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"अब क्या होगा अजय?" प्रतिमा ने कहा__"तुम्हारी ख्वाहिशों ने आज क्या सिला दिया है तुम्हें और तुम्हारे साथ साथ हम सबको भी। क्या होगा जब सबको ये मालूम होगा कि तुम गैर कानूनी धंधा भी करते हो?"
"मुझे और किसी की परवाह नहीं है प्रतिमा।" अजय सिंह बोला__"मुझे तो बस इस बात की चिन्ता है कि इस सबके बाद मैं अपनी ही बेटी की नज़रों में गिर जाऊॅगा। कानून के प्रति उसकी ईमानदारी और आस्था देख कर यही लगता है कि वह मुझे इस काम की वजह से जेल की सलाखों के पीछे भी डाल सकती है।"
"ये कैसे कह सकते हो तुम?" प्रतिमा ने चौंकते हुए कहा__"हमारी बेटी भला ऐसा कैसे कर सकती है?"
"वो यकीनन ऐसा ही कर सकती है प्रतिमा।" अजय सिंह ने कहा__"क्यों कि फैक्टरी में हो रही छानबीन में उसे वो सब मिल जाएगा जो ये साबित करेगा कि मैं गैर कानूनी धंधा करता हूॅ।"
"तुम्हारे कहने का मतलब है कि फैक्टरी में ही तुमने अपने गैर कानूनी धंधों के सबूत छोंड़ रखे हैं?" प्रतिमा की धड़कनें रुकती सी प्रतीत हुई उसे__"और वो सब सबूत अब रितू के हाॅथ लग जाएंगे?"
"बिलकुल।" अजय सिंह के चेहरे पर चिंता के भाव थे__"यही सच है प्रतिमा। फैक्टरी में ही मैंने एक गुप्त तहखाना बनवाया हुआ था, और उसी तहखाने में मैं गुप्तरूप से अपना ये गैर कानूनी धंधा करता था। इस धंधे में कानून के द्वारा पकड़े जाने का मुझे कोई डर नहीं था क्योंकि मेरे संबंध कानून तथा मंत्रियों से थे। ये सब मेरे इस धंधे से होने वाले मुनाफे से हिस्सा पाते थे। अगर ये कहूॅ तो ग़लत न होगा कि इन्हीं लोगों की कृपा से मेरा ये धंधा चल रहा था।"
"अगर ऐसी बात है तो तुम्हें इतना परेशान और चिन्ता करने की क्या ज़रूरत है?" प्रतिमा ने कहा__"ये सब तुम रोंकवा भी तो सकते हो। कानून और मंत्रियों में तो सब तुम्हारे ही आदमी हैं, तो उनसे कह कर इस छानबीन को रुकवाया भी तो जा सकता है?"
"अब ऐसा नहीं हो सकता प्रतिमा।" अजय सिंह बोला__"क्योंकि इसके पहले जो छानबीन हुई थी वो मेरे अनुरूप हुई थी। उसमें सब मेरे ही आदमीं थे लेकिन अब जो छानबीन हो रही है उसमें मैं कुछ नहीं कर सकता।"
"क्यों?" प्रतिमा चौंकी__"क्यों नहीं कर सकते? अब क्या हो गया है ऐसा?"
"अब वो हुआ है प्रतिमा।" अजय सिंह ने गहरी साॅस छोंड़ी__"जिसके बारे में मैं कभी सोच भी नहीं सकता था।"
"क्या मतलब??" प्रतिमा हैरान।
"मतलब कि रातों रात सारे पुलिस डिपार्टमेंट को बदल दिया गया।" अजय सिंह कह रहा था__"पुलिस में कमिश्नर तक जो भी मेरे आदमी थे उन सबका तबादला कर दिया गया है। अब तुम समझ सकती हो कि इन हालात में मैं क्या कर सकता हूॅ। मंत्री से मदद माॅगी लेकिन उसने भी अपने हाॅथ खड़े कर लिए। मंत्री ने कहा कि वो कुछ नहीं कर सकता क्योंकि ये सब ऊपर हाई कमान के आदेश पर हो रहा है।"
"हे भगवान!" प्रतिमा चकित भाव से बोली__"ये तो बहुत ही सीरियस मामला हो गया है।"
"वही तो।" अजय सिंह ने कहा__"मुझे समझ में नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों हो रहा है? आखिर क्या वजह है जो इस सबके लिए हाई कमान से आदेश दिया गया? आखिर किस वजह से रातों रात इस शहर के सारे पुलिस विभाग का तबादला कर दिया गया?"
"यकीनन अजय।" प्रतिमा ने कुछ सोचते हुए कहा__"ये तो बड़ा ही पेंचीदा मामला हो गया है। लेकिन रितु ने तो कहा था कि इस केस को उसने रिओपेन करवाया है, उस सूरत में मामले को इतना सीरियस नहीं होना चाहिए था। कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारी बेटी ने ही हाई कमान को किसी ज़रिये इस सबके लिए सूचित किया हो?"
"हो भी सकता है और नहीं भी?" अजय सिंह ने सोचने वाले अंदाज़ से कहा।
"क्या मतलब?" प्रतिमा के माथे पर सिलवटें उभरी।
"साधारण रूप से अगर हम ये सोच कर चलें।" अजय सिंह बोला__"कि रितू ने सिर्फ अपने पिता की फैक्टरी में आग लगने से हुए भारी नुकसान के चलते ये सोच कर इस केस को रिओपेन करवाया है कि कदाचित ये सब हमारे किसी दुश्मन के द्वारा ही किया गया हो सकता है तो इस मामले की छानबीन साधारण तरीके से ही होती। लेकिन अगर हम ये सोचें कि हो सकता है रितू को किसी वजह से ये पता चला हो कि उसका बाप इस बिजनेस की आड़ में गैर कानूनी धंधा भी करता है तो यकीनन इस केस की छानबीन का ये मामला संगीन है।"
"मुझे और किसी की परवाह नहीं है प्रतिमा।" अजय सिंह बोला__"मुझे तो बस इस बात की चिन्ता है कि इस सबके बाद मैं अपनी ही बेटी की नज़रों में गिर जाऊॅगा। कानून के प्रति उसकी ईमानदारी और आस्था देख कर यही लगता है कि वह मुझे इस काम की वजह से जेल की सलाखों के पीछे भी डाल सकती है।"
"ये कैसे कह सकते हो तुम?" प्रतिमा ने चौंकते हुए कहा__"हमारी बेटी भला ऐसा कैसे कर सकती है?"
"वो यकीनन ऐसा ही कर सकती है प्रतिमा।" अजय सिंह ने कहा__"क्यों कि फैक्टरी में हो रही छानबीन में उसे वो सब मिल जाएगा जो ये साबित करेगा कि मैं गैर कानूनी धंधा करता हूॅ।"
"तुम्हारे कहने का मतलब है कि फैक्टरी में ही तुमने अपने गैर कानूनी धंधों के सबूत छोंड़ रखे हैं?" प्रतिमा की धड़कनें रुकती सी प्रतीत हुई उसे__"और वो सब सबूत अब रितू के हाॅथ लग जाएंगे?"
"बिलकुल।" अजय सिंह के चेहरे पर चिंता के भाव थे__"यही सच है प्रतिमा। फैक्टरी में ही मैंने एक गुप्त तहखाना बनवाया हुआ था, और उसी तहखाने में मैं गुप्तरूप से अपना ये गैर कानूनी धंधा करता था। इस धंधे में कानून के द्वारा पकड़े जाने का मुझे कोई डर नहीं था क्योंकि मेरे संबंध कानून तथा मंत्रियों से थे। ये सब मेरे इस धंधे से होने वाले मुनाफे से हिस्सा पाते थे। अगर ये कहूॅ तो ग़लत न होगा कि इन्हीं लोगों की कृपा से मेरा ये धंधा चल रहा था।"
"अगर ऐसी बात है तो तुम्हें इतना परेशान और चिन्ता करने की क्या ज़रूरत है?" प्रतिमा ने कहा__"ये सब तुम रोंकवा भी तो सकते हो। कानून और मंत्रियों में तो सब तुम्हारे ही आदमी हैं, तो उनसे कह कर इस छानबीन को रुकवाया भी तो जा सकता है?"
"अब ऐसा नहीं हो सकता प्रतिमा।" अजय सिंह बोला__"क्योंकि इसके पहले जो छानबीन हुई थी वो मेरे अनुरूप हुई थी। उसमें सब मेरे ही आदमीं थे लेकिन अब जो छानबीन हो रही है उसमें मैं कुछ नहीं कर सकता।"
"क्यों?" प्रतिमा चौंकी__"क्यों नहीं कर सकते? अब क्या हो गया है ऐसा?"
"अब वो हुआ है प्रतिमा।" अजय सिंह ने गहरी साॅस छोंड़ी__"जिसके बारे में मैं कभी सोच भी नहीं सकता था।"
"क्या मतलब??" प्रतिमा हैरान।
"मतलब कि रातों रात सारे पुलिस डिपार्टमेंट को बदल दिया गया।" अजय सिंह कह रहा था__"पुलिस में कमिश्नर तक जो भी मेरे आदमी थे उन सबका तबादला कर दिया गया है। अब तुम समझ सकती हो कि इन हालात में मैं क्या कर सकता हूॅ। मंत्री से मदद माॅगी लेकिन उसने भी अपने हाॅथ खड़े कर लिए। मंत्री ने कहा कि वो कुछ नहीं कर सकता क्योंकि ये सब ऊपर हाई कमान के आदेश पर हो रहा है।"
"हे भगवान!" प्रतिमा चकित भाव से बोली__"ये तो बहुत ही सीरियस मामला हो गया है।"
"वही तो।" अजय सिंह ने कहा__"मुझे समझ में नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों हो रहा है? आखिर क्या वजह है जो इस सबके लिए हाई कमान से आदेश दिया गया? आखिर किस वजह से रातों रात इस शहर के सारे पुलिस विभाग का तबादला कर दिया गया?"
"यकीनन अजय।" प्रतिमा ने कुछ सोचते हुए कहा__"ये तो बड़ा ही पेंचीदा मामला हो गया है। लेकिन रितु ने तो कहा था कि इस केस को उसने रिओपेन करवाया है, उस सूरत में मामले को इतना सीरियस नहीं होना चाहिए था। कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारी बेटी ने ही हाई कमान को किसी ज़रिये इस सबके लिए सूचित किया हो?"
"हो भी सकता है और नहीं भी?" अजय सिंह ने सोचने वाले अंदाज़ से कहा।
"क्या मतलब?" प्रतिमा के माथे पर सिलवटें उभरी।
"साधारण रूप से अगर हम ये सोच कर चलें।" अजय सिंह बोला__"कि रितू ने सिर्फ अपने पिता की फैक्टरी में आग लगने से हुए भारी नुकसान के चलते ये सोच कर इस केस को रिओपेन करवाया है कि कदाचित ये सब हमारे किसी दुश्मन के द्वारा ही किया गया हो सकता है तो इस मामले की छानबीन साधारण तरीके से ही होती। लेकिन अगर हम ये सोचें कि हो सकता है रितू को किसी वजह से ये पता चला हो कि उसका बाप इस बिजनेस की आड़ में गैर कानूनी धंधा भी करता है तो यकीनन इस केस की छानबीन का ये मामला संगीन है।"