस लिए अब जब ऐसा कुछ उसे मिला ही नहीं तो किसी बात से डरने या परेशान होने की अब कोई ज़रूरत नहीं है तुम्हें। बस शुकर मनाओ कि फैक्टरी के साथ साथ वो सब भी जल गया।"

"तुम सबसे बड़ी बात पर ग़ौर ही नहीं कर रही हो प्रतिमा।" अजय सिंह ने कहा__"तुम इस बात की तरफ ध्यान क्यों नहीं दे रही हो कि फैक्टरी के तहखाने में बम्ब फिट किया था किसी ने?"

"हाॅ तो?" प्रतिमा ने लापरवाही से कहा।

"तो ये कि जिसने भी तहखाने में बम्ब लगाया।" अजय सिंह बोला__"क्या उसने न देखा होगा कि तहखाने में क्या क्या चीज़ें मौजूद हैं? बल्कि यकीनन देखा होगा उसने। अब अगर हमारी बेटी ये कह रही है कि उसे तहखाने में कुछ नहीं मिला तो इसका क्या मतलब हो सकता है? इसके तो दो ही मतलब हो सकते हैं, और वो ये कि या तो हमारी बेटी हमसे झूॅठ बोल रही है कि उसे तहखाने में कुछ नहीं मिला या फिर ऐसा हो सकता है कि जिसने तहखाने में बम्ब लगाया उसने ही तहखाने में मौजूद सारी गैर कानूनी चीज़ों को गायब कर दिया।"

प्रतिमा चकित सी देखती रह गई अजय सिंह को। कुछ देर यूॅ ही देखने के बाद उसने कहा__"ओह माई गाड अजय, ये तो मैंने सोचा ही नहीं था। हद हो गई, भला इस बात पर मेरा ध्यान क्यों नहीं गया?"

"क्योंकि औरतों का दिमाग़ उसके घुटनों में होता है न।" अजय सिंह हॅस पड़ा।

"ज्यादा शुभम कुमार बनने की कोशिश मत करो।" प्रतिमा ने बुरा सा मुह बनाया था।

"शु शुभम कुमार???" अजय सिंह चकरा गया__"ये किस चिड़ीमार का नाम है?"

"तुम शुभम कुमार को नहीं जानते?" प्रतिमा ने हैरत से कहा__"अरे ये बहुत बड़ा डिटेक्टिव है। जासूसी टाइप के उपन्यास भी लिखता है ये। इसके आगे जेम्स बाॅण्ड वगैरा सब फेल हैं। ऐसा इसका मानना है, हलाॅकि मैं इसे ज्यादा भाव नहीं देती"

"हाहाहाहा ज्यादा भाव देना भी नहीं मेरी जान।" अजय सिंह हॅसा__"वर्ना उसका जासूसी दिमाग़ तुम्हारे पिछवाड़े में घुस जाएगा।"

"उसके बारे में ऐसा मत बोलो डियर।" प्रतिमा ने कहा__"वो बड़ा शरीफ लड़का है।"

"लड़का है???????" अजय सिंह चौंका__"ये क्या कह रही हो?"

"अरे अभी वो लड़का ही है।" प्रतिमा ने कहा__"बेचारा अभी कुवाॅरा है न इस लिए।"

"हाहाहाहा अच्छा अब छोड़ो इस लड़के की बात को।" अजय सिंह ने एकाएक गंभीर होकर कहा__"मैं ये कह रहा था कि हमारी बेटी को अगर तहखाने से कुछ नहीं मिला तो इसकी यही दो वजह हो सकती हैं।"

"लेकिन रितू इस बात को क्यों छुपाएगी भला?" प्रतिमा ने कहा__"बल्कि अगर उसके पास कोई ऐसा सबूत होता तो वह किसी भी समय तुम्हारे हाॅथ में हॅथकड़ी डाल देती। मुझे तो लगता है कि रितू को सचमुच तहखाने से कुछ नहीं मिला है। बल्कि तुम्हारा ये ख़याल ज्यादा सही लगता है कि तहखाने में टाइम बम्ब लगाने वाले ने ही उन सब चीज़ों को गायब किया है।"
 
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